S
StoryPublisher
Guest
तब सशा ने जगदीश राय के लंड को पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर दबाया, तो जगदीश राय के लंड का सुपाडा उसकी चूत की फांको को फेलाता हुआ, छेद पर जा लगा,सशा की कुँवारी चूत की फाँकें जगदीश राय के लंड के सुपाडे के चारो तरफ फैेलाते हुए कस गई, अपनी चूत के छेद पर अपने पापा के लंड का गरम सुपाडा महसूस करते ही उसके बदन में मानो हज़ारो वॉट की बिजली कोंध गई हो,सशा का पूरा बदन थरथरा गया….
सशा की चूत उसकी चूत से निकल रहे कामरस से एक दम गीली हो चुकी थी, सशा ने अपनी आँखो को बड़ी मुस्किल से खोल कर जगदीश राय की तरफ देखा, और फिर काँपती आवाज़ में बोली…
सशा: पापा धीरे-धीरे ही अंदर करना, मैं ये सब पहली बार कर रही हूँ, इसलिए मुझे दर्द होगा, पर आप चिंता मत करना , चाहे मुझे कितना भी दर्द हो, आप अपना लंड मेरी कुँवारी चूत में पूरा घुसाना।
अब जगदीश राय ने धीरे धीरे अपने लंड के सुपाडे को सशा की चूत के छेद पर दोबारा दबाना शुरू किया, जैसे ही उसके लंड का सुपाडा सशा की गीली चूत के छेद में थोड़ा सा घुसा, सशा एक दम सिसक उठी, जगदीश राय के लंड का सुपाडा सशा की चूत की सील पर जाकर अटक गया, जगदीश राय भी इस रुकावट को साफ महसूस कर पा रहा था….
सशा की चूत की झिल्ली,जगदीश राय के लंड के सुपाड़े से बुरी तरह अंदर को खिच गई, जिसके कारण सशा के बदन में दर्द की एक तेज लहर दौड़ गई, उसके चेहरे पर उसके दर्द का साफ पता चल रहा था।
जगदीश राय: क्या हुआ बेटी ? ज्यादा दर्द हो रहा है क्या ?
सशा: आहह हां पापा…दर्द हो रहा है…..
जगदीश राय: बाहर निकाल लूँ…..
सशा: नही पापा बाहर मत निकालना….ये दर्द तो हर लड़की को जिंदगी में एक ना एक बार तो सहन करना ही पड़ता है….पापा आप बस ज़ोर से धक्का मारो….और एक ही बार मे मेरी चूत फाड़ दो।
सशा की चूत उसकी चूत से निकल रहे कामरस से एक दम गीली हो चुकी थी, सशा ने अपनी आँखो को बड़ी मुस्किल से खोल कर जगदीश राय की तरफ देखा, और फिर काँपती आवाज़ में बोली…
सशा: पापा धीरे-धीरे ही अंदर करना, मैं ये सब पहली बार कर रही हूँ, इसलिए मुझे दर्द होगा, पर आप चिंता मत करना , चाहे मुझे कितना भी दर्द हो, आप अपना लंड मेरी कुँवारी चूत में पूरा घुसाना।
अब जगदीश राय ने धीरे धीरे अपने लंड के सुपाडे को सशा की चूत के छेद पर दोबारा दबाना शुरू किया, जैसे ही उसके लंड का सुपाडा सशा की गीली चूत के छेद में थोड़ा सा घुसा, सशा एक दम सिसक उठी, जगदीश राय के लंड का सुपाडा सशा की चूत की सील पर जाकर अटक गया, जगदीश राय भी इस रुकावट को साफ महसूस कर पा रहा था….
सशा की चूत की झिल्ली,जगदीश राय के लंड के सुपाड़े से बुरी तरह अंदर को खिच गई, जिसके कारण सशा के बदन में दर्द की एक तेज लहर दौड़ गई, उसके चेहरे पर उसके दर्द का साफ पता चल रहा था।
जगदीश राय: क्या हुआ बेटी ? ज्यादा दर्द हो रहा है क्या ?
सशा: आहह हां पापा…दर्द हो रहा है…..
जगदीश राय: बाहर निकाल लूँ…..
सशा: नही पापा बाहर मत निकालना….ये दर्द तो हर लड़की को जिंदगी में एक ना एक बार तो सहन करना ही पड़ता है….पापा आप बस ज़ोर से धक्का मारो….और एक ही बार मे मेरी चूत फाड़ दो।