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झरना- “अच्छा रामू भैया... क्या आप मुझे भी अपने लण्ड से चोदना चाहोगे?”
मैं- “बिलकुन बहना...”
झरना- “चलो तो फिर शुरू हो जाओ..”
मैं- “अभी... यहीं पर?”
झरना- “क्यों क्या हुआ? अच्छा मेरे भैया यहां हैं। अरे, तुमने अभी सुना नहीं कि मैं इतने दिन अपने सगे भाई से ही चुदवा रही थी। वो कुछ भी नहीं बोलेंगे। है ना भैया?"
जीजाजी- “हाँ हाँ.. मैं कुछ भी नहीं बोलूंगा। तुम्हारी चुदाई देखकर हमें भी बहुत मजा आएगा...”
मैं- “पर मेरी दीदी?”
दीदी- “अरे, उसी दीदी से शर्मा आ रही है भैया। जिसे तुम रात भर चलती बस में चोद के आए हो। देखो ना झरना, देखो मेरी बुर अभी तक सूज रखी है...” मेरी दीदी अपने साया को ऊपर उठाती हुई बोली।
झरना- “हे भाभी... मैं मर जावां गुड़ खाके। सचमुच भाभी तुम्हारी बुर एकदम सूज गई है। भाभी बोलो ना अपने भैया को मुझे भी अपनी बुर सुजानी है...”
दीदी- “अरे पगली, मैं क्यों मना करूँगी? तू जाने तेरी बुर जाने और जाने मेरे भैया का लण्ड। मुझे तो चुदवाना है अपने सैयां से। बहुत दिनों से चूत में हो रही खुजली आज मिटानी है...”
जीजाजी- “अच्छा जी रात को खुजली नहीं मिटी..."
दीदी- “अजी वो तो इत्तेफाकन मैं चुदवा बैठी। पर असली खुजली तो आप ही मिटाओगे मेरे सैयां। वैसे भी भैया परसों चले जाएंगे और आज की बुकिंग आपकी बहन ने कर ही दी है...”
झरना मेरे पास खिसक के मेरे लण्ड को नजदीक से देखने लगी- “हे भाभी... ये तो सचमुच काफी बड़ा है। मेरी तो फट ही जाएगी...”
दीदी- “फट जाएगी तो ना चुदवा ना मेरे भाई के लण्ड से। फिर चुदवा ले अपने ही भाई के लण्ड से, मैं चुदवा लँगी मेरे भाई के लण्ड से..” ।
झरना- “वाह जी वाह... भाभी तुमने ये खूब कही। पर भाभी, तुम तो जानती ही हो कि मैं कितनी बड़ी चुदक्कड़
दीदी- “हाँ, जानती हूँ मेरी प्यारी ननद कि शादी से पहले तू अपने भैया से अपनी प्यास बुझाती थी। मुझे तो चुदा-चुदाया लण्ड ही मिला था तेरे भैया का। फिर भी झरना, कुछ तो शर्म करो। अपने ही भैया भाभी के सामने तुम कैसे चुदवा सकती हो?”
झरना- “क्यों क्यों? क्यों नहीं चुदवा सकती मैं? आप भी तो रात भर चुदवा के आई हो ना इनसे। फिर मैं क्यों नहीं चुदवा सकती? अच्छा अब समझी... आपका फिर से इन्हीं से चुदवाने का विचार है?”
मैं- “बिलकुन बहना...”
झरना- “चलो तो फिर शुरू हो जाओ..”
मैं- “अभी... यहीं पर?”
झरना- “क्यों क्या हुआ? अच्छा मेरे भैया यहां हैं। अरे, तुमने अभी सुना नहीं कि मैं इतने दिन अपने सगे भाई से ही चुदवा रही थी। वो कुछ भी नहीं बोलेंगे। है ना भैया?"
जीजाजी- “हाँ हाँ.. मैं कुछ भी नहीं बोलूंगा। तुम्हारी चुदाई देखकर हमें भी बहुत मजा आएगा...”
मैं- “पर मेरी दीदी?”
दीदी- “अरे, उसी दीदी से शर्मा आ रही है भैया। जिसे तुम रात भर चलती बस में चोद के आए हो। देखो ना झरना, देखो मेरी बुर अभी तक सूज रखी है...” मेरी दीदी अपने साया को ऊपर उठाती हुई बोली।
झरना- “हे भाभी... मैं मर जावां गुड़ खाके। सचमुच भाभी तुम्हारी बुर एकदम सूज गई है। भाभी बोलो ना अपने भैया को मुझे भी अपनी बुर सुजानी है...”
दीदी- “अरे पगली, मैं क्यों मना करूँगी? तू जाने तेरी बुर जाने और जाने मेरे भैया का लण्ड। मुझे तो चुदवाना है अपने सैयां से। बहुत दिनों से चूत में हो रही खुजली आज मिटानी है...”
जीजाजी- “अच्छा जी रात को खुजली नहीं मिटी..."
दीदी- “अजी वो तो इत्तेफाकन मैं चुदवा बैठी। पर असली खुजली तो आप ही मिटाओगे मेरे सैयां। वैसे भी भैया परसों चले जाएंगे और आज की बुकिंग आपकी बहन ने कर ही दी है...”
झरना मेरे पास खिसक के मेरे लण्ड को नजदीक से देखने लगी- “हे भाभी... ये तो सचमुच काफी बड़ा है। मेरी तो फट ही जाएगी...”
दीदी- “फट जाएगी तो ना चुदवा ना मेरे भाई के लण्ड से। फिर चुदवा ले अपने ही भाई के लण्ड से, मैं चुदवा लँगी मेरे भाई के लण्ड से..” ।
झरना- “वाह जी वाह... भाभी तुमने ये खूब कही। पर भाभी, तुम तो जानती ही हो कि मैं कितनी बड़ी चुदक्कड़
दीदी- “हाँ, जानती हूँ मेरी प्यारी ननद कि शादी से पहले तू अपने भैया से अपनी प्यास बुझाती थी। मुझे तो चुदा-चुदाया लण्ड ही मिला था तेरे भैया का। फिर भी झरना, कुछ तो शर्म करो। अपने ही भैया भाभी के सामने तुम कैसे चुदवा सकती हो?”
झरना- “क्यों क्यों? क्यों नहीं चुदवा सकती मैं? आप भी तो रात भर चुदवा के आई हो ना इनसे। फिर मैं क्यों नहीं चुदवा सकती? अच्छा अब समझी... आपका फिर से इन्हीं से चुदवाने का विचार है?”