• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

तड़पति जवानी compleet

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
तड़पति जवानी-पार्ट-26

गतान्क से आगे.........“तुम सच में सुवर हो.” मैने अपने गुस्से को बाहर निकाल कर उसे गाली देते हुए कहा.

“हा...हा...हा वो तो मैं हूँ. बोलो क्या दीखओगि चूत या चुचिया.” उसने फिर से गंदी सी हँसी हस्ते हुए कहा. जैसी उसकी सुवर सी शक्ल थी वैसे ही उसकी हँसी भी थी. जिसे सुन कर मेरा खून खोल रहा था.

“तुम मुड़ो तो सही प्लीज़.” मैने उस से फिर से रिक्वेस्ट करते हुए कहा.

“दीखओगि ना फिर अपनी चूची.” उसने मेरी बात पर तुरंत रिप्लाइ करते हुए कहा.

“हां दीखा दूँगी, अब मुड़ो.” मेरे मूह से ना जाने कैसे हां निकल गया जबकि मेरा उस बुढहे को हां बोलने का कोई इरादा नही था.

वो गंदी सी हँसी हंसते हुवे मूड गया. मैने फ़ौरन डब्बे को अपने नीचे सरकाया और उसमें मूतने लगी. जब मैने कर लिया तो वो मूड गया. मगर तब तक मैं उठ चुकी थी. मैने गौर किया कि उसने अपनी जेब से एक देसी दारू की बॉटल निकाल कर पूरी गटक ली थी.

“दीखाओ अब.” वो नशे में थोड़ा ज़ोर से बोला.

“धीरे बोलो कोई सुन लेगा. नही दिखाउन्गि.” मैने सॉफ इनकार करते हुए कहा.

“नही ऐसा मत कहो मैं मरा जा रहा हूँ इन संतरों को देखने के लिए.” उसने इस बार थोड़ा गिड़गिदने वाली स्टाइल मे कहा.

मैं अजीब मुसीबत में फँस गयी थी.अब मैं बाहर कैसे जाउ.. उपर से यह देहाती अपने कपड़े उतार के खड़ा है…ई नो ही ईज़ नोट इन सेन्सस क्यूंकी वो पीया हुआ है. इसलिए अब मुझे ही समझदारी से काम लेना होगा. मुझे उसे प्यार से बहलाना होगा नही तो मेरी इज़्ज़त ख़तरे में पड़ जाएगी. उसने कही ज़ोर से कुछ बोल दिया तो बाहर खड़े लोग ज़रूर अंदर आ जाएँगे.

मुझे अब इन लोगों के जाने का वेट करना है मगर उसके न्यूड बॉडी को देखके मेरी साँसे फूलने लगी. हालाँकि वो बत्सूरत है फिर भी जिस तरह से वो अपने भीमकाय लिंग को अपने हाथ से सहला रहा था मुझे कुछ मदहोशी सी होने लगी थी. मैने सोचा क्यूँ नही लोगो के जाने तक थोड़ा टाइम पास करलूँ मैं. इस से ये कंट्रोल में भी रहेगा और इसके मन की बात भी पता चल जाएगी मुझे. लेट मी सी क्या है इसके दिमाग़ में. वैसे भी मैं उसे अपने साथ कुछ करने तो नही दूँगी.

मेरे मन में यह भी था कि अगर मैं किसी तरह इसका वीर्य निकालने में कामयाब हो गयी तो शायद यह शांत हो जाएगा, क्यूंकी आदमी के अंदर जोश तबतक रहता है जबतक उसके अंदर वीर्य रहता है. एक बार अगर उसका वीर्य बाहर निकल गया तो फिर उसके आगे कितनी भी सुंदर से सुंदर औरत हो वो कुछ नही कर सकता है.

इस बात का पता मुझे पीछले चार पाँच दिनो मे चल गया था जैसे मनीष करते थे. मेरे पास इस समय और कोई रास्ता नही था इस बूढ़े से अपना पीछा छुड़ाने का सिवाय इसके कि मैं उसे अपनी बातो मे फँसा कर उसका पानी निकलवा दू. इसके लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी था मेरा उसके साथ खुल कर बात करना. इसलिए अब मैं भी उसके साथ बात करने लगी.

“इसे यू ही निकाल कर रखोगे क्या. अंदर कर लो इसे.” मैने उसके भीमकाय लिंग की तरफ देखते हुवे कहा.

“तुम ले लो अंदर मेरी जान मैं तो कब से तैयार खड़ा हूँ.”

“धत्त अपने अंदर की बात नही कर रही मैं. इसे पॅंट में रख लो.”

“दे दो ना प्लीज़ एक बार. तूने पीनू को भी तो दी थी.”

उसका यू गिड़गिडना मुझे अप्रिय लगा. मैने उसे और सताने का प्लान बनाया.

“तुम्हे नही मिलेगा कुछ भी. तुमने तो मुझे यहाँ फँसाया है. जाओ तुम से कत्ति.”

“नही नही ऐसा मत कहो मेरी जान निकल जाएगी. बस एक बार दे दो ना.”

“यहाँ कैसे दूं तुम्हे. देखते नही बाहर लोग खड़े हैं. फिर किसी दिन दूँगी.”

“सच कह रही हो.”

“हां बिल्कुल सच.”

“मेरे लंड पे हाथ रख कर बोलो.”

“पागल हो क्या. मेरा यकीन करो. बाद में देखेंगे.”
 


वो मायूस हो गया. मैने उसे मुस्कुराते हुए पूछा कि “तुमने पीनू और मेरे बीच और क्या क्या देखा था होते हुए ? क्या तुमने ये भी देखा था कि मैने उसका वो भी हिलाया था और चूसा भी था” मेरे मूह से ये सुन कर वो हैरान हो गया. उसकी हालत देखने वाली थी. क्यूकी मैं अब पूरी तरह से खुल कर बोल रही थी.

मैने फिर अपने होंटो को धीरे से अपने दातों से दबा लिया. यह देख वो पागल हो उठा और ज़ोर से अपने लिंग को हाथ से हिलाने लगा जैसे की हस्तमैथुन कर रहा हो. वो बोला कि अगर तुम्हे बुरा ना लगे तो क्या मैं मूठ मार सकता हूँ.

“बिल्कुल करो पीनू तो अक्सर मेरे सामने करता था ये. मुझे अच्छा लगता है ये देखना. चलो स्टार्ट करो.” मैने उसे उकसाने के लिए कहा.

वो ज़ोर ज़ोर से अपने लिंग को अपनी हाथों की उंगलियों में लेकर हस्तमैथुन करने लगा. जब 5 मिनिट हो गयी और उसने आँखे बंद कर ली तो मैं समझ गयी अब ये झदाने वाला है. यही तो मैं चाहती थी.

वो भी अब मुझसे कुछ कुछ बोलने लगा, मेरी शरीर के बारे में. मुझे भी मज़ा तो आ ही रहा था.

“आहह कब आएगा वो दिन जब मैं तुम्हारी मखमली गांद मारूँगा.”

“जल्दी आएगा सब्र करो तुम. और धीरे बोलो.”

“तुम्हारी चुचियाँ बिल्कुल बड़े बड़े संतरों जैसी हैं. नही संतरे नही नारियल जैसी है” वो झटके लेता हुवा बोला.

“धत्त शरारती कही के.”

अचानक मेरा ध्यान बाहर की हलचल पर चला गया. तभी उसने एक हाथ से मेरे बायें उभार को दबोच लिया. “वाह क्या संतरें हैं.”

मैने गुस्से में उसका हाथ झटक दिया और बोली, “ मेरे संतरे हर किसी के लिए नही है. “

वो मायूस हो गया.

“पीनू ने तो मेरे सन्तरो पर आइस क्रीम लगा कर चॅटी थी. क्या तुम ऐसा कर सकते हो” मैने उसे और चढ़ाने के लिए अपने और पीनू की झूठी बातें बोलने लगी

मगर यह सब कहते कहते मैं खुद ही एग्ज़ाइट होने लगी…लेकिन मैं डरने भी लगी कि कहीं कोई आ ना जाए…आंड मोरोवर इसका झाड़ भी नही रहा था…व्हाट टू डू.

“चल दीखा तो दे ये संतरे एक बार. मेरा पानी छ्छूटने में आसानी होगी.”

“अभी नही फिर कभी दिखाउन्गि, तुम तो खुद देख रहे हो कि सब लोग छत पर ही है कोई अगर यहाँ पर आ गया तो.? मुझे बोहोत डर लग रहा है” मैने उसे समझाते हुए कहा ताकि वो मुझसे दूर रहे.

“अरे मेरी रानी कोई नही आएगा यहाँ कोई नही आता है. तू बस अब खोल दे जल्दी से” उसने वही से बैठे बैठे मेरी छाती को एक टक देखते हुए कहा. ” पीनू को तो तुमने बड़े प्यार से अपनी चूत भी दी थी और अपने संतरे भी चुस्वाए थे. मुझे भी थोड़ा दिखा दो तो मेरा भी काम हो जाएगा.”

मुकेश की बात सुन कर मैं एक दम हैरान हो गयी. यानी इस बुड्ढे हरामी ने उस दिन छत पर सब देख लिया था. “ क्या क्या देखा था तुमने ?” मैने उस से जिग्यासा वश पूछा ताकि पता चले कि पीनू और मेरे बीच उसने क्या देखा था.

“यही कि पीनू ने तुम्हारे संतरो को खूब जी भर कर चूसा था और तुमने भी खूब मज़े से अपने संतरो को चुस्वाया था. तुम दोनो की सब स्टोरी जो भी उस रात छत पर हुई थी मुझे सब पता है..हहहे” उसने वही गंदी सी हँसी हस्ते हुए कहा.

“क्या देखा है तुमने मेरे और पीनू के बीचे मे मुझे भी तो पता चले. कि कितनी झूठी सच्ची और मंगडंत बाते तुम बना रहे हो ?” मैने उस से सब कुछ उगलवाने के लिए उसे और उकसाया. छत पर अब भी लोगो की भीड़ वैसे ही जमा थी. अंदर ही अंदर मेरा दिल बुरी तरह से इस बात को लेकर धड़क रहा था कि कही कोई आ ना जाए.

मुकेश ने कहा “देखो कोई देख लेगा, मुझे जल्दी से दिखा दो ताकि मैं अपना पानी निकाल सकु वरना अगर कोई अंदर आ गया तो तुम सोच लो.”

मुझे पता तो था कि वो ये सब क्यो कह रहा है पर फिर भी दरवाजे पर हो रही हलचल और आती हुई आवाज़ो ने मुझे बोहोत बैचैन कर दिया था समझ मे नही आ रहा था कि क्या करू क्या ना करू.

“देखो तुमने जब पीनू को दे दी तो मुझे देने मे इतने नखरे क्यू कर रही हो ?” उसने फिर से एक बार गिड़गिदते हुए कहा.

“तुम समझते क्यू नही हो मैने पीनू के साथ कुछ नही किया है तुमने जो भी देखा आइ डॉन’ट नो व्हाट एवर यू सीन वो सब ग़लत है और यहाँ पर मुझे ये सब बिल्कुल भी ठीक नही लग रहा है.” मैने फिर से उसे एक बार समझाने की नाकाम कोसिस करते हुए कहा.

मुकेश- “इस में ठीक लगने, ना लगने की क्या बात है ? ये तो एक खेल है, मज़े से खेलो और भूल जाओ, तुम बेकार में चिंता कर रही हो.” उसने मेरी तरफ ललचाई हुई नज़ारो से देखते हुए कहा.

“तुम आदमी हो, एक औरत की मजबूरी तुम नही समझ सकते.” मैने उसे फिर से समझाते हुए कहा.

“अगर मैं तुमको मजबूर कर रहा हूँ तो मैं ज़रूर ग़लत हू, पर अगर तेरा मन खुद मेरे साथ चुदाई करने का कर रहा है तो तू क्यू अपने मन को मार रही है. अपने मन को ज़बरदस्ती मारना बिल्कुल ग़लत है.” उसने मेरी आँखो को शायद पढ़ लिया था जिनमे इस समय वासना की लहरो ने बोहोत धीमे ही सही पर उठना शुरू कर दिया था.

“तुम समझ नही रहे हो. मैं एक शादी शुदा औरत हू और बाहर मेरे पति मनीष खड़े हुए है अगर उन्हे ज़रा भी पता चल गया तो तुम नही जानते कि क्या हो जाएगा. प्लीज़ तुम अपना जल्दी जल्दी हिला कर पानी निकाल लो.

“अगर तेरा पति तुझे सही तरीके से चोद पता तो तू पीनू से क्यू चुदवाती तूने तो पीनू से अपनी गांद भी मरवाई थी.” उसने मुझे फिर से टोन्ट कसते हुए कहा. उसकी बात सुन कर मैं शर्म से ज़मीन मे गढ़ी जा रही थी.
 


उसकी बात सुन कर मुझे बोहोत तेज गुस्सा आ गया और मैं उस के उपर बरस पड़ी “शकल देखी है तूने कभी अपनी आयने मे जो मेरे से इस तरह बात कर रहा है, अपनी शकल देख जा कर आयने मे तब मुझसे बात करियो” मैं उस पर बोहोत बुरी तरह से बरस पड़ी जिस से वो बुरी तरह सक-पका गया.

मुझे डर लग रहा था कि कही वो मेरे इतना तेज गुस्सा करने से कुछ उल्टा सीधा ना कर दे जो मेरे गले की हड्डी ना बन जाए. पर इसके उल्टे वो मेरे कदमो में बैठ गया और धीमे से बोला, “तुम गुस्से में और भी ज़्यादा प्यारी लग रही हो”

मैने उसकी बात का कोई जवाब नही दिया. और चुप-चाप उसको घूरती रही.

“प्लीज़ मुझ पर रहम खाओ, मैं तुझसे फिर से माफी माँगता हू. केयी सारी रात मैं तेरे लिए तड़प्ता रहा हू, तुझे क्या पता मेरी क्या हालत हो रही है तेरे प्यार में. तेरे जिस्म ने मुझे पागल कर दिया है बस एक बार अपने संतरे दिखा दे मेरा पानी निकल जाएगा.” उसने मेरे कदमो मे गिड-गिदते हुए कहा.

मेरे मन में यह भी था कि अगर मैं किसी तरह इसका वीर्य निकालने में कामयाब हो गयी तो शायद यह शांत हो जाएगा, क्यूंकी आदमी के अंदर जोश तबतक रहता है जबतक उसके अंदर वीर्य रहता है. एक बार अगर उसका वीर्य बाहर निकल गया तो फिर उसके आगे कितनी भी सुंदर से सुंदर औरत हो वो कुछ नही कर सकता है.

क्रमशः................
 


Tadapti Jawani-paart-26


gataank se aage.........“tum sach mein suvar ho.” maine apne gusse ko bahar nikal kar use gaali dete hue kaha.

“ha...ha...ha vo to main hun. Bolo kya deekhaogi choot ya chuchiya.” usne phir se gandi si hansi haste hue kaha. jaisi uski suvar si shakl thi waise hi uski hansi bhi thi. jise sun kar mera khoon khool raha tha.

“tum mudo to sahi please.” maine us se phir se request karte hue kaha.

“deekhaogi na phir apni choochi.” usne meri baat par turant reply karte hue kaha.

“haan deekha dungi, ab mudo.” Mere muh se na jaane kaise haan nikal gaya jabki mera us budhhe ko haan bolne ka koi irada nahi tha.

Vo gandi si hansi hanste huve mud gaya. Maine fauran dabbe ko apne neeche sarkaya aur usmein mootne lagi. Jab maine kar liya to vo mud gaya. Magar tab tak main uth chuki thi. Maine gaur kiya ki usne apni jeb se ek desi daaru ki bottle nikaal kar puri gatak li thi.

“deekhao ab.” Vo nashe mein thoda jor se bola.

“dheere bolo koyi sun lega. nahi deekhaungi.” maine saaf inkar kartte hue kaha.

“nahi aisa mat kaho main mara ja raha hun in santron ko dekhne ke liye.” usne is baar thoda gidgidane wali style me kaha.

Main ajeeb musibat mein phans gayi thi.Ab main bahar kaise jaun.. upar se yeh dehati apne kapde utaar ke khada hai…I know he is not in senses kyunki who peeya hua hai. isliye ab mujhe hi samajhdari se kaam lena hoga. Mujhe use pyar se bahlana hoga nahi to meri izzat khatre mein pad jaayegi. Usne kahi jor se kuch bol diya to baahar khade log jaroor ander aa jaayenge.

mujhe ab in logon ke jane ka wait karna hai magar uske nude body ko dekhke meri saanse phoolne lagi. halanki wo batsurat hai phir bhi jis tarah se who apne bheemkay ling ko apne haath se sahla raha tha mujhe kuch madhosi si hone lagi thi. maine socha kyun nahi logo ke jaane tak thoda time pass karlun main. Is se ye control mein bhi rahega aur iske man ki baat bhi pata chal jaayegi mujhe. let me see kya hai iske dimag mein. waise bhi main use apne sath kuch karne to nahi dungi.

mere man mein yeh bhi tha ki agar main kisi tarah iska virya nikalne mein kaamyab ho gayi to shayad yeh shant ho jayega, kyunki aadmi ke andar josh tabtak rahta hai jabtak uske andar virya rahta hai. ek baar agar uska virya bahar nikal gaya to phir uske aage kitni bhi sundar se sundar aurat ho wo kuch nahi kar sakta hai.

is baat ka pata mujhe peechle char paanch dino me chal gaya tha jaise manish karte the. mere paas is samay aur koi rasta nahi tha is budhe se apna peecha chudane ka siway iske ki main use apni baato me fansa kar uska paani nikalwa du. iske liye sabse jayda jaroori tha mera uske saath khul kar baat karna. isliye Ab main bhi uske sath baat karne lagi.

“ise yu hi nikaal kar rakhoge kya. Ander kar lo ise.” Maine uske bheemkay ling ki taraf dekhte huve kaha.

“tum le lo ander meri jaan main to kab se taiyar khada hun.”

“dhatt apne ander ki baat nahi kar rahi main. Ise pant mein rakh lo.”

“de do na please ek baar. Tune pinu ko bhi to di thi.”

Uska yu gidgidana mujhe apinu laga. Maine use aur sataane ka plan banaya.

“tumhe nahi milega kuch bhi. Tumne to mujhe yaha phansaya hai. Jao tum se katti.”

“nahi nahi aisa mat kaho meri jaan nikal jaayegi. Bas ek baar de do na.”

“yaha kaise dun tumhe. Dekhte nahi baahar log khade hain. Phir kisi din dungi.”

“sach kah rahi ho.”

“haan bilkul sach.”

“mere lund pe haath rakh kar bolo.”

“paagal ho kya. Mera yakin karo. Baad mein dekhenge.”

Vo maayus ho gaya. maine use muskurate hue poocha ki “tumne pinu aur mere beech aur kya kya dekha tha hote hue ? kya tumne ye bhi dekha tha ki maine uska wo bhi hilaya tha aur chusa bhi tha” Mere muh se ye sun kar vo hairan ho gaya. Uski haalat dekhne wali thi. kyuki main ab puri tarah se khul kar bol rahi thi.

maine phir apne honton ko dheere se apne daaton se daba liya. yeh dekh wo pagal ho utha aur zor se apne ling ko haath se hilaane laga jaise ki hastmaithun kar raha ho. Vo bola ki agar tumhe bura na lage to kya main muth maar sakta hun.

“bilkul karo pinu to aksar mere saamne karta tha ye. Mujhe apinu lagta hai ye dekhne. Chalo start karo.” Maine use uksaane ke liye kaha.

Vo jor jor se apne ling ko apni haathon ki ungliyon mein lekar hastmaithun karne laga. Jab 5 minute ho gayi aur usne aankhe band kar li to main samjah gayi ab ye jhadane wala hai. Yahi to main chaahti thi.

who bhi ab mujhse kuch kuch bolne laga, meri sharir ke bare mein. mujhe bhi maza to aa hi raha tha.

“aahh kab aayega vo din jab main tumhari makhmali gaand maarunga.”

“jaldi aayega sabr karo tum. Aur dheere bolo.”

“tumhari chuchiyan bilkul bade bade santron jaisi hain. nahi santre nahi nariyal jaisi hai” Vo jhatke leta huva bola.

“dhatt sharaarti kahi ke.”
 


Achanak mera dhyaan baahar ki halchal par chala gaya. Tabhi usne ek haath se mere baayein ubhaar ko daboch liya. “waah kya santrein hain.”

maine gusse mein uska haath jhatak diya aur boli, “ mere santre har kisi ke liye nahi hai. “

vo maayus ho gaya.

“pinu ne to mere santon par ice cream laga kar chaati thi. Kya tum aisa kar sakte ho” maine use aur chadhane ke liye apne aur pinu ki jhooti baatein bolne lagi

Magar yeh sab kahte kahte main khud hi excite hone lagi…lekin main darne bhi lagi ki kahin koi aa na jaye…and moreover iska jhad bhi nahi raha tha…what to do.

“chal deekha to de ye santre ek baar. Mera paani chhootne mein asaani hogi.”

“abhi nahi phir kabhi dikhaugi, tum to khud dekh rahe ho ki sab log chhat par hi hai koi agar yaha par aa gaya to.? mujhe bohot dar lag raha hai” maine use samjhate hue kaha taaki wo mujhse door rahe.

“are meri raani koi nahi aayega yaha koi nahi aata hai. Tu bas ab khol de jaldi se” usne wahi se baithe baithe meri chhati ko ek tak dekhte hue kaha. ” pinu ko to tumne bade pyaar se apni choot bhi di thi aur apne santare bhi chuswaye the. mujhe bhi thoda dikha do to mera bhi kaam ho jayega.”

Mukesh ki baat sun kar main ek dam hairaan ho gayi. Yaani is budhhe harami ne us din chhat par sab dekh liya tha. “ kya kya dekha tha tumne ?” maine us se jigyasa wash pucha taaki pata chale ki pinu aur mere beech usne kya dekha tha.

“yahi ki pinu ne tumhare santro ko khoob ji bhar kar chusa tha aur tumne bhi khoob maje se apne santro ko chuswaya tha. tum dono ki sab story jo bhi us raat chhat par hui thi mujhe sab pata hai..hehehe” usne wahi gandi si hansi haste hue kaha.

“kya dekha hai tumne mere aur pinu ke beeche me mujhe bhi to pata chale. Ki kitni jhooti sachhi aur mangadanth baate tum bana rahe ho ?” maine us se sab kuch ugalwane ke liye use aur uksaaya. Chhat par ab bhi logo ki bheed waise hi jama thi. Andar hi andar mera dil buri tarah se is baat ko lekar dhadak raha tha ki kahi koi aa na jaye.

Mukesh ne kaha “dekho koyi dekh lega, mujhe jaldi se dikha do taaki main apna paani nikal saku warna agar koi andar aa gaya to tum soch lo.”

Mujhe pata to tha ki vo ye sab kyo kah raha hai par phir bhi darvaaje par ho rahi halchal aur aati hui aawajo ne mujhe bohot baichain kar diya tha samjh me nahi aa raha tha ki kya karu kya na karu.

“dekho tumne jab pinu ko de di to mujhe dene me itne nakhre kyu kar rahi ho ?” usne phir se ek baar gidgidate hue kaha.

“tum samjhte kyu nahi ho maine pinu ke saath kuch nahi kiya hai tumne job hi dekha I don’t know what ever you seen wo sab galat hai aur yaha par Mujhe ye sab bilkul bhi thik nahi lag raha hai.” Maine phir se use ek baar samjhane ki nakaam kosis karte hue kaha.

Mukesh- “is mein theek lagne, na lagne ki kya baat hai ? ye to ek khel hai, maje se khelo aur bhul jao, tum bekaar mein chinta kar rahi ho.” usne meri taraf lalchayi hui najaro se dekhte hue kaha.

“tum aadmi ho, ek aurat ki majburi tum nahi samajh sakte.” Maine use phir se samjhate hue kaha.

“agar main tumko majboor kar raha hun to mai jarur galat hu, par agar tera man khud mere saath chudai karne ka kar raha hai to tu kyu apne man ko maar rahi hai. Apne man ko jabardasti maarna bilkul galat hai.” Usne meri aankho ko shayad padh liya tha jinme is samay vasna ki lehro ne bohot dheeme hi sahi par uthna shuru kar diya tha.

“tum samjh nahi rahe ho. main ek shaadi shuda aurat hu aur bahar mere pati Manish khade hue hai agar unhe jara bhi pata chal gaya to tum nahi jante ki kya ho jayega. Plz tum apna jaldi jaldi hila kar paani nikal lo.

“agar tera pati tujhe sahi tareeke se chod pata to tu pinu se kyu chudwati tune to pinu se apni gaand bhi marwayi thi.” Usne mujhe phir se tonth kaste hue kaha. Uski baat sun kar main sharm se jameen me gadi ja rahi thi.

Uski baat sun kar mujhe bohot tej gussa aa gaya aur main us ke upar baras padi “shakal dekhi hai tune kabhi apni aayne me jo mere se is tarah baat kar raha hai, apni shakal dekh ja kar aayne me tab mujhse baat kariyo” main us par bohot buri tarah se baras padi jis se wo buri tarah sak-paka gaya.

Mujhe dar lag raha tha ki kahi wo mere itna tej gussa karne se kuch ulta seedha na kar de jo mere gale ki haddi na ban jaye. Par iske ulte wo mere kadmo mein baith gaya aur dheeme se bola, “tum gusse mein aur bhi jyada pyari lag rahi ho”

Maine uski baat ka koyi jawaab nahi diya. Aur chu-chap usko ghoorti rahi.

“Please mujh par raham khao, mai tujhse fir se maafi maangta hu. Kayi saari raat mai tere liye tadapta raha hu, tujhe kya pata meri kya haalat ho rahi hai tere pyar mein. Tere jism ne mujhe pagal kar diya hai bas ek baar apne santare dikha de mera paani nikal jayega.” Usne mere kadmo me gid-gidate hue kaha.

“Please mujh par raham khao, mai tujhse fir se maafi maangta hu. Kayi saari raat mai tere liye tadapta raha hu, tujhe kya pata meri kya haalat ho rahi hai tere pyar mein. Tere jism ne mujhe pagal kar diya hai bas ek baar apne santare dikha de mera paani nikal jayega.” Usne mere kadmo me gid-gidate hue kaha.

mere man mein yeh bhi tha ki agar main kisi tarah iska virya nikalne mein kaamyab ho gayi to shayad yeh shant ho jayega, kyunki aadmi ke andar josh tabtak rahta hai jabtak uske andar virya rahta hai. ek baar agar uska virya bahar nikal gaya to phir uske aage kitni bhi sundar se sundar aurat ho wo kuch nahi kar sakta hai.

kramashah................

 
तड़पति जवानी-पार्ट-27

गतान्क से आगे.........

“अगर तुम्हे मेरी चुचिया देखनी है तो मुझे वो सब बाते बताओ जो तुमने मेरे और पीनू के बीच मे छत पर देखी थी.”

“तुम्हे वो सब सुनना है तो सुनो” कह कर उसने बड़ी चालाकी से अपने लौदे से अपना हाथ हटा लिया और मुझे पीनू ने जो मेरे साथ किया था वो बताने लग गया.

“पीनू ने जब तुम से कहा था कि एक बार दे दो ना. और तुम्हारे होंटो से अचानक निकल गया, क्या ? और तुम ना चाहते हुवे भी शर्मा गयी थी. जिस पर पीनू ने तुमसे बेशर्मी से हंसते हुवे कहा, वही दे दो जहा मनीष भैया तुम्हारी लेते है, सच जब से तुम्हारी ली है रात मे मेरा लंड मेरे को कोस्ता रहता है कि मनीष ने क्या किशमत पाई है.”

ये सुन कर एक पल को मेरे होश उड़ गये. मेरे मन का एक कोना भी तो ऐसा ही चाहता था पीनू का जब से लिंग देखा था मेरी आँखो के आगे तो बस वही सब घूम रहा था. पर ये बुढहा आधी बात अपने मन की और आधी सही बोल रहा था शायद इस समय इसके उपर शराब के नशे का असर हो रखा था. जो वो ये सब बोल रहा था पर इस नशे की हालत मे भी ये गनीमत थी कि वो ज़्यादा तेज जैसा की आम तौर पर और नशेड़ी करते है जो ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लग जाते है वैसा कुछ नही कर रहा था.

पर फिर मैने खुद को संभाला और कहा “चुप करो, मैं ऐसा नही कर सकती, पीनू और उसके साथ तुमने जिसे भी देखा हो पर वो मैं नही थी और अब ये अपनी झूठी कहानी सुनाना बंद करो.” मैने मुकेश को घुस्से से डाँटते हुए कहा.

मुकेश ने कहा “सच बताना क्या दुबारा तुझे लंड लेने की इच्छा नही हो रही है मेरा लॉडा देख कर ? क्या तुझे इस समय वो पल याद नही आया जब पीनू ने तेरी गांद मारी थी ? मेरे लॉड को देख कर सच सच बता”

ये सब सुन कर मैं फिर से अपने होश खो बैठी, मेरी आँखो में फिर से वो पल घूम गया जब पीनू बहुत तेज-तेज मेरे नितंबो में धक्के लगा रहा था और मैं उसके हर धक्के का मज़ा सिसकारिया भर कर ले रही थी.

उसने फिर पूछा, बता ना शर्मा मत क्या सच मे तूने पीनू को अपनी गांद मारने दी थी. मैने तो छत पर देखा भी था कि छत पर उस तरफ साइड मे जहाँ पर उस दिन कंडे रखे हुए थे उसने तेरी गांद मे पूरा लॉडा घुसेड दिया था जिस से तेरी बुरी तरह से चीख निकल गयी थी. जब से पीनू और तेरी चुदाई देखी है तब से उपर वाले से यही दुआ माँग रहा हू कि मुझे भी पीनू की तरह एक बार तेरी गांद की सेवा करने का मौका मिल जाए. मैं भी तेरी गांद का एक बार मज़ा ले सकु देखु तो सही की तेरी मस्तानी गांद का कैसा मज़ा आता है.

वो ऐसी बाते कर रहा था कि कोई भी सुन कर बहक जाता, मैं भी थोड़ा सा बहक गयी, पर फिर मैने कहा, “नही मुझे कुछ याद नही आया, तुम अब चुप चाप अपना हिलाओ, और मेरा पीछा छोड़ दो और मुझे मेरे परिवार में खुश रहने दो. मैं एक शादी शुदा औरत हू और तुमने ये सोच भी कैसे लिया कि मैं तुम्हारे या उस हरामी पीनू के साथ ऐसा कुछ कर भी सकती हू”

वो बोला, “तू तो खुश ही है मैं ही दीवानो की तरह यहा तेरी गांद के चक्कर मे भटक रहा हू, देख तेरे सन्तरो की एक झलक पाए बिना मेरे लंड ने भी पानी निकालना बंद कर दिया है.. ये भी तेरे सन्तरो की एक झलक का दीदार करना चाहता है..”

मैने उसकी हालत देख कर उसको और ज़्यादा चिढ़ाते हुए कहा “तो मैं क्या करूँ मैने तो तुम्हे अपने पीछे नही लगाया ना और ना मैने तुम्हे मेरे पीछे यहाँ पर आने को कहा था?”

वो बोला, “ठीक है ग़लती मेरी ही है, जो सब कुछ छोड़ कर तेरे पीछे पड़ा हूँ, मैं चला जाउन्गा पर एक बार अपने संतरे तो दिखा दो”
 


उसकी बात सुन कर मैं कुछ नही कह पाई और खामोशी से उसकी बेबसी देखती रही मुझे उसको यूँ तड़प्ता हुआ देख कर बड़ा अच्छा लग रहा था. मुझे ये बात अच्छे से समझ मे आ गयी थी कि ये इस तरह चुप नही रहेगा. क्या मुझे इसको को-ऑपरेट करना सही होगा.? मेरे मन मे एक सवाल उठा और जल्दी ही उसका जवाब भी मिल गया. हां अगर मैं इसको को-ऑपरेट करू तो ये सब सुन कर ये उत्तेजित हो जाएगा और इसका पानी निकल जाएगा. एक बार ये झाड़ गया तो फिर सब कुछ नॉर्मल हो जाएगा.

“हां तुम सही कह रहे हो पीनू ने मेरे साथ बोहोत अच्छे से किया. मुझे नही लगता कि तुम उस तरह से कर भी पाओगे. तुम अपनी हालत तो देखो. तुम्हारे इस बुढहे दुबले पतले शरीर मे इतनी जान है कि तुम पीनू की तरह मुझे खुश कर सको” कह कर हल्के हल्के हँसने लग गयी.

मुकेश मेरी बात सुन कर उत्तेजित हो जाता है और कहता है “क्या किया था ऐसा पीनू ने जो मैं नही कर सकता मेरा लंड भी तो पीनू के बराबर ही बड़ा है और जो मेरे लंड से एक बार चुद ले तो फिर वो मेरी गुलाम हो कर रह जाती है.”

“मुझे नही लग रहा तो मैं क्या करू” मैने उसे और ज़्यादा चिढ़ाते हुए कहा.

मुकेश मेरी बात सुन कर बोहोत ज़्यादा उत्तेजित हो जाता है और अपने लंड को हाथ मे पकड़ कर हिलाते हुए कहता है “मेरे लंड को देखो और पीनू के लंड का साइज़ याद करो पीनू का लंड मेरे से छ्होटा है. जब मेरा लंड तुम्हारी चूत मे जाएगा तो तुम्हे इतना मज़ा आएगा जितना तुम्हे पीनू के साथ भी नही आया था.”

जब मेरी नज़र बुढहे के लंड पर जमती है तो सच मे इस बुढहे मुकेश का लंड पीनू से बड़ा था और मोटा भी पीनू के लंड को थोड़ी देर यूँ एक तक देखने से मेरी चूत ने भी जवाब दे दिया था मैं भी पूरी तरह से गरम हो चुकी थी. पर मैं इस बुढहे के साथ उस तरह का कुछ भी नही करना चाहती थी इसलिए मैने सोचा कि इसको सिर्फ़ बाते करते हुए झाड़वाना ठीक होगा.

“तुम्हे पता है पीनू का सूपड़ा कितना मोटा है. पीनू ने तू मुझे अपना लंड चुस्वाया था उनके लंड का स्वाद भी एक दम बढ़िया था. मैने मज़े मज़े मे दो बार पीनू के लंड की चुसाइ की थी और पीनू ने भी मेरी चूत को जम कर चॅटा था उसकी पूरी जीभ मेरी चूत को चाट चाट कर सॉफ कर रही थी. अभी भी मुझे पीनू की जीभ अपनी चूत पर सॉफ महसूस होती है.” मैने उसको और ज़्यादा उत्तेजित करने के लिए कहा. ताकि उसका ये सब बाते सुन कर पानी निकल जाए.

मुकेश अपना लंड अपने हाथ से हिलाते हुए काफ़ी थक जाता है और कहता है कि “अरे मेरी जान मेरी मदद करो ना मेरा हाथ थक गया है लंड हिलाते हिलाते पर पानी नही निकल रहा है” मुकेश ने एक नज़र मेरी तरफ देखा जो ठीक उसके लंड को ललचाई हुई नज़रो से देख रही थी इसी बात को समझ कर “तुम अपने हाथ से हिलाओ ना तुम्हारे हाथ का स्पर्श पा कर शायद मेरा पानी निकल जाए और मैं झाड़ जाउ.”

“खबर दार जो मुझे जान कहा तो अपनी शकल देखी है कभी आयने मे. और तुमने सोच भी कैसे लिया कि मैं तुम्हारे जैसे आदमी का लंड अपने हाथ मे लेकर हिलाउन्गि” मैने उसे बुरी तरह से हड़काते हुए कहा, मेरे इस तरह हड़काने से वो बुरी तरह झेंप गया. बाहर से आने वाली आवाज़ भी अब आना कम हो गयी थी इसलिए मैने उस से कहा “मैं जा रही बाहर सब चले गये है इस से पहले कि कोई छत पर वापस आ जाए मैं जा रही हू.” ये कहते हुए जैसे ही मैं मूड कर दरवाजे तक आई तो मेरा दिल बुरी तरह से धड़क उठा बाहर छत पर मनीष खड़े हुए थे. और अगर मैं मनीष के सामने इस तरह से बाहर निकलती तो मेरी क्या इज़्ज़त रह जाती. यही सोच कर डर के कारण मैं वापस पीछे की तरफ हो गयी. मेरे वापस पीछे होते ही मुकेश मेरे कदमो मे गिर गया और मेरे पैर पकड़ कर बोला “एक बार दिखा दे ना अपने संतरे मेरे से अब बर्दाश्त नही हो रहा है” वो नशे मे होने के कारण थोड़ा तेज़ी से बोल रहा था जिस से मेरे प्राण और हलक मे आ कर अटक गये, कही मनीष ना कुछ सुन ले. इस समय मेरी उपर की साँस उपर और नीचे की नीचे बीच मे पेट खाली वाली स्थिति हो गयी थी.

“दिखा दे ना एक बार मेरा निकल जाएगा” मुकेश ने फिर से मेरे पैरो मे गिरते हुए कहा.
 


मैं अजीब इस्थिति मे फँस गयी थी की क्या करू क्या ना करू कुछ भी समझ मे नही आ रहा था एक तरफ बाहर मनीष खड़े हुए थे और दूसरी तरफ ये मुकेश मेरे पीछे पड़ा हुआ था. पर उसका यूँ मेरे पैरो मे गिड़गिदते हुए भीक माँगना मुझे बोहोत अच्छा लग रहा था. अभी मैं उसकी तरफ गौर करती इस से पहले ही मनीष की आवाज़ मेरे कानो मे आई वो नीचे जा रहे थे इस बात को सुन कर मेरे दिल ने राहत की साँस ली पर उनके जाने का जो फ़ायदा हुआ उसके बदले छत पर और लोग आ गये. मैं तो यहाँ इस छत पर आ कर बुरी तरह से फँस गयी थी.

छत से जब मैने अपना ध्यान हटाया तो इधर मुकेश लगातार मेरे पैरो मे गिर कर मुझसे एक बार दिखा देने की भीख माँग रहा था. उसको यूँ गिड-गिडता हुआ देख कर मेरे मन मे उसके लिए दया आ गयी. और मैने उस से कहा “अच्छा ठीक है मैं तुम्हारा अपने हाथो से हिला देती हू ताकि तुम्हारा पानी निकल जाए और तुम आसानी से झाड़ जाओ” मेरी बात सुन कर वो ख़ुसी से पागल हो गया.

वो जल्दी से मेरे पैरो से उठ कर खड़ा हो गया और मैं उसके पास ही खड़े हो कर उसका लॉडा हाथ मे पकड़ लिया हिलाने के लिए. पर जैसे ही उसका लंड मैने अपने हाथ मे लिया मेरे पूरे शरीर मे एक सनसनी सी दौड़ गयी. मेरी योनि बुरी तरह से गीली होना शुरू हो गयी. मुकेश के लंड को हाथ मे पकड़ कर मैने सोचा अगर मैं इस से थोड़ी गंदी बाते करू तो इसको जल्दी पानी निकल जाएगा.

मैने उसके लंड को पकड़ कर उसकी खाल को जैसे ही पीछे किया उसके लंड का सूपड़ा निकल आया “अरे वाह मुकेश तुम्हारे लंड का सूपड़ा तो बोहोत चिकना और एक दम लाल रखा हुआ है इस उमर मे भी तुम्हारा लंड एक दम लोहे की रोड की जैसे सख़्त हो जाता है कैसे क्या करते हो तुम और ये तुम्हारा लंड इतना बड़ा कैसे हो गया.” मैं मुकेश का लंड हिलाते हुए उस से इस तरह की बात करना शुरू कर दिया ताकि उसका पानी जल्दी से निकल जाए और वो झाड़ कर शांत हो जाए और मैं वापस आराम से नीचे जा सकु.

मुकेश मेरी बात सुन कर मुस्कुरा देता है और कहता है “अरे अब क्या बताऊ बस बचपन से ही मेरा ऐसा है”

“वैसे मुकेश अब तक कितनी चूत और गांद चोद चुका है तुम्हारा ये मोटा घोड़े जैसा लंड?” मैं भी अब खुल कर उसके साथ चूत लंड गांद बोल रही थी.

“कितनी चूते चोदि है ये तो नही पता पर तुम्हारी एक बार चूत मिल जाए तो मैं जिंदगी भर तुम्हारी गुलामी करता रहुगा. तुम्हारी गांद देख कर तो ऐसा लगता है कि बस सीधा लंड पकड़ कर तुम्हारी गांद मे पेल दू.” कह कर उसने फिर अपनी गंदी सी हँसी हंस दी पर अब मुझे उसकी हँसी गंदी नही लग रही थी. क्यूकी वो मेरी इतनी तारीफ करता जा रहा था. हर औरत की इच्छा होती है कि कोई हो जो उसके हर अंग की तारीफ करे की वो कैसी दिखती है जब वो चलती है तो उसकी बाल खाती हुई लचक मारती हुई कमर लोगो की नींद उड़ा देती है. उसके गांद के दोनो गुंबद जैसे तरबूज जब किसी तराजू की तरह उपर नीचे को होते है तो अच्छे अच्छे आदमियो के ईमान डोल जाते है. छाती के दोनो मस्त गोल उभारो को देख कर तो ऐसा लगता है की बस अभी खोल कर इन्पे अपना मुँह लगा लू और दोनो हाथो से कस कर रगड़ दू. हर औरत ये सब सुनने को बेकार होती है पर होती तो एक औरत ही है इसलिए अपने मन की बात को मन मे रखती है. पर मुकेश और पीनू दोनो ने मेरे पूरे शरीर की इतनी तारीफ की थी कि मैं अपने आप ही बहक गयी. जो तारीफ मैं मनीष के मुँह से अपने लिए सुनना चाहती थी वो आज यहाँ इस कोठरी मे इस बुढहे मुकेश के मुँह से सुनने को मिल रही थी.
 
उसके मुँह से अपने लिए तारीफ सुन कर मैं और भी ज़्यादा मस्त हो गयी और मस्ती मे आने के कारण मैने उसके दोनो बॉल्स को भी अपने हाथ से सहलाना शुरू कर दिया. मुझे लग रहा था कि मुकेश का पानी अब निकल जाएगा पर मुकेश बोहोत चालक था उसने बड़ी चालाकी से जैसे ही पानी निकलने वाला होता था वो मेरे हाथ को रोक देने को कहता और थोड़ा पीछे को खिसक जाता था. इस तरह बीच मे रुक जाने से सारा किया धारा बेकार हो जाता और उसका पानी नही निकल पाता. मेरे हाथ मुकेश की गांद पर भी चल रहे थे. मैने मज़े लेने के लिए अपनी एक उंगली मुकेश की गांद मे घुसा दी. मेरे यूँ अचानक गांद मे उंगली घुसा देने से मुकेश बुरी तरह उछल गया. और मुस्कुरा कर मेरी तरफ देखते हुए बोला “बोहोत शरारती हो तुम” कह कर मुस्कुरा दिया.

उसको मुस्कुराता हुआ देख कर मैं भी मुस्कुरा दी और बोली “मज़ा आ रहा है या नही ?”

“कसम से आज तक इतना मज़ा नही मिला जितना अब आ रहा है. तुम्हारे हाथो मे तो जादू है” कहते हुए वो एक बार फिर से मुस्कुरा दिया. “फूलो से भी नाज़ुक है तुम्हारे ये हाथ. मन तो कर रहा है कि इन हाथो को चूम लू. पर तुम नाराज़ हो जाओगी. हहहे”

अपने बारे मे मुकेश के मुँह से तारीफ सुन सुन कर मैं और भी ज़्यादा उसकी तरफ होती जा रही थी. जिस से मेरा हाथ मुकेश के लंड पर और भी तेज़ी के साथ चल रहा था. और दूसरे हाथ से दो उंगली भी उसकी गांद मे घुस देती थी बीच बीच मे. लेकिन काफ़ी देर तक मुकेश का लंड हिलाने के बाद भी जब मुकेश का पानी नही निकलता है तो मैं बुरी तरह से मुकेश पर फ्रस्टरेट हो जाती हू और उस को झल्लाते हुए कहतू हू कि “तुम गाँव वाले साले सब के सब बीमार हो.. तुम लोगो मे तो वीर्य है ही नही निकलेगा तो जब, जब होगा” कह कर ना जाने क्यू मेरी अपने आप हँसी निकल जाती है.

“मैने तुम्हे बताया ना कि मेरा ऐसे नही निकलता है. जब तक मैं तुम्हारी चूत ना देखु लू तब तक मेरा पानी नही निकलेगा. तुम मेरी तकलीफ़ को समझो ना जब तुम पीनू को दे सकती हो तो मुझे दिखाने मे तुम्हारा क्या घिस जाएगा ? केवल एक बार दिखा दो मेरा अपने आप देख कर आसानी से निकल जाएगा जब तुम इतनी गरम हो तो तुम्हारी चूत तो तुम से भी ज़्यादा गरम होगी और तुम्हारी चूत की गरमी को देख कर मैं महसूस करते हुए अपने आप झाड़ जाउन्गा” कहते हुए वो फिर से एक बार मेरे कदमो मे गिर कर भीख माँगने लग गया. “दिखा दो ना एक बार” वो फिर से एक बार गिड-गिदाया. ज़बरदस्ती वो कर नही सकता था क्यूकी मैने आते ही उसके गाल पर रसीद काट दी थी इस लिए वो केवल मुझसे रिक्वेस्ट कर सकता था और वही वो कर रहा था.
 


छत पर भी अब लोगो की आवाज़े आना कम हो गया था और मुझे यहाँ पर आए हुए भी काफ़ी वक़्त हो गया था. इस लिए मैं वहाँ से जल्दी से जल्दी निकल लेना चाहती थी. पर ये मुकेश बार-बार मेरे कदमो मे गिर कर मुझसे इस तरह गिड-गीडा कर भीख माँग रहा था और मैं भी पूरी तरह से गरम हो चुकी थी इस लिए मैने मुकेश के लंड को ब्लो जॉब देने की सोची ताकि उसका आसानी से निकल जाए. मैं मुकेश को दीवार के सहारे से खड़ा कर दिया और वही उसके कदमो मे बैठ कर उसके लंड को हाथ मे पकड़ लिया और एक नज़र मुकेश की तरफ देखा वो अब भी मेरी तरफ रहम भरी नज़रो से देख रहा था. उसकी आँखो मे भीख देख कर मैं बोहोत खुस थी.

मैने मुकेश के लंड की खाल को एक झटके से पूरा का पूरा पीछे कर दिया जिस से मुकेश के मुँह से एक दर्द भरी आआआहह निकल गयी “आराम से करो ना” मुकेश के मुँह से जैसे ही ये शब्द निकले मैं मुकेश की तरफ देख कर मुस्कुरा दी और बोली “क्यू मज़ा नही आ रहा है ?”

“मज़ा तो आ रहा है पर थोड़ा आराम से करो ना तो और मज़ा आएगा” मुकेश ने मेरे सर पर अपना हाथ फिराते हुए कहा

“ठीक है आराम से करती हू” कह कर मैने मुकेश के लिंग पर अपनी जीभ फिरा दी.

मेरे झीभ फिरते ही मुकेश के पूरे शरीर मे एक सनसनी की सी लहर फैल गयी. “आहह क्या कर रही हो” मुकेश ने मज़े से अपनी आँखे बंद करे हुए ही कहा.

मैं भी मज़े से मुकेश के लंड को अपने मुँह मे ले कर चुस्ती रही कभी उसके सूपदे पर जीभ घुमाती तो कभी उसके लंड को मुँह मे लेकर चुस्ती. उसका लंड चूसने मे मुझे भी बड़ा मज़ा आ रहा था. मुकेश ने भी अब मेरे सर को पकड़ कर अपने लंड पर कसना शुरू कर दिया जिस से उसका लंड मेरे गले तक आ कर अटक जाता. यूँ ही काफ़ी देर तक मुकेश का लंड चूसने के बाद भी जब मुकेश का पानी नही निकला तो मैं बोहोत बुरी तरह से उस पर खिस्या गयी “तुम्हारे अंदर वीर्य है भी या नही इतनी देर हो गयी मुझे तुम्हारा पानी अभी तक नही निकला. हाथ से भी हिला दिया. ब्लो जॉब भी दे दी फिर भी तुम्हारा पानी नही निकल रहा है.” मैने बुरी तरह से उस पर खिस्याते हुए कहा पर फिर मेरे दिमाग़ मे ना जाने क्या आया कि इस से और मज़े लिए जाए “मैं अब यहाँ नही रुक सकती मैं जा रही हू.” बोल कर मैं खड़ी हो गयी और दरवाजे की तरफ देखने लगी.

क्रमशः................
 
Back
Top