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जगदीश राय: पर…क्यों…बेटी…कुछ नहीं होगा…डरो मत…।
निशा (फिर हँस्ते हुए): अब आप एक बच्चे की तरह सो जाईये…चलिये।।
जगदीश राय: पर…
निशा(दरवाज़ा बंद करते हुए): गुड नाईट…स्वीट ड्रीम्स।।हे हे…
जगदीश राय रात भर करवटें बदलता रहा।
दिन में हुई घटनाओ, निशा की गिली चूत, उसपर लगी लाल बड़ी क्लिटोरिस, चूचे, गुलाबी निप्पल , मुलायम चमड़ी उसे सोने नहीं दे रहे थे।
वह खुद निशा के रूम में जाना चाहता था। कोई 4 बजे उसकी आँख लगी।
सूबह 8 बजे जगदीश राय की नींद बर्तनो की आवाज़ से खुली।
जगदीश राय मुह हाथ धोकर हॉल में पहूंच गया। निशा एक लूज मैक्सि, जो पैरो तक ढकी हुई थी, पहनी नास्ता बना रही थी।
निशा ने अपने गीले बाल एक सफ़ेद टॉवल में बांध रखे थे। और पानी की कुछ बूँदे बालों से गिरकर निशा के गर्दन पर फिसल रहा था।
जगदीश राय निशा का यह रूप देखकर बहुत उत्तेजित हो गया था।
निशा: अरे पापा।।आ गए…रुको मैं अभी चाय लेकर आती हूँ।
जगदीश राय: ओह्ह्ह्हह
जगदीश राय , रूठे हुए अंदाज़ में निशा की तरफ देखा।
निशा (मुस्कुराते हुए): क्या हुआ पापा…नाराज़ हो…मुझपर…
जगदीश राय: और नहीं तो क्या…।कल सारी रात मुझे नींद नहीं आई।
निशा (मुस्कुराते हुए): क्यूँउउ?
जगदीश राय: अब बनो मत…तुम जानती हो…क्यो?
निशा (मुस्कुराते हुए): अच्छा जी…तो सारी रात किया क्या …हे हे…
जगदीश राय (बच्चे की तरह रूठे हुए): और क्या …तुम्हारा हर अंग मेरे आखौं के सामने झलक रहा था।।नीन्द कैसे आती…
निशा (चिढ़ाते हुए):ओह ओह …सो सैड।।।
जगदीश राय: वह छोडो।।नाशता तैयार है या नहीं…
निशा: आपके लिए तो दो दो नाश्ता तैयार है…
निशा (फिर हँस्ते हुए): अब आप एक बच्चे की तरह सो जाईये…चलिये।।
जगदीश राय: पर…
निशा(दरवाज़ा बंद करते हुए): गुड नाईट…स्वीट ड्रीम्स।।हे हे…
जगदीश राय रात भर करवटें बदलता रहा।
दिन में हुई घटनाओ, निशा की गिली चूत, उसपर लगी लाल बड़ी क्लिटोरिस, चूचे, गुलाबी निप्पल , मुलायम चमड़ी उसे सोने नहीं दे रहे थे।
वह खुद निशा के रूम में जाना चाहता था। कोई 4 बजे उसकी आँख लगी।
सूबह 8 बजे जगदीश राय की नींद बर्तनो की आवाज़ से खुली।
जगदीश राय मुह हाथ धोकर हॉल में पहूंच गया। निशा एक लूज मैक्सि, जो पैरो तक ढकी हुई थी, पहनी नास्ता बना रही थी।
निशा ने अपने गीले बाल एक सफ़ेद टॉवल में बांध रखे थे। और पानी की कुछ बूँदे बालों से गिरकर निशा के गर्दन पर फिसल रहा था।
जगदीश राय निशा का यह रूप देखकर बहुत उत्तेजित हो गया था।
निशा: अरे पापा।।आ गए…रुको मैं अभी चाय लेकर आती हूँ।
जगदीश राय: ओह्ह्ह्हह
जगदीश राय , रूठे हुए अंदाज़ में निशा की तरफ देखा।
निशा (मुस्कुराते हुए): क्या हुआ पापा…नाराज़ हो…मुझपर…
जगदीश राय: और नहीं तो क्या…।कल सारी रात मुझे नींद नहीं आई।
निशा (मुस्कुराते हुए): क्यूँउउ?
जगदीश राय: अब बनो मत…तुम जानती हो…क्यो?
निशा (मुस्कुराते हुए): अच्छा जी…तो सारी रात किया क्या …हे हे…
जगदीश राय (बच्चे की तरह रूठे हुए): और क्या …तुम्हारा हर अंग मेरे आखौं के सामने झलक रहा था।।नीन्द कैसे आती…
निशा (चिढ़ाते हुए):ओह ओह …सो सैड।।।
जगदीश राय: वह छोडो।।नाशता तैयार है या नहीं…
निशा: आपके लिए तो दो दो नाश्ता तैयार है…