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तड़पति जवानी compleet

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तड़पति जवानी-पार्ट-22

गतान्क से आगे.........

पर मुझे उस वक़्त तसल्ली से ज़्यादा अनिता की फिकर हो रही थी इस लिए मैं उन दोनो के लाख रोकने पर भी नही रुकी और वहाँ से बाहर निकल आई और उस तरफ़ जिस तरफ अनिता गयी थी उस दिशा मे चल दी. पूरे रास्ते चलते हुए मेरे कई उल्टे सीधे ख्यालात आ रहे थे समझ मे नही आ रहा था कि वो उस रिक्शे वाले को ढूँढने कहाँ पर गयी होगी.. धूप इतनी तेज पड़ रही थी कि थोड़े दूर चलते ही मेरा सर तेज धूप से चकराने लगा मुझे चक्कर से आने लग गये थे. थोड़ी छाँव की तलाश करते हुए मैं इधर उधर देखने लगी पर कही कोई छायादार जगह दिखाई ही नही दे रही थी हर तरफ बस खेत ही खेत और सर के उपर सूरज से निकलती हुई आग… गर्मी के कारण मेरा पूरा गला सुख गया था मुझे बोहोत जोरो की प्यास लगी हुई थी.

मैं मन ही मन अनिता को और फिर अपने आप को कोसने लग गयी. की मैं अनिता के साथ आई ही क्यू यहाँ ?

पर अब किया भी क्या जा सकता था चलते चलते थोड़ी ही दूरी पर एक झोपड़ी सी नज़र आने लगी जो एक खेत मे बनी हुई थी. उसके छप्पर मे थोड़ी छाया सी दिखाई दी और साथ ही एक हॅंड-पंप भी प्यास तो बोहोत ज़ोर से लगी हुई थी हॅंड-पंप देख कर मुझसे रहा नही गया और मैं सीधा उस झोपड़ी की तरफ चल दी.

झूपड़ी के पास आते ही मुझे झूपड़ी के अंदर से आपस मे बात करने की आवाज़े आती हुई सुनाई दी.. अंदर से जो आवाज़े आ रही थी ऐसा लग रहा था जैसे मैने वो आवाज़ पहले भी कही सुनी है. उन आवाज़ो को सोचने के चक्कर मे मे अपनी प्यास को भूल गयी और मेरे कदम खुद-ब-खुद उस झोपड़ी के दरवाजे की तरफ हो लिए.

जैसे ही मैं झोपड़ी के थोड़े और पास आई और जब आवाज़ दोबारा से आई तो मेरा मुँह खुला का खुला रह गया. अंदर से आती हुई आवाज़े किसी और की नही बल्कि अनिता की थी. और दूसरे आवाज़ उस लड़के की जो कल रात अमित के साथ था.

“दीपक मुझे बोहोत डर लग रहा है” अनिता की आवाज़ मे कुछ ऐसा था जो जिस कारण उसकी आवाज़ बोहोत डरी हुई सी लग रही थी या तो वो… अंदर वो सब कुछ चुकी थी या करने के लिए डर रही थी.

“मैने कहा ना कुछ नही होगा, तुम तो बेकार मे डर रही हो. अगर कुछ हुआ भी तो मैं हू ना.” उस लड़के की आवाज़ आती है..

“मुझे बोहोत डर लग रहा है दीपक” अनिता की आवाज़ मे एक डर सॉफ झलक रहा था.

“डरने वाली कोई बात नही है. ये तो हर लड़की के साथ होता है जब पहली बार करते है तो ऐसा ही होता है. अगर तुम्हे मेरी बात पर भरोसा ना हो तो अपनी किसी सहेली से पूछ लेना. इस खून को देख कर तुम्हे डरने की कोई ज़रूरत नही है.” उस लड़के की बात सुन कर मेरा शक़ यकीन मे बदल गया.

मैं झोपड़ी के बाहर खड़ी हुई थी सर पर बुरी तरह से धूप पड़ रही थी और पूरा गला भी सुख रहा था. मुझे समझ मे नही आ रहा था कि क्या करू. क्या मेरा दरवाजा खटखटा कर दोनो को डांटना सही होगा. जो ये दोनो कर रहे है वो ग़लत है.

“नही दीपक अब नही बोहोत दर्द हो रहा है..” अनिता की दर्द भरी आवाज़ मेरे कानो मे पड़ी.

“अरे बिल्कुल दर्द नही होगा.. जितना दर्द होना था वो हो गया अब सिर्फ़ मज़ा आएगा. ऐसा मज़ा जो तुम्हे कभी नही आया होगा. बस तुम थोड़ा सा खुल जाओ.”

“दीपक बोहोत देर हो गयी है. भाभी भी परेशान हो रही होगी.” अनिता की वही दर्द भरी आवाज़.

“बस 10 मिनट की बात है अनिता..”

उन दोनो की बाते सुन कर मेरी हालत जो गर्मी की वजह से पहले ही खराब थी और भी ज़्यादा खराब होने लग गयी. मेरी छाती के दोनो उभार एक दम सख़्त होने लग गये और नीचे मेरी योनि ने अपनी लार टपकाना शुरू कर दिया. सर पर गिरती तेज धूप जो थोड़ी देर पहले तक परेशान कर रही थी अब तो उसका नाम ओ निशान भी महसूस नही हो रहा था.

“थोड़ा इधर की तरफ हो जाओ.” उस लड़के की आवाज़ सुन कर सॉफ पता चल रहा था कि वो क्या करने की कह रहा था. मेरा मन अब और भी ज़्यादा बेचैन होने लग गया था. मेरी निगाहे इधर उधर अंदर का नज़ारा देखनेके लिए बेचैन होने लग गयी. थोड़ी देर इधर उधर देखने के बाद मैं जैसे ही झोपड़ी के दूसरी तरफ को गयी वहाँ पर छाँव भी अच्छी थी और दूसरा खिड़की भी बनी हुई थी.. खिड़की ज़्यादा बड़ी नही थी छ्होटी सी थी पर अंदर का नज़ारा देखने के लिए काफ़ी थी. पर उस खिड़की से अंदर देखने मे एक मुस्किल थी वो खिड़की थोड़ा उपर की तरफ थी और मैं उस खिड़की पर ठीक से नही पहुँच पा रही थी. कई बार मैने उचक कर अंदर देखने की कोसिस की पर नही देख सकी. पास ही पड़े एक पत्थर पर निगाह पड़ते ही मैने उसे खिड़की के नीचे लगाया और उस पर खड़े हो कर देखने लगी उस पत्थर को लगाने के बादभी मुझे अपने दोनो पंजो पर खड़े हो कर देखना पड़ रहा था. अंदर का नज़ारा देख कर मेरा मुँह खुला का खुला रह गया.

झोपड़ी के अंदर ज़मीन पर अनिता एक दम नंगी लेटी हुई थी और उसके पास ही वो लड़का दीपक बैठा हुआ था. जहाँ अनिता लेटी थी उसकी दोनो टाँगो के नीचे और उसकी योनि पर लाल लाल खून के दाग लगे हुए थे जिस से सॉफ पता चल रहा था कि उसने अपनी वर्जिनिटी खो दी है. अनिता से हट कर जब मेरी नज़र उस लड़के पर पड़ी तो मेरी आँखे एक दम हैरत मे खो गयी. उस लड़के का लिंग भी अमित के जैसा ही भीमकाय था. पर अमित और उसमे काफ़ी फ़र्क था.. जहा अमित एक दम देहाती अनपढ़ गँवार लगता था वही वो पढ़ा लिखा स्मार्ट था. उसका लिंग पूरी तरह से तना हुआ था और उसके लिंग पर भी खून के लाल लाल धब्बे लगे हुए थे. उसका लिंग पूरी तरह तन कर उपर नीचे की तरफ झटके ले रहा था.
 
वो वही अनिता के पास ही बैठा हुआ था उसका चेहरा अनिता के चेहरे के उपर झुका हुआ था. और उसका एक हाथ अनिता के उरोज को पकड़ कर मसल रहा था और दूसरा हाथ अनिता के नितंबो पर था जो उसे सख्ती के साथ मसल रहे थे. बाहर से खड़े हो कर देखने और उपर की तरफ उचकने की वजह से मेरे पैरो मे काफ़ी दर्द सा महसूस होने लग गया. पर उस समय तो जैसे मुझे वो दोनो आगे क्या करते है ये देखना ज़्यादा इंपॉर्टेंट लग रहा था.

वो लड़का अनिता के उपर और ज़्यादा झुका और उसके होंठो को अपने होंठ से जकड़ने ही वाला था कि अनिता ने उसकी आँखो मे आँखे डाल कर फर्याद करते हुए लहजे मे कहा.

“प्लीज़ दीपक मान जाओ ना.. बोहोत लेट हो गयी हू.. अगर भाभी घर चली गयी बिना मुझे लिए तो मेरे लिए दिक्कत हो जाएगी..”

“बस एक बार करूगा फिर तुम आराम से चली जाना” कह कर उसने अपने होंठो को अनिता के होंठो पर टिका दिया.

उन दोनो को यूँ किस्सिंग करते हुए देख कर मेरी खुद की योनि मे जैसा आग सी लगी जा रही थी जिसकी वजह से वो और भी ज़्यादा पानी बहाने लग गयी. पता नही ये सब अचानक से मेरे साथ क्या होने लग गया था. मैं कभी भी इस तरह की नही थी जैसी की आज हो गयी हू.. ये सब उस अमित की वजह से हुआ है ना वो हमारे घर आता ना हम दोनो के बीच मे वो सब होता और ना ही मैं इस तरह से ये सब… ऐसा ख़याल आते ही एक पल के लिए मुझे अपने आप पर शरम सी आई और मैं वहाँ से हटने ही वाली थी की अंदर से आती हुई अनिता की सिसकारी ने मेरे पूरे तन बदन मे एक सनसनी सी दौड़ा दी…

ष्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…

… आआआआआईयईईईईईइइम्म्म्ममाआआअ….

और मैं वापस खिड़की जा लगी.. अंदर देखा तो उस लड़के ने अनिता के होंठो को छ्चोड़ कर अपना मुँह उसके उरोज पर लगा दिया है और बारी बारी से उसके दोनो उरोजो को ज़ोर ज़ोर से चूसे जारहा था. और अनिता मस्त हो कर उसके साथ मज़े लेते हुए सिसकारिया निकाल रही थी. उरोज चूस्ते हुए ही उस लड़के ने अपने एक हाथ को अनिता की योनि पर रख दिया और उसकी योनि पर बोहोत आराम से उपर नीचे फिराने लग गया. वो अपने हाथ को थोड़ी देर तक तो गोल गोल घुमाता रहा लेकिन थोड़ी ही देर मे उसने अपने हाथ को घुमाने की जगह पर अपनी उंगलियो को अनिता की योनि पर उपर नीचे करना शुरू कर दिया जिस से अनिता और भी बुरी तरह से मचलने लग गयी और उसकी सिसकारियो की आवाज़े और भी तेज हो गई.

अनिता के मुँह से निकलती हुई आवाज़े मुझ पर एक अजीब ही तरह का नशा कर रही थी जिस से मेरे पूरे शरीर मे एक अजीब ही किस्म की सनसनी सी होने लग गयी थी सोचने-समझने की तो जैसे मुझमे ज़रा भी ताक़त ही नही थी. उस लड़के का हाथ धीरे धीरे उसकी योनि पर तेज़ी के साथ चलने लग गया, जिस से अनिता और भी बुरी तरह से मचलने लग गयी उसके मचलने की हालत इस बात से ही पता चल रही थी कि वो अपने दोनो नितंबो को हवा मे उठा कर उस लड़के के हाथ पर रगड़ रही थी. अनिता ने अपनी दोनो आँखे बंद कर ली थी. और वो आँखे बंद किए हुए ही अपने नितंब को उठा कर उस लड़के के साथ मज़े ले रही थी. अनिता के नितंबो को उठाने से उसका पूरा शरीर इस तरह से हिल रहा था कि उसके दोनो उरोज एक दम से उपर हवा मे उठ जाते और फिर एक ही पल मे नीचे की तरफ हो जाते.

ये सब नज़ारा देख कर मेरी हालत और भी ज़्यादा खराब हो गयी. गर्मी से मेरा गला जो पहले ही सूखा हुआ था ये सब देखने के बाद तो हालत और भी ज़्यादा खराब हो गयी थी. दोनो पैरो के पंजो पर खड़े हो कर देखने की वजह से मेरी योनि से बहता हुआ पानी मेरी दोनो टाँगो पर गिर कर चिपकने लग गया था. जो मुझे और भी अजीब हालत मे ले जा रहा था. मैने अपना एक हाथ उपर खिड़की से हटा कर अपनी योनि पर रख कर योनि को सहलाना शुरू कर दिया और अपने दोनो उरोजो को उस झोपड़ी से दबाने लगी. जैसे जैसे मेरा हाथ मेरी योनि पर चल रहा था और अंदर से अनिता की सिसकारियो की आवाज़ो ने तो जैसे मुझे एक अलग ही दुनिया मे ले जा कर खड़ा कर दिया और उस मदहोशी के आलम मे मेरा हाथ मेरी योनि पर और भी तेज़ी के साथ चलने लगा.. मेरी दोनो आँखे अपने आप बंद हो कर उस पल मे डूबने लग गयी.

अभी मुझे अपनी आँखे बंद किए हुए कुछ ही पल हुए थे की अचानक से अंदर से अनिता की एक दर्द भरी आवाज़ ने मुझे मेरी आँखे खोलने पर मजबूर कर दिया. मैने अपने हाथ को अपनी योनि से हटा कर वापस खिड़की पर टिका दिया और पंजो पर उचक कर देखा तो उस लड़के ने अपनी दो उंगली अनिता की योनि मे डाल दी है और उसे बड़े मज़े के साथ उसकी योनि मे घुमा रहा है. वो अपनी उंगलियो को पूरी तेज़ी के साथ उसकी योनि मे अंदर बाहर कर रहा था और अनिता ने उसके सर को अपने दोनो हाथो से कस कर पकड़ लिया था. उसकी तेज़ी के साथ चलती हुई उंगलिया पूरी तरह से अनिता के योनि रस मे गीली हो चुकी थी. अचानक उसने अपनी तेज़ी के साथ चलती हुई उंगलियो को रोका और अनिता की योनि से अपनी उंगलियो को बाहर निकाल कर अपने मुँह के करीब तक लाया और बोहोत धीरे से शायद उसकी खुद की साँसे भी मदहोशी के कारण उखड़ सी गयी थी बोला-

 
“अनिता तुम्हारी चूत से आती हुई खुसबू ने तो मुझे पागल ही कर दिया है पानी का टेस्ट करके भी देखु कि वो कितना मजेदार है” बोल कर उसने अपनी दोनो उंगलिया अपने मुँह मे डाल ली और लोलीपोप के जैसे उन्हे चूसने लग गया.

अनिता उसकी इस हरकत को देख कर पहले तो मुस्कुराइ और फिर शरम के कारण अपने दोनो हाथो से अपना चेहरा ढँक लिया.

“जल्दी करो दीपक वहाँ दुकान पर भाभी मेरा इंतजार कर रही होगी” अनिता ने वैसे ही अपने हाथो को अपने चेहरे पर लगाए हुए ही कहा.

“भाभी की चिंता हो रही है… और मैं..!!! जो इतने दिनो से तुम्हारे लिए पागल दीवानो की तरह से घूम रहा था उसका कुछ नही ?” कह कर वो अनिता के पास से खिसक कर अनिता की दोनो टाँगो के बीच मे आ गया… उसके लिंग ने पहले से भी तेज़ी के साथ उपर नीचे की तरफ झटके लेना शुरू कर दिया था. अनिता की दोनो टाँगो के बीच मे आ कर उसने उसकी दोनो टाँगो को पूरी तरह से फैला दिया और अपना मुँह अनिता की योनि पर लगा दिया. उस लड़के ने जैसे ही अपनी जीभ को योनि पर घुमाया अनिता के पूरे शेरर मे एक झटका सा लगा और उसने उस लड़के के सर को पकड़ कर अपनी योनि पर दबा दिया.

थोड़ी देर उसने उसकी योनि को अपनी जीभ से चाटना चालू रखा. वो कभी तो अपनी जीभ को अनिता की योनि पर उपर से नीचे तक घुमाता तो कभी अपनी जीब को उसकी योनि के अंदर डाल देता. इस सब से अनिता बोहोत खुस हो कर मज़े ले रही थी. पर ये सब देख कर मेरी हालत और भी ज़्यादा खराब होती जा रही थी. धूप और गर्मी की वजह से मेरी हालत वैसे ही खराब थी उपर से ये सब देख कर तो और भी ज़्यादा हो गयी. अंदर का नज़ारा देख कर मेरा हाथ वापस मेरी योनि को प्यार से सहला कर दिलासा देने लग गया.

“दीपक और तेज बस मे झड़ने वाली हू.. आअहह दीपक तेज और तेज…” अंदर से आती हुई आवाज़ ने मुझे फिर से अंदर झाँकने पर मजबूर कर दिया. अंदर देखा तो अनिता अपने दोनो नितंबो को हवा मे उठा कर उस लड़के के मुँह पे ज़्यादा से ज़्यादा दबाने की कोसिस कर रही थी. शायद वो अपनी आखरी मंज़िल पर थी. इस लिए वो पूरी मस्ती के साथ अपने नितंबो को हवा मे उपर उठा रही थी. वो पूरी मस्ती मे आई ही थी कि वो लड़का एका एक रुक गया. और उसको उल्टा होने का इशारा करने लग गया.

अनिता इस समय पूरी मस्ती मे थी इस लिए वो बिना किसी जवाब सवाल के पलट गयी. अब अनिता के नितंब ठीक उस लड़के के लिंग से रगड़ खा रहे थे. उस लड़के ने अनिता की पीठ पर हाथ रख कर उसको थोड़ा सा आगे की तरफ और झुका कर अपनी जगह बनाई. और अपने दोनो हाथो से उसके नितंबो को धीरे धीरे कर के मसलना शुरू कर दिया. अनिता इस समय पूरी मस्ती के साथ सिसकारिया निकालते हुए मज़े ले रही थी. थोड़ी ही देर मे उस लड़के ने अपनी पोज़िशन बना कर हल्के हल्के अपने लिंग को अनिता की योनि मे डालना शुरू कर दिया. लिंग के योनि मे जाते ही अनिता की दर्द भरी चीख निकलने लगी. पर वो उस समय पूरी तरह मस्ती मे थी इस लिए उसने उस लड़के को रोका नही. थोड़ी ही देर मे हल्की हल्की दर्द भरी चीख निकालते हुए अनिता ने उस लड़के के भीमकाय जैसे लिंग को पूरा का पूरा अपनी योनि मे ले लिया.

ये सब देख कर मुझसे अब बर्दास्त करना मुश्किल होता जा रहा था. इस लिए मैं वहाँ से हट कर थोड़ा दूर झोपड़ी से सॅट कर खड़ी हो गयी और कब मेरा हाथ मेरी योनि के साथ खेलने लगा मुझे इस बात का एहसास ही नही हुआ. मेरे हाथ की और मेरी योनि की इस समय जंग सी च्चिड गयी थी. पता करना मुश्किल था कि कॉन किसका दुश्मन है. थोड़ी ही देर मे हाथ और योनि की जंग मे हाथ की जीत हुई और योनि ने अपने मुँह से उल्टिया करके अपनी हार मान ली. इधर अंदर से अनिता के सिसकारिया लेने की आवाज़े भी आना बंद सी हो गयी थी. आवाज़े ना आने का मतलब सॉफ था कि अनिता सेक्स का मज़ा ले चुकी है और किसी भी वक़्त बाहर आ सकती है. इस लिए मैं अपने कपड़े सही करके वहाँ से जल्दी से दूर सड़क की तरफ आ गयी. थोड़ी ही देर मे अनिता भी आ गयी. मैं दूसरी तरफ मुँह करके खड़ी हुई थी ताकि वो उस झोपड़ी से आसानी से बिना किसी शर्म-ओ-हया के बाहर निकल सके.

क्रमशः................

 
Tadapti Jawani-paart-22

gataank se aage.........

par mujhe us waqt tasaali se jyada anita ki fikar ho rahi thi is liye main un dono ke laakh rokne par bhi nahi ruki aur waha se bahar nikal aayi aur us tarf jis taraf anita gayi thi us disha me chal di. pure raste chalte hue mere kai ulte seedhe khyalat aa rahe the samjh me nahi aa raha tha ki wo us rikashe wale ko dhoondhne kaha par gayi hogi.. dhoop itni tej pad rahi thi ki thode door chalte hi mera sar tej dhoop se chakrane laga mujhe chakkar se aane lag gaye the. thode chaaun ki talaash karte hue main idhar udhar dekhne lagi par kahi koi chayadar jagah dikhayi hi nahi de rahi thi har taraf bas khet hi khet aur sar ke upar suraj se nikalti hui aag… garmi ke karan mera pura gala such gaya tha mujhe bohot joro ki pyaas lagi hui thi.

main man hi man anita ko aur phir apne aap ko kosne lag gayi. ki main anita ke saath aayi hi kyu yaha ?

par ab kiya bhi kya ja sakta tha chalte chalte thodi hi doori par ek jhopdi si najar aane lagi jo ek khet me bani hui thi. uske chappar me thodi chaya si dikhayi di aur saath hi ek hand-pump bhi pyaas to bohot jor se lagi hui thi hand-pump dekh kar mujhse raha nahi gaya aur main seedha us jhopdi ki taraf chal di.

jhoopdi ke paas aate hi mujhe jhoopdi ke andar se aapas me baat karne ki aawaje aati hui sunai di.. andar se jo aawaje aa rahi thi aisa lag raha tha jaise maine wo aawaj pehle bhi kahi suni hai. un aawajo ko sochne ke chakkar me mai apni pyaas ko bhool gayi aur mere kadam khud-b-khud us jhopdi ke darwaja ki taraf ho liye.

jaise hi main jhopdi ke thode aur paas aayi aur jab aawaj dobara se aayi to mera munh khula ka khula rah gaya. andar se aati hui aawaje kisi aur ki nahi balki anita ki thi. aur dusre aawaj us ladke ki jo kal raat amit ke saath tha.

“deepak mujhe bohot dar lag raha hai” anita ki aawaj me kuch aisa tha jo jis karan uski aawaj bohot dari hui si lag rahi thi ya to wo… andar wo sab kuch chuki thi ya karne ke liye dar rahi thi.

“maine kaha na kuch nahi hoga, tum to bekar me dar rahi ho. agar kuch hua bhi to main hu na.” us ladke ki aawaj aati hai..

“mujhe bohot dar lag raha hai Deepak” anita ki aawaj me ek dar saaf jhalak raha tha.

“darne wali koi baat nahi hai. Ye to har ladki ke saath hota hai jab pehli baar karte hai to aisa hi hota hai. Agar tumhe meri baat par bharosa na ho to apni kisi saheli se puch lena. Is khoon ko dekh kar tumhe darne ki koi jaroorat nahi hai.” Us ladke ki baat sun kar mera shaq yakeen me badal gaya.

Main jhopdi ke bahar khadi hui thi sar par buri tarah se dhoop pad rahi thi aur pura gala bhi sukh raha tha. Mujhe samjh me nahi aa raha tha ki kya karu. Kya mera darwaja khatkhata kar dono ko daantna sahi hoga. Jo ye dono kar rahe hai wo galat hai.

“nahi Deepak ab nahi bohot dard ho raha hai..” anita ki dard bhari aawaj mere kaano me padi.

“are bilkul dard nahi hoga.. jitna dard hona tha wo ho gaya ab sirf maja aayega. Aisa maja jo tumhe kabhi nahi aaya hoga. Bas tum thoda sa khul jao.”

“Deepak bohot der ho gayi hai. Bhabhi bhi pareshan ho rahi hogi.” anita ki wahi dard bhari aawaj.

“bas 10 min ki baat hai anita..”

Un dono ki baate sun kar meri halat jo garmi ki wajah se pehle hi kharab thi aur bhi jyada kharab hone lag gayi. Meri chhati ke dono ubar ek dam sakht hone lag gaye aur neeche meri yoni ne apni laar tapkana shuru kar diya. Sar par girti tej dhoop jo thodi der pehle tak pareshan kar rahi thi ab to uska naam o nishan bhi mehsoos nahi ho raha tha.

“thoda idhar ki taraf ho jao.” Us ladke ki aawaj sun kar saaf pata chal raha tha ki wo kya karne ki keh raha tha. Mera man ab aur bhi jyada bechain hone lag gaya tha. Meri nighaahe idhar udhar andar ka najara dekhneke liye bechain hone lag gayi. Thodi der idhar udhar dekhne ke baad main jaisa hi jhopdi ke dusri taraf ko gayi waha par chhanv bhi achhi thi aur dusra khidki bhi bani hui thi.. khidki jyada badi nahi thi chhoti si thi par andar ka najara dekhne ke liye kaafi thi. Par us khidki se andar dekhne me ek muskil thi wo khidki thoda upar ki taraf thi aur main us khidki par thik se nahi pahunch pa rahi thi. Kai baar maine uchak kar andar dekhne ki kosis ki par nahi dekh saki. Paas hi pade ek pathar par nigaah padte hi maine use khidki ke neeche lagaya aur us par khade ho kar dekhne lagi us pathar ke lagane bhi mujhe apne dono panjo par khade ho kar dekhna pad raha tha. Andar ka najara dekh kar mera munh khula ka khula rah gaya.

Jhopdi ke andar jameen par anita ek dam nangi leti hui thi aur uske paas hi wo ladka Deepak baitha hua tha. Jaha anita leti thi uski dono tango ke neeche aur uski yoni par laal laal khoon ke daag lage hue the jis se saaf pata chal raha tha ki usne apni virginity kho di hai. Anita se hat kar jab meri najar us ladke par padi to meri aankhe ek dam hairat me kho gayi. Us lake ka ling bhi amit ke jaisa hi bheemkay tha. Par amit aur usme kaafi fark tha.. jaha amit ek dam dehati anpadh ganwaar lagta tha wahi wo padha likha smart tha. Uska ling puri tarah se tana hua tha aur uske ling par bhi khoon ke laal laal dhabbe lage hue the. Uska ling puri tarah tan kar upar neeche ki taraf jhatke le raha tha.

Wo wahi anita ke paas hi baitha hua tha uska chehra anita ke chehre ke upar jhuka hua tha. Aur uska ek haath anita ke uroj ko pakad kar masal raha tha aur dusra haath anita ke nitambo par tha jo use sakhti ke saath masal rahe the. Bahar se khade ho kar dekhne aur upar ki taraf uchakne ki wajah se mere pairo me kaafi dard sa mehsoos hone lag gaya. Par us samay to jaise mujhe wo dono aage kya karte hai ye dekhna jyada important lag raha tha.

Wo ladka anita ke upar aur jyada jhuka aur uske hontho ko apne honth se jakadne hi wala tha ki anita ne uski aankho me aankhe daal kar faryad karte hue lahje me kaha.

“plz Deepak maan jao na.. bohot late ho gayi hu.. agar bhabhi ghar chali gayi bina mujhe liye to mere liye dikkat ho jayegi..”

“bas ek baar karuga phir tum aaram se chali jana” keh kar usne apne hontho ko anita ke hontho par tika diya.

 
Un dono ko yun kissing karte hue dekh kar meri khud ki yoni me jaisa aag si lagi ja rahi thi jiski wajah se wo aur bhi jyada paani bahane lag gayi. Pata nahi ye sab achanak se mere saath kya hone lag gaya tha. Main kabhi bhi is tarah ki nahi thi jaisi ki aaj ho gayi hu.. ye sab us amit ki wajah se hua hai na wo hamare ghar aata na ham dono ke beech me wo sab hota aur na hi main is tarah se ye sab… aisa khayal aate hi ek pal ke liye mujhe apne aap par sharam si aayi aur main waha se hatne hi wali thi ki andar se aati hui anita ki siskari ne mere pure tan badan me ek sansani si dauda di…

Shhhhhhhhhhhhhhh…… aaaaaaaaaaiiiiiiiiimmmmmaaaaaaa….

Aur main wapas khidki ja lagi.. andar dekha to us ladke ne anita ke hontho ko chhod kar apna munh uske uroj par laga diya hai aur baari baari se uske dono urojo ko jor jor se chuse jar aha tha. Aur anita mast ho kar uske saath maje lete hue siskariya nikal rahi thi. Uroj chuste hue hi us ladke ne apne ek haath ko anita ki yoni par rakh dia aur uski yoni par bohot aaram se upar neeche firane lag gaya. Wo apne haath ko thodi der tak to gol gol ghumata raha lekin thodi hi der me usne apne haath ko ghumane ki jagah par apni ungliyo ko anita ki yoni par upar neeche karna shuru kar diya jis se anita aur bhi buri tarah se machalne lag gayi aur uski siskariyo ki aawaje aur bhi tej ho gai.

Aur main wapas khidki se ja lagi.. andar dekha to us ladke ne anita ke hontho ko chhod kar apna munh uske uroj par laga diya hai aur baari baari se uske dono urojo ko jor jor se chuse jar aha tha. Aur anita mast ho kar uske saath maje lete hue siskariya nikal rahi thi. Uroj chuste hue hi us ladke ne apne ek haath ko anita ki yoni par rakh dia aur uski yoni par bohot aaram se upar neeche firane lag gaya. Wo apne haath ko thodi der tak to gol gol ghumata raha lekin thodi hi der me usne apne haath ko ghumane ki jagah par apni ungliyo ko anita ki yoni par upar neeche karna shuru kar diya jis se anita aur bhi buri tarah se machalne lag gayi aur uski siskariyo ki aawaje aur bhi teji ke saath nikalne lag gayi.

Anita ke munh se nikalti hui aawaje mujh par ek ajeeb hi tarah ka nasha kar rahi thi jis se mere pure sharer me ek ajeeb hi kism ki sansani si hone lag gayi thi sochne-samjh ki to jaise mujhme jara bhi takat hi nahi thi. Us ladke ka haath dheere dheere uski yoni par teji ke saath chalne lag gaya, jis se anita aur bhi buri tarah se machalne lag gayi uske machalne ki halat is baat se hi pata chal rahi thi ki wo apne dono nitambo ko hawa me utha kar us ladke ke haath par ragad rahi thi. Anita ne apni dono aankhe band kar li thi. Aur wo aankhe band kiye hue hi apne nitamb ko utha kar us ladke ke saath maje le rahi thi. Anita ke nitambo ko uthane se uska pura sharer is tarah se hil raha tha ki uske dono uroj ek dam se upar hawa me uth jate aur phir ek hi pal me neeche ki taraf ho jate.

Ye sab najara dekh kar meri halat aur bhi jayda kharab ho gayi. Garmi se mera gala jo pehle hi sukha hua tha ye sab dekhne ke baad to halat aur bhi jyada kharab ho gayi thi. Dono pairo ke panjo par khade ho kar dekhne ki wajah se meri yoni se behta hua paani meri dono tango par gir kar chipakne lag gaya tha. Jo mujhe aur bhi ajeeb halat me le ja raha tha. Maine apna ek hath upar khidki se hata kar apni yoni par rakh kar yoni ko sehlana shuru kar diya aur apne dono urojo ko us jhopdi se dabane lagi. Jaise jaise mera haath meri yoni par chal raha tha aur andar se anita ki siskariyo ki aawajo ne to jaise mujhe ek alag hi duniya me le ja kar khada kar diya aur us madhoshi ke aalam me mera haath meri yoni par aur bhi teji ke saath chalne laga.. meri dono aankhe apne aap band ho kar us pal me doobne lag gayi.

Abhi mujhe apni aankhe band kiye hue kuch hi pal hue the ki achanak se andar se anita ki ek dard bhari aawaj ne mujhe meri aankhe kholne par majboor kar diya. Maine apne haath ko apni yoni se hata kar wapas khidki par tika diya aur panjo par uchak kar dekha to us ladke ne apni do ungli anita ki yoni me daal di hai aur use bade maje ke saath uski yoni me ghuma raha hai. Wo apni ungliyo ko puri teji ke saath uski yoni me andar bahar kar raha tha aur anita ne uske sar ko apne dono haatho se kas kar pakad liya tha. Uski teji ke saath chalti hui ungliya puri tarah se anita ke yoni ras me gili ho chuki thi. Achanak usne apni teji ke saath chalti hui ungliyo ko roka aur anita ki yoni se apni ungliyo ko bahar nikal kar apne munh ke kareeb tak laya aur bohot dheere se shayad uski khud ki saanse bhi madhoshi ke karan ukhad si gayi thi bola-

“anita tumhari choot se aati hui khusbo ne to mujhe pagal hi kar diya hai paani ka test karke bhi dekhu ki wo kitna majedar hai” bol kar usne apni dono ungliya apne munh me daal li aur lolypop ke jaise unhe chusne lag gaya.

Anita uski is harkat ko dekh kar pehle to muskurayi aur phir sharam ke karan apne dono haatho se apna chehra dhank liya.

“jaldi karo Deepak waha dukaan par bhabhi mera intjaar kar rahi hogi” anita ne waise hi apne haatho ko apne chehre par lagaye hue hi kaha.

“bhabhi ki chinta ho rahi hai… aur main..!!! jo itne dino se tumhare liye pagal deewano ki tarah se ghoom raha tha uska kuch nahi ?” keh kar wo anita ke paas se khisak kar anita ki dono tango ke beech me aa gaya… Uske ling ne pehle se bhi teji ke saath upar neeche ki taraf jhatke lena shuru kar diya tha. Anita ki dono tango ke beech me aa kar usne uski dono taano ko puri tarah se faila diya aur apna munh anita ki yoni par laga diya. Us ladke ne jaise hi apni jeebh ko yoni par ghumaya anita ke pure sharer me ek jhatka sa laga aur usne us ladke ke sar ko pakad kar apni yoni par daba diya.

Thodi der usne uski yoni ko apni jeebh se chatna chalu rakha. Wo kabhi to apni jeebh ko anita ki yoni par upar se neeche tak ghumata to kabhi apni jeeb ko uski yoni ke andar daal deta. Is sab se anita bohot khus ho kar maje le rahi thi. Par ye sab dekh kar meri halat aur bhi jayda kharab hoti ja rahi thi. Dhoop aur garmi ki wajah se meri halat waise hi kharab thi upar se ye sab dekh kar to aur bhi jyada ho gayi. Andar ka najara dekh kar mera haath wapas meri yoni ko pyar se sehla kar dilasa dene lag gaya.

“deepak aur tej bas me jhadne wali hu.. aaahhhh Deepak tej aur tej…” andar se aati hui aawaj ne mujhe phir se andar jhankne par majboor kar diya. Andar dekha to anita apne dono nitambo ko hawa me utha kar us ladke ke munh pe jyada se jyada dabane ki kosis kar rahi thi. Shayad wo apni aakhri manjil par thi. Is liye wo puri masti ke saath apne nitambo ko hawa me upar utha rahi thi. Wo puri masti me aayi hi thi ki wo ladka ek ka ek ruk gaya. Aur usko ulta hone ka ishara karne lag gaya.

Anita is samay puri masti me thi is liye wo bina kisi jawaab sawaal ke palat gayi. Ab anita ke nitamb thik us ladke ke ling se ragad kha rahe the. Us ladke ne anita ki peeth par haath rakh kar usko thoda sa aage ki taraf aur jhuka kar apni jagah banayi. Aur apne dono haatho se uske nitambo ko dheere dheere kar ke maslna shuru kar diya. Anita is samay puri masti ke saath siskariya nikalte hue maje le rahi thi. Thodi hi der me us ladke ne apni position bana kar halke halke apne ling ko anita ki yoni me daalna shuru kar diya. Ling ke yoni me jaate hi anita ki dard bhari cheekh nikalne lagi. Par wo us samay puri tarah masti me thi is liye usne us ladke ko roka nahi. Thodi hi der me halki halki dard bhari cheekh nikalte hue anita ne us ladke ke bheemkaye jaise ling ko pura ka pura apni yoni me le liya.

Ye sab dekh kar mujhse ab bardast karna mushkil hota ja raha tha. Is liye main waha se hat kar thoda door jhopdi se sat kar khadi ho gayi aur kab mera haath meri yoni ke saath khelne laga mujhe is baat ka ehsaas hi nahi hua. Mere haath ki aur meri yoni ki is samay jang si chhid gayi thi. Pata karna mushkil tha ki kon kiska dushman hai. Thodi hi der me haath aur yoni ki jang me haath ki jeet hui aur yoni ne apne munh se ultiya karke apni haar maan li. Idhar andar se anita ke siskariya lene ki aawaje bhi aana band si ho gayi thi. Aawaje na aane ka matlab saaf tha ki anita sex ka maja le chuki hai aur kisi bhi waqt bahar aa sakti hai. Is liye main apne kapde sahi karke waha se jaldi se door sadak ki taraf aa gayi. Thodi hi der me anita bhi aa gayi. Main dusri taraf munh karke khadi hui thi taaki wo us jhodi se aasani se bina kisi sharm-o-haya ke bahar nikal sake.

kramashah................

 
तड़पति जवानी-पार्ट-23

गतान्क से आगे.........

“अरे भाभी आप यहा पर ?” अनिता ने मेरे पास आ कर मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए कहा.

“कहाँ रह गयी थी तुम ? कितनी देर से तुम्हारा वहाँ उस टेलर की दुकान पर वेट कर रही थी.” मैने चोव्न्क्ते हुए पलट कर अनिता की तरफ देखते हुए कहा ताकि उसको शक़ ना हो कि मैने उसे इस हालत मे देख लिया है. “तुझे पता है मैं कितना घबरा गयी थी तेरे इतनी देर गायब होने से “ मैने थोड़ा झूठा गुस्सा करते हुए कहा.

“सॉरी भाभी !! वो मैं क्या करती वो रिक्शे वाला हमे छ्चोड़ कर कही दूसरी जगह निकल गया था. उसके ही पीछे गयी थी. अगर उसके पीछे ना जाती तो मेरी पायल कभी वापस ना मिलती और घर पर मा तो मुझे कच्चा चबा जाती.” उसने अपने आँखे नीचे झुकाते हुए कहा.

“अच्छा अब ठीक है यहा से जल्दी चलो.. वैसे भी हम काफ़ी लेट हो चुके है घर पर मम्मी हम लोगो के लिए फिकर कर रही होगी.” मैने उसे वहाँ से चलने का इशारा करते हुए कहा.

“भाभी आप ने कपड़े क्या किए ?” अनिता ने मेरा खाली हाथ देख कर मुझसे सवाल किया.

“वो कपड़े मैने अपना नाप उस टेलर को नोट करवा कर बनने के लिए दे दिए है.

“मेरे कपड़े के बारे मे कुछ बोला वो टेलर ?” अनिता ने चलते चलते ही सवाल करते हुए कहा.

“मैने पूछा था पर वो कह रहा था कि अभी बन नही पाए है थोड़ा सा काम बाकी रह गया है आज शाम तक तैयार कर देगा.” मैने बताते हुए कहा.

थोड़ी दूर चलने के बाद ही हमने एक रिक्शा किया और वापस घर के लिए चल दिए…

घर पर आ कर मैं अपने कमरे मे थोड़ा फ्रेश होना चाहती थी पर मम्मी ने मुझे आवाज़ लगा कर वही काम काज मे लगा लिया. इस समय मैं ऐसी हालत मे थी कि मैं फ्रेश होना चाहती थी योनि से निकला हुआ पानी पूरी जाँघो पर बुरी तरह से चिपक रहा था. लेकिन मम्मी ने जो काम बताया था वो काम भी करना ज़रूरी था. इस लिए चुप चाप काम करने लग गयी. घर पर इस समय इतनी गर्मी नही थी लेकिन फिर भी पसीना निकलने की वजह से जाँघो पर लगा हुआ पानी बुरी तरह से चिपक रहा था. जिस से बड़ा अजीब फील हो रहा था. मैं जल्दी जल्दी काम ख़तम करके मौका देख रही थी ताकि टाय्लेट मे जा कर थोड़ा फ्रेश हो सकु.

मैं अपने काम मे बिज़ी थी कि पीछे से मुझे अमित की आवाज़ सुनाई दी. मैने जब पलट कर देखा तो वो मेरी ही तरफ आ रहा था. उसके मेरी तरफ आने से मेरे दिल की धड़कन एक अंजाने डर से तेज होने लग गयी. समझ मे ही नही आ रहा था कि वहाँ रुकु या वहाँ से चली जाउ. मैने अपने मन ही मन मे फ़ैसला कर लिया कि मैं उसकी तरफ कोई ध्यान नही दूँगी. इस लिए उसके पास आने से पहले ही मैने अपना चेहरा वापस घुमा कर जो काम कर रही थी काम पर ध्यान देना शुरू कर दिया. पर दिल मे कही ना कही रात को जो कुछ भी अमित ने छत पर किया था वो सब सोच कर दिल बैठा जा रहा था.

मैं अपने काम मे मगन हो गयी पर काफ़ी देर तक जब मुझे कोई आहट या हरकत नही सुनाई दी तो मैने पीछे पलट कर देख कि वो कहाँ है.. पर वो कही नही दिखा. शायद वो अपने किसी और काम मे बिज़ी हो गया हो. वो मेरे पास नही आया है ये सोच कर मैने मन ही मन एक सुकून की साँस ली. और थोड़ी ही देर मे अपने सब काम निपटा कर मम्मी से बोल कर अपने कमरे मे आ गयी. मुझे इस समय अपने शरीर पर कपड़े बोहोत परेशानी दे रहे थे. पॅंटी और पेटिकोट तो पूरा का पूरा ही खराब हो चुके थे. इस लिए मैने अपने कमरे मे आ कर जल्दी से दरवाजा अंदर से बंद किया और अपनी साडी खोल कर बेड पर फेंक दी और बाथरूम की तरफ जाने लगी फिर सोचा कि ये पेटिकोट और ब्लाउस भी निकाल देती हू घर पर हू तो सलवार पहन लेती हू.
 
मैने गाँव मे अपने ससुराल मे ज़रूर थी पर मेरे कपड़े पहनने को लेकर मम्मी पापा को कोई एतराज नही था और ना ही उन्होने मुझे कभी कपड़ो को लेकर कुछ बोला. मैने अलमारी से सलवार सूट निकाला और पेटिकोट उतार कर हाथ मे पकड़ लिया और ब्लाउस को खोल कर उतारने ही वाली थी कि मेरी नज़र सामने ड्रेसिंग टेबल पर गयी तो मेरी आँखे फटी की फटी रह गयी. अमित मेरे ठीक पीछे खड़ा हुआ था और उसने अपना लिंग हाथ मे निकाल रखा था..

अमित को अपने पीछे देख कर मैं बुरी तरह से हड़बड़ा गयी थी कुछ समझ नही आ रहा था. मैं जिस हालत मे थी और वो जो अपने लिंग को बाहर निकाल कर उसे हिला रहा था उस सीन ने तो जैसे मेरे दिमाग़ की सारी नसे कुन्द कर दी थी. समझ मे ही नही आ रहा था कि क्या करू क्या नही. फिर भी मैने अपने आप को पल भर मे संभालते हुए अपने हाथ मे लगे हुए कपड़ो से अपने शरीर को ढँकने की पूरी कोसिस करने लगी. अपने शरीर को जितना हो सकता था उतना ढक कर मैने उसकी तरफ गुस्से से देखते हुए उस से कहा कि

“ये क्या बदतमीज़ी है? तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई यहा मेरे कमरे मे बिना मेरी इजाज़त के आने की ?”

वो अपने हाथ से अपने लिंग को हिलाता हुआ मेरी तरफ बढ़ने लगा. उसका इस तरह से मेरी तरफ बढ़ना मुझे अंदर ही अंदर बुरी तरह से घबराहट होने लग गयी.

“वही खड़े रहो.” मैने उसे अपनी तरफ बढ़ते हुए देख कर कहा.

वो एक पल के लिए मेरे गुस्से भरी आवाज़ सुन कर वही रुक गया पर फिर मेरी तरफ देख कर मुस्कुराते हुए बढ़ने लग गया. वो जैसे जैसे मेरी तरफ आता जा रहा था मेरे दिल की धड़कने और भी तेज होती जा रही थी.

“भाभी एक बार दिखा दो अपने सारे कपड़े निकाल कर..”

“तुम यहा से बाहर जाते हो या मैं शोर मचा कर मम्मी और पापा को यहा पर बुलाऊ?” मैने गुस्से से उस पर चिल्लाते हुए कहा.

मेरी बात के जवाब मे मुस्कुरा दिया… “आप की मर्ज़ी है भाभी जी.. मैं तो जब तक यहाँ से नही जाउन्गा जब तक कि आप मुझे फिर से नंगी हो कर नही दिखाते हो..” उसने अपने लिंग पर हाथ चलाना बंद करके इशारे से अपने लिंग की तरफ देखने को बोलने लगा. उसकी इस हरकत से मैं और भी ज़्यादा गुस्से मे आ गई मैं ज़ोर से चीख कर मम्मी पापा को बुलाना चाहती थी पर जैसे ही मैं आवाज़ लगाने को हुई मुझे उसके मोबाइल की याद आ गयी. इस समय मेरी हालत शिकारी के जाल मे फँसे हुए जानवर के जैसी हो गयी थी. जो कहने को तो कुछ भी कर सकता है पर शिकारी के आगे वो सिर्फ़ शिकारी से बचने की दुआ ही माँगता है.

“देखो तुम यहा से चले जाओ. किसी ने हमे यहाँ पर देख लिया तो… प्लीज़ तुम यहा से चले जाओ.” मैने उस से गिड़गिदते हुए रिक्वेस्ट करने लग गयी.

“मैने कहा ना.. जब तक तुम अपने पूरी नंगी हो कर नही दिखओगि मैं यहाँ से नही जाने वाला”

मैं बोहोत अजीब मुश्किल मे फँस गयी थी. शादी का महॉल था और घर मे सभी लोग थे कभी भी कोई भी आ सकता था. और अनिता तो कभी भी आ सकती थी. समझ मे नही आ रहा था कि मैं कैसे उसे कमरे से बाहर भेजू.

“तुम आख़िर मेरे पीछे क्यू पड़े हुए हो. अगर किसी ने देख लिया तो मैं जिंदा नही रहूगी.” पता नही मेरे अंदर उस वक़्त कहा से इतना डर भर गया की मेरी आँखे अपने आप नम हो गयी.

“कुछ नही होगा अभी सब काम मे बिज़ी है कोई नही आएगा. बस तुम एक बार पूरी नंगी हो जाओ ना” उसने मुझे इस तरह से जैसे मैं कोई छ्होटी बच्ची हू समझा रहा हो..

क्या करू क्या ना करू कि स्थिति मे मैं सोच ही रही थी कि दरवाजे के बाहर से आती हुई अनिता और मम्मी जी की आवाज़ सुनाई दी. उन दोनो की आवाज़ सुन कर तो मेरी हालत एक दम खराब हो गयी. दरवाजा बंद था पर फिर भी मेरा दिल बुरी तरह से डर रहा था. मैं मन ही मन दुआ करने लगी कि उन दोनो मैंसे कोई भी इस वक़्त इस तरफ ना आए. उपर वाले को शायद मेरी हालत पर तरस आ गया इस लिए बाहर से आती हुई आवाज़े दूसरी दिशा की तरफ मुड़ती हुई सुनाई देने लगी.. और धीरे धीरे करके आवाज़े आना कम हो गयी. आवाज़ो के कम होते ही मैने चैन की लंबी साँस ली. पर एक मुसीबत इस अमित के रूप मे मेरे सर पर अब भी मौजूद थी जो पता नही कैसे दूर होगी.

“भाभी दिखा दो ना कल रात को ज़रा भी मज़ा नही आया था. अंधेरे मे कुछ भी नही दिखाई दिया.” उसने इस बार अपने चेहरे पर इस तरह के भाव लाते हुए कहा की मुझे ऐसा लगा कि वो मेरी बेज़्जती कर रहा है.

“देखो मैं एक शादी शुदा औरत हू. मेरा पति है मेरे सास ससुर है क्यू मेरी जिंदगी बर्बाद करने पर तुले हुए हो.” मेरी आँखो से अब भी आँसुओ की बूंदे टपक रही थी. “तुम्हारे साथ मैने जो कुछ भी किया वो सब करने के बाद मैं चैन से सो नही पाती हू. हर वक़्त हर समय मुझे अपने पति के साथ किए हुए धोके का एहसास होता रहता है. मेरी पूरी जिंदगी घुटि घुटि सी हो गयी है.”

 
“भाभी..!!” वो मेरे बिल्कुल नज़दीक आ गया और मेरी आँखो से बहते हुए आँसू को अपने हाथ से सॉफ करते हुए “भाभी आप कुछ मत सोचो कुछ नही हुआ है. आप ने किसी को धोका नही दिया है. बल्कि आप ने तो अपने आप को जो धोका दे रही थी वो सब बंद कर दिया है. और वैसे भी धोका देने की बात जब सामने आती है जब किसी को कुछ पता चले. ना तो मैं किसी को इस बारे मे बताउन्गा और आप किसी को बताओ ये तो सवाल ही पैदा नही होता है. फिर धोका देने की बात कहाँ से आ गयी.”

मैने अपने चेहरे से उसके दोनो हाथ जो मेरे गाल पर बह रहे आँसू को सॉफ कर रहे थे झटक कर दूर कर दिया.”आख़िर तुम चाहते क्या हो ? क्यू मेरी हस्ती खेलती जिंदगी को बर्बाद करने पर तुले हुए हो.मैने अपनी जिंदगी और अपने पति के साथ बोहोत खुश हू”

“मैं क्या चाहता हू…!!! मैं क्या चाहता हू वो तुमको कैसे समझोउ..” कह कर वो एक दम चुप हो गया. उसने ये बात इस तरह से बोली की मुझे कुछ समझ मे ही नही आया कि क्या हुआ वो कहना क्या चाहता है..

“देखो हम दोनो के बीच जो कुछ भी हुआ वो मेरी भूल थी. और मैं वो सब कुछ अब दोबारा नही दोहराना चाहती हू. अगर तुम्हारे दिल मे मेरे लिए ज़रा भी इज़्ज़त या दया है तो प्लीज़ यहाँ से इसी वक़्त चले जाओ” मैने अपने दोनो हाथ लगभग उसके आगे जोड़ते हुए उस से विनती करने लग गयी. मुझे लगा था कि वो मेरी इस रिक्वेस्ट को मान कर चला जाएगा. पर वो वहाँ से हिला तक नही. बल्कि मेरी तराफ़ देख कर मुकुराने लग गया. थोड़ी देर वैसे ही मुस्कुराने के बाद वो मेरे चाहेरे को अपने दोनो हाथो मे लेकर बोला

"ठीक है भाभी जैसा तुम चाहो पर जाने से पहले एक बार मुझे अपने हुस्न का पूरा दीदार करा दो कसम से फिर कभी तुम्हारे पीछे नही आउगा."

उसकी बात सुन कर मैं सोच मे पड़ गयी कि क्या करू क्या ना करू. क्यूकी उसने जिस तरह से अपने दाँत निकालते हुए कहा था. मुझे पता था कि इस से हां करने का मतलब क्या हो सकता है. पर इस समय मैं मजबूर और लाचार थी. एक तो हम दोनो इस हालत मे थे दूसरा घर मे सब लोग माजूद थे कभी भी कोई भी आ सकता था. मरती क्या ना करती अपनी जान छुड़ाने के लिए मैने हां कर दी. “ठीक है पर तुम पहले वादा करो की कुछ भी ग़लत नही करोगे..”

उसने अपना सर हां मे हिला कर कुछ भी ग़लत ना करने की मंज़ूरी दे दी. मेरे हाथ पैर दोबारा से काँप रहे थे. बात उसके आगे कपड़े उतारने की नही थी पर डर इस बात का ज़्यादा था कि अगर कोई आ गया या किसी ने कुछ देख लिया तो क्या होगा. मैने अपने काँपते हुए हाथो से अपने हाथ मे लगे हुए कपड़ो को वही बेड पर रख दिया मेरे शरीर पर इस समय खुला हुआ ब्लाउस और ब्रा पॅंटी थे. वो मज़े से मुझे देख रहा था. मेरा मन तो कर रहा था उसकी उस हँसी को देख कर उसका खून कर दू. पर नही कर सकती थी. मेरे हाथ बुरी तरह से काँप रहे थे और नज़र दरवाजे की तरफ टिकी हुई थी कि कही कोई आ ना जाए.

“क्या हुआ भाभी जल्दी जल्दी उतारो ना.” उसने अपनी बत्तीसी निकाल कर दिखाते हुए कहा.

“मुझसे नही होगा. प्लीज़ तुम चले जाओ. तुमने सब कुछ तो देखा हुआ है अब फिर दोबारा देखने की क्या ज़रूरत है.” मैने लगभग उस से रहम माँगते हुए वाले अंदाज मे कहा.

“कोई नही भाभी आप से नही होगा तो मैं हू ना.. आप का देवर पीनू… ये पीनू किस दिन काम आएगा.” कहते के साथ ही वो अपनी जगह से दोबारा मेरे नज़दीक आ गया और अपने दोनो हाथो से मेरा ब्लाउस पकड़ कर उसे पीछे की तरफ से उतारने लग गया.

मैं उसके अपने ब्लाउस पकड़े जाने से घबरा गयी थी क्यूकी उसका कोई भरोसा नही था वो उन लोगो मे से था जो उंगली पकड़ कर पॉंचा पकड़ने की कोसिस करते है. मैने एक नज़र उसकी तरफ गुस्से से घूर कर देखा पर उसका ध्यान तो मेरे ब्लाउस को उतारने मे लगा हुआ था. “दूर हटो मेरे से” मैने अपने हाथो को झटका दे कर उसको अपने से दूर करते हुए कहा. पर वो बजाय दूर होने के और भी मजबूती के साथ मेरे ब्लाउस को अपने हाथो से पकड़ कर उसे जल्दी से जल्दी मेरे शरीर से अलग करने की कोसिस करने लग गया. और उसकी कोसिस भी जल्दी ही कामयाब हो गयी मेरे शरीर से ब्लाउस भी अलग हो गया. अब मैं उसके सामने सिर्फ़ ब्रा और पॅंटी मे ही खड़ी हुई थी और वो मेरे पास ही खड़ा हुआ था.

“प्ल्ज़ रहने दो ना कुछ तो रहम खाओ मुझ पर अगर कोई आ गया तो. मुझे बोहोत डर लग रहा है.” मैने फिर से एक आखरी कोसिस करते हुए की शायद मान जाए उसके आगे रहम की भीख माँगी.

“जितनी जल्दी भाभी अपना जलवा दिखओगि मैं वादा करता हू उतनी ही जल्दी यहाँ से चला जाउन्गा.” वो अपने दाँत दिखाता हुआ बोला.

मरती क्या ना करती, इस समय वक़्त और हालत कुछ इस तरह थे कि मुझे उसकी बात मान ने के सिवा दूसरा कोई तरीका नज़र नही आ रहा था अपनी जान छुड़ाने का. मैने अपने दोनो हाथो को अपनी पीठ पर ले जा कर अपनी ब्रा का हुक खोलने लग गयी. डर और शर्म दोनो इस समय मेरे उपर बुरी तरह से हावी थे. मैने अपने हाथ पीछे ले जा कर ब्रा का हुक तो खोल लिया था पर ब्रा को अपनी छाती से अलग करने की हिम्मत नही हो रही थी.
 
“क्या हुआ, अब हटा भी दो तुम तो ऐसे शर्मा रही हो जैसे पहली बार मेरे सामने अपनी चुचिया दिखा रही हो” कह कर उसने एक हाथ को मेरे नितंब पर ले जा कर उसे बड़ी ज़ोर से दबा दिया. उसके इतनी ज़ोर से नितंब दबाने से मेरे मुँह से चीख निकलते निकलते रह गयी. जिस तरह से वो मेरे शरीर के अंगो के नाम ले कर बोलता था मुझे बड़ी शरम आती थी. चूत, गांद चुचिया भोसड़ी ये सब शब्द मैने कभी यूज़ नही किए और ना ही मनीष ने कभी मुझसे ये सब शब्द बोले. पर जिस तरह से वो मेरे साथ इन शब्दो को लेकर बोलता था मुझे ऐसा लगता था कि मैं किसी बाज़ार मे आ गयी हू.

मैं अपनी सोच मे डरी सहमी सी खड़ी हुई अभी सोच ही रही थी कि उसे अपने हाथ को आगे बढ़ा कर मेरी छाती से मेरी ब्रा को अलग कर दिया. ब्रा के हट ते ही मैने अपनी छाती को अपने दोनो हाथ से छुपाने की कोसिस की लेकिन उसने अपने दोनो हाथो से मेरे हाथो को मेरी छाती से अलग कर दिया. मैं बुरी तरह शरम से मरी जा रही थी कि तभी बाहर से मम्मी के कमरे की तरफ आने की आवाज़ सुनाई देने लगी. मेरी हालत एक दम से बुरी तरह कराब हो गयी थी. समझ मे नही आ रहा था कि क्या करू क्या ना करू, अगर मम्मी ने मुझे अमित के साथ कमरे मे देख लिया तो मेरा क्या होगा. क्या सोचेगी वो मेरे बारे मे क्या इज़्ज़त रह जाएगी..

“देखो तुम यहाँ से चले जाओ. मम्मी इधर ही आ रही है. अगर उन्होने तुम्हे यहाँ पर देख लिया तो मेरे लिए बोहोत मुसीबत हो जाएगी.” मैने उस से घबराते हुए कहा.

“ह्म्‍म्म्मम…!!!! चला जाउन्गा पर पहले इसको भी उतारो जल्दी से” उसने अपने एक हाथ को आगे बढ़ा कर मेरी पॅंटी के उपर से मेरी योनि पर फिराते हुए कहा.

उसके हाथ का स्पर्श अपनी योनि पर होते ही मेरे पूरे शरीर मे एक पल के लिए करेंट सा दौड़ गया पर वक़्त की नज़ाकत को ध्यान मे रखते हुए मैने अपने आप को संभाला और अपने दोनो हाथ को अपनी पॅंटी को ले जाकर रख लिए. मेरे दिमाग़ मे बस इस समय यही चल रहा था कि किसी भी अनहोनी के होने से पहले वो यहाँ से चला जाए. इस लिए मैने अपनी पॅंटी को अपने हाथ से एक ही झटके मे उतार दिया मेरी पॅंटी इस समय मेरे दोनो टाँगो के नीचे थी.

क्रमशः................

 
Tadapti Jawani-paart-23

gataank se aage.........

“are bhabhi aap yaha par ?” anita ne mere paas aa kar mere kandhe par haath rakhte hue kaha.

“kaha rah gayi thi tum ? kitni der se tumhara waha us tailor ki dukaan par wait kar rahi thi.” Maine chownkte hue palat kar anita ki taraf dekhte hue kaha taaki usko shaq na ho ki maine use is halat me dekh liya hai. “tujhe pata hai main kitna ghabra gayi thi tere itni der gayab hone se “ maine thoda jhootha gussa karte hue kaha.

“sorry bhabhi !! wo main kya karti wo rikshe wala hame chhod kar kahi dusri jagah nikal gaya tha. Uske hi peeche gayi thi. Agar uske peeche na jati to meri payal kabhi wapas na milti aur ghar par maa to mujhe kachha chaba jati.” Usne apne aankhe neeche jhukate hue kaha.

“achha ab thik hai yaha se jaldi chalo.. waise bhi ham kaafi late ho chuke hai ghar par mummy ham logo ke liye fikar kar rahi hogi.” Maine use waha se chalne ka ishara karte hue kaha.

“bhabhi aap ne kapde kya kiye ?” anita ne mera khaali haath dekh kar mujhse sawaal kiya.

“wo kapde maine apna naap us tailor ko note karwa kar banne ke liye de diye hai.

“mere kapde ke bare me kuch bola wo tailor ?” anita ne chalte chalte hi sawaal karte hue kaha.

“maine pucha tha par wo keh raha tha ki abhi ban nahi paye hai thoda sa kaam baaki rah gaya hai aaj sham tak taiyar kar dega.” Maine batate hue kaha.

Thodi door chalne ke baad hi hamne ek riksha kiya aur wapas ghar ke liye chal diye…

Ghar par aa kar main apne kamre me thoda fresh hona chahti thi par mummy ne mujhe aawaj laga kar wahi kaam kaaj me lag alia. Is samay main aisi halat me thi ki main fresh hona chahti thi yoni se nikla hua paani puri jaangho par buri tarah se chipak raha tha. Lekin mummy ne jo kaam bataya tha wo kaam bhi karna jaroori tha. Is liye chup chaap kaam karne lag gayi. Ghar par is samay itni garmi nahi thi lekin phir bhi paseena nikalne ki wajah se jaangho par laga hua paani buri tarah se chipak raha tha. Jis se bada ajeeb feel ho raha tha. Main jaldi jaldi kaam khatam karke mauka dekh rahi thi taaki toilet me ja kar thoda fresh ho saku.

Main apne kaam me busy thi ki peeche se mujhe amit ki aawaj sunai di. Maine jab palat kar dekha to Wo meri hi taraf aa raha tha. Uske meri taraf aane se mere dil ki dhadkan ek anjaane dar se tej hone lag gayi. Samjh me hi nahi aa raha tha ki waha ruku ya waha se chali jau. Maine apne man hi man me faisla kar liya ki main uski taraf koi dhyan nahi dungi. Is liye uske paas aane se pehle hi maine apna chehra wapas ghuma kar jo kaam kar rahi thi kaam par dhyan dena shuru kar diya. Par dil me kahi na kahi raat ko jo kuch bhi amit ne chat par kiya tha wo sab soch kar dil baitha ja raha tha.

Main apne kaam me magan ho gayi par kaafi der tak jab mujhe koi aahat ya harkat nahi sunai di to maine peeche palat kar dekh ki wo kaha hai.. par wo kahi nahi dikha. Shayad wo apne kisi aur kaam me busy ho gaya ho. Wo mere paas nahi aaya hai ye soch kar maine man hi man ek sukoon ki saans li. Aur thodi hi der me apne sab kaam nipta kar mummy se bol kar apne kamre me aa gayi. Mujhe is samay apne sharer par kapde bohot pareshani de rahe the. Panty aur petticoat to pura ka pura hi kharab ho chuke the. Is liye maine apne kamre me aa kar jaldi se darwaja andar se band kiya aur apni saree khol kar bed par fenk di aur bathroom ki taraf jane lagi phir socha ki ye petticoat aur blouse bhi nikal deti hu ghar par hu to salwar pehan leti hu.

Maine gaanv me apne sasural me jaroor thi par mere kapde pehnne ko lekar mummy papa ko koi etraaj nahi tha aur na hi unhone mujhe kabhi kapdo ko lekar kuch bola. Maine almari se salwar suit nikala aur petticoat utar kar haath me pakad liya aur blouse ko khol kar utarne hi wali thi ki meri najar samne dressing table par gayi to meri aankhe fati ki fati rah gayi. Amit mere thik peeche khada hua tha aur usne apna ling haath me nikal rakha tha..

amit ko apne peeche dekh kar main buri tarah se hadbada gayi thi kuch samjh nahi aa raha tha. main jis halat me thi aur wo jo apne ling ko bahar nikal kar use hila raha tha us scene ne to jaise mere dimaag ki saari nase kund kar di thi. samjh me hi nahi aa raha tha ki kya karu kya nahi. phir bhi maine apne aap ko pal bhar me sambhalte hue apne haath me lage hue kapdo se apne sharer ko dhankne ki puri kosis karne lagi. apne sharer ko jitna ho sakta tha utna dhak kar maine uski taraf gusse se dekhte hue us se kaha ki

“ye kya badtameeji hai? tumhari himmat kaise hui yaha mere kamre me bina meri ijajat ke aane ki ?”

wo apne haath se apne ling ko hillata hua meri taraf badhne laga. uska is tarah se meri taraf badhna mujhe andar hi andar buri tarah se ghabrahat hone lag gayi.

“wahi khade raho.” maine use apni taraf badhte hue dekh kar kaha.

wo ek pal ke liye mere gusse bhari aawaj sun kar wahi ruk gaya par phir meri taraf dekh kar muskurate hue badhne lag gaya. wo jaise jaise meri taraf aata ja raha tha mere dil ki dhadkane aur bhi tej hoti ja rahi thi.

“bhabhi ek baar dikha do apne saare kapde nikal kar..”

“tum yaha se bahar jate ho ya main shor macha kar mummy aur papa ko yaha par bulau?” maine gusse se us par chillate hue kaha.

meri baat ke jawaab me muskura diya… “aap ki marji hai bhabhi ji.. main to jab tak yaha se nahi jauga jab tak ki aap mujhe phir se nangi ho kar nahi dikhate ho..” usne apne ling par haath chalana band karke ishare se apne ling ki taraf dekhne ko bolnne laga. uski is harkat se main aur bhi jyada gusse me aagayi main jor se cheek kar mummy papa ko bulana chahti thi par jaise hi main aawaj lagane ko hui mujhe uske mob ki yaad aa gayi. is samay meri halat shikari ke jaal me fanse hue janwarr ke jaisi ho gayi thi. Jo kehne ko to kuch bhi kar sakta hai par shikari ke aage wo sirf sikhari se bachne ki dua hi manata hai.

“dekho tum yaha se chale jao. Kisi ne hame yaha par dekh liya to… please tum yaha se chale jao.” Maine us se gidgidate hue request karne lag gayi.

 
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