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परिवार(दि फैमिली) complete

"आहहह भैया" कंचन ने नरेश का हाथ अपनी चूत पर पडते ही सिसकते हुए कहा।

"क्या हुआ दीदी आपको अच्छा नहीं लग रहा है" नरेश ने अपने हाथ से वैसे ही कंचन की चूत को सहलाते हुए कहा।

"ओहहहहह भैया बुहत अच्छा महसूस हो रहा है" कंचन ने इस बार मज़े से अपनी आँखों को बंद करते हुए कहा । कंचन की चूत से उत्तेजना के मारे बुहत ज्यादा पानी निकल रहा था ।

"दीदी इस में से तो कुछ निकल रहा है" नरेश ने अपने हाथ को कंचन की चूत के छेद पर रखते हुए कहा। जहाँ से पानी की बूँदे निकल रही थी।

"आह्ह्ह्ह भैया यहीं तो कुछ हो रहा है" कंचन ने अपने भाई का हाथ अपनी चूत के छेद पर लगने से काँपते हुए बोली।

"ओहहहह दीदी आपकी चूत की स्मेल कितनी अच्छी है" नरेश ने इस बार झुककर अपना मूह अपनी बहन की चूत के पास करके अपने नाक से साँसों को पीछे की तरफ खींचते हुए कहा।

"आह्ह्ह्ह भैया मेरी हालत तो ज्यादा ख़राब हो रही है प्लीज कुछ करो ना" कंचन ने नरेश के मुँह से आती हुयी साँसों को अपनी चूत के इतना क़रीब महसूस करने से सिसकते हुए कहा ।

"दीदी क्या मैं इसे चूम सकता हूँ" नरेश ने अपने हाथ से कंचन की चूत के दाने को सहलाते हुए कहा।

"ओहहहह भैया मुझसे कुछ मत पूछो" कंचन ने नरेश की बात सुनकर सिसकते हुए कहा।

"ओहहहहह दीदी आप कितनी अच्छी हो" नरेश ने इतना कहा और अपना मूह नीचे करते हुए कंचन की चूत के छेद के पतले लबों को अपने होंठो से चूम लिया,

"आहहह शह भैया" नरेश के होंठ अपनी चूत के छेद पर लगते ही कंचन का पूरा जिस्म मज़े से सिहर उठा और उसने सिसकते हुए कहा।

"दीदी क्या हुआ आपको अच्छा नहीं लगा क्या?" नरेश ने कंचन की चूत को गौर से देखते हुए कहा।

"आहहह भैया मुझे बुहत अच्छा लगा था । वैसे ही करो ना" कंचन ने उत्तेजना के मारे अपने चूतडो को उछालते हुए कहा।

नरेश कंचन को गरम देखकर खुश होते हुए अपने होंठो को फिर से उसकी चूत के छेद पर रख दिया । नरेश इस बार अपने होंठो को कंचन की चूत के छेद पर रखे हुए ही उसके दाने को अपने हाथ से सहलाने लगा, कंचन की हालत बुहत खराब हो चुकी थी । वह ज़ोर से सिसक रही थी और उसका पूरा जिस्म कांप रहा था ।
 
नरेश के होंठ कंचन की चूत से निकालते हुए पानी से भीग चुके थे । नरेश ने अपने होंठो को कंचन की चूत से थोडा अलग करते हुए अपनी जीभ को निकालकर उसकी चूत के छेद से निकलते हुए पानी को चाटने लगा।

"ओहहहहह आहहह भैया" नरेश की जीभ को अपनी चूत पर लगते हुए कंचन उत्तेजना के मारे अपने चूतडों को ज़ोर से उछालते हुए सिसकने लगी । नरेश कुछ देर तक अपनी जीभ से कंचन की चूत को चाटने के बाद अपना मूह खोलकर उसकी चूत के पतले होंठो को पूरा अपने मूह में भरकर चूसने लगा ।

नरेश की इस हरकत से कंचन का पूरा जिस्म अकडने लगा । वह मज़े की एक नयी दुनिया में पुहंच चुकी थी। नरेश कंचन की चूत के होठो को बुहत ज़ोर से चूस रहा था । अचानक नरेश ने कंचन की चूत को अपने मूह से निकालते हुए उसकी चूत के लबों को अपने दांतों के बीच लेकर हल्का हल्का काटने लगा।

"उई भैया आहहहह काट क्यों रहे हो ओह्ह्ह्हह्ह्" कंचन नरेश की इस हरकत से ज़ोर से चीख़ने लगी। मगर अगले ही पल वह सब कुछ भूलकर अपनी आँखें बंद करते मज़े की एक नयी दुनिया में खो गई । कंचन की चूत से बुहत सारा पानी निकलने लगा और वह झरने लगी, नरेश ने कंचन को झरता हुआ देखकर अपनी जीभ से उसकी चूत से निकलते हुए पानी को चाटने लगा ।

कंचन झरते हुए बुहत ज़ोर से सिसक रही थी और उसने अपने दोनों हाथों से नरेश के सर को पकड़कर अपनी चूत पर दबा दिया था । कुछ देर बाद जब कंचन का झरना ख़तम हुआ तो उसने नरेश के सर से अपने हाथों को हटा दिया।

नरेश ने कंचन के हाथों के हटते ही अपना चेहरा ऊपर उठा दिया और कंचन की तरफ देखते हुए अपने होंठो पर लगे हुए उसके पानी को अपनी जीभ से चाटने लगा। नरेश का पूरा मूह कंचन की चूत के पानी से भीगा हुआ था, कंचन ने नरेश को अपनी तरफ घूरता हुआ देखकर शर्म से अपनी नज़रों को नीचे कर लिया ।

नरेश ने अपनी शर्ट उठाते हुए अपना मूह पोंछ दिया और कंचन के साइड में उसके साथ लेट गया । इधर इतनी देर से कंचन और नरेश का खेल देखकर शीला और विजय की हालत बुहत बिगड चुकी थी, वह एक दुसरे से अलग होकर बैठे थे विजय ने तो अपना अंडरवियर उतार दिया था और अपने हाथों से अपने लंड को सहला रहा था।
 
शीला भी अपनी चूत को पेंटी के ऊपर से सहला रही थी । विजय ने शीला के हाथ को पकडकर अपने लंड पर रख दिया, शीला भी बुहत गरम हो चुकी थी। अपना हाथ विजय के लंड पर पडते ही उसका हाथ अपने आप उस पर ऊपर नीचे होने लगा।

"आह्ह्ह्ह दीदी ज़रा इसे अपने मुँह में लो" शीला का नरम हाथ अपने लंड पर पडते ही विजय ने सिसकते हुए कहा ।

शीला विजय की बात सुनकर उसके नज़दीक आ गयी और नीचे झुकते हुए विजय के लंड के गुलाबी सुपाडे को चूम लिया।

"आह्ह्ह्ह साली मुँह में ले ना" विजय ने गरम होते हुए कहा । शीला ने इस बार अपनी जीभ निकाली और विजय के लंड के सुपाडे पर फिराने लगी ।

"ओहहहह साली क्यों तडपा रही हो" विजय ने शीला को बालों से पकडते हुए अपने लंड पर दबाते हुए कहा ।शीला ने फिर भी विजय के लंड को अपने मुँह में नहीं लिया और अपनी जीभ से उसके सुपाडे को चाटते हुए अपने हाथों से विजय की घंटे की तरह लटकती हुयी दोनों गोटियों को सहलाने लगी।

"ओहहहह साली तडपा क्यों रही हो। मुँह में ले ना" विजय ने सिसकते हुए कहा। शीला ने विजय की बात सुनकर अपना मुँह खोलते हुए उसके सुपाडे को अपने मूह में ले लीया और बुहत ज़ोर से चूसते हुए फिर से अपने मूह से निकाल दिया।

"आह्ह्ह्ह साली रंडी। इस अपने मुँह में लेती है या मैं ही कुछ करुं" विजय ने इस बार गुस्से से शीला की तरफ देखकर चिल्लाते हुए कहा ।

शीला ने इसबार विजय को धक्का देते हुए सीधा लिटा दिया और अपनी जीभ बाहर निकालकर विजय के लंड को ऊपर से नीचे तक चाटते हुए उसकी गोटयों की तरफ बढ़ने लगी । शीला विजय की गोटियों को अपनी जीभ से चाटते हुए उन्हें बारी बारी अपने मूह में लेकर चूसने लगी।

शीला की इस हरकत से विजय का पूरा जिस्म मज़े से काम्पने लगा और वह मज़े को बर्दाशत न करते हुए अपनी आँखों को बंद करके सिसकने लगा । शीला कुछ देर तक ऐसे ही उसकी गोटियों को चाटने के बाद अपने मुँह को खोलते हुए विजय के लंड को चूसने लगी ।

विजय कुछ देर तक शीला से लंड चुसवाने के बाद उसे बालों से पकडकर अपने ऊपर गिरा दिया और उसकी चुचियों को पागलो की तरह चाटने लाग, विजय ने शीला की चुचियों को चाटते हुए उसे सीधा बेड पर लिटा दिया और खुद उसके ऊपर आ गया।

विजय शीला की चुचियों को कुछ देर तक चूसने के बाद नीचे होते हुए उसके पेट को चूमते हुए उसकी पेंटी तक आ गया और अपने हाथों से शीला की पेंटी को उसके जिस्म से अलग कर दिया । शीला की पेंटी के उतरते ही उसकी रस टपकाती चूत नंगी होकर विजय के सामने आ गयी जिसे वह बड़े गौर से देखने लगा ।
 
विजय ने एक नज़र शीला की रस टपकाती चूत पर डाली और अपने होंठ उसकी चूत पर रख दिये।

"आआह्ह्ह्ह भैया" विजय के होंठ अपनी चूत पर महसूस होते ही शीला के मुँह से एक सिसकी निकल गयी । विजय शीला की चूत को अपने होंठो से चूमने के बाद अपना मूह उसकी चूत से थोडा ऊपर कर दिया ।

विजय के होंठ अपनी छूट से ऊपर उठते ही शीला उत्तेजना के मारे अपने गाँड को उछालते हुए विजय की तरफ देखने लगी । विजय ने अपनी जीभ को निकाला और शीला की चूत के दाने से लेकर उसकी चूत के छेद तक फिराते हुए फिर से अपना मुँह उसकी चूत से थोडा ऊपर उठा दिया।

"आह्ह्ह्ह विजय भैया क़ीक़ कर रहे हो" शीला ने इस बार उत्तेजना के मारे सिसककर अपने चूतडो को उछालते हुए विजय से कहा।

"क्या हुआ दीदी?" विजय ने शीला को ज्यादा तडपाते हुए कहा।

"ओहहहहहह भैया अपना मूह क्यों हटाया" शीला ने वैसे ही उत्तेजना के मारे सिसकते हुए कहा ।

विजय ने शीला की बात सुनकर अपनी जीभ को फिर से शीला की चूत के छेद पर रख दिया और उसकी चूत से निकलते हुए पानी को चाटने लगा।

"आह्ह्ह्ह इसशहहहह भैया ऐसे ही ओह्ह्ह्हह्ह्" शीला विजय की जीभ को अपनी चूत पर महसूस करते ही बुहत ज़ोर से सिसकते हुए अपने चूतडो को उछाल रही थी।

विजय कुछ देर तक ऐसे ही शीला की चूत को चाटने के बाद अपना मुँह उसकी चूत से हटा दिया और शीला की टांगों को उसके घुटनों तक मोड़ दिया । शीला की चूत अब बिलकुल खुलकर विजय की आँखों के सामने आ गयी, विजय ने अपने फनफनाते हुए लंड को अपने हाथ से पकडते हुए शीला की चूत पर रख दिया और बुहत ज़ोर से उसकी चूत पर ऊपर से नीचे घीसने लगा ।

"आआह्ह्ह्हह ओहह भैया क्यों तडपा रहे हो" विजय के ऐसा करने से शीला ने सिसकते हुए कहा।

"दीदी फिर क्या करुं?" विजय ने शीला को तडपता हुआ देखकर उसकी चूत पर अपना लंड ज़ोर से घिसते हुए बोला।
 
कंचन और नरेश भी शीला और विजय की तरफ ही देख रहे थे। उन दोनों की हालत भी ख़राब होने लगी थी ।नरेश ने अपने अंडरवियर को उतारकर कंचन के हाथ को अपने खडे लंड पर रख दिया था, कंचन भी बुहत गरम हो चुकी थी अपना हाथ नरेश के गरम लंड पर पडते ही उसका हाथ अपने आप उसके लंड पर ऊपर नीचे होने लगा ।

"आह्ह्ह्ह भैया डालो ना" शीला ने वैसे ही सिसककर अपने चूतडों को उछालते हुए विजय से कहा।

"क्या डालों दीदी" विजय ने शीला की आँखों में देखते हुए कहा।

"भइया आप भी अपना लंड डालो ना" शीला ने अपनी नज़रों को विजय से हटाकर शरमाते हुए कहा।

शीला के मूह से लंड जैसे शब्द सुनकर विजय का पूरा शरीर सिहर उठा।

"ओहहहह दीदी मैं अपना लंड कहाँ डालुँ" विजय ने अपना लंड जानबूझकर शीला की चूत के छेद में थोडा फंसाते हुए कहा।

"ओहहहहह भैया अपना लंड मेरी चूत में डाल दो ना" शीला से अब बर्दाशत नहीं हो रहा था। जिस वजह से उसने सिसकते हुए विजय से कह दिया ।

"ओहहहह दीदी" विजय का लंड शीला के मुँह से यह सब सुनकर ज्यादा फूलकर मोटा और लम्बा हो गया था ।विजय ने शीला की टांगों को अपने हाथों से पकडते हुए एक धक्का मार दिया।

"ओहहहहह भैया आराम से आपका तो बुहत मोटा है" शीला ने हल्का चीखते हुए कहा । विजय का लंड एक ही धक्के में शीला की चूत में अपनी जगह बनाता हुआ आधा घुस चूका था ।

नरेश की हालत उस वक्त देखने जैसी थी । उसका लंड बुहत ज्यादा तनकर कंचन के हाथों में झटके खा रहा था । नरेश ने कंचन के सर को पकडते हुए अपने लंड पर झुका दिया, कंचन भी उस वक्त बुहत गरम थी। नरेश का लंड अपने मुँह के इतने क़रीब देखकर उसने अपनी जीभ निकाली और नरेश के लंड पर ऊपर से नीचे तक फिराने लगी।

कंचन ने कुछ देर तक नरेश के लंड पर अपनी जीभ फिराने के बाद अपना मुँह खोलते हुए नरेश का लंड अपने मूह में जितना हो सकता था ले लीया और उसे अपने होंठो और जीभ से चूसने लगी । अपना लंड कंचन के मूह में जाते ही नरेश मज़े से सिसकते हुए एक नयी दुनिया में पुहंच गया, नरेश का लंड चूसते हुए भी कंचन अपने भाई और शीला की तरफ देख रही थी ।
 
अगला अपडेट बहुत ही धमाकेदार होगा।जिसमे ग्रुप सेक्स और बहनों की अदला बदली होनेवाली है।आप सभी को कमेंट के लिए थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अगला अपडेट जल्दी ही।कहानी के बारें में अपनी राय अवश्य दें।thanks
 
विजय शीला के मूह से चीख़ सुनकर अपने लंड को थोडा बाहर खींचा और बुहत ज़ोर के ३-४ धक्के मारकर अपना पूरा लंड शीला की चूत में घुसा दिया।

"उईई ओह्ह्ह्हह्हह भैया मेरी चूत आअह्ह्ह फट गई" विजय का पूरा लंड घुसते ही शीला के मूह से ज़ोर की चीख़ें निकलने लगी ।

"दीदी क्या हुआ अभी तो कह रही थी अपना लंड मेरी चूत में घुसाओ" विजय ने वैसे ही अपना पूरा लंड शीला की चूत में घुसाए हुए हँसकर कहा।

"आह्ह्ह्ह भैया आप बुहत गंदे हो" शीला ने सुबकते हुए कहा।

"दीदी आप चिंता मत करो थोडी ही देर में आप मेरे लंड को उछल उछल कर अपनी चूत में लोगी" विजय ने शीला की बात सुनकर अपना लंड उसकी चूत से बाहर खीचकर फिर से जड़ तक पेलते हुए कहा।

"ओहहहह भैया आपका बुहत मोटा है मुझे तो लग रहा है यह मेरी चूत को फाडकर ही दम लेगा" शीला ने विजय का लंड अपनी चूत में अंदर बाहर होने के कारण फिर से चील्लाते हुए कहा ।

"दीदी मेरा लंड आपकी चूत में पूरा तो घुस चूका है" विजय ने शीला की बात सुनकर अपने लंड को फिर से बाहर खीचते हुए कहा।

"आह्ह्ह्ह भैया पूरा तो घुस चूका है मगर इसने मेरी चूत को बुहत बुरी तरह फ़ैला रखा है" शीला ने विजय का लंड अपनी चूत से बाहर होते ही आह भरते हुए कहा।

विजय शीला की बात सुनकर फिर से अपना लंड उसकी चूत में जड़ तक घुसा दिया। मगर इस बार विजय ने फिर से अपने लंड को बाहर खीँच लिया । और ऐसे ही वह तेज़ी के साथ अपना लंड शीला की चूत में अंदर बाहर करने लगा।

"आह्ह्ह्ह इशह भैया आपने सही कहा था ओहहहह प्लीज ऐसे ही तेज़ी से चोदो मुझे" विजय का लंड अपनी चूत में अंदर बाहर होने से शीला ने ज़ोर से सिसकते हुए कहा । विजय का लंड अब शीला की चूत में अपनी जगह बना चूका था। इसीलिए शीला को अब विजय से चुदवाते हुए बुहत ज्यादा मजा आ रहा था ।

कंचन ने अब नरेश के लंड को अपने मुँह से निकाल दिया था और वह नरेश के साथ लेटकर शीला और अपने भाई की तरफ गौर से देखते हुए नरेश के लंड को सहला रही थी । नरेश भी अपने हाथ से कंचन की चूत को सहला रहा था और अपने मूह से उसकी चुचियों को चूमते चाटते हुए अपनी बहन और विजय को घूर रहा था ।
 
विजय अब अपने लंड को बुहत ज़ोर से शीला की चूत में अंदर बाहर कर रहा था और शीला ने भी अपनी टांगों को विजय की कमर में डाल दिया था और विजय के हर धक्के के साथ अपने चूतडों को उछालते हुए विजय से ताल से ताल मिला रही थी ।

विजय और शीला दोनों का जिस्म पूरी तरह पसीने से भीग चूका था । शीला झरने के बिलकुल क़रीब थी इसी लिए वह अपने चूतडों को बुहत ज़ोर से उछालते हुए विजय का लंड अपनी चूत में ले रही थी।

"यआह्ह्ह्ह ईश भैया ज़ोर से पेलो। फाड दो अपनी बहन की चु ओह्ह्ह्हह ऐसे ही में झड रही हू" शीला का जिस्म कुछ ही देर में अकडने लगा और वह बुहत ज़ोर से बड़बड़ाते हुए झरने लगी।

शीला कुछ देर तक अपनी आँखें बंद किये हुए झडती रही और पूरी तरह झरने के बाद अपनी आँखें खोल दी। विजय अब भी शीला को वैसे ही चोद रहा था और शीला की टाँगें विजय की कमर में फँसी हुयी थी।

"दीदी मजा आया" विजय ने शीला की आँखें खुलते ही उसे देखते हुए कहा ।

"भइया बुहत ज्यादा" शीला ने शर्म से अपनी नज़रों को नीचे करते हुए कहा । विजय ने अपना लंड शीला की चूत से खीचकर बाहर निकाल दिया और शीला को उल्टा लिटा दिया। विजय ने ३-४ ज़ोर के धक्के मारते हुए पीछे से अपना लंड शीला की चूत में जड़ तक पेल दिया।

विजय शीला के चूतडो को पकडकर उसे बुहत ज़ोर से पेलने लगा । कंचन और नरेश वैसे ही लेते हुए उन दोनों की तरफ देख रहे थे।

"आजहहह भैया आप क्यों चुप बैठे हैं। कंचन दीदी को चोदीये ना" शीला ने विजय से चुदवाते हुए नरेश की तरफ देखते हुए कहा ।

नरेश अपनी बहन की बात सुनकर कंचन की तरफ देखने लगा । कंचन बिना कुछ कहे नरेश के साइड से उठते हुए अपनी दोनों टांगों को फ़ैलाकर अपनी चूत को नरेश के लंड पर टीका दिया और अपने भाई की तरफ देखते हुए नरेश के लंड पर अपने वजन के साथ बैठने लगी।

कंचन जानबूझकर नरेश के लंड पर उल्टा होकर बैठी थी उसकी पीठ नरेश की तरफ थी और मूह विजय और शीला की तरफ।

"आह्ह्ह्ह नरेश भैया आपका लंड कितना सख्त है" नरेश का लंड अपनी चूत में जड़ तक घुसते ही कंचन ज़ोर से सिसकते हुए बोल रही थी ।
 
कंचन नरेश के लंड पर बुहत ज़ोर से ऊपर नीचे हो रही थी । जिस वजह से उसकी बड़ी बड़ी चुचियां विजय के सामने उछल रही थी । नरेश ने कंचन को कमर से पकड रखा था और उसे अपने लंड पर ऊपर नीचे करने में वह मदद कर रहा था, कंचन के भारी चूतडों को अपने लंड पर ऊपर नीचे होता हुआ देखकर नरेश का लंड कंचन की चूत में बुहत ज़ोर के झटके खा रहा था।

विजय अपनी बहन को ऐसे नरेश के लंड पर उछलता हुआ देखकर बुहत ज्यादा उत्तेजित होते हुए शीला की चूत में धक्के मारने लगा । विजय के लंड को बुहत ज़ोर से अपनी चूत में अंदर बाहर होने से शीला के मुँह से सिस्कियाँ निकल रही थी ।

कंचन इतनी देर से अपने भाई और शीला को देखकर गरम हो चुकी थी। इसीलिए नरेश के लंड पर उछलते हुए उसकी चूत से बुहत ज्यादा पानी निकल रहा था और कुछ ही देर में उसका पूरा जिस्म अकडने लगा।

कंचन झरने के बिलकुल क़रीब थी। इसीलिए वह नरेश के लंड पर बुहत तेज़ी के साथ उछल रही थी । कंचन के मूह से उत्तेजना के मारे बुहत ज़ोर किस सिस्कियाँ निकल रही थी और उसका पूरा जिस्म पसीने से भीग चूका था।

"आह्ह्ह्हह आहह भैया ओहहहह मैं झर रही हू" कंचन अचानक अपनी आँखें बंद करके पागलो की तरह नरेश के लंड पर उछलते हुए झरने लगी ।

विजय अपनी बहन को झडता हुआ देखकर अपने आपको भी रोक नहीं पाया और हाँफते हुए शीला की चूत में अपना वीर्य गिराने लगा । शीला अपनी चूत में विजय का गरम वीर्य को महसूस करते ही खुद भी आँखें बंद करके झरने लगी ।

विजय पूरी तरह झरने के बाद शीला से अलग होते हुए बेड पर सीधा लेट गया । शीला भी विजय के साथ साइड में लेट गई, कंचन पूरी तरह झरने के बाद नरेश के ऊपर से उठते हुए उसकी साइड में लेटकर हांफ रही थी, नरेश अभी तक झडा नहीं था इसीलिए वह उठकर कंचन की टांगों के बीच आ गया।
 
नरेश ने कंचन की टांगों को घुटनों तक मोड़ दिया और खुद नीचे झुककर उसकी चूत से निकलता हुए पानी को चाटने लगा । अपनी चूत पर नरेश की जीभ लगते ही कंचन फिर से गरम होने लगी और उसके मूह से सिस्कियाँ निकलने लगी, शीला और विजय बिलकुल शांत लेटे हुए कंचन और नरेश की तरफ देख रहे थे।

नरेश को कंचन की चूत चाटते हुए उसकी गांड का भूरा छेद नज़र आ गया जिसे देखकर नरेश का लंड ज्यादा झटके खाने लगा । नरेश अब कंचन की चूत पर अपनी जीभ को फिराते हुए उसकी गांड के भूरे छेद तक ले जा रहा था।

नरेश की जीभ अपनी गाँड पर लगते ही कंचन का पूरा जिस्म मज़े और गुदगुदी के अहसास से सिहरने लगा और उसके मूह से बुहत ज़ोर की सिस्कियाँ निकलने लगी । नरेश कंचन की सिस्कियाँ सुनकर अपनी जीभ को सिर्फ कंचन की गांड के भूरे छेद पर फिराने लगा।

नरेश कुछ देर कंचन की गांड को चाटने के बाद सीधा होते हुए अपना लंड उसकी चूत में घुसा दिया और बुहत तेज़ी के साथ कंचन को चोदने लगा । विजय का लंड अपनी बहन की चुदाई देखकर फिर से तनने लगा था। नरेश कुछ देर तक कंचन को ऐसे ही चोदने के बाद कंचन की चूत से अपना लंड निकालकर उसे उल्टा लिटा दिया और अपना लंड पीछे से उसकी चूत में डालकर उसे चोदने लगा।

विजय शीला के पास से उठकर कंचन के सामने आकर बैठ गया और उसकी आँखों में निहारने लगा।

"आह्ह्ह्ह भैया आप ओहहहहहह बुहत मजा आ रहा है" कंचन अपने भाई को अपने सामने देखकर जानबूझकर ज़ोर से सिसकने लगी । विजय ने एक नज़र अपनी बहन पर डाली और अपने होंठ उसके होंठो पर रख दिये ।

कंचन और विजय एक दुसरे के होंठो को बुहत ज़ोर से चूस रहे थे । कंचन तो मज़े के मारे जैसे हवा में उड़ रही थी । एक तरफ उसकी चूत को नरेश बुरी तरह चोद रहा था तो दूसरी तरफ उसका भाई उसके होंठो और जीभ को चाट रहा था।

शीला यह सब देखकर खुद को रोक नहीं पायी और वह घुटनों के बल चलते हुए अपने भाई नरेश के पास खडी हो गई । नरेश ने जैसे ही शीला को अपने सामने देखा उसने शीला को कमर से पकडते हुए उसकी एक चूचि को अपने मुँह में भर लिया और शीला की चूचि को चूसते हुए कंचन की चूत में ज़ोर जोर से धक्के मारने लगा ।
 
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