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ज़िंदगी भी अजीब होती है Restart

और बोली आगे से थोड़ा हिसाब से रहियो अगर तेरी माँ को पता चल गया तो फिर तू जानता ही है जाते जाते बुआ दरवाजे पर रुकी और मेरी तरफ एक मुस्कान फेक कर नीचे चली गयी तो मैने भाभी की कच्छि को अलमारी मे रखा और अपनी पॅंट को बाथरूम मे डाल दिया धोने के लिए मेरी शाम तकरीबन मंदिर के तालाब पे ही गुजरा करा करती थी अब कोई दोस्त भी नही था जिस से थोड़ा टाइम पास हो जाए और जो दोस्त थी वो पता नही कहाँ खो गयी थी मम्मी ने एक दो जगह मेरी शादी का जिकर चला दिया था पर मुझे क्या फरक पड़ना था मैं तो आज़ाद परिंदा था रात को मैं और मिता लंबी बाते कर लिया करते थे पर इन सब के बीच मैं गीता के दर्शन ना कर पाया था मैने अपना पूरा ध्यान बुआ पर लगाया हुआ था पर कुछ लटको झटको के अलावा कुछ बात बन नही रही थी इधर मेरा लड उनको देखते ही खड़ा हो जाता था जिसे वो भी आजकल महसूस करने लगी थी मेरी समझ मे नही आ रहा था कि कैसे उनको चुदाई के लिए तैयार करू पता नही मेरी किस्मत को क्या हो गया था आस पास चूत ही चूत थी अनिता ,शीला पर मौका ही नही मिल रहा था कभी कोई आजाता कभी कोई आजाता ऐसे ही एक दिन ताइजी को हॉस्पिटल ले जाना पड़ा

तो ताऊ जी, मम्मी और अनिता भाभी उनके साथ चले गये पापा और चाचा तो ऑफीस थे तो बचे बस मैं और बुआ जी तो मैने सोचा चलो कुछ ट्राइ करके देखता हू तो मैने एक प्लान बनाया और देखा कि वो हॉल मे बैठी थी तो मैं सीढ़ियो पर खड़ा हुआ और झूठ-मूठ अपने फोन को कान पर लगाया और उनको सुनाते हुए बोलने लगा कि अरे आज घर पर कोई नही है मैं बिल्कुल अकेला ही हू तू आजा ऐश करेंगे ये सुनते ही बुआ के कान खड़े हो गये फिर मैने फोन को अपनी जेब मे डाल लिया और अपने कमरे मे चला गया

और टीशर्ट और कच्छे मे ही जाकर बेड पर लेट गया कुछ देर बाद बुआ उपर आई और मेरे बेड पर ही बैठ गयी और बोली अभी तू किस से बात कर रहा था तो मैने कहा किसी से नही बुआ जी तो वो बोली मुझे सब पता चल गया है तू क्या कह रहा था तो मैने कहा बुआ जी मैं जवान हू मेरी भी एक पर्सनल लाइफ है मैं बस थोड़ा सा एंजाय करना चाहता हू तो वो बोली मैं सब जानती हू तू किस एंजाय्मेंट की बात कर रहा है मैने कहा आप को जो भी समझना है समझो मैं तो वो ही करूगा जो मुझे ठीक लगे गा बुआ से बात करते करते ही मेरा लड खड़ा होने लगा बुआ की नज़र भी मेरे कच्छे पर ही थी तो मैने पूछा क्या देख रहे हो बुआ जी तो वो सकपका गयी और थूक गटकते हुए बोली कुछ……. कुछ नही तो मैं उठा और बुआ के बराबर मे जाके बैठ गया

उनकी मांसल जाँघ से मेरी टाँग रगड़ खाने लगी मैने पक्का ठान लिया था कि आज अगर बुआ को नही चोदा तो फिर कभी नही चोद पाउन्गा तो मैने फिर पूछा बुआ जी बताओ ना आप क्या देख रही थी तो उन्होने कहा कि बताया तो कुछ नही बस ऐसे ही तो मैने उनका हाथ पकड़ा और अपने लड पर रख दिया बुआ ने तुरंत ही अपना हाथ हटा लिया और उनको गुस्सा आ गया पर मैं तो आज फ़ैसला कर ही चुका था बुआ बड़े ही गुस्से मे आ गयी थी पर मैं शांत था मैने अपने कच्छे को उतार दिया और नीचे से नंगा हो गया मेरा नागराज हवा मे झूलने लगा बुआ के आँखे अचानक ही मेरे लड पर आकर ठहर गयी सरसो के तेल से मालिश करने के बाद और भी ज़्यादा फूल गया था वो बुआ तो जैसे पॉज़ ही हो गयी थी मैने उनको पकड़ा और दीवार से सटा दिया

अरे, मैं आपको बुआ के बारे मे बताना तो भूल ही गया उनका नाम प्रमिला है एक हाउसवाइफ है उमर लगभग 36-37 होगी, बेहद ही गौरी और एक दम गरम माल बड़े बड़े बूब्स और बेहद शानदार गान्ड उनको देख कर कोई बता भी नही सकता था कि दो बच्चो की माँ होंगी

तो मैने बुआ को दीवार से सटा दिया वो अलग होने की कोशिश करने लगी तो मैने अपनी पकड़ को मजबूत कर दिया वो कहने लगी मुझे जाने दे वरना अच्छा नही होगा तो मैं बोला अब जो होगा वो देखा जाएगा पर आज तो मैं अपने मन की कसर मिटा कर ही रहूँगा और अपने होंठ बुआ के होंठो पर टिका दिए और उनके गुलाबी शरबती होंटो का रस चाटने लगा पर वो अपना मूह बार बार हिला रही थी तो मैं ढंग से उनको चूम नही पा रहा था

इधर मेरा लड उनकी चूत मे धसने को बेताब हो रहा था और उनकी चूत पे रगड़ खा रहा था बुआ मेरे लड को अपनी चूत पर महसूस कर के शर्मिंदा सी हो गयी पर मुझे क्या फरक पड़ना था क्योंकि ये ही एक रास्ता था उनकी चूत मारने का तो मैं अपनी कोशिश मे लगा पड़ा था मैं अब पूरे जोरो से बुआ को चूमने लगा उनके होंठ मेरे मूह मे जैसे पिघलने से लगे थे कोई दस मिनट तक मैं बस उनको चूमता ही रहा नीचे मेरे लड की रगड़ से उनकी चूत मे हलचल मची पड़ी थी तो मैं अपना एक हाथ नीचे ले गया और उनके पेट से होकर सलवार मे घुसा दिया और कच्छि के उपर से ही उनकी चूत को मसल्ने लगा बुआ के जिस्म मे तो जैसे भूचाल ही आ गया था वो काँपति हुई आवाज़ मे बोली मुझे जाने दे अपनी बुआ की इज़्ज़त को खराब मत कर

 
पर मुझ पर तो जैसे वासना का खुमार चढ़ चुका था मैं बस इतना ही कह पाया कि बुआ बस एक बार मुझे करने दे बस एक बार करने दे मैं लगा तार उनकी चूत को मसले ही जा रहा था नीचे से उनकी चूत भी रस छोड़ने लगी थी बुआ का विरोध भी अब इतना त्रीव नही था बस कुछ सिसकारियो के साथ उका विरोध भी आधा ही रह गया था तो अब मैने बुआ को जल्दी से बेड पर पटका और दरवाजे की कुण्डी लगा दी ताकि वो भाग ना जाए मैने बुआ के दोनो हाथो को पकड़ लिया और उनकी सलवार का नाडा खोल दिया और उसको उतार कर फेक दिया उनकी गौरी गौरी सुडौल केले के तने जैसी जाँघो को देखकर मेरी तो आँखे चुन्धिया ही गयी बहुत ही गौरी थी वो और उपर से नीले रंग की डिजाइन दार पेंटी ने मेरा मन मोह लिया बुआ अब भी दबी दबी आवाज़ मे मुझे रुकने को कह रही थी

तो मैने अपनी उग्लिया उनकी पेंटी मे फसाई और उसको भी उनके बदन से अलग कर दिया उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़

क्या बताऊ ऐसी मस्त चूत तो मैने आजतक नही देखी थी कई औरतो को रगड़ दिया था पर बेहद शानदार चूत थी बल्कि यू कहूँ मैं कि चूतो की सहजादी थी बुआ की चूत एक दम मस्त आज तक कई औरतो की काली चूत तो देखी थी पर पार्मिला बुआ की चूत बहुत ही जबरदस्त थी थोड़ी लंबी सी और एक दम हल्के भूरे रंग की और उपर से हल्की हल्की झान्टो ने उनकी चूत की सुदरता मे चार चाँद लगा दिए मैने बुआ के हाथो को छोड़ दिया तो उहोने अपने हाथो से अपनी चूत को छुपा लिया और बोली बस तुम यही पर रुक जाओ तो मैने अपने लड पर हाथ फेरते हुए कहा

कि बुआ जी क्या आप को मेरा लड पसंद नही आया उन्होने अपनी नज़र झुका ली मैं बोला बुआ अब आपका सब कुछ मैने देख तो लिया ही है प्लीज़ मेरी बात मान जाओ मैं आपसे रिक्वेस्ट करता हू बस एक बार मुझे कर लेने दो देखो अगर मैं ज़बरदस्ती करूगा तो आपको भी तकलीफ़ होगी और मज़ा भी नही आएगा प्लीज़ मेरी बात मान जाओ पर वो बोली कि वो अपने भतीजे के साथ ऐसा हरगिज़ नही कर सकती है मैने कहा पर मैं तो आपकी लेकर ही मानूँगा चाहे आप राज़ी हो या ना हो आपकी मर्ज़ी और बुआ को दबोच लिया और उनके उपर चढ़ गया और एक बार फिर से उनको चूमने लगा बुआ फिर से मेरा विरोध करने लगी पर आज मैं रुकने वाला नही था तो मैं अपना हाथ नीचे ले गया

और अपनी उगली उनकी चूत मे घुसा दी उफफफफफफफ्फ़ कितनी गर्माहट थी उस चूत मे पर थोड़ी मुझे वो गीली भी लगी तो मैं उनको चूमते चूमते उनकी चूत मे उगली करने लगा अब बुआ भी कोई अलग तो थी नही वो भी एक औरत ही थी और फिर चुदास तो उनके मन मे भी उठती थी तभी बुआ का मूह थोड़ा सा खुल गया और उसी का फ़ायदा उठाते हुए मैने अपनी जीभ उके मूह मे सरका दी उनका मूह मेरे मूह मे लॉक था तो वो कुछ नही कर सकती थी मैं अपनी जीभ से उनकी जीभ को चूमने लगा बुआ के शरीर मे भी वासना की लहर उठने लगी लगातार उगली करने से उनकी चूत भी कामरस छोड़ने लगी तो मैने अपना मूह उनके मूह से हटाया और उनके एक बोबे को अपने मूह मे ले लिया

बुआ का पूरा बदन हिलोरे मारने लगा पर अभी ऐसा टाइम नही था कि मैं उनके बोबो को मज़े से चूस सकूँ तो मैं तुरंत ही नीचे आया उनकी टाँगो को चौड़ा करते हुए अपना मूह उनकी रस से भरी हुई योनि पर लगा दिया बुआ कुछ समझ पाती उस से पहले ही मैं उनकी चूत को चाटने लगा जैसे ही मेरी जीभ ने उनकी योनि को टच किया उनका सारा विरोध एक पल मे ना जाने कहाँ गायब हो गया क्या मस्त स्वाद था उनकी चूत से रिस्ते हुए पानी का थोड़ा सा नमकीन और थोड़ा सा शरबती जैसे ही मैने अपनी खुरदरी जीभ को उपर से नीचे तक सुर्रा लगाया बुआ की आह निकलगई

आआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआजजजज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्झहह हह ओहूऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊओह मैने कहा क्यो बुआ मज़ा आया तो वो कुछ नही बोली पर उनके गालो की लाली अपनी कहानी को बयान कर रही थी मैं हौले हौले उनकी चूत को चाटे जा रहा था बुआ के चूतड़ अपने आप मटकने लगे थे हिचकोले खाती उनकी कमर उनकी मादकता को बता रही थी मैं बड़े ही प्यार से उनको मज़ा दे रहा था हर गुज़रते हुए मिनट के साथ उनकी साँसे भारी हो ती जा रही थी तो मैने उनकी चूत की पंखूड़ियो को मूह मे भर लिया और अपने दाँतों से काट ते हुए उपर लगे चूत के पानी को पीने लगा

बुआ अब पूरी तरह से मेरे काबू मे आ चुकी थी मेरा लड इतनी बुरी तरह से उत्तेजित था कि उसमे अब दर्द होने लगा था पर मैं बुआ की चूत का रस पीना चाहता था तो मैं तेज तेज उनकी चूत को चाटने लगा आख़िर वो पल भी आया जब बुआ ने अपने हाथो से मेरे सर को अपनी चूत पर दबा लिया और मीठी मीठी आहे भरते हुए अपनी चूत को चटवाने लगी पूरे 20 मिनट तक उनकी चूत को मैने चाटा तब जाकर उनकी चूत ने अपना पानी छोड़ा जिसे मैं मज़े से पी गया बुआ हान्फते हुए बेड पर पसर गयी और अपनी टूट ती हुई सांसो को इकट्ठा करने लगी ठीक उसी पल मैं उनके उपर आया और अपने लड को चूत पर रख दिया बुआ को भी पता था कि अब बस दो पल मे ही उनकी चुदाई शुरू होने वाली है तो उहोने अपनी आँखो को बंद कर लिया
 
मैने धक्का लगाया और मेरा लड उनकी चूत के छेद को फैलाते हुए अंदर जाने लगा बुआ बोली आहह कितना मोटा है तेरा कही खून तो नही निकल आया तो मैं बोला क्या बुआ आप भी आज कल तो कुवारि कन्याओ की चूत से खून नही निकलता और आप शादी शुदा होकर ऐसी बात बोल रही हो और अगले झटके के साथ लड को जड़ तक उनकी योनि मे घुसा दिया उनकी चूत ने मेरे लड को अपने मे कस लिया और मैं अब लगा धक्के लगाने मैने उनके उपर वाले होंठ को अपने दोनो होंठो के बीच मे दबा लिया और उसको चूमते हुए उनके थूक को भी पीने लगा बुआ इस कदम से और भी मस्त हो गयी उन्होने अपने हाथ मेरे सर पर रखे और मेरे बालो को सहलाने लगी

मेरा जोश और भी बढ़ने लगा मैने भी आज तक ऐसे करारी चूत नही ली थी मुझे ना जाने क्यो फूफा से जलन सी होने लगी मैं पूरी रफ़्तार से बुआ को चोदे जा रहा था बेड का गद्दा जैसे टूटने को आया था धम्म से मेरी गोलिया उनके चुतडो से टकराई बुआ को चोद कर पता चला था कि चूत क्या होती है इतनी कसी हुई चूत बहुत ही मज़ा दे रही थी समय गुज़रे जा रहा था और मैं लगातार उनको ठोके जा रहा था बुआ भी अब चुदाई का पूरा मज़ा ले रही थी हर एक धक्के पर उनकी चूत बलिहारी जा रही थी हमारे शरीर पसीने से पूरी तरह भीग गये थे उपर चलता पंखा भी गरम हवा ही फेक रहा था तो अब मैने अपना मूह उनकी चूची पर लगाया

और उसको पीते पीते उनको रगड़ने लगा बुआ अब और भी चुदासी हो गयी चूत तो बहुत ही पानी छोड़ने लगी थी बुआ की आँखे मस्ती से बंद हो गयी थी अब मैं बहुत तेज तेज झटके लगा ने लगा था बुआ हाई हाई ही कर रही थी फिर एका एक उनका जिस्म आकड़ा और चूत की पंखुड़िया मेरे लड पर कस गयी और वो फिर से झड़ने लगी अब उनको कोई होश नही था जैसे बेहोशी छा गयी थी उन पर पर मैं अभी नही झाड़ा था तो मैं लगा रहा मैने उनको खीचा और बेड के किनारे पर ले आया और उनकी टाँगो को अपने कंधो पर रखा और दुबारा से चोदने लगा 10-12 मिनट तक और ढंग से उनको बजाया और फिर जल्दी से उनके उपर झुका और अपने लड से निकलती हुई हर एक पिचकारी से उनकी चूत को भरने लगा

बुआ बेसुधि की हालत मे थी उनकी चूत अभी भी फडक रही थी जब मेरा लड बिल्कुल मुरझा गया तो मैने उसको चूत से बाहर निकाला

फिर मैं नंगा ही नीचे गया और फ्रिड्ज से ठंडे पानी की बॉटल निकाली तोड़ा पानी खुद पीया और बाकी ले जाकर बुआ को दिया उन्होने भी अपने गले को तर किया और फिर अपने कपड़ो को उठाया और नंगी ही बाथ रूम मे चली गयी मैं भी उनके पीछे पीछे चला गया जब मैं दरवाजे के पास पहुचा तो वो सीट पर बैठ कर पेशाब कर रही थी सुर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर सुर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर करते हुए पेशाब की मोटी धार उनकी चूत से निकल रही थी फिर बुआ उठी और अपने अंगो को धोने लगी तो मैं जाकर उनके पीछे चिपक गया तो वो बोली अब भी तेरा मन नही भरा है क्या आज तो मेरी इज़्ज़त लूट ही ली तूने तो मैने कहा बुआ आप भी तो मज़े ले कर चुद रही थी सच बताना आप को मज़ा आया ना तो वो कुछ नही बोली और अपनी चूत और टाँगो को धोती रही वो बोली चल अभी मेरे पीछे से हट तो मैने उनकी चूची दबाते हुए कहा कि बुआ अभी मेरा मन नही भरा है और उनको वही पर पंजो के बल झुका दिया और अपने लड को चूत से सटा दिया बुआ बोली वो बहुत थक गयी है मैं और तंग ना करू उनको पर मेरा लड कहाँ मान ने वाला था मैने कमर उचकाई और एक बार फिर मेरा लड बुआ की गरमा गरम चूत मे उतर चुका था

बुआ की कमर को अपने दोनो हाथो से थामे मैं उनको लगा चोदने थोड़ी देर बाद वो भी पूरे रंग मे आ गयी और अपनी गान्ड को मटका मटका कर चुदने लगी थोड़ी देर तक उनको वही चोदने के बाद मैं उनको अपनी गोद मे उठा कर वापिस कमरे मे ले आया और उनको घोड़ी बना कर उनकी सवारी करने लगा बुआ बस आआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआहह आआआआआआआआआआआआआआआअहह ऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ ऊऊऊऊऊऊऊवझज्झहह उईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई माअंम्म्ममममममममममममम आआआआराअंम्म्मममममममममम सीईईईईईईईई

 
ऐसी ही आवाज़े निकाल रही थी मैं उनकी मोरनी सी गर्दन को चूमते हुए उनकी चूत मारे जा रहा था बुआ को पाकर तो जैसे मैने साक्षात स्वर्ग का सफ़र ही कर लिया था जब मैं अपने लड को सुपाडे तक बाहर निकालता और फिर झट से पूरा अंदर डालता

तो बुआ की आँखे मस्ती से बंद हो जाती तो मैने अपने लड को निकाला वो मेरी ओर देखने लगी ती मैने कहा अभी आप थोड़ी देर उपर आजाओ और मैं लेट गया बुआ मेरे उपर आई और अपने हाथ से लड को चूत पे लगाया और उस पर बैठ गयी मुझे ऐसे लगा कि जैसे अंदर किसी चीज़ से टकराया हो बुआ अब लगी अपनी गान्ड को मटकाने उनके बोबे बहुत तेज़ी से हिल रहे थे जब जब वो उपर नीचे होती उनके बोबो का उछालना देखना ही बनता था तो मैने अपने हाथ उनके मुलायम चुतडो पर रख दिए और उनको दबाने लगा और फिर अपनी उगली उनकी गान्ड के छेद पर फिराने लगा तो मेरी थोड़ी सी उगली आराम से अंदर चली गयी बुआ ने अपने चुतडो को थोड़ा सा टाइट कर लिया मैं समझ चुका था कि वो गान्ड भी मरवाती होंगी चलो मेरे लिए तो अच्छी ही बात थी बुआ का सारा मेकप पसीने की वजह से उतर गया था तो मैने कहा की बुआ तोड़ा तेज तेज करो तो वो पूरी ताक़त से अपनी गान्ड को मटकाने लगी और मुझे मज़ा देने लगी थोड़ी देर बाद मैने उनको अपने उपर से उतारा और उनको बेड पर लिटा कर दुबारा से रगड़ने लगा अब बस कमरे मे हम दोनो की फूली हुई सांसो की ही आवाज़ आ रही थी बेहद घनघोर चुदाई के सैलाब मे हम दोनो बहक चुके थे

मैं काफ़ी देर से उनको चोद रहा था और झड़ने के करीब ही था तो मैने कुछ जोरदार झटके लगाए और फिर हम साथ साथ ही अपनी मंज़िल को पा गये मैं साइड मे लेट गया बुआ ने भी काफ़ी दिनो बाद ऐसी दमदार चुदाई की थी मैं भी थोड़ा सा थक गया तो पता ही नही चला कि कब नींद आ गयी जब मैं सोकर उठा तो शाम के 5 बज रहे थे मैने अपने कपड़े पहने और नीचे आ गया बुआ हॉल मे ही बैठी थी उन्होने मुझे देखा और मेरे लिए चाइ बनाने चली गयी मैं भी रसोई मे ही चला गया और उनको किस करने लगा तो वो बोली अब सब कुछ तो मेरा लूट लिया अब क्या चाहिए मुझे तो मैने कहा बुआ मैं तो आपका दीवाना हो गया हू अब मैं रोज ही आपकी लिया करूगा तो वो कुछ ना बोली फिर मैने उनको कहा बुआ रोज दोगि ना तो वो हँस पड़ी फिर हमने साथ साथ चाइ पी मेरे बदन मे मीठा मीठा सा दर्द हो रहा था तो मैं नहाने चला गया पर अभी भी बदन कुछ टूट सा रहा था पर दिल मे एक खुशी भी थी कि आज बुआ को भी चोद डाला था आज मैने एक किला और फ़तेह कर लिया था फिर कुछ मौका मिला नही अंधेरा होने से पहले मम्मी पापा भी आ गयी थी पता चला कि ताइजी के घुटने मे इन्फेक्षन हो गया था तो मैं उसे मिलने चला गया

काफ़ी देर लग गयी उनके घर पर ही खाने के बाद मैने बुआ से कहा कि रात को कुछ चान्स बनेगा तो उन्होने सॉफ सॉफ माना कर दिया तो बस अब सोना ही था…

अगले दिन मोबाइल की आवाज़ से मेरी नींद टूटी मैने फोन उठाया तो मिता बोली कि आज मिलते है तो मैने कहा ठीक है मैं कोई एक घंटे मे उसे मिलता हू तो उसने कहा कि वो मुझे सहर मे मिलेगी मैं वहाँ आने के बाद उसको फोन करलू मैं जल्दी से तैयार हुआ और चल पड़ा सहर की ओर मैने फिर मिता से कॉंटॅक्ट किया तो उसने मुझे अपनी लोकेशन बताई मैने उसको पिक कर लिया तभी मेरे दिल मे एक विचार आया मैने अपनी बाइक स्कूल की ओर मोड़ दी कोई दस मिनट बाद हम दोनो वहाँ थे मिता बोली अरे हम यहाँ पर क्यो आए है तो मैने कहा डार्लिंग अपना स्कूल है पुरानी यादे है और फिर यही पर तो अपना प्यार परवान चढ़ा था मिटा थोड़ा सा शर्मा गयी फिर हम अंदर गये तो कुछ पुराने टीचर्स मिल गये उनको नमस्ते किया और अपने बॅच के बारे मे बताया

फिर प्रिन्सिपल से पर्मिशन ली और विज़िट करने लगे हम स्कूल की अपनी क्लास मे गये बेहद ही अच्छा लगा मुझे अपनी स्कूल लाइफ की याद आ गयी आँखो के सामने हर एक बिताया हुआ लम्हा जैसे जी उठा फिर हम कॅंटीन गये और उसी कौने मे जा बैठे जहा अपना अड्डा हुआ करता था मिटा बोली ये तुमने बहुत ही अच्छा किया जो मुझे यहाँ ले आए सच मे ये मेरे लिए एक बेस्ट गिफ्ट है आइ लव यू सो मच और मेरे गले लग गयी कोई दो घंटे वहाँ पर बिताने के बाद अपनी आँखो मे उन लम्हो को समेटे हम वापिस हो लिए दिल जैसे भर सा आया था दोपहर हो गयी थी तो फिर हम लंच करने के लिए चले गये आज के पूरे दिन मेरी दिलरुबा मेरे साथ ही रहने वाली थी लंच के बाद हमने थोड़ी शॉपिंग की फिर मैने कहा मिता आज मैं तुमको किसी से मिलवाता हू

वो बोली किस से बताओ तो सही तो मैने बस इतना ही कहा कि बस तुम चलो फिर खूद ही देख लेना और थोड़ी देर बाद हम पापा के ऑफीस मे थे मैं मिता के साथ उनके कॅबिन मे गया मिता थोड़ी से हैरान परेशान थी तो मैने कहा पापा ये मिथ्लेश है मैने बताया था ना मिता ने अपने सर पर चुन्नि डाली और पापा के पाँव छू लिए आक्च्युयली मैं ऐसे ही उसको ले आया था तो ना वो समझ पाई कि कैसे रिएक्ट करे और ना ही पापा पापा ने नाश्ता मंगवालिया और फिर मिता से बाते करने लगे उसकी पढ़ाई लिखाई के बारे मे फॅमिली के बारे मे कोई एक घंटा वहाँ बिताने के बाद हम वहाँ से निकल पड़े अब शाम भी हो ही रही थी तो मैने उसको टेंपो स्टॅंड के पास ड्रॉप किया और मैं भी घर आ गया रात को मैं और पापा बात कर रहे थे

तो मैने पूछा पापा मिता कैसी लगी तो वो बोले बेटा लड़की तो ठीक है पर उसके गाँव से अपना भाई चारा है और फिर उसके पिताजी को मैं तो जानता नही हू अब उनकी फॅमिली के बारे मे क्या कह सकते है पर मैं कुछ कोशिश करूगा फिर देखते है पर पहले तेरी मम्मी को भी तो समझाना पड़ेगा तो मैने कहा पापा ये सब आप संभाल लेना फिर मैं सोने चला गया आज गर्मी कुछ ज़्यादा ही थी तो मैं और चाचा आज हॉल मे ही कूलर की हवा मे सोए पड़े थे कि रात को कोई 3 बजे फोन की घंटी से मेरी नींद खुली मैं आँखे मल्ता हुआ उठा और मैने फोन उठाया तो दूसरी तरफ मामी थी उन्होने बताया कि नाना जी की तबीयत बहुत ही ज़्यादा खराब हो गयी है उनको हॉस्पिटल मे अड्मिट करवा दिया है पर तुम्हारे मामा को आने मे कुछ दिन लग जाएँगे

 


तो मैने कहा आप दो मिनट रूको मैने जाकर पापा को जगाया उन्होने मामी से बात की और उनको आश्वस्त किया कि वो अगले दिन ही आ जाएँगे पापा बात कर ही रहे थे कि मम्मी भी आ गयी उनको जब नाना जी की तबीयत के बारे पता चला तो वो थोड़ा घबरा सा गयी थोड़ी भावुक हो गयी तो हम सब ने उनको संभाला अब किसे नींद आनी थी इधर घर मे कुछ दिनो बाद ताई जी की घुटने का दुबारा ऑपरेशन होना था और उधर नाना की तबीयत भी अचानक से बिगड़ गयी थी सुबह होते ही मम्मी पापा नाना से मिलने के लिए निकल गये चाचा भी ऑफीस चले गये बचे मैं और बुआ तो बुआ ने कहा कि घर मे राशन ख़तम होने को है और थोड़ा सामान और भी खरीदना है तो मैने कहा बुआ आप तैयार हो जाओ फिर बाज़ार चलते है

इतना सामान मैं अकेला बाइक पर नही ला पाउन्गा तो वो बोली ठीक है कोई 11 बजे हम दोनो सहर की ओर चल पड़े आसमानी कलर की साड़ी मे बुआ एक दम गजब ढा रही थी मेरा लड तो एक झटके मे ही खड़ा हो गया मैने उनको अपनी बाहों मे लिया तो वो बोली अभी मुझे मत छेड़ो चलो चलते है फिर हमने ताला लगाया और चाबी अनिता भाभी को दी और चल पड़े बुआ मुझसे थोड़ा सा चिपक कर बैठी थी उनकी बड़ी बड़ी चूचिया मेरी पीठ मे जैसे धन्से जा रही थी मुझे बड़ा ही मज़ा आ रहा था सबसे पहले हमने राशन का सामान लिया फिर मुझे थोड़ा सा पर्सनल समान लेना था वो लिया मैने बुआ से पूछा कि आपको कुछ चाहिए तो उन्होने मना कर दिया फिर मैं एक फ्रूट शॉप पर गया और ताइजी के लिए कुछ फ्रूट लिए और साक्षी के लिए ढेर सारे चॉकलेट

फिर बुआ को जूस पिलाया और दो घंटे बाद हम वापिस आ गये मैं कुछ ज़्यादा ही तेज बाइक चला रहा था मुझे हुड़क चढ़ि थी बुआ की लेने की तो जल्दी से घर पहुचना चाहता था जैसे ही हम घर पहुचे मैं चाभी लेने गया और फ्रूट्स और चॉकलेट भाभी को पकडाई और वापिस आ गया अब घर मे बस हम दोनो के सिवा कोई नही था

मैने देखा कि बुआ रसोई मे बर्तन धो रही थी तो मैं भी वही पर चला गया और पीछे से उनको बाहों मे भर लिया वो बोली छोड़ मुझे बहुत काम पड़ा है तो मैने कहा काम तो होता रहेगा और अभी कौन सी आफ़त आ रही है मैने उनके बोबो को ब्लाउज के उपर से पकड़ लिया और उनको दबाने लगा बुआ कसमसाने लगी उनकी दो दो किलो की चूचिया बड़ी ही मस्त थी मेरे हाथो मे आती ही नही थी मैं लगा तार उनके बोबो को मसले जा रहा था

बुआ बोली मनोगे या नही तो मैने कहा एक बार दे दो मान जाउन्गा और उका मुँह अपनी तरफ करके अपने होंठ उनके रसीले होंठो से जोड़ दिए और उनका रस पीने लगा बुआ ने भी अपना मुँह खोल दिया और मज़े से अपने होंठो को चुसवाने लगी एक बहुत ही गहरे किस के बाद मैं उससे अलग हुआ और उनकी साड़ी को खीच कर उनके बदन से हटा दिया पेटिकोट मे बुआ के बाहर को निकलते हुए चूतड़ बहुत ही जबरदस्त लग रहे थे मैने झट से उनको नंगा करना शुरू किया और 5 मिनट मे ही हम दोनो बिल्कुल नंगे आमने सामने खड़े थे मेरी टाँगो के बीच मे झूलता हुआ मेरा लड उनकी चूत को सलामी दे रहा था मैने बुआ को नीचे बिठा दिया और अपना लड उनके गालो पर रगड़ने लगा उनके गोरे गालो पर लाली छा गयी थी कुछ देर बाद मैं लड को उनके होंठो पर रगड़ने लगा तो अचानक ही उन्होने अपने मुँह को खोला और मेरे सुपाडे को मुँह मे भर लिया और मेरी गोलियो को अपने हाथो से सहलाते हुए मेरा लड चूसने लगी वो अपनी नशीली आँखो से मेरी ओर देखते हुए बड़ी ही कातिलाना अदा से मेरे लड को चूसे जा रही थी

धीरे धीरे करके उन्होने पूरा लड अपने मुँह मे ले लिया और अपनी जीभ को गोल गोल घुमाते हुए उसका मज़ा लिए जा रही थी मैं बोला बुआ आप तो बड़ा ही अच्छे तरीके से लड चूस्ति हो तो उन्होने अपने दाँत मेरे लड पर गढ़ा दिए मैं दर्द से कराह उठा 10 मिनट तक उनको खूब लड चूसाया फिर उन्होने अपने थूक से सने मेरे लड को अपने मुँह से बाहर निकाल दिया मैने उनको उठाया और रसोई की स्लॅब पर बिठा दिया और उनकी मांसल जाँघो को फैला दिया बुआ थोड़ा सा पीछे की तरफ हो गयी जिस से उनकी चूत आगे हो गयी उन्होने खुद अपने हाथ से अपनी चूत को फैलाया तो मैने अपना मुँह वहाँ पर लगा दिया और एक जोरदार चम्मी ली बुआ की नस नस मे वासना चढ़ गयी वो बोली आआआआआआआआआआआआआहह

आईसीईईईई ही चूस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स बहुत मज़ा आता है जब तू इसको चाट ता है मैं तो निहाल ही हो गाइिईईईईईईईईईईईईईईईई ओककककककककककककककककककककककककककककक मैने कहा बुआ कइयो की चूत का पानी पी चुका हू पर जो मज़ा आपकी मे आया है वो और कही नही आया

 


बुआ अपनी तारीफ़ सुन कर बेहद खुश हो गयी और मेरे मुँह को अपनी चूत पर दबा लिया और मज़े से अपनी चूत की चुसाई करवाने लगी उनकी चूत का खारा पन मेरे मुँह मे समा ने लगा बुआ बड़ी ही मस्त हो चुकी थी मैं लगातार उनको अपनी जीभ से मज़ा दिए जा रहा था तो कुछ देर बाद उन्होने मुझे हटने को कहा वो बोली वो ऐसे नही झड़ना चाहती है फिर वो नीचे उतरी और स्लॅब पर अपने दोनो हाथ रखते हुए थोड़ा सा झुक गयी मैं उनके पीछे आया और अपने लड को चूत से सटा दिया

बुआ बोली अब देर ना कर जल्दी से अंदर डाल तो मैने एक झटके मे ही पूरा लड घुसा दिया वो बोली अरे आअर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्राआआआम से कर ना मैने अपने हाथ उनके कंधो पर रखे और उनकी चूत की हसीन वादियो मे खोता चला गया बुआ की चूत ने पूरे लड को निगल लिया बुआ बोली ओह क्या कर दिया है तूने मुझे देख अपने ही सगे भतीजे से चुदवा रही हू तूने तो मुझे बिल्कुल ही बेशरम कर दिया है और अपनी गान्ड को पीछे करके हिलाने लगी मैं उनके गौरे गौरे गालो को चूमता हुआ उनको चोदने लगा मैं उनके सेब से गालो को अपने दाँतों से काटने लगा बुआ की चूत मेरे लड को अपने मे समेटे जा रही थी मैं बस बड़े ही प्यार से धीरे धीरे लड को चूत मे अंदर बाहर करे जा रहा था बुआ की टांगे थर थराने लगी तो उन्होने मस्ती मे आकर अपनी गान्ड को और भी ज़्यादा उभार लिया और मरवाने लगी तो मेरे हाथ उनकी कमर से हट कर उनकी चूचियो पर पहुच गये और मैं मज़े से उनको दबाने लगा बुआ और मैं पूरी तरह से मस्ती मे जैसे खो ही गये थे थोड़ी देर ऐसे ही चोदने के बाद मैं उन्हे हॉल मे ले आया और सोफे पर बैठ गया बुआ ने एक नज़र मेरी ओर देखा और फिर झट से आकर मेरी गोदी मे चढ़ गयी और लड पर तेज तेज कूदने लगी बुआ काँपति हुई आवाज़ मे बोली तेरे फूफा भी मुझे बहुत चोद ते है पर ऐसी तसल्ली वो भी नही कर पाते है तूने तो मुझे एक अलग ही सुख दिया है तो मैने अपने होंठ उनके मुँह पर रख दिए और चूमने लगा बुआ मेरी जीभ को अपने मुँह मे लेकर चूसने लगी थी बहुत ही ज़्यादा मज़ा आ रहा था और उपर से कूलर की ठंडी हवा एक अलग सा ही आनंद प्रदान कर रही थी तभी बुआ बोली कि मैं उपर आ जाउ उनका होने ही वाला है तो मैने उनको अपने नीचे किया और बेहद तेज गति से उनकी चूत को चोदना शुरू किया बुआ अब अपने काबू मे नही थी उनको ना कोई होश था बस थोड़ी देर मे उन्होने अपने बदन को इतना टाइट कर लिया और उनकी चूत बह चली बुआ मुझसे लिपट ते हुए अपने चरम सुख को प्राप्त करने लगी कुछ देर मैने और धक्के लगाए फिर मैने अपने लड को चूत से बाहर निकाला और बुआ के मूँह मे डाल दिया जैसे ही मेरे सुपाडे को उनकी जीभ का स्पर्श हुआ मेरे लड ने भी मैदान छोड़ दिया और मैं अपना वीर्य उनके मुँह मे गिराने लगा बुआ उसको ऐसे चाटने लगी जैसे कि कोई चॉकलेट हो लड के मुरझाने तक बुआ उसको चाट ती ही रही फिर उन्होने अपने कपड़े समेटे समेटे और बाथरूम मे चली गयी मैने भी कपड़े चेंज किए और ताइजी के घर चला गया

ताइजी की हालत कुछ खास ठीक नही थी उनका घुटना और भी सूज गया था और दर्द भी ज़्यादा ही हो रहा था तो मैने कहा कि ऑपरेशन कब होना है तो ताऊ जी ने बताया कि एक हफ्ते बाद इधर ताइजी भी ठीक नही थी उधर नाना जी भी बीमार थे साला ये पंगा भी अभी होना ही था कुछ देर उनके वही बैठा रहा साक्षी को खिलाया फिर वापिस अपने घर आ गया तो मैने देखा कि बुआ आराम कर रही है मैं भी उनकी बगल मे जाकर लेट गया और उसे छेड़खानी करने लगा मैं उनके कुल्हो को दबाते हुए बोला बुआ एक बार गान्ड भी मरवा लो तो वो बोली कि अभी वो बहुत ही ज़्यादा थक गयी है मैं उनको परेशान ना करू तो मैने कहा कि ठीक है आप आराम करो मैं बाहर जा रहा हू आपके लिए कुछ लेकर आना है क्या तो उन्होने मना कर दिया तो मैं शीला की तरफ चला गया बाहर से देखा तो पप्पू घर पर ही था तो तुरंत ही वापिस हो लिया ये छुट्टियाँ बड़े ही बोरिंग तरीके से कट रही थी निखट दोपहर का टाइम था लू चल रही थी अब जाउ भी तो कहा जाउ ना कोई दोस्त था यहा पर जिसके सहारे थोड़ा टाइम पास ही हो जाए तो मैं मंदिर की बगीची मे चला गया सब कुछ जैसे उबल रहा हो गर्मी आज हद से ज़्यादा ही पड़ रही थी ये वो जगह थी जहा मैं अक्सर निशा के साथ अपने सुख-दूख की बाते कर लेता था सूखे पत्ते हवा से उड़ रहे थे एक बार फिर निशा की यादो ने मेरे दिल को झींझोड़ दिया था मैं बड़ा ही परेशान था उसको लेकर कहाँ पर होगी , कैसी होगी

 


आख़िर मैं क्यो उसको इतना याद किया करता था जिंदगी के सफ़र मे पता नही कितने लोग मिलते है कितने बिछड़ जाते है फिर मैं क्यो निशा को अपनी लाइफ से अलग नही कर पा रहा था आख़िर क्यो मुझे हर पल वो इतनी अज़ीज़ थी क्यो वो मेरे लिए मिता से भी ज़्यादा बढ़ कर होने लगी थी जब गर्मी को सहना मुश्किल हो गया तो मैं वापिस घर आ गया और थोड़ी देर सो गया दो दिन और ऐसे ही गुजर गये थे मैने सोच लिया था कि आज गीता से ज़रूर मिलने जाउन्गा मैं तैयारी कर ही रहा था कि पापा का फोन आ गया उन्होने बताया कि तेरे नाना जी एक्सपाइर हो गये है ये सुनते ही मुझे सॉक लगा वो बोले कि डेड बॉडी को गाँव लेकर आ रहे है अंतिम संस्कार मे आ जाना तो मैने तुरंत ही चाचा को फोन किया और बताया तो उन्होने कहा कि मैं अभी आता हू कोई आधे घंटे बाद वो घर आ गये तो मैं रवि और चाचा चल पड़े मामा के गाँव सूकर है चाचा ने कार बुक कर ली थी वरना कहाँ धक्के खाते जब हम वहाँ पर पहुचे तो माहौल काफ़ी गमगीन सा था चारो तरफ चीख पुकार मची थी मेरी भी रुलाई फुट पड़ी शाम तक अंतिम संस्कार भी हो गया था सभी घरवालो का हाल परेशान सा था चूँकि मैने पहले किसी की डेथ देखी नही थी तो मुझे थोड़ा सा अजीब अजीब लग रहा था खैर ये बारह दिन तो बड़े ही मुश्किल गुजरने थे रोज अलग अलग रिश्तेदारियो से लोग आते थे अपनी संवेदना प्रकट करने के लिए तीन चार दिन ऐसे ही बीत गये अब ताइजी का ऑपरेशन भी करवाना था तो पापा मुझे बोले कि वैसे तो तेरे मामा है ही पर फिर भी तू भी थोड़ा संभाल लियो हमे जाना पड़ेगा भाभी का ऑपरेशन है तो पापा और चाचा निकल गये घर मैं शाम को होदि पे नहा रहा था तो मेरी मुलाकात सरोज से हो गयी वो मेरे पास आई और बोले अरे तुम तो हमारा रास्ता भूल ही गये तो मैने कहा हाँ वो थोड़ी छुट्टियो की प्राब्लम रहती है तो उसने कहा कि अभी तो यही हो फिर हमारी तरफ भी कुछ ध्यान देना तो मैने कहा कि इधर घर पे तो सारा दिन रोना- पीटना ही चलता रहता है मैं तो खुद ही परेशान हू तो उसने कहा कि कल मेरे कुँए पे आ जाना फिर मैं तुम्हारा मूड तोड़ा हल्का करती हू तो मैने कहा कि पर मुझे तो आपके कुँए का पता ही नही है तो उसने कहा तुम अपना नंबर मुझे दे दो मैं कल तुम्हे फोन करूगी तो मैने अपना नंबर उसके फोन मे सेव कर दिया

मैने सोचा चलो ये भी ठीक है कल इसको ही चोद लुगा और अगले दिन का इंतज़ार करने लगा रात को मैं सोया ही था कि मिता के फोन की वजह से मेरी नींद टूट गयी वो मुझसे मिलना चाहती थी तो मैने उसको अपनी मजबूरी बताई पर मैने कहा कि मैं जल्दी ही टाइम सेट कर लुगा अब मिता से बात हो रही थी तो नींद किसे आनी थी मैं नीम के पेड़ के नीचे अपनी खाट डाले अपनी प्रेयसी से बाते कर रहा था मिता की कशिश मुझे अपनी ओर खीचे जा रही थी मैं अपना दिल जो हार बैठा था उसपे जब तक हमारा बॅलेन्स नही ख़तम हो गया हम लगे रहे दिल मे एक तस्सल्ली थी कि चलो कोई तो है अपना भी इस दुनियाँ मे एक आस थी उसको अपना बना ने की जिस के सहारे मैं जी रहा था आँखो मे एक सपना संजोया था अपनी प्रेयसी के साथ घर बसाने का .

अगले दिन मैं थोड़ा सा खुश था कि आज तो सरोज की चूत मारने को मिलेगी कोई 11 बजे मुझे सरोज का फोन आया और उसने मुझे बताया कि कौशल्या के घर के पास जो आम का बाग है उस के थोड़ी आगे चलने पर ही उसका कुँआ है मैं उधर ही आ जाउ तो मैं पैदल ही उस तरफ सरक लिया और आधे घंटे बाद मैं सरोज की आँखो के सामने था मैं बोला मामी इधर कोई आ गया तो ?????????????????

सरोज बोली अरे मैं तुम्हारे साथ हू ना पहली बात तो ये है कि इतनी गर्मी मे कोई आएगा ही नही और फिर अगर कुछ बात हुई भी तो मैं हू ना संभालने के लिए तुम तो बस जो आग मेरे अंदर लगी पड़ी है उसको बुझा दो बस सरोज ने अपने घाघरे का नाडा खोला और उसको उतार कर साइड मे रख दिया अंदर कच्छि ना पहनी होने के कारण नीचे से वो नंगी ही थी कुछ ही देर मे उसने अपना ब्लाउज और ब्रा भी उतार कर जनमजात अवस्था मे आ गयी और खड़ी खड़ी ही अपनी चूचियो को दबाती हुई मेरी तरफ हवस से भरी हुई नज़रो से देखने लगी उनको नंगी देखते ही मेरा लड तो झट से अपनी औकात मे आ गया तो मैने भी अपने कपड़ो को उतार फेंका और उनको अपने से सटा ते हुए उनके होंठो को चबाने लगा उनके गुलाबी होंठ देखकर ऐसा लगा जैसे अभी उसमे से खून छलक उठेगा और दूसरी तरफ अपने हाथो से उसके मोटे मोटे कुल्हो को थाम लिया और उनको दबाने लगा मैं कई दिनो से गान्ड मे लड नही डाला था तो मैने कहा मामी पहले मैं तुम्हारी गान्ड मारूगा तो वो बोली पर मेरी तो इसमे आग लगी है और अपनी चूत मे उगली करने लगी तो मैने कहा मामी बहुत दिन हो गये गान्ड नही मारी है तो पहले मैं आपकी गान्ड ही मरूगा आप जल्दी से तैयार हो जाओ तो वो बोली अब तुम्हारी इच्छा तो पूरी करनी ही पड़ेगी मैं तो तुम्हारी गुलाम हो गयी हू चलो आओ और खोल डालो मेरी गान्ड का ढक्कन मैं खुश हो गया उसके कुल्हो का कटाव देखते ही बनता था बीते सालो मे उसकी जवानी और भी निखर आई थी अब उसको चुदाई के अलावा और काम भी क्या था मैं उसकी गान्ड पर थूका और अपनी एक उगली को अंदर सरका दिया उसने अपने कुल्हो को भींच लिया और इतराते हुए बोली कि आह तोड़ा सा आराम से इसको फाड़ोगे क्या मैं उगली अंदर बाहर करने लगा

 


जब मुझे लगा कि अब उसकी गान्ड लड लेने के लिए एक दम तैयार है तो मैने मोर्चा संभाला और अपने लड पर भी थोड़ा थूक लगाया और उसको सरोज की गान्ड पर सटा दिया और एक झटके के साथ मेरा सुपाडा उसके छेद को चीरते हुए गान्ड मे घुसता चला गया सरोज थोड़ा सा आगे की ओर हो गयी और उसके चूतड़ टाइट हो गये तो मैने कहा आराम से डलवा ले ना तो वो फिर से सही पोज़िशन मे आ गयी 2 मिनट बाद पूरा का पूरा लड मामी सरोज की गान्ड की शोभा बढ़ा रहा था

मैं उनकी पीठ को चूमते चूमते उनकी गान्ड मारने लगा इतनी टाइट गान्ड थी उनकी कि लगा जैसे मेरे लड का दम ही घुट जाएगा घप घाप लड अंदर बाहर हुए जा रहा था मेरे घुटने फर्श पे धँसने को ही थे मुझे लगा कि कही घुटने छिल ना जाए तो मैने उसको फर्श पर उल्टा लिटा दिया और दुबारा से उसकी गान्ड मारने लगा वो बस दर्द भरी आहे लेते हुए अपनी गान्ड मरवा रही थी 15-20 मिनट तक मैं उनकी रागड़ाई कर ता रहा फिर मैने उनके कुल्हो पर ही अपना पानी छोड़ दिया और साइड मे पड़ गया

कुछ देर हम दोनो पड़े रहे फिर सरोज उठी और पानी के डब्बे से अपनी गान्ड सॉफ की और मेरे लड को भी धो दिया ठंडे पानी के एहसास से मेरे बदन मे कंपकपि हो गयी मैं ऐसे ही लेटा पड़ा था तो सरोज मेरी तरफ पीठ की ओर मेरे लड पर अपने चेहरे को झुका लिया और उस पर अपनी जीभ फेरने लगी मैं उसके चुतडो के बीच से झाँकती उसकी चूत को देखने लगा काफ़ी गीली और चिपचिपी सी लग रही थी वो उसके होंठो के जादू से मेरा लड दुबारा अपना सर उठाने लगा था लड चूसने मे तो वो बड़ी ही कुशल थी तो मैने अपनी बीच वाली उगली उसकी चूत मे उतार दी और उसको गोल गोल घुमाने लगा सरोज को और भी ज़्यादा जोश चढ़ गया और वो बड़ी ही तल्लिन्ता से लड को चूसने लगी

12-15 मिनट तक वो उसको चूस्ति ही रही फिर वो हटी और लेट गयी अब टाइम था मेरे पोज़िशन मे आने का मैं उसकी खुली पड़ी टाँगो के बीच मे आया और अपने लड को चूत पर उपर से लेके नीचे तक रगड़ने लगा उसकी उत्तेजना और भी ज़्यादा बढ़ने लगी वो बोली अब यूँ ना तडपाओ मेरा भी कुछ ख़याल करो ना तुम्हारे बारे मे सोच सोच कर रात से ही इसका बुरा हाल हुआ पड़ा है अब जल्दी से मुझ मे समा जाओ तो मैने कहा मेरी जान ले अभी और अपने लड को चूत का रास्ता दिखा दिया जैसे ही लड अंदर गया सरोज के चेहरे पे ऐसे भाव आ गये जैसे रेगिस्तान मे भटकते हुए किसी को पानी का दरिया मिल जाए मैं पूरी तरह से उसपर छा चुका था और उसकी चुदाई शुरू हो गयी

सरोज भी पूरी एक्सपर्ट थी तो चुदाई का मज़ा ही अलग हो गया था वो बड़ी ही तेज़ी से मेरे होंठो को अपने मुँह मे दबाने लगी मैने कहा सांस तो लेने दो पर अब वो जंगली बिल्ली कहाँ सुन ने वाली थी बड़े ही आक्रामक अंदाज मे वो किस किए जा रही थी मेरे धक्को की स्पीड अपने आप ही बढ़ती जा रही थी उसकी उछलती हुई गान्ड बता रही थी कि सरोज भी पूरा मज़ा ले रही है हम दोनो का मुँह लार से भर चुका था जिसे सरोज ने अपने पेट मे उतार लिया मैं लगातार उसकी चूत के छेद को और भी ज़्यादा खोले जा रहा था मस्ती का तूफान ही आ गया था वहाँ पर जिसमे मैं और सरोज दोनो गोते खा रहे थे उसने अब अपनी टाँगो को मेरी कमर के चारो तरफ लपेट दिया था तो और भी आसानी से लड चूत को रौदते जा रहा था सरोज अपने हाथो से मेरे कुल्हो को दबाते हुए बोली कि बस ऐसे ही मुझे चोद्ते रहो पसीने से भीगे उसके बालो से एक मदहोश करने वाली खुश्बू आ रही थी कोई 5-7 मिनट और बीते होंगे कि सरोज का बदन एक दम से आकड़ा और फिर निढाल हो गया उसका स्खलन हो गया था कोई 5 मिनट और मैने उसकी मारी फिर मैने भी अपने रस से उसकी चूत को लबा लब भर दिया ऐसे ही एक बार और उसको चोदा और शाम को साढ़े तीन बजे मैं वापिस चल पड़ा

मैं घर आया तो थोड़ी सी थकान भी हो रही थी तो मैं नींबू पानी पी ही रहा था कि कौशल्या मामी मेरे पास आकर बैठ गयी उनको भी कई दिनो बाद फ्री टाइम मिला था मैने कहा मामी कैसे हो आप तो वो बोली कि ठीक हू तुम्हारे मामा की ड्यूटी अब गाँव के स्कूल मे ही है तो बढ़िया गुजर रही है मैने कहा चलो ठीक है अब आपकी खुजली का इलाज तो हो गया अब तो हर रात आपके मज़े ही मज़े है तो वो बोली अरे कहाँ वो तो बस मेरी गान्ड ही बजाते है कभी कभी मैं जब नाराज़ हो जाती हू तभी मेरी लेते है ना जाने कहाँ से उनको गान्ड मारने की लत लग पड़ी मेरी चूत तो प्यासी ही पड़ी रहती है

मेरा पिछला छेद तो इतना बड़ा कर दिया है कि दो उग्लिया ऐसे ही अंदर चली जाती है मुझे थोड़ी हँसी आ गयी मैने कहा मामी मुझे सेवा का मौका दो फिर करते है आपकी प्यास बुझाने का इंतज़ाम तो वो बोली मैं तो कब्से तैयार हू पर घर मे माहौल ठीक नही है और इतने सारे लोग है कैसे होगा फिर बच्चे भी है किसी ने देख लिया तो अलग मुसीबत समझ नही आ रहा कि क्या करू तो मैने कहा देख लेना कोई चान्स बने तो इशारा कर देना फिर कुछ देर बैठने के बाद वो चली गयी वैसे तो दो दो मामियाँ थी चुदने को बेसबर पर मौका नही बन सकता था इधर मिता भी बुला रही थी पर मैं जाने से पहले एक बार दोनो मामियों की सेवा ज़रूर लेना चाहता था तो मैं बड़ी मामी के पास गया और उसे पूछा कि कुछ जुगाड़ हो जाएगा क्या तो वो बोली मैं तो तैयार हू पर करेंगे कैसे तुम्हारे मामा भी है और घर मे रिश्तेदार भी है कही कुछ गड़बड़ ना हो जाए तो वो बोली कि एक उपाय हो सकता है मैं बोला क्या वो बोली कि कल जब मैं नहाने जाउ तो तू भी मोका देख कर अंदर घुस जाना फिर हमे इतना टाइम मिल जाएगा कि छोटी सी चुदाई तो कर ही लेंगे मामी के आइडिया मे दम था तभी मैने कहा मामी क्या ऐसा हो सकता है कि मैं आपको और कौशल्या मामी दोनो को एक साथ मेरा मतलब है कि हम तीनो एक साथ सेक्स कर सके तो मामी बोली तू दोनो मामियों को चोद्ता है इसका मतलब ये नही है कि कुछ भी मन मे आया वो करेगा हमारे बीच मे थोड़ी शरम तो रहने दे और फिर क्या मुझे शरम नही आएगी उसके आगे तुमसे चुद्ते तो मैने कहा मामी मेरी बात मान लो ना बड़ा मज़ा आएगा पर उन्होने सॉफ सॉफ मना कर दिया और बोली कि तुझे मेरी चाहिए तो कल जब मैं नहाऊ तो बाथरूम मे घुस जइयो और चली गयी पर मैं और कुछ ही सोच रहा था कि तभी मेरे फोन पर सरोज का फोन आया तो उसने कहा कि उसकी एक सहेली है जो उसकी ही तरह मस्ती से भरपूर है और जब सरोज ने उसे मेरे बारे मे बताया तो वो भी मुझे मिलना चाहती है अगर तू कहे तो बात करू तो मैने कहा कि मामी मैं देखूँगा तो सरोज बोली अरे वो ठकुराइन है और उस से भी ज़्यादा मस्त औरत है उसको चोद के तुमको मज़ा आ जाएगा और मैने उसको वादा भी कर दिया है तो मैने कहा कि मामी अभी मैं थोड़ा सा बिजी हू मैं आपको कल बताउन्गा और फोन काट दिया मैं सोचने लगा कि अगर मैं एक लड़की होता तो अब तक एक नंबर की रंडी बन गया होता मैं ऐसा तो ना था इस चूत नामक छोटे से छेद के लिए मैं क्या से क्या बन गया था जब मैने गौर किया तो पाया कि सदा से मैं ऐसा ही तो था एक नंबर का अय्याश आवारा अपने से दोगुनी उमर की औरतो को भी चोद चुका था मामी , बुआ किसी को भी तो नही छोड़ा था ना जाने मुझे आज क्यो खुद से ही घिंन सी आने लगी थी ऐसे ही सोचते सोचते मैं सो गया रात को कोई डेढ़ दो बजे मैं उठा बड़ी ही प्यास लगी थी तो मैने देखा कि बगल वाली खाट पर मामा का लड़का अशोक भाई नही था जबकि सोए तो हम साथ ही थे

अब इतनी रात को ये कहाँ पर गया तो मेरे फ़ौजी दिमाग़ ने अपने घोड़े दौड़ाए मैने आस पास देखा तो कुछ समझ नही आया मैं मुड़ने ही वाला था कि मुझे छप्पर के पीछे की तरफ से कुछ आवाज़ सी आई तो मेरे कान किसी कुत्ते की तरह खड़े हो गये तो मैं उस ओर गया तो मैने देखा कि अशोक भाई किसी लड़की के साथ लगा पड़ा था तो मैं वही छुप कर उनकी चुदाई को देखने लगा देखने क्या लगा इतना अंधेरा था तो कुछ सॉफ सॉफ तो दिख नही रहा था पर अब मैं कहाँ जाउ तो मैं वही रुक गया जब भाई का काम ख़तम हो गया तो वो आया तो मैने कहा हम भाई काम हो गया तो वो थोड़ा हकलाते हुए बोला कि को सा काम भाई मैं तो बस ऐसे ही टहलने गया था तो मैने कहा यार रात को ढाई बजे तू बड़ा टहल रहा है पागल समझा है क्या मैने लाइव देखा है सब कुछ मैं बोला भाई अब बता भी दे मुझसे क्या छुपाना तो वो बोला कि ये अपने पड़ोस की लड़की है इसका नाम लिली है मेरा इस से टांका भिड़ा है कई बार चोद चुका हू इसको तो मैने कहा फिर घबराने की क्या बात है जो करना है बिंदास कर वो बोला भाई किसी को बताना मत तो मैने कहा तू चिंता मत कर चल अभी सो जा और मुझे भी सोने दे तो मैने पानी पिया और सो गया

 


अगले दिन मैने लिली को देखा तो मैने सोचा यार इतने ज़ोर का माल साला मेरी नज़र से कैसे बच गया मैं सोचने लगा कि इसको तो चोदना ही पड़ेगा पर वो तो भाई की सेट्टिंग थी तो समस्या थी तो मैने एक प्लान बनाया और सरोज को फोन किया और कहा कि मामी मेरी एक समस्या है जिसका समाधान आप ही कर सकती हो तो वो बोली बताओ मैने कहा कि मामी आपको मेरे लिए किसी को एक बार अपनी चूत देनी पड़ेगी तो वो बोली किसको तो मैने कहा अशोक भाई को तो वो बोली पागल है क्या मोहल्ले का मामला है और फिर वो तो मेरे बेटे जैसे ही तो है उसकी मम्मी मेरी सहेली है तो मैने कहा मैं भी तो आपके बेटे सा ही हू जब मुझसे चुद सकती हो तो उस से भी चुद लेना प्लीज़ बहुत समझाने पर मामी मानी वो बोली देख मैं बस तेरे क़म के लिए उस को दे रही हू

अब बारी थी अशोक से लिली के बारे मे पूछने की मैने उसको कहा भाई मुझे भी लिली की दिलवा दे तो वो भड़क गया और बोला यार वो मेरी सेट्टिंग है वगेरह वगेरह तो मैने कहा कि भाई मैं भी बदले मे तुझे एक मस्त चूत दिलवा दूं तो ये सुनते ही वो बोला कौन किसकी जल्दी बता तो मैने कहा सरोज की तो वो बोला सरोज चाची की क्या बात कर रहा है तू कब कैसे तो मैने कहा तू आम खा ना भाई बोल मंजूर है या नही तो वो बोला भाई मुझे थोड़ा टाइम दे मैं लिली से बात करता हू फिर बताउन्गा इधर इन सब बातों के चक्कर मे मैं बड़ी मामी के बारे मे भूल ही गया अब वो नाराज़ थी वो अलग शाम को भाई ने बताया कि यार लिली मान ही नही रही तो मैने कहा की ठीक है अब तुझे सरोज की चाहिए तो मुझे लिली की दिलवानी ही पड़ेगी चाहे कुछ भी कर . वो बोला कोशिस कर तो रहा हू

इधर मैने कौशल्या को कहा कि मामी मेरी छुट्टियाँ क्या ऐसे ही बीत जाएँगी प्लीज़ मेरा कुछ तो ख़याल करो तो वो बोली ठीक है चाहे कुछ हो जाए आज रात तेरी प्यास ज़रूर बुझा दुगी तो मैने कहा कि कैसे तो वो बोली कि रात को मैं अपने घर पे रहूंगी तेरे मामा तो यहाँ पर रहेंगे तू वही आ जाना फिर मैं अड्जस्ट कर लुगी तो मैने कहा ठीक है डार्लिंग जब मामी जाने लगी तो उन्होने मामा से कहा कि बच्चे भी यही है तो मामी मेरा नाम लेते हुए बोली कि इसको भी घर ले जाती हू इधर गम के माहौल मे ये थोड़ा सा उदास है तो थोड़ा सा फ्रेश भी हो जाएगा तो मामा बोले हम ठीक है वैसे भी फौज मे परेशान ही है बेचारा फिर मैं और कौशल्या मामी उनके घर चल पड़े

मामी आज बड़ा ही मुस्कुरा रही थी उनके घर पहुचते ही मामी बोली मैं पहले नहा लेती हू पूरा शरीर पसीने से भरा पड़ा है तो मैने कहा चलो साथ ही नहाते है तो वो बोली कि नही कही कोई आ गया तो तुम बाहर होदि पे नहा लो तो मैने अपने कपड़े उतारे और पानी के होद मे उतार गया ठंडे पानी मे जाते ही मेरी सारी थकान एक दम गायब ही हो गयी मैं बहुत देर तक ठंडे पानी मे पड़ा रहा फिर मैं बाहर आया और कपड़े पहने जब मैं अंदर गया तो मामी ने बस एक ढीली सी मॅक्सी ही डाल रखी थी वो भी आधे से ज़्यादा गीली थी उनके बालो से टपकती बूँदो की वजह से उनकी पीठ पूरी भीगी हुई थी

मैं सीधा उनके पास गया और उनके होंठो पर अपने होंठ रख दिए और उनके बतख से होंठो का रस निचोड़ने लगा मामी ने भी एक मजेदार किस दिया और फिर बोली कि तुमसे कभी भी सबर नही होता है तुम हमेशा ही इतने उतावले रहते हो तो मैने कहा कि मामी चार साल बाद आज आपकी चूत मारने का मौका मिला है अभी भी उतावला ना होऊ तो कैसे चलेगा तो मामी बोली रूको बाहर का दरवाजा तो बंद कर लू मामी ने दरवाजा बंद किया और बोली आँगन मे ही चारपाई बिछा लेते है यही पर सोएंगे तो मैने कहा कि मामी आज की रात कौन सोएगा तो मामी मुझे अपनी आँखे दिखाने लगी खाना वाना खाने के बाद रात को कोई साढ़े 9 बजे मैं कौशल्या मामी के साथ बिस्तर मे लेटा हुआ था मेरे हाथ मामी के शरीर पर साँप की तरह रेंगने लगे थे मामी बोली मुझे तुम्हारी बहुत याद आती थी तुम्हारे बारे मे सोच कर ना जाने कितनी बार मैने अपनी चूत मे उगली करके ही गुज़ारा किया है तो मैने कहा मामी कुछ ऐसा ही हाल मेरा है अब बात मत करो और बस मुझ मे खो जाओ…

अट प्रेज़ेंट

मैं क्या कहूँ तुझे ज़िंदगी अगर तू इतनी कठोर है तो मुझे कभी तू चाहिए ही नही थी मैं अकसर यही सोचता रहता हू कि लोग कहते है कि ज़िंदगी खूबसूरत होती है फिर तू ऐसी क्यो है क्यो कोई रंग नही है मेरे इस जीवन मे क्यो मैं ऐसा हू पर आख़िर मैं तुम्हे क्यो दोष दे रहा हू वो मैं ही तो था जिसने इस राह को चुना था पर अब मैं तंग आ चुका हू अपने इस बन्जारेपन से एक घुटन सी महसूस करता हू मैं अपने आप मे सिमट कर रह गया हू कोई भी तो नही है पास मेरे बस मैं हू और मेरा परिचय है ज़िंदगी मैं अक्सर सोचता हू कि तू इतनी बेरहम कैसे है अगर तू ऐसी है तो मौत कैसी होगी क्या बो खूबसूरत होगी या वो भी बस तेरी तरह एक छलावा भर ही है भटक ता रहता हू मैं यहाँ से वहाँ मैं वो मुसाफिर हू जिसकी कोई मंज़िल कोई ठिकाना नही है बस एक खाना बदोश ज़िंदगी ज़ीनी है

मैं हू कौन, एक सैनिक या एक कातिल एक प्रेमी या एक आवारा बहुत कोशिश करता हू खुद को एक पहचान देने की पर नाकामी ही मिला करती है मैं घुट ता रहता हू हर पल एक लाश ही हू मैं बस फरक इतना है कि सांस कुछ बाकी सी है इस सफ़र मे साथी तो कई मिले पर हमसफ़र पास होकर भी दूर है मैं आज एक ऐसे मुकाम पर आ खड़ा हू कि वापिस जाने को कोई राह दिखाई ही नही देती है बस अकेलेपन को ही साथ लेकर चलना है यार-दोस्त सन्गि-साथी कभी मिले ही नही जो भी मिला बस लूट ही ले गया थोड़ा थोड़ा किसी ने देखा ही नही कि इस सीने मे भी एक चीज़ धड़कती है जिसे लोग दिल कहा करते है ये खूबसूरत वादियाँ भी मेरे दर्द को कम नही कर पाती है इतने नकाब है मेरे कि अब भूल ही गया हू मैं कि असल मे मैं हू कौन एक आम इंसान या कोई छलावा दिल मे एक उमंग थी तो मैने ये राह चुन ली पर कांटो के इस सफ़र मे रोज मेरे पाँव छिलते गये हर अपना मुझ से दूर और दूर होता गया घर छूट गया अपने रूठ गये पर सबर कर लिया कि देश तो अपना ही है लोग अपने है पर कौई साला कदर करता है हीरो की और फिर क्या फरक पड़ता है हम रहे या ना रहे सबकुछ अपना दाँव पर लगा दिया सोचा था कि एक छोटा सा आशियाना अपना भी होगा पर साली तकदीर जब लेने पे आई तो कुछ भी बाकी ना छोड़ा सब कुछ वसूल कर लिया मैं हैरान परेशान सोचता रहता हू कि आख़िर मैने कौन सी ग़लती करदी क्या गुनाह हो गया मुझ से ऐसा कि ये सज़ा मिली है मुझ को मैं तो हार ही चुका हू ज़िंदगी तेरे आगे बस इतनी सी मेरी गुज़ारिश मान ले और मुझे इस दर्द से आज़ाद कर दे

मौत तू मुझे कोई दुख ना देना मैं बहुत थक गया हू तुझसे पनाह माँगता हू मैं बहुत भाग लिया अब रुकना चाहता हू थमना चाहता हू मुझे अपनी बाहों मे ले ले ना तू कम से कम तू तो मेरी बात मान ले आख़िर कब तक मैं यू ज़िंदा रहूं अब कुछ भी तो नही है ना वो गाँव मेरा है ना वो घर मेरा है अब सर्दियो मे लहराती वो सरसो की फसल नही दिखती है मुझे ना गाँव मे नीम के पेड़ पे झूला झूलती वो मुटियारे दिखती है सब कुछ खो गया है इस चका चौध मे वैसे तो अब पूरी दुनियाँ ही मेरी है पर वो छत कहाँ है जहा मैं दो पल आराम कर सकूँ कहाँ है वो आँगन जहाँ मैं बैठ कर अपने बचपन को याद कर सकूँ कुछ भी तो नही है फिर क्यो मैं इस ज़िंदगी का एहसान लूँ आख़िर क्या लगती है ये मेरी होगी वो बहुत खूबसूरत होंगी उसमे हज़ारो रंग पर मैं क्यों फिर बेरंग हू है कोई जवाब तेरे पास

बुरा लगता है मुझे जब लोग साले समझ ही नही पाते है कि क्या खोते है मेरे जैसे लोग दिन महीनो मे और महीने साल मे बदल जाते है पर हम मजबूरी का घूँट पी कर रह जाते है हाँ सही है कि हम अपनी तकदीर खुद लिखते है पर किस के लिए कोई नही समझता बहुत दर्द होता है बदन मे पीठ ज़ख़्मी है करवट नही बदल पाता हू मैं शूकर है हाथ सही सलामत है और थॅंक्स टू टेक्नालजी जिसने ये आइपॅड जैसे गॅड्जेस्ट्स बनाए जिनके सहारे मैं अपने मन की बात आप तक पहुचा पाता हू कल पूरी रात दर्द से कराहता ही रहा कभी कभी सो नही पाता हू इसको मैं सोच ता हू कि काश कोई अपना होता जो मेरा थोड़ा दर्द बाँट लेता पर अब तो आदत सी हो गयी है दर्द मे भी मुस्कुराने की मेरी इन भीगी आँखो मे भी कुछ सपने है जो मैं शायद कभी पूरा ना कर पाऊ सबकुछ पैसा नही होता अगर होता तो आज मैं दुखी नही होता कभी जब घर की याद आती है तो कलेजा चीर जाती है तब दारू का पेग भी गम भुलाने मे कोई मदद नही कर पाता है इच्छा होती है कि बुढ़ापे मे घर वालो का सहारा बनू उनकी राह देखती आँखो का सुना पन दिखता है मुझे पर मजबूर हू तकदीर के हाथो

क्या लिखू इन कागज के टुकड़ो पे अब कुछ बाकी ना रहा जबसे छूटा तेरा साथ अपना कोई साथी ना रहा

बस मैं हू और ये अधूरी हसरते है और एक ये दिल है जो साला मानता ही नही है क्या करू

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मामी मुझसे और भी चिपक गयी और मेरे पयज़ामे को नीचे सरकाते हुए मेरे लंड को अपने हाथ मे ले लिया और उसको सहलाने लगी मैने उनकी गर्दन मे हाथ डाला और उनके चेहरे को अपनी ओर करते हुए उनके पतले पतले होंठो को अपने मुँह मे भर कर चूसने लगा करीब दस पंद्रह मिनट तक बस मैं उनके होंठो का रस ही पीता रहा इधर लगातार उनका हाथ मेरे लड पर था तो वो भी पूरी तरह तन्कर एक दम टाइट हो चुका था और मामी की चूत की बखिया उधेड़ने को तैयार हो गया था मामी ने मेरी टी-शर्ट को उतार दिया और अपनी मॅक्सी भी उतार कर साइड मे रख दी और मामी का संगमरमरी बदन मेरी आँखो के सामने था मामी का फिगर आज भी ऐसा ही था जैसे पहले हुआ करता था एक इंच भी फरक नही आया था

तो मैने मामी को लिटाया और दुबारा से उनके होंठो को चूमने लगा थोड़ी देर चूमा था कि मामी बोली बस ज़्यादा मत चूसो होंठ सूज गये तो कही तुम्हारे मामा शक ना कर ले तो मैने कहा ठीक है मैं थोड़ा नीचे आया और और अपना मुँह उनकी एक साइड की चूची पर लगा दिया और उनके निप्पल को चूसने लगा और दूसरे वाले को अपने हाथ से दबाने लगा कुछ ही देर मे मामी की चूचियो मे कठोरता आ गयी वो ऐसे हो गयी जैसे की ठोस गोले हो आधे घंटे से भी ज़्यादा टाइम तक मैं मामी की दोनो चूचियो को पीता ही रहा जब मैने अपना मुँह उनसे से हटाया तो वो बिल्कुल लाल हो गयी थी मामी की आँखो मे वासना के डोरे तैरने लगे थे उन्होने मेरे हट ते ही अपनी टाँगो को चौड़ा कर लिया काली झान्टो से भरी हुई उनकी चूत के अंदर से आती सुगंध ने मुझ पर जैसे जादू सा कर दिया था मैने उनकी मांसल जाँघो को थामा और अपना मुँह उनकी पानी छोड़ती थी हुई चूत पर लगा दिया

मामी की चूत हद से ज़यादा पानी बहा रही थी तो मैं उस रिश्ते हुए पानी को अपनी जीभ से चाट ने लगा जैसे ही मेरी जीभ उनकी चूत से टच हुई मामी के बदन मे जैसे शोले से उठने लगे मामी ने अपनी टाँगो को थोड़ा सा टाइट सा कर लिया नीचे मैने चूत के छेद मे अपनी जीभ फसाई हुई थी और उपर मैं चूत के दाने को अपने अंगूठे से रगड़ने लगा तो मामी है है करने लगी मामी के होंठो से फुट ती हुई कामुक सिसकारियो से मेरे कान भी गरम होने लगे थे 5 मिनट मे ही कौशल्या के चूतड़ उपर की तरफ उठ गये थे अब वो चारपाई पर थोड़ा बैठी सी हो गयी थी मैं पूरे मज़े से उनकी रस से भरी हुई चूत को चाटे जा रहा था जब मैं अपने दाँतों से उनकी चूत की फांको को दबाता तो खारा पानी झट से मेरे मुँह मे भर जाता

मामी को थोड़ा दर्द होता पर वो बस मस्ती से मुस्कुरा ही देती मामी के सरीर मे अब कंपन बढ़ने लगा था तो मुझे हिंट मिल रहा था कि बस कुछ ही देर मे वो झड़ने को ही है तो मैं और ज़ोर से अपनी जीभ को चूत पर रगड़ने लगा और 4-5 मिनट बाद ही उनका कामुक शरीर अकड़ गया और चूत से रस का फव्वारा छूट गया मुझे ऐसा लगा कि जैसे किसी ने नमक की पूरी कटोरी को ही मेरे मुँह मे उडेल दिया हो मैने मामी की चूत को चाट चाट कर एक दम चमका दिया मैं अपना मुँह उनकी चूत से हटाने ही वाला था तो मामी बोली थोड़ी देर और चाटो ना मज़ा आ रहा है तो मैने फिर से अपनी जीभ उनकी योनि से सटा दी और दुबारा से चूत से छेड़खानी करने लगा शायद मामी आज बहुत ही आतुर थी तो थोड़ी देर बाद ही उनकी योनि फिर से गीली होने लगी

तो मैने अपना मुँह वहाँ से हटा या और अपने लड को जो कि काफ़ी देर से परेशान हो रहा था उसको मामी की चूत पर टिका दिया मामी ने अपने चुतडो के नीचे एक तकिया लगा या और बोली चलो अब डाल भी दो इसको अंदर मेरी प्यासी चूत देखो कैसे फाड़ फाडा रही है इसको अपने अंदर लेने के लिए तो मैने एक धक्का लगाया और पहले धक्के मे ही आधा लड अंदर चला गया मामी के चेहरे पे एक चमक सी आ गयी जिसे शायद उस वक़्त मैं ही समझ सकता था और अगले धक्के के साथ मेरा लड मामी की चूत की गहराइयो को नाप रहा था अब मैं मामी के उपर नीचे होने लगा हर धक्के के साथ उनकी आँखो मे नशा उतरने लगा था मामी ने अपनी जीभ मेरे मुँह मे डाल दी और मैं उसको चूमने लगा मेरी उग्लिया उनकी उग्लियो मे उलझ गयी थी

बेहद खामोशी से सितारो से भरी रात के नीचे हम दोनो अपनी चुदाई मे मशगूल थे मैं अपने हर एक धक्के के साथ मामी मे समाए जा रहा था आज एक आह भी नही फुट रही थी हमारी साँसे भी जैसे आज गूंगी हो गयी थी पर पसीने से लथ पथ हमारे शरीर एक अलग ही दास्तान कह रहे थे अब मैने मामी को अपनी तरफ टेढ़ी कर लिया और उनकी टाँगो को अपनी कमर पर रख लिया और उनके चूतड़ को थामते हुए उनकी धुँआधार चुदाई शुरू कर दी मैं तेज तेज धक्के लगाते हुए मामी को उनकी मंज़िल की ओर पहुचाने लगा मामी के साथ साथ मैं भी बहुत मस्त हो गया था मेरा वीर्य मेरे टट्टो मे इकट्ठा होने लगा था मैं मामी के कान को काट ते हुए बोला जान मैं बस झड़ने ही वाला हू तो मामी बोली कि दो मिनट और बस मैं भी जाने ही वाली हू और कहते कहते ही इधर उनकी चूत से रस छूटा और मेरे लड से वीर्य की पिचकारी एक साथ ही हम दोनो अपनी अपनी मंज़िल को पा गये थे कुछ देर बाद हम दोनो अपनी अपनी सांसो को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे थे

फिर मामी उठी और अपनी मस्त गान्ड को मतकती हुई अंदर चली गयी और एक ठंडे पानी की बॉटल ले आई थोड़ा खुद पिया थोड़ा मुझे पिलाया गला एक दम तर हो गया फिर मामी वापिस मेरे पास आकर लेट गयी और हम बाते करने लगे वो कहने लगी कि आज कितने दिन बाद मेरी चूत को आराम मिला है तुम्हारे मामा तो बस मेरे चूतड़ छोड़े करने मे ही लगे रहते है महीने मे बस दो चार बार ही चूत मरते है पर गान्ड उनको डेली चाहिए तुम ही बताओ मैं क्या करू तो मैने कहा अब मैं क्या कर सकता हू ये आप हज़्बेंड –वाइफ के बीच का मॅटर है मैं भला क्या कर सकता हू

मामी ने मेरे लड को हाथ लगाया और बोली तेरा ये कभी डाउन भी होता है जब देखो खड़ा ही रहता है तो मैने कहा मामी जब आप जैसा चोखा माल पास हो तोये कैसे ढीला रह सकता है मामी बोली बाते बनाना तो कोई तुमसे सीखे और हँसने लगी तो मैने कहा कि मामी लड चूसो ना तो वो बोली अरे ये भी कोई कहने की बात है अभी लो और अपने चेहरे को मेरे लड पर झुका दिया और उसको चाटने लगी मामी के मुँह मे जाते ही लड और भी फुफ्कारने लगा मुझे बड़ा ही आनंद आ रहा था कि तभी मामी ने उसे अपने मुँह से निकाल दिया और बोली मैं अभी आई और अंदर चली गयी कुछ मिनट बाद जब वो वापिस आई तो उनके हाथ मे एक कटोरी थी जिसमे मलाई पड़ी थी तो मामी ने ढेर सारी मलाई मेरे लड पर चुपड दी और फिर उसको अपने मुँह मे ले लिया मलाई लगने से लड बेहद मुलायम और चिकना हो गया था मामी बड़े ही चटखारे लेते हुए बड़े ही मज़े से अब मेरे लड को चूसे जा रही थी

मैने उनके चेहरे के सामने आ गये उनके बालो को साइड मे किया मामी के गुलाबी होंठ मेरे लड पे किसी लॉक की तरह कसे हुए थे अब वो खाली बस मेरे सुपाडे को ही चूस रही थी और अपने हाथो से मेरी गोलियो को लगातार सहलाए जा रही थी मुझे वहाँ पर बेहद गुद गुदि महसूस हो रही थी मुझे अब लगने लगा था कि कही उनके मुँह मे ही मेरा वीर्य ना छूट जाए तो मैने उनको अपने लड से हटा दिया और मामी को घोड़ी बना दिया जब मैने उनको घोड़ी बनाया तो मैने गौर किया कि उनकी गान्ड का छेद दो बेहद खुल गया है शायद रोज गान्ड मरवाने के कारण तो अब मैने अपना लड एक बार फिर से चूत पर सटा दिया मामी ने अपनी गान्ड को थोड़ा सा हिलाया और अगले ही पल मेरा लड उनकी चूत मे घुस गया था और मेरी गोलिया उनके चुतडो से टकराने लगी थी मैने उनकी चूचियो को अपने हाथो मे दबा लिया

और उनको बेरहमी से दबाते हुए मामी की चूत मारने लगा मामी भी लगातार अपने कुल्हो को आगे पीछे करे जा रही थी मैं बहुत ज़ोर से उनके बोबो को भिंचे जा रहा था उनको दर्द भी हो रहा था पर उन्होने मुझे एक बार भी नही रोका वो तो बस आज जी भर कर चुदना चाहती थी बस चुदना और कुछ नही उनकी चूत से पच पुछ्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह की आवाज़ आने लगी थी उनकी चूत से बहता पानी लड को लगातार भिगोएे जा रहा था तो अब मैं उनको चोद्ते चोद्ते उनकी पीठ को भी चूमने लगा था मामी के हर एक अंग से मस्ती जैसे फूटने लगी थी मैं अपने दाँत भींचे चूत को चोदे जा रहा था तभी मुझे पता नही क्या सूझा मैने लड को निकाला और उनके चुतडो को थामते हुए उनकी चूत को पीछे से ही चूमने लगा

मामी का तो पूरा बदन ही कांप गया मैं उनके दाने को कुरेदे जा रहा था मामी बहुत ही ज़्यादा मस्ता गयी थी वो लरजती हुई आवाज़ मे बोली आआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआ आईईईीीइसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स मात्त्तटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटटतत्त कार्रर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्रूऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊ आब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्बबभहिईीईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई मुझीईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्बबब ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्बबबुउुउउस्सुउुुुुुुुुउउस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स लाआआआआआाअंद्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्दद्ड ही ईईईईईईईईईईईईईईईई चाहियीईईइईईईईईईईईईईईईईईईई तो मैं हटा और

लड को दुबारा घुसा कर उनकी ढलती हुई जवानी को लूटने लगा मैने कोई 25-30 धक्के और मारे थे कि मामी एक बार फिर ढह गयी और औधी पड़ गयी मामी झड चूँकि थी और उनकी हिम्मत अब जवाब दे गयी थी वैसे तो मैं भी बेहद ही करीब था तो मैं उनपर लगा ही रहा और तेज तेज धक्के मारने लगा जब मुझे लगा कि अब बस काम होने ही वाला है तो मैने अपने लड को बाहर निकाला और मामी के मुँह मे दे दिया वीर्य की धार उनके गले से टकराई और फिर लगातार टकराती ही गयी मामी ने मेरा सारा वीर्य पी लिया फिर उन्होने मेरी बनियान से अपने मुँह को सॉफ किया और मेरी बाहों मे आकर लेट गयी और हाँफती हुई बोली कि बस अब मेरी ओर हिम्मत नही है एक बार और चुदि तो फिर सुबह उठ नही पाउन्गि तो मैने कहा कोई बात नही आप आराम कर लो तो मामी और मैं एक दूसरे से चिपक कर ही सो गये

 
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