वह निशा की चूत को ताकता रहा। सुजी हुई चूत के अंदर समायी गुलाबी होठ उसे पुकार रहे थे। और चूत के उपरी भाग पर क्लाइटोरिस देखकर चौक गया। जगदीश राय ने आज तक इतनी बड़ी क्लाइटोरिस नहीं देखा था।
चूत की मादक गंध से जगदीश राय मदहोष हो गया।
और उसने बिना सोचे सीधे अपने होठ से निशा के चूत को दबोच लिया।
निशा: आह पापा…धीरे…ओह…गॉड…पापा…यह…। बहुत…अच्छा…।फिल…
निशा अपने हाथो से पापा के टट्टो को धीरे धीरे गोल-गोल सहला रही थी।
जगदीश राय अब निशा के कमर को पकड़ कर थोड़ा ऊपर उठा दिया , और अपने होठ से निशा की क्लाइटोरिस को दबोच लिया।
जगदीश राय कभी क्लाइटोरिस को चबाता, तो कभी अपने जीभ से निशा की पूरी चूत चाट लेता।
निशा अपने पापा के छाती पर बैठ, गांड को गोल-गोल ऊपर-नीचे उठाकर अपनी चूत को अपने पापा से चटवा रही थी।
जगदीश राय: बेटी…कैसा लग रहा है…
निशा: सवाल मत करो पापा…करते रहो…।बहुत अच्छा…।
फिर जगदीश राय ने दोनों हाथो से निशा के चूत को फैलाया। अभी चूदी हुई चूत में निशा को दर्द हुआ और उसने अपने होटों को चबाकर दर्द को सहा।
और जगदीश राय ने अपने जीभ को निशा के चूत में सरका दिया।
निशा: आअह…।पापाआ…।आआआआह।
निशा सिसकी मारते हुए आगे गिर पडी। और उसके होठ पापा के 9 इंच के लंड से लग गये।
निशा ने टट्टो को छोड लंड को दबोच लिया और और लंड को क़रीब से निहारती रही।
और एक भूखी शेरनी की तरह लंड को अपने मुह में घूसा लिया। ४ इंच मोटाई का लंड वह अपने मुह में घूसाने की कोशिश कर रही थी। कभी वह चाटती कभी चूसती। कभी हाथों से मुठ मारती।
उसे अपने पापा के लंड से प्यार हो गया था। और वह एक छोटे बच्चे की तरह उसके साथ खेले जा रही थी।
यहाँ जगदीश राय निशा की चूत को अपने जीभ से चोद रहा था और वहां निशा पापा के लंड को लोलीपोप की तरह चूस रही थी।
दोनो बड़े ही प्यार से बिना कोई जल्दबाज़ी किये आराम से एक दूसरे को चाट और चूस रहे थे।
करीब 5 मिनट बाद , निशा को अपने चूत में अकड महसूस हुई। वह अपने पापा के मुह में झड़ना नहीं चाहती थी।
जगदीश राय , अनुभवी होने के कारण समझ गया की निशा झडने वाली है।
उसने तुरंत निशा की कमर और गांड को अपने हाथों से दबोच लिया। और अपने उंगलिओं से निशा की चूत को फैलाता-सहलाता रहा। और निशा की क्लाइटोरिस को होटों में दबोच कर बेदरदी से चूसता रहा और खीचता रहा।
निशा अब लंड चूसना बंद कर अपने हाथो से मुठ मारना शुरू किया।