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आशा: पापा…ज़ोर से खीचिए…ऐसे नहीं निकलेगी।।।
जगदीश राय , पूरा ज़ोर लगा खीचना शुरू किया ।
धीरे धीरे आशा की गांड से बाहर गया, और अन्तः में 2 इंच का गोलदार भाग 'पलॉक' के आवाज़ से बाहर निकल गई।
पूँछ बाहर निकलते ही, आशा की गोलदार गांड के बीचो बीच एक 2 इंच का सुन्दर होल, गांड के छेद को चौड़ा कर , अपने पापा के लंड को मानो पुकार रहा था।
जगदीश राय, ने जवाब में 3 इंच मोटे लंड को उस होल में घुसाना उचित समझा ।
और १० सेक्ण्ड के अंदर, अपने पापा के 9 इंच लम्बाई के लंड से कठोर चुदाई , आशा की गांड खोलकर ले रही थी।
हर चुदाई के भारी धक्के से, आशा दिवार से चिपक जाती और गांड का छेद 3 इंच तक खीच जाता।
इसके पहले की देर हो जाए, जगदीश राय ने तुरंत तूफ़ानी गति से पेलते हुए, अपना ढेर सारा गाढ़ा वीर्य से आशा की गांड को भर दिया।
हाफ्ती हुयी, कापते पैरो से, जगदीश राय , लंड को गांड से बाहर निकाला।और बिस्तर पर बैठ गया।
आशा, बिना किछ कहे, पूछ का गोलदार हिस्सा, बाये हाथ से गांड पर ले जाती है। और "ह्म्ममम्म" के आवाज़ से गांड में एक झटके से घुसा देती है।
गाँड में घुसते वक़्त , पापा का ढेर सारा मलाइदार वीर्य गांड के छेद से निकलकर पूँछ और उसके हाथो पर गिर पड़ता है। और थोड़ा शर्ट पर भी। आशा उसकी कोई परवाह नहीं करते हुयी, शर्ट ठीक करके, चलने लगती है।
जगदीश राय : बेटी…कल भी आना…।अब सिर्फ कल की रात है।।परसो रात से निशा आ जाएगी…
आशा: मतलब परसो रात से तो आप फिर से दूल्हे राजा…नहीं…हाँ पर मेरे बारे में निशा दीदी को कुछ पता नहीं चलनी चाहिए।।
जगदीश राय : हाँ हाँ बेटी ।।।बिल्कूल।…मैं क्यू।।कैसे…
आशा: तो फिर ठीक है।।वैसे कौन ज्यादा पसंद है आपको।। दीदी की चूत या मेरी गांड।।।
अगले दिन, आशा ने अपने पापा को पूरा निचोड कर रख दिया था। कल आशा ने छुपके से अपने पापा से कहा था।
आशा (प्यार से): पापा…मेरी आज म्यूजिक क्लास है…लेकिन आप चाहो तो मैं आपकी इस बासुरी के साथ गुज़ार सकती हु…क्या आप जल्दी आ सकते है…?
जगदीश राय को आशा की प्यार भरी अंदाज़ से ताजुब हुआ।
जगदीश राय (मैं मैं): अरे कल तक तो यह मुझ पर उपकार कर रही थी।।और आज इतने प्यार से…
जगदीश राय : हाँ …मैं…कोशिश कर सकता हूँ।
आशा: तो फिर ठीक…3 बजे।। और सशा कल लेट आयेगी…उसकी सहेली की बर्थडे जो है…तो हमें आराम से 4-5 घन्टे मिलेंगे।।
जगदीश राय 5 घन्टे सुनकर खूशी से पागल हो गया। क्युकी आज तक उससे 30 मिनट से ज्यादा आशा ने नहीं दिया था।
पर आज जगदीश राय को पता चल गया था की वह सब इस आशा की चाल थी।
वह जानती थी की 15 दिन से भूखी निशा आते ही लंड माँगेगी। और पूरी रात निशा आज उनका लंड चूसेगी और निचोड़ेगी।
ओर जो दर्द जगदीश राय को होगा, उसे देखकर परपीड़क (सैडिस्ट) आशा को मजा आयेगा।
जगदीश राय , पूरा ज़ोर लगा खीचना शुरू किया ।
धीरे धीरे आशा की गांड से बाहर गया, और अन्तः में 2 इंच का गोलदार भाग 'पलॉक' के आवाज़ से बाहर निकल गई।
पूँछ बाहर निकलते ही, आशा की गोलदार गांड के बीचो बीच एक 2 इंच का सुन्दर होल, गांड के छेद को चौड़ा कर , अपने पापा के लंड को मानो पुकार रहा था।
जगदीश राय, ने जवाब में 3 इंच मोटे लंड को उस होल में घुसाना उचित समझा ।
और १० सेक्ण्ड के अंदर, अपने पापा के 9 इंच लम्बाई के लंड से कठोर चुदाई , आशा की गांड खोलकर ले रही थी।
हर चुदाई के भारी धक्के से, आशा दिवार से चिपक जाती और गांड का छेद 3 इंच तक खीच जाता।
इसके पहले की देर हो जाए, जगदीश राय ने तुरंत तूफ़ानी गति से पेलते हुए, अपना ढेर सारा गाढ़ा वीर्य से आशा की गांड को भर दिया।
हाफ्ती हुयी, कापते पैरो से, जगदीश राय , लंड को गांड से बाहर निकाला।और बिस्तर पर बैठ गया।
आशा, बिना किछ कहे, पूछ का गोलदार हिस्सा, बाये हाथ से गांड पर ले जाती है। और "ह्म्ममम्म" के आवाज़ से गांड में एक झटके से घुसा देती है।
गाँड में घुसते वक़्त , पापा का ढेर सारा मलाइदार वीर्य गांड के छेद से निकलकर पूँछ और उसके हाथो पर गिर पड़ता है। और थोड़ा शर्ट पर भी। आशा उसकी कोई परवाह नहीं करते हुयी, शर्ट ठीक करके, चलने लगती है।
जगदीश राय : बेटी…कल भी आना…।अब सिर्फ कल की रात है।।परसो रात से निशा आ जाएगी…
आशा: मतलब परसो रात से तो आप फिर से दूल्हे राजा…नहीं…हाँ पर मेरे बारे में निशा दीदी को कुछ पता नहीं चलनी चाहिए।।
जगदीश राय : हाँ हाँ बेटी ।।।बिल्कूल।…मैं क्यू।।कैसे…
आशा: तो फिर ठीक है।।वैसे कौन ज्यादा पसंद है आपको।। दीदी की चूत या मेरी गांड।।।
अगले दिन, आशा ने अपने पापा को पूरा निचोड कर रख दिया था। कल आशा ने छुपके से अपने पापा से कहा था।
आशा (प्यार से): पापा…मेरी आज म्यूजिक क्लास है…लेकिन आप चाहो तो मैं आपकी इस बासुरी के साथ गुज़ार सकती हु…क्या आप जल्दी आ सकते है…?
जगदीश राय को आशा की प्यार भरी अंदाज़ से ताजुब हुआ।
जगदीश राय (मैं मैं): अरे कल तक तो यह मुझ पर उपकार कर रही थी।।और आज इतने प्यार से…
जगदीश राय : हाँ …मैं…कोशिश कर सकता हूँ।
आशा: तो फिर ठीक…3 बजे।। और सशा कल लेट आयेगी…उसकी सहेली की बर्थडे जो है…तो हमें आराम से 4-5 घन्टे मिलेंगे।।
जगदीश राय 5 घन्टे सुनकर खूशी से पागल हो गया। क्युकी आज तक उससे 30 मिनट से ज्यादा आशा ने नहीं दिया था।
पर आज जगदीश राय को पता चल गया था की वह सब इस आशा की चाल थी।
वह जानती थी की 15 दिन से भूखी निशा आते ही लंड माँगेगी। और पूरी रात निशा आज उनका लंड चूसेगी और निचोड़ेगी।
ओर जो दर्द जगदीश राय को होगा, उसे देखकर परपीड़क (सैडिस्ट) आशा को मजा आयेगा।