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तस्वीर का रहस्य

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तस्वीर का रहस्य



लेखक - पराग-प्रेरणा

कहते हैं की रिश्तों की डोर को टाइट पकड़े रहना चाहिए वरना वो छूट जाती है। यह कहानी इन्हीं रिश्तों की डोर की है। यह कहानी है पराग की। आगे की कहानी पराग की जुबानी।

मेरा नाम पराग है और 28 साल का हूँ। मेरी शादी प्रेरणा से 5 साल पहले हुई थी और मेरा अभी एक साल का बेटा भी है। मैं एक कंपनी में जाब करता हूँ और प्रेरणा हाउसवाइफ है। मैं और मेरी वाइफ की हाइट 5'8" इंच है और दोनों ही फिट बाडी के है। प्रेरणा एकदम गोरी चिट्टी है और थोड़ी देर भी धूप में रह जाए तो स्किन लाल पड़ जाती है।

बच्चा होने के बाद जरूर प्रेरणा के मुम्मे कुछ फूलकर बड़े हो गये थे और वजन 4-5 किलो बढ़ गया था पर फिर भी वो बहुत फिट थी। हम लोगों ने एक सोसाइटी में घर खरीदा और उसमें शिफ्ट हो गये। हम दोनों ही बहुत खुश थे की लाइफ बहत सही जा रही थी। मेरी जाब की वजह से हम यहां रह रहे थे, वरना हम दोनों के ही पेरेंट्स दूसरे शहर में रहते हैं।

धीरे-धीरे प्रेरणा की दोस्ती पड़ोसियों से होने लगी मगर मैं क्योंकी आफिस में ही रहता हूँ तो इतनी अच्छी जान पहचान नहीं थी। सोसाइटी मीटिंग से मेरी हेलो हो जाती थी।

प्रेरणा की हमारी एक पड़ोसन नैना से अच्छी दोस्ती हो चुकी थी। हालांकी मैं कभी मिला नहीं था। वो लोग दोपहर में ही मिलते थे, जब मैं घर पर नहीं होता था।

प्रेरणा हमेशा नैना के साथ ही शापिंग पर जाती थी और खाली टाइम में आपस में गप्पे भी लड़ाती थी। दोपहर में जब भी मैं वाइफ प्रेरणा को फोन करता तो पता चलता की या तो वो नैना के घर होती या फिर नैना हमारे घर पर होती थी।

एक दिन सोसाइटी में फंक्सन था। प्रेरणा साड़ी पहनकर तैयार हो गई थी। हालांकी वो साड़ी इतना नहीं पहनती थी पर आज फंक्सन था तो उसने पहन ली थी। प्रेरणा ने मुझे हमारे बेटे को तैयार करने का आदेश दिया और मुझे बोल गई की उसको नैना से कुछ काम है तो वो थोड़ी देर में आ रही है।

मैं अपने बच्चे को तैयार कर ही रहा था और 5-10 मिनट के बाद डोरबेल बजी और मैंने जाकर दरवाजा खोला। प्रेरणा वापिस आ गई थी पर उसकी शकल उतरी हुई थी। मैं कुछ पूछता उसके पहले ही वो भागती हुई बेडरूम में चली गई। मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया और दरवाजा बंद करके अपने बेटे को जूते पहना दिए।

देर हो रही थी और जब दो मिनट तक प्रेरणा बाहर नहीं आई तो मैं खुद बेडरूम में देखने गया की वो क्या कर रही है? मैंने देखा की वो बेड पर उल्टा लेटी हुई है और सुबकते हुए रो रही थी। उसकी साड़ी साइड में हो चुकी

थी और उसकी गोरी कमर दिख रही थी। ब्लाउज के ऊपर उसकी गोरी नंगी पीठ भी दिखाई दे रही थी।

मैंने उसकी पीठ पर हाथ फेरते हुए पूछा- “तुमको क्या हुआ है?"

प्रेरणा उठकर बैठ गई। उसका पल्लू तो वैसे ही उसके कंधे से उतर चुका था और ऊपर से सिर्फ ब्लाउज में वो मेरे सीने से लिपटकर रोने लगी। वो कुछ बोलते हुए सुबक रही थी और मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था, क्योंकी वो अपना सेंटेन्स ही पूरा नहीं कर पा रही थी।

मैंने उसको शांत होकर अच्छे से बताने को बोला। पर तभी डोरबेल बाजी और मैं प्रेरणा को चोदकर दरवाजा खोलने गया।

दरवाजा खुलते ही एक सुंदर सी युवती सामने खड़ी थी। उसने भी ठीक वैसी ही साड़ी पहनी थी जैसी अभी प्रेरणा ने पहनी थी। मैं उसको आश्चर्य से देखता रह गया क्योंकी मैंने उसको पहले कभी देखा नहीं था।

उस युवती ने बताया की वो नैना है और प्रेरणा के बारे में पूछने लगी। मैंने उसको बेडरूम की तरफ इशारा करकर बोला- "प्रेरणा बेडरूम में है..."

मैं साइड में हो गया और वो दनदनाते हुए मेरे बेडरूम की तरफ बढ़ी। मैं उसको पीछे से देखता ही रह गया। पीछे से वो एकदम मेरी वाइफ प्रेरणा की तरह ही लग रही थी, वही हाइट और लगभग वोही हेल्थ। बच्चा होने से पहले प्रेरणा जैसी थी एकदम वैसी ही नैना दिख रही थी। शायद प्रेरणा से 4-5 किलो वजन कम रहा होगा। उसके कूल्हे अच्छे से मटक रहे थे, जब वो चलती हुई जा रही थी।

आज तक प्रेरणा के मुँह से नैना के बारे में सुना था, आज देख भी लिया। प्रेरणा की ही तरह वो 26 साल की युवती थी। प्रेरणा के जितनी गोरी तो नहीं थी पर काफी गोरी थी। मैं उसके मटकते कूल्हे ही देख रहा था की मेरे पीछे के दरवाजे से एक भारी आवाज सुनाई दी।

 
मैंने मुड़ कर देखा तो वह एक ६ फ़ीट का आदमी अच्छे से तैयार खड़ा था। उसने थोड़ा मुस्कुराते हुए अपना हाथ मिलाने के लिए आगे बढ़ाया और अपना नाम मिहिर बताया। मैंने भी उसको अपना नाम पराग बताया। मिहिर मेरी ही उमरा का था, अच्छी ख़ासी बॉडी बना राखी थी। अवाज तो उसकी दमदार थी ही। उसने बताया की वो नैना का हस्बैंड हैं और हमारे पड़ोस के फ्लैट में रह्ता है। एक बार तो मैं झेंप गया क्यों की अभी अभी मैं उसकी ही बीवी को पीछे से घूर रहा था, क्या पता उसने देख लिया होगा। मैंने भी उसको मुस्कुराते हुए अंदर आने को कहा। उसको अंदर लेकर मैंने दरवाजा बंद कर लिया।

मिहिर: आई ऍम रियली सॉरी पराग, मेरी एक ग़लतफ़हमी की वजह से प्रेरणा को प्रॉब्लम हो गायी।"

पराग: "कैसी ग़लतफ़हमी! मैं समझा नहीं"

मिहिर: "ओहः, प्रेरणा ने तुम्हे अभी तक बताया नाहि। वो दरअसल प्रेरणा अभी हमारे घर आयी थी, मुझे पता नहीं था। उसने नैना की तरह ही साड़ी पहनी थी तो पीछे से उसको देख मुझे लगा की वह नैना खड़ी हैं और मैंने उसको पीछे से जाकर पकड़ लिया। वो नाराज हो गयी और मेरे घर से चली गायी।"

अब मुझे माजरा समझ में आया की प्रेरणा क्यों रोते हुई आयी थी। जैसा की मिहिर ने बताया था उसके हिसाब से तो यह ग़लत-फ़हमी की वजह से हुआ था। प्रेरणा ने बेवजह इसको सीरियसली ले लिया होगा।

पराग: "ओहः, इसलिए वो नाराज होकर घर आयी थी। उसको भी ग़लतफ़हमी हो गयी होगी। मैं उसको समझा देता हूँ"

मिहिर: "मुझे बहुत बुरा लग रह है। मैं नैना को साथ लेकर आया की वो प्रेरणा को समझाये। मैंने पहले कभी प्रेरणा को देखा नहीं था, वर्ना शायद यह प्रॉब्लम नहीं होता"

पराग: "कोई बात नाहि, दोनों ने एक जैसे कपड़े पहने थे और पीछे से दोनों एक जैसी दिखती हैं"

ताभी नैना मेरे बेडरूम से बाहर आयी और उसने मिहिर को बुलया। फिर वो दोनों मेरे बेडरूम में चले गए। दरवाजा बंद था तो मैं इन्तेजार करने लाग। २-३ मिनट्स के बाद मैंने सोचा मैं भी अंदर जाता हूँ और प्रेरणा को समझाता हू। मैं बेडरूम की तरफ बढ़ने ही वाला था की तभी नैना बेडरूम से बाहर आयी और दरवाज बंद कर मुस्कुराते हुए हेलो बोल कर मेरी तरफ बढी। मैने अब नैना को सामने से भी स्कैन करना शुरू किया। वो लगभग प्रेरणा की ही तरह हेल्थ में थी। सिर्फ एक बड़ा डिफरेंस था की प्रेरणा के मुम्मे नैना के मुकाबले कुछ बड़े थे। प्रेरणा को बच्चा होने से पहले जो साइज़ उसके मुम्मो का था वोही साइज अभी नैना के मुम्मो का था। इसके अलावा दोनों में कोई ज्यादा फर्क नहीं था। नैना ने मेरे पास आकर मुझे बताया की अब प्रेरणा ठीक हैं और शांत है। मिहिर उस से बात कर माफ़ी मांग रहा है। फिर नैना मुझसे मेरा हाल चाल पूछने लगी की इतने दिन यहाँ होने के बाद भी हम लोग पहली बार मिल रहे है।
 
मै सोचने लगा की मेरे बेडरूम में मेरी बीवी किसी गैर मर्द के साथ अकेली है। यह बात नैना को अजीब क्यों नहीं लग रही है। मुझे थोड़ा डर था की जिस मर्द ने थोड़ी देर पहले मेरी बीवी को पकड़ लिया था वो अभी उसके साथ अकेला है। मै नैना को बोलै की मैं अंदर देख कर आता हूँ की कुछ प्रॉब्लम तो नहीं है। मैं आगे बढ़ता उसके पहले ही नैना की नाजुक मुलायम उंगलियो ने मेरी कलाई को पकड़ लिया। नैना की उंगलियो का मुझे पर पहला स्पर्श एक जादू सा कर गया और मैं वही रुक गया। नैना ने मुस्कुराते हुए कहा की उन दोनों के बीच मिस अन्दरस्टण्डींग हैं तो उन दोनों को ही सोलव करने देते है न। मुझे उसकी समझदारी की बात अच्छी लागि, वो एक सुलझि हुई महिला लग रही थी पर मैं प्रेरणा का रोता हुआ चेहरा याद कर थोड़ा चिंतित भी था। तभी बेडरूम का दरवाजा खुला और हँसते हुए मिहिर बाहर आया। उसने एक हाथ से प्रेरणा का हाथ थाम रखा था और उसको लेकर बाहर आया। खुशी की बात यह थी की प्रेरणा रो नहीं रही थी और उसके चेहरे पर एक हलकी सी स्माइल थी। मैंने भी चैन की साँस ली। मिहिर ने डिक्लेअर किया की अब सब ग़लतफ़हमी दूर हो चुकी हैं और प्रेरणा ने उसको माफ़ कर दिया है।

नैना बोली की अब हम सब लोग नीचे फंक्शन अटेंड करने जाते है। मैंने प्रेरणा को साड़ी चेंज करने को बोला ताकि फिर कोई कन्फूज़न ना हो क्यों की दोनों ने शेम साड़ी पहनी थी। प्रेरणा वापिस बेडरूम में चेंज करने गायी। मैंने उनको बोला की उन्हें इन्तेजार करने की जरुरत नहीं हैं और वो आगे बढ, हम लोग थोड़ी देर में ज्वाइन कर लेंग। मिहिर और नैना फिर मेरे घर से चले गए। प्रेरणा साड़ी बदल कर बाहर आयी और मैंने उसकी ख़ैरियत पुछी। फिर हम दोनों अपने बच्चे को लेकर नीचे सोसाइटी के फंक्शन में गए। फंक्शन में मेरी मिहिर से अच्छे से बात हुयी। वो एक छोटा मोटा बिज़नेस करता है। नैना एक हाउस वाइफ है। मुझे वो दोनों अच्छे इंसान लग रहे थे। दोनो बड़े सलीक़े से समझदारी भरी बातें कर रहे थे। मेरी मिहिर से अच्छी सी दोस्ती हो गयी थी। नैना और प्रेरणा भी हमारे साथ ही थे तो नैना से भी काफी बातें हुयी।

फंक्शन के बाद हम घर आये और बच्चे को सुलाने के बाद प्रेरणा बेडरूम में आयी। वो अभी गम्भीर लग रही थी। मैंने उसको कारण पुछा।

पराग: "क्या हुआ, तुमन तो मिहिर को माफ़ कर दिया न, अब क्यों टेंशन में हो?"

प्रेरणा: "माफ़ नहीं करती तो क्या करती? वो तो घुटनो के बल बैठ गया और मेरा पैर पकड़ माफ़ी माँगने लाग। बोला की जब तक मैं माफ़ नहीं करुँगी वो मेरा पैर नहीं छोडेगा"

पराग: "ऐसा क्या हो गया की तुम उसको माफ़ी माँगने पर भी माफ़ नहीं कर रही थी। एक ग़लती ही तो हुई थी एक जैसी साड़ी पहने होने से"

प्रेरणा: "मुझे अभी भी यकीन नहीं की वो एक ग़लती थी या जान बूझकर कर की गयी कोशिश थी"

पराग: "पूरी बात बतओ, क्या हुआ था"

प्रेरणा: "मैं वह नैना से मिलने गयी थी। उसने मुझे अंदर लिया और किचन में कुछ काम होने का बोल कर मुझे ड्राइंग में वेट करने को बोल। मैं वहां खड़ी थी की अचानक से मिहिर ने पीछे से आकर मुझे पकड़ लिया और मुझे ओह डार्लिंग क्या लग रही हो बोला"

पराग: "हां तो यह ग़लतफ़हमी हो सकती हैं न!"

प्रेरणा: "तुम रहने दो, तुम नहीं समझोेंगे l शादी को ५ साल हो गए हैं, वो अभी भी नैना को डार्लिंग क्यों बोलेगा? तुम तो नहीं बोलते अब! शादी एक दो साल बाद ही तुमने प्यार भरे नाम बोलना बंद कर दिया था। उसको पता था की मैं वह खड़ी हूँ इसलिए मुझे डार्लिंग बोला था"
 
पराग: "अब मैंने तुम्हे डार्लिंग बोलना छोड़ दिया हैं इसका मतलब यह नहीं की दुनिया का हर मर्द शादी के ५ साल बाद अपनी बीवी को डार्लिंग नहीं बोल सकता हैं"

प्रेरणा: "तुम रहने दो, मुझे इस बारे और बात नहीं करनी हैं"

मुझ लग गया की प्रेरणा मुझसे कुछ छुपा रही थी। वो कपड़े चेंज कर रही थी और साड़ी निकाल कर सिर्फ ब्रा और पैंटी में खड़ी थी। उसके बड़े से मुम्मे उसकी ब्रा से बाहर से काफी बाहर दीख रहे थे। मैंने नोट किया की बात करते हुए रोजना के मुकाबले उसके मुम्मे कुछ ज्यादा ही फुले हुए थे।

(प्रेरणा के साथ उस दिन पडोसी मिहिर ने डिटेल में क्या किया था यह उसके पति पराग के लिए एक मिस्ट्री बना हुआ था। जरुर कोई बात थी जो प्रेरणा मुझसे छुपा रही थी और मुझे वो कुरेद कर उस से पूछना था।)

मैं शरारती मूड में आ गया और उस से पुछ ही लिया की मिहिर ने ऐसे कहा से पकड़ लिया की तुम इतना नाराज हो गायी।

प्रेरणा अब अपना साटन का नाईट गाउन पहन कर मेरे पास आकर लेट गयी और लाइट बंद कर दि। मैंने उसकी कमर पर हाथ राख कर पूछा की यहाँ से पकड़ा था क्या।

उसने मेरा हाथ छिटक दिया और मुझसे सोने का बोल दिया। मैंने भी सोचा की अभी वो थोड़ा दुखि हैं तो मैं उसको टाइम देता हूँ और कल पूछुंग।

अगली रात सोते वक़्त मैंने फिर जिक्र छेड़ दिया की कल मिहिर ने उसको कैसे पकड़ा था। मैंने उसकी कमर पर हाथ रखा तो उसने बोला की मिहिर ने यहाँ हाथ नहीं रखा था।

मैने अब अपना हाथ आगे बढा कर उसके पेट पर राख दिया। उसके पतले गाउन से मैं उसकी नाभि को भी फील कर सकता था।प्रेरणा ने बोला की मिहिर ने एक हाथ से उसको यही से पकड़ा था और वो भी साड़ी के अंदर से। यानी प्रेरणा के नंगे पेट पर से छुआ था।

मैने प्रेरणा को थोड़ा और कुरेद कर पूछा की तो फिर मिहिर का दूसरा हाथ कहा था।प्रेरणा ने मुझे वो इंसिडेंट फिर से याद न दिलाने का बोल कर सोने को बोल दिया।

प्रेरणा कुछ तो छुपा रही थी। कल उसने यह भी नहीं बताया की मिहिर ने उसको पेट से पकड़ा था पर आज बता दिया था। मैंने बाकी का काम कल के लिए छोड़ दिया की अब आगे का मैं उस से कल पूछुंग।

अगली रात प्रेरणा मेरे पास लेटी थी और मैंने उसको एक करवट सुलाया और उसके पीछे लेट कर अपना एक हाथ उसके पेट पर राख दिया। फिर मैंने उस से पूछा की ऐसे ही पकड़ा था न मिहिर ने!

प्रेरणा ने बोला की नहीं, मिहिर ने उसको और कास के पकड़ा था। मैं अब प्रेरणा के पीछे से जाकर चिपक गया और अपने हाथ से उसका पेट पकडे राख। मेरे लंड का हिस्सा सीधा जाकर प्रेरणा की गाँड से चिपक गया और मेरे लंड का मोटापन प्रेरणा के पटले गाउन में उसकी गाँड की दरार में छु गया।

मैने प्रेरणा से फिर पूछा की इस तरह से पकड़ा था मिहिर ने और प्रेरणा ने भरी आवाज में हामी भर। मैं उसके साथ ऐसे ही चिपक कर लेटा रहा और उसके पेट पर हाथ लगाए राख। प्रेरणा की मुलायम गाँड से चिपक कर मेरे लंड को भी शांति मिल रही थी। मैं सोचने लगा की ग़लती से ही सही पर मिहिर ने प्रेरणा के शारीर की नजाकत को अच्छे से फील किया होगा। शायद यही कारण था की प्रेरणा इतनी उन-कफोर्टिब्ले हो गयी थी। मैंने अब उसको पूछा की मिहिर का एक हाथ उसके पेट पर था तो दूसरा कहा था।
 
प्रेरणा इस सवाल पर भडक गयी और मेरा हाथ उसके पेट से हटा दिया और मैं जो उस से चिपका हुआ था तो मुझसे दूर हो गयी।

उसका ऐसा रिएक्शन देख कर मैं भी हैरान रह गया। वो सच में उस घटना से बहुत आहात हुई थी। मैने थोड़ा इन्तेजार करना ठीक समझ।

अगली रात जब प्रेरणा बेडरूम में कपड़े समेटने में बिजी थी तब मैंने उसको बोला की मिहिर और नैना दोनों ठीक लगे मुझको और भरोसेमंद है। प्रेरणा ने कहा की नैना तो ठीक हैं पर मिहिर के बारे में नहीं बोल सकति, उसको मिहिर पर अभी भी शक है। मैंने मिहिर को डिफ़ेंड करने की कोशिश की। मैं प्रेरणा से सच जानना चाहता था। मैने आगे बढ़कर प्रेरणा को बोल ही दिया की मिहिर ने अपने दूसरे हाथ से कही उसके मुम्मे तो नहीं पकड़ लिए थे। प्रेरणा कपड़े समेटते हुए कुछ नहीं बोळी।

मुझे लग गया की मिहिर ने जरूर प्रेरणा के मम्मो से पकड़ा होग, वर्ना प्रेरणा इतना ओवर रियेक्ट नहीं करती। मैंने आगे बढ़कर प्रेरणा के कंधे पर हाथ रखा और उसको विश्वास में लेते हुए फिर पूछा की मिहिर ने उसको कहाँ से छुआ था।

प्रेरणा ने अपने मुम्मो पर हाथ रखते हुए कहा की यहाँ से पकड़ा था। (मेरे मन में गुस्सा भर गया, उस मिहिर ने मेरी बीवी के मुम्मो को पकड़ लिया था।)

पराग: "भले ही ग़लती से ही साहि, पर मिहिर ने गलत तो किया हैं, उसको तुम्हे यहाँ से नहीं पकडना चाहिए था"

प्रेरणा: "मुझे तो इसमें भी डाउट हैं की उसने ग़लती से पकड़ा होगा"

पराग: "तुम्हे ऐसा क्यों लगा?"

प्रेरणा: "अगर ग़लती से पकड़ा होता तो एक सेकंड में ही पता चल जाता न की मैं उसकी बीवी नैना नहीं हूं, उसने कुछ सेकण्ड्स तक मुझे नहीं छोड़ा था"

पराग: "मैंने नैना को भी पीछे से देखा था, वो एकदम तुम्हारी तरह ही लगती हैं"

प्रेरणा: "मैं पीछे की नाहि, आगे की बात कर रही हू। तुम तो फंक्शन में नैना को देख रहे थे, हम दोनों के मुम्मो के साइज में कोई फर्क नहीं हैं क्या!"

पराग: "हां तुम्हारे मुम्मे नैना के मुकाबले बड़े हैं"

प्रेरणा: "ऐसी चीजे बड़े ध्यान से देखते हो तुम!"

पराग: "अब यह चीजे थोड़े ही छुपती हैं, दीख ही जाती हैं सामने से"

प्रेरणा: "मिहिर को मेरे मुम्मे दबाने में और नैना के मुम्मे दबाने में फर्क महसूस नहीं हुआ होगा क्या? उसको एक सेकंड में छूटे ही पता लग गया होगा की मैं नैना नहीं थी, पर फिर भी वो ८-१० सेकंड तक कुचलता ही रह, जब की मैं चीख़ रही थी। मैंने उसको दूर किया तब जाकर उसने मुझे छोड़ा और सॉरी सॉरी बोलने लाग। फिर मैं भाग कर अपने घर आ गायी।"

पराग: "मैं उस से बात करता हूं, उसकी अच्छे से खबर लेता हूं। ऐसे लोगो को सही टाइम पर समझाना जरुरी हैं"
 
प्रेरणा: "इसलिए मैं तुम्हे पूरी बात नहीं बता रही थी। अभी तुम कुछ मत करो। आगे देखते हैं, अगर उसकी नीयत ख़राब हुई तो फिर पता चल ही जाएगा"

पराग: "सच में ग़लतफ़हमी भी हो सकती है। तुम्हे बच्चा होने के बाद से पिछले एक साल में तुमने मुश्किल से मुझे २-३ बार अपने मुम्मो पर हाथ लगाने दिया होगा। इतने टाइम में तो आदमी भूजल ही जाता हैं की उसकी बीवी के मुम्मो का क्या साइज है। उसके साथ भी ऐसा कुछ हुआ होगा"

प्रेरणा: "मैंने तुम्हे सिर्फ २-३ बार हाथ लगाने दिया? आये दिन तो तुम मेरी छति को दबाते रहते हो!"

पराग: "सिर्फ एक ऊँगली लगाने को मुम्मा दबाना नहीं कहते हैं"

प्रेरणा: "बच्चा होने के बाद मेरे मुम्मो में दूध था, तुम्हे हाथ कैसे लगाने दू? मेरा दूध निकल जाता हैं और फिर कपड़ो पर दूध का दाग लग जाता हैं"

पराग: "दूध तो कुछ महीने बाद ख़त्म हो गया था, फिर भी तुमने मुझे अपने मुम्मे चुस्ने देना तो दूर की बाट, हाथ तक नहीं लगाने दिया"

प्रेरणा: "मुम्मो को हाथ लगाने से तुम्हे क्या मिल जायेगा! तुम्हारा जो मैं काम हैं चुदाई का वो तो तुम करते ही हो, उसमें तो कभी कोई कमी नहीं आयी न?"

पराग: "बात अभी मुम्मो को दबाने की हो रही है। एक साल में सिर्फ दो बार मुम्मो को दबाने दिया!"

प्रेरणा: "ठीक हैं, जब मेरा मूड होगा तब मैं तुम्हे हाथ लगाने दूंगी पर तुम ज्यादा नोचोगे नाहि, प्यार से पेश आओगे तभी हाथ लगाने दूंगी"

पराग: "और मुह से भी चुसने दोगी?"

प्रेरणा: "चूस भी लेना पर जब मैं बोलू तभी"

कब मेरा दिमाग रह रह कर वो मंजर बनाने लगा की कैसे मिहिर ने प्रेरणा को दबोचा होगा और इतनी देर तक मेरी बीवी के मुम्मो को मसला होगा। इस हक़ से तो काफी हद तक मैं भी मरहूम हूं। नैना के मुम्मे प्रेरणा जितने बड़े नहीं हैं तो मिहिर ने जरूर जान बूझकर यह ग़लतफ़हमी का खेल खेला होगा ताकि वो प्रेरणा के बड़े मुम्मो के मजे ले पाये और बच भी

जाये l फिर मैं खुद सोचने लगा की अगर मैं नैना के मुम्मे दबाऊंगा तो क्या मुझे नैना और प्रेरणा के मुम्मो में फर्क महसूस हो पायेगा या नहीं?

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इस तरह कुछ महीने निकल गए और नैना और प्रेरणा की दोस्ती इसी तरह चालती राहि। मुझे भी नैना के बारे में थोड़ा बहुत प्रेरणा से पता चल ही जात। प्रेरणा का भी सामना उसके बाद कभी मिहिर से नहीं हुआ। इस घटना का एक फायदा यह हुआ की अब हफ्ते में एक बार प्रेरणा मुझे अपने मुम्मो को दबाने देती मगर उसके गाउन और ब्रा सहित ही हाथ लगा पता था। कम से कम थोड़ी प्रोग्रेस तो हुई थी।

मैन कभी कभार सोसाइटी कंपाउंड में आते जाते मिहिर से मिल लेता था या बाहर वाक करते वक़्त वो मिल जाता तो थोड़ी बात हो जाया करती थी। उसने खुद थोड़े मजे लेकर मेरा थोड़ा फायदा तो कर ही दिया था, क्यों की प्रेरणा मुझे अब मुम्मे दबाने देती थी। दोपाहर में ऑफिस से जब भी मैं प्रेरणा को फ़ोन करता तो वो अधिकतर नैना के साथ ही पायी जाती। उन दोनों की दोस्ती बरकारार थी, एक बार मैंने प्रेरणा से बात करते हुए बैकग्राउंड में नैना के गाना गाने की आवाज भी सुनी। वो बहुत अच्छा गा रही थी तो मैंने प्रेरणा से पुछ ही लिया था की वो कौन गा रहा हैं, बहुत अच्छा गा रही है।

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पहली दिवाली आने वाली थी और मेरा और प्रेरणा का प्रोग्राम था की हम इस बार हमारे पेरेंट्स के घर जाकर दिवाली मनायेंगे। कुछ दिन वहाँ रह कर दिवाली के बाद हम वापिस अपने फ्लैट पर पहुचे। उस दिन संडे था और हम लोग सुबह सुबह ट्रेन से पहुच गए थे। ब्रेकफास्ट के बाद डोर बैल बाजी। प्रेरणा ने दरवाजा खोला तो नैना और मिहिर थे जो की हमें दिवाली की बधाई देने आये थे।

नैना और प्रेरणा ने गले मिल कर एक दूसरे को बधाई दि। मैं साइड में खड़ा देख पा रहा था की उन दोनों के बूब्स आपस में टकरा कर दब गए थे। इसके पहले की मैं उस नज़ारे के और मजे लेता मिहिर ने आकर मुझे गले लगा लिया और हमने भी एक दूसरे को दिवाली की बधाई दि। हम दोनों गले लग कर अलग हुए तब तक नैना और प्रेरणा दूर हो चुके थे।

मिहिर मुझसे हटा की नैना मेरी तरफ बढि। मैं अपना एक हाथ आगे बढा कर हाथ मिलाना चाहता था पर उसके पहले ही नैना ने अपनी बाहें फैला दि। मुझे यकीन नहीं हो रहा था की नैना मुझको गले लग दिवाली की बधाई देना चाहती है। मैंने भी नैना की मुस्कान से अपनी मुस्कान मिलाते हुए अपनी बाहें फैला दि। नैना ने एक हाथ मेरी गर्दन के पीछे डाल कर साइड से कंधे से कन्धा मिलाया। इस बहाने ही सही नैना के मुम्मो का एक हल्का सा हिस्सा मेरे शारीर से भी टकराया और मैं तरंगित हो गया। मैं एक सेकंड के लिए अपनी आँख बंद किये उसके परफ्यूम की महाक को सूँघने लाग। उसी वक़्त मैंने देखा की मिहिर भी अपनी बाहें फैलाये प्रेरणा की तरफ बढा। मेरा दिल धड़कना रुक गया पर प्रेरणा ने अपना एक हाथ आगे बढा कर उस से हाथ मिला कर मिहिर के प्लान को वही ख़त्म कर दिया। मै बड़ा खुश हुआ। मुझे नैना को थोड़ा छुने को मिला पर मिहिर को कुछ नहीं मिला था। मुझे मेरी बीवी पर उस वक़्त गर्व हुआ।

हम चारो लोग बैठ कर दीवाली कैसे मनाई वो बताने लाग। प्रेरणा ने उनको थोड़ा नाश्ता भी करवा दिया जो हम घरसे लेकर आये थे। मिहिर ने बताया की प्रेरणा जब कभी अपने हाथ का पका खाना नैना को देती हैं तो मिहिर भी उसको खता हैं और उसको प्रेरणा के हाथ के बने खाने बहुत अच्छा लगता है। प्रेरणा खाना बहुत अच्छा बनाती हैं यह मुझे पता था, मगर मैं तो रोज ही खाता हूँ तो रोज तो तारीफ़ नहीं कर सकता था। मगर उस वक़्त अपने खाने की तारीफ़ सुनकर प्रेरणा ख़ुशी से फुली नहीं समां रही थी। मिहिर ने आगे बढ़ कर खुद ही बोल दिया की प्रेरणा उनको खाने पर कब बुलाएगी। उस दिन तो हम थाके हुए थे तो प्रेरणा ने नेक्स्ट संडे का प्लान फिक्स कर दिया। फिर नैना और मिहिर हुमको आराम करने का बोल कर चले गए।

मैने प्रेरणा से बाद में पूछा की उसने मिहिर को अपने घर पर खाने को क्यों बुलाय जब की वो तो मिहिर से थोड़ी नाराज चल रही है।

प्रेरणा ने कहा की मिहिर ने आगे से खुद को इनवाइट कर दिया तो वो फिर मैं ना कैसे बोलती। मैंने भी उसको छेड़ा की वो अपनी तारीफ़ सुनकर थोड़ा पिघल गयी और उनको खाने पर बुला लिया था। प्रेरणा स्माइल करने के अलावा कुछ नहीं कर पायी। उस दिन प्रेरणा बहुत खुश थी, सामने से किसी ने उसके खाने की तारीफ़ की थी। उस रात प्रेरणा का चुदाई का मूड बन गया था। बच्चा होने के बाद से ही प्रेरणा का चुदाई का मूड बहुत कम ही बनता था। मैं ही मेरा मूड होने पर आगे बढ़ कर प्रेरणा को छेडता हूँ और वो एक ज़िन्दा लाश की तरह पड़े रहती हैं। मगर आज अच्छा मौक़ा था। उसका भी मूड था, तो छेड़ते वक़्त मुझको अच्छा रिस्पांस मिलने वाला था। मैंने लगे हाथों उसको पुछ ही लिया की क्या वो मुझे उसके मुम्मे भी दबाने देगी। प्रेरणा मान गयी की मैं उसके मुम्मे दबा सकता हूं, और यहाँ तक की उसने अपना पूरा गाउन उतार दिया था। हमेशा वो गाउन नीचे से ऊपर कर के ही चुदवा लेती थी। मैने थोड़ी देर उसके मुम्मो का क्लीवेज चुमा। ब्रा के बाहर से झाँकते हुए उसके बूब्स के उभार को अपने मुह से चुमने का मजा लिया और फिर प्रेरणा की चुत को अपने मुह से छेड़ा। शादी के बाद शुरू के २ साल तक वो बराबर अपनी चुत को सफाचट रखती थी। फिर वो सफाई कम होती गायी। बच्चा होने के बाद तो वो अपनी चुत के बालो की सफायी करना जैसे भूल ही गयी थी। प्रेरणा की चुत पर बड़े बड़े बाल उगे थे और उसकी चुत चाटते वक़्त बाल मेरे मुह में भी जा रहे थे पर मैं उत्साह के साथ उस मिले हुए अवसर का फायदा उठा रहा था। प्रेरणा सिसकिया मार रही थी और मुझे मजा आ रहा था। मैंने भी उसको मेरा लंड चुसने को बोला मगर उसने मना बोल दिया। शादी के शुरू के एक साल में उसने मेरा लंड जरूर काफी बार चुसा था पर २-३ साल के अंदर वो सब बंद हो चूका था। फिलहाल मैंने उसके गोर बदन को चुमने का भरपुर आनंद लिया। काफी दिनों बाद वो सिर्फ एक ब्रा में लेती थी और मुझे चोदने दे रही थी।
 
इतने दिनों बाद प्रेरणा को इतना खुल कर चुमने का मौका मिला तो मैं १५-२० मिनट्स उसके बदन को चुमता रह। तब तक मेरा लंड कड़क हो चुदाई को तैयार था। मैने लंड को कंडोम पहनाया और प्रेरणा की दोनों टाँगो को हवा में खड़ा कर चौडा किया। प्रेरणा की चुत खुल कर मेरे सामने थी। उसकी चुत को अपनी दो उंगलियो से चौड़ा कर उन बड़े बालो के बीच से मैंने चुत की दरार को देखा और अपना लंड सावधानी से उसकी चुत में रख दिया। फिर उसकी दोनों टाँगे पकड़ कर थोड़ा पुश करते हुए अपना लंड धीरे धीरे प्रेरणा की चुत में उतार दिया। मेरा लंड अंदर जाते ही मुझे करार मिला। प्रेरणा की भी एक आह निकली। फिर मैंने धीरे धीरे धक्के मारते हुए प्रेरणा को चोदना शुरू किया। चोदते हुए मन में बार बार आज दिन में नैना को जब गल लगाया था वो पल याद आ गया। नैना के ख्यालो में थोड़ा खोते हुए मैं प्रेरणा को चोदना रह। पता ही नहीं चला कब प्रेरणा की तेज सिसकिया चालु हो चुकी थी। बहुत कम ही होता हैं जब प्रेरणा को सिसकियां लेते हुए सुन पता था। मैने जोष में आकर प्रेरणा को और तेज स्पीड में चोदना शुरू किया और प्रेरणा भी आँखें बंद किये और मुह खोले आहें भर चुदवाती राहि। मैने एक हाथ आगे ले जाकर उसके मुम्मे को ब्रा साहित दबोच लिया और इसी तरह मसलते हुए प्रेरणा को चोदता रह। जल्दी ही मैं झड़ने के क़रीब आ गया। मै चाहता था की मैं प्रेरणा को भी झड़ने में मदद कर दे। मैंने अब चोदने की अपनी स्पीड कम कर दि। मगर थोड़ी ही देर में प्रेरणा ने मुझे तेज चोदने को बोली। मैने एक बार फिर अपने चोदने की स्पीड बढा ली। ५ मिनट के अंदर ही मैं फिर झड़ने के मुक़ाम पर आ खड़ा हुआ। मगर इस बीच प्रेरणा भी तेज चीख़ने लागी। मैने अब अपने लंड का पानी छोड़ते हुए प्रेरणा की चुत में झटके मार शुरू किया और प्रेरणा की ओहहः एआईए आह अह्ह्ह चालती रही और वो मेरे साथ ही झाड गायी। बाहुत दिनों बाद मुझे इतनी अच्छी चुदायी करने को मिली थी। मैंने एक बार फिर मन ही मन मिहिर को थैंक यू बोल। पिछली बार उसकी वजह से मुझे प्रेरणा के मुम्मो को दबाने का मौका मिला था और इस बार इतनी अच्छी चुदायी।

फिर अगले संडे वो लोग लंचके लिए आए। एक दिन पहले ही मेरे साथ मार्किट जाकर प्रेरणा ने अच्छी से दावत की तयारी कर ली थी। प्रेरणा को शादी के कुछ समय बाद ही कुकिंग का बहुत जोश चढ़ा और उसने काफी चीजे सिख ली थी और दूसरो को भी सिखाती थी। उसने अपनी कुकिंग के कुछ वीडियोस भी ऑनलाइन डाले थे। नैना और मिहिर प्रेरणा के हाथ का खाना खाकर बहुत खुश हुये। मिहिर तो लगा-तार प्रेरणा की तारीफ़ किये जा रहा था। मैं अपने आप को छोटा महसूस कर रहा था, की मैं इतनी तारीफ प्रेरणाकी नहीं करता था। खाना खाने के बाद बातों का दौर चला की हम लोगो के और क्या क्या शौक है। मैंने नैना को बोला की मैंने एक बार फ़ोन से उसका गाना सुना हैं तो वो कोई गाना सुनाए। नैना ने दो खुबसुररत गाने जाए। एक गाने का मतलब यह था की धीरे धीरे पहचान बढ़ रही हैं और प्यार होने वाला है। दूसरे गाने का मतलब था की कोई तुम्हे चाहता हैं और तुम बेख़बर हो।

मैने उसके गाने की बहुत तारीफ़ की वो सच में अच्छा गाती थी। फिर मैंने सोचा उसने यह गाने युही गा लिए या फिर उसके बहाने वो कोई मेसेज दे रही है। मैने उनको बताया की मुझे कविता लिखने का शौक है। उन्होंने मुझे कविता सुनाने को बोल। मैंने उनको मेरी दो कविताएं सुनायी। पहली कविता ज़िन्दगी के बारे में थी और दूसरी माँ की भावनाओ पर थी। दूसरी कविता सुनकर नैना की आँखें भर आयी। हालांकि मैं ऐसे ही लिख देता हूँ पर मुझे लगा की मेरी कविताओ में भी वजन हैं जो की किसी को रुला दिया। मिहिर ने नैना को शांत कराया और नैना आँसुओ सहित थोड़ा मुस्कुरा उठि। फिर मिहिर ने बताया की उनकी शादी के ५ साल हो गए हैं पर नैना माँ नहीं बन सकती हैं इसलिए वो थोड़ा इमोशनल हो गयी थी।

बात आगे बढ़ाते हुए मिहिर ने बताया की वो स्कूल के टाइम से एथलिट रहा है। इसके अलावा उसको पेंटिंग का थोड़ा बहुत शौक हैं। यह सुनकर प्रेरणा बहुत खुश हो गायी। प्रेरणा को शुरू से पेंटिंग का शौक था पर उसके घर वालों ने उसको अलाउ नहीं किया तथा उसको आर्ट की बजाय साइंस दिलवा दिया। नतीजा यह निकला की वो इतना अच्छा नहीं पढ़ पायी और उसका करियर नहीं बन पाया। समय के साथ उसकी पेंटिंग का शौक मर गया और कुकिंग का शौक डेवेलप हो गया। पर उसके मायके में उसके रूम में आज भी कुछ पेंटिंग लटकी हुई है।
 
प्रेरणा ने उत्साहित होकर बोली की उसने भी कुछ पेंटिंग की है। यह उसकी वोही पेंटिंग हैं जो की मैं बहुत पहले ही रिजेक्ट कर चूका था। प्रेरणा अंदर से जाकर वो पेंटिंग लेआयी। मिहिर ने उनको देखा और कहा की यह शुरुआत के लिए अच्छी हैं पर प्रेरणा को इसकी कोई ट्रेनिंग लेनी चहिये। मिहिर ने अपने फ़ोन में अपनी एक पेंटिंग का फोटो बताया। उसने उसकी बीवी नैना का स्केच बनाए था। वो स्केच हु-बा-हु नैना से मिल रहा था। हम लोग उसकी स्केचिंग के कायल हो गए। प्रेरणा ने मिहिर से रिक्वेस्ट की वो उसका भी एक स्केच बना दे। मिहिर तुरंत मान गया और अगले संडे का प्लान फिक्स कर दिया की वो प्रेरणा का स्केच बनाएग। प्रेरणा बहुत खुश हुयी।

फिर हमारी जनरल बातें हुयी। जहा नैना बाच्चो के नाम के बारे में बताने लागी।

नैना "हमें एक लड़की चाहिए थी और उसका नाम भी सोच लिया था मेरे और मिहिर के नाम से मिला कर। मिहिर के नाम से "मि" और मेरे नाम से "न" मिला कर "मीणा" नाम बनता है।"

प्रेरणा: "मेरे और पराग के नाम को मिलकर कोई नाम ही नहीं बनता"

नैना: "मेरे और पराग के नाम से बन जायेगा "पाना" यानी पन्ना कर सकते हैं"

प्रेरणा: "मेरे और मिहिर के नाम से बनेगा प्रेमी"l

हँसि मजाक के साथ उन दोनों को विदा किया और एक हसीं शाम समाप्त हुयी।

उस रात एक बार फिर प्रेरणा का चुदने का मन बन गया था। लगातार दूसरे संडे को प्रेरणा का खुद चुदने का मन हुआ था। एक बार फिर मुझे उसने अपने मुम्मे दबाने की इजाजत दे दि। पिछले संडे की तरह इस बार भी मैंने प्रेरणा को चोदने के जाम कर मजे लिये। इस बार मैंने थोड़ी चीटिंग भी की थी। प्रेरणा को छोड कर झाड़ते वक़्त मैंने आँखें बंद कर नैना को ही याद किया था जैसे उसी को ही चोद रहा था। मेरे नए पड़ोसियो का एक फायदा तो मुझे हो ही गया था, की हमारी सेक्स bलाइफ थोड़ी बेहतर हो रही थी। पूरे वीक प्रेरणा बहुत एक्ससिटेड थी की उसका भी स्केच बनेग। अगले संडे वो सुबह जल्दी उठ कर तैयार हो गयी थी। उसने अपना फेवरेट कुरता पहने था जिसमे वो अपना स्केच बनवाने वाली थी। अपनी हेयर स्टाइल भी अच्छे से बना ली।

दिये गए टाइम पर मैं, प्रेरणा और अपने बच्चे को लेकर मिहिर और नैना के फ्लैट पर पहुंच। मिहिर ने अपने ड्राइंग रुम में लाइटिंग उसके हिसाब से सेट कर दी थी। उसके घर में दीवारो पर तसवीरे सजी हुई थी। मिहिर ने प्रेरणा को एक सोफ़े पर बैठा दिया और उसका पॉज फिक्स करने लाग। मिहिर ने प्रेरणा के पॉज ठीक करने के लिए कभी उसके कंधे तो कभी हाथ तो कभी पैर छु कर उसको सीधा किया। मिहिर ने बताया की उसको स्केचिंग के लिए १-२ घन्टे लगेगा।

नैना ने मुझको कहाकी इस बीच वो मेरी कविता सुन कर उसको गाने की कोशिश करेगि। मागर वहा गाना गाने से स्केचिंग में डिस्टर्बेंस होगा तो हमने डीसाईड किया की हम लोग मेरे फ्लैट पर जाएंगे। मैं नैना और मेरे बच्चे के साथ अपने फ्लैट पर आया। बच्चा साइड में खेलता रहा और मैं अपनी कविता को नैनाके साथ डिसकस कर अलग अलग धुन पर उसको गाना गवाने लगा। इस घन्टे के दौरान हम काफी खुल गए थे और बात बात में हम एक दूसरे के कन्धे, हाथ या जाँघो को छु कर एक दूसरे का ध्यान अपनी बात की तरफ दिला रहे थे। नैना ने एक टाइट टीशर्ट के साथ एक टाइट पंत पहने थी। उस टीशर्ट के अंदर से उसके ब्रा के किनारे दीख रहे थे। मैं बातों के बीच बीच में अपनी नजरे नैना के मुम्मो पर गडा कर देख लेता। उसके लिपस्टिक से रंगे गुलाबी होंठों के बीच से सुर बह रहे थे। गाते हुए उसका गाला लहरा रहा था और मैं उसके गोर दमकते हुए चेहरे को इतने क़रीब से देख पा रहा था।
 
जब भी वो गाने के लिए साँस लेती तो उसका बदन हिलता और उसके टाइट टीशर्ट में उसके मुम्मे थोड़ा ऊपर नीचे हिल कर मुझे भी हिला देते। गाना ख़त्म होने के बाद वो थोड़ा खासने लगी तो मैं अपने एक हाथ से उसकी पीठ को रगड देता। मेरा हाथ रह रह कर उसके ब्रा के स्ट्राप को भी रगड रहा था और मुझे मजा आ रहा था। कुछ सेकण्ड्स तक वो रुक रुक कर खास्ती रही तो मैंने उसको पानी लाकर दिया। उसने पानी पीकर थैंक यू बोला। मैं उसके पास फिर से बैठ गया। मैने उसको पूछा की वो ठीक तो हैं और एक बार फिर मौके का फायदा उठा कर उसकी पीठ से लेकर कमर तक अपनी एक हथेली रगड दि। मेरा हाथ उसके ब्रा के हुक को छुता हुआ ऊपर नीचे हो रहा था। मेरी तमन्ना थी की काश इस रगड से उसके ब्रा का हुक ही खुल जाए पर यह तो मेरी इच्छा थी, पूरी तो हो नहीं सकती थी। नैना अब ठीक महसूस कर रही थी। काफी देर गाने से उसका गला सुख गया था तो ख़ासी आ गयी थी। मुझे भी उस्की पीठ को रगडने का मौका छोडना पडा।

एक तरफ जहा मिहिर अपनी पड़ोसन प्रेरणा का स्केच बना रहा था तो दूसरी तरफ उनके पार्टनर्स पराग और नैना साथ में टाइम स्पेंट कर रहे थे जहा पराग ने नैना को छुने का कोई मौका नहीं छोड़ा था। आगे की कहानी पराग की जुबानी जारी हैं ।

नैना ने याद दिलाया की मेरे बच्चे को भूख लगी होगी। मगर उसके पास तो खाने की कई चीजे थी और वो आराम से नीचे बैठा खेल रहा था। नैना अब सोफ़े से उतरि और घोड़ी की तरह मेरे बच्चे के सामने बैठ गयी और उसको पुचकारने लागी। पीछे से मैं बैठा हुआ अब नैना के टाइट पेंटी से उसके गाँड के उभार को अच्छी से देख रहा था। नैना का टाइट टीशर्ट भी थोड़ा खिंच कर कमर से ऊपर उठ गया और उसके टीशर्ट और पंट के बीच से उसकी गोरी चमड़ी दीखने लगी थी। नैना अपना एक हाथ आगे बढाए मेरे बच्चे को खिलाने लगी तो खिचाव से उसकी ब्लैक पेंटी थोड़ी सी पेंट के बाहर दिखने लागी।

यह दृश्य देखकर मेरे अंदर बिजली सी दौड़ने लागी। मेरी इच्छा हो रही थी की इस पॉज में मैं नैना को डोगी स्टाइल में चोद दु। मै अब आगे की तरफ गया और अपने बच्चे के पास बैठ गया ताकि आगे से कुछ नजारा दीख जाए। हालंकी नैना ने टाइट टीशर्ट पहना था पर फिर भी उसके घोड़ी बने रहने से यु शेप का उसका टीशर्ट थोड़ा खुल गया और मुझे उसके मुम्मो के थोड़ा ऊपर का एक हल्का सा गोरा उभार दीख गया।

मैने कोशिश की की कुछ और दीख जाए पर उस टाइट टीशर्ट में वो मुमकिन नहीं हो रहा था। नैना जब भी हिलती तो झटके की वजह से उसके लटके हुए मुम्मे भी हीलते और टीशर्ट के गप से वो मुम्मो का हल्का सा उभार लचकता दीखता। मै इस थोड़े से दर्शन से ही खुश हो रहा था। फिर नैना उठ खड़ी हुई की काफी टाइम हो गया हैं और मिहिर का स्केच भी बन गया होगा। नैना के मजे लेने के चक्कर में मैं भूल ही गया था की मैं प्रेरणा को उधर मिहिर के साथ अकेला छोड़ आया था। हालांकि मुझे प्रेरणा पर पूरा भरोसा था। वइसे भी मिहिर ने अभी तक कोई गड़बड़ नहीं की थी और अब प्रेरणा का भी भरोसा मिहिर पर बढ़ने लगा था। इसलिए मैं निश्चिंत भी था। नैना मुझसे विदा लेकर जाने लगी और फिर मेरी तरफ मुड़ कर मुझे थैंक यू कहा की उसको कविता गाने का प्रोग्राम बहुत अच्छा लगा और उसने अपनी बाहें कड़क कर मेरी तरफ फेलायी। मै तो खुश हो गया की उसको गले लगाने का मौका था। वहा आस पास हमारे पार्टनर भी नहीं थे तो खुल कर गले लग सकते थे।
 
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