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जुनून (प्यार या हवस) complete

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आज वस्ल की रात थी ,और किशन के साथ सुमन की दिल की धड़कने भी बढ़ी हुई थी ,किशन बड़ी मुश्किल से उसके पास जाकर बैठा था,सुमन अब भी घूंघट में ही बैठी मुस्कुरा रही थी ,वो कभी अपने पैरो को एक दूसरे पर मसलती कभी किशन के पहल का इंतजार करती ……..

“सुमन …..”

“हम्म्म्म “

“अरे कुछ तो बोलो “

कुछ देर तक कोई भी आवाज नही आयी ,किशन उसके पास जाकर उसका घूंघट उठा लेता है ,सुमन बड़ी मुश्किल से ही सही लेकिन अपनी नजर नीचे ही गड़ाए रखती है,

“सुमन …..”

“हम्म “

“ऐसे कैसे चलेगा,मुझे भी बहुत डर लग रहा है “

सुमन हल्के से हस्ती है ,वो हँसी हल्की ही थी लेकिन किशन के कानो तक पहुच ही गई

“अरे तुम्हे मजाक लग रहा है ,ये देखो “

वो सुमन के हाथो को पकड़कर उसे अपने दिल के पास लाकर रख देता है जो की तेजी से धड़क रहा था,सुमन उसे नजर उठाकर देखने पर मजबूर हो जाती है ,जो लड़का कभी उसका रेप करने वाला था जो ना जाने कितनी लड़कियों के साथ सेक्स कर चुका था आज वो एक लड़की के सामने बैठा ये कह रहा है ,पहले तो सुमन को यकीन नही हुआ था लेकिन उसके धड़कते दिल ने उसे सच बता दिया था,

दोनो की नजर मिली और सुमन ने तुरंत ही अपनी नजर झुका ली ,सुमन की नजर का प्रेम देखकर किशन को कुछ राहत मिली और साथ ही थोड़ी हिम्मत भी मिली वो उसके और पास गया …

“सुनो ना “

“ह्म्म्म “

“तुम बहुत ही खूबसूरत लग रही हो मन करता है की ………..”

सुमन ने कुछ भी नही कहा बस उसके बांहो को जो की सुमन के बाजू में था हल्के से मरती है ,

“अरे मैं तो किस की बात कर रहा हु “

सुमन कुछ भी नही कह पाती …

“अच्छा लगता है तुम्हारा मन नही है मैं जाता हु “

किशन को भी पता था की वो उसे रोकेगी लेकिन उसने अपने आवाज में एक झूठा गुस्सा लाया ,एक हल्का सा गुस्सा ,

सुमन तुरंत ही उसकी प्रतिक्रिया देती है और जैसे ही किशन पलटने को होता है वो उसका हाथ पकड़कर रोक लेती है ,

“मत जाओ “सुमन उसे देखते हुए बोलती है ,इससे किशन के चहरे में एक मुस्कान आ जाती है लेकिन सुमन शर्मा जाती है,और फिर से अपनी नजर नीचे कर लेती है ,

“तुम तो कुछ बोल ही नही रही हो “

“क्या बोलू “

“मेरी बात का जवाब दोगी “वो हा में सर हिलती है …

“हम तो इतने दिनों से साथ है ना फिर आज इतना क्यो शर्मा रही हो “

वो फिर से नजर उठाकर उसे देखती है लेकिन फिर से नजर झुका लेती है,

“क्योकि अब आप मेरे पति हो “

“अच्छा तो अपने पति के पैर तो तुमने छुवे ही नही “किशन के चहरे में एक मुस्कुराहट तैर जाती है वही सुमन जैसे कुछ भूल गई हो वो हड़बड़ाई और तुरंत किशन के पैर ढूंढने लगी किशन जोरो से हँसा और इसी हलचल में उसने सुमन को अपने ऊपर गिरा लिया ,अब किशन बिस्तर में पड़ा था वही सुमन उसके ऊपर पड़ी थी ,सुमन का घूंघट पूरी तरह से निकल चुका था ,हलचल में बाल भी थोड़े बिखर गए थे,लेकिन फिर भी सलीके से सवांरे गए थे ,एक आउच के साथ वो किशन की बांहो में थी ,किशन ने आराम से एक तकिया अपने सर में रख लिया और स्तिथि का भान होने पर सुमन बिल्कुल शर्मा कर पहले तो छूटने की कोसिस करने लगी लेकिन किशन की बांहो ने उसे मजबूती से कस रखा था ,वो हारकर अपना सर उसके सीने से लगा के लेट गई उसका विरोध कम होने पर किशन ने उसके मुखड़े को उठाकर देखा ,वो कठपुतली सी उठ गई ,सजी सवारी सवाली सलोनी सी सुमन ,एक तेज से भरा हुआ रूप जो की उसकी परिस्थितियों से और भी उज्वल हो गया था,वो आंखे बंद किये हुए किशन को अपना सब सौपने को तैयार थी ,ऐसे तो किशन ने बहुत ही हूर परिया देखी थी लेकिन सुमन के प्यार के आगे सब ही फीके थे ,वो अपने सर को उठाकर उसके होठो पर एक चुम्मन लेता है जिससे सुमन फिर से हरकत में आती है और अपना सर उसकी छाती में गड़ा देती है ,

“सुमन मेरी जान ,कितनी मुद्दत से तुम्हे पाना चाहा था और आज मिली तो यू बेरुखी दिखा रही हो “

सुमन बस हँस कर रह गई ,किशन उसके बालो को सहलाता रहा ,वो भी एक सुकून में खो गया था जंहा करने को कुछ भी नही था,जो भी था वो होने को था,वो जब हो जाय परवाह किसे थी,अब तो सुमन उसकी थी और वो उसका ……

वो उसके बालो को सहलाता रहा ,सुमन भी आंखे बंद किये अपने पति के अहसास को अपने अंदर भरती रही ,लेकिन ना वो ही आगे बढ़ रहा था ना ही सुमन …

आधे घंटे यू ही बीत गए ,किशन का हाथ भी अब उसके सर पर ही रखा था लेकिन कोई भी हलचल नही कर रहा था,सुमन को लगा जैसे की किशन सो ही गया हो ,वो उठाकर उसे देखने लगी सचमे किशन आंखे बंद किये हुए लेटा था,उसे उसे देखकर हँसी आयी और वो उठाकर उसके होठो के पास जाकर रुकी वो देखना चाहती थी की वो सोया है या नही ,कोई भी हलचल नही होने पर वो उसके होठो पर एक प्यारी सी किस करती है ,और उठाकर फिर से उसे देखती है वो अब भी आंखे बंद किये हुए सोया था ,वो फिर से उसके होठो के पास पहुचती है और जैसे ही वो उसके होठो पर किस करती है किशन अपने हाथो को उसके सर पर लाकर रख देता है और अपने होठो को खोलता हुआ उसके होठो को चूसना शुरू कर देता है ,इससे सुमन पहले तो चौक जाती है लेकिन जैसे ही उसे ये आभास होता है की किशन पहले से जग रहा था वो अपने हाथो से उसे मारती है लेकिन अब उसका सर किशन के कब्जे में था ,वो उसके होठो को बेपनाह चूमे जा रहा था ,आखिर सुमन भी अपने लाज के पहरे को कब तक सम्हाल पाती ,वो भी अपने होठो को खोलकर उसका स्वागत करती है और दोनो के जीभ आपस में टकरा जाते है ,एक पल को जैसे सब रुक जाता है लेकिन अगले ही पल दोनो ही दुनिया की हर फिक्र को छोडकर अपने महबूब की बांहो में समा जाते है ,दोनो ही एक दूसरे के होठो की गहराइयों को नाप रहे थे और एक दूसरे के सर को पकड़े हुए उसे अपनी ओर खिंचने की कोशिस कर रहे थे,ये तब तक चला जब तक की उनकी सांसे इतनी नही भर गई की वो अलग होने पर मजबूर ना हो जाय ,जैसे ही वो अलग हुए सुमन जल्दी से उसे छोड़ कर फिर से शर्माती हुई दूसरे तरफ मुह कर सो गई ,और किशन उसके पीछे से उसे जकड़ लिया ,वासना की कोई भी लहर अभी दोनो के मन में नही उठी थी ,ना ही मन में ना ही शरीर में ,वो बस एक दूसरे को अहसास करना चाहते थे ,किशन उससे जितना सट सकता था सट गया ,और उसके गले को चूमने लगा ,उसके होठो में जो भी आता वो उसे ही बड़ी शिद्दत से चूमता चूसता जा रहा था वो उसके गले से बालो तक पूरा सर से लेकर उसके माथे से होता हुआ उसके गालो तक ,उसकी आंखों को नाक को होठो को गालो को गले से आगे के हिस्से से होता हुआ उसके छातियों के उस हिस्से को जो की उसके ब्लाउज़ के बाहर से झांक रहे थे ,उसने उसकी साड़ी के पल्लू को दूर फेक दिया सुमन ऊपर बस ब्लाउज़ में थी जिससे किशन को उसके उन्नत स्तनों की झलकियां मिल रही थी ,किशन ने अपने जीभ को उस दोनो स्तनों की खाई में घुसाने की कोशिस की लेकिन नाकाम ही रहा लेकिन जितना उसके जीभ और होठो के दायरे में आया वो उसे पूरी शिद्दत से चूसा चाटा और चूमा ,सुमन किशन के सर को पकडकर उसे कभी रोकती तो कभी अपने पास धकेलती ,उसकी सांसे भी तेज हो गई थी वही किशन की उत्तेजना भी बढ़ गई थी ,सुमन अब अपने पीठ के बल आ चुकी थी और किशन उसके ऊपर लगभग चढ़ ही गया था,वो अपने हाथो को ऊपर कर उसके स्तनों पर दबाव बनाया जो की सुमन के सहन के बाहर था ,

“आह जान “

वो उसके सर को पकड़कर उसे अपने ऊपर खिंची और उसके होठो पर अपने होठो को मिला दिया ,दोनो फिर हवस के एक झोंके से बाहर आकर प्यार के सागर में डूबने लगे ,पहले तो वो जोरो से चूसने लगे थे लेकिन फिर वो आराम से और इत्मीनान से एक दूसरे के होठो में खोने लगे,किशन ने आगे बढ़ने की सोची और अपना हाथ उसके पेट से ले जाकर उसके साड़ी के अंदर घुसने की कोसीसे करने लगा ,सुमन ने उसका हाथ रोका और उसके कानो ने धीरे से कहा

“आज नही ना “

किशन को कभी किसी समझदार आदमी की वो बात याद आ गई जिसने कहा था की सुहागरात की पहली रात सिर्फ प्यार नो सेक्स ….

किशन मुस्कुराता हुआ अपना हाथ वहां से हटा लिया और फिर से उसके होठो में घुस गया ,सुमन अपने पति के द्वारा अपने लिए किये सम्मान और आदर को देख कर उसके प्रति प्यार से और भी भर गई और उसे जिंदगी भर पूरा प्यार देने का वचन मन में लेती हुई ,उसके होठो में अपने होठो को समर्पित कर दिया ………..

“तो बताओ ना भाभी जी की क्या क्या हुआ “रानी और निधि ने सुबह से ही सुमन को पकड़ लिया था,

“कुछ भी नही “

“ऐसा कैसे हो सकता है ,की किशन भाई कुछ भी ना करे “

सोनल कमरे में आते हुए बोली

“सच्ची दीदी कुछ नही हुआ बस किस “

“अरे वाह मेरे भाई को एक ही रात में सुधार दिया तुमने “सोनल हँस पड़ी साथ में बाकी सभी …

 
इधर

अजय और नितिन बैठे बाते कर रहे थे,साथ ही विजय धनुष और अभिषेक भी थे

“भइया हमे बहुत ही सोच समझकर काम करना पड़ेगा “

“हम्म अभिषेक तूम कालेज के अध्यक्ष हो कितने लड़के है हमारे साथ “

जब से इन भाइयो ने अभिषेक को उल्टा लटकाया था वो बेचारा भीगी बिल्ली की तरह रहता था और साथ ही उनकी हर बात माना करता था,अजय को पता था की इसे बस में रखना बहुत जरूरी है क्योकि उसके अंदर प्रतिभा थी जिसका उपयोग जिसका उपयोग अजय को अपनी पार्टी के लिए करना था ,

“भइया लगभग सभी “

“लगभग का क्या मतलब होता है “विजय की दमदार आवाज से अभी थोड़ा घबराया ,अजय ने उसे शांत रहने को कहा ,

“भइया कुछ लोग पहले से पुरानी पार्टी के मेम्बर है ,और वो कुछ ना कुछ पदों में भी है उन्हें तोडना मुश्किल है “

“हम्म कोई बात नही दूसरी पार्टीयो में भी तो कोई होना ही चाहिए ,अभी अगर हम उन्हें अपने साथ लाने की कोशिस करेंगे तो वो नाजायज मांगे करेंगे उससे अच्छा है की उन्हें हम ऐसे हराये की वो हारकर हमारे साथ आने पर मजबूर हो जाय ,इस साल पहला इलेक्शन विधानसभा का होगा,फिर लोकसभा अगले साल से शुरू होने वाला है ,उसके बाद पंचायत चुनाव और निगमो के चुनाव होंगे ,हमे अपना बेस इतना मजबूत रखना है की पहले 2 इलेक्शन में भले ही हमे कम सीटे मिले लेकिन स्थानीय चुनाव तक हमारा परचम लहराए,एक एक गांव के एक एक बूथ तक हमारी पहुच होनी चाहिए ,हर जगह से जितने भी लोग है सभी को इकट्ठे करो ,सभी कार्यकर्ता को से जो भी वोट ला सकता है अपनी शक्ति दिखाने को कहो हम सबसे पर्सनली मिलेंगे,जो भी योग्य होगा उसे सीट दी जाएगी ,और पद भी ,निर्वाचन आयोग में पार्टी की मान्यता के लिए दरखास्त दे दी आई है ,कुछ ही दिनों में हमे हमारा नाम और चुनाव चिन्ह भी मिल जाएगा ,हमे तुरंत शक्ति प्रदर्शन के लिए रेलिया निकालनी शुरू करनी होगी ,बहुत काम है दोस्तो भीड़ जाओ पूरे प्रदेश में फैल जाओ और चुन चुन कर उम्मीदवार लाओ जो अपने इलाको का नेतृत्व करे ,,,,

उसी शाम फिर से एक मीटिंग होती है जिसमे करीब 100 लोग शामिल थे अधिकतर लोग युवा ही थे ,ठाकुर-तिवारी परिवार के सभी बच्चे वहां मौजूद थे और अजय के नेतृत्व में सभी को उनकी जिम्मेदारी बांटी जा रही थी ,सबसे ज्यादा काम अजय , निधि धनुष के पास था ,बाकियों को बस अपने ही क्षेत्रो में जाने का काम दिया गया था ,जिसका जैसा समर्थ था वैसा काम उन्हें मिल गया था ,निधि को पार्टी का प्रेजिडेंट बनाया गया,वही धनुष को मुख्यमंत्रि का उमीदवार घोषित कर दिया गया ,अभिषेक पार्टी का महासचिव था ,साथ ही हर इलाके में गांव और ब्लाक लेवल तक और शहरों में जिला से वार्डो तक के प्रतिनिधियो की लिस्ट भी जारी कर दी ,ये काम कई दिनों का था लेकिन अजय ने होशियारी दिखाई थी और पहले से ही लिस्ट तैयार रखी थी ,जैसे सालो से वो उसी काम में भिड़ा हुआ हो ,एक एक प्रतिनिधि हैरत में था की अजय उन्हें पर्सनली जानता है,उनके इलाको की समस्याओं को जानता है ,

असल में अजय ने इसकी प्लानिंग सालो में ही की थी ,वो पूरे इलाके में घूमता रहता था और कई लोगो से मिलता जो की सामाजिक और राजनीतिक रूप से एक्टिव थे ,वो अलग अलग पार्टी के या स्वतंत्र काम करने वाले थे ,अजय सभी को लिस्टेड करता रहता था और उनके काम पर नजर भी रखता था ,उसने अपनी पार्टी का इतना बड़ा खांचा बना दिया था की विरोधी पार्टीयो के पसीने आने वाले थे ,जो उन्हें बच्चा समझ कर मजाक में ले रहे थे ……...

ये बात दूसरे दिन के अखबारों की हेडलाइन होने वाली थी ,अखबार से बहुत से लोग भी वँहा शामिल थे और उन्हें खूब पिलाया गया ,और खूब खातिरदारी की गई ,ये सभी काम विजय और नितिन के सुपुर्द था ,अजय विजय और नितिन पर्दे के पीछे से काम करने वालो में थे,धनुष और निधि के चहरा सामने होना था,और किशन राकेश और बाकियों को इससे दूर ही रखा गया था ,ज्यादा से ज्यादा अपने क्षेत्र में कुछ प्रचार के लिए उनका उपयोग होता ….

अब बस देर थी पार्टी के नाम के आने की और चुनाव चिन्ह के मिलने की …….

वही हवेली पहुचने के बाद सबको इंतजार था सुमन के गुड न्यूज़ की जो शायद आज रात होने वाला था ,......

जिन हसीन पलो का इंतजार किशन और सुमन को था वो आ ही गया था ,सुमन ने दुनिया से लड़कर अपना कौमार्य अपने पति के लिये बचाया था वही किशन भी अपने हवसी और चंचल स्वभाव को त्यागकर बस सुमन का ही हो गया था,दोनो के लिए ये रात बहुत ही खास थी ,उनकी सुहागरात तो मन चुकी थी लेकिन अब भी सुमन का जिस्म पूरी तरह से किशन का नही हुआ था,समर्पण की एक इंतहान अभी भी बाकी था,

सुमन भी जानती थी की आज कुछ हो सकता है और वो इस बात से थोड़ी डरी डरी सी थी ,

वो काम में व्यस्त थी,चम्पा के साथ घर के काम कर रही थी ,ऐसे यही काम वो रोज किया करती थी ,सीता मौसी अपनी पोती को साड़ी में देखकर गदगद हो रही थी वही चम्पा अपनी बहु और अपनी सौतेली बेटी के ऊपर पूरा प्यार लुटा रही थी ,ये बात तो सुमन को भी पता थी ,लेकिन सुमन अब इस बारे में सोचना नही चाहती थी ,लेकिन मन है …….

मन तो मन ही है ,वो बातो को घुमा फिरा कर सामने ले ही आता है ,सुमन बार बार ये बात भुलाने की कोसीसे करती थी की वो और किशन एक ही खून है ,खून के रिस्ते से वो भाई बहन ही है ,लेकिन फिर भी वो दिल के किसी कोने में इस बात को भूल नही पा रही थी ,

‘क्या मुझे किशन जी को ये बता देना चाहिए ‘

उसके मन ने खुद से ही ये सवाल किया

‘नही नही पागल हो गई हो क्या ,अगर ऐसा हुआ तो अनर्थ हो जाएगा,घर में बवाल हो सकता है,उस समय चम्पा मा की क्या मजबूरियां थी इसपर किसी का भी ध्यान नही जाएगा ,किशन शायद खुद भी डिप्रेशन में आ जाए ‘

उसने मन ही मन इस बात को ना खोलने की सोची लेकिन वो अपने भाई से ही कैसे जिस्म का रिस्ता बना सकती थी……..????

वो बड़ी उधेबुन में बैठी रही ,काम खत्म होने पर चम्पा ने उसे कमरे में जाने को कहा वो हा बोलकर वहां से तो निकल गई लेकिन कमरे में जा ना सकी,वो छत में जाकर बैठ गई वो अपने इसी खयालो में पागल हुए जा रही थी ,उसे समझ नही आ रहा था की आखिर वो करे तो क्या करे ….

वो रोये जा रही थी ,

रानी ने उसे गुमसुम देखा था,जब वो छत में जा रही थी तो उसके चाल से ही उसे समझ आ गया था की कुछ गड़बड़ है वो उसका पीछा करने लगी ,आखिर वो सुमन के जाने के थोड़ी देर के बाद धीरे धीरे ऊपर जाने लगी ,उसने जब सुमन को रोते हुए पाया तो उसे समझ ही ना आया की आखिर ऐसा क्या हो गया की वो ऐसे रो रही है ,क्या मा ने कुछ कहा,नही वो इसे क्यो कुछ कहेगी ,तो भाई ने ? हा ये हो सकता है ,

थोड़ी देर हु ही उसे देखती रही फिर जाकर सुमन के पास ही खड़ी हो गई ,उसे देखकर सुमन हड़बड़ाई और उठी ,वो अपने आंसू पोछने लगी ,

“क्या हुआ भाभी “

“कुछ भी तो नही “

“तो बिना कारण के आप रो रही है ??”

“वो वो मा की याद आ गई “

रानी के चहरे में हँसी आ गई

“भाभी आप को जब झूट बोलना नही आता तो क्यो बोलती हो ,बताओ ना क्या हो गया “

सुमन चुप थी उसे समझ ही नही आ रहा था की आखिर वो उसे क्या जवाब दे ,रानी उसके पास जाकर उसकी बांहे पकड़ती है ,

“आज जो होने वाला है उसके लिए रो रही हो क्या “

सुमन को याद आया की आज क्या होने वाला है ,

“नही नही ….नही तो “

रानी फिर से मुस्कुराई

“या मेरा भाई आपको पसंद नही है ,जबरदस्ती शादी तो नही की ना आपने,...हर मर्द की तमन्ना होती है की वो सुहागरात में अपनी पत्नी को अपना बना ले लेकिन आपने वो करने नही दिया ,आज आप यहां बैठी हो ,जबकि भाई वहां बेसब्री से इंतजार कर रहा है, मुझे तो लगता है की तुम्हारे दिल में कभी भाई के लिए प्यार था ही नही “

रानी एक ही सांस में सब कुछ बोल जाती है वही सुमन बस उसे देखते रह जाती है,उसके मुह से कोई भी बात निकल ही नही रही थी,उसे समझ ही नही आता की रानी को कैसे समझाए

“ऐसा नही है रानी “वो बड़ी ही मुश्किल से ये बोल पाई

“तो कैसा है ,अगर ये सच नही है तो बताओ की क्या सच है,”

रानी इस बार ने थोड़ी जोर से कहा ,और बदले में सुमन भी जोरो से रोने लगी ,वो वँहा से जाने लगी लेकिन रानी ने उसका हाथ जकड़ लिया

“तुम ऐसे नही जा सकती “

“नही रानी मुझे छोड़ दो सच इतना कड़वा है की तुम उसे सह नही पाओगी इसे मुझतक ही रहने दो ,वो मेरा इंतजार कर रहे होंगे मुझे जाने दो “

रानी के चहरे में फिर से एक मुस्कुराहट आ गई लेकिन ये मुस्कुराहट भी बहुत कड़वी थी

“नही भाभी “

इस बार उसकी आवाज नरम थी ,उसने जानबूझ कर ये सोच कर ही उसे कड़वे वचन कहे थे की वो टूटकर सच बता दे लेकिन रानी को भी इसका आभास हो गया था की सुमन इतनी जल्दी नही टूटने वाली

“भाभी जी ,अगर आपके दिल में भाई के लिए प्यार नही हो तो शायद आप कभी खुस नही रह पाएंगी और ना ही भाई खुस रह पायेगा ,आपके हाथो में दो जिंदगियां है “

“मैं उनसे बेपनाह प्यार करती हु रानी ,मेरी जान भी उनकी एक हँसी के सामने कुर्बान है “

रानी उसका हाथ छोड़ देती है और सुमन भी जल्दी से वहां से निकल जाती है ,लेकिन रानी के दिमाग में ये बात घर कर गई के आखिर ऐसा कौन सा सच है जो सुमन उससे छुपा रही है ,खैर उसे जो जानना था उसे समझ आ गया था की सुमन की ओर से कोई भी देरी नही है वो तो अपने को किशन के नाम ही कर बैठी है………

 
इधर

किशन अपने कमरे में अधीर इधर उधर घूम रहा था ,तभी उसे सुमन की आहट मिली उसका दिल धक कर रह गया ,सुमन की सांसे फूली हुई थी वो छत से दौड़ाते हुए सीधे वहां आयी थी ,दोनो की नजर मिली ,सुमन अभी भी उसी खयालो में थी लेकिन उसे अब अपनी गृहस्थी सम्हालना था और इन सब बातो का कोई अर्थ अब नही रह गया था ,सोचने के लिए बहुत देर हो चुकी थी ,वो अपने होठो में मुस्कुराहट लाती है ,किशन उसे देखकर मुस्कुराता है ,वो उससे बिना कुछ कहे ही अपने कपड़े पकड़कर बाथरूम में घुस जाती है वो फ्रेश होकर एक नाइटी पहन लेती है जिसे किशन की बहनों ने उसके लिए शादी के तोहफे के रूप में लिया था ,वो सफेद रंग की झीनी सी नाइटी थी ,जो काफी हद तक पारदर्शी थी ,उसके जांघ उसमे साफ दिख रहे थे,ऐसी ही नाइटी इस घर की सभी लडकिया पहनती थी लेकिन सुमन के लिए ये पहली बार था,वो सवाली सी थी ,निधि या सोनल की तरह उसके जांघो का भराव भी उतना नही था लेकिन फिर भी उसके आत्मविस्वास में कोई कमी नही आयी ,वो एक बार फिर से अपने को दर्पण में देखती है ,थोड़ा घूम घूम कर उसके कूल्हों का वजन अभी उतना ज्यादा नही था लेकिन फिर भी वो साफ साफ भरे हुए देख रहे थे,वो खुद ही शर्मा जाती है,उसके स्तनों की बीच की घाटी साफ और उत्तेजक प्रतीत हो रही थी ,लेकिन अब भी उसे लगा की कुछ कमी है उसे अपने मांग के सिंदूर की याद आयी ,चहरा धोने से उसके मांग का सिंदूर थोड़ा सा फीका पड़ गया था,वो बाहर आयी ,किशन अपना मुह फाडे उसे निहार रहा था ,लेकिन सुमन ने उसकी ओर देखा भी नही वो अपने ड्रेसिंग के पास पहुची और अपनी मांग में गढ़ा सिंदूर लगाया,नए दुल्हन जैसे उसके हाथ अब भी चूड़ियों से सजे हुए थे ,उसने अपने बालो को पूरा खोला और कंघी से थोड़ा सीधा किया ,वो उसे खुला ही रहने दी ,अपने माथे की पुरानी बिंदिया निकल कर उसने नई बिंदिया लगाई ,अब फिर से उसने अपने को देखा लेकिन वो इतनी हसीन लग रही थी की वो खुद को भी नही देख पा रही थी ,वो शर्म से मरी जा रही थी ,उसे समझ ही नही आ रहा था की वो किशन के पास कैसे जाए ,

उसकी हालत और सुंदरता देख किशन को अपने किश्मत पर गुमान हुआ वो उठा और सुमन के पास गया ,सुमन अब भी सर नीचे किये खड़ी थी ,उसने उसे पीछे से जकड़ लिया ,दोनो के ही अंग अंग में एक झुनझुनाहट सी दौड़ गई ,दोनो ही सिहर गए …

किशन ने उसके गले पर अपने होठो को टिकाया ,उसके कोमल होठ के स्पर्श से ही सुमन का बदन अकड़ गया ,

“आह “वो धीरे से आह लेने लगी ,इतने देर के मानसिक तनाव से उस एक स्पर्श ने मुक्ति दिला दी वो समझ गई की यही उसकी नियति है और किशन को प्यार देना और उससे प्यार पाना ही उसके लिए सौभाग्य की बात है,उसने अपने को पूरी तरह से किशन के लिये समर्पित करने की कसम खाई और पलट कर किशन के होठो में अपने होठों को मिला लिया ,ये किशन के लिए आश्चर्यजनक था क्योंकि अभी तक वो इतना शर्मा चुकी थी की किशन उससे पहल की उम्मीद ही नही कर रहा था ,लेकिन वो खुश था बहुत खुस ,दोनो के होठ मिले और सिलसिला शुरू हो गया,किशन ने उसे ले जाकर बिस्तर में पटक दिया और उसके ऊपर आकर उसके होठों की गहराइयों में अपने जीभ को ले गया ,दोनो ही मस्ती में डूबे हुए थे ,दोनो ही दुनिया के अहसास को भूल कर बस एक दूजे में खोये हुए थे,जब दोनो ही थक गए तो एक दूसरे को देख कर मुस्कुराए

“तो आज क्या प्लान है “किशन ने सुमन के कानो में कहा और जवाब में सुमन ने उसे अपनी ओर खिंच लिया और उसके होठो को फिर से चूमने लगी ,किशन के लिए इतना इशारा ही काफी था,वो धीरे से अपने हाथो को उसके जांघो पर सहलाता है और सुमन के होठो से सिसकारियां निकलने लगती है ,उसके लिए ये सब पहला अहसास था,उसके योनि से धार छूटनी शुरू हो चुकी थी ,किशन ने देर नही करते हुए अपने कपड़े निकाल फेके लेकिन सुमन अब भी वैसे ही थी किशन का लिंग सुनम के पेंटी को भेदता हुआ सीधे उसके योनि पर वार कर रहा था,जो अब सुमन के लिए भी सहना मुश्किल ही रहा था ,वो बेचैनी में छटपटाई और आखिर में खुद ही अपने हाथो को नीचे कर किशन के लिंग को पकड़कर अपने योनि में जोरो से रगड़ने लगी ,किशन उसके इस व्यव्हार से हक्का बक्का रह गया ,वो जोरो जोरो से सिसकिया लेते हुई झड़ गई ,वो हफते हुए थोड़ी शान्त हुई तो उसकी नजर किशन पर गई,उसे अपने किये की याद आयी और वो बुरी तरह से शर्मा कर अपने मुह को छुपाने लगी लेकिन इससे पहले ही किशन उसके ऊपर कब्ज़ा जमा चुका था और इस बार वो सुमन के हर एक अंग को चुम रहा था ,उसके होठ सुनम के एक एक अंगों को नाप रहे थे और गीला कर रहे थे ,सुमन फिर से गर्म होने लगी थी ,वो किशन के बालो को पकड़े हुए बस आहे ले रही थी ,किशन उसके कपड़ो को अभी तक नही निकाला था वो उसके जांघो तक आ गया और ऊपर जाने लगा ,वो उसके पेंटी के किनारे पर था ,दोनो जांघो के बीच कसे हुए पेंटी को ही चाट रहा था ,और उसे इधर सुमन उसके बालो को और भी जोरो से कसे जा रही थी ,अंत में फिर से उससे नही रहा गया और वो किशन के सर को अपने योनि में दबाने लगी ,किशन के चहरे में एक मुस्कान आ गई और वो जोर लगा कर उठ खड़ा हुआ ,सुमन उसे अजीब से खा जाने वाली निगाह से देख रही थी ,किशन उसके ऊपर आकर उसकी पेंटी को निकालने लगा ,उसे पता था की सुमन वर्जिन है और यही सही मौका है जब वो बेहद गर्म है वो उसे झरने नही देना चाहता था ,किशन ने अपनी एक उंगली उसके योनि के अंदर डाली वो अंदर से बेहद गर्म थी लेकिन गीली भी थी ,सुमन ने एक जोरो की आह ली और किशन के बालो को पकड़कर झूल गई ,किशन ने अपने होठो को उसके होठो से मिलाया और उसके योनि में अपने उंगली को धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा ,वो पास से ही एक क्रीम पकड़ लाया और उसे अपनी उंगली में लगा कर उसे अपने लिंग के लिए तैयार करने लगा ,वो फिर थोड़ी थोड़ी देर में ही रुक जाता जिससे सुमन का ओर्गास्म ना हो ,सुमन बेहद ही चिढ़ गई थी जिससे किशन को हँसी आ रही थी ,वो अब तैयार थी वो फिर से उसके होठो को चूसने लगा और अपने लिंग की ऊपरी चमड़ी को पीछे कर उसके योनि में रगड़ने लगा ,सुमन बस सिसकिया ले रही थी ,क्रीम का प्रभाव ,योनि का गीलापन और सुमन के तन में फैली सेक्स की गर्मी ने किशन का काम आसान कर दिया था ,वो पहली बार में अपना आधा लिंग उसके अंदर डाल दिया ,सुमन जोरो से चीखी लेकिन उसकी चीख किशन के होठो में ही घुट गई ,थोड़ी देर के किस ने उसे फिर से राहत दी और किशन धीरे धीरे धक्के मरता हुआ सुमन के योनि में अपना स्थान बनाने लगा ,थोड़ी ही देर में किशन का लिंग पूरी तरह से सुमन के योनि के अंदर था ,एक ही झटके के साथ सुमन फिर से अपने चरम सुख पर पहुच गई और ढेर हो गई ,किशन भी हालात को समझता हुआ रुक गया और उसे अपने ऊपर लेकर उसे सुस्ताने का मौका देने लगा ,सुमन के घने बाल पूरी तरह से अस्त व्यस्त हो चुके थे ,उसका सिंदूर फैल गया था और वो बेहद ही सेक्सी लग रही थी ,उसकी कुछ चूड़ियां टूट गई थी जिसे किशन ने बाजू में ही फेक दिया था ,किशन का लिंग अब भी उसके अंदर था,सुमन इन एक मदहोश आंखों से उसे देखा ,वो इतने मजे से गुजरी थी की पूरी दुनिया ही भूल गई थी ,किशन पर उसे इतना प्यार आ रहा था की उसका दिल किया की अभी उसके लिये अपनी जान दे दे ,वो झुककर उसके होठो पर अपने होठो को रखती है और चूसने लगती है ,दोनो की आंखे अभी आधी खुली और आधी बंद थी ,दोनो ही मदहोशी के आलम में गुम थे,सुमन ने अपने कमर को थोड़ा हिलाया उसे अपने भरे होने का अहसास हुआ ,वो किशन के लिए और भी प्यार से भर गई ,किशन का लिंग उसकी योनि में मजबूती से समाया हुआ था और सुमन की योनि भी उसे मजबूती से कसे हुए थी ,वो इतनी गीली थी लिंग आराम से अंदर बाहर हो रही था,लेकिन अब किसी को कोई भी जल्द बाजी नही थी ,सुमन आराम से कभी कभी अपने कमर को हिला कर उसे अपने अंदर खिंचती या बाहर निकलती वही कभी कभी किशन धक्के देता लेकिन वो अभी एक दूजे के होठो का रस पान कर रहे थे,वो एक दूसरे के शरीर से खेल रहे थे,अब सेक्स गौण हो गया था और अहसास ही सब कुछ रह गया था,पता नही कितने देर तक ये ही चलता रहा ,किशन का वीर्य कब निकल कर सुमन को भर गया उन्हें पता ही नही चला ,लिंग अब भी नही मुरझाया था और अब भी वो खेल जाती था ,वीर्य योनि से निकलकर बिस्तर को गीला कर रहा था ,लेकिन परवाह किसे थी वो ऐसे ही घंटो तक एक दूसरे के बांहो में पड़े रहे और नीद के आगोश में समा गए …

 
इधर

अजय और नितिन बैठे बाते कर रहे थे,साथ ही विजय धनुष और अभिषेक भी थे

“भइया हमे बहुत ही सोच समझकर काम करना पड़ेगा “

“हम्म अभिषेक तूम कालेज के अध्यक्ष हो कितने लड़के है हमारे साथ “

जब से इन भाइयो ने अभिषेक को उल्टा लटकाया था वो बेचारा भीगी बिल्ली की तरह रहता था और साथ ही उनकी हर बात माना करता था,अजय को पता था की इसे बस में रखना बहुत जरूरी है क्योकि उसके अंदर प्रतिभा थी जिसका उपयोग जिसका उपयोग अजय को अपनी पार्टी के लिए करना था ,

“भइया लगभग सभी “

“लगभग का क्या मतलब होता है “विजय की दमदार आवाज से अभी थोड़ा घबराया ,अजय ने उसे शांत रहने को कहा ,

“भइया कुछ लोग पहले से पुरानी पार्टी के मेम्बर है ,और वो कुछ ना कुछ पदों में भी है उन्हें तोडना मुश्किल है “

“हम्म कोई बात नही दूसरी पार्टीयो में भी तो कोई होना ही चाहिए ,अभी अगर हम उन्हें अपने साथ लाने की कोशिस करेंगे तो वो नाजायज मांगे करेंगे उससे अच्छा है की उन्हें हम ऐसे हराये की वो हारकर हमारे साथ आने पर मजबूर हो जाय ,इस साल पहला इलेक्शन विधानसभा का होगा,फिर लोकसभा अगले साल से शुरू होने वाला है ,उसके बाद पंचायत चुनाव और निगमो के चुनाव होंगे ,हमे अपना बेस इतना मजबूत रखना है की पहले 2 इलेक्शन में भले ही हमे कम सीटे मिले लेकिन स्थानीय चुनाव तक हमारा परचम लहराए,एक एक गांव के एक एक बूथ तक हमारी पहुच होनी चाहिए ,हर जगह से जितने भी लोग है सभी को इकट्ठे करो ,सभी कार्यकर्ता को से जो भी वोट ला सकता है अपनी शक्ति दिखाने को कहो हम सबसे पर्सनली मिलेंगे,जो भी योग्य होगा उसे सीट दी जाएगी ,और पद भी ,निर्वाचन आयोग में पार्टी की मान्यता के लिए दरखास्त दे दी आई है ,कुछ ही दिनों में हमे हमारा नाम और चुनाव चिन्ह भी मिल जाएगा ,हमे तुरंत शक्ति प्रदर्शन के लिए रेलिया निकालनी शुरू करनी होगी ,बहुत काम है दोस्तो भीड़ जाओ पूरे प्रदेश में फैल जाओ और चुन चुन कर उम्मीदवार लाओ जो अपने इलाको का नेतृत्व करे ,,,,

उसी शाम फिर से एक मीटिंग होती है जिसमे करीब 100 लोग शामिल थे अधिकतर लोग युवा ही थे ,ठाकुर-तिवारी परिवार के सभी बच्चे वहां मौजूद थे और अजय के नेतृत्व में सभी को उनकी जिम्मेदारी बांटी जा रही थी ,सबसे ज्यादा काम अजय , निधि धनुष के पास था ,बाकियों को बस अपने ही क्षेत्रो में जाने का काम दिया गया था ,जिसका जैसा समर्थ था वैसा काम उन्हें मिल गया था ,निधि को पार्टी का प्रेजिडेंट बनाया गया,वही धनुष को मुख्यमंत्रि का उमीदवार घोषित कर दिया गया ,अभिषेक पार्टी का महासचिव था ,साथ ही हर इलाके में गांव और ब्लाक लेवल तक और शहरों में जिला से वार्डो तक के प्रतिनिधियो की लिस्ट भी जारी कर दी ,ये काम कई दिनों का था लेकिन अजय ने होशियारी दिखाई थी और पहले से ही लिस्ट तैयार रखी थी ,जैसे सालो से वो उसी काम में भिड़ा हुआ हो ,एक एक प्रतिनिधि हैरत में था की अजय उन्हें पर्सनली जानता है,उनके इलाको की समस्याओं को जानता है ,

असल में अजय ने इसकी प्लानिंग सालो में ही की थी ,वो पूरे इलाके में घूमता रहता था और कई लोगो से मिलता जो की सामाजिक और राजनीतिक रूप से एक्टिव थे ,वो अलग अलग पार्टी के या स्वतंत्र काम करने वाले थे ,अजय सभी को लिस्टेड करता रहता था और उनके काम पर नजर भी रखता था ,उसने अपनी पार्टी का इतना बड़ा खांचा बना दिया था की विरोधी पार्टीयो के पसीने आने वाले थे ,जो उन्हें बच्चा समझ कर मजाक में ले रहे थे ……...

ये बात दूसरे दिन के अखबारों की हेडलाइन होने वाली थी ,अखबार से बहुत से लोग भी वँहा शामिल थे और उन्हें खूब पिलाया गया ,और खूब खातिरदारी की गई ,ये सभी काम विजय और नितिन के सुपुर्द था ,अजय विजय और नितिन पर्दे के पीछे से काम करने वालो में थे,धनुष और निधि के चहरा सामने होना था,और किशन राकेश और बाकियों को इससे दूर ही रखा गया था ,ज्यादा से ज्यादा अपने क्षेत्र में कुछ प्रचार के लिए उनका उपयोग होता ….

अब बस देर थी पार्टी के नाम के आने की और चुनाव चिन्ह के मिलने की …….

वही हवेली पहुचने के बाद सबको इंतजार था सुमन के गुड न्यूज़ की जो शायद आज रात होने वाला था ,......

जिन हसीन पलो का इंतजार किशन और सुमन को था वो आ ही गया था ,सुमन ने दुनिया से लड़कर अपना कौमार्य अपने पति के लिये बचाया था वही किशन भी अपने हवसी और चंचल स्वभाव को त्यागकर बस सुमन का ही हो गया था,दोनो के लिए ये रात बहुत ही खास थी ,उनकी सुहागरात तो मन चुकी थी लेकिन अब भी सुमन का जिस्म पूरी तरह से किशन का नही हुआ था,समर्पण की एक इंतहान अभी भी बाकी था,

सुमन भी जानती थी की आज कुछ हो सकता है और वो इस बात से थोड़ी डरी डरी सी थी ,

वो काम में व्यस्त थी,चम्पा के साथ घर के काम कर रही थी ,ऐसे यही काम वो रोज किया करती थी ,सीता मौसी अपनी पोती को साड़ी में देखकर गदगद हो रही थी वही चम्पा अपनी बहु और अपनी सौतेली बेटी के ऊपर पूरा प्यार लुटा रही थी ,ये बात तो सुमन को भी पता थी ,लेकिन सुमन अब इस बारे में सोचना नही चाहती थी ,लेकिन मन है …….

मन तो मन ही है ,वो बातो को घुमा फिरा कर सामने ले ही आता है ,सुमन बार बार ये बात भुलाने की कोसीसे करती थी की वो और किशन एक ही खून है ,खून के रिस्ते से वो भाई बहन ही है ,लेकिन फिर भी वो दिल के किसी कोने में इस बात को भूल नही पा रही थी ,

‘क्या मुझे किशन जी को ये बता देना चाहिए ‘

उसके मन ने खुद से ही ये सवाल किया

‘नही नही पागल हो गई हो क्या ,अगर ऐसा हुआ तो अनर्थ हो जाएगा,घर में बवाल हो सकता है,उस समय चम्पा मा की क्या मजबूरियां थी इसपर किसी का भी ध्यान नही जाएगा ,किशन शायद खुद भी डिप्रेशन में आ जाए ‘

उसने मन ही मन इस बात को ना खोलने की सोची लेकिन वो अपने भाई से ही कैसे जिस्म का रिस्ता बना सकती थी……..????

वो बड़ी उधेबुन में बैठी रही ,काम खत्म होने पर चम्पा ने उसे कमरे में जाने को कहा वो हा बोलकर वहां से तो निकल गई लेकिन कमरे में जा ना सकी,वो छत में जाकर बैठ गई वो अपने इसी खयालो में पागल हुए जा रही थी ,उसे समझ नही आ रहा था की आखिर वो करे तो क्या करे ….

वो रोये जा रही थी ,

रानी ने उसे गुमसुम देखा था,जब वो छत में जा रही थी तो उसके चाल से ही उसे समझ आ गया था की कुछ गड़बड़ है वो उसका पीछा करने लगी ,आखिर वो सुमन के जाने के थोड़ी देर के बाद धीरे धीरे ऊपर जाने लगी ,उसने जब सुमन को रोते हुए पाया तो उसे समझ ही ना आया की आखिर ऐसा क्या हो गया की वो ऐसे रो रही है ,क्या मा ने कुछ कहा,नही वो इसे क्यो कुछ कहेगी ,तो भाई ने ? हा ये हो सकता है ,

थोड़ी देर हु ही उसे देखती रही फिर जाकर सुमन के पास ही खड़ी हो गई ,उसे देखकर सुमन हड़बड़ाई और उठी ,वो अपने आंसू पोछने लगी ,

“क्या हुआ भाभी “

“कुछ भी तो नही “

“तो बिना कारण के आप रो रही है ??”

“वो वो मा की याद आ गई “

रानी के चहरे में हँसी आ गई

“भाभी आप को जब झूट बोलना नही आता तो क्यो बोलती हो ,बताओ ना क्या हो गया “

सुमन चुप थी उसे समझ ही नही आ रहा था की आखिर वो उसे क्या जवाब दे ,रानी उसके पास जाकर उसकी बांहे पकड़ती है ,

“आज जो होने वाला है उसके लिए रो रही हो क्या “

सुमन को याद आया की आज क्या होने वाला है ,

“नही नही ….नही तो “

रानी फिर से मुस्कुराई

“या मेरा भाई आपको पसंद नही है ,जबरदस्ती शादी तो नही की ना आपने,...हर मर्द की तमन्ना होती है की वो सुहागरात में अपनी पत्नी को अपना बना ले लेकिन आपने वो करने नही दिया ,आज आप यहां बैठी हो ,जबकि भाई वहां बेसब्री से इंतजार कर रहा है, मुझे तो लगता है की तुम्हारे दिल में कभी भाई के लिए प्यार था ही नही “

रानी एक ही सांस में सब कुछ बोल जाती है वही सुमन बस उसे देखते रह जाती है,उसके मुह से कोई भी बात निकल ही नही रही थी,उसे समझ ही नही आता की रानी को कैसे समझाए

“ऐसा नही है रानी “वो बड़ी ही मुश्किल से ये बोल पाई

“तो कैसा है ,अगर ये सच नही है तो बताओ की क्या सच है,”

रानी इस बार ने थोड़ी जोर से कहा ,और बदले में सुमन भी जोरो से रोने लगी ,वो वँहा से जाने लगी लेकिन रानी ने उसका हाथ जकड़ लिया

“तुम ऐसे नही जा सकती “

“नही रानी मुझे छोड़ दो सच इतना कड़वा है की तुम उसे सह नही पाओगी इसे मुझतक ही रहने दो ,वो मेरा इंतजार कर रहे होंगे मुझे जाने दो “

रानी के चहरे में फिर से एक मुस्कुराहट आ गई लेकिन ये मुस्कुराहट भी बहुत कड़वी थी

“नही भाभी “

इस बार उसकी आवाज नरम थी ,उसने जानबूझ कर ये सोच कर ही उसे कड़वे वचन कहे थे की वो टूटकर सच बता दे लेकिन रानी को भी इसका आभास हो गया था की सुमन इतनी जल्दी नही टूटने वाली

“भाभी जी ,अगर आपके दिल में भाई के लिए प्यार नही हो तो शायद आप कभी खुस नही रह पाएंगी और ना ही भाई खुस रह पायेगा ,आपके हाथो में दो जिंदगियां है “

“मैं उनसे बेपनाह प्यार करती हु रानी ,मेरी जान भी उनकी एक हँसी के सामने कुर्बान है “

रानी उसका हाथ छोड़ देती है और सुमन भी जल्दी से वहां से निकल जाती है ,लेकिन रानी के दिमाग में ये बात घर कर गई के आखिर ऐसा कौन सा सच है जो सुमन उससे छुपा रही है ,खैर उसे जो जानना था उसे समझ आ गया था की सुमन की ओर से कोई भी देरी नही है वो तो अपने को किशन के नाम ही कर बैठी है………

 
इधर

किशन अपने कमरे में अधीर इधर उधर घूम रहा था ,तभी उसे सुमन की आहट मिली उसका दिल धक कर रह गया ,सुमन की सांसे फूली हुई थी वो छत से दौड़ाते हुए सीधे वहां आयी थी ,दोनो की नजर मिली ,सुमन अभी भी उसी खयालो में थी लेकिन उसे अब अपनी गृहस्थी सम्हालना था और इन सब बातो का कोई अर्थ अब नही रह गया था ,सोचने के लिए बहुत देर हो चुकी थी ,वो अपने होठो में मुस्कुराहट लाती है ,किशन उसे देखकर मुस्कुराता है ,वो उससे बिना कुछ कहे ही अपने कपड़े पकड़कर बाथरूम में घुस जाती है वो फ्रेश होकर एक नाइटी पहन लेती है जिसे किशन की बहनों ने उसके लिए शादी के तोहफे के रूप में लिया था ,वो सफेद रंग की झीनी सी नाइटी थी ,जो काफी हद तक पारदर्शी थी ,उसके जांघ उसमे साफ दिख रहे थे,ऐसी ही नाइटी इस घर की सभी लडकिया पहनती थी लेकिन सुमन के लिए ये पहली बार था,वो सवाली सी थी ,निधि या सोनल की तरह उसके जांघो का भराव भी उतना नही था लेकिन फिर भी उसके आत्मविस्वास में कोई कमी नही आयी ,वो एक बार फिर से अपने को दर्पण में देखती है ,थोड़ा घूम घूम कर उसके कूल्हों का वजन अभी उतना ज्यादा नही था लेकिन फिर भी वो साफ साफ भरे हुए देख रहे थे,वो खुद ही शर्मा जाती है,उसके स्तनों की बीच की घाटी साफ और उत्तेजक प्रतीत हो रही थी ,लेकिन अब भी उसे लगा की कुछ कमी है उसे अपने मांग के सिंदूर की याद आयी ,चहरा धोने से उसके मांग का सिंदूर थोड़ा सा फीका पड़ गया था,वो बाहर आयी ,किशन अपना मुह फाडे उसे निहार रहा था ,लेकिन सुमन ने उसकी ओर देखा भी नही वो अपने ड्रेसिंग के पास पहुची और अपनी मांग में गढ़ा सिंदूर लगाया,नए दुल्हन जैसे उसके हाथ अब भी चूड़ियों से सजे हुए थे ,उसने अपने बालो को पूरा खोला और कंघी से थोड़ा सीधा किया ,वो उसे खुला ही रहने दी ,अपने माथे की पुरानी बिंदिया निकल कर उसने नई बिंदिया लगाई ,अब फिर से उसने अपने को देखा लेकिन वो इतनी हसीन लग रही थी की वो खुद को भी नही देख पा रही थी ,वो शर्म से मरी जा रही थी ,उसे समझ ही नही आ रहा था की वो किशन के पास कैसे जाए ,

उसकी हालत और सुंदरता देख किशन को अपने किश्मत पर गुमान हुआ वो उठा और सुमन के पास गया ,सुमन अब भी सर नीचे किये खड़ी थी ,उसने उसे पीछे से जकड़ लिया ,दोनो के ही अंग अंग में एक झुनझुनाहट सी दौड़ गई ,दोनो ही सिहर गए …

किशन ने उसके गले पर अपने होठो को टिकाया ,उसके कोमल होठ के स्पर्श से ही सुमन का बदन अकड़ गया ,

“आह “वो धीरे से आह लेने लगी ,इतने देर के मानसिक तनाव से उस एक स्पर्श ने मुक्ति दिला दी वो समझ गई की यही उसकी नियति है और किशन को प्यार देना और उससे प्यार पाना ही उसके लिए सौभाग्य की बात है,उसने अपने को पूरी तरह से किशन के लिये समर्पित करने की कसम खाई और पलट कर किशन के होठो में अपने होठों को मिला लिया ,ये किशन के लिए आश्चर्यजनक था क्योंकि अभी तक वो इतना शर्मा चुकी थी की किशन उससे पहल की उम्मीद ही नही कर रहा था ,लेकिन वो खुश था बहुत खुस ,दोनो के होठ मिले और सिलसिला शुरू हो गया,किशन ने उसे ले जाकर बिस्तर में पटक दिया और उसके ऊपर आकर उसके होठों की गहराइयों में अपने जीभ को ले गया ,दोनो ही मस्ती में डूबे हुए थे ,दोनो ही दुनिया के अहसास को भूल कर बस एक दूजे में खोये हुए थे,जब दोनो ही थक गए तो एक दूसरे को देख कर मुस्कुराए

“तो आज क्या प्लान है “किशन ने सुमन के कानो में कहा और जवाब में सुमन ने उसे अपनी ओर खिंच लिया और उसके होठो को फिर से चूमने लगी ,किशन के लिए इतना इशारा ही काफी था,वो धीरे से अपने हाथो को उसके जांघो पर सहलाता है और सुमन के होठो से सिसकारियां निकलने लगती है ,उसके लिए ये सब पहला अहसास था,उसके योनि से धार छूटनी शुरू हो चुकी थी ,किशन ने देर नही करते हुए अपने कपड़े निकाल फेके लेकिन सुमन अब भी वैसे ही थी किशन का लिंग सुनम के पेंटी को भेदता हुआ सीधे उसके योनि पर वार कर रहा था,जो अब सुमन के लिए भी सहना मुश्किल ही रहा था ,वो बेचैनी में छटपटाई और आखिर में खुद ही अपने हाथो को नीचे कर किशन के लिंग को पकड़कर अपने योनि में जोरो से रगड़ने लगी ,किशन उसके इस व्यव्हार से हक्का बक्का रह गया ,वो जोरो जोरो से सिसकिया लेते हुई झड़ गई ,वो हफते हुए थोड़ी शान्त हुई तो उसकी नजर किशन पर गई,उसे अपने किये की याद आयी और वो बुरी तरह से शर्मा कर अपने मुह को छुपाने लगी लेकिन इससे पहले ही किशन उसके ऊपर कब्ज़ा जमा चुका था और इस बार वो सुमन के हर एक अंग को चुम रहा था ,उसके होठ सुनम के एक एक अंगों को नाप रहे थे और गीला कर रहे थे ,सुमन फिर से गर्म होने लगी थी ,वो किशन के बालो को पकड़े हुए बस आहे ले रही थी ,किशन उसके कपड़ो को अभी तक नही निकाला था वो उसके जांघो तक आ गया और ऊपर जाने लगा ,वो उसके पेंटी के किनारे पर था ,दोनो जांघो के बीच कसे हुए पेंटी को ही चाट रहा था ,और उसे इधर सुमन उसके बालो को और भी जोरो से कसे जा रही थी ,अंत में फिर से उससे नही रहा गया और वो किशन के सर को अपने योनि में दबाने लगी ,किशन के चहरे में एक मुस्कान आ गई और वो जोर लगा कर उठ खड़ा हुआ ,सुमन उसे अजीब से खा जाने वाली निगाह से देख रही थी ,किशन उसके ऊपर आकर उसकी पेंटी को निकालने लगा ,उसे पता था की सुमन वर्जिन है और यही सही मौका है जब वो बेहद गर्म है वो उसे झरने नही देना चाहता था ,किशन ने अपनी एक उंगली उसके योनि के अंदर डाली वो अंदर से बेहद गर्म थी लेकिन गीली भी थी ,सुमन ने एक जोरो की आह ली और किशन के बालो को पकड़कर झूल गई ,किशन ने अपने होठो को उसके होठो से मिलाया और उसके योनि में अपने उंगली को धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा ,वो पास से ही एक क्रीम पकड़ लाया और उसे अपनी उंगली में लगा कर उसे अपने लिंग के लिए तैयार करने लगा ,वो फिर थोड़ी थोड़ी देर में ही रुक जाता जिससे सुमन का ओर्गास्म ना हो ,सुमन बेहद ही चिढ़ गई थी जिससे किशन को हँसी आ रही थी ,वो अब तैयार थी वो फिर से उसके होठो को चूसने लगा और अपने लिंग की ऊपरी चमड़ी को पीछे कर उसके योनि में रगड़ने लगा ,सुमन बस सिसकिया ले रही थी ,क्रीम का प्रभाव ,योनि का गीलापन और सुमन के तन में फैली सेक्स की गर्मी ने किशन का काम आसान कर दिया था ,वो पहली बार में अपना आधा लिंग उसके अंदर डाल दिया ,सुमन जोरो से चीखी लेकिन उसकी चीख किशन के होठो में ही घुट गई ,थोड़ी देर के किस ने उसे फिर से राहत दी और किशन धीरे धीरे धक्के मरता हुआ सुमन के योनि में अपना स्थान बनाने लगा ,थोड़ी ही देर में किशन का लिंग पूरी तरह से सुमन के योनि के अंदर था ,एक ही झटके के साथ सुमन फिर से अपने चरम सुख पर पहुच गई और ढेर हो गई ,किशन भी हालात को समझता हुआ रुक गया और उसे अपने ऊपर लेकर उसे सुस्ताने का मौका देने लगा ,सुमन के घने बाल पूरी तरह से अस्त व्यस्त हो चुके थे ,उसका सिंदूर फैल गया था और वो बेहद ही सेक्सी लग रही थी ,उसकी कुछ चूड़ियां टूट गई थी जिसे किशन ने बाजू में ही फेक दिया था ,किशन का लिंग अब भी उसके अंदर था,सुमन इन एक मदहोश आंखों से उसे देखा ,वो इतने मजे से गुजरी थी की पूरी दुनिया ही भूल गई थी ,किशन पर उसे इतना प्यार आ रहा था की उसका दिल किया की अभी उसके लिये अपनी जान दे दे ,वो झुककर उसके होठो पर अपने होठो को रखती है और चूसने लगती है ,दोनो की आंखे अभी आधी खुली और आधी बंद थी ,दोनो ही मदहोशी के आलम में गुम थे,सुमन ने अपने कमर को थोड़ा हिलाया उसे अपने भरे होने का अहसास हुआ ,वो किशन के लिए और भी प्यार से भर गई ,किशन का लिंग उसकी योनि में मजबूती से समाया हुआ था और सुमन की योनि भी उसे मजबूती से कसे हुए थी ,वो इतनी गीली थी लिंग आराम से अंदर बाहर हो रही था,लेकिन अब किसी को कोई भी जल्द बाजी नही थी ,सुमन आराम से कभी कभी अपने कमर को हिला कर उसे अपने अंदर खिंचती या बाहर निकलती वही कभी कभी किशन धक्के देता लेकिन वो अभी एक दूजे के होठो का रस पान कर रहे थे,वो एक दूसरे के शरीर से खेल रहे थे,अब सेक्स गौण हो गया था और अहसास ही सब कुछ रह गया था,पता नही कितने देर तक ये ही चलता रहा ,किशन का वीर्य कब निकल कर सुमन को भर गया उन्हें पता ही नही चला ,लिंग अब भी नही मुरझाया था और अब भी वो खेल जाती था ,वीर्य योनि से निकलकर बिस्तर को गीला कर रहा था ,लेकिन परवाह किसे थी वो ऐसे ही घंटो तक एक दूसरे के बांहो में पड़े रहे और नीद के आगोश में समा गए …

 
अपने कमरे में एक चेयर में बैठा हुआ अजय कमरे की छत को निहार रहा था,बीते समय की हर घटना उसके दिलो दिमाग में एक साथ ही चल पड़ी ,वो कड़ियों को जोड़ रहा था,लेकिन कुछ भी समझ नही आ रहा था,देखने को तो सब कुछ ही बड़ा शांत सा चल रहा था लेकिन असल में शायद कोई तूफान उनका इंतजार कर रहा था,पहले तो उसे अपने दुश्मनों का पता था लेकिन अब ….ना जाने कौन कब कहा से वार कर दे ,उसे अपनी चिंता तो कभी भी नही थी लेकिन अपने परिवार की चिंता उसे हमेशा ही सताती,

“भइया क्या हुआ आप आज बड़े ही चिंता में लग रहे हो ,कोई परेशानी है क्या “निधि की कोमल आवाज से अजय का ध्यान उधर गया,

“नही कोई बात नही बस ऐसे ही “

“क्या ऐसे ही ,अब तो मूझे बताया करो अब मैं बड़ी हो गई हु और अगर हम चुनाव जीत गए तो मैं मंत्री बन जाऊंगी ,सोचो अपनी छोटी सी बहन जिसे आप कुछ भी नही बताते वो मंत्री बन जाएगी “

अजय उसकी बातो पर हँस पड़ा ,

“ह्म्म्म क्या बताऊ तुझे “

निशि अजय के पैरो के पास बैठ कर अपना सर उसके गोद में रख लेती है ,

“अपना हर दर्द ,”

अजय उसके सर को यू ही थपथपाता है ,

“सोच रहा था की ना जाने जिंदगी किस मोड़ पर ला रही है,पहले तिवारियो का पंगा था अब ये इलेक्शन ,सालो से इस दिन का इंतजार किया था जब सब कुछ मिल रहा है तो एक अजीब सा डर दिमाग में भर गया है…”

“आप अगर डर जाओगे तो हमारा क्या होगा,मेरा भाई कभी भी डर नही सकता मैं तो मान ही नही सकती की आप डर गए “

“अच्छा ,डर नही एक बेचैनी तो है ना “

“तो मूड थोड़ा ठिक कर देती हु “

निधि अपने नाइटी को ऊपर करके उसके गोद में बैठ जाती है ,अब निधि का चहरा अजय के चहरे के पास ही था,उसके उजोर अजय के सीने से लग रहे थे और वो अजय के जांघो के बीच अपने जांघो को फसाये बैठी थी जिससे उसकी योनि का हिस्सा अजय के लिंग से टकरा रहा था,वो अपने बालो को खोले हुई थी जिससे वो और भी सेक्सी लग रही थी ,दोनो के रिस्ते में अब इतना खुलापन आ गया था की वो कुछ भी करने से हिचकिचाते नही थे,अजय ने अपने हाथो से उसके नितम्भो को पकड़ा ,अपनी आदत के अनुसार निधि अब भी नंगी ही थी वो उसके नरम नरम नितम्भो को अपने हथेलियों से और भी पास खिंचता है ,निधि एक नजर अजय को देखती है और फिर उसके होठो को अपने होठो में भर लेती है,

दोनो ही बहुत देर तक एक दूसरे के होठो का रसपान करते है ,

“अब बेचैनी कम हुई “

“तेरी बांहो में तो दुनिया भूल जाता हु ,मेरी जान “

वो कसकर उसके कमर को पकड़ कर अपनी ओर खिंचता है और फिर से उसे अपने सीने से लगा कर उसके होठो को चूमने लगता है,”

इधर

“तुम पागल हो गए हो भाई “

आरती अपने भाई सुरेश पर भड़क गई

“मैंने क्या गलत कहा है आरती “

“तुमने सब कुछ तो गलत कहा है ,तुम मुझे कह रहे हो की मैं इस परिवार से गद्दारी करू ,आखिर क्या मिलेगा मुझे इससे “

“क्या मिलेगा,जो अभी तक इस परिवार ने तुम्हे दिया क्या वो सही था,अपनी प्रतिष्ठा के कारण मेरी कम उम्र की बहन ने विधवा की जिंदगी बिताई क्या ये सही था,क्या तुम्हारे अरमानो को प्रतिष्ठा की आड़ में कुचल देना सही था आरती,तुम फिर से शादी कर सकती थी लेकिन नही तिवारियो की मर्यादा,उनकी इज्जत के कारण तुम्हे इस उम्र में विधवा की जिंदगी जीनी पड़ रही है क्या ये सही है ………….”

आरती खामोश थी ,

“तुम्हे ये किसने भड़का दिया है ,तुम तो ऐसे नही थे ,एक तुम ही तो जिसे मैं अपना कह सकती हु ,ये लोग बहुत ही खतरनाक है भाई और अब तो इनके सबसे बड़े दुश्मन ठाकुर भी इनसे मिल गए है ,अब इन्हें हराने की बात सोचना भी गलत होगा…”

“हमे इन्हें हराना नही है आरती हमे इनसे लड़ना नही है ,हमे तो बस उनलोगों का थोड़ा सहयोग करना है बाकी सब उन्हें ही करने दो,”

“लेकिन क्या ये सही होगा”

“हा बिल्कुल जो इन लोगो ने किया है उसके सामने ये कुछ भी नही है ,तुम्हे बस इनकी जानकारी उन तक पहुचानी है बस ,”

“लेकिन भाई “

“मैंने तुम्हारे मा बाप को तुम्हारी याद में तड़फकर मरते देखा है और इसकी वजह ये लोग ही है ,मेरे लिए यही एक वजह काफी है इनसे बदला लेने का,आज जब खुद तकदीर ने हमे ये मौका दिया है तो हमे ये क्यो नही अपना लेना चाहिए ,मैं एक छोटे से नॉकरी में हु मेरे लिए इनसे लड़ना बहुत ही मुश्किल है लेकिन वो लोग इनके गुरुर को तोड़ कर रख देंगे ,”

सुरेश आरती का हाथ पकड़ लेता है ,

“देख बहन ये एक ही मौका कुदरत ने हमे दिया है ,अब ज्यादा सोच मत ऐसे भी हमे कुछ भी तो नही करना है ,किसी को पता भी नही लगेगा की क्या हुआ है,तुम्हे जो जानकारी मांगी जाय वो देना है ,”

आरती की आंखे अब भी पूरी तरह से सहमत नही थी लेकिन फिर भी उसने अपना सर हा में हिला दिया ………..

इधर

शाम होने को थी और कलावा बगीचे में कुछ काम कर रहा था तभी रानी की नजर कलवा पर पड़ी ,वो बार बार एक जगह को खोदता फिर थोड़ा ऊपर को देखता फिर उस जगह को खोदता,

रानी के समझ ही नही आ रहा था की आखिर कलवा इस तरह बेवजह क्यो जमीन खोद रहा है ,तभी उसने ऊपर देखा उसकी मा चम्पा वहां बैठे हुए चाय पी रही थी ,वो अभी किसी से बात कर रही थी ,वो भी कभी कभी कलवा की तरफ देखा करती लेकिन दोनो ही बस एक दूसरे से नजर बचाकर एक दूसरे को देख रहे थे,रानी को उनकी निगाहों में कुछ कुछ होता है वाली फीलिंग देख रही थी वो भी कन्फ्यूज़ थी,ऐसे तो वो कल रात से ही समझने की कोशिस कर रही थी की कुसुम के साथ क्या गड़बड़ चल रही है लेकिन यहां ये नजारा देखकर उसके माथे पर फिर से एक लकीर पड़ गई ,आखिर इस घर में ऐसा हो क्या रहा था जो सबसे छुपा था,

कलवा का गठीला बदन किसी भी लड़की को आकर्षित कर सकता था,इस उम्र में भी उसके पेट में चर्बी का नामोनिशान नही था,सपाट पेट और बड़े गठीले भुजाओं के मालिक काले कलवा का कालापन उसे और भी मजबूत दिखता और वो भी बड़ा आकर्षक लगता था,वो भी दिन हुआ करते थे जब की चम्पा और कलवा प्यार की पींगे हाँकते थे और आज ये दिन है जब उनके बीच फिर से एक आकर्षण का बीज पनपने लगा था ,ये बीज इतना फलने वाला था ये तो वक़्त ही बताता लेकिन अभी तो रानी के लिए ये एक पहेली ही थी वो तो कभी सपने में भी इस रिस्ते के बारे में सोच नही सकती थी ………..

 
अजय बेचैनी से मेरी की तरफ देखता है जो की विजय को घूर रही थी ,अजय फिर अपनी घड़ी की ओर देखता है फिर वो विजय की ओर देखता है जो की मेरी को घूर रहा था,अजय फिर घड़ी के तरफ देखता है,

“आखिर डॉ है कहा कितना समय लगेगा उन्हें “

अजय के इंतजार की सीमा खत्म हो रही थी ,

“आप 8 बजे सुबह से यहां आकर बैठे है ,क्लिनिक 10 बजे खुलता है,”

मेरी के दो टूक जवाब से अजय झल्ला जाता है ,

“मैंने उन्हें कहा था और उन्होंने कहा था की वो आ रहे है “

“हा तो आ ही रहे होंगे आप इतने परेशान क्यो हो रहे हो “

“उन्हें फोन लगाओ अभी “

अजय टेबल में जोर से हाथ मरता है ,वहां रखा पानी का ग्लास भी उछल पड़ता है ,मेरी उसे गुस्से से देखते हुए कमरे से बाहर निकल जाती है ,थोड़ी ही देर में डॉ वहां आ जाते है ,

“अरे यार अजय क्या हुआ इतने बेताब हो रहे हो “

“मुझे लगा था की आप हमेशा किसी भी समय मेरी सहायता के लिए उपस्थित रहेंगे “

“तो हु तो ना यहां बताओ “

“मुझे आपसे अकेले में कुछ बात करनी है “

इतना सुनकर ही मेरी और विजय के चहरे में चमक आ जाती है जिसे डॉ समझ जाता है

“मेरी “

“जी सर विजय को क्लिनिक दिखा कर आती हु “

विजय भी डरता हुआ उठता है

“अब बताओ क्या बात हो गई है “

“मेरे परिवार पर हमले की साजिस हो रही है और आप ऐसे अनजान बन रहे है जैसे कोई बड़ी बात ही नही हुई “

डॉ के चहरे में एक मुस्कुराहट आ जाती है

“ये कोई नही बात तो नही है ,तुम्हारे परिवार पर खतरा हमेशा से ही रहा है “

“लेकिन अब हम दुश्मन को जानते भी तो नही है “

“तुम्हे इसके बारे में किसने बताया “

“कुछ लोग है जो जंगलो में रहते है लेकिन मुझे बहुत मानते है खासकर जबसे मैं राजा घोषित हुआ हु “

“हम्म राजा के वफादार आदिवासी ,तो पकड़ो उन लोगो को जो साजिस रच रहे है “

“वो कौन है ये तो पुख्ता उन्हें भी नही पता लेकिन वो फैली हुई खबर मुझे बता रहे है ,”

“देखो अजय अब तुम राजा घोषित हो चुके हो और साथ ही अब तुम राजनीति में भी आ गए हो ,तुम्हारे जितने वफादार है उतने ही तुम्हारे दुश्मन भी हो चुके है ,”

“लेकिन मेरे परिवार पर खतरा हो तो मैं कैसे चैन से रह सकता हु,रातो की नींद भी हराम हो रही है मेरी”

“मेरी बात मानो तुम्हे थोड़ा रेस्ट और शांति की जरूरत है “

“शांति नही डॉ मुझे ताकत चाहिए ,ताकत से ही मैं उन्हें हरा सकता हु “

डॉ जोरो से हँसता है जिससे पूरा कमरा गूंज जाता है .

“ताकत ,और हराना…...तुम किसके भाषा में बात कर रहे हो अजय ,ताकत से तुम कुछ भी नही कर पाओगे,ताकत सिर्फ बेचैनी पैदा करती है और शांति ,,,,,शांति ही तुम्हे असली रास्ता दिखा सकती है,मेरी मानो तो पहाड़ी वाले बाबा के पास जाओ और एक दो दिन वहां बिता के आओ ,मन थोड़ा शांत होगा तो कुछ रास्ता जरूर निकलेगा ..”

अजय कुर्सी से टिक जाता है और अपनी आंखे बंद कर लेता है ,वही डॉ उसके चहरे में आये हुए परिवर्तन को देखने लगते है

“अजय तुन्हें पता है,तुम्हारे पिता जी को मैंने कभी इतना बेचैन नही देखा जीतना की तुम हो ,और इसलिए वो कभी कोई भी बाजी हारे नही ,जब तुम्हारे मन में शांति होती है तो तुम मुझे वीर की याद दिला देते हो ,”

अजय के चहरे में एक मुस्कुराहट आ जाती है ,

“लेकिन डॉ ये कौन लोग हो सकते है जो हामरे पीछे इतनी शिद्दत से पड़े हुए है .”

“ये तो मुझे नही पता लेकिन उसमे कोई तो ऐसा है जो तुम्हारे बहुत करीब रह रहा है ,किशन की शादी में तुम्हे और निधि को मारने की जो साजिस हुई थी उससे तो यही लगता है ,और फिर तुम्हारे पार्टी के मीटिंग के दिन वाली बात “

अजय एक गहरी सांस लेता है

“तुम्हारे और मेरे अलावा और किसी को ये बाते पता तो नही है”

“नही बस मैं,निधि और आप ,विजय को भी अभी तक इन सबके बारे में नही बताया हु ,”

“हम्म्म्म बताना भी मत पता नही वो जोश में आकर क्या कर बैठे “

इन दोनों ही घटनाओं ने अजय को सोचने पर मजबूर कर दिया था,लेकिन फिर भी वो बात अपने तक ही रखा ताकि चुपचाप ही कोई ऐसा काम किया जा सके जिसकी भनक उनके दुश्मनों तक ना पहुचे ,

“लेकिन डॉ कोई तो कदम लेना ही पड़ेगा ,ऐसे बैठे रहे तो उनके होशले और भी मजबूत हो जाएंगे “

“कदम तो लेना है लेकिन इतने सफाई से और इतने खामोशी से की किसी को भनक भी ना लगे,और उनके हौसले और भी ज्यादा मजबूत होने दो ,इसी में वो कोई बड़ी गलती करेंगे,अभी तक वो लोग बड़ी ही खामोशी से अपनी तैयारी कर रहे थे अब उन्हें सामने आने का मौका देना होगा,दोनो ही घटनाओं में एक बात तो तुमने भी नोटिस की होगी की वो किसी को मरना नही चाहते थे,बस निधि और खुसबू को पकड़ने की साजिश थी उनकी ,”

निधि और खुसबू का नाम सुनकर ही अजय की आंखे फिर से लाल हो गई ,

“वो लड़का जिसे शादी में अपने पकड़ा था वो कुछ बोला ,ओ उन्हें पानी में बेहोशी की दवाई मिला कर पिलाने वाला था “

“नही असल में वो भी नशेड़ी किस्म का लड़का है जिसकी खबर उन केटर्स को भी नही थी जिनके साथ वो आया था,वो लोग बड़ी पार्टी होने के कारण कुछ लोगो को रोजी के हिसाब से काम कराने के लिए लाये थे,ये भी शहर में रोजी में काम करता है,दिन के 300 और नशा करके पड़ा रहता है ,इस काम के लिए उसे 10 हजार मिलने वाले थे ,उसे बस दवाई पानी में मिला कर निधि और खुसबू को पिलाना था उसके आगे का काम उसे नही करना था ,वो काम दूसरे लोगो का था ,जिसका उसे पता भी नही था,वो तो अच्छा हुआ की मेरे बंदे की नजर उस पर चली गई और वो निशि के अजीब हरकत को परख कर मुझे खबर दे दिया ,जिससे हमे उस लड़के का पता लग गया साथ ही खुसबू भी बच गई,लेकिन हमने एक गलती कर दी ,हमे निधि के किडनैप होने तक वेट करना था अगर हम थोड़ी और धीरज से काम लेते तो शायद कोई ऐसा आदमी पकड़ में आ ही जाता जो की तुम्हारे ही घर में रहकर तुम्हारे ही खिलाफ साजिश कर रहा है……..”

डॉ की बात सुनकर अजय ने फिर से एक गहरी सांस छोड़ी .

“मेरी बात मानो कुछ दिन रेस्ट करो जाकर बाबा जी के पास रहो साथ ही खुसबू और निधि को भी ले जाओ ,वहां पर सुरक्षा का पूरा इंतजाम हो जाएगा ,और वहां आकर अगर किसी ने भी अगर कुछ करने की कोशिश की तो वो आसानी से पकड़ा जाएगा ,तुम्हे थोड़ी बेफिक्री दिखानी होगी ताकि वो लोग फिर से जल्दी ही कोई कांड करे और धरे जाए ,चुनाव से पहले ही ये निपट जाए तो अच्छा होगा क्योकि चुनाव के दौरान फिर से सभी को खुले में जाकर प्रचार करना है और उसमे खतरा और भी बढ़ जाएगा …”

तभी बाहर से मेरी के चिल्लाने की आवाज आती है ,अजय और डॉ एक दूसरे को देखते है ,अजय का सर झुक जाता है लेकिन आज उसे इन बातो की ज्यादा परवाह नही थी ,

“मेरी बात मानो अजय कुछ दिन आराम करो ,मैं यहां से अपने बंदे तुम्हारे पीछे लगा देता हु जो की 24 घंटे तुम्हारी और तुम्हारे परिवार की सुरक्षा में तैनात रहेंगे उनकी डिटेल मैं तुम्हे भेज देता हु ,उन्हें कहा कहा रखना है ये भी बता दूंगा ,किसी भी बहाने से अपने आस पास ही रखो ,”

“हम्म ओके डॉ ,और आप कुछ IAS,IPS अधिकारियों से मेरी मुलाकात करवाने वाले थे ,”

“हम्म मेरा एक पुराना दोस्त है जो की पहले फारेस्ट में अधिकारी था वो अब आईएएस है ,विकास ,वो तुम्हरी बैठक अरेंज करने की कोशिस कर रहा है ,”

“विकास ….नाम सुना सुना सा लगता है “

“बिल्कुल सुना होगा ,केशरगड़ में ..तुम्हरे चाचा और तुम्हारे पिता जी उसी अच्छे से जानते थे,खैर तुम अभी आराम करो बाकी सब देखा जाएगा ,हमे अपनी कोशिश करनी है बाकी की बाते भगवान पर छोड़ दो ….”

डॉ का लहजा और बात दोनो ही सर्द थे,

इधर

रात में एक गांव में कुछ लोग ख़ौफ़ से कांप रहे थे,

“तूने सचमे उसे देखा “

“हा बड़े बडे बिखरे हुए बाल थे,पूरा नंगा और मारे हुए हिरण के मांस को कच्चा ऐसे खा रहा था जैसे की कोई जंगली जानवर ,मुझे देखकर चिल्लाया कि मैं आ रहा हु तुम लोगो के जीवन में अंधेरा भरने ...मैं तो कांप ही गया,मेरी तो सांसे ही नही चल रही थी ऐसे भागा हु वहां से की पीछे मुड़कर भी नही देखा “

सभी लोग उसकी बातो को ध्यान से सुन रहे थे,तभी एक बुजुर्ग बोल उठा

“जबसे पहाड़ी वाले बाबा ने उस तांत्रिक को भगाया था तब से अब तक वो कभी यहां के किसी व्यक्ति को नही सताया ,लेकिन अब कुछ दिनों से वो फिर से अपना ख़ौफ़ फैला रहा है,हमे बाबा के पास जाना होगा नही तो इसके आतंक और भी बढ़ जाएगा ,वो हमारे गांव से लोगो को उठाना शुरू कर देगा ,हमारी बहु बेटियों की इज्जत से खेलने लगेगा और हम कुछ भी नही कर पाएंगे ,अभी देर नही हुई है कल ही चलो बाबा जी के पास ,आखिर पिछले 100 सालो से उन्हों ने ही तो हमे बचा कर रखा है ……”

बुजुर्ग की बातो से सभी सहमत थे ,उसके सिवा किसी के पास कोई चारा भी तो नही था ,

 
इधर

उसी दिन गांव की बैठक के थोड़ी देर बाद ,अंधेरे जंगल में 3 व्यक्ति खड़े थे ,

“वो लोग पहाड़ी वाले बाबा के पास जाने वाले है”

बाकी के दोनो व्यक्ति जोरो से हँसने लगे

“जाने दो जाने दो देखते है की वो क्या बिगड़ता है हमारे अघोरी तांत्रिक का “

“नही वो बहुत ही शक्तिशाली है ,पहले भी जब तांत्रिक ने गांव वालो को सताया था तो उसी बाबा ने उनकी मदद की थी ,”

इस बार उनमे से एक के चहरे पर थोड़ी शिकन आयी

“अच्छा वो पहाड़ी वाले बाबा जो है उन्होंने कैसे बचाया था गांव वालो को “

“कहते है आज से कुछ 100 साल पहले की बात है जब हमारे तांत्रिक महाराज खुले गांवो में घुमा करते थे और हर अमावस की रात को एक कुवारी लड़की की भेंट गांव वाले उन्हें चढ़ाते थे ,जिसके साथ वो संभोग करते और उसकी बलि देते थे,गांव वाले उनसे इतना डरते थे की कोई भी इसके खिलाफ नही बोलता था,जो बोलता वो दूसरे दिन का सूरज ही नही देख पता ,सभी को पता है की वो नरभक्षी है ,लेकिन उसी समय हमारे गांव का कोई व्यक्ति पहाड़ी वाले बाबा से मिला और उन्हें यहां लाकर पहाड़ी में उनके लिए सबने मिलकर मंदिर बनवा दिया ,उन्होंने ही तांत्रिक महाराज को गांव से भगाया ,उसके बाद भी कभी कभी कुछ लोग गांव से गायब हो जाया करते थे,लोग उस गुफा के आसपास भी नही जाते थे,उस कुछ सालो बाद ये घटनाएं होना बंद हो गई और लोगो को लगा की तांत्रिक महाराज का देहांत हो गया लोग फिर से गुफा के आसपास जाने लगे लेकिन फिर से वही कहर ,और इतने सालो बाद फिर से महाराज को देखकर सभी फिर से घबरा गए ….”

“ये पहाड़ी वाले बाबा की उम्र कितनी है “

“क्या पता जैसे हमारे तांत्रिक महाराज अमर है वैसे ही बाबा भी अमर है वो हमेशा ही 50-60 के ही दिखते है ,”

उस व्यक्ति ने थोड़े आश्चर्य से कहा

“हम्म्म्म तुम क्यो तांत्रिक की पूजा करते हो तुम भी अपने पहाड़ी वाले बाबा की पूजा किया करो “

“मुझे भी ताकत चाहिए “

“अच्छा “

उस शख्स के चहरे में एक कुटिल सी मुस्कान आ गई

“क्या तुम लोगो ने उन्हें देखा है”

“हा मैंने उन्हें देखा है,तुम्हे भी मिलवा दे क्या “

गांव का आदमी सिहर उठा

“डरो नही बस दारू की एक बोतल और 2 किलो बकरे का कच्चा मांस ,लेकर अमावस की रात को आ जाना ,साथ ही अगर कोई कुवारी लड़की ले आओ तो तुम्हारी तो सिद्धि पक्की “

वो थोड़ा खुस हुआ लेकिन फिर से डर गया

“नही नही जो भी उस गुफा में गया वो बाहर नही आया है ,कई लोग वँहा दारू और मांस लेकर गए लेकिन कोई भी बाहर नही आया “

“हम तो आये ना “

वो सोच में पड़ जाता है ,

“देखो अभी समय है इससे पहले की तांत्रिक बाबा की ताकत और बड़े और वो गांव में आकर घूमने लगे जो जो उनकी शरण में आ जाएगा वो ही बचेगा ,सोचलो और अब पहाड़ी वाले बाबा कुछ भी नही कर पाएंगे क्योकि अब हमारे तांत्रिक बाबा इतने ताकतवर हो चुके है की उनके सामने कोई भी नही टिक सकता …जय शैतान की ,”

एक शख्स ने जोरो से कहा ,वो जग्गू था जो की खुद ही तांत्रिक बाबा के भेष बना चुका था ,

उसके साथ ही उसका दोस्त पुनिया था दोनो मिलकर बाबा के नाम पर कुछ लोगो को अपने तरफ करने में कामियाब हो चुके थे जिनसे सिद्धि और डर के नाम पर कुछ काम करा लिया करते थे ….

उसकी बात सुनकर वो शख्स और भी काँपने लगा

“जय शैतान की ...जय शैतान की ..”

“ठीक है अभी तू जा और कल फिर से शराब और मांस लेकर आना “

उसके जाते ही जग्गू मांस पर झपटा जिसे पुनिया ने रोका

“अबे इसे भून तो ले “

“अरे मेरे भाई सालो से कच्चा ही खा रहा हु अब आदत मत बिगड़ मेरी वरना इन लोगो को डराएंगे कैसे ,तू अपने लिए इसे भून ले “

“हम्म ठीक है लेकिन पहले गुफा के अंदर चल “

दोनो ही गुफा के अंदर चले जाते है …

“मुझे एक बात समझ नही आयी की आखिर ये पहाड़ी वाले बाबा अभी तक 50-60 के कैसे लगते है जबकि गांव वाले उन्हें 100 सालो से जानते है “

“अरे ये लोग तो मुझे भी वही तांत्रिक मानते है ,मेरा गुरु 70-75 साल में ही मर गया था ,हो सकता है की उसका भी कोई गुरु रहा हो जिसे ये लोग आदमखोर तांत्रिक मानते रहे हो ,इन्हें तो ये ही लगता है की ना तांत्रिक मरता है ना ही पहाड़ी वाले बाबा ,तो जैसे तांत्रिक का रहस्य है वही रहस्य बाबा का भी होगा “

“ह्म्म्म “पुनिया ने एक गहरी सांस ली और अपने शराब को अपने हलक से उतारा…..

 
धाय धाय धाय

हवा में गोलियो की आवाज और बारूद की बदबू फैल गई थी ,अजय के कंधे को छूते हुए वो बुलेट गुजरी थी लेकिन अजय की आंखों में खून उतर गया ,जो बुलेट उसे बस छू के निकली थी वो सीधे निधि के कंधे पर जा घुसी थी ,अजय बौखलाया उसने इतनी तेज ब्रेक मारी उसकी मोटरसाइकिल कई मीटर तक यू ही घसीटती चली गयी …….जंगल में घोर सन्नाटा छा गया गाड़ी रुकी ही थी की फिर कुछ नकाबपोश शख्सियत जंगल से प्रगट हुए वो जानते थे की इस समय अजय और निधि अकेले ही छिपकर बाइक से पहाड़ी वाले बाबा के आश्रम के लिए निकले है ,दूर दूर तक कोई नही था ना ही किसी से मदद की ही कोई उम्मीद थी ,निधि के कंधे से बहता हुआ खून अजय को पागल बना रहा था वही उन्हें इस अवस्था में देखकर नकाबपोशों के हौसले और भी बढ़ गए थे .,...वो तेजी से अजय की तरफ बड़े और फायर करने लगे ,उनकी संख्या लगभग 10 थी सबके ही हाथो में अत्याधुनिक हथियार थे और अजय बिल्कुल ही खाली हाथ वो झट से बाइक के पीछे छुपा उसे पता था की ये छुपने की सही जगह नही है लेकिन वो कर भी क्या सकता था ,वो निधि को अपनी बांहो में भरे हुए था और गोलियां उसके शरीर के पास से गुजर कर जा रही थी ,की अचानक बाजुओ में कोई नुकीली सी चीज आकर गड़ी,वो उसे आश्चर्य से देखने लगा वो तो जानवरो को बेहोश करने वाला इंगजेक्शन था ,वो घबराया हुआ निधि को देखने लगा और उसकी आंखे बंद होने लगी वो चाहकर भी सम्हाल नही पा रहा था अब वो नकाबपोश उसके आसपास ही खड़े दिख रहे थे और वो निधि को उठा रहे थे ,अजय ने पूरी कोशिश की लेकिन वो अपना हाथ भी नही उठा पा रहा था ,वो बस निधि की चीख और नकाबपोशों के हँसने की आवाज को ही सुन पा रहा था……..धीरे धीरे उसके आंख बंद हो गए …..

इधर

खबर आंधी सी फैलाने लगी पूरा राज्य ही इस घटना से स्तब्ध था,घरके लोगो की नींद ही हराम हो गई थी ,उन्हें बस अजय की बाइक ही मिल पाई थी अजय और निधि का कोई भी सुराग हाथ नही लग रहा था ,पूरे 5 घंटे बीत गए थे ,प्रदेश के बड़े बड़े नेता और आफिसर भी इस बात से घबराए और हड़बड़ाये हुए थे,चुनाव सर पर था और अगर ऐसे में अजय और निधि का पता नही चल पता या कोई अनहोनी घटना घट जाती तो पूरा ठीकरा सत्तारूढ़ पार्टी के सर में फुट सकता था ,लेकिन चाहे विजय और बाली हो या तिवारी खानदान के लोग वो जानते थे की ये हमला राजनीतिक नही हो सकता ,कोई भी इतना बड़ा रिस्क नही उठाएगा,ये जानते हुए की उंनके परिवार की पहुच क्या है ,वो पूरे राज्य में हाहाकार मचा देंगे,.....

डॉ को अपने दिए गए सुझाव पर पछतावा हो रहा था ,आखिर उसने क्यो उन्हें अकेले ही जाने को कहा था,लेकिन अब देर हो चुकी थी किसी घर के भेदी ने ही कुछ ऐसी जानकारी लीक कर दी थी जिससे ये हादसा हो गया ,खोज चरम पर था जब डॉ ,बाली,कलवा और जिले का SP अजय और निधि को तलाश करते हुए पहाड़ी वाले बाबा के पास पहुच गए ,

“बड़ा ही गंभीर विषय है,आखिर कौन हो सकता है जो इस सहज और प्रेम से भरे हुए इंसान के लिए अपने दिल में नफरत रखता है…”

उस तेजमयी विशालकाय और मनमोहक व्यक्तित्व की गहरी आवाज गुंजी

“बाबा जी पूरा इलाका छान मारा लेकिन कही कोई सुराग नही मिला “

इस बार बाली ने रोते हुए कहा ,

“बाबाजी जो गोलियां अजय और निधि के किडनैप किये जाने वाले जगह से मिली थी उससे पता लगता है की इसमें नक्सलियों का भी हाथ हो सकता है…”SP कहा

तभी एक शख्स जो मैले कपड़ो में लिपटा हुआ था वँहा पहुच गया ,

“बाबाजी हमारी समस्या पर अपने गौर किया ,वो तांत्रिक तो अपनी हद से बाहर जा रहा है ,उसने फरमान भिजवाया है की हमारे गांव के सरपंच की कुवारी बेटी को जल्द से जल्द उसके पास भेज दे वरना वो हाहाकार मचा देगा ,”उस शख्स की आंखों में भी आंसू थे,डॉ ने बाबा जी को ध्यान से देखा ,

“क्या आप भी वही सोच रहे हो जो मैं सोच रहा हु “

डॉ ने बड़े ही गंभीर स्वर में कहा

“मुझे भी यही लगता है “बाबा जी की सहमति पर सभी लोग उन दोनो को ही देखने लगे

“हमे पहले गांव की समस्या सुलझानी चाहिए “

“आप पागल हो गए हो ,मेरा भतीजा और भतीजी की आपको कोई फिक्र नही है “बाली चीखा

“है…लेकिन तुमने नही सुना उसे कुँवारी लड़की चाहिए ,अगर उन्हें मरना ही था तो वो उन्हें मार ही देते शायद यहां बात और भी गहरी है जो हमारे समझ में नही आ रही है ,हो सकता है की गांव वालो की समस्या सुलझाते हुए हमे हमारी समस्या का समाधान भी मिल जाय,तुम लोगो के पास सब कुछ है जिससे हम उस तांत्रिक को पकड़ सके और उसके कहर से गांव वालो को बचा सके ,असल में मैंने अजय को इसी लिए यहां बुलवाया था ताकि वो मेरी जगह पर ये काम हाथ में ले सके ,हो ना हो भगवान हमे कुछ संकेत दे रहा है .”

6फिट 2 इंच का बाबा जी का शरीर उठ खड़ा हुआ ,एक गेहुये रंग की धोती बस उन्होंने लपेट रखी थी ,चौड़ी भुजाए और चौड़ी छाती देखकर कोई पहलवान भी उनसे डर जाय लेकिन मुख मंडल का तेज और सौम्यता उनके बारे में अलग ही जानकारी देती थी ….पास रखा त्रिशूल उठा लिया लगा की साक्षात शिव प्रगट हो गए हो ,वहां बैठे हुए उनके भक्त जानो की आंखों में अश्रु की धारा बह गई ,एक भक्त ने शंखनाद किया ,बाकियों के रोंगटे ही खड़े हो गए थे ,

“हमे जाना कहा है “

वहां खड़े हुए SP ने टूटते हुए आवाज में कहा

“उस गुफा में चलो जंहा जाने से ये लोग घबराते है और जिसे तांत्रिक का निवास कहा जाता है “

इधर

अजय को बेहोश हुए ना जाने कितना समय बीत चुका था ,उसे हल्की हल्की सी आवाज आते सुनाई दे रही थी ,हा वो जिंदा था ,शायद उसे यकीन ही नही था लेकिन उसे जैसे ही निधि की याद आई वो पूरे होशं से भर गया ,उसने हल्के से अपनी आंखे खोली ,वो सीलन भरी जगह थी जंहा पर नमी का अहसास हो रहा था साथ ही मांस के सड़ने की हल्की बदबू फ़ैली थी ,सामने एक काले पत्थर की बड़ी सी मूर्ति दिखाई दी साथ ही जो दृश्य उसे दिखाई दिया उससे उसकी रूह तक कांप गई ,मूर्ति के नीचे एक लड़की नग्न अवस्था में बैठी थी उसके बाल बिखरे हुए थे ,वो अजीब सी मचल रही थी जब उस लड़की ने सर उठाया वो अजय के प्राण कांप गए वो निधि थी ,माथे पर बड़ा सा तिलक था और उसके चारो ओर फूल बिछाए गए थे ,उसका दूधिया शरीर दूर से ही साफ दिखाई पड़ता था ,वो मानो बहुत ही नशे में थी ,पास ही उसने 2 लोगो को खड़े हुए देखा ,एक नकाबपोश था जबकि दूसरा किसी तांत्रिक की तरह दिख रहा था ,पूर्ण नग्न उस शख्स के शरीर पर राख लिपटे हुए थी ,बालो के नाम पर जटाएं थी जो बिखरी हुई थी वो लगड़ा कर चल रहा था पास ही एक बलशाली सा आदमी नकाब में था ,अजय ने अपने हाथ चलाने की कोशिस की वो बंधा हुआ था ,उसने रुकने का फैसला किया ,वो उत्तेजना में कोई ऐसा कदम नही उठाना चाहता था जिससे निधि को कोई खतरा हो ,जब तक वो जिंदा था निधि के बचने की उम्मीद थी …

“आखिर ये कैसे हो सकता है “

नकाबपोश शख्स बौखलाया

“मुझे क्या पता लेकिन ये लड़की कुँवारी नही है “

लंगड़ा तांत्रिक बुदबुदाया

“आखिर कैसे मैं इसपर सालो से नजर रखा हुआ हु ,इसका कोई बॉयफ्रेंड भी नही है ,किसी लड़के की छाया भी इसपर नही पड़ी और ये ...और तुम ये कैसे कह सकते हो ,इतना बड़ा रिस्क उठाया है मैंने इसके लिए और तुम .”

वो और भी बौखलाया

“हमे लड़कियों के कौमार्य की परीक्षा करना सिखाया जाता है ,अगर इसकी बलि दे दिया तो शैतान नाराज हो जाएगा और इसकी सजा हमे मिलेगी ,”वो हड़बड़ाया हुआ बोला

“तेरे शैतान की तो मैं..”

उसने अपनी बंदूख उठाई और उस मूर्ति के सामने तान दिया

“पुनिया “जग्गू जोरो से चिल्लाया ,पुनिया ने तुरंत ही उसे चुप करा दिया

“पागल हो गया है क्या ,हमारे नाम किसी को भी पता नही चलने चाहिए “पुनिया हड़बड़ाया

“तो तू शैतान के बारे में ये कैसे बोल सकता है ,ये लड़की अब शैतान की भेंट तो चढ़ चुकी है ,लेकिन इससे हमे कोई भी लाभ नही हो सकता,अगर हमने इसे छुवा तो उसका कहर हमपर बरसेगा ,अगर हम शैतान को इसे भोगने के लिए आमंत्रित करे तो ये कुँवारी नही है शैतान हम पर ही बरसेगा “

जग्गू बड़े ही गंभीर होते हुए कहा

“तू पागल है ये सब दुसरो को डराने के लिए ही ठीक है ,तू भी इन सब पर विस्वास करता है “

जग्गू जोरो से हंसा

“अपनी आधी जिंदगी मैंने ये सब देखते हुए बिताया है और तू मुझे विस्वास की बात करता है ,हा लोगो को डराने के लिए कुछ पैतरे अपनाने पड़ते है लेकिन ये कोई पैतरा नही है,सच में शैतान को कुँवारी लड़की का भोग लगाने से वो खुस होता है और इससे हमारी शक्ति बढ़ती है,सालो से मैं ये करना चाहता था ,उस सरपंच की बेटी ही मिल जाती तो अच्छा था कहा हम इसे कली समझ कर इसके पीछे पड़ गए ,अगर हमारा ये प्रयास सफल हो जाता तो हमे हराना किसी भी के लिए नामुमकिन हो जाता ,”जग्गू मायूस था

“लेकिन अगर हम इससे संभोग भी नही कर पाए तो इस लड़की के जिंदा रहने का मतलब भी क्या हुआ “पुनिया अब बेचैन हो गया था

“क्योकि हमने इसे शैतान को सौप दिया है ,मैंने सभी विधि विधान तो कर दिए है लेकिन शैतान को बुलाने से पहले मुझे इसके कौमार्य के भंग होने की जानकारी मिल गई ,जब मैं इसके योनि को छुवा ,हम बच तो गए लेकिन अब फंस भी गए ,अब इसे ना ही मार सकते है क्योकि इसे मारने का अधिकार अब शैतान का ही है ,”

कुछ देर की खामोशी के बाद पुनिया के चहरे में एक शैतानी मुस्कुराहट ने जन्म लिया

“अगर शैतान को इसके भाई के अंदर बुलाया जाय तो “पुनिया की बात से जग्गू का चहरा खिल गया

“ये हुई ना बात ,अब भाई ही अपनी बहन को मारेगा और इसके अंदर का शैतान उस आदमी को मार डालेगा जिसने उसे एक पहले से इस्तेमाल की हुई लड़की का भोग लगाया ,मतलब इसका भाई ही मरेगा ,हम बस तमाशा देखेंगे दोनो ही मौत का “

“मुझे तो ये देखना है की कैसे एक भाई ही अपनी बहन को हमारे सामने चोदेगा ,वो भी जब उसके अंदर शैतान का वास हो …”

पुनिया की ख़ौफ़नाक हँसी पूरे गुफा में गूंज गई वही उनकी बाते सुनकर अजय की रूह कांप गयी ..

 
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