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Guest
"अर्रे एक बात बताना तो भूल ही गयी.. पापा ने डिन्नर पे इन्वाइट किया है फ्राइडे को"
"अर्रे यार.. मैने अंकल को पहले ही कहा था कि शादी की बात सिर्फ़ पेरेंट्स से ही करें... चलो फोन पे बात कर लेंगे.. अपना फोन में पूरा टॉक टाइम रखना... इज़्ड कॉल्स महनगी होती हैं"
"ऐसी कोई बात नहीं हैं... उन्होने तान्या और रोहित को भी बुलाया है..."
"रोहित तो मेरे साथ ही था सुबह से.. उसको तो कोई फोन नही आया.. कहीं तुम मुझे अकेले में बुला कर मेरी इज़्ज़त पे हाथ डालना तो नहीं चाहती दिया"
"इन युवर ड्रीम्स बिट्टू..."
"वाह.. क्या ड्रीम्स होंगी वो भी... मैं, तुम और हमारा अपना खेत"
"शट अप... कल मिलते हैं.. मुझे रोहित को भी फोन करके बोलना है"
"ओके देन" खेकर बिट्टू ने फोन रख दिया.
"हेलो"
"इस दट तान्या"
"यस"
"तान्या रोहित बोल रहा हूँ"
"ओह्ह हाई रोहित. तुम्हार तबीयत कैसी है? हाथ कैसा है तुम्हारा?"
"अब मैं ठीक हूँ. मुझे तुमसे मिलना है तान्या"
"क्यूँ नही.. कभी भी बोलो मिल लेंगे.."
"अभी.. अभी आ रहा हूँ मैं वहाँ.. अपना अड्रेस दो"
"अभी ?? हां लिख लो अड्रेस... और हां .. उड़ के मत आना... "हँसते हुए तान्या ने अपना अड्रेस लिखवा दिया
"मैं 30 मिनट में आता हूँ तान्या" कह कर रोहित ने फोन रख दिया. वो अपने बाथरूम में जा कर अच्छी तरह से नहाया. उसे अभी भी कमज़ोरी लग रही थी. उसको खून की उल्टी एक बार और हुई और उसे थोड़ा अच्छा लगने लगा. शायद उसकी बॉडी बिट्टू का खून रिजेक्ट कर रही थी. पर अब उसको डर नही था क्यूंकी अब उसके घाव भर चुके थे. नहा धो के वो तय्यार हुआ और टॅक्सी ले कर तान्या के बताए पते पर चला गया.
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उधर तान्या के मन में एक प्लान बन रहा था. देर सवेर किसी तरह से रोहित को पता चल ही जाएगा कि उसके पास भी पवर्स हैं.. खास कर के अगर उसको कल की डेत्स के बारे में पता चलेगा तो क्यूंकी एक भी बंदा गोली लगने से नही मरा था. उसको लगा कि क्यूँ ना वो खुद ही रोहित को अपनी सच्चाई बता दे. शायद बिट्टू ने उसको कुछ बताया हुआ था जिसके कारण वो अधमरी हालत में भी बिट्टू को याद कर रहा था. लेकिन उसपर अपनी पवर्स ज़ाहिर करने से पहले तान्या को उसको अपने वश में करना होगा. रोहित को अपने प्यार के जाल में इस कदर फसाना होगा के वो चाहकर भी कभी उससे अलग ना हो पाए. वो सोचने लगी कि अगर वो और रोहित मिल जायें तो क्या क्या नही कर सकते. वो रोहित के साथ मिल के कोई बड़ा हाथ मारेगी और फिर उसको छोड़ कर, सारी उम्र आराम से बिताएगी. अगर छोड़ ना भी पाई तो भी रोहित के साथ उम्र बिताने में भी उससे कोई प्राब्लम नही थी. रोहित एक हॅंडसम और इंटेलिजेंट आदमी था और उसने प्रूव कर दिया था कि वो डरपोक भी नही है. धीरे धीरे वो अपने मन में रोहित को फसाने का प्लान सोचने लगी.
उसकी सोच तब टूटी जब दरवाज़े की घंटी बजी. घंटी सुनते ही वो रोहित को रिसीव करने के लिए जल्दी से दरवाज़े की तरफ भागी और देखा कि सच मुच वो ही आया है. दरवाज़ा खोल के वो उससे लिपट गयी
"ओह्ह रोहित तुम्हें पता है कि मुझे तुम्हारी कितनी चिंता हो रही थी.. कैसे हो तुम.. फोन पे तुम थोड़े वीक लग रहे थे"
"हां थोड़ी वीकनेस है. पर ठीक हूँ मैं" रोहित ने सूप्राइज़्ड होकर बोला. उसने तान्या से ऐसे वेलकम की उम्मीद नही करी थी
"चलो अंदर आ जाओ" उसका हाथ पकड़ कर तान्या उसे अंदर ले आई. रह रह कर रोहित की नज़र तान्या के बदन पर जाती. उसने एक डेनिम की शॉर्ट्स और स्पोर्ट्स ब्रा पहने हुए थे. संगमरमर की तरह का उसका बदन नुमाइश पे लगा हुआ था और उसको देख के रोहित का ईमान डोल रहा था. उसकी महकी खुश्बू रोहित को और दीवाना बना रही थी और उसके हिलते होठों को देखकर रोहित किसी और ही दुनिया में खोता जा रहा था.. "तुम कुछ सुन भी रहे हो कि नही" जब तान्या ने बोला तो रोहित का ध्यान टूटा
"नही.. मतलब हां.. मतलब मेरा सर बहुत दुख रहा है.. मुझे अभी कुछ नही सुन-ना"
"तो फिर तुम यहाँ आए क्यूँ हो" तान्या को पता चल चुका था कि उसका जादू कुछ कुछ असर करने लग गया है रोहित पे
"तान्या मैं कल के बारे में बात करना चाहता था"
"हां. वो बात तो मुझे भी सुन-नी थी. कल मैने देखा था. तुम सच मुच उड़ रहे थे" तान्या ने हैरत में अपनी आखें बड़ी बड़ी करते हुए बोला.
"हां टान्या. मुझे पता नही यह कैसा होता है और मेरे साथ क्यूँ होता है, पर मैं सच मुच उड़ सकता हूँ" उसकी आँखों में खोते हुए रोहित ने बोला
"मतलब तुम आज के ज़माने के सूपरमन हो ना" अपनी पलकें झपकाती हुई तान्या बोली
"मुझे कुछ पता नही है तान्या. कुछ समझ नही आता. बस एक दरख़्वास्त है कि हम दोनो के अलावा तुम किसी और को यह बात मत बताना. मैं नही जान-ता कि लोगों का क्या रिक्षन रहेगा इस बात पे. जब मेरे लिए ही यकीन करना इतना मुश्किल है तो औरों के लिए तो और भी मुश्किल होगा"
"तुम मेरा विश्वास करो रोहित. मैं यह बात किसी को नही बताउन्गी. यह राज़ मेरे अंदर ही दबा रहेगा." तान्या ने उस का हाथ अपने हाथ से सहलाते करते हुए कहा.
इतनी सुंदर लड़की झूठ नही बोल सकती. ऐसा सोच कर रोहित का मन उसपर विश्वास करने को हो गया. पता नही क्यूँ आज उसकी नज़रें तान्या से हट ही नही रही थी. यह तान्या की ड्रेस के कारण था या किसी और कारण से, उसे पता नही.. पर आज तान्या उसको बहुत सेक्सी लग रही थी. वो सोचने लगा कि पहले उसने क्यूँ नही तान्या को इन नज़रों से देखा, अगर देख लिया होता तो शायद प्लेन से ही ट्राइ कर रहा होता उसके लिए. उसका मन कर रहा था कि बस यूँ ही तान्या को देखता रहे और वक़्त कभी ना थमे. उसके ऐसे घूर्ने से तान्या भी थोड़ा अनकंफर्टबल महसूस कर रही थी. हालाँकि उसने पूरा प्लान सोच समझ कर ही यह चाल चली थी, पर फिर भी जिस तरह से रोहित उसको घूर रहा था, उसको थोड़ा अजीब सा लग रहा था. "रोहित तुम कुछ खाओगे" कहते हुए वो उठी.
"हां. कुछ भी बना दो. बहुत भूख लग रही है"
"तुम लेट जाओ. मैं कुछ बना के लाती हूँ"
"यार तुम तो मुझे पूरा पेशेंट की तरह ट्रीट कर रही हो. नही लेटना मुझे. मैं भी हेल्प कर देता हूँ थोड़ी" कह कर वो उठ गया. तान्या ने भी मना नही किया और दोनो इधर उधर की गप्पें मारते हुए किचन में पहुँच गये और खाना बनाने लगे.
"अर्रे यार.. मैने अंकल को पहले ही कहा था कि शादी की बात सिर्फ़ पेरेंट्स से ही करें... चलो फोन पे बात कर लेंगे.. अपना फोन में पूरा टॉक टाइम रखना... इज़्ड कॉल्स महनगी होती हैं"
"ऐसी कोई बात नहीं हैं... उन्होने तान्या और रोहित को भी बुलाया है..."
"रोहित तो मेरे साथ ही था सुबह से.. उसको तो कोई फोन नही आया.. कहीं तुम मुझे अकेले में बुला कर मेरी इज़्ज़त पे हाथ डालना तो नहीं चाहती दिया"
"इन युवर ड्रीम्स बिट्टू..."
"वाह.. क्या ड्रीम्स होंगी वो भी... मैं, तुम और हमारा अपना खेत"
"शट अप... कल मिलते हैं.. मुझे रोहित को भी फोन करके बोलना है"
"ओके देन" खेकर बिट्टू ने फोन रख दिया.
"हेलो"
"इस दट तान्या"
"यस"
"तान्या रोहित बोल रहा हूँ"
"ओह्ह हाई रोहित. तुम्हार तबीयत कैसी है? हाथ कैसा है तुम्हारा?"
"अब मैं ठीक हूँ. मुझे तुमसे मिलना है तान्या"
"क्यूँ नही.. कभी भी बोलो मिल लेंगे.."
"अभी.. अभी आ रहा हूँ मैं वहाँ.. अपना अड्रेस दो"
"अभी ?? हां लिख लो अड्रेस... और हां .. उड़ के मत आना... "हँसते हुए तान्या ने अपना अड्रेस लिखवा दिया
"मैं 30 मिनट में आता हूँ तान्या" कह कर रोहित ने फोन रख दिया. वो अपने बाथरूम में जा कर अच्छी तरह से नहाया. उसे अभी भी कमज़ोरी लग रही थी. उसको खून की उल्टी एक बार और हुई और उसे थोड़ा अच्छा लगने लगा. शायद उसकी बॉडी बिट्टू का खून रिजेक्ट कर रही थी. पर अब उसको डर नही था क्यूंकी अब उसके घाव भर चुके थे. नहा धो के वो तय्यार हुआ और टॅक्सी ले कर तान्या के बताए पते पर चला गया.
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उधर तान्या के मन में एक प्लान बन रहा था. देर सवेर किसी तरह से रोहित को पता चल ही जाएगा कि उसके पास भी पवर्स हैं.. खास कर के अगर उसको कल की डेत्स के बारे में पता चलेगा तो क्यूंकी एक भी बंदा गोली लगने से नही मरा था. उसको लगा कि क्यूँ ना वो खुद ही रोहित को अपनी सच्चाई बता दे. शायद बिट्टू ने उसको कुछ बताया हुआ था जिसके कारण वो अधमरी हालत में भी बिट्टू को याद कर रहा था. लेकिन उसपर अपनी पवर्स ज़ाहिर करने से पहले तान्या को उसको अपने वश में करना होगा. रोहित को अपने प्यार के जाल में इस कदर फसाना होगा के वो चाहकर भी कभी उससे अलग ना हो पाए. वो सोचने लगी कि अगर वो और रोहित मिल जायें तो क्या क्या नही कर सकते. वो रोहित के साथ मिल के कोई बड़ा हाथ मारेगी और फिर उसको छोड़ कर, सारी उम्र आराम से बिताएगी. अगर छोड़ ना भी पाई तो भी रोहित के साथ उम्र बिताने में भी उससे कोई प्राब्लम नही थी. रोहित एक हॅंडसम और इंटेलिजेंट आदमी था और उसने प्रूव कर दिया था कि वो डरपोक भी नही है. धीरे धीरे वो अपने मन में रोहित को फसाने का प्लान सोचने लगी.
उसकी सोच तब टूटी जब दरवाज़े की घंटी बजी. घंटी सुनते ही वो रोहित को रिसीव करने के लिए जल्दी से दरवाज़े की तरफ भागी और देखा कि सच मुच वो ही आया है. दरवाज़ा खोल के वो उससे लिपट गयी
"ओह्ह रोहित तुम्हें पता है कि मुझे तुम्हारी कितनी चिंता हो रही थी.. कैसे हो तुम.. फोन पे तुम थोड़े वीक लग रहे थे"
"हां थोड़ी वीकनेस है. पर ठीक हूँ मैं" रोहित ने सूप्राइज़्ड होकर बोला. उसने तान्या से ऐसे वेलकम की उम्मीद नही करी थी
"चलो अंदर आ जाओ" उसका हाथ पकड़ कर तान्या उसे अंदर ले आई. रह रह कर रोहित की नज़र तान्या के बदन पर जाती. उसने एक डेनिम की शॉर्ट्स और स्पोर्ट्स ब्रा पहने हुए थे. संगमरमर की तरह का उसका बदन नुमाइश पे लगा हुआ था और उसको देख के रोहित का ईमान डोल रहा था. उसकी महकी खुश्बू रोहित को और दीवाना बना रही थी और उसके हिलते होठों को देखकर रोहित किसी और ही दुनिया में खोता जा रहा था.. "तुम कुछ सुन भी रहे हो कि नही" जब तान्या ने बोला तो रोहित का ध्यान टूटा
"नही.. मतलब हां.. मतलब मेरा सर बहुत दुख रहा है.. मुझे अभी कुछ नही सुन-ना"
"तो फिर तुम यहाँ आए क्यूँ हो" तान्या को पता चल चुका था कि उसका जादू कुछ कुछ असर करने लग गया है रोहित पे
"तान्या मैं कल के बारे में बात करना चाहता था"
"हां. वो बात तो मुझे भी सुन-नी थी. कल मैने देखा था. तुम सच मुच उड़ रहे थे" तान्या ने हैरत में अपनी आखें बड़ी बड़ी करते हुए बोला.
"हां टान्या. मुझे पता नही यह कैसा होता है और मेरे साथ क्यूँ होता है, पर मैं सच मुच उड़ सकता हूँ" उसकी आँखों में खोते हुए रोहित ने बोला
"मतलब तुम आज के ज़माने के सूपरमन हो ना" अपनी पलकें झपकाती हुई तान्या बोली
"मुझे कुछ पता नही है तान्या. कुछ समझ नही आता. बस एक दरख़्वास्त है कि हम दोनो के अलावा तुम किसी और को यह बात मत बताना. मैं नही जान-ता कि लोगों का क्या रिक्षन रहेगा इस बात पे. जब मेरे लिए ही यकीन करना इतना मुश्किल है तो औरों के लिए तो और भी मुश्किल होगा"
"तुम मेरा विश्वास करो रोहित. मैं यह बात किसी को नही बताउन्गी. यह राज़ मेरे अंदर ही दबा रहेगा." तान्या ने उस का हाथ अपने हाथ से सहलाते करते हुए कहा.
इतनी सुंदर लड़की झूठ नही बोल सकती. ऐसा सोच कर रोहित का मन उसपर विश्वास करने को हो गया. पता नही क्यूँ आज उसकी नज़रें तान्या से हट ही नही रही थी. यह तान्या की ड्रेस के कारण था या किसी और कारण से, उसे पता नही.. पर आज तान्या उसको बहुत सेक्सी लग रही थी. वो सोचने लगा कि पहले उसने क्यूँ नही तान्या को इन नज़रों से देखा, अगर देख लिया होता तो शायद प्लेन से ही ट्राइ कर रहा होता उसके लिए. उसका मन कर रहा था कि बस यूँ ही तान्या को देखता रहे और वक़्त कभी ना थमे. उसके ऐसे घूर्ने से तान्या भी थोड़ा अनकंफर्टबल महसूस कर रही थी. हालाँकि उसने पूरा प्लान सोच समझ कर ही यह चाल चली थी, पर फिर भी जिस तरह से रोहित उसको घूर रहा था, उसको थोड़ा अजीब सा लग रहा था. "रोहित तुम कुछ खाओगे" कहते हुए वो उठी.
"हां. कुछ भी बना दो. बहुत भूख लग रही है"
"तुम लेट जाओ. मैं कुछ बना के लाती हूँ"
"यार तुम तो मुझे पूरा पेशेंट की तरह ट्रीट कर रही हो. नही लेटना मुझे. मैं भी हेल्प कर देता हूँ थोड़ी" कह कर वो उठ गया. तान्या ने भी मना नही किया और दोनो इधर उधर की गप्पें मारते हुए किचन में पहुँच गये और खाना बनाने लगे.