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ज़िंदगी भी अजीब होती है Restart

पर मुझे पता था कि आउट पास अब मिलेगा ही नही क्योंकि टर्म बिजी चल रही थी एक दिन घर से फोन आया कि दादी चल बसी है मुझे बहुत दुख हुआ पापा बोले कोशिश करना कि छुट्टी मिल जाए पर आर्मी हॅज़ देयर ओन रूल्स मैं उनके अंतिम दर्शन भी नही कर पाया मेरा मन बहुत ही उदास था कई बार मेरे मन मे आया कि यहाँ से भाग जाउ पर ऐसा भी नही कर पाया गुज़रते हुए वक़्त के साथ मैं भी नॉर्मल होने लगा ऋतु मॅम का थोड़ा सहारा था कभी कभी उनके साथ थोड़ा टाइम स्पेंड हो जाया करता था मिता के फाइनल एअर चल रहा था तो वो बहुत ही बिजी रहा करती थी एक दिन शाम को मैं बाहर गया हुआ था मुझे निशा की बहुत ही याद आ रही थी लास्ट टाइम उस से जब बात हुई थी जब उसने बताया था कि उसकी जॉब लग गयी है उन बातो को भी दो-ढाई महीने हो गये थे पर अब उसका फोन हमेशा स्विच ऑफ ही रहता था मैं एक रेस्टोरेंट मे बैठा था तो वहाँ एक गाना बज रहा था जो यूँ था कि “ तेरे खामोश होंठो पे मोहब्बत गुनगुनाती है ”बहुत ही अच्छा लगा वो सॉंग मुझे पर दिल मे कहीं पर थोड़ा सा दर्द बढ़ गया था जितनी फिकर मैं निशा की करता था उतनी तो मैं मिता के बारे मे सोचता भी नही था आख़िर कैसा बंधन था मेरा उसके साथ वो कौन सी डोर थी जो अनचाहे ही उस से जुड़ गयी थी मेरा मन घबराने लगा था मुझे इस बेचैनी का कुछ ना कुछ इलाज तो करना ही था अगले दिन मैं ऋतु मॅम से मिला मैने उनको कहा कि मॅम अक्सर ही मेरा मन बहुत ही घबरा जाता है उन्होने बीपी चेक किया

सब कुछ नॉर्मल ही था तो उन्होने पूछा कि कोई घर की परेशानी है तो मैने कहा नही तो उहोने पूछा कि गर्लफ्रेंड से झगड़ा हुआ है क्या तो मैने फिर से मना किया तो उन्होने फिर पूछा कि किस टाइप की टेन्षन रहती है तो मैने उनको निशा के बारे मे बताया तो वो बोली ऐसा अक्सर होताः है जब आदमी दो नावो की सवारी करता है मैं बोला मॅम मैं कुछ समझा नही तो वो बोली निशा से प्यार करते हो मैने कहा नही मॅम बिल्कुल नही तो वो बोली फिर उसकी इतनी फिकर क्यो

क्यो बस उसका ही ख़याल होता है तुम्हे जबकि तुम्हारा दिल तो मिथ्लेश के लिए धड़कता है क्यो हर बार मिता की जगह निशा होती है तुम्हारे जहन मे उनके किसी भी सवाल का जवाब नही था मेरे पास . मॅम बोली ये पानी पियो और रिलॅक्स फील करो देखो हम सब की एक इंडिविजुयल लाइफ है हम रिश्ते-नाते भी निभाते है पर हमारे जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई है ये आर्मी लाइफ जब तुम्हे तुम्हारी पहली पोस्टिंग मिलेगी तो तुमको सब समझ मे आ जाए गा प्यार, मोहब्बत सब झूठ लगने लगे गा बस रह जाएँगी तो मुट्ठी मे कुछ यादें , वो यादे जिनके सहारे तुम्हारा आगे का जीवन कटेगा तो मेरी बात मानो तो मानसिक रूप से थोड़ा मजबूत बनो क्या हुआ अगर तुम अपनी दोस्त से बात नही कर पाए, क्या हुआ अगर तुम्हे छुट्टी नही मिली यू अरे आ डॅम सोल्जर अपकमिंग ऑफीसर ऑफ दिस बॅच यू विल मेक प्राउड अस वन डे सो जस्ट बी काम आंड फर्गेट ऑल अनेक्सेसॅरी थॉट्स आंड मस्ट फोकस ऑन दट पथ विच यू हॅव चोज़न

कुछ पल खामोशियों में खुद से रूबरू हो लेने दो यारों, ज़िन्दगी के शोर में खुद को सुना नहीं मुद्दतों से मैंने..

उहोने जो भी कहा था वो सोलह आने सच ही था मैं अपनी उस लाइफ को तो पहले ही छोड़ आया था फिर इतने दिन हो गये थे क्या निशा को मेरा ख्याल नही आया था वापसी मे मैं कॅंटीन गया और एक बियर ली और अपने यादो को भूलने की कोशिश करने लगा पर क्या ये सब इतना आसान था,नही मेरे दोस्त बिल्कुल नही फोज भी अजीब होती है अपने अंदर एक अलग ही दुनिया को समेटे हुए रहती है मैं सीप ले ही रहा था कि एक जवान मोबाइल पर दिल तो खोया है कही पे गाना बजाए जा रहा था ना जाने कब मेरे होंठो पे एक मुस्कान आ गयी तो मैने ऋतु मॅम को फोन किया और कहा कि मॅम क्या हम सनडे को मिल सकते है तो उहोने कहा हम क्यो नही तुम टाइम से ही आ जाना थोड़ा एंजाय भी कर लेंगे…

तो मुझ अब इंतज़ार था सनडे का जो कि दो दिन बाद आने वाला था दो दिन भी कट ही गये अब वक़्त पे किसका ज़ोर चलता है वो तो अपनी मर्ज़ी से ही चलेगा ना , तो सनडे को मैं एक दम रेडी होकर सबसे पहले शॉपिंग सेंटर गया और कुछ रंग और पेपर्स खरीदे उनको एक फोल्डर मे पॅक किया और मॅम के घर पहुच गया मैने घंटी बजाई तो उहोने गेट खोला आज तो बड़ी ही टिप-टॉप लग रही थी वो जीन्स और टॉप मे एक दम गजब पीस , मैं अंदर गया तो उन्होने पूछा कॉफी पियो गे तो मैने मना कर दिया मैने कहा मॅम यहाँ का सफ़र तो अब पूरा ही हो गया समझो अब कुछ दिनो मे देहरादून जाना है बाकी बची ट्रैनिंग के लिए पर जाने से पहले आपको एक गिफ्ट देना चाहता हू तो मैने कहा मैं आपकी एक पैंटिंग बनाना चाहता हू और उनको बाहर झूले पर बिठा दिया

मैं काफ़ी देर तक रंगो से खेलता रहा पर चेहरे पे एक चमक भी थी कोई एक डेढ़ घंटे के अथक प्रयास के बाद मेरा काम ख़तम हुआ तो मॅम उठ कर मेरे पास आई और उस तस्वीर को देखने लगी वो बोली अरे वाह!!!! तुम तो बड़े छुपे रुस्तम हो क्या मस्त तस्वीर बनाई है मॅम बोली इसको मैं फ्रेम करवा कर दीवार पर लगाउन्गि फिर मैं अपने हाथ धोने बाथरूम चला गया जब मैं वापिस आया तो मॅम अपने टॉप को निकाल रही थी उहोने ब्रा नही पहनी तो टॉप उतरते ही उनके उभार आज़ाद हो गये और नीचे की ओर लटक गये उनकी नंगी पीठ पर जब मैने अपने होंठ रखे तो वो कसमसा गयी और बोली फक मी टिल माइ लास्ट ब्रेत तो मैने कहा जी और अपनी उग्लिया उनकी जीन्स के अंदर घुसा दी और उनकी योनि को उपर से ही मसल्ने लगा

दूसरी तरफ मैं उनकी पीठ को चूमे जा रहा था ऐसा लगा जैसे मलाई घुल रही हो मेरे मूह मे फिर मैने उनकी जीन्स के बटन को ढीला किया और जीप खोल दी मॅम ने अपने चूतड़ मच्काये और जीन्स उनके घुटनो तक सरक गयी रेड कलर की जैल दार पेंटी ने उनके सौदर्य को और भी बढ़ा दिया था मैने कहा आपकी ये पैंटी तो बहुत ही अच्छी है इसमे तो आप एक दम जबरदस्त लग रही है तो वो बोली तुम्हे ये पसंद आई मैने कहा बहुत फिर वो मुझसे दूर हटी और अपनी जीन्स को निकाल दिया तो मैने उनको गोदी मे लिया और बेडरूम मे ले आया वास्तव मे आज वो कुछ ज़्यादा ही सुंदर लग रही थी

मैने उनके बालो मे लगी हुई पिन को निकाल दिया तो उनके बाल फिसलते हुए उनके कुल्हो तक आ गिरे ऋतु कहने लगी कि यार तुम्हारा अंदाज बिल्कुल हट कर है जो भी तुम्हारी वाइफ बनेगी वो बहुत ही लकी होगी तो मैने कहा मॅम ऐसी कोई बात नही है बस जो मुझे अच्छा लगता है वो ही करता हू वो बोली मैं तो तुम्हारी फॅंटेसी की कायल हो गयी हू काश मेरे पति तुम्हारे जैसे होते तो मेरी लाइफ सेट थी
 
मैं बस मुस्कुरा दिया और अपने कपड़े उतारने लगा जब मैने अपना कच्छा उतरा तो मेरे झान्टो को देख कर वो बोली तुम इनको भी तो सॉफ करा करो तो मैने कहा मॅम इधर टाइम ही नही मिलता है आप तो जानती ही हो तो उहोने कहा रूको मैं अभी आई और हेर रिमूवर क्रीम उठा लाई और मेरे झान्टो पर लगा ने लगी वो बोली बस थोड़ी देर की बात है ये अभी हट जाएँगे अब मैने तो कभी ये लगाई नही थी अपन तो एक रुपये वाली ब्लेड से ही काम निपटा दिया करते थे दस मिनट मे ही लड एक दम चिकना हो गया था फिर मैने उसको पानी से धो दिया ताकि बची क्रीम भी सॉफ हो जाए मॅम उसे अपने हाथो से पोंछने लगी फिर वो झुक कर बैठ गयी और अपनी चूचियो पर उसको रगड़ने लगी उका मुलायम एहसास पाकर मेरे लड मे तनाव आने लगा थोड़ी देर तक वो उसको अपने बोबो से दबाती रही फिर मैने कहा कि मॅम अगर बुरा ना माने तो एक बात कहूँ तो वो बोली यस, तो मैने कहा कि अगर आप की इजाज़त हो तो एक बार ये भी ट्राइ कर ले और उनकी गान्ड पर हाथ रख दिया तो वो ब्लश करते हुए बोली अरे ये तो मेरी भी विश थी पर मैने सोचा कि तुम्हारा यहाँ इंटेरेस्ट नही होगा वरना मैं ये काम तो पहले ही कर लेती

मैने कहा थॅंक यू मॅम तो वो बोली तुम हमेशा इतने फॉर्मल क्यो रहते हो कितनी बार कहा है कि मुझे मेरे नाम से ही बुलाया करो तो मैने कहा क्या करू प्रोटोकॉल की आदत हो गयी है ना, तो अब मैने उको उल्टा लिटाया और उनके चुतडो को फैलाते हुए उनकी गान्ड के छोटे से छेद को देखने लगा गहरे भूरे रंग का वो छेद बड़ा ही मस्त लग रहा था मैने अपनी उगली वहाँ पर रगड़नी शुरू की पर उनकी गान्ड थोड़ा टाइट सी थी तो मैने बेड के सिरहाने रखे हुए बॉडआइलोशन को उठाया और उनकी गान्ड पर ढेर सारा लगा दिया और फिर अपने लड पर भी मल लिया और उसको गान्ड के मुहाने पर रख दिया

मैं बोला डालु तो उहोने कहा हम तो मैने थोड़ा सा ज़ोर लगाया गान्ड एक दम चिकनी होने के कारण सूपड़ा झट से उसके अंदर जाकर अटक गया जैसे ही ऋतु की गान्ड चौड़ी हुई उका बदन दर्द से दोहरा हो गया आँखे जैसे बाहर को आने को हो गयी तो मैं रुका और पूछने लगा कि आपने पहले पीछे नही डलवाया है क्या तो वो बोली नही ऐसी बात नही है8-10 बार कर चुकी हू पर मेरे हब्बी का तुम्हारे जैसा मोटा नही है और फिर गान्ड तो वैसे भी टाइट हो ही जाती है तो मैने कहा अगर आपको तकलीफ़ हो रही है तो मैं बाहर निकाल लू तो उन्होने कहा अरे नही बस थोड़ा थोड़ा करके डालते रहो वो कराहते हुए बोली और मैं भी फॉजन हू पीछे नही हाटुगी उनकी गान्ड तो वैसे ही पूरी चिकनी थी तो थोड़ा सा और अंदर चला गया ऋतु गहरी साँसे लेते हुए मेरे लड को अपनी गान्ड मे लेने लगी धीरे धीरे करके मैने अपना पूरा लड उनकी गान्ड मे डाल ही दिया

मेरे अंडकोष उनकी गान्ड पे चिपक गये थे मैं उन पर लेटा पड़ा था कुछ देर बाद उहोने धीरे धीरे करने को कहा तो मैं अपनी कमर को हिलाने लगा उनकी गान्ड मे मेरा लिंग जैसे लॉक हो गया था उस पर बहुत दबाव पड़ रहा था वैसे ऋतु की गान्ड थी बड़ी ही मस्त मज़ा आ रहा था मारने मे कोई 5-7 मिनट बाद वो भी नॉर्मल हो गयी थी और मज़े से गान्ड मरवाने लगी मैने अपने हाथ उनके बोबो पे रखा और उको निचोड़ते हुए गान्ड मारने लगा मैने अपने दाँत उनके गालो पे गढ़ा दिए तो उहोने कहा प्लीज़ काटो मत कही निशान पड़ गये तो दिक्कत हो जाएगी तो मैं उनके गालो को बस चूमने लगा 20-22 मिनट तक दबा के उनकी गान्ड मारी और फिर अपना पानी अंदर ही छोड़ दिया

जब मैने अपने हथियार को ऋतु की गान्ड से बाहर निकाला तो मेरा पानी भी बाहर आ गया और थोड़ा नीचे की ओर बहने लगा मैने बेड की चादर से उसको सॉफ कर दिया और उनकी बगल मे ही लेट गया ऋतु ने अपनी गान्ड को हाथ लगाया और बोली तुमने तो पूरी तरह से सूजा दिया है लगता है गरम पानी का सेक करना पड़ेगा तो मैने कहा कुछ नही होगा थोड़ी देर मे नॉर्मल हो जाएगी वो अपना हाथ मेरे साइन पे फिराने लगी और बोली कसम से तुम्हारे साथ रहकर मैं तो एक दम बदल गयी हू पहले तो मैं अपनी इच्छाओ को कंट्रोल कर लिया करती थी पर अब बहुत ही मुश्किल हो गया है मैने लीव के लिए अप्लाइ कर दिया है और अगर सब कुछ ठीक रहा तो मैं कुछ दिन अपने पति के पास रहूंगी तो मैने कहा चलो ठीक ही है आपको भी क्वालिटी टाइम बिताने को मिलेगा फिर वो मेरे पेट पर अपना सर रख कर लेट गयी

वो कहने लगी कि आज मुझे इतना चोदो कि मेरा अंग अंग खिल जाए तो मैने कहा कि शाम तक आपका ही हू जो चाहे कर्लो तो वो थोड़ा सा घूमी और मेरे लड पर अपनी लंबी जीभ को फिराने लगी मेरे बदन मे सुरसूराहट तैर गयी मैने कहा मॅम थोड़ा गीला कर्लो इसको तो ऋतु ने थोड़ा सा थूक सुपाडे पर लगाया और उसको चाटने लगी

मैने अपनी आँखे बंद कर ली और वो मज़े से मेरे लिंग को चूसने लगी थोड़ी देर तक ऐसे ही चलता रहा अब वो मेरी तरफ पीठ किए हुए लड को चूस रही थी जिस से उनके चूतड़ मेरी तरफ थे और उनकी चूत पूरी तरह से मेरी आँखो के सामने थी तो मैं उके कुल्हो को सहलाने लगा और अपनी दो उग्लिया उनकी योनि मे सरका दी और उनको अंदर बाहर करने लगा

 
ऋतु की योनि तो पहले से ही पानी छोड़ रही थी दूसरी ओर वो मज़े से मेरे लड को चूसे जा रही थी तो मैने उनके कुल्हो को थोड़ा पीछे की ओर किया अपना मूह उनके चुतडो पर लगा दिया और उनको काटने लगा मॅम हाई हाई करने लगी कुछ देर बाद मेरे होंठ उनकी चूत की फांको पे चिपक चुके थे ऋतु बहुत ही ज़्यादा गर्म हो चुकी थी मेरी नाक उनकी गान्ड मे धँस रही थी उसमे से अभी भी मेरे वीर्य की महक आ रही थी जब मेरी जीभ उनकी चूत की गर्माहट से जलने लगी तो मैने उनको अपने उपर से उतार दिया ऋतु ने मुझे अपनी नशीली आँखो से देखा तो मैने कहा आओ और अब इसकी सवारी करो तो उसने लिंग को पकड़ा और अपने छेद पर रखा और उसको अंदर लेने गई कुछ ही पॅलो मे चूत पूरे लड को खा गयी थी उन्होने मेरे सीने पर अपने हाथ रखे और उपर नीचे कूदने लगी

अब ऋतु ने अपनी उगली मेरे मूह मे डाली तो मैं उसको चूसने लगा वो पूरा दम लगाते हुए उपर नीचे हो रही थी मस्ती रोम रोम से फूटने लगी थी उसकी चूत के गीलेपान से मेरी जंघे भीगने लगी थी बहुत देर तक वो ऐसे ही अपनी गान्ड को मटकाती रही पर फिर उनकी स्पीड कम होने लगी वो थकने लगी तो मैने उनको हटने को कहा और उनको लिटा ते हुए उनकी टाँगो को अपने कंधो पर रख लिया और लगा दमदार शॉट लगाने मेरे हरर धक्के पे उनकी चूचिया बुरी तरह से हिल रही थी लड उनके पेट तक झटके मारे जा रहा था मॅम मदहोश हो गयी थी ऋतु अपने दाँतों से अपने होंठ को काटने लगी वो बोली य्स यससेसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स ौअर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर वेरयययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययययी गगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगूऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊओद्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्

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द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्दद्ड ऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊओहूऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ!!!!!!!!!!!!!!!!!!ह

ह!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! य्स्स सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स बसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स र्र्ररुउुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुऊउक्कककककककककककन्ाआआआ

आआआआआआआआआआअ मत रुकना मत मैने कहा आप चिंता ना करूऊऊऊऊऊऊऊऊओ और पूरा दम लगाते हुए चूत मारने लगा ऋतु की चूत अब बहुत ही गीली हो गई थी उसमेमेरा लड बार बार फिसलने लगा था तो मैने उनकी टाँगो को अपने कंधो पर से हटा या और उनको चौड़ा करते हुए उनमे समा गया और दुबारा उनको चोदने लगा उनके हावभाव देख कर मुझे लगने लगा था कि वो बस अब जाने ही वाली है और2-3 मिनट बीते होंगे कि उनकी चूत ने उनका साथ छोड़ दिया ऋतु का शरीर एक दम कुन्द पड़ गया और वो अपने सुख को प्राप्त करते हुए एक अलग दुनिया मे ही पहुच गयी उन्होने मुझे कस कर भींच लिया पर मैं नही रुका मैं लगातार उनको चोदे जा रहा था चूँकि उनका जोश अब ठंडा पड़ गया था उनको अब परेशानी होने लगी वो बोली तुम अपने इसको बाहर निकाल लो मेरी योनि मे जलन होने लगी है तो मैने कहा बस कुछ ही मिनट की बात है तो मैं लगा रहा कुछ देर तो उन्होने बर्दास्त किया

फिर वो बार बार निकालने को कहने लगी पर मेरी मंज़िल अभी बहुत ही दूर थी तो मैने उनकी एक ना सुनी वो अपने नाख़ून मेरी पीठ मे गढ़ाने लगी पर मैं तो वासना मे पागल हो चुका था हर धक्के के साथ उकी हालत पतली होती जा रही थी उनकी शकल रौआंसी हो गयी और वो बोली प्लीज़ मुझे जाने दो मुझे बहुत ही तेज सूसू आई है तो मैने कहा यही पर कर दो वो बोली अब हट भी जाओ ना पर मैं धक्के मारता ही रहा

तो वो बोली की हट जाओ मेरा मूत निकलने ही वाला है ईईईईईई तो मैने झट से अपने लड को निकाला और अपने मूह मे चूत को भर लिया मेरे होंठ चूत पर लगे ही थे कि एक गरमा गरम धार सुर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर करती हुई मेरे मूह मे गिरने लगी मैं किसी कोल्ड ड्रिंक की तरह उके सारे मूत को पी गया फिर मैने अपना मूह हटाया ऋतु अपनी फटी आँखो से मेरी तरफ देख रही थी एक नॉटी सी स्माइल के साथ पर मेरा लड तो अभी भी खड़ा था तो मैने कहा इसका भी कुछ करो तो वो बोली आगे लेने की तो मेरी हिम्मत बची नही है तुम पीछे ही कर्लो और प्लीज़ जल्दी से फारिग हो जाना मेरा तो पुर्जा पुर्जा हिल गया है तो मैने उनको उल्टी लिटाया और अपने लड को गान्ड मे उतार दिया और गान्ड मारने लगा वो एक बार फिर दर्द भरी आहे निकालने लगी 10-12 मिनट तक फ़ुर्सत से उनकी गान्ड मारी जब मुझे लगा कि अब मैं जाने वाला हू तो मैने अपने लिंग को बाहर निकाला और उनके गौरे गौरे चुतडो पर अपना सफेद पानी छिड़कने लगा जैसे ही मेरा पानी छूटा मेरी टांगे ऐसे काँपी कि जैसे उनकी सारी शक्ति किसी ने निचोड़ लिया हो तो मैं हार कर उनके पास ही पड़ गया …

आधे पोने घंटे तक हम दोनो बेड पर ही पसरे रहे फिर वो उठी और तौलिए से अपने शरीर को सॉफ करने लगी मुझे भी पेशाब आ रहा था तो मैं बाथरूम मे चला गया और थोड़ी देर बाद आया तो देखा की ऋतु एक बार फिर बेड पर लेट गयी है तो मैने कहा क्या हुआ तो वो बोली पूरा शरीर मीठा मीठा सा दुख रहा है सोचा थोड़ी देर सो लूँ तो मैने कहा ठीक है आप सो जाओ मैं वापिस होस्टल चला जाता हू तो वो बोली एक मिनट रूको और अपनी अलमारी खोलकर एक छोटा सा पॅकेट निकाला और मुझे देते हुए बोली ये लो मैने तुम्हारे लिए कुछ लिया है तो मैने कहा क्या है ये तो उन्होने कहा कि इसे अभी मत खोलो अपने रूम मे जाकर खोलना फिर मैने उन्हे बाइ किया और बाहर आ गया मुझे भूक भी लग आई थी

पर अब तक तो मेस बंद हो गया होगा तो मैं शॉपिंग सेंटर की तरफ चल पड़ा वहाँ एक छोटा सा रेस्टोरेंट था तो वहाँ जाकर दो संडविच खाए मैं अपने रूम मे आया और उनके पॅकेट को खोल कर देखा उसमे एक टाइमेक्स की स्पोर्ट्स घड़ी थी जो बहुत ही मेह्न्गि लग रही थी मैने उनको थॅंक यू का मेसेज भेजा . दो- चार दिन यू ही गुजर गये और खडकवास्ला से विदा लेने का टाइम आ ही गया अब मंज़िल थी डिफेन्स अकॅडमी देहरादून मैं खुश था क्योंकि इसके कई मायने थे देहरादून से शिमला भी ज़्यादा दूर नही था तो चान्स तो मिता से मिलने के लिए और फिर मैं पहले भी देहरादून आ चुका था तो यादे भी थी ट्रेन बुक थी तय समय पर हम स्टेशन पर आ गये थे आर्मी की स्पेशल ट्रेन हमे ले जाने वाली थी

 


मैने अपना फोन निकाला और निशा का नंबर डाइयल किया पर एक बार फिर से मुझे स्विच ऑफ ही सुनाई दिया दिल मे एक कसक सी उठ गयी मैने एक ठंडी आह भरी और पेप्सी की बॉटल को अपने होंठो से लगा लिया सभी कॅडेट्स आपस मे हसी-मज़ाक करते हुए सफ़र का आनंद ले रहे थे पर मेरा मन निशा के बारे मे सोचके उदास हो गया था तो मैने अपनी डायरी निकली और उसमे रखी उसकी तस्वीरो को देखने लगा ना जाने कब मेरी आँखो से दो आँसू आकर गालो पे लुढ़क गये तो मैने डायरी को वापिस बॅग मे रखा और गेट पर आकर बैठ गया ठंडी हवा के थपेड़े मुझे जीवन की हक़ीकत समझाने लगे रात को आधी बॉटल वोड्का की टिका ली मैने और गहरी नींद मे सो गया जब मेरे साथी ने मुझे जगाया तो पता चला कि गाड़ी प्लेटफॉर्म पर लग चुकी है

तो मैं अपनी आँखे मलता हुआ उठा उसने मुझे पानी की बॉटल दी मूह धोने के लिए फिर हम दौड़ ते हुए लगेज के कोच मे गये और अपना अपना समान कॅरी किया एक संदूक और कंधे पर दो बॅग बस ये था अपना जुगाड़ मास्टर जी ने सभी कॅडेट्स की काउटिंग पूरी की फिर हम लाइन से बाहर आ गये तो पता चला कि आर्मी की गाडियो मे जाना था तो अपनी सीट पकड़ ली आधे घंटे बाद हम उस गोरवशाली गेट के सामने खड़े थे जिसके अंदर जाने का सपना तो बहुत लोग देखते है पर कामयाब बस कुछ ही होते है मैं घुटनो के बल झुका और उस गेट की मिट्टी को अपने माथे से लगा लिया और प्रणाम किया फिर एंट्री हुई फॉरमॅलिटीस को निपटा ते हुए शाम ही हो गयी थी एक सफ़र की थकान और उपर से नहाए धोए भी नही थे पर सूकर था कि अलॉटमेंट पूरी हो गयी थी

शाम को डिन्नर से पहले ब्रिगडियर साहिब के जोशीले भासन ने हमे अंदर तक हिला दिया मेरे तो कान पक गये ऐसे फालतू भासन सुन सुन कर मेरा तो दिल कर रहा था कि बस दो रोटी मिल जाए तो चिंता मिटे कोई एक हफ्ते बाद की बात है हमारी क्लास ख़तम ही हुई थी कि अरदली ने आकर सूचना दी कि तुमसे मिलने कोई आया है तो मैं विज़िटर्स रूम मे गया तो मुझे तो यकीन ही नही हुआ मेरे पापा आए थे मैं दौड़ कर उनके गले लग गया वो रुधे गले से बोले बेटा कितने दिन हो गये पिछले तीन सालो मे तुम बस एक बार ही घर पे आए हो क्या घर की याद नही आती तुम्हे तो मैने कहा कि पापा आप तो जानते ही हो कि 5 साल तक ये सब झेलना है तब कमिशन मिलेगा डिग्री तो मिल गयी अब यह टाइम काटना है बस पोस्टिंग के बाद तो थोड़ी आसानी हो जाएगी

उन्होने मुझे बॅग देते हुए कहा कि ये ले तेरे लिए कुछ समान है मैने खोल के देखा तो लड्डू , घी और भी ना जाने क्या क्या चीज़े थी फिर मैं उनको अपने रूम मे ले गया और हम बाते करने लगे उहोने कहा कि तेरी बहुत याद आती है जब भी घर के बाहर को आहट होती है सारे जने देखते है कि क्या पता तू आ गया हो मैं भी थोड़ा एमोशनल हो गया मैने कहा पापा अबकी बार जैसे ही छुट्टी मिलेगी मैं सीधा घर आउन्गा फिर मैने उनको पूरी अकॅडमी दिखाई शाम होते होते वो वापिस हो लिए मैं मजबूर था उनको रोक भी नही सकता था बस मन मसोस कर रह गया

उस रात डिन्नर नही किया गले से उतरा ही नही भावनाओ मे जो बह गया था दिन गुजरने लगे मैने अपना मोबाइल नंबर वहीं वाला रखा था रोमिंग लगती रहती थी पर एक आस थी कि क्या पता निशा का फोन आ जाए पर आता ही नही था ये तो शूकर था कि मिता हफ्ते दो हफ्ते मे याद कर लिया करती थी वरना मैं तो टूट कर बिखर ही जाता 5 महीने और ऐसे ही कट गये टर्म का राउन्ड पूरा हो गया था कॅडेट्स अब चाहे तो अब कुछ दिनो के लिए घर जा सकते थे तो ईक दिन मैने छुट्टी की अप्लिकेशन लगा ही दी मेरी तो सारी ही पेंडिंग पड़ी थी तो हफ्ते भर बाद ही मुझे 45 दिन का ऑफ मिल गया और शाम 5 बजे मैं वहाँ से निकल पड़ा ट्रेन मिली नही तो देल्ही तक बस ले ली रात का सफ़र काटना था देल्ही आया फ्रेश अप हुआ और फिर थोड़ा कुछ खाया पिया और अपने सहर की बस ढूँढने लगा तो पता चला कि धोला कुआँ से मिलेगी तो ऑटो पकड़ कर धौला कुआँ आया जैसे ही ऑटो से उतरा बस एक दम तैयार मिली अब कोई 4-5 घंटे और लगने थे तो कानो मे वॉकमॅन की लीड लगाई और सो गया बस अपनी रफ़्तार से चल पड़ी जब मैं पहुचा तो दोपहर के तीन बज रहे थे साथ मे सामान भी था तो मैने रिक्शा किया और पापा के ऑफीस चल पड़ा वो अपने कॅबिन मे थे जैसे ही मैने दरवाजा खोला उनके चेहरे की चमक बढ़ गयी

 


वो बोले आने से पहले बता देता तो मैं बस स्टॅंड आ जाता तो मैने कहा कोई बात नही पापा अब तो आदत हो गयी है और वैसे भी फोजी और कुली मे कोई ज़्यादा फरक नही होता है तो वो हँसने लगे तो मैने कहा पापा घर चले तो उहोने अपने असिस्टेंट को बुलाया और कुछ समझाया और फिर हम स्कूटर पर चल पड़े संदूक को जैसे तैसे अड्जस्ट कर ही लिया मैने जब हम घर पहुचे तो मैं हैरान रह गया

मेरे घर की जगह पर एक चमचमाती हुई कोठी खड़ी थी मैने कहा पापा ये क्या तो उन्होने कहा कि बेटा तू अब अफ़सर बन गया है तो तेरे स्टॅंडर्ड के हिसाब से ही घर भी होना चाहिए ना और फिर मकान पुराने भी हो गये थे तो उन सबको तुड़वा कर पिछले साल ये नयी कोठी बनवा ली तो मैने कहा पर पापा मुझे तो वो घर ही पसंद था मुझे अच्छा नही लगा अब ना घर के सामने नीम का पेड़ था जिस पर मैं बचपन मे झूले पर पींगे चढ़ाया करता था ना वो पुराना छप्पर था सब कुछ बदल दिया गया था पापा बोले क्या सोचने लगा चल अंदर चल जब उहोने घंटी बजाई तो मम्मी ने दरवाजा खोला जैसे ही उहोने मुझे गेट पर खड़े हुए देखा खींच कर दो-चार झापड़ मुझे लगा दिए और भावुक आवाज़ मे बोली मिल गयी तुझे फ़ुर्सत आ गयी माँ-बाप की याद तुझे क्या पड़ी है हम लोग जिए या मरे तुझे अब हमारी चिंता कहाँ तो मैने कहा मम्मी अंदर तो आने दो मम्मी की शिकायते चलती ही रही तो मैने उनको बताया कि अभी आप चुप हो जाओ मैं आ गया हू तो अब पूरे डेढ़ महीने यही पर रहूँगा तब जाकर उको थोड़ी से शान्ती हुई ना जाने क्यू मुझे ये नया घर अपना सा नही लगा मेरी सारी यादे तो उस पुराने वाले घर के साथ ही जैसे खो गयी थी

मेरा दम सा घुटने लगा तो मैने पूछा मेरा कमरा कौन सा है तो पता चला कि मम्मी पापा नीचे रहते है और उपर वाली मंज़िल पर चाचा और मेरा कमरा था मैने अपना संदूक उठाया और उपर चल पड़ा मैने कमरा खोला काफ़ी बड़ा कमरा था जिसके बीचो बीच एक बेड पड़ा था और साइड मे एक अलमारी थी मैने अलमारी खोली तो उसमे बस मेरे कुछ कपड़े ही रखे हुए थे बाकी कुछ नही था तो मैं नीचे आया और मम्मी से पूछा कि मेरा पुरानी अलमारी मे जो सामान रखा था वो कहाँ पर है तो मम्मी बोली कि वो सब कचरा तो उन्होने जला दिया मेरा तो दिमाग़ ही घूम गया मुझे बहुत तेज गुस्सा आया पर किसी तरह खुद को कंट्रोल करते हुए मैने कहा मम्मी आप जानती थी ना कि वो मेरे जीवन मे बहुत इंपॉर्टेंट था फिर भी आपने उसको जला दिया तो वो बोली उनको अपने घर मे कचरा पसंद नही है तो मैने एक फीकी मुस्कान के साथ कहा हाँ मम्मी मैं तो भूल ही गया था कि ये आपका घर है और मैं उसी समय वहाँ से निकल गया मैं तो बड़ा ही खुश हो कर चला था कि इतने दिनो बाद गाँव जाउन्गा पर सारी खुशी पल भर मे ही काफूर हो गयी थी मैं पैदल ही गाँव के बाहर की ओर चल पड़ा एक बात मैने गौर की कि अब ये मेरा वो गाँव नही रह गया था

सब कुछ इन चार सालो मे बदल गया था रास्ते मे कुछ लोगो ने पहचाना और कुछ ने नही गाँव के बस अड्डे का तो नक्शा ही बदल गया था वो सादगी ना जाने कहा छुप गयी थी मुझे वो पानी की टंकी नही दिखी जहाँ पर अक्सर मैं अपने मूह को धोया करता था हम एक साइड मे वाटरकूलर ज़रूर लगा हुआ था तो मैं मंदिर की तरफ चला गया तालाब की सीढ़ियो पर जाके बैठा तो अनचाहे ही कुछ यादो ने घेर लिया मैने अपने जूते खोले और अपने पैरो को ठंडे पानी मे डाल दिया पता नही कब मेरी आँख भर आई बहुत देर तक मैं वही पर बैठा रहा जब कुछ होश आया तो घड़ी शाम के सात बजा रही थी कि मुझे निशा का ख़याल आया तो मैं उसके घर की तरफ मूड गया पर उसके घर पे ताला लगा था धूल जमी पड़ी थी जैसे कयि दिनो से वहाँ कोई आया नही हो तो मैं पड़ोस के घर मे गया और एक औरत से पूछा कि यहाँ पर निशा रहती थी तो वो मुझे अंदर ले गयी और बिठाया और बताया कि वो निशा की चाची है वो कहने लगी कि उसकी बॅंक मे नौकरी लग गयी तो वो बस एक दिन ही आई थी और अगले दिन ही अपनी माँ को लेकर चली गयी डेढ़ साल हो गया है पर उसने ना कोई फोन किया ना कोई संदेशा आया हम तो खुद ही बड़े परेशान है गाँव मे लोग कहते है कि वो भाग गयी मैने कहा ऐसा नही हो सकता

तो वो बोली बेटा उपर वाला ही जाने फिर मैं उके घर से वापिस हो लिया मेरा मूड और भी ऑफ हो गया था एक तो घर आते ही और उपर से निशा का भी पता नही मिला मैं जंगल की तरफ जाने वाली पुलिया पर बैठ गया और विचार करने लगा रात घिर चुकी थी अंधेरा फैल गया था टाइम 9 से उपर हो रहा था कि तभी चाचा मुझे ढूँढते हुए उसी तरफ आ गाए जब उहोने मुझे पुलिया पर बैठे तो उनकी सांस मे सांस आई वो बोले अरे मैं कब से तुझे ढूँढ रहा हू और तू यहाँ पर बैठा है घर नही आना क्या तो मैने कहा कि कौन सा घर चाचा वो मेरा घर नही है वो तो मम्मी का घर है तो चाचा बोले की और मम्मी किस की है तो मैं कुछ नही बोला वो बोले बेटा अगर घर वाले कुछ कह भी दे तो ऐसे नाराज़ नही होते है सब कुछ तेरा ही तो है

 


चल अभी आजा तो मैं चुपचाप स्कूटर पे बैठ गया और वो थोड़ी देर बाद हम घर आ गये मैं सोफे पर बैठ गया पापा आए और बोले बेटे क्या बात है तो मैने कहा पापा मम्मी ने मेरा पुराना सामान जला दिया बस वो ही तो था मेरे पास मेरी यादे थी उसमे सभी पुराने दोस्तो की तस्वीरे थी मैं जैसे रोने को आ गया तो उन्होने कहा कि बेटा देख अब जो हो गया वो वापिस तो नही हो सकता पर मैं वादा करता हू आगे से तेरी मर्ज़ी के बिना तेरे किसी भी सामान को कोई घर वाला नही छुए गा चल अभी आजा खाना खाते है देख सब कुछ तेरी ही पसंद का बनाया है मेरा मूड नही था पर मैने उनको मना नही किया खाना खाते खाते मैने पूछा कि चाची दिखाई नही दे रही है तो पता चला कि वो अपने मायके गयी हुई है और कुछ दिनो मे लौट आएँगी खाने के बाद मैं अपने कमरे मे गया और अपनी डायरी मे आज की घटनाओ को उतारने लगा

अगले दिन मैं जल्दी ही उठ गया मैं पापा के पास गया और कहा कि अगर आप कहे तो मैं एक बाइक खरीद लू तो उहोने कहा कि बोल कितने पैसे चाहिए तो मैने कहा कि पापा अभी पैसो की चिंता नही है तो वो बोले ठीक है खरीद लियो तो मैं बोला मैं तैयार हो जाता हू आप मुझे बॅंक ड्रॉप करते हुए चले जाना वो बोले ठीक है कोई दस बजे मैं बॅंक मे था पर अभी थोड़ा टाइम था तो मैं वही पास के स्टेशनरी स्टोर पर चला गया और कुछ पैंटिंग के पेपर और रंग खरीद लिए फिर मैने पैसे निकलवाए और बाइक के लिए चल पड़ा कोई दो तीन मॉडेल ट्राइ किए पर अपना दिल तो बुलेट पर ही आया सभी फॉरमॅलिटीस पूरी करते करते दुपहर के दो बज गये थे तो मैं एक रेस्टोरेंट चला गया वही लंच किया फिर मैं कॅंटीन गया कुछ ग्रोसरी का समान लिया

और रास्ते मे दारू के ठेके पे दो कॅन बियर भी ले ली और फिर गाँव का रास्ता पकड़ लिया समान को रखा बियर फ्रिड्ज मे पटकी और अपने कमरे मे आ गया थोड़ी थकान सी हो गयी थी तो मैं कुछ देर सो गया शाम को 6 बजे मैं उठा और नीचे आया तो देखा कि अनिता भाभी आई हुई थी उनकी गोदी मे एक बच्चा था तो मैने कहा भाभी ये कौन है तो उहोने कहा कि ये तुम्हारी भतीजी है मुझे तो यकीन ही नही हुआ मैने कहा भाभी इतनी बड़ी बात आपने मुझसे शेअर नही की तो उन्होने कहा अब तुम तो कभी फोन करते नही हो और घर से कोई करता है तो तुम पिक नही करते हो तो तुम्हे कौन बता ता मैने झट से उस गुड़िया को अपने हाथो मे लिया

और पूछा इसका नाम क्या है भाभी को उन्होने कहा साक्षी , अपनी अगली पीढ़ी को देखते ही मेरे अंदर की सारी उदासी गायब हो गयी मैं बहुत ही खुश था मैने भाभी को थॅंक यू कहा तो वो बोली किसलिए तो मैने कहा हमे इतनी प्यारी गुड़िया देने के लिए तो भाभी शरमा गयी कि तभी रवि भी आ गया तो मैने कहा भाई आज तो पार्टी होगी तभी पापा आ गये वो बोले कि किस बात की पार्टी हो रही है तो मैने कहा कि पापा साक्षी के जनम के समय तो मैं यहाँ पर नही था तो ऐसे ही कुछ सेलेब्रेशन कर ना चाहते है तो उहोने कहा दो दिन बाद तुम्हारी बुआ और फूफा भी आ रहे है तभी कुछ करते है रात को मैं और चाचा चटाई बिछा कर छत पर पड़े थे तो वो बोले फ्रिड्ज मे बियर तूने रखी है ना तो मैने कहा हम वो बोले तू कब से …

……………………… तो मैने कहा क्या चाचू आप भी ना अभी आर्मी मे है तो चल जाती है फिर मैने पूछा कि चाची कब आएगी तो वो बोले यार ऑफीस मे काम ज़्यादा है तो टाइम नही मिल रहा है उधर जाने का एक काम कर तू ले आ उसको घूम भी आइयो और तेरी चाची को भी ले आइयो मैने कहा मैं देखूँगा बाते करते करते हम दोनो सो गये अगले दिन जब मेरी आँख खुली तो सूरज सर पर चढ़ आया था मैं जम्हाई लेते हुए उठा तो मेरी नज़र शीला के घर पर गयी थोड़ी देर बाद मैं फ्रेश होकर आया तो देखा कि घर पर कोई नही था मैं बाहर निकला और शीला के घर पे आ गया मुझे देख कर वो खुश हो गयी मैने उसको पकड़ लिया और बोला भाभी बहुत दिन हो गये है आज मेरा काम करना पड़ेगा तुमको तो वो बोली अभी उसको ज़रूरी काम है

तो मैने कहा कि क्या भाभी मैं इतने दिनो बाद आया हू और आप बहाने बना रही हो लगता है अब आप को मैं अच्छा नही लगता तो वो बोली जी ऐसे बात नही है चलो पहले आपको ही खुश कर देती हू काम तो बाद मे भी कर लुगी तुम अंदर चलो मैं गेट बंद कर के आती हू

 
आते ही मैने शीला को दबोच लिया और उसकी चूचियो को बहुत ज़ोर से दबा दिया तो वो दर्द से कराहती हुई बोली आआआआआआआआआआआआआआआआआअ तो मैने कहा वो क्या है ना भाभी कई दिनो मे आज किसी औरत के नज़दीक आने का मौका मिला है तो थोड़ा जोश चढ़ रहा है वो बोली अभी आपका जोश ठंडा करती हू और मेरे पयज़ामे को नीचे सरकाते हुए मेरे लड को पकड़ दिया और उसको मसलते हुए बोली कि अरे ये तो बहुत ही ख़ूँख़ार हो गया

है आज तो मेरी जान निकालेगा ये तो मैने बिना देर करते हुए भाभी के साँवले होंठो को अपने होंठो से मिला लिया और उनको चूमने लगा भाभी के होंठो की गर्माहट मेरे मूह मे घुलने लगी बहुत देर तक उनको बस चूमता ही रहा उनकी संतरे जैसी चूचिया उपर नीचे होने लगी थी मैने उनके ब्लाउस को खोल दिया अंदर ब्रा नही थी तो उनकी काली काली चूचिया तुरंत ही मेरे हाथो मे समा गयी मैं उनकी घुंदियो पे अपनी उग्लिया फिराने लगा शीला लगातार मेरी मुट्ठी मारे जा रही थी मेरा लड अब एक दहक्ता हुआ शोला बन चुका था जिसको अब बस चूत के रस की धार ही ठंडा कर सकती थी मैने भाभी के घाघरे को खीच कर हटा दिया अब बस एक कच्छि ही थी उनकी अमानत को अपने मे समेटे हुए तो मैने उनको लिटाया

और उस पर किसी शिकारी कुत्ते की तरह टूट पड़ा कुछ देर उसकी चूचियो को निचोड़ने के बाद मैने उसकी कच्छि मे हाथ डाला और उसको नंगी कर दिया गहरे काले रंग की चूत फड़फदा रही थी मैने फ़ौरन ही अपने तड़प्ते हुए लौडे को चूत के मूह पर लगा या आ और अगले ही पल वो शीला की चूत मे समा गया था शीला ने एक आह भरी और मुझसे लिपट गयी एक बार फिर से मैं उसकी होंठो को खाने लगा दो मिनट मे ही मेरा लड चूत मे अड्जस्ट हो गया था और हमारी चुदाई शुरू हो गयी शीला की बेहद कसी हुई चूत मे अपना लड डाल कर मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था शीला बोली आप जब नही थे तो आपके इस मज़े की बहुत ही याद आती थी मैं तो रोज ही आप की आने की राह देखती थी मैं लरजते हुए स्वर मे बोला भाभी अभी तो मैं आ गया हू

अभी पूरे डेढ़ महीने तक आपको ढंग से चोदुगा वो बोली हाअ मेरे देवेर जीिइईईईईईईईईईईई आईसस्स्स्स्स्स्स्स्स्सीईईईईईईईईईईईईई हीईीईईईईईईईईईईई आअपका लड इसस्स्स्स्स्स्स्सस्स चूऊऊऊऊऊऊऊऊऊथततटटटटटटतत्त मे रहना चाहिए और शीला भी नीचे से अपनी गान्ड उठा उठा कर चुदने लगी हम दोनो के शरीर दो जिस्म एक जान हो गये थे मैं पूरी रफ़्तार से शीला की चूत मारे जा रहा था शीला ने अपने दाँत मेरे कंधो मे गढ़ा दिए और जोश से वहाँ पर काटने लगी मैं बोला भाभी धीरे फिर अगले दस पंद्रह मिनट तक कुछ आवाज़ नही हुई बस हमारी चुदाई की ही हल्की हल्की आवाज़े आती रही पूरे आधे घंटे तक शीला की चूत मारने के बाद मैने अपना पानी उसकी चूत मे ही गिरा दिया और ढह गया

अपना काम हो जाने के बाद मैने अपना पयज़ामा पहना और उसकी दो- तीन पप्पी ली और घर आ गया मैं अपने कमरे मे गया और मोबाइल को देखा तो मिता के 22 मिसकाल थे मैने उसको फोन मिलाया तो पता चला कि अगले सनडे को वो आ रही है तो मैने कह दिया कि मैं उसको स्टेशन पर ही मिलुगा फिर थोड़ी बहुत बातचीत के बाद मैने फोन काट दिया चलो ये भी अच्छा ही था मिता के सहारे छुट्टिया काट जाएँगी मैं बेड पर लेट गया और आराम करने लगा अभी तक मैं गीता से भी नही मिल पाया था तो मैं प्लॅनिंग करने लगा मैने सोचा कि आज शाम को उधर भी राउन्ड मार ही दूँगा मैं सोच ही रहा था कि तभी ऋतु मॅम का फोन आ गया उहोने बताया कि उनकी पोस्टिंग रुड़की मे हो गयी है तो मैने कहा कि ठीक है मॅम अब आप भी पास आ गये हो तो मिलना भी हो जाएगा मैने उनको बताया कि अभी तो मैं गाँव आया हू पर लास्ट के एक दो दिन उनके साथ ही बिताउन्गा तो वो बोली पक्का आना कही भूल मत जाना बात थोड़ी लंबी चली शाम को चार बजे के आस पास मैने बाइक ली और गीता के घर की तरफ चल पड़ा पर उसके घर पर ताला लगा था थोड़ी देर इंतज़ार किया पर वो नही आई तो मैं वापिस घर आ गया थोड़ी देर साक्षी के साथ खेलता रहा

 


रात को छत पर मैं रवि और चाचा इकट्ठे थे मैने चाचा को पटा लिया था बॉटल खुल चुकी थी पूरी मस्ती चल रही थी अपनो के साथ रहने का मज़ा ही कुछ और होता है फिर टन होकर हम वही पर गिर पड़े पता नही क्यो आज कल मैं देर से ही उठने लगा था मैं नहा कर आया ही था कि अनिता भाभी आ गयी वो बोली चाची जी तो खेत मे गयी है चलो मैं तुम्हारे लिए कुछ बना दूं बताओ क्या खाओगे तो मैने पूछा तुम इतनी देर यहाँ रहोगी तो ताइजी शक नही करेंगी तो वो बोली रवि यहाँ रहते है तो मुझे थोड़ी आज़ादी है तुम उनकी चिंता मत करो

मैने कहा भाभी मैं तो तुमको ही खाउन्गा और उनका हाथ पकड़ लिया और कहा कि भाभी आज मौका भी है चलो कुछ करते है तो वो बोली अब तुम मानोगे तो नही और फिर तुम्हारी इच्छा तो पूरी करनी ही पड़ेगी तो मैने उनको सोफे पर पटक दिया और उनकी सलवार का नाडा खोलते हुए उसको एक झटके मे ही उतार दिया भाभी की गौरी गौरी टाँगो की चमक देख कर मेरी आँखे चौंधिया गयी मैं उनकी टाँगो को सहलाते हुए बोला भाभी आप तो और भी ज़्यादा निखर गयी हो तो वो बोली अब बच्ची होने के बाद पहले वाली ताज़गी नही रही तो मैने कहा भाभी आप तो हमेशा एक खिला हुआ फूल हो

तो वो मुस्कुरा पड़ी मैने अपना मूह उनकी पेंटी पर लगा दिया और उसको सुघने लगा भाभी मचलने लगी वो भी गरम होने लगी मैं कच्छि के उपर से ही उनकी योनि को चूमने लगा भाभी अपनी टाँगो को इधर उधर हिलाने लगी उहोने अपने सूट और ब्रा को खुद ही उतार दिया था मैने भी अपने कपड़े उतार दिए भाभी ने बिना कुछ कहे ही सीधे मेरे लड को अपने मूह मे लिया और चूसने लगी वो मेरे सुपाडे को किस करने लगी भाभी के गुलाबी होंठो के स्पर्श से मेरा लड और भी ज़्यादा फुफ्कारने लगा जब जब उनकी जीभ मेरे लड पर फिरती मुझे तो बहुत ही आजा आता मैं भाभी को लड चूसा ही रहा था कि बाहर से किसी ने घंटी बजा दी भाभी ने जल्दी से अपने कपड़े पहने मैं उपर चला गया कुछ देर बाद मैं आक्टिंग करते हुए नीचे आया तो पता चला कि बुआ-फूफा आ गये है अब इन्हे भी इसी टाइम पर ही आना था खैर, तो मैने उनके पाँव छुए और बाते करने लगा भाभी चाइ- नाश्ता बना ने लगी कुछ देर इधर उधर की बाते होती रही फिर मैने कहा आप लोग बैठो मैं मम्मी को बुला लाता हू और बाइक निकल कर कुँए पर चल पड़ा जब मैं वहाँ पर पहुचा तो गीता मम्मी के पास ही बैठी थी मैने उसको नमस्ते किया तो उसने पूछा अरे तुम कब आए

तो मैने उसको बता दिया फिर मैने मम्मी को कहा कि जल्दी चलो बुआ आई है वो बोली मैं अभी आई मैने गीता से कहा कि मैं कल आया था पर तुम थी नही तो उसने बताया कि वो सहर गयी हुई थी मैने कहा मैं जल्दी ही आउन्गा वो खुश हो गयी फिर मैने मम्मी को लिया और वापिस घर आ गये फिर पूरा दिन ऐसे ही हसी मज़ाक मे निकल गया आज तो चूत मिलते मिलते रह गयी थी अगले दिन मैं नहा कर आया और अपने कमरे मे खुद को तौलिए से पोंछ ने लगा मैने दरवाजा बंद नही किया बल्कि हल्का सा ही अड़ा दिया था वैसे भी मेरे कमरे मे कोई आता तो था नही तो मैं अपनी शरीर पर तेल की मालिश करने लगा मैने सोचा लड को भी थोड़ा तेल पिला देता हू और उसपर थोड़ा तेल लगा के उसकी मालिश करने लगा अब लड तो ठहरा लड वो साला तन गया मैं ज़ोर से उसपर तेल का हाथ रगड़ने लगा तभी दरवाजा खुला और मैने देखा कि बुआ दरवाजे पर चाइ का कप लिए खड़ी थी और अंदर मैं बिल्कुल नंगा हाथ मे अपना खड़ा लड लिए सिचुयेशन बड़ी ही अकवर्ड हो गयी थी मुझे रिएक्ट करने का टाइम मिला ही नही बुआ मूडी और नीचे चली गयी कुछ देर बाद मैं भी नीचे आ गया अब बुआ मुझसे नज़रे चुरा रही थी और मैं नाश्ता कर ही रहा था कि

मिता का फोन आ गया वो बोली कि वो बस कुछ ही देर मे ट्रेन पकड़ रही है और कल सुबह 11 बजे तक आ जाएगी मैने कहा ठीक है अगले दिन फूफा भी जाने वाले थे तो मैने कहा कि बुआ तो कुछ दिन यही पर रह जाएगी तो वो बोले हम ये भी कई दिनो बाद मायके आई है कुछ दिन रह लेगी फिर मैं बाजार चला गया साक्षी के लिए कुछ नयी ड्रेस और ढेर सारे खिलोने खरीदे और शाम होते होते मैं वापिस आ गया दिन बस ऐसे ही गुजर रहे थे ज़्यादातर टाइम मैं बोर ही होता रहता था करने को भी कुछ ख़ास नही था एक हफ़्ता गुजर चुका था पर कुछ खास हुआ नही था अब मेरी प्यास बस गीता ही बुझा सकती थी पर उसके पास जाने का मौका ही नही मिल रहा था अगले दिन मैने फूफा को बस मे बिठाया और फिर स्टेशन की ओर बढ़ गया वहाँ जाकर पता चला कि बस ट्रेन आती ही होगी और कोई बीस मिनट बाद रेल आ गयी मिता ने फोन किया और बताया कि वो कहाँ खड़ी है मैं दौड़ता हुआ गया उसके पास .

आज साढ़े चार साल बाद मैं अपनी प्रेयसी को आमने सामने देखने जा रहा था थोड़ी सी फॅशनबल बन गयी थी, आँखो पर चश्मा चढ़ गया था और थोड़ा शरीर भी भर गया था मिता मुझे देख कर मुस्कुराइ मेरे तो जैसे दोनो जहाँ रुक गये थे उस पल मे तभी किसी ने पीछे से मुझे थपकाया मैने मुड़कर देखा तो रीना थी मैं बोला अरे तू भी आई है क्या तो वो बोली अब आपकी नज़र मिथिलेश से हटे तो औरो का भी ख़याल आए आपको मिता बोली तू चुप कर फिर हम बाहर आए और एक खाली पड़ी बेंच पर बैठ गये रीना बोली भाई आप तो एक दम बदल गये हो बिल्कु जेंटेल्मन लग रहे हो मैने कहा अब आर्मी मॅन हो गया हू तो बस थोड़ा सा फरक आ गया है और कुछ नही बहुत देर तक हम लोग अपनी पुरानी यादो को ताज़ा करते रहे फिर मैने कहा तुम लोगो को भूख लगी होगी चलो कुछ खाते है और हम रेस्टोरेंट मे आ गये एक बेहद लज़ीज़ लंच के बाद मिता बोली अब उनको चलने चाहिए फिर वो बोली वो फोन करके बता देगी मिलने के बारे मे फिर वो टेंपो स्टॅंड की तरफ बढ़ गयी और मैं भी चल पड़ा

 


मिता से मिलने के बाद मुझे एक अजीब सा अहसास हो रहा था शाम को सारा परिवार बैठा था बात चीत हो रही थी तो बुआ ने कहा कि अब हमे इसकी शादी के बारे मे कुछ सोचना चाहिए देखो ना इसके पाँव तो घर मे टिकते ही नही है बस पूरा दिन उड़ा उड़ा ही रहता है मम्मी को तो मौका मिल गया वो बोली मैं तो कब से कह रही हू कि हमे ये काम कर देना चाहिए तो मैने कहा और मैं भी कई बार बता चुका हू कि जब तक पोस्टिंग नही मिल जाती मैं शादी नही कर सकता हू तो वो बोली अरे तो सगाई करले शादी पोस्टिंग के बाद कर लेना मैने सोचा आज तो ये पूरे मूड मे है बकरे को काटने के लिए

तो मेरे मूह से निकल गया कि मैं अपनी मर्ज़ी से शादी करूगा

पापा ने मेरी तरफ देखा और कहा कि क्या कहा तूने अभी तो मैने कहा मैं अपनी मर्ज़ी की लड़की से शादी करूगा और इनफॅक्ट मैं किसी को को बेहद पसंद करता हू और उसी से ही ब्याह करूगा मम्मी ने अपनी चप्पल उतारी और मेरी तरफ फेंक कर मारी और पापा की तरफ देखते हुए बोली और आज़ादी दो इसको देख लिया ना मुझे तो पहले ही पता था कि ये एक दिन हमारी नाक ज़रूर कटवाएगा तो मैने कहा इसमे ग़लत क्या है मैं किसी से प्यार करता हू

और उसके साथ अपनी लाइफ गुज़ारना चाहता हू इसमे ग़लत क्या है तो मम्मी चीखते हुए बोली कि हाँ तू ही सही है हम तो कोई हैं ही नही गाँव है भाईचारा है समाज भी कुछ होता है ना हम दुनियाँ से क्या कहेंगे कि बेटे ने भागकर शादी कर ली तो मैने कहा अब इसमे भागने की बात कहाँ से आ गयी मम्मी बकने लगी कौन है वो कुलटा मेरे बेटे को फास लिया फलाना धिमकाना मुझे खीज होने लगी मैने कहा मैं तो उसी से शादी करूगा चाहे जो भी हो जाए तो पापा ने कहा आ मेरे साथ चल और हम घर से बाहर आ गये वो बोले देख बेटा मैं समझता हू ये उमर ही ऐसी है लड़के लड़किया इस उमर मे थोड़ा अलग सा बिहेवियर करते है बेटा ये प्यार मोहब्बत कुछ नही होता है फिर माँ बाप तेरे लिए कोई ग़लत लड़की थोड़ी ना चुनेंगे बेटा हमारे भी कुछ अरमान है और फिर क्या पता उस लड़की के माँ बाप इस रिश्ते के लिए तैयार होंगे भी या नही फिर समाज भी है तू ठंडे दिमाग़ से सोच फिर हम इस बारे मे बात करेंगे फिर हम अंदर चले गये फिर ज़्यादा कुछ नही हुआ रात को छत पर मैं और चाचा पड़े थे तो वो बोले अरे ये क्या पंगा खड़ा कर दिया तूने मुझे ठीक से बता तो मैने कहा कि चाचा मेरे साथ एक लड़की पढ़ा करती थी शुरू से ही हम एक दूसरे को पसंद करने लगे थे .

ना जाने कब हमे प्यार हो गया वो नर्स का कोर्स कर रही है उसी के लिए मैने एनडीए जाय्न करा है वरना आप तो जानते ही हो कि मैं और फ़ौज़ मे ये आसान थोड़ी ही ना था मेरे लिए पर उसके लिए मैं नौकरी लगा अब बताओ मेरी क्या ग़लती है वो बोले बेटा प्यार व्यार बड़े शहरों की बाते है गाँव का माहौल अलग होता है अब तू बच्चा तो रहा नही बराबर का हो गया है आगे तेरी मर्ज़ी ,

थोड़ी देर बाद हम सो गये अगले दिन जब मैं नहा ने जा रहा था तो बुआ बस नहा कर निकली ही थी उनका सूट आगे से थोड़ा सा गीला होकर उनकी मोटी मोटी चूचियो से चिपक गया था ब्रा ना पहनी होने के कारण उनके निपल्लस मुझे सॉफ दिखाई दे रहे थे मेरा लड तो पाजामे मे ही तन गया उन्होने भी मेरे पयज़ामे मे बने हुए उभार को देख लिया था फिर वो चली गयी मैं जल्दी से अंदर गया वहाँ मुझे बुआ की गीली ब्रा टकी हुई मिली मैं उसको सुघने लगा एक बहुत ही मस्त सी खुश्बू आ रही थी उसमे से मेरा लड झटके मारने लगा तो मैं बुआ के बारे मे सोच कर मुट्ठी मारने लगा आज से पहले उनके प्रति मुझे ऐसी कभी फीलिंग नही आई थी मुट्ठी मारकर थोड़ा चैन मिला मुझे

दिन ऐसे ही गुजर रहे थे दो तीन दिन और भी बीत गये एक दिन मैं सोया पड़ा था तो बुआ छत पर झाड़ू निकाल रही थी उनकी पीठ मेरी तरफ थी उनका सूट पीछे से थोड़ा सा उठ गाया था तो उनकी सुडोल गान्ड जो टाइट सलवार मे कसी होने के कारण बड़ी ही सुंदर लग रही थी अचानक ही मैं बुआ को अपनी आँखो से नंगा करने लगा मैं उनके प्रति आकर्षित होने लगा अब हवस मे आदमी को रिश्ते नातो का ध्यान कहाँ रहता है उसको तो बस हर औरत मे बस चूत ही दिखती है कुछ ऐसा ही हाल मेरा था मैने सोच लिया बुआ को भी ट्राइ करके देखूँगा क्या पता चान्स बन जाए मेरे दिल मे उनको चोदने की हुड़क जाग चुकी थी पर कैसे पटाऊ उनको ये ही सोचता रहा मैं पूरे दिन पर कुछ ना सूझा उसी दिन शाम को मैं घर के साइड वाली नाली को सॉफ कर रहा था तो मैने देखा कि बुआ छत पर मुडेर वाली साइड पर कपड़े सुखाने के लिए आई तो

मुझे एक आइडिया आया मैने अंजान बनते हुए अपनी ज़िप खोली और लड को बाहर निकाल कर गली मे ही पेशाब करने लगा उपर बुआ मुडेर पर खड़ी थी मैने तिरछी निगाहों से देखा कि उनका ध्यान मेरे लड पर ही था मैने भी जान बुझ कर थोड़ी देर उसको बाहर ही रखा फिर मैं एक दम से पलटा और छत की तरफ देखा बुआ तुरंत ही सरक ली मैं बुआ को बस अपनी ओर आकर्षित करना चाहता था इसी उधेड़बुन मे एक दिन और गुजर गया

 
मैने उनको कहा उपर आ जाओ मेरे कमरे मे वो बोली बुआजी कहाँ है तो मैने कहा सो रही है वो बोली कही फस ना जाए मैने कहा तू चिंता मत कर और मेरी प्यास बुझाने का जुगाड़ कर मैं भाभी को अपने कमरे मे ले आया और बेड पर पटक दिया और अनिता के उपर चढ़ कर उसके गालो को खाने लगा मैं उनकी चोली को खोल ही रहा था कि उहोने कहा अभी कपड़े नही निकालो घर खुला ही पड़ा है और फिर बुआ उठ गयी तो परेशानी हो जाएगी तो मैने कहा ठीक है मैं बोला भाभी आपके बिना कैसे जीता हू वहाँ पर मैं ही जानता हू आपकी बहुत याद आती है भाभी अपनी तारीफ़ सुनकर खुश हो गयी उःन्हॉने अपने होंठ मेरे मूह से लगा दिए और अपने सेब से मीठे होंठो को मुझे पिलाने लगी उनकी लिपलिस्टिक मेरे होंठो पर लग गयी

बहुत ही मस्ती से मैं उनको चूमे जा रहा था ना जाने कब मेरे हाथ उनके घाघरे के अंदर पहुच गये और उनकी चूत को मसल्ने लगे उनकी कच्छि पुरी तरह से गीली हो चुकी थी मैने उसको उतार दिया और उनकी चूत को आज़ाद कर दिया मैने अपनी बीच वाली उगली को चूत मे सरका दिया और अंदर बाहर करने लगा भाभी ने अपनी टाँगो को आपस मे चिपका लिया मेरी पूरी उगली उनकी योनि मे धँस चुकी थी दूसरी ओर मैं उनके होंठो को चूमे ही जा रहा था हमारी साँसे फूलने लगी थी पर एक भी पीछे हटने को तैयार नही था भाभी ने मेरी पेंट की चैन को खोला और मेरे हथियार को बाहर निकाल लिया और वो मेरी मुट्ठी मारने लगी अब जलती आग मे घी पड़ चुका था मैने भाभी को बेड पर ही घोड़ी बनाया और उनके घाघरे को उठा कर उनकी कमर तक कर दिया

और उनके पीछे होते हुए अपने लड को चूत के दरवाजे पर टिका दिया जैसी ही चूत ने लड को महसूस किया उसके होंठ फडक उठे एक हल्के से धक्के के साथ आधा लड भाभी की चूत मे पनाह ले गया भाबी की एक आह निकली और दीवारो से टकरा कर खो गयी मैने लड को थोड़ा सा पीछे की ओर खींचा और अबकी बार एक तेज प्रहार करते हुए पूरे लड को गहराइयो मे उतार दिया और उनकी कमर को थाम कर चुदाई शुरू कर दी भाभी बोली देवर जी आज कितने दिनो बाद आपके इसको अपने अंदर महसूस किया है मेरी अधूरी प्यास भड़क गयी है आज उसे पूरी करदो अब ये तो औरतो की खास आदत थी जब तक लड चूत मे नही गया तब तक हज़ार नखडे होते है और एक बार लड अंदर गया तो फिर बस …………… मैं उनकी चूत पर पूरी रफ़्तार से धक्के लगाए जा रहा था

भाभी की हल्की हकली सिसकारिया लगा तार मेरा जोश बढ़ाए जा रही थी उनके चुतडो से टकराती मेरी गोलिया एक अलग सी आवाज़ कर रही थी दस मिनट तक उनको घोड़ी बनाए रखा भाभी की चूत से इतना पानी बह रहा था कि मैं बता नही सकता हू जैसे किसी नदी मे उफान आ गया हो उनकी आँखो मे नशा भर गया था उस नशे के आगे तो महनगी से महनगी दारू भी बेकार तो मैं हटा और बेड पर लेट गया अनिता मेरे उपर आई और लड पर बैठ गयी और अपनी गान्ड को मटकाते हुए चुदाई का मज़ा लेने लगी मुझ से रहा नही गया तो मैं अपने हाथ उनकी पीठ पर ले गया और उनकी चोली को उतार ही दिया और ब्रा के उपर से ही उनकी दूध से भरी छातियो को भींचने लगा भाभी बोली मैने मना किया था ना पर तुम कभी भी किसी की बात नही मानते हो

मैने ब्रा को भी खोल दिया और बोबो को मसल्ने लगा मैने एक चूची को थोड़ा कस कर दबा दिया तो उसमे से दूध की धार निकली और मेरे मूह पर आ गिरी भाभी हँसते हुए बोली देवर जी अब पहले वाली बात नही रही अब मैं माँ बन चुकी हू और खिल खिलाने लगी मैने उनकी चोली से अपने मूह को सॉफ किया भाभी बोली दूध पीना है तो देख लो

मैने कहा नही मुझे नही पीना भाभी की खनखनाती चूड़ियो की आवाज़ मेरे दिल मे उतरती जा रही थी अनिता की स्पीड अब बढ़ गयी थी मैं समझ गया था कि वो झाड़ ने ही वाली है तो मैने उसको अपनी नीचे लिया और बेहद तेज रफ़्तार से अनिता की चूत मारने लगा भाभी भी अपनी कमर को उचकाने लगी थी वो कुछ ऐसे पल थे जब मैं बिल्कुल उनमे खो ही गया था की तभी भाभी ने अपने शरीर को कस लिया और मुझसे चिपकते हुए झड़ने लगी

और ठीक जब वो झाड़ रही थी मेरे लड ने भी अपना रस चूत मे उडेल दिया और हम साथ साथ ही झाड़ गये कुछ देर हम दोनो एक दूसरे से लिपटे पड़े रहे फिर मैं उनके उपर से उतरा मेरी पॅंट आगे से उनके रस से भीग कर खराब हो गयी थी तो मैने उसे निकाल कर बेड पर ही फेक दिया और दूसरी पेंट पहन लिया भाभी भी रेडी हो गयी थी तो हम नीचे आ गये…

बुआ अभी तक सो ही रही थी तो मैने भाभी से कहा कि कुछ बना दो मेरे लिए भूक लग आई है तो वो रसोई मे चली गयी वो चावल पका ही रही थी कि बुआ भी उठ गयी और मेरे पास आकर ही बैठ गयी हम बाते करने लगे पर मेरी निगाह तो उनके बोबो पर ही थी बुआ भी शायद समझ रही थी पर उन्होने कुछ कहा नही पंद्रह बीस मिनट बाद हम तीनो साथ ही खाना खा रहे थे उसके बाद कुछ करने को था नही बुआ अनिता भाभी के साथ ताई के घर चली गयी और मैं अकेला रह गया एक तो मेरी तन्हाइयां और उपर से ये घर भी मुझे काटने को दौड़ता था मैं वही सोफे पर ही पसर गया और गाने सुनते सुनते सो गया शाम को कोई साढ़े 6 बजे पापा ने मुझे जगाया वो अभी अभी आए ही थे वो बोले अरे सोना था तो बेड पर सोता यहा कैसे पड़ा है मैं उठा और हाथ मूह धोने चला गया मैं जब तक आया तो मम्मी ने चाइ बना दी थी मैने घर वाले फोन से चाची के गाँव फोन मिलाया और पूछा कि वो कब आए गी वो मेरी आवाज़ सुनते ही खुश हो गयी वो बोली कि दस दिन बाद मैं आ जाउ उनको लेने तो मैने कहा ठीक है फिर मैं थोड़ा घूमने फिरने चला गया अगले दिन सुबह कोई दस बजे की बात है

मैं नहा धोकर अपने कमरे मे आया ही था कि बुआ वहाँ पर थी वो बोली इधर आ मैं गया तो उनके हाथ मे मेरी पॅंट थी जिस पर चुदाई के निशान थे वो दाग लगे थे वहाँ पर और उनके दूसरे हाथ मे अनिता की चड्डी थी जो वो शायद पहन ना भूल गयी थी बुआ ने वो चीज़े मुझे दिखाते हुए कहा ये सब क्या है मैने झूट बोलते हुए कहा कि मुझे नही पता तो वो बोली चल मान लिया तुझे नही पता पर ये पॅंट तो तेरी ही है ना अब मेरे पास कहने को कुछ नही था उहोने कहा कि नीचे चल अभी तेरी मम्मी को बता ती हू तो मैने कहा नही बुआ जी प्लीज़ ऐसा मत करना घर मे वैसे ही इतनी टेन्षन चल रही है और कबाड़ा हो जाए गा तो बुआ बोली पहले सच सच बता कि ये सब चक्कर क्या है और तू घर पर किस को लेकर आया था मैने कहा बुआ अब रहने भी दो ना तो वो थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली कि बता ता है या ले चलूं तेरी मम्मी के पास तो मैने कहा कि कल दोपहर को जब आप सो रही थी तो मैं अपनी किसी दोस्त को लेकर आया था और्र???????????????????????????????????????

वो बोली और क्य्ाआआआआआआआआआआअ तो मैं बोला आगे आप समझ ही जाओ तो वो बोली क्या समझू मैं

बता आगे क्या तो मैने तैश मे आ कर कह दिया कि फिर हमने सेक्स किया बस अब तो आप खुश हो गयी हो ना वो बोली मैं तो तुझे शरीफ बच्चा ही समझती थी पर तू तो सबके पर काट गया मैने कहा बुआ जी मेरी भी एक पर्सनल लाइफ है कुछ चीज़ो की मुझे भी ज़रूरत महसूस होती है तो वो कहने लगी कि तो फिर करवा ले शादी हम कब से कह रहे है तो मैने कहा कि बुआ मैने शादी से मना थोड़ी किया है बस मैं तो अपनी पसंद की लड़की से ब्याह करना चाहता हू इतनी सी तो बात है बुआ बोली ये आज कल की औलादे भी ना फिर अचानक से उन्होने कहा तू मुझे इतना घूर घूर कर क्यो देखता ही रहता है मैने कई बार नोटीस किया है ख़ासकर जब मैं झुक कर काम कर रही हू उस वक़्त अब माल पर निगाह तो जाएगी ही मैं बुदबुदा दिया वो बोली क्या बोला तू अभी तो मैने कहा कुछ नही वो बोली बता तो मैने कहा आप मुझे अच्छी लगती हो बुआ ने अपने मूह पर हाथ रख लिया और बोली कमिने अपनी बुआ के बारे मे ऐसे विचार रखता है शरम नही आई तुझे तो मैने कहा आप सुंदर हो तो आपकी तारीफ ही करूगा ना बुआ ब्लश करने लगी औरतो की बस थोड़ी सी तारीफ़ करदो वो खुश हो जाती है फिर उहोने मुझे वो पॅंट और कच्छि दी

 
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