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चम्पारानी जीजाजी से सटी हुई थी। उनके मर्दाना जिम से निकल रही गंध उसे उत्तेजित कर रहा था। जीजाजी ने उसके सिर पे हाथ फेरा, चूचियां दबाते हुए उसे चूमने लगे। चम्पारानी भी अपनी जीभ को उसके मुँह में घुसेड़ दी। जीजाजी के हाथ अब पीठ पे होता हुआ उसके चूतड़ को सहलाने लगे। चम्पारानी ने जीजाजी की बलों से भरी हुई छाती के ऊपर एक चुम्मी दे दी। दोनों एक-दूसरे से लिपट गये। उसकी दोनों चूचियां जीजाजी की छाती से चिपक गई। उसने महसूस किया की जीजाजी के हाथ उसकी जांघों को सहलाते हुए जांघों के जोड़ों की तरफ बढ़ रहे हैं। धीरे-धीरे उनके हाथ चूत की दोनों फांकों को फैलने लगे और चूत के दानों के ऊपर उंगलियां चलाने लगे। जीजाजी के ऐसा करने से चम्पारानी उत्तेजित होने लगी। वो उनके ऊपर चढ़ गई, और उनके लण्ड को सहलाने लगी। उनका लण्ड एकदम सख्त हो चुका था।
चम्पारानी- हाय भैया, आपका तो मस्त और बड़ा हो गया है। आज तो मेरी फुद्दी की खैर नहीं। आज आप मेरी फुद्दी को फाड़ के ही मानोगे। मेरी तो अभी से फुद्दी गीली हो चुकी है।
चम्पारानी ने झुक करके पहले तो एक चुम्मा दिया और फिर गप्प से अपने मुँह में ले लिया।
जीजाजी के मुँह से एक आहह... सी निकल गई। चम्पारानी ने थोड़ी देर लण्ड को चूसकरके गीला कर दिया। उसने जीजाजी को । आँखों ही आँखों में इशारा किया और पलंग पर लेट गई। जीजाजी ने उसे चूमना शुरू कर दिया। वो सिसकारी मारने लगी। जीजाजी उसकी चूचियां दबाते हुए एक चूची को चूस रहे थे। चम्पारानी उनके सिर को हाथों से पकड़कर नीचे की तरफ धकेल रही थी।
जीजाजी नीचे की तरफ बढ़ने लगे। चम्पारानी के पेट को चूमने लगे। चम्पारानी ने उनके सिर को जब और नीचे धकेला तो उनका मुँह नाभी के पास आ गया। वो नाभि में ही जीभ घुसेड़ने लगे। अब तो चम्पारानी तड़पने लगी। वो उनके सिर को और नीचे धकेलने लगी। अब जीजाजी के चेहरे के आगे चम्पारानी की चूत थी। अब जीजाजी उसे चाटने लगे। चम्पारानी तड़पने लगी। फिर जीजाजी उठे और चूत के ऊपर लण्ड को घिसने लगे। चम्पारानी की चूत पानी छोड़ने लगी।
जीजाजी ने चम्पारानी की चूत की दोनों फांकों को अलग किया और एक अंगूठा अंदर घुसेड़कर अंदर-बाहर करने लगे। ऐसे ही जब दो मिनट तक उन्होंने किया तो नीचे से चम्पारानी अपना चूतड़ उछालने लगी। अब जीजाजी ने अपने लण्ड का सुपाड़ा चूत के अंदर घुसाने लगे। चम्पारानी दर्द से आह्ह... भरने लगी। जीजाजी ने उसके होंठों को अपने होंठों से बंद करके एक धक्का लगाया। दर्द से चम्पारानी ने चीखना चाहा, पर उसके होंठ तो जीजाजी के होंठों से बंद थे। और तीसरे धक्के में पूरा का पूरा लण्ड घुस चुका था। जीजाजी ने अब चम्पारानी के गालों पर, होंठों पर, चूचियों को दबाते हुए चूमने लगे। अब वो चम्पारानी की चूत में अपने लण्ड को अंदर-बाहर करने लगे।
मजे में चम्पारानी अपना चूतड़ उछालने लगी। कुछ देर तक जीजाजी ने चुदाई चालू रखी। पर उन्हें लग रहा था की ज्यादा देर चम्पारानी की कसी हुई चूत को चोदना जारी नहीं रख सकते। उन्होंने एक पूरे धक्के के साथ। अपने लण्ड को चम्पारानी की चूत में अंदर तक घुसेड़ा और बाहर निकाल लिए। अब वो चम्पारानी के पेट के ऊपर बैठ के दोनों चूचियों के बीच में लण्ड सटा के चूचियों को ही चोदने लगे। और फिर कुछ समय बाद ही उनके लण्ड ने पिचकारी छोड़ना चालू कर दिया। पुछ-पुछ करके लण्ड से वीर्य की पिचकारी छोड़ने लगे। अब वो गहरी सांसें लेने लगे। और उसके बगल में ही लेट गये।
चम्पारानी- हाय भैया, आपका तो मस्त और बड़ा हो गया है। आज तो मेरी फुद्दी की खैर नहीं। आज आप मेरी फुद्दी को फाड़ के ही मानोगे। मेरी तो अभी से फुद्दी गीली हो चुकी है।
चम्पारानी ने झुक करके पहले तो एक चुम्मा दिया और फिर गप्प से अपने मुँह में ले लिया।
जीजाजी के मुँह से एक आहह... सी निकल गई। चम्पारानी ने थोड़ी देर लण्ड को चूसकरके गीला कर दिया। उसने जीजाजी को । आँखों ही आँखों में इशारा किया और पलंग पर लेट गई। जीजाजी ने उसे चूमना शुरू कर दिया। वो सिसकारी मारने लगी। जीजाजी उसकी चूचियां दबाते हुए एक चूची को चूस रहे थे। चम्पारानी उनके सिर को हाथों से पकड़कर नीचे की तरफ धकेल रही थी।
जीजाजी नीचे की तरफ बढ़ने लगे। चम्पारानी के पेट को चूमने लगे। चम्पारानी ने उनके सिर को जब और नीचे धकेला तो उनका मुँह नाभी के पास आ गया। वो नाभि में ही जीभ घुसेड़ने लगे। अब तो चम्पारानी तड़पने लगी। वो उनके सिर को और नीचे धकेलने लगी। अब जीजाजी के चेहरे के आगे चम्पारानी की चूत थी। अब जीजाजी उसे चाटने लगे। चम्पारानी तड़पने लगी। फिर जीजाजी उठे और चूत के ऊपर लण्ड को घिसने लगे। चम्पारानी की चूत पानी छोड़ने लगी।
जीजाजी ने चम्पारानी की चूत की दोनों फांकों को अलग किया और एक अंगूठा अंदर घुसेड़कर अंदर-बाहर करने लगे। ऐसे ही जब दो मिनट तक उन्होंने किया तो नीचे से चम्पारानी अपना चूतड़ उछालने लगी। अब जीजाजी ने अपने लण्ड का सुपाड़ा चूत के अंदर घुसाने लगे। चम्पारानी दर्द से आह्ह... भरने लगी। जीजाजी ने उसके होंठों को अपने होंठों से बंद करके एक धक्का लगाया। दर्द से चम्पारानी ने चीखना चाहा, पर उसके होंठ तो जीजाजी के होंठों से बंद थे। और तीसरे धक्के में पूरा का पूरा लण्ड घुस चुका था। जीजाजी ने अब चम्पारानी के गालों पर, होंठों पर, चूचियों को दबाते हुए चूमने लगे। अब वो चम्पारानी की चूत में अपने लण्ड को अंदर-बाहर करने लगे।
मजे में चम्पारानी अपना चूतड़ उछालने लगी। कुछ देर तक जीजाजी ने चुदाई चालू रखी। पर उन्हें लग रहा था की ज्यादा देर चम्पारानी की कसी हुई चूत को चोदना जारी नहीं रख सकते। उन्होंने एक पूरे धक्के के साथ। अपने लण्ड को चम्पारानी की चूत में अंदर तक घुसेड़ा और बाहर निकाल लिए। अब वो चम्पारानी के पेट के ऊपर बैठ के दोनों चूचियों के बीच में लण्ड सटा के चूचियों को ही चोदने लगे। और फिर कुछ समय बाद ही उनके लण्ड ने पिचकारी छोड़ना चालू कर दिया। पुछ-पुछ करके लण्ड से वीर्य की पिचकारी छोड़ने लगे। अब वो गहरी सांसें लेने लगे। और उसके बगल में ही लेट गये।