अगले दिन मैने उठते ही मिथ्लेश को एसएमएस किया और पूछा कि क्या हम मिल सकते है तो उसने कहा कि मैं उसको पब्लिक लाइब्ररी के बाहर मिलू मुझे थोड़ा बॅंक का काम भी था तो मैने वो निपटाया फिर मिता को पिक कर लिया
आज तो वो बहुत ही प्यारी लग रही थी उसने पूछा हम कहाँ जा रहे है तो मैने कहा बस ऐसे ही घूमने के लिए और अपनी बाइक को नहर पे बने डॅम की ओर मोड़ दिया थोड़ी देर मे हम वहाँ पहुच गये एक अजीब सा सन्नाटा सा फैला हुआ था वहाँ पर अब गर्मी मे कौन आता वहाँ पर मैं और निशा तो अक्सर ही घूमते रहते थे वहाँ पर पर मिता के साथ आज पहली बार आया था पास ही एक बेरो का बगीचा था तो मिता बोली चलो बेर खाते है तो हम उस ओर चले गये वहाँ पर बस एक अम्मा ही थी तो उसे कुछ बेर लिए और इजाज़त ली कि क्या हम थोड़ी देर बाग मे घूम ले तो उन्होने हाँ कर दी
वहाँ के माहौल मे थोड़ी ठंडक सी थी तो गरम लू भी अच्छी लग रही थी मिता बोली एक बात मान नी पड़ेगी तुम्हारी चाय्स बहुत ही अलग है तुम साधारण चीज़ो को भी अलग बना देते हो तुम्हारी इसी बात पर तो मैं मर मिटी हू मैने मिता के हाथ को अपने हाथ मे पकड़ लिया हम एक पेड़ के नीचे बैठ गये उसने पूछा कब जाना है तो मैने कहा एक हफ्ते बाद वो बोली मत जाओ ना मैं क्या कहता बस इतना ही कह पाया कि जाना पड़ेगा अब एक फ़ौजी का नसीब यही तो होता है गिनती के ही दिन मिलते है अब उसमे क्या क्या कर ले मिता ने अपना सर मेरे कंधे पर टिका दिया और कहने लगी कितनी जल्दी ख़तम हो गये तुम्हारे हॉलिडे तो मैने कहा यार तेरे प्यार के लिए ही तो नौकरी की है अब बस तू जल्दी से मेरी ज़िंदगी मे आ जा वो भावुक होते हुए बोली कि मैं तो आज आ जाउ पर घरवालो से बात कैसे करू कुछ समझ नही आता है
रोज सोचती हू कि मम्मी से बात करू बट हिम्मत नही पड़ती है
मेरा गला भी भर आया मैं बस इतना ही कह पाया मिथ्लेश नही जी पाउन्गा तेरे बिन जितनी भी साँसे है बस तेरे लिए ही है पहली और आख़िरी पसंद बस तू ही है कुछ भी कर पर बस तुम मेरी ही दुल्हन बन ना मैं बोला अगली छुट्टी आते ही चाहे कुछ भी हो मैं तेरे घर आउन्गा तेरा हाथ माँगने के लिए
मितलेश कहने लगी की तब तक उसका कोर्स भी ख़तम हो जाएगा और वो भी जॉब करने लग जाएगी कोई डेढ़ दो घंटे तक हम लोग वही रहे फिर मैने कहा यार भूख लग आई है चल चलते है और हम वापिस शहर की तरफ आ गये मैं उसको एक नये खुले रेस्टोरेंट मे ले गया और साथ ही हमने लंच किया मैं आज का पूरा दिन बस मिता के साथ ही बिताना चाहता था
जब वो साथ होती थी तो टाइम भी बहुत तेज़ी से दौड़ लगाने लगता था मैने बाइक को पार्किंग मे लगाया और पैदल ही बाजार की तरफ निकल गये मैने कहा कुछ लेना है वो मना करने लगी पर मैने उसके लिए कुछ ड्रेस खरीद ही ली फिर मैने उसके लिए एक घड़ी खरीदी तभी वो बोली कि मुझे गोलगप्पे खाने है तो मैं उसको लेकर खोम्चे पे गया लड़किया भी ना गोल्गप्पो के लिए बड़ी ही क्रेज़ी होती है वो बड़े चाव से खाती रही और मैं बस उसको देख कर खुश होता रहा
अब ज़िंदगी मे ये कुछ लम्हे ही तो थे जिनके सहारे मैं वहाँ आर्मी मे जीता था ये यादे ही तो मुझे हौसला देती थी मिता भी मेरी मनोस्थिति को समझ रही थी पर वो बेचारी भी क्या कर सकती थी वो बस मुझे खुश करने की कोशिश ही कर रही थी तभी मुझे एक स्टेशनरी की शॉप इखी तो मैने कुछ नये पैंट और ब्रश खरीद लिए
मिथ्लेश बोली अब भी पैंटिंग करते हो तो मैने कहा की हा जब भी तुम्हारी याद आती है कर लेता हू वो हँस पड़ी उसको खिल खिलाते हुए देख कर मेरा दिल भी झूम उठा जब जब वो मेरे पास होती थी मेरे दिल की धड़कन ऑटोमॅटिकली बढ़ जाती थी
हम दोनो एक शॉप की सीढ़ियो पर बैठे हुए थे वो पॉपकॉर्न खा रही थी मैं पेप्सी पी रहा था मैने कहा यार देख टाइम कितना चेंज हो गया है ना कभी हम एक समोसा खा कर ही खुश हो जाते थे और आज इतने रुपये खर्च करने के बाद भी मज़ा नही आता है तो वो बोली तुमने अच्छा याद दिलाया एक काम करो चलो आज फिर से अपनी पुरानी लाइफ को याद करते है आओ चले मैं उसके पीछे पीछे चल दिया हम वापिस उसी गली मे पहुच गये थे जहा अक्सर हम जलेबिया और समोसे खाया करते थे वो दुकान आज भी वैसे ही थी मैने कुछ जलेबिया ली आज भी वो दोनो मे ही देता था
गर्म गरम जलेबियो के साथ काजू-बादाम वाला दूध का कुल्हड़ पीकर मज़ा ही आ गया मैने दुकानदार को बताया कि कैसे हम 10+2 मे यहाँ आते थे हर तीसरे चौथे दिन वो भी थोड़ा खुश हो गया बिल पे करने के बाद मैने मिता को थॅंक्स कहा ऐसे ही शाम तक हम पैदल पैदल घूमते रहे तफ़री मारती रहे फिर हम पार्किंग आए बाइक ली अब बस घर ही जाना था
तो मैने मिता से पूछा कि वो कब तक रुकेगी तो वो बोली कि वो तो दो महीने रुकेगी क्योंकि कॉलेज की टर्म ऑफ हो गयी थी मैने कहा कि मैं उस से मिलने शिमला आउन्गा उसने कहा कि वो पैदल ही टेंपो स्टॅंड तक जाएगी मैने सर हिलाया और उसको जाते हुए देखता रहा मेरा थोड़ा दिमाग़ उलझ सा गया था तो मैने एक ठंडी बियर खरीदी और गटकाने लगा
ये सुनहरी रेत जो बार बार मेरे हाथो से फिसल जाती है अपने आप मे ना जाने कितनी ही कहानियाँ समेटे बैठी है कुछ हम जानते है और कुछ इस रेत मे ही दफ़न हो गयी तपती दुपहरी मे जब ये हवा से से चलती है तो मैं अक्सर अपनी इस पोस्ट से थोड़ा बाहर आकर खड़ा हो जाता हू ये गरम लू मेरे शरीर को जैसे छलनी कर डालती है पर ये गरम हवा भी जैसे मुझसे नाराज़ है मानो मुझसे कह रही हो कि वो भी मेरी तरह जुदाई का गम लिए बह रही है जब रात होती है तो ये रेत मुझ अपने आगोश मे ले लेती है बिल्कुल किसी माँ के आँचल की तरह एक सुकून सा मिलता है कल की बात है
अचानक से बारिश आ गयी ठंडी बूंदे मेरे तन को भिगो गयी लगा जैसे वो बरसात मेरी प्रेयसी का संदेशा लेकर आई थी जब मेरे चेहरे पर बारिश की फुहार पड़ी तो लगा कि जैसे मेरी प्रियतमा का चुंबन हो कभी कभी मैं अपने जज्बातो को काबू कर नही पता हू आख़िर मैं भी तो एक इंसान ही तो हू कभी कभी कोफ़्त होती है इस खाना बदोश ज़िंदगी से मुझे सबकुछ होकर भी कुछ नही है मेरे पास मैं यहा टुकड़ो मे जी रहा हू वो कही इसी हाल मे जी रही है मैं उसको भी क्या दोष दूँ बहुत मना किया था उस दीवानी लड़की को कि मैं तो एक झोंका हू कभी इस पल कभी उस पल पर वो भी मर्जानी मानी ही नही पर खुशी भी है कि वो दूर होकर भी हर पल पास ही है मेरी रूह से इस कदर जुड़ चुकी है वो कि शब्दो मे बया ही नही कर सकता दिल की बाते दिल मे ही कहीं रह जाती है कोशिश तो करता हू पर होंठो पे आ ही नही पाती है पर मैं करू भी तो क्या आज यहा कल वहाँ अब तो पूरी डुंजया ही मेरा घर हो गयी है जहा जगह मिली वही चद्दर तान कर सो गये सवेरा हुआ तो चल दिए ना किसी से कोई शिकवा है ना कोई गिला है आख़िर इस ज़िंदगी को मैने ही तो चुना था अपने लिए शिकायत नही कर रहा हू बस कभी कभी थोड़ा सा तल्ख़ हो उठता हू
जब कभी लगता है कि टूट के बस बिखर ही जाउन्गा तो अपनी इस पोस्ट के बाहर आकर खड़ा हो जाता हू बस थोड़ी ही दूरी पर एक बंकर और दिखता है जहा मेरे जैसा ही कोई और दिखता है बोली भाषा भी मेरे जैसी ही पर बीच मे एक तारो की दीवार है जिसे हम सरहद कहते है ना इस पर कुछ फरक है ना उस पार कुछ फरक है बस ये बाद हमे जुदा कर देती है अक्सर पेट्रॉल्लिंग टाइम पे उसे भी गुफ़्तुगू होती ही रहती है कभी ज़ुबान बात करती है कभी बंदूक कभी छुपकर जश्न भी साथ होता है तो कभी आँसू भी भा लेते है मैं कभी भी समझ नही पाता हू इंसानी भावनाओ को कभी तो अपनो को भी जुदा कर देती है और कभी दुश्मनो के लिए भी रुला देती है
पर मैं करू भी तो क्या मेरी तो फ़ितरत ही है ऐसी और फिर कातीलो का कहाँ कोई ईमान होता है बहुत ही घुटन महसूस करता हू आज़ाद परिंदे की तरह उड़ना चाहता हू पर क़ैद हू पिंजरे मे ये मेरी अधूरी हसरते मुझे हर रोज रूलाती है पर मैं कुछ ज़्यादा तो नही माँगता हू ना फिर सब कुछ तो ज़िंदगी ने पहले ही छीन लिया है बस ये साँसे ही चल रही है ऐसी राह चुन ली चलने को कि सबका साथ छूट गया बस पता नही वो पगली क्यो रह गई मेरे इंतज़ार मे उसका बहुत शुक्रगुज़ार हू मैं हर वो ज़िम्मेदारी निभाती है जो मैं पूरी ना कर पाया दिल मे आती है उसकी याद बात करने को जी चाहता है पर फोन मे उसका नंबर डाइयल करने की हिम्मत नही हो पाती है हम उसके ईमेल रो ज ही आ जाते है पर कभी शिकायत नही करती है साथ रहना ही तो प्यार नही होता है दूर रहकर पास होना ही प्यार है अबकी बार सोचा है कि दीवाली पे घर ज़रूर जाउन्गा
घर , पर मेरा घर है कहाँ उस गाँव को तो मैं बहुत पहले ही छोड़ आया था कितना ख़ुदग़र्ज़ हो गया था मैं अब किस मुँह से जाउ मैं वापिस हिम्मत ही नही होती है कई बार कोशिश भी की पर नही जा पाया आख़िर वो बुरी यादे मेरा रास्ता रोक लेती है बाप की बूढ़ी आँखे आज भी मेरी राह तकती होंगी माँ का क्या हाल होगा पता नही परिवार ने मेरे लिए बहुत कुछ किया पर मैं अपनी ईगो और जिद्द के कारण सब तबाह कर आया मानता हू टाइम बदल गया है पर आज भी वो घर मुझे ही पुकारता है बहुत याद आता है मुझे अपना गाँव घर रोज घुट घुट के जी रहा हू अब छुट्टिया प्रेयसी के फ्लॅट पे ही काट लेता हू पर याद आती है माँ के हाथ की बाजरे की रोटिया पैसा तो बहुत कमाता हू पर रोटियो मे वो मिठास नही मिलती जो अपने घर के खाने मे आती थी जब कभी शीशे मे खुद को देखता हू तो नज़रे नही मिला पाता हू हँसता भी हू जीता भी हू पर अंदर अंदर कुछ जैसे छूट रहा है करू भी तो क्या करू अब मैं ख़ुदग़र्ज़ जो ठहरा
ये मेरा अधूरा पन जो कभी पूरा नही हो पाएगा बस अब तो देखना है कि कितनी सांस बाकी है
अक्सर मिता से मिलने के बाद मैं उदास हो जाया करता था मैं उसकी जुदाई बर्दस्त
कर ही नही पाता था पर मेरे पाँवो मे मजबूरियो की बेड़िया पड़ी थी पर इन चार
सालो मे इतना तो सीख ही गया था कि अपने गम को कैसे छुपाया जाए घर आया
तो पता चला कि ताइजी की हॉस्पिटल से छुट्टी हो गयी थी तो उनसे मिलने चला गया
थोड़ी बात चीत की रवि बोला भाई आज का खाना तू इधर ही खाएगा तो मैने कहा ठीक है मैं ज़रा नहा धो लू फिर आता हू वापिस आकर मैं बाथरूम मे घुस गया आज पानी की ठंडी बूंदे भी मेरे मन की आग को ठंडा नही कर सकती थी
नहा कर थोड़ा अच्छा लगा चाची बोली क्या बात है आज बड़ा उदास लग रहा है क्या बात है तो मैने कहा छुट्टिया ख्तम होने वाली है वो बोली वो तो है पर कर भी तो क्या सकते है फिर मैने कहा कि मैं आज खाना रवि के यहाँ खाउन्गा तो
आप मत बना ना और घर से बाहर निकल पड़ा
भाभी ने सब कुछ मेरी पसंद का ही बनाया था बेहद ही लज़ीज़ भोजन था अपनी
लाइफ इन छोटे छोटे लम्हो पर ही तो टिकी हुई थी खाने के बाद मैं आँगन मे डाली
चारपाई पर लेट गया और लेटे लेटे हुए बाते करने लगा परिवार जो इंसान का सबसे
बड़ा सहारा होता है फिर भाभी खीर ले आई पेट तो पहले ही ठूंस ठूंस कर
भरा हुआ था अनिता भाभी बर्तन धोने रसोई मे चली गयी तो मैं भी वही
चला गया और उससे बाते करने लगा मैने कहा भाभी खाना तो बड़ा ही
बढ़िया था पर मेरा मन अभी नही भरा तो वो कहने लगी कि तो ऑर ख़ालो किसने
रोका है मैने कहा कि भाभी मुझे तो अभी बस आपको ही खाना है तो वो बोली
जल्दी ही मोका निकालूंगी तुम्हारे लिए और वो भी मेरे साथ मस्ती करने लगी काफ़ी
देर हो गयी थी वहाँ पर तो बुआ ने नज़र बचा कर मुझे इशारा किया तो मैं और
बुआ अपने घर आ गये तो बुआ कहने लगी कि मेरी झान्टे सुलग रही है और तू
वहाँ टाइमपास कर रहा था तो मैने कहा बुआ चाची भी इधर ही है उनको सो
जाने दो फिर मैं आपके कमरे मे आ जाउन्गा तो वो बोली ठीक है अब उपर चाची
नीचे बुआ जब मैं उपर गया तो चाची ने पकड़ लिया और किस करने लगी तो मैने
कहा चाची आज मैं थोड़ा सा थक गया हू आज नही करूगा तो वो हताश हो गयी
और बोली एक बार तो करले पर मैने सॉफ सॉफ मना कर दिया पर चाची कहाँ
मान ने वाली थी वो मुझे खीचते हुए अपने कमरे मे ले गयी और कुण्डी बंद
कर ली और मुझसे चिपकते हुए बोली कि मेरी चूत तो मारनी ही पड़ेगी चाहे राज़ी या
बेराजी तो मैने कहा कि चाची क्या मेरा रेप करोगी तो वो हँसने लगी और बोली रे
चाकू चाहे खरबूजे पर गिरे या खरबूजा चाकू पर कट ता तो खरबूजा ही है
और हँसने लगी और अपने घाघरे के नाडे को खोल दिया घाघरा उनके पैरो मे जा
गिरा अंदर कच्छि नही पहनी थी उन्होने तो नीचे से पूरा शरीर किसी ट्यूबलाइट की
तरह चमकने लगा एक पल मे ही मेरे लड ने सिटी मार दी चाची ने अपनी चोली
भी खोल दी और नंगी होकर बेड पर चढ़ गयी और मेरी पॅंट को खोलने लगी बड़ी ही
नज़ाकत से उन्होने मेरी पॅंट को नीचे किया और थोड़ा सा झुकते हुए मेरे लड
को अपने मुँह मे क़ैद कर लिया लड जो पहले ही करेंट मे आ चुका था और भी ज़ोर
से फुफ्करने लगा चाची अपने दाँतों से मेरे लड की खाल को काटने लगी मैने कहा
क्या करती हो मुझे तकलीफ़ हो रही है तो उन्होने और भी ज़ोर से अपने दाँत वापिस से
गढ़ा दिए मेरा पूरा लड उनके मुँह मे था कुछ देर तक वो पूरी तल्लिनता से उसको
चूस्ति रही फिर मैने उनके मुँह से उसको बाहर निकाला और चाची को बेड पर
खीच लिया उनको मैने टेडी लिटाया और उनकी पीठ के नीचे से हाथ ले जाते हुए
उनके एक बोबे को अपने हाथ से कस कर पकड़ लिया और दूसरे हाथ से उनकी टाँग को
थोड़ा सा उपर उठा दिया मैने अपने शरीर को और भी उससे सटा दिया अब मेरा
लड चूत से कुछ ही इंच की दूरी पर था तो मैने अपने सुपाडे को गरमा
गरम चूत के मुख पर लगा दिया और एक कस कर धक्का लगा दिया चाची की एक
आ निकली और मेरा लड उनकी चूत मे समाता चला गया अब मैने अपने दोनो
हाथो मे उनके खरबूज़ो से उन्नत उभारो को थाम लिया और कस कस के धक्के
लगाने लगा चाची मीठी मीठी आहे भरने लगी चाची ने अपने चुतड़ों को
थोड़ा सा पीछे की ओर कर लिया ताकि मैं और भी अच्छे ढंग से उनकी चुदाई कर
कुछ देर बाद मैने लंड को बाहर निकाला बेचारा मुरझा कर सिकुड चुका था
दो दो गरमा गरम हुस्न की मल्लिकाओ को चोदने के बाद मैं भी थोड़ी थकान महसूस करने लगा था बुआ भी बहाल बेड पर पड़ी थी मैने दरवाजा खोला और बाथरूम मे चला गया बुआ भी थोड़ी देर बाद आ गयी और मेरे सामने ही मूतने लगी वो नज़ारा बहुत ही उत्तेजक था पर अब मेरा मूड नही था बुआ पेशाब करने के बाद चली गयी मेरे शरीर मे पसीने की चिप चिप हो रही थी तो मैं नहा ने लगा नहाने के बाद मैं वापिस आया तो सोचने लगा कि उपर जाके सोऊ या नीचे ही सो जाउ फिर मैं सोफे पे ही लेट गाया मैने मोबाइल निकाला और मिथ्लेश को एसएमएस कर दिया कि कल मिलना है ज़रूर
दरअसल मैं चाहता था कि ज़्यादा से ज़्यादा टाइम मैं उसके साथ बैठू तो फिर मैं सोफे पर ही सो गया अगले दिन मैं दस बजे उठा मोबाइल देखा तो पता चला कि मिता की कई मिस कॉल थी तो उसको फोन लगाया वो थोड़ा सा नाराज़ होने लगी तो मैने कहा कि यार मैं तो सो रहा था जस्ट अभी उठा ही हू तो उसने कहा कि वो मुझे वही पर मिलेगी जहाँ कल मिली थी मैं उसको पिक कर लू तो मैने कहा कि आधे घंटे मे आ जाउन्गा और जल्दी से नहाया-धोया और बाइक उठा कर चल पड़ा अपनी सपनो की रानी से मिलने उसको पिक किया पर शहर मे ऐसी कोई जगह नही थी जहाँ हम टाइम बिता सके तो मैने कहा डार्लिंग मेरे घर चलेगी क्या तो वो बोली कि ऐसे कैसे चल सकती हू पर मैने कहा मान भी जा यार होने वाली पत्नी के नाते ना सही तो एक दोस्त के नाते तो चल मैने कहा कि तू अपने दुपट्टे को मुँह पर लपेट ले ताकि कोई पहचाने ना और फिर मैं उसको अपने घर ले ही आया .
आज मेरी होने वाली दुल्हन मेरे घर आई थी बुआ और चाची को तो समझ ही नही आया कुछ पर मिता को देखकर वो खुश हो गयी अनिता भाभी तो बेहद ही खुश हो गयी थी मिता साक्षी को खिलाने लगी तो मैने कहा भाभी कुछ नाश्ते पानी का इंतज़ाम तो करो तो भाभी बोली हाँ अभी लाई और रसोई मे चली गयी बुआ और चाची मिता से बाते करने लगी कुछ ही देर मे मिता के व्यवहार ने उनका दिल जीत लिया फिर नाश्ते के बाद मैने कहा मिता आओ तुम्हे कुछ दिखाता हू और उसको अपने कमरे मे लाया अब साला यही पे थोड़ी सी प्राब्लम हो गयी मेरे कमरे की एक दीवार पर मिथ्लेश की तस्वीर बनी थी और एक दीवार पर निशा की मिता बोली कि ये किस की तस्वीर है तो मैने कहा कि ये मेरी दोस्त थी जो अब ना जाने कहाँ है तो मिता मेरे पास आई और बोली कि बस दोस्त ही है या कुछ ऑर तो मैने कहा तुम्हे क्या लगता है तो वो बोली अब तुम्हारे मन की मैं क्या जानू पर मुझे लगा कि वो कुछ सोच रही है तो मैने कहा यार मेरी पहली और आखरी ख्वाहिश तो बस तुम ही हो
तो वो बोली अरे रिलॅक्स हो जाओ मैं तो मज़ाक कर रही हू अब ये तुम्हारी दोस्त है तो मेरी भी दोस्त हुई ना मैं आल्बम ले आया जिसमे हमारी तस्वीरे थी स्कूल टाइम की मिता थोड़ी सेनटी हो गयी तो मैने उसको कहा कि यार एमोशनल क्यो हो हम साथ ही तो है मिता बोली क्या हमारी शादी हो पाएगी तो मैने कहा कि हो पाएगी नही हो गी ही फिर कुछ देर बाद हम नीचे आ गये मिता सबको ही बहुत पसंद आई थी कुछ तो बात थी ही मेरी पसंद मे अनिता भाभी तो उसे एक मिनट के लिए छोड़ ही नही रही थी कुल मिला कर माहौल बड़ा ही अच्छा बना हुआ था मैं तो आज बहुत ही खुश हो रहा था
आख़िर खुशी की ही तो बात थी मेरी प्रियतमा जो मेरे घर आई हुवी थी आज टाइम भी कुछ ज़्यादा ही जल्दी गुजर रहा था मिता ने पूछा कब जा रहे हो मैने कहा अगले सोमवार को वो थोड़ा सा और मेरे पास खिसक आई और बोली कि फिर कब आओगे तो मैने कहा जैसे ही छुट्टी मिलेगी सबसे पहले मैं शिमला आउन्गा तुम्हारे पास मैने उसको प्रॉमिस किया तब जाके उसको थोड़ा सा चैन मिला अब ये ही तो थी जिंदगी जब दूर थे तो दूर थे अब दिल ही नही कर रहा था उस से दूर होने को पर क्या करे जाना तो था ही मिथ्लेश बोली कि अब मैं जितना हो सके उतना टाइम तुम्हारे साथ ही स्पेंड करूँगी ना जाने फिर ये टाइम मिले ना मिले तो मैने कहा पगली ऐसा क्यो सोचती हो मैं वापिस भी तो आउन्गा तुम ऐसे ना बोलो हम बाते कर ही रहे थे क़ी चाची ने नीचे से आवाज़ लगाई चाइ पीने के लिए टाइम भी 4 हो रहा था तो हम ने चाइ पी फिर मैं मिथ्लेश को ड्रॉप करने चला गया