नेहा और मेरे पापा" दोनों रजाई में एक दुसरे से चिपक के सो रहे थे। मैं ये देख के दंग रह गयी। उनके चहरे से पता चल रहा था की अभी अभी दमदार सेक्स सेशन हुआ है और वो आराम कर रहे है। मुझे बहोत अजीब लगा। पर अगले पल दिमाग में वो बात आयी जो अभी अभी मैं नेहा के पापा के साथ करके आयीं थी। सोचा चलो अच्छा है नेहा को आखिर लंड तो मिला।
मुझे बहोत नींद आ रही थी सो मैं सोने चली गयी। सुबह नेहा ने मुझे जगाया।
नेहा:= माधवी उठ ना ..... चल जल्दी हमें महाबलेश्वर जाना है। चल उठ।
मैं:=महाबलेश्वर? ये कब तय हुआ?( मैंने आखे मसलते लेटे लेटे ही पूछा)
नेहा:= वो काका ने कहा की चलो तुम लोग भी वहा दिन भर घूमना शौपिंग करना रात को रुकेंगे और कल वो हमें यहाँ लाके छोड देन्गे।
मैं:= हा हा घूमेंगे फिरेंगे और रात कों तू उनसे मस्त चुदवायेगी नहीं?
नेहा को मेरी बात को कोई आश्चर्य नहीं हुआ उल्टा वो बेशर्मी से बोली...
नेहा:= हा वो भी कर लुंगी... तू चल जल्दी।
मैं:= साली कामिनी नानाजी नहीं मिले तो मेरे पापा को ही फसा लिया तूने।
नेहा:= हा यार बस हो गया...
मैं:= तू ना बहोत चालु है... बता जल्दी क्या क्या हुआ?
नेहा:= वो सब बाद मे बताउंगी.... तू चल जल्दी कर।
मैं:= मैं नहीं आ रही तू वहा मस्त चुदवायेगी और मैं क्या मंजीरे बजाऊ?
नेहा:= मेरी जान तूने क्या अपनी बहन को इतना मतलबी समझा है? मैंने नानाजी की तबियत का बहाना बना के उनको भी अपने साथ चलने को कह दिया।
मैं:= सच? नानाजी आ रहे है?
नेहा := हा ...। तू उनके साथ मजे करना मैं काका के साथ। अब जल्दी कर उठ।
ये बात सुनके नेहा और मैं दोनों हँसने लगे। मैं पटापट तैयार हुई और हम सब महाबलेश्वर के लिए निकल गए। वहा दिन भर हमने बहोत मस्ती की। पापा उनकी मीटिंग में बिजी थे। शाम को जब हम होटल पहोंचे तो पापा का मेसेज था वो डिनर के बाद 9 बजे आएंगे।
फिर मैंने नेहा को पकड़ा और बोला बता अब क्या क्या हुआ रात को?
नानाजी:=रात को क्या हुआ?
मैं:= आप नहीं जानते नेहा ने क्या किया है नानाजी....इसने आपके दामाद को ही फसा लिया और रात को मस्त चुदी है उनसे।
नानाजी:= क्या??? तुम सच कह रही हो?
नेहा:= हा दादाजी ...वो आ बस हो गया।
मैं:= चल अब डिटेल में बता
नेहा:==== अरे तू जब निचे गयी तो थोड़ी देर बाद मैं भी निचे आने के लिए निकली तो मैंने देखा की काका छत पे टहल रहे थे। उन्होंने मुझे देखा तो पूछ ने लगे"" अरे नेहा क्या हुआ ? सोई नहीं अब तक? माधवी सो गयी क्या?""
मैं:=वो काका माधवी निचे है उसीको बुलाने जा रही थी। नींद नहीं आ रही। आप सोये नहीं?
काका:= नहीं बस खुली हवा का मजा ले रहा हु।
मैं फिर उनसे बात करने को चली गयी और उनके साथ टहलते हुए बात करने लगे।
काका:=और बताओ अगले साल ग्रेजुएशन हो जाएगा फिर क्या करने वाली हो पढाई करोगी आगे या शादी? अगर कोई देख रखा है तो बताना मुझे मैं हेल्प करूँगा तुम्हारी।
फिर हम एक जगह दिवार से सट के खड़े हो गए। उन्होंने मेरे कंधो पे हाथ रखा। वो तो हमेशा ही रखते है पर रात को एक तो मेरी चूत में खलबली मची हुई थी। और फिर एक मर्द का स्पर्श उफ्फ्फ मेरी आग फिर भड़कने लगी थी। लेकिन मैंने अपने आप को कण्ट्रोल किया हुआ था।
काका:=तुम चिंता मत करो मैं तुम्हारे लिए एक से एक अच्छे लडके ढूंढ के लाऊँगा।
नेहा:= ठीक है लेकिन अपने जैसा ही ढूंढना।
काका:= वो क्यू? मैं तुम्हे इतना अच्छा लगता हु?
मैं:= हा ... मैं जब भी शादी के बारे में सोचती हु तो आप जैसे लडके के बारे में ही सोचती हु।.... मैं बोल गयी।
काका ये सुनके बहोत खुश हुए। वो अब मुझे कुछ अलग नजरो से देखने लगे। मैं ये बात समझ गयी।
काका:= तो मुझसे ही कर लो शादी।
मैं:= हा ठीक है आप मौसी को मना लो मै तैयार हु।
ये सुनके हम दोनों हँसने लगे। काका ने अब मेरे कंधे और बाह सहलाना सुरु कर दिया था। शायद उनको मेरी बातो से उत्तेजना होने लगी थी। उनका पैंट में उनके खड़े होते हुए लंड का उभार दिख रहा था। अब मेरी भी हालात खराब होने लगी थी। मन में तय कर लिया की अगर काका भी यही चाहते है तो मैं मना नहीं करुँगी।
काका:= मौसी को मनाने की क्या जरुरत है हम भाग चलते है।
मैं:= ठीक है मैं कपडे लाती हु...।ऐसा बोल के मैं जाने के लिए आगे बढ़ी तो उन्होंने मुझे पकड़ना चाहा लेकिन मेरे बाह को पकड़ते पकड़ते उनका हाथ मेरी चूची को लग गया।
काका:= हा हा हा तुम तो बिलकुल तैयार हो।
नेहा:= हा मैं तो तैयार ही हु बस आप देर कर रहे हो।
मैंने कुछ ऐसे कहा की उन्हें समझ जाय की मैं किस बारे में बात कर रही हु। और उनको समझ भी गया। अब वो उन्होंने अपना हाथ मेरी कमर पे रख दिया था। मैंने कुछ नहीं कहा तो उनका हौसला बढ़ गया। वो धीरे धीरे मेरे पेट और कमर को सहलाने लगे। मैं आगे कुछ बोल पाती की कही एक चूहा मेरे पैरो पर से गया मैं घबरा के पलट के उनके सिने से चिपक गयी। उनका लंड और मेरी चूत आपस में टकरा गए। उनका लंड खड़ा था।उम्म्म्म्म मेरी चूत अब पनियाने लगी थी। मै वापस अपनी जगह आके खड़ी हो गयी।
मैं:= हा कितना बड़ा था वो चूहा।... मैंने उनके लंड की तरफ देखते हुए कहा। काका को अब यकींन हो गया था की मैं उनसे क्या चाहती हु।
काका:= हा बड़ा तो था... पर बेचारा इतना इधर उधर उड़ इसलिए रहा है क्यू की उसे अपने बिल की तलाश है।..... ऐसा बोल के काका ने मेरी कमर दबाई।
मैं:= तो जाए ना बिल में रोका किसने है? क्या पता बिल भी यही चाहता हो की चूहा जल्दी से अंदर आ जाय।
काका:=हा लेकिन उसे बिल दिखे तो अंदर जाय।.... काका ने अपना हाथ अब साइड से मेरी गांड को टच कर रहा था।
मैं:= पर काका इतना बड़ा चूहा इतने छोटे बिल में कैसे जाएगा? उसे दर्द नहीं होगा?
काका:= सुरु में होगा फिर तो मजे ही मजे है।
मैं:= तो आज देखते है ना चूहे को बिल में उतार के।
काका:= उसके लिए तुम्हे चूहे को पकड़ना होगा पहले।
मैं:= लेकिन मैं कैसे?
काका:=( मेरा हाथ पकड़ के अपने लंड पे रखा) ये लो पकड़ो अपने चूहे को।
मैंने शरमाते हुए अपना हाथ पीछे किया।
मैं:= उए तो आपका पर्सनल चूहा है।
काका:=हा ...तो उतार लो ना इसे अपने बिल में।
मैं:= काका आप क्या बोल रहे है?
काका:=मुझे पता है तुम ऐसे अपने बिल में लेने के लिए उतावली हो रही हो। और तुम्हारी बातो ने और तुम्हारी जवानी की खुशबु ने पागल कर दिया है।
मैं:= वो तो मैं.. मैं...
मेरी बात पूरी होने से पहले ही उन्होंने मुझे जकड लिया। अपने दोनों हाथो से मेरी गांड के दोनों फाको को पकड़ के और खुद थोडा निचे झुक के अपना लंड मेरी चूत पे रगड़ते हुए बोले""मैं मैं क्या? मुझे पता है तुम जवानी का मजा लेने के लिए उतावली हो रही हो। ओह्ह्ह्ह नेहा मैंने कभी नहीं सोचा था की मैं तुम्हारे साथ ये सब करूँगा।
मेरी आखे बंद हो गयी थी। मैं मदमस्त हुए जा रही थी। फिर काका मुझे बाहो में पकड़ के किस किये जा रहे थे। मैं भी उनका साथ देने लगी थी। काका ने पूछा"" नेहा माधवी आ गयी तो?"" मैंने कहा""वो अकेली नहीं आएगी इधर अँधेरे से डरती है वो"" ।थोड़ी ही देर में हमारे सारे कपडे उतर चुके थे। हम एक दूसरे के प्रत्येक अंग को चूमे जा रहे थे। फिर काका मेरी चूत चाट रहे थे और मैं उनका लंड।
मुझसे रहा नहीं जा रहा था मैंने हापते हुए कहा"" ओह्ह्ह्ह काका प्लीज अब डाल भी दीजिये ना अपना लंड अह्ह्ह बर्दाश्त नहीं होता अब।"" फिर काका ने मेरी चूत में अपना लंड डालना सुरु किया। काका का लंड नानाजी जितना बड़ा नहीं था और मेरी चूत भी काफी गीली थी इसके वजह से मुझे ज्यादा दर्द नहीं हो रहा था। पर जब उन्होंने झटके से अपना लंड मेरी चूत में घुसेड़ा तो मैं चीख पड़ी।
काका को भरपूर मजा मिल गया। फिर उन्होंने मुझे सीधा लिटा दिया। मेरी चूत में उन्होंने पूरा लंड पेल दिया और जल्दी जल्दी चोदने लगे। मेरी 36” की चूचियां बार बार उपर नीचे जाने लगी और डिस्को डांस करने लगी। काका मेरी चूत का केक अपने लंड रूपी चाक़ू से काट रहे थे। मैं चुद रही थी। काका ने मेरी कमर को दोनों हाथों से पकड़ रखा था। वो मेरे जिस्म की खूबसूरती को नीचे से उपर तक निहार रहे थे और मुझे पेल रहे थे। मैं “उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ… सी सी सी सी…..
ऊँ—ऊँ…ऊँ….” की आवाज निकाल रही थी। मैं गहरी गहरी सिस्कारियां ले रही थी। मुझे अजीब सी बेचैनी हो रही थी। मेरे चूचियां उपर नीचे जल्दी जल्दी हिल रही थी और बहुत खूबसूरत लग रही थी। मैंने बिस्तर की चादर को मुठी में कस रखा था।
“….उंह उंह उंह…..अई…अई….अई काका आराम से चोदो। दर्द हो रहा है। जल्दी क्या है। पूरी रात अपनी है…आराम से” मैंने कहा। उसके बाद काका आराम आराम से मुझे चोदने लगे। कुछ देर बाद मैं अपनी कमर उठाने लगी। मुझे अजीब सी बेचैनी हो रही थी। वासना और सेक्स की आग में मैं जल रही थी। चुदाते चुदाते मेरी आँखों में जलन हो रही थी। मेरा गला भी सुख रहा था। काश मेरे मुंह में कोई १ घूंट पानी डाल देता। फिर काका ने मेरे सेक्सी पतले छरहरे पेट पर हाथ रख दिया और सहला सहला कर मुझे चोदने लगे।
मेरे चेहरा अजीब तरह से बन गया था। मेरे गाल पिचक गये थे। मेरे दोनों भवे आपस में जुड़ गयी थी। मेरे मुंह से “आऊ…..आऊ….हमममम अहह्ह्ह्हह…सी सी सी सी..हा हा हा..” की आवाज आ रही थी। जैसे मैं कोई तेज मिर्ची खा रही थी और सी सी की आवाज निकाल रही थी। काका का लंड अब बड़ी आराम से मेरी चूत में दौड़ रहा था। अब मेरी चूत रवां हो गयी थी। उसका रास्ता बन गया था। काका का लंड मेरी चूत के आखिरी किनारे तक जा रहा था। मुझे भरपूर यौन सुख की प्रप्ति हो रही थी। कभी मैं बेचैनी से ऑंखें बंद कर लेती थी तो कभी खोल लेती थी। सिर्फ काका को ही ताड़ रही थी। मेरी चूत में उनका लौड़ा पिघल रहा था। मैं अच्छे से जानती थी आज रात काका मुझे चोद चोदकर मेरी रसीली बुर फाड़ देंगे और मुझे एक असली रंडी बना देंगे। फिर काका मेरे उपर झुक गये और जल्दी जल्दी कमर घुमाने लगे। मेरी चूत में जल्दी जल्दी उनका लंड जाने लगा। चट चट की आवाज मेरी चूत से आने लगी जैसे बच्चे ताली बजा रहे हो।
15 मिनट बाद काका ने मुझे कुतिया बना दिया और मेरे खूबसूरत पुट्ठे सहलाने और चूमने लगे। मुझे सुरसुरी सी हो रही थी। काका आज अपनी जवान बेटी की उम्र की लड़की को देखकर वासना में अंधे हो गये थे। उनको किसी तरह की कोई शर्म नही आ रही थी। वो बड़ी देर तक मेरे गोल मटोल पिछवाड़े और गांड को चूमते रहे। और फिर अपना मोटा लंड मेरी चूत में घुसाकर पेलने लगे।
वो धीरे धीरे अपना लंड मेरी चूत में आगा पीछे करने लगे। मेरा दर्द गायब हो चूका था। मैं उन्हें जोर से चोदने को कह रही थी।काका अब मुझे पूरी ताकत से चोदे जा रहे थे।मैं अह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ उईईमआ उम्म्मएअह्ह्ह्ह् जोर से और चोदो अह्ह्ह मजा आ रहा है उम्म्म्म अह्ह्ह धीरे अह्ह्ह और और ऊऊओऊ उम्म्म ऐसे बोल।के उनका जोश बड़ा रही थी। वो लगातार आधा घंटा मिझे अलग अलग पोजीशन में चोदते रहे मैं दो बार झड़ चुकी थी। फिर वो भी अपना सारा पानी मेरी चूत में छोड़ के मुझ पर ही सो गए। थोड़ी देर बाद मैंने उनका लंड जो की उनके और मेरे चूत के पानी से लबरेज था उसे चाट के साफ़ किया उम्म्म्म्म बहोत अच्छा था वो टेस्ट।
* * * * * * * * * * * * * * * * * * थोड़ी देर आराम करके फिर से उन्होंने मुझे चोदा। इस बार की चुदाई तो और भी दमदार थी।मेरी चूत का कोना कोना उनके लंड ने चोद डाला था। करीब 4 बजे हम दोनों सो गए।
माधवी मैं क्या बताउ यार अभी तक उनके लंड का एहसास मेरी चूत को हो रहा है। कल रात को ही हमने ये आज का प्लान बना लिया था। मैं उन्हें बोलूंगी की तुम दोनों को मैंने नींद की गोली दे दी है। फिर मैं उधर मजे करुँगी और आप लोग यहाँ।
मैं:= ह्म्म्म क्या बात है यार ... मान गए तुझे तो।
नानाजी:= ओह्ह्ह मरे लंड के नशीब में ही नहीं था शायद तुम्हारी चूत में पहली बार जाना।
नेहा:=तो क्या हुआ आपकी प्यारी माधवी की चूत में तो पहला लंड आपका ही जानेवाला है आज।
नानाजी:= हा वो तो है। मैं तो आज ही इसकी जमके चुदाई करूँगा वरना क्या पता ये भी किसी और से चुदा ले और मैं सिर्फ देखता ही रहू।
डिनर के बाद हम जब लौटे तो पापा भी आ चुके थे। हम सब रूम बैठ के गप्पे मार रहे थे।नानाजी सोने लगे मतलब की सोने का नाटक करने लगे। थोड़ी देर बाद मैं भी नींद आने का सीन बनाने लगी। जो की उनके प्लान के हिसाब से था। क्यू की नेहा ने पापा को बताया था की उसने हमें नींद की गोली खिला दी है।
पापा कहने लगे की ""चलो मैं जाता हु तुम लोगो को शायद बहोत नींद आ रही है। बाबूजी को यही सोने दो अब उन्हें जगाना ठीक नहीं होगा।""
ह्म्म्म्म जैसे हमें पता ही नहीं था की उन्होंने तिन लोगो के लिए रूम लिया था। और खुद के लिये सामने ही दूसरी रूम ली थी...।
हमने उनको गुड़ नाईट बोला। वो चले गए। 15 min के बाद नेहा भी चली गयी। नेहा ने रूम बाहर से लॉक कर दी और मैंने अंदर से।मैं धड़कते दिल से दरवाजा लॉक करके पलटी। तो देखा नानाजी मेरे पीछे ही खड़े थे।उनहोंने मुझे बाहो में भर लिया और पागलो की तरह मुझे चूमने लगे। मेरे गालो को होठो को गले को और पुरे बदन पे हाथ घुमाने लगे। मैं भी उनका साथ दिए जा रही थी। चूमते चूमते ही उन्होंने मेरे सारे कपडे उतार दिए। जब हम एक दूसरे को चूमते चूमते थक गए तो बेड पे धड़ाम से गिर गए।
मैं:= नानाजी... क्या आप भी मुझे तो पूरा नंगा कर दिया पर खुदके एक भी कपडे नहीं उतारे।
नानाजी ने मुझे अपनी और खीचा और मेरा पैर अपनी कमर पे रखा और लंड मेरी चूत में चुभाने लगे। मेरी नंगी गांड पे हाथ घुमाते हुए बोले...
""मैंने कहा रोका है उतार लो""
मैं:= वो तो उतार ही दूंगी...मैं बता नहीं सकती उस दिन से कितनी तड़प रही हु मैं...
नानाजी:= तड़प तो मैं भी रहा था कबसे....
मैं:=नानाजी कभी आपने मेरी उम्र की लड़की को चोदा है?
मैं:= आपकी लैंग्वेज में आपने सिर्फ भोसड़े चोदे है.... कच्ची उम्र की चूत आज मिलने वाली है आपको....मैं मादक आवाज में बोली।
नानाजी:= हा मेरी जान... नानाजी मेरी गांड को पकड़ के अपनी और खीचते हुए बोले।
मैं:=उफ़्फ़्फ़ग नानाजीईईई...
नानाजी:= माधवी सच में बहोत ही सेक्सी हो तुम... और ये तुम्हारी चुचिया तो क़यामत है....।
मैं:= रहने दीजिये... मुझे चढ़ाने की जरुरत नहीं है... लेटी तो हु आपकी बाहो में... ये मखन लगाने की जरुरत नहीं है।
नानाजी:= नहीं सच में ये तुम्हारे जिस्म की खुशबू अह्ह्ह्ह और ये तुम्हारा संगेमरमर सा बदन उफ्फ्फ्फ्फ़ देख के ही लंड खड़ा हो जाता है।
मैं:=अगर ये बात है तो इन्तजार किस चीज का है.... डालिये अपना लंड मेरी चूत में ....मैं आहे भरती हुए बोली।
नानाजी:= तुम ऐसे बोलोगी तो दिन रात तुम्हे चोदते रहने का मन करेगा।
मैं:=दिन का तो पता नहीं पर हर रात ये लंड मुझे अपनी चूत चाहिए जितने दिन मैं यहाँ हु।
नानाजी:= हा मेरी गुड़िया रानी....ऐसे चोदुंगा तुम्हे की तुम ये छुट्टियां जिंदगी भर याद रखोगी....
मैं:= ओह्ह्ह्ह उम्म्म नानाजी मैं भी आपके लंड को ऐसा मजा दूंगी की आप मेरी चूत की याद में खिचे चले आएंगे मुम्बई मुझे चोदने......
नानाजी:=उम्म्म्म माधवी अह्ह्ह क्या अदाएं है तुम्हारी.... देखो ना मेरा लंड कैसा गिला गिला कर दिया है तुमने अपनी बातो से....अंडरवियर के साथ साथ पैजामा भी गिला होने लगा है...
मैं:=सीसीसीसीसी आह्ह नानाजी चूत तो मेरी भी कम गीली नाही है अह्ह्ह्ह।
नानाजी:= जरा देखु तो... हम्म आहा क्या नरम और मुलायम चूत है तुम्हारी माधवी.... और इसका पानी उफ्फ्फ्फ्फ्फ।
मैं:= उम्म्म्म्म अह्ह्ह्ह नानाजी उस दिन आपके लंड का पानी उफ्फ्फ्फ़ बहोत ही अच्छा लगा था मुझे।
नानाजी:= तो तुम्हे रोका किसने है जाओ और लेलो टेस्ट .... पर मुझे भी तुम्हारी चूत का पानी टेस्ट करने दो...
मैं उठ के नानाजी का लंड पैंट के ऊपर से ही मुह में लेने लगी। फिर मैंने उनका पैंट अंडरवियर के साथ ही निकाल दिया। और उनका लंबा लंड हाथ पे पकड़ा। उसके लाल सुपाड़े पे प्रीकम किसी मोती की भाति चमक रहा था उफ्फ्फ्फ़ उम्म्म मैंने उसे अपनी जुबान से चाट लिया आह्ह्ह्ह्ह्ह।
नाना:=उफ्फ्फ्फ़ आह्ह्ह उम्म्म माधवी सीसीसी।
मैं:= क्या हुआ?
नानाजी:= ऐसा लगा जैसे किसीने गुलाब की पंखुड़ी मेरे लंड के ऊपर से फिराई हो अह्ह्ह्ह... माधवी मुझे भी तो चखाओ अपना रस....
मैं:= रुकिए ना अहह पहले मैं जी भर के चखलु फिर आप को देती हु।
नानाजी:= अरे उस दिन जैसे आके रख दो अपनी चूत मेरे मुह पे...
मैं पलट के उनके मुह के ऊपर बैठ गयी।
नानाजी मेरी गीली चूत को निहारते हुए बोले""स्स्स आह्हा माधवी तुम्हारी चूत कितनी गीली है उफ्फ्फ और इसकी खुशबू उम्म्म्म्म .....इतनी खूबसूरत है .... भगवान् ने भी इसे बनाया होगा तब उसका भी ईमान डौल गया होगा....."""
नानाजी की ऐसी बाते और उनके होठ और जुबान इस कदर मेरी चूत को लग रही थी की मैं क्या बताओ। अब तो वो और भी पानी छोड़े जा रही थी। हम दोनों इस कदर एक दूसरे के गुप्तांगो को चूस रहे थे चाट रहे थे की बस ये पहली और आखरी बार है।मैं नानाजी के होठो के और जुबान की आगे ज्यादा देर टिक नहीं पायी और झड़ गयी। मैंने भी हार नहीं मानी और उनके लंड को इस कदर चूसा और चाटा की 5 min में ही उनका पानी निकल गया। उम्म्म्म्म्म मैं उनके वीर्य की पिचकारियों को को अपने मुह पे लेने लगी उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़ क्या गरम था उनका पानी उम्म्म्म्म मैंने खुदको और नानाजी के लंड को साफ़ किया। और उनकी छाती पे सर रखकर सोने लगी।
नानाजी:= उम्म्म वाह माधवी आज तुमने जिस तरीके से मेरे लंड को चूसा है वैसे किसीने आज तक नहीं चूसा....मजा आ गया।
मैं:= इतने में मजा आ गया अभी तो पूरी रात बाकी है नानाजी...............
हम बेड पे लेटे लेटे थोडा रिलैक्स कर रहे थे।
मैं:= नानाजी उधर नेहा का क्या चल रहा होगा?
नानाजी:= क्या चलने वाला है....चूत में लंड लिए उछल उछल के चुद रही होगी।
मैं:=ह्म्म्म्म सच में नानाजी नेहा बहोत ही चुद्दकड़ है।
नानाजी:=छोडो उसे....एक बात बताओ मैंने सुना है की मुम्बई में कोई क्लब में नंगी लडकियोका डांस होता है।
मैं:= हा सुना है मैंने भी।
नानाजी:=कैसे होता है?
मैं:= आपको देखना है? तो अभी दिखा देती हु ना ...
मैं उठ के खड़ी हो गयी। नानाजी पीछे सरक के बेड से अपनी पीठ टिकाके बैठ गए। मैंने सेक्सी एक्सप्रेशन के साथ एक एक अदाएं दिखानी सुरु कर दी। मैं पलट के उन्हें अपनी गांड दिखाने लगी उस पर से हाथ घुमाते गए गांड मटकाने लगी।
नानाजी:= सीसीसीसी आह्ह माधवी क्या बात है अह्ह्ह्म मेरा लंड तो अपने आप ही खड़ा होने लगा है।
मैंने पलट के देखा तो सच में नानाजी के लंड में फिर से जान आने लगी थी। मैं फिर और जादा सेक्सी अदाएं दिखाने लगी। अपनी गांड के फाको को चौड़ा कर के उसे मटकाते हुए उनके करीब गयी जैसे वो उसे छुने के लिए उठे मैं आगे आ गयी। फिर मैंने अपने बूब्सको पकड़ के उन्हें मसलने लगी निप्प्ल्स को मुह में लेने की कोशिश करने लगी। साथ साथ उम्म्म्म अह्ह्ह सीसीसीसी ऐसी मादक आहे भरने लगी।