S
StoryPublisher
Guest
"आहहह भैया" कंचन ने नरेश का हाथ अपनी चूत पर पडते ही सिसकते हुए कहा।
"क्या हुआ दीदी आपको अच्छा नहीं लग रहा है" नरेश ने अपने हाथ से वैसे ही कंचन की चूत को सहलाते हुए कहा।
"ओहहहहह भैया बुहत अच्छा महसूस हो रहा है" कंचन ने इस बार मज़े से अपनी आँखों को बंद करते हुए कहा । कंचन की चूत से उत्तेजना के मारे बुहत ज्यादा पानी निकल रहा था ।
"दीदी इस में से तो कुछ निकल रहा है" नरेश ने अपने हाथ को कंचन की चूत के छेद पर रखते हुए कहा। जहाँ से पानी की बूँदे निकल रही थी।
"आह्ह्ह्ह भैया यहीं तो कुछ हो रहा है" कंचन ने अपने भाई का हाथ अपनी चूत के छेद पर लगने से काँपते हुए बोली।
"ओहहहह दीदी आपकी चूत की स्मेल कितनी अच्छी है" नरेश ने इस बार झुककर अपना मूह अपनी बहन की चूत के पास करके अपने नाक से साँसों को पीछे की तरफ खींचते हुए कहा।
"आह्ह्ह्ह भैया मेरी हालत तो ज्यादा ख़राब हो रही है प्लीज कुछ करो ना" कंचन ने नरेश के मुँह से आती हुयी साँसों को अपनी चूत के इतना क़रीब महसूस करने से सिसकते हुए कहा ।
"दीदी क्या मैं इसे चूम सकता हूँ" नरेश ने अपने हाथ से कंचन की चूत के दाने को सहलाते हुए कहा।
"ओहहहह भैया मुझसे कुछ मत पूछो" कंचन ने नरेश की बात सुनकर सिसकते हुए कहा।
"ओहहहहह दीदी आप कितनी अच्छी हो" नरेश ने इतना कहा और अपना मूह नीचे करते हुए कंचन की चूत के छेद के पतले लबों को अपने होंठो से चूम लिया,
"आहहह शह भैया" नरेश के होंठ अपनी चूत के छेद पर लगते ही कंचन का पूरा जिस्म मज़े से सिहर उठा और उसने सिसकते हुए कहा।
"दीदी क्या हुआ आपको अच्छा नहीं लगा क्या?" नरेश ने कंचन की चूत को गौर से देखते हुए कहा।
"आहहह भैया मुझे बुहत अच्छा लगा था । वैसे ही करो ना" कंचन ने उत्तेजना के मारे अपने चूतडो को उछालते हुए कहा।
नरेश कंचन को गरम देखकर खुश होते हुए अपने होंठो को फिर से उसकी चूत के छेद पर रख दिया । नरेश इस बार अपने होंठो को कंचन की चूत के छेद पर रखे हुए ही उसके दाने को अपने हाथ से सहलाने लगा, कंचन की हालत बुहत खराब हो चुकी थी । वह ज़ोर से सिसक रही थी और उसका पूरा जिस्म कांप रहा था ।
"क्या हुआ दीदी आपको अच्छा नहीं लग रहा है" नरेश ने अपने हाथ से वैसे ही कंचन की चूत को सहलाते हुए कहा।
"ओहहहहह भैया बुहत अच्छा महसूस हो रहा है" कंचन ने इस बार मज़े से अपनी आँखों को बंद करते हुए कहा । कंचन की चूत से उत्तेजना के मारे बुहत ज्यादा पानी निकल रहा था ।
"दीदी इस में से तो कुछ निकल रहा है" नरेश ने अपने हाथ को कंचन की चूत के छेद पर रखते हुए कहा। जहाँ से पानी की बूँदे निकल रही थी।
"आह्ह्ह्ह भैया यहीं तो कुछ हो रहा है" कंचन ने अपने भाई का हाथ अपनी चूत के छेद पर लगने से काँपते हुए बोली।
"ओहहहह दीदी आपकी चूत की स्मेल कितनी अच्छी है" नरेश ने इस बार झुककर अपना मूह अपनी बहन की चूत के पास करके अपने नाक से साँसों को पीछे की तरफ खींचते हुए कहा।
"आह्ह्ह्ह भैया मेरी हालत तो ज्यादा ख़राब हो रही है प्लीज कुछ करो ना" कंचन ने नरेश के मुँह से आती हुयी साँसों को अपनी चूत के इतना क़रीब महसूस करने से सिसकते हुए कहा ।
"दीदी क्या मैं इसे चूम सकता हूँ" नरेश ने अपने हाथ से कंचन की चूत के दाने को सहलाते हुए कहा।
"ओहहहह भैया मुझसे कुछ मत पूछो" कंचन ने नरेश की बात सुनकर सिसकते हुए कहा।
"ओहहहहह दीदी आप कितनी अच्छी हो" नरेश ने इतना कहा और अपना मूह नीचे करते हुए कंचन की चूत के छेद के पतले लबों को अपने होंठो से चूम लिया,
"आहहह शह भैया" नरेश के होंठ अपनी चूत के छेद पर लगते ही कंचन का पूरा जिस्म मज़े से सिहर उठा और उसने सिसकते हुए कहा।
"दीदी क्या हुआ आपको अच्छा नहीं लगा क्या?" नरेश ने कंचन की चूत को गौर से देखते हुए कहा।
"आहहह भैया मुझे बुहत अच्छा लगा था । वैसे ही करो ना" कंचन ने उत्तेजना के मारे अपने चूतडो को उछालते हुए कहा।
नरेश कंचन को गरम देखकर खुश होते हुए अपने होंठो को फिर से उसकी चूत के छेद पर रख दिया । नरेश इस बार अपने होंठो को कंचन की चूत के छेद पर रखे हुए ही उसके दाने को अपने हाथ से सहलाने लगा, कंचन की हालत बुहत खराब हो चुकी थी । वह ज़ोर से सिसक रही थी और उसका पूरा जिस्म कांप रहा था ।