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तीन बेटियाँ complete

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जगदीश राय- ऐसे क्या देख रही हैं बेटी ।सिर्फ देखती रहोगी क्या.

राधिका अपना थूक निगलते हुए- पापा आज तो ये और बड़ा हो गया है।

फिर जगदीश राय निशा को बिस्तर पर सीधा लेटा देता हैं और उसकी पैंटी भी सरकाकर उसे पूरा नंगा कर देता हैं. अब निशा की चूत अपने पापा के सामने बे-परदा थी।

फिर जगदीश राय उसकी गर्देन पर अच्छे से अपनी जीभ फिराता हैं और फिर एक हाथ से उसके बूब्स को कस कर मसल्ने लगता हैं और और दूसरी उंगली उसकी चूत पर फिराने लगता हैं. और अपना जीभ से उसके दूसरे निपल्स को चूसने लगता हैं.फिर धीरे धीरे निचे आते हुए अपनी जीभ से निशा की चूत को चूसने लगता है। अब निशा का सब्र जवाब दे देता हैं और वो ना चाहते हुए भी चीख पड़ती हैं.

निशा- बस........ पापा........आज .. मेरी ....जान लोगे.......क्या. मैं....मर .जाउन्गि............आह... और इतना कहते कहते उसकी चूत से उसका पानी निकलना शुरू हो जाता हैं और निशा का ऑर्गॅनिसम हो जाता हैं वो वही एक लाश की तरह अपने पापा की बाहों में पड़ी रहती हैं. उसकी धड़कनें बहुत ज़ोर ज़ोर से चल रही थी. और साँसें भी कंट्रोल के बाहर थी. बड़ी मुश्किल से वो अपनी साँसों को कंट्रोल करती हैं और अपनी आँखें बंद करके अपने पापा के लबों को चूम लेती हैं....

जगदीश राय- बेटी अब तेरी बारी हैं. चल अब तू मेरी प्यास को शांत कर. और इतना बोलकर जगदीश राय अपना लंड निशा के मूह के एकदम करीब रख देता हैं. निशा बड़े गौर से जगदीश राय के लंड को देखने लगती हैं. फिर अपनी जीभ निकालकर धीरे से उसके लंड का सूपड़ा को नीचे से लेकर उपर तक चाटने लगती हैं.जगदीश राय के मूह से सिसकारी निकल पड़ती हैं.

फिर वो निशा के सिर के बालो को खोल देता हैं और अपना हाथ निशा के सिर पर फिराने लगता हैं.निशा धीरे धीरे जगदीश राय के लंड पर अपना जीभ फिराती हैं. अचानक जगदीश राय को ना जाने क्या सुझता हैं वो तुरंत निशा के मूह से अपना लंड बाहर निकाल लेता हैं. निशा हैरत भरी नज़रों से अपने पापा को देखने लगती हैं. जगदीश राय उठकर किचन में चला जाता हैं और थोड़ी देर के बाद वो एक शहद की शीशी लेकर वापस आता हैं.

शहद की शीशी को देखकर निशा के चेहरे पर मुस्कान तैर जाती हैं. वो भी अपने पापा का मतलब समझ जाती हैं. जगदीश राय फिर शहद की शीशी को खोलता हैं और और उसे अपने लंड पर अच्छे से लगा देता हैं. जगदीश राय का लंड बिल्कुल लाल कलर में दिखाई देने लगता हैं.फिर वो निशा के तरफ बड़े प्यार से देखने लगता हैं. निशा मुस्कुरा कर आगे बढ़ती हैं और अपना मूह खोलकर शहद से लिपटा अपने पापा के लंड को धीरे धीरे चूसना शुरू करती हैं. एक तरफ नमकीन का स्वाद और एक तरफ शहद का स्वाद दोनो का टेस्ट कुल मिलकर बड़ा अद्भुत था. थोड़ी देर के बाद निशा अपने पापा के लंड पर का पूरा शहद चाट कर सॉफ कर देती हैं.

 
जगदीश राय- बेटी एक बार मेरा लंड को पूरा अपने मूह में लेकर चूसो ना. तुझे भी बहुत मज़ा आएगा.

निशा- पापा आपका दिमाग़ तो नहीं खराब हो गया. भला इतना बड़ा लंड पूरा मेरे मूह में कैसे जाएगा. नहीं मैं इसे पूरा अपने मूह में नहीं ले सकती.

जगदीश राय- क्या तू मेरे लिए इतना भी नहीं कर सकती. मैं जानता हूँ बोलने और करने में बहुत फरक होता हैं. ठीक हैं मैं तुझसे ज़बरदस्ती नहीं करूँगा. आगे तेरी मर्ज़ी. और जगदीश राय के चेहरे पर मायूसी छा जाती हैं.

अपने पापा को ऐसे मायूस देखकर निशा तुरंत अपना इरादा बदल लेती हैं.

निशा- क्यों नाराज़ होते हो पापा. मेरा कहने का ये मतलब नहीं था. मैं तो बस......................अच्छा फिर ठीक हैं अगर आपकी खुशी इसी में हैं तो मैं अब आपको किसी भी बात के लिए मना नहीं करूँगी. कर लो जो आपका दिल करता हैं.आज मैं साबित कर दूँगी कि निशा जो बोलती हैं वो करती भी हैं.

जगदीश राय भी मुस्कुरा देता हैं और निशा के बूब्स को पूरी ताक़त से मसल देता हैं. निशा के मूह से एक तेज़ सिसकारी निकल जाती हैं.

जगदीश राय- मैं तो यही चाहता हूँ कि तू खुशी खुशी मेरा लंड पूरा अपने मूह में लेकर चूसे. मैं यकीन से कहता हूँ कि तुझे भी बहुत मज़ा आएगा. हां शुरू में थोड़ी तकलीफ़ होगी फिर तू भी आसानी से इसे पूरा अपने मूह में ले लेगी.

निशा- जैसा आपका हुकुम सरकार.. मगर मुझे तकलीफ़ होगी तो क्या आपको अच्छा लगेगा. बोलो......................

जगदीश राय-अगर चुदाई में तकलीफ़ ना हो तो मज़ा कैसा. पहले दर्द तो होता ही हैं फिर मज़ा भी बहुत आता हैं. बस तू मेरा पूरा साथ दो। फिर देखना ये सारा दर्द मज़ा में बदल जाएगा.

जगदीश राय फिर शहद अपनी उंगली में लेता हैं और अपने टिट्स पर मलने लगता हैं और फिर अपने लंड के आखरी छोर पर भी पूरा शहद लगा देता हैं.

जगदीश राय निशा को बेड पर लेटा देता हैं और उसकी गर्देन को बिस्तेर के नीचे झुका देता हैं. निशा को जब समझ आता हैं तो उसके रोंगटे खड़े हो जाते हैं. वो तो सोच रही थी कि वो अपनी मर्ज़ी से पूरा लंड धीरे धीरे अपने मूह में ले लेगी मगर यहाँ तो उसकी मर्ज़ी नहीं बल्कि वो तो खुद अपने पापा के रहमो करम पर थी. मगर वो अपने पापा की ख़ुशी के लिए उसे सब मंजूर था.
 
जगदीश राय भी निशा के मूह के पास अपना लंड रख देता हैं और फिर निशा की ओर देखने लगता हैं. निशा भी अपनी आँखों से उसे लंड अंदर डालने का इशारा करती हैं. जगदीश राय निशा के सिर को पकड़कर धीरे धीरे अपने लंड पर प्रेशर डालने लगता हैं और निशा भी अपना मूह पूरा खोल देती हैं. धीरे धीरे उसका लंड निशा के मूह के अंदर जाने लगता हैं.जगदीश राय करीब 5 इंच तक निशा के मूह में लंड पेल देता हैं और फिर उसके मूह में अपना लंड आगे पीछे करके चोदने लगता हैं.

निशा की गरम साँसें उसको पल पल पागल कर रही थी. वो धीरे धीरे अपनी रफ़्तार बढ़ाने लगता हैं और साथ साथ अपना लंड भी अंदर पेलने लगता हैं. निशा की हालत धीरे धीरे खराब होनी शुरू हो जाती हैं. वैसे ये निशा का फर्स्ट एक्सपीरियेन्स था. वो अपने पापा का लंड कई बार चूसी थी पर कभी अपने मूह में पूरा नही ली थी. इसलिए तकलीफ़ होना लाजमी था. जगदीश राय करीब 7 इंच तक निशा के मूह में लंड डाल देता हैं और निशा की साँसें उखाड़ने लगती हैं.

जगदीश राय एक टक निशा को देखता हैं और फिर अपना लंड पूरा बाहर निकाल कर एक झटके में पूरा अंदर पेल देता हैं. लंड करीब 8 इंच से भी ज़्यादा निशा के मूह में चला जाता हैं. निशा को तो ऐसा लगता हैं कि अभी उसका गला फट जाएगा. उसकी आँखों से भी आँसू निकल पड़ते हैं और आँखें भी बाहर की ओर आ जाती हैं.तकलीफ़ तो उसे बहुत हो रही थी मगर वो अपने पापा की खुशी के लिए सारी तकलीफो को घुट घुट कर पी रही थी. निशा को कुछ राहत मिलती हैं मगर जगदीश राय कहाँ रुकने वाला था वो फिर एक झटके से अपना लंड बाहर निकालकर फिर से उतनी ही स्पीड से वो निशा के मूह में पूरा लंड पेल देता हैं.

इस बार जगदीश राय अपना पूरा लंड निशा के हलक तक पहुँचने में सफल हो गया था.निशा के आँसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे. उसे तो ऐसा लग रहा था कि उसका दम घुट जाएगा और वो वही मर जाएगी.निशा ऐसे ही करीब 10 सेकेंड्स तक निशा के हलक में अपना लंड फँसाए रखता हैं. निशा के मूह से गु.......गु.......गू............. की लगातार दर्द भरी आवाज़ें निकल रही थी. जब उसकी बर्दास्त की सीमा बाहर हो गयी तो अपना दोनो हाथों से अपने पापा के पैरों पर मारने लगती हैं जगदीश राय को भी तुरंत आभास होता हैं और वो एक झटके से अपना पूरा लंड निशा के हलक से बाहर निकाल देता हैं. निशा वही ज़ोर ज़ोर से खांसने लगती हैं वो वही धम्म से बिस्तर पर पसर जाती हैं.
 
जगदीश राय के लंड से एक थूक की लकीर निशा के मूह तक जुड़ी हुई थी. ऐसा लग रहा था कि उसके लंड से कोई धागा निशा के मूह तक बाँध दिया हो. वो घूर कर एक नज़र अपने पापा को देखती हैं.

निशा- ये क्या पापा भला कोई ऐसे भी सेक्स करता हैं क्या. आज तो लग रहा था कि आप मुझे मार ही डालोगे. मुझे कितनी तकलीफ़ हो रही थी आपको क्या मालूम. देखो ना अभी तक मेरा मूह भी दर्द कर रहा हैं.

जगदीश राय- तू जानती नहीं हैं निशा बेटी मेरा एक सपना था कि मैं किसी भी लड़की के मूह में अपना पूरा लंड पेलने का. मगर आज तूने मेरा सपना पूरा कर दिया. ना जाने मैं कितनी लड़कियों के साथ सेक्स किया हूँ मगर उनमें से किसी ने भी मेरे लंड अपने मूह में पूरा नहीं लिया. आख़िर अपना खून अपना ही होता हैं.

निशा:अब तो आप खुश हो ना।

जगदीश राय: हां बेटी।अच्छा तुम मुझे गिफ्ट देनेवाली थी ना।क्या है वो तेरी स्पेशल गिफ्ट।

निशा:मुस्कुराकर।आप गेस करके बताइए।आपकी इस समय सबसे बड़ी इच्छा क्या है मैं वो पूरी करुँगी।वही आपका स्पेशल गिफ्ट होगा।

जगदीश राय- मेरा तो इस समय सबसे ज़्यादा मन तेरी गाण्ड मारने को कर रहा हैं. अगर तू मुझे इसकी इजाज़त दे तो.................

निशा:चलो पापा आज रात आपको अपनी गांड आपको गिफ्ट में दिया।आप जैसे चाहो मेरी गांड मार लो।

जगदीश राय झट से निशा को अपनी बाहों में ले लेता हैं और उसका लब चूम लेता हैं.

जगदीश राय- तू सच में बहुत बिंदास है बेटी। मैने आज तक तेरे जैसे लड़की नहीं देखी. सच में तेरा पति बहुत किस्मत वाला होगा.

निशा- और आप नहीं हो क्या .निशा धीरे से मुस्कुरा देती हैं.

जगदीश राय- सच में तेरी जैसे बेटी पाकर तो मेरा भी नसीब खुल गया. और इतना कहकर वो निशा की गान्ड को कसकर अपने दोनो हाथों से भीच लेता हैं.

जगदीश राय- बेटी मेरा लंड को पूरा खड़ा कर ना. फिर मैं तेरी गांड मारूँगा.करीब 5 मिनिट तक निशा जगदीश राय के लंड को पूरा थूक लगाकर चूसती और चाटती है तब जगदीश राय का का लंड निशा की कुँवारी गांड को फाड़ने के लिए तैयार हो जाता हैं।

जगदीश राय:बेटी पहले तेरी गदराई गांड से तो जी भर के प्यार कर लूँ।

 
जगदीश राय बस देखने लगता है अपनी बेटी के गान्ड की खूबसूरती ...उफफफफ्फ़..क्या नज़ारा था.. भारी भारी गोल गोल उभरे हुए गोरे गोरे चूतड ..जिन्हें अपनी हथेलियों से बड़े ही हल्के से दबाता हुआ अलग करता है ...दरार चौड़ी हो जाती है ..दरार के बीच थोड़ी सी डार्कनेस लिए गान्ड के होल की चारों ओर का गोश्त ... गाँड की सूराख पूरी बंद हुई ... पर चारों ओर का गोश्त एक दम टाइट ..बन्द सूराख इस बात की गवाही दे रहा था कि गान्ड में कोई लंड अंदर नहीं गया है... और पूरी दरार चीकनी और चमकती हुई ... उस ने अपने अंगूठे से गान्ड की दरार को हल्के से दबाया ....अंगूठा उसकी चीकनी गान्ड में फिसलता हुआ उपर की ओर बढ़ता गया।उफ़फ्फ़ इतनी चीकनी और भारी गान्ड जगदीश राय ने आज तक नही देखी....

निशा अपने पापा की हरकतों से मस्त थी..मुस्कुरा रही थी..और अंगूठे के दबाव से सीहर उठी ...उस ने अपनी गान्ड थोड़ी सी उपर उठाते हुए कहा ..

" हां ..हां पापा अच्छे से छू लो , दबा लो देख लो ... तुम्हारे लौडे के लिए सही है ना..? "

" बेटी... बहोत शानदार , जानदार और मालदार है तेरी गान्ड ..उफफफफ्फ़..सही में तुम ने काफ़ी मेहनत की है ....ज़रा चाट लूँ बेटी ? "

यह बात सुन कर निशा और भी मस्ती में आ जाती है ..और अपनी गान्ड और भी उपर उठाते हुए पापा के मुँह पर रखती है ...

" पापा ..पूछते क्यूँ हो....आप की बेटी है ..आप की प्यारी बेटी का गान्ड है..जो जी चाहे करो ना ..चाटो..चूसो खा जाओ ना ....पर लॉडा अंदर ज़रूर पेलना ..."

और अपने पापा के मुँह से गान्ड और भी लगा देती है ..

जगदीश राय उसकी गान्ड नीचे पलंग पर कर देता है , दरार को फिर से अलग करता हुआ अपनी जीभ उसके सूराख पर लगाता है और पूरी दरार की लंबाई चाट जाता है..जीभ को अच्छे से दबाता हुआ .... उफफफफ्फ़ उसकी गान्ड की मदमस्त महक और एक अजीब ही सोंधा सोंधा सा टेस्ट था ...

दो चार बार दरार में जीभ फिराता है ..जीभ के छूने से और जीभ की लार के ठंडे ठंडे टच से निशा सीहर उठ ती है ...और फिर जगदीश राय उसकी गान्ड के गोश्त को अपने होंठों से जाकड़ लेता है और बूरी तरह चूसता है...मानो गान्ड के अंदर का पूरा माल अपने मुँह में लेने को तड़प रहा हो....

निशा मज़े में चीख उठती है " आआआआः....पापा ....उईईई..देखो ना मेरी गान्ड कितनी मस्त है .? अब देर ना करो ..बस पेल दो ना अंदर ..प्लीज्जज्जज्जज्जज्ज ...।

जगदीश राय किचन में जाकर तेल की शीशी लेकर आता हैं.निशा जब अपने पापा के हाथ में तेल की शीशी देखती हैं तो उसकी हालत बिगड़ जाती हैं. उसने तो बोल दिया था कि वो अपने पापा से अपनी गान्ड मरवायेगि मगर इतना मोटा और लंबा लंड को वो अपनी गान्ड में कैसे बर्दास्त कर पाएगी ये उसकी समझ में नहीं आ रहा था. जगदीश राय फिर तेल की शीशी खोलता हैं और थोड़ा सा तेल लेकर निशा की गान्ड के छेद पर गिरा देता हैं और अपनी दोनो उंगली में अच्छे से तेल लगाकर वो उसकी गान्ड में धीरे धीरे ऊँगली पेलना शुरू कर देता हैं. कुछ देर के बाद वो अपनी दोनो उंगली को निशा की गान्ड में डालकर अच्छे से आगे पीछे करने लगता हैं. निशा फिर से गरम होने लगती हैं.

 
निशा को समझ में नहीं आ रहा था कि उसे क्या हो गया है. भला वो बार बार कैसे गरम हो रही हैं. जगदीश राय फिर तेल की शीशी को अपने लंड पर लगाता हैं और कुछ निशा की गान्ड में भी डाल देता है. फिर अपना लंड को निशा की गान्ड पर रखकर धीरे धीरे उसे निशा की गान्ड में पेलने लगता हैं. निशा के मूह से चीख निकलने लगती हैं मगर वो अपने पापा को रोकने का बिल्कुल प्रयास नहीं करती. जैसे ही जगदीश राय का सूपाड़ा अंदर जाता हैं निशा की आँखों से आँसू निकल जाते हैं. उसे इतना दर्द होता है लगता हैं किसी ने उसकी गान्ड में जलता हुआ सरिया डाल दिया हो. वो फिर भी अपने पापा के लिए वो दर्द को बर्दास्त करती हैं।

निशा :उफफफफ्फ़.पापा आप कितने बेरहम हो......पूरा घुसा दिया........इतना मोटा लॉडा पूरा मेरी गान्ड में डाल दिया"

जगदीश राय:हां बेटी.....पूरा ले लिया है तूने........ऐसे ही बेकार में डर रही थी"

निशा:बेकार में......उूउउफफफफ्फ़.........मेरी जगह आप होते तो मालूम चलता.....अभी भी कितना दुख रहा है....,धीरे करो पापा"

जगदीश राय: बेटी अब तो चला गया है ना पूरा अंदर.......बस कुछ पलों की देर है देखना तू खुद अपनी गान्ड मेरे लौडे पर मारेगी" बेटी की पीठ चूमता बोला.

"धीरे पेलो पापा.......हाए बहुत दुख रही है मेरी गान्ड......."निशा सिसिया रही थी. जगदीश राय तेल वाला सुझाव वाकई मे बड़ा समझदारी वाला था. तेल से लंड आराम से अंदर बाहर फिसलने लगा था. जहाँ पहले इतना ज़ोर लगाना पड़ रहा था लंड को थोड़ी सी भी गति देने के लिए अब वो उतनी ही आसानी से अंदर बाहर होने लगा था. हालाँकि निशा ने अपने पापा धीरे धीरे धक्के लगाने के लिए कहा था मगर पिछले आधे घंटे से किए सबर का बाँध टूट गया और जगदीश राय ना चाहता हुआ भी अपनी बेटी की गान्ड को कस कस कर चोदने लगा.

निशा: हाए उउउफफफफफफफ्फ़.........आआआहज्ज्ज्ज मार...डााअल्ल्लीीगगगघाा क्यआआअ......हीईीईईईई.....ओह माआआअ.......,,हे भगवान......मेरी गान्ड....,उफफफफफफफ़फ्ग फट गईईईईई।

निशा चीख रही थी, चिल्ला रही थी मगर अपने पापा को रुकने के लिए नही कह रही थी. सॉफ था उसे इस बेदर्दी में भी मज़ा आ रहा था.वैसे भी वो रोकती तो भी जगदीश राय रुकने वाला नही था. दाँत भींचे वह निशा की गान्ड को पेलता जा रहा था और वो पेलवाती जा रही थी.

 
जगदीश राय: हाए अब बोल बेटी......मज़ा आ रहा है ना गान्ड मरवाने में....."

निशा: आ रहा है....हाए बहुत मज़ा आ रहा है....ऐसे ही ज़ोर लगा कर चोदते रहिए पापा.......हाए मारो अपनी बेटी की कुँवारी गान्ड"

जगदीश राय: "ले बिटिया.....ले....यह ले.........मेरा लॉडा अपनी गान्ड में" जगदीश राय पूरी रफ़्तार पकड़ते हुए निशा के चुतड़ों पर तड़ तड़ चान्टे मारने सुरू कर दिए.

निशा:हाय....उूुुउउफफफ्फ़...,मारो ..पापा....मारो अपनी बेटी की गान्ड....फाड़ो अपनी बेटी की गान्ड.......,हाए मारो फाड़ डालो। इसे...,उफफ़गगगगगग...हे भगवान..........ले लो मेरी गान्ड.......ले लो मेरे पापा..." ।

और फिर जगदीश राय पूरी रफ़्तार से अपना लंड अंदर और अंदर पेलना शुरू करता हैं और तब तक नहीं रुकता जब तक उसका लंड निशा की गान्ड की गहराई में पूरा नहीं उतर जाता. निशा की हालत बहुत खराब थी. वो दर्द से उबर नहीं पा रही थी. करीब 5 मिनिट तक वो ऐसे ही अपना लंड को निशा के गान्ड में रहने देता हैं.

फिर धीरे धीरे वो उसकी गान्ड को चोदना शुरू करता है. निशा के मूह से दर्द और सिसकारी का मिश्रण निकलने लगता हैं और जगदीश राय तब तक नहीं रुकता जब तक वो निशा की गान्ड से खून नहीं निकाल देता। करीब 30 मिनिट तक ज़बरदस्त गान्ड मारने के बाद आख़िरकार निशा का बदन भी जवाब दे देता हैं और वो भी चिल्लाते हुए ज़ोर ज़ोर से झरने लगती हैं।साथ में जगदीश राय भी निशा के गांड में अपनी मलाई छोड़ देता है।

वही दोनो बाप बेटी वही बिस्तर पर एक दूसरे की बाहों में समा जाते हैं. और निशा अपने पापा को अपने सीने से चिपका लेती हैं. जगदीश राय भी उसके सीने पर अपना सिर रखकर लेट जाता हैं।

 
निशा:एक बात पूँछू पापा।प्लीज आप सही सही बताना।चूँकि मैं आशा से डायरेक्ट नहीं पूछ सकती।आप मेरे दोस्त हो तो आप बताओ।आशा से आप......कैसे.....

जगदीश राय:देखो बेटी।जब तुम टूर पर चली गई तो 2-3 दिन बाद मेरा मन नहीं लग रहा था ऑफिस में तो मैं घर चला आया।यहाँ देखा की आशा अपने कमरे में एक लड़के के साथ है।दोनों नंगे थे।लड़का मुझे देख के भाग गया।लेकिन आशा वैसी ही खड़ी रही।फिर जब मैंने उसे डाँटा तो उसने ये राज खोला की पापा आप भी तो निशा दीदी के साथ मज़े लेते हो।

मुझे तो विस्वास ही नहीं हुवा लेकिन आशा ने कभी रात में हमें देखा था।इसलिए मुझे झुकना पड़ा।फिर मैंने देखा की आशा की गाँड में एक पूँछ घुसी हुई है।मैंने पूछा तो उसने बताया की उसे इसमें मज़ा आता है।वो रैबिट की पूँछ है।और उसकी सहेली विदेश से लाई है दोनों के लिए।

फिर दो तीन दिन बाद मैं एक दिन मुठ मार रहा था तो आशा आ गई और मेरी हेल्प करने के बहाने अपनी गांड में लंड डालने पर मजबूर किया।

निशा:लेकिन चूत में क्यों नहीं।

जगदीश राय:क्योंकि आशा बोल रही थी की वो कुंवारी चूत अपने पति को देगी।दूसरे को सिर्फ गाँड देगी।मैं भी ये सोचकर उसके साथ किया की कम से कम बाहर

इज्जत ख़राब ना करे।आजकल के लड़कों का क्या भरोसा। कोई वीडियो बना लेगा तो हमारी इज़्ज़त का क्या होगा।घर में हम आपस में खुश रहेंगे।हमारी जरूरतें भी पूरी होती रहेगी।

निशा:अजीब पागल है ये लड़की भी।थैंक्स पापा आपने अच्छा किया।कम से कम हमारी इज़्ज़त तो बची रहेगी।

फिर जगदीश राय सोने लगा।

कुछ देर बाद जगदीश राय को अपने लंड पर गीली गरम जीभ का अहसास हुवा तो उसने आँखे खोल दी।उसने देखा उसकी बेटी किसी कुतिया की तरह उसके लंड को ऊपर से निचे तक चाट रही थी।जगदीश राय का लंड फिर से अकड़ने लगा था।निशा लंड को तेजी में चूस रही थी।अब जगदीश राय का लंड निशा के थूक से पूरा गिला हो गया था।

 
जब लंड पूरा खड़ा हो गया तो जगदीश राय ने निशा को सुला दिया और अपना लन्ड एक ही झटके में पूरा 9 इंच का लंड अपनी बेटी निशा की चूत में पेल दिया।

निशा:आआऐईईइ.....इसस्स्स्सस्स....ऊऊऊ इइइइइ मआआ..... मर गयी. आअहह...इससस्स...आ.” पापा के मोटे लंड ने निशा की चूत के छेद को इतना ज़्यादा चौड़ा कर दिया था, ऐसा लगता था कि चूत फॅट ही जाएगी.

“क्या हुआ बेटी?” जगदीश राय ने लंड थोड़ा सा और अंदर बाहर करते हुए पूछा.

निशा:“पापा, इसस्स....बहुत..... बहुत मोटा लंड है आआपका. आप तो हमारी चूत फाड़ डालेंगे.”

जगदीश राय:हम अपनी प्यारी बिटिया की चूत कैसे फाड़ सकते हैं?” पापा ने निशा के होंठों का रसपान करते हुए बोले.

जगदीश राय ने निशा की दोनो टाँगें मोड़ के उसके घुटने उसकी चुचियों से चिपका दिए थे. अब तो वह बिल्कुल लाचार थी और उसकी चूत पापा के मोटे तगड़े लंड की दया पे थी. हलाकी अब तक तो पापा अपने लंबे तगड़े लंड से कितनी बार निशा को चोद चुके थे, लेकिन आज पापा का लंड झेलना भारी पड़ रहा था. इतने में जगदीश राय ने अपना लंड थोड़ा सा निशा की चूत के बाहर खींचा और फिर एक ज़ोर का धक्का लगा दिया. आधे से ज़्यादा लंड फिर से चूत में समा गया.

निशा:“आाआऐययईईईईईई....ऊऊऊीीईईईई माआआआ........आहह धीरे....अया...धीरे..ईीीइससस्स....”

इससे पहले कि निशा कुछ संभलती जगदीश राय ने फिर से अपना लंड सुपाडे तक बाहर खींचा और इस बार एक और भी भयंकर धक्का मार के पूरा लंड निशा की चूत में उतार दिया.

 
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