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जुनून (प्यार या हवस) complete

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अजय का यू रोना शायद की कोई समझ सकता था,नितिन उसे बस सहारा दे रहा था,...............

“छि कितनी बदबू फैला के रखे हो रूम में …”

निधि की प्यारी सी आवाज से विजय चौका जब वो अपने ओल्ड मोंक की बोलत से 4 था पटियाला पैक बनाकर तैयार था,आज उसे इसी हार्ड दारू का सहारा था,वो बड़ा ही परेशान था,निधि यू तो उसके कमरे में नही आती थी लेकिन अजय से सब सुनने के बाद वो खुद को रोक नही पाई थी…

कमरे में घुसते ही उसे रम की वो खुसबू/बदबू आयी (खुसबू उनके लिए जो पीते है और बदबू उनके लिए जो……..छोड़ो यार 0

“ये क्या कर रहे हो छोड़ो इसे”

निधि ने ग्लास हाथ से छिनने की कोसीस की लेकिन विजय की लाल आंखे उसे भी थोड़ा डरा गई …………….

“तू यहां क्यो आयी है तेरा तो एक ही भाई है ना जा उसके पास ,मुझे क्या हक है तेरे जिंदगी के फैसले लेने का,जो अजय भइया कहे वही सही है,कोई तेरी जिंदगी बर्बाद भी करदे तो हमे हक नही है बोलने का………”

विजय की आंखों में आंसू थे ,और दिल में एक अजीब सा दर्द जो उसे कभी भी फील नही हुआ था,वो शराब का सहारा ले रहा था,लेकिन शराब साली किसकी सगी है,जब दिल के गम भुलाने को पियो तो गड़े दर्द को और जगा देती है ,...

निधि बेचारी बस उसे देखती ही रह गई वो विजय को प्यार करे या उस लाचारी पर रोये उसे समझ ही नही थी ,लेकिन सोनल जो उनके पीछे खड़े सब सुन रही थी वो गुस्से में आ गई और उसके हाथ से वो ग्लास पकड़कर पटक दिया ….

विजय उसे भारी हुई आंखों से ही देखता रहा…

“हा साले तुझे कुछ भी हक नही है अपने बहनों की जिंदगी के लिए फैसला करने का किया ही क्या है तूने ……”

निधि डरकर सोनल को चुप करने गयी लेकिन उसने उसे अलग कर दिया

“क्या आता है तुझे और क्या जानता है तू अजय भइया के बारे में ,सब कुछ सहकर जिसने हमे इस मुकाम में पहुचाया आज तू उनका ही दिल दुखा आया ,तुझे तो बस यही समझ है की मारो या मारो,और तुझे क्या चाहिये दारू और लड़की ……..”

सोनल के इतने कहने पर ही विजय फफककर रोने लगा निधि जाकर उसे अपने गले से लगा ली,निधि की कमर पर विजय का सर था और वो रोये जा रहा था.लेकिन सोनल का गुस्सा शांत नही होने वाला था,

“क्या बहन की जिम्मेदारी की बात कर रहा है तू….क्या किया है तूने आज तक बहनों के लिए “

“दीदी बस करो भाई को देखो कितने दुखी है और आप हो की …”

“ए भईया की चमची जा तू जाकर अजय भइया के साथ सो जा ,मेरे भाई को मेरे लिए लिए छोड़ दे ……”

विजय और निधि सोनल का चहरा देखने लगे ….अब सबके आंखों में आंसू था,निधि तो वही बैठ गयी उसे यकीन नही हो रहा था की उसके घर में ये क्या हो रहा है,आज एक भाई किसी एक बहन का तो दूसरा दूसरे बहन का हो गया,

लेकिन कुछ ही देर में सोनल के चहरे पर एक मुस्कान आयी …

“क्यो लगा हुआ ना दर्द ….सोच कैसा लगा होगा भैया को जब तूने उन्हें ये कहा ,उन्होंने हममें कब कोई फर्क समझा जो हम समझ रहे है,और उन्होंने जो फैसला किया है वो कुछ सोचकर ही किया होगा,वो हम सबकी भलाई चाहते है,निधि ,मुझहे और रानी को अगर कोई सबसे ज्यादा प्यार करता है तो वो अजय भइया है ,साथ सोने से ही सब कुछ नही हो जाता समझे…”सोनल के साथ इसबार विजय और निधि भी हल्के से हँसे …

“माफ कर दो यार गलती हो गई बस समझ नही आया उस समय …”विजय मुस्कुराते हुए कह गया

“और भइया आई लव यू ...और मेरे भी भैया है समझी नितिन की gf “

निधि ने विजय के गालो पर एक जोर का किस किया ,लेकिन वो gf वाली बात पर सोनल उसे मारने लगी निधि विजय के पीछे छुप गई ,

,माहौल अचानक ही बदल गया था,निधि विजय के गोद में बैठ जाती है ,

“भइया इतनी बदबू है इसमें आप पी कैसे लेते हो ….”

सोनल और विजय बस मुस्कुरा दिए और जवाब में विजय ने निधि के गालो को पकड़कर एक जोर का किस ले लिया ………….

केशरगड़ की खबर जंगल में आग की तरह फैली और कुछ ही घंटे में पुरातत्व के बड़े अधिकारियो का जमावड़ा वहां हो गया,अजय की तरफ से वहां के कुछ बंदों ने सिफारिश भी करदी,और अजय के ब्लड का सेम्पल भी लिया गया,ये भी एक न्यूज़ बन गई की अजय ठाकुर नाम के शख्स ने केसरगढ़ के राजपरिवार का होने का दावा किया,डीएनए टेस्ट के बाद असलियत का खुलासा होगा,,लेकिन उस शख्स का चहरा वहां मिले मूर्ति से हूबहू मिलती है,

बंसल को भी समझ आ चुका था कि उसने देरी कर दी है और अब कुछ भी कर पाना मुश्किल है,अजय को उसका नाम तो मिल ही जाएगा,बस उसे अब राजनीति में उसे आगे बढ़ने से रोकना था,और साथ ही अपने को ज्यादा मज़बूत करना था,

इधर अभिषेक से मिस्टर x (पुनिया ) ने संबंध ही काट लिया क्योकि उसे पता चल गया था की उसे पकड़ लिया गया है,उसे इस बात का भी पता चल गया था की अजय राजनीति में आना चाहता था,उसने बंसल से बात करने की ठानी…

वो अपने दोस्त जग्गू जो की एक तांत्रिक था,के पास बैठा अपने मन की बात कर रहा था,

“तुम्हे क्या लगता है बंसल से बात करना ठीक होगा,”

“तू चुतिया है ,बंसल तो तुझे ही अजय के सामने पेश कर देगा की तू ही उसके मा बाप का कातिल है ,और भूल मत वो राजनीतिज्ञ है कोई चुतिया नही जो तेरी मदद करेगा,अजय के लिये तुझसे बड़ा गिफ्ट क्या होगा,और बंसल बदले में उसे अपने पार्टी में मिला ले तो क्या अजय मना कर पायेगा,नही …….बंसल को इतनी समझ तो होगी ना ..”

“हा यार जग्गू तू ठीक कहता है,लेकिन अब क्या एक मोहरा इतने दिनों की मेहनत से जुटाया था वो भी गया,”

“कुछ तो जल्दी करना होगा,मेरा भी लंड अब सब्र नही कर रहा जबसे इन कमसिन हसीनाओं को देखा है”

पुनिया का तो माथा ठनक जाता हैं,

“साले तुझे बस चुद दिखाई दे रहा है,इतने सालो का बदला भूल गया तू “

जग्गू ने अपने पीले और बेहद ही बेकार दांत निकले और हँसने लगा

“भाई सालो हो गए है ना ,तू क्या समझे गा,मेरे गुरु तो हाथ से भी हिलाने नही देते थे,बस जब कोई लड़की की बलि दो तब ही उसे कर सकते हो,जल्दी दिला यार …”

पुनिया गहरे सोच में पड़ गया था,की आखिर किया क्या जाय ,की अचानक उसे एक आईडिया आया ,

“क्योना तिवारियो के हवेली में सेंध डाली जाय ?????”

“कैसे “

पुनिया ने चहरे पर एक कातिल मुस्कान आ गई ….

इधर तिवारियो की हवेली में ,

राकेश महेंद्र का बेटा अपने कमरे में मोबाइल पर कुछ देख रहा था की उसके कमरे का दरवाजा हल्के से खुला ,उसने नजर उठाकर देखा तो सामने आरती(वीरेंद्र रामचंद्र के सबसे छोटे बेटे की पत्नी ) खड़ी थी ,उसके हाथ में दूध का ग्लास था,वो सफेद साड़ी में भी किसी अप्सरा से कम नही लग रही थी,उसकी उबलती हुई प्यासी जवानी मर्द के स्पर्श को लगभग भूल सी गई थी,उसके स्तन मलवाले से उसके तने हुए ब्लाउज़ को फाड़ने को तैयार थे,उनके बीच की घाटी की गहराई भी उसके चमकदार और मांसल स्तनों का आभास दे रहे थे,उसे देखकर ही राकेश के चहरे पर एक मुस्कान आ गई ,

 
वो कमरे के अंदर आयी और अपने पीछे ही कमरे का दरवाजा बन्द कर दिया,सफेद साड़ी जो की इतनी पतली थी की उसके उजोरो की घाटी साफ दिख रही थी,उसके बड़े नितम्भ और पतले कमर की वो लचक ,किसी काम की देवी सी वो लचकते हुए राकेश के पास पहुची और उसके बिस्तर पर बैठ गई ,

“तुम्हारे लिए दूध लायी हु “

उसके हर शब्द से वासना की महक आ रही थी,

“आप तो जानती हो चाची की मुझे दूध कैसे पीना पसंद है,”

राकेश का लिंग उसके पतले निकर को फाड़ रहा था,आरती की नजर उसके अकड़े लिंग में गयी और उसके योनि से भी कुछ रस काम का टपक पड़ा,वो एक खुजली के अहसास से मचल गई,

“पहले ग्लास से तो पी लो ,साथ ही शिलाजीत भी लायी हु “

वो दो गोलिया शिलाजीत की दूध में मिला देती है जो की आसानी से घुल जाता है,राकेश उस दूध को पकड़ता है वो केशर की महक से महक रहा था,राकेश के चहरे पर एक मुस्कान आ गई ,और वो जल्दी से उसे पी गया ,आरती उसके पास आई उसकी सांसे तेज थी ,राकेश की भी सांसे कुछ तेज हो रही थी,

राकेस ने अपने हाथ उसके कमर पर लगाया और वो मचल गई

“आह बेटा “

राकेश फिर से मुस्कुराया और उसे फिर से अपने पास खिंचा उसका जिस्म किसी गर्मी से पसीना छोड़ रहा था ,जिससे आरती एक शरीर गिला हो गया था,उसके नरम त्वचा के अहसास से राकेश के जिस्म पर भी एक झुंझुरी सी दौड़ गई ,

पसीने के गीले पतले साड़ी के कारण जिस्म का कटाव उभर कर आ रहा था,आरती की खुसबू से राकेश के अंगों में अकड़ान बढ़ रही थी,

वासना की आग उम्र और रिस्तो के बंधन को नही मानती वो हर दीवार तोड़ कर उस आग को शांत करना चाहती थी,एक विधवा औरत अपने बच्चे की उम्र के लड़के के साथ आज सबकुछ करने को तैयार थी,शायद ये उनका पहले बार भी नही था,लेकिन आरती करती भी क्या,उसकी शादी नई नई थी की बेचारी का पति पारिवारिक झगड़े के कारण मारा गया,एक अच्छे घर की लड़की जो एक जमीदार खानदान की बहु थी,पढ़ी लिखी थी,समाज के सामने शालीन थी,मर्यादित थी,लेकिन जिस्म की आग जो उसके पति ने उसे लगाई थी लेकिन उम्र के उस दौर में जब ये आग सबसे ज्यादा होती है उसके पति की मौत हो गई,आरती की ये मजबूरी थी की वो अपने को किसी ऐसे के हाथो में सौपे जो की उसकी इज्जत के ना उछाले ,राकेश जब जवान हुआ तब से ही आरती ने उसे सम्हाल लिया,राकेश सबसे ज्यादा प्यार अब आरती को ही करता था,वो उसके लिए पहले मा थी ,बाद में उसकी सबसे अच्छी दोस्त और उसके बाद उसकी गर्लफ्रैंड बन गई,आज भी राकेश के दिल में उसके लिए बहुत प्यार और सम्मान था,लेकिन शायद राकेश को भी उसकी मजबूरी समझ आती थी और वो उससे जिस्म का रिश्ता निभाने में संकोच नही करता ……..

आरती आज बड़े दिनों के बाद फिर से राकेश के साथ थी,आज वो अपनी सभी जलन मिटाना चाहती थी,वो राकेश के होठो के पास आकर उसके आंखों में झांकती है,राकेश की आंखे उससे टकराती और वो अपने होठो को आरती के होठो में मिला देता है,

दोनो एक दूजे के जिस्म से खेलने लगते है और राकेश उसके पल्लू को सरकाकर उसके बड़े बड़े आमो के रस को पीने की कोशिस उनके ब्लाउज़ के ऊपर से ही करने लगता है….

उसकी जीभ का स्पर्श पाकर आरती की आहे निकलने लगती है,

“आह बेटा थोड़ा आराम से ,नही दांत मत गड़ा ना “

“आज तो पूरे मन की करूँगा चाची आप को नही छोडूंगा,इतने दिनों के बाद मिली हो “

राकेश उतेजित था और उसके दन्तो के निशान आरती के उजोरो पर पड़ रहे थे वो उसके बालो को अपने हाथो से कसकर पकड़े हुए थी ,राकेश अपने दांतो को गड़ाता और थूक से उसके ब्लाउज़ को भिगोने लगा,आरती को मजबूरन ब्लाउज़ के बटन खोलने पड़े ,अंदर अंतःवस्तो की कमी के कारण उसके उजाले स्तनों की चोटी के दर्शन राकेश को आसानी से हो गए,और वो अपनी आदत के अनुसार अपने दन्तो और लार से उसे भिगोने लगा,उसके निप्पलों को अपने मुह से भरकर वो उसे पूरी तकत से चूसने लगा,आरती के लिये सहन से बाहर हो रहा था,उसका शरीर मादकता से भरा हुआ था और किसी मर्द के ना छूने के कारण वो जलते तवे सा हो गया था,थोड़े से पानी के छीटे भी धुवा उठा देते थे,

राकेश का इतना सा खेल ही उसे झड़ने को काफी था,वो पागलो की तरह मतवाली से झूमि और एक धार उसके पेंटी को भिगो दी ,राकेश उसकी हालत पर मुस्कुराया ,और आरती उसे झूठे गुस्से से देखने लगी,

“शैतान कही का “और उसके गालो को पकड़ कर उसके होठो को अपने होठो से भिगोने लगी…

माहौल की गर्मी बढ़ रही थी,और दोनो की उत्तेजना भी,और राकेश से और नही सहा गया वो अपनी प्यारी चाची को बिस्तर में लिटा कर सीधे उसके साड़ी को पकड़कर उठाने लगा,एक ही झटके में उसे कमर से ऊपर खिंच दिया राकेश का हाथ पेंटी पर गया ही था,

“अरे इतनी क्या उतावली है मैं उतार देती हु,’

लेकिन खड़ा लिंग किसकी सुनता है,वो उसे उतारा जैसे की वो इसे फाड़ ही देगा,आरती को उसके उतावले स्वभाव को देखकर हँसी भी आ गई,लेकिन उसकी हँसी ज्यादा समय तक नही रही ,क्योकि राकेश ने सीधे ही उसके योनि में अपना लिंग धसा दिया,वो बेचारी एक आह भरकर रह गई,और अपने बांहो के घेरे से राकेश को घेर लिया,वो उसे अपनी पूरी ताकत से धक्के लगाए जा रहा था……..

कमरे में छप छप छप की आवाजे आ रही थी ,आरती ने पहले ही अपना पानी निकल दिया था और वो फिर से उतेजित हो चुकी थी,और राकेश का लिंग पूरी तरह से भीगा हुआ अंदर बाहर हो रहा था,कमर चलता रहा आहे निकलती रही ,और दिल धड़कते रहे ,और वो लावा राकेश के अंदर से निकल कर सीधा आरती के अंदर समा गया….

“सुरेश है ये हमारे काम आ सकता है”

पुनिया आज बहुत खुस दिख रहा था,सुरेश आरती के मामा का लड़का था,और वीरेंद्र की मौत तथा आरती के इस तरह जवानी में ही विधवा हो जाने को लेकर बहुत ही दुखी भी रहता था,वो वन विभाग में एक अधिकारी के पोस्ट में था,और उसकी नफरत ठाकुरो और तिवारियो से हमेशा से थी,ठाकुरो से इसलिए क्योकि उनके कारण वीरेंद्र की जान गई और तिवारियो से इसलिए क्योकि उन्होंने उसके बहन को दूसरी शादी नही करने दिया,कभी सुरेश पुनिया के गांव में ही इंचार्ज हुआ करता था और जग्गू और पुनिया के लिए सहानुभूति भी रखता था,लेकिन सालो से उनका इससे कोई भी मेल मिलाप नही था….

“लेकिन क्या वो मानेगा,खफा होना और दुश्मनी होने में बहुत ही फर्क है ,सुरेश चाहे कितना भी नफरत करता हो वो हमारे साथ आएगा उसकी गुंजाइस थोड़ी कम ही है,”

जग्गू ने नाम तो सुझा दिया था लेकिन वो भी कंफर्म नही था की सुरेश उनकी मदद करेगा की नही ,

“सुरेश क्या कर सकता है मुझे तो आरती की मदद चाहिए वो अगर हमारे साथ आ गई तो काम हो जाएगा,”

जग्गू को नही पता था की पुनिया क्या करने वाला है पर उसे उसपर पूरा भरोसा था,

इधर

ठाकुरो की हवेली में चहलपहल बढ़ गयी थी ,अजय को केशरगढ़ के राज परिवार का वारिस घोषित कर दिया गया था,इस हैसियत से उसे राजा घोषित किया गया उसका राज तिलक हुआ और एक बड़ी पार्टी की गई साथ ही परंपरा के अनुसार वो गरीबो में बहुत सा दान भी दिया. ,वहां के लोग अपने राजा को देखने को दूर दूर से आने लगे रोज ही अखबारों में तस्वीरे वगैरह कुल मिलाकर पूरे इलाके में बात का एक ही विषय था ,अजय का राजा बनना….

इससे उनको कोई आर्थिक मदद नही मिलने वाली थी पर एक सम्मान जो अजय और उसके परिवार का वहां था वो कई गुना बढ़ गया था,

हवेली की रंगत ही कुछ और हो चुकी थी और साथ ही समय पास आ रहा था सुमन और किशन की शादी का...सुमन अब हर दुख को छोड़कर बस किशन को अपना पति बनाने को बेताब थी ,कुछ ही दिनों में उनकी शादी थी ,बाली चाहता था की उससे पहले अजय और विजय की भी शादी हो जाय लेकिन उसे भी पता था की ये मुमकिन नही है,

वक़्त चलता चला गया और चुनाव को भी एक ही साल का समय बचा था,निधि और धनुष बड़े ही ताकत से चुनाव की तैयारी में लगे थे,वही अब अभिषेक निधि से दूर रहने लगा था उसे पता था की उसकी एक छोटी सी गलती उसे कही का नही रहने देगी….निधि को पहले तो ये अजीब लगा लेकिन फिर वो अपने काम में इतनी व्यस्त होने लगी की उसे इसकी सुध भी नही रहती थी………

उस रात बाली अपने कमरे में गया ,वो अब चम्पा के साथ ही सोया करता था,लेकिन अलग अलग बिस्तरों में ,इतने दिनों की दूरी अब भी नही भरी थी ,

“शादी की तैयारीया कैसे चल रही है …”

ऐसे तो वो दोनो बहुत ही कम बात किया करते थे पर जब से किशन की शादी फिक्स हुई थी वो कुछ चीजो के लिए बात कर ही लिया करते थे,

“ठीक है और ये बच्चे मुझे कुछ करने ही कहा देते है,अब तो इनकी ही चलती है अब मैं बुड्ढा हो गया हु “

बाली हँसते हुए कहा,

“आप भी ना अभी तो आप किसी जवान को भी मात दे दे ...अभी भी तो वैसे ही है “

बाली की नजर सीधे चम्पा पर गई वो उसके बदन को ही घूर रही थी ,बाली से नजर मिलते ही उसकी नजर शर्म से झुक गई ,बाली को भी बड़ा अजीब सा लगा,ये सालो की दूरियां जिसने मन के जज़बातों को दफना दिया था,एक हल्की सी आहत ने उसे हिलोरे मारने पर मजबूर कर दिए था.,

दोनो ही चुप होकर सोने की कोशिस करने लगे वो अलग अलग बिस्तर में सोए थे ,चम्पा के दिल की धड़कन बाली तक पहुच रही थी लेकिन वो मूरत बना बस सोया हुआ था,की चम्पा उठी जैसे वो इस आग को बर्दास्त नही कर पाएगी उसके उठने की आहट से बाली भी उसकी ओर देखने लगा ,जैसे ही चम्पा बिस्तर से उठी उसका पल्लू नीचे गिर गया….

वो अभी बेफिक्र थी उसे लगा की हमेशा की तरह बाली दूसरी ओर मुह किया सोया होगा,लेकिन बाली की नजर सीधे ही उसके उजोरो पर गई,आज भी चम्पा की कातिल अदाएं वही थी जो सालो पहले हुआ करती थी,उसके उजोरो के मदमस्त पर्वत ब्लाउज के उस दर्रे से झांक रहे थे,वो मखमली जिस्म का वो हिस्सा बाली के मन को बहकाने को काफी था,सालो से किसी औरत के जिस्म का स्वाद उसे नही मिला था यही हाल कुछ चम्पा का भी था और दोनो एक दूसरे के सामने इस हालत में थे की वो कुछ कर भी नही पा रहे थे और किये बिना रहना भी मुस्किल हो रहा था…..

दूधिया रोशनी में चमकता हुआ चम्पा का जिस्म और उससे आने वाली वो मनमोहक खुशबू,उम्र के इस पड़ाव में वो उसका शरीर और भी गदरा गया था,भारी नितम्भ,उभरे उरोज ,और चहरे पर वही कातिलाना अंदाज,...

 
कभी वो कई लोगो का बिस्तर गर्म करती नही थकती थी,और उसके अदाओं ने ना जाने कितनो को पागल बना रखा था,दोनो ही एक दीवार से खुद को अलग पा रहे थे और उस दीवार को तोडना दोनो की हसरत थी,लेकिन ….

मजबूर आकांक्षाओं की दीवार एक ही चोट में धराशायी हो जाती लेकिन वो चोट पहले कौन लगाता,वो अपनी नजर झुकाए बालकनी में चली गई ,और हवा के हल्के झोको ने चम्पा को उस आग से कुछ आराम दिया,उसने अपने पल्लू के पर्दे को हटा कर अपनी उरोजों को सांस लेने के लिए खुला छोड़ा वो उसे मसल कर अपनी भावनाओ को सकून दे रही थी,

नीचे कलवा अभी अभी कुछ काम निपटा कर लौट रहा था,चम्पा के कमरे के नीचे एक सन्नटा होता था,वो जगह उनके बगीचे की थी,कलवा अपनी अकेली रातो में वहां आकर कुछ सकून के पल बिताया करता था,दोनो की नजरे मिली और कलवा भी उस काम की मूरत को देखता रह गया,,,...

चम्पा को अपने स्थिति का आभास कलवा के नजरो से ही हुआ और उसके चहरे पर शर्म की लाली खिल गई ,वो उसे देखकर हल्के से मुस्कुराई ,वो बहुत अच्छे दोस्त थे ,कलवा कभी चम्पा का आशिक हुआ करता था और ये बात चम्पा को भी पता थी,आज इतने दिनों बाद दोनो की वही भावनाएं फिर से जाग गई ,कुछ देर को ही सही लेकिन कलवा उसे वैसे ही घूर रहा था जैसे की वो पहले घूरा करता था और चम्पा की अदाएं कुछ टिस करती हुई कलवा तक पहुच रही थी,उसके चहरे पर शर्म ने एक मुस्कान की जगह ले ली थी जो की एक कामोत्तेजक मुस्कान थी,महिलाओं की ये मुस्कान किसी भी समझदार आदमी के दिमाग को बिगड़ देती है ,ये एक सिग्नल होता है की वो महिला आपमे उत्सुक है,

कलवा का दिल सालो बाद यू जोरो से धड़का था,और अचानक ही मानो दोनो को होश आया की वो ये क्या कर रहे है……

चम्पा ने अपने को झट से ठीक किया और नजर नीची कर अपने कमरे में चली गई वही कलवा को भी ये आभास हुआ और वो भी वहां से निकल जाना ही बेहतर समझा ….

चम्पा कमरे में दाखिल हुई तो उसने बाली को जागता पाया,वो अपने बिस्तर में बैठा किसी सोच में गुम था…

“क्या हुआ नींद नही आ रही आपको “

चम्पा जुबान में अचानक ही एक मीठापन आ गया था,कुछ ही देर पहले हुए सभी वाक्यो ने उसके योनि में कुछ रिसाव शुरू कर दिया था और अपने बिस्तर में लेटकर चादर के नीचे उसे शांत करना चाहती थी लेकिन अभी बाली जाग रहा था,और उस उत्तेजना ने उसमे एक हिम्मत ला दी वो सीधे बाली के बाजू में बैठ गई,और अपना हाथ बाली के हाथो में ले लिया ,

“पता नही कुछ अजीब लग रहा है..”

बाली मुड़ने वाला ही था की चम्पा ने बड़ी अदा से अपने पल्लू को नीचे गिरा दिया,बाली की आंखे सीधा उसके ब्लाउज़ के दरार पर पड़ी...और वो अपनी थूक गटक गया,

चम्पा की हिम्मत और बड़ी वो बाली के पैजामे से झांकते उसकी मर्दानगी को देखने लगी,जो तन कर किसी रॉड की शक्ल ले चुका था,इसके आभास ने ही उसे और उत्तेजित कर दिया ,और वो अपना हाथ बाली के बालो में ले आयी और उसे अपनी ओर खिंचने लगी ,इतना बलशाली बाली भी किसी कठपुतली की तरह उसके इशारों पर खिंचा चला गया और उसके सीने से जा लगा….

बाली की सांसे अब चम्पा के दरारों पर पड़ रही थी,जिससे दोनो ही जिस्मो की आग बढ़ती जा रही थी,अब बाली से भी सहन करना कठिन हो रहा था और वो अपने मुख को खोलकर थोड़ा नीचे जाता हुआ उसके खुले जगह पर अपनी जीभ लगा दिया..

चम्पा के लिए ये सहन करना कठिन था,वो बाली के सर को अपनी छाती पर जोरो से भिच ली..और वो दीवार टूट गई ...वो संकोच की दीवार आगे क्या होने वाला था दोनो ही जानते थे और इस उमंग से ही दोनो के दिल की धड़कन तेज हो गई थी,बाली ने चम्पा की सहमति पा कर अपने हाथो और मुह को काम में लगा दिया वो धीरे धीरे बढ़ता हुआ उसके उजोरो को हर जगह से चाटने लगा और उसे निर्वस्त्र करने लगा चम्पा को भी अब ये कपड़े सुहा नही रहे थे,दोनो ही सालो के प्यासे थे और कब ये आग फुट जाय इसका कोई भी भरोसा नही था,बाली के अंदर का जानवर अब धीरे धीरे जागने लगा था,वो चम्पा के दूध को दुहने में आमादा था वो इतने जोरो से उसे निचोड़ रहा था की चम्पा को लगा की कही इनसे खून ना निकल जाय बाली अपनी जवानी में लौट गया था,वो चूसता मसलता,चम्पा के शरीर को तोड़ रहा था,और चम्पा की आहे पूरे सबाब में गूंज रही थी…

बाली ने आखिर चम्पा का वो आखरी वस्त्र भी निकाल फेका और खुद भी पूरी तरह निर्वस्त्र हो उसके उस गुफा में अपने लिंग को घुसाने लगा,दोनो ही इतने गर्म थे की कुछ ही धक्कों ने दोनो को तोड़ दिया और दोनो एक दूसरे को देख कर मुस्कुराने लगे….

जल्दी झरने का कोई दुख किसी को भी नही था क्योकि वो जानते थे की अब तो हर रात जवान होने वाली है ………..

“तुम बहुत ही कसी हुई हो ,जैसे जवानी में होती थी…”

बाली का प्यार पाकर चम्पा और भी खिल गई थी,उसने मादक अदा दिखाते हुए बाली को अपनी ओर खिंचा

“और आप वैसे ही जानवर है जैसे पहले हुआ करते थे,,..”

चम्पा की बात सुनकर बाली के अर्ध तने लिंग ने फिर से फुंकार मारी

“अब दिखता हु की जानवर किसे कहते है…”

दोनो का ठहाका पूरे कमरे में गूंज गया और बाली चम्पा के ऊपर सच में जानवरो जैसा झपटा...

किशन की शादी की शॉपिंग करने पूरा परिवार शहर गया हुआ था,शहर के उसी माल में जहा कभी सुमन उन्हें मिली थी आज वो माल ठाकुरो का था,तिवारी परिवार की तरफ से गए थे खुसबू और नितिन ,आरती स्वाभाविक था की शॉपिंग दिन भर चलनी थी ,वहां के कई दुकान भी अजय ने ही खरीद लिए थे,कुछ को महेंद्र ने ,कुछ बाकियों के भी थे...माल में चहलकदमी सुबह से जोरो पर थी ,जब खुद मालिक का परिवार आ रहा हो तो ये होना स्वाभाविक भी था,

सुमन आज उसी दुकान में बैठी थी जंहा कभी वो काम किया करती थी,वो अपने सभी साथियों को देखकर भावुक हो गई,सभी उससे ऐसे मिल रहे थे जिसे की कोई नई दुल्हन पहली बार मायके आयी हो,लेकिन सभी को पता था की अब ये यहां की कर्मचारी नही बल्कि मालकिन है, अपने आंखों में आंसू और दिल में विनय का भाव लिए वो वहां बैठी थी ,उसे तो अपनी किश्मत पर कभी कभी यकीन भी नही होता था,क्या ये एक सपना था,लोग उसे किसी महारानी की तरह से ट्रीट कर रहे थे,लेकिन उसके आंखों में बहुत ही विनम्रता उन लोगो के लिए थी होती भी क्यो ना कभी वो भी उन्ही में से एक हुआ करती थी,

सुमन का साथ निधि ने कभी नही छोड़ा,सभी उसको देख कर ही पहचान गए की यही वो लड़की है जिससे हुई लड़ाई ने सुमन की पूरी जिंदगी ही बदल कर रख दी,वक़्त भी कैसे कैसे खेल खेलता है,जिस चीज के लिए सुमन को अपनी नॉकरी से भी हाथ धोना पड़ा था वही चीज उसे नॉकर से मालकिन बना दिया…

इधर कुछ जवा दिलो के लिए ये ट्रिप किसी पिकनिक से कम नही था ये वो मौका था जहा वो एक दुसरे को निहार सकते थे,खुसबू नितिन और सोनल तो यहां आये ही इसी लिए थे की वो अपने सनम की कुछ झलक देख पाए,

विजय ने भी उन्हें थोड़ा स्पेस देने की सोची और किशन को लेकर लड़कियों के साथ बैठ गया ,जिसे कभी लड़कियों के साथ शॉपिंग करना पसंद नही था वो दोनो लवंडे आज शादी की शॉपिंग में सबका हाथ बटा रहे थे,ऐसे वो सचमे लड़को को बोझिल करने वाला होता है,पर आज दोनो ही उसे इंजॉय कर रहे थे,किशन के पास तो इसका वाजिब कारण भी था लेकिन विजय के पास क्या कारण था???सिर्फ सोनल और नितिन को स्पेस देना या खुसबू को अजय से बात करने का कोई मौका देना…??

इसके अलावा भी एक कारण उसके सामने था,वो थी सफेद साड़ी में लिपटी हुई एक अधेड़ उम्र की विधवा महिला ,जो की अपने सौंदर्य और पहनावे के तरीके से ना तो अधेड़ लग रही थी ना नही विधवा,आरती की कमाल की खूबसूरती ने विजय को सोचने पर मजबूर कर दिया था,वो ऐसे तो उसकी मामी थी और उसे किसी गंदे नजर से देखने का उसका कोई मूड भी नही था लेकिन आरती के वो इशारे जो अक्सर कोई महिला किसी को आकर्षित करने को करती है ,विजय को अंदर से तोड़ रही थी ,वो लड़कियों के मामले में हरामी लड़का था और उसे हर बात साफ समझ आ रही थी की क्यो विजय के देखने पर ही आरती अपने पल्लू को सम्हालती है जिससे कुछ छिपता तो नही बल्कि कुछ दिख ही जाता है और क्यो वो विजय के नजर पड़ते ही अपने कमर की साड़ी को थोड़ा हटा लेती है,जिससे उसकी पतली कमर का वो भाग सामने आ जाता है….

विजय पका हुआ खिलाड़ी था वो हर इशारे अच्छे से समझ रहा था और वो उसे और भी अच्छे से समझने के लिए वहां बैठा हुआ था ,दोनो में एक खेल चल रहा था जिसे बस दोनो ही जानते थे,और किसी को भी इसकी भनक तक नही लग रही थी होती भी कैसे सभी अपने कामो में इतने मसरूफ थे की उन्हें इनपर ध्यान देने की फुरसत ही नही थी,विजय ने आखिर मर्यादाओ के बंधन को तोड़कर आगे बढ़ने की सोची जब खुद लड़की तैयार है तो ट्राय करने में क्या जाता है,ऐसे भी हवस में रिस्ते नही देखा करते ,

विजय जाकर आरती के पास बैठ गया,दोनो की नजर मिली और एक मुस्कान दोनो के होठो में खिल गया,

विजय ने एक अंगड़ाई ली और उसका हाथ सीधे जाकर आरती के स्तन से टकराया,वो ऐसे था की आरती भी इसकी फिक्र ना करती अगर उसे पता नही होता की विजय का असली मकसद क्या था,विजय ने फिर से रिएक्शन देखा उसकी इस हरकत ने आरती के होठो की मुस्कान को और भी चौड़ी कर दि थी,जिससे विजय का लिंग एक जोरदार झटका लगा दिया,

उसके बालो से आने वाली खुसबू ने ऐसे भी उसे पागल बना दिया था ,और उसकी तरफ से आ रहे इस इशारे से वो झूम सा गया,उसने एक कदम आगे बढ़ाने की सोची और अपना हाथ आरती के पीछे से ले जाकर उसके खुले हुए कमर पर रख दिया ,आरती को इतनी हिम्मत की उमीद नही थी उसे लगा था की ये भी किसी आम ठरकी की तरह होगा उसे क्या पता था की ये सभी ठरकीयो का बाप निकले गा उसे इसकी बिल्कुल भी उमीद नही थी फिर भी वो कोई रिएक्शन नही दिखाई ,इससे विजय को समझ आ चुका था की वो पूरी तरह से तैयार है उसे बस मौका चाहिए था आगे बढ़ने का,

“मामी ये सब कितना बोरिंग है ना “

विजय ने आरती से पहली बार बात की थी

“हा है तो ,ऐसे हमारा रहना भी जरूरी नही है”विजय की आंखे चौड़ी हो गई ये तो बहुत ज्यादा चालू है ,इसे खुद इतनी जल्दी पड़ी है,वो सोच में लग गया की आखिर क्या किया जाय की उसे यहां से बाहर निकाला जाय…….

इधर

सोनल खुसबू नितिन और अजय बाहर ही खड़े थे …

“तुम लोगो को नही देखना कपड़ा “

अजय ने सोनल से पूछा

“अरे भैया आप अकेले हो जाओगे ना इसलिए हम रुक गए “

“अरे जाओ मेरे साथ नितिन है ना “

नितिन ने ऐसे देखा जैसे की वो ही फस गया हो ,

“असल में मुझे भी शॉपिंग पसन्द नही “

खुसबू ने हल्के से कहा जिसे सोनल समझ गई ,

“ह्म्म्म एक काम करते है मैं और नितिन अंदर जाते है आप खुसबू का ख्याल रखो…”इससे पहले की अजय कुछ कह पता सोनल नितिन का हाथ पकड़कर वहां से अंदर चली गई,जब अजय ने खुसबू को देखा तो वो हल्के हल्के मुस्कुरा रही थी ,वो लोग नीचे के फ्लोर में बैठे हुए थे,विजय अभी अभी ऊपर गया था…..

अजय को कुछ अजीब सा महसूस हो रहा था उसे पता था की उसे खुसबू के साथ अकेले क्यो छोड़ा गया है पर वो रिश्तों के बंधन को तोडना नही चाहता था….

“तुम्हे कुछ चाहिए बहन “

अजय ने खुसबू को देखते हुए जानबूझ कर कहा ,जिससे उसका मुह उतर सा गया

“नही और आप मुझे बहन ना कहा कीजिये “

खुसबू ने पहली बार अजय का विरोध किया था उसके आवाज में सचमे एक गुस्सा था उसे भी पता था की अजय भी ये जानता है की उसके दिल में अजय के लिए क्या है पर फिर भी वो उससे दूर जाने की कोसीसे करता है ,

“बहन को बहन ही तो कहते है ना “

“मैं आपकी बहन नही हु ये आप समझ लीजिये “

अजय ने उसके मासूम से चहरे पर वो गुस्सा देखा जिसमे गुस्सा कम और दुख ज्यादा था,अजय ने कुछ नही कहा लेकिन कुछ ही देर की ये खामोशी एक अजीब सी बेचैनी लेके आ गया ,

“चलिए काफी पीते है,”खुसबू ने कहा

“जाओ सोनल को ले जाओ मूझे मन नही है “

खुसबू का पारा चढ़ गया और वो अजय का हाथ पकड़कर उसे माल से बाहर ले जाने लगी .

“ये क्या कर रही हो “

“आप मुझे बहन कहते है तो ठीक है हु मैं आपकी बहन अब चलिए जहा मैं ले जा रही हु “

अजय बस उसके साथ खिंचता चला गया….

 
माल से ही लगा एक गार्डन था जिसमे प्रेमी युगलो का जमावड़ा हुआ करता था,खुसबू और सोनल यहां अक्सर अपने दोस्तो जिनमे नितिन भी शामिल था उनके साथ आया करते थे,वो उसे खिंचते हुए ले जाती गई ,बड़ा गार्डन था,और दोपहर का वक़्त जिसमे वो गार्डन बंद हुआ करता था,बस ट्रिक ये था की उसके केयरटेकर को कुछ पैसे देने होते थे,और खुसबू को ये पता था उसने उसे 100 का एक नोट दिया और उसने उसे एक छोटे से गेट से अंदर घुसने को कहा ,वहां आकर कुछ जोड़े तो सेक्स भी कर लिया करते थे,लेकिन उन्हें इतने एकांत की जरूरत नही थी ,अजय को भी सब समझ आ रहा था लेकिन वो भी उसके साथ चलने में कोई भी एतराज नही जताया कयोकि उसे भी खुसबू से बात करनी थी वो भी हर चीज क्लियर करना चाहता था,

“आराम से करना थोड़ा देख कर कोई देख ना ले “

केयरटेकर की गंदी सी हँसी निकली जिसमे उसके रंगे हुए दांत दिखने लगे,वो एक 40-45 साल का मोटा से आदमी था जिसकी सूरत से ही कमीनेपन झलक रहा था, दोनो ही उसका मतलब समझ चुके थे,खुसबू को इससे कोई फर्क नही पड़ा लेकिन अजय का दिमाग सरक गया,अजय ने एक झापड़ खीचकर उसके गालो में लगा दिया ,आवाज इतनी शानदार थी की आसपास में आते जाते लोग भी रुककर उन्हें देखने लगे ,और ताकत इतनी लगाई थी वो वहां से दूर जा गिरा ,उसके मुह से खून आ रहा था,और पास ही उसका एक दांत गिरा पड़ा था,वो बौखलाई आंखों से अजय को देख रहा था,आजतक ना जाने कितने लोगो को उसने ये कमेंट किया था ये पहला शख्स था जिसने इसका विरोध ही नही किया बल्कि उसे इतने जोरो का चांटा भी रसीद कर दिया...अक्सर लोग उसकी बात सुनकर हँसकर टाल दिया करते थे क्योकि सबको पता था की वो वंहा क्या करने जा रहे है…

खुसबू के मुह से एक हँसी निकल गई और वो अजय का हाथ पकड़कर सीधे छोटे गेट से अंदर चली गई ,वो शख्स बस ठगा सा उन्हें देखता रहा …………..

 
इधर

विजय को आरती का इशारा तो मिल गया था पर उसे समझ नहीं आ रहा था कि आगे क्या करें, उसने सोनल को इशारा किया जो अभी लहंगा देखने में व्यस्त थी,

विजय बाहर आय साथ में सोनल भी,

“यार तुम लोग को इतना अच्छा मौका मिला है और तुम यहाँ बैठे हो,”

“हा यार बट सुमन के साथ रहना भी तो जरूरी हैं ना,”

“हा वो तो हैं, लेकिन आस पास कोई गार्डन नहीं है क्या,”

सोनल कुछ सोचती है,

“अरे यहां बाजू में तो एक गार्डन हैं जो शाम में खुलता है लेकिन अगर गार्ड को पैसा दो तो वो दोपहर में भी खोल देता है,”

“परफेक्ट”

“लेकिन यार सब लोगों को क्या बोलूंगी “

“अरे कुछ मत बोल ,भाई की शादी है और अपनी होने वाली बहु के लिए अच्छे से कपड़े सलेक्ट कर”

सोनल उसे अजीब निगाहों से देखती हैं, दोनो फिर से आकर बैठ जाते हैं, कुछ ही देर में आरती उठती हैं और कुछ बहाना बनाकर निकल जाती हैं, फिर विजय उठकर निकल जाता हैं, सोनल उसे धयन से देखने लगती हैं वो उसे आंख मारकर निकल जाता हैं, सोनल को जैसे कुछ समझ आया और उसकी आंखें चौड़ी हो गई,वो उसे रोकना चाहती थी पर कैसे???

इधर विजय और आरती भी गार्डन पहुच चुके थे,

वहां वो गार्ड अभी अभी मार खाकर अपने जख्मो पर दवाई लगाए बैठा था,खून तो रुक चुका था लेकिन दर्द नही गया था,

“बॉस अंदर जाना है “

विजय ने कुछ नोट आगे बढ़ते हुए कहा ,जिससे वो गार्ड थोड़ा झल्ला गया,

“अभी बंद शाम को आना “

“अरे ये रखो ना “

उसने वो नोट उसके पॉकेट में डाल दिए

“बोला ना बंद है समझ नही आता “

गार्ड ने चिल्लाने की गुस्ताखी कर दी,विजय ने अंदर नजर डाली,गार्डन ऐसे तो बड़ा था लेकिन उसे कुछ कपल वहां दिख गए ,

“वो अंदर जो लोग है वो कैसे चले गए “

“चलो बहस मत करो जाओ यहां से ,साले पता नही कहा से चले आते है”

विजय का माथा खनका और एक जोर का तमाचा उसने खिंच दिया,

चटाक ….

ये तमाचा उसे दूसरे गाल पर पड़ा था,गार्ड फिर से जमीन पर था और उसका एक दांत भी बाहर निकल गया ,वो बेचारा रोनी सूरत बनाये विजय को देखने लगा ,आरती जंहा हस पड़ी वही विजय भी मुस्कुरा दिया ,उसका गुस्सा थोड़ा कम हो चुका था,

उसने हाथ आगे बढ़ाकर उसे खड़ा किया और उसके जेब में पैसा रखे ,

“चल गेट खोल “

“दादा गिरी है क्या “

वो रोनी सूरत बनाये कह रहा था,विजय ने अपने जीन्स के पीछे रखी पिस्तौल निकली और उसके माथे में टिका दिया

“हा दादागिरी है”

गार्ड की हालत सांप सूंघने जैसी थी और उस बेचारे के मुह से कोई भी शब्द नही फुट रहे थे,आखिर उसने छोटी गेट की तरफ इशारा किया ,दोनो वहां से गार्डन के अंदर चले गए …

गार्ड अपनी कुर्सी पर बैठा बस यही सोच रहा था की आज किसका मुह देखकर उठा था….

“बोलो क्या बोलना चाहती हो”

अजय एक पेड़ के नीचे बैठ गया ,एक मस्त हवा ठंडी सी खुशबूदार हवा के झोंके ने उसे सहलाया,जिसमे बगीचे के फूलो की खुसबू भी साथ थी,बड़े दिनों बाद उसे इसतरह से सुकून से बैठने का मौका मिल रहा था,बगीचे के एक किनारे में वो बैठा हुआ खुसबू को देखने लगा जो की एक सादे सफेद सलवार सूट में थी ,उसकी सादगी उसे निधि की याद दिला गई लेकिन उसके व्यवहार में निधि जितनी चंचलता नही थी,वो बहुत गंभीर स्वभाव की थी,अजय के लिए ये परफेक्ट मेच था लेकिन वो रिस्ते के कारण पूछे हट रहा था,

 
आज पहली बार उसने खुसबू की खूबसूरती को निहारा ,कसा हुआ शरीर,और जरूरत के हिसाब से ही भराव ,न कम ना ज्यादा,मासूम सा उज्वल चहरा,गुलाबी होठ,घने बाल जो उसके कमर को छूते थे,उसके बल उसके नितंबो कटाव में ठहरकर विश्राम कर रहे थे,बहुत ही नाजुक मुलायम त्वचा की मलिका थी खुसबू ,उसके शरीर से एक सौंधी सी खुसबू आ रही थी,अजय मानो उसकी ख़ूबसूती में डूबने लगा था,वो अपने को मुश्किल से सम्हाला लेकिन तब तक खुसबू को भी इसका आभास हो गया था की उसके दिल में क्या चल रहा है,वो हल्के से मुस्कुरा कर अजय को देखने लगी,अजय ने अपनी नजर नीचे कर ली ,वो उसके बाजू में जा बैठी ,

“मैं आपसे बहुत प्यार करती हु ,”

वो उसके कंधे पर अपना सर रख लेती है,और उसकी भुजा को अपने हाथो से पकड़ लेती है ,अजय उसे हटाता नही ,

“तुम मेरा जवाब जानती हो खुसबू तुम मेरी बहन हो “

“कब से ?????”

“हमेशा से ….बस हमे पता नही था”

“लेकिन जब मुझे आपको प्यार हुआ था तब तो मुझे ये नही पता था की आप मेरे भाई हो ,अब मैं क्या करू,मेरी क्या गलती है की जिंदगी में पहली बार जिसे दिलो जान से चाहा वो मेरा भाई निकल गया…”

खुसबू के आंखों से आंसू की एक बून्द निकल कर उसके गालो तक पहुच गई ,अजय उसके चहरे को नही देख रहा था लेकिन उसके भरे हुए गले का पता उसे चल गया था,

“लेकिन अब तो पता है ना ,जानबूझकर हम ये नही कर सकते …”

थोड़ी देर तक वहां शांति रही

“अच्छा एक बात पुछु “

“हम्म्म्म “

“अगर भाई बहन होने से प्यार नही कर सकते तो नितिन और सोनल क्या करेंगे,वो कैसे शादी करेंगे एक दूसरे से ,वो भी तो तब से प्यार करते है जबसे उन्हें पता ही नही था की वो एक दूसरे के भाई बहन है ,अब आप क्या करोगे …”

खुसबू की बात सुनकर अजय उससे अलग होकर उसे देखने लगा ,उसे एक बड़ा शॉक सा लगा ,वो उसकी आंखों में देखता रहा ,उसे समझ ही नही आ रहा था की वो इसका क्या जवाब दे ….

“हा ये सच है…”

अजय अपने सर को पकड़ कर बैठ गया

“खुसबू तुम समझ नही रही हो इस परिवार को साथ लाने के लिए मैंने कितने दिनों का इंतजार किया है,ये एक फैसला सब कुछ बिगड़ देगा ,अगर किसी एक पक्ष की भी इसमें असहमति हुई तो बवाल हो जाएगा ,मैं नही चाहता की फिर से वही हो जो हमारे मा बाप के साथ हुआ था…….”

खुसबू मुस्कुराते हुए फिर से उसके बाजुओ को पकड़ कर उसके कंधे में अपना सर रख देती है,

“मैं सब समझ रही हु ,दादा जी भी यही चाहते थे और मैं भी लेकिन जो हो गया उसका तो कुछ नही किया जा सकता ,विजय भैया ,नितिन और सोनल तो मान गए है,और किसी भी बच्चे को इसमें कोई परेशानी नही होगी,वो तो हमारे बारे में भी जानते है और हमारे पक्ष में खड़े है ,और रही मेरे घर में किसी के नही मानने की बात तो मैं और नितिन भइया सबको मना लेंगे और रही आपके घर में किसी के नही मानने की बात तो आपकी बात कौन नही मानेगा वहां…”

अजय अब भी सोच में पड़ा था,

“लेकिन …”

खुसबू उसके होठो में अपनी उंगली रख देती है,

“मुझे पता है की आपको सोनल और नितिन के रिश्ते से कोई भी एतराज नही है,और मैं ये भी जानती हु की आप मुझसे बहुत ही प्यार करते है ,बस कहते नही ,लेकिन मैं लड़की हु आपकी आंखों को भी पढ़ सकती हु “

अजय खुसबू को देखने लगता है खुसबू के होठो में एक मुस्कान थी ,अजय अब भी कुछ नही कहता लेकिन खुसबू जैसे सब समझ जाती है और उसके गालो में किस कर लेती है ,अजय थोड़े गुस्से से उसे देखता है…

“सॉरी “वो हल्के से हस कर कहती है ……

इधर

विजय आरती को झुरमुट के पीछे ले जाता है और जैसे की दोनो ही बहुत देर से प्यासे थे वो बस चालू हो जाते है ,एक दूसरे को बेहद ही जोर से दबाने लगते है,एक दूसरे के कपड़े निकल के जैसे फेक ही देते है,दोनो आदमजात नंगे किसी की भी परवाह किये बिना बस हवस की आग बुझाने में लग जाते है,

जब आरती नंगी होती है तो विजय उसे पीछे करता है और उसके जिस्म को ध्यान से देखता है,

“वाह”विजय के मुह से निकल जाता है,

“ऐसा क्या वाह कर रहा है जिसे की कभी देखा ही नही ,मैं अब इतनी भी हसीन नही रही “

“कौन चुतिया ये कहता है की तुम हसीन नही हो ,मामी जी ईईईईई”

वो उसे अपने नंगे जिस्म से लगा लेता है,उसका लिंग जो तन कर किसी लोहे की रॉड की तरह लग रहा था,आरती की पेट में चुभता है,

“सच में कमाल का जिस्म है आपका ,बिल्कुल सटीक ,जंहा जरूरत हो वहां इतना मांस है की मन करता है नोच के खा जाऊ”वो अपने लिंग को फिर से उसके पेट में गड़ा देता है,

“आउच ...तो खा जा ना कमीने “

वो विजय के चहरे को खीचकर उसे अपने होठो के पास लाती है और उसके होठो को चूसने लगती है,दोनो ही एक दूसरे के होठो को खिंचने खाने लग जाते है ,दोनो ही मस्ती में थे और एक दूसरे के जिस्म को भरपर रूप से मसल रहे थे,विजय उसकी मखमली त्वचा का दीवाना हो गया था,वो उसके नितंबो को अपने हाथ से पकड़कर उसे उठा लेता है ,अब उसका लिंग उसकी योनि की दीवार पर था,लिंग में योनि का पानी लगने लगता है,विजय था तो बड़ा पहुचा हुआ खिलाड़ी वो योनि से कुछ देर ही अपने लिंग को रगड़ता है,उसके हाथ आरती के नितंबो को पकड़े थे वही आरती के हाथ विजय के गले से लिपटे थे,वो अपने लिंग को अपनी कमर हिलाकर ही अरजेस्ट करता है और खच से जैसे कोई चाकू गोभ दिया गया हो ,

“आआहह जानवर है क्या “

आरती के आंसू निकल आते है वही विजय की हँसी उसका पूरा लिंग आरती के योनि में धस गया था,थोड़ी देर में ही वो उसे खड़े खड़े अपने हाथो को ऊपर नीचे कर संभोग करने लगता है,

आरती की आंखे बंद हो गई थी,राकेश इसके सामने बच्चा ही था,वो विजय के ताकत की दीवानी हुई जा रही थी ,वो ऐसे चिल्लाने लगी जैसे की कोई नई नई दुल्हन हो ,विजय को भी उसके योनि के कसाव का आभास हो रहा था,

वो उसे नीचे घास में लिटा देता है,

“लगता है किसी ने इसे ढीला नही किया है,बहुत कसाव है इसमें ,मजा आ गया मामी जी “वो फिर से अपने कमर को जोरो से चलाने लगता है,आरती पागलो जैसे चिल्ला रही थी,मानो किसी कुवारी लड़की की सील टूट रही हो,विजय भी जानवरो की तरह उसे चोद रहा था,उसके गालो शरीर को काट रहा था,वो अपने पूरे सबाब में था,

इधर

आरती की चीख सुने गार्डन में गूंज रही थी,यहां तक गार्ड को भी ये आवाजे सुनाई दे रही थी लेकिन उसमे इतनी हिम्मत नही थी की वो उसे मना करे ,वो तो और भी डर गया था की कोई राह चलने वाला इसे सुन ना ले ,उसके मुह से खून बह रहा था जो अभी अभी बंद हुआ था ,रुमाल से उसने अपना मुह ढक रखा था,वो फिर से मार खाना नही चाहता था,वो तो भला हो की गाड़ियों के शोर में वो आवाज आने जाने वालो तक नही पहुच रहे थे ,लेकिन अगर कोई थोड़े भी ध्यान से सुनता तो उन्हें ये समझ आ जाता की कुछ तो हो रहा है,कभी कभी ये तेज हो जाते फिर कम हो जाते …

“ये साले मादरचोद आज मेरी नॉकरी और मेरी जान लेकर रहेंगे “

गार्ड अपने में भी भुनभुनाया

इधर

ये आवाज अजय और खुसबू तक भी पहुच रहे थे ,जो की गार्ड की अपेक्षाकृत और भी ज्यादा और क्लियर था,गार्डन के शांत माहौल में आरती की चीख कभी कभी फैल जाती थी ,दोनो को पता था की क्या हो रहा है ,दोनो ही असहज हो रहे थे ,आखिर थोड़ी ही देर में अजय से ये ना सहा गया ,

“सालो को इतनी भी तमीज नही है की पब्लिक प्लेस में कैसे रहना चाहिए “वो खड़ा होने ही वाला था की खुसबू ने उसे रोक लिया

“छिड़िये ना वो यहां इंजॉय करने ही तो आये है “

“तो ऐसे इंजॉय करेंगे अपने घर में करे ना ये सब “

वो गुस्से से लाल होने लगा था

“बेचारों के पास घर नही होगा इसीलिए तो आये होंगे “

अजय फिर गुस्से से उसे देखता है

“तुम्हे बहुत पता है “

“हा मैं भी तो यहां आती थी सोनल और नितिन के साथ “

अजय का दिमाग ही घूम गया ,उसके दिमाग में नितिन और सोनल की सेक्स की बात आई और वो ...

“मादरचोद “

अजय खुसबू के गले को अपने हाथो से पकड़ कर उसे उठा देता है वो दोनो ही बैठे थे लेकिन खुसबू फिर भी थोड़ी ऊपर हो गई ,उसका चहरा लाल हो गया ,और आंखों में आंसू आ गए ,वो कुछ बोलना चाहती ही लेकिन बात उसके गले से नही निकल रही थी वो बस गु गु कर रही थी ,अजय को जब उसकी हालात का अंदाजा हुआ वो उस झट से छोड़ दिया ,ना जाने उसे इतना गुस्सा कैसे आ गया था ,खुसबू खांसने लगी

“क्यो क्या आपकी बहन सेक्स नही कर सकती जिससे वो प्यार करती है “

खुसबू गुस्से में भर गई थी,उसने व्यंग मारा था …

“मैं प्यार के खिलाफ नही हु ,ना ही शाररिक संबंधों के लेकिन उसका भी कोई समय और जगह होती है ,कोई प्यार में हो तो बात अलग है लेकिन इस तरह नही ,मेरी बहन ऐसा नही कर सकती और अगर तुम भी कहो तो मैं ये नही मान सकता ….”

अजय का गुस्सा थोड़ा कम हो गया था,लेकिन फिर भी ना जाने क्यो उसके सीने में एक अजीब सी जलन थी ,

“मुझे भी अपने भाई पर पूरा भरोसा है वो सोनल से प्यार करता है हवस के लिए उसके साथ यहां नही आता था,मैं तो बस आपको परखने के लिए बोल दिया ,और हम पूरे क्लास यहां आते थे ,कॉलेज बंक करके …”

खुसबू ने अपनी सफाई दी जिसकी कोई जरूरत तो नही थी लेकिन फिर भी खुसबू को बोले बिना नही रहा गया,उसने अजय का गुस्सा और ताकत का अभी अभी अंदाजा किया था ,इससे उसके मन में अजय के लिए एक अनजाना सा डर बैठ गया ,,लेकिन साथ ही एक खुसी थी,वो ये सोच कर ही मचल गई की जब अजय उससे प्यार करेगा तो वो उसे इसी तरह से पकड़ेगा,वो उसपर अपनी ताकत लगाएगा……...ये एक अहसास ही खुसबू को रोमांचित कर गई ,वो थोड़ी और अजय की दीवानी बन गई ….

ये लड़कियों के साथ हमेशा ही होता है ,वो ताकत की मुरीद रहती है ,वो हमेशा ही चाहती है की उनका प्रेमी उन्हें बेहद प्यार करे,और आराम से प्यार करे रोमांटिक हो , लेकिन एक स्थिति में वो उसे अपना मालिक बनाना चाहती है ,वो अपने को सौप देना चाहती है ,लेकिन इसे वो अपने प्रेमी पर छोड़ देती है की वो उसे पूरा ले ले ,उसपर अपना अधिकार जमाये …

तभी एक आवाज फिर से आयी .

“ओह जोर से जोर से जोर से “

अजय से अब नही रहा गया

“चलो यहां से उन्हें ही करने दो जो करना है “

वो खुसबू का हाथ पकड़े खड़ा हुआ ,खुसबू की आंखों में अजय को देखकर पानी आ गया उसे लगा जैसे की वो उसे अपना बनाने ले जा रहा हो ,वो अब उसका हो,अजय ने पहली बार उसपर इतना अधिकार जताया था वो उसके हाथो को खीचकर उसे उठा रहा था ,और फिर उसे खीचकर अपने साथ बाहर ले जा रहा था,खुसबू तो उसी नशे में खोई हुई ,जाते जाते खुसबू ने उस झुरमुट के तरफ देखा जिधर से आवाज आ रही थी,कुछ भी दिखाई नही दे रहा था लेकिन उसने उन कपड़ो को जरूर देख लिया जो की उन झाड़ियों से बाहर को फेके गए थे,जाने क्यो उसे लगा की इन्हें कही देखा है,अचानक उसे कुछ याद आया उसकी आंखे चौड़ी हुई लेकिन फिर उसे अपने ही ख्याल पर हँसी आई ,ऐसा थोड़ी ना होगा ,वो हल्के से हँसी और गार्डन से बाहर की ओर चल दी ,गार्ड ने उन्हें जाते देखा वो खड़ा हो गया ,उसे समझ आ गया की ये तो वो नही है जो चिल्ला रहे है,अजय ने एक बार गार्ड को देखा लेकिन उसने कुछ भी नही कहा ,गार्ड अपनी खड़ा होकर उसे सलाम करता है,अजय कुछ रिएक्शन दिए बिना ही वहां से चला जाता है……...

 
किशन की शादी को कुछ ही दिन बचे थे,सभी लोग पूरे जोश से इसकी तैयारी में लगे थे,खुसबू अब अक्सर ही इनके हवेली में आया करती थी,कभी कभी रात भी सोनल के साथ ही बिताया करती थी,अजय के करीब जाने का कोई भी मौका वो नही छोड़ती,अजय के दिल में उसके लिए प्यार तो था लेकिन वो अब भी बहुत असमंजस में था,वो सोनल और नितिन के रिस्ते को लेकर भी बहुत असमंजस की स्थिति में पड़ा हुआ था ,आखिर उसने सोनल से बात करने का फैसला किया…..

रात होने को थी और अजय ने सोनल को अपने कमरे में बुलाया था,खुसबू उसे बता चुकी थी की उसने अजय को सब सच सच बता दिया है,

सोनल के मन में भी थोड़ा डर जरूर था,

“आओ सोनल “

अजय अभी एक्सरसाइज कर रहा था,सोनल आकर उसके पास ही खड़ी हो गई,उसने उसके बदन पर एक नजर डाली ,बालो से भरा उसका चौड़ा सीना पसीने से चमक रहा था,भुजाए अभी अभी भार उठाने की वजह से फड़क रही थी,नशों में खून तेजी से दौड़ रहा था,जिससे उसकी नशे फूल सी गई थी,चौड़ा मस्तक तेज से दमक रहा था,सोनल उसे मोहित सी देख रही थी,अजय बस एक छोटी सी निकर डाले हुआ था,उसका पूरा गठीला जिस्म सोनल के सामने था,

‘वाओ “ उसके मुह से निकला

अजय भी उसकी तरह देखकर मुकुराय ,वो पास ही खड़ी थी ,तभी निधि भी कमरे में आ गई वो अपनी आदत के अनुसार एक झीनी सी नाइटी में थी अंदर कुछ भी नही पहनने के कारण उसके मदमस्त भरे पूरे जिस्म का हर भाग उस पारदर्शी नाइटी से झांक रहा था,

सोनल उसे देखकर और भी हैरान रह गई

“ये क्या पहन कर घूम रही है ,इतनी बड़ी हो गई है पर अकल बिल्कुल नही आयी है “

सोनल ने निधि को डांटा

“मैं कौन सा बाहर घूम रही हु और मैं तो रोज यही पहनती हु ,आप भी तो अपने रूम में यही पहन के रहती हो ,”

वो अपनी चिरपरिचित मासूमियत से बोली .अजय के चहरे में एक मुस्कान आ गया ,

“अरे तो भी भइया के सामने ???”

वो हल्के से बोली

“अच्छा आप विजय भइया के साथ ऐसे ही सोती हो तो …”

निधि झँझला गई ,सोनल को भी होश आया की ये क्या बोल गई ,अजय ने उसे एक भरी निगाह से देखा लेकिन वो उसे क्या बोलता,वो खुद भी तो निधि के साथ जिस्म के रिस्ते में उतर गया था….

निधि आगे बढ़कर अजय के गले से लग गई,उसकी पूरी नाइटी अजय के पसीने से गीली हो गई थी,लेकिन वो उसे नही छोड़ रही थी ,सोनल बस उसे देखे जा रही थी,वो दोनो के लिए तो ये नार्मल बात थी लेकिन सोनल जो उसे देख रही थी उसे इसमें एक मादकता दिखी ,दो जिस्म लगभग नंगे एक दूसरे से लिपटे थे ,निधि ने अपने होठो को अजय के होठो के पास किया और अजय ने उसे अपने होठो में भर लिया,थोड़ी देर तक वो एक दूसरे को यू ही चूमते रहे ,सोनल को आभास हुआ की वो भी विजय के साथ यही करती है,आज उसे लगा की शायद भाई बहन के रिस्ते में वो बहुत आगे निकल गए जितना नही निकलना चाहिए था,ये अहसास उसे भी अभी हुआ,खुद को अहसास कभी भी नही होता लेकिन दूसरे को देखने से लगता था की ये तो कुछ ज्यादा हो रहा है,अजय ने उसके चहरे के भाव पड़े और उसे अपनी ओर बुलाया,वो काँपती हुई अजय के पास आई ,आज उसे इन क्रियाओं में भाई बहन का प्यार नही दो देह का मिलान दिख रहा था,

अजय ने उसे उसके कमर से पकड़ा और उसे अपनी ओर खिंच लिया,वो उससे सट गई,उसकी सांसे एक अनजाने डर से तेज हो गई थी,अजय ने अपनी गर्दन नीचे किया और उसके होठो को भी अपने होठो से लगा लिया ,सोनल के लिए ये थोड़ा मुश्किल था,वो अभी प्यार की उस संवेदना में नही थी जंहा से उसे ये सब अच्छा लगता लेकिन वो अजय को ना भी नही कह पा रही थी,दोनो के होठ मिले निधि उनसे थोड़ी अलग हुई और बिस्तर में जाकर लेट गई ,यहां अजय का हाथ सोनल की कमर में गया और वो उसे और भी करीब खिंच लिया,अजय को ना जाने क्यो सोनल पर बहुत प्यार आ रहा था,उसे नितिन की वजह से ऐसा लग रहा था की वो उससे अलग हो रही है ,अजय को सोनल के लिए ऐसे ख्याल कभी भी नही आये थे,वो सोनल की आंखों में देखता है,

सोनल भी डरी हुई सी उसके आंखों में देखने लगी,लेकिन जैसे ही उनकी आंखे मिली उसका सारा डर जाता रहा,अजय की आंखों में उसके लिए अथाह प्यार था,सोनल को अपनी गलती का अहसास हुआ ,उसका भाई उसे बेहद प्यार करता था,उसके मन में कोई भी पाप उसके लिए आ ही नही सकते थे,सोनल की आंखे नम हो गई थी ,अजय उसकी आंखों के पानी को अपने होठो से पी गया ,

“i love you भइया,मुझे माफ कर दो “सोनल रोती हुई अजय से लिपट गई ,अजय को समझ नही आया की आखिर वो ऐसा क्यो बोल रही है,

वो उसके बालो को सहलाने लगा,

“क्या हुआ मेरी जान “

“कुछ नही भइया आज पहली बात मेरे दिल में आपके लिए गलत ख्याल आया “अजय फिर से कंफ्यूज हो गया था,सोनल उसके छाती के बालो में अपने हाथ फेरने लगी

“सोनल मैंने तुम्हे कुछ बात करने बुलाया था,”

“जी भइया “

“तुम बैठो मैं नहाकर आता हु “

वो बाथरूम में घुसा साथ ही निधि भी दौड़कर उसके साथ घुस गई,सोनल को ये देखकर हँसी आ गई ,वो अपनी आंसुओ को पोछते हुए बिस्तर में बैठ गई,कुछ देर बाद अजय और निधि बाहर आये,निधि एक नए नाइटी में थी शायद वो उसे पहले से बाथरूम में रख रखा था,अजय भी एक टॉवेल में बाहर आया और एक निकर उठाकर उसे पहनने लगा,ये सब वो अपनी दोनो जवान बहनों के सामने कर रहा था,लेकिन ना तो उसके मन में कोई बात आयी ना ही उन दोनो के दिमाग में ,

वो फिर से बिस्तर में बैठा,

“सोनल मैं तुमसे बहुत प्यार करता हु और मुझे तुम्हारे और नितिन के बारे में पता चला ,मुझे इससे कोई भी परेशानी नही है लेकिन क्या तुम दोनो किसको लेकर स्योर हो ..”

“भइया इसका क्या मतलब हुआ हम एक दूसरे से प्यार करते है ,और एक दूसरे से शादी भी करना चाहते है,”

“लेकिन तुम दोनो भाई बहन हो ये जानते हुए भी “इस बार अजय थोड़ा गंभीर था,और सोनल भी ,सोनल के आंखों में कुछ आंसू आ गए थे,उसने अपना मन दृढ़ किया जैसे वो कुछ निश्चय कर ली हो ,अजय निधि और सोनल के बीच में लेटा था वही निधि उससे लिपटी हुई लेटी थी जबकि सोनल उसके दूसरी ओर बैठी थी,वो उसके और पास गई उसके सीने में अपनी हथेलि रखी ,और उसे सहलाने लगी

“भइया हम सगे भाई बहन तो नही है ना,और अपने ही तो कहा था की मैं जिससे भी कहु आप उससे मेरी शादी करोगे,मुझे आपपर पूरा भरोसा है भइया की आप मेरा साथ दोगो,और अगर आप ये सोच रहे हो की …………..”

 
सोनल थोड़ी देर को चुप हो गई ,अजय अब भी उसके चहरे को देख रहा था वही निधि को जैसे कुछ मतलब ही नही था वो बस आंखे बन्द किए सोई थी,

“कि भाई बहन है तो हमारे बीच सेक्स कैसे होगा,तो भइया दिल में अगर प्यार हो तो जिस्म का मिलान पाप नही होता,”

वो एक ही सांस में बोल गई,”

सोनल इतना बोलकर उसके सीने में अपने सर को टिका दिया

“मैं जानती हु भइया,समाज की मुझे कोई भी चिंता नही है ,आप सबसे लड़ जाओगे मेरे लिए “वो सुबकने लगी अजय ने उसे उठाया और अपने ऊपर खिंच कर उसे गले से लगा लिया ,वो अब भी सुबक रही थी ,अजय उसके बालो को सहला रहा था,

“नही मेरी जान मुझे समाज की नही तुम्हारी चिंता है,और चिंता है इन दो परिवारों को जो इतने सालो की दुश्मनी के बाद आज जाकर मिले है,

“मैं जानती हु भइया ,लेकिन अगर आप साथ हो गए तो कोई भी कुछ नही कहेगा,मुझे लगता है सभी मान जाएंगे”

“ह्म्म्म,तो तेरी भी शादी किशन के साथ ही कर दे “

सोनल का सुबकना अचानक ही बन्द हो गया,वो उठी अजय के चहरे में एक मुस्कान थी ,उसे देखकर उसके होठो में मुस्कान और चहरे में शर्म आयी वो उसे एक मुक्का अजय की छाती में लगाई ,और फिर से उससे लिपट गई,

“भइया एक चीज बोलू ,”

“हम्म “

“आप बुरा मत मानना लेकिन मेरे और विजय के बीच भी सेक्स हो गया,हम पता नही कैसे ये कर बैठे,आज जब आपको और निधि को यू किस करते देखा तो लगा की हमने शायद बहुत बड़ी गलती कर दी ,भाई बहन के प्यार का ये मतलब तो नही की जिस्म की आग बुझाई जाए,”सोनल फिर से रो रही थी और वो अब उठकर बैठ गई थी,वो अजय के चहरे को देख रही थी वो बोलते रही ..

“भइया आपकी कसम की हमारा ये इरादा बिल्कुल भी नही था,हम तो बस एक दूसरे को प्यार करते है जैसे की आप और निधि ,लेकिन ना जाने ऐसा क्या हुआ की हमे समझ ही नही आया की क्या हुआ और हमारे जिस्म मिल गए …”

अब अजय क्या बोलता वो खुद भी शॉक था,उसे भी समझ नही आ रहा था की जो वो निधि के साथ प्यार बोलकर करता है क्या वो गलत है या सही ,इसी गलत सही के फेर में सालो तक वो निधि से अलग रहने की कोसीसे करता रहा था,लेकिन वक्त के सामने किसीकी चलती है जो अजय की चलती ,वो चुप ही था ,उसे समझ नही आ रहा था की क्या कहे गुस्सा हो जाय या और कुछ ,हा उसके दिल में एक अजीब सा दर्द जरूर था,जो की एक बेचैनी थी या कोई तमन्ना या की कोई सपना क्या था …..??????

“अरे पागल उसे सेक्स नही प्यार करते है समझी आप भी ना दीदी,और ये मैं और भैया रोज ही करते है…. “

निधि मचलते हुए कह गई ,वो अजय के बांहो में मचली ,उसके आंख अब भी बन्द ही थे….लेकिन ये सुनकर सोनल का रोना बिल्कुल ही बन्द हो गया,अब वो और अजय दोनो ही शॉक थे ,दोनो कभी एक दूजे को देखते तो कभी निधि को ,शायद ये निधि को भी समझ आ गया था वो ऐसे कूदकर उठी जैसे कभी सोई ही नही हो ,

“सच्ची तो कह रही हु”उसने फिर से कहा ,और दोनो को देखने लगी,अजय बिल्कुल ही नर्वस हो गया था,लेकिन सोनल के होठो में एक मुस्कान आ गई

“ओह भइया ऐसी बात है तभी आप खुसबू से दूर भगते हो ,अपनी सगी बहन के साथ तो सबकुछ कर सकते हो और मामा की लड़की आपकी बहन हो गई उससे दूर रहना चाहते हो “सोनल के चहरे में अभी भी मुस्कान थी

“मेरे भैया को कुछ भी मत बोलो दीदी ,उन्होंने जो भी किया मेरे कहने पर किया और जो भी ये गलत हो तो वही सही मैं अपने भइया का साथ कभी नही छोड़ने वाली और दुनिया के नियमो की तो मा की …. “निशि इतना बोलकर ही रुक गई

अजय अब भी कुछ नही बोल पा रहा था,

“सोनल मुझे माफ कर दे ,लेकिन पता ही नही चला की ये कब हो गया,और तुझे पता है की मैं अपनी बहनों से कितना प्यार करता हु मैं उनके बारे में बुरा सोच भी नही सकता ….”

अजय की आंखों में भी पानी आ गया था ,वो जानता था की जिस परिस्थिति में ये सब हुआ था वो गलत नही थे लेकिन समाज की बनाई रिवाजो के सामने उसे अपने द्वारा किया काम गलत लगने लगा था,

सोनल उसके माथे में अपना हाथ फेरती है,

“मैं समझ सकती हु भइया ,प्यार की क्यो सिमा नही होती सीमा तो रिश्तों की होती है,जब प्यार रिश्तों के आगे निकल जाय तो वो मर्यादा का बंधन लांघ सकती है,मेरे और विजय के साथ भी यही हुआ जो आपके साथ हुआ ,अब ये गलत है या सही मुझे नही पता लेकिन जो है वो बस है….”

अजय ने बड़े प्यार से सोनल को देखा ,

“तो निधि आज हम दोनो मिलकर भइया से प्यार करेंगे “सोनल की बात से निधि खुस हो गई लेकिन अजय को जैसे ही ये बात समझ आयी

“नही पागल हो क्या “

“भइया हम तो प्यार करने की बात कर रहे है आप तो गलत समझ लिए “

सोनल ने मुस्कुराकर शरारत से कहा और दोनो बहन अजय के ऊपर कूद गए ,अजय भी हँसता हुआ उनसे खेलने लगा,लेकिन आज कोई भी सेक्स के मूड में नही था वो बस मस्ती कर रहे थे…………..

पूरा घर सजा था,चारो ओर खुशियो की बारिस हो रही थी,किशन की शादी की रस्मे शुरू हो चुकी थी ,किशन की बारात ठाकुरो के हवेली से निकल कर ततिवारियो के हवेली में जानी थी,गाजे बाजे से बारात निकली ,पूरा परिवार झूम रहा था,

बारात का स्वागत और हँसी ठिठोली में समय बीत रहा था,शादी की रस्मे जोरो पर थी ,अजय ने एक नजर खुसबू को देखा,सचमे ऐसा लग रहा था जैसेकि स्वर्ग से कोई अप्सरा उतर आयी हो ,घाघरे चोली में लिपटी हुई वो हुस्न की मलिका सुमन के साथ जब बाहर निकली तो अजय बस उसे ही देखता रह गया,खुसबू की नजर जब अजय पर पड़ी तो वो भी शर्मा गई ,आज पहली बार था जब अजय खुसबू को इतने प्यार से देख रहा था,

मेहमानों में कुछ खास लोग भी आने शुरू हो गए थे,मुख्यमंत्रि जी डॉ चुतिया के साथ बाते कर रहे थे,विपक्ष के नेता भी साथ ही थे,तभी अजय उनको जॉइन करता है ,

“बधाई हो अजय अब तो तुम भी राजनीति के दंगल में आ गए “

अजय के चहरे में एक कुटिल सी मुस्कान आयी उसे इन सीनियर नेताओ से बहुत कुछ सीखना था ,वो जंहा बाहर एक दूसरे को काटने में लगे होते है वही जब दूसरे वो फुरसत में एक दूसरे से मिलते है तो हँसी ठिठोली में समय बिताते है,इन्हें देखकर कौन कह सकता था की जो दो लोग सामने खड़े थे वो एक दूसरे के राजनीतिक रूप से कट्टर दुश्मन थे ,और अब इनके दुश्मनों में एक नाम अजय का भी था,

“बस आप लोगो की कृपा है अंकल ,आप लोग अगर समाज के लिए कुछ बुनियादी काम करते तो शायद हम जैसे लोगो को राजनीति में आने की जरूरत ही नही पड़ती “

अजय की बात सुनकर डॉ हँसने लगा ,

“मंत्री साहब अब इससे बच कर रहिए गा,कम समय में ही बहुत कुछ सिख लिया इसने “

सभी हँसने लगे .

“अरे भई राजनीति तो इसके खून में है,राजाओं के वंसज है ,और इसके दादा जी, वाह कमाल के राजनेता थे ,ऐसे सच कहा डॉ इसने तो हम दोनो पार्टीयो को डरा ही दिया है ,लेकिन बेटा राजनीति में सिर्फ चुनाव जितना ही काफी नही होता बल्कि सत्ता में आकर ही समझ आएगा की असली मुश्किलें कहा है “

मुख्यमंत्रि बंसल साहब मुस्कुराते हुए बोले ,

“अंकल आप कुर्सी खाली तो कीजिये फिर आप तो है ना हमे मार्गदर्शन देने के लिए ,हम भी सत्ता चला ही लेंगे …”

अजय ने ये बात हस्ते हुए कही और सभी फिर से हँस पड़े

“अब ये पक्का राजनेता बन गया है “

बंसल साहब ने टिप्पणी की ,

तभी बाकी के बुजुर्गों ने दोनो नेताओ को अपने पास बुला लिया ,अब डॉ और अजय ही रह गए थे,

“यार अजय इस बार लगता है की तुम्हारी पार्टी कुछ सीटे तो जीत ही जाएगी लेकिन तुम्हे गठबंधन करना पड़ेगा ,क्यो ना तुम बंसल की पार्टी से ही गठबंधन कर लो ,और साथ ही चुनाव लडो”

“नही डॉ साहब गठबंधन का मतलब होगा की हमे उनके सामने झुकना पड़ेगा ,चुनाव तो हम अकेले ही लड़ेंगे कम से कम हमे हमारी ताकत का अंदाजा तो लग ही जाएगा ,और चुनाव आयोग को पार्टी की रूपरेखा भी भेज दी है कुछ ही दिनों में चुनाव चिन्ह और पार्टी का नाम भी डिसाइड हो जाएगा ,2-4 सीट ही मिले लेकिन अपने दम पर मिले तभी काम की है ,उसके बाद देखेंगे अगर गठबंधन का मौका मिला तो दोनो पार्टीयो में जो हमारे एजेंडे पर काम करने को तैयार होगा उसका ही साथ देंगे “

डॉ अजय की समझ से बहुत खुस दिख रहे थे,

“लेकिन अगर तुम बंसल की पार्टी से अभी गठबंधन करोगे तो 10 से 12 सीटे तुम्हे मिल सकती है “

“लेकिन बंसल अंकल इतनी सीटे हमे क्यो देंगे ,मेरे ख्याल से 4-5 सीट देने को ही तैयार होंगे “

“बंसल अक्लमंद आदमी है वो अगर 10 सीट भी तुम्हे दे देगा तो उसका कोई नुकसान नही होगा ,तुम्हारे इलाके से तो उसका जितना अभी लगभग नामुमकिन है ,4 सीटे तो तुम्हे आराम से केशरगढ़ क्षेत्र से मिल ही जाएंगी ,लेकिन बाकियों ने मुकाबला तो बंसल और तुम्हारे बीच का ही होगा ,इससे उसकी 20-25 सीटो पर बुरा असर पड़ सकता है ,यहाँ सिर्फ जितना ही इम्पोर्टेन्ट नही होता ,बहुमत भी तो चाहिए और अगर उन सीटो में तुम्हारे झगड़े से अगर दूसरी पार्टी को फायदा पहुचा तो सीधे से बंसल के बहुमत को नुकसान होगा ,ऐसे भी 10 सालो से ये मुख्यमंत्रि है इसका इसबार जितना बड़ा ही मुश्किल लग रहा है ,जनता भी इससे पक चुकी है ऐसे में कोई नई पार्टी जिसके समर्थक उसके ही लोग हो ,बंसल के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकती है ,वो तो चाहेगा की तुम उसके साथ आकर चुनाव लड़ो ,और निधि या धनुष को कोई मंत्रालय भी दे dega …….

अजय सोच में पड़ गया लेकिन उसने बहुत ही जल्दी फैसला भी कर लिया ,

 
“नही डॉ कम सीट ही मिले लेकिन चुनाव तो अकेले ही लड़ेंगे ,उसके बाद अगर सरकार को गठबंधन की जरूरत पड़ी तो डील कर लेंगे ,4 सीट के साथ भी मैं अपने भाई बहन को मंत्री बना सकता हु ,क्योकि आखरी बहुमत तो हमारे होने से ही होगा ,मुझे ये असंका है की इस बार बहुतमत किसी को नही मिलेगा ,और हम गेम चेंजर हो जाएंगे “

डॉ अजय की बात सुनकर हँसने लगता है ,

“ठीक है ठीक है लेकिन जेम चेंजर बनने के लिए कम से कम 10 सीटे होनी चाहिए ,मेहनत शुरू कर दो 20 सीटे चुन लो जिनमे तुम्हारे जितने की संभावना सबसे ज्यादा हो ,जंहा तुम्हारा रुतबा हो या तुम्हारा व्यपार फैला हो ,इनमें से 10 भी तुम्हारे हाथ लगे तो तुम जेम चेंजर हो जाओगे ,फिर तुम्हारे बिना कोई भी सरकार नही बना पायेगा …”

अजय डॉ एक दूसरे की बातो से सहमत होते है,तभी कोई डॉ को बुलाने आ जाता है …………….

सभी शादी की रश्मो में बिजी हो गए थे,अजय अकेले में छत में जाकर बैठा था,पंडित जी के मंत्रोच्चार की ध्वनियाँ वातावरण में गूंज रही थी,तभी उसे किसी के पायल की आवाज आयी,वो चौका क्योकि वो खुद सबसे छिपकर छत में जाकर बैठा था,और ऊपर से नीचे गार्डन में हो रहे फंक्शन को देख रहा था,वो पलटा

“अरे तुम यहां ??”

“आप भी तो यहां है “खुसबू मुस्कुराई साथ में अजय भी

“मेरा पीछा कर रही हो “

“वही समझ लीजिये “

अजय ने फिर से उसे ऊपर से नीचे तक देखा ,जिससे खुसबू के दिल की धड़कन बढ़ गई वो शर्म से नजर नीचे किये अजय के पास आकर खड़ी हो गई ,अजय ने उसका हाथ पकड़ा और पास ही बिठा लिया ,दोनो ही अब छत की बाउंड्री से पीठ सटाए बैठे थे,अजय के हाथ के स्पर्श ने खुसबू के शरीर में एक झुनझुनी सी दौड़ा दी ,

“ह्म्म्म अब बोलो क्यो पीछा कर रही हो मेरा “

“आप यहां अकेले क्यो बैठे है “

“पहला प्रश्न तो मैंने पूछा था ना “

“तो पहला उत्तर भी आप ही दे दो “खुसबू हल्के से हँसी,उसकी ये हँसी अजय के दिल के गहराइयों तक पहुच गई ,वो दिल से खुसबू को पसंद करता था,बस कुछ दीवारे थी जो सोनल से मिलने के बाद बहुत ही कमजोर हो चुकी थी ,

अजय ने खुसबू के हाथो को हल्के से सहलाया ,और फिर उसे अपनी ओर जोर से खिंचा ,खुसबू को इसकी अपेक्षा ही नही थी,वो सीधे अजय के ऊपर जाकर गिर गई,

“आउच क्या कर रहे है आप “

अजय ने उसे अपने बांहो के घेरे में भर लिया

“कुछ नही बस तुम पर हक जताने की कोसिस “

खुसबू के तो आनंद की सिमा ही नही थी ,जिसे वो इतने दिनों से चाहती थी ,और जो उसे मिलना लगभग नामुमकिन लग रहा था आज वो हो रहा है,अजय उसपर हक जताना चाहता है,

खुसबू की खुसी का बयान उसकी आंखों ने किया,वो बहने लगे,वो अपने सर को अजय की छाती में गड़ा कर सुबकने लगी ,अजय का हाथ उसके सर पर गया और वो उसे सहलाने लगा ,खुसबू ने अपनी बांहो फैलाई और अजय को जकड़ लिया,

अजय उसके गालो में अपनी उंगलिया फिराने लगा

“ए देखो मुझे “

खुसबू ने अपना सर ना में हिलाया

“अरे देखो तो सही “

फिर से ना में सर हिलाया

“क्यो ,क्या हुआ ?”

“ऊऊऊ न हु “

“बताओगी क्या हुआ “अजय अपने होठो को उसके कानो के पास ले जाकर हल्के से फूक मारी,खुसबू मचल गई वो सुबकते हुए भी हल्के से हँस पड़ी ,

“मत कीजिये ना “खुसबू मचलते हुए बोली

“अच्छा तो मैं जाता हु “

अजय उसे अपने से हटाने लगा ,

खुसबू ने सर उठाकर उसे देखा ,उसकी आंखे अब भी गीली थी

“रुक जाइये मत जाइये ……”वो उसे छोड़ने को तैयार नही थी

“अच्छा कर लीजिये जो करना है “इतना बोलकर वो फिर से अजय को जकड़ ली

“अच्छा क्या करू “

“जो अपना दिल चाहे …”खुसबू की आवाज थोड़ी धीरे थी ,वो तो बस अपने को अजय के सामने सौपना चाहती थी,वो अपना सर तक उसके सीने से हटाने को राजी नही थी ,होती भी कैसे जिसे इतने शिद्दत से चाहा था वो आज मिला था,

“अच्छा कुछ भी कर लू “अजय उसके कानो के पास जाकर कहता है

“ह्म्म्म मैं तो आपकी ही हु,बहुत पहले से मैंने खुद को आपको सौप चुकी हु ,आप ही मुझे अपनाने से इनकार कर रहे थे …”वो अजय के सीने में खुद को और भी जोरो से दबाती है,

“मैं आपकी हु और जीवन भर आपकी ही बनकर रहना चाहती हु ,मुझे अपना लीजिये “

खुसबू अब लगभग रोने लगी थी ,अजय उसका चहरा ऊपर उठता है जो वो उठाने नही दे रही थी वो अपना सर उसके सीने से अलग नही होने दे रही थी,जब उसका चहरा अजय के चहरे के पास आता है वो अजय उसके होठो में प्यार से एक किस कर लेता है

“मुझे माफ कर दो खुसबू ,मुझे समझ ही नही आ रहा था की आखिर मैं क्या करू,आई लव यु खुसबू ….”

खुसबू अपने आँखों में पानी लिए अजय को प्यार से देखती है वो उसे बहुत कुछ कहना चाहती थी ,अपना दिल उसके सामने चिर कर रख देना चाहती थी लेकिन कैसे ,मजबूरी में बस उसके होठ कांप रहे थे,और आंखों से आंसू बह रहे थे

……………………

 
“कुछ बोलो ना”अजय अब भी उसके बालो को सहला रहा था,

“उ हु ,मैं कुछ भी नही बोलूंगी बस ऐसे ही रहो ,सारी जिंदगी बस अब ऐसे ही बीत जाय,और मुझे कुछ भी नही चाहिए “

अजय ने उसे प्यार से देखा लेकिन उसका चहरा अजय के सीने में गड़ा हुआ था,वो उसके सर पर ही एक किस करता है,

“अच्छा चलो अब देर हो रही है सभी हमे ही ढूंढ रहे होंगे “

खुसबू फिर से ना में सर हिला देती है ,वो बिना कुछ बोले यू ही एक दूजे के चिपके हुए ना जाने कितने देर तक बैठे रहे,समय थम चुका था,बस धड़कने थी कोई जिस्म कही नही था,फ़क़त कुछ सांसे थी,और था वो अहसास एक दूजे के होने का,एक दूजे में खो जाने का …….

तभी किसी के पायलों की आवाज आने लगी दोनो अपनी दुनिया से बाहर निकले ,ही थे की सोनल ने दूर से उन्हें देख लिया,वो जल्दी से अलग हुए …

“ओहो ओहो अब चिपके ही रहो मुझे देख के अलग क्यो हो रहे हो “

खुसबू बुरी तरह से शर्मा गई थी वही अजय भी थोड़ा नर्वस हो रहा था,दोनो ही खड़े हो गए

“हम इन्हें कहा कहा ढूंढ रहे है और ये है की यहां प्रेम की पींगे हांक रहे है,ओहो क्यो मेरी खुसबू रानी “

सोनल जाकर खुसबू को छेड़ने लगी खुसबू घबराकर वहां से भागी,लेकिन खुसबू ने उसे पकड़ लिया और उसके चहरे पर एक किस कर दिया ,अजय ये सब देखकर सोनल के लिए प्यार से भर गया वो अपनी बांहे फैलाकर सोनल को उसमे आने का निमंत्रण देता है और सोनल दौड़ते हुए उसके सीने से लग गई ,खुसबू तो दौड़ कर बाहर चली गई ,और सोनल अजय के बांहो में थी,

“क्यो भइया आखिर हमे भाभी मिल ही गई “

“हम्म मेरी जान ,”

“तो लव यु वगेरह बोला की नही “

“जब दिल में ही प्यार हो तो क्या बोलना “

“अरे भइया बोलना भी जरूरी होता है बस प्यार करना ही नही बल्कि उसे जताना भी जरूरी होता है “

“ठीक है मेरी मा वो भी कर देंगे लेकिन अब नीचे चल सब ढूंढ रहे होंगे “

“हा भइया जल्दी चलिए “

नए नए प्यार का नशा ,वो खुमार वो खुसबू ,कुछ अलग ही फिलिंग होती थी ,अजय खुसबू के प्यार की खुसबू में खोया हुआ था ,और ये बात हवा में बह रही खुसबू जैसे चारो ओर फैलाने लगी थी,लगभग सभी बच्चों तक ये बात पहुच गयी और सभी इससे बहुत खुस थे ,दोनो ही एक दुसरो को रह रह कर देखते और खुसबू इससे शर्मा जाती और सोनल उसे छेड़ने का कोई भी मौका नही छोड़ रही थी,सुमन की बिदाई का समय आ गया था ,रोने वाला कोई था ही नही ,क्योकि सभी इस रिश्ते से बेहद खुस थे ,लेकिन उसकी मां की आंखों में आंसू आ ही गया ,

ठाकुरो की हवेली में किशन का कमरा फूलो से सजाया गया था,ऐसे तो किशन ने अब तक ना जाने कितनी लड़कियों के साथ सेक्स किया था लेकिन आज उसका दिल जोरो से धड़क रहा था,ये बात भी स्वाभाविक थी क्योकि सुमन उसका प्यार था,और ये पहली बार था …..

तो धक धक करते जिया के साथ वो छत में टहल रहा था,उसकी इतनी हिम्मत नही हो रही ही की वो अपने कमरे में जाय

तभी उसे किसी के आने की आहट हुई अजय उसके पास आया था ,

उसे देखते ही वो उसके पास चला गया ,अजय ने अपने चहरे में एक मुस्कुराहट लाते हुए उससे आंखों से ही पूछ लिया की क्या हुआ ,

“पता नही भैया बहुत घबराहट हो रही है”

अजय की मुस्कान चौड़ी हो गई

“ये तेरे साथ पहली बार तो नही है “

“नही भइया वो बात नही है पर ना जाने क्यो बहुत ही घबराहट हो रही है,ऐसा लग रहा है जैसे की ये पहली बात हो ,पहले कभी ऐसे दिल नही धड़का था,सांसो ने तो जैसे आंदोलन कर रखा है,समझ नही आ रहा की ये क्या हो रहा है “

अजय उसके कंधे पर प्यार से अपना हाथ रखकर कहता है,

“अरे पगले तेरा ये हाल है ओ जरा सोच की उसका क्या हाल होगा,ये स्वाभाविक है होता है ,और अगर तू ऐसे डरेगा तो उसे कैसे समझयेगा ,अब तेरी शादी हो चुकी है मतलब की वो अब तेरी जिम्मेदारी है ,उसका सुख दुख अब सब तुझसे ही होगा ,अब चल गहरी सांसे ले और नीचे चल ,सब ठीक होगा “

अजय के पास होने के अहसास से ही किशन के दिल में हिम्मत आ गई वो 2-4 गहरी सांसे लेकर

“चलो भइया किला फतह करते है “

अजय की हँसी छूट गई

“किला मुझे नही तुझे फतह करनी है ,चल अब नीचे “

किशन कमरे में आया तो चौक गया ,सभी औरते वही जमावड़ा डाले बैठी थी,उसका पूरा जोश ही ठंडा होने लगा ,सभी उसे देखते ही मजाक उड़ाने लगी वो बेचारा पसीने से भीग चुका था,लेकिन सभी उसकी हालत देखकर उसपर थोड़ा तरस खाकर वहां से जाने लगे लेकिन रानी और निधि अब भी वही थी ,किशन ने दोनो को सवालिया निशान से देखा ,

“ऐसे कैसे चले जाएंगे भइया,हमारे रश्म के पैसे कहा है “

रानी के चहरे पर मुस्कान थी उसे पता था की किशन ने ऐसा कभी सोचा भी नही होगा,वो सच में घबरा गया …

“ये ये कैसा रस्म है मुझे तो किसी ने कुछ बताया है नही “

“ओहो देखा भाभीजी आपका पाला किस बुद्धू से पड़ गया ,अरे मेरे प्यारे भइया जी आज जब तक आप हमे हमारे मुह मांगे पैसे नही दे देते हम इस कमरे से नही जाएंगे “

किशन थोड़ी देर सोचा लेकिन उसके चहरे में एक मुस्कान आ गई

“अरे मेरी बहनों तुम्हारे लिए पैसा क्या मैं अपनी जान भी दे दु “

“अभी के लिये तो पैसे ही काफी है ,भइया जल्दी दो मुझे बहुत नींद आ रही है “इस बार निधि के अपने मासूमियत वाले अंदाज में कहा ,

“तो अपनी भाभी के साथ सो जा ना ,ऐसे भी तुम्हारे यंहा रहने से मुझे कोई परेशानी नही है “

“अच्छा तो मैं तो यंही सो रही हु गुड नाइट “निधि बिस्तर में मुह गड़ाकर सो गई ,

“अरे ये क्या कर रही है ,तुझे कहा था ना की जब तक भाई पैसे ना दे यही रहना और तू यहां सोने लगी आज इनकी सुहागरात है पगली ,और अब ये कमरा भाभी जी का है हमारा नही “रानी निधि को हिलाते हुए बोली ,किशन उसके पास आकर बैठ गया ,वो सुमन के बाजू में ही बैठी थी ,सुमन अभी दुल्हन के जोड़े में सिकुचाई हुई पैर मोड़कर बैठी हुई थी उसे देखकर लगता ही नही था की ये इस घर में इतने दिनों से रह रही थी,किशन रानी के बाजू में बैठ गया ,निधि अपनी आंखे खोले उन्हें देख रही थी ,किशन ने रानी के बालो को अपने हाथो से सहलाया ….और उसे गौर से देखने लगा ,पता नही क्यो लेकिन रानी की आंखों में उसका स्पर्श पड़ते ही आंसू आ गए ,वो अपने भाई की खुसी से बहुत ही खुश थी पर उसे व्यक्त नही कर पा रही थी ,कभी किशन एक आवारा सा लड़का हुआ करता था इस लड़की के प्यार ने उसे क्या से क्या बना दिया,

“मेरे पास जो भी है वो तेरा ही तो है पगली ,क्या चाहिए तुम दोनो को अगर तुम्हारे भाई के बस का रहा तो जरूर दूंगा ,लेकिन ये मत कहना की ये कमरा अब तुम्हारा नही रहा,या मैं तुम्हारा नही रहा तुम्हे यंहा रहना है तो यही रहो ,और मैं तो जीवन भर तुमलोगो का रहूंगा,मुझे मेरी बहनों से दुनिया की कोई भी ताकत अलग नही कर सकती “

रानी के मुह से कोई बोल ही नही निकल रहे थे ,वो बस आंसू लिए अपने भाई को देख रही थी वो किशन से लिपट गई ….

“लव यू भाई,मुझे तुमसे कुछ भी नही चाहिए और मुझे पता है मेरा भाई मुझसे कितना प्यार करता है मैं आज बहुत खुश हु भाई ,मेरे भाई को उसका प्यार मिल गया …”

वो दोनो थोड़ी देर तक एक दूसरे से चिपके रहे ,तभी निधि बोल पड़ी

“भइया मुझे तो चाहिए “

“तू बोल तो सही मेरी प्यारी गुड़िया को क्या चाहिये “किशन उसके बालो में हाथ फेरने लगा

“जल्दी से एक प्यारा सा भतीजा ….और इसमें देरी नही होनी चाहिए “रानी और निधि हँसने लगे वही सुमन बेचारी थोड़ी सकुचा गई ,वो जरूर घूंघट के नीचे मुस्कुराई होगी …

“अरे बहन अब इन्हें छोड़ देते है नही तो भतीजा आने में देरी हो जाएगी “रानी और निधि फिर से हँसे और किशन और सुमन को किस करके कमरे से निकल गए……..

 
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