मैं आधे रास्ते गया ही था कि देखा की सामने से प्रीतम का
भाई बोरिया बिस्तर लिए चला आ रहा है उसने मुझे देखा और गले लगा लिया और
पूछा कि तुम कब छुट्टी आए तो मैने कहा भाई अब तो जाने का टाइम हो गया ट्रेन
है 4 दिन बाद की वो बोला क्या यार मैं आज आया और तूने जाने की तैयारी कर दी
मैने कहा कोई बात नही भाई तू तो समझता है ना फोर्स के रूल को तो वो बोला हाँ
भाई तो मैने उसका आधा सामान उठा लिया और उसके घर की तरफ चल पड़े
अच्छा लगा उसको देख कर थोड़ी देर मे उसके घर पहुचे तो उसने घंटी बजाई
जैसे ही दरवाजा खुला सामने के बेहद ही मस्त औरत दिखाई दी मैं उसको जानता
नही था तो मैने कहा भाई ये कॉन है तो उसने कहा पहले अंदर तो आने दे फिर
बता ता हू प्रीतम की माँ भी बाहर आ गयी और अपने बेटे को देखकर खुश हो
गयी मैं सोफे पर बैठ गया मिलने मिलाने के बाद उसने कहा कि ये तेरी भाभी
है तो मैने कहा कि अब तूने शादी कब करली हमे पता ही नही चला तो उसने कहा
कि भाई एक साल होने को है अब तेरा फोन नंबर तो था नही तो तुझे न्योता ना
दे पाया उसके लिए माफ़ कर्दे मैने कहा कोई नही भाई फिर उनके घर ही चाइ
नाश्ता किया मुझे वो पल याद आ गये जब मैं इसी घर मे प्रीतम को चोदा करता
था मैने पूछ ही लिया कि प्रीतम नही आई गर्मियो मे तो उसकी माँ बोली बेटा
उसको दूसरा बच्चा होने वाला है कभी भी हो सकता है तो अब तो बच्चा होने के
बाद ही आएगी मैने कहा ये तो खुशी की बात है तो प्रीतम की माँ बोली कि बेटा
अब तू भी शादी करले नौकरी भी मिल गयी तो मैने कहा एक बार पोस्टिंग मिले
तभी तो कुछ होगा मुझे उनके घर गये काफ़ी टाइम हो गया था तो मैने कहा
की चल भाई अभी मैं चलता हू बाद मे मिलेंगे और मैं घर आ गया
घर पे गरमा गरम खाना मेरा इंतजार कर रहा था तो आते ही पेट पूजा की मैने चाची और बुआ को बता दिया था कि आज मैं किसी से भी सेक्स नही करूँगा क्योंकि कई दिन हो गये थे मैं अच्छे से सो नही पाया था और फिर जैसे जैसे छुट्टी ख़तम होती जा रही थी मैं थोड़ा सा परेशान होने लगा था तो उन्होने भी मुझे फोर्स नही किया मैं डिन्नर करके अपने कमरे मे चला गया मेरी आँख लगी ही थी कि तभी मिथ्लेश का फोन आ गया आँखो को मलते हुए मैने फोन उठाया और हेलो कहा
मिटा: आज तुमने फोन क्यो नही किया
मैं: यार आज बहुत ही बिज़ी था ट्रेन मे रिज़र्वेशन टाइम से नही करवाया तो अभी थोड़ी दिक्कत हो गयी है
मिता: अरे यार तुम कभी कोई काम टाइम पर करते ही नही हो
मैं: अरे यार ध्यान ही नही रहा अभी देखते है
मिता: यार मैं सोच रही हू कि तुम्हारे साथ देहरादून चलूं फिर वही से शिमला निकल जाउन्गि
मैं: पर डार्लिंग तुम तो बाद मे जाने वाली थी
मिटा: अब मैं तुम्हारे साथ आ रही हू तो कोई प्राब्लम है क्या
मैं: अरे नही यार ऐसी बात नही है तुम साथ आओगी तो सफ़र भी अच्छा कट जाएगा और हम थोड़ा टाइम और साथ बिता सकेंगे
मिता: तो ठीक है मैं रीना को भी बता दूँगी आख़िर वो भी तो मेरे साथ ही जाएगी ना
मे: हाँ ठीक है
मिता: क्या बात है आज कुछ उखड़े उखड़े लग रहे हो
मे: नही यार ऐसी कोई बात नही है पता नही आज कल अजीब सा लगता है
मिता: शायद वापिस जाने का टाइम आगया इसलिए
मे: अब मैं क्या कहूँ पर जाना तो पड़ेगा ही ना अब अपनी ज़िंदगी ही ऐसी है आज यहाँ कल कही ऑर पर तुम आदत डाल लो मेरे बिना रहने की वरना कल को कहोगी कि फोजी से ब्याह करके मैं तो पछतायी
मिता: वह तुम तो ऐसे कह रहे हो कि जैसे मैं हमेशा से ही तुम्हारे साथ रही हू
मे: यार तू तो हर पल मेरे साथ है जब से तुझे पहली बार देखा था तब से आज तक हर पल मैने अपने पास महसूस किया है हर पल हर लम्हा बस तुझे ही महसूस करता हू जब तुम दूर होती हो तो मैं ही जानता हू कि कैसे एक एक लम्हा काटा है तेरे बिन
मिता: अब मैं मेरा हाल किसको बताऊ
मे: मैं हू ना
मिता: यार मैं सीरीयस हू और तुम्हे मस्ती सूझ रही है जाओ मैं नही करती बात
मे; अच्छा बाबा
मिता: यार आज माँ कह रही थी कि अब मिता के लिए भी कोई लड़का देख ही लेना चाहिए
मे: तो उनको मेरे बारे मे बताना था ना
मिता: ना बाबा ना
मईटा: मेरी हिम्मत नही होती है मेरे घर वालो को तो तुम जानते ही हो अगर पता चलेगा कि चोरी प्रेम करे से तो मेरी जान ही ले लेंगे
मे: पर तेरी जान तो मैं हू
मिता: बी सीरीयस
मे:ओके ओके
मिता: यार क्या हमारी शादी हो पाएगी
मे: क्यो नही होगी अगर हमारा प्यार सच्चा है तो हम ज़रूर एक होंगे
मिता: पर ये सब होगा कैसे
मे: एक बार मुझे पोस्टिंग मिलने दे फिर आउन्गा तेरे घर तेरा हाथ माँगने बस तू मेरा साथ देना बाकी मैं संभाल लूँगा
मिता: अगर घर वालो ने मना कर दिया तो
मे: वो भी देखेंगे
ऐसे ही हम दोनो काफ़ी देर बात करते रहे जब फोन कटा तो रात का एक बज रहा था मैं उठा और पानी पीने के लिए नीचे आ गया मैं पानी पीकर जा ही रहा था कि मेरी नज़र बुआ के कमरे मे पड़ी तो मैने देखा कि उनकी नाइटी उनकी कमर तक उठी पड़ी है और लाल रंग की पैंटी क्या खूब फॅब रही थी उनके गोरे चुतड़ों पर मेरा हाथ अपने लंड पर चला गया और मैं उसको सहलाने लगा मैने अपना कच्छा नीचे सरकाया और बुआ के पास जाकर लेट गया और उनको अपनी बाहों मे लेके जगाने लगा
बुआ ने अपनी अधखूली आँखो से मुझे देखा और बोली दूर हट मुझे सोने दे तो मैं उनकी चूत को मसालते हुए बोला बुआ बस अभी जल्दी से कर लेते है फिर सो जाना तो वो बोली कोई टाइम होता है सेक्स का भी अभी क्यो मेरी नींद खराब कर रहा है बुआ बोली कि अभी टाइम देख एक काम कर अभी तू भी मेरे पास ही सोजा मैं सुबह उठते ही तुझे दे दूँगी तो मैने कहा ठीक है जैसे आपकी मर्ज़ी और उनको अपनी बाहों मे लिए लिए ही सो गया
मैं गहरी नींद मे सो रहा था कि किसी ने मुझे झींझोड़ कर उठाया तो मैने अधखूली आँखो से देखा तो अनिता भाभी खड़ी थी उन्होने कहा अब कितना सोओगे चलो उठ भी जाओ बाजार नही चलना है क्या तो मैने काहा बाजार का क्या काम है भाभी तो वो बोली भूल गये क्या कल तो खुद ही मुझे तैयार किया था और अभी मुझ से ही पूछ रहे हो तो मैने कहा ज़रा रूको आप और अपने होश को संभालने लगा गुलाबी कलर की साड़ी मे भाभी तो गजब लग रही थी मैने कहा भाभी आप तो कयामत लग रही हो आज तो वो बोली क्या तुम भी उठते ही सुरू हो गये चलो अब फटा फट से रेडी हो जाओ फिर चलते है तो मैं उठा और बाहर आ गया बुआ बाथरूम मे अपने कपड़े धो रही थी तो मैने कहा बुआ आपने सुबह मुझे क्यो नही जगाया तो उन्होने कहा कि मैने जगाया था पर तुम उठे ही नही तो मैं क्या करती मैने कहा अच्छा अभी आप बाहर आ जाओ मुझे नहाना है तो उन्होने कहा कि वो कपड़े धो रही है
मैं छत पर जाकर नहा लूँ तो मैने कहा जी अच्छा नहाने धोने और नाश्ता करने मे काफ़ी टाइम खराब हो गया था तो मैने बाइक निकली और मैं भाभी और साक्षी चल पड़े शहर की ओर भाभी मुझसे चिपक कर बैठी थी तो बड़ा ही मज़ा आ रहा था चूँकि छोटी गुड़िया भी थी तो मैं बाइक नॉर्मल स्पीड पर ही चला रहा था तो हम ऐसे ही बाजार पहुच गये और शुरू हो गयी खरीदारी ढेर सार खिलोने बच्ची की लिए खरीदे और फिर कुछ ड्रेससेस्स भी उसके बाद मैने कहा भाभी आओ तुम्हे कुछ दिखाता हू और मैं उनको उस दुकान पर ले आया जहाँ हम स्कूल टाइम मे समोसे और जलेबिया खाया करते थे दुकान वाला मुझे देखते ही खुश हो गया अब एक ये ही जगहा तो थी जहाँ मुझे भी स्पेशल ट्रीट मेंट मिला करता था पिस्ते वाला दूध और गरमा गरम जलेबिया खाकर भाभी खुश हो गयी कुछ जलेबिया घर के लिए पॅक करवाई मैने सोचा कि भाभी को भी कुछ गिफ्ट देना चाहिए तो मैने बाइक सुनार की दुकान की ओर मोड़ दी और भाभी के लिए एक चाँदी की चैन खरीद ली भाभी मना करती रही पर मैं कहा मान ने वाला था बाजार मे ही बहुत टाइम लग गया था तो मैने कहा भाभी और कुछ लेना है क्या उन्होने मना किया तो हम घर वापिस हो लिए
गरम लू के थपेड़े खाते हुए जब हम घर आए तो देखा कि मम्मी पापा
और चाचा भी आ गये थे मैने उनका हाल चाल पूछा तो पापा बोले कि बाजार
गया था तो तेरी बुआ जी को भी ले जाता वो भी अपनी पसंद के कपड़े खरीद लेती तो
मैने कहा पापा बुआ को कल शॉपिंग करवा दूँगा तो मम्मी बोली कोई बात नही
वो जाएँगी बुआ के साथ मैने कहा ओके पापा बोले कब जाएगा तू तो मैने कहा
परसो सुबह तो उन्होने कहा की पॅकिंग टाइम से कर लियो कही कुछ रह ना जाए
मैने कहा पापा बस आइ कार्ड ही मैंन चीज़ है बाकी जो पुराने कपड़े लाया था वो
तो मैं यही छोड़ जाउन्गा और बस एक बॅग ही ले जाना है वो बोले जैसा तुझे ठीक
लगे मम्मी मेरे सर पर हाथ फेरते हुए बोली कि बेटे अब कब आओगे तो मैनें
कहा कि जब भी तुम बुलाओगी तभी आ जाउन्गा फिर मैं अपने कमरे मे चला गया
अब चूँकि सारे लोग आ गये थे तो अब चूत मिलनी मुश्किल हो गयी थी तो मैं
सोचने लगा कि कैसे बुआ को रगडू क्योंकि चाचा आ गये थे तो आज तो वो ही
चोदेन्गे चाची को मैने इशारे से बुआ को पास बुलाया और पूछा तो वो बोली कि
प्रमिला ने तो मेरी लाइफ को एक अलग मोड़ पर ही ले जाकर खड़ी कर दिया था मेरा
लंड सरपट सरपट चूत मे अंदर बाहर होये जा रहा था करीब 10 मिनट तक
बुआ के उपर चढ़े चढ़े उनकी चुदाई करने के बाद मैने उनको फर्श पर
खड़ा किया और खड़े खड़े ही बुआ को चोदने लगा बुआ की चूत की चिकनाई बहुत
ही बढ़ गयी थी और कोई 12-13 मिनट बाद बाद मैं और बुआ साथ साथ ही झाड़
गये
चुदाई ख़तम होने के बाद बुआ ने फटाफट अपने कपड़े पहने और बिस्तर को ठीक किया ताकि किसी को भी कमरे को देख कर ये ना लगे कि रात भर कमरे मे घमासान मचा था कमरे की हालत ठीक करने के बाद बुआ ने कहा कि वो नीचे जा रही है और चली गयी मैं बाहर छत पर आकर टहलने लगा आज कई दिन बाद इतनी सुबह उठा था उगते सूरज को देखना बड़ा अच्छा लगा था मुझे कुछ देर बाद अंगड़ाई लेते हुए चाची भी अपने कमरे से बाहर निकल आई और मुझे देख कर बोली कि आज तुम सवेरे सवेरे ही उठ गये तो मैने कहा हाँ चाची फिर चाची फ्रेश होने चली गयी मैंन नीचे गया तो बुआ ने चाइ बना ली थी मैने चाइ पी
अब आज का दिन ही बचा था गाँव मे कल मुझे जाना था तो मन थोड़ा भारी सा होने लगा पर हमारे जैसो को तो एमोशन्स पर कंट्रोल करना पड़ता ही है खैर टाइम तो अपनी रफ़्तार से ही चलता है ना उसपे कहाँ किसी का ज़ोर चलता है कुछ तैयारिया करनी थी तो मैं उनमे जुट गया चाचा को बोल दिया था बाइक का रेजिस्ट्रेशन नंबर वो ले आए पॅकिंग शेकिंग मे दोपहर ही हो गयी थी सभी घरवाले थोड़ा सा सॅड सॅड हो रहे थे पर अपनी भी कुछ मजबूरिया थी 45 दिन जम कर ऐश ली थी वो दिन भी ऐसे ही गुजर गया एक बोझिल महॉल के साथ रात को मैने मिता को फोन किया तो उसने कहा कि ठीक है मैं तुम्हे टाइम पर बस स्टॅंड मिलूंगी फिर हम साथ ही निकलेंगे तो मैने उसको टाइमिंग बता दी और फोन काट दिया रात को फिर से बुआ जी के साथ जम कर घमासान मचाया अगले दिन मम्मी की आवाज़ से मेरी आँख खुली मुझे दस बजे निकलना था तो मैं बातरूम मे घुस गया और फटाफट तैयार होने लगा तैयार होके मैने फटाफट से नाश्ता पानी किया और फिर ताइजी के घर चला गया सब से मिलने साक्षी को थोड़ी देर खिलाया फिर वापिस आ गया अपना बॅग उठाया और सभी घरवालो से अब विदा लेने का टाइम आ गया था मम्मी बोली कि जैसे ही छुट्टी मिले तुरंत ही घर आना और जब भी टाइम मिले फोन ज़रूर करना तो मैने कहा जी ठीक है फिर थोड़ी देर बाद मैने सहर जाने के लिए टेंपो पकड़ लिया जब मैं बस स्टॅंड पहुचा तो मिता ओर रीना मेरा वेट ही कर रही थी मैने उनको कहा मैं अभी टिकेट लेकर आता हू तो रीना बोली भाई टिकेट मैने ले ली है फिर कुछ खाने पीने का सामान लिया और हम चल पड़े अपने सफ़र को मुझे हमेशा से ही बस का सफ़र बड़ा ही चूतिया लगा करता था पर अपनी डार्लिंग साथ होने से वो बोझिल सफ़र भी बड़ा प्यारा लग रहा था बस पूरी रफ़्तार से हाइवे पर दौड़ रही थी हम तीनो बाते करते हुए अपना टाइम पास कर रहे थे रास्ते मे पानीपत मे बस एक ढाबे पर रुकी हम सब फ्रेश हुए और कुछ खाया पिया और एक बार फिर उस थकाने वाले सफ़र का हिस्सा बन गये चंडीगढ़ पहुचते पहुचते रात के साढ़े 9 बज गये थे चंडीघर के बारे मे सुना तो बहुत था पर मोका आज मिला था देखने का सेक्टर 17 के बस स्टॅंड पर हम तीनो उतर चुके थे रात गहरा ही चुकी थी तो एक रेस्टोरेंट मे खाना खाया और फिर एक होटेल मे दो रूम ले लिए एक मेरे लिए और एक उन दोनो के लिए सफ़र की थकान थी तो पड़ते ही नींद आ गयी हालाँकि मैं थोड़ा टाइम मिथ्लेश के साथ बात करना चाहता था पर पिछली कुछ रातो से मैं ठीक से सोया नही था और फिर आज एक लंबा थकाऊ सफ़र भी किया था तो पड़ते ही नींद आ गयी अगली सुबह तैयार होने मे ही 9 बज गये थे मिता तो मेरे साथ चंडीघर घूमना चाहती थी पर मुझे शाम तक रिपोर्ट करना था तो मैने कहा डार्लिंग मेरे पास टाइम कम है वैसे तो चंडीगढ़ से देहरादून का सफ़र कोई ज़्यादा नही था पर अब रास्ते मे क्या हो जाए तो मैं कोई रिस्क नही लेना चाहता था मैने कहा तुम दोनो घूम लेना पर मैं अभी निकलूंगा तो मिता उदास होते हुए बोली कि यार तुम भी ना प्लान भी बनाया और कुछ मज़ा भी नही आया तो मैने उसका हाथ पकड़ा और कहा डार्लिंग मैं जल्दी ही शिमला आउन्गा फिर जी भर के घूमेंगे थोड़ा उसको समझाया तो मिता बोली ठीक है जब तुम जा ही रहे हो तो मैं और रीना भी शिमला ही निकल जाते है एक दूसरे के गले लगने के बाद हम ने अपनी अपनी बस पकड़ ली और चल पड़े अलग अलग रस्तो पर अपनी अपनी मंज़िल के तलाश मे बस मे मेरी आँख लग गयी होश जब आया जब कडक्टर ने जगाया और बोला भाई अब उतर जा तो अंगड़ाई लेते हव मैं बस से उतरा और सिटी बस पकड़ कर मिल्लिटरी अकादमी की ओर चल पड़ा एक बेहद ही गोरवशाली और गर्व से भरी इमारत का गेट मेरी आँखो के सामने खड़ा था यहा आते ही दिल से इक मीठी सी आह निकल पड़ी मैने सर को झटका और चल पड़ा गेट पर एंट्री करवाई फिर सीधा रिपोर्ट की कुछ सवाल जवाब हुए और फिर मैं अपने रूम मे पहुच गया साथ वाले भाइयो से दुआ सलाम हुवी कुछ घर की याद भी आ रही थी तो थोड़ी देर बाद मैं कॅंपस मे ही घूमने चला गया तो चिंकारा कॅंटीन मे एक अपना याडी बन गया था वो भी एक नंबर का चोदु था कई बार बता ता रहता था अपने किस्से तो मैं उसके पास चला गया शाम का टाइम था तो कॅंटीन मे इतनी भीड़ भी नही थी तो हम दोनो बाते करने लगे मैने कहा और भाई बता कुछ नया ताज़ा तो वो बोला भाई एक दो माल पे नज़र है एक तो कर्नल साहब की लड़की है इधर देहरादून से ही एमबीए कर रही है माल तो बड़ा ही चोखा है पर मैं तो ठहरा जवान मुझे तो क्यो घास डालेगी तू तो भाई कोई दिन मे एलटी हो जाएगा तू ट्राइ करले तो मैने कहा भाई मैं तो जानता ही नही पहले इंट्रो तो करवा तो वो बोला भाई तू डेली शाम को आया कर वो अक्सर शाम को ही कॅंटीन मे आती है तो मैने कहा यदि अब जब भी वो आए तो तू मुझे फोन करियो फिर देखते है क्या होता है एक नयी चूत के बारे मे सुनकर मेरे लंड मे भी खुजली होने लगी थी तो मैने कहा भाई उसकी माँ चोद और तेरी पुरानी वाली सेट्टिंग्स मे से ही किसी का जुगाड़ करवा दे तो वो बोला भाई जुगाड़ तो बहुत है इधर पर मेरी एक शर्त है तो मैने कहा हाँ भाई तू बता तो वो बोला कि भाई अपना सीधा सा हिसाब है एक हाथ दे इक हाथ ले तू मुझे दिलवा मैं तुझे तो मैने कहा भाई कोई माल फसि तो तेरा ध्यान भी रखूँगा पक्का प्रॉमिस अब उस चूतिए को कॉन समझाए कि वो खुद को चूत का शिकारी समझता था तो मैं तो उसका बाप था
एक दो दिन मे पूरा बॅच वापिस आ गया था तो अपनी धक्कम पेल शुरू हो गयी थी कुछ तो छुट्टी का आलस था कुछ चूत मारके टूटे पड़े थे तो इतनी हिम्मत ही नही होती थी कि ट्रैनिंग मे अव्वल दर्जे की पर्फॉर्मेन्स दे सके अक्सर ही पनिशमेंट मिलती ही रहा करती थी वो अलग हमारा मेजर जो हमारा ट्रैनिंग इनस्टरक्टर था वो हम कुछ 4-5 दोस्तो का ग्रूप था उसकी बॅंड बजाने मे ही लगा रहा करता था नाम था नागार्जुन मूर्ति चेन्नई का निवासी एक तो उसकी लॅंग्वेज समझ नही आती थी और उपर से गान्ड घिसाई भी ज़्यादा ही करवाता था दो हफ्ते से उसके कहर को झेल रहे थे हम सब दोस्त उसकी फालतू की पनिशमेंट से बेहद ही परेशान हो चुके थे हम सोच रहे थे कि कैसे उस से पीछा छूटे पर फोज मे अपना बस कहा चलता है चलता है तो बस चूतिया ऑफिसर्स का ऑर्डर
तो भाई लोगो मैं आ चुका था बेहद तंग एक दिन टाइम पे ड्रिल करने के बाद साले ने मार्क्स काट दिए तो मेरी खोपड़ी सतक गयी मुझे बहुत तेज गुस्सा आ रहा था मैने सोच लिया कुछ भी करके मेजर की गान्ड तो लाल करूँगा ही चाहे फिर सज़ा क्यो ना मिले 28 दिन क्वॉर्टर गार्ड ही क्यो ना काटना पड़े पर इसकी माँ चोदुन्गा तभी चैन मिलेगा तो मैं लगा मेजर की गान्ड तोड़ने के मौके मे पर भाई अपना नसीब भी इधर आकर कुछ ज़्यादा ही चूतिया हो जाता था खैर दिन कट रहे थे मेरी गान्ड मरते हुए एक दिन मैं कॅंटीन से शेव लोशन खरीद के आ रहा था शाम का टाइम था मेजर साहब सिविल ड्रेस मे एक औरत के साथ हंस हंस के बाते करते हुए पैदल ही स्विम्मिंग पूल की तरफ जा रहे थे मेरा माथा ठनका भाई अब इस चूतिए के साथ ये कॉन है तो मैं भी उनके पीछे पीछे चल पड़ा वहाँ जाकर पता चला कि ये तो साहब की मेम्साब है अब मुझे हँसी आ गयी हे भगवान ये तेरी कैसी लीला इस ढक्कन की बीबी ऐसी खूबसूरत बेहद ही गोरी जैसे दूध मे केसर का रंग घुल गया हो मैं तो देख के हैरान हो गया पूल साइड पर इतनी लोगो की भीड़ नही थी मेजर गोते मार मार कर नहा रहा था और मेम साबमुझे दिखाई नही दी शायद गयी होंगी चेंज वेंज करने तो मैने मोका देख कर मेजर की जेब से उसका आइडी कार्ड चुरा लिया और वहाँ से सरक लिया अब बजेगी पुँगी साले तूने बहुत खून पिया है अब साले तेरी माँ चुदेगि ये सोचते हुए मैं खुशी से पागल हुआ जा रहा था क्योंकि आइडी कार्ड अगर खो गया तो बंदे को क्वॉर्टर गार्ड मिलता है मैं आकर चैन की नींद सो गया अगले दिन सुबह से ही हमारी सुताई हो गयी आज मेजर साहब की जगह सूबेदार जसपाल सिंग हमारी एक्सर्साइज़ करवा रहे थे बड़े ही जिंदा दिल आदमी थे बड़ी ही इज़्ज़त करते थे लोग उनकी तो हमे भी मज़ा आ रहा था फिर 9 बजे नाश्ते मे दो गिलास चाइ और चार पूरी तोड़ने के बाद मैं सूबेदार साहब के पास गया और उनको प्रोटोकॉल देने के बाद पूछा कि आज साहब कहाँ गए तो उनको भी कुछ ज़्यादा पता नही था पर मुझे तो हुड़क चढ़ि थी मैं मेजर साहब के एक्सप्रेशन देखना चाहता था पर वो पूरा दिन आया ही नही अब इधर ना मुझे चैन ना उधर उसको चैन अगले दो दिन साहब के दर्शन ना हुए दो दिन बाद मुझे ट्रैनिंग मे फिर से सज़ा मिल गयी थी उसको पूरा करके जब तक मैं मेस पहुचा तो मेस भी बंद हो गया था मैं कुक के पास गया और बोला भाई जो भी पड़ा है तो दे दे तो वो बोला भैया अभी कुछ देर रुक जाओ तो मैं चाइ कॉफी या नाश्ता अरेंज कर सकता हू तो मैने कहा भाई पेट मे आग लगी है तू चाइ पिलाने की बात कर रहा है मैं पैर पटकते हुए वापिस आ गया आज पूरा दिन से भूखा था अब बिस्कुट से भूख थोड़ी ही ना मिट ती है तो मैं शॉपिंग सेंटर की तरफ चल पड़ा तभी मुझे ख़याल आया कि यार मेजर 3 दिन से दिखा ही नही कही साला टेन्षन टेन्षन मे कुछ कर ना ले और कही फिर इंकवारी हो गयी तो और भी पंगा हो जाएगा तो मैने सोचा मेजर अपनी माँ चुदाये उसको आइ कार्ड वापिस कर देता हू और क्या पता इसी बहाने से वो सज़ा देना भी बंद कर दे हल्का हल्का सा अंधेरा भी छाने लगा था सावन का मौसम वैसे चल रहा था तो मैं पैदल पैदल साहब की घर चल पड़ा घर क्या था ऑफीसर बंग्लॉ था घंटी बजाई तो मेम साहब ने दरवाजा खोला और मुझे सवालिया नज़रो से देखने लगी और मैं उन्हे हवस की नज़रो से देखने लगा फिर उन्होने मेरी तंद्रा तोड़ ते हुए पूछा कि एस किस से मिलना है आपको तो मैने कहा की मॅम मुझे मेजर साहब से मिलना है और अपना नाम बताया तो वो बोली कि यही रूको मैं आभी आती हू कुछ मिनट बाद उन्होने मुझे अंदर बुलाया और सोफे पे बैठने को कहा और खुद भी बैठ गयी मेरी नज़र उनसे हट ही नही रही थी पर प्रोटोकॉल भी देना पड़ता है फोज चलती ही चूतिया रूल पर है थोड़ी देर बाद मूर्ति सर भी आ गये थोड़े परेशान ही लग रहे थे पर मुझ से नॉर्मल ही बात की और एक कॉफी पिलाने के बाद आने का कारण पूछा तो मैने जेब से उनका कार्ड निकाला और कहा कि सिर मुझे ये कॅंपस मे मिला तो आपको देने आया हूँ आइ कार्ड देखते ही मेजर की आँखो मे चमक आ गयी उसने चैन की सांस ली और बार बार मेरा थॅंक यू करने लगा वो बोला कि तुमने मेरी बहुत मदद की है बताओ मैं तुम्हारे लिए क्या कर सकता हू मैं पूरे दिन से भूखा था तो मुँह से निकल गया कि सिर भूख लगी है थोड़ा खाना ही खिला दो तो मेम्साब जोरो से हँसने लगी और बोलो तुम बैठो मैं अभी तुम्हारे लिए कुछ लाती हू उनके घर दबा के मैने इडली डोसा खाया पर नज़र तो मेरी मेम्साब की मोटी मोटी चूचियो पर ही थी खाने के बाद मैने कहा सर अब मैं चलता हू सावन का महीना था तो बारिश के से आसार हो रहे थे तो सर ने एक बार फिर से मुझे थॅंक यू कहा और गेट तक छोड़ने आए
कुछ दूर ही आया था की हल्की हल्की बारिश शुरू हो गयी ठंडी ठंडी बूंदे मेरे चेहरे से होती हुवी मेरे तन बदन को भिगोने लगी बारिश का मज़ा लेते हुए मैं अपने होस्टल की ओर चले जा रहा था इधर नीचे पॅंट मे लंड जीने नही दे रहा था चूत दिलवाओ ऐसा शोर मचाए जा रहा था तो जाते ही मुट्ठी मारी तब जाके सांस आई पूरी रात बारिश हुवी थी तो अगली सुबा सब कुछ ताज़ा ताज़ा सा ही लग रहा था चहकते हुए पक्षियो की मधुर आवाज़े बड़ी ही अच्छी लग रही थी पर अपनी तकदीर मे कहाँ नज़ारे है अपनी तो सुबह होते ही गान्ड घसाई शुरू हो गयी थी तो भाई लोगो दिन ब दिन ऐसे ही काट रहे थे मुझे आए हुए बीस दिन के आस पास आ गये थे तो एक दोपहर को घर से फोन आया दूसरी तरफ चाची थी बड़ी ही चहक रही थी वो उन्होने शरमाते हुए बताया कि काम हो गया है इस बार उनकी डेट्स नही आई तो उन्होने प्रेगञेंसी टेस्ट किया है और वो पॉज़िटिव आया है तो मैने कहा ये तो बेहद ही खुशी वाली बात बताई है आपने मुझे सच मे बहुत ही खुशी हुवी थी फिर थोड़ी देर मम्मी से भी बात चीत कर ली और फोन काट दिया मैं सोचने लगा कल को जब चाची के जो भी बच्चा या बच्ची होगा उसको मैं भाई बहन कहूँगा या बेटा बेटी अब मैं तो कोंफूज़ हो गया पर फिर सोचा अपने को क्यो टेन्षन लेनी जो भी हो अच्छा ही है एक दिन सुबह की ड्रिल के बाद मैं नाश्ते के लिए जा रहा था तो तभी मूर्ति सर ने मुझे कॉल किया मैं सोचा अब क्या हो गया मैं दौड़ते हुए उनके पास गया तो उन्होने मुझे अपने ऑफीस मे आने को कहा मैं उनके साथ चला गया उन्होने मुझे एक टिफिन दिया और बोले कि ये मैं तुम्हारे लिए लाया हू आज तुम साउत इंडियन ब्रेकफास्ट करो मुझे तो यकीन ही नही हुआ कि ये साला मेरे पे कभी मेहरबान भी हो पाएगा बेहद ही टेस्टी इडली और नारियल की चटनी मज़ा ही आ गया मुझको तो दिन ऐसे ही मज़े लेते हुए कट रहे थे एक दिन कॅंपस मे बड़ा खाना हुआ तो पार्टी पूरे जोश मे चल रही थी मैंन भी दो पेग टिका दिए थे सभी ऑफिसर्स चाहे सीनियर हो या जूनियर अपनी अपनी फॅमिली के साथ आए हुए थे एक से एक माल घूम रहा था आस पास पर अपन को तो मुट्ठी मार कर ही सोना था तो मैने तीसरा पेग भी उठा लिया तभी मुझे अपना याडी दिख गया मैं उसके पास गया और बोला भाई आज तो लंड जीने ही नही दे रहा है आज तू कुछ जुगाड़ करवा भाई तो वो बोला भाई एक जुगाड़ तो है पर कुछ ख़ास्स नही है मैने कहा जो भी है अड्जस्ट तो करवा तो वो बोला आ मेरे साथ पार्टी मे ही उसने मुझे इक लड़की से मिलवाया लड़की तो क्या लड़की के नाम पे कलंक ही थी साली इतनी पतली जैसे ही बस अब हवा चली और अब वो उड़ी और आँखो पर नज़र का चश्मा उसको देख कर मैने सोचा कि यार कहाँ तो एक से एक माल को रगड़ दिया और कहाँ इसकी लेनी पड़ेगी तो मैने कहा भाई ये कही मर वर ना जाए तो वो बोला भाई एक बार इसके साथ जाके तो देख फिर कहना तो उसने मेरा इंट्रो उस लड़की से करवाया और सारा मामला सेट करवा दिया अब जगह की दिक्कत थी तो मैने आइडिया लगाया पास मे ही जॅंकयार्ड था जहा पुराने आर्मी वेहिकल्स पड़े थे तो वहाँ एक आर्मी बस भी खड़ी थी मैं सबसे बचते बचाते उस लड़की को उस बस मे ले गया