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जादू की लकड़ी

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“हा मुझे दुसरो को देखना अच्छा लगता है पहले ये एक तरह का फन था जैसे बाकी सभी नशे होते है लेकिन फिर धीरे धीरे मुझे इसकी आदत सी पड़ गयी या कब एक नशा बना मुझे पता ही नही चला,मुझे दुसरो के पर्सनल चीजो को दिखने में मजा आता है ,या फिर किसी को सेक्स करते देखना ….इसलिए मैं पोर्न का आदि भी हो गया,पोर्न ,मास्टरबेर्शन(हिलाना) ,और साथ में ये ..इन सबने मेरी जिंदगी को बर्बाद ही कर दिया,पहले निकिता को इसका पता नही था लेकिन मेरे अंदर आये बदलाव को वो समझ गई,मुझे समझाया की ये सब बस फेंटेसी है असलियत नही लेकिन मैंने उससे कहा की ये बस मजे के लिए है ,एक दिन मैं ये सब छोड़ दूंगा लेकिन ...लेकिन मैं इसे नही छोड़ पाया ,इतना आदि हो गया की मैंने यंहा फ्लेट लिया और टेलिस्कोप लगा कर दुसरो के पर्सनल चीजो को देखने लगा,खासकर निकिता को ,जब वो इस अपार्टमेंट में आयी तब उसे पता चला की मैं यंहा से उसके पर्सनल चीजो को देख रहा हूं,उसे बहुत गुस्सा आया,इसीबार को लेकर हमारा बहुत झगड़ा हुआ,और वो मुझसे दूर हो गई ,लेकिन मैं उसे बहुत प्यार करता था और वो भी मुझसे बहुत प्यार करती थी इसलिए हम फिर मिले,मैंने ये सब छोड़कर अपने प्यार को अपनाने की बहुत कोशिस भी की लेकिन असफल रहा,मैंने उससे कहा की मैं इस अपरमेंट को छोड़ चुका हु और दूसरी जगह शिफ्ट हो गया हु,और मैं अपने पुराने पारिवारिक घर में रहने लगा लेकिन जब वो चली जाती मैं फिर से यंहा आ जाता,और ये बात उसे पता लग गई ,हमारा फिर से झगड़ा हुआ और फिर हम कभी नही मिल सके…….वो आज भी मुझसे प्यार करती है और उसे पता है की मैं उसे देख रहा हु इसलिए तो वो रोज ही सुबह शाम अपनी खिड़की में आती है ,उसे पता था की उसका शराब पीना मुझे पसंद नही था इसलिए मेरे सामने शराब पीती है,या कभी गुस्से में दिन भर ही खिड़की के पर्दो को लगाकर रखती है ,उसने मुझे दिखाने के लिए ही कल पर्दो को हटा कर तुम्हारे साथ सेक्स किया,उसने मुझे ये मेसेज दे दिया की अब हमारे बीच सब कुछ खत्म हो चुका है ..”

वो रोने लगा था ,मुझे उस आदमी पर दया सी आने लगी थी ..

नशा सच में आदमी के दिमाग को ही खराब कर देता है ,ये मेरे सामने एक जीता जागता उदाहरण था,पता नही कैसे लेकिन इस चूतिये से मेरी बहन पट गई थी वो इसे प्यार करती थी ,निकिता दीदी जैसी हॉट लड़की इसे प्यार करती थी,हा प्यार अंधा होता है दोस्तो ,लेकिन ये चूतिया अपने इस नशे में फंसकर उस लड़की से ब्रेकअप कर बैठा जिसे ये प्यार करता था,था नही है,दीदी भी इससे प्यार करती है इसका सुबूत मैं देख चुका था,वो इसकी याद में देवदास बनी हुई है और ये दुसरो को देखकर हिला रहा है …

काल्पनिकता जब सर में चढ़ जाए तो असलियत फीकी सी लगती है ,यही पोर्न एडिक्ट्स के साथ भी होता है,यही मास्टरबेशन के आदि लोगो के साथ भी होता है ,वो काल्पनिक दुनिया में ऐसे खो जाते है की उन्हें असली सेक्स भी फीका लगने लगता है,रिलेशनशिप,प्यार बोर लगने लगता है,क्योकि हाथ से हिलाना इतना आसान काम है और किसी लड़की को चोदने के लिए बहुत मेहनत चाहिए ,उसे पटाना पड़ता है ,उसके पीछे भागना होता है,समाज का डर,दुनिया जहान की चीजे उसके बाद मिलता है सेक्स या प्यार और यंहा तो लेपटॉप या मोबाइल चालू किया वेबसाइट ओपन की और लगे हिलाने कोई मेहनत नही ..

लेकिन ये असलियत से दूर ले जाता है और अगर इसका नशा लग गया तो जीवन को बर्बाद भी कर सकता है …

मैं उसके पास जा बैठा और उसके कंधे पर अपना हाथ रखा ..

“तुम दोनो खुश रहना ,उसे कभी दुखी मत करना वो बहुत ही अच्छी लड़की है ,मैं उसके जीवन से बहुत दूर चले जाऊंगा “

वो अब भी रो रहा था ,

“तुम्हे कहि जाने की जरूरत नही क्योकि वो अब भी सिंगल ही है ,और मैं उसका बॉयफ्रेंड नही हु बल्कि उसका भाई हु “

वो अचानक से मुझे देखने लगा ऐसे जैसे कोई झटका सा लग गया हो ..

“तूतूतू मम म राज हो..उसके भाई ..ओह होली फक ..”

वो सर पकड़ कर खड़ा हो गया

“लेकिन तुम तो चूतिये थे ,उसने बताया था की तुम अजीब से हो मलतब ..”

वो बोलने के लिए शब्द ढूंढ रहा था ,

“हा मैं चूतिया था लेकिन अब नही हु,समझे “

वो चुप हो गया फिर अचानक से बोल पड़ा

“निकिता तुम्हारी बहन है और तुम उसके साथ ही ..”

उसकी आंखे बड़ी हो गई थी ..

“क्यो पोर्न में नही देखते क्या बहन भाई वाला ..”

“लेकिन वो पोर्न है तुम दोनो तो असलियत में “

मैं मुस्कुरा उठा..

“हर चीज असलियत है मेरे दोस्त कभी नजर उठाकर दुनिया को देखो तो सही ,मैं दीदी से बात करूँगा तुम्हारे बारे में और तुम्हे भी मैं ही ठीक कर दूंगा डोंट वरी “

“लेकिन वो तो तुम्हारे साथ ..”

मैं समझ गया था की वो क्या बोलना चाहता था ..

“देखो प्यार और सेक्स में फर्क होता है,वो भले ही मेरे साथ सोई हो लेकिन आज भी प्यार तो तुझसे ही करती है,और तू खुद सोच निकिता दीदी जैसी हॉट लड़की तुझ जैसे चोदू से प्यार करती है,अबे तुझे और क्या चाहिए,हमारे बीच जो भी हुआ वो बस एक रात की कहानी थी ,समझ ले एक गलती,वो अपने दिमाग से निकाल दे वो तो जीवन भर के लिए तेरी होने को राजी है ,और तू मुह मोड़े हुआ है “

वो शांत हो चुका था …..फिर उसका चहरा उतर गया ..

“लेकिन मैं उसे खुश नही रख पाऊंगा ,मैं तो कमजोर हु तुम्हारी तरह नही ..”

“दोस्त लकड़ियां सिर्फ सेक्स से खुश नही रहती ,और तू फिक्र मत कर मैं तुझे भी ट्रेनिंग दे दूंगा ,पहले तेरी आदत छुड़वानी होगी ..और अगर तू खुश नही रख पायेगा तो उसका भाई अभी जिंदा है उन्हें खुश रखने के लिए “

उसकी आंखे फट गई थी वो कुछ नही बोल पा रहा था ..

“ऐसे एक चीज cuckold भी होती है ,तुझे देखना पसंद है ना तो हमे देखकर भी तू हिलाया होगा “

शर्म से उसकी नजर झुक गई मुझे बिना बोले ही समझ आ गया था ..

मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा ..

“दोस्त सब ठीक हो जाएगा ,ये सब मानसिकता का खेल है डोंट वरी...ऐसे मेरे पास एक डॉ है जो शायद तेरा इलाज कर दे “

वो मुझे घूर रहा था …

“कौन ???”

“उनका नाम है डॉ चूतिया,द ग्रेट साइकोलॉजिस्ट..”
 
अध्याय 34

रोहित मेरी बातो से बहुत ही पोजेटिव फील कर रहा था ,वही मैंने निकिता दीदी से भी उसके लिया बात कर दी ,वो बेचारी तो खुद ही चाहती थी की रोहित ठीक हो जाए और दोनो का फिर से पेचउप हो जाए …

मैं रोहित को डॉ चूतिया जी के पास ले गया ,

“ओह आओ आओ राज ,अच्छा तो ये है रोहित जिसके बारे में तुमने मुझे बताया था ,”

“जी डॉ साहब “

“ओके तो मुझे रोहित से अकेले में कुछ बाते करनी है तब तक क्या तुम बाहर वेट करोगे “

“जी बिल्कुल “

ये कहते हुए मैंने मेडम मैरी को देखा ,उनके होठो में मुस्कान थी ..

मैं मैरी के साथ बाहर आ कर बैठ गया…

मिस मैरी ,या मेडम मैरी….एक भरी पूरी औरत थी ,रंग किसी आंग्ल इंडियन की तरह था,और लेकिन आदते पूरी देशी,समझ लो को सनी लियोन सामने खड़ी हो और बात देशी स्टाइल में कर रही हो ..

“मैरी जी आप डॉ के साथ कब से है “

“सालो हो गए “

हम बाहर एक सोफे में बैठे थे

“ओह तो आपने अभी तक शादी नही की “

मैरी हल्के से हंसी

“नही मैं शादीशुदा ही हु ,लेकिन पति के साथ नही रहती ,अभी तक हमारा तलाक नही हुआ है “

मैं आश्चर्य में पड़ गया था ..

“ओह तो आपके पति ..”

मैरी का चहरा उतर गया ,

“क्या बताऊ साल कहने को तो डॉन है लेकिन है बिल्कुल ही चोदू,”

मेरा ध्यान मैरी के टाइट एप्रॉन से झांकते हुए वक्षो पर चला गया ..

मेरे मुह में ना जाने कहा से इतना पानी आ गया था ,उसके वक्षो की चोटी पूरे गर्व से उभरी हुई थी ,शायद मैरी ने मेरे नजरो को पहचान लिया था ...वो मुस्कुराई

“क्या देख रहे हो “

“बस देख रहा हु की आपकी जवानी तो बाहर आने के लिए बेताब है ,आप इस जवानी को आखिर सम्हालती कैसे है “

मेरे अंदर का शैतान एक्टिव होने लगा था ,और मैरी के होठो की मुस्कान और भी गाढ़ी हो गई…

“तुम जानकर क्या करोगे तुम तो अभी बच्चे हो “

हा मैं अभी अभी तो स्कूल से निकला था लेकिन ये मेरे लिए किसी MLIF से कम नही थी …

“अरे मैरी जी यही तो उम्र होती है जब शरीर के हार्मोन्स सबसे ज्यादा उछलते कूदते है,बच्चा समझने की भूल मत कीजिये,आप से ज्यादा खेली खाई दो दो औरतो को एक ही रात में बेहोश कर चुका हु “

मेरी बात से मैरी की आंखे चौड़ी हो गई वही मेरे टाइट जीन्स को भी फाड़ने को बेताब मेरे लिंग का भी उसे आभास हो गया,ऐसा लगा जैसे अब उसके मुह में पानी आ गया हो ..

“ऐसे क्या देख रही है,यकीन नही आता तो टेस्ट कर लीजिए “

मैंने निडरता से उनकी आंखों में अपनी आंखे गड़ाते हुए कहा …

मेरी ने पहले मेरे बाजुओ को पकड़ा,मेरे मांस से भरे हुए बाजू की मांसलता देख कर एक बार उसकी आंखे भी चौन्धिया सी गयी थी ..

“तुम तो इस उम्र में भी बड़े स्ट्रांग हो “

मैं हल्के से मुस्कुराया

“मेडम इससे ज्यादा स्ट्रांग चीज तो मेरे पेंट के अंदर है “

अब उन्होंने देर नही की और मेरा हाथ पकड़कर साथ लगे टॉयलट में ले गई ,

वंहा इतनी जगह थी की आराम से दो लोग लेट सकते थे..

मैंने जितना सोचा था मेरी तो उससे भी ज्यादा फ़ास्ट थी ,वो सीधे मेरे जीन्स पर पहुची और उसे तुरंत खोल कर नीचे कर दिया ,मेरी जॉकी की चड्डी में फंसा मेरा लिंग अकड़ने लगा था ,एक बार उसने लिंग को ऊपर से ही सहलाया,मेरा सांप भी फुंकार मारने लगा था ,देर ना करते हुए मैरी ने मेरी कच्छी नीचे कर दी ,मेरा लिंग फुंकार मरते हुए उसके मुह से टकरा गया ..

“ओह माय होली जीजस ..:eek:mg: इतना बड़ा,इंसान का है या घोड़े का “

मैरी की बात सुनकर मैं हंस पड़ा ..

“मेडम अभी तो इसे आपकी हर छेद में जाना है ,बहुत बोल रही थी ना की मैं बच्चा हु अब देखो ये बच्चा कैसे तुम्हे माँ बनाता है “

मैरी की आंख में शरारत नाचने लगी और उसने बिना कुछ कहे ही अपना मुह खोलकर मेरे लहराते हुए लिंग को अपने नरम नरम होठो से रगड़ दिया ..

“मादरचोद “ मेरे मुह से उत्तेजना के कारण अनायास ही निकल गया ..और मेरे हाथ सीधा मैरी के बालो को कसकर जकड़ लिए ..

उसने अपना पूरा मुह खोला और मेरा लिंग नर्म होठो से रगड़ खाता हुआ मैरी के मुह में प्रवेश करने लगा, लिंग के सुपडे की चमड़ी सरकते हुए पूरी खुल चुकी थी और मैरी में गले तक चली गई थी ..

“ऊऊहह गु गु “

मैरी के मुह का लार मेरे लिंग को भिगोने लगा था ,मुझे इतना मजा आ रहा था की ऐसा लगा जैसे उसके मुह में ही झर जाऊंगा,वो सच में एक्सपर्ट थी ,ऐसी चुसाई तो मैंने कभी पोर्न फिल्मो में भी नही देखी थी ,बड़े ही पैशन के साथ वो मेरे लिंग को किसी लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी ,ऐसे लग रहा था जैसे किसी बच्चे को उसका फेवरेट खिलौना मिल गया हो ..

मेरा लिंग पूरी तरह से लार से भीग चुका था वही मेरा हाथ मैरी के सर को जकड़े हुए जोरो से उसे अंदर बाहर कर रहा था,मैं बड़े जोश में उसका मुखचोदन कर रहा था ..

थोड़ी देर बाद वो खड़ी हुई और अपने कपड़े उतारने लगी ,वो इतनी मादक थी जैसे उसके एक एक अंग में कुदरत ने वासना का सैलाब भरा हो ,वो रस से भरी हुई थी ,ऐसा लग रहा था की यही है जिसे रात भर निचोड़ कर पीयू तो भी इसका रस कम ना हो ..

मेरी सांसे बेहद ही तेज हो गई थी ,मैं इतना उत्तेजित कभी नही होता था आज ये मेरे साथ पहली बार हो रहा था की मैं एक लड़की के वश में था ना की वो मेरे वश में,

उसने अपने होठो को मेरे होठो में मिला दिया,मैं उसके रस के प्यारे से जाम पीने लगा था ,उसने मेरे हाथो को अपने योनि में टिकाया ,ऐसा लग रहा था जैसे हल्के गर्म चिपचिपे पानी का कोई झरना सा बह रहा हो मैंने एक उंगली घुसाई ऐसा लगा जैसे वो उंगली वही गुम हो गई,मैंने एक साथ तीन उंगली घुसाई तब जाकर मैरी के मुह से आह निकली ..

“कितने लौड़े खा चुकी है तेरी ये चुद “

मैंने उसके वक्षो पर अपने दांतो को गड़ाते हुए कहा ..

“आह बेटा जितनी तेरी उम्र है ना उससे दो गुना ज्यादा लौड़े ले चुकी हु “

उसने मेरे बालो को खीचकर मेरे होठो को काट दिया ,वो दर्द एक मीठा सा दर्द था मैं भी उसके होठो को किसी भूखे कुत्ते की तरह खा रहा था ..

मैंने देर ना करते हुए उसे दीवार से टिका दिया और अपने लिंग को उसकी योनि के द्वार पर टिकाया ..

“बेबी पहले चाट तो लो “

उसने मुझे सुझाया

“अरे मेरी जान मैं तो तुझे चोद चोद कर ही झडा दूंगा तू फिक्र क्यो कर रही हो “

उसने मुझे मस्कुरा कर देखा

“बहुत गुमान है तुम्हे अपने मर्दानगी का “

बस देखती जाओ ,मैंने अपने लिंग को उसकी योनि में सरका दिया ..

उसने मेरे बालो को जोरो से पकड़ रखा था..

“बेटे ..आह ..सच में घोड़े का लौड़ा है तेरा,आह मेरी चुद को भी फाड़ देगा तू तो ..माsss “

मैंने उसके होठो को अपने होठो में भर लिया,मेरा लिंग पहले ही उसकी लार से गीला था वही मैरी की योनि भी अपना भरपूर रस छोड़ रही थी दोनो की चिकनाई की वजह से एक ही वार में पूरा लिंग उसकी योनि में समा गई ..उसने अपने योनि को सिकोड़ा मेरी तो हालत ही खराब हो गई ,

लगता था साली कोई जादूगरनी थी ,इतना मजा ..

“आह मादरचोद..आह”

मैंने धक्के तेजी से देने शुरू किये ,वो भी मस्त होकर हिलने लगी,योनि और लिंग दोनो ही बहुत ही चिकने हो गए थे,मेरा लिंग किसी पिस्टन की तरह अंदर बाहर हो रहा था ,वही कामरस के कारण पच पच की आवाजे आने लगी थी ..वो खुलकर सिसकिया ले रही थी मैं भी पूरे जोश में उसे धक्के मार रहा था ,

एक समय आया जब उसने मेरे बालो को बुरी तरह से नोच लिया और मेरे कंधे पर अपने दांत गड़ा दिए..

“माअअअअअअअअअअअअ”

वो जोरो से झड़ी और मुझमे समा गई ,उसकी योनि किसी झरने की तरह बह रही थी और मेरे पूरे जांघो तक उसका कामरस फैल गया था ..

वो थककर मुझपर ही गिर गई..

“अरे मेरी जान तू तो मुझे बच्चा कह रही थी और इतने जल्दी तू ही झर गई..”

“तू बच्चा नही साले तू घोड़ा है ,चल अब जल्दी से तू भी गिरा ले “

वो हांफ रही थी

“अरे अभी इतनी जल्दी भी क्या है “

मैंने उसे पलट दिया ,उसने हाथो से दीवार को थामा और उसके पिछवाड़ा मेरे सामने हो गया...क्या चीज थी वो ,मटके जैसे उसके चूतड़ों को देखकर लग रहा था जैसे अभी इसे खा जाऊ..

मैंने पूरी ताकत से उसे पकड़ा और उसके चूतड़ वाले छेद में अपने लिंग को ले गया ..

“अब तू अभी मेरी गांड भी मरेगा “

“क्यो नही ??”

“नही नही …”उसने जल्दी से खुद को सम्हाला ..

“तू अगर अभी इसे चोदेगा तो मैं चल भी नही पाऊंगी आज नही बेटा फिर कभी “

मैंने उसके बालो को पकड़कर उसे अपनी ओर खीच लिया ..

“ओके माँ जी ,लेकिन ये वादा रहा ..”

“हा वादा है मेरा ,तुझे पूरी रात इसी एक छेद की सैर करवा दूंगी फिर चाहे दो दिनों तक चल ना पाउ”

उसने बड़े ही प्यार से कहा और मेरे गालो में एक प्यारा सा किस दे दिया ..

“चलो बहुत देर हो गई है डॉ साहब देख रहे होंगे “

उसने तुरंत अपने कपड़े हाथो में उठा लिए”

“और इसका क्या करू “

अपने अपने हथियार की ओर इशारा किया जो अभी तक वैसा ही तना हुआ था ..

“अब इसे तुम ही सम्हालो ,मूत लो शायद थोड़ा शांत हो जाए “

वो खिलखिलाकर हंसी और अपने कपड़े पहनने लगी ,मैं भी कमोड में मूतने के लिए खड़ा हो गया था लेकिन साला निकल ही नही रहा था ..

जब मैं थोड़ा शांत हुआ तो मैंने अपनी जीन्स चढ़ाई और बाहर निकला ,बाहर सोफे में बैठा रोहित ने हमे एक साथ बाहर निकलते हुए देखा ..उसका मुह खुला का खुला था …

 
अध्याय 35

रोहित का काम हो चुका था डॉ ने उसे मोटीवेट कर दिया था और साथ ही लगातार कॉउंसलिंग के लिए भी बोला था,मैं भी उसके लिए डाइट चार्ट और एक्सरसाइज का प्लान बनाने में उसकी मदद कर रहा था ,और उसकी सबसे बड़ी मोटिवेशन थी निकिता दीदी ,वो उसे फिर से पाना चाहता था ,उसने मुझे कहा की वो उन्हें वैसा खुश रखना चाहता है जैसा मैं हर लड़कियों को रखता हु ,शायद उसने मैरी और मेरी आवाजे सुनी होंगी ,और निकिता दीदी के साथ तो देखा ही था……

ख़ैर अभी कुछ दिन ही हुए थे,और मेरे पास निशा और निकिता दीदी थी ,कभी इसके साथ तो कभी उसके साथ सो रहा था,निकिता दीदी रोहित से धोखा करना नही चाहती थी लेकिन बेचारी करे भी तो क्या करे एक बार जो मेरा मजा लग गया था तो थोड़ी बावली सी हो गई थी …..

तभी एक दिन मेरे वकील का फोन आया उसने बताया की महीना पूरा हो चुका है ,और किसी को कोई भी ऑब्जेक्शन नही है तो सारी संपत्ति हमारे नाम से करवाया जा सकता है,उसने दूसरे दिन का ही डेट बताया,

दूसरे दिन मेरा पूरा परिवार ऑफिस पहुचा और वंहा पूरी प्रक्रिया कंपलीट कर हम बाहर निकले ,अब मैं कोई साधारण इंसान नही रह गया था ,मैं चंदानी इंड्रस्ट्री का मालिक था ,और अब से मुझे पूरे कारोबार को देखना था ,रश्मि के पिता भी वहां आये थे क्योकि उनकी सरकारी महकमे में तगड़ी पहुच थी हमारा काम बहुत ही जल्दी हो गया ….

हम सभी ऑफिस के बाहर ही खड़े थे ,मेरी मा खुसी में सभी को मिठाईया खिला रही थी ,लेकिन मैंने देखा की मेरे पिता जी का चहरा थोड़ा उतरा हुआ है …..

“पापा आप कुछ उदा लग रहे हो “

मैंने उनके पास जाकर

“कुछ नही बेटा...मेरे पिता और ससुर को कभी मेरे ऊपर भरोसा नही था,मैंने कभी उनका भरोसा नही कमाया लेकिन पता नही क्यो उन दोनो को ही तुम्हारी मा पर बहुत भरोसा था ,इसलिए शायद उन्होंने सारी जयजाद उसके बच्चों के नाम कर दी ..”

“क्या आप खुश ही हो ..??”

“नही मैं खुश हु ,लेकिन दुखी भी हु ,ये सब कुछ तुम लोगो का ही है ,और मैं तो तुम्हारे दादा और नाना के कारोबार को और आगे ले गया ताकि मेरे बच्चों को और भी ज्यादा मिले,लेकिन दुख बस इतना है की …….मैं अपने पिता और ससुर को कभी खुश नही रख पाया,वो मुझे नालायक समझते थे ,जबकि मैंने उनके कारोबार को कई गुना बड़ा दिया,मैं ये नही कहता की मेरे पास आज कुछ नही है ,मेरे पास मेरे बच्चे है,मेरी प्यार करने वाली बीबी है और मुझे अब जीवन से कुछ भी नही चाहिए,हा मैंने गलतियां की थी ,जवानी में हो जाता है ,और मेरी जवानी थोड़ी ज्यादा चल गई ..”

वो हल्के से हँसे ..शायद जीवन में हमने इतनी देर कभी बात ही नही की थी ,आज पता नही क्यो लेकिन मुझे वो सही लग रहे थे,मैं भी तो अपनी जवानी में वो ही सब कर रहा हु जो उन्होंने किया था और जिसके कारण उन्हें इस जयजाद से बेदखल रखा गया था ..

उन्होंने बोलना जारी रखा ..

“काश की ये संपत्ति मैं तुम लोगो को सौपता ,”

वो फिर थोड़ी देर चुप हो गए ..

“लेकिन मैं ये नही कर पाया,खैर अब से तुम्हे ये सब सम्हलना है और मेरी कोई भी जरूरत पड़े तो मैं तुम्हारे साथ हु “

उनकी बात सुनकर पहली बार मुझे ऐसा लगा जैसे वो मेरे पिता है ..

“थैंक्स पापा,और मुझे कारोबार का क्या आईडिया है ,आप को ही सब सम्हलना है और मुझे सीखना है “

उन्होंने प्यार से मेरे बालो में हाथ फेरा ..

मैं आज बहुत खुश था ,इसलिए नही की मुझे ये संपत्ति मिली ,बल्कि इस लिए क्योकि आज मुझे मेरे पिता मिल गए ..

सभी लोग वापस जाने के लिए तैयार हुए ,हम दो गाड़ियों से आये थे ,एक में पिता जी और मा आयी थी वही दूसरे में मैं और मेरी तीनो बहने ,वापस जाते समय भी हम वैसे ही जाने के लिए तैयार हुए पिता जी और मा जाकर गाड़ी में बैठ चुके थे वही मैं और बहने दूसरी गाड़ी में ,उन्होंने गाड़ी स्टार्ट कर दी मैं भी जाने ही वाला था ,तभी अचानक मा दौड़ाकर मेरे पास आयी ..

“क्या हुआ मा “

“अरे कुछ नही तेरे पिता जी को ऑफिस से फोन आया था वो वंहा जा रहे है,मैं तुम्हारे साथ जाऊंगी “

“ओके”

वो मेरी गाड़ी में बैठ गई ..

हम आगे निकलने ही वाले थे की पिता जी अपनी गाड़ी से बाहर आये ,इस बार उनके चहरे की हवाइयां उड़ी हुई थी ..

वो मेरी गाड़ी जो की चलने ही वाली थी उसके सामने आकर खड़े हो गए थे ,उनके हाथ में मोबाइल था और वो किसी से बात कर रहे थे,उन्होंने मुझे इशारा किया ,सारी खिड़किया लगी हुई तो उनकी आवाज सुनाई नही दे रही थी लेकिन वो चिल्ला रहे थे ..

मैंने खिड़की खोली ..

“राज सभी तुरंत बाहर निकलो “

वो चिल्लाए

और हमारी कर के पास आकर एक एक का हाथ पकड़कर बाहर निकालने लगे ,हम सभी बाहर आ चुके थे ..

“पापा क्या हुआ …??”

उन्होंने हमे गाड़ी से दूर धकेला ,लेकिन मा अभी भी गाड़ी में थी ,मैं जल्दी जल्दी में ये भूल ही गया था की उनकी सीट बेल्ट अटक गई थी ,पिता जी कार के अंदर ड्राइवर सीट में घुसे और बाजू वाले सीट पर बैठी मा की सीट बेल्ट को निकालने लगे ..

“पापा हुआ क्या है ..?”

मैं पास जाते हुए उनसे पूछा ….

“दुर हटो यंहा से मैं कुछ समझ पाता इससे पहले ही माँ पापा ने मुझे जोर का धक्का दिया और माँ की तरफ पलटे लेकिन तक सीट बेल्ट खुल चुकी थी और मा दरवाजा खोलकर बाहर निकल चुकी थी ..

और धड़ाम …….

पूरी की पूरी कार हवा में उछल गई ,मैं और माँ धमाके से दूर जाकर गिरे ……..

कानो ने सुनना बंद कर दिया था चारो तरफ भगदड़ मची हुई थी,चोट तो मुझे भी आयी थी लेकिन मैं सम्हल चुका था,और मेरे सामने पिता जी की बुरी तरह से जली हुई लाश पड़ी थी …..

मैंने माँ को देखा वो दूर बेहोश पड़ी हुई थी ,

“पिता जी….” मैं पूरी ताकत से चिल्लाया और उनकी ओर भागा,जब मैं उनके पास पहुचा तो लगा जैसे वो मुझे देख रहे हो ,पूरा चहरा जल चुका था ,उनकी आंखे मेरी आंखों से मिली ,उनकी जुबान थोड़ी सी हिली ..जैसे वो मुझेसे कुछ कहना चाहते हो ..

मैंने अपने कान नीचे किये

“माँ का ख्याल रखना,मैंने जीवन भर उसे दुख दिया..”

और ……..

और वो चुप हो गए …..

आज ही तो मुझे वो मिले थे ,आज मैं कितना खुश था और आज ही ……

आज ही वो मुझे छोड़कर चले गए …..

मेरी नजर माँ पर गयी ,कुछ लोग उन्हें उठा रहे थे,वो भी बुरी तरह से चोटग्रस्त थी ,मैं माथा पकड़ कर रो रहा था तभी …

धड़ाम……

हमारी दूसरी कार भी हवा में उड़ गई ,चारो तरफ मानो आतंक का सन्नटा छा गया था,और उसके साथ एक सन्नाटा मेरे दिल में भी छा गया था ……

 
अध्याय 36

हॉस्पिटल का माहौल गमगीन था,पिता का पार्थिव शरीर मरचुरी में रखा गया था,माँ ICU में एडमिट थी ,बहनो की आंखे रो रो कर सूज गई थी ,मैं बिल्कुल किसी पत्थर की तरह निश्चल सा हो गया था,मन और शरीर शून्य से पड़ गए थे,क्या हुआ क्यो हुआ कुछ भी समझ के परे था,

भैरव सिंह(रश्मि के पिता) और डॉ चूतिया पूरे दिन साथ ही रहे,लेकिन उनके सांत्वनाये मेरे किसी काम नही आ रही थी ..

तभी ICU का दरवाजा खुला ..

कुछ डॉक्टरस बाहर आये ,और भैरव सिंह के पास पहुचे ..

“राजा साहब ,पेशेंट की हालत खतरे से बाहर है लेकिन अभी जख्मो को भरने और सामान्य होने में समय लगेगा,”

तभी मुझे अचानक से होश आया ,वो डॉ जा चुका था और मैं खड़ा हुआ ..डॉ चूतिया और भैरव सिंह मुझे देखने लगे ,मैं अभी तक एक आंसू नही रोया था जैसे मेरे आंसू ही सुख गए हो ..

“लगातार दो बम विस्फोट हुए ,हमारे कारो में,पापा को फोन आया और उन्हें किसी ने बताया की हमारे कार में भी बम रखा गया है,आखिर क्यो..???अगर उसे हमे मारना ही होता तो बताने की क्या जरूरत थी की हमारे कार में बम है ..”

मैंने उठाते ही कहा और दोनो ही चौक गए ..और मुझे देखने लगे ..

“ऐसे मत देखिए,मेरा मेरे पिता के साथ जीवन में कभी नही बना,पहली बार बनने लगा था लेकिन शायद प्रकृति को यही मंजूर है की हम अलग ही रहे ,और इस समय मैं कमजोर नही पड़ सकता,ना जाने क्या हो रहा है,अगर उन्हें जयजाद ही चाहिए थी वो पहले ही मार देते लेकिन अभी अटैक क्यो,और अगर उनका टारगेट मैं था या मेरी माँ या बहने थी तो स्वाभाविक है की अभी वो इंसान शांत नही बैठेगा ,और मेरे कमजोर होने का मतलब है की उसका ताकतवर हो जाना,मैं अपने परिवार पर कोई खतरा नही होने दूंगा “

मेरी आंखों में जैसे ज्वाला नाचने लगा था ,डॉ चूतिया ने मेरे कंधे पर अपना हाथ रखा ..

“डॉ साहब अब मेरी माँ खतरे से बाहर है ,मेरे ख्याल से अब मुझे पूरी ताकत से इस काम में लग जाना चाहिए ,मुझे अभी पुलिस स्टेशन जाना होगा “

“ह्म्म्म चलो हम भी साथ चलते है ,”

भैरव सिंह बोल उठा

“नही अंकल शायद आपको यही रहना चाहिए,मेरे जाने के बाद कोई तो यंहा होना चाहिए जो मेरे परिवार को सम्हाले,”

अंकल ने हामी भरी और मैं डॉ चूतिया के साथ पुलिस स्टेशन चला गया ..

*********

“डॉ साहब दोनो गाड़ियों में रिमोट टाइमर वाले बम लगाए गए थे,मतलब रिमोट से टाइमर को कंट्रोल किया जा रहा था ,इसमे रिमोट दबाते ही टाइमर आन हो जाता है ,”

इंस्पेक्टर हमे बता रहा था ..

“और पापा के नंबर पर लास्ट काल किसका था जिसने उन्हें बताया की हमारी काम में बम लगा हुआ है..”

“नही पता सर ,इंटरनैशनल नंबर था जो सिर्फ एक बार यूज़ किया गया,शायद इसी काम के लिए उसे लिया गया था जिससे वो ट्रेक ना किया जा सके..”

“ह्म्म्म :hmm: लेकिन सोचने वाली बात है की अगर उसे तुम लोगो को मारना ही था तो उसने काल क्यो किया ??”

डॉ ने सवाल किया और मेरे दिमाग के कीड़े दौड़ाने लगे ..

“क्योकि उसे सभी को नही मरना था ,वो किसी को बचा रहा था..”

मेरे दिमाग में वो नजारा फिर से घूमने लगा .मैंने अपनी आंखे बंद की सब कुछ क्लियर दिखने लगा था..मैं बोलने लगा ..

“हम बाहर आये सभी खुश थे,पिता जी ने पहली बार अपनी गलती मानी थी,मुझे लगा की आज वो मुझे वापस मिल गए ,हम सभी भाई बहन एक कार से जाने वाले थे वही पिता जी और माँ दूसरी कार से...उस कातिल में दोनो कारो में बम रखा क्योकि उसे पता नही था की कौन किस कार से जाएगा ...अब शायद उसका टारगेट मैं या मेरी बहने थी इसलिए उसने रिमोट से कार में लगे बम को एक्टिव किया ,शायद 2 या 3 मिनट का टाइमर रहा होगा,ताकि गाड़ी थोड़ी आगे बाद जाए ,लेकिन तभी मेरी माँ पिता जी को छोड़कर हमारे साथ बैठ गयी और मामला गड़बड़ हो गया,उसने पिता जी को काल किया और बताया की कार में बम लगा है,जैसे ही वो उतरे की उसने पिता जी की कार में लगे बम को भी एक्टिव कर दिया होगा,पिता जी ने हमे तो बचा लिया लेकिन ….और उसके कुछ देर बाद ही पिता जी की कार भी फट पड़ी...ताकि हमे लगे की वो सब को मारना चाहता था…….लेकिन उसने टारगेट किया था वो किसी को बचा रहा था ???”

मैंने आंखे खोली इंस्पेक्टर और डॉ मुझे ही देख रहे थे…

“तुम्हारी माँ को ..वो तुम्हारी माँ को बचा रहा था..”

डॉ उत्तेजना में बोल उठे…

“.लेकिन क्यो.???.”इंस्पेक्टर जैसे गहरी नींद से अचानक ही जाग गया हो ..

दोनो मुझे ही देख रहे थे...मैं दोनो को एक नजर देखा और अपनी आंखे बंद कर ली ,मेरी रूह मेरे शरीर से बाहर थी और मैं सीधे हॉस्पिटल में ,भैरव सिंह मेरी माँ के कमरे में था,उसका हाथ मेरी माँ के हाथ में था,उसकी आंखों में आंसू था ..

माँ अभी भी बेहोश थी ,तभी दरवाजा खुला और रश्मि अंदर आयी उसने अपने पिता के कंधे पर हाथ रखा ..

“अपने आप को सम्हालो पापा ..”

“कैसे सम्हालु बेटी ,आखिर कैसे ,मेरे कारण ही इसकी ये हालत हुई है ,मेरे कारण ही अनुराधा ने जीवन भर दुख ही पाया,कभी पति से प्यार नही पाया सिर्फ मेरे कारण,चंदानी को हमेशा से शक था की अनुराधा उससे नही मुझसे प्यार करती थी ,उसने इसे पा तो लिया लेकिन इस दर्द से कभी बाहर नही निकल पाया था वो ,उसे तो ये भी लगता था की राज उसका नही मेरा बेटा है ,इसलिए कभी उसने राज को अपना बेटा ही नही माना ,उससे हमेशा ही गैरो की तरह बर्ताव किया ,आज जब सब कुछ ठीक होने वाला था तो ...ये हादसा …”

वो चुप हो गया था ..

लेकिन उसकी बात से रश्मि चौक गई थी ..

“पापा क्या राज सच में आपका खून है “

भैरव ने एक बार रश्मि को देखा और अपने आंसू पोछे ..

मेरे ख्याल से अब हमे चंदानी के अंतिम यात्रा की तैयारी करनी चाहिए ..

वो उठ कर बाहर चला गया लेकिन …….

लेकिन उसकी एक बात से रश्मि और मुझे अंदर किसी गहरे तल बहुत कुछ बदल सा गया था …….

मेरी आंखे खुली मेरे आंखों में फिर से पानी था …..

 
अध्याय 37

"क्या हुआ क्या देखा तुमने ??"

डॉ ने मेरे आंखे खोलते ही कहा

"कुछ नहीं,हमें चलना चाहिए "

हम वंहा से उठकर चले गए ..

"राज आखिर देखा क्या तुमने ??"

कार में जाते समय डॉ ने फिर से पूछा ,

"कुछ नहीं डॉ साहब ,बस मुझे माँ के पास जाना है "

डॉ मेरी बात सुनकर शांत हो चुके थे ,जो भी हो रहा था वो मेरे मन के अंदर ही हो रहा था ,एक द्वन्द था जो अंदर ही अंदर मुझे खाये जा रहा था ,बार बार मेरे आँखों के सामने भैरव सिंह और माँ का चेहरा घूम जाता था वही मेरे पिता की मुझे हँसते हुए दिखाई देते ,

वो मुस्कुराते और उनकी ये मुस्कुराहट मेरे लिए किसी नासूर से कम नहीं थी ,दिल में समाया हुआ एक ऐसा नासूर जिसने मेरा पूरा बचपन ही खत्म कर दिया ,नासूर जिसका जख्म मेरे पैदा होने से पहले से ही पिता जी को सताता रहा होगा और जिसका शिकार मैं हुआ हु,अब मुझे इस नासूर को साथ लेकर जीना था ..

हम हॉस्पिटल में थे मेरी बहने भैरव के साथ घर जा चुकी थी ,पता चला की पिता जी के अंतिम यात्रा की तैयारी हो रही है,हम सब तो अभी बच्चे ही थे,ऐसा लग रहा था जैसे भैरव ने ही हमारे अभिभावक की जगह ले ली है,

रश्मि की माँ अर्चना और उसकी चाची सुमन भी वंहा आ चुके थे ,जबकि उसे चाचा भीष्म अभी मेरे घर गए हुए थे ,एक बार मेरी और रश्मि की आंखे मिली ,ऐसा लगा की बहुत कुछ कहना चाहती हो लेकिन जुबान फिर भी ना हिले ,

"बेटा जो हुआ उसे नहीं बदला जा सकता अब तुम्हे अपने पिता की अंतिम विदाई सम्पन्न करने में ध्यान देना होगा,"

अर्चना आंटी ने मेरे कंधे पर अपना हाथ रखा ..

"लेकिन माँ ??"

"बेटा अनुराधा ठीक हो जायेगी ,उसने कभी किसी का बुरा नहीं किया है भगवान उसके साथ कभी बुरा नहीं करेगा ,वो अब ठीक है ,बस थोड़े देर में उसे होश आ जायेगा ..लेकिन पिता का काम तो तुम्हे ही करना होगा "

माँ को होश आ जायेगा ,मुझे ये समझ नहीं आ रहा था की मैं उनका सामना कैसे करूँगा ..अगर वो पिता जी को देखने की जिद करेगी तो,मैं उन्हें कैसे ये बताऊंगा की उनका चेहरा आप देख नहीं पाओगी ..

मैं वंहा से चलता हुआ हॉस्पिटल में बने गार्डन में पहुंचा,कोने में जाकर चाय के साथ एक सिगरेट जला कर मैं भविष्य के बारे में सोच रहा था ,अभी एक हाथ मेरे कंधे पर पड़ा ,

"रश्मि तुम ??" रश्मि मेरे बाजु में आकर बैठ गई ,वो कुछ भी नहीं बोल रही थी ना ही मैं कुछ बोलने की स्तिथि में था ,

"आखिर कौन हो सकता है जिसे हमारी खुशियों से इतनी जलन है "

मेरे मुँह से अनायास ही निकल गया

"राज मुझे नहीं लगता की ये दौलत के लिए किया गया था .."

"हां रश्मि ,ये बहुत ही पर्सनल अटेक था "

"लेकिन राज सोचने वाली बात है की किसके ऊपर ,क्या तुम्हे नहीं लगता की टारगेट तुम भाई बहन थे और कोई आंटी को बचा रहा था ,वो भी अभी क्यों ? अगर करना ही था तो पहले क्यों नहीं मारा तुम लोगो को उसने ??"

मैंने एक बार रश्मि की ओर देखा ,उसका प्यारा सा चेहरा मुरझा सा गया था

"हां रश्मि मुझे भी लगता है की प्लान तो हमे मरने का था लेकिन माँ के बीच में आने के कारण उसने पिता जी को फोन किया ,लेकिन वो माँ को बचा क्यों रहा था ??"

रश्मि की आंखे थोड़ी नम होने लगी

"क्या हुआ रश्मि ??"

"मुझे लगता है की जिसने भी ये किया होगा वो तुम्हारी माँ से प्यार करता है ,"

वो चुप हो गई ,और मै स्तब्ध ,हां ये सही था और ये ख्याल मेरे दिमाग में भी आया था लेकिन मेरा स्तब्ध होना रश्मि के आंसुओ के कारण था ,मै समझ गया था की आखिर वो क्या सोच रही है ..

"नहीं रश्मि मुझे नहीं लगता की तुम जो सोच रही हो वो सही हो सकता है .."

"क्यों राज ??"

"क्योकि उनके पास कोई कारण नहीं है ऐसा करने का .."

हम भैरव की बात कर रहे थे ,भैरव रश्मि का पिता था और रश्मि को भी पता था की जवानी के दिनों में भैरव मेरी माँ से प्यार करता था ,

"कारन तो कुछ भी हो सकता है राज ..."

"नहीं रश्मि मुझे नहीं लगता की अंकल ऐसा करेंगे ,उन्होंने तो हर मुश्किल में मेरा साथ दिया है,और माँ के लिए उनका प्यार सच्चा है ,सच्चा प्रेम कभी किसी को दुःख नहीं पहुँचता ,उसमे कोई संघर्ष नहीं होता कोई जीत हार नहीं होती ,क्या तुम्हे कभी ऐसा लगा की अंकल ने तुम्हारी माँ को कम प्यार किया ,(रश्मि ने ना में सर हिलाया ) ,हां रश्मि तुम्हारे पिता ने तुम्हारी माँ को भी भरपूर प्यार दिया ,भले ही शायद आज भी वो मेरी माँ से प्रेम करते हो लेकिन ....लेकिन वो एक प्रेमी ही है और प्रेमी अपने प्रेम की पूजा करते है ना की वो किसी मोह में प्रेम को दुःख देते है ,अंकल ने माँ के जाने के बाद भी शायद उनसे प्रेम किया हो लेकिन फिर भी उन्होंने तुम्हारी माँ को भरपूर प्रेम दिया ,तुम्हे भरपूर प्रेम दिया ,वही एक मेरे पिता थे जिनकी आँखों में मैंने कभी माँ के लिए प्रेम नहीं देखा ,वो उनके लिए एक उपलब्धि थी जिसे वो सेलेब्रेट किया करते थे प्रेम नहीं ,अगर मेरे पिता की बात होती तो शायद मै मान भी लेता की वो मेरे साथ ऐसा करना चाहते हो ,लेकिन अंकल... नहीं ..जब मैं उनके पहली बार मिला था तो उनके आँखों में एक चमक थी ,उस चमक को मैं पहचान सकता था ,वो चमक तब आती है जब कोई इंसान अपने अजीज के बच्चो को देखता है ,मैंने अपने मन से इसे महसूस किया है,उनके अंदर मेरे लिए एक अनकहा सा प्रेम है ..वो ऐसा नहीं कर सकते ,क्या तुमने ये महसूस नहीं किया ??"

रश्मि के चेहरे पर एक मुस्कान खिल गई ...

"तुमने मेरे दिल का एक बोझ ही हल्का कर दिया ,लेकिन .."

वो कहते कहते रुक गई थी

"लेकिन क्या ?"

"लेकिन राज मुझे आज एक बात पता चली "

मैं जानता था की उसे क्या पता चला है ,वो मेरी आँखों में देख रही थी जैसे कोई इजाजत मांग रही हो ...मैंने अपने आँखों से ही उसे वो इजाजत दे दी थी ..

"राज तुम्हारे पिता जी को जीवन भर ये शक था की तुम ..(वो कुछ सेकण्ड के लिए चुप हो गई ) की तुम मेरे पिता का खून हो .."

रश्मि ने इतना बोलकर अपनी आंखे निचे कर ली

"और तुम्हे क्या लगता है "

उसने फिर से सर उठाया और मेरे आँखों में देखने लगी

"मुझे नहीं पता "

मैं हंस पड़ा ,और हसते हँसते मेरी आँखों में पानी आ गया ,वो किसी गम का नहीं एक अहसास का पानी था,इस लड़की के प्रेम का अहसास ,हो इन चीजों को छिपा भी सकती थी ,लेकिन वो मेरे लिए अपने पिता को भी कातिल समझने को तैयार थी ,मैंने प्यार से उसके गालो को सहलाया

"नहीं रश्मि मुझे अपनी माँ पर पूरा भरोसा है,मैं ये मान सकता हु की उन्होंने तुम्हारे पिता से प्रेम किया होगा,लेकिन ये नहीं की उन्होंने शादी के बाद मेरे पिता से धोखा किया होगा ,नहीं मै ये नहीं मान सकता ,उन्होंने तो अपना पूरा जीवन ही पिता जी को समर्पित कर दिया था रश्मि ,और जंहा बात है की पिता जी के ऐसा सोचने की तो जो आदमी जीवन भर अपनी बीबी को धोखा देता रहा उसके दिमाग में अगर ऐसी बात आ भी जाए तो इसमें अचरज क्या है,लोग जैसा सोचते है वैसा ही देखते भी है,उन्हें लगता की पूरी दुनिया उनके जैसी है .नजारो को अच्छा या बुरा हमारी नजरे ही तो बनाती है ,ये दृष्टि ही दृश्य को परिलक्षित करती है "

मेरी बात सुनकर रश्मि के चेहरे में एक मुस्कान आ गई

"तुमने मेरे मन का एक बोझ हल्का कर दिया राज "

उसकी इस बात से मेरे चेहरे में भी मुसकान खिली ,ये भरी गर्मी की दोपहर में मिलने वाली ठंडी सुकून भरी हवा जैसा अहसास था ,इस द्वन्द और युद्ध की स्तिथि में उसका प्रेम से भरा हुआ चेहरा और दिल से खिलती हुई वो मुस्कान मेरे लिए सुकून भरे थपकी से कम नहीं था ,

"तुम उस कमीने को ढूंढ लोगे राज ,मुझे तुमपर पूरा यकीन है ,उस कमीने को छोड़ना मत ,बस तुम्हे आंटी के ठीक होने का इंतजार करना चाहिए शायद इन सबका राज उनके अतीत से जुड़ा होगा "

"हां रश्मि मुझे भी ऐसा ही लगता है,शायद कोई और ऐसा है जो हमारी नजरो से ओझल होते हुए भी हमरे जीवन पर असर कर रहा है ,अतीत के कुछ किस्से कब वर्तमान को प्रभावित करने लगते है हमे पता ही नहीं चलता ,और हम इसी भ्रम में जीते है की अभी हमसे कुछ गलती हुई होगी ,लेकिन रोग पुराना होता है ,हां उसका इलाज जरूर नया हो सकता है "

मैंने मुस्कुराते हुए रश्मि को देखा ,

उसने मेरे कंधे पर अपना हाथ रखा

"राज अब शयद हमे चलना चाहिए,तुम्हे अपने घर जाकर अंकल के अंतिम संस्कार का कार्यक्रम सम्पन्न करना चाहिए ,मैं ,मम्मी और चाची जी यही रुके हुए है हम आंटी का पूरा ख्याल रखेंगे और चाचा भी थोड़े देर में आ जायेगे "

मैंने हां में सर हिलाया और हम वंहा से निकल गए .....

 
अध्याय 38

पिता की अन्तोष्टि का कार्यक्रम ख़त्म हो चूका था ,लेकिन अभी भी माँ को होश नहीं आया था ,मैं लगातार रश्मि के संपर्क में था ...

अभी घर में आये मेहमानो की भीड़ को सम्हला ही रहा था की एक सफ़ेद रंग के सलवार में लिपटी हुई कोई हुस्न परी सी लड़की मेरी ओर आते हुए मुझे दिखी ..

"हैल्लो मिस्टर सिंह ,कैसे है आप "

उसने मेरे बाजु में खड़े हुए भैरव सिंह से कहा

"ओह समीरा तुम ..मैं तो अच्छा हु तुम कैसी हो "

"बॉस के गुजर जाने के बाद कैसी हो सकती हु सर "

उसने चेहरे पर एक दुःख का भाव तो लाया लेकिन साफ साफ पता चल रहा था की उसका ये दुःख बिलकुल बनावटी था .

"हम्म इनसे मिलो ये तुम्हारे नए बॉस है मिस्टर राज "

भैरव अंकल ने मुझे अड्रेस करते हुए कहा

"हैल्लो सर मैं आपसे मिलने ही वाली थी की ये हादसा हो गया ,मैंने सोचा की बिजनेस की बाते ये सब ख़त्म होने के बाद करेंगे "

उसने मेरी ओर हाथ बढ़ाया और मैंने भी उसके साथ हाथ मिला लिया ..

"कोई बात नहीं शायद आप पापा की पर्सनल सेकेट्री है ??"

मैंने कभी कभी इसका नाम सुना था ..

"जी सर और अब आपकी .."

उसके चेहरे में एक सौम्य सी मुस्कान आई ..

"जी ..मेरे ख्याल से हम आराम से बिजनेस के बारे में चर्चा करेंगे ,अभी ये समय सही नहीं है "

"जी सर मुझे भी यही लगता है लेकिन आपको कल ही ऑफिस ज्वाइन कर लेना चाहिए ,क्या है ना की सर के गुजरने के बाद और पूरी प्रॉपर्टी का बटवारा होने के बाद हमारे इन्वेस्टर थोड़े से परेशान है ,अगर आप आगे आकर उन्हें हिम्मत दे तो बात अलग होगी .."

मैं जानता था की बिजनेस में पर्सनल इमोशंस की कोई जगह नहीं होती और सभी इन्वेस्टर्स कंपनी के भविष्य को लेकर चिंतित होंगे ,इसलिए मैंने हां में सर हिला दिया .....

************

"इस लड़की को ध्यान से देख लो राज ,ये है एक दो धारी तलवार है ,ये तुम्हे आसमान में भी पंहुचा सकती है और गर्त में भी "

अंकल ने समीरा की और दिखते हुए कहा ..

"आखिर आप ऐसा क्यों बोल रहे हो अंकल ?"

उन्होंने एक गहरी साँस ली ,

"समीरा खन्ना ,एक रिक्शा चलने वाले की बेटी,MBA इन हर,झोपडी में पली बढ़ी लेकिन ख्वाब हमेशा ही इसने ऊंचे देखे,अपनी मेहनत और काबिलियत के बल पर यंहा पहुंची है ,तुम्हारे पापा की सबसे खास और भरोसेमंद मुलाजिम और तुम्हारे कंपनी चांदनी के बाद नंबर 2 का पावर रखने वाली शख्स ,कंपनी की 20% की शेयर होल्डर ,और अब तुम्हारी कंपनी की सबसे पावर फूल पर्सन ...."

मैंने आश्चर्य से भैरव अंकल की और देखने लगा

"हां राज ये सही है ,बिजनेस में पैसा और पावर ही सब कुछ होता है ,और समीरा के पास दोनों ही है साथ ही है एक गजब का दिमाग जिसका उपयोग करके तुम्हारे पिता ने अपने पुरखो की दौलत को कई गुना तक बड़ा दिया ,चांदनी की एक खासियत थी की उसे हीरो की समझ रही उसने समीरा जैसे हिरे को खोज निकला और अपना राइट हेंड बनाया ,उसे कंपनी में शेयर दिए ,समीरा ही थी जो तुम्हारे पिता की राजदार थी ,उसके पर्सनल और प्रोफेसनल जिंदगी की राजदार ....तुम ये मत समझना की तुम कंपनी के मालिक हो तो तुम समीरा से जयदा पावर फूल हो गए ,नहीं ऐसा नहीं होता क्योकि तुम्हारे साथ कंपनी के बाकि शेयर होल्डर्स भी है और बोर्ड ऑफ़ डिरेक्टर्स भी ,अब तुम्हे ऑफिसियल कंपनी का CEO बना दिया जायेगा लेकिन तुम अब भी इतने पावर फूल नहीं हो की तुम अपनी बात मनवा सको क्योकि उस बोर्ड में अब तुम्हारी बहने भी होंगी ,चांदनी के पास तुमसे ज्यादा पावर थी लेकिन अब पावर बोर्ड के पास होगी ,और इस समय बोर्ड की सबसे तजुर्बेकार और शक्तिशाली मेंबर समीरा ही होगी ,इसने ही कंपनी को इतने इन्वेर्स्टर दिलाये है तो इसकी एक इज्जत सभी के दिल में है और वो लोग तुम्हारी नहीं इसकी बात ही सुनेंगे ,ये मत समझना की ये तुम्हरी पर्सनल सेकेट्री है तो तुम इसके बॉस हो ,इसने वो पद अपनी मर्जी से अपनाया था तुम्हारे पिता के लिए,लेकिन ये तुम्हारी लिए भी उतनी ही वफादार रहे इस बात की कोई गारंटी नहीं है,ये जब चाहे तुम्हारा जॉब छोड़कर जा सकती है और इसके जाने का एक ही मतलब है की सारे इन्वेस्टर भी इसके साथ जायेंगे .."

मैं उनकी बात ध्यान से सुन रहा था मुझे तो लगा था की बिजनेस आसान सी चीज होगी ,मैं मालिक और बाकि मेरे मुलाजिम लेकिन ये बात इतने भी आसान नहीं थी ,खासकर जबकि मुझे बिजनेश की कोई खास समझ भी नहीं थी ..

"अंकल मुझे क्या करना चाहिए "

"अभी तो कुछ ज्यादा नहीं ,जब तक तुम अपने इन्वेस्टर्स को और बोर्ड के लोगो को अपने काबू में नहीं कर लेते तब तक तुम्हे समीरा का ही भरोसा है ,और सभी को बस एक ही चीज चाहिए वो है प्रॉफिट ,अगर किसी को भी लगा की तुम्हारे फैसले से कंपनी को लॉस होगा तो समझो वो तुम्हे छोड़ने में थोड़ी भी देरी नहीं लगाएंगे ,यंहा पर्सनल इमोशंस की कोई क़द्र नहीं होती ,चांदनी की ये बात सबसे खास थी की वो आदमी भले ही कितना भी कमीना हो लेकिन बिजनेस मैन वो कमाल का था सभी को अपने काबू में रखता था ...अब तुम्हे भी ये सब करना होगा सीखना होगा ,खासकर समीरा को नाराज मत करना ,वो भी शेयर होल्डर है तो उसे भी कंपनी की फिक्र है ,और वो भी लॉस बर्दास्त नहीं करेगी ,"

मैंने हां में सर हिलाया

*********************

मैं हॉस्पिटल में बैठा हुआ था बाकि सभी लोग जा चुके थे ,मेरे अलावा वंहा बस निकिता दीदी ही बैठी थी ..

"क्या हुआ भाई इतने टेंसन में दिख रहा है .."

"दीदी कल से मुझे कंपनी सम्हालनी है पता नहीं कैसे कर पाउँगा ,पापा की बात अलग थी उनका रुतबा था ,उनके पास पहचान थी सब था ,लेकिन मेरे पास .."

मैं चुप ही हो गया ,स्वाभाविक था जो लड़का अभी अभी स्कुल से निकला हो कालेज में जिसने कदम भी नहीं रखा उसके ऊपर अब 14 हजार करोड़ की कम्पनी की जिम्मेदारी थी ,इन्वेस्टर और शेयर होल्डर्स को खुस करना था ,सभी को अपने ऊपर भरोसा दिलाना था ,माँ ने कभी बिजनेस किया नहीं था ,मैं ही एक फेस था जिसके ऊपर लोग उम्मीद करके बैठे थे ...

दीदी मुझसे ज्यादा मेच्युर थी ,उनके बिजनेस की सेन्स भी मुझसे ज्यादा थी इसलिए वो मेरी बात को तुरंत ही समझ गई ,उन्होंने मेरे सर पर हाथ फेरा ..

"भाई ऐसे डरने से कुछ नहीं होगा,मुझे पता है की अभी हमारी स्तिथि क्या है लेकिन तुझ फिक्र करने की जरूरत नहीं है हमारे परिवार के कुछ बहुत ही वफादार लोग अब भी कंपनी में है ,हमरे बिजनेस में मेरा थोड़ा दखल रहा था ,मैं पापा के साथ कभी कभी ऑफिस जाया करती थी ,मुझे वंहा की थोड़ी समझ है ,मैं तुम्हे उन लोगो से मिलवा दूगी .."

"दीदी आज मैं समीरा से मिला .."

समीरा का नाम सुनते ही दीदी का चेहरा लाल हो गया था ..

"वो साली रंडी ...'

इतना ही बोलकर दीदी चुप हो गई

"क्या बात है दीदी ..??"

"मेरा बस चलता तो मैं उसका कत्ल ही कर देती लकिन क्या करू उसने पापा का दिल जीत रखा था ,अपने हुस्न और काम से पापा ने उसे कंपनी का शेयर होल्डर भी बना दिया ,पता नहीं वो पापा के लिए ऐसा क्या करती थी की पापा उसपर इतने मेहरबान थे ,कहने को तो वो बस एक पर्सनल सेकेट्री है लेकिन कंपनी उसके ही इशारो में चलती है ,मुझे ये डर है भाई की वो हमारे इन्वेस्टर को डाइवर्ट न कर दे "

"क्या हम उसे कंपनी से निकाल नहीं सकते ??"

मेरे दिमाग में ये प्रश्न बहुत देर से घूम रहा था

"नहीं भाई अभी वो है जो इस कंडीसन में हमारे इन्वेस्टर्स को रोके रख सकती है ,और उसकी अहमियत इतनी है की उसे निकलने के बारे में तो हम सोच भी नहीं सकते ,लेकिन तुम्हे उससे होशियार रहना होगा ,वो हमारे लिए इतनी काम की है उससे कही ज्यादा खतरनाक भी ,साली रंडी की औलाद जो है .."

"आप उससे इतना क्यों चिढ़ती हो दीदी ??"

दीदी के मन में समीरा के लिए बहुत गुस्सा था ..

"साली सड़क छाप लड़की है जिसे पिता जी ने अपने सर में बिठा दिया ,उसका बाप रिक्शा चलाता था और माँ एक रंडी थी ,उसने अपने हुस्न से पिता जी को फंसा लिया और क्या देखो आज क्या बन गई है,अब ऐसी लकड़ी का क्या भरोसा करोगे "

दीदी गुस्से में लग रही थी ,इसलिए मैंने उनसे कुछ कहना ठीक नहीं समझा ,एक तरफ भैरव अंकल समीरा की तारीफ करते नहीं थक रहे थे तो दूसरी तरफ दीदी उसकी बुराई करते नहीं थक रही थी ...

साली मेरी जिंदगी में कभी आराम से काम करना लिखा ही नहीं था ,जंहा भी जाता था षडयंत्र पहले पहुंच जाती थी ,

 
अध्याय 39

मैं और निकिता दीदी ऑफिस में थे ..

सभी ने बड़े ही प्यार से हमारा स्वागत तो किया लेकिन एक अजीब सा डर उनके चहरे और बातचीत में मैंने महसूस किया ,ऐसा लगा जैसे कोई नवसीखिया को राजा बना दिया गया हो और सभी का भविष्य अब उसके ही हाथो में हो ,वंहा मुझे समीरा मिल गई और साथ ही दीदी ने मुझे हमारे एक पुराने वफादार से भी मिलवाया जिसका नाम सतीश था ,दीदी ने मुझसे कहा की सतीश से उसे ऑफिस के अंदर की जानकारी मिलेगी लेकिन वो सभी के सामने उससे ज्यादा बात ना करे ,समीरा और दीदी के रिश्ते कुछ खास नही थे लेकिन समीरा ने मुझे बहुत भाव दिया ,इन्वेस्टर के सामने कैसे बात करना है क्या कहना है सभी कुछ हमने मिलकर ही तय किया ,इसके लिए एक पर्सनल मीटिंग रखी गई थी जिसमे मेरी अनुरोध में मेरा वकील और भैरव सिंह भी आये हुए थे,मुझे अभी इनकी जरूरत थी क्योकि बिजिनेस मेरे लिए नया था और समीरा का अभी मैं कोई भरोसा नही कर सकता था ...दीदी पूरे मीटिंग में चुप ही रही समीरा ने ही प्लान बनाया था जो की सभी को बहुत पसंद आया ,

फिर इन्वेस्टर्स और ऑफिस के कर्मचारियों के साथ मीटिंग्स हुई एक प्रेस कांफ्रेंस भी करवाई गई ,कुल मिलाकर उद्योग के गलाकाट प्रतियोगिता वाले जगत में मेरा आगाज हो गया ,कुछ लोगो को मुझसे उम्मीदे थी तो कुछ को मेरे ऊपर शक था जो भी था मुझे बस हवा के बहाव में बहना था क्योकि मैं अभी उसके विपरीत जाने के लायक नही हुआ था ……

समीरा ने मीटिंग्स के बाद एक छोटी सी पार्टी भी अरेंज करवाई थी जिसमे मेरा आना सबसे ज्यादा जरूरी था,इस पार्टी के जरिये वो कुछ बड़े लोगो के सामने मुझे इंट्रोड्यूज करवाना चाहती थी ,अभी मेरा पार्टी करने का कोई भी मूड नही था मेरे पिता जी अभी अभी गुजरे थे और मेरी मा अभी भी हॉस्पिटल में थी जो की बेहोश थी ,लेकिन भैरव अंकल ने भी मुझे समझाया साथ ही निकिता दीदी ने भी की ये पार्टी मेरे लिए कितनी जरूरी है ,और मुझे वंहा जाना ही पड़ा,निकिता दीदी हॉस्पिटल के लिए निकल गई लेकिन भैरव अंकल वही रुक गए …

पार्टी में बड़े बड़े नेता ,बिजनेसमैन ,सरकार के बड़े अधिकारी ,मीडिया के लोग और हमारे इन्वेस्टर और कंपनी से जुड़े कुछ खास लोग आये हुए थे ,कहने को छोटी सी पार्टी में लगभग 150 लोगो का जमावड़ा था ,

बातचीत का दौर जारी था ,मैं कुछ इन्वेस्टर्स के साथ खड़ा हुआ था ..

“भई राज हमे लगता है की तुम सब कुछ अच्छे से सम्हाल लोगे आखिर समीरा और राजा जी का साथ है तुम्हारे पास “

ये कोई बड़ा इन्वेस्टर था मैंने सिर्फ उसे धन्यवाद कहा वही भैरव अंकल हँसते हुए उसके कांधे पर हाथ रख दिया ..

“क्यो SP साहब चंदानी जी के मर्डर के केस में कुछ सुराग मिला आपको “

साथ खड़े दूसरे व्यक्ति जो की कोई मंत्री टाइप थे ने शहर के SP से पूछा

“नही सर अभी तक कोई सुराग नही मिला है लेकिन हम पूरी कोशिस कर रहे है “

“तुमसे कुछ ना हो पायेगा मुन्ना ,इसे तो वो हल करेगा “

उस मंत्री ने एक ओर इशारा किया जन्हा से मुझे डॉ चूतिया और काजल साथ आते हुए दिखाई दिए ,आते ही सभी ने उनका अभिनंदन किया ,थोड़ी देर तक बाते चलती रही ..जाते जाते मंत्री साहब ने मेरे कंधे पर हाथ रखा और बात करने के लिए मुझे थोड़ा अलग ले गए …

“बेटा मैं तुम्हारे पिता का बहुत ही अच्छा दोस्त था ,मुझे उनके गुजरने पर बहुत ही अफसोस है ,लेकिन इस बात की खुशी है की आज तुम्हारे पीछे इतने काबिल लोग खड़े है ,समीरा जैसी इंटेलिजेंट लड़की तुम्हारे साथ है,राजा साहब (भैरव सिंह ) तुम्हे अपना मानते है,डॉ चूतिया जैसा इंसान तुम्हारा दोस्त है ,इतने छोटी उम्र में तुम्हे प्रोटेक्ट करने के लिए तुम्हारे आस पास बहुत ही काबिल लोग है ,लेकिन बस एक इंसान की कमी मुझे खल रही है ..”

मैं उसे देखने लगा

“विवेक अग्निहोत्री ,तुम्हारे पिता और राजा साहब दोनो का अच्छा दोस्त था और साथ ही गजब का वकील भी ,काश वो भी तुम्हारे साथ होता ,क्या दिमाग था साले के पास मेरा भी वकील वही था “

“मुझे भी उनके दुखद मौत पर दुख हुआ “

मुझे उस वकील की याद आ गई जो की हमारा पुराना फेमली फ्रेंड भी था और साथ ही साथ मा का अच्छा दोस्त भी

“पता नही क्यो उसने आत्महत्या की ,वो ऐसा इंसान तो नही था ,बहुत ही मजबूत शख्सियत थी ,आजतक ना कोई उसे डरा पाया ना कोई हिला पाया ,पता नही अंतिम दिनों में उसके साथ ऐसा क्या हो गया ,खैर ..अब उसकी पत्नी भी गायब थी सुना है की उसका आचरण ठीक नही था,कुछ दिन पहले जंगल में उसकी लाश मिली “

“ओह”

ये मेरे लिए नई खबर थी

“खैर हमे भी अपना ही समझना कभी कोई भी जरूरत हो तो मिल लेना या फिर समीरा से कहकर मेरे सेकेट्री से बात कर लेना “

“जी धन्यवाद आपका “

मैंने सीधे उसके चरण स्पर्श कर लिए ,मैं भी थोड़ी राजनीति सिख रहा था उसने मुस्कुराते हुए मेरे कंधे पर अपना हाथ रखा और वंहा से निकल गया ..

तभी मेरी शहर SP पर नजर पड़ी जो की दारू पी कर मस्त हो रहा था

“हैल्लो सर “

“ओ हैल्लो राज जी “

उसने बड़े ही अदब से मेरा नाम लिया इस उम्र में भी मुझे समझ आने लगा था की पावर की सभी इज्जत करते है

“सर आपसे एक बात करनी थी “

“जी जी बिल्कुल कहिए ,चंदानी साहब के मर्डर के बारे में “

“नही नही वो विवेक अंगिहोत्री की वाइफ के मर्डर के बारे में “

“ओ वो ,उसका किसी गैर मर्द के साथ तालुक थे ,वो अग्निहोत्री जी का ही कोई मुलाजिम था पहले ,उनके मौत के समय से ही गायब था ,वकील साहब को इस बात का पता चल गया तो उन्होंने उसे नॉकरी से निकाल दिया था उसके बाद से ही उसका कोई पता नही चला ,हम आज भी उसे ढूंढ रहे है शायद वकील साहब ने इन सब चीजो के कारण ही आत्महत्या की हो और उस इंसान ने वकील साहब की बीवी को भी मार दिया हो ,हमारा प्राइम सस्पेक्ट तो वही इंसान है “

“जी क्या नाम था उस शख्स का .??”

“अतुल वर्मा “

“ओके क्या मुझे उसके घर का अड्रेस मिल सकता है कौन कौन है उसके घर में “

“जी बीवी और बच्चे है उसके ,लेकिन आपको इस केस में इतना इंटरेस्ट कैसे जाग गया “

“असल में मुझे हमेशा से लगता है की वकील साहब ने आत्महत्या नही की बल्कि उनका मर्डर किया गया था ,और इसका लिंक मेरे पिता जी के मर्डर से भी हो सकता है “

इतना कुछ होने के बाद मुझे इस बात का इल्म हो गया था की विवेक को मारने वाला शख्स ही इस पूरे फसाद की जड़ था ..

“जी बिल्कुल अगर ऐसा है तो मैं आपको उसका अड्रेस सेंड कर दूंगा “

“जी धन्यवाद “

थोड़ी देर बाद मेरा फोन बजा ,निकिता दीदी ने फोन किया था ,

“भाई मा को होश आ गया है “

उनका ये कहना था की दिल को एक सकून सा मिल गया ,मैं तुरंत ही हॉस्पिटल के लिए निकल गया ...

 
अध्याय 40

मुझे देखते ही माँ की आंखे जैसे फुट पड़ी थी ,मैं सीधे उनसे लिपट गया था ,दोनो ही आंखों में आंसू की धार बरस रही थी ,यंहा मेरे परिवार के सभी लोग मौजूद थे ,मेरी सभी बहने थी जिनका रो रो कर बुरा हाल पहले ही हो चुका था,मेरे साथ आये भैरव अंकल भी थोड़ी देर खड़े सब कुछ देख रहे थे ..

थोड़ी देर बाद माँ थोड़ी सामान्य हुई ..

उन्होंने अंकल को देखा

“थैंक्स भैरव मेरे बच्चों को सम्हालने के लिए “

अंकल कुछ ना बोले बस उन्होंने हा में हल्के से सर हिलाया

रात काफी हो चुकी थी मैंने बहनो को घर भेज दिया था ,मैं हॉस्पिटल में ही रुक गया था ..

मन में उनसे कहने के लिए ढेरो सवाल थे ,सबसे बड़ा सवाल ये था की क्या मैं भैरव सिंह का खून था ,लेकिन मेरे सभी सवाल माँ की इस हालत के सामने मुरझा से गए थे मैं पहले उन्हें स्वस्थ्य देखना चाहता था,इस हालत में जबकि वो खुद शारीरिक और मानसिक दुख से गुजर रही थी मैं और कोई सवाल पैदा कर उनकी दशा को बिगड़ना नही चाहता था …..

मैं उनसे हल्के फुल्के बाते कर रहा था ..

“तो आज तुम ऑफिस गए और इन्वेस्टर्स के साथ मीटिंग भी किया ,कैसा रहा “

माँ अब तक कुछ शांत हो चुकी थी

“बढ़िया था माँ,सभी ने मुझे सपोर्ट किया खास कर भैरव अंकल ने और समीरा ने “

समीरा का नाम सुनकर माँ का भी चहरा उतर गया था ..

“ह्म्म्म “वो बस इतना ही बोल पाई तभी कमरे में रश्मि दाखिल हुई साथ ही उसकी मा भी थी ,रश्मि की माँ अर्चना माँ की अच्छी सहेली भी थी तो मैंने दोनो को बात करने के लिए छोड़ दिया और मैं रश्मि के साथ वंहा से बाहर आ गया ..

“मैंने तुम्हारे और निशा के लिए *** कॉलेज का फार्म भर दिया है “

रश्मि ने मुझे देखते हुए कहा ..

“थैंक्स यार ,मुझे समझ नही आ रहा है की ये सब कैसे मेंटेन करूँगा,पढ़ाई भी पूरी करनी है ,बिजनेस भी सम्हलना है और साथ ही मेरे दुश्मन को भी ढूंढना है जिसने ये सब किया है,वो आज भी जिंदा है और शायद हमारे ऊपर नजर भी रखे है ,कभी कभी तो कुछ भी समझ नही आता “

रश्मि ने मेरे कंधे पर अपना हाथ रखा

“सब कुछ ठीक हो जाएगा राज तुम फिक्र मत करो ,मैं जानती हु की तुम कितने बहादुर हो और कितने टैलेंटेड ,आखिर तुम्हारे पास तुम्हारे बाबा जी की दी शक्तियां भी तो है ..”

इतने दिनों के बाद मुझे ये याद आया की मेरे पास कुछ अमानवीय शक्तियां भी है ,लेकिन लकड़ी के जाने के बाद उसपर ध्यान भी नही जाता था …इतने दिनों के बाद मुझे बाबा जी की भी याद आयी ..

रश्मि ने मुझे चुप देखकर फिर से कहा

“एक बार उनसे मिल आते है ,तुम्हारे साथ इतना कुछ हो गया और उन्हें खबर भी नही होगी ,”

मैंने हा में सर हिलाया

“कल चले ,मैं पापा से बोलकर हेलीकाफ्टर का इंतजाम कर देती हु”

“ह्म्म्म कल चलते है “

रश्मि ने फिर से मेरे कंधे पर अपना हाथ रखा

“राज यार तुम ही ऐसे दुखी रहोगे तो सबको कौन सम्हालेगा ,तुम्हे ही अपने परिवार को और बिजनेस को सम्हलना है और साथ अपने आप को भी ...इतना टेंशन मत लो ..”

मैंने उसे देखकर एक स्माइल की

“कल चलते है बाबा जी के पास “

***********

सुबह के 6 ही बजे थे और मैं ,रश्मि और टॉमी के साथ बाबा जी के पास था ,

सूरज अभी अभी उगा ही था हमे देखकर उनके चहरे में चिर परिचित सी मुस्कान खिल गई …

“आओ आओ राज इतने दिनों के बाद सब ठीक तो है ??”

ये कहते हुए भी उनके चहरे में मुस्कान थी जैसे वो जानते हो की सब कुछ ठीक नही है …

हम उनके साथ थोड़ी देर बैठे फिर बाबा जी के हुक्म के अनुसार रश्मि टॉमी के साथ वंहा से घूमने चले गई

और मैंने बाबा जी को पूरा वृतांत बात दिया ..

“ह्म्म्म तुमने अपनी लकड़ी खो दी ,तो क्या तुम नई लकड़ी लेने आये हो ??”

“नही बाबा जी मैं तो बस आपसे मिलने आया हु “

“अच्छी बात है ऐसे भी मैं तुम्हे कुछ नही देने वाला “

वो जोरो से हंस पड़े ,मुझे समझ नही आया की क्यो ?

“राज जो भी तुम्हारे साथ हो रहा है उसे अपनी परीक्षा ही समझो ,शायद तुम्हे ये जानकर आश्चर्य हो लेकिन अब तुम पहले से भी ज्यादा ताकतवर हो चुके हो ,हा दैवीय शक्ति नही लेकिन राक्षसी शक्तियों के द्वारा ,अब शक्ति कैसी भी हो वो शक्ति ही होती है ,कई ऐसे अघोरि और तांत्रिक लोग भी होते है जो की राक्षसी शक्ति से ही लोगो का भला करते है और कई ऐसे लोग भी होते है जो की दैवीय शक्ति के बावजूद लोगो को तकलीफ ही देते है ,तो तुम्हे अपनी शक्तियों का इस्तमाल करना चाहिए तुम्हे फिक्र करने की कोई जरूरत नही है ,तुम्हरी शक्तियां पहले से बढ़ी ही है कम नही हुई है ,जन्हा तक उस अघोरी और उसकी साधना की बात है तो ऐसी साधना करने वाले अघोरियों का एक समुदाय है जो शैतानो से अपनी ताकत प्राप्त करते है ,उनके एक मुख्य गुरु मुझे हिमालय प्रवास के दौरान मिले थे ,देखने में खतरनाक थे लेकिन दिल के वो भी एक संत ही थे ,मेरे ख्याल से तुम्हे उनसे मिलना चाहिए वो कुछ मदद कर दे “

मैं उन्हें आशा से देखने लगा ,और वो बोलते गए

“लेकिन वो तुम्हे उस अघोरी तक ही पहुचा पाएंगे ,उस कातिल तक नही जो ये सब कर रहा है ,क्योकि जन्हा तक मैं उन अघोरियों के बारे में जानता हु वो अपनी शक्तियों का उपयोग किसी नेक काम में ही करते है ,हा उनका शक्ति प्राप्त करने का तरीका जरूर गलत होता है...और वो किसी से व्यक्तिगत दुश्मनी नही निकालते,जैसा तुम्हारे साथ हो रहा है ,तो इस बात से इत्मीनान रखो उस अघोरी का तुम्हारे पिता की हत्या से कोई संबंध नही है ,वो हत्यारा जरूर अतीत के पन्नो में ही छिपा होगा जिसे तुम्हे ढूंढ कर निकालना होगा,जैसा तुमने मुझे बताया उसके अनुसार तुम्हे अपने माँ के बारे में पता करना होगा ,वही उस वकील और उससे जुड़े लोगो के बारे में भी और साथ ही साथ उसकी पत्नी के उस आशिक के बारे में भी ,अपने पिता से संबंधित लोगो को बारे में भी पता करो और भैरव सिंह पर इतना भी विस्वास करना भी ठीक नही है ,वो भी तुम्हारी मा को चाहता था तो कातिल तो वो भी हो सकता है,और समीरा भी ,समीरा और भैरव के पास तुम्हारे पिता और तुम्हारे परिवार का कत्ल करने की पर्याप्त वजह भी है ,मेरे ख्याल से इस मामले में तुम्हे डॉ चूतिया और काजल की मदद लेनी चाहिए,वो एक जासूस भी है और वो तुम्हारी मदद कर सकते है ..”

मैं बस हा में सर हिलाता रहा

“और मैं तुम्हे अघोरी गुरु का पता बताता हु जब तुम्हे उस अघोरी के बारे में जानने की इक्छा हो तो उसके पास चले जाना ,लेकिन अकेले ही जाना …”

उन्होंने कोई पता नही दिया बल्कि अपने हवन कुंड से कुछ राख निकाल कर मंत्र पढ़कर कागज में बांधकर दे दिया साथ ही एक मंत्र भी लिखकर दिया

“इस राख को अपने मस्तक में लगा लेना और थोड़ा मुह में डालना और फिर इस मंत्र का जाप करना वो तुम्हे अपने पास बुला लेगा “

वो फिर से मुस्कुराने लगे ,

,मुझे लगा था की बाबा जी के पास आकर मुझे समस्या का कोई समाधान मिलेगा लेकिन समस्या जस की तस थी बस कुछ राह जरूर मिल गए थे …...और सबसे बड़ी चीज मिली समस्याओं से लड़ने का हौसला….

 
अध्याय 41

एक नए जोश के साथ मैं फिर से अपने काम में भिड़ चुका था ,मेरे पास जो भी जानकारी थी उनके बेस में मुझे आगे बढ़ना था ,बाबा जी के पास से आने के बाद मैंने पहला काम किया की मैं डॉ चूतिया से मिलने पहुच गया ..

वंहा मेडम मेरी ने मेरा स्वागत एक शरारती मुसकान के साथ किया लेकिन अभी मेरा फोकस अलग जगह पर था ..

मैंने डॉ को सभी बाते बताई ,और ये भी की भैरव ने क्या कहा था,और साथ ही बाबा के बारे में भी और अतुल वर्मा के बारे में भी…

उन्होंने एक फोन लगाया और मुझे कहि ले गए ,1 घण्टे गाड़ी चलाने के बाद हम एक घर के सामने खड़े थे ..

“ये हमारा वर्किंग प्लेस है ,सिर्फ जासूसी के लिए “

उन्होंने मस्कुराते हुए कहा …

कमरे का दरवाजा काजल ने खोला और मुझे सारी बाते समझ में आ गई ..

“वेलकम राज “

“ओह तो आप दोनो फिर से साथ में काम करने लगे ?”

मैंने मुस्कराते हुए काजल को देखा वो हमेशा की तरह हसीन लग रही थी

“बिल्कुल थैंक्स टू यु ..”उसने मुस्कुराते हुए जवाब दिया

वो हमे एक कमरे में ले गई जन्हा एक बड़ा सा बोर्ड लगा हुआ था और उसमे मुझसे संबंधित बहुत सारी बाते लिखी थी ..मैं बिल्कुल ही आश्चर्य से इसे देखने लगा ….डॉ ने बोलना शुरू किया

“राज किसी भी मिस्क्ट्री को साल्व करना हो तो एक एक चीज को गहराई से समझना जरूरी है ,इसके अलावा मानव की आंतरिक भावनाओ को भी समझना चाहिए ,अधिकतर क्राइम मानसिक भावनाओ के कारण ही किया जाता है,तुम्हारे केस में हमे अतीत में जाना होगा,तुम्हारे बारे में हमारे पास जानकारी है ,तुम्हारे परिवार के बारे में हमारे पास जानकारी है लेकिन ..लेकिन हमारे पास कई पर्सनल जानकारी नही है ,खासकर जो चीज घूम फिर कर सामने आ रही है ,तुम्हारी माँ का अतीत….वो तो तुम्हे ही उनसे पता करवाना होगा,तुमने अतुल वर्मा वाली चीज नई बताई है मुझे लगता है की इससे कहानी में नया ट्विस्ट आने वाला है ,उसके बारे में हम आज से ही पता करना शुरू कर देते है बाकी जानकारियां निलवाने के लिए हमने आदमी रख छोड़े है ,उनसे अभी इनफार्मेशन आने में समय है ..”

उनकी तैयारी देखकर मैं खुश हो गया था ..

“डॉ साहब आप मेरे लिए इतना कुछ कर रहे हो ,वो भी बिना किसी स्वार्थ के ,मैं आपका आभारी हु ..मैं ये अहसान तो नही चुका सकता लेकिन …..लेकिन मैं आपको फीस जरूर आफर करना चाहूंगा “

मेरी बात सुनकर डॉ खिलखिला कर हंस पड़े

“अरे यार तुम्हे क्या लगता है की हमारे पास पैसों की कमी है ??”

“नही सर लेकिन इन सबमे भी तो पैसे खर्च होते होंगे “

उन्होंने एक बार काजल की ओर देखा काजल ने मस्कुराते हुए हामी भर दी …

“ओके तुम्हे जो फीस देनी हो दे देना लेकिन काम होने के बाद ,अभी तो केस में फोकस करना चाहिए “

उन्होंने बोर्ड को ध्यान से देखा मैं भी उसे ध्यान से देख रहा था ..

मेरे बचपन से लेकर आज तक की चीजे उसमे लिखी गई थी ,मेरे पूरे परिवार का बॉयोडाटा मौजूद था साथ ही भैरव सिंह ,रश्मि,के परिवार का भी और यंहा तक की समीरा ,चन्दू ,कान्ता रामु ,अब्दुल शबीना सभी कुछ वंहा मौजूद था …

आज डॉ ने उसमे विवेक अग्निहोत्री उसकी बीबी और अतुल वर्मा को भी ऐड कर दिया ..

“काजल सिटी SP को काल करो और अतुल वर्मा की डिटेल मंगवा लो और अपने एक आदमी को उसकी जानकारी लेने उसके घर भेज दो ,याद रहे वो आदमी पुलिस वाला नही होना चाहिए,ना ही उसके परिवार को ऐसा लगे की कोई उनकी पुछताज कर रहा है,कोई दूसरा जरिया अपनाना होगा वरना सही तरीके से सच सामने नही आएगा ..”

डॉ की बात सुनकर काजल ने हा में सर हिलाया

“पहले पता तो चले की उसका परिवार किस तरह का है उसी हिसाब से आदमी भेजूंगी “

काजल ने क्या कहा मुझे अभी समझ नही आया था लेकिन मुझे इन दो शख्स की काबिलियत में जरूर यकीन था ..

**********

मुझे आज अपना आफिस भी जॉइन करना था ,मैंने अपनी बहनो को सख्त हिदायत दे रखी थी की हॉस्पिटल में माँ को बिल्कुल भी अकेला ना छोड़े ,कोई ना कोई उनके साथ जरूर रहता था ,साथ ही मैंने अपने परिवार पर सिक्युरिटी भी बढ़वा दी थी ...हर गाड़ी को मेटल और बम्ब डिटेक्टर से पहले चेक किया जाता था ,पुरे घर में कैमरे से नजर रखी जा रही थी ,अपने तरफ से मैं कोई दूसरा हमला सहने की हालत में नही था और इसलिए पूरी सुरक्षा के इंतजाम कर रखे थे…..

शाम हो चुका था तब मैं ऑफिस पहुचा ..

वंहा समीरा ने मेरा स्वागत किया ..

“आइये राज सर आपका स्वागत है ..”उसके चहरे में वही चिर परीचित मुस्कान थी जो आपको किसी भी होटल के रिसेप्शनिस्ट के चहरे में मिल जाएगी ,अंदर से कोई खुशी नही लेकिन मुस्कराना उनका काम होता है….

“प्लीज समीरा मुझे सर मत कहा करो और साथ ही मुझे ये फार्मेलटी भी नही चाहिए ,मेरे साथ दोस्तो वाला विहेब करो ना की बॉस वाला “

इस बार फिर से समीरा मुस्कुरा उठी लेकिन अबकी मुस्कुराहट असली थी ..

“तुम अपने पिता पर ही गए हो उन्होंने भी कभी मुझे बॉस जैसा ट्रीट नही किया “

वो मुझे मेरे केबिन में ले जाते हुए बोली

“हा तूम दोनो के किस्से तो मशहूर है ,मेरी माँ तूमसे नफरत करती है “

पता नही क्यो लेकिन मैंने ये बोल ही दिया

वो एक बार तो आश्चर्य से मुझे देखने लगी फिर हल्के से हंसी

“पहले ये मेरा काम था राज लेकिन बाद में मेरे लिए ये पर्सनल चीज हो गई ...तुम्हारे पिता एक अच्छे इंसान थे और शायद इसलिए मैं कंपनी की शेयर होल्डर होने के बावजूद उनकी पर्सनल सेकेट्री के रूप में रही और आज भी यही हु तुम्हारे साथ …”

एक अजीब सा भाव था उसकी बात में ,एक अजीब सा अहसास मुझे समझ नही आया की मेरे पिता इसके लिए इतने इम्पोर्टेन्ट क्यो थे ….

मुझे समझ ही नही आ रहा था की मैं उसका क्या जवाब दु ,मैंने ये तो सुन रखा था की मेरे पिता में एक गजब का आकर्षण था और लड़कियो का उन्हें शौक भी था लेकिन कोई उनकी इतनी इज्जत करता होगा ये मैंने नही सोचा था ..क्योकि उनके इस आकर्षण और शौक की कीमत मेरे माँ ने चुकाई थी अपने पति की बेवफाई को उन्हने जीवन भर नजरअंदाज किया था …

“कहा खो गए ,केबिन कैसा है तुमने बताया नही “

मैंने के बार पूरे केबिन को गौर से देखा ,बड़ा सा कमर था बड़े ही तरीके से सवार गया था,एक तरफ दीवाल की जगह कांच लगा हुआ था जन्हा से पूरे शहर का मंजर दिखाई देता था उसके सामने एक बड़ा सा टेबल ,टेबल अर्द्धवृत्ताकार था और उसमे एक डेस्कटॉप के अलावा कुछ भी नही था ,बाजू की दीवाल पर किताबो को बड़े ही सही तरीके से सजाया गया था ,दूसरे बाजू की दीवार खाली थी लेकिन मेरी पारखी आंखों से कुछ नही छिप पाया ,

मैंने उस खाली दीवार कोई ध्यान से देखा ..

“क्या ये कोई सीक्रेट दरवाजा है “

मैंने उसे ध्यान से देखते हुए कहा

“इम्प्रेसिव ...तुम्हारे पिता सही कहते थे तुम जंगल से आने के बाद से कुछ ज्यादा ही इंटेलिजेंट हो गए हो “

समीरा किताबो के पास आयी और एक किताब को हटाकर उसके पीछे लगे एक बटन को दबाया और खाली दीवार में बना दरवाजा खुलता चला गया ,अंदर एक पूरा कमरा था .एक बड़ा सा बिस्तर और बार काउंटर जिसमे महंगी शराबे रखी गई थी ,कहने की जरूरत नही है की ये मेरे पिता के मौज मस्ती के लिए बनाया गया था ….

मैंने उस बिस्तर को ध्यान से देखा,एक गोल बिस्तर था जिसमे सफेद रंग की बेडसीट लगी हुई थी ,इस बिस्तर में ना जाने कितनी लडकिया नंगी हुई हो ...ये सोचकर ही मेरे अंदर के शैतान में थोड़ी जागृति आई और मेरा लिंग फुंकार मारने को खड़ा होने लगा ,लेकिन अभी ये सही जगह नही थी ..

मैं खुद को सम्हलता उससे पहले ही समीरा कमरे में बने बार काउंटर की ओर बड़ी ..

“कुछ पीना चाहोगे ??”

वो जब मेरे सामने से निकली तो मेरी नजर उसके मटकते हुए नितंबो में चली गई ,उसने एक सेकेट्री वाली ड्रेस ही पहनी थी ,मिनी स्कर्ट शर्ट और एक कोर्ट,सभी कुछ काले रंग का था ,टिपिकल ऑफिसियल ड्रेस ...मुझे कुछ ना बोलता देखकर वो अचानक से मुड़ी,मेरी नजर अभी भी उसके मटकते हुए नितंबो पर थी,

“माय गॉड ,तुम सच में अपने पिता की कार्बन कॉपी हो “

वो खिलखिलाई और मुझे होश आया

“सॉरी .वो कुछ भी बना दो “

उसने मुस्कुराते हुए एक दो पैक बनाये और एक मेरी ओर किया और खुद जाकर बिस्तर में बैठ गई ,मैं भी उसके बाजू में बैठ गया था …..

हम दोनो ही चुप थे ,समीरा ने अपना कोर्ट उतार कर रख दिया ,उसके उजोरो अब शर्ट को फाड़कर बाहर आने को बेताब लग रहे थे..

मुझे अपने वक्षो को घूरता हुआ देखकर वो मुस्कुराई

“क्या देख रहे हो “

“सोच रहा हु की बेचारों पर कितना जुल्म हो रहा है ,इन्हें आजाद ही कर दो ,बेचारे कसे कसे तड़फ रहे होंगे “

मेरा शैतान जाग चुका था और अब शर्म ,डर और झिझक जैसी चीजे तेल लेने जा चुकी थी ,लिंग सरिया बन चुका था ,और आंखे अभी भी समीरा के मादक वक्षो पर थी ..

मेरी बात सुनकर वो जोरो से हँस पड़ी

“यार तुम तो कुछ ज्यादा ही फ़ास्ट हो “

अब मेरी नजर उसके नजर से मिली ,लगा जैसे मैं उसे सच में पाना चाहता हु ,और कुछ हुआ वही वो उस दिन निकिता दीदी के साथ हुआ था ,मेरी एक इक्छा और वो जैसे मुझसे सम्मोहित सी हो गई,उसके चहरे का रंग बदल गया था उसकी हँसी गायब हो गई थी ,उसकी आंखे जैसे आश्चर्य से भर गई थी ,वो बस मुझे देखे जा रही थी जैसे समझने की कोशिस कर रही हो की आखिर उसे हुआ क्या है ..

“तुम क्या कर रहे हो मेरे साथ ..”

उसने पूछ ही लिया ,मुझे समझ आ चुका था की ये मैं ही कर रहा हु मेरे अंदर की शैतानी शक्ति से …

मैं मुस्कराया

“तुम्हे पागल बना रहा हु ..”

मैंने अपने पैक को एक बार में खत्म किया और उसके ग्लास को भी लेकर जमीन में रख दिया ,मेरे हाथ उसके वक्षो पर पहुच गए थे,मैंने एक बार उसे जोरो से दबाया ,

“वाह..”

“ओ तुम सच में बहुत ही फ़ास्ट हो ,मैं खुस को कंट्रोल क्यो नही कर पा रही “

“क्योकि तुम भी यही चाहती हो “

मैंने उसकी आंखों में देखते हुए कहा और उसके गले में अपने होठो को रख दिया ,वो जैसे पिघल ही गई थी

“उम्म क्या कर दिया तुमने राज “उसने मेरे बालो को अपने हाथो से जकड़ लिया ,मेरे हाथ उसके वक्षो को जोरो से दबा रहे थे वही मेरे होठ उसके गले को गीला कर रहे थे …

एक एक करके मैंने उसके शर्ट के सारे बटन खोल दिए ,वो बस ब्रा और स्कर्ट में थी ,मैंने हाथ बढ़ाया और उसके स्कर्ट से उसकी जांघो को सहलाता हुआ उसके जांघो के बीच तक ले गया ,उसकी पेंटी में फंसा हुआ उसके यौवन का द्वार अभी आश्चर्य जनक रूप से गीला हो चुका था ,मैंने हल्के से उसकी पेंटी को हटाया और उंगली को उसकी योनि पर ले गया ..मैं हल्के से सहलाया ही था

“मार डालोगे क्या “

वो बिस्तर में ढेर हो गई ,और वासना की आग से जलने लगी ,मैं उसके ऊपर आ चुका था ,उसके ब्रा के हुक को खोलकर आराम से उसके वक्षो को अपने मुह में डालकर चूसने लगा..वो और भी तड़फने लगी ,

तभी ...तभी मेरा मोबाइल बजा ,ऐसा लगा जैसे किसी ने खड़े लंड में धोखा कर दिया हो ..

“अभी कौन है मादरचोद “मैंने झल्लाते हुए स्क्रीन को देखा

देखा तो नंबर डॉ साहब का था ..

“हैल्लो सर “

“राज अतुल का पता लगाया हम लोगो ने ..तुम कहा हो अभी “

ऐसा लगा जैसे कीसी गुब्बारे से पूरी हवा एक बार में ही निकाल ली गई हो …..

“जी ओफिस में “

“ओके तुरंत यंहा आ जाओ “

“जी जी अभी आता हु “

बेचारी समीरा मुझे ऐसे देख रही थी जैसे किसी ने बच्चे के हाथो से चॉकलेट छीन लिया हो …...

 
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