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ज़िन्दगी एक सफ़र है बेगाना complete

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खून का एक सैलाब सा उसके शरीर से फुट पड़ा, उस आदमी ने फ़ौरन फर्स्ट एड बॉक्स से डीटॉल लेकर कॉटन से उसकी कमर के घाव को सॉफ किया और ड्रेसिंग करदी, फिर उसने एक इंजेक्षन लेकर उस आदमी के कूल्हे पर लगा दिया.

इतना काम निपटा कर उसने अपने बाजू पर ध्यान दिया, उसके चेहरे पर पीड़ा के भाव अब सॉफ दिखाई पड़ रहे थे, उसने अपनी शर्ट उतार फेंकी, उसकी सफेद रंग के वेस्ट भी उस साइड से लाल हो चुकी थी.

उस शख्स ने एक और इंजेक्षन लिया और अपने कंधे के घाव के पास उसको थोड़ा-2 दो तीन जगह खुद ही इंजेक्ट कर लिया.

5 मिनट के बाद उसने वो खजर का फल डेटोल से सॉफ किया और अपने कंधे के घाव में उसकी नोक घुसेड दी.

मारे दर्द के उसका चेहरा लाल भभुका हो गया था, उसके होंठ कस चुके थे,

दर्द के बावजूद भी वो उसे घुसाए ही रहा और जब उसे कंधे के अंदर धसि बुलेट का आभास खंजर की नोक पर हुआ तो उसने दाँत भीच कर बुलेट को नोक से फसाया और बाहर उछाल दिया.

बुलेट निकलते ही उसने अपने अंदर ठहरी साँस बाहर छोड़ी और वो वहीं फर्श पर ही पसर गया.

इंजेक्षन के असर से अब उसका दर्द कुछ कम हुआ, तो उसने उठके अपने घाव को डेटोल से सॉफ करके बेंडेड लगा ली, और एक पेन किल्लर बिना पानी ही निगल ली.

फिर उसने उस घायल के हाथ पैर एक रस्सी से कस दिए और खुद एक हॉल जैसे कमरे में पड़े सोफे पर आकर लेट गया. उसकी आँखें बंद होने लगी थी.

ये फार्म हाउस शहर के एक बिल्डर कम रूलिंग पार्टी के लीडर हितेश पटेल का था, जो आजकल सेंट्रल गॉव ने उस लीडर से लीज़ पर ले रखा था, जिसकी चाबी आजकल इस शख्स के पास होती थी.

ये और कोई नही अरुण शर्मा था, जो आजकल एक पीएसयू में एक इंजिनियर है, और अभी-2 शहर में हुए टेरर अटॅक को असफल करके एक आतंकी को घायल करके यहाँ उठा लाया था, और तीन को उनके अंजाम तक पहुँचा चुका था.

जिस चौथे आतंकी ने गोलियों की बौछार उसके उपर की थी, लाख कोशिसों के बबजूद एक गोली कंधे में धँस ही गयी.

जब कुछ देर बाद अपने दर्द पर काबू पाने के बाद मैने सेल फोन के स्पेशल आइडी से एनएसए को फोन लगाया और सारी घटना को ब्रीफ किया,

हालाँकि न्यूज़ चेनलों से पूरे देश को पता चल चुका था की शहर में आतंकवादी घटना हुई है और पोलीस सरगर्मी से लापता आतंकी को ढूंड रही है.

मैने उनको बोल दिया कि शहर से पोलीस की नौटंकी को बंद कराओ नही तो कुछ गड़बड़ हो सकती है, भले ही दिखाबे के लिए करते रहें.

वो एक बंदा मेरी गिरफ़्त में है, अभी बेहोश है, होश में आते ही उसका ट्रीटमेंट शुरू करूँगा, फिर आपको रिपोर्ट देता हूँ.

इतना रिपोर्ट करके मैने फोन कट कर दिया.

रात गहरी होती जा रही थी, मुझे खाना भी खाना था, सो उस रूम को बाहर से लॉक करके, मे बाहर आया, गाड़ी में एमर्जेन्सी के लिए एक चादर जैसी पड़ी थी, उसे लपेटा और चल दिया घर की ओर.

रास्ते में पोलीस की सख़्त चेकिंग थी, मे किसी तरह से पोलीस को चकमा देकर जैसे तैसे अपने घर पहुचा,

शरीर की सॉफ सफाई की कपड़े चेंज किए और खाने के लिए निकल पड़ा.

होटेल में खाना ख़ाके कुछ और खाने की चीज़ें पॅक करके घर पर 6 घंटे की नींद ली, अपनी ड्रेसिंग अच्छे से करके फ्रेश होके ज़रूरी सामान लेकर अर्ली मॉर्निंग फार्म हाउस की ओर निकल पड़ा.

वहाँ जाकर देखा तो वो बंदा, होश में आ चुका था और उसकी कराहने की आवाज़ें स्टोर रूम के बाहर से ही सुनाई दे रही थी.

लॉक खोल कर अंदर गया तो वो वैसे ही पड़ा हुआ दर्द से कराह रहा था.

मे - क्यों बेटा, एक ही बार में इतना कराह रहा है, तुम तो लोगों को इससे भी कई गुना बड़े-2 घाव देते हो सोचो उनको कितनी पीड़ा होती होगी..?

वो सिर्फ़ नज़र चूरा कर पड़ा रहा, मैने उसको थोड़ा बहुत नाश्ता कराया और एक पेन किल्लर दी.

जब कुछ देर में उसका दर्द कम हुआ तो मे उससे बोला - क्यों प्यारे अब कुछ प्यार मुहब्बत की बातें हो जायें..?

उसने सिर्फ़ मुझे घूर कर देखा.. !

मे - तुम्हारा नाम क्या है और कहाँ के रहने वाले हो..?

उसने अपना नाम और शहर का नाम बतया जो कि यूपी के एक छोटे से कस्बे से था.

मे - तेरे साथ जो वो तीन थे उनके बारे में बता - तो उसने वो भी आसानी से बता दिए..जिनमें 1 और यूपी से था 2 वेस्टबंगाल से थे.

ये काम क्यों और किसके लिए कर रहे थे तुम लोग..?

मेरे इस सवाल पर वो चुप्पी लगा गया.

जब कुछ देर तक उसने कोई जबाब नही दिया, तो मैने उससे कहा –

देख भाई, मैने तेरी इतनी सेवा की, मलम पट्टी की, नाश्ता कराया, दर्द कम करने की दबा भी दी, तो अब तुम्हे भी तो मेरी कुछ मदद करनी चाहिए..! है कि नही.

वो - इस बारे में मुझे कोई जानकारी नही है, मुझे तो बस पैसे दिए इन लोगों ने और अपने साथ ले आए यहाँ.

मे - मेरी शक्ल पे चूतिया लिखा देखा है तूने..? इतनी बड़ी ऑटोमॅटिक गन कोई ऐसे ही पकड़ा देगा,

कि ले बेटा ! फिल्म की शूटिंग चल रही है, चला इसे लोगों की भीड़ में..!

देख भाई मुझे मजबूर मत करना, मे तुझे कष्ट देना नही चाहता, वैसे भी तू घायल है,

मुझे ज़्यादा कुछ नही करना पड़ेगा, तेरा घाव खुला छोड़ कर, ऐसे ही तुझे बँधा छोड़ दूँगा यहीं पर.

अब सोच जब बाहर के कीड़े मकोड़ो को तेरे खून की खुश्बू मिलेगी तो अपने आप दावत उड़ाने आ जाएँगे बिना निमंत्रण के.

और दो-तीन दिन में ही इसमें घर बना के बैठ जाएँगे. क्या बोलता है.. जाउ मे यहाँ से..?

 
मेरी दबी ज़ुबान में दी हुई धमकी से वो बुरी तरह डर गया, मौत की परच्छाई उसके चेहरे पर सॉफ सॉफ दिखाई देने लगी.

आनेवाली पीड़ा का एहसास होते ही, वो गिडगिडाते हुए बोला - प्लीज़ ऐसा मत करो..

वो लोग मुझे जान से मार देंगे, और तुम्हें भी नही छोड़ेंगे.

मे - तू मेरी चिंता छोड़, और सोच, अब्बल तो उनके फरिस्ते भी तुझे यहाँ से नही निकाल सकते, और अगर किसी तरह पहुँच भी गये, तो इस कष्ट से तो ज़्यादा कष्ट नही होगा ना तुझे.

और इसके उलट, अगर तूने मेरी मदद की तो हो सकता है, मे तुझे उनसे बचा के भी रख सकूँ.

अब तू खुद से सोचले, तेरे लिए क्या ठीक रहेगा ?

कुछ देर वो चुप रहा मैने भी उसको नही छेड़ा, लेकिन कुछ देर के बाद जो उसने बताना शुरू किया, उसकी बातें सुनकर मेरी आँखें चौड़ी होती चली गयी…

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अब्दुल सत्तार गनी आका गनी भाई…! पास के ही दूसरे शहर का नामी गिरामी बिल्डर, और विपक्षी पार्टी का जाना माना लीडर,

शहर के एक विशेष समुदाय बहुल्य इलाक़े में इसका आलीशान बंगला है,

पॉलिटिक्स और रियल एस्टेट के अलावा और भी इसके धंधे हैं, जिन्हें किसी भी सूरतेहाल में लीगल तो नही ठहराया जा सकता…जिनका मकड जाल दूसरे प्रांतों तक फैला हुआ था…

सुबह के 7:30 का समय था, गनी भाई की 30 वर्षीया खूबसूरत बेगम रुखसाना अपने लखते जिगर को स्कूल बस में छोड़ने के लिए बंगले के बाहर खड़ी बस का इंतेज़ार कर रही थी.

काले रंग के सलवार सूट में सर को एक मॅचिंग कलर के चमकीले दुपट्टे से ढके अपने बेटे की उंगली थामे खड़ी थी..

कि तभी वहाँ एक मारुति वॅन आकर झटके के साथ रुकती है और उसमें से दो आदमी उतर कर रुखसाना और उसके बच्चे की ओर झपटते हैं, और बच्चे को उसके हाथ से छीन कर उसे उठा लेते हैं.

अभी वो उस बच्चे को वॅन के अंदर बिठा ही रहे थे कि तभी एक 25-26 साल का नौजवान, जिसके चेहरे पर हल्की-2 दाढ़ी थी, आकर उन दोनो आदमियों से भिड़ जाता है,

मौका लगते ही सबसे पहले वो उस बच्चे को वॅन से बाहर निकालता है, तभी उन गुण्डों में से एक अपना चाकू उसके पेट में घुसेड देता है.

नौजवान घायल होते हुए भी उस बच्चे को उसकी अम्मी के हवाले करता है, और फिर से उन गुण्डों से भिड़ने के लिए पलटता है,

लेकिन प्रयास असफल होते देख वो गुंडे गाड़ी लेकर वहाँ से भाग जाते हैं.

नौजवान अपने पेट पर हाथ रखे दर्द से तड़पता हुआ घुटने टेक कर वहीं बैठ जाता है,

उसका सर स्वतः ही नीचे को झुकता चला जाता है, अभी वो गिरने ही वाला था कि दो जनाने हाथों ने उसको गिरने से रोक लिया.

इतने में वहाँ कुछ लोग और आ गये और उसको संभाल लिया,

कुछ लोगों ने उसको हॉस्पीटल ले जाने के लिए कहा तो उस ख़ातून ने परिस्थिति को समझते हुए उसे अपने घर लेजाना बेहतर समझा.

क्योंकि हॉस्पिटल तक जाने में काफ़ी खून बहने के चान्स थे सो वो लोगों के मदद से अपने बंगले में उसे ले गयी.

ज़ख़्म ज़्यादा गहरा नही था, सो घर में मौजूद फर्स्ट एड से उसके ज़ख़्म को सॉफ करके ड्रेसिंग कर दिया, वाकी लोग जा चुके थे वो नौजवान अभी भी सोफे पर लेटा हुआ था.

जब वो थोड़ा राहत महसूस करने लगा तो उसने उसके बच्चे के सर पर हाथ फेरा और पुछा- तुम ठीक तो हो बेटे..?

उस बच्चे ने हां में गर्दन हिला दी.

फिर वो ख़ातून बोली - आपका बहुत-2 शुक्रिया, आपकी वजह से एक अनहोनी होने से बच गयी, वरना ना जाने क्या हो जाता अगर आप वक़्त पर हमारी मदद नही करते तो,

आज एजाज़ के अब्बू भी शहर में नही हैं.

वैसे अपने रहनुमा का नाम जान सकती हूँ..?

असलम, नौजवान के सूखे से होठों से निकला, मे यहाँ से वॉक पे निकला था, कल शाम को ही मुंबई से आया था किसी काम के सिलसिले में.

कुछ देर और बातें होती रही फिर रुखसाना बेगम ने उसको चाइ नाश्ता ऑफर किया, उसको खाते-2 अचानक वो दर्द से कराह उठा..!

रुखसाना फ़ौरन अपनी जगह से उठके उसके पास पहुँची और उसकी शर्ट उतार कर ज़ख़्म चेक करने लगी.

थोड़ा सा खून उभर आया था उसकी ड्रेसिंग के उपर, उसने अपनी पहचान के डॉक्टर को फोन किया, और वो 10 मिनट में ही उसके घर आ गया.

डॉक्टर ने ड्रेसिंग खोल के चेक किया और इंजेक्षन वग़ैरह देके फिर से अच्छे से उसकी मलम पट्टी करदी.

रुखसाना उस नौजवान के चौड़े सीने और कसे हुए शरीर को देख कर प्रभावित हुए बिना नही रह पाई,

उसके मन में उस नौजवान के प्रति कुछ अजीब सी भावनाएँ पैदा होने लगी थी.

शौहर के काम और रुतवे के चलते, उसको अपने घर परिवार के लिए समय नही था, उपेच्छित बीबी अपनी जवानी को किसी तरह संभाले हुए थी,

लेकिन एक अर्धनग्न कसरती मर्दाना जिस्म देख कर उसकी चूत उससे तरह तरह के सवाल करने लगी.

टाइट सूट में कसे उसके पके दशहरी आम रस छोड़ने को व्याकुल दिखाई देने लगे.

वो उसके पास ही सोफे पर उससे सट कर बैठ गयी, और उसके ज़ख़्म को सहलाने के बहाने उसके बालों भरे सीने और पेट पर हाथ फिराने लगी.

नौजवान आँखें बंद किए हुए पड़ा था, वो उसकी भावनाओं को अच्छे से समझ चुका था.

रुखसाना धीरे-2 उसके उपर झुकती जा रही थी, सहलाते-2 उसके हाथ नौजवान के गले तक पहुँच गये, इस कारण उसे और ज़्यादा झुकना पड़ रहा था,

आख़िर वो लम्हा आ ही गया जब उसके कलमी आम नौजवान के सीने पर टिक गये,

उत्तेजनावस खड़े हो चुके निपल जैसे ही उसके कठोर सीने से लगे रुखसाना के मुँह से हल्की सी सिसकी निकल गयी.

नौजवान ने अपनी आँखें खोल कर उसको देखा तो वो उसकी आँखों में झाँक कर बोली - असलम मियाँ अब आपका दर्द कैसा है..?

वो - अब कुछ राहत महसूस कर रहा हूँ, और वो उठने की कोशिश करने लगा तो उसने उसके सीने पर अपना हाथ रखते हुए उसे लेटे रहने के लिए कहा.

रुखसाना - अभी आपका ज़ख़्म ताज़ा है, उठने की कोशिश मत करो, कोई काम है तो बोलो मे कर देती हूँ.

वो - मुझे टाय्लेट जाना था, ये सुनकर वो शरमा कर उसके पास से हट गयी, और वो उसे सहारा देकर वॉशरूम के दरवाजे तक लेगयि.

बाहर आकर वो नौजवान बोला - अब मुझे चलना चाहिए, कुछ अर्जेंट काम है जो निपटाने हैं.

रुखसाना- लेकिन अभी आपकी हालत तो ठीक नही है, ऐसी हालत में चलना फिरना ठीक नही है, कुछ देर और रेस्ट कर्लो ना.., लंच के बाद चले जाना.

वो - नही लंच में तो अभी बहुत वक़्त है, तब तक यहाँ क्या करूँगा, खमखा मेरी वजह से आपको तकलीफ़ उठानी पड़ेगी..!

रुखसाना - कैसी बातें कर रहे हैं आप, आपकी वजह से आज हम सही सलामत हैं, और आपके यहाँ रहने से हमें ही तकलीफ़ होगी..?

अब मे आपकी एक नही सुनूँगी, चलिए अब आप मेरे बेडरूम में चल कर पलंग पर आराम कीजिए बस.

 
इतना कहकर वो उसका हाथ पकड़ कर ज़बरदस्ती से उसे अपने बेडरूम तक ले गयी, और जाकर बेड पर बिठा दिया…

जब वो नौजवान पलग पर लेट गया तो वो फिर से उसके ज़ख़्म को सहलाने लगी, वो अपनी आँखें बंद किए लेटा रहा और उसके नर्म हाथों का लुफ्त उठाता रहा.

अब रुखसाना धीरे-2 अपना कंट्रोल खोती जा रही थी, और स्वतः ही उसके रसीले पतले-2 लिपीसटिक से पुते होंठ उस नौजवान के मर्दाने होठों पर टिक गये..,

नौजवान आँखें खोलकर बोला- ये आप क्या कर रहीं हैं ख़ातून, ये मुनासिब नही है, शादी-सुदा होके ये हरकत आपके लिए वाजिब नही है..

वो उसकी आँखों में झाँकते हुए बोली- और शादी-सुदा मर्द अपनी बीवी को छोड़ दूसरी औरतों के पास जा सकता है वो वाजिब है ?

ये कहकर उसने फिर से उसके होठ चूम लिए…. और बोली – जबाब दीजिए, क्या मर्द के लिए सब वाजिब है…?

नौजवान - कतई नही !! पर मे कैसे..? मेरा जमीर ये गवारा नही कर रहा..!

एक प्यासी औरत को यूँ अधूरे में छोड़ देना ये गवारा है आपको.. वो उसकी आँखों में झाँकते हुए बोली.

नौजवान – लेकिन बीवी ! मेरी हालत तो देखिए..? पेट फटा पड़ा है.. ऐसे में ये सब कैसे…?

रुखसाना - आप उसकी फिकर मत करो..! मे आपको कोई तकलीफ़ कैसे होने दे सकती हूँ, इतना तो सेन्स है मुझमें.

फिर वो उसके पास से उठकर एक बार दूसरे कमरे में अपने बच्चे को देखने चली गयी, जो इस समय मीठी-2 नींद में सो रहा था………!!!

वापिस आकर उसने बेडरूम को अंदर से लॉक किया और उसके बगल में आकर बैठ गयी,

रुखसाना ने उसके पेंट को उसकी टाँगों से बाहर निकाल कर एक साइड में रख दिया.

नौजवान का लंड, मिलने वाली चूत की सुगंध ले चुका था सो उसके मिलन की कल्पना मात्र से ही अंडरवेर को फाड़ देने की फिराक में था.

रुखसाना बेगम उसके लंड को अंडरवेर के उपर से ही पकड़ कर मसल्ते हुए बोली-

क्या कह रहे थे जनाब कि आपका जमीर गवारा नही कर रहा..!

वो उसकी आँखों में देखती हुई शरारत से हसके बोली - ये आपका जमीर तो लगाम तोड़ने पर आमादा है.. हैं !

नौजवान - इसको किसी के जमीर से कोई वास्ता नही, इसको तो बस कोई चूत दिखी नही कि हो गया शुरू जंग लड़ने को.

रुखसाना - कितनी जंग लड़ चुका है ये अब तक…? वैसे तुम्हारा ये सिपाही लग तो दमदार रहा है..!!

नौजवान - गिनती का क्या है रुखसाना बेगम, आप बस आम खाओ गुठलियों के मोल जानकार क्या करोगी..?

और फिर उसने उसके कुर्ते को उपर से निकाल दिया जिसमें रुखसाना ने उसकी पूरी-2 मदद की,

मासा अल्लाह ! क्या मस्त सुडौल दूध जैसी फक्क गोरी चुचियाँ थी उसकी, उसका शरीर लाल कश्मीरी सेब जैसा गोरी रंगत लिए था,

एक दम मस्त कश्मीरी माल, भरा भरा सीना, पके आम जैसे लग रहे थे उसके बूब्स, मानो हाथ लगते ही रस से छल-छला पड़ेंगे.

रुखसाना अपनी पाजामी भी उतार कर पेंटी में ही उसके अंडरवेर में क़ैद लंड के उपर अपनी चूत को रख कर बैठ गयी,

नौजवान ने उसके दोनो आमों को ब्रा के उपर से ही अपने हाथों में भर लिया और पूरा दम लगा कर उनका रस मथने में जुट गया.

रुखसाना सिसकी भरते हुए उसके कड़क अकडे हुए सख़्त लंड पर झूला झूलने लगी,

उसने अपना एक हाथ लेजा कर उसके लंड का रुख़ उपर को कर दिया और अपनी चूत की फांकों को उसकी मोटाई पर रख कर आगे-पीछे होने लगी.

लंड की मोटाई ने उसकी फांकों को फैला दिया था, मज़े के आलम में दोनो की आँखें मूंद गयी…

साला इतना मज़ा तो अंदर डाल कर भी नही आता होगा, नौजवान का सुपाडा जब अंडरवेर के कपड़े से रगड़ता तो उसके पूरे शरीर में झंझनाहट फैल जाती.

दोनो ही मज़े की खमरी में सिसक रहे थे,

आअहह……सस्सिईईईईईई….ईसस्शह…उउउफफफ्फ़…की आवाज़ों से कमरे का वातावरण गूज़ रहा था.

कुछ देर उपर से ही रगड़ने के बाद रुखसाना ने अपनी पेंटी को एक साइड में सरका दिया…और अपनी उंगलियों के इशारे से अपनी चूत के मोटे-मोटे होठों को थोड़ा सा फैला दिया…

अब उसका लंड अंडरवेर के बावजूद भी वो और अच्छे से फील कर रही थी…

घुटने टेक कर अब वो और तेज़ी से अपनी गान्ड को आगे पीछे पूरी लंबाई में घिसने लगी… उसकी सिसकियों से माहौल में गरमी बढ़ाने लगी…

आआहह….ईीइसस्स्स्शह….उउफफफफ्फ़…..आस्सालामम्म…आईईई…आममि…

आखिकार रुखसाना की चूत जबाब दे ही गयी और उसकी चूत ने गरमागरम रस छोड़ दिया, वो भल-भला कर झड़ने लगी.

उसकी पेंटी उसी के चूत रस से सराबोर हो गयी और उसने उस नौजवान के अंडरवेर को भी भिगो कर तर कर दिया.

नौजवान - बीवी.. ! अब और नही रुका जाएगा मुझसे, ये कहते हुए उसने उसकी ब्रा भी झटके से खोल दी, और अपना अंडरवेर निकाल कर लंड अपने हाथ में लेकर मसलने लगा.

रुखसाना - अरे रूको तो जनाब ! ये बाँदी कब काम आएगी, तुम्हें तकलीफ़ उठाने की कोई दरकार नही है..

रुखसाना ने अपनी पेंटी को लगभग फाड़ ही डाला, और अपने से दूर फेंक दी मानो वो उसकी बहुत बड़ी दुश्मन हो.

फिर उसने जैसे ही उस नौजवान का लंड हाथ में लिया वो चोंक गयी..!

तुम मुसलमान नही हो..?

नौजवान - हकबकाते हुए..! आ..आ ऐसा क्यूँ कह रही हो..?

ओह्ह्ह…तो ये बात है..

फिर उसने बात संभालते हुए कहा.. मेरा ख़तना नही हुआ इसलिए आपको लगा ऐसा.. है ना,,!!

रुखसाना - हां..! लेकिन क्यों नही कराया..??

नौजवान - दरअसल मेरे पैदा होने के समय ही मेरे अम्मी-अब्बू एक आक्सिडेंट में मारे गये, पड़ोस की एक हिंदू फॅमिली ने मुझे पाला है..

रुखसाना - ओह ! आइ आम सॉरी!

नौजवान - कोई नही.. बहुत लोग धोखा खा जाते हैं इसे देख कर, पर एतबार रखो, मज़ा पूरा देगा.. ट्राइ करके देखो ..

रुखसाना ने हंसते हुए एक बार उसके फौलादी लंड के सुपाडे को चूमा, और फिर उसको अपनी तर-बतर चूत के मुँह पर रखकर उसके उपर बैठती चली गयी..

अब जोश-2 में बैठ तो गयी… लेकिन उसके मुँह से एक लंबी सी चीख भी निकल गयी…

हाअईई…आलल्ल्लाअहह….. मर गाइिईई…. कितना मोटा है ये.. आयईयी.. लंबा भी…

मेरी चूत के परखच्चे उद्दा डीईए… मुएं ने…

आअहह…सीईईईईईईईईईई… अब मज़ा भी बहुत देगाअ…. उउफफफ्फ़…आअहह…

और फिर वो बरसाती मेढक की तरह फुदकने लगी उसके लंड के उपर,

उस नौजवान की तो मज़े से आँखें ही नही खुल पा रही थी,

उसने रुखसार को थोड़ा झुका कर उसके आमों को बारी-2 से चूसने लगा और उनमें से रस निकालने की कोशिश करने लगा.

उसने एक बार उसके निप्पलो को ज़ोर से मरोड़ दिया.. रुखसार का मुँह खुला रह गया और वो सीने को और आगे उभार कर उसकी जाँघो पर अपनी गान्ड को रगड़ने लगी.

अब दोनो का मज़ा अपने चरम पर पहुँच चुका था रुखसाना अपने घुटनों पर आ गई, और उस नौजवान ने उसके पपीतों को हाथों मे कस लिया.

अपने ज़ख़्म की परवाह ना करते हुए, नीचे से उसने इतनी तेज़ी से अपनी कमर चलाई कि रुखसाना किल्कारियाँ मारती हुई फिर से एक बार फल-फला कर झड़ने पर मजबूर हो गयी,

उसके कुछ ही पलों बाद उसके नाग ने भी फुफ्कार मारी, और उसके बिल को अपने जहर से भर दिया.

घायल आदमी के साथ इतनी जबरदस्त चुदाई भी हो सकती है, ये आज देखने को मिला था रुखसाना को,

उसका रोम-2 पुलकित होने लगा था. लेकिन उस नौजवान का ज़ख़्म फिर से रिसने लगा.

वो नीचे उतरी और फिर तन मन से उसकी सेवा में जुट गयी.

उसके बाद उसके ज़ख़्म की अच्छे से ड्रेसिंग करदी, और अपने कपड़े पहन कर किचेन में चली गयी,

 
पूरे तन मन से उसके लिए खाना तैयार किया.

दोपहर ढले वो नौजवान उसके होठों का रस्पान करके फिर से मिलने का वादा करके उसके बंगले से चला गया.

रुखसाना को ना जाने कितनी मुद्दतो के बाद एक सुकून भरा लम्हा मिला था,

वो तो अब हर वक़्त उन्ही पलों में खोई अपने आप में कुछ गुनगुनाती फिर रही थी,

वो उस नौजवान के लंड की ऐसी दीवानी हो गयी, कि हर पल उसके आने की आहट उसके मन में लगी रहती थी.

उसका शौहर जब रात को आया तो उसने वो सुबह का वाक़या उससे बयान किया, तो वो भी उस नौजवान से मिलने के लिए उतावला दिखाई देने लगा.

लेकिन अब गनी भाई को अपने लखते जिगर की जान की परवाह भी होने लगी थी, पता नही कौन गुंडे थे,

फिर से कोई ऐसा वाकीया ना हो, इसलिए उसने उसी वक़्त अपने चमचो को फोन लगाया और एक हट्टे-कट्टे पहलवान सरीखे आदमी को उसकी देख रेख के लिए लगा दिया.

दूसरे दिन से ही वो शख्स उसके बच्चे के साथ साए की तरह रहने लगा, जब तक वो स्कूल में रहता, वो उसका गेट पर इंतजार करता.. अपने साथ ले जाता और अपने साथ ही लेकर आता.

एक हफ़्ता गुजर गया, लेकिन उस नौजवान की शक्ल तक देखना नसीब नही हुआ रुखसाना बेगम को,

वो बेचारी उसके इंतेज़ार में खाना पीना भी भूल गयी थी.

फिर जब वो एक दिन शाम को किसी काम से बाज़ार गयी, तो उसे वो नौजवान एक रिक्शे के पास खड़ा दिखाई दिया.

वो फ़ौरन तेज कदमों से चल कर उसके पास तक गयी और पीछे से उसको आवाज़ दी.

उस नौजवान ने जब मूड कर उसे देखा तो रुखसाना का मुरझाया हुआ चेहरा सामने था.

नौजवान - अरे ख़ातून आप… यहाँ..?

रुखसाना - लौटे ही नही फिर… !! इतनी बेरूख़ी का सबब ..!

नौजवन् - इसे बेरूख़ी नही मेरे जमीर की आवाज़ कहिए..! मे ये कतई बर्दास्त नही कर सकता कि मेरी वजह से किसी इज़्ज़त दार औरत पर कोई उंगली उठाए.. बस यही सोच कर नही आया..!

रुखसाना - जानते हैं एजाज़ के अब्बू कितने बैचैन थे आपसे मुलाकात के लिए.

नौजवान - अच्छा ! आपके शौहर मुझसे मिलना चाहते थे..?

रुखसाना - हां ! जब मैने वो वाकिया उनके सामने बयान किया तो वो भी आपसे मिलने को बेकरार हो गये…

लेकिन जनाब तो ईद के चाँद हो गये. अब और बहाने ना बनाइए, चलिए हमारे साथ..!

वाकी की बातें वहीं होती रहेंगी, और इतना कहकर वो जाने के लिए पलटी, जैसे उसको पता ही हो कि वो उसके पीछे -2 आएगा ही.

नौजवान - अरे बी ! सुनिए तो..! वो तुरंत पलटी अब उसके चेहरे पर सवालिया निशान दिख रहे थे..!

देखिए बुरा मत मानिए, लेकिन अब में आपके घर पर आपसे नही मिल पाउन्गा.

अगर आपको मुझसे मिलना ही है, तो कहीं दूसरी जगह मिल सकते हैं.

रुखसाना - वो क्यों भला..? मेरे घर पर आपको कोई ख़तरा है..?

नौजवान - मुझे मेरे ख़तरे की परवाह नही है, मे तो बस आपकी परवाह कर रहा हूँ,

देखिए आज नही तो कल लोग बातें शुरू कर देंगे, आपके शौहर का रुतवा खराब ना हो इसलिए.. बस और कुछ नही.

रुखसाना को भी लगा कि ये उसकी परवाह कर रहा है, इसलिए वो बोली- तो बताइए कहाँ मिल सकते हैं..?

नौजवान - कल आप कितने बजे फारिग होगी..?

रुखसाना - सुबह 8 बजे से 2 बजे तक फारिग ही फारिग रहती हूँ.

नौजवान - तो फिर ठीक है, कल 9 बजे आप मुझे बाइपास जाने वाले मोड पर मिलिए, और इतमीनान रखिए मे आपको रुसवा नही होने दूँगा.

रुखसाना - अरे ये कहने की ज़रूरत नही है, मुझे आप पर एतवार है. मे ठीक 9 बजे आपसे मिलती हूँ, लेकिन 2 बजे तक मेरे घर छोड़ देना. ओके. बाइ.

नौजवान - बेशक..!

और बाइ करके वो दोनो अलग-2 दिशा में बढ़ गये.

दूसरे दिन सुबह 9 बजे वो नौजवान शहर से हाइवे की ओर जाने वाले एक चार रास्ते के पास खड़ा, रुखसाना का इंतजार कर रहा था.

चन्द पल ही गुज़रे होंगे कि वो काले बुर्क़े में एक रिक्शे से उतरी और उसकी ओर बढ़ी.

नौजवान – बहुत देर करदी हुजूर आते-2..?

रुखसाना - सॉरी थोड़ा लेट हो गयी, पर ज़्यादा नही.. देखो सिर्फ़ 10 मिनट ही उपर हुआ है.. चलो कहाँ चलना है..?

वो दोनो पास में खड़ी एक कार में बैठ गये और कार हाइवे की तरफ जाने वाले रास्ते पर चल पड़ी.

रुखसाना - हम कहीं शहर से बाहर जा रहे हैं..?

नौजवान - इतमीनान रखो, आज मे आपको ऐसी जगह ले चलूँगा, जहाँ सिर्फ़ और सिर्फ़ हम दो ही होंगे, और जिंदगी का मज़ा लूटेंगे.. बस.

और फिर उसने हाइवे पर टर्न लेकर कार को स्पीड दे दी, कार अब हवा से बातें कर रही थी.

ऐरो-डाइनमिक शेप कार 140-150किमी की स्पीड से दौड़ रही थी, वो आपस में रोमॅंटिक बातें भी कर रहे थे.

नौजवान का एक हाथ रुखसाना की गुदाज जांघों को सहला रहा था और रुखसाना का एक हाथ उसके लंड पर रखा था, जिसे वो अपने हाथ से सहलाती जा रही थी.

कोई 25-30 मिनट में ही वो दूसरे बड़े शहर के बाइपास पर थे,

जब वो शहर भी पीछे छूटने लगा तो रुखसाना ने फिर पुछा- अब हम और कितनी दूर जाएँगे ? सारा वक़्त तो रास्ते में ही निकला जा रहा है.

नौजवान - अभी घर से चले आधा घंटा ही हुआ है मोहतार्मा..! बस पहुँच ही गये,

और इसी के साथ ही गाड़ी एक टर्न लेकर दोनो तरफ से घने पेड़ों से घिरे एक सिंगल रोड पर दौड़ने लगी.

जब गाड़ी रुकी तो ये एक फार्म हाउस का गेट था जो घने जंगल के बीच बनाया गया था...

गाड़ी को फार्महाउस के पीछे खड़ी करके, वो दोनो पिच्छले गेट से ही अंदर दाखिल हुए.

फार्महाउस अंदर से किसी बंगले से कम नही था. रुखसाना देख कर खुश हो गयी, वहाँ पड़े सोफे पर पसर कर उसने एक लंबी साँस छोड़ी.

रुखसाना - तो यहाँ मस्ती करनी है, नोट बॅड चाय्स हां..! आइ रियली ग्लॅड नाउ..!

नौजवान - आपको पसंद आई जगह ..?

रुखसाना - बहुत..! और सबसे बड़ी बात हमें यहाँ कोई डिस्टर्ब करने वाला भी नही है.

लेकिन असलम, ये ख़याल रहे, दो बजे तक मुझे घर पहुँचना है हर हाल में.

नौजवान - बेशक ! अभी तो 10 भी नही बजे..! हमारे पास तीन साडे तीन घंटे हैं एंजाय करने के लिए, और फिर वो उसके बाजू में बैठ गया…

उसने रुखसाना की मांसल जांघों को सहलाते हुए उसके लाल रसीले होठों को चूम लिया…

ना जाने कैसी कशिश थी इस नौजवान के मर्दाना शरीर की, रुखसाना अपने सारे रुतवे, लिहाज़ छोड़कर उसकी बाहों में समा गयी.

मास्टर सोफे पर दोनो एक दूसरे में खोते चले गये, ना जाने कब उन दोनो के कपड़े बदन छोड़ कर फर्श पर बिखर गये…

 
दोनो के बदन पर मात्र 4-4 अंगुल के अंडरवेर ही बचे थे…जो उनके विशेष पार्ट को भी बमुश्किल छुपाने में असमर्थ हो रहे थे…

वो उसके आमों को अपनी मुत्ठियों में भरकर, उसके होठों से रस निचोड़ने लगा…

फिर उसने , रुखसाना को सोफे पर बिठाकर, खुद उसके नीचे उसकी टाँगों के बीच घुटने टेक कर बैठ गया…

उसकी छोटी सी पेंटी को एक तरफ करके उसने अपनी जीभ से जैसे ही उसकी चूत के मोटे-मोटे होठों पर फिराया…

रुखाना आअहह….करते हुए अपनी कमर को हवा में उठाए उसके मुँह में अपनी चूत को घुसने में लग गयी…

वो उसके सर के बालों में अपनी उंगलियाँ फँसा कर उन्हें मुट्ठी में भरते हुए बोली –

आआहह…..आ..स..लामम्म्म…खाज़ाऊओ…ईससीए..उउउफफफ्फ़….आअम्म्मिईिइ…..हइईए….ईसस्शह…. करती हुई…वो अपनी कमर हवा में लटकाए ही इधर से उधर मटकाने लगी…

नौजवान ने उसके क्लिट को अपने दाँतों में दबा कर अपनी दो उंगलियाँ उसकी चूत में डालकर ज़ोर ज़ोर से अंदर बाहर करने लगा…

रुखसाना ने शायद ही इतना भयंकर अटॅक अपनी चूत पर झेला हो पहले…

उत्तेजना में उसकी गले की नसें तक फूलकर कर उसके फक्क गोरे रंग में किसी नीली ट्यूब जैसी दिखने लगी…

कुछ ही देर में हाए-हाए करते हुए वो झड़ने पर मजबूर हो गयी…

और उसने अपनी दोनो टाँगों को उठाकर नौजवान के गले में लपेटकर उसके मुँह को अपनी चूत के मुँह पर बुरी तरह से कस लिया और फल्फला कर झड़ने लगी….

जब उसका झड़ना पूरी तरह से बंद हुआ तब जाकर उसने उसे मुक्ति दी…और धीरे -2 अपनी चौड़ी चकली गान्ड सोफे पर लॅंड कराई…

उसके हटते ही, नौजवान ने लंबी साँस ली, जो वो उसे इतनी देर से लेना ही भूल गया था, या यूँ कहें कि बेचारा ले नही पाया था…

उसका मुँह उसके चूतरस से भीग गया था, जिसे देखकर रुखसाना मुस्करा उठी, और झपट कर किसी भूखी बिल्ली की तरह उसके होठों पर टूट पड़ी,

उसके बाद उसने नौजवान को सोफे पर खींच लिया, खुद नीचे बैठ कर उसके अंडरवेर को निकाल दिया और उसके गरम सख़्त रोड जैसे लंड को अपनी मुट्ठी में कस कर बोली….

कमाल का मज़ा देते हो मियाँ, सच में ऐसा मज़ा पहले कभी नही मिला मुझे…

फिर उसके लंड को आगे पीछे करते हुए उसकी आँखों में देखते हुए बोली – अब मेरी बारी है, इसे मज़ा देने की,

ये कहकर उसने पहले उसके लंड को चूमा, और फिर उसके सुपाडे को चाटकर अपने मुँह में भर लिया…

अब तड़पने की बारी उस नौजवान की थी.. रुखसाना उसके लंड को पूरी लंबाई तक लेकर चूस रही थी,

साथ साथ वो उसकी गोलियों को भी सहला देती, जिससे उसके मज़े की वजह से उसका बुरा हाल बहाल था…

उसने रुखसाना के आमों को अपने हाथों में लेकर ज़ोर्से मसल दिया, और साथ ही अपनी कमर को उठाकर अपना लंड पूरी ताक़त से उसके मुँह में पेलने लगा…

रुखसाना को अपनी साँस अटकती सी महसूस हुई, तो उसने अपने हाथ उसके पेट पर जमाए, और उसका लंड अपने मुँह से बाहर निकल कर शिकायती नज़रों से उसे घूर्ने लगी…

उसका लंड फटने की सीमा तक फूल चुका था, अब उससे एक सेकेंड का इंतेज़ार भी असहनीय हो रहा था, सो उसने रुखसाना की बगलों में हाथ डालकर उसे सोफे पर पटक दिया..

और खुद उसकी टाँगों को उपर करके चूत के मुँह पर लंड टीकाया और एक भरपूर धक्का जड़ दिया…

एक ही झटके में उसका पूरा 8” से भी तगड़ा लंड उसकी चूत में समा गया…

रुखसाना के मुँह से चीख उबल पड़ी…लेकिन….

वो भी बहुत गर्म औरत थी, वो इस सुलेमानी झटके को भी झेल गयी…

फिर जब चुदाई का दौर शुरू हुआ तो वो चलता ही रहा, नौजवान ने उसकी सारी गर्मी निकाल दी,

अंत में जब उसने उसके पिछले गोल पोस्ट में गोल किया तब तो रुखसाना के फरिस्ते ही कून्च कर गये…

वो किसी तरह से उसके मूसल को अपनी गान्ड में झेल तो गयी, लेकिन उसके बाद उसकी गान्ड और चूत फुदक-2 करने लगे.

आज रुखसाना को तीनों छेदों में लंड के इस्तेमाल का पता चल गया था…

कोई 1 बजे से ही रुखसाना उसको चलने के लिए बोलने लगी, उन्होने फ़्रीज़ से निकाल कर एक-एक कोल्ड ड्रिंक पिया और वहाँ से निकले.

नौजवान ने अपनी रिस्ट वाच पर नज़र डाली और पिछले गेट को खोला.

 
गेट खोल कर जैसे ही उन्होने बाहर की ओर कदम बढ़ाया कि सामने दो लोगों को खड़ा देख कर उनके होश उड़ गये….!!

वे दोनो कोई और नही वही दोनो थे जिन्होने रुखसाना और उसके बच्चे पर उस दिन अटॅक किया था, उसके बेटे को किडनॅप करने के लिहाज से.

उन्हें देखते ही रुखसाना चोंक कर बोली - तुम लोग यहाँ..? और डर के मारे पलटकर वो उस नौजवान से लिपट गयी.

नौजवान उसके कंधों से पकड़ कर अपने से अलग करते हुए बोला - घबराओ नही रुखसाना बेगम, मे देखता हूँ और उन दोनो से मुखातिब हुआ –

तुम लोग यहाँ भी पहुँच गये..? आख़िर चाहते क्या हो..?

उनमें से एक बोला – वही जो तुमने लिया है इस हुश्न परी से..!

रुखसाना - क्या..? क्या मतलब है तुम्हारा..? क्या लिया है इन्होने मुझसे..?

दूसरा बंदा उसके कधे पर हाथ रखकर उसे सहलाते हुए बोला –

तेरा ये खूबसूरत बदन रानी..! आहह…कसम से क्या मस्त जवानी है तेरी,

अब ये मत कहना कि तुम दोनो यहाँ 3 घंटे से कोई रामलीला का शो चल रहा था, उसे देख रहे थे..!!

रुखसाना उस नौजवान की ओर देखने लगी, उसके शरीर में कंपकपि दौड़ने लगी थी,

वो नौजवान अपने खुसक हो चुके होठों पर जीभ से गीला करने की नाकाम कोशिश करते हुए आँखें फाडे बस उनकी ओर देखे जा रहा था.

रुखसाना - तुम कुछ बोलो ना आ.आ.असलम..!

नौजवान - म.म.मईए.. क्या बोलूं..? मेरी तो कुछ समझ में नही आ..आ रहा..? फिर वो कुछ हिम्मत जुटा कर उन दोनो की ओर मुखातिब हुआ –

आए.. देखो तुम लोग ये ठीक नही कर रहे, हम यहाँ ऐसा-वैसा कुछ नही कर रहे थे, ऐसे ही घूमने चले आए बस.

और फिर हम कुछ भी करें, उससे तुम लोगों को कोई सरोकार नही होना चाहिए समझे..! अब निकलो यहाँ से और हमें भी जाने दो लेट हो रहे है..!

पहला बंदा - ओये..डेढ़ सियाने… हम लोगो के साथ ज़्यादा सियानपट्टी नही, समझा क्या…., साले तूने उस दिन भी हमारा काम खराब कर दिया था, लेकिन आज नही,

चल पीछे हट और उसने उस नौजवान के सीने पर अपना हाथ रखकर उसको धक्का दिया, जिससे वो नौजवान थोड़ा सा पीछे को लडखडाया, फिर सम्भल कर आगे आकर उसके सामने तन के खड़ा हो गया.

नौजवान - तुम लोग ऐसे नही मानने वाले ये कहकर उसने उस बंदे का गिरेबान पकड़ लिया, तब तक साथ वाले ने अपनी गन निकाल ली, और उसकी कनपटी पर रखकर बोला-

लगता है तू सीधी तरह से नही मानेगा, हम नही चाहते थे कि यहाँ कोई खून खाराव हो पर अब लगता है सीधी उंगली से घी निकलने वाला नही है.

गन पॉइंट पर वो उसे पीछे धकेल्ता हुआ सोफे तक लाया और धक्का देकर उसे सोफे पर गिरा दिया, नौजवान के साथ-2 रुखसाना भी थर-2 काँप रही थी.

वो गन वाला बोला - अब चुपचाप बैठ कर हमारा खेल देख, ज़यादा चूं चपड की तो भेजा उड़ा दूँगा समझे..!

और अपने साथी से बोला ओये भाई चल शुरू कर खाली-पीली टाइम वेस्ट नही करने का अपने को.

वो दूसरा रुखसाना के साथ ज़बरदस्ती करने लगा, और कुछ ही देर में उसके सारे कपड़े फिर से फर्श पर पड़े थे.

वो नौजवान अपने घुटनों मे सर देकर चुप चाप सोफे पर बैठा रहा..

रुखसाना चीखती चिल्लाती रही, उस नौजवान को मदद के लिए बुलाती रही,

नौजवान ने एक बार फिर हिम्मत जुटाई, उसने उठने की एक और कोशिश की तो उस गन वाले ने उसके सर के पीछे हॅंडल का बार करके उसे बेहोश कर दिया,

नौजवान बेहोश होकर सोफे पर लंबा हो गया….

उसके बाद उन दोनो ने रुखसाना को पूरी तरह नंगा कर दिया…और उसके बदन से खेलने लगे…

ना चाहते हुए, वो भी उन लोगों का साथ देने लगी…

उन्होने उसे घोड़ी बना दिया, और उनमें से एक बंदे ने पीछे से उसकी चूत में लंड डाल दिया और चोदने लगा…

दूसरा अपना लंड हाथ में लिए उसके मुँह के आगे खड़ा हो गया, और अपना खूँटे जैसा लंड ज़बरदस्ती उसके मुँह में ठूंस दिया…

अब वो उसे आगे और पीछे दोनो तरफ से चोदने लगे…

 
कुछ देर बाद उन दोनो की पोज़िशन चेंज हो गयी, और जो पहले मुँह चोद रहा था, अब वो उसकी चूत मार रहा था, और दूसरा मुँह को..

एक राउंड की धमाकेदार चुदाई के बाद उन्होने थोड़ा रेस्ट किया,

फिर उनमें से एक बंदे ने सोफे पर लेट कर रुखसाना को अपने उपर ले लिया और नीचे से उसकी चूत में लंड डाल दिया…

दूसरे ने उपर से उसकी गान्ड को थूक से गीला किया, और अपना सुलेमानी लंड उसकी गान्ड में पेल दिया……

एक बार को रुखसाना बुरी तरह बिलबिला गयी, लेकिन बेचारी कर भी क्या सकती थी…

उसका तो बुरा हाल हो चुका था…, वो दोनो उसके दोनो छेदों में ढकपेल लंड चला रहे थे…

कुछ देर की तकलीफ़ के बाद रुखसाना को इस तरह की चुदाई में एक अजीब सा ही मज़ा आ रहा था, जिसे वो इन दोनो को नही बोल सकती थी,

जब दोनो के लंड आपस में एक दूसरे में ठोकर मारते, तो उन तीनों को ही असीम आनंद की अनुभूति होने लगती…

उन दोनो ने उसकी दोनो छेदों में लंड डालकर जबरदस्त चुदाई की, अंत में दोनो ने उसके आगे-पीछे के छेदों को अपने वीर्य से भर दिया…

उसके बाद उसकी शारीरिक शक्ति जबाब दे गयी और वो वहीं फर्श पर नंगी ही पड़ी रह गयी.

वो दोनो उसको वहीं ठंडे फर्श पर पड़ा छोड़ कर अपने-2 कपड़े पहन कर वहाँ से निकल गये..

वो कुछ देर यौंही पड़ी सुबक्ती रही, फिर कुछ देर बाद जब उसके होश कुछ वापस लौटे,

दिनभर की चुदाई की वजह से उसका पूरा बदन पके फोड़े की तरह दुख रहा था, फिर भी वो उठी और किसी तरह अपने कपड़े पहने,

फिर उसने उस नौजवान के कंधे पकड़ कर उसे हिलाया..

असलम.. असलम मियाँ..उठो.. मुझे मेरे घर छोड़ दो..

वो नौजवान आँखे मलते हुए उठा, और चारों ओर देखने लगा, फिर बोला- वो लोग चले गये..?

सॉरी रुखसाना मे आपकी मदद नही कर सका, उन सालों ने मुझे भी बेहोश कर दिया..!

रुखसाना मरी सी आवाज़ में बोली - कोई बात नही, मे समझ सकती हूँ, अब जल्दी से उठो और मुझे मेरे घर छोड़ दो.. पता नही अब क्या होगा ?,

एजाज़ स्कूल से आ गया होगा, और मुझे घर ना पाकर क्या सोच रहा होगा..?

वो नौजवान खड़ा हुआ और बोला - अब इस वक़्त अपने घर जाकर क्या करोगी रुखसाना बेगम..?

रुखसाना – ये क्या कह रहे हो तुम ? मेरे शौहर भी घर पहुँचने वाले होंगे.. मुझे वहाँ ना पाकर ना जाने क्या – 2 सोचने लगेंगे…?

चलो ! जल्दी करो, अब और ज़्यादा देर करना मुनासिब नही होगा…

नौजवान ने बड़ी रुखाई से कहा – तो क्यों ना तुम्हारे शौहर को भी यहीं बुला लिया जाए..!

रुखसाना उसके बदले हुए तेवर देखकर एकदम चोन्क्ते हुए बोली - क्य्ाआअ..??? क्या कहा तुमने…?

वो भौंचक्की सी उस नौजवान की सूरत देखती ही रह गयी……जो अब खड़ा खड़ा उसके सामने मुस्करा रहा था…!!!

रात को जब अब्दुल सत्तार गनी उर्फ गनी भाई अपने घर आया तो उसका बेटा एजाज़ घर में अकेला था, उसका बॉडीगार्ड बाहर अहाते में मुस्तेदि से तैनात था.

बेटे ने जब अपने अब्बू को देखा तो वो रोते हुए दौड़ता हुआ आया और उसके पैरों से लिपट गया.. - अब्बू..! अम्मी कहाँ है..?

गनी को अपने बेटे के मुँह से ये बात सुनकर एक जोरदार झटका लगा - क्या..? वो यहाँ नही है..? तो कहाँ है, तुम्हें नही पता वो कहाँ गयी..?

एजाज़ - सुबक्ते हुए.. नहीं, मे जबसे स्कूल से आया हूँ, मुझे वो यहाँ नही मिली.

और देखो ना अब्बू, अब तो रात भी हो गयी, अभी तक नही आई वो… कहाँ चली गयी..? उउहह..उउहह..वो और ज़ोर-2 से रोने लगा.

गनी ने वहीं ज़मीन पर बैठ कर अपने बच्चे को अपने सीने से लिपटा लिया और उसकी पीठ पर हाथ फेर कर उसे चुप करते हुए सोच में डूब गया.

उसके दिमाग़ में अंजनी आशंकाओं का बवंडर सा उठने लगा. आख़िर रुखसाना गयी तो गयी कहाँ..? कहीं वो उस दिन वाले गुंडे तो नही…?

उसने अपने गुर्गों से भी इस विषय में पुच्छना उचित नही समझा, कहीं बात ग़लत रूप ना लेले..? उसे अपनी नेता वाली छवि की भी चिंता थी.

हो सकता है अपने किसी रिस्तेदार के यहाँ, या किसी सहेली के घर चली गयी हो, उसके मन ने झुटि तसल्ली देने की कोशिश की, लेकिन फिर खुद ही उसे खारिज भी कर दिया..

नही-नही..!! रुखसाना इतनी भी ग़ैरज़िम्मेदाराना हरकत नही कर सकती कि अपने बेटे को भी बिना बताए कहीं चली जाए..?

तो.. !! तो फिर आख़िर गयी कहाँ..? क्या मुझे पोलीस का सहारा लेना चाहिए..?

हां ये सही रहेगा ! और वो इसमें भी राजनीतिक फ़ायदा ढूँढने के बारे में सोचने लगा.

अभी वो पोलीस को फोन करने के बारे में सोच ही रहा था कि उसका फोन सामने से घनघना उठा.

बेल की आवाज़ सुनते ही वो एकदम से उच्छल पड़ा, मानो किसी गरम तबे पर गान्ड रखकर ग़लती से बैठ गया हो..?

उसे इस बात की तो कोई आशंका ही नही थी.

उसने लपक कर फोन उठाया और बोला- ह.ह.हेलो कौन ..?

सत्तार मियाँ..! कैसे हो..? अपनी बीबी का इंतजार कर रहे हो..? दूसरी ओर से कहा गया.

गनी - क्क्कोन बोल रहा है..? और तुम्हें कैसे पता कि मेरी बीबी घर पर नही है..?

नौजवान रुखसाना के होठों पर अपने उल्टे हाथ की उंगली फेरते हुए बोला - क्योंकि वो इस समय मेरे पास है..!

गनी - क्या..? ?? क्यों ?? तुम्हारे पास कैसे है वो..? कॉन हो तुम, और कहाँ से बोल रहे हो..?

अरे बाप रे…! इतने सारे सवाल एक साथ.. एक-एक करके पुछो सत्तार मिया.. उसने रुखसाना के गदराए हुए बदन पर हाथ फेरते हुए कहा, जो इस समय उसके पास ही सोफे पर बैठी थी,

ये दीगर बात थी, कि इस समय उसके हाथ बँधे हुए थे…

उस नौजवान ने आगे कहा - मेरी याददस्त थोड़ी कमजोर है सत्तार मियाँ, भूल गया तो एक भी बात का जबाब नही दे पाउन्गा, फिर तुम्हें तुम्हारी बीवी का पता कैसे मिलेगा ?.

गनी - मेरी बीवी तुम्हारे पास कैसे है पहले ये बताओ..?

नौजवान ने उसके आमों को ज़ोर्से मसल्ते हुए कहा - वो मुझसे चुदवाने आई है, अब तुम तो उसको चोदते नही हो,

बाहर की रंडियों के साथ मुँह मारते फिरते हो, तो बेचारी करे तो क्या करे, मेरे दमदार लंड से चुद के मस्त हो गयी है…बात करना चाहोगे उससे..?

गनी - क्या बकवास कर रहे हो तुम..? होश में तो हो ? जानते तुम किससे बात कर रहे हो..?

नौजवान - बिल्कुल होश में हूँ, और ये भी जानता हूँ की किससे बात कर रहा हूँ..? अच्छा लो अपनी बेगम से बात करो..!

कुछ देर के बाद रुखसाना की आवाज़ सुनाई दी, वो रोते-बिलखते हुए खुद को उससे बचाने की बात करने लगी,

जब गनी ने उससे पुछा कि वो वहाँ कैसे पहुँची, तो उसने बात को गोल करके ज़बरदस्ती खुद के किडनप होने का बहाना बना दिया.

फिर गनी ने पुछा कि वो इस समय कहाँ पर है, इससे पहले की वो कुछ बताती, नौजवान ने फोन उसके हाथ से छीन लिया,

और फिर उसने गनी को जो धमकाया, पट्ठे की सिट्टी-पिटी गुम हो गयी आख़िर में उसने पुछा.

गनी - अब तुम क्या चाहते हो..?

नौजवान - देख भाई, तेरी बीवी की चुदाई की मस्त सीडी बनाई है मैने, तू देखना चाहे तो मे भेज सकता हूँ,

और अगर तू नही चाहता कि ये सीडी सार्वजनिक हो, और तेरी बीवी भी तुझे सही सलामत मिल जाए तो 50 लाख का इंतेज़ाम करके रखना कल शाम तक, वरना तू इतना तो समझदार होगा.. कि क्या हो सकता है ?

मे तुझे अब कल फोन करूँगा, और हां पोलीस-वॉलिस के चक्कर में भूल के भी मत पड़ना.

 
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