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यह सब कुछ करने में विकास और मोन्टो को पूरा एक घंटा लग गया-----इस बीच हर व्यक्ति चाहकर भी कुछ नहीं कर सका था------------क्योंकि विकास का रिवॉल्वर प्रत्येक पल जूलिया की कनपटी से सटा रहा था !
विकास को सभी ने समझाने की कोशिश की ।
मगर वह तो जिद्दी था न ?
पक्का जिद्दी!
किसी की एक न सुनी उसने ।।।
हाथों-मैं रिवॉल्वर लिए इस वक्त विकास और मोन्टो सारे हाल-मे घूमते फिर रहे थे--विकास का अंदाज ऐसा था, जेसे हरेक के बंधन चैक कर रहा हो----आश्वस्त होने परे उसने पुकारा----" मोन्टो?"
नन्हे मोन्टो ने उसे एकदम सैल्यूट सा दिया ।
"तुम उस रोशनदान पर बैठ जाओ---------------रिवॉल्यर हर क्षण तुम्हारे हाथ मेँ रहेगा-------यदि इनमे से जब भी कोई किसी किस्म की चालाकी दिखाने की केशिश करे तो तुम बेहिचक जैकी और जूलिया को गोली मार दोगे ।"
स्वीकृति में गर्दन हिलाने के बाद मोन्टो उछला और रोशनदान पर जा जमा…जिस वक्त वहां बैठा मोन्टो जेब से एक सिगार निकालकर सुलगा रहा था, उस वक्त विकास ठाकुर साहब के नजदीक पहुंचकर बोला------"'सिर्फ आप इस हाॅल बल्कि इस कोठी से बाहर जाएंगे नानाजी!"
"क्या मतलब?"
"मैं आपको खोल रहा हूं----आप इस कोठी से बाहर.....जाएगे-----रेडियों पर यहां की स्थिति का हवाला देकर तुरंत ही एक स्पेशल बुलेटिन के जरिए यह ऐलान कराएंगे कि कल सुबह दस बजे तक हैरी खुद यहां पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दे वरना साढे दस बजे उसके मां-बाप लाश में बदल चुके होंगे।"
"ओह! " ठाकुर साहब के मुंह से निकला।
उन्हे घूरते हुए विकास ने कहा…"एक बार यहां से निकलने के बाद आप खुद भी लौटकर यहां नहीं आएंगे---"हैरी के अलावा कोठी की चारदीवारी में कोई नहीं घुसेगा ग्रांडफादर'------- यदि ऐसा हुआ तो सिर्फ जैकी और जूलिया को ही नहीं, बल्कि खुद सहित मैं इस हाल में मौजूद. एक-एक व्यक्ति को गोली मार दूंगा------आप हैरी को गिरफ्तार नहीं करेगे-उसे यहाँ आने देंगे-------क्योकि यदि वह कल सुबह दस-बजे तक यहां नही आया तो !!
"हम समझ गए बेटे!"
अन्य बहुत-सी चेतावनी देते हुए उसने ठाकुर साहब के बंधन खोल दिये --रिवॉल्वर से खुद ही कवर करके उन्हें कोठी की बाउन्ड्री से बाहर छोड़ कर आया ।
अचानक रेडियो पर प्रसारित हो रहा एक मधुर गीत बीच में ही रुक गया…फिर एक गम्भीर आवाज गूंजी-----" अब आप एक विशेष सूचना सुनिए ।"
एक मिनट के लिए खामोशी ।
इस बीच श्रोताओं के दिल थड़क उठे------------ ऐसी क्या सूचना है, जिसके लिए गीत को बीच में रोक दिया गया, फिर वह आवाज ठाकुर साहब की थी, जो रेडियों पर गूंजी-------------'"हालांकि हम नहीं मानते कि अमेरिकी जासूस मिस्टर हैरी आर्मरट्रांग अभी तक राजनगर से भी बाहर निकल चुका होगा--------फिर भी हम दावे के साथ वह सकते है कि.वह कम-से-कम हिन्दुस्तान की सरहदों को पार नहीं कर पाया है----यह सूचना रेडियो स्टेशन से प्रसारित की जा रही है-----सूचना सिर्फ हैरी के लिए है-----यह कि उसके माता-पिता को विकास ने कैद कर लिया है-यदि हैरी इस सूचना को रहा है-------तो वह हिन्दुस्तानी सरहदों से बाहर निकलने की कोशिश न करे----कल सुबह दस बजे तक सुपर रघुनाथ की कोठी पर पहुच जाए-विकास का कहना है कि यदि वह निर्धारित समय तक वहां नहीं पहुंचता तो विकास उसके माता-पिता की हत्या कर देगा ।"
बस…यही सूचना एक वार फिर दोहराई गई ।
गीत शुरू ।
कमरे चल रहे रेडियों का स्विच आँफ़ करके जब सात फुट लम्बा लडका घूमा तो उसकी नीली आंखों में जैसे खून उतर आया था-------चेहरा सख्त----जबंड़े कस गए-दाएं हाथ मुट्ठी भीचकर वह बहुत जोर से बाएं हाथ की हथेली पर मारता हुआ बोला…“मुझे इसी बात का डर था !"
" अब क्या होगा?" सोफे से उठकर खडा होता हुअ एक युवक कह उठा ।
"होगा क्या ब्रेकर…मुझे बहा जाना पडेगा ।"
"म...मगर'-अभी आप हिन्दुस्तान की सरहदों से बाहर निकलने की बात कर रहे थे?"
"सब कुछ तबाह होने के बाद मैं सीधा यहां आ गया….....इसीलिए क्योंकि अभी तक किसी को तुम्हारे अमेरिकी ऐजेण्ट होने की जानकारी नहीं है---------चाहता तो मैं अभी तक दस बार राजनगर की सीमा से निकल सकता था, लेकिन नही निकला---- तुम्हारे पास समय गुजारता रहा---सिर्फ बिकास के होश मे आने के बाद की प्रतिक्रिया जानने के लिए और वही हुआ…मैँ जानता हूं कि यदि मैं निर्धाद्वित समय तक वहां नहीं पहुंचा तो विकास सचमुच मम्मी डैडी को मार डालेगा ।"
ब्रेकर कह उठा----"ल......लेकिन-यदि आप वहां गए तो ?"
"मेरी जान को खतरा है-यही न?"
"जी हां ।"
"यह खतरा तो अब उठाना-ही होगा ब्रेकर !"
"क्या मैं आपकी कुछ मदद कर सकता हूं सर !"
एक पल सोचने के'बाद हैरी ने कहा--------------"नहीं-अब मुझें वहां अकेले ही जाना होगा अफसोस है ब्रेकर कि मैं अपने लक्ष्य में कामयाब न हो सका----विजय अंकल अन्तिम क्षणों में वहां पहुंच गए----मेरी कोशिश यह थी कि मैं सब कुछ कर भी जाऊं और कोई यह भी न जान सके कि हैरी यहाँ आया था------मगर सब चौपट हो गया----उल्टे मम्मी-डैडी ही उनके-चंगुल में फंस गए, लेकिन. . . ।"
"लेकिन क्या सर?"
"‘मम्मी-डैडी को तो उसके चंगुल से निकालने मुझे जाना ही होगा-----साथ ही अपना मकसद पूरा करना भी मेरे लिए उतना महत्वपूर्ण है------सुनो ब्रेकर-क्या तुम एक काम कर सकते हो ?"
"आप हुक्म तो कीजिए सर !"
“मुझें एक ऐसा बम चाहिए, जिसके फटने से कम-से-कप बीस गज के हिस्से में मोजूद हर वस्तु तबाह हो जाए ।"
"मिल जाएगा सर !'
सारा राजनगर मानो सिर्फ और सिर्फ सुपर रघुनाथ की कोठी के चारों तरफ़ ही एकत्रित होगया------दूर दूर तक हुजूम और आपाधापी-सी मची हुई थी--- मेला सा लग गया था वहां ।
हालाकि ठाकुर साहब ने रेडियो-पर सुचना प्रसारित करंने से पहले ही अपने नेतृत्व में ढेर सारी फोर्स के साथ कोठी को चारों तरफ से घेर लिया था…मगर उमड़ती भीड को काबू मे
रखने के लिए, अतिरिक्त फोर्स भी लगानी पडी थी-ठाकुर साहब ने न तो एक बार भी स्वयं ही कोठी की चारदीवारी के अन्दर प्रविष्ट होने की कोशिश की न ही किसी को इसकी इजाजत दी ।
रात के ग्यारह बज रहे थे ।
कोठी की सभी लाइटे आंन हो चुकी थी !
हॉल में भरपूर प्रकाश था-----मोन्टो अपने स्थान पर तैनात…अन्य सभी अपने-अपने स्थानों पऱ बंधे थे----विकास तभी से निरन्तर सारे हाल में चहलकदमी कर रहा था----एक मिनट के लिए भी वह कहीं नहीं बैठा था----, बीच-बीच मे ठिठककर वह सभी के बन्धन अवश्य चैक कर लेता था ।
विकास को समझाने'की कोशिश करके सभी हार गए थे ॥॥॥
हवा में लटके जैकी और जूलिया को अब काफी कष्ट होने लगा था ॥॥॥
सवा ग्यारह बजे-आकाश मे हल्की-सी गड़गड़ाहट की आवाज सुनाई दी…सभी के कान खडे हो गए…गड़गड़ाहट की आवाज प्रतिपल नजदीक आती जा रही थी-----एकाएक गम्भीर स्वर में विकास ने कहा…“वह शायद हेलीकाप्टर से आ रहा है मोन्टो-----------छत पर जाओ--वह वहां लैंड करेगा तुम्हारा काम सिर्फ उसे कवर करके इस हाल तक पहुचा देना है !"
'मोन्टो ने फर्श पर जम्प लगा दी।
विकास को सभी ने समझाने की कोशिश की ।
मगर वह तो जिद्दी था न ?
पक्का जिद्दी!
किसी की एक न सुनी उसने ।।।
हाथों-मैं रिवॉल्वर लिए इस वक्त विकास और मोन्टो सारे हाल-मे घूमते फिर रहे थे--विकास का अंदाज ऐसा था, जेसे हरेक के बंधन चैक कर रहा हो----आश्वस्त होने परे उसने पुकारा----" मोन्टो?"
नन्हे मोन्टो ने उसे एकदम सैल्यूट सा दिया ।
"तुम उस रोशनदान पर बैठ जाओ---------------रिवॉल्यर हर क्षण तुम्हारे हाथ मेँ रहेगा-------यदि इनमे से जब भी कोई किसी किस्म की चालाकी दिखाने की केशिश करे तो तुम बेहिचक जैकी और जूलिया को गोली मार दोगे ।"
स्वीकृति में गर्दन हिलाने के बाद मोन्टो उछला और रोशनदान पर जा जमा…जिस वक्त वहां बैठा मोन्टो जेब से एक सिगार निकालकर सुलगा रहा था, उस वक्त विकास ठाकुर साहब के नजदीक पहुंचकर बोला------"'सिर्फ आप इस हाॅल बल्कि इस कोठी से बाहर जाएंगे नानाजी!"
"क्या मतलब?"
"मैं आपको खोल रहा हूं----आप इस कोठी से बाहर.....जाएगे-----रेडियों पर यहां की स्थिति का हवाला देकर तुरंत ही एक स्पेशल बुलेटिन के जरिए यह ऐलान कराएंगे कि कल सुबह दस बजे तक हैरी खुद यहां पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दे वरना साढे दस बजे उसके मां-बाप लाश में बदल चुके होंगे।"
"ओह! " ठाकुर साहब के मुंह से निकला।
उन्हे घूरते हुए विकास ने कहा…"एक बार यहां से निकलने के बाद आप खुद भी लौटकर यहां नहीं आएंगे---"हैरी के अलावा कोठी की चारदीवारी में कोई नहीं घुसेगा ग्रांडफादर'------- यदि ऐसा हुआ तो सिर्फ जैकी और जूलिया को ही नहीं, बल्कि खुद सहित मैं इस हाल में मौजूद. एक-एक व्यक्ति को गोली मार दूंगा------आप हैरी को गिरफ्तार नहीं करेगे-उसे यहाँ आने देंगे-------क्योकि यदि वह कल सुबह दस-बजे तक यहां नही आया तो !!
"हम समझ गए बेटे!"
अन्य बहुत-सी चेतावनी देते हुए उसने ठाकुर साहब के बंधन खोल दिये --रिवॉल्वर से खुद ही कवर करके उन्हें कोठी की बाउन्ड्री से बाहर छोड़ कर आया ।
अचानक रेडियो पर प्रसारित हो रहा एक मधुर गीत बीच में ही रुक गया…फिर एक गम्भीर आवाज गूंजी-----" अब आप एक विशेष सूचना सुनिए ।"
एक मिनट के लिए खामोशी ।
इस बीच श्रोताओं के दिल थड़क उठे------------ ऐसी क्या सूचना है, जिसके लिए गीत को बीच में रोक दिया गया, फिर वह आवाज ठाकुर साहब की थी, जो रेडियों पर गूंजी-------------'"हालांकि हम नहीं मानते कि अमेरिकी जासूस मिस्टर हैरी आर्मरट्रांग अभी तक राजनगर से भी बाहर निकल चुका होगा--------फिर भी हम दावे के साथ वह सकते है कि.वह कम-से-कम हिन्दुस्तान की सरहदों को पार नहीं कर पाया है----यह सूचना रेडियो स्टेशन से प्रसारित की जा रही है-----सूचना सिर्फ हैरी के लिए है-----यह कि उसके माता-पिता को विकास ने कैद कर लिया है-यदि हैरी इस सूचना को रहा है-------तो वह हिन्दुस्तानी सरहदों से बाहर निकलने की कोशिश न करे----कल सुबह दस बजे तक सुपर रघुनाथ की कोठी पर पहुच जाए-विकास का कहना है कि यदि वह निर्धारित समय तक वहां नहीं पहुंचता तो विकास उसके माता-पिता की हत्या कर देगा ।"
बस…यही सूचना एक वार फिर दोहराई गई ।
गीत शुरू ।
कमरे चल रहे रेडियों का स्विच आँफ़ करके जब सात फुट लम्बा लडका घूमा तो उसकी नीली आंखों में जैसे खून उतर आया था-------चेहरा सख्त----जबंड़े कस गए-दाएं हाथ मुट्ठी भीचकर वह बहुत जोर से बाएं हाथ की हथेली पर मारता हुआ बोला…“मुझे इसी बात का डर था !"
" अब क्या होगा?" सोफे से उठकर खडा होता हुअ एक युवक कह उठा ।
"होगा क्या ब्रेकर…मुझे बहा जाना पडेगा ।"
"म...मगर'-अभी आप हिन्दुस्तान की सरहदों से बाहर निकलने की बात कर रहे थे?"
"सब कुछ तबाह होने के बाद मैं सीधा यहां आ गया….....इसीलिए क्योंकि अभी तक किसी को तुम्हारे अमेरिकी ऐजेण्ट होने की जानकारी नहीं है---------चाहता तो मैं अभी तक दस बार राजनगर की सीमा से निकल सकता था, लेकिन नही निकला---- तुम्हारे पास समय गुजारता रहा---सिर्फ बिकास के होश मे आने के बाद की प्रतिक्रिया जानने के लिए और वही हुआ…मैँ जानता हूं कि यदि मैं निर्धाद्वित समय तक वहां नहीं पहुंचा तो विकास सचमुच मम्मी डैडी को मार डालेगा ।"
ब्रेकर कह उठा----"ल......लेकिन-यदि आप वहां गए तो ?"
"मेरी जान को खतरा है-यही न?"
"जी हां ।"
"यह खतरा तो अब उठाना-ही होगा ब्रेकर !"
"क्या मैं आपकी कुछ मदद कर सकता हूं सर !"
एक पल सोचने के'बाद हैरी ने कहा--------------"नहीं-अब मुझें वहां अकेले ही जाना होगा अफसोस है ब्रेकर कि मैं अपने लक्ष्य में कामयाब न हो सका----विजय अंकल अन्तिम क्षणों में वहां पहुंच गए----मेरी कोशिश यह थी कि मैं सब कुछ कर भी जाऊं और कोई यह भी न जान सके कि हैरी यहाँ आया था------मगर सब चौपट हो गया----उल्टे मम्मी-डैडी ही उनके-चंगुल में फंस गए, लेकिन. . . ।"
"लेकिन क्या सर?"
"‘मम्मी-डैडी को तो उसके चंगुल से निकालने मुझे जाना ही होगा-----साथ ही अपना मकसद पूरा करना भी मेरे लिए उतना महत्वपूर्ण है------सुनो ब्रेकर-क्या तुम एक काम कर सकते हो ?"
"आप हुक्म तो कीजिए सर !"
“मुझें एक ऐसा बम चाहिए, जिसके फटने से कम-से-कप बीस गज के हिस्से में मोजूद हर वस्तु तबाह हो जाए ।"
"मिल जाएगा सर !'
सारा राजनगर मानो सिर्फ और सिर्फ सुपर रघुनाथ की कोठी के चारों तरफ़ ही एकत्रित होगया------दूर दूर तक हुजूम और आपाधापी-सी मची हुई थी--- मेला सा लग गया था वहां ।
हालाकि ठाकुर साहब ने रेडियो-पर सुचना प्रसारित करंने से पहले ही अपने नेतृत्व में ढेर सारी फोर्स के साथ कोठी को चारों तरफ से घेर लिया था…मगर उमड़ती भीड को काबू मे
रखने के लिए, अतिरिक्त फोर्स भी लगानी पडी थी-ठाकुर साहब ने न तो एक बार भी स्वयं ही कोठी की चारदीवारी के अन्दर प्रविष्ट होने की कोशिश की न ही किसी को इसकी इजाजत दी ।
रात के ग्यारह बज रहे थे ।
कोठी की सभी लाइटे आंन हो चुकी थी !
हॉल में भरपूर प्रकाश था-----मोन्टो अपने स्थान पर तैनात…अन्य सभी अपने-अपने स्थानों पऱ बंधे थे----विकास तभी से निरन्तर सारे हाल में चहलकदमी कर रहा था----एक मिनट के लिए भी वह कहीं नहीं बैठा था----, बीच-बीच मे ठिठककर वह सभी के बन्धन अवश्य चैक कर लेता था ।
विकास को समझाने'की कोशिश करके सभी हार गए थे ॥॥॥
हवा में लटके जैकी और जूलिया को अब काफी कष्ट होने लगा था ॥॥॥
सवा ग्यारह बजे-आकाश मे हल्की-सी गड़गड़ाहट की आवाज सुनाई दी…सभी के कान खडे हो गए…गड़गड़ाहट की आवाज प्रतिपल नजदीक आती जा रही थी-----एकाएक गम्भीर स्वर में विकास ने कहा…“वह शायद हेलीकाप्टर से आ रहा है मोन्टो-----------छत पर जाओ--वह वहां लैंड करेगा तुम्हारा काम सिर्फ उसे कवर करके इस हाल तक पहुचा देना है !"
'मोन्टो ने फर्श पर जम्प लगा दी।