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दीदी की ननद की बेटी की चुदास
मेरा नाम रंगीला है.. मैं 28 साल का हट्टा-कट्टा और एकदम गोरा चिट्टा युवक हूँ।
मैं आप लोगों के लिए मेरी एक नई और सच्ची सेक्स कहानी लेकर आया हूँ, यह घटना यही साल भर पहले की है।
जवानी की शुरूआत में ही मुझे मेरी भाभी ने अच्छा ख़ासा ज्ञान और अनुभव दे दिया था.. जिसके कारण मैंने अपनी बहन और भाभी दोनों से सेक्स का मजा बहुत लिया है।
उम्र के साथ-साथ मेरी सेक्स की भूख भी बढ़ती जा रही थी, अब तो जिस भी सेक्सी लड़की को देखता.. तो उसे चोदने के लिए बेचैन हो उठता… किसी भी लड़की की चूचियां देखते ही मेरे हाथों में खुजली होने लगती, उसकी उभरी गांड को देखते ही लंड खड़ा हो जाता।
एक दिन मैं अपने घर पर ही था कि घर के बाहर गाड़ी के रुकने की आवाज सुनाई दी। मैंने मेनगेट खोला तो देखा मेरी दीदी की ननद ऑटो से उतर रही थीं.. साथ में उनकी बेटी सपना भी थी।
वे लोग बिहार के हाज़ीपुर के रहने वाले हैं।
मैंने उन दोनों का स्वागत किया और उन्हें घर के अन्दर ले गया, मेरे घर वाले उन्हें देख कर बहुत ही खुश हुए।
थोड़ी बहुत बातचीत के बाद बेबी दी (दीदी की ननद का नाम) गेस्ट रूम में फ्रेश होने के लिए चली गईं।
यहाँ मैं बता दूँ कि दीदी की ननद जो कि मुझसे बड़ी थीं.. उन्हें भी मैं दीदी कह कर ही बुलाता था।
सपना अभी भी हम लोगों के पास बैठी थी, सपना से बातचीत के बाद पता चला कि वो हमारे शहर में एग्जाम देने आई है।
सपना बहुत ही खूबसूरत और बोल्ड लड़की थी, वो मुझे बहुत ही सेक्सी लग रही थी, पर मैं उसे जी भर के देख नहीं पा रहा था क्योंकि वो मेरी भतीजियों के साथ थी, वे सब आपस में बातें कर रही थीं।
सपना की उम्र यही कोई 20 साल की होगी, उसकी चूचियाँ संतरे के आकार की होंगी और उसकी गांड भी बड़ी और उठी हुई थी।
वो लैगीज और शार्ट कुरती में कयामत ढा रही थी।
चूंकि मेरी भतीजियां भी उसे घेर कर बैठी थीं.. तो मैं चोरी से सबकी नजरें बचा कर सपना की नुकीले पहाड़ सी तनी हुई चूचियों को देख कर अपने लंड को मसल रहा था।
मैं मन ही मन उसे चोदने का प्लान सोच रहा था। वो हमारे यहाँ करीब एक सप्ताह रुकने वाली थी, यह सोच कर मैं बहुत खुश हो रहा था कि एक सप्ताह में साथ दिन होते हैं यानि कि जब दुनिया एक सप्ताह में सात बार घूम सकती है तो क्या कोशिश करने से मैं एक बार सपना की बुर नहीं चूम सकता।
खैर.. जैसे-तैसे दिन बीता। मैं ज़्यादा समय सपना के आगे-पीछे मौके की तलाश में घूमता रहा.. पर उसके चूचियों को छूने का कोई मौका नहीं मिला, हाँ एक-दो बार मैंने उसके चूतड़ों को हल्के हाथों से टच जरूर कर लिया था.. जिसका उसे पता नहीं चला.. या शायद उसे पता भी चल गया होगा.. पर मैंने इस अंदाज में उसके गोल मुलायम उभरे हुए चूतड़ों को टच किया था कि उसे लगा होगा कि ये अंजाने में हुआ।
शरीर से चिपकी हुई मुलायम कपड़े की लैगीज के ऊपर से भी मैंने उसकी गांड की गर्मी को महसूस किया था।
मेरा लंड का तो हाल पूछो ही मत दोस्तो.. अगर मैं पजामे के अन्दर चड्डी नहीं पहना होता.. तो शायद लंड महाशय अब तक पजामे को फाड़ चुके होते।
जब वो चलती.. तो मेरी नजर उसकी बल खाती पतली कमर के साथ ऊपर-नीचे होती गांड पर ही जम कर रह जाती। बुर की प्यास से मेरा गला बार-बार सूख रहा था.. जिसे पानी नहीं भिगो पा रहा था।
उस वक़्त मेरे पास मेरी प्यास बुझाने वाला और कोई भी नहीं था।
इतनी हसीन लड़की को अपने घर में पा कर मैं चुदाई करने के लिए बेचैन हो गया था। अगर सपना कभी अकेली मिलती.. तो मैं उसे खींच कर बात भी करता.. पर मेरी भतीजियां उसे अकेला छोड़ ही नहीं रही थीं।
किसी तरह समय बीत रहा था।
सपना को चोदना है.. इसके अलावा मेरे दिमाग़ में और कुछ आ भी नहीं रहा था कि मैं कोई प्लान भी बना सकूँ। उसकी चूचियां और चूतड़ ही मेरे दिमाग़ में घूम रहे थे। उत्तेजना के मारे मेरा बुरा हाल था.. जिसे मेरी भाभी ने पढ़ लिया।
जब सब रात का खाना खा रहे थे, तो भाभी ने मुझे अपने कमरे में आने को कहा। भाभी की उम्र अभी करीब 40 साल की होगी। अब वो मुझे उतना समय नहीं दे पाती थीं क्योंकि मेरा पूरा घर बच्चों से भर गया था। साथ ही भाभी का भी सेक्स में इंटरेस्ट कम हो गया था, बस अब वो भैया तक ही सिमट कर रह गई थीं, कभी कभार ही महीनों में मुझे चान्स मिलता.. जब भैया कहीं बाहर होते।
खैर.. मैं भाभी के रूम में गया, तो भाभी मेरा इंतजार कर रही थीं। भाभी ने मुझे अपने पास बैठाया.. फिर मुझसे बोलीं- क्या बात है तुमने खाना क्यों नहीं खाया और इतने परेशान से क्यों हो?
मैं भाभी से क्या छुपाता.. मैंने उन्हें सच-सच बता दिया कि सेक्स की भूख मुझे बेचैन कर रही है।
भाभी पहले तो मुझे देख कर मुस्कुराईं.. फिर अचानक ही भाभी ने अपना एक हाथ मेरे पजामे में डाल दिया। अब भाभी मेरे लंड को पकड़ कर सहलाने लगीं।
मेरी उत्तेजना इतनी बढ़ी हुई थी कि भाभी के द्वारा मेरे लंड को सहलाने से मेरी आँखें बंद हो गईं ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’
भाभी मेरे होंठों को भी चूसने लगी थीं।
दो ही मिनट में मेरे लंड ने पिचकारी छोड़ दी।
भाभी ने कसके मुझे अपने से चिपका लिया और मेरे कान में बोलीं- मेरे राजा अभी मेरा महीना आया है.. इसलिए इतने से ही काम चलाओ, अब चलो जल्दी से खाना खालो।
मुझे थोड़ी राहत मिली.. और मैं भाभी के पीछे चल दिया। मैंने खाना खाया और अपने रूम में सोने के लिए चला गया।
अपने कमरे में जाते हुए मेरी आँखें सपना को ढूँढ रही थीं.. पर वो मुझे नहीं दिखी। अपनी भतीजी राखी से पूछने पर पता चला कि वो पढ़ रही है, क्योंकि कल ही उसका एग्जाम है।
करवटें बदल-बदल कर किसी तरह रात बीती।
सुबह-सुबह नींद आई ही थी कि सपना मेरे रूम में पहुँच गई, वो अकेली ही आई थी, वो मुझे उठाने लगी, यह मौका में कैसे गंवाता।
अनजान बनते हुए मैंने सपना को बांहों में समेट लिया और उसे अपने साथ लिटा लिया और बोला- गुड मॉर्निंग बच्चा.. क्यों सुबह उठा रही है राखी.. सोने दे ना.. तेरी चाची है साथ में!
यह सब करते हुए मेरी आँखें बंद थीं, सपना के शरीर की भीनी खुशबू मेरी सांसों में समा रही थी। शायद वो नहा चुकी थी क्योंकि उसके गीले बाल मेरी गर्दन महसूस हो रहे थे।
सपना मेरी बांहों में कसमसाते हुए बोली- मामाजी.. मैं राखी नहीं.. सपना हूँ, उठिए और फ्रेश हो जाइए। आपको मुझे एग्जाम दिलाने ले चलना है।
इतना कहते हुए वो मेरी बांहों से छूटने की कोशिश करने लगी। उसके ऐसा करने से उसकी चूचियां जो मेरे सीने में दबी थीं.. वो सीने से रगड़ने लगीं।
मैंने उसे अपने ऊपर खींच लिया था और मैं उसे छोड़ ही नहीं रहा था। उसके मखमली जिस्म की छुअन से मेरा लंड खड़ा होकर उसकी जाँघों के बीच में बुर से सटा हुआ था। सपना जब जब हिलती.. तो कपड़े के ऊपर से मेरा लोहे की तरह कड़ा लंड उसकी बुर से रगड़ ख़ाता।
‘मामाजी उठिए ना.. मामाजी छोड़िए ना..’ यह कहते हुए वो हिल-हिल कर मुझसे छूटने की कोशिश कर रही थी और मैं आँखें बंद किए उसे कसके जकड़े हुए था।
शायद सपना को अपनी बुर पर मेरे लंड का स्पर्श अच्छा लगने लगा था.. इसीलिए उसने इधर-उधर हिलना कम कर दिया और अपनी बुर को मेरे लंड पर दबाने लगी थी।
अब मुझे लगने लगा था कि सपना की बुर भी फड़क उठी है और आज नहीं तो कल ये मेरे लंड पर झूल ही जाएगी।
मुझे लगा कि सपना की बुर भी फड़क उठी है, यह महसूस करते ही मेरा साहस और बढ़ गया। फिर मैं अपना एक हाथ सपना की पीठ से नीचे सरकाते हुए एकदम से उसकी गांड पर ले गया और धीरे-धीरे सहलाते हुए दबाने लगा।
पर यह क्या.. मेरी पकड़ ढीली होते ही वो एक झटके से मेरे ऊपर से उठ गई और रूम से बाहर जाते हुए मुझसे बोली- जल्दी उठिए.. और नहा लीजिए.. नाश्ता तैयार है।
मैं बस उसे जाता हुआ देखता रहा और मन ही मन बोला- नाश्ता तो करा दिया.. अब खाना भी खिला दो सपना डार्लिंग!
उसके जाने के बाद भी मैं अपना लंड पकड़ कर अपने सीने पर उसकी चूचियों का और लंड पर उसकी चूत का दबाव महसूस कर रहा था। क्या दिलकश मंजर था वो.. जब सपना अपनी चूत मेरे लंड पर दबा रही थी। मुझे जो मजा मिला, मेरे पास इसको लिखने के लिए शब्द नहीं हैं.. जो उस अनुभव को लिख सकूँ।
सपना की ओर से हरी झंडी मिल गई, यह खुशी में बर्दाश्त नहीं कर सका और उठ कर नाचने लगा।
मुझे पता नहीं था.. पर जब हँसने की आवाज सुनी तो देखा सपना दरवाजे पर खड़ी थी और मुझे नाचता देख कर हँस रही थी। मेरे देखते ही वो भाग गई और मैं शर्मा कर बाथरूम में घुस गया।
मैं फ्रेश होकर बाहर आया तो देख सपना तैयार थी। मैंने जल्दी से नाश्ता किया और हम दोनों घर से एग्जाम के लिए मेरी बाइक पर निकल गए।
एग्जाम को लेकर सपना कुछ नर्वस थी, रास्ते भर वो ज़्यादा कुछ नहीं बोली, बस पढ़ाई की टॉपिक पर थोड़ी बहुत बात कर रही थी। एग्जाम सेन्टर तक का रास्ता लंबा था। उसका सेंटर हमारे घर से करीब 55-60 किलोमीटर दूर था। हम दोनों लगभग एक घंटे में पहुँच गए। मैंने उसे ‘बेस्ट ऑफ लक’ विश किया.. जिस पर वो मुस्कुरा कर ‘थैंक्यू..’ बोली और स्कूल के अन्दर चली गई।
अब मैं सोच में पड़ गया कि अचानक ऐसा क्या हो गया कि बाइक पर वो मुझसे काफ़ी दूर ही बैठी रही थी, उसके हाथ को छोड़ उसका कोई अंग मुझसे नहीं छू रहा था, वो काफ़ी सम्भल कर बैठी थी।
मेरे मन में ख्याल आने लगा कि शायद सुबह की उसकी हरकत मेरे पकड़ से छूटने की कोई चाल तो नहीं थी। हो भी सकता है नारी के लिए कुछ भी असंभव नहीं होता.. वो बहुत ही चालाक होती है, अपने शरीर को इस्तेमाल करके वो अनहोनी को भी होनी कर सकती है।
मैं जिसे हरी झंडी समझ रहा था.. वो तो एक छलावा था। रास्ते भर के उसके बर्ताव से मुझे यही लग रहा था। जो मैं चाह रहा था, अगर वो भी वही चाहती, तो अकेलेपन का फायदा उठाती.. बाइक पर मुझसे चिपक कर बैठती और रास्ते भर मज़े करती। पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ तो मैं भी अब सावधान हो गया कि मेरी जल्दबाज़ी में कहीं बनती बात बिगड़ ना जाए।
सपना दो घंटे बाद स्कूल से बाहर आई.. वो खुश दिखाई दे रही थी। शायद उसका एग्जाम बढ़िया गया था।
उसके पास आते ही मैंने पूछा- एग्जाम कैसा हुआ सपना?
सपना- अच्छा हुआ मामाजी.. जो-जो तैयारी की थी.. उन्हीं में से सवाल आए थे।
मैं- तो अब क्या भूख लगी है?
सपना- हाँ मामाजी भूख भी और प्यास भी ज़ोर की लगी है.. स्कूल के अन्दर अच्छा पानी भी नहीं था।
लंच का समय भी हो गया था.. सो मैं सपना को एक रेस्टोरेंट में ले गया। वहाँ हमने खाना खाया और फिर घर की ओर चल दिए। इस बार वो थोड़ा रिलॅक्स लग रही थी। अभी हम थोड़ी दूर आए ही थे कि सपना मुझे बाइक रोकने को बोली। जिस जगह उसने बाइक रुकवाई.. वो एरिया जंगल का था, चारों ओर पेड़ और झाड़ियां थीं।
मैंने बाइक रोक दी।
सपना बाइक से उतरी और रोड के साइड में घनी झाड़ियों में घुस गई, शायद वो पेशाब करने गई थी।
मैं भी बाइक खड़ी करके चुपके से उसे देखने के लिए झाड़ियों के करीब चला गया। वो पेशाब करेगी यह सोच कर मैं खुद को रोक नहीं पाया और झाड़ियों के पास जाकर देखा तो उसने अपनी लैगी पूरी उतार ली थी, उसकी शार्ट कुरती उसकी गांड तक ही आ रही थी, इसलिए मुझे उसकी गोरी चिकनी जांघें पीछे से दिख रही थीं।
सपना की पीठ मेरी तरफ थी.. वो मुझे नहीं देख पा रही थी। उसकी नंगी जाँघों का दीदार पाते ही लंड महाशय जाग गए.. जो अब तक डर से दुबके हुए थे।
सपना ने अपनी पेंटी भी उतार दी, अब वो नीचे से पूरी नंगी थी, उसकी गांड क्या गजब की थी… एकदम दूध जैसी सफेद!
सपना जब पेंटी को अपने पैरों से निकालने के लिए सामने की ओर झुकी तो मुझे पीछे से उसकी हल्के काले बालों से घिरी गुलाबी नंगी चूत दिखाई दी, उम्म्ह… अहह… हय… याह… जिससे मेरा लंड उत्तेजना में भरकर मेरे जींस से बाहर निकलने को तड़पने लगा।
मैंने उसे ज़्यादा तड़पने नहीं दिया और अपनी जींस को खोलकर जाँघों तक कर लिया और अपने लंड को हाथों में ले कर सहलाने लगा। लंड पूरी तरह तन कर लाल हो गया था।
उधर सपना को ना जाने क्या हुआ और वो पेंटी को वहीं फेंक दी और पेशाब करके सिर्फ़ लैगीज पहन ली।
मैं उसे एकटक देख रहा था और अपने लंड को सहला रहा था। वो वापस आने लगी.. पर मैं वहाँ से नहीं हटा। पता नहीं मुझे अब अंजाम की परवाह नहीं थी, मैं वहीं खड़ा सपना से नजर मिला कर अपने लंड को सहलाता रहा।
मैंने देखा सपना तिरछी नजरों से मेरे लंड को देखते हुए बगल से चली गई। उसने बाइक के पास जाकर मुझे आवाज़ दी। मैं उसी अवस्था में घूम गया और जींस को पहनते हुए उसके करीब जाने लगा।
मेरा लंड अब भी बाहर था। चुदाई की सोच कर उत्तेजना में लंड इस कदर तना हुआ था कि वो जींस के अन्दर समा नहीं रहा था। मैंने अपनी टी-शर्ट से उसे ढक तो दिया.. पर उसके उभार को छुपा नहीं पाया और वैसे ही सपना के पास चला गया।
वो मेरे लंड के उभार को देख कर घूम गई थी, सपना की पीठ मेरी ओर हो गई थी। मुझ पर चुदाई का भूत सवार हो गया था, मेरा पूरा शरीर काँपने लगा लगा था। पीछे से सपना की गांड से लंड को सटा कर मैंने उसे बांहों में भर लिया।
सपना- क्या करते हो मामाजी? छोड़िए मुझे!
यह बात उसने मुझसे गुस्से में कही, पर मैंने अनसुना कर दिया और उसकी गांड में अपने लंड को और जोर से दबा दिया।
इस पर वो तिलमिला गई और घूम कर मुझे धक्का देते हुए बोली- होश में आइए मामाजी.. आप घर चलिए, मैं सबको आपकी इस हरकत के बारे में बताऊँगी।
यह सुनते ही मेरा माथा चकरा गया, मैंने एक बार प्यासी नज़रों से सपना को देखा, वो मुझे गुस्से से घूर रही थी।
उसका गुस्सा देख कर लंड महाशय कोने में दुबक लिए.. मुझसे कुछ भी कहा नहीं जा रहा था, मैंने चुपचाप जींस के ज़िप को बंद किया और बाइक पर बैठ गया.. सपना भी मेरे पीछे बैठ गई।
मैंने बाइक को स्टार्ट किया और हम दोनों घर की ओर चल दिए।
मेरा नाम रंगीला है.. मैं 28 साल का हट्टा-कट्टा और एकदम गोरा चिट्टा युवक हूँ।
मैं आप लोगों के लिए मेरी एक नई और सच्ची सेक्स कहानी लेकर आया हूँ, यह घटना यही साल भर पहले की है।
जवानी की शुरूआत में ही मुझे मेरी भाभी ने अच्छा ख़ासा ज्ञान और अनुभव दे दिया था.. जिसके कारण मैंने अपनी बहन और भाभी दोनों से सेक्स का मजा बहुत लिया है।
उम्र के साथ-साथ मेरी सेक्स की भूख भी बढ़ती जा रही थी, अब तो जिस भी सेक्सी लड़की को देखता.. तो उसे चोदने के लिए बेचैन हो उठता… किसी भी लड़की की चूचियां देखते ही मेरे हाथों में खुजली होने लगती, उसकी उभरी गांड को देखते ही लंड खड़ा हो जाता।
एक दिन मैं अपने घर पर ही था कि घर के बाहर गाड़ी के रुकने की आवाज सुनाई दी। मैंने मेनगेट खोला तो देखा मेरी दीदी की ननद ऑटो से उतर रही थीं.. साथ में उनकी बेटी सपना भी थी।
वे लोग बिहार के हाज़ीपुर के रहने वाले हैं।
मैंने उन दोनों का स्वागत किया और उन्हें घर के अन्दर ले गया, मेरे घर वाले उन्हें देख कर बहुत ही खुश हुए।
थोड़ी बहुत बातचीत के बाद बेबी दी (दीदी की ननद का नाम) गेस्ट रूम में फ्रेश होने के लिए चली गईं।
यहाँ मैं बता दूँ कि दीदी की ननद जो कि मुझसे बड़ी थीं.. उन्हें भी मैं दीदी कह कर ही बुलाता था।
सपना अभी भी हम लोगों के पास बैठी थी, सपना से बातचीत के बाद पता चला कि वो हमारे शहर में एग्जाम देने आई है।
सपना बहुत ही खूबसूरत और बोल्ड लड़की थी, वो मुझे बहुत ही सेक्सी लग रही थी, पर मैं उसे जी भर के देख नहीं पा रहा था क्योंकि वो मेरी भतीजियों के साथ थी, वे सब आपस में बातें कर रही थीं।
सपना की उम्र यही कोई 20 साल की होगी, उसकी चूचियाँ संतरे के आकार की होंगी और उसकी गांड भी बड़ी और उठी हुई थी।
वो लैगीज और शार्ट कुरती में कयामत ढा रही थी।
चूंकि मेरी भतीजियां भी उसे घेर कर बैठी थीं.. तो मैं चोरी से सबकी नजरें बचा कर सपना की नुकीले पहाड़ सी तनी हुई चूचियों को देख कर अपने लंड को मसल रहा था।
मैं मन ही मन उसे चोदने का प्लान सोच रहा था। वो हमारे यहाँ करीब एक सप्ताह रुकने वाली थी, यह सोच कर मैं बहुत खुश हो रहा था कि एक सप्ताह में साथ दिन होते हैं यानि कि जब दुनिया एक सप्ताह में सात बार घूम सकती है तो क्या कोशिश करने से मैं एक बार सपना की बुर नहीं चूम सकता।
खैर.. जैसे-तैसे दिन बीता। मैं ज़्यादा समय सपना के आगे-पीछे मौके की तलाश में घूमता रहा.. पर उसके चूचियों को छूने का कोई मौका नहीं मिला, हाँ एक-दो बार मैंने उसके चूतड़ों को हल्के हाथों से टच जरूर कर लिया था.. जिसका उसे पता नहीं चला.. या शायद उसे पता भी चल गया होगा.. पर मैंने इस अंदाज में उसके गोल मुलायम उभरे हुए चूतड़ों को टच किया था कि उसे लगा होगा कि ये अंजाने में हुआ।
शरीर से चिपकी हुई मुलायम कपड़े की लैगीज के ऊपर से भी मैंने उसकी गांड की गर्मी को महसूस किया था।
मेरा लंड का तो हाल पूछो ही मत दोस्तो.. अगर मैं पजामे के अन्दर चड्डी नहीं पहना होता.. तो शायद लंड महाशय अब तक पजामे को फाड़ चुके होते।
जब वो चलती.. तो मेरी नजर उसकी बल खाती पतली कमर के साथ ऊपर-नीचे होती गांड पर ही जम कर रह जाती। बुर की प्यास से मेरा गला बार-बार सूख रहा था.. जिसे पानी नहीं भिगो पा रहा था।
उस वक़्त मेरे पास मेरी प्यास बुझाने वाला और कोई भी नहीं था।
इतनी हसीन लड़की को अपने घर में पा कर मैं चुदाई करने के लिए बेचैन हो गया था। अगर सपना कभी अकेली मिलती.. तो मैं उसे खींच कर बात भी करता.. पर मेरी भतीजियां उसे अकेला छोड़ ही नहीं रही थीं।
किसी तरह समय बीत रहा था।
सपना को चोदना है.. इसके अलावा मेरे दिमाग़ में और कुछ आ भी नहीं रहा था कि मैं कोई प्लान भी बना सकूँ। उसकी चूचियां और चूतड़ ही मेरे दिमाग़ में घूम रहे थे। उत्तेजना के मारे मेरा बुरा हाल था.. जिसे मेरी भाभी ने पढ़ लिया।
जब सब रात का खाना खा रहे थे, तो भाभी ने मुझे अपने कमरे में आने को कहा। भाभी की उम्र अभी करीब 40 साल की होगी। अब वो मुझे उतना समय नहीं दे पाती थीं क्योंकि मेरा पूरा घर बच्चों से भर गया था। साथ ही भाभी का भी सेक्स में इंटरेस्ट कम हो गया था, बस अब वो भैया तक ही सिमट कर रह गई थीं, कभी कभार ही महीनों में मुझे चान्स मिलता.. जब भैया कहीं बाहर होते।
खैर.. मैं भाभी के रूम में गया, तो भाभी मेरा इंतजार कर रही थीं। भाभी ने मुझे अपने पास बैठाया.. फिर मुझसे बोलीं- क्या बात है तुमने खाना क्यों नहीं खाया और इतने परेशान से क्यों हो?
मैं भाभी से क्या छुपाता.. मैंने उन्हें सच-सच बता दिया कि सेक्स की भूख मुझे बेचैन कर रही है।
भाभी पहले तो मुझे देख कर मुस्कुराईं.. फिर अचानक ही भाभी ने अपना एक हाथ मेरे पजामे में डाल दिया। अब भाभी मेरे लंड को पकड़ कर सहलाने लगीं।
मेरी उत्तेजना इतनी बढ़ी हुई थी कि भाभी के द्वारा मेरे लंड को सहलाने से मेरी आँखें बंद हो गईं ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’
भाभी मेरे होंठों को भी चूसने लगी थीं।
दो ही मिनट में मेरे लंड ने पिचकारी छोड़ दी।
भाभी ने कसके मुझे अपने से चिपका लिया और मेरे कान में बोलीं- मेरे राजा अभी मेरा महीना आया है.. इसलिए इतने से ही काम चलाओ, अब चलो जल्दी से खाना खालो।
मुझे थोड़ी राहत मिली.. और मैं भाभी के पीछे चल दिया। मैंने खाना खाया और अपने रूम में सोने के लिए चला गया।
अपने कमरे में जाते हुए मेरी आँखें सपना को ढूँढ रही थीं.. पर वो मुझे नहीं दिखी। अपनी भतीजी राखी से पूछने पर पता चला कि वो पढ़ रही है, क्योंकि कल ही उसका एग्जाम है।
करवटें बदल-बदल कर किसी तरह रात बीती।
सुबह-सुबह नींद आई ही थी कि सपना मेरे रूम में पहुँच गई, वो अकेली ही आई थी, वो मुझे उठाने लगी, यह मौका में कैसे गंवाता।
अनजान बनते हुए मैंने सपना को बांहों में समेट लिया और उसे अपने साथ लिटा लिया और बोला- गुड मॉर्निंग बच्चा.. क्यों सुबह उठा रही है राखी.. सोने दे ना.. तेरी चाची है साथ में!
यह सब करते हुए मेरी आँखें बंद थीं, सपना के शरीर की भीनी खुशबू मेरी सांसों में समा रही थी। शायद वो नहा चुकी थी क्योंकि उसके गीले बाल मेरी गर्दन महसूस हो रहे थे।
सपना मेरी बांहों में कसमसाते हुए बोली- मामाजी.. मैं राखी नहीं.. सपना हूँ, उठिए और फ्रेश हो जाइए। आपको मुझे एग्जाम दिलाने ले चलना है।
इतना कहते हुए वो मेरी बांहों से छूटने की कोशिश करने लगी। उसके ऐसा करने से उसकी चूचियां जो मेरे सीने में दबी थीं.. वो सीने से रगड़ने लगीं।
मैंने उसे अपने ऊपर खींच लिया था और मैं उसे छोड़ ही नहीं रहा था। उसके मखमली जिस्म की छुअन से मेरा लंड खड़ा होकर उसकी जाँघों के बीच में बुर से सटा हुआ था। सपना जब जब हिलती.. तो कपड़े के ऊपर से मेरा लोहे की तरह कड़ा लंड उसकी बुर से रगड़ ख़ाता।
‘मामाजी उठिए ना.. मामाजी छोड़िए ना..’ यह कहते हुए वो हिल-हिल कर मुझसे छूटने की कोशिश कर रही थी और मैं आँखें बंद किए उसे कसके जकड़े हुए था।
शायद सपना को अपनी बुर पर मेरे लंड का स्पर्श अच्छा लगने लगा था.. इसीलिए उसने इधर-उधर हिलना कम कर दिया और अपनी बुर को मेरे लंड पर दबाने लगी थी।
अब मुझे लगने लगा था कि सपना की बुर भी फड़क उठी है और आज नहीं तो कल ये मेरे लंड पर झूल ही जाएगी।
मुझे लगा कि सपना की बुर भी फड़क उठी है, यह महसूस करते ही मेरा साहस और बढ़ गया। फिर मैं अपना एक हाथ सपना की पीठ से नीचे सरकाते हुए एकदम से उसकी गांड पर ले गया और धीरे-धीरे सहलाते हुए दबाने लगा।
पर यह क्या.. मेरी पकड़ ढीली होते ही वो एक झटके से मेरे ऊपर से उठ गई और रूम से बाहर जाते हुए मुझसे बोली- जल्दी उठिए.. और नहा लीजिए.. नाश्ता तैयार है।
मैं बस उसे जाता हुआ देखता रहा और मन ही मन बोला- नाश्ता तो करा दिया.. अब खाना भी खिला दो सपना डार्लिंग!
उसके जाने के बाद भी मैं अपना लंड पकड़ कर अपने सीने पर उसकी चूचियों का और लंड पर उसकी चूत का दबाव महसूस कर रहा था। क्या दिलकश मंजर था वो.. जब सपना अपनी चूत मेरे लंड पर दबा रही थी। मुझे जो मजा मिला, मेरे पास इसको लिखने के लिए शब्द नहीं हैं.. जो उस अनुभव को लिख सकूँ।
सपना की ओर से हरी झंडी मिल गई, यह खुशी में बर्दाश्त नहीं कर सका और उठ कर नाचने लगा।
मुझे पता नहीं था.. पर जब हँसने की आवाज सुनी तो देखा सपना दरवाजे पर खड़ी थी और मुझे नाचता देख कर हँस रही थी। मेरे देखते ही वो भाग गई और मैं शर्मा कर बाथरूम में घुस गया।
मैं फ्रेश होकर बाहर आया तो देख सपना तैयार थी। मैंने जल्दी से नाश्ता किया और हम दोनों घर से एग्जाम के लिए मेरी बाइक पर निकल गए।
एग्जाम को लेकर सपना कुछ नर्वस थी, रास्ते भर वो ज़्यादा कुछ नहीं बोली, बस पढ़ाई की टॉपिक पर थोड़ी बहुत बात कर रही थी। एग्जाम सेन्टर तक का रास्ता लंबा था। उसका सेंटर हमारे घर से करीब 55-60 किलोमीटर दूर था। हम दोनों लगभग एक घंटे में पहुँच गए। मैंने उसे ‘बेस्ट ऑफ लक’ विश किया.. जिस पर वो मुस्कुरा कर ‘थैंक्यू..’ बोली और स्कूल के अन्दर चली गई।
अब मैं सोच में पड़ गया कि अचानक ऐसा क्या हो गया कि बाइक पर वो मुझसे काफ़ी दूर ही बैठी रही थी, उसके हाथ को छोड़ उसका कोई अंग मुझसे नहीं छू रहा था, वो काफ़ी सम्भल कर बैठी थी।
मेरे मन में ख्याल आने लगा कि शायद सुबह की उसकी हरकत मेरे पकड़ से छूटने की कोई चाल तो नहीं थी। हो भी सकता है नारी के लिए कुछ भी असंभव नहीं होता.. वो बहुत ही चालाक होती है, अपने शरीर को इस्तेमाल करके वो अनहोनी को भी होनी कर सकती है।
मैं जिसे हरी झंडी समझ रहा था.. वो तो एक छलावा था। रास्ते भर के उसके बर्ताव से मुझे यही लग रहा था। जो मैं चाह रहा था, अगर वो भी वही चाहती, तो अकेलेपन का फायदा उठाती.. बाइक पर मुझसे चिपक कर बैठती और रास्ते भर मज़े करती। पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ तो मैं भी अब सावधान हो गया कि मेरी जल्दबाज़ी में कहीं बनती बात बिगड़ ना जाए।
सपना दो घंटे बाद स्कूल से बाहर आई.. वो खुश दिखाई दे रही थी। शायद उसका एग्जाम बढ़िया गया था।
उसके पास आते ही मैंने पूछा- एग्जाम कैसा हुआ सपना?
सपना- अच्छा हुआ मामाजी.. जो-जो तैयारी की थी.. उन्हीं में से सवाल आए थे।
मैं- तो अब क्या भूख लगी है?
सपना- हाँ मामाजी भूख भी और प्यास भी ज़ोर की लगी है.. स्कूल के अन्दर अच्छा पानी भी नहीं था।
लंच का समय भी हो गया था.. सो मैं सपना को एक रेस्टोरेंट में ले गया। वहाँ हमने खाना खाया और फिर घर की ओर चल दिए। इस बार वो थोड़ा रिलॅक्स लग रही थी। अभी हम थोड़ी दूर आए ही थे कि सपना मुझे बाइक रोकने को बोली। जिस जगह उसने बाइक रुकवाई.. वो एरिया जंगल का था, चारों ओर पेड़ और झाड़ियां थीं।
मैंने बाइक रोक दी।
सपना बाइक से उतरी और रोड के साइड में घनी झाड़ियों में घुस गई, शायद वो पेशाब करने गई थी।
मैं भी बाइक खड़ी करके चुपके से उसे देखने के लिए झाड़ियों के करीब चला गया। वो पेशाब करेगी यह सोच कर मैं खुद को रोक नहीं पाया और झाड़ियों के पास जाकर देखा तो उसने अपनी लैगी पूरी उतार ली थी, उसकी शार्ट कुरती उसकी गांड तक ही आ रही थी, इसलिए मुझे उसकी गोरी चिकनी जांघें पीछे से दिख रही थीं।
सपना की पीठ मेरी तरफ थी.. वो मुझे नहीं देख पा रही थी। उसकी नंगी जाँघों का दीदार पाते ही लंड महाशय जाग गए.. जो अब तक डर से दुबके हुए थे।
सपना ने अपनी पेंटी भी उतार दी, अब वो नीचे से पूरी नंगी थी, उसकी गांड क्या गजब की थी… एकदम दूध जैसी सफेद!
सपना जब पेंटी को अपने पैरों से निकालने के लिए सामने की ओर झुकी तो मुझे पीछे से उसकी हल्के काले बालों से घिरी गुलाबी नंगी चूत दिखाई दी, उम्म्ह… अहह… हय… याह… जिससे मेरा लंड उत्तेजना में भरकर मेरे जींस से बाहर निकलने को तड़पने लगा।
मैंने उसे ज़्यादा तड़पने नहीं दिया और अपनी जींस को खोलकर जाँघों तक कर लिया और अपने लंड को हाथों में ले कर सहलाने लगा। लंड पूरी तरह तन कर लाल हो गया था।
उधर सपना को ना जाने क्या हुआ और वो पेंटी को वहीं फेंक दी और पेशाब करके सिर्फ़ लैगीज पहन ली।
मैं उसे एकटक देख रहा था और अपने लंड को सहला रहा था। वो वापस आने लगी.. पर मैं वहाँ से नहीं हटा। पता नहीं मुझे अब अंजाम की परवाह नहीं थी, मैं वहीं खड़ा सपना से नजर मिला कर अपने लंड को सहलाता रहा।
मैंने देखा सपना तिरछी नजरों से मेरे लंड को देखते हुए बगल से चली गई। उसने बाइक के पास जाकर मुझे आवाज़ दी। मैं उसी अवस्था में घूम गया और जींस को पहनते हुए उसके करीब जाने लगा।
मेरा लंड अब भी बाहर था। चुदाई की सोच कर उत्तेजना में लंड इस कदर तना हुआ था कि वो जींस के अन्दर समा नहीं रहा था। मैंने अपनी टी-शर्ट से उसे ढक तो दिया.. पर उसके उभार को छुपा नहीं पाया और वैसे ही सपना के पास चला गया।
वो मेरे लंड के उभार को देख कर घूम गई थी, सपना की पीठ मेरी ओर हो गई थी। मुझ पर चुदाई का भूत सवार हो गया था, मेरा पूरा शरीर काँपने लगा लगा था। पीछे से सपना की गांड से लंड को सटा कर मैंने उसे बांहों में भर लिया।
सपना- क्या करते हो मामाजी? छोड़िए मुझे!
यह बात उसने मुझसे गुस्से में कही, पर मैंने अनसुना कर दिया और उसकी गांड में अपने लंड को और जोर से दबा दिया।
इस पर वो तिलमिला गई और घूम कर मुझे धक्का देते हुए बोली- होश में आइए मामाजी.. आप घर चलिए, मैं सबको आपकी इस हरकत के बारे में बताऊँगी।
यह सुनते ही मेरा माथा चकरा गया, मैंने एक बार प्यासी नज़रों से सपना को देखा, वो मुझे गुस्से से घूर रही थी।
उसका गुस्सा देख कर लंड महाशय कोने में दुबक लिए.. मुझसे कुछ भी कहा नहीं जा रहा था, मैंने चुपचाप जींस के ज़िप को बंद किया और बाइक पर बैठ गया.. सपना भी मेरे पीछे बैठ गई।
मैंने बाइक को स्टार्ट किया और हम दोनों घर की ओर चल दिए।