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जुली को मिल गई मूली compleet

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Guest
जुली को मिल गई मूली--1

दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा एक और कहानी लेकर हाजिर हूँ आशा करता हूँ कि ये कहानी भी आपको बहुत पसंद आएगी --मैं जूली हूँ. मैं उस समय 14 साल की थी और क्लास 9 मे थी. मैं यहाँ बता दूं कि मेरा बेडरूम और मेरे पेरेंट्स का बेडरूम साथ साथ है. दोनो के बेडरूम के बीच मे एक कामन बाथरूम है जो दोनो तरफ से यूज़ हो सकता है. अगर मुझे बाथरूम जाना हो तो मैं उसको अपने पेरेंट्स के रूम मे खुलने वाले डोर को अंदर से लॉक करती हूँ और यही मेरे पेरेंट्स करते है, मेरे रूम की तरफ खुलने वाले दरवाजे को अंदर से लॉक करते है. यह बाथरूम हमारे दोनो बेडरूम के बीच आने जाने का एक अंदर के दरवाजे का काम भी करता था.

अब तक मैं सेक्स और चुदाई के बारे मैं पूरी तरह नही जानती थी. बस, केवल आधा अधूरा ही नालेज था.

एक दिन मैं स्कूल से आने के बाद घर मे अकेली ही थी. मेरे पेरेंट्स और मेरे चाचा हमारे फार्म हाउस पर हमारे एक वर्कर की बेटी की मैरिज मे गये थे. मुझे स्कूल जाना था इसलिए मैं नही गयी थी. सब लोग शाम को ही वापस आने वाले थे. मेरी मा ने मेरा खाना बना कर किचन मे रखा था और हम रात का खाना साथ मे ही खाने वाले थे.

मैं दोपहर को करीब 12 बजे स्कूल से आई और खाना खा लिया. मैं टाइम पास के लिए VCआर पर मूवी देख रही थी. ( उस समय VCड और डVड नही थे) कुछ समय बाद मैं उस मूवी से बोर होगयि और कोई दूसरी मूवी की कॅसेट तलाश करने लगी. अचानक, मेरी मा की अलमारी मे मैने एक बिना लेबल की कॅसेट देखी. मैने सोचा देखते हैं ये कौन सी मूवी है, शायद कोई अच्छी मूवी हो. मैने कॅसेट लगाई तो देखा कि वो तो एक ब्लू फिल्म थी. घर मे कोई नही था और मैं वो ब्लू फिल्म देखने लगी. थोड़ी ही देर मे मैं गरम हो गयी और मैने देखा कि मेरी पॅंटी गीली हो गयी है. मुझे समझ मे नही आया कि ये कैसे हो गया. मैं देख रही थी कि एक गोरा आदमी अपने बड़े और मोटे लंड से एक काली लड़की को अलग अलग पोज़िशन मे चोद रहा था. मैं और गरम होने लगी और अंजाने मे मेरी उंगली मेरी छ्होटी सी चूत पर पॅनी के उपर पहुँच गयी. मैने देखा कि मेरी पॅंटी काफ़ी गीली हो गयी है. मैने अपनी पॅंटी उतार दी और धीरे धीरे अपनी उंगली अपनी छ्होटी सी चूत पर फिराने लगी. उस समय मेरी चूत गीली, और गीली होती जा रही थी. उस समय मैं ये नही समझ पाई कि ऐसा क्यों हो रहा है? क्यों मेरी चूत गीली हो गयी है? क्या मेरा पेशाब निकल गया है? मैं थोड़ा डर गयी थी और मैने अपनी चूत पर से अपनी उंगली हटा ली. मैने VCऱ से कॅसेट निकाल कर वापस मेरी मा की अलमारी मे उसी जगह रख दी. मैं डर रही थी कि अचानक मेरी चूत से पानी कैसे निकलने लगा जो रुक ही नही रहा था. जैसे मैं अपने पेशाब को कंट्रोल कर सकती थी, वैसे वो पानी कंट्रोल ही नही हो रहा था और लगातार निकलता ही जा रहा था. मैं जल्दी से बाथरूम गयी और अपनी गीली पॅंटी धोने लगी क्यों कि मैं अपने पेरेंट्स के आने से पहले वोही पॅंटी सूखा कर वापस पहन ना चाहती थी ताकि उनको पता ना चले. मैने पेशाब किया और अपनी नन्ही सी चूत को साबुन से धोया. चूत धोने के बाद उसको टवल से पोन्छा. मुझे ये देख कर संतोष हुआ कि अब और पानी नही निकल रहा है मेरी चूत से.

दूसरे दिन जब मैं स्कूल गई और मेरी सबसे अच्छी फ्रेंड आंजेलीना को बताया कि कल मेरे साथ क्या हुआ था तो वो ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी. उसने मुझे बताया कि ये तो नॉर्मल चीज़ है और सब कुछ ठीक है. मैं जानती थी कि आंजेलीना को सेक्स का ज्ञान मेरे से ज़्यादा है क्यों कि वो मेरे से एक साल बड़ी है. मैने उसको पूछा कि उसको ये सब कैसे पता है तो उसने बताया कि उसने इसके बारे मे किताबो मे पढ़ा है. मैने उसको पूछा कि क्या उसने किसी के साथ चुदाई की है तो उसने बताया कि चुदाई तो उसने नही की है पर वो जानती है कि चुदाई कैसे होती है और एक लड़की अपने आप को कैसे सॅटिस्फाइ कर सकती है. मेरे कहने पर वो मुझे सिखाने को तय्यार हो गई.

स्कूल के बाद अपने घर पर बता कर वो मेरे साथ मेरे घर आई. लंच के बाद हम दोनो मेरे बेडरूम मे आ गई. उसने बेडरूम का दरवाजा अंदर से बंद किया और मैने बाथरूम का दरवाजा बंद किया ताकि मेरी मा मेरे बेडरूम मे बाथरूम के दरवाजे से ना आ सके क्यों कि लंच के बाद वो अपने बेडरूम मे आराम करने गयी थी.

आंजेलीना ने अपने सभी कपड़े उतार दिए और पूरी नंगी हो गयी मेरे सामने. उसने मुझे भी सभी कपड़े उतार कर नगी होने को कहा. मुझे शरम तो आई मगर उसको नंगी देख कर मैं भी अपने कपड़े उतार कर नंगी हो गयी.

आंजेलीना का बदन बहुत सेक्सी था. उसकी चुचियाँ मेरे से थोड़ी बड़ी थी. उसकी चूत भी मुझसे ज़्यादा उभरी हुई थी. उसकी गंद मेरी तरह गोल और कड़क थी. उसने मेरा चेहरा अपने हाथों के बीच ले कर मेरे होटो पर किस किया. हे भगवान...... ये मेरा पहला किस था. ऐसे लगा जैसे कोई बिजली सी दौड़ गई हो मेरे अंदर. मैने भी उसका पूरा साथ दिया किस करने मे.उसने मुझे अपनी चुचि चूसने को कहा. मैने उसकी एक निपल अपने मुँह मे लेकर चूसना चालू किया तो मुझे लगा कि उसकी निपल टाइट हो गई है. वो अपने मुँह से सिसकारियाँ निकालने लगी थी. उसने मुझे और ज़ोर से चूसने को कहा और मैं भी मज़े लेती हुई उसकी चुचि ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी. उसको मज़ा आने लगा और वो अपने मुँह से आनंद भरी आवाज़े निकालने लगी. तब उसने कहा मैं उसकी चूत पर हाथ लगाऊ. मैने देखा कि उसकी चूत भी गीली हो रही थी जैसे कल मेरी हुई थी. फिर मैने अपनी चूत को चेक किया पर मेरी चूत तो गीली नही हुई थी. मैने उस से पूछा तो उसने कहा कि अभी हो जाएगी गीली मेरी चूत भी. उसने मुझे पकड़ा और मेरे नींबू जैसे एक चुचि को मसलने लगी और दूसरी चुचि को अपने मुँह मे लेकर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी. मेरी चुचि मसलते मसल्ते उसके हाथ मेरे पूरे नंगे बदन पर रेंगने लगे. मैने महसूस किया कि मेरी निपल्स भी हार्ड हो गयी है और मुझे बहुत मज़ा आने लगा. अन्जाने मैं ही मेरे मुँह से आवाज़ें निकलने लगी थी. मैने महसूस किया कि मेरी चूत भी गीली होनी सुरू हो गई है और उस मे से कल की तरह पानी निकलना सुरू हो गया है. उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी चूत पर रखा. उसने कहा कि मैं उसकी चूत पर हाथ फिराऊ और उसके दाने को मसलूं. वो पहली बार था जब मैने फीमेल क्लिट की इंपॉर्टेन्स को जाना. मैने उसके क्लिट को मसलना चालू किया और उसने मेरी क्लिट को मसलना चालू कर दिया. मेरा बदन गरम होने लगा था. फिर उस ने अपने होठ मेरी चूत पर रख दिए और वहाँ से निकलने वाले रस को चाटने लगी. मैने उसको कहा कि ये गंदी बात है, ऐसा मत करो. नीचे से निकलने वाला पानी मुँह मे मत लो, तो उसने बताया कि ये गंदी चीज़ नही है. ये कोई पेशाब नही है. ये तो जवानी का रस है जो कि स्वाद भरा और सेफ है. उसने मेरी क्लिट को अपने मुँह मे दबाया और हे भगवान, कितना मज़ा आया मुझे लिख नही सकती. मैं जान गई कि वो एक बहुत ही उस्ताद चूसने वाली है. मेरी चुचियाँ और बदन कड़क हो गये और मैने उस से कहा ज़रा जल्दी जल्दी चूसो मेरी चूत. पता नही क्यों, मेरी गंद अपने आप उपर उठने लगी और मन ने चाहा कि वो मेरी चूत चबा जाए. मेरे बदन मे कुछ अजीब सा होने लगा और अचानक ही मैं झाड़ गई. मैने उसके सिर को अपनी टाँगो के बीच दबा लिया औट वो समझ गई कि मेरा हो गया है. मुझे ऐसा मज़ा पहली बार मालूम हुआ. उसने धीरे धीरे मेरी चूत का सारा रस चाट लिया. मैं तो अपने आनंद और मस्ती मे आँखें बंद कर के पड़ी थी और मज़ा ले रही थी. चुदाई से ये मेरी पहली पहचान थी और क्या शानदार परिचय हुआ मेरा चुदाई से. कहानी को छोटा रखने के लिए केवक इतना ही लिखूँगी कि मैने भी उसके साथ वोही किया जो उसने मेरे साथ किया था. उसको भी मैने पूरा पूरा मज़ा दिया अपने मुँह का उसकी प्यारी सी चूत पर.

हम दोनो ही नंगी बेड पर सोई थी और मैने उस से पूछा कि क्या मैं अभी भी वर्जिन हूँ? उस ने मुझे समझाया कि हम दोनो ही अभी तक कुमारी है. जब तक किसी मर्द का लंड हमारी चूत मे नही जाता है, हम वर्जिन रहेंगी. उसने मुझे आगे समझाया कि जब भी मैं गरम होने लगु, अपनी खुद की उंगली अपनी चूत मे डाल कर मज़ा ले सकती हूँ. ये बिल्कुल सेफ है.

उसको हमारे बाथरूम का सिस्टम पता था. उसने मुझे कहा कि मेरे पापा और मा काफ़ी सेक्सी दिखते है. वो शायद रोज़ ही चुदाई करते होंगे. उसने मुझे कहा कि अगर कभी मौका मिले तो मैं अपने पापा और मा को चुदाई करते हुए देखूं ताकि मैं असली वाली, और औरत - मर्द वाली चुदाई के बारे मे ज़्यादा जान सकु. मैने पूछा कि क्या ये ठीक होगा अपने मा बाप को चुदाई करते हुए देखना? उसने कहा कि इसमे कुछ भी ग़लत नही है. वो खुद अपने मा बाप को चुदाई करते हुए कई बार देख चुकी है और बहुत कुछ सीखा है. हम ने कुछ देर ऐसी ही बातें की और कुछ देर बाद वो अपने घर लौट गई. मेरे दिमाग़ मे एक ही बात थी, कैसे चोद्ते होंगे मेरे पापा मेरी मा को? कब मौका मिलेगा मुझे देखने का मेरे पापा - मा की चुदाई?

उसी रात को, जब मेरी नींद खुली और मुझे बाथरूम जाना था. मैं बाथरूम के अंदर गई और आदत के मुताबिक जैसे ही अपने पापा के बेडरूम की तरफ खुलने वाला दरवाजा लॉक करने वाली थी कि मैने अपनी मा - पापा के बेडरूम से आने वाली कुछ आवाज़ें सुनी. मैं समझ गई कि अंदर ज़रूर कुछ हो रहा है. ह... ओह्ह्ह...... हां...... जानू................... ओह........... की आवाज़ें आ रही थी. ज़रूर मेरे पापा मेरी मा को चोद रहे थे. मैने चाबी के होल से देखा कि उनके बेडरूम की लाइट ऑन थी मगर मैं कुछ देख नही पाई क्यों कि उनके बिस्तर की पोज़ीशन ऐसी थी कि बिना दरवाजा खोले पता नही चलता था कि बिस्तर पर क्या हो रहा है. मैं वापस अपने बेडरूम मे आई, लाइट ऑफ करी और बाथरूम का दरवाजा जो मेरे पापा के बैडरूम मे खुलता था ट्राइ किया. ओह, मेरी अच्छी किस्मत ! दरवाजा उनकी तरफ से बंद नही था. मैने धीरे से थोड़ा सा दरवाजा खोला और अपनी जिंदगी का सब से शानदार नज़ारा देखा. बेड रूम की लाइट ऑन थी. शायद मेरे मा - बाप को फुल लाइट मे चोदने का मज़ा आता होगा.

सबसे पहले मुझे अपनी मा की गोल गोल, गोरी गोरी गंद दिखी. वो ज़मीन पर खड़ी थी और बेड पर झुकी हुई थी. वो पूरी नंगी थी. मेरी तरफ उनकी शानदार गंद थी. मैने देखा कि मेरी मा की बॉडी कितनी शानदार और सेक्सी थी. मेरे पापा बेड पर बैठे हुए थे, उनका लंबा, मोटा और मज़बूत लंड उनके हाथ मे था. वो अपने लंड पर कुछ कर रहे थे. ( मुझे अब पता है कि वो अपने लंड पर कॉंडम लगा रहे थे. ) वो खड़े हो गये ज़मीन पर और मेरी मा के पीछे आए. एक हाथ से वो अपना लंड पकड़े हुए थे. उनका लंड लाइट मे चमक रहा था ( क्यों कि उस पर कॉंडम था). उन्होने एक हाथ मेरी मा की गंद पर रखा और उस से थोड़ा और पीछे झुकने को कहा. मैने सोचा कि वो मेरी मा की गंद मारने वाले है. मैं हैरान हो गई कि पहली बार किसी की चुदाई लाइव देखने का मौका मिला है, वो भी अपने मा - बाप की, जो कि मेरी मा की गंद मारने वाले है. ( मुझे अब पता है कि चूत को पीछे से भी चोदा जा सकता है) मेरी मा थोड़ा सा झुकी, अपनी टांगे चौड़ी की. मेरे पापा को मा की चूत नज़र आने लगी और उन्होने अपने लंड की टोपी मा की चूत पर रख कर एक धक्का दिया. उनका लंड मा की चूत मे उतरता चला गया. उन्होने अपने दोनो हाथो मे मा की गंद पकड़ रखी थी और अपना लंड मेरी मा की चूत मे अंदर बाहर करने लगे. मेरी मा की बड़ी चुचियाँ आगे - पीछे हिलने लगी क्यों कि मेरे पापा उनकी चूत मे अपना लंड अंदर बाहर करते हुए धक्के लगा रहे थे. उधर मेरी मा चुद रही थी और इधर मुझे मज़ा आ रहा था उनकी चुदाई देखने मे. मैं शायद बहुत किस्मत वाली हूँ जिसने अपने पापा को मा को चोद्ते हुए देखा. वो दोनो कुछ कह रहे थे जो मेरी समझ मे नही आया. पापा लगातार आगे पीछे हो रहे थे और मेरी मा चुद रही थी. अब वो ज़ोर ज़ोर से मेरी मा को चोद्ने लगे थे. मेरा हाथ अपनी छोटी सी चूत पर गया और मैने पाया कि वो फिर से गीली हो गई है. मैने अपनी चूत के दाने को टच किया तो बदन मे बिजली सी दौड़ गई और आग लग गई. मुझे लगा कि आनंद के मारे मेरे मुँह से आवाज़ निकल जाएगी. मैने अपना हाथ अपनी गीली चूत से हटा लिया और फिर से अपने मा - बाप की चुदाई देखने लगी. वो किसी जानवर की तरह पीछे से मेरी मा को चोद रहे थे ज़ोर ज़ोर से. अचानक उनकी स्पीड बढ़ गई और वो मेरी मा से चिपक गये. उन्होने मेरी मा की चुचियाँ हाथ मे लेकर दबानी सुरू करदी. मैं समझ गयी कि उनका हो गया है और मेरे पापा का चोद रस निकल गया है. मेरी मा धीरे से अपने पेट के बल बिस्तर पर लेट गयी और मेरे पापा उसके उपर थे. मेरे पापा का लंड अभी भी मेरी मा की चूत मे था.

मैं जैसे सपने जागी और पोज़िशन को समझा. मैने धीरे से दरवाजा बंद कर दिया बिना किसी आवाज़ के. मैं अपने बेडरूम मे आ गई और बाथरूम का दरवाजा अपनी तरफ से बंद करलिया. मेरी साँस फूली हुई थी जैसे मैं लंबी दौड़ लगा कर आई हूँ. मैने जल्दी से अपनी चड्डी उतार फेंकी जो कि पूरी तरह गीली हो चुकी थी. मैं अपने आप को रोक नही सकी और अपनी चूत को रगड़ने लगी. मेरी उंगलियों की स्पीड काफ़ी ज़्यादा थी क्यों कि मैं बहुत गरम हो चुकी थी अपनी मा की चुदाई देख कर. मैं पहले से काफ़ी गरम थी इस लिए जल्दी ही मैं अपनी मंज़िल पर पहुँच गई और मेरी चूत ने अपना रस निकाल दिया.

मैं कब सो गयी मुझे पता ही नही चला मगर सपने मे मैं अपनी मा को चुद्ते हुए देखती रही.

क्रमशः.......................................


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जुली को मिल गई मूली—2

गतान्क से आगे……………………………..

अब ये मेरा शौक हो गया था, या यूँ कहिए कि आदत हो गई थी कि मैं कोई भी मौका नही छोड़ती थी अपने मा बाप की चुदाई देखने का. मेरे पापा मेरी मा को वीक मे तीन - चार बार चोद्ते थे और जब भी वे बाथरूम का दरवाजा अपनी तरफ से बंद करना भूल जाते थे, मैं पहुँच जाती थी उनकी चुदाई देखने के लिए. अब तक मैं चुदाई के बारे मे काफ़ी जान गई थी. मैने अपने मा बाप को अलग अलग पोज़िशन मे चोद्ते हुए देखा था जैसे कि ब्लू फिल्म मे होता है. मैं जब भी मेरी मा को चुद्ते हुए देखती, अपनी चूत मे उंगली डाल कर अपने आप को शांत और ठंडी करती थी. मेरा भी मन करता था कि कोई मुझे भी ऐसे ही चोदे. मैने देखा कि मेरे पापा बहुत अच्छा चोद्ते है और एक औरत को सॅटिस्फाइ करना बहुत अच्छी तरह जानते है. मेरी मा बहुत सुन्दर है और उसका बदन अभी भी जवान औरत जैसा सेक्सी है. मैने देखा कि मेरी मा भी चुदाई मे मेरे पापा का पूरा साथ देती थी और चुदाई का पूरा मज़ा लेती है और पापा को पूरा मज़ा देती है. वो दोनो एक दूसरे को चोद कर बहुत खुस है. मैं जान गई थी कि ना तो मेरे पापा किसी और औरत को चोद्ते है और ना ही मेरी मा किसी और मर्द से चुद्वाती है. दोनो एक दूसरे से पूरी तरह सॅटिस्फाइ है और खुस है.

मेरी मा अपनी चूत को हमेशा सॉफ रखती है बिना बालों के. मेरे पापा भी अपने लंड पर बाल पसंद नही करते हैं. एक बार तो मैने पापा को मा की चूत शेव करते हुए भी देखा था. मेरे पापा का लंड करीब 7 इंच लंबा है और काफ़ी मोटा भी है. मैने जब भी उनका लंड खड़ा हुआ देखा, वो बहुत हार्ड और मज़बूत लगा..

मैने उनको हर पोज़िशन मे चोद्ते हुए देखा पर उनको मा की गंद मारते हुए कभी नही देखा. मुझे आंजेलीना ने बताया था कि कुछ मर्द लोग अपनी फीमेल पार्ट्नर की गंद भी मारते है जैसे कि उसके पापा मारते हैं उसकी मा की. मैं सोचती थी की गंद चोद्ना कैसा होता होगा. खैर............... ये मेरे लिए बहुत ही अच्छा था कि मेरे मा बाप लाइट ऑन रख कर चुदाई करते है और मैं हर चीज़ सॉफ सॉफ देख सकती थी. शायद वो सोचते होंगे कि उनकी प्यारी बेटी तो दूसरे बेडरूम मे गहरी नींद सो रही है. शायद इसी लिए वो बाथरूम के दरवाजे को अपनी तरफ से बंद करने पर ज़्यादा ध्यान नही देते थे क्यों कि उनकी चुदाई जब भी होती थी, आधी रात के बाद ही होती थी और शायद इसी लिए दरवाजे पर उन्होने ज़्यादा ध्यान नही दिया. उन को क्या पता कि उनकी छ्होटी प्यारी बेटी अब चुदाई को जान ने लगी है और उनकी ही चुदाई देखती है. आज उस बात को इतने साल हो गये, पर मैं अब भी अपने आप को रोक नही पाती उनको चोद्ते हुए देखने से.

मेरे पापा और मेरे चाचा दो ही भाई है. मेरे पापा और चाचा मे बहुत प्यार है. मेरे पापा क्यों कि बड़े भाई है, चाचा उनकी बहुत इज़्ज़त करते है. मेरे चाचा ने अभी तक शादी नही की है क्यों कि वो शादी नही करना चाहते. वो भी मेरे पापा की तरह बहुत हॅंडसम है.

मैं अपने मा बाप की अकेली औलाद हूँ. मेरे कोई भाई या बहन नही है.

मेरे चाचा का बेड रूम मेरे बेडरूम के सामने है. हमारे घर मे कुल पाँच बेड रूम है. तीन फर्स्ट फ्लोर पर, मेरे पापा का, मेरे चाचा का और मेरा. दो बेडरूम सेकेंड फ्लोर पर है जो कि गेस्ट बेडरूम है.

ड्रॉयिंग रूम, किचन डाइनिंग रूम और हमारा ऑफीस ग्राउंड फ्लोर पर है.

खैर.......... अब मैं असली बात पर आती हूँ. एक रात की बात है कि हमेशा की तरह मुझे मौका मिला और मैं देख रही थी कि मेरी मा के मुँह मे पापा का लंबा लंड है और पापा मा की चूत चाट रहे है. वो 69 पोज़िशन मे थे. वो दोनो मज़ा ले रहे थे पर मुझे लग रहा था कि उन से ज़्यादा मज़ा मैं ले रही हूँ. मेरा हाथ मेरी चड्डी के अंदर था और मैं अपनी चूत के साथ खेल रही थी. मेरी चूत से रस निकल रहा था और मेरी उंगलियाँ मेरी चूत के रस से गीली हो गई थी. जब मेरे पापा और मा ने एक दूसरे की चूत / लंड चूसना बंद कर दिया तो मैने भी धीरे से बाथरूम का दरवाजा बंद कर्दिया और अपनी तरफ का दरवाजा बंद करने के बाद अपने बेडरूम मे घुसी. मैं इतनी गरम हो चुकी थी किमेरी चूत को जोरदार मालिश की ज़रूरत थी. मैं जल्दी जल्दी अपनी चूत मे उंगली करके झड़ना चाहती थी.

मुझे ये देख कर शॉक लगा कि मेरे चाचा मेरे बेड के नज़दीक एक कुर्सी पर बैठे है. मेरा मुँह खुला का खुला रह गया और मेरी समझ मे नही आ रहा था कि मैं अब क्या करू. मैं इतना तो समझ गयी थी कि मेरे चाचा ने मुझे अपने पापा और मा की चुदाई देखते हुए देख लिया है. मैं कुछ नही बोल पाई और मेरे पैर जैसे ज़मीन मे जाम हो गये थे. मैने धीरे से अपना सर उपर किया और सोच रही थी कि क्या बोलू. मेरे चाचा मेरी तरफ ही देख रहे थे और उनकी आँखो मे बहुत से क्वेस्चन्स थे. अचानक वो खड़े हो गये और उन्होने मेरे होटो पर उंगली रख कर चुप रहने का इशारा किया. उन्होने मेरा हाथ पकड़ा और अपने बेड रूम मे ले गये. अपने बेडरूम का दरवाजा बंद करने के बाद वो मेरी तरफ मुड़े और कहा

चाचा - मैं नही चाहता कि भाई और भाभी हमारी आवाज़ सुने, इसी लिए मैं तुम को यहाँ लाया हूँ. अब बताओ तुम क्या कर रही थी वहाँ?

मैं - कुछ नही चाचा, मैं तो बाथरूम से आ रही थी.

चाचा - मुझे मूर्ख बनाने की कोशिस मत करो. मैने सब देख लिया है कि तुम क्या कर रही थी.

मैं - क्या? क्यदेख लिया है? मैं तो कुछ नही कर रही थी.

चाचा - तुम अपने मा बाप को देख रही थी उनके बेडरूम मे. उनके बेडरूम की लाइट तुम्हारे बेडरूम तक आ रही थी खुले हुए बाथरूम से. और तुम उनके बाथरूम के दरवाजे के पीछे खड़ी थी थोड़ा सा दरवाजा खोल के जहाँ से लाइट तुम्हारे बेड रूम तक आ रही थी. मैने सब देख लिया है.

मैं कुछ नही बोल पाई पर समझ गई कि सारा भेद चाचा जान गये है. अब चाचा सब जान गये है और वो मेरे पापा और मा को सब बता देंगे. मैं चाचा के बेड पर बैठी थी और मेरी आँखों से आँसू निकलने चालू हो गये डर से. चाचा मुझे देख रहे थे और मैं अपना सिर नीचे कर के रो रही थी.

चाचा - हे! रो मत. चुप हो जाओ.

उन्होने अपना हाथ उपर किया और मेरे आँसू पोन्छे.

चाचा - साफ साफ बताओ. क्या तुम चाहती हो कि मैं ये बात भाई और भाभी को बताऊ?

मैं - नही चाचा ! प्लीज़......., मैने उनका हाथ पकड़ लिया.

चाचा - ठीक है. नही बताउन्गा. मुझे बताओ, ये सब तुम कब से कर रही हो?

मैं - पिछले सिक्स मंत्स से.

चाचा - ओह! सिक्स मोन्थ से? मतलब बहुत दिन हो गये. तुम छ्होटी लड़की हो, क्या तुम समझ सकती हो कि तुम उनको क्या करते हुए देखती हो?

मैं - हां. मैं जानती हूँ.

चाचा - साफ साफ बोलो. मुझ से कुछ मत छिपाओ. तुम मेरी छ्होटी बच्ची हो और ये विश्वास रखो कि ये बात हम दोनो के बीच मे ही रहेगी. शरमाओ मत. बताओ.

मैं - वो आपस मे प्यार करते है रात को.

चाचा - क्या तुम पूरी तरह समझती हो कि वो क्या करते है?

मैं - हां. वो सेक्स करते हैं.

चाचा - ठीक है. लेकिन तुम अभी बहुत छ्होटी हो. किसने सिखाया ये तुम को?

मैने सोच लिया था कि मैं इस मे अंग्र्लिना का नाम नही आने दूँगी. वो मेरी सबसे अच्छी दोस्त है और मैं उसका नाम नही ले सकती.

मैं - एक रात को जब मैं पेशाब करने गयी तो उनका बाथरूम का दरवाजा थोड़ा खुला था और बाथरूम मे उनके बेडरूम से लाइट आ रही थी. कुछ आवाज़ें भी आ रही थी. मैं जान ना चाहती थी कि इतनी रात को वहाँ क्या हो रहा है. मैने धीरे से देखा और मैं समझ गयी कि वो चुदाई कर रहे है और तब से मैं जब भी मौका मिलता है, उनको चोद्ते हुए देखती हूँ. ऐसा वीक मे दो / तीन बार होता है.

चाचा - वो तो ठीक है, पर पर तुम को चुदाई के बारे मे बताया किसने? तुम को क्या पता कि इसको चुदाई कहतें है? तुम को ये कैसे पता है कि हज़्बेंड - वाइफ चुदाई करते है? तुम बहुत छ्होटी हो और मैं समझ नही पा रहा हूँ कि तुम को ये सब इतनी डीटेल मे कैसे पता है?

मैं - वो मैने एक दिन आक्सिडेंट्ली एक ब्लू फिल्म देख ली थी. और तब से मैं जान गयी कि ये चुदाई होती है.

चाचा - ब्लू फिल्म? वो कहाँ देखी तुम ने? अपनी किसी दोस्त के घर पे?

मैं - अपने घर पर ही. मैं किसी फिल्म की कॅसेट तलाश रही थी कि वो मुझे मा की अलमारी से मिली.

चाचा - हे भगवान! साफ साफ बताओ मुझे. क्या तुमने अब तक भी और भाभी को ही चोद्ते देखा है या और भी कुछ किया है? मेरा मतलब है किसी लड़के के साथ तुम ने भी चुदाई की है?

मैं - नही चाचा. मैने सिर्फ़ पापा और मा को ही देखा है. मैने वैसा कुछ नही किया है. मैने किसी से भी नही चुदवाया है.

चाचा - तुम बहुत छ्होटी हो पर अब तुम सेक्स के बारे मैं बहुत जान गयी हो. हम अब साफ साफ बात करते हैं. जब तुम उनको चोद्ते हुए देखती हो तो तुम को कुछ फील नही होता है? क्या तुम्हारी इच्छा नही होती है कि तुम को भी कोई ऐसे ही चोदे?

मैं - मैने अभी तक ऐसा नही सोचा है कि कोई मुझे भी चोदे.

चाचा - फिर तुम क्या करती हो? ये सब देखने के बाद तुम को नींद कैसे आती है?

मैं - मत पुछो चाचा. मुझे शरम आती है.

चाचा - शरमाओ मत बेबी. साफ़ साफ बताओ. मुझे तुम्हारी बहुत चिंता हो रही है कि तुम्हारा क्या होगा. तुम बहुत छ्होटी हो और दुनिया को नही जान ती हो. पता नही क्या होगा तुम्हारा अगर किसी ग़लत हाथ मे पड़ गई तो. मुझे बताओ मेरी बेबी. मैं तुम्हारा चाचा ही नही दोस्त समझो मुझे.

मैं - मैं अपनी उंगली से कर्लेति हूँ.

चाचा - थॅंक गॉड. मैं खुस हूँ कि तुम ने किसी से अब तक नही चुदवाया है. नही चुदवाया है ना?

मैं - नही चाचा. मैने किसी से भी नही चुदवाया है. मेरा विश्वास करो. मैं अपने रूम मे जाऊ?

चाचा - ठीक है. जाओ, पर मैं कल रात को तुम्हारा इंतेज़ार करूँगा. बहुत सी बातें करनी है तुम से.

मैं - गुड नाइट चाचा.

चाचा ने मुझे गले लगाया और मेरे गाल चूमे और कहा - गुड नाइट बेबी, आराम करो. कल बात करतें हैं.

जब चाचा मुझे गले लगा रहे थे तो मैने कोई कड़क चीज़, लकड़ी जैसी कड़क चीज़ अपने पेट पर महसूस की और तुरंत समझ गई कि ये मेरे चाचा का लंड है.

मैं समझ गई थी कि चाचा ये बात किसी को नही बताएँगे. मैं अपने रूम मे आ गई और सोने की कोशिस करने लगी. काफ़ी देर तक मुझे नींद नही आई. मैने अपनी चूत मे उंगली करने की भी सोची मगर फिर नही की क्यों कि जो कुछ हुआ था उस के बाद मूड नही बन रहा था.

अगले दिन मैं सुस्त थी. जब मा ने कारण पुछा तो मैने कहा कि रात को नींद नही आई पूरी तरह से. बाकी सब ठीक है. मैं स्कूल चली गई. मैं जल्दी से जल्दी आंजेलीना से मिलकर कल रात के बारे मे बात करना चाहती थी. जब मैने उसको सब बताया तो वो कुछ देर तक चुप रही, कुछ नही बोली. बस कुछ सोचती रही. कुछ देर बाद उसने कहा " जूली! ये तुम ने बहुत अच्छा किया कि मेरा नाम नही बताया. अब जब कि सब तुम्हारे चाचा को पता चल गया है तो मुझे लगता है कि तुम्हारा चाचा तुम को चोद्ना चाहता है. इसमे कोई खराबी नही है. केवल एक ही बात का डर है कि तुम सिर्फ़ 14 साल की हो और तुम्हारे चाचा पूरे आदमी है. लेकिन मुझे लगता है कि तुम्हारे चाचा अच्छे आदमी है और तुम्हारा ध्यान रखेंगे. किसी और से चुद्वाने से तो अच्छा है की चाचा ही चोदे. आज नही तो कल, कोई तो चोदेगा, फिर चाचा से चुद्वाने मे क्या हर्ज़ है. घर की बात घर मे ही रहेगी. मेरा कहना मानो तो जो चाचा कहते है वो ही करो. सब ठीक रहेगा." दोस्तो क्या जुली की सहेली ने सही राय दी है आप बताए आपका दोस्त राज शर्मा

क्रमशः…………………
 
जुली को मिल गई मूली—3

गतान्क से आगे……………………………..

मैं ये सोचती हुई दोपहर को घर आई कि क्या सचमुच चाचा मुझे चोदेगा? क्या ये ठीक है? सच पूछो तो मेरा भी बहुत मन कर रहा था कि कोई मुझे चोदे जैसे मेरे पापा मेरी मा को चोद्ते है. अपनी जवानी की पहली चुदाई किसी और से करवाने से तो अच्छा है कि चाचा से ही चुदाई करवाई जाए. अपनी कुँवारी चूत का मोती चाचा को देना ही ठीक है बजाय किसी और को देने से. घर की इज़्ज़त घर मे ही रहेगी. किसी को पता भी नही चलेगा और चुदाई भी होती रहेगी. चाचा के लिए भी ठीक है, उनको भी अपने लंड के लिए चूत घर मे ही मिल जाएगी.

हम ने रात का खाना खाया और मैं अपने बेडरूम मे आ गई. रात के 11.00 बजे मेरे पापा और मा भी सोने चले गये और मैं चाचा का इंतेजार कर रही थी. मैने महसूस किया कि चाचा भी अपने बेडरूम मे आ चुके है. मैं सोच रही थी कि सीधे चाचा के बेड रूम मे चली जाऊ या उन के बुलाने का इंतेजार करू. तभी मेरे बेडरूम का दरवाजा खुला और चाचा दरवाजे पर थे.

चाचा - क्या बेबी ! सो गयी क्या?

मैं अपने बेड से खड़ी हुई तो चाचा मेरी तरफ देख कर मुस्काराए. मैं भी मुस्काराई.

हम दोनो चाचा के बेडरूम मे गये और चाचा ने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया. मैं अंदाज़ा लगा रही थी और ये सोच कर खुस हो रही थी कि अब क्या होने वाला है. हम दोनो बेड पर बैठे थे और चाचा ने मेरा हाथ अपने हाथ मे लेते हुए कहा...........

"तुम जानती हो जूली कि तुम मुझे कितनी प्यारी हो. कल की बातें होने के बाद तो तुम मुझे और भी प्यारी लगती हो."

मैने चाचा की आँखों मे देखा.

चाचा - जूली! मुझे ख़ुसी है कि तुम जवान हो रही हो. अब से हम दोनो अच्छे दोस्त है. हम एक दूसरे के राज़ को राज़ ही रखेंगे. क्या तुम भी ये चाहती हो कि कोई तुम से भी वैसा प्यार करे जैसे तुम ने देखा है भाई भाभी को करते हुए?

मैं - हां चाचा. पर मैं अभी छ्होटी हूँ और मैं ये सब केवल अपने मज़े के लिए नही करना चाहती.

चाचा - अब जब कि हम आपस मे इतना खुल गये है, बताओ मेरे बारे मे तुम्हारा क्या विचार है. मैं तभी आगे बढ़ुंगा जब तुम हां कहोगी. मैं नही चाहता कि तुम मेरे बारे मे खराब सोचो. चिंता मत करना, तुम्हारा राज़ अब राज़ ही रहेगा. इस बात का अपने प्यार से कोई लेना देना नही है. मैं नही चाहता कि तुम ये सोचो कि मैने तुम्हारी मज़बूरी का फ़ायदा उठाया या कोई ग़लत काम किया. ये पूरी तरह तुम्हारे उपर है. तुम्हारी हां या ना से मुझे कोई फ़र्क नही पड़ेगा.

मैं - नही चाचा, ऐसा नही है. मुझे पता है कि आप मेरा बुरा नही चाहेंगे और मेरे साथ कुछ ग़लत नही करेंगे, पर मुझे डर लगता है.

चाचा - डर? कैसा डर?

मैं - मैं आप की छोटी बच्ची हूँ और आप पूरे आदमी है और मेरे चाचा है. क्या ये संभव है?

चाचा - अच्छा वो? क्या तुम जानती हो कि मैने कल क्यों कुछ करने की कोशिश नही की? मैं बताता हूँ. क्यों कि मैं तुम से प्यार करता हूँ और तुम्हे गुमराह नही होने देना चाहता. मैं तुम्हे कोई नुकसान भी नही पहुँचाना चाहता. अभी तुम छ्होटी हो लेकिन चुदाई के बारे मे अपनी उमर से ज़्यादा जान गई हो. पर तुम्हारे लिए अभी भी बहुत कुछ जान ना बाकी है. हर चीज़ के दो चेहरे होते हैं. सेक्स के भी दो चेहरे है. मैं जानता हूँ कि अब तुम चुदाई के बिना नही रह सकती और मैं नही चाहता कि तुम किसी से भी चुदवाओ और जवान होते होते तुम्हारी ज़िंदगी खराब हो जाए. इसीलिए मैं ये सब कर रहा हूँ. मैं बिना तुम को कोई नुकसान पहुँचाए सब सिखाउन्गा ताकि तुम कभी धोका नही खाओ. तुम मेरी कुँवारी बेबी हो और मैं इस का ध्यान रखूँगा कि तुम्हे जयदा तकलीफ़ ना हो. ये अच्छी बात है कि तुम अपने चाचा से अपनी कुँवारी सील तुडवा रही हो. कल तक मैं भी इस के लिए तय्यार नही था. मैं जो कर रहा हूँ वो सोच समझ कर कर रहा हूँ.

और फिर चाचा ने मुझे जेल्ली की ट्यूब दिखाई जो वो आज खरीद कर लाए थे.

मैं कुछ बोल नही पाई मगर सच्चाई तो ये है कि मैं भी चुदवाना चाहती थी. मैं भी वो मज़ा लेना चाहती थी जो मेरी मा ले रही थी पापा से चुद कर.

चाचा ने मेरा चेहरा अपने हाथो के बीच लिया और अपने होंठ मेरे होठों पर रख दिए. ये मेरे जीवन का पहला किस था. मैने अपने चाचा को कस कर पकड़ लिया और किस मे उनका साथ देने लगी. वो मेरा निचला होंठ चूस रहे थे और मैं उनका उपर का होंठ चूस रही थी. उन्होने मेरी जीभ अपने मुँह मे ली और उसको चूसना चालू कर दिया. मैने भी यही किया. मेरी चूत हमेशा की तरह गीली होना सुरू हो गयी थी और मैं जानती थी कि आज मेरी कुँवारी चूत चुद्ने वाली है. सभी लाइट्स ऑन थी. हम ने अपना चुंबन पूरा किया और चाचा मेरे बदन पर अपना हाथ फिराने लगे. चाचा ने मेरे टॉप के लिकिंटन खोल दिए. मैं उस समय ब्रा नही पहनती थी और मेरे नींबू जैसी छ्होटी छ्होटी कड़क चुचियाँ लाइट मे चमकने लगी. उनको मेरी प्यारी प्यारी छ्होटी चुचियाँ बहुत पसंद आई और उन्होने उनको धीरे धीरे दबाना सुरू कर्दिया. आअह..... वो पहली बार था जब कोई मर्द मेरी चुचियों को टच कर रहा था और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. उनका हाथ धीरे धीरे नीचे सरका और उन्होने मेरी स्कर्ट का हुक खोल कर अपना हाथ मेरी गोल गोल गंद पर रखा. उन्होने मेरी स्कर्ट निकाल दी और मैं पूरी तरह उनके सामने नंगी हो चुकी थी क्यों कि मैने चड्डी भी नही पहन रखी थी. फिर चाचा ने भी अपने कपड़े उतारे और वो भी मेरी तरह नंगे हो गये. मैने देखा कि उनकी चेस्ट काफ़ी बड़ी है और उस पर काफ़ी बाल भी है. उनका लंड मेरी आँखों के सामने था और किसी खंभे की तरह मज़बूती से खड़ा था. मैने तुलना की तो पाया कि चाचा का लंड मेरे पापा के लंड से थोड़ा बड़ा और थोड़ा मोटा है. मैने सोचना सुरू किया और मेरी समझ मे नही आया कि इतना बड़ा, इतना मोटा, खंबे जैसा चाचा का लंड मेरी छ्होटी सी कुँवारी चूत मे कैसे जाएगा. शायद मेरी चूत फॅट ही जाएगी.

हम दोनो एक दूसरे के सामने नंगे बैठे हुए थे और मैं हैरान थी कि चाचा का इतना लंबा, इतना मोटा और इतना कड़क लंड मेरी छ्होटी सी चूत मे कैसे जाएगा. मैने अब तक दो लंड देखे थे, एक मेरे पापा का और एक अब मेरे चाचा का. मेरे पापा के लंड मुण्ड पर चमड़ी नही थी और दूर से ही उनका गुलाबी लंड मुण्ड नज़र आता था और नीचे काली चॅम्डी थी. चाचा के लंड का अगला भाग काली चॅम्डी से ढका हुआ था और उनके लंड के आगे का और अंदर का भाग थोड़ा सा ही नज़र आ रहा था. मैं साफ साफ चाचा के लंड पर पेशाब का होल देख सकती थी. ये मेरा पहली बार था कि मैं किसी मर्द के सामने नंगी बैठी हुई थी और और किसी नंगे मर्द को अपने इतने करीब से भी मैने पहली बार ही देखा था. मैं तो ये सोच कर ही झुरजुरी ले रही थी कि आज मैं पहली बार चुद्ने जा रही थी. चाचा के हाथ मेरे नंगे बदन पर फिर रहे थे. मैं तो बिस्तर पर चुप चाप बैठी थी बिना कुछ करे क्यों कि मुझे तो मालूम ही नही था क़ि मुझे क्या करना चाहिए. चाचा बोले कि "मेरी बेबी, आज मैं तुम्हे औरत बनाउन्गा और मैं तुम को वो सब कुछ दूँगा जिस की तुम हक़दार हो."

मेरी नींबू जैसी चुचियाँ उनके हाथो मे थी और वो उनको मसल रहे थे. वो बोले कि उन्होने इतनी छ्होटी और कड़क चुचियाँ कभी नही देखी है. वो मेरी चुचियों को धीरे धीरे मसल रहे थे. उन्होने मेरी एक निपल अपने मुँह मे लेकर चूसना चालू कर्दिया जैसे कोई बच्चा दूध पीता है. मेरी आँखें बंद होने लगी और मेरे होंठ फड़फड़ाने लगे. मैने अपने बदन मे एक बिजली सी महसूस की जो कि पहले कभी महसूस नही की थी. मेरा बदन आनंद के मारे अकड़ने लगा था. फिर उन्होने मेरी दूसरी निपल अपने मुँह मे लिया और वो ही किया जो पहली निपल के साथ किया था. मृेरी नन्ही चूत जो पहले ही गीली थी, और भी गीली होने लगी और मैने महसूस किया कि उस मे से रस निकलता ही जा रहा है. उन्होने अपने हाथो मे मेरी छ्होटी सी, गोल और कड़क गंद को दबाया और मालिश सी करने लगे मेरी नंगी गंद पर. मेरा मन जल्दी से जल्दी चुदाई करवाने का होने लगा. चाचा की बालो से भरी चौड़ी छाती मेरे सामने थी. मैं अपने आप को रोक नही सकी और उनकी छाती के बाल साइड मे करके उनकी छ्होटी सी निपल को अपने मुँह मे ले लिया और उसी तरह चूसने लगी जैसे उन्होने मेरी निपल चूसी थी. चाचा के मुँह से आनंद की आवाज़ें निकलने लगी और वो बोले " ओह मेरी छोटी सी डार्लिंग, किसी लड़की या औरत ने ऐसा नही किया मेरे साथ जो तुम कर रही हो. ये बहुत आनंद देने वाला काम है. चुस्ती रहो मेरी जान, चुस्ती रहो. ज़ोर ज़ोर से चूसो . हां..... ऐसे ही........ मेरी प्यारी ...... चूसो......." फिर उन्होने मेरे मुँह मे अपनी दूसरी निपल दी और मैने उसको भी वैसे ही चूसा.
 
मैने महसूस किया कि उनका कड़क लॉडा मेरी नन्ही सी चूत खत खता रहा है. मैने देखा कि हालाँकि उनकी कमर नही हिल रही थी पर उनका लंबा लंड उपर-नीचे हो रहा था. मैं उस समय ये नही जान पाई कि उनका लंड अपने आप कैसे हिल रहा है पर अब जानती हूँ कि ये तो नॅचुरल है. एक खड़ा हुआ लंड इसी तरह हिलता है और नाचता है. मैं सोच रही थी कि चाचा मुझे चोद क्यों नही रहे है, चोद्ने मे इतना समय क्यों लगा रहे है. मैं आपे से बाहर होने लगी चुदाई करवाने के लिए मैने अपना हाथ उनके लंड पर रखा. ओह., माइ गॉड, वो बहुत ही कड़क था. एक दम लोहे की रोड जैसा. मैने पहली बार एक लंड को हाथ लगाया था. पहली बार किसी मर्द का लंबा, मोटा, कड़क और गरम खड़ा हुआ लंड मेरे हाथ मे था और मैं सोच रही थी कि अब क्या करूँ उस लंड का. मैने एक बार मा को पापा का लॅंड पकड़े हुए देखा था. मैने भी वैसा ही किया. मैने उनके लंड को ज़ोर से, टाइट पकड़ लिया. उनकी आँखें आनंद से बंद हो गई. मीं चाचा के लंड को देख नही पा रही थी क्यों कि हम एक दूसरे से चिपके हुए बैठे थे. वो थोड़ा सरके और बिस्तर पर उपर होकर पीछे तकिया लगा कर बैठ गये. उन्होने अपनी टांगे सीधी करली थी. उनका लंबा लंड हवा मे खंबे की तरह नाच रहा था.

उन्होने मुझे नज़दीक खींचा और मैं अपने पैर फोल्ड करके उनकी कमर के पास बैठ गई तो उन्होने अपना लंड फिर से मुझे दिया. क्या शानदार लंड था उनका. मैने फिर से उनका लंड अपने हाथ मे पकड़ा. उनका लंड इतना लंबा था कि मेरा एक हाथ आधे से भी कम लंड को कवर कर रहा था. उनका लंड नीचे से मेरे हाथ मे था और उपर का भाग अभी भी मेरी पकड़ के बाहर था. मैने देखा उनके लंड के चारों तरफ छ्होटे छ्होटे काले बाल थे. उन के लंड का मुँह गुलाबी था और कुछ पानी जैसे कलर का चिकना रस उनके लंड के मुँह से बाहर आ रहा था. हालाँकि वो मेरे चाचा थे पर जिस हालत मे हम उस समय थे, मैने सारी शरम छ्चोड़ दी. मैं चुदाई को पूरा समझना चाहती थी. मैने उनसे पूछा " पापा का लंड आप के लंड से अलग कैसे दिखता है ? उन के लंड के आगे का भाग दिखता है पर आप के लंड पर पूरी चॅम्डी है ? ऐसा क्यो ?"

चाचा मुस्काराए और उन्होने मुझे अपना लंड उपर से टाइट पकड़ कर नीचे करने को कहा. मैने वैसा ही किया. मैं हैरान हो गई कि उनकी चॅम्डी जो कि पूरे लंड को कवर थी, अब नीचे आ गई है और उनके लंड का गुलाबी सूपड़ा अब साफ साफ दिख रहा है, बिल्कुल मेरे पापा के लंड जैसा. मेरे ऐसा करने पर उनके लंड से निकलने वाला रस मेरे हाथ पर लग गया और मैने उसको अपनी नाक के पास ले जा कर सूँघा. बहुत ही प्यारी खुसबू आ रही थी उनके लंड रस की. उन्होने मुझे उसको टेस्ट करने को कहा. मैने टेस्ट किया. बहुत ही स्वदिस्त था उनका लंड रस. मुझे पसंद आया. उन्होने मुझे बताया कि लंड के उपर की चॅम्डी अपने आप नीचे हो जाती जब ये चूत मे जाता है. कुछ लोग तो उपर की चॅम्डी को अलग अलग रीज़न्स से कटवा लेटें है. मैं समझ गई. उन्होने आगे बताया कि हर मर्द चाहता है की उसकी साथी लड़की/औरत उसके लंड को मुँह मे ले और उसको मज़ा दे. मैने कहा... " हां. मैने बहुत बार देखा है कि मा ने पापा का लंड मुँह मे लिया है, पर मुँह मे लेने के बाद क्या करते है?" वो मुस्कराए और बोले " मेरी नन्ही डार्लिंग, तुम को अभी बहुत कुछ सीखना है. मैं तुम को सब सिखाउन्गा और एक पर्फेक्ट चुदाई एक्सपर्ट बना दूँगा. मेरे लंड को अपने मुँह मे लो और उसी तरह चूसो जिस तरह तुम ने मेरी चुचि को चूसा था. हम दोनो को मज़ा आएगा."

मैने उनका लंड अपने मुँह मे लेने की कोशिश की तो उनका लंबा और मोटा लंड थोड़ा सा ही मेरे मुँह मे आया. मुझे वो गरम लगा. मैं उसको चूसने लगी और वो और कड़क होता गया. कुछ देर बाद वो बोले कि मैं उनकी जगह बैठ जाऊ और अपने पैर उपर करके, घुटने मोड़ कर चौड़े करलूँ. वो मेरे चौड़े किए हुए पैरों के बीच मे आए और और उनकी आँखें चौड़ी हो गई मेरी नन्ही सी, कुँवारी, प्यारी सी, टाइट और गुलाबी बिन चुदी चूत को देख कर. मेरी चूत पर तब बाल नही आए थे. उन्होने कहा " मेरी जान, मैं पहली बार एक कुँवारी, बिन चुदी, बिना बालों की टाइट चूत देख रहा हूँ. तुम्हारी चूत भी तुम्हारी तरह बहुत सुंदर है. मेरी किस्मत अच्छी है कि पहली बार मैं तुम को चोदुन्गा. मैने सपने मे भी ऐसी प्यारी चूत नही देखी है. तुम को खुद को पता नही है कि तुम्हारी चूत कितनी प्यारी और सुंदर है. तुम्हारी गंद भी कितनी प्यारी है और मैं तो पागल हुआ जा रहा हूँ."

उन्होने अपना हाथ बढ़ाया और मेरी चूत के होठों को छुआ. मेरे बदन मे करेंट सा दौड़ गया. मैं ऐसी पोज़िशन मे थी कि मैं अपनी चूत सॉफ देख पा रही थी और ये भी देख रही थी कि चाचा क्या कर रहें है. उन्होने अपनी उंगली मेरी चूत के बीच मे रखी और उसको नीचे से उपर की तरफ ले गये. ऐसे पहले आंजेलीना ने भी किया था और मैने खुद कई बार किया था पर जो सुख मुझे अभी मिल रहा था एक मर्द के हाथों से मेरी चूत पर, वो मैं लिख नही सकती. मेरे लिए ये एक नया और मज़ेदार अनुभव था. वो अपनी उंगली मेरी चूत के बीच मे तेज़ी से फिराने लगे और मैं गरम होती चली गयी. मेरी कमर उनकी उंगली के फिरने के साथ साथ उपर नीचे होने लगी थी. मेरी चूत से लगातार चूत रस निकल रहा था जिस से चाचा को मेरी चूत के बीच मे उंगली घुमाने मे आसानी हो रही थी. उन्होने महसूस किया था कि मैं काफ़ी गरम हो चुकी हूँ और झरने वाली हूँ. उन्होने अपनी उंगली मेरी चूत के बीच मे से निकाल ली और अपने होंठ रख दिए मेरी गरम और गीली चूत पर.

वो मेरी चूत चाटने लगे और मेरी चूत का रस भी. उन्होने धीरे से अपनी जीभ मेरी चूत के अंदर डाली और उसको अंदर बाहर करने लगे. मैं बहुत गरम हो चुकी थी और वो मेरी चूत को अपनी जीभ से चोद रहे थे. मेरी कमर उपर - नीचे ज़ोर ज़ोर से हिलने लगी. और.......... और... अचानक मैं झर गई. मैं वहाँ पहुँच चुकी थी जहाँ आनंद ही आनंद होता है. मैने अपने पैर टाइट कर लिए थे. उनकी गर्दन मेरे पैरों के बीच मे थी और वो मेरी चूत का रस लगातार पिए जा रहे थे, चाट ते जा रहे थे मेरी बिना चुदी चूत को.

मैने धीरे से अपनी पकड़ ढीली की और फिर से पैर चौड़े कर लिए. वो मेरी चूत का सारा रस चाट चुके थे और मेरी चूत बाहर से बिल्कुल सॉफ हो चुकी थी. उन्होने मेरी तरफ देखा और मेरी आँखों मे चुदाई की चमक देख कर बोले " जूली, मैं जानता हूँ कि तुम जल्दी से जल्दी चुद्वाना चाहती हो पर मुझे तुम्हारा पूरा पूरा ख़याल रखना है. तुम्हारी चूत छ्होटी सी है और कुँवारी है. मेरा लंड तुम्हारी बिन चुदी छोटी सी चूत के लिए काफ़ी लंबा औट मोटा है. तुम को पता नही है कि ये इतना आसान नही है जैसे कि तुम्हारे पापा तुम्हारी मा को चोद्ते हैं. तुम को बहुत दर्द होने वाला है. मैं कोशिश करूँगा कि तुम को कम से कम तकलीफ़ हो और ज़्यादा से ज़्यादा मज़ा आए. दर्द तो होगा, लेकिन सिर्फ़ पहली बार. उस के बाद तुम बिना दर्द के चुदाई का मज़ा ले सकती हो. क्या तुम एक दर्द भरी चुदाई के लिए तय्यार हो?" तो दोस्तो आपने देखा कैसे चाचा इस कमसिन जुली को चोदने की तैयारी कर रहा है क्या ये चुदाई सपूर्ण हो पाएगी आपका दोस्त राज शर्मा

क्रमशः…………………
 
जुली को मिल गई मूली—4

गतान्क से आगे……………………………..

मैं पूरी तरह उनकी बात को समझ नही पाई. ये तो मैं उनका लंबा और मोटा लंड देखते ही जान गई थी कि उस लंड का पूरा मेरी छोटी सी चूत मे जाना मुश्किल है, पर मैं ये नही जानती थी कि ये इतना दर्द भरा होगा जैसे कि वो बता रहे थे. खैर, चुदाई तो करवानी ही थी, मैने उनको आँखों ही आँखो मे चोद्ने का इशारा किया. मैं चुद्वाने के लिए पूरी तरह तय्यार थी. मेरी पहली चुदाई होने वाली थी.

उन्होने बेड के कोने मे रखी जेल्ली की ट्यूब को उठाया और उसे खुद लंड पर लगाया. फिर उन्होने बहुत सारी जेल्ली मेरी चूत पर लगाई. मैं उनको ये सब करते हुए देख रही थी. उन्होने अपनी उंगली की सहायता से मेरी चूत के होल मे लगाई. उन्होने मुझे अपने लंड पर क्रीम मलने को कहा तो मैने बहुत सारी क्रीम उनके खड़े हुए लंड पर अपने दोनो हाथो से लगाई.

मैं अपनी पीठ के बल बिस्तर पर अपनी टाँगे चौड़ी कर के लेटी थी और अपनी चुदाई का इंतेज़ार कर रही थी. वो मेरी दोनो टाँगों के बीच मे बैठ गये और उनका मोटा ताज़ा लंड उनके हाथ मे था. उन्होने अपने लंड का टोपा मेरी चूत के दरवाजे पर लगाया तो मैं सिहर उठी. क्या गजब का एहसास था. लंड मेरी चूत के दरवाजे पर खड़ा था. मैने मुस्करा के चाचा की तरफ देखा तो वो भी मुस्काराए. उन्होने कहा " अपनी साँस रोक लो मेरी नन्ही चूत वाली, मैं अपने लंड को तुम्हारी छ्होटी सी चूत मे डालने जा रहा हूँ. थोडा दर्द होगा पर आवाज़ मत करना नही तो भाई - भाभी जाग जाएँगे."

और उन्होने अपने लंड को मेरी चूत के दरवाजे पर थोड़ा दबाया. थोड़ा दर्द तो हुआ मुझे और लगा कि उनके मोटे और लंबे लंड का थोडा हिस्सा मेरी चूत के अंदर गया है. उन्होने थोडा और ज़ोर लगाया तो मुझे दर्द ज़्यादा होने लगा. मैने अपना सिर उपर कर के देखा तो पाया कि अभी तो उनके लंबे लंड का मुँह ही मेरी चूत मे गया है. बाकी का सारा का सारा लंड तो अभी बाहर ही है. अब मेरी समझ मे आया कि वो बार बार दर्द की बात क्यों कर रहे थे. अभी तो उनके लंबे लंड का सिर्फ़ थोड़ा सा अगला भाग ही अंदर गया है और मुझे इतना दर्द हो रहा है, पूरा लंड अंदर जाने पर तो शायद मेरी छोटी सी चूत फट ही जाएगी और मैं सिर्फ़ दर्द का अंदाज़ा ही लगा सकती थी. उन्होने कहा " अब सावधान जूली डार्लिंग, अपने होंठ मजबूती से बंद कर्लो और बहुत ज़्यादा दर्द सहन करने के लिए तय्यार हो जाओ. तुम्हारी चूत क्यों कि कुँवारी है इस लिए दर्द भी होगा और खून भी निकलेगा. घबराओ मत, तुम्हारी चूत फटने वाली नही है, जब किसी कुँवारी लड़की की सील टूट ती है तो खून निकलता है. लेकिन ये दर्द और खून सिर्फ़ पहली बार मे ही होता है. फिर चुदाई का मज़ा ही मज़ा आता है."

मैने अपने होंठ मजबूती से बंद कर लिए और उनके लंड का अपनी चूत पर धक्के का इंतेज़ार करने लगी. मैं अपनी पहली चुदाई के लिए पूरी तरह तय्यार थी. आज तो चुदना ही है. उन्होने ज़ोर लगाना चालू किया और उनका लंड धीरे धीरे मेरी छ्होटी सी चूत मे जाने लगा. दर्द भी बढ़ता गया. और वो थोडा रुके. कहा कि " अब जाता हूँ मैं अंदर, तय्यार हो जाओ."

उन्होने अपना लंड थोड़ा सा बाहर निकाला और एक जोरदार धक्का मारा. उनका लंड इस धक्के से मेरी चूत के अंदर काफ़ी घुस गया और मेरे मुँह से चीख निकलने वाली थी दर्द के मारे, तो उन्होने अपना हाथ मेरे मुँह पर रख कर मेरी चीख को अंदर ही रोक दिया. ओह मेरी मा....... मरगई मैं तो दर्द के मारे. मेरा मुँह तो बंद कर्दिया था चाचा ने और मेरी आवाज़ नही निकल रही थी पर दर्द के मारे मेरी आँखों से आँसू बहने लगे. बहुत ही ज़्यादा दर्द हो रहा था मेरी चूत मे और लगता था कि चाचा ने मेरी चूत अपने मोटे और लंबे लंड से फाड़ कर दो भागों मे कर्दिया है. मैं तो मर ही गयो थी दर्द के मारे. ओह मेरी मा........ ओह भगवान.......... ऐसी भी क्या चुदाई जिसमे जान निकल जाए. मेरा दर्द बढ़ता ही जा रहा था और मुझे लगा कि आज तो मैं चुदाई का मज़ा लेने की बजाय मर ही जाओंगी. वो तो अच्छा था कि चाचा ने अपने लंड का और धक्का नही मारा. चाचा मेरे पर झुके और मेरे गाल पर किस किया क्यों कि मेरे होंठो पर तो उनका हाथ था. मैने अपनी आँखों से उनको अपना लंड बाहर निकालने की रिक्वेस्ट की. वो मेरे कान मे धीरे से बोले " ओके डार्लिंग. मैं अपना लंड बाहर निकाल रहा हूँ. रोना बंद करो और अपने मुँह से आवाज़ मत निकालना. मेरा विश्वास करो डियर, सब ठीक है और सब ठीक होगा."

मैने अपना हाथ नीचे ले जा कर चेक किया तो पाया कि उनका करीब आधा लंड मेरी चूत मे घुस चुका है और आधा अभी भी बाहर है. मैं सोच रही थी कि अगर पूरा ही घुसा देते तो मैं तो मर ही जाती. मैने अपनी उंगलियों पर कुछ महसूस किया, चिप चिपा सा कुछ, और हाथ उपर कर के देखा तो वो खून था. लाल और गाढ़ा खून जो मेरी चूत से निकल रहा था. वो बोले " मैने कहा था कि थोड़ा खून निकलेगा. ये तुम्हारी कुँवारी सील का खून है. लेकिन चिंता मत करो. अभी सब ठीक हो जाएगा. मैं हाथ हटाता हूँ तुम्हारे मुँह पर से, आवाज़ मत करना. मैं अपना लंड भी बाहर निकाल रहा हूँ. ओके ? कंट्रोल करो डार्लिंग."

मैने अपना सिर हिलाया तो उन्होने अपना हाथ मेरे मुँह पर से हटा लिया और मेरे होंठो पर अपने गरम गरम होंठ रख दिए और मेरे होंठो को धीरे धीरे चूसने लगे. किस करते हुए मैने फील किया कि वो अपना लंड भी मेरी खून भरी चूत से बाहर निकाल रहें है. मेरा दर्द कुछ कम हुआ और मैने रोना बंद कर्दिया था पर मेरी आँखों से अभी भी पानी निकल रहा था. उन्होने किस पूरा किया और बोले " हम थोड़ी देर रुकतें है तब तक तुम्हारा दर्द भी कम हो जाएगा. उस के बाद तुम को भी चुदाई का मज़ा आएगा."

मैने कहा " नही चाचा. कोई चुदाई नही अब. आप ने तो लगता है मेरी चूत ही फाड़ दी है. इतने दर्द मे, खून निकलती हुई चूत मे क्या मज़ा आएगा चुदाई का?"

वो मुश्कराए और कहा " थोड़ी देर रुकतें है डियर. लंड भी मैने बाहर निकाल लिया है. केवल मेरे लंड का टोपा अंदर है तुम्हारी चूत के. तुम खुद देख लो."

मैने चेक किया तो पाया कि वो सच बोल रहें है. मेरा दर्द थोड़ा सा कम हुआ था. धीरे धीरे मेरा दर्द काफ़ी कम हो गया था. हम करीब 15 मिनिट उसी पोज़ीशन मे पड़े रहे.

फिर उन्होने कहा " सुरू करें? दर्द तो थोड़ा फिर से होगा तुम को पर तुम को मज़ा आना भी सुरू हो जाएगा तो तुम दर्द को भूल जाओगी और कुछ देर बाद दर्द नही रहेगा. सिर्फ़ मज़ा और मज़ा रहेगा."

मैं थोड़ा हिचकिचाई पर मुझे चाचा पर पूरा विस्वास था कि वो सब अच्छी तरह ही करेंगे. मैने अपनी मुस्कान से उनकी बात का जवाब दिया.

उन्होने अपना लंड एक बार पूरा बाहर निकाला और फिर से मेरी चूत के दरवाजे पर रख कर एक हल्का सा धक्का दिया. लंड थोड़ा सा मेरी चूत मे गया. फिर से उन्होने लंड थोड़ा सा बाहर निकाला और फिर से एक धक्का मारा. मुझे दर्द तो हो रहा था पर ज़्यादा नही. वो अपने लंड को इसी तरह अंदर बाहर करने लगे धीरे धीरे. अब मुझे भी थोड़ा थोड़ा मज़ा आने लगा था. उन्होने लंड की धक्का मारने की स्पीड बढ़ा दी तो मेरा मज़ा भी बढ़ने लगा. उन का लंड मेरी चूत मे रगड़ ख़ाता हुआ अंदर जा रहा था और बाहर आ रहा था और मैं अपना दर्द भूलने लगी और चुदाई का मज़ा लेने लगी. अब मज़ा ज़्यादा था और दर्द कम. चाचा ने ठीक ही कहा था. मैं चुद रही थी वो मज़ा ले रही थी जो मैने पहले कभी नही लिया था. मेरी कुँवारी चूत मेरे चाचा के द्वारा चोदि जा रही थी.
 
चाचा थोड़ा रुके और कहा " अब कैसा लग रहा है जूली. अभी भी मैने अपना पूरा लंड तुम्हारी चूत मे नही डाला है. अभी तक मैं अपना आधा लंड अंदर डाल कर ही तुम्हारी चूत चोद रहा हूँ. क्या तुम और ज़्यादा मेरा लंड अपनी चूत के अंदर ले सकती हो ? तुम को मज़ा आएगा."

मैने कहा " हां चाचा. और अंदर डालो लेकिन धीरे धीरे. दर्द मत करना, अभी ही तो मज़ा आना सुरू हुआ है."

अब चाचा के धक्के ज़रा ज़ोर ज़ोर से लगने लगे थे और मैने फील किया कि उनका लॅंड काफ़ी अंदर तक मेरी चूत मे जा रहा है और अंदर किसी ऐसी जगह से टकरा रहा है जहाँ से मुझे वैसा मज़ा आ रहा था जो मैने पहले कभी नही पाया था. इसी तरह धक्का लगाते लगाते उन्होने अपना पूरा का पूरा लंड मेरी चूत मे उतार दिया था. वो बोले " जूली, तुम्हारी चूत छोटी ज़रूर है पर देखो, मेरा पूरा लंड ले लिया. मैने अपना हाथ नीचे अपनी चूत पर ले जा कर चेक किया तो पता लगा कि जब भी चाचा धक्का लगाते थे, उनका लंबा और मोटा लंड पूरी तरह मेरी चूत मे घुस रहा था. उनके लंड के नीचे की गोलियाँ मेरी गंद को लग रही थी जब भी वो धक्का लगाते थे. मुझे अब दर्द नही हो रहा था और मैं महसूस कर रही थी कि जैसे मैं स्वर्ग की सैर कर रही हूँ जहाँ मेरे चोदु चाचा ले गये है. चाचा इसी तरह धक्के पे धक्का लगाते रहे और अपनी स्पीड बढ़ाते गये. मेरा बदन अकड़ने लगा और मैं अपने झड़ने की मंज़िल की तरफ बढ़ने लगी. चाचा समझ गये कि मैं झड़ने वाली हूँ. वो बोले " डार्लिंग, तुम्हारा लगता है होने वाला है पर मुझे थोड़ा टाइम और लगेगा. मैं तुम्हारा होने के बाद रुक जाऊ या चालू रखूं."

मैने कहा " चाचा, जब तुम मुझे इतना मज़ा दे रहे हो चुदाई का तो मैं भी तुम्हे पूरा मज़ा देना चाहती हूँ."

और मेरा बदन अब टाइट होने लगा और....... और........ अचानक मैं झाड़ गई. मैने वो पाया जो पहले कभी नही मिला था. झड़ी तो मैं कई बार थी अपनी चूत मे उंगली करके पर इस बार जो चुदाई मे झड़ी थी वो मज़ा मैं सिर्फ़ महसीस कर सकती हूँ , लिख नही सकती. चाचा मुझे लगातार चोद रहे थे ज़ोर ज़ोर से धक्का लगाते हुए, अपने लंबे और मोटे खंबे जैसे लंड को मेरी चूत मे अंदर बाहर करते हुए. अचानक वो रुक गये और उन्होने अपना लंड मेरी चूत मे गहराई तक घुसा दिया. मैने फील किया कि मेरी छूट मे कुछ गरम गरम हो रहा है. ऐसे लगता था जैसे कोई गरम पानी का फव्वारा मेरी चूत मे छ्चोड़ रहा है. मैं समझ गई कि चाचा भी झाड़ चुके है और अपना लंड रस मेरी चूत मे डाल रहें है. वो मेरे उपर मुझसे चिपक कर लेटे थे और उनका लंबा मोटा लंड मेरी चूत मे नाचता हुआ अपना रस बरसा रहा था.

चाचा मेरे उपर लेटे हुए थे मुझ को ख़ुसी मे कस कर पकड़े हुए. मैं बहुत खुस थी कि मुझे जिंदगी मे पहली बार किसी मर्द से चुदाई करवाने का पूरा पूरा मज़ा मिला था. मेरी चूत मे फिर से थोड़ा थोड़ा दर्द होना सुरू हो गया था जो कि मेरे चाचा ने महसूस किया. उन्होने मेरे होंठो का चुंबन लिया और कहा " धन्यवाद मेरी छ्होटी डार्लिंग जूली अपनी कुँवारी चूत देने के लिए और मुझे मौका देने के लिए कि मैं तुम्हे लड़की से औरत बना सका."

और उन्होने धीरे से मेरी चूत से अपना लंड निकाल लिया. मैने देखा कि उनका लंड पूरा खून मे सना था. खून के साथ और भी सफेद सफेद सा लगा हुआ था उनके लंड पर. मैं जान गई थी कि वो सफेद सफेद सा उनके लंड का रस है जो मेरी चूत मे उन्होने छोड़ा था. मैने देखा कि हालाँकि उनका लंड अब भी उतना ही बड़ा था जीतना चोद्ते समय था पर वो अब उतना कड़क नही रहा था. थोड़ा मुलायम हो गया था. उनके लंड का मुँह नीचे की तरफ था जो कि चोद्ते वक़्त उपर था. मेरी चूत मे दर्द फिर बढ़ना सुरू हो गया था.

मैने देखा कि बेडशीट पर भी लाल लाल धब्बा लगा हुआ था. मेरी चूत के खून के साथ उनके लंड रस का धब्बा. उन्होने बेड शीट खींच ली बेड से तो मैने पाया कि गद्दे पर भी लाल धब्बा था. उन्होने अपना खून और लंड रस से भरा हुआ लंड चादर से पोंच्छा और मेरी चूत का बाहरी भाग भी उसी चादर से साफ किया. फिर उन्होने वो चादर एक प्लास्टिक की बॅग मे डाल दी. मेरी चूत का दर्द और भी बढ़ गया जब उन्होने उसको चादर से साफ किया था. मैं बड़ी मुश्किल से खड़ी हुई पर मैं बिल्कुल भी चल नही पाई. मेरी चूत से खून और उनका लंड रस अभी भी निकल रहा था और मैं बाथरूम जाकर मेरी चूत को सॉफ करना चाहती थी. चाचा मुश्कराए और उन्होने मुझे अपने हाथों मे एक बच्चे की तरह उठा लिया और बाथरूम की तरफ बढ़े. उन्होने मुझे बाथ टब के अंदर खड़ा किया और बोले " मैं तुम्हारी हेल्प करता हूँ सफाई करने मे."

उन्होने हॅंड शवर चालू किया और मुझे पैर चौड़े करने के लिए कहा. हॅंड शवर से उन्होने मेरी चूत पर पानी डाला तो मुझे बहुत अच्छा लगा. फिर उन्होने अपने हाथ का इस्तेमाल करके मेरी चूत और पैर पूरी तरह सॉफ कर्दिये. मैने उन्हे साबुन लगाने को कहा तो उन्होने मना कर्दिया और कहा कि अगर इस समय साबुन लगाया तो बहुत दर्द और बहुत जलन होगी. फिर वो भी बाथ टब के अंदर आ गये और और अपना लंड साबुन और शवर के पानी से सॉफ किया. हम बाथ टब से बाहर आए और अपना नंगा बदन टवल से पोंच्छा. उन्होने फिर से मुझे अपने हाथों मे उठाया और बेडरूम मे ले आए. उन्होने मुझे एक कुर्सी पर बिठाया और बिस्तर को पलंग पर पलट दिया.

अब मेरी चूत के खून का धब्बा बिस्तर पर नही दिख रहा था. वो बिस्तर के पलटने से नीचे छुप गया था. उन्होने एक नई चादर निकाली और उसको बिस्तर पर लगाया. उन्होने फिर से मुझे उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया. थोड़ा ठीक लग रहा था पर चूत मे दर्द अभी भी हो रहा था. वो वाइन की बॉटल लाए और दो ग्लास मे डाली वाइन एक ग्लास मुझे थमाया. मैने अभी तक कभी वाइन नही पी थी. एक कॅतोलिक होने के नाते हमारे घर पर वाइन होना या पीना आम बात थी पर मैने अभी तक टेस्ट नही की थी. वो बोले " ये प्योर् इटॅलियन रेड वाइन है. नुकसान नही करती है. पी लो. तुम्हे दर्द से आराम मिलेगा. मैं तो तुम्हारी चूत को भी ये वाइन पिलाने वाला हूँ." और वो हंस पड़े. मैने सोचा शायद मज़ाक कर रहें है. उन्होने कुछ कॉटन ( रूई) ली और उसको वाइन मे डुबोया. फिर वो बोले" थोड़ी जलन होगी पर जल्दी ही सब ठीक हो जाएगा."

उन्होने मुझे मेरे पैर चौड़े करने को कहा और मेरे ऐसा करने पर मेरी चूत की तरफ देखते हुए बोले, "थोड़ी सूजन है, कोई सीरीयस बात नही है." उन्होने वाइन मे डूबा कॉटन मेरी चूत मे डाल दिया और मुझे पैर सीधे करने को कहा. उन्होने मुझे सहारा दे कर बेड पर पीछे तकिया लगा कर दीवार के सहारे बिठा दिया. मैं आराम से बैठी हुई थी. मेरी चूत मे थोड़ा दर्द और थोड़ी जलन हो रही थी. जलन शायद वाइन से हो रही थी जो अब मेरी चूत के अंदर तक जा चुकी थी. लेकिन धीरे धीरे मुझे काफ़ी ठीक लगने लगा. चाचा ने मेरा वाइन ग्लास मुझे दिया और अपना ग्लास ले कर मेरे पास मेरे जैसे ही बैठ गये.

वो बोले " चियर्स!! मेरी जूली की पहली चुदाई के नाम. और ऐसी ही कई और चुदाई के नाम जो आने वाले समय मे होने वाली है. तुम्हारे चोदु चाचा की तरफ से ऑल दा बेस्ट." मैने भी कहा " चियर्स !! मेरे चोदु चाचा के नाम."

मैं वाइन पीते हुए उनका लंड देख रही थी. उनका लंड अब कोई चूहे जैसा लग रहा था जो उनकी गोलियों पर बैठा था. अब मुझे सब पता है लेकिन उस समय मैं इस के बारे मैं पूरी तरह नही जान ती थी. कारण कि मैने तब तक सिर्फ़ दो ही लंड देखे थे, एक अपने पापा का और दूसरा अपने चोदु चाचा का और दोनो को ही तने हुए, खड़े हुए देखा था. मैने कभी भी किसी लंड को उसकी नॉर्मल पोज़िशन मे आज के पहले नही देखा था. पहले मैं सोचती थी कि मर्द का लंड हमेशा ही खड़ा रहता है और तब मैने कई बार अपने पापा के लंड को उनकी पॅंट के अंदर देखने की कोशिश की थी और मैं समझ नही पाई थी कि अपने लंबे लंड को वो कैसे च्छूपाते थे पॅंट के अंदर. खड़े हुए लंड का उभार मुझे कभी भी उनकी पॅंट के उपर से नज़र नही आया था. मैं लगातार चाचा के बैठे हुए लंड की ओर देखे जा रही थी और सोच रही थी कि शायद ये मर्द के बस मे होता होगा कि जब चाहे खड़ा कर लिया और जब चाहे बिठा लिया.

मैने अपना एक हाथ बढ़ा कर उनके लंड को पकड़ा. उसको मेरी उंगलियों के बीच मसला, ओह........ क्या मस्त फीलिंग्स थी मेरी. ये तो बहुत ही नरम था, बिल्कुल मेरी चुचियों की तरह, सच कहूँ तो मेरी चुचियों से भी मुलायम. मैने जब चाचा से पूछा कि आप इसको जब चाहे लंबा और जब चाहे छोटा बना सकते है, तो वो धीरे से हँसे लगे. फिर उन्होने मुझे असली बात समझाई कि मर्द का लंड कैसे और कब खड़ा होता है और कैसे बैठता है. मर्द के लंड के खड़ा होने के पीछे उसकी चुदाई की सोच होती है. फिर उन्होने एक बहुत ही मज़े दार बात कही " ये लंड एक ऐसी चीज़ है दुनिया मैं जो सबसे हल्की भी है और सब से भारी भी. हल्की इसलिए कि सिर्फ़ सोच से खड़ा हो जाता है और सबसे भारी इसलिए कि जब खड़ा नही होता तो दुनिया की कोई ताक़त इसको पकड़ कर या उठा कर खड़ा नही कर सकती." दोस्तो ये बात सही है या ग़लत आप ही बताइए आपका दोस्त राज शर्मा

क्रमशः…………………
 
जुली को मिल गई मूली—5

गतान्क से आगे……………………………..

हम ने जब तक अपनी वाइन ख़तम की तब तक रात के 2 बज चुके थे. हालाँकि अब भी मेरी चूत मे हल्का हल्का दर्द था पर मैं अब अच्छा महसूस कर रही थी. चाचा ने कहा " जूली, मुझे लगता है कि कल तुम को स्कूल नही जाना चाहिए. अगर कल आराम करोगी तो दोपहर तक एक दम ठीक हो जाओगी. कल सिर दर्द का बहाना कर के अपनी मा से कह देना कि स्कूल नही जाओगी. मैं भी कल घर पर ही हूँ. क्या तुम चुदाई के बारे मे कुछ और सीखना चाहोगी?"

मैने कहा " हां, पर बहुत रात हो चुकी है."

चाचा बोले " कोई बात नही. थोड़ी सी देर लगेगी."

मैने कहा " ओके."

चाचा - " क्या तुम मेरा नरम लंड चूसना चाहोगी.??

मैं - ' हां. लेकिन मैं अभी दूसरी बार चुद्ने के लिए तय्यार नही हूँ"

चाचा - " नही, मैं और नही चोदुन्गा तुम को. मैं तो तुम को कुछ दिखाना चाहता हूँ. आओ और मेरे मुलायम लंड को अपने मुँह मे ले कर फ़र्क महसूस करो"

मैं आगे आई और चाचा का नरम और मुलायम लंड अपने मुँह मे डाला. मुझे उनका नरम लंड बहुत अच्छा लगा. नरम लंड की सबसे अच्छी बात ये थी कि मैने पूरे का पूरा लंड अपने मुँह मे ले लिया और उसको आइस क्रीम के जैसे चूसने लगी. तुरंत ही मैने महसूस किया कि चाचा का नरम लंड बड़ा होता जा रहा है जैसे उसमे हवा भरी जा रही हो. उनका लंड बड़ा और कड़क होता चला गया. जल्दी ही चाचा का लंड वैसा खड़ा हो गया जैसे लंड ने मुझे चोदा था. लंबा, बड़ा, मोटा और कड़क. जैसे जैसे उनका लंड बड़ा होता गया, मेरे मुँह से बाहर निकलता चला गया और अब मेरे मुँह मे सिर्फ़ उनके मोटे लंड का मुँह ही रह गया था जिस को मैं चूस रही थी. चाचा को मेरी लंड चुसाइ मे मज़ा आने लगा और वो मुझे और ज़ोर से चूसने को कहने लगे. मैने वैसा ही किया. फिर उन्होने मुझे लंड चूसने का सही तरीका बताया.

उन्होने अपने लंड के मुँह की चॅम्डी नीचे करके लंड के मुँह को बाहर निकाला, मेरे मुँह मे दिया और मुझे लंड को नीचे से पकड़ कर मूठ मारने को कहा. मैं उनके लंड का आगे का भाग चूस रही थी और नीचे के भाग को टाइट पकड़ कर उपर नीचे करते हुए मूठ मार रही थी. चाचा के मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी. मैं उनका लंड चूसने के साथ ही साथ मूठ भी मारती जा रही थी और मैने महसूस किया कि उनका पहले से मोटा लंड और भी मोटा और पहले से लंबा लंड और भी लंबा हो गया है.

वो बोले " ओके, जूली, क्या तुम मेरे लंड का स्वदिस्त रस पीना चाहती हो? तुम ने ज़रूर अपनी मा को पापा के लंड का रस पीते हुए देखा होगा कभी."

चाचा सही कह रहे थे. मैने कई बार अपनी मा को ऐसा करते हुए देखा था. मैने उनका लंड चूस्ते हुए और मूठ मारते हुए अपनी गर्दन "हां" मे हिलाई. मैं भी मर्द के लंड का रस चखना चाहती थी.

चाचा ने मुझे रुकने को कहा. अब उन्होने अपना लंड खुद के हाथ मे ले लिया था. वो अपना लंड पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से आगे - पीछे, उपर - नीचे करने लगे. मेरा मुँह अभी भी उनके हिलते हुए लंड के पास था. चाचा की पकड़ उनके खुद के लंड पर ज़ोर की थी और वो बहुत तेज़ी से अपने लंड को हिलाते हुए मूठ मार रहे थे जैसे कि कोई मशीन हो. वो अपनी मूठ मारने की स्पीड बढ़ाते गये, लंड को आगे-पीछे करते गये और फिर वो बोले" अपना मुँह खोलो बेबी. रस निकलने वाला है......... ओह....... आ......... ऊओह ........... ऊओह........ "

मेरा मुँह खुला हुआ था और मैं इंतेज़ार कर रही थी कि अचानक....... उनके लंड से सफेद धार निकली और मेरा मुँह भर गया. मैने अपना मुँह बंद किया और उनके लंड रस को पी गयी. मुझे वो बहुत अच्छा लगा. थोड़ा सा नमकीन सा था. उनके लंड से लगातार रस की धार निकलती जा रही थी और मेरी चुचियों पर गिरने लगी. उनका लंड रस निकालते हुए नाच रहा था. उनके लंड का कुछ रस उनके अपने हाथ पर भी लगा था. जब उन्होने अपने लंड पर से अपना हाथ हटाया तो मैने उनके हाथ को चाट कर सॉफ कर्दिया. उन्होने भी मेरी चुचियों पर लगा खुद का रस चाट कर साफ किया.

मैने अपने चाचा की आँखों मे पूरी तरह सन्तुस्ति के भाव देखे. मैं खड़ी हो कर फिर बाथरूम की तरफ बढ़ी अपने आप को सॉफ करने के लिए. मेरा दर्द अब काफ़ी कम हो गया था. मैने अपना बदन पानी से सॉफ किया और उसको पोन्छते हुए बाथरूम से बाहर आई. मैं बहुत धीरे धीरे चल रही थी क्यों कि वाइन मे डूबी कॉटन अभी भी मेरी चूत मे थी. फिर मेरे चाचा ने मुझे कपड़े पहनने से मना करते हुए बाथरूम गये और जब वापस आए तो उनके हाथ मे एक ट्यूब थी. वो मेरे पैरों के बीच मे बैठे और उनको चौड़ा किया. क्या चाचा फिर से चोद्ने जा रहें है मुझे, मैने सोचा. मैने कहा " चाचा. और नही आज. दर्द हो रहा है.

चाचा - "नही डार्लिंग, मैं चोद नही रहा हूँ. मैं कल भी नही चोदुन्गा तुझे. आज के लिए काफ़ी चुदाई हो गई तुम्हारी. अब जब तुम्हारी चूत बिल्कुल ठीक हो जाएगी तब चुदाई करेंगे. अभी तो मैं दवा लगा रहा हूँ तुम्हारी चूत मे ताकि तुम फिर से चुदाई के लिए दो तीन दिन मे तय्यार हो जाओ. फिर तुमको कोई दर्द नही होगा और सिर्फ़ मज़ा आएगा चुदाई का."

फिर उन्होने मेरी चूत से वाइन का कॉटन निकाल लिया और अपनी उंगली से धीरे धीरे मेरी चूत मे दवा लगाने लगे. उन्होने अपने हाथों से मेरी चूत पर हल्की सी मालिश की. अपनी उंगली मेरी चूत के होल मे डाल कर अंदर तक दवा लगाई. फिर उन्होने मेरी मदद की मेरे कपड़े पह्न ने मे. उन्होने अपने कपड़े भी पहने और कहा" आओ डार्लिंग. मैं तुम्हे तुम्हारे बिस्तर तक पहुँचा दूं." फिर पहले की तरह उन्होने मुझे अपनी बाहों मे उठाया और मुझे मेरे बेडरूम मे ले आए. वो मेरे कान मे बोले " स्वीट ड्रीम्स बेबी! सुबह मिलते है. कल स्कूल मत जाना" फिर उन्होने मेरा चुंबन लिया और मेरे बेडरूम का दरवाजा बंद करते हुए अपने बेडरूम मे चले गये. मेरी चूत का दर्द काफ़ी कम, ना के बराबर था अब.

फिर ये सोचते हुए ना जाने कब मेरी आँख लग गई कि आज मैने अपने चाचा से अपनी चूत की चमत्कारिक चुदाई करवा के अपनी चूत की चटनी बनवाई है. वाह मेरी चूत चोदु चाचा.

मैं अपनी नॉर्मल लाइफ एंजाय कर रही थी और साथ ही साथ अपनी सीक्रेट चुदाई की लाइफ भी एंजाय कर रही थी अपने चाचा के साथ. मेरी चुदाई चाचा के साथ बिना किसी को पता चले आराम से चल रही थी. अभी भी, जब भी मौका मिलता है, मैं अपने मा - बाप को चुदाई करते हुए ज़रूर देखती थी और चुदाई मेरे जीवन का एक ज़रूरी हिस्सा बन गयी थी.

मैने अपने चाचा से चुदाई के बारे मे बहुत कुछ या यूँ कहिए कि सब कुछ जान लिया था और मैं अपने आप को अब चुदाई की एक्सपर्ट समझती हूँ.

मेरे बदन मे अब तेज़ी से परिवर्तन होने लगे थे और मेरा बदन बहुत सुंदर हो चला था. पता नही इसके पीछे क्या कारण था, मेरी लगातार चुदाई या मेरी जवानी की तरफ बढ़ती उमर. मैं एक पूरी जवान लड़की लगने लगी थी अपनी 16/17 साल की उमर मे. मैं बहुत ही खूबसूरत हो गई थी और मेरे बदन का नाप ऐसा हो गया जो हर लड़की का सपना होता है. मैं जानती थी कि दूसरी लड़कियाँ मेरा सुंदर चेहरा और कटीला बदन देख कर मुझ से जलती थी. मेरी चुचियाँ कोई बहुत बड़ी नही थी लेकिन गोल गोल थी और कड़क थी जो किसी भी मर्द को आकर्षित कर लेती है. मेरी गोल गोल गंद बहुत अच्छे शेप मे विकसित हुई थी और जब मैं चलती हूँ तो बहुत ही सेक्सी अंदाज़ मे मटकती और हिलती है.

मैं यहाँ लिखना चाहूँगी कि मेरे चाचा और मैने चुदाई का कोई भी मौका कभी भी नही छ्चोड़ा था. जब भी मौका मिलता था हम ज़रूर चुदाई करते थे. कई बार तो हम ने फटाफट चुदाई भी की है जब दूसरा कोई आस पास हो या दूसरे कमरे मे हो. ऐसे रोमांच का मज़ा ही अलग है. कभी कभी जब मैं अचानक गरम हो जाती थी और चुदना चाहती थी तो हम एक फटाफट चुदाई कर लेते थे. कभी बाथरूम मे, कभी किचन मे, कभी सीढ़ियों मे, और कभी कभी तो कार की पिछली सीट पर, कार को किसी सुनसान रास्ते पर साइड मे पार्क करके. ऐसी फटाफट चुदाई मे हम अपने पूरे कपड़े नही उतार ते थे. मैं अपनी चड्डी उतार देती थी ताकि मौके के हिसाब से अपने पैर चौड़े कर सकूँ / फैला सकूँ ताकि चाचा मुझे आराम से चोद सके. या तो मैं अपनी नीचे पहनी हुई ड्रेस उपर कर लेती थी या नीचे सरका लेती थी. चाचा अपना लंड अपनी पॅंट की ज़िप खोल कर अपनी चड्डी के होल से बाहर निकाल लेते थे. इस तरह की फटाफट चुदाई मे दूसरे कामों मे वक़्त जाया ना करके हम सीधे सीधे चुदाई मे ही लगजाते थे. चाचा अपना लंड मेरी चूत मे घुसा कर मुझे फटाफट चोद देते थे और किसी को पता चलने के पहले ही हमारी चुदाई पूरी हो जाती थी बिल्कुल कम समय मे, फटा फट. इंग्लीश मे इसको "क्विकी" कहतें है.

मैने अपनी एचएससी की पढ़ाई पूरी करने के बाद कॉलेज मे अड्मिशन ले लिया था. अभी कॉलेज खुलने मे काफ़ी दिन थे तो मैं अपने पापा के बिज़्नेस मे उनका साथ देने लगी. मेरे पापा और चाचा का आम और काजू की खेती का बिज़्नेस है. मेरे चाचा इन चीज़ों की एक्सपोर्ट मार्केटिंग का काम देखते है. मैं भी उनका हाथ बाँटने लगी अपने फर्म प्रॉडक्ट्स की एक्सपोर्ट मार्केटिंग मे. मेरे पापा फार्म हाउस और खेती का काम देखतें है.

चाचा का जर्मनी और स्विट्ज़र्लॅंड जाने का प्रोग्राम बन रहा था काम के सिलसिले मे और उन्होने मेरे पापा से कहा कि कॉलेज खुलने मे अभी काफ़ी समय है तो ये अच्छा रहेगा अगर जूली भी उनके साथ जाए और उन लोगों से मिले जिनको हम एक्सपोर्ट करतें है. मेरे पापा ने हां करदी तो मैं अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए तय्यार होने लगी. हम ने स्विस एर की फ्लाइट से दो टिकेट ज़ूरिच (स्विट्ज़र्लॅंड) के बुक करवाए और हमारी फ़्लाइट मुंबई से थी.

हम ने गोआ से मुंबई की फ़्लाइट पकड़ी और मुंबई आ गये हमारी आगे की स्विट्ज़र्लॅंड की यात्रा के लिए. हम ने चेक इन किया और इंतेज़ार करने लगे. हमारी फ्लाइट छूटने का वक़्त रात के 1.20 का था. मैने देखा कि फ़्लाइट के लिए कोई ज़्यादा पॅसेंजर्स नही है. शायद फ्लाइट के लिए 50 से 55% पॅसेंजर्स ही थे. हम प्लेन के अंदर गये और हमारा प्लेन स्विट्ज़र्लॅंड के लिए उड़ा. वो एक लंबा सफ़र था करीब 8.5 घंटे का. स्विट्ज़र्लॅंड के टाइम के हिसाब से हम वहाँ सुबह 6.20 पर पहुँचने वाले थे. हम को 8.5 घंटे हवा मे रहना था. मैने देखा कि ज़्यादातर लोग एक या दो ड्रिंक लेने के बाद सो गये थे. हमारी सीट बीच मे 4 पॅसेंजर्स बैठने वाली जगह पर थी, पर बाकी की दो सीट खाली थी. चार की जगह पर हम दो ही, मैं और मेरे चाचा बैठे थे. मतलब हमारे पास पूरी जगह थी आराम करने की. चाचा पहली सीट पर बैठ गये और मुझे बाकी की तीन सीट्स का हॅंडेल उपर कर के सो जाने को कहा. मैने वैसा ही किया. मैं चाचा की गोद मे सिर रख कर आराम से सो गई. मेरा मुँह चाचा के पेट की तरफ था और मैने कंबल ओढ़ लिया अपनी गर्दन तक. प्लेन मे अंधेरा जैसा था क्यों कि कम रोशनी की लाइट ही जल रही थी और पूरी तरह शांति थी. चाचा का एक हाथ मेरे सिर पर था और वो प्यार से मेरे बालों मे हाथ फेरने लगे और मैने चाचा का दूसरा हाथ पकड़ कर कंबल के अंदर, मेरी चुचियों पर रखा और फिर मैं कब सो गई मुझे पता भी नही चला. मैने सपने मे देखा कि कोई कोई मेरे गालों पर बड़े प्यार से हाथ लगा रहा है. मुझे सपने मे बहुत ही अच्छा लग रहा था कि कोई मुझे प्यार कर रहा है. अचानक मेरी आँख खुल गई और मैने देखा की वो सपना नही था.
 
मैने उपर देखा तो पाया की चाचा गहरी नींद मे सो रहे थे. मैने अपने गाल के नीचे कुछ कड़क सा महसूस किया, वो तो चाचा का लंबा और मोटा लंड था जो कि मेरे गाल को छू रहा था. और इस से अंजान चाचा आराम से सो रहे थे. उनका लंड नींद मे ही खड़ा हो गया लगता था. दोस्तों....... आप शायद अब तक जान गये होंगे कि चाचा का लंड मेरी कमज़ोरी बन गया था और अब उनका खड़ा लंड मेरे गाल के नीचे मेरे बदन मे चुदाई की आग लगा रहा था. मैं चाचा की नींद खराब नही करना चाहती थी इस लिए मैं फिर से सोने की कोशिश करने लगी. लेकिन मैं क्या करती. मेरे बदन मे लगी चुदाई की आग मुझे सोने नही दे रही थी. मेरा दिल चुदाई करवाने के लिए मचलने लगा और मेरी चूत शायद तय्यार हो रही थी चाचा का लंबा और मोटा लंड लेने के लिए. मैने प्लेन मे इधर उधर देखा. सब लोग सोए हुए थे और कोई हलचल नही थी. मैने अपनी घड़ी देखी जिसमे कि मैने स्विस टाइम सेट करलिया था. उसमे 3.00 बजे थे. मतलब अभी भी हमारे पहुँचने मे 3 घंटे बाकी थे.

मैने सोचलिया कि इतना वक़्त तो काफ़ी था एक चुदाई के लिए. मैं और गरम होने लगी और मेरी चूत ने पानी छ्चोड़ना सुरू कर दिया था. मैने महसूस किया कि मेरी दोनो चुचियों की निपल भी मेरी ब्रा के अंदर तन कर खड़ी हो गई है. मैं सोच रही थी कि असली चुदाई तो शायद प्लेन मे संभव नही है. अगर हम सीट पर चुदाई करतें है तो किसी ना किसी का ध्यान हमारी ओर ज़रूर चला जाएगा. मैने अपना मन मसोस लिया कि जब चुदाई की ज़रूरत है तो चुदाई नहीं कर पाएँगे. पर मैने सोच लिया था कि कंबल के अंदर हाथ से ही एक दूसरे की चुदाई करेंगे ओर वो भी इतने लोगों के बीच, उड़ते हुए प्लेन मे, हवा मैं. मैने सोच लिया था कि चाचा का पानी उनका लंड हिला हिला कर निकाल दूँगी और वो मेरी चूत मे उंगली से मुझे चोद देंगे. दोनो का काम हो जाएगा.

चाचा अभी भी गहरी नींद मे थे और उनके लंड के कदकपन मे कोई कमी नही आई थी. मुझे तो लग रहा था कि वो और भी कड़क हो गया है. अपना काम करने के लिए मैने कंबल सिर तक ओढ़ कर अपना मुँह अंदर करलिया था ताकि जब मैं चाचा के लंड से खेलूँ, वो कंबल के अंदर ही, दूसरों की नज़र से दूर ही रहे और किसी को पता ना चले. मैने अपना हाथ अपने सिर की तरफ किया और साथ ही अपना सिर चाचा के घुटनों की तरफ सरकाया ताकि मैं उनका लंड उनकी पॅंट की ज़िप खोल कर बाहर निकाल सकूँ अपने हाथ और मुँह मे लेने के लिए. मैने जैसे ही चाचा की पॅंट की ज़िप खोली, चाचा जाग गये नींद से. वो समझ गये और उन्होने अपनी पोज़िशन थोड़ी सी चेंज करली और अपने पैर थोड़े से चौड़े कर लिए ताकि मैं आराम से उनका लंड बाहर निकाल सकूँ. चाचा की पॅंट की ज़िप खुली थी और अब बीच मे केवल उनकी चड्डी थी जिस के अंदर उनका प्यारा लंड था.

मैने हाथ से चड्डी का होल तलाश किया और अपनी उंगलियाँ अंदर डाल कर उनका लंड बाहर निकालने की कोशिश करने लगी. आप सब जानते होंगे कि खड़े लंड को चड्डी के होल से बाहर निकालना कितना मुश्किल है. खास करके कि जब मर्द कुर्सी पर बैठा हो. चाचा ने थोड़ी सहायता की और मैने उनका खड़ा हुआ लंड उनकी चड्डी से बाहर निकाल लिया. उनका गरमा गरम, पूरी तरह से तना हुआ, लंबा और मोटा लंड कंबल के नीचे मेरी आँखों के सामने था. मैने बिना कोई देर किए उसको अपने होंठो के बीच ले लिया. उनका लंड भी तब तक आगे से थोड़ा गीला था जो कि हमेशा हो जाता है चुदाई के पहले. मैं अपनी जीभ उनके लंड मुण्ड पर घूमने लगी. चाचा ने भी कंबल के अंदर अपना हाथ मेरी गीली चूत की तरफ बढ़ाया. मैं जीन्स और टी-शर्ट पहनी हुई थी. मेरी पोज़िशन ऐसी थी कि मैं अपनी साइड पर सोई हुई थी, यानी मेरा मुँह चाचा की तरफ था और मेरा सिर चाचा की गोदी मे था मेरे गाल के बल, मेरे पैर सीधे थे, एक पर दूसरा. चाचा ने अपना हाथ मेरी जीन के अंदर उपर से डाला और उनकी उंगलियाँ सीधे मेरी सॉफ सुथरी गीली चूत पर थी. यानी उनका हाथ मेरी जीन्स और चड्डी के अंदर था. पर फिर भी उनके लिए मेरी चूत मे उंगली करना मेरी पोज़िशन की वजह से आसान नही था.

मैने अपना उपर वाला पैर थोड़ा और उपर किया ताकि चाचा अपना काम ईज़िली कर सके. अब उनकी बीच की उंगली मेरी चूत के बीच घूम रही थी. क्यों कि मेरी चूत पहले से ही गीली थी, उनकी उंगली मेरी चूत के बीच आराम से घूम रही थी. उनकी मेरी चूत के बीच मे उंगली घूमने से मेरी चूत और गीली होने लगी थी. हम, मैं और चाचा एक बार फिर एक दूसरे से चुदाई वाला प्यार कर रहे थे पर इस बार हवा मे और तब जब कि दूसरे लोग हमारे आस पास थे, लेकिन अपनी अपनी सीट पर सोए हुए थे. अब चाचा तना हुआ आधा लंड मेरे मुँह मे था और मैं उनके लंड को बड़े प्यार से चूस रही थी.

चाचा का हाथ मेरी चूत पर चल रहा था और हम दोंनो एक दूसरे को मज़ा दे रहे थे. हम दोनो पूरी पूरी कोशिश कर रहे थे कि हमारे बदन मे कम से कम हलचल हो पर फिर भी हम हिल रहे थे, खास कर के मैं तो कुछ ज़्यादा ही हिल रही थी चाचा की उंगली अपनी चूत मे लेते हुए. मज़े के कारण मेरी गंद काफ़ी आगे पीछे हो रही थी. चाचा ने अपनी उंगली की स्पीड बढ़ाई और जवाब मे मैने भी उनका लंड चूसने की स्पीड बढ़ाई. चाचा ने महसूस करलिया था कि मैं पहुँचने वाली हूँ, मैं झरने वाली हूँ तो उन्होने अपना पूरा चुदाई का अनुभव लगा दिया मुझे मज़ा देने के लिए. मेरी गंद उनकी उंगली के चूत मे घूमने के मुताबिक आगे पीछे हिल रही थी और वो अपनी उंगली मेरी चूत मे अंदर बाहर कर रहे थे, यानी मुझे अपनी उंगली से चोद रहे थे. उनकी उंगली मे ही लंड का मज़ा आ रहा था. और अचानक ही मैं अपनी चुदाई की मंज़िल पर पहुँच गयी, यानी मैं झर चुकी थी और मैने चाचा का हाथ अपनी टाँगो के बीच भींच लिया था. मैं भी चाचा का लंड रस निकालना चाहती थी और मैने उनका लंड अपने मुँह से बाहर निकालकर, अपने हाथ मे पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से मूठ मारना सुरू कर्दिया था. यहाँ मैं बता दूं कि मेरे चाचा चुदाई के मामले मैं बहुत मज़बूत है और उनके लंड से पानी निकलने मे काफ़ी समय लगता है.
 
मैं ज़ोर ज़ोर से उनके लंड पर मूठ मारे जा रही थी, लंड को आगे पीछे कर रही थी की चाचा ने मुझे रोक दिया और मुझे टाय्लेट मे जाने को कहा और कहा कि दरवाजा बंद नही करूँ. मैं समझ गई कि अब मेरी असली चुदाई होने वाली है और वो भी प्लेन के टाय्लेट मे. चाचा अपना लंड मेरी चूत मे डाल कर मुझे चोदेन्गे. लेकिन मैं सोच रही थी कि प्लेन का टाय्लेट तो बहुत छ्होटा होता है, उसमे वो मुझे कैसे चोद पाएँगे. और फिर अगर किसी ने हम दोनो को एक ही टाय्लेट मे जाते हुए या वापस आते हुए देख लिया तो? चाचा ने आँखों ही आँखों मे मुझे समझाया और मैं एक टाय्लेट मे घुस गई. मैं सोच रही थी कि यहाँ किस पोज़िशन मे चुदाई हो सकती है कि चाचा अंदर आए और उन्होने दरवाजा अंदर से बंद करलिया. उन्होने मुझे कहा कि हम को जल्दी जल्दी चुदाई करनी पड़ेगी जैसा कि हम ने पहले भी कई बार किया है. उन्होने मेरी जीन के लिकिंटन खोल कर उसको नीचे किया और फिर मेरी चड्डी भी नीचे करदी. मैं आधी नंगी हो गई थी. उन्होने मुझे घुमाया तो मेरा मुँह टाय्लेट मे लगे मिरर और वॉश बेसिन की तरफ हो गया. उन्होने मुझे वॉश बेसिन का सहारा ले कर ज़रा झुकने को कहा. मैं समझ गई कि वो मुझे घोड़ी बना कर पीछे से चोदेन्गे. छ्होटी जगह मे चुदाई करने की इस से अच्छी पोज़िशन नही हो सकती. मैं वॉश बेसिन का सहारा ले कर घोड़ी सी बन गई ताकि मेरी चूत चाचा के सामने आ जाए.

मैने अपने पैर भी थोड़े से चौड़े कर लिए ताकि उनका लंड आराम से मेरी चूत तक पहुँच जाए. चाचा ने अपना पहले से तना हुआ गरम लंड अपनी पॅंट की ज़िप खोल कर बाहर निकाला और उसको मेरी चूत के दरवाजे पर पीछे से रखा. अपने दोनो हाथों से उन्होने मेरी गंद पीछे से पकड़ी और एक ज़ोर का धक्का मेरी चूत पर मारा. मेरी चूत तो पहले से ही गीली थी इस लिए उनका आधा लंड एक ही धक्के मे मेरी चूत मे घुस गया. चाचा ने अपना लंड थोड़ा बाहर निकाला और मेरी गंद पकड़ कर एक और धक्का मारा. अब चाचा का लंबा और मोटा लंड मेरी रसीली चूत मे अंदर तक घुस चुका था और चाचा ने हाथो हाथ मेरी चूत मे अपने लंड से धक्के मारते हुए अंदर बाहर करने लगे. रोज़ के मुक़ाबले उनके लंड के धक्कों की रफ़्तार तेज थी और उनका लंड तेज़ी से मेरी चूत मे अंदर बाहर हो रहा था. हम दोनो को ही चुदाई का मज़ा आ रहा था. उनके लंड के धक्कों की रफ़्तार इतनी तेज थी कि मैं समझ गई कि जल्दी ही हम दोनो अपनी मंज़िल पर पहुँच जाएँगे.

मेरी चूत ने और रस छ्चोड़ा और प्लेन के टाय्लेट मे चुदाई का मधुर संगीत गूँज उठा. उनका पेट जब धक्के मारते हुए मेरी गंद से टकरा रहा था तब भी फक फक...... ठक ठक की आवाज़ें आ रही थी. उनके लंड के नीचे की गोलियाँ भी उनके हर धक्के के साथ मेरे पैरों के बीच टकरा रही थी. हमारी चुदाई का काम, एक उड़ते हुए प्लेन के टाय्लेट मे, सुबह सुबह जल्दी, मेरी पहली विदेश यात्रा के दौरान, मंज़िल पर पहुँचने के बिल्कुल पहले हो रहा था. क्या सुखद एहसास था कि मैं अपने चाचा से घोड़ी बनी हुई उड़ते हुए प्लेन मे चुद रही थी. उस छ्होटी सी जगह मे मैं भी चुदाई मे बराबर चाचा का साथ दे रही थी. अपनी गंद उनके धक्के के साथ आगे पीछे कर रही थी. चाचा ने और स्पीड बढ़ा चुदाई की और मैं एक बार फिर अपनी चुदाई की मंज़िल पर पहुँचने वाली थी. चाचा मुझे तेज़ी से चोद रहे थे ताकि उनका भी जल्दी ही निकल जाए. तेज.......... तेज......... तेज और तेज......... मेरी चूत मे उनका लंड धक्के लगाते हुए अंदर बाहर हो रहा था.

अचानक ही मैं पहुँच गई थी.

मेरा हो गया था.

मैं झर गई थी.

बहुत ही मज़ा आया था. शानदार चुदाई और जानदार मज़ा. लेकिन चाचा अभी भी धक्के लगा रहे थे, अपने लंड को तेज़ी से मेरी चूत मे अंदर तक डाल रहे थे और बाहर निकाल रहे थे. चोद रहे थे मुझे पूरी मस्ती में, पूरी तेज़ी से. मैं भी झरने के बावजूद उनका पूरा साथ दे रही थी कि उनका भी पानी निकले और उनको भी चुदाई का आनंद मिले. अचानक उन्होने अपना लंड मेरी चूत की गहराई तक घुसा दिया और मुझ पर पीछे से झुक गये. उनका लंड अपने प्यार के पानी की बरसात मेरी चूत के अंदर करने लगा. मैने उनके लंड का गरम गरम रस अपनी चूत के अंदर महसूस किया. उन्होने अपने दोनो हाथ मेरी गंद पर से हटा कर मस्ती के मारे मेरी दोनो चुचियाँ दबाई. उनका लंड अभी भी मेरी चूत मे नाच रहा था. हम दोनो कुछ देर उसी पोज़िशन मे रहे अपनी चुदाई के मज़े और सन्तुस्ति को महसूस करते हुए.

फिर चाचा ने अपना नरम हो चला लंड मेरी चूत से बाहर निकाला और उसको टिश्यू पेपर से सॉफ करने लगे. अपना लंड सॉफ करने के बाद उन्होने उसको वापस अपनी पॅंट और चड्डी के अंदर डाला. उन्होने मुझको अपनी चूत की सफाई करने के बाद बाहर सीट पर आने को कहा और धीरे से टाय्लेट का दरवाजा खोल कर बाहर देखा. उन्होने मुझे कहा कि बाहर सब कुछ वैसा ही है, कोई हलचल नही है और वो मुझे दरवाजा अंदर से बंद करने को कह कर टाय्लेट से बाहर निकल गये. मैने टाय्लेट का दरवाजा अंदर से बंद करके टाय्लेट सीट पर बैठ गई ताकि चाचा के लंड से मेरी चूत मे छ्चोड़ा गया रस बाहर निकल आए. मेरी आँखें चुदाई के आनंद और सन्तुस्ति से बंद थी. उनके लंड का रस मेरी चूत से बाहर निकल गया और मैने अपनी चूत को पानी से धोने के बाद टाय्लेट पेपर से सॉफ किया. मैने अपनी चड्डी पहनी, जीन्स पहनी और टाय्लेट से बाहर निकल आई. चाचा अपनी सीट पर बैठे हुए थे और मैं उनके बगल मे जा कर बैठ गई. मैने अपना सिर उनके कंधे पर रखा और अपनी आँखें बंद करली. मैं कितनी किस्मत वाली हूँ जो मुझे मेरे चाचा से चुदाई करवाने का मौका मिल रहा था.

कुछ देर बाद प्लेन मे हलचल हुई और हम को चाइ, कॉफी और नाश्ता सर्व किया गया. हम दोनो फिर से टाय्लेट गये लेकिन इस बार साथ मे नही, अलग अलग वक़्त पर अलग अलग टाय्लेट मैं. हा...... हा.......... हा..........

सुबह के 5.30 बज चुके थे और हम को स्विट्ज़र्लॅंड का खूबसूरत नज़ारा होने लगा था और मैं अपना पहला कदम विदेश की धरती पर रखने जा रही थी. मेरे सपनो का देश........ स्विट्ज़र्लॅंड. तो दोस्तो कैसी लगी हवा मे चुदाई ज़रूर बताना आपका दोस्त राज शर्मा

क्रमशः…………………
 
गतान्क से आगे……………………………..

मेरी उमर उस समय 18 साल की थी और मैं गोआ की एक कॉलेज मे पहले साल कॉमर्स मे पढ़ती थी. मेरी कॉलेज मेरे घर से करीब 20 किमी. दूर थी. मैने अपने पापा से कॉलेज आने जाने के लिए एक स्कूटर माँगा तो पापा ने मुझे एक साल और वेट करने को कहा और मुझे बस मे कॉलेज आने जाने की सलाह दी. बस हमारे घर के पास से ही जाती थी और कॉलेज के गेट तक जाती थी. बस सर्विस बहुत रेग्युलर थी. मेरी दोस्त आंजेलीना भी मेरे साथ मेरी क्लास मे ही थी. हम दोनो साथ साथ ही कॉलेज जाती थी.

मैने देखा कि एक बहुत ही सुंदर लड़का उसी बस मे हमेशा आता जाता था जो कि हमारे कॉलेज मे ही पढ़ता था. मेरी दोस्त आंजेलीना ने भी ये नोट किया था और मुझे बताया कि वो लड़का हमेशा मुझ को ही देखा करता था जब मेरी नज़र कहीं और होती थी. वैसे मैं भी उसको देखा करती थी क्यों कि वो बहुत ही सुंदर, स्मार्ट और अच्छे घर का एक अच्छा लड़का लगता था. शायद मैं मन ही मन मे उसको प्यार करने लगी थी और लगता था वो भी मुझको पसंद करता है.

कुछ दिनो के बाद आंजेलीना ने मुझे बताया कि वो लड़का हमारे कॉलेज मे फाइनल एअर मे पढ़ता है. उस का नाम रमेश है. वो बहुत ही बरिल्लिएंट स्टूडेंट है इस कॉलेज का. आंजेलीना ने मुझे ये भी बताया कि वो हिंदू है और मैं कॅतोलिक लड़की हूँ, इस लिए उसके बारे मे ज़्यादा सीरियस्ली सोचने की ज़रूरत नही है. उस ने मुझ से कहा कि अगर मैं उस के साथ मज़े करना चाहूं तो कोई बात नही है पर उस के साथ सीरीयस रीलेशन शिप यानी प्यार ना करूँ. पर आंजेलीना को क्या पता था कि मेरे सोचने का तरीका अलग है. मुझे वो सचमुच बहुत अच्छा लगता था.

एक दिन, मैं अकेली थी बस मे कॉलेज जाते समय, आंजेलीना मेरे साथ नही थी. बस मे काफ़ी भीड़ थी और बैठने की कोई जगह नही थी. मैने देखा कि रमेश भी उसी बस मे था हमेशा की तरह और मुझ से कुछ सीट पीछे बैठा था जहाँ मैं खड़ी थी. उस ने मुझे इशारे से अपनी सीट ऑफर की तो मैने हाथ हिला कर धन्यवाद का सिग्नल दिया और अपनी जगह खड़ी रही. ये हमारे बीच मे पहला संपर्क था. अचानक खड़े हुए मैने अपनी गंद पर कुछ महसूस किया और मूड कर देखा तो एक आदमी था जो अपना खड़ा हुआ कड़क लंड पीछे से मेरी गंद पर रगड़ रहा था. मैं चुदाई के बारे मे जानती थी इस लिए समझ गई कि वो क्या कर रहा है. मैं आप को बता दूं कि मैं ऐसी बातों मे चुप रहने वाली लड़की नही थी. पहले तो मैने सोचा कि ये सब शायद अंजाने मे हो गया होगा. बेचारे का लंड खड़ा हो गया होगा और अंजाने मे ही मेरी गंद पर लग गया होगा. अगर ऐसा होता तो मैं चुप ही रहती. मगर जल्दी ही मैं समझ गई कि वो ये सब जान भूझ कर कर रहा है. उस ने अपना खड़ा लंड बार बार, बस के हर धक्के से साथ मेरी गंद पर दबाना सुरू कर दिया था. मैने उसको सबक सिखाने की सोच ली. मैने अपना हाथ पीछे किया और धीरे से उसके खड़े हुए लंड को हाथ लगाया. वो बहुत ही खुस हुआ ये देख कर कि मैने उसके लंड पर हाथ रखा है. वो समझ रहा था कि मैं उस से पट गई थी और उसका लंड मुझ को अच्छा लग रहा था. वो तो फिर ज़ोर ज़ोर से अपना कड़ा हुआ लंड पीछे से मेरी गंद पर रगड़ने लगा था. वो समझ रहा था कि मैं उसका लंड अपने हाथ मे पकड़ना चाहती हूँ. अचानक मैने उसके लंड को अपने हाथ मे पकड़ कर निचोड़ दिया ज़ोर से. दर्द के मारे वो हवा मे उच्छल पड़ा और ज़ोर से चिल्लाया. बस मे सब उसकी तरफ देखने लगे और पूछने लगे कि क्या हुआ? अब वो कैसे किसी को बताता कि क्या हुआ. उस ने कंडक्टर से बस रोकने को कहा और बोला कि उसकी तबीयत ठीक नही है और वो उतरना चाहता है, और वो बस से नीचे उतर गया.

आख़िर बस कॉलेज के सामने पहुँची और मैं बस से उतर गई. मैने देखा कि रमेश भी पीछे के दरवाजे से उतर गया था.

” हेलो……. मेरा नाम रमेश है और मैं भी इसी कॉलेज मे पढ़ता हूँ.” मैने पहली बार उसकी आवाज़ सुनी.

“हेलो …… मैं जूली हूँ.” मैने जवाब दिया.

रमेश – ” तुम से मिल कर अच्छा लगा जूली.”

मैं – ” मुझे भी तुम से मिल कर अच्छा लगा रमेश.”

रमेश – ” मैने देखा जो बस मे हुआ था.”

मैं – ” क्या हुआ था? कुछ भी तो नही हुआ था.”

रमेश – ” मैं बता नही सकता, पर मैने सब देखा. वो क्या कर रहा था और कैसे तुम ने जवाब दिया. मुझे अच्छा लगा”

मैं – ” मैं ऐसा ही जवाब देने वाली लड़की हूँ.”

रमेश – ” मुझे भी ऐसा जवाब देने वाली लड़की पसंद है. मैं रोज़ तुम को बस मे देखता हूँ. मैं यहाँ फाइनल एअर मे हूँ. क्या तुम मुझ से दोस्ती करना पसंद करोगी?”

मैं- ” हां. मैं इसी बस से रोज़ आती जाती हूँ. मुझे तुम्हारी दोस्त बन कर खुशी होगी.”

रमेश – ” तो फिर ठीक है. आज से हम दोनो दोस्त है और बस मे हम साथ साथ सफ़र करेंगे. ठीक है?”

मैं – ” ठीक है रमेश. हम को अब अपनी क्लास मे जाना चाहिए.”

और हम अपनी अपनी क्लासस मे चले गये. अब हम तीनो रोज बस मे साथ साथ आने जाने लगे, मैं, आंजेलीना और रमेश. कभी कभी हम तीनो कॅंटीन मे भी साथ साथ जाते थे. मैने महसूस किया कि रमेश भी मुझ से प्यार करने लगा है. मुझे छुने का वो कोई भी मौका नही छ्चोड़ता था. एक दिन मैने आंजेलीना से कहा कि लगता है वो भी मुझ से प्यार करता है, लेकिन उसने कभी अपने मूह से नही कहा. आंजेलीना ने कहा कि वो इस बारे मे उस से जल्दी बात करेगी. तब तक हम सिर्फ़ अच्छे दोस्त ही बने रहे.
 
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