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दीदी से सेटिंग

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Guest
मैं , दीपक गुप्ता अभी २० साल का हु और बैंगलोर में इंजीनियरिंग कर रहा ह। मेरे मम्मी पापा मैसूर में रहते है और मैं यहाँ बैंगलोर में अपने दीदी ( स्नेहा दीदी ) के पास रहता हूँ। मेरी हाइट काफी अछि है , मैं ६ फ़ीट का हट्टा कट्टा जबान हूँ। मेरे औज़ार के बारे में आपको बाद में पता चल ही जाएगा।

मेरी बड़ी दीदी : स्नेहा गुप्ता ,उनकी उम्र २६ साल है,लेकिन अभी तक उन्होंने शादी नहीं की है…वो काफी इंटेलीजेंट थी और अभी एम बी ए करने के बाद वो एक बड़े कंपनी में चीफ फाइनेंस अफसर (स्फो) है। उनकी अच्छि सैलरी पैकेज है और उनका फ्लैट बनरगट्टा रोड , बैंगलोर में है। दीदी ने ये फ्लैट खरीद लिया है,ए थ्री बैडरूम का फ्लैट है। दीदी ने मम्मी पापा को भी उपने साथ रहने के लिए बोला था लेकिन चुकी पापा मैसूर में बैंक में काम करते है और हमारे सारे रिलेटिव भी मैसूर में ही रहते है। इस्लिये जब मेरे इनजीनियरिंग में एडमिशन का टाइम हुआ तो दीदी ने जिद कर दी की मैं उनके साथ ही रहु ,जिस्से उन्हें भी कंपनी मिले फैमिली मेंबर का। अब जरा मैं अपने दीदी की पर्सनल बाते भी कहु आपसे, मेरी दीदी बहुत ही खूबसूरत है, उनका भी हाइट मेरे जैसे ज्यादा है, वो ५ फ़ीट ६ इंच की है। उनके लम्बे लम्बे बाल, उनकी खूबसूरत आँखे , सब लाजबाब है। उनकी मम्मे तो बहुत ही जबरदस्त है…और पतली कमर और बड़ी सी चुतर ,उनके शरीर को काफी क़यामत बना देता है…मैं अगर उनके साइज के बारे में बताऊ तो ३८-३०-३८ है।भरी पूरी है मेरी दीदी, रोज जिम जाती है , जो की उनके अपार्टमेंट में ही है।

मेरी छोटी दीदी: काव्य गुप्ता , उनकी उम्र २३ इयर्स है, और एम बी बी एस कर रही है और मैसूर में ही है , वो मम्मी पापा के पास रहती है… उसके बारे में बाद में बात करेंगे ,वैसे वो स्नेहा दीदी से थोड़ी पतली है…मॉडल की तरह लगाती है।।और उसका बॉडी साइज भी लाजबाब है। ३६-२८-३६ का मेज़रमेंट है उसकी बॉडी का।

और भी काफी करैक्टर है…लेकिन जैसे जैसे उनकी एंट्री होगी।।उनका परिचय कराते जांऊगा।

मै मोहित अंकल के फ्लैट से निकल कर अपने फ्लैट में आया…।और दीदी के आने का इन्तेजार करने लगा…मेरा सर चकरा रहा था और मैंने अपना सर दो तीन बार धोया…।

कारीब आधे घंटे के बाद।।डोरबेल बजी और मैं समझ गया की दीदी आ गयी है। मैंने जा कर दरवाजा खोला।।समने दीदी ही थी…।और पता नहीं आज बहुत अछि लग रही थी…अच्छी यानि हॉट लग रही थी… शायद ड्रिंक का कमाल था …दीदी बिज़नेस सूट में क़यामत लग रही थी मुझे …उसकी बड़े बड़े ब्रैस्ट शर्ट में काफी कमाल दिख रहे थे।।और टाइट पेंट में उसकी बड़ी बड़ी चुतड भी कहर ढा रही थी…वो कमरे के अंदर आयी और अपना बैग रखके…बाथरूम में चलि गयी…

आज तक मेरी इतनी हिम्मत नहीं थी की मैं दीदी के चेहरे के अलाबा उसके मम्मे या चूतड़ को देखु…लेकिन आज मेरा मन कुछ और कह रहा था…और दीदी को देखने के बाद मेरे लंड में सुरसुराहट हो रही थी…

मैने बाहर सोफ़े पे बैठके दीदी का वेट किया।।कुछ देर में दीदी ब्लू जीन्स और वाइट टॉप पहन के आयी…और पानी का बोतल लेके सोफ़े के दूसरे तरफ बैठ गयी…

सनेहा दीदी : ( मुझसे ) और दीपक कैसा रहा तुम्हारा दिन …

मै : अच्छा दीदी…थोडा एग्जाम का टेंशन है…

स्नेहा दीदी: कोई ट्यूशन की जरूरत हो तो बता देना…।

मै : नहीं दीदी…अभी तो मेरे दो सीनियर है।।उनसे हेल्प ले लेता हु कॉलेज मे।

स्नेहा दीदी : तो मैं खाना लगाती हु…।

मेरे यहाँ एक मेड सर्वेंट आता था और मॉर्निंग एंड इवनिंग में खाना बनाकर चला जाता था साथ में कपडे भी वही धोता था…इसलिए दीदी या मुझे खाना बनाने का कोई टेंशन नहीं था…।।

खाने की टेबल पे मैंने दीदी से राजेश और अब्दुल के बार्रे में बात की।

मै : दीदी , मेरे सीनियर राजेश और अब्दुल को जॉब नहीं लग रहा है लेकिन दोनों बहुत ही इंटेलीजेंट है…टोपर है।।क्या आप उनकी मदद कर सकते है…

स्नेहा दीदी : मैं कैसे मदद कर सकती हु…

मै : आप अपने कंपनी में ट्राई करते…

स्नेहा दीदी: ठीक है देखति हु…लेकिन उनसे बोलो अपना रिज्यूम दे दे मुझे और…हा एक काम…

मै : क्या दीदी?

स्नेहा दीदी: उन्हें घर पे बुलाके टयुशन लो…।दुसरों से काम भी निकालना सिखो।।अगर हेल्प कर रहे हो तो उनसे भी मदद लो…

मै : लेकिन दीदी…

स्नेहा दीदी: मेरे भाई…इस दुनियां में कुछ फ्री नहीं है।।में उनके जॉब की बात कर रही हु…तो वो तुम्हे यहाँ आ कर पढा जाये…

मै : ओके दीदी मैं, बात करता हु…

फिर हमने खाना फिनिश किया…दीदी अपने कमरे में चलि गयी…मैं फ्रेश हुआ और सोचा की अब जरा मोहित अंकल के फ्लैट से हो आता हूँ।।

मैने दीदी के बैडरूम का दरवाजा खोला…दीदी बेड पे लेटके लैपटॉप पे काम कर रही थी और उसकी बड़ी सी चुतड मेरे तरफ यानि दरवाजे की तरफ थी…जिसे देखकर मेरे लंड में सुसुराहट होने लगी ।।मैने उसे हाथ से पकडकर दीदी से पुछा : दीदी मैं जरा टहल के आता हूँ…

स्नेहा दीदी : ठीक है…
 
फिर मैं अपने फ्लैट से निकलकर मैं माथुर अंकल के फ्लैट के पास पंहुचा और डोरबेल बजाई।

मैने माथुर अंकल के घर की बैल बजाई ही थी की दरवाजा खुला और माथुर अंकल खडे थे…

माथुर अंकल : आ जाओ …।दीदी सो गयी…

मै : नहीं…उन्हें कुछ काम है…।जरा लेट सोती है…

माथुर अंकल : क्या बोल के आए…

मै: यही की घुम के आता हु बाहर से…

माथुर अंकल ; चलो अच्छा है…अगर मेरे रूम में आने का बताते तो ढेर सारा क्वेश्चन पूछती…

मै : इसीलिए नहीं बताया…

फिर मैं अंकल के ड्राइंग रूम में बैठा जहाँ एल सी डी लगा था उन्होंने अपना पेन ड्राइव उसमे लगाये और आकर मेरे पास बैठ गए…।

माथुर अंकल : एक बोतल और निकालता हु बीयर की…।?

मै: ठीक है…।

मेरे हामी भरते ही…उन्होंने दो बोतल निकाला और गिलास में डाला…और फिर हमदोनो उसे पिने लगे…अंकल ने एल सी डी ओन कर दी…।स्क्रीन पे लिखा आया “बिग टिट्स एट वर्क” और जो लेडी स्क्रीन पे आयी वो काफी सेक्सी थी, और उसके बूब्स और गांड बड़े बड़े थे…वो लड़की बिज़नेस सूट में थी…

माथुर अंकल : ये कुछ कुछ तुम्हारी दीदी जैसी लगती है न…

मै: हाँ… कह सकते है…।

मुझे लगा की ये कोई सॉफ्ट पोर्न है।।क्योकि अभी तक मैंने क्सक्सक्स मूवी नहीं देखि थी…मैंने अंकल से पूछा।।

मै: अंकल ये कौन सी मूवी है…।।

माथुर अंकल : तुमने टाइटल नहीं देखा शुरु में…

मै : मिस कर गया…

माथुर अंकल : पहले ये बोलो की ये सही में तुमको स्नेहा दीदी की कॉपी लगती है या नहीं…?

मै : है लगती तो है…लेकिन आप आज दीदी के बारे इतना क्यों पुछ रहे है…
 
उन्होंने समझ लिया की मैं अब तैयार हु सुनने के लिए क्योंकि मेरी बोतल ख़त्म हो गयी थी और सामने एक्ट्रेस ने अपना कपडा उतार दिया था…कहानी कुछ इस तरह कि ही की …एक्ट्रेस बॉस थी और अपने ऑफिस में थी और तभी एक ऑफिस बॉय पानी का बोतल रखने आता है…एक्ट्रेस उसे पानी लेकर देने के लिए बोलति है…और वो ऑफिस स्टाफ गिलास में पानी भरके जब देने जाता है तो ,ज़ान बुझकर गिलास का पानी बॉस लेडी के ऊपर गिरा देता है…मजबूरी में ग़ुस्सा करते हुए बॉस लेडी अपना ऑफिस सूट निकाल देती है और अभी वो केबल ब्रा में है।।उसके बड़े बड़े मम्मे बहुत ही अच्छे लगते है…अंकल के कहने के बाद मैं भी उसे अपनी दीदी ही मान बैठा था…ऑफिस स्टाफ जैसे ही उसे ब्रा में देखता है…उसके मम्मे दबाने लगता है और उसके बूब्स को ब्रा से निकलकर मुँह से चुस्ने लगता है…।।

माथुर अंकल : मैंने इसकी तुलना तुम्हारे दीदी से इसलिए कि थी।।की देखो बेचारी के मम्मे क्या तुम्हारी दीदी के भी इतने बड़े बड़े नहीं है…?

मै पूरी तरह से मूवी में खो गया था और उसे अपनी दीदी ही समझ बैठा था…मेरा लंड खडा हो गया था और उसे सहला रहा था और बोतल पूरी ख़तम हो जाने के बाद नशा भी हो गया था…।

मै: हाँ…अंकल दीदी के मम्मे भी ऐसे ही है…।

माथुर अंकल ; तुमने देखे कभी?

मै: हाँ देखे है कपड़ों में ही…।

माथुर अंकल : कभी नंगी नहीं देखे…।क्या ब्रा में देखि ?

मै : हाँ।।ब्रा में देख चुक्का हु दो बार…

माथुर अंकल : स्नेहा के चुच्चे इससे भी मस्त है…क्योकि वो नेचुरल है ये तो फेक है…

मै ; मुझे भी दीदी के मम्मे काफी अच्छे लगते है…

माथुर अंकल : चीज़ ही ऐसी है तुम्हारी दीदी।।कीसी का भी मन उसे चोदने को हो जाये…।तुम भी तो आखिर लड़के ही हो…

मै: अभी मैंने ऐसा नहीं सोचा…।

माथुर अंकल ; कैसे कण्ट्रोल कर पाते हो तुम।।अगर ऐसी दीदी घर में हो तो डेली चोदूँ मैं…।।

मै ; क्या दीदी को चोदना गलत नहीं है…?

माथुर अंकल: तुम दीदी और भाई की तरह मत सोचो…एक जबान लड़की और लड़के की जरूरत की तरह सोचो…वो कभी न कभी किसी से चुदेगी ही…।

हमदोनो काफी खुल गए थे।।और मुझे भी दीदी की बारे में बात करके मजा आ रहा था…सामने स्क्रीन पर एक्ट्रेस उस ऑफिस स्टाफ के लंड को चूस रही थी फिर उस आदमी ने बॉस की पेंट उतारी और टेबल पे डोगी स्टाइल में खडा कर के अपना लंड उसकी चुत में पेल दिया…मैं ये देख कर मस्त हो रहा था…उधर अंकल भी अपना लंड मसल रहे थे और उन्होंने अपना लंड पेंट से बाहर कर लिया मैं हैरान था की…ये कैसे कर रहे है वो…उनका लंड सामने स्क्रीन पे दिख रहे लड़के से कम मोटा या लम्बा नहीं था…उनकी लम्बाई १० इंच और मोटाई 3 इंच कि थी।वो अपने लंड को हाथ में लेके हिला रहे थे और मेरी दीदी के बारे में बात कर रहे थे । मैं भी काफी खुल गया था उनसे…
 
माथुर अंकल :और दीपक गांड देख इसकी…क्या स्नेहा दीदी की गांड ऐसी नहीं लगती तुम्हे…

मै : मुझे तो दीदी की गांड इससे भी बड़ी लगती है…।

माथुर अंकल ; सही में…क्या तुम्हारी दीदी ऑफिस में किसी से ऐसे चूदी होगी…

मै: क्या पता…।

माथुर अंकल : आजकल तो हर बड़ी पोस्ट पे लड़कियां जो जॉब करती है चुदती जरूर है…

मै : हो सकता है…स्नेहा दीदी भी चूदी हो किसी से…

माथुर अंकल : तुम्हारा मन तो करता ही होगा की अगर सामने तुम्हारी दीदी चुद रही हो तो मजा आ जाए।।

मै : मैं तो इसे दीदी ही सोच कर देख रहा हु…

माथुर अंकल: रियल में मन नहीं करता की कोई तुम्हारी दीदी की चूत में ऐसे ही लंड पेले…

मै : अब मन कर रहा है…।

माथुर अंकल : मेरे लंड के बारे में क्या ख़याल है…ये अगर स्नेहा दीदी की चूत या गांड में घुसे तो…

मै : (चौक गया उनकी बात सुनकर , लेकिन मन में सोचने लगा की दीदी की चुदाई अगर इस लंड से हो तो सही में मजा आएगा)लेकिन आप चोदोगे कैसे उसको…।

माथूर अंकल : अगर तुम मदद करो तो…हो सकता है…

मै: मैं कैसे मदद कर सकता हु…।

मुझे समझ में नहीं आ रहा था की ये ड्रिंक का असर है…या पोर्न मूवी देखने का…या फिर अब मैं ये सब करना चाहता हूँ…

मैने देखा माथुर अंकल की तरफ वो पूरे जोश में दिख रहे थे और उनकी बातों से ऐसा लग रहा था की वो मेरी दीदी को चोदना चाहते है…।लकिन दोनों के बीच उमर का अंतर भी काफी था स्नेहा दीदी मानेगी कैसे…और इतना बड़ा लंड दीदी कैसे अपने चुत में ले सकती है…वैसे पोर्न एक्ट्रेस ने तो ले लिया अंदर आसानी से लेकिन वो प्रोफेशनल है…मेरी दीदी तो अभी तक चूदी भी नहीं है…

मै : अंकल मैं कैसे आपकी मदद करू…

माथुर अंकल : तुम तैयार हो न मदद करने के लिए…

मै : हाँ मैं तैयार हु…

माथुर अंकल : तब ठीक है…।मेरे पास बहुत से प्लान है…।लकिन क्या तुम भी चोदना चाहते हो अपनी दीदी को…

मै : वो कैसे पॉसिबल है अंकल ।।मेरी दीदी मुझसे कैसे चूदवायेगी…

माथुर अंकल : तुम आम खाओ।।गुठलीयां मत गिनो…

माथुर अंकल ने मुझसे कहना शुरु किया अपना प्लान…जब उन्होंने अपना पूरा प्लान मुझे बताया मैं दंग रह गया…।

मै: लेकिन अंकल इसमे आपके फँसने का डर है…

माथुर अंकल : कुछ नहीं होगा चिंता मत कर…बस एक काम कर ये रसगुल्ला तो खा ले क्योंकि अगर तुम्हारे मुह से स्मेल आएगा तो दीदी को शक होगा…

मैने वो गुलाब जामुन खा लिया और मन ही मन सोचने लगा की कैसे ये सब होगा।लकिन मुझे अंकल के कॉन्फिडेंस पे भरोसा था। आज क्या कुछ हो रहा था मेरे साथ…अब मैं समझा। नशे में लोग क्यों बहक जाते है…आज मेरे जैसा लड़का अपनी दीदी को चोदने का प्लान बना रहा था या यु कहें की अपनी प्यारी दीदी की सेटिंग कर रहा था।

मै : तो ठीक है अंकल मैं चलता हु अब…

माथुर अंकल : ओके …गुड नाईट।
 
ओ मुझे छोड़ने दरवाजे तक भी नहीं आये और कुछ दूंढ रहे थे और मैं मन में प्लान के बारे में सोचते हुए अपने फ्लैट में आ गया…

जैसे ही मै अपने फ्लैट में आया।।देखा स्नेहा दीदी के रूम का लाइट जल रहा था। मैंने अंदर जा के देखा तो दीदी बेड पे लेट के लैपटॉप पे काम कर रही थी।

मै : दीदी सोयी नहीं अभी तक…

स्नेहा दीदी पलटी…जिससे उसके शर्ट से उसके बूब्स के कुछ पार्ट मेरे आँखों के सामने थे…

स्नेहा दीदी : हा…सो जाउँगी।।थोड़ा ऑफिस का काम फिनिश कर लेती हूँ।

मैने अपनी आँखे उनके बूब्स से हटा ली…।और बोला ।

मै : ठीक है दीदी।।लकिन जल्दी सो जाओ…।मै बाहर का दरवाजा बंद कर देता हुँ…

स्नेहा दीदी: ठीक है…।गूड़ नाईट।

मै जैसे ही अपने कमरे में पंहुचा…माथुर अंकल का फ़ोन आया मेरे मोबाइल पे।

माथुर अंकल : और सो गए?

मै : नहीं अंकल …कोशिश कर रहा हुँ…

माथुर अंकल : और स्नेहा दीदी सो गयी…

मै : नहीं वो अभी कुछ देर में सोयेगी…

माथुर अंकल : ओके गुड नाईट…

फिर उन्होंने फ़ोन कट कर दिया…और मैं मन ही मन सोचने लगा की क्या हमारा प्लान सच होगा या हम फंस जायेंगे…

मै बेड पे लेटे लेटे ये ही सोच रहा था की अगर अंकल दीदी को चोदने में सफल हो गए तो उनका १० इंच का लंड दीदी के चुत में कैसे जायेगा… और जायेगा तो कितना मजा आएगा।

क्या अंकल दीदी को छोड पाएंगे?

क्या प्लान था उनका?

मुझे अंकल का इंतजार था…हमारे प्लान के मुताबिक वो रात के १२ बजे हमारे फ्लैट में आते…मैंने दीदी से तो ये बोल दिया की मैं दरवाजा बंद कर दूंगा लेकिन मैंने दरवाजा खुला रखा था… जिससे माथुर अंकल मेरे घर में आसानी से घुस जाते… मैंने घडी देखि और जैसे ही घरी में ११;४५ हुए मैं एक बार अपने रूम से निकल कर चेक कर लिया की स्नेहा दीदी सो गई है…।उनके रूम का लाइट बंद था और वो सो रही थी।

मैने अपने कमरे में जाके माथुर अंकल को फ़ोन कर दिया की स्नेहा दीदी सो चुकी है और मैंने दरवाजा खुला रखा है…अब वो आ सकते है…

मै उनके आने का इन्तेजार करने लगा…

मै ड्राइंग रूम में बैठा था।।जैसे ही मेरे दरवाजे की कुण्डी पे हाथ रखा अंकल ने। मैं उठ गया और जाके दरवाजा खोला। वइसे दरवाजा खुला ही था।।लकिन मुझे लगा की अंकल को दिक्कत न हो।

जैसे ही अंकल ड्राइंग रूम के अंदर आये …उन्होंने अपने चेहरे को एक काला नकाब से ढक लिया और उन्होंने अपने जेब से एक नकली लेकिन बिलकुल असली जैसी पिस्तौल निकाली…

मै समझ गया की अंकल ने ये प्लान पहले से सोच के रखा था।फिर उसने मेरे सर के ऊपर पिस्तोल लगा के दीदी के कमरे की तरफ बढे।

उनहोने दीदी के कमरे का दरवाजा खोला…दीदी हमेशा अपने रूम का दरवाजा खोल कर ही रखती है।

अंधेरे में हमें दिखा की स्नेहा दीदी बेड पे लेटी हुयी थी ।।और गहरे नींद में सो रही थी…उसने इस बक्त एक लूज पेंट और टॉप पहनी थी।

उन्होने अपना गन मेरे सर के ऊपर रखा और मुझे बोले की स्नेहा दीदी को जगाये…

मै : दीदी…दीदी…
 
स्नेहा दीदी ।।मेरी आवाज सुनके उठी…और उसने अपने बेड के पास में जो स्विच था उसको ऑन किया और कमरे में उजाला हो गया…दीदी ने जैसे ही ये देखा की कोई आदमी ब्लैक कपडे और नकाब में मेरे सर के ऊपर गन लगाए हुए है।।चीखने की कोशिश की।।तभी अंकल ने उसे धमकी दी।।

माथुर अंकल: ( अपनी आवाज को थोड़ा भारी बनाते हुए) अगर तुमने शोर किया तो तुम्हारे भाई के सर में गोली मार दूँगा।

स्नेहा दीदी: नही।।नही मैं शोर नहीं मचाउंगी…तुम्हे जो चाहिए ले लो…लेकिन मेरे भाई को कुछ मत करना।

माथुर अंकल: ये हुयी न बात।।जब जैसा जैसा मैं कहता हु करती जाओ।

स्नेहा दीदी: ओके…क्या करना है…

माथुर अंकल: ओके…तुम्हे देख के मेरा लूट का मन बदल गया…

स्नेहा दीदी: तो फिर…

मै ये सब कुछ देख रहा था और खुश भी हो रहा था की अंकल की चाल कामयाब हो रही है।।

माथुर अंकल: जरा मेरे पास आओ…

स्नेहा दीदी कुछ समझ नहीं पा रही थी।।लकिन वो अंकल के पास गयी। अंकल ने एक हाथ में पकडे अपने गन को मेरे सर से सटाए रखा और जैसे ही स्नेहा दीदी उनके नजदीक आयी …उन्होंने अपने दूसरे हाथ से दीदी की चूचियों को बारी बारी से दबाने लगे।

स्नेहा दीदी ने उनका हाथ हटाया…और ग़ुस्सा दिखाने लगी।

स्नेहा दीदी: ये क्या तरीका है…

माथुर अंकल ने अपने गन का दबाब मेरे सर पे दिखाया स्नेहा दीदी को और गुस्से में बोला।

माथुर अंकल: मैं तुमसे तरीका सीखने नहीं आया हु…।चपचप मेरे पास आ ।।और जो भी मैं कर रहा हु और करने को बोल रहा हु कर …नहीं तो तेरे भाई का भेजा निकल दूँगा।

मै अपनी रोनी सुरत बना के वहां खडा था।।

क्या स्नेहा दीदी, माथुर अंकल की बात मानेंगी?
 
स्नेहा दीदी मजबूर थी…माथुर अंकल की बात मानने के लिये।।वो चपचाप अपने मम्मे को दबवा रही थी माथुर अंकल से…मुझे तो अपने ऑखों पे विश्वास ही नहीं हो रहा था की क़ैस एक ही दिन के अंदर मेरे मन में दीदी के लिए ऐसा ख्याल आया और मैंने दीदी की सेटिंग कर दी माथुर अंकल के साथ।

मुझे बुरा भी लग रहा था की इस सब का जिमेदार मैं ही था।।मेरी दीदी आज माथुर अंकल के हाथो में खेल रही थी…।

माथुर अंकल ने सही तरीके से कुछ देर तक दीदी के चूचियों को कपडे के ऊपर से दबाया…।फिर उनका मन हुआ की अब उसकी नंगी चूचियों को दबाये…

माथुर अंकल : चलो अपने टॉप को बाहर निकालो…

स्नेहा दीदी ने नहीं मानी उनकी बात और हाथ जोड कर रिक्वेस्ट करने लगी…।

स्नेहा दीदी: प्लीज…ऐसा मत करो…

स्नेहा दीदी इतनी बड़ी अफसर थी अपने कंपनी की और आज वो मजबूर थी अंकल के हर बात को मानने के लिये।

माथुर अंकल : मैंने अभी समझया था…मुझे नखरे नहीं चाहिए…आज तुम केबल मेरा सुनोगी…।कपडे उताड़ो…

स्नेहा दीदी को मजबूरन अपने टॉप को निकालना पड़ा…

ओह ।।गोड़।।उनहोने अंदर ब्रा नहीं पहनी थी।।और मेरे ऑंखों की उसको दीदी के मम्मे पूरी तरह से नंगे थे।।मैने दीदी को दिखाने के लिए अपनी नजर निचे कर ली लेकिन चोर नजरों से मैं उनकी बड़ी बड़ी चूचियों को निहार रहा था।

स्नेहा दीदी ने अपने हाथो से अपने बड़े बड़े मम्मे को छूपाने की काफी कोशिश की लेकिन अंकल ने उनका हाथ हटा दिया और उनकी दोनों बड़ी बडी नंगी चूचियों को बारी बारी से दबाने लगे अपने एक हाथ से। बीच बीच में वो स्नेहा दीदी की चूचि के निप्पल को भी दबा रहे थे ब्राउन कलर की स्नेहा दीदी की निप्पल काफी मनमोहक लग रही थी…

माथुर अंकल ने तभी मेरी तरफ देखा और उन्होंने देखा की मेरी नजर निचे झुकी हुयी है।तो उन्होंने अपने प्लान के मुताबिक ,

माथुर अंकल : और बेटे…तुम्हारा मन नहीं कर रहा है…ऐसी चूचियों को दबाने को।

स्नेहा दीदी: नहीं ऐसा कुछ …मत करना …वो मेरा छोटा भाई है…

माथुर अंकल : कोई बात नहीं…बड़ी बहिन माँ जैसी होती है न…और बेटे को दूध पिने का तो हक़ है न।।

स्नेहा दीदी: नही।।प्लीज कुछ भी ऐसा मत करो…तुम्हे जो करना है कर लो …उसे मत शामील करो।

माथुर अंकल: अबे साले…जाकर अपनी दीदी का दूध पि ले।।

उसने मुझे थोडा सा धक्का दिया…मुझे ये सारा ड्रामा पता था इसलिए मैं केबल एक्टिंग कर रहा था।मैं धीरे से दीदी की तरफ बढा और स्नेहा दीदी को बोला।

मै: सॉरी दीदी…क्या करु।

स्नेहा दीदी भी समझ गयी थी की ये आदमी खतरनाक है साइको टाइप का । मना करने से काम नहीं चलेगा।

स्नेहा दीदी: कोई बात नहीं भाई…मान लो इसकी बात।

मै अंदर से काफी खुश था ये बात सुनकर और आगे बढा और अपना हाथ धीरे से दीदी की चूचियों पे रखा , स्नेहा दीदी ने अपनी आंखे बंद कर ली थी।

माथुर अंकल: अबे सहला क्या रहा है।।मुह में ले उसे …और चूस जैसे बच्चे चुसते है…उसकी निप्पल को चुस।।

मैने माथुर अंकल की बात सुनी और अपना मुह दीदी के चूचियों से लगा दिया।।मुझे तो ऐसे लग रहा था जैसे मैं आसमान में उड रहा हूँ।।आज तक मैंने स्नेहा दीदी की चूचियां केबल कपडे में या कम से कम ब्रा में देखि थी…लेकिन आज वो चूचियां मेरी ऑंखों के सामने नंगी थी और मैंने अपना मुह लगाया था उसपे।

मेरा मुह जैसे ही दीदी की चूचियों से लगा …मेरा लंड पूरी तरह से खडा हो गया…दीदी भी जोश की बजह से सिसक रही थी।।ये सिसकियाँ दुःख की बजह से नहीं था ।।उसे धीरे धीरे अच्छा लग रहा था।।

इधर अंकल ने अपना मोबाइल निकाला और कैमरा ऑन करके रिकॉर्ड करने लगे…इस बीच उन्होंने कमरे में लाइट ऑन कर दिया था…

मै ये सब कुछ नहीं देख रहा था , मैं तो बस स्नेहा दीदी के बड़े बड़े दोनों मम्मो को अपने दोनों हाथो में पकडे उसे पूरे मन से चूस रहा था और बीच-२ में दीदी के ब्राउन निप्पल को अपनी जीभ से छेड देता था।जिसे दीदी आहः।।आहह करने लगती थी।।वो अब मज़े ले रही थी…क्योकि उसने अपना आँख खोल लिया था और बीच-२ में मेरे सर को पकड़ कर अपने चूचि पे दबा देती थी…हो भी क्यों नहीं इतनी उम्र हो जाने के बाद भी उनकी शादी नहीं हुयी थी और कोई बॉयफ्रेंड भी नहीं था दीदी का। इसलिए अभी तक प्यासी थी वो…आज जब उनके अंगों को कोई इस तरह से छुआ था, वो अपने आपको रोक नहीं पाई थी।

माथुर अंकल अपने मोबाइल से वीडियो रिकॉर्ड कर रहे थे और मैं स्नेहा दीदी के दोनों चूचियों को बारी बारी से चूस रहा था और अपने हाथो से दबा भी रहा था…

दीदी आंखे बंद किये हुए थी और अपनी चूचियां चुस्बा रही थी ।।अभी उसे ये भी होश नहीं रहा था की वो अपने भाई से चुस्बा रही है…वजह जो भी हो मुझे भी पूरा मजा आ रहा था और स्नेहा दीदी को भी मजा आ रहा था।

तभी माथुर अंकल की आबाज मेरे कानों में पडी।।

माथुर अंकल : चलो अब कुछ नया करते है…

मै : अब और क्या?
 
मै अन्जान बनते हुए उनसे ये पुछ बैठा…

माथुर अंकल : साले ।।जैसा बोल रहा हु बस वैसा कर …कोई चपड़ चपड नहीं…

मै अंदर ही अंदर उनकी बात पे सोच रहा था की बहुत ही अच्छी एक्टिंग कर लेते है माथुर अंकल।।

माथुर अंकल: (दीदी की तरफ इशारा करके) तुम अब अपने भाई का लंड चुसो…

स्नेहा दीदी: ये मुझसे नहीं होगा…

उनका इतना बोलना था की माथुर अंकल उसके पास आये और उनकी नंगी चूचि को जोर से दबाते हुए बोले…

माथुर अंकल: जो बोला है।।वो चुपचाप करो…नहीं तो बुरी गत बना देंगे…

स्नेहा दीदी चीख़ उठि दर्द से…।उसने सर हिला के हामी भर दी… अब दीदी घुटनो के बल मेरे सामने बैठी और उसने मेरे पेंट का जीप खोला और अपना हाथ अंदर डाल के मेरे लंड को बाहर निकाला।।स्नेहा दीदी की चूचि चुसते हुए मेरा लंड पूरा तन के खडा हो चुक्का था…

मेरा लंड माथुर अंकल की तरह १० इंच का नहीं था लेकिन ८ इंच का जरूर था।।

स्नेहा दीदी थोड़े असमंजस की हालत में मेरे लंड को अपने हाथो से पकड़ा और मेरे लंड के चमडे को ऊपर निचे करने लगी।

माथुर अंकल ने कमरे से रिकॉर्ड करते हुए दीदी को इशारा किया की मेरे लंड को मुह में ले।।स्नेहा दीदी मजबूर थी और उसने आगे और कुछ नहीं सोचा बस उसने मेरे लंड का सुपाडा अपने गरम मुह में लिया और मैंने भी दीदी को लंड अंदर लेते देख जोश में आ गया और अपने लंड को आगे सरका दिया …मेरा मोटा और लम्बा लंड स्नेहा दीदी के मुह के अंदर चला गया…।

स्नेहा दीदी भी अपने मुह को मेरे लंड के ऊपर आगे पीछे करने लगी…वो बहुत ही तरीके से मेरे लंड चूस रही थी…।

माथुर अंकल : तुम्हे लंड चुसते देख के लगता है…की आदत है तुम्हे लंड चुस्ने की…

स्नेहा दीदी उनका बात सुनके कोई जबाब नहीं दी…अंकल ने फिर जोर से पुछा…बता सच क्या है…और स्नेहा दीदी ने मेरे सामने एक शाकिंग बात बतायी की जब वो जूनियर थी तब उसने अपने बॉस का लंड चुसी है कई बार…

माथुर अंकल : तब तो चूदी भी जरूर होगी…

स्नेहा दीदी: नहीं…उसने काफी जोर दिया था…लेकिन मैं नहीं मानी…

माथुर अंकल: चलो आज हम तुम्हारा रास्ता खोल देते है…

और मोहित अंकल गब्बर सिंह की तरह से हॅसने लगे…

स्नेहा दीदी रुकि नहीं और मेरे लंड को बडी बारीकी से चुस्ती रही…।मथुर अंकल को ये देख के रहा नहीं गया और वो भी स्नेहा दीदी के पास आ गए और उसने इशारा किया की उनका लंड भी चुसे…।

अब स्नेहा दीदी थोड़ी ओपन हो गयी थी और बिना किसी दिक्कत के स्नेहा दीदी ने अंकल का चैन खोला और उनका १० इंच लम्बा लंड बाहर निकाला…पहली बार उनके लंड को देखके तो उनकी आँखे चौड़ी हो गयी …लेकिन अगले ही पल उसने अंकल का मोटा लंड अपने मुह के अंदर कर लिया और उसके साथ मस्ती में चूसाई करने लगी…।

स्नेहा दीदी को लंड चुसते देख लग ही नहीं रहा था की वो किसी अजनबी का लंड चूस रही है…ऐसा लग रहा था की वो बरसो की भूखी है लण्ड के लिए और उसे बस पूरा का पूरा निगल जाना चाहती है…
 
माथुर अंकल ने स्नेहा दीदी का सर पकड़ लिया और अपना लंड उसके मुह के अंदर बाहर करने लगे…।कुछ देर तक माथुर अंकल ने स्नेहा दीदी के मुह की चुदाई अच्छे से की और फिर अपने प्लान के मुताबिक उसने दीदी को खडे होने के लिए बोला और स्नेहा दीदी से बोले की अपनी पेंट निकालो।

स्नेहा दीदी : और क्या करबाओगे।।प्लीज देखो मेरा भाई है यहाँ पे।

माथुर अंकल : उसके रहते तो और मजा आएगा…तुम्हे भी बहुत मजा आएगा…बेकार में तुम अपना बदन सुखा रही हो।।घर में जबान लौंडा है।।तुमहे तो इस से रोज़ चुदना चाहिये।

स्नेहा दीदी: की…शर्म आनी चाहिए तुम्हे।

माथुर अंकल : शर्म…अभी जब तुम इसका लंड चूस रही थी तब मजा नहीं आ रहा था तुम्हे…सच बोलो।

स्नेहा दीदी ने अपना सर झुका लिया…और अपनी पेंट निचे करने लगी।।उसे पता चल गया थी की बिना कपडे उतारे ये टलने वाला नहीं है।

स्नेहा दीदी मेरे और माथुर अंकल के सामने केबल अपने ब्लैक पेंटी में थी…माथुर अंकल अपने मोबाइल से रिकॉर्ड कर रहे थे। उसने स्नेहा दीदी को पास आने के लिए बोले और जैसे ही दीदी उसके बगल में आयी…उसने स्नेहा दीदी को इशारा किया की झुक जाये आगे की तरफ।

फिर माथुर अंकल ने स्नेहा दीदी की चुतड पे अपना हाथ फेरा…जैसे ही स्नेहा दीदी आगे को झुकि उसकी बड़ी सी गांड अंकल की तरफ निकल आयी थी और बहुत ही मनमोहक लग रही थी उसकी गांड़।

माथुर अंकल ने पहले तो स्नेहा दीदी की चूतड़ को सहलाया ।।फिर उसने दीदी के ब्लैक पेंटी को धीरे से उसके पैरों से निकाल दिया।

स्नेहा दीदी मुझे कपडे में हॉट लगती थी क्योंकि उनकी चूचियां और चूतड़ काफी बड़ी थी ।।लकिन अभी जब वो मेरे सामने नंगी थी।।तो स्नेहा दीदी के मांसल जांघो को देखकर मेरा मन खुसी से झूम उठा था…।

दीदी की जांघे बहुत ही मोटी मोटी थी और गोरे रंग की होने की वजह से क़यामत ढा रही थी।

माथुर अंकल ने अपने उँगली से स्नेहा दीदी के चुत को छेडने लगे और दीदी इस बजह से सिसकारियां मारने लगी थी…माथुर अंकल ने अपनी एक उँगली स्नेहा दीदी की चुत ने घुसा दिया…।दीदी की चुत पहले ही गिली हो गयी थी और उनकी उँगली एक झटके में ही अंदर चलि गयी…

माथुर अंकल अपने एक हाथ से सब कुछ रिकॉर्ड कर रहे थे और अपने दूसरे हाथ से दीदी की चुत के साथ खेल रहे थे।

जब स्नेहा दीदी की चुत से रस टपकने लगा ।।तब माथुर अंकल ने उसका रस अपने उँगली में लगा के स्नेहा दीदी के गांड के छेद पे लगाने लगे…।वो शायद स्नेहा दीदी की गांड को भी नहीं छोड़ना चाहते थे…

उसने बताया भी था की स्नेहा दीदी की सबसे अछि चीज़ उन्हें उसकी गांड ही लगती है।।माथुर अंकल ने चुत के रस से सने अपनी उँगली स्नेहा दीदी की गांड के छेद पे रखे और धीरे से उसने उसे अंदर ढकेल दिया।।स्नेहा दीदी चीख पड़ी…दर्द से…अहह…ओह…।।

स्नेहा दीदी: बहुत दर्द हो रहा है।।प्लीज निकाल लो इसे।

माथुर अंकल : डार्लिंग…यही बात तो है…पहले दर्द होता है…फिर मजा आता है…तुम बस देखते जाओ…

स्नेहा दीदी: प्लीज…चुत में डालो…गांड़ में नहीं ।

दर्द होता है वहां…

माथुर अंकल ने उसकी बात नहीं सुनि…और उन्होंने अपनी उँगली स्नेहा दीदी की गांड के अंदर बाहर करने लगे।

स्नेहा दीदी दर्द से तडप रही थी और माथुर अंकल स्नेहा दीदी की गांड की छेद को ढीला करने में लगे थे…पहले उन्होंने एक उँगली उसमे घुसाई फिर उसने अपनी दो उँगली स्नेहा दीदी की गांड में घुसा दिए …स्नेहा दीदी जोर से चीख़ उठी।

स्नेहा दीदी: प्लीज रहम करो…।

माथुर अंकल: चलो तुम्हारा दर्द कम करता हूँ…

माथुर अंकल ने मुझे इशारा किया और मैं दीदी की आगे जाके खडा हो गया और माथुर अंकल ने इशारा किया की अपना लंड उसके मुह में डाल दो।।

माथुर अंकल : चल।।रानी।।अपने भाई का लंड मुह में लेके चुसो।।दरद कम हो जाएगा।

स्नेहा दीदी के पास और कोई रास्ता नहीं था।उसने मेरा लंड अपने मुह में ले लिया और उसको चुस्ने लगी।।

माथुर अंकल: धक्के लगा उसके मुह मे।

माथुर अंकल की बात सुनते ही मैंने स्नेहा दीदी के मुह में धक्के लगाने लगा और उधर माथुर अंकल स्नेहा दीदी के गांड की छेद को बड़ा करने में लगे थे…वो अपनी दोनों उँगली को स्नेहा दीदी के गांड के अंदर बाहर कर रहे थे और बीच बीच में अपने हाथ का चांटा भी स्नेहा दीदी के चुतड पे मार देते थे।
 
जब से स्नेहा दीदी लंड चुस्ने में मगन थी वो शांत थी।।इस बात का माथुर अंकल ने फायदा उठाना चाहा।।और वो अपनी उँगली बाहर निकाल के दीदी के डेसिंग टेबल पे पड़े हुए तेल की शीशी उठा लाए और पूरी बोतल का तेल दीदी की फ़ैली हुयी चुतड पे गिरा दिए और अपने हाथो से स्नेहा दीदी की चुतड की मालिश करने लगे जब उनहोने पूरा तेल उसकी चुतर पे चुपड दिए तब उसने अपनी उँगली में लगे तेल की वजह से स्नेहा दीदी की गांड में पहले एक उगली शाट से घुसा दिए फिर दूसरी और फाइनली तीन उँगली स्नेहा दीदी की गांड में घुसा दिया उन्होंने…दीदी मेरा लंड चुस्ने में लगी थी लेकिन उन्हें दर्द तो बहुत हुआ लेकिन तेल लगा होने की वजह से अंकल की उँगली आसानी से स्नेहा दीदी की गांड में घुस गई और अब अंकल अपने तीनो उँगलियों को गोल बनाके अन्दर बाहर करने लगे जैसे की कोई लंड अंदर बाहर हो रहा हो…

जब अंकल ने अपनी तीनो उँगली बाहर निकाली तो स्नेहा दीदी की गांड की छेद एक बड़े होल की तरह लग रही थी वह फ़ैल गयी थी…अंकल ने उसके चुतर से तेल अपने हाथ में लगा के अपने लंड पे लगाया और अपने सुपारे को स्नेहा दीदी के गांड के उसकी गोल छेद पे टीका दिए।।

मुझे बिस्वास ही नहीं हो रहा था की कैसे अंकल का इतना बड़ा लंड स्नेहा दीदी के गांड के अंदर चला जायेगा ।।लकिन माथुर अंकल तो उस्ताद आदमी थे…स्नेहा दीदी घोड़ी बनी हुयी थी और अंकल ने मुझे इशारा किया की मैं स्नेहा दीदी को आगे से थाम लु और पीछे से माथुर अंकल ने स्नेहा दीदी के गांड के छेद में अपना लंड का सुपाडा टीका के दीदी की कमर को पकड़ा और एक तेज धक्का दे दिया…गांड के अंदर रास्ता पहले से ही बना था और उसपे तेल की चिकनाइ थी।।अंकल का लंड भी तेल से सना था…अंकल के इस जोरदार धक्के से उनका लंड स्नेहा दीदी की गांड को चीरता हुआ अंदर तक चला गया।
 

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