"चेले मियां, अगर जासूस होकर भूतों तथा जादू पर बिश्वास करोगे तो बन लिए जासूस I”
“मेरा बिश्वास जादू के प्रति अटूट है ।"
"एक बात का जवाब दोगे?”
“पूछो ?"
"जब पाकिस्तानियों ने तुम लोगों पर इतनी बर्बरताएं कीं, अत्याचार किए, उस समय तुम्हारा काला जादू कहां चला गया था-अपने काले जादू से ही पाक की सेना को उड़ा क्यों नहीं दिया था?"
"वह बात और थी, गुरू ।"
"तुम काले जादू का नाम लेकर अपनी कमजोरी क्रो दबाना चाहते हो I”
“बात यह नहीं, गुरु ।”
"अब तुम अपनी बोलती पर ढक्कन लगा लो ।" विजय ने कहा तथा यह कहकर कि वह कुछ देर में वापस आ रहा है, कमरे से बाहर निकल गया । रहमान अपने ढंग से इस कैस
के पहलुओं पर विचार कर रहा था ।
गैराज से कार निकालकर विजय सीधा गुप्त भवन तथा ब्लेक-ब्वाॅय के सामने कुर्सी पर बैठता हुआ बोला ।।
"सुनाओ प्यारे काले लडके ।"
"'सर, अभी रहमान क्रो भेजा तो नहीं?"
“नहीं-क्यों? ”
“सर, "बंगला सीकेट कौर' से संदेश भेजा गया है कि रहमान को भेज दिया जाए I”
"कह देना…अभी कुछ दिन और रहमान तुम्हारा मेहमान रहेगा ।"
“क्यों सर?”
"इसलिए कि हम श्मशानगढ़ जा रहे हैं I”
"श्मशानगढ़ ! "
"यस प्यारे!"
"लेकिन क्यो, सर?”
"सुना है आजकल वहां प्रेतात्माओं का बड़ा आतंक है I"
"उससे हमें क्या मतलब, सर?”
"कोई खास नहीं ।"
"तो फिर आप वहां क्यों जाना चाहते हैं?”
"सैर-सपाटा करने ।"
"लेकिन सर, क्या सैर-सपाटे को आपको श्मशानगढ ही नजर आया?”
"अपनी…अपनी पसंद है प्यारे काले लड़के I"
"नहीँ सर, मैं नहीं मान सकता, अवश्य वहां आप किसी विशेष काम से जा रहे हैं?"
"मियां चीफ़ दी ग्रेट !!"
"यस सर! ”
"आजकल तुम्हारी अकल के घोड़े हमारी बगल से होकर सरपट दोड़ रहे हैं ।”
"मैं मतलब नहीँ समझा, सर ।"
"मेरा मतलब हे, आजकल काफी होशियार होते जा रहे हो I"
"सर, आप ही की संगत का प्रभाव है सर ।"
"खैर 'प्रभाव' की साले की क्या मजाल जो न हो. . .वेसे असली माजरा यह है कि वहां से हमारे एक भूतपूर्व परम मित्र का पत्र आया है तथा उन मित्र महोदय ने हमसे प्रार्थना की है कि हम शीघातिशीघ्र श्मशानगढ़ में अपना मनहूस थोबड़ा ले जाएं तथा उन साली प्रेत आत्माओं का तीया-पांचा कर दे I"
"सर, क्या आप वास्तव में श्मशानगढ़ जाएंगे?"
"विचार तो कुछ ऐसा ही है चीफ़ मियां ।" विजय ने कहा तथा फिर सम्पूर्ण घटना विवरण सहित बता दी ।
सारी बातें सुनकर ब्लैक-ब्वाॅय बोला-“सर हो सकता है वहां वास्तव में प्रेत आत्माओं का चक्कर हो?"
"मियां चीफ़ दी बोगस, क्या तुम्हारा दिमाग मिट्टी के तेल में घुल गया है. . .अच्छे-खासे पढे-लिखे होकर प्रेत आत्माओं पर बिश्वास रखते हुए क्या तुम्हें जरा भी गैरत नहीं आई?"
“सर, आपको तो मालूम ही है कि आजकल के आधुनिक वैज्ञानिक भी प्रेत आत्माओं में कुछ सत्यता महसूस करने लगे हैं । वे अपने नए परीक्षणों में इस बात पर जोर दे रहे है कि मरने के बाद आखिर आत्मा का होता क्या है?. वह कहां जाती है. . . ये बात तो ठीक है कि अभी तक वैज्ञानिकों ने स्पष्ट रूप से यह स्वीकार नहीं किया है कि भूत-प्रेत कुछ होते भी हैं…लेकिन साथ ही यह बात भी है कि वे स्वीकार करते हैं कि वे आत्माएं जो अपने जीवन से तृप्त और संतुष्ट नहीं हो पाती वे अपने कार्य क्रो पूरा करने के लिए ब्रहांड मे भटकती रहती हैं ।"
"भाषण तो तुम किसी हद तक ठीक ही दे रहे हो प्यारे काले लडके ।"
"इसलिए सर, हो सकता है वहां कोई ऐसा ही चक्कर हो I”
“खैर प्यारे ये साली प्रेत आत्मा वाली बात हलक से नीचे उतरती तो है नहीं, लेकिन अगर ऐसा हुआ भी तो कोई चिंता नहीं है…हमारे साथ बंगाल के काले जादूगर "मेनड्रेक्र' रहमान की सूरत में जा रहे हैं-आत्माओँ का तीया-पांचा वह अपने तांत्रिक करिश्मे से कर देगा I”
"सर एक राय देना चाहता हूं I”
"दे डालो ।"
"क्यों ना आप अशरफ क्रो भी अपने साथ ले जाएं?"
“उनकी आवश्यकता नहीं है . . . । वहां कोई मैं बारात लेकर जाऊंगा? ”
"सर, मैं सिर्फ सुरक्षा के नाते कह रहा था ।”
"हमारा चेला और हम तो साली अपनी प्रेत आत्माओं का मी तीया-पांचा कर देगे ।"
"फिर भी सर, रहमान अभी कच्चा खिलाडी है I”
“मियां चीफ़ दी ग्रेट, वह साला बीस बरस का छोकरा किसी भी बात में कम नही हे । मानता हूं वह इस क्षेत्र का नया खिलाडी है लेकिन शायद तुम यह नहीं जानते कि चेला किसका है?. .जैसे ग्रेट जासूस का वह चेला हे वैसा ही ग्रेट वह स्वयं भी है । आज़ वह जासूसी के क्षेत्र में कच्चा अवश्य है लेकिन मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि अगर वह मेरे साथ काम करता रहा तो एक दिन वह बड़े-बड़े जासूसों के नाक-कान अपनी जेब में रखकर घूमा करेगा ।"
"सर, अब आप अपने शागिर्द की जरूरत से ज्यादा तारीफ़ कर रहे हैं ।” ब्लैक…ब्बाय विजय पर व्यंग कसने वाले स्वर मेँ बोला I
"प्यारे काले लडके, हमारा चेला वक्त पर अपना परिचय स्वयं दे देगा ।"
"खैर सर, छोडो इन बातों को, मतलब यह कि आप सिर्फ रहमान के साथ श्मशानगढ़ जा रहे हैं?”
"निःसंदेह I”
“जैसी आपकी इच्छा I"
"और देखो मैं यह कहने आया था कि अगर बीच मेँ किसी कारणवश मुझसे सम्बंध स्थापित करने की आवश्यकता पड़े तो फ्लाई टू करना I"
"ओके सर ।" ब्लैक-ब्वाॅय ने कहा ।
"अच्छा प्यारे, चलते हैँ. . .प्रेत आत्माओं के बीच बैठकर हम कुछ झकझकियों का निर्माण करेगे और वापस आकर उन्हें तुम्हारी सेवा मे हाजिर करेंगे I" विजय ने कहा तथा हाथ मिलाकर गुप्त भवन से बाहर आ गया ।
ब्लैक व्बाॅय के होंठो पर एक अजीबोगरीब मुस्कान I
इधर विजय गुप्त भवन से बाहर आया तथा अपनी कार की ओर बढा । अभी वह कार की ड्राइविंग सीट पर बैठा ही था कि वह चौक पडा। उसकी निगाह स्टेयरिंग में फसे एक कागज पर स्थिर हो गई थी । पहले तो वह कुछ सोचता रहा…फिर हाथ बढाकर कागज निकाल लिया तथा कार में बैठे-बैठे उसने वहीँ खोल लिया तथा पढा । लिखा था… "प्यारे विजय मैं जानता हू कि तुम श्मशानगढ़ कै लिए रवाना हो रहे हो, लेकिन साबधान याद रखना यहां भयंकर 'प्रेत्त आत्माए' पनप रही हैं ! ध्यान रखना इस बारु तुम किती मानव अपराधी सै नहीं बल्कि भूतों से टकराने जा रहे हो । उन भूतों-प्रेतों सै जो सदियों से भटक रहे हैं । मैं श्मशागढ़ के विषय में काफी जानता हू । बैसे मैं यह थी जानता हू कि तुम मैरे इस पत्र से रुकने वाले नहीं ही लैकिन एक बार फिर सतर्क कर रहा हू कि वहां तुम्हें आत्माओं सै भी टकराना होगा । न जाने क्यों मैरा दिल कह रहा हैं कि श्मशानगढ़ कै राजा कै खानदान कै एक-एक व्यक्ति का कत्ल कर दिया जाएगा । याद रखना; जंगल में बनी एक दैत्याकार हवेली बहुत ही मनहूस है और वह तुम्हारी कब्र भी साबित हो सकती है ।
खैर मैं अब अधिक क्या लिखु तुम स्वय ही उन रहस्यों
में उलझने जा रहे हो जो सदियाँ से रहस्य बनै हुए हैं । बस यह ध्यान रखना कि इस कैस में तुम मौत की गहरी नींद भी सो सकते हो ।
तुम्हारा शुभचिंतक I”