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जुनून (प्यार या हवस) complete

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अब जग्गू एक जोरो की हँसी हँसता है,और पुनिया को देखकर उसे उठाकर पास ही बैठा देता है और खुद वो उसी जगह पर बैठ जाता है जहा पर वो पहले था,

“तू तो गांव और मुझे छोड़कर चला गया ,और मैं इस जख्मी पैरो को लेकर कहा जाता ,मैं निराश सा जंगल में आकर रहने लगा,मेरी बीवी को वो हरामी अपनी रखेल बना कर रखे थे,उसके पैसे से ही घर चल रहा था,मेरी निराशा जब ज्यादा बढ़ गयी तो मैंने अपनी जान देने की ठान ली और जंगल में चलता हुआ सोच रहा था की किसी जंगली जानवर के सामने अपनी जान दे दु ,पर इसी गुफा से एक तांत्रिक निकाला उसे देखकर मैं डर से काँपने लगा पर मुझे याद आया की मैं तो यहां पर मारने आया हु तो मैं इससे क्यो डर रहा हु ,वो वही तांत्रिक था जिसकी खोज में तू यहां आया है,उसी नरभक्षी तांत्रिक की सभी जगह पर इतनी दहसत है ,आज लोग मुझे वही समझते है पर वो मैं नही बल्कि मैं तो उसका शिष्य हु,वो तो कब के मर चुके है .,,,मेरी हालात को देख और मेरे साहस को देख उसने मुझे यहां आने का कारण पुझा मैंने उन्हें सब बताया वो बोले की अगर तू मरने मारने को तैयार है तो मैं तुझे ये विद्या सीखा दूंगा,मेरा कोई भी शिष्य नही है सब मुझसे इतना डरते है ,

मुझे तो मरना ही था मेरे भाई मैं उसकी बात मानकर ये विद्या सिख ली और देख आज तेरे भाई से दुनिया डरती है ,”

एक जोरो की हँसी माहौल में गूंज गयी ….

पुनिया के चहरे पर भी एक मुसकान आ गयी …

“मैं भी उनके अत्याचारों को नही भुला हु,और उनसे बदला लेने को तडफ रहा हु….”

उसने अपनी जेब से दो फ़ोटो निकाली ,और गज्जू को दिखाया जिसे देखकर उसके चहरे में चमक आ गयी …

“ये उनके घर की लडकिया है,ये निधि है अभी मासूम है ,ये वीर की बेटी है,और ये जिसका शायद तुझे बेसब्री से इंतजार होगा,इसका नाम खुसबू है ये गजेंद्र की बेटी है….”

गज्जू के चहरे में बदले की आग धधक उठी थी वो चिल्ला उठा …

“इनका भी वही हश्र होगा जो हमारी बीबियों और बहनों का उन्होंने किया था,चहरे तो मासूम लग रही है इनकी सील तो मैं तोडूंगा,और इन्हें शैतान से चुदवाऊंगा ….इनकी बली से शैतान मुझे और भी शक्ति देगा जब वो इन दोनो कुवारी लड़कियों को भोगेगा..हा हा हा ….हम इन्हें अपनी रंडिया बना कर रखेंगे…”

ऐसी हँसी की दिल दहल जाय,शैतानियत उनके चहरे से टपक रही थी…

“हा जग्गू ये दोनो अभी तक सील बंद है,इसे हमारे बदले के लिए ही बनाया गया है…(उन्हें नही पता था की निधि अब कुवारी नही है,अजय ने ही अपनी बहन को भोगा है,और खुसबू का कोई भरोसा नही की कब अजय उसे भी भोग ले)”

“पुनिया मेरे भाई ना जाने कितने दिन हो गए किसी लड़की को भोगे हुए इन कच्ची कलियों का तो मैं मांस ही उतार दूंगा...जल्दी से इनको मेरे पास ले के आ फिर कोई भी हमे नही रोक सकता उन्हें बर्बाद करने से …”

फिर से दोनो की हँसी से पूरी गुफा गूंज उठी …..

सभी लोग घर पहच चुके थे,किशन को कलवा ने खुशखबरी दी जिसे सुनकर वो झूम गया...सभी एक दूजे से मिलने में व्यस्त थे,कल वो समय तय किया गया था जब तिवारियो का पूरा परिवार ठाकुरो के घर आने वाला था ,सभी बहुत ही जोश से भरे हुए थे ,यहां तक की वहां काम करने वाले भी जोश से भरे थे,डॉ को भी बुलाया गया था,वो अपनी सेकेट्री मेरी के साथ आने वाले थे,इंस्पेक्टर ठाकुर ,कुछ नेता गण,सभी पार्टी के मंत्री,यहां तक की मुख्यमंत्री जी भी, धनुष और निधि की पार्टी के लोग,जिनमे अभिषेक प्रमुख था,कॉलेज की प्रिंसिपल मेडम काव्या सेठ सभी को बुलाया गया था,कुल मिलाकर एक जश्न का आयोजन किया गया था,उस क्षेत्र के सबसे शक्तिशाली दो परिवारों के मिलान का समारोह था,तैयारिया जोरो पर थी और सभी बहुत ही खुस थे,वहां के लोग भी सालो की दुश्मनी के समाप्त होने से खुश थे……..

किशन अब बस सुमन से मिलना चाहता था,वो उसके कमरे के पास ही फटक रहा था लेकिन सुमन की मा और उसका भाई अंदर थे,वो बाहर कभी आता एक नजर डालता और फिर चला जाता,वही उसकी इस हरकत को रानी ने पकड़ लिया…

“क्यो मेरे प्यारे भइया जी ,भाभी से बात किये बिना चैन नही मिल रहा है क्या “

किशन उसे देखकर चौक गया

“नही यार मैं तो बस यहां यू ही घूम रहा था,”

‘“अच्छा अब बनो मत सब जानती हु मैं,चलो मेरे साथ “

वो उसका हाथ पकड़ कर उसे सीधे सुमन के कमरे में ले जाती है वहां सुशीला ,वरुण (सुमन का छोटा भाई ),और निधि बैठे हुए थे,साथ ही सुमन भी थी सभी अपनी बातो में खोये थे वही वरुण कोई किताब निकाल कर पड़ रहा था…

“चाचीजी देखो आपका दमांद सुमन से मिलने के लिए कितना बेचैन हो रहा है,”

रानी के ऐसा बोलने से ही किशन की सांसे रुक गयी ,वही सभी हँसने लगे,घर में सभी को ये पता चल चुका था,और सभी इस रिस्ते से काफी खुश भी थे...सुशीला उठी और भरे हुए नयन से किशन को अपने गले से लगा लिया,

“भगवान इतनी खुसी एक साथ दे रहा है कही नजर ना लग जाय,”वो रोते ही अपने आंखों से काजल निकल कर किशन के माथे के पास लगाती है,किशन तो इस बात से फुला नही समा रहा था पर सुमन के चहरे पर वो खुसी नही दिख रही थी…

“चल अपनी जीजा जी को प्रणाम कर “सुशीला ने वरुण से कहा पर वो अभी भी अपनी पुस्तक में खोया था,

“ये तो ना पुस्तक मिल जाय तो इसे कुछ भी नही सूझता “

“लगता है किताबी कीड़ा है “निधि ने कहते हुए वरुण के सर पर एक हल्की सी चपत मार दी,वरुण उसे गुस्से से देखता है ,पर अगले ही पल वो फिर से किताब में घुस जाता है….

“बेटा अब बात तो तुम्हे जिंदगी भर करना है तो अब थोड़ा सबर रखो …”सुशीला ने हँसते हुए कहा जिससे किशन शर्मा गया,

“जी चाची “

“चाची नही बेटा अब मुझे मा कहकर पुकारा कर “

“जी माजी “किशन वहां से चला जाता है .

वही निधि और रानी सुमन को छेडने लगे पर वो बेचारी क्या करती चाह कर भी उसके चहरे पर वो ख़ुर्शी नही आ पा रही थी जो होनी चहिये थी….

रात हो चली सभी अपने कमरे में थे,सोनल विजय के पास चली गयी थी और रानी किशन के पास ….निधि तो अजय के साथ ही सोती थी..

आजय के कमरे में

“भइया कितना अच्छा है ना ,अब किशन भइया की शादी हो जाएगी …”निधि ने अजय के सीने में हाथ फेरते हुए कहा …

“हा बहन सचमे बहुत खुशी हुई ये जानकर “

“लेकिन भैया आप कब करोगे शादी ,नियम से तो आपकी पहले होनी चहिये ना आप तो सबसे बड़े हो “

अजय निधि को देखता है जो हल्के हल्के से मुस्कुरा रही थी,

“बहुत बड़ी हो गयी है तू बड़ी बड़ी बातें करने लगी है…”अजय उसे अपने ऊपर ले लेता है,हमेशा की ही तरह निधि ने बस एक स्कर्ट पहना था वही अजय पूरा नंगा ही था,उसके ऊपर आने से उसकी कमर अजय के लिंग को छू जाती है ,अपनी प्यारी बहन के नाज़ुकता का अहसास अजय को रोमांचित कर देता है,वो उसे अपने ऊपर भीच लेता है,कितनी प्यारी और नाजुक थी निधि जो इस तरह अजय के मर्दाने और मजबूत बांहो में सोई थी,अजय के सीने के घने बाल निधि के छातियों से रगड़ खाकर निधि और अजय दोनो को ही एक सुखद अहसास दे रहे थे…

निधि अपना सर ऊपर उठाती है और अजय की आंखों में देखती है,हमेशा की तरहः ही उसके आंखों में बस प्यार ही दिखता है ,वो चंचल की कोमल सी प्यारी सी गुड़िया अजय के होठो को अपने नरम गुलाबी पतले से होठो से मिलती है…

अजय अब उसके होठो का रस पी रहा था ,दोनो ही एक दूसरे के प्यार के अहसास में गम थे,निधि अपने स्कर्ट को निकलने के लिए अजय से अलग हुई पर अजय ने उसे फिर से अपने ऊपर खिंच लिया और उसके मजबूत लोहे जैसे शरीर में निधि के कोमल यौवन से भरे जिस्म को छुपा लिया,

अजय का लिंग अब अपने बहन की योनि की गर्मी में भीगना चाहता था,वो अपनी अकड़ दिखा रहा था,उसने अपने लिंग को निधि के कोमल योनि के पास लाया ,उसकी योनि के घने बालो से रगड़ खा कर वो और भी अकड़ गया वही निधि भी अपने भाई का प्यार पाकर गीली हो गयी थी ,वो जोरो से अपने होठो को उसके होठों के अंदर करती है और अजय नीचे से अपने लिंग को निधि की गहराइयों में उतार देता है,ये इतना सहज और प्यार भरा अहसास था जिसमे ना तो कोई छल था ना ही कोई वासना….बड़ी आसानी एक अजय का पूरा लिंग उसके अंदर समा गया ,इतने दिन में दोनो लगभग रोज ही एक दूसरे को प्यार देते थे ,और इसी प्यार के कारण निधि की अनछुई योनि आज इतनी जवान हो गयी थी की अजय जैसे मजबूत लिंग को भी आसानी से अपने अंदर ले ले ,,,,अब दर्द का नाम तक उसे नही आता था ,आता था तो बस उस गर्म अहसास का मजा जो वो जिंदगी भर लेना चाहती थी……

निधि ने हल्की मदहोश आंखों से अजय को देखा ,उस आंखों में अब ना तो कोई शर्म थी ना ही कोई भी ग्लानि ,ना कोई वासना था तो बस अपने भाई के लिए वो असीमित प्यार जिसका बयान शायद वो लफ्जो में नही कर सकती थी और ये ही एक माध्यम था जिसके द्वारा वो अपने भाई से उस प्यार का जिक्र कर पाती थी ,ये उनके एक दूजे से प्यार को बयान करने का एक साधन ही था,वो बस अपने भाई के मजबूत बदन से लिपटी हुई उसके शरीर के मजबूती से गदगद हो रही थी ,

“खुसबू दीदी आपसे बहुत प्यार करती है भइया ,मेरे खातिर आप उनसे बात कर लेना “

वो सोए हुए ही अजय से कहती है ,

“कौन “

“सोनल दीदी की सहेली ,सोनल आप उससे मिले भी हो वो पब वाली लड़की याद है,सोनल दीदी आप से ये बात कहने से डर रही थी इसलिए सबने मुझे ये बात करने को कहा …….”

अजय के चहरे पर एक मुस्कान आ जाती है,

“जिसे मेरी बहने पसन्द कर ले उसे मुझे पसंद करने में कोई भी दिक्कत नही है ,पर जान मेरे ऊपर सबकी जिम्मेदारियां है,पहले अपनी प्यारी बहनों के हाथ तो पीले कर लू फिर अपने बारे में सोचूंगा “

वो निधि के चहरे पर एक प्यार भरा चुम्मन देता है,उसका लिंग जरूर निधि की योनि में समाया था पर उन्हें वासना के हिलोरों में नही बहना था उन्हें तो बस अपना प्यार देना था वो बस ऐसे ही रहते थे ,कभी धक्के देने की कोई भी जल्दबाजी कोई नही करता ,वो बस उस अहसास के साथ रहना चाहते थे…..

“लेकिन आप मिलोगे उनसे जल्द ही ,प्रोमिश करो “

निधि ने अपना सर उठाया और अजय को देखते हुए प्यार से कहा

अजय को उसकी मासूमियत देखकर उसपर बड़ा प्यार आया और उसकी आंखों में देखने लगा

“प्रोमिश मेरी जान “

और अजय उसके होठो पर ऐसे खाने लगा जैसे वो कोई बर्फी हो ….

इधर विजय के कमरे में

विजय काम निपटाकर आता है वो आज बहुत ही थक गया था सुबह से वो काम ही कर रहा था ,लेकिन कमरे में दाखिल होते ही उसकी आंखों में चमक आ जाती है ,सोनल के जिस्म को वो ऐसे देख रहा था जैसे की कोई अजूबा देख लिया हो वो लग भी तो कमाल रही थी ….

 
उसकी नाइटी से उसके शरीर का हर हिस्सा बड़ा ही मादक लग रहा है वो भी उसे देखकर खड़ी हो गयी और उसे ऐसे देखता पाकर थोड़ी शर्मा गयी पर फिर उसने अपनी बांहे फैला कर उसे अपने पास बुलाया ,विजय दौड़ता हुआ जाकर उससे लिपट गया,दोनो जैसे सदियों के बिछड़े हो एक दूजे से चिपक गए ,

“आज तो मेरी रानी बहुत ही सेक्सी लग रही है,इतने पतले कपड़े पहन के रहेगी तो मेरी भी नियत डोल जाएगी “

विजय ने उसे शरारती निगाहों से देखा

“मैं तो अपने भाई की ही हु,नियत डोले या कुछ भी हो जाय “

इसबार सोनल इमोशनल हो गयी थी ,उसकी आंखों में आंसू थे और वो फिर से विजय से लिपट गयी,विजय ने उसे अपने बिस्तर में लिटाया,उसके नाजुक जिस्म से आती हुई वो महक विजय के होश उड़ाने को काफी थे वो उसके बालो को सहलाता हुआ उसके यौवन को निहारता है और उसे ऐसे देखता पाकर सोनल भी शर्मा जाती है,और उसके गाल पर एक प्यारी सी चपत मार देती है,

वो सोनल के नितंबो को अपने हाथ में भर कर उसे अपने ऊपर ला देता है और उसके नितंबो को सहलाने लगता है ,सोनल थोड़ी गदराई थी ,उसके गोल नाजुक और भारी नितम्भ विजय को एक अलग ही अहसास दे रहे थे पर वो अहसास दूसरी लड़कियों से मिलने वाले हर अहसास से बहुत ही जुदा था,ना जाने आजतक उसने कितनी लड़कियों के साथ सेक्स किया था कितनो के जिस्मो से खेला था पर सोनल के साथ बात अलग थी उसके बदन को छूना उसके अंदर वासना को नही बल्कि एक अजीब से अहसास को जगती थी जिसे शायद लोग प्यार कहते थे,वो उसके लिए कुछ भी कर सकता था और सोनल भी उसके लिए कुछ भी कर सकती थी ,वो महज एक जिस्म नही थे वो भी बहन थे और उनका प्यार कोई वासना से भर हुआ खेल नही था बल्कि वो उस प्यार की अभिव्यक्ति थी जो वो एक दूसरे से करते थे,

सोनल की गोलियो को छुता हुआ विजय उसकी आंखों में खो गया,उसे अपनी बहन की आंखों में आया वो पानी पसंद नही आया वो उसे अपने होठो से पी गया ,

“हमे कितने दिनों तक अलग रहना पड़ता है भाई ,साले तेरे साथ सोने को तरस जाती हु “

“मैं भी जान “

“चल ना झूठे कही के ,तुझे दूसरी लड़कियों के साथ सोने में फुरसत मील तब ना तू मुझे याद करेगा “

“अरे इतनी सारी तो तेरी छमिया है यहां पर ,साले अय्याशी तू करता है और मुझे बोल रहा है की कोन सी लडकिया “

“नही जान अब कोई भी है,आख़िरीबार जो हुआ था वो रेणुका से हुआ था,शादी वाले दिन फिर तो कोई भी नही है,”

“अच्छा और सेठ मेडम ‘

“अरे उनके लिए तो समय ही नही मिल पा रहा है,अब सब ठीक हो गया तो अब शायद कुछ हो जाय “

“ओह तो मेरा शेर भाई कई दिनों का भूखा है “

:हा जान “

विजय ने मुह बनाते हुए कहा ,सोनल खिलखिलाकर हँस पड़ी ,और उसके गालो में एक प्यार भरी पप्पी दे दी ,

“ह्म्म्म तो मेरे भाई के भूख को मुझे ही मिटाना पड़ेगा,”उसने बड़ी ही शरारत भरे लहजे में कहा पर विजय उसे बड़े ही गंभीर भाव से देख रहा था ,

“क्या हुआ साले ऐसे क्यो देख रहा है,”

सोनल हल्के से फुसफुसाई ,और विजय उसे खीचकर अपने सीने से लगा लिया ,सोनल को भी उसके हालात का पता चल गया था वो भी बहुत ही सेंटी हो चुका था ,सोनल ने मजाक छोड़कर अपने भाई को प्यार देने की सोची और उसके होठो पर अपने होठो को सटा दिया,

विजय सोनल के होठो को भरपूर ताकत से खाने लगा जैसे की उसे और कभी ये नही मिलेगा,सोनल भी अपने प्यारे भाई पर अपना सबकुछ लुटाने को आमादा थी ,वो अपने शरीर को विजय से सटा ही दी और अपने जिस्म को उसके जिस्म में रगड़ने लगी,दोनो ही एक दूसरे में खो जाना चाहते थे और उन्हें भी वही एक तरीका पाता था…..

लेकिन एक रिस्तो की दीवार अब भी उनके बीच थी ,शायद मन के किसी कोने में….

विजय सोनल के नितंबो को सहलाने की बजाय अब उसे मसलने लगा था,वही सोनल के मुह से भी सिसकिया निकल रही थी ,उसे समझ भी नही आ रहा था की जो वो कर रही है ये सही है या गलत पर जो भी हो रहा है वो उसे सही गलत के दायरे से बाहर ही रखना चाहती थी ,इतने दिनों के बाद वो अपने भाई के साथ थी वो अपने को सही गलत के दायरे में बांधकर अपने भाई को प्यार से वंचित नही करना चाहती थी…

विजय के हाथ अब उसके नाइटी के अंदर थे ,सोनल की झीनी सी पेंटी से उसके कोमल शरीर का अहसास विजय को हो रहा था ,पहले की तरह आज वो वासना से भरा हुआ नही था ना ही उसमे कोई भी उत्तेजना आयी थी,वो तो बस सोनल को भरपूर प्यार देना चाहता था,जितना उसमे भरा है वो सब उसमे उढेल देना चाहता था…

उसका हाथ कब उसके पेंटी के अंदर चला गया उस पता भी नही चला,पुरानी आदते अपना असर जरूर दिखती है वही विजय के साथ भी हो रहा था,वो उसकी पेंटी को स्वाभाविक तौर पर ही उतारने लगा,वो तो बस सोनल के होठो के रस पीने में मगन था पर कब उसने उसके पेंटी की इलास्टिक को पकड़ कर सरकना शुरू किया उसे भी पता नही चला,हा ये सोनल को जरूर पता चला पर उसके होठो में और मन में बस एक मुस्कान आयी वो अपने भाई के आदत से वाकिफ थी,उसे पता था की उसे ये भी होश नही था की वो उसकी पेंटी उतार रहा है ,पर सोनल ने उसे नही रोका वो अब उसे रोकना ही नही चाहती थी ,ना जाने कब वो भी शादी के बंधन में बांधकर चले जाय और विजय से ऐसे मुलाकात कब हो ,वो अपना सब कुछ उसे देख देना चाहती थी पर उसे भी पता था की मर्यादाओ की दीवारे विजय को ही रोक देंगी उसे अपने भाई के प्यार पर पूरा विश्वास था,वो जानती थी की विजय का प्यार किसी वासना से प्रेरित नही है और वो अपनी सीमाओं को नही लांघेगा और अगर लांघेगा तो भी सोनल को वो सहर्ष स्वीकार था…

विजय उसे पागलो की तरह चुम रहा था,दोनो की ही आंखे बंद थी और कब विजय ने अपने नीचे के कपड़े निकल फेके उसे पता नही चला,अब दोनो जने नीचे से नंगे थे और उनके गुप्त कहे जाने वाले अंग अब गुप्त नही रह गए थे ,उनका मिलान हो रहा था वो एक दूजे में रगड़ खा रहे थे .पर इन बावरे प्यार के पंछियों को क्या फर्क पड़ने वाला था ,वो बस अपने प्यार की लहरों में सवार ना जाने कहा जाने को निकल पड़े थे ,ऐसे सफर पर जिसकी कोई मंजिल ही नही थी ,और जो उसकी मंजिल थी वो एक भाई-बहन के रिस्ते में जायज नही माना जाता था…….

सोनल की योनि और विजय के लिंग का टकराव जारी रहा पर प्यार का खुमार ऐसे छाया था की ना तो विजय के लिंग में कोई भी तनाव था ना ही सोनल के योनि में कोई गीलापन,दोनो बस एक दूजे को पकड़े हुए चुम रहे थे,लेकिन थे तो वो भी शरीर ही ना ...कब तक वो शरीर के बंधनो से बच सकते थे लगातार हो ने वाले टकराव ने आखिर धीरे धीरे विजय के लिंग में तनाव भरना शुरू कर दिया,जब हल्का ताना हुआ लिंग सोनल के योनि से टकराया तो उसे जैसे होश आया की वो क्या कर रही थी और ये सोचकर ही उसके योनि में अचानक ही एक दरिया सी बहने लगी वो विजय को जोरो से चूमने लगी,और जैसे ही वो विजय के बालो को अपने उंगलियों में फसाकर उसके चहरे की तरफ ऊपर बढ़ी उसके कमर ने ऊपर की तरफ गति की और विजय का तन चुका लिंग जो की सोनल के योनि के द्वार पर ही खड़ा था वो हल्के से योनि के अंदर चला गया ,

“आह ,मेरी जान “

सोनल के मुह से अनायास ही निकल गया ,लिंग अभी थोड़ा ही अंदर गया था पर सोनल की योनि अभी बहुत ही टाइट थी ,उसे अभी भी खुलने का मौका ही नही मिला था ,अचानक हुए इस झटके से विजय ने अपनी पुरानी आदत के अनुसार ही एक जोर का झटका दिए और इसबार उसका हाथ भी सोनल के नितंबो को थामे था,और ये झटका विजय के पूरे मूसल से लिंग को सोनल के अंदर पहुचा दिया ,वो लिंग जिसने खेली खाई भरीपूरी औरतों की सांसे रोक दी थी ,और चीख निकल दी थी आज उसकी सबसे प्यारी बहन की लगभग अनछुई योनि की दीवारों को चीरता हुआ अंदर चला गया,सोनल के मुह से चीख निकलना तो स्वाभाविक था,

 
“आह भाई “वो जोर से चीखी ,भला हो उस हवेली का जो इतनी बड़ी थी,और विजय के होठो का जो सोनल के होठो को भरे हुए थे, वरना सारा घर ही उठ जाता ,

विजय को भी अब अहसास होने लगा था की वो क्या कर रहा है,सालो से उसने इतनी टाइट चुद में अपना लिंग नही घुसाया था,उसे अचानक ही याद आया की मैं किसके अंदर चला गया ,भाई ….है भगवान फिर से ,उसने ऊपर देखा सोनल ही थी …

जो उसके चहरे पर आये एक्सप्रेशन को देखकर समझ गयी की विजय को अभी अपनी गलती का अहसास हो रहा है ,उसे हँसी आ गई ,उसे हँसता देखकर विजय के होठो पर भी एक मुस्कान आ गयी,

“कामिनी रोक नही सकती थी “

सोनल ने शरारती मुस्कान से उसे देखा

“मैं क्यो रोकू तुझे इतनी समझ नही है क्या की किसके अंदर डालना है किसके अंदर नही,कोई अपनी बहन के अंदर डालता है क्या भला,और वो भी इतने जोर से हाय ,”

विजय सोनल को झूठे गुस्से से देखा पर अपनी बहन की इन्ही बातो पर तो मरता था,सोनल के एक मुस्कान की खातिर तो वो जान भी दे सकता था,आज उसे कोई भी ग्लानि के भाव नही आये क्योकि वो जानता था की उनका प्यार समाज के हर बंधनो से बढ़कर है ,वो सोनल को और कस लेता है,अब उसे अपने लिंग में सोनल के प्यार की गर्मी का अहसास हो रहा था ,सोनल को भी अपने भी के लिंग का अहसास अपने अंदर हो रहा था ,वो अपने को भरा हुआ महसूस कर रही थी ,उसे ऐसा लगा जैसे बस ऐसे ही जिंदगी गुजर जाय और उसे कुछ नही चाहिये…….

 
इधर किशन के कमरे में

किशन और रानी साथ ही लेटे थे,

“भाई सुमन कुछ खास खुस नही लग रही थी बात क्या है ,कोई परेशानी तो नही हो गई तुम दोनो के बीच ,,,”

“नही जान ऐसा तो कुछ भी नही हुआ है,मैंने भी ये देखा की वो पहले की तरह नही दिख रही थी,”

“पर क्या हो गया है उसे”

“मुझे क्या पता यार”

तभी सुमन उसके कमरे के बाहर से गुजरती है और वो किशन और रानी के बातो में अपना जिक्र पाकर रुक जाती है,वो हल्के से खुले हुए दरवाजे को धकेलती है और वो दरवाजा खुलता जाता है,दोनो ही सुमन को यहां देखकर चौक जाते है,और उन्हें देखकर सुमन भी चौक जाती है,कारण था सुमन का कपड़ा...जो कपड़ा वो पहनी थी वो बिल्कुल ही पारदर्शी था और उससे उसके अंगों का हर कटाव दिख रहा था,वो भी एक नाइटी था,रानी निधि और सोनल जितनी गोरी और भरीपूरी तो नही थी पर वो भी जवानी के दहलीज पर थी और उसके बदन से चम्पा की जवानी वाले दिनों की याद आ जाती थी,उज्जवलता और कौमार्य की मसुमता दोनो ही उसके चहरे पर खिले होते थे,जिन अंगों को खेलने के लिए कोई भी मर्द बहक जाय वो मतवाले अंग जवानी की खूबसूरती से नही बच सकते,यही कारण था की रानी भी उन कपड़ो में किसी परी से कम नही लग रही थी और किशन अपना प्यार उस परी पर लूटाने को बस एक निकर में तैयार बैठा था,उसका बदन ऊपर से पूरी तरह वस्त्र विहीन था,और उसे देखकर तो सुमन भी थोड़ी शर्मा गयी थी,

रानी थोड़ी सम्हलकर

“आओ भाभी जी ,आखिरकार भैया की याद आपको आ ही गयी ,”

वो उठाकर सुमन की ओर बढ़ती है ,और सुमन के छाती से लग जाती है,सुमन को उसके उजोरो का पता साफ चलता है ,वो फिर के एक आश्चर्य में पड़ जाती है की ये तो किशन को भी हो रहा होगा,रानी ने पतले से नाइटी ने अंदर कुछ भी नही पहना था और उसके एक एक अंगों का आभास सुमन को साफ हो रहा था,कोई भी बहन अपने भाई के साथ ऐसे कैसे सो सकती है,सुनम के तो समझ के बाहर थी ,वो रानी से अलग होती है ,

“अच्छा भैया अब भाभी जी आ गयी तो मैं चलती हु “ वो जाने को हुई पर किशन ने दौड़कर उसका हाथ पकड़ कर उसे रोक लिया

“अरे तेरी भाभी का कोई भरोषा थोड़ी है की वो कितने देर मुझसे नाराज हो जाय ,तू रुक और मेरे साथ ही सोना आज कितने दिन हो गए तेरे साथ सोए …”

सुमन फिर से चौकी ये इस हालत में किशन के साथ सोने वाली थी,उसे थोड़ी जलन भी होने लगी ,लेकिन आखिरकार वो दोनो भाई बहन थे और उनके रिस्ते पर शक करना अजीब था,लेकिन वो भी तो किशन की बहन थी …..

ये खयाल आते ही सुमन का चहरा उतारने लगा...जिसे देख कर किशन उसके पास आया और उसे अपनी बांहो में ले लिया ,

“क्या हुआ मेरी जान मैं तो बस मजाक कर रहा था,तुम आज क्यो ऐसे उदास हो,नाराज हो क्या मुझसे,...”

सुमन उसे देखती है और फिर से उसके बांहो में आ छुपती है…

“नही लेकिन कुछ सही नही लग रहा है,एक अजीब से घबराहट मेरे मन में छा रही है,”

“कुछ भी तो नही हुआ है सब तो ठीक है,”

रानी दोनो को ऐसे देख कर वहां से जाने लगती है,किशन उसका हाथ पकड़कर रोक लेता है,

“रुक जाओ आज साथ ही सोते है,”किशन रानी और सुमन को अपने बिस्तर में ले जाता है और दोनो के बीच खुद भी सो जाता है,दोनो ही उसे जकड़कर उसकी छाती में सर रख लेते है,....किशन दोनो के गालो पर प्यार से किस करता है और दोनो बदले में उसे साथ ही किस करते है,....

रात चढ़ने लगती है और सुबह की पहली किरण आने के इंतजार में थी,सुमन की नींद खुलने पर वो चौक जाती है,रानी की नाइटी उसके कमर के ऊपर थी और उसकी पतली सी पेंटी से उसके गोल गद्देदार नितम्भ झांक रहे थे,वही किशन रानी की तरफ ही करवट लिए लेटा था,उसके हाथ रानी के नग्गे कमर पर थे ,दोनो के ही कमर चिपके हुए थे,रानी के पाव भी किशन के कमर से लिपटे थे,ये देखकर सुमन एक अजीब से जलन से भर गयी उसे ये बिल्कुल भी पसंद नही आ रहा था,वो किशन को अपनी ओर खिंचती है,वो नींद में ही था,लेकिन उसके खिंचने से उसकी नींद हल्के से टूट गयी,वो उसका हाथ पकड़कर अपने कमर में लगा देती है,किशन हल्की रोशनी में उसका चहरा देखता है और उसके होठो पर एक मुस्कान आ जाती है वो उसके कमर को पकड़कर अपनी ओर खिंचता है,सुमन उसके ओर खिंची चली जाती है,सुमन ने सलवार कमीज पहन रखी थी जो थोड़ी ढीली सी थी ,किशन उसके पिछवाड़े में हाथ फिरता है ,सुमन के मुह से एक आह निकलती है और वो उससे अलग होने की कोशिस करती है पर किशन फिर से थोड़ा जोर लगता है और उसे अपनी ओर खिंच लेता है,वो अपने सर को उठाकर सुमन के होठो में अपने होठो को रख देता है,कुछ देर तो सुमन अपना सर इधर उधर हटाती है फिर वो अपने होठो को खोलकर उसके जीभ को अपने मुह में प्रवेश दे ही देती है,दोनो के जीभ मिलते है और वो एक दूजे को और भी कस कर जकड़ लेते है,किशन अपने हाथ सुमन के पीछे ले जाता है और सुमन भी उसके बालो में अपने हाथ फंसा लेती है,दोनो ही एक दूजे में खो जाते है और प्यार की गहराई का अहसास करने लगते है,

होठ दोनो के ही गीले थे,और जस्बात का एक उफान दिलो में था,

किशन का हाथ फिर से उसके कमर से होता हुआ उसके नितम्भो पर पहुचता है पर इस बार सुमन मना नही करती और किशन उसे जोर जोर से मसलने लगता है,सुमन के मुह से आहे फुट पड़ती है और किशन का लिंग उसकी अहो को सुनकर फुंकार मारने लगता है,उसके कड़ेपन का आभास सुमन को अपने योनि के ऊपर होता है और जैसे उसकी सांसे ही रुक जाती है वो अपने को किशन से अलग करने की कोशिस करती है पर वो उस उन्माद में इतना जोर ही नही लगा पाती की उससे अलग हो जाय…..

किशन फिर से उसे अपनी ओर खिंचता है और इस बार वो अपना लिंग उसकी योनि के ऊपर थोड़ा रगड़ भी देता है,सुमन फिर से थोड़ा छटपटाती है फिर एक झूठा गुस्सा किशन पर दिखाते हुए उसके पीठ पर मुक्का मरती है ,लेकिन शरीर की कहानी तो कुछ और ही थी उसकी योनि से रस की धार निकालनी शुरू हो चुकी थी ,वो एक आनंद की दुनिया में थी जिससे वो अब तक अनजानी ही थी,वो भी अपने पैरो को किशन के कमर पर जकड़ने लगती है पर किशन मौका देख उसके सलवार के नाड़े को खोल देता है ,सुमन को उस उन्माद में इसका पता भी नही चलता ,लेकिन जब चलता है तो देर हो चुकी होती है ,किशन उसके सलवार को नीचे कर चुका था,अब तक सुमन के पैर किशन के कमर पर लिपट चुके थे और सलवार उसके घुटनो के नीचे चला गया था,वो अपने पैरो को खोलने की कोशिस करती लेकिन किशन तो अपने पैरो के उसके पैरो को जकड़ चुका था,

“नही ना ….”वो बस इतना ही बोल पाई थी की किशन ने फिर से अपने होठो को उसके होठो से लगा लिया और सुमन फिर से अपनी दुनिया में खो गई ,उसे होश तब आया जब उसे एक ताजा सा मूसल उसके योनि में रगड़ खाने का अहसास हुआ,किशन अपने निकर को सरका चुका था और अपने लिंग को आजाद कर सुमन के पेंटी के ऊपर से ही रगड़ रहा था,उसकी योनि के गीलेपन के कारण पेंटी का वो हिस्सा भी भीग चुका था,और ये अहसास किशन को हो रहा था,भले ही ये सुमन के लिए नई बात हो पर किशन तो इस खेल का पुराना खिलाड़ी था…..

“हे भगवान ये आप क्या कर रहे हो …”सुमन की सांसे पूरी तरह से उखड़ी हुई थी..

वो अपने को छुड़ाने को थोड़ी छटपटाई पर किशन ने उसे ऐसे जकड़ा था की वो असफल ही हुई,उसने आखिरकार वो कर दिया जिसका डर सुमन को था,वो पेंटी के एक सिरे को उसके योनि से हटा कर उसपर अपने लिंग को रगड़ दिया,,,,,वो बहुत ही जोर से छटपटाई और इससे रानी की नींद ही खुल गयी…

“मैंने कहा था ना की शादी से पहले कुछ भी नही ,प्लीज् नआआआआ “

रानी तब तक उठ चुकी थी ..

“आप लोगो को शर्म वर्म है की नही बहन बाजू में सोई है और आप चालू हो गए,बोल देते अपने रूम में चली जाती “

वो अपने आंखों को मलते हुए बोलती है,किशन की हालत खराब हो गई और जिसे ही उसकी पकड़ ढीली हुई

“हे भगवान ,”सुमन किशन को झटके से पीछे करते हुए अपने कपड़े सम्हालते हुए वहां से भागी ,उसका चहरा शर्म से पूरी तरह लाल हो चुका था..

किशन भी अपने लिंग को जल्दी से अंदर करता है,सुमन के जाने के बाद वो उसे शिकायत के भाव से देखता है और रानी हस्ते हुए उसे देखने लगती है…

“बहुत जल्दी है भईया “

“तेरी तो “

किशन रानी के ऊपर कूद जाता है ,उसका लिंग अभी भी ताना हुआ था और रानी के कमर से कपड़ा अभी भी उठा हुआ था,उसकी पेंटी तो सुमन से भी छोटी थी,किशन का लिंग अनायास ही उसकी पेंटी के ऊपर से योनि पर रगड़ खाता है,

“आउच गर्लफ्रैंड की हवस बहन पर निकलोगे क्या”रानी उसके पीठ को मरते हुए कहती है,

“ये हवस नही जान ये तो मेरा प्यार है,”

किशन उसे हँसते हुए देखता है वो भी उसे देखकर मुस्कुराती है और दोनो के होठ मिल जाते है….दोनो एक दूजे के बांहो में पड़े हुए फिर से नींद के आगोश में चले जाते है….

 
जुनून प्यार या हवस,जो भी हो एक रात तो इन सबमे ही चली गई,सुबह सभी को इंतजार था,इंताजर इस पीढ़ी को एक दूसरे से मिलाने का था,वीर ,बाली,गजेंद्र,महेंद्र के बच्चे अपने भाई बहनों से मिलने को बेताब थे,ठाकुरो की हवेली तो दुल्हन की तरह से सजी हुई थी,मेहमानों का आना जाना सुबह से शुरू हो चुका था,सभी व्यस्त थे अपने अपने कामो में लगे हुए थे.सीता मौसी अपने बच्चे से मिलने को बेताब थी तो सुशीला अपने पति से….वही तिवारियो की हवेली में भी हलचल सुबह से ही थी,सभी लोग तैयार बैठे थे,लेकिन एक शख्स की धड़कने बड़ी हुई थी वो थी खुसबू...उसे ये सोचकर ही डर लग रहा था की जब नितिन और सोनल को पता लगेगा तो अंजाम क्या होगा,के ये भी पता था की उनके बारे में विजय को भी पता चल चुका है,विजय का रिएक्शन कैसा होगा….और सबसे ज्यादा अजय ...आज वो अजय से मिलने वाली थी,सोनल भी उसे अजय के नाम से चिढ़ाने लगी थी,लेकिन जब उसे पता लगेगा की वो उसके बुआ का ही लड़का है तो क्या रिएक्शन होने वाला है ये सोचकर ही उसका दिल जोरो से धड़क रहा था…..

आखिरकार सभी तैयार होकर वहां पहुच जाते है,,,जोरो से उनका स्वागत होता है….सभी बच्चे..

तिवारी परिवार का परिचय एक बार और दे देता हु…

दादा रामचंद्र,उसके 3 बेटे,गजेंद्र,महेंद्र और वीरेंद्र..वीरेंद्र मर चुका है,गजेंद्र के दो बच्चे -नितिन और खुसबू,महेंद्र के 3 -राकेश ,भूमिका,और धनुष ….

तीनो भाइयो की पत्नियां भी साथ आयी थी लेकिन उनका नाम समय पर ही बताऊंगा…

गाड़िया रुकती है और सभी बाहर आते है ,उनके हाथो में बड़े बड़े गिफ्ट के पैकेट थे,और आंखों में अपार खुशी...ठाकुरो का परिवार भी आरती और फूल मालाएं पकड़े उनका स्वागत करता है,तभी नजरे मिलती है और कुछ चहरो से खुशी अचानक ही गायब हो जाती है,हँसने की आवाजे तो ऐसे चारो ओर फैल रही थी पर फिर भी एक शांति सी कुछ मनो में चल रही थी,उन्हें समझ ही नही आ रहा था की कैसे रिएकट करे …

तभी अचानक अजय की नजर खुसबू पर पड़ती है और वो उसे पहचानने की कोशिस करता है,और तभी निधि की आवाज आती है,....

“अरे आप तो वही है ना वो पब वाली...जो अजय भइया को लाइन मार रही थी…आप तो सोनल दीदी की सहेली है ना …”

चहरो पर पसीने आ जाते है और अजय को भी सब याद आता है ,वो निधि के माथे में एक चपत मरता है,

“कुछ भी बोलती है,”

चोरी पकड़े जाने पर अनजान बनने की जरूरत अब किसी को भी नही थी,सोनल और खुसबू गले मिलते है वही रानी और भूमिका भी ,एक दूसरे से गले मिलते है,सोनल नितिन को हल्के से हाय कहती है,लेकिन जब बात विजय और नितिन की आती है तो विजय अब भी फैसला नही कर पा रहा था की वो क्या करे….नितिन अपना हाथ विजय की ओर बढ़ाता है,लेकिन विजय बस उसे घूरे जा रहा था…

तभी एक हाथ पीछे से विजय के कंधे पर आता है...वो बाली था.

“बेटा हमारे बीच जो भी गलतफहमियां थी उसे छोड़कर अब हाथ मिलने का समय आ गया है,ये तुम्हारा भाई है,इससे हाथ मिलाओ ...विजय की इस हरकत से सभी थोड़े स्तब्ध थे,अजय को भी ये समझ नही आ रहा था की विजय ऐसा क्यो कर रहा है,लेकिन सोनल और नितिन और खुसबू सब कुछ समझ रहे थे,विजय जैसे अचानक ही तंद्रा से उठता है,वो सीधे सोनल की ओर देखता है,सोनल हल्के से अपना सर सहमति में हिलती है और विजय नितिन के आंखों में देखता हुआ उसके हाथो से अपना हाथ नही मिलता बल्कि सीधा उसके गले से लग जाता है,सभी को इससे सकून आता है,और विजय नितिन के कानो में हल्के से कहता है…

“मुझसे अकेले में मिलना “

नितिन कुछ भी नही बोल पता उसकी खामोशी ही असल में उसकी हा थी,स्थिति कुछ अजीब सी तो थी लेकिन सभी उसे सम्हालने में लगे थे….

“कुदरत का करिश्मा देखो सभी भाई -बहन एक ही जगह पर पढ़ रहे थे और ना इन्हें कुछ पता था ना ही हमे ,,,चलो अच्छा है ये एक दूसरे को पहले से ही जानते है…”

गजेंद्र ने कहा….अजय ने सभी को अंदर बुलाया ,और फिर मेहमान ,खाना, परिचय, और भी बहुत कुछ सबसे ज़्यादा इंजॉय धनुष और निधि कर रहे थे,सभी उनपर जी भरकर प्यार भी लुटा रहे थे,सुमन का भाई वरुण जैसे इन सबसे अछूता अकेले बैठा था उसे तो अपने पिता से मिलने की भी कुछ खास खुसी नही हुई,उसे ये सब ऐसा लग रहा था जैसे की सब दिखावा हो रहा है,निधि और धनुष ने उसे कई बार पकड़कर ले जाने की कोशिस की ,कभी उसे डांस करने की कोशिस करते तो कभी उसे किसी गेम में पार्टिसिपेट कराने की कोशिस करते लेकिन वो साला पूरा सुस्त आदमी था,उसे अपनी किताबे ज्यादा याद आ रही थी और उसकी मा ने उसे सख्त हिदायत दे रखी थी की आज पढ़ाई नही करेगा...उसे असल में सबपर ही बहुत गुस्सा आ रहा था,उसे ये सब सिर्फ वक़्त की बर्बादी ही लग रही थी,वो बेचारा करता भी तो क्या,आज इतने सालो के बाद एक आदमी उसपर इतना प्यार देखके कहता है की वो उसका बाप है,उसे तो बचपन से ही बस अपनी माँ और बहन का पता था,और पता था तो बस इतना की जिंदगी कितनी कठिन है,मुफलिसी क्या होती है,जमाने की सामने जब कोई आपकी जवान बहन को जलील करता है ,मा को गली देता है तो वो दर्द क्या होता है,छोटी सी उम्र में ही उसे वो पता चला जो शायद लोगो को अपनी जिंदगी भर में पता नही चलता ,वो था दर्द एक अजीब सा दर्द ,जब से उसे समझ आयी थी उसे बस इतना ही समझ आया की दर्द क्या होता है और जीने के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ती है….और उसे ये ही बताया गया था की उसे पढ़ना है इतना की वो अपनी बहन और माँ की अच्छे से परवरिस कर सके,उनकी जिम्मेदारी उठा सके…

वो जिम्मेदारी का अहसास उसमें बचपन से भर दिया गया था,सुमन उसे कभी भी कोई काम नही करने देती सब कुछ उसने अपने ही नाजुक कंधों में उठाया था,क्योकि वो चाहती थी की वो अपने भाई को खूब पढ़ाये और खूब बड़ा आदमी बनाये,उसकी मा लगभग उसे ये अहसास दिलाती की देख तेरी बहन कितनी मेहनत करती है सिर्फ इसलिए की तू पढ़ सके ….और इसी सब बातो का असर ये था की उसके लिए अगर जीवन में कुछ सबसे जरूरी था तो वो था पढ़ाई ….शायद सुशीला और सुमन भी ये कभी ना समझ पाते की वो वरुण को क्या बना दिए है,वो जज़्बातों से कोसो दूर हो चुका था,क्योकि उसे बचपन से भावनाओ से दूर रहना ही सिखाया गया था,नही तो शायद वो अपनी माँ और बहन की हालत को देखकर कुछ गलत रास्तो पर निकल पड़ता...बहुत ही खूबी से उसे पाला गया था और यही अब उसके लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन गयी थी,सुमन और सुशीला भी समझ नही पाते थे की इसे इस माहौल में कैसे ढाले वो तो अब भी वही पुराना वरुण था जो झोपड़ों में पला था,ऐसा नही था की वो संवेदनहीन हो उसे भी दुनिया की समझ थी पर एक अजीब सा डर उसे घेरे रहता एक असुरक्षा की भावना….की ये जो सब अच्छा है वो खत्म हो जाएगा और उसे फिर से वही जाना पड़ेगा जहा से वो आया है और इसलिए उसे पड़ना है और कुछ ऐसा बनाना है की वो अपनी माँ और बहन को एक अच्छी सी जिंदगी दे सके जो किसी की खैरात ना हो जो उनकी हो ….

और ये उसका बाप जो ना जाने कहा से अभी अचानक ही प्रगट हो गया है,क्या पता फिर से वो कब यहां से चला जाएगा…और आज माँ को क्या हो गया है हमेशा तो खुद ही कहती थी की तू बस पढ़ यही हमारी जिंदगी बदलेगा और अब पुस्तक से ही दूर कर दी….

वो बेचारा अपने सोच में बैठा हुआ था,एक कोने में एक कुर्सी में,उसने कभी भी कोई ढंग का कपड़ा भी तो नही पहना था और आज उसे जबरदस्ती कोई महंगा सा जैकेट पहना दिया गया था वो इसमें भी बहुत ही अनकंफर्टेबल फील कर रहा था ,

तभी उसके पास एक अधेड़ उम्र की एक औरत आकर बैठी ,

“हैल्लो ,क्या नाम है तुम्हारा,तुम बजरंगी भइया के बेटे हो ना,कितने क्यूट हो…”

उस महिला ने उसके गालो को खिंचा और वो गुस्से से उसे देखा ,सफेद साड़ी में लिपटी हुई वो महिला,वरुण शायद उसके हुस्न की कदर ना जानता हो पर वो बहुत ही खूबसूरत थी,मांग में सिंदूर नही था,हाथो में कुछ ही चूड़ियां थी वो भी सादी ,एक पतली सी घड़ी,और चहरे से बहुत सी शालीन और पढ़ी लिखी लग रही थी,गोरा रंग पर कोई भी श्रृंगार नही ,उज्वल चहरा ,और भरा हुआ शरीर ,लेकिन वरुण ने तो शायद उसके चहरे को ही देखा वो भी गुस्से से और वो फिर से आगे देखेने लगा..

“अरे बहुत गुस्से में दिख रहे हो ,आदत डाल लो तुम्हे मेरे ही साथ रहना है,”वो खिलखिलाती है और उसके कसे हुए सुंदर दांतो की पंक्तिया चमक उठती है,

वरुण भी उसे घूरकर देखता है,

“हा तुम्हारी माँ और तुम अब बजरंगी भइया के साथ ही रहोगे ना ,तो मुझसे दोस्ती कर लो मैं तुम्हारे काम आऊंगी “

वो हँसते हुए उसके सामने अपना हाथ बढ़ाती है पर वरुण कोई भी इंटरेस्ट नही दिखता …

“और मैं तुम्हे पढ़ाऊंगी भी,मुझे सब आता है,जो तुम्हे सीखना है “इस बार उसकी बात में थोड़ी शरारत और थोड़ी मदहोशी भी थी जिसे वरुण समझ ही नही पता लेकिन उसके चहरे को वो एक बार फिर से देखता है उसे अपने स्कूल टीचर की याद आ जाती है और वो खुस होकर उससे हाथ मिलता है,चलो कोई थो था जो उसे पढ़ाई की बातें कर रहा था….

तभी बाली और बजरंगी मंच पर चढ़ते है ,और बाली माइक पकड़कर सुमन और किशन की सगाई की अलाउंसमेन्ट कर देता है,सभी खुस हो जाते है,सुमन और किशन को स्टेज में बुलाया जाता है,सुमन इधर उधर देखती है उसे वरुण एक कोने में बैठा दिखता है,वो पहले दौड़कर वरुण के पास आती है ,

“अरे मेरे साथ चल आज मेरी सगाई है और तू यहां बैठा है,”

वो उसका हाथ पकड़कर उसे खड़ा करती है वरुण बड़े ही बेमन से खड़ा होता है,

“चाची जी आप भी चलिए ना …”

वो उस महिला को देखकर कहती है,

“हा बेटा तुम चलो मैं आती हु”सुमन वरुण को लेकर वहॉ से चली जाती है और वो महिला उन्हें जाते हुए देखती है,उसकी आंखों से शायद कोई भारी दर्द फूटने को होता है पर वो जैसे तैसे उस दर्द को सम्हालती है,उसके चहरे पर खुसी तो आ ही नही पा रही थी ,पर वो अपने आंसुओ को निकलने से जैसे तैसे रोकती है,और स्टेज की तरफ देखने लगती है,इस भीड़ में कोई ऐसा नही था जिसे उसकी फिकर थी,सभी अपने बच्चों के साथ खुस थे ,हा ये उसका ही परिवार था लेकिन शायद सिर्फ कहने को….

ये महिला वीरेंद्र की विधवा थी,...नाम था आरती,,,

 
इधर समारोह पूरे सबाब पर था और इधर दिलो में भी आग सी लगी थी,नितिन खुसबू और सोनल को इशारा करता है,और सोनल विजय को सभी के दिलो की धड़कने बढ़ी हुई थी,सभी विजय के रूम में चले जाते है,विजय जब पहुचता है तब तक सोनाल खुसबू और नितिन पहुच चुके होते है,सभी बैठ कर एक दूजे को देखरहे होते है,शमा गंभीर सा था…..

विजय भी कमरे में आता है,और आते ही सीधे नितिन के गले को पकड़ लेता है….

“साले प्यार के नाम पर तूने इतना बड़ा धोखा दिया…”

सोनल और खुसबू इससे डर गए साथ ही नितिन भी घबरा गया...सोनल दौड़कर विजय के पास पहुचती है,

“विजय ये क्या कर रहा है,”

“इसने …..इसने तेरे प्यार से खेला है सोनल,इसे पता था की तू कौन है और ये….”

“इसे कैसे मालूम होगा की मैं कौन हु और हमे भी कहा पता था की ये कौन है,विजय प्लीज़ मामले को बिगड़ मत …”

विजय सोनल के चहरे पर आये आंसुओ को देखता है और उसका हाथ अपने ही आप ढीला होता जाता है…

वो नितिन को छोड़कर अपने कमरे में एक दराज से विस्की की बोतल निकलता है और 3-4 घुट सीधे ही पी जाता है,उसे भी समझ नही आ रहा था की क्या करे….

“मुझे सचमे नही पता था था विजय की ये कौन है और अब जानने के बाद की ये मेरी बहन है मैं कैसे……..कैसे इस रिस्ते को आगे बड़ा सकता हु,....तुम अगर कहो तो मैं अभी से सोनल की जिंदगी से दूर हो जाऊंगा…”

नितिन अपनी आंखे अभी भी नीचे किये हुए था…

“हा एक को अपनी मर्यादा की पड़ी है और एक को समाज की,,,”खुसबू की बातो में दर्द और व्यंग दोनो था...वो आगे कहती है..

“लेकिन तुम दोनो ने ये पूछा भी की आखिर सोनल क्या चाहती है,उसे क्या चाहिए ….एक लड़की के दिल को समझने की तो किसी को कोई फुरसत ही नही है,ठीक है की अब सोनल नितिन की बहन है पर इसका मतलब क्या हुआ...की जो प्यार वो दोनो एक दूजे से करते है वो खत्म हो जाएगा….नही मुझे पता है ये नही हो सकता,क्योकि मुझे भी प्यार हुआ है…”नितिन खुसबू को घूर कर देखता है उसके लिए ये बात एक आश्चर्य} ही थी अभी तक खुसबू ने उसे कुछ भी नही कहा था….

“हा नितिन मैं अजय से प्यार करती हु,ये बात तो उसे भी नही पता,लेकिन सच यही है और एक सच किसी को भी नही पता….मैं पहले से जानती थी की तुम कौन हो ,”सभी आश्चर्य से खुसबू को देखते है…

“जब सोनल ने पब में मुझे तुम्हारे नाम बताये तब ही मुझे पता चल गया था की तुम लोग कौन हो ,दादा जी ने मुझे तुम्हारे नाम बतलाए थे और मैं दादा जी की बहुत करीबी हु,उन्होंने मुझसे वचन लिया था की मैं दोनो परिवारों को मिलने के लिए जो भी कर सकू करूँगी,लेकिन इत्तफाक देखो मुझे अजय से उसे देखते ही प्यार हो गया,और वो प्यार तो तब भी कम नही हुआ जब दोनो परिवार एक दूजे के खून के प्यासे थे और तुम सोचते हो की अब तुम दोनो एक दूसरे से अलग हो जाओगे तो ये बहुत बड़ी गलती होगी…”

“लेकिन ये दोनो भाई बहन है”विजय चिल्लाता है

“तो क्या हुआ”सोनल विजय को झकझोर देती है,दोनो की आंखे मिलती है और उसे रात का वो शमा याद आ जाता है ,वो प्यार था की एक ग्लानि का भाव या शर्म या और कुछ लेकिन विजय का सर अपने आप ही नीचे हो जाता है उसका सारा गुस्सा जाता रहता है और उसके आंखों में आंसू की बूंदे आने लगती है...सोनल उसे अपने गले से लगा लेती है…

“भाई कुछ भी गलत नही हुआ,जो हमने किया वो भी और जो हम करने वाले है वो भी ,,,...”विजय को ये समझ नही आ रहा था की सोनल अपने और उसके बारे में बोल रही है या अपने और नितिन के बारे में पर जो भी हो उसे कुछ कुछ समझ तो आ रहा था,

“भाई प्यार तो प्यार होता है ना सब भूलकर बस मेरी खुशी देखो ना,मैं खुश हु और खुस रहूंगी मुझे इन रिस्ते के बंधनो में मत बांधो भाई ….”विजय का हाथ उसके बालो पर चला गया वो उसे कसकर पकड़ लेता है …

“चाहे दुनिया वाले कुछ भी कहे पर तेरी शादी होगी तो नितिन से ही होगी ,और वो साला अगर मना करे तो उसे बांधकर मंडप पर बैठूंगा…”

वो नितिन को देखता है जो अभी भी थोड़ा सा सोच में था पर विजय के आखिरी लाइन से वो भी हँस पड़ता है साथ ही विजय खुसबू की तरफ देखता है,

“और आप बनोगी मेरी भाभी …”

खुसबू थोड़ा शर्मा जाती है…

तभी कमरे में मिसेस कव्या सेठ (जो अभी कॉलेज की प्रिंसिपल है) आ जाती है ,

“ओह मुझे माफ करना समझ नही आ रहा था की टॉयलेट कहा पर है,इतना बड़ा घर है तुम लोगो का “

“अरे आप आइए ना मेडम “

सोनल कहती है,

“अरे प्रोग्राम तो वहां चल रहा है और तुम लोग यहां बैठे हो “

“वो मेडम “नितिन कुछ बोलने वाला होता है.तभी सोनल उसका बात काट। देती है.

“मेडम वो सब आप छोड़िए ना और भइया का ही रूम है आप इसका टॉयलेट इस्तेमाल} कर लीजिये …

“ओके “ कव्या विजय को देखते हुए हल्की मुस्कान के साथ टॉयलेट में घुस जाती है,

“चलो हम सब चलते है ,”

सभी बाहर निकल रहे होते है तो सोनल विजय को रोकती है ,

“अरे आप कहा जा रहे है ,मेहमान आया है यहां कुछ खातिरदारी करो “

विजय के चहरे पर मुस्कान आ जाती है वही नितिन और खुसबू उसे अजीब निगाहों से देखते है…

“मतलब की उन्हें अकेला मत छोड़ो साथ ही आ जाना ना “

“ओके मैं भी रुक जाता हु “नितिन कहता है.

“भइया उसे सम्हाल लेंगे तुम्हे होशियारी दिखाने की कोई जरूरत नही है”सोनल नितिन का हाथ पकड़ती है और खीचकर उसे ले जाने लगती है,साथ ही वो विजय को हल्के से आंख भी मार देती है और साथ ही विजय के चहरे पर एक शैतानी मुस्कान उभर जाती है…

इधर कव्या तो आयी ही विजय से मिलने को थी ,वो जल्दी से निकलती है

“कैसी हो मेडम जी “विजय उसके कमर में हाथ डालकर उसे अपनी ओर खिंचता है,

“भागो तुम ,यहां मैंने खुशी खुशी ट्रांसफर मंजूर किया था की तुम यहां हो ,और एक् तूमहो की हाल चाल पूछने भी नही आये,”

“अरे मेडम जी क्या करे काम ही ऐसे आ गए थे की आपसे मुलाकात ही नही हो पा रही थी ,पर आप फिकर मत करे अब तो आपके लिए पूरा समय है मेरे पास”

“अच्छा तो क्या करोगे”

“जो भी काम उस दिन बच गया था सब आज ही पूरा कर लेते है”

“अच्छा “

कव्या एक घाघरा पहने हुई थी ,मांग में गढ़ा सिंदूर और हाथो में भरी हुई चूड़ियां ,उसके मादक जिस्म में कहर ढहा रहा था,वो ये श्रृंगार भी तो विजय के लिए ही कर के आयी थी

,मादकता में और भी मादक उसके होठो की वो लाली थी जो विजय को उसे चूसने को कह रही थी और विजय ने वही किया ,वो उसे अपने हाथो से उठाकर सीधा ही अपने बिस्तर पर लिटा दिया ,उसने देखा की वो विस्की का ढक्कन अब भी नीचे ही गिरा था,उसने उस बोतल को पकड़ा और दो घुट खुद लगाए फिर कव्या के होठो से लगा दिया ,वो भी दो घुट ऐसे लगा गयी जैसे की कोई पुरानी शराबी हो ,....

उसके ब्लाउज़ से झांकते हुए उसके बेहतरीन उजोरो को वो अपने होठो से महसूस करने लगा और हाथो को पीछे लाकर वो ब्लाउज़ की चैन खोल दिया,कव्या की एक सिसकारी पूरे कमरे में फैली तभी दरवाजा फिर से खुलता है….

“कम से कम दरवाजा तो लगा दिया करो “और एक हँसी पूरे माहौल में गूंज जाती है कव्या जल्दी से अपने को सम्हालने और ढकने में लग जाती है पर विजय के होठो में एक मुस्कान आ जाती है,सामने मेरी खड़ी थी (मेडम मेरी ,डॉ की सेकेट्री )वो एक हल्के रंग की साड़ी पहने सनी लीओन सी लग रही थी ,हाथो में हल्के डिजाइनर चूड़ियां ,और उसका गजब का गदराया बदन ,देखने वाले का मन तो डोल ही जाय,

दोनो औरतें विजय के ताकत की गुलाम और शादीशुदा था,दोनो ही गदराये हुस्न की मलिका थी ,और दोनो को ही विजय चाहिये था ….वप इठलाते हुए बिस्तर की ओर बढ़ती है,

“जानेमन तुम आदमी हो या घोड़े,कितनी औरतों को अपने नीचे लाओगे…”विजय उसे बस मुस्कुराते हुए देखता है और उसे अपने ऊपर डाल देता है,

“बाकियों का तो नही पता लेकिन आज तुम दोनो को “

उसकी इस हरकत और इस बात से कव्या भी सामान्य हो चुकी थी और तीनो एक साथ ही जोरो से हस्ते है…

“अब तो दरवाजा लगा दो या किसी और की राह देख रहे हो “

मेरी हँसते हुए कहती है,विजय जल्दी से दरवाजा लगता है ,उसके टाइट जीन्स से भी उसका अकड़ा हुआ लिंग दिख रहा था जिसे दोनो ही बड़ी कामुक नजरो से देख रही थी ….

विजय उनके पास आता है दोनो ही अपने जीभ पर उंगलिया फिराती है,

आज तक ने ना जाने कितनी लड़कियों के साथ ये खेल खेला था पर आज पहली बार दो लडकिया और वो इतनी हरीभरी और खेली खाई ...विजय जैसा आदमी ही ये रिस्क लेने को तैयार हो सकता था और दोनो को ही खुश करने की गारेंटी भी दे सकता था,विजय जैसे ही बिस्तर पर पहुचा दोनो ही उसपर झपड़ पड़ी जहा कव्या उसके ऊपर के भाग को सम्हाल रही थी वही मेरी ने नीचे के भाग की जिम्मेदारी ले ली थी ,मेरी ने उसे नीचे से नंगा कर दिया और कव्या ने ऊपर दे कव्या अपने होठो को उसके होठो पर भर कर उसका रस चूस रही थी और वही मेरी उसके अकड़े हुए लिंग को अपने होठो से गिला कर रही थी ,विजय की सांसे तेज हो रही थी और उसकी आंखे बंद,आज तक दुसरो के अंगों को निचोड़ने वाले विजय के अंगों को आज कोई दूसरा निचोड़ रहा था और वो बस सोया हुआ था,काव्या ने अपने उजोरो को अपने तने हुए ब्लाउज़ से अलग किया और ब्रा के ऊपर से ही उसे विजय के मुह में घुसेड़ दिया वो कुछ कह पता उससे पहले ही काव्या ब्रा को एक ओर कर अपने उभरे हुए निप्पल को उसके हल्के से खुले मुह में घुसा देती है,विजय भी उस उतेजित निपल को अपने मुह में पाकर खुस हो जाता है और जोरो से चूसने लगता है…

“आह मेरी जान “काव्या विजय के बालो को अपने उंगलियों में फंसा लेती है,वही विजय उसके निप्पल को दांतो से हल्के से काट देता है ,

“हाय कमीने कही के ,बहुत ही शरारती हो तुम ,हाय “

“अभी शरारत दिकहि कहा हो जान “

“मेरे बारे में भी तो कुछ सोचो “मेरी ने अपने मुह से विजय का लिंग निकल कर कहा ,विजय ने उसे मुस्कुराकर देखा और उसके पैर जो उसके सर के पास थे को पकड़कर उसकी साड़ी को ऊपर किया और अपना सर वहां घुसा दिया,हुस्न के दीदारे खयालो में जम गए,मेरे सारे बच्चे रूमालों में जम गए...हुस्न के दीदारे खयालो में जम गए,मेरे सारे बच्चे रूमालों में जम गए...हुस्न के दीदारे खयालो में जम गए,मेरे सारे बच्चे रूमालों में जम गए...हुस्न के दीदारे खयालो में जम गए,मेरे सारे बच्चे रूमालों में जम गए...हुस्न के दीदारे खयालो में जम गए,मेरे सारे बच्चे रूमालों में जम गए...

काव्या का चहरा थोड़ा उतर सा गया,तो मेरी ने उसे अपने पास खिंचा और उसके घाघरे में अपना मुह घुसा दिया,विजय ने मेरी के योनि में दांतो से कलाकारी की वो उचक पड़ी और उतेजना में काव्या के पेंटी से ही उसके योनि को खा गयी …

“आह पागल हो तुम लोग,मार ही डालोगे “काव्या छटपटाई

और जाकर विजय के कमर से चिपकने लगी ,विजय ने अपने हाथ से उसका से अपने लिंग की ओर मोड़ दिया और वो जैसे इशारा समझ गई हो विजय का लिंग अपने होठो में भर लिया…..

सभी एक दूसरे को स्वर्ग की सैर करा रहे थे,जब जब विजय कोई कलाकारी मेरी के योनि से करता ,मेरी उतेजना में आकर काव्या की योनि में घुस कर उसे खा सी जाती और काव्या उतेजना में विजय के लिंग को और जोर से अपने मुह में भिचा लेती,विजय का चहरा पूरी तरहः से मेरी के कामरस से गिला हो चुका था ,वही हाल मेरी का भी था ,वही काव्या के थूक से विजय का लिंग पूरी तरह भीग था चुका,सभी की सांसो की ही आवाज से कमरे में एक हलचल सी हो चुकी थी ,मेरी और काव्या एक जोरो की धार छोड़ते हुए अपनी योनि की आग शांत कर ली ,लेकिन अब विजय की आग अच्छे से बड़ी थी बस बात ये था की इस आग का पहला शिकार कौन होने वाला था…

वो उठकर दोनो को ही अपने ओर खिंच लिया ,सभी एक दूसरे के होठो को,गालो को चुम रहे थे ,सभी के चहरे अब रस से भीगे थे,मेरी और काव्या के कपड़ो की हालत बहुत ही खराब हो चुकी थी ,कोई कुछ कहता उससे पहले ही विजय ने काव्या को अपने नीचे ला लिया और उसके घाघरे का नाडा खोल कर उसे नीचे कर दिया,नीचे उसकी पेंटी पूरी तरहः से उतरी नही थी उसे बस एक तरफ सरकाया गया था,विजय ने उसे उतारने की जहमत भी नही की और अपना तना हुआ लिंग उसके अंदर पेल दिया….ऐसे तो मेरी के थूक ने उसे बहुत चिकना बना दिया था फिर भी वो सालो से किसी मर्द का लिंग अपने अंदर नही ली थी वो चीख ही गई होती अगर मेरी ने उसकी हालत भाप कर उसके होठो पर अपने होठ को नही रख दिया होता,विजय का मूसल एक पिस्टल की तरह अंदर बाहर हो रहा था,काव्या की आंखे फट कर बाहर निकालें को हो गयी थी पर मेरी के सहलाने से और विजय के धक्कों से वो फिर से गीली हो गयी ….

 
“आह मेरी जान ,आह हाय विजय आह ,सालोओओओ से कोई नही कीईईईईई याआआआआआ है मुऊऊऊ झे ….आह आह आह “जोरदार धक्कों से काव्या का शरीर ही नही बल्कि पूरा बिस्तर भी हिलने लगा था….वही मेरी ने उनपर उठाकर अपने होठो को विजय के होठो से मिला दिया और दोनो के होठ मिलते ही विजय पर फिर से एक नशा चढ़ा और वो फिर से बहुत ही जोतो से धक्का देने लगा…

“मैं मर जाऊंगी थोड़ा धीरे प्लीज़ प्लीज़ “वो चिल्लाने को हुई मेरी ने फिर से अपने होठ उसके होठो पर रख दीये लेकिन विजय ने अपनी स्पीड और ताकत कम नही की ,काव्या की आंखे बाहर को हो रही थी उसका चहरा पूरी तरह से पसीने से भीग चुका था लेकिन उसकी आहे मेरी के मुह में दबकर रह जाती उसकी आंखों से आंसू आने लगे थे ,और ये देखकर विजय को बड़ा मजा आ रहा था ,सालो के बाद ऐसा हुआ था की वो किसी को ऐसे बेदर्दी के साथ पेल रहा हो …

काव्या ने खुद को पूरी तरहः से छोड़ ही दिया वो बेहाल ,बेबस और पूरी तरहः से थक चुकी थी उसे नही पता था की विजय इतना बड़ा शैतान है ,वो उसके मर्दानगी के कायल भी हो रही थी पर वो साथ ही वो अपने को बिल्कुल असहाय भी महसूस कर रही थी उसके लिए इंचभर भी हिलाना मुश्किल हो रहा था,वो झटपटाना चाहती थी पर उसके लिए ये मुश्किल था,विजय का विशाल शरीर और मेरी की पकड़ के सामने वो बेबस थी लेकिन ये भी सच था की उसे ऐसा मजा जिंदगी में पहली बार आ रहा था,वो भीग जाती और फिर से गीली हो जाती ,वो अकड़ी। और तेज फुहारे उसने छोड़े अपने चरम सुख की अनुभूति कर वो निढल हो गई,लेकिन ये तो विजय था की अभी भी उसमे पूरा खजाना बाकी था,मेरी ने विजय को रोका और खुद अपने कपड़े उतार कर काव्या के ऊपर आ गई

वो एक कुतिया के तरहः अपने घुटनो और हाथो के बल थी और नीचे काव्या थी जिसके मुह में उसने अपने स्तनों को घुसा रखा था,वही विजय को उसकी चिकनी योनि की वो दरार दिखी जिसे लोग जन्नत का दरवाजा भी कहते है,वो अपने लिंग को जो की काव्या के रास से भीगा था उस दरवाजे में लेजाकर एक जोर का धक्का दिया,मेरी अपेक्षाकृत आसानी से उस वॉर को सह गई वो ,आनद के सरोवर में तैरने लगी और विजय लगातार उसे धक्के देने लगा….मेरी के झरने के बाद भी विजय बचा हुआ था वो फिर से काव्या को देखता है जिसे देखकर वो थोड़ी घबरा जाती है ,

“फिकर मत कर जान ये तुझे बड़ा मजा देगा”मेरी काव्या के होठो पर अपने उंगलियों को फेरते हुए कहती है,इस बार मेरी भी चाहती थी की अब विजय झर ही जाय वो काव्या के पैरो को विजय के कंधे पर टिका देती है ,जिससे उसकी योनि दो फांको में साफ तौर से बंट जाती है ,विजय अपनी पूरी हवस निकलने के उद्देश्य} से पूरे जोर से धक्के लगा रहा था और आखिर वो समय भी आया की विजय ने अपने वीर्य की पहली धार सीधे काव्या के गर्भ में उतार दी,......और मानो एक तूफान शांत हो गया...तीनो एक दूसरे से लिपटे कुछ देर तक पड़े रहे पर कब तक….मेरी काव्या और विजय की आग फिर से भड़की और इसबार सभी को बहुत मजा आया ...विजय पूरे खेल में तीन बार झडा और भेदभाव ना करते हुए वो एक बार मेरी के अंदर भी झडा ,और एक बार दोनो के चहरे पर...दोनो औरते अब पूरी तरहः से नंगी थी और पसीने से भीगी हुई थी ,विजय ने ना जाने कितनी बार उन्हें चरमसुख तक पहुचा दिया था……………

“तुम पागल हो गयी हो”

“भैया वो अच्छी लड़की है ,”

“तो,जानती है ना अब वो हमारी बहन है”

“तो क्या हुआ और अपने तो मुझे प्रोमिश किया था ”

“देखो निधि तब की बात और थी अब की और है,

“क्या बदल गया”

“अरे पागल लड़की तुझे इतना भी समझ नही आता क्या,बड़ी नेता बनकर घूमती है ,अब वो हमारी बहन है “

“तो क्या हुआ “

“अब तू इस टॉपिक में मुझसे बात नही करेगी बस”

निधि अजय को घूर रही थी,

“अब ऐसे घूरना बंद कर ,और मुझे काम करने दे,इतने लोग आये है यहां और तू ये सब बात कर रही है और ये विजय कहा चला गया,”अजय वहां से जाने को होता है,लेकिन निधि ने उसका हाथ पकड़ रखा था ,

“अब छोड़ भी दे “

“आप मुझसे गुस्सा हो “

“नही जान मैं अपनी प्यारी बहन से कैसे गुस्सा हो सकता हु “

“तो जो बात मैंने कही वो करोगे ना ,खुसबू अच्छी लड़की है भइया “

“अच्छा लेकिन तुम तो उसे पसन्द नही करती ना “

“वो मेरे भइया को मुझसे छीन लेगी तो मैं उसे क्यो पसंद करूँगी लेकिन भइया सच में वो बहुत अच्छी है और वो आपसे बहुत प्यार करती है उसकी आंखों से पता चलता है…”

“मैंने कहा ना की अब उस टॉपिक में कोई बात नही “

“मैं तो करूँगी आप को गुस्सा आये तो आय “

अजय सर पकड़ लेता है,

“ठीक है करते रह बात लेकिन मूझे छोड़ दे अभी काम है ना बेटा “

“ठीक है “

अजय उसके माथे में एक प्यार भरा चुम्मन देखर वहां से निकलता है मेहमान सभी अपनी मस्ती में थे,लेकिन विजय को ना देखकर अजय थोडा चिंतित हो जाता है ,तभी उसे सोनल खुसबू और नितिन आते हुए दिखते है

“अरे सोनल अजय कहा है “

“भैया वो तो किसी काम से गए है “

“कहा “

“अरे वो मेरे ही काम से बाहर गए है “

“घर में इतने लोग आये है और तुमने उसे बाहर भेज दिया ,तुम लोग भी ना “

अजय के जाने के बाद नितिन और खुसबू उसे देखने लगते है

‘क्या देख रहे हो चलो यार पार्टी इंजॉय करते है “

खुसबू की नजर अभी भी बार बार अजय की ओर चले जाती थी,अजय ने उसे महसूस तो किया लेकिन हर बार उसे इग्नोर कर दिया,

“क्या देख रही हो मेरी जान “

सोनल ने खुसबू को कोहनी मरते हुए पूछा

“बस देख रही हु की तेरे भइया कितने अच्छे है “

वो हल्के से शर्मा गयी

“अच्छा “

“हा “

“तो बात चलाऊ क्या ,भइया “

“अरे नही “

लेकिन तब तक अजय सोनल की बात सुन चुका था और वो उसके पास आ जाता है,

“क्या हुआ सोनल “

“भइया ये खुसबू है “

“हा जानता हु ,बडें मामा की बेटी और तुम्हारी दोस्त ,और मेरी प्यारी बहन “

अजय ने अपना हाथ खुसबू के सर पर चलाया लेकिन इससे खुसबू को जरा भी अच्छा नही लगा ,वो जिसे अपना पति मानती थी वो उसे अपनी बहन बनाने में लगा था,सोनल का भी चहरा उतर गया था और अजय सब समझता भी था पर वो जानबूझ कर ऐसा कर रहा था ,वो फिर से दोनो परिवारों के बीच कोई भी दीवार नही बनाना चाहता था,तभी अभिषेक की इंट्री हुई ,

“नमस्ते सर “

“ये क्या सर सर लगा के रखा है ,तुम मुझे भैया ही कहा करो ,और ये है मेरी बहने सोनल और खुसबू,और ये है अभिषेक हमारे कॉलेज के प्रेजिडेंट और पार्टी के बड़े ही अच्छे कार्यकर्ता और धनुष निधि के बहुत अच्छे दोस्त “

अभिषेक तो खुसबू को बस देखता ही रह जाता है ,वो भी निधि से कम हसीन ना थी और सोनल वाह

‘साला इसके परिवार की तो हर लड़की माल है ‘अभिषेक मन में सोचता है

“हलो मेम “

“क्या मेम लगा के रखे हो भइया ने बोला ना तुम हमे भी दीदी ही कहो “

सोनल ने उसे खिंचते हुए कहा ,तभी निधि ,धनुष सोनल और बाकी बच्चे भी आ गए वहां विजय के अलावा सभी थे ,अजय ने उन्हें थोड़ा कंफर्ट देने के लिए वहां से जाना ठीक समझा ….

प्रदेश के कुछ मंत्री भी वहां पहुचे थे थोड़ी देर में मुख्यमंत्रि भी पहुच गए ,अजय भी उनका स्वागत करने सभी बड़ो के साथ ही खड़ा था …

“तो अजय कैसे चल रहा है तुम्हारा कारोबार “

मुख्यमंत्रि राजन बंसल साहब ने खाने की प्लेट से एक टुकड़ा उठाते हुए कहा ,सभी नेता और बड़े लोग एक साथ ही बैठे थे ,बंसल के बाजू में अजय खड़ा था और बाली और गजेंद्र उसके आजु बाजू में बैठे थे ,

“बस बढ़िया है सर आपकी कृपा है “

“यार लेकिन तुम इस कृपा का गलत फायदा उठा रहे हो …”जिसने भी उसकी आवाज सुनी वो उन्हें ही देखने लगा …

“मैं समझा नही “

“मैं तुम्हारी पार्टी की बात कर रहा हु ,देखो यहां तो विपक्ष के लोग भी आये है और सरकार में बैठे लोग भी….लेकिन यार तुम्हे क्या पार्टी बनाने की जरूरत पड़ गयी “

“अरे सर वो तो बस बच्चों के कारण ,और वो कोई राजनीतिक पार्टी नही है ,बस बच्चे कुछ काम करना चाहते है तो साथ मिलकर कर रहे है.”

“अरे तो हमारी पार्टी जॉइन करा दो उन्हें हम भी तो समाज की भलाई के लिए ही काम कर रहे है “

अजय के चहरे में बस एक मुस्कान आ गई

“अरे बंसल साहब क्या आप अजय को भड़का रहे हो ,और आप कितना समाज की भलाई के लिए काम करते हो हमे सब पता है “

ये आवाज विपक्ष के नेता की थी ,

“अरे चुप करो यार तुम सब क्या इसे संसद समझ रखा है ,तुम लोग दोस्त हो इसलिए यहां बुलाया और तुम यहां भी चालू हो रहे हो “

गजेंद्र ने दोनो को ही झपडते हुए कहा और दोनो ही बस बदले में हकले से मुस्कुरा दिए

“और अगर मेरे बच्चे राजनीति में आ गए ना बेटा तुम दोनो की गद्दी चले जाएगी समझ गए ना अपनी गद्दीयां बचा के रखो हा हा हा “गजेंद्र ने फिर कहा और सभी हस पड़े …

“हा ये बात तो है “बंसल ने भी मुस्कुराते हुए कहा

कार्यक्रम समाप्त होने को आ रहा था शाम होने वाली और विजय अभी भी दोनो स्त्रियों की ठुकाई में व्यस्त था,बंसल ने जाते हुए अजय को अकेले में बुला ही लिया …

“देखो अजय बाली और गजेंद्र दोनो ही मेरे दोस्त रहे है और दोनो ही हमे बहुत बड़ी राशि चंदे में देते है ,लेकिन मेरी बात को याद रखना अगर कभी राजनीति में आने की जरूरत महसूस हो तो हमारे ही साथ आना ,राजनीति बहुत ही खतरनाक चीज है ,मैं तुमसे ये कह रहा हु क्योकि तुम समझदार हो...और तुम इतना भी जानते होंगे की हम अगर 15 सालो से सत्ता में है तो इसकी कोई तो वजह होगी ,यहां साम दाम दंड भेद सभी का सहारा लेना पड़ता है ,और मैं कभी नही चाहूंगा की तुम्हारे जैसा इतना ताकतवर परिवार हमारे पार्टी का दुश्मन बन जाय “

इस बार बंसल के चहरे पर कोई भी मुस्कुराहट नही थी ,अजय ने उसे महसूस किया उसे कुछ अजीब सा अहसास हुआ ,जैसे बंसल उसे सीधे सीधे धमका रहा है ,

“अच्छा मैं चलता हु “बंसल अपने कार में बैठने लगा

“रुकिए मुझे आपसे कुछ और भी बात करनी है मैं आपके साथ कार में ही चलता हु थोड़ी दूर उतर जाऊंगा “

बंसल के चहरे में एक मुस्कान आ गयी जैसे उसे मनमांगी मुराद मिल गयी हो ,लेकिन वहां खड़े बाकी लोग अजय को अजीब नजरो से देखने लगे ,अजय ने कलवा को बस कुछ इशारा किया कलवा ने भी सर हिलाया और अजय बंसल के साथ उसकी गाड़ी में बैठ गया …

“तो अजय क्या कहना चाहते हो “

“बस यही की आप इतने क्यो डरे हुए है “

बंसल ने अजय को थोड़े आश्चर्य से देखा

“तुम सचमे समझदार हो अजय ,तुम्हारी पार्टी का जनाधार बढ़ रहा है और उससे वो लोग भी जुड़ने लगे है जिन्हें राजनीति में जगह नही मिल पाई थी ,माना की अभी वो बस एक छात्र संगठन है लेकिन कब तक जो लोग तुम्हारे साथ जुड़ रहे है वो उसे बस एक समाज सेवी संगठन बनकर नही रहने देंगे ….और मेरे डर का कारण ये है की अगला चुनाव बस आने को ही है ऐसे में अगर तुम्हारी पार्टी ने चुनाव लड़ा तो …”

“आपको डर है की आपकी सीटे उन्हें मिल जाएगी ,क्योकि वो बहुत एक्टिव है और आपकी सरकार से लोग बोर हो चुके है “

बंसल मुस्कुराया

“विपक्ष से लड़ने को हमारे पास पूरा प्लान है ,उनकी सभी कमियां हमारे पास है ,सभी किच्छा चिट्ठा हमे पता है ,लेकिन इस बार हमारे खिलाफ भी बहुत ही जनाक्रोश है अगर तुमने पार्टी उतारी तो शायद तुम्हे कोई फायदा ना हो पर हमे घटा जरूर होगा,विपक्ष जीत सकता है ,जिससे तुम्हे कोई फायदा नही होगा ,लेकिन मेरा 4था कार्यकाल पूरा करने का सपना खतरे में पड़ जाएगा ….तुम हमारे आदमी हो और तुम्हारे दादा के साथ मैं भी लड़ा था,तुम्हारे पापा भी मेरे अच्छे दोस्त रहे है ,हम दोनो ही बहुत ही मुस्किलो से ऊपर उठे है ,तुम हमारे साथ आ जाओ...निधि और धनुष को मंत्री पद दिला देंगे हमारे ही बच्चे है दोनो ,अबतक के सबसे युवा मंत्री होंगे हमारे बच्चे उनका शौक भी पूरा हो जाएगा और मेरा सपना भी …”

 
बंसल की बात पूरी की पूरी अजय को समझ आ गई लेकिन उसे भी पता था की लोग सरकार से कितने परेशान है ,उसे भी एक्टिव पॉलिटिक्स में जाना था और ये एक अच्छा ऑप्शन हो सकता था लेकिन ………

“आपकी बात तो ठीक है सर पर अभी तो उन्हें बहुत कुछ सीखना है और जहा तक रही राजनीति की बात तो हा हम राजनीति में आ रहे है लेकिन किसी भी पार्टी के साथ नही ….जब हम आप लोगो को चंदा देकर जीता सकते है तो अपने बच्चों को क्यो नही ,हा अगर आपको सरकार बनाने में हमरी मदद लगेगी तो हम आपका समर्थन जरूर करेंगे लेकिन विधायक तो हम जीत कर ही बनेंगे और वो भी अपनी पार्टी से ….

बंसल का चहरा उतर गया उसे शक तो था लेकिन अब ये यकीन हो गया ,ये सब अजय का फैलाया हुआ जाल ही था ,वो धीरे धीरे अच्छे लोगो को दूसरी पार्टीयो से खीचकर अपनी पार्टी में मिला रहा था ,वो सभी उसके समाज सेवा कार्यक्रम का हिस्सा होते थे वो लोग अपनी पार्टीयो में रहते हुए अजय की पार्टी के साथ काम कर रहे थे ,क्योकि अजय की पार्टी कोई पॉलिटिकल पार्टी नही थी किसी को भी शक नही होता लेकिन बंसल ने ये भांप लिया था ,

“तुम तो सीधे दुश्मनी पर उतर आये यार …”

“अपने ही कहा था सर की राजनीति में कोई किसी का सगा नही होता ,”

अजय के चहरे पर एक मुस्कान आ गई

“अजय राजनीति गंदी चीज है और तुम अच्छे आदमी हो तुम्हारे जैसे आदमी को ये सब सोभा नही देगा “

“आप भूल गए की तिवारी और ठाकुर परिवार एक हो चुका है और तिवारी कमीनेपन में आप सबके बाप रह चुके है ,वही ठाकुरो का जनाधार आज भी कायम है ,आप अपनी गद्दी बचाइए बंसल साहब,हमारे क्षेत्र से तो जितने की सोचना भी भूल जाइये …..”

एक लड़का जो उनके ही सामने पैदा हुआ था ,बंसल को ऐसी बाते बोल रहा था,बंसल साहब की तो भवे चढ़ गयी लेकिन थे तो वो भी एक माने हुए राजनितज्ञ ,उन्हने अपने को शांत ही रखा

“सोच लो अजय आज तुम जितना सोचते हो उससे कही ज्यादा पवार हमारे पास है,अब जमीदरियो का दौर गया और दौर गया की लाठी के बल पर बाहुबली बने फ़िरो ,आज पुलिस और सत्ता से ज्यादा पावरफुल कोई भी नही है “

“जानता हु सर इसलिए तो कह रहा हु ,ये सत्ता आती कहा से है ,ये भी तो जनता के द्वारा ही चुनी जाती है ,और लोकतंत्र में जनता से पावरफुल कोई नही हो सकता और मेरे पास आज जनता का सपोर्ट है,हमारे पूर्वजो ने कभी यहां राज किया था,और जनता आज भी हमे अपना राजा मानती है ……….”

अजय की आंखों में ऐसी चमक बंसल ने कभी नही देखी थी ये एक अजीब सी चमक थी,अजय का रूप कुछ अलग सा हो गया था ,मानो सचमे कोई राजा हो ….बंसल के दिमाग में ये बात कौध गई,वो अजय के दादा और पिता(वीर )के साथ भी काम कर चुका था ,उसने ये चमक उसके दादा में देखी थी लेकिन कभी वीर में वो चमक नही दिखी वीर को तो अपने को सम्हालने में ही बहुत वक़्त लगा था,लेकिन अजय में वही चमक,जनता आज भी हमे राजा मानती है,बंसल उस वाक्य को खोजने की कोसिस कर रहा था ,यहां के जमीदार तो तिवारी थे ,फिर राजा ठाकुर कैसे हो सकते थे??????

तिवारियो की जमीदारी जिस राज में आती थी वो भी किसी दूसरे रियासत में थी ,हो सकता था की ये उन्ही ठाकुरो के परिवार से संबंध रखते हो जो वहां के रियासत के राजा थे ,लेकिन इसके बारे में बंसल को नही पता था,

“तुम कहना क्या चाहते हो अजय “इसबार बंसल की आवाज कुछ धीमी थी ,

“कुछ नही सर बस हम आपकी बहुत इज्जत करते है और भले ही हम राजनीतिक रूप से प्रतिद्वंदी हो जाय लेकिन आप हमारे पिता के मित्र रहेंगे और आपके लिए हमारे दिल में सम्मान कभी भी खत्म नही होगा”

बंसल के चहरे पर एक मुस्कान आ गई

“तुम्हे भी हमारी कभी भी जरूरत पड़े तो याद करना,लेकिन फिर भी मैं तुम्हे ये हिदायत दूंगा की राजनीति से दूर रहो वो तुम्हारे बस का नही है ,और मैं तुम्हारे लिए हमेशा शुभकामना करूँगा “

गाड़ी रुकती है और अजय बाहर निकलता है,और पीछे आ रही गाड़ी जिसमे कलवा सवार था बैठकर फिर से अपने हवेली की ओर चल पड़ता है…..

वहां सभी अजय का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे ,सभी मेहमान जा चुके थे केवल दोनो परिवारों के लोग ,डॉ चुतिया ,बस बचे थे …

“क्या हुआ अजय ऐसे बंसल के साथ कहा चले गए थे…”गजेंद्र चिंतित होते हुए पूछता है..

अजय उसके कंधे पर हाथ रखता है ,

“कुछ नही मामा जी बस अब हमारा राज फिर से प्राप्त करने का समय आ गया है…”

सभी उसे प्रश्नवाचक निगाह से देख रहे थे,

वो बाली की तरफ देखता है ,

“कल केशरगढ़ चलना है “

बाली उसे आश्चर्य से देखता है और अजय बिना कुछ बोले ही वहां से चला जाता है ……...

“भइया हम केशरगढ़ क्यो जा रहे है,”

निधि अपने भाई के बाहों में आकर लेट गई.

“क्योकि हमे वहां कुछ काम है “

“क्या काम है भइया “

“तुम्हे रानी बनाना है”

“अरे आप भी ना रानी तो राजा की होती है ,”

“हा वो तो है बहन ,तो राजकुमारी बनाना है “

“अरे लेकिन राजकुमारी तो वो होती है ना जिसके पापा राजा होते है “

अजय उसकी बात पर उसे देखने लग जाता है ,अजय की प्यार भरी आंखे जैसे ही निधि से मिलती है निधि उठकर उसके होठो को चुम लेती है,और फिर उससे लिपट कर उसके सीने में छिप जाती है.

“भइया बताइये ना “

“हमारे पापा राजा ही थे बेटा बस उन्होंने हमे बताया नही “

“क्या “निधि जैसे खुसी और आश्चर्य से उछल जाती है,

“हा”

“पर भइया हम कहा के राजा है”

“केशरगढ़ “

“हा हा हा “निधि जोरो से हँसती है

“अच्छा मजाक था भइया ,हम उस खण्डर के राजा है ,जहा कुछ भी नही है उससे अच्छा तो हमारी हवेली है “

“केशरगढ़ कोई किला बस नही है निधि ,वो एक जगह थी कभी,जिसके अंदर आज के कई शहर आते है, हम वहां के राजपूत ठाकुरो के वंसज है ,जिसका हमारे दादाजी को पता था लेकिन उन्होंने कभी इसका जिक्र हमारे पापा से नही किया क्योकि इसका कोई भी मतलब नही था लेकिन अब उसका बहुत मतलब होने वाला है…”अजय गंभीर था ,और निधि परेशान

“ये क्या बोल रहे हो भइया “

“तू मेरी सबसे प्यारी गुड़िया है और तुझे मैं एक राजकुमारी बनाऊंगा “

निधि अपने भाई को बड़े ही प्यार से देखते है ,

“सच में “

“हा मेरी जान सच में “वो उसके माथे में एक किस करता है ,

तभी उसकी नजर निधि के हाथो में पहने एक पतले से घड़ी पर जाती है ,वो उसने पहले कभी नही देखी थी ,

“ये घड़ी ???”

“अभी ने दी है अच्छी है ना “

“कौन अभी “

“अरे भईया अभिषेक …”

“ओह हा अच्छी है,”

अजय उस घड़ी को ध्यान से देखता है ,और थोड़ा गंभीर हो जाता है .

निधि अजय को ऐसे गंभीर देख कर उसके गालो को अपने हाथो से सहलाती है

“क्या हुआ भइया “

“कुछ भी तो नही “

“बताओ ना “

“तुम अभिषेक को पसंद करती हो ???“

निधि थोड़ा सा शर्मा जाती है साथ ही उसका दिल जोरो से धड़कता है वो अजय से सटकर सोई थी अजय को उसके धड़कन का आभास हो जाता है,

“ये कैसा सवाल है भइया,वो मेरा अच्छा दोस्त है “

“बस दोस्त है या दोस्त से कुछ जाता “

“आप भी ना कुछ भी बोलते हो दोस्त से ज्यादा क्या होगा,और मैं किसी को भी अपना भाई नही बना लेती जैसे आप बना लेते हो …”

निधि ने अपना मुह फूलते हुए कहा ,अजय ने उसे देखा जैसे पूछ रहा हो किसीके बारे में बोल रही है

“क्या देख रहे हो वो खुसबू …”

“वो हमारी बहन है समझी “

“बहन होगी आपकी मेरी तो भाभी है”

“चुपकर पागल कही की और बात मत घुमा जो पूछा वो बता ना “

“मैं बात नही आपको घुमा दूंगी मैं राजकुमारी हु वो भी केशरगढ़ की ,समझे “

निधि ने बात सचमे घुमा दिया था और अजय को पता था की उसे क्या करना है वो बात को वही छोड़ देता है और उसे अपने बहन की बदमाशियों में बहुत प्यार आता है ,

“अच्छा मेरी राजकुमारी जी पहले ये घड़ी उतार दो कही तुम्हारे अभी की घड़ी टूट ना जाय,जाओ अपने रूम के रख दो “

निधि मुह बनाते हुए चले जाती है...

“अच्छा मेरी राजकुमारी जी अब आज्ञा हो तो सो जाय …”

“राजकुमारी चाहती है की आप उससे प्यार करे ,वो पलंगतोड़ वाला “

निधि अपना जीभ निकल कर उसके होठो पर रख देती है ,और अजय उसके जीभ को अपने दांतो से दबा लेता है,और हल्के से काटता है ,निधि झूठे गुस्से से अजय के छाती में एक मुक्का मरती है ,

“चूसने को दिया था काटने को नही “

अजय बस उसे देखने लगता है ,कितनी प्यारी थी निधि ,और अभिषेक ….उसका तो पता करना पड़ेगा,अजय निधि को किसी भी के भरोसे नही सौप सकता था जबकि उसे पता था की उसके कई दुश्मन घूम रहे है,और सभी को पता था की निधि ही अजय की सबसे बड़ी कमजोरी है,अजय निधि को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाना चाहता था ना की कमजोरी…

अजय निधि को निहारते निहारते फिर से अपने विचारों में खो गया था,

“आउच ,क्या कर रही है “निधि की खिलखिलाहट उसे सुनाई दी ,निधि ने अजय निचले होठों को जोरो से काटा था,

“कहा खो जाते हो जल्दी से आओ कल सुबह जल्दी से जाना है ना “

“तेरी तो “

 
अजय पूरे ताकत से निधि को पकड़कर बिस्तर में डाल देता है और फिर से उनके प्यार का करवा चल पड़ता है….

सुबह से सभी तैयार होकर केशरगढ़ की ओर निकल जाते है साथ में तिवारियो का परिवार भी था,सभी को यही उत्सुकता थी की जो अजय ने उन्हें बताया है क्या वो सच है,अगर वो सच होता तो हजारों सालो का वो रहस्य खुल जाने वाला था,और अजय को वो राजगद्दी आधिकारिक तौर पर मिल जाती जो कभी केशरगड़ के राजाओं की थी,

घने जंगलो के बीच वो खण्डर सा किला था,जिसमे किले के अवशेष ही बचे थे,पता नही वहां कौन सा ऐसा खजाना था जिससे अजय को फायदा होने वाला था,जब वहां लोग पहुचे तो देखा की पूरी जगह पुरातात्विक विभाग ने घेर रखा था,

“अरे यहां तो कुछ काम चल रहा है,”

बाली ने वहां मौजूद मजदूरों को देखते हुए कहा

“फिक्र मत कीजिये चाचा डॉ की यहां की सुपरवाइजर से पहचान है,

“सुना है कोई विदेशी महिला है ,इटली से आयी है “

“हाँ मामा जी मैंने भी सुना है “

“अरे तुम लोग क्यो दिमाग लगा रहे हो हमारी ही बंदी है …”डॉ ने सबको टोका ,

सामने से एक अग्रेजो जैसे गोरी हल्की मोटी सी लगभग 35-40 साल की महिला आ रही थी ,जो डॉ को देखते ही उसे हाथ हिलाकर दिखती है ,उसे देखकर मेरी (सेकेट्री ) भी बहुत खुस हो जाती है ,वो पास आकर डॉ के गले से लगती है ,

“वाओ डॉ बहुत दिनों बाद मिले “

“बस इधर आना ही नही होता यार “

“वाओ ये तो मेरी है ना इकबाल भाई की वाईफ ,कैसे है इकबाल भाई ,सुधरे की तुमने उन्हें छोड़ दिया “

“नही दीदी वो तो नही सुधरे मै उन्हें छोड़ कर अब डॉ साहब की सेकेट्री बन गई हु “

दोनो गले मिलते है,

डॉ उसका परिचय बाकियों से कराता है,

“ये मलीना है ,यहां की सुपरवाइजर .15 साल पहले ये यहां आयी थी तब इस जगह पर किसी का भी ध्यान नही गया था .आज इसके मेहनत से इसने यहां के इतिहास को जानने में बहुत मदद मिली और साथ ही मिला कुछ कीमती चीज ,कुछ तस्वीरे,कुछ लेख ,और एक सुराग जो बताता है की यहां से उनके परिवार के लोग आखिर गए कहा,अभी कोई भी ऐसा नही सामने आया जो उनका वंसज होने का दावा करे ,आज भी यहां के लोग उन्हें ही अपना राजा मानते है ,अगर अजय या आपके परिवार के किसी भी का डीएनए यहां मौजूद खून के छिटो से मिल गया तो ये साबित हो जाएगा की आप ही इनके वंसज है ….”

“लेकिन इससे हमे क्या फायदा होगा “

विजय ने सवाल किया

“इससे हमारी शाख का हमे पता चलेगा …”

अजय के चहरे में एक अजीब सी चमक आ गई ,

“मुझहे लगता है,मलीना जी की मैंने आपको कही देखा है …”

बाली की बात से डॉ और मलीना दोनो ही हँस पड़े ,

“क्या यार बाली आप भी हमे भूल गए ,”

मलीना ने उसे हँसते हुए देखा

“सच में याद नही आ रहा है की कहा देखा है ,तुम काजल की दोस्त हो क्या “

मलीना और डॉ जोरो से हँसते है,

“पकड़ तो लिए बाली जी ,लेकिन आपको काजल याद रही हम नही “

“सॉरी यार “

बाली भी आकर मलीना के गले लगता है,

“साले बाली काजल को तू कैसे भूलेगा “

डॉ उसे कोहनी से मारता है,

“चुप कर बे मरवाएगा क्या “

“तो कैसे है विकास और काजल “

काजल का नाम लेते ही बाली के चहरे में एक चमक सी आ गई थी ,

“बहुत अच्छे है ,विकास अब IAS बन चुका है और काजल का वही पुराना होटल का बिजनेस …”

“हम्म आदित्य इंटरनेशनल”

“चलिए जब यहां तक आ गए तो कभी उनसे भी मिल लीजिएगा,ऐसे आप तो हमे भूल ही गए “

“हा भैया के मौत के बाद से सबकुछ बदल सा गया “

“बहुत दुख हुआ वीर का सुनकर ,इतना अच्छा इंसान था ,दोस्तो के लिए जान देंने वाला “

डॉ सभी का परिचय एक एक कर मलीना से करता है,

“ऐसे गजेंद्र और महेंद्र तुम भी इसके पिता जी को जानते हो “

दोनो डॉ को धयन से देखते है ,

“ये मिश्रा जी की बेटी है ,मिश्रा जी याद है जो कभी चीफ सेक्टरी हुआ करते थे “

“यार उन्हें कैसे भूल सकते है ,बहुत अच्छे इंसान थे ,दुख हुआ उनके बारे में जानकर “

मलीना के चहरे पर एक फीकी मुस्कान आ गई

“हा अच्छे इंसान तो थे……..”

डॉ अपना हाथ उसके कंधे में रखता है,

(नोट-मलीना ,काजल ,विकास,इकबाल,मिश्रा के बारे में ज्यादा जानने के लिए मेरे दूसरी कहानी बीवी के कारनामे पढ़े )

“तो कौन है हमारे राजा साहब “

“ये “

अजय आगे आता है,मलीना उसे ध्यान से देखती है,

“पूरा वीर है ये तो ,मैं जब वीर को पहले बार देखी थी तभी समझ गई थी की वो किसी राजघराने से होगा,राजाओं की तरह पर्सनाल्टी थी उसकी ...अजय तुम्हारा ब्लड सेम्पल चाहिए होगा मुझे,और आइए आप सब आपको कुछ दिखाना है ….”

खण्डर सा हो चुका वो महल आज बड़ा ही अद्भुत लग रहा था सामान्य जानो का वहां आना जाना निषेध था,उनलोगों के उसे खोद खोद कर बहुत सारा भाग बाहर ले आये थे,एक एक पत्थर को साफ किया गया था,और उनमे बनी कलाकृतियां बेहद खूबसूरत लगने लगी थी,

“वाओ “

निधि के मुख से अनायास ही निकल गया,

“भइया मैं तो सोच रही थी की ये बस खण्डर होगा लेकिन ये तो पूरा महल जैसा है कितना सुंदर है,बस थोड़ी छत को बनवाना पड़ेगा “निधि के बात सुनकर सभी हँसने लगे ,अजय ने अपना हाथ उसके सर पर रखा,

“सच में तुमने बहुत मेहनत की है मलीना ,जब मैं पहले यहां आया था तो ये बस अवशेष ही बचे थे,इतना मेहनत किया है तुमने इन सबको सम्हालने में “

“मूल्यवान चीज को सम्हालने और खोजने में मेहनत तो लगती है डॉ ,मैंने तो अपनी पूरी जवानी यही बिता दी तब जाकर कुछ पता चल पा रहा है,ये देखो ये तुम लोगो को देखना चाहिए…”

एक बड़ी सी मूर्ती कमरे के कोने में रखी थी ,थोड़ी टूटी थी लेकिन फिर भी अच्छी कन्डीशन में थी ,

“ये हमे जमीन के नीचे से मिली जब हम इस कमरे को खोदना शुरू किये थे,ये कमरा शायद राजा का कमरा रहा होगा,ये इतना बड़ा है ,कई एकड़ के फैले किले के क्षेत्र के महल के हिस्से में ये सबसे बड़ा कमरा है,और इसकी नक्कासी देखो...अभी तो मुझे और 15 साल लग जाएंगे इस किले को पूरी तरह समझने में “

वो आधी बाते फुसफुसाते हुए कह गई……….

उस मूर्ती को तो सब देखते ही रह गए …

“अब समझे अजय की मैंने तुम्हे ये क्यो कहा था की तुम हो ना हो राजपरिवार के सदस्य होंगे ..”

डॉ ने मुस्कुराते हुए अजय से कहा जो की बड़े ही ध्यान से उस मूर्ति को देखे जा रहा था…

“सचमे अद्भुत …”

बाली और गजेंद्र के मुह से एक साथ ही निकला,

“ये तो हु ब हु भईया जैसी दिख रही है “

निधि भी उछाल गई …

लेकिन मलीना थोड़ी गंभीर थी ,

“मुझे पूरा विस्वास है की तुम राज परिवार के ही वंसज हो ,लेकिन इसे सिद्ध करना बहुत ही कठिन होने वाला है ,यहां के पुरातात्विक विभाग के अधिकारी इस मूर्ती को यहां से ले जाना चाहते है ...वो ऐसे तो कह रहे है की वो इसे किसी म्यूजियम से रखेंगे लेकिन मेरा ख्याल है की ये इसे नष्ट करने की कोसिस करेंगे ..”

“क्यो ,कही बंसल तो इसमें इन्वॉल्व नही है”

अजय की बात से मलीना उसे देखने लगी जैसे की उसने उसके मन की बात समझ ली हो …

“हा मुख्यमंत्रि का इतना प्रेशर कभी नही था,पहले भी कहा गया था की इस मूर्ति के बारे में किसी को भी भनक ना लगे,और इसे कई बार यहां से ले जाने की कोसिस भी की गई थी लेकिन मेरे दबाव में सभी झुक जाते थे ,लेकिन इस बार तो हद हो गई मुझे ही चार्ज से निकलने की धमकी दे दी..जब मैंने पहली बार इस मूर्ति को देखा था तो मुझे ये बहुत कुछ वीर की याद दिलाता था,लेकिन तबतक वीर की मौत हो चुकी थी ,बंसल साहब भी इसे देखकर शॉक हो गए थे,और उन्होंने आनन फानन में ही मुझपर दबाव डाला था की इस मूर्ती को यहाँ से गायब कर दिया जाय ,लेकिन मेरे पास यहां का फूल चार्ज था और सीधे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरातात्विक महकमो के दबाव में आकर बंसल चुप हो गया ,कभी कभी और भी कोसीसे की गई पर वो भी नाकाम हो गई ,बदले में राष्ट्रीय विभाग ने उन्हें लताड़ भी दिया,तब से वो चुप बैठ गया,लेकिन कल से उसने पूरी ताकत लगा दी है इस मूर्ती को यहां से ले जाने की आज शाम तक वो परमिशन भी ले आएगा,...मुझे तो लगता है की वो चाहता ही नही की राजाओं के वंसजो का पता चले….मुझे समझ ही नही आ रहा है की क्या किया जाय ”मलीना कहते हुए रुक गई

“आप आज छुट्टी ले लीजिये ,आपकी तबियत आज अचानक खराब हो जाएगी “

“क्या “अजय की बात मलीना को समझ नही आयी

“ये मजदूर कहा के है ,और आपके सिवा यहां और कौन कर्मचारी या अधिकारी है “

“सभी मजदूर तो पास के गांव वाले ही है ,कुछ कर्मचारी है जो अलग अलग काम देखते है ,और कुछ जूनियर भी यहां पर होंगे...कुछ बाहर के होंगे कुछ आये नही है..”

 
“ठीक विजय ,नितिन ,धनुष,किशन,राकेश ….सभी को ख़रीद लो ,और आप यहां से चले जाइये आज की छुट्टी ले लीजिये..सभी को समझा दो की हम यहां आये ही नही थे,चाचा जी,मामा जी प्रेस को फोन लगाइए,जितने भी हमारे विस्वसनीय लोग प्रेस में है सबको काल कीजिये किसी को भी भनक नही लगनी चाहिए की वो क्या रिपोर्टिंग करने वाले है,और आज दोपहर तक ये मूर्ती इंटरनेशल न्यूज़ होनी चाहिये,हर एंगल से इसका फ़ोटो खीचकर छपवाये और हम भी यहां से निकलते है बस कुछ लोग यहां देख रेख में होंगे विजय तुम नितिन के साथ रुक जाओ ,जैसे ही न्यूज़ वाले आ जाए हम भी आ जायेगे,आसपास से भीड़ भी इकठ्ठी करनी है ,कलवा चाचा बजरंगी चाचा आप ये काम करो ,लोगो को अपनी गाड़ी में भरकर लाओ और यहां एक माहौल तैयार कर दो...एक बार इंटरनेशनल लेबल में बात पहुच गई तो बंसल का बाप भी इस मूर्ती को नष्ट नही पायेगा...ये हमारे लिए बहुत ही इम्पोटेंट है,पैसा बहा दो सबको खरीद लो ,जितना चाहे उतना दे दो ……”अजय के फैसला सुनने की देरी थी की सभी अपने काम में व्यस्त हो गए…

मलीना आंखे फाड़कर देखने लगी ,

“आप अगर ये कल ही बता देती तो शायद अभी तक ये इंटरनेशल न्यूज़ होती “

“लेकिन इससे तुम्हे क्या मिलेगा,अगर तुम राजा के वंसज साबित भी हो जाते हो तो भी ये प्रोपर्टी तो सरकार की ही होगी और यहां से तुम एक ढेला भी नही ले जा पाओगे “

“मुझे बस वो नाम चहिये आपको पता नही की बंसल इसके पीछे हाथ धो कर क्यो पड़ा है,ये इस राज्य की राजनीतिक साख की बात है …….”

मलीना बस उसके चहरे को देखते रह जाती है...

“नही मुझे कुछ नही पता “

एक जोर का डंडा फिर से अभिषेक के पेट में पड़ता है,

और उसकी चीख सुनाई देती है……..

“बस करे क्या भाई अब तो भूख भी लग गयी,”

राकेश की आवाज सुनाई देती है,

“अबे तुम अभी इस परिवार का हिस्सा बने हो हमारा तो नियम है पहले जी भर के मारो फिर जी भर के खाओ “

विजय ने हँसते हुए कहा और फिर डंडा घुमा दिया,अभिषेक के चीख के साथ ही किशन और विजय की हँसी निकल गई,

तभी गेट खुला और अजय और नितिन कमरे में आते है,वो एक गेरेज जैसा कमरा था जहा ज्यादा समान नही थे,बीचो बीच अभिषेक को उल्टा लटकाया गया था,जो की बस एक जीन्स पहने था,ऊपर वो कुछ भी नही पहने था और डंडों की चोट साफ नजर आ रही थी,

“चलो साले की किश्मत अच्छी है की भैया आ गए”

किशन की भी हँसते हुए आवाज अभिषेक को सुनाई दी और वो भी थोड़ा रिलेक्स हुआ…..

“क्या कहा इसने”

अजय का पहला सवाल यही था,

“बोलता है कुछ पता नही “

विजय ने साफ शब्दो में कहा

“अच्छा नीचे उतार”

अजय के आदेश मिलते नही उन्होंने उसे नीचे उतार के बैठा दिया,

अजय और नितिन उसके पास ही गए थे की अभेसेक का रोना शुरू हो गया,

“भइया मैं सच कहता हु मुझहे कुछ भी नही पता,आप लोग मुझे क्यो उठाकर लाये है मुझहे समझ नही आ रहा “

“घड़ी……...याद है ना जो तूने निधि को दी थी ,उसमे एक माइक्रोफोन था ,हमारी बात सुनकर तू क्या करना चाहता था,बस इतना बता दे,तेरा बाप तुझे हर जगह ढूंढ रहा है,मैं नाही चाहता की उसके इकलौते बेटे लाश उसे मिले वो भी ऐसे की वो उसे पहचान ना पाए “

अजय ने बड़े ही सरल शब्दो में अभिषेक को समझा दिया,लेकिन नितिन के लिए ये पहली बार था ,किसी के साथ इस तरह पेश आना उसे तो इसकी भनक भी नही थी,वो थोड़ा चौका तो जरूर लेकिन उसे भी याद आया की वो भी तिवारियो के परिवार से है जंहा ये सब घटनाये रोज का काम है…

“मुझे तो ये घड़ी मिस्टर एक्स ने दी थी निधि को देने के लिए ….बस भइया मुझहे इससे ज्यादा कुछ भी नही पता “

“भाई ये जबसे हमे चुतिया बना रहा है मिस्टर एक्स बोल कर बोलो तो इसकी खाल खिंचवा दु “

इसबार विजय सचमे गुस्से में था ,लेकिन अजय ने उसे रुकने को कहा

“कौन है ये मिस्टर एक्स “

अभिषेक पूरी कहानी बताने लगा की कैसे एक आदमी उसे मिला और निशि की तस्वीर दिखाकर उसे बहलाया ,कैसे उसने ही उसे चुनाव में खड़े होने को कहा और वो दोनो परिवारों से इतनी नफरत करता है...उसका नाम किसी को नही पता लेकिन जो भी उसे जानते है वो उसे मिस्टर एक्स के नाम से जानते है,उन्होंने ही उनकी गाड़ी पर हमला कराया था और शायद उनके पिता की हत्या के पीछे भी उसका ही हाथ है,और उस घड़ी से उसे ये भी पता चल गया की वो केशरगढ़ जा रहे है,लेकिन वो कुछ भी नही कर पाया,अब उसका प्लान उनकी बहनों को पटा कर …………..

“अभेसेक उससे आगे नही बोल पाया क्योकि उसे पता था की उससे आगे सुन पाना शायद ना तो अजय ना ही नितिन के लिए संभव था,वो बस इतना ही बोल पाया की उनकी नजर निधि और खुसबू पर है………

अजय और नितिन जो अपन बहनों से जान से भी ज्यादा प्यार करते थे,उसकी बात से आग से जलने लगे लेकिन वक़्त जलने का नही जलाने का था……….

सबसे बड़ी समस्या थी की क्या ऐसी प्रॉब्लम थी की मिस्टर एक्स उनके परिवार को बर्बाद करना चाहता है,

“छोड़ दे इसे जाने दे “

अजय ने विजय को आदेश दिया …

“लेकिन भाई ……”

“बस बोला ना जाने दे इसे ,और अगर वो जो भी हो तुझे मिलने बुलाये तो जरूर जाना लेकिन हमे बताकर ,और तू आज सुबह से यहां था ये किसी को भी पता नही चलना चाहिए ….”

“जी भइया “

अजय उसके पास जाकर उसके कंधे पर हाथ रखता है,

“देख भाई तूने मुझे भइया कहा है और निधि ने तुझे अपना दोस्त माना है,दोस्त ही नही शायद दोस्त से कुछ ज्यादा ,और मुझे कोई भी एतराज नही है,लेकिन अगर वो लोग कामियाब हो गए तो ना तुझे निधि मिलेगी और ना ही हमारा साथ,तुझे ये सोचना है की तुझे क्या चाहिए ,तू हमारे साथ रह उसके बारे में जो भी तुझे पता चले वो हमे बता ,मैं तो तुझे इस राज्य के मंत्री के रूप में देख रहा था और तू ही यू गद्दार निकला …”

विजय की आंखे लाल हो चुकी थी पर अजय ने उसे इशारे से शांत रहने को कहा वही अजय के प्यार भरे बातो से अभिषेक पिघल गया और रोने लगा,वो अजय से माफी मांगने लगा अजय उसे सहानुभूति ही दिखता रहा और उसे सही सलामत वापस भेज दिया ,.....

“इसपर नजर रखने के लिए आदमी इसके पीछे लगा दे “

अजय के कहने से ही किशन तुरंत ही उसके पीछे वहां से निकल गया…

“माना की आप निधि से बहुत प्यार करते है और हमारे घर के सबसे बड़े आप है लेकिन भाई वो मेरी भी तो बहन है….और आप उसे ये कह रहे है की आपको उससे कोई भी प्रॉब्लम नही है…”

विजय सचमे गुस्से में था…

“बात को समझ उसे अपनी ओर करना सबसे जरूरी था,

“अरे मा चुदाये आपकी ये राजनीति भरी बाते ,आपको पता था की ये हमारी बहन के लिए ये सोच रहा है लेकिन आपने उसे जाने दिया,साले की लाश भी नही मिलनी थी कही …’”

विजय गुस्से को यू पी रहा था की उसके आंखों में पानी आ गए ..

आज पहली बार था की विजय ने अजय के किसी भी फैसले पर सवाल उठा दिया था ,यू तो अजय को भी कहते हुए कुछ भी नही बना वो भी जवाब की तलाश में था…..विजय को अपनी गलती का आभास हुआ और वो कमरे से निकल गया ,अजय के आंखों में बस आंसू थे ...नितिन अपना हाथ उसके कंधे पर रखता है…

“भाई विजय दिल से सोचता है दिमाग से नही “

नितिन ने अजय को सहानुभूति देते हुए कहा ,

“वो भी निधि से उतना ही प्यार करता है जितना की मैं,बस दिखता नही है,,,सच में नितिन परिवार की जिम्मेदारी निभाते निभाते कुछ फैसले ऐसे भी लेने पड़ते है जो दिल से नही दिमाग से लेने पड़े,उसने कुछ भी गलत नही किया और मैंने भी जो किया वो हमारे परिवार की भलाई के लिए ही था…”

 
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