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नए पड़ोसी complete

मैंने धीरे से पूछा. "क्या मैं आपकी चूत चाट सकता हूँ?"

तो वो बोली "अब पूछ मत जो मन करे वो कर."

मैंने धीरे से आंटी की चुत को छुआ. उनकी चूत गीली थी और झांटे तो उन्होंने अभी आधे घंटे पहले ही साफ़ की थी. मैंने ओम जैसा करता था वैसे ही अपनी जीभ उनकी चूत पर लगाई तो उन्हें तो जैसे करंट लग गया हो. उन्होंने एक जोर का झटका लिया और मैं उनकी चूत का स्वाद लेने लगा. उन्होंने कहा दाने को चाटो दाने को. मैं दाने को चाटने की जगह हल्का सा काट बैठा. वह कसमसा कर बोली "उफ्फ्फ. जान लोगे क्या" और तेज तेज सिसकारियाँ लेने लगी. मैं अपनी जीभ उनकी चूत के अंदर बाहर करने लगा, उनकी सिसकारियाँ और तेज होती गई और 2 मिनट के बाद आंटी झड़ गई.

एक मिनट आंटी वैसे ही पड़ी रही फिर बोली, "ला. तेरा भी चूस देती हूँ." मैंने अपना लण्ड आंटी के मुँह के पास ले गया और आंटी उसे चूसने लगी. मुझे तो लगा की मैं तो जैसे जन्नत में पहुच गया.

आंटी कस कस कर मेरे लंड को चूस रही थी. मैं भी अब थोडा निश्चिन्त होकर उनके मम्मों को कस कस कर दबा रहा था. बीच बीच में उनके निप्पल भी नोच रहा था. जब मैं उनके निप्पल नोचता तब वो वो मेरे लंड पर अपने दांत गडा देती. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.

कुछ देर के बाद मैं झड़ने वाला था तो मैं आंटी से बोला "मेरा निकलने वाला है"
 
आंटी और जोर जोर से मेरा चूसने लगी और मैंने आंटी के मुँह में अपना पूरा पानी छोड़ दिया. आंटी ने मस्त होकर पूरा लण्ड साफ कर दिया और बोली अब थोड़ी देर तक तो ये किसी काम का नहीं है. मेरा लण्ड थोड़ा ढीला हो गया था पर मैंने देखा था की ओम के झड़ने के बाद जब वो उसका लंड चूसती है तो वो फिर से खड़ा हो जाता है. मैंने उनसे कहा आप चूसती रहो. ये फिर से तैयार हो जायेगा.

वो हंसी और फिर से लंड मुह में लेकर चूसने लगी. कुछ देर में लंड फिर खड़ा हो गया. आंटी बोली वाकई बच्चा नहीं है तू. अब न मुझसे सबर हो रहा था न ही आंटी से. मैंने आंटी को नीचे लिटाया और खुद उनके ऊपर आ गया और उनकी चूत में अपना लंड डालने की कोशिश की पर लंड बाहर ही फिसल गया. आंटी हंस पड़ी और बोली की अभी हरकतें बच्चो वाली ही है. आंटी ने एक तकिया उठा कर अपने चुतर के नीचे लगाई और फिर मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत के मुहाने पर लगाया और बोली अब डालो. मैंने धीरे से अपने लंड को उनकी चूत में डाल दिया. उफ्फ्फ मुझे लगा की मेरा लंड एक आग की भट्टी में घुस गया है.

आंटी बोली अब अन्दर बाहर करो. जल्दीई हान्न्न आआईईईईऐऐअ ऐसे ही आआआअ.

मैंने धीरे धीरे झटके लगाने शुरू कर दिए और आंटी ने भी चुतर उछालने शुरू कर दिए. मुझे अच्छा लगा की आंटी को भी अच्छा लग रहा है. मैं आंटी के ऊपर उनके मम्मों को चूस रहा था और लंड अन्दर बाहर कर रहा था. मैं अपनी जिंदगी की पहली चुदाई कर रहा था. मैं उत्तेजना से पागल ही हो गया था और जोर जोर से झटके लगाने लगा. अचानक मेरे लंड में दर्द सा उठा. पर मस्ती के आगे दर्द की किसी को क्या परवाह. मेरी गति तेज़ होती गई, फिर मैं और आंटी साथ में झड गए. मैं कुछ देर आंटी के ऊपर लेटा रहा. ढीला लंड आंटी की चूत में ही था और मैं आंटी को खूब चूम रहा था. साथ में उनके मम्मे दबा रहा था. फिर आंटी ने मुझे हटाया और उठा कर कपडे पहनने लगी. मैंने कहा मेरे लंड में कुछ दर्द सा हो रहा है शायद खून निकल रहा है...

आंटी ने लंड हाथ में लेकर देखा और मुस्कुरा कर बोली "तुम्हारा टोपा खुल गया. अब कुछ दिन इसकी ठीक से साफ़ सफाई करना वरना इन्फेक्शन हो जायेगा. कल आना तो एक दावा भी दूँगी. यहाँ लगा लेना. अब 4-५ दिन इससे ज्यादा छेड छाड़ मत करना. अब कपडे पहनो और जाओ." मैं जब कपडे पहन कर निकलने लगा तभी आंटी बोली "और सुनो जो हुआ उसका किसी से जिक्र मत करना. अपने किसी दोस्त से नहीं."

"ओम से?" मैंने पुछा.

"ओम से तो ख़ास तौर पर नहीं. समझे." आंटी ने कहा और मैं वापस घर चला आया.
 
आंटी ने कहा तो था की 4-5 दिन लंड से छेद छाड़ मत करना पर जब शेर के मुह खून लग जाता है तो फिर कण्ट्रोल कहाँ होता है और वैसे भी जब मयंक और रुची वापस आ जायेंगे तब तो बहुत छुट्टियों तक आंटी को दुबारा चोदना मुश्किल होगा तो रात भर तो मैंने आंटी को ख्वाब में चोदा और अगले ही दिन फिर पहुच गया आंटी के घर. आंटी नहाने जा रही थी, मुझे देख कर मुस्कुराते हुए बोली "मैं नहाने जा रही हूँ तू थोड़ी देर बाद आना फिर तुझे दूँगी."

मैंने भी शरारत से पुछा "क्या?"

आंटी बोली "तेरे लंड के लिए दवा और क्या?"

मैंने कहा आंटी की चूत की तरफ इशारा करके कहा "आंटी इसकी दवा तो बस एक ही है"

आंटी हँसने लगी और बोली "क्यों कल तो कह रहा था बहुत दर्द हो रहा है, अब दर्द ठीक हो गया."

मैंने कहा "दर्द तो कल रात तक ही ठीक हो गया था. वैसे दर्द का भी तो अपना ही मज़ा है"

आंटी ने कहा "अच्छा बच्चू तो चल कपडे उतर और मेरे साथ बाथरूम में चल, जरा मेरी पीठ साफ़ करवा देना. कई दिन से तेरे अंकल से कह रही हूँ पर उनके पास टाइम ही नहीं है."

 
मैंने ख़ुशी ख़ुशी कपडे उतार दिए. मेरा लंड तो आंटी को देखते ही खड़ा हो गया था. कपडे उतारते ही लहराने लगा. आंटी मेरा खड़ा लंड देख कर मुस्कुराई और कमर बलखाते हुए बाथरूम की तरफ चल दी और मैं भी उनके पीछे चल दिया. बाथरूम में पहुच कर आंटी ने अपना नाईट गाउन उतार दिया और अब वो सिर्फ नीले रंग की ब्रा पैंटी थी. फिर आंटी शावर के नीचे चली गयी और शावर ऑन कर दिया. मैं आगे बढ़ा तो आंटी बोली "वो लिक्विड सोप स्पोंज में डाल कर ले आओ और मेरी पीठ पर ठीक से लगा दो."

मैंने तुरंत आंटी के हुक्म की तामील की और साबुन उनकी पीठ पर लगाने लगा. आंटी का मखमली बदन साबुन की खुशबु से और महक गया. मैंने कहा "आंटी आप कहिये तो पुरे बदन पर ही अच्छे से साबुन लगा देता हूँ."

आंटी ने शावर बंद किया और ब्रा उतारते हुए बोली "ठीक है लगा दे". आंटी के ब्रा उतारते ही आंटी के मम्मे उछल कर बाहर आ गए और मैंने फ़ौरन उन पर हमला बोल दिया और साबुन लगाने के बहाने उनको मसलने लगा. आंटी भी अब आहें भरने लगी थी. थोड़ी देर आंटी के मम्मे मसलने के बाद मैंने आंटी की पैंटी भी उतार दी और उनकी चूत को मसलने लगा. धीरे धीरे मैंने अपनी तीन ऊँगलिया आंटी की चूत में डाल दी. हाथ में साबुन होने की वजह से उंगलिया आराम से अन्दर बाहर हो रही थी और साथ ही साथ मैंने आंटी की नाभि में अपनी जबान घुसा दी. इस चौड़ी नाभि में जबान डाल के मैं उसे घुमाने लगा. आंटी सिसकिया भर रही थी और मेरे माथे को पीछे से पकड़ के अपनी नाभि पर दबाने लगी. आंटी की गांड पर हाथ रख के मैंने अब नाभि में और भी जोर से उसे चाटना चालू कर दिया. आंटी की मस्ती भी अब चरम पर पहुच गयी थी. उनकी चूत में मेरी उंगलिया अन्दर बाहर हो ही रही थी. आंटी बोली, अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह आह्ह्हह्ह उईईइ बड़ा मस्त लगा अह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह. फिर मैंने आंटी की नाभि से जबान हटा कर उनकी चिकनी चूत में घुसा दी और उनके चूत के दाने को चूसने लगा. आंटी उत्तेजना के चरम पर तो थी ही मेरे इस पैतरे से आंटी का पानी छुट पड़ा जिसे मैंने पी लिया.

 
मैंने आंटी से कहा अब मेरा भी चूसिये न तो आंटी ने कहा अभी तो तुम मुझे चोदो. आज टाइम थोडा कम है.

और आंटी वही घोड़ी बन गयी और बोली अब जल्दी से डाल दो. मैंने ये पोजीशन ब्लू फिल्मो में देखी थी. मैंने थोडा पानी और साबुन ले लिया और उसकी चूत और गांड पर झाग कर दिया. फिर मैंने जब लंड को चूत पर रख दिया. आंटी की चूत में लंड एकदम आराम से घुस गया साबुन की चिकनाहट की वजह से. आंटी ने कहा, आह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह. मैंने गांड पकड के एक झटके से पुरे लंड को अन्दर उतारा. साबुन की वजह से पूरा लंड चूत में बैठ गया. अब मैंने अपने हाथों को आगे किया और आंटी के बूब्स पकड़ के चोदने लगा. आंटी को भी बड़ा मस्त लग रहा था और वो आह आह कर के अपनी गांड को हिला के चुदवा रही थी.

साबुन की वजह से चिकनाहट बहुत थी और मुझे भी अलग अनुभव मिल रहा था. मेरा दिल आंटी की नरम गांड को देख कर दोल रहा था. मैंने आंटी की गांड के छेद पर थोडा लिक्विड सोप डाल दिया और उनकी चूत मारने के साथ साथ उनकी गांड में ऊँगली भी डालने लगा. साबुन की वजह से ऊँगली आराम से गांड में जा रही थी. मुझे लगा शायद आंटी ने ओम से भी गांड मरवाई होगी. जब आंटी की गांड काफी चिकनी हो गयी तो मैंने लंड उनकी चूत से निकाल के गांड में डालना चाहा. मेरा लंड आराम से आंटी की गांड में घुस गया. मुझे लगा शायद आंटी रोकेगी पर आंटी को भी गांड मरवाने में बहुत मज़ा आता होगा तभी तो वो अपने कुल्हे हिला हिला के मेरा लंड गांड में ले रही थी.

 
थोड़ी देर बाद मैं झड़ने लगा और मैंने आंटी की गांड में ही अपना वीर्य निकाल दिया. जब मैंने लंड को बाहर निकाला तो उनकी गांड के अन्दर से वीर्य की बुँदे बहार टपक रही थी. मैंने आंटी से पुछा "कैसा लगा आंटी मुझसे गांड मरवा के?"

आंटी ने "मस्त लगा बेटा. अब जल्दी से नाहा कर कपडे पहनो और जाओ."

मैंने कहा "ऐसी भी क्या जल्दी है. थोडा लंड चूस दीजिये तो आपकी चूत को भी शांत कर दूं."

आंटी बोली "अभी नहीं. उसके लिए ओम आने वाला है. अब जल्दी तैयार हो कर भागो."

आंटी के मुह से ये सुन कर की अभी ओम आंटी को चोदने आने वाला है मेरा मन उन दोनों की चुदाई देखने का करने लगा. पर मैंने आंटी से नहीं कहा क्योंकि वो मना कर देती. इसीलिए मैंने चुपचाप आंटी के साथ नहाया और बाहर आकर कपडे पहन लिए और छत पर आकर ओम के आने का इंतज़ार करने लगा.

 
मुझे ज्यादा इन्तेजार नहीं करना पड़ा. ५ मिनट बाद ही आंटी के घर का दरवाजा खुला और बंद हो गया. मैंने कन्फर्म करने के लिए छत से नीचे झाँका तो ओम आंगन में आंटी को अपनी बाँहों में उठा कर आंटी के बेडरूम में जा रहा था. मुझे एहसास हुआ की जितना मजा मुझे आंटी को चोदने में आता है उतना ही मजा जब ओम आंटी को चोदता है उसे देखने में आता है. वही मजा लेने के लिए मैं दबे कदमो से सीढ़ियों से नीचे उतर आया पर मेरे साथ klpd हो चुकी थी. आंटी ने सीढियों का दरवाजा जो आंगन में खुलता था वो बंद कर लिया था. शायद वो जानती थी की अब जब मुझे पता है की ओम उन्हें चोदने आने वाला है तो मैं जरूर उन्हें देखने की कोशिश करूंगा. मुझे बड़ा अफ़सोस हुआ की मुझे पहले ही आंटी से जिद करके उनके बेडरूम में छिप जाना चाहिए था. मैंने सोचा अगर मैं जोर जोर से दरवाजा ठोकू तो ओम और आंटी को दरवाजा खोलना ही पड़ेगा. अगर मैं देख नहीं सकता तो उन्हें चुदाई करने भी नहीं दूंगा. फिर मैंने सोचा की अगर आंटी नाराज हो गयी तो मुफ्त में जो चूत मिल रही है वो भी हाथ से जाएगी और मैं मन मार कर वापस अपने घर आ गया.
 
जैसे ही मैं नीचे उतर कर आया रश्मि दीदी ने मुझे पकड़ लिया और पूछने लगी की इतनी गर्मी में मैं छत पर क्या करने गया था. उनकी बातों से मुझे अंदाजा लग गया की उन्होंने मुझे ऊपर जाते नहीं देखा था तो उनको ये नहीं पता था की मैं कितनी देर पहले छत पर गया था. इसी बात का फायदा उठाते हुए मैंने बोल दिया "मैं आंटी से पूछने गया था की मयंक और रुची वापस कब आएंगे पर उनका सीढ़ियों का दरवाजा बंद था तो मैं वापस आ गया."

ये सुन कर दीदी बोली, "मयंक सोमवार को वापस आ जायेगा. रुची बाद में आयेगी."

मैंने सोचा इनको बड़ी खबर है मयंक की. मैंने दीदी से पुछा "तुमको कैसे पता."

"मेरी कल मयंक से फोन पर बात हुई थी तभी उसने बताया था." दीदी ने जवाब दिया और फ़ौरन ही बात को संभाला "वो दरअसल रुची को मुझसे कुछ पूछना था तो उसी ने मयंक से फ़ोन करवाया था. उनकी नानी के घर में फ़ोन नहीं है न तो कहीं दूर जाकर फ़ोन करना पड़ता है."

रुची अभी वापस नहीं आयेगी ये सुन कर मेरा मूड ख़राब हो गया. आज बुधवार था मतलब सिर्फ 4 दिन बाद मयंक वापस आ जायेगा. सन्डे को अंकल घर में रहते है और शनिवार को जल्दी आ जाते हैं. मैंने सोच लिया की बचे दोनों दिन मैं आंटी की चूत और गांड जरूर मारूंगा और अगले दिन जैसे ही अंकल ऑफिस के लिए निकले मैं भी फ़ौरन तैयार होकर घर से निकल गया. दीदी को मैंने बोल दिया की मुझे अपने दोस्त से मिलने जाना है. आज मैं छत से नहीं गया वरना अगर दीदी देख लेती तो उनको शक हो सकता था. मैं सामने से भी नहीं जा सकता था क्योंकि आंटी ओम के सामने मुझे घर के अन्दर नहीं बुलाती. मैं ये सब सोच कर अपने घर के पीछे वाली गली में गया. वो गली बहुत गन्दी रहती थी इसीलिए उसे कोई यूज़ नहीं करता था पर सबके घरों में पीछे गली में एक दरवाजा जरूर बना था. मैं मना रहा था की काश वो दरवाजा खुला हो तो मजा आ जाये. गली में जाकर मैंने देखा की हर तरफ सन्नाटा था.

 
मैंने आंटी के घर का दरवाजा खोलने की कोशिश की पर दरवाजा अन्दर से बंद था. मैंने इधर उधर देखा और दरवाज़े के ऊपर से कूद कर अन्दर चला गया. पीछे आंटी ने एक बहुत ही खूबसूरत गार्डन बना रखा था. अब मैंने सोचा की अन्दर तो आ गया अब सामने के सारे दरवाजे तो बंद है क्या करूं. तभी किस्मत ने साथ दिया और आंटी किचन में कुछ करने आई. किचन की खिड़की पीछे आंगन में खुलती थी तो मैंने खिड़की पर हलकी सी दस्तक दी. आंटी ने चौंक कर खिड़की की तरफ देखा और मुझे देखते ही उनके चेहरे पर वोही मुस्कान दौड़ गयी. वो खिड़की के पास आई और बोली "क्या हुआ मनीष. यहाँ क्या कर रहे हो."

"बस आपसे मिलने चला आया. दरवाजा तो खोलिए" मैंने चिड़ते हुए जवाब दिया. आंटी को अच्छे से पता था की मैं यहाँ क्यों आया हूँ.

"अन्दर कैसे आये. दरवाजा तो बंद है" आंटी ने मुझे अनसुना करते हुए फिर पुछा.

"कितना ऊँचा दरवाजा है. कूद कर आ गया. अब खोलिए भी" मैंने बेसब्री से कहा.

"कभी छत कूद कर आ जाते हो कभी दरवाजा कूद कर. अंकल से बोल कर दरवाजा ऊँचा करवाना पड़ेगा." आंटी ने मुझे और चिढाया.

मैंने बोला "देखिये दरवाजा खोलना है तो बोलिए वरना मैं चला अपने घर."

"ओहो. नाराज हो गया मेरी चूत का पिस्सू. हा हा हा" आंटी ने हँसते हुए किचेन का दरवाजा खोल दिया.

आंटी ने मुझे चूत का पिस्सू बोला मुझे इस बात पर गुस्सा नहीं आया बल्कि इस बात पर आया की उन्होंने दरवाजा खोलने में इतनी देर क्यों लगा दी. मैं फ़ौरन किचन में घुसा और आंटी को पीछे से पकड़ लिया. मैंने आंटी की दोनो चुचियों को अपनी हथेली में भर लिया और जोर जोर से दबाने लगा. आंटी आहे भरने लगी. अआह धीरे ईईई दर्द होताआ हाईईईईई मनीष. मैंने आंटी पर कोई रहम नहीं किया और उनके कान को अपने होठो से चुभलाते हुए पुछा "अगले हफ्ते मयंक आ रहा है, मुझे बताया क्यों नहीं. अब हम चुदाई कैसे किया करेंगे."

 
"ओह्ह इसीलिए इतना गुस्सा आआआअ है. ओफ्फूऊ अरे मयंक तो इसलिए वापस आ रहा है क्योंकि उसकी कोचिंग शुरू हो जाएगी. समझे आआआ अब तो धीररे आआअह्ह्ह करूऊऊऊ. वो १० से 2 पढने चला जायेगा तब एक दिन तुम और एक दिन ओम समझे ना."

"और कल सीढियों का दरवाजा क्यों बंद किया था. हैं. मुझे ओम और तुम्हारी चुदाई देखनी थी." मैंने आंटी की चुचियों को और जोर से दबाते हुए कहा.

"आऐईईईई बस करो. अरे मार ही डालोगे क्या. उफ्फ्फ्फ़ दरवाजा इसीलिए बंद किया था की कहीं तुम वापस आ गए और ओम ने तुमको देख लिया तो? बस्सस्सस्सस." आंटी ने जवाब दिया.

"मैं इतने दिनों से देख रहा हूँ कभी तूम लोगो को पता चला. अगर आज के बाद कभी दरवाजा बंद किया तो ओम को बता दूंगा की मैं भी तुम्हे चोदता हूँ. और तुम तो जानती ही को वो कितना हरामी है. इस बात का पता चलते ही वो तुम्हे कोठे पे बिठा देगा. लोगो से पैसे लेकर चुदवाने लगेगा तुमको. समझी और आज और कल के लिए तुम सिर्फ मेरी हो. तुम्हारी चूत गांड सिर्फ मैं ही मारूंगा ओम वोम को भूल जाओ.." मैंने आंटी को धमकाते हुए बोला."

"अच्छा बाबा ठीक है. अब तो थोडा आराम से दबाओ. जान ही निकाल दी तुमने." आंटी के राजी होते ही मैंने उनको घुमाया और उनके होठो पर अपने होठ रख दिए. आंटी को एक ताबड़ तोड़ किस देने के बाद मैंने आंटी के कपडे उतारने शुरू किये. आंटी ने कहा "चलो बेडरूम में चलते है." मैंने कहा "नहीं. मैंने कई फिल्मो में देखा है की लोग किचेन में सेक्स करते है. आज हम दोनों भी करेंगे. ये किचन स्लैब बहुत काम की चीज है मेरी जान."

 
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