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परिवार(दि फैमिली) complete

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कंचन को अपने छोटे भाई पर इतना प्यार आ रहा था की अगर लोगों के देखने का डर न होता तो वह अपने भाई को कभी न छोड़ती । दोनों भाई बहन कुछ देर तक आपस में बैठकर बाते ही करने के बाद अपने अपने क्लासेज में चले गए ।

रेखा किचन में अभी खाना बनाने की तैयारी कर रही थी की अचानक उसे नरेश का ख्याल आया की वह इतनी देर से दिख ही नहीं रहा है आखिर क्या कर रहा है वह ।

रेखा किचन से निकलकर सीधा नरेश के कमरे में पुहंच गयी । दरवाज़ा खुला हुआ था अंदर पुहंचते ही रेखा ने देखा के नरेश वहां नहीं था, वह जाने ही वाली थी की उसे बाथरूम से पानी गिरने की आवज़ सुनायी दी।

नरेश कुछ देर तक बिस्तर पर लेटे रहने के बाद फ्रेश होने के लिए बाथरूम गया था । रेखा ने बेड की तरफ देखा वहां पर नरेश के कपडे पडे थे, रेखा मन ही मन में खुश होते हुए वहीँ पर बैठकर नरेश का इंतज़ार करने लगी ।

रेखा को यकीन था की नरेश सिर्फ टॉवल में ही बाहर निकलेगा क्योंकी उसके कपडे बेड पर पडे थे । नरेश नहाने के बाद अपने आपको बुहत ज़्यादा फ्रेश महसूस कर रहा था। उसका लंड अब भी तना हुआ था क्योंकी उसके ज़हन में अपना जिस्म साफ़ करते हुए उसे अपनी बहन का नंगा जिस्म नज़र आ रहा था ।

नरेश अपने जिस्म पर टॉवल लपेटकर बाहर निकलने लगा, पानी का आवज़ ख़त्म होते ही रेखा बेड से उठकर दरवाज़े पर जाकर खडी हो गई । रेखा नरेश को यह अहसास बिलकुल नहीं दिलाना चाहती थी की वह जान बूझकर उसको नंगा देखना चाहती है, नरेश जैसे ही दरवाज़ा खोलकर बाहर निकला रेखा भी सामने से आगे बढ़ने लगी ।

"भान्जे तुम्हें शर्म नहीं आती नंगे होकर बैठे हो और दरवाज़ा भी बंद नहीं किया" नरेश बेड की तरफ बढ़ रहा था की अचानक रेखा की आवज़ ने उसे चौंका दिया । नरेश के हाथ से इस अचानक हुयी आवाज़ से अपना टॉवल छूट गया और वह अपनी मामी के सामने बिलकुल नंगा हो गया।

"अरे बेशर्म इतना बड़ा साँप पाल रखा है कुछ तो शर्म करो" रेखा ने अपने भांजे के नंगा होते ही उसके खडे बड़े और मोटे लंड को घूरते हुए झूठा गुस्सा करते हुए कहा, नरेश ने अपनी मामी की बात सुनकर जल्दी से टॉवल उठा लिया और अपने आपको ढ़क लिया ।

"मामी आप अचानक क्या काम है" नरेश ने टॉवल लपेटने के बाद हकलाते हुए कहा।

"अरे मैं तो तुम्हें देखने आई थी की कहाँ चले गए। किचन में कुछ मदद कर देते मगर तुम तो यहाँ नंगे होकर अपनी मामी को ही अपना साँप दिखा कर डरा रहे हो" रेखा ने बड़ी बेशरमी से अपने भान्जे से कहा।
 
वो मामी आप जाओ में कपड़े पहन कर अभी आता हूँ" नरेश ने यों ही हकलाते हुए कहा।

"हा हाँ मैं तो जा रही हूँ मगर अपने साँप को सँभालकर रख। कॉलेज की लड़कियों को डराने के काम आएगा। अपनी मामी के सामने इसे छुपाकर रख" रेखा ने जाते हुए मन ही मन में खुश होते हुए कहा ।

नरेश अपनी मामी के जाते ही बुहत परेशान हो गया। आखिर आज हो क्या रहा है, वह अपने कपड़े पहनकर अपनी मामी के पास किचन में चला गया।

"आ गये मेरे लाडले भांजे, अपने साँप को तो सुला दिया या फिर से वह अपना फन उठाकर हमें डरायेगा?" रेखा ने अपने भान्जे के आते ही उसे छेडते हुए कहा।

"मामी आप इस उम्र में इतना डरती क्यों हो । आप ने ऐसे कई साँप अब तक निगल लिए होंगे" नरेश ने भी अपनी मामी को करारा जवाब देते हुए कहा।

"अरे भांजे कुछ तो शर्म कर कोई कॉलेज की लड़की नहीं पटी तो क्या इस साँप का डंक अपनी मामी को लगाओगे" रेखा ने बनावटी गुस्सा करते हुए कहा ।

"मामी कैसी बातें कर रही हो । मैं आपके बारे में ऐसा कैसे सोच सकता हूं। मगर क्या करुं यह साँप जिस ख़ूबसूरत चीज़ को देख ले बस खडा हो जाता है। मादरचोद यह भी नहीं समझता की यह मामी है या कोई और" नरेश ने अपनी मामी की तरफ देखते हुए कहा।

"भान्जे फिर इसको किसी ख़ूबसूरत चीज़ के बिल में घुसा दे वरना यह तुझे यूँ ही तंग करता रहेंगा" रेखा ने अपने भान्जे से वैसे ही बेशरमी से बात करते हुए कहा।

"मामी अब जब तक कोई दूसरी ख़ूबसूरत बला मिले तब तक यह साँप तो यों ही फनफनाता रहेंगा" नरेश ने अपनी पेण्ट के ऊपर ही अपने लंड को सहलाते हुए कहा।

"तेरी मम्मी से कहकर तुम्हारे साँप के लिए कोई परमानेंट बिल का इन्तज़ाम कर देती हूँ" रेखा ने नरेश की तरफ देखते हुए कहा।

"मामी फिर तो आपकी बुहत बड़ी महरबानी हो जायेगी और मेरा साँप भी हमेशा आपको दुआ देता रहेंगा" नरेश ने खुश होते हुए कहा।

"ठीक है चल अब एक काम करो मुझे वह बर्तन उठाना है । मुझे थोडा ऊपर उठाओ और हाँ अपने साँप को कण्ट्रोल में रखना कहीं वह ख़ुशी में अपनी मामी की बिल में न घुस जाए" रेखा ने अपने भांजे को बड़ी बेशरमी से कहा ।
 
मामी मेरे साँप का ऐसा नसीब कहाँ के आप जीतनी ख़ूबसूरत औरत की बिल में जाने का मौका मिले" नरेश अपनी मामी की बात सुनकर उसके क़रीब आते हुए कहा।

"चल बदमाश मेरी झूठी तारीफ मत कर" नरेश के क़रीब आते ही रेखा ने अपनी बाहों को ऊपर करते हुए कहा।

"मामी कसम से आप बुहत सूंदर हो, मेरा क्या दुनिया का हर साँप आप जैसी सूंदर औरत की बिल में जाना पसंद करेंगा" नरेश ने अपनी मामी की कमर में बाहें ड़ालते हुए उसे ऊपर उठाते हुए कहा।

"नलायक चुप करो मैं तुम्हारी माँ जैसी हूँ मेरे बारे में ऐसा सोचते हुए तुम्हें शर्म नहीं आती" रेखा ने अपने भांजे की मज़बूत बाहों में आते ही ऊपर से कुछ सामान उतारते हुए कहा।

"क्या करुं मामी मेरे साँप ने मुझे परेशान कर दिया है। इसीलिए ऐसी बातें ज़हन में आ रही हैं" नरेश ने अपनी मामी के नंगे गोरे पेट पर अपने होंठ रखते हुए कहा।

"आह्ह" नरेश के होंठ अपने नंगे पेट पर पडते ही रेखा के पूरे जिस्म में करंट के एक झटके की लहर दौड गई,

"क्या हुआ मामी" नरेश ने अपनी मामी से अन्जान बनते हुए कहा।

"कुछ नहीं भांजे, वह एक काक्रोच था" रेखा ने अपने आप पर काबू रखते हुए कहा।

"मामी थोडा ख़याल रखो यह काक्रोच बुहत शरारती होते हैं कहीं भी घुस जाते हैं । नरेश ने अपने होंठ अपनी मामी के गोर पेट पर ऊपर से नीचे तक फिराते हुए कहा ।

"वो तो मुझे पता है भांजे ज़रा यह तो लेना" रेखा ने इस बार अपनी सिसकी को अपने मुँह में ही दबाते हुए कहा।

नरेश ने जैसे ही अपना मुँह अपनी मामी के पेट से हटाते हुए ऊपर किया उसके होश ही उड़ गये।

रेखा की साड़ी का पल्लु उसकी चुचियों से नीचे गिरा हुआ था और उसके ब्लाउज से आधि चुचियां नंगी होकर नरेश को दिखाई दे रही थी, रेखा का ब्लाउज गर्मी होने के कारण पूरा भीग चूका था । जिस वजह से रेखा के ब्लाउज के अंदर की काली ब्रा बिलकुल साफ़ नज़र आ रही थी ।

"क्या देख रहे हो भांजे, कभी देखि नहीं क्या ऐसी चीजें" रेखा ने अपने भांजे को अपनी चुचियों की तरफ घूरता हुआ देखकर कहा । रेखा के हाथों में दो बर्तन थे।

"मामी बुहत देखे हैं मगर यह तो बिलकुल अनोखे और सब से ख़ूबसूरत हैं" नरेश ने अपनी मामी की चुचियों को यों ही देखते हुए कहा ।
 
"भान्जे इन में दूध रखती हूँ" रेखा ने बर्तनों को नीचे झुककर रखते हुए कहा।

"मामी कितना दूध रख सकते हैं इन में" नरेश ने अपनी मामी के नीचे होकर बर्तन रखने से उसकी दोनों चुचियों को बुहत नज़दीक से देखते हुए कहा ।

"भान्जे बुहत ज़्यादा दूध समां जाता है इन में" रेखा ने बर्तन रखने के बाद जान बूझकर अपनी चुचियां नरेश के मूह से रगडकर ऊपर करते हुए कहा।

"मामी कभी हमें भी तो दूध पीला दिया करो" नरेश ने फिर से अपनी मामी की चुचियों को देखते हुए कहा।

"भान्जे कहो तो अभी गरम गरम पिला दूँ" रेखा ने फिर से दूसरा एक बर्तन उठाकर नीचे झुककर उसे रखते हुए कहा । रेखा के झुकने से उसकी बड़ी बड़ी चुचियां सीधा नरेश के आँखों के सामने आ गयी ।

"भान्जे क्या कहते हो पियोगे न गरम दूध" रेखा ने नरेश को अपनी चुचियों में खोया हुआ देखकर उससे फिर कहा।

"हा मामी क्यों नहीं पीयेंगे ताज़ा दूध है हम तो ज़रूर पिएँगे" नरेश ने यह कहते हुए इस बार अपने होंठ अपनी मामी की चुचियों के बने उभार पर रख दिये ।

"यआह्ह्ह्ह हहह क्या कर रहे हो भांजे मुझे नीचे उतारो तुम्हें अभी गरम दूध बनाकर देती हूं, नालायक़ तुम तो अपनी मामी की चुचियां का दूध ही पीने लगे" रेखा ने अपने भांजे के होंठ अपने उभारों पर पड़ते ही सिसकते हुए कहा ।

रेखा अपने भांजे को कुछ तडपाना चाहती थी इसीलिए उसने उसे टोक दिया । नरेश अपनी मामी की बात सुनकर होश में आते हुए अपनी मामी को नीचे उतार दिया।

"अरे हमारा भंजा तो बुहत थक गया, जाओ कुर्सी पर बैठो में तुम्हारे लिए दूध बनाती हूँ" रेखा ने नीचे उतरते ही अपने भांजे के माथे से पसीना पोछते हुए कहा।

नरेश की हालत बुहत बिगड चुकी थी, उसका लंड तनकर उसकी पेण्ट को फटने के लिए तैयार था । नरेश का दिल कर रहा था की अभी जाकर अपनी मामी को पकडकर अपना लंड उसकी चूत में घुसा दे, मगर वह ऐसा नहीं कर सकता था ।

नरेश किचन में ही कुर्सी पर बैठ गया, रेखा फ्रीजर से दूध निकालकर अपने भांजे के लिए गरम करने लगी । कुछ ही देर में दूध गरम हो गया जिसे वह एक गिलास में ड़ालने लगी ।

रेखा दूध को गिलास में ड़ालते हुए उसे लेकर नरेश के पास आ गयी । नरेश अपना कन्धा झुकाये हुए कुर्सी पर बैठा था जैसे कुछ सोच रहा हो।

"भान्जे गरम दूध" रेखा ने नीचे झुककर दूध का ग्लॉस अपने भांजे के सामने कर दिया, मगर नीचे झुकने से रेखा की साड़ी का पल्लु उसकी चुचियों से हट गया और उसकी चुचियां फिर से आधि नंगी होकर नरेश के आँखों के सामने आ गई ।

नरेश जो अपने ख्यालों में बैठा था अपनी मामी की आवाज़ सुनकर जैसे ही अपना कन्धा ऊपर किया उसकी हालत फिर से खराब होने लगी, उसकी मामी की चुचियां आधि नंगी उसके सामने थी । नरेश की नज़रें अपनी मामी की नंगी चुचियों में ही अटक गयी।
 
" नालायक इधर क्या देख रहे हो। यह लो गरम दूध, तुम तो बिलकुल ही बेशर्म हो गये हो। अपनी मामी की चुचियों के पीछे पड़ गए हो । अगर तुम्हें इनका दूध पीना है तो अपनी माँ से कहकर शादी कर ले और अपनी बीवी की चुचियों का दूध पी" रेखा ने नरेश को अपनी चुचियों की तरफ देखता हुआ पाकर गुस्से से कहा ।

"मामी आपकी यह हैं ही ऐसी के कोई भी देखकर इनका दीवाना हो जायेगा" नरेश ने अपनी मामी के हाथ से दूध का ग्लॉस लेते हुए उसकी चुचियों की तारीफ करते हुए कहा।

"शटअप मैं सब जानती हूँ यह झूठी तारीफ करके तुम आजकल की छोरियों को फँसा सकते हो हमें नही" रेखा ने ग्लास के दूध पीते ही उसके हाथ से गिलास लेते हुए कहा।

"मामी आपको क्या पता की आजकल की लड़कियाँ तारीफ सुनकर पट जाती हें?" नरेश ने अपनी मामी से पूछा।

"क्यों बेटा हमने अपनी सारी उम्र ऐसे ही नहीं बिता दी। हमें पता है की तुम लड़के छोरियों को फ़साने के लिए उनकी झूठमूठ की तारीफ कर देते हो और वह भी खुश होकर अपना सब कुछ तुम पर निवछावर कर देती हैं" रेखा ने अपने भांजे को जवाब देते हुए कहा और नीचे बैठकर आटे को थाल में डालकर गूंथने लगी।

रेखा के आटे को गूंथने से उसकी साड़ी का पल्लु फिर से उसकी चुचियों से हट गया। मगर उसका ख़याल वहां नहीं था इसीलिए वह आटे को गूंथने में ही मसरुफ रही । नरेश जो कुर्सी पर बैठा था अपनी मामी की चुचियों से पल्लु के हट जाने से अपनी आखों को वहीँ पर जमा लिया ।

रेखा के नीचे बैठने से और आटे को ज़ोर लगाकर गूंथने की वजह से नरेश को उसकी चुचियां तकरीबन ८०% तक नज़र आने लगी । नरेश का लंड इतना तन चूका था की उसे अपने लंड में फिर से दर्द होने लगा।

नरेश का हाथ अपने आप अपनी पेण्ट पर चला गया और अपनी मामी की चुचियों को देखते हुए अपने लंड को पेण्ट के ऊपर से ही सहलाने लगा । रेखा ने अचानक जैसे ही अपनी नज़रें उठाये उसने देखा की उसका भान्जा अपने लंड को सहला रहा है और उसकी नज़र सीधे उसकी चुचियों की तरफ है, तभी रेखा को ख़याल आया की उसकी चुचियों से पल्लु हटा हुआ है। इसेलिए उसका भान्जा उसकी तरफ देख कर ठण्डा हो रहा है।

"भान्जे कुछ कण्ट्रोल रख अपने ऊपर अपनी मामी की चुचियों को देखकर अपने लंड को सहलाते हुए शर्म नहीं आती तुझे" रेखा ने अपने पल्लु को बिना सही किये ही नरेश को टोक दिया।

"मामी क्या करों आपकी चुचियां बार बार हमें तंग कर रही हैं कहाँ से कण्ट्रोल करुं" नरेश अचानक अपनी मामी की आवाज़ सुनकर अपने लंड से अपना हाथ हटाते हुए कहा।
 
" बेटे तुम इधर हो?" अचानक मनीषा अपने बेटे को ढूँढ़ते हुए किचन में आ गयी।

रेखा ने अपनी भाभी को आता हुआ देखकर जल्दी से अपनी चुचियों को पल्लु से ढक लिया।

"जी मम्मी मैं इधर हूँ" नरेश ने अपनी माँ को जवाब देते हुए कहा ।

"बेटा हमें बाजार से कुछ ख़रीदना है हमारे साथ चलो" मनीषा ने किचन में आते ही अपने बेटे से कहा उसने गुलाबी रंग की नयी साड़ी पाहन रखी थी वह बिलकुल तैयार होकर आई थी ।

"ठीक है मम्मी हम भी ऐसे ही बैठे थे चलो" अपनी माँ की बात सुनकर नरेश ने उठते हुए उसके साथ जाने के लिए राज़ी होते हुए कहा।

नरेश अपनी माँ के साथ घर से निकलकर बाहर आ गया और बस स्टैंड पर बस का इंतज़ार करने लगे क्योंकी बाजार यहां से काफी दूर था । थोड़ी ही देर में बाजार की तरफ जाने वाली बस आ गयी, नरेश अपनी माँ के साथ जल्दी से बस में चढ गया ।

बस में अंदर आते ही नरेश और उसकी माँ को पता चला की इस बस में चढ़कर उन्होने गलती की है क्योंकी वहां पर बैठना तो छोड़ो। खडे होने की भी बुहत कम जगह थी।

"अरे भाई बुहत भीड़ है यहां" अचानक मनीषा के पीछे से एक शख्स से उससे सटकर खडे होते हुए कहा।

मानिषा को अपनी गांड पर उस शख्स का लंड चुभ रहा था । मनीषा ने आगे होने की कोशिश की मगर भीड इतनी थी की वह थोडा ही आगे होकर फँस गयी। उसके आगे उसका बेटा खडा था, मनीषा के थोडा आगे सरकने से उसकी चुचियां अपने बेटे के सीने में दब गयी ।

मानिषा को लगा की अब वह शख्स उससे दूर हो गया होगा। मगर दो मिनट में ही फिर से मनीषा को अपनी गांड पर कुछ चुभता हुआ महसूस हुआ ।

"बुहत भीड़ है मेंम साहब" मनीषा ने जैसे ही पीछे मुड़कर देखा तो उस काले रंग के शख्स ने अपने दाँत निकालते हुए कहा।

मानिषा को उस शख्स की शक्ल देखते ही बुहत गुस्सा आया मगर वह मजबूर थी। उसने अपना मुँह वापस फेर लिया । नरेश की हालत भी बिगडती जा रही थी वह पहले से अपनी मामी के टॉर्चर से बुहत गरम था और ऊपर से इस भीड में उसके सीने से उसे अपनी माँ की चुचियां दबने से उसकी हालत बिगडने लगी।

मानिषा को अब अपनी गांड के बिलकुल बीच में उस शख्स का लंड धक्के मारते हुआ महसूस होने लगा।मनीषा के होश ही उड़ने लगे वह शख्स जानबूझकर भीड का फायदा उठा रहा था।
 
मानिषा ने सोचा चलो साले को देखती हूँ की इस भारी भीड में और क्या करता है । वह शख्स मनीषा का कोई विरोध न पाकर अपने दोनों हाथों से मनीषा के दोनों चुतडो को पकडते हुए अपने लंड पर दबाने लगा, उस शख्स के ऐसा करने से मनीषा के पूरे जिस्म में एक सुरसुरी दौडने लगी और उसका जिस्म गरम होने लगा।

मानिषा ने अब अपने चूतड़ खुद उस शख्स के लंड पर दबाने शुरू कर दिये । नरेश जो अपनी माँ की चुचियों को अपने सीने पर महसूस करके ठण्डा हो रहा था वह उस शख्स और अपनी माँ का खेल बुहत मज़े से देखने लगा, अपनी सगी माँ को एक गैर मरद के लंड पर अपने चूतडों को दबाते हुए देखकर नरेश का लंड उसकी पेण्ट में उबाल मचाने लगा ।

वह शख्स अचानक थोडा पीछे हट गया। मनीषा के समझ में नहीं आया की वह शख्स क्यों पीछे हट गया है। मगर दुसरे ही पल वह शख्स फिर से मनीषा से सट गया । उस शख्स ने मनीषा के एक हाथ को पकड कर अपने लंड पर रख दिया था । मनीषा अपने हाथ उस शख्स के लंड पर लगते ही कांप उठी। क्योंकी उस शख्स ने अपने लंड को अपनी पेण्ट से बाहर निकालकर बिलकुल नंगा कर दिया था ।

मानिषा ने अपना हाथ जल्दी से उसके लंड से हटा दिया । नरेश अपनी माँ और उस शख्स का सारा खेल देख रहा था। वह उस शख्स की बहादुरी पर हैंरान रह गया, उस शख्स ने इस बार मनीषा की साड़ी को थोडा ऊपर करते हुए अपने लंड को उसकी पेंटी के ऊपर मनीषा की गांड पर रगडने लगा ।
 
दोस्तों आपलोगों के सहयोग के लिए बहुत बहुत थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अगला अपडेट जल्दी ही।कहानी के बारें में अपनी राय अवश्य दें।thanks
 
मनीषा ने साड़ी के नीचे पेटिकोट नहीं पहना था, उस शख्स का नंगा लंड सीधे अपनी पेंटी से टकराते ही उसको अपने पूरे शरीर में ज़ोर की सिहरन दौडने लगी । मनीषा को भी उस शख्स का लंड अपनी पेंटी पर रगडते हुए बुहत मजा दे रहा था ।

मानिषा को यह पता नहीं था की उस शख्स के साथ होने वाली सारी हरकत उसका बेटा भी देख रहा है । उस शख्स ने अब अपने दोनों हाथों को भी मनीषा की साड़ी के अंदर डाल दिया और उसके चुतडो को जो छोटी सी पेंटी में क़ैद थे अपने हाथों से मसलने लगा।

वह शख्स अपने हाथों से मनीषा के चूतडों को मसलते हुए अपने लंड को उसके चूतडों के बीच हल्के धक्के लगाने लगा । मनीषा को भी मजा आ रहा था इसीलिए वह ज़्यादा से ज़्यादा आगे झुकने की कोशिश कर रही थी ।

"मम्मी क्या हुया" नरेश ने अपनी मम्मी को अपनी तरफ झुकने से मन ही मन में मुस्कुराते हुए कहा।

"बेटा जाने क्यों चक्कर आ रहे हैं" मनीषा ने अपने बेटे के काँधे पर अपना सर रखकर अपने चूतडों को उस शख्स के लंड पर दबाते हुए कहा ।

"मम्मी भीड़ बुहत ज़्यादा है आप ऐसे ही खड़े रहिए मैं आपको गिरने नहीं दूंगा" नरेश ने अपने हाथों को अपनी माँ के पीठ पर रखकर उसकी चुचियों को अपने सीने की तरफ ज़ोर से दबाते हुए कहा ।

उस शख्स से अपने हाथों से मनीषा की पेंटी को भी थोडा नीचे कर दिया । मनीषा को कुछ समझ में नहीं आ रहा था । उसका पूरा जिस्म उस शख्स की हरक़तों से गरम हो चुका था और उसकी साँसें बुहत ज़ोर से चल रही थी । नरेश कुछ ज़्यादा देख नहीं पा रहा था उसे बस इतना पता था की वह शख्स उसकी माँ के चूतड़ो पर अपना लंड दबा रहा है।

वह शख्स अपने नंगे लंड को मनीषा की नंगे चुतडो पर सहलाते हुए उसकी गांड के छेद में ड़ालने की कोशिश करने लगा । मगर वह ऐसा करने में सफल नहीं हो पाया ।

उस शख्स ने अपने लंड को मनीषा के चूतडों से हटाते हुए अपनी ऊँगली से मनीषा को गांड से लेकर उसकी चूत तक सहलाने लगा । मनीषा की चूत पहले से ही बुहत गरम थी। उस शख्स की ऊँगली के लगते ही उसकी चूत से ज़्यादा पानी टपकने लगा ।

उस शख्स ने मनीषा का हाथ फिर से पकडते हुए अपने लंड पर रख दिया और अपनी ऊँगली से उसकी चूत को सहलाने लगा । मनीषा का हाथ उस शख्स के लंड पर पड़ते ही अपने आप उस पर आगे पीछे होने लगा ।

मानिषा को उस शख्स के तने हुए गरम लंड पर अपने हाथ के लगते ही जाने क्या हो गया उसकी साँसें बुहत ज़ोर से चलने लगी और उसका हाथ उस शख्स के लंड पर ज़ोर से चलने लगा। नरेश का लंड अपनी माँ का हाथ उस शख्स की पेण्ट तरफ जाता हुआ देखकर बुहत ज़ोर से अकड़कर झटके मारने लगा।
 
उस शख्स ने अपनी ऊँगली से मनीषा की चूत को सहलाते हुए उसकी चूत में अपनी ऊँगली को अंदर डाल दिया । मनीषा उस शख्स की ऊँगली को अपनी चूत में जाते ही अपनी सिसकी को अपने मूह में ही दबा दिया ।

मानिषा अपने हाथ से उस शख्स के लंड को ज़ोर से सहलाने लगी । कुछ देर तक दोनों का यह खेल चलते रहा और अचानक मनीषा का जिस्म अकडने लगा

उसकी चुचियों के दाने इतने सख्त हो गये की नरेश को अपनी माँ की चुचियों के दाने अपने सीने में चुभते हुए महसूस होने लगे ।

मानिषा की चूत झटके खाते हुए उस शख्स की ऊँगली पर पानी छोड़ने लगी, मनीषा ने झरते हुए अपना पूरा वज़न अपने बेटे पर डाल दिया और अपने हाथ को बुहत ज़ोर से उस शख्स के लंड पर दबाते हुए मज़े से अपने होंठ अपने बेटे के काँधे पर दबा दिया ।

वह शख्स भी मनीषा के हाथ की गर्मी बर्दाशत न कर सका और अपनी ऑंखें बंद करके झरने लगा । नरेश अपनी माँ का वजन अपने ऊपर पड़ते ही अपने हाथ से उसकी पीठ को सहलाने लगा। नरेश उस शख्स के चेहरे को देखकर समझ गया की वह झड़ गया है।

मानिषा का हाथ उस शख्स के झरने से उसके वीर्य से गन्दा हो गया। जिसे उसने अपनी साड़ी से साफ़ करते हुए सीधा हो गई । मनीषा जैसे ही सीधा हुयी उसे बुहत ज़ोर का झटका लगा क्योंके सीधा होते ही उसको अपने बेटे का लंड अपने पेट पर टकराता हुआ महसूस हुआ ।

नरेश का क़द बुहत लम्बा था जिस वजह से उसकी पेण्ट में बना हुआ लंड का उभार मनीषा के पेट पर रगड रहा था । मनीषा ने अपने बेटे के लंड पर बिना धयान दिए ही अपनी पेंटी को खींचकर ऊपर कर दिया।

अपना लंड अपनी माँ के पेट पर लगते ही नरेश के पूरे शरीर में झुरझुरी दौड़ गयी । नरेश ने अपनी माँ को पेंटी ऊपर करते हुए देख लिया, उसका लंड यह सोचकर बुहत ज़ोर से अकडकर झटके मारने लगा की उसकी माँ जब उस शख्स के लंड पर अपने चूतड़ रगड रही थी तो वह बिलकुल नंगी थी ।

नरेश अब जानबूझकर अपने लंड को आगे करते हुए अपनी माँ के पेट पर रगडने लगा।

"ये क्या लग रहा है मुझे पेट पर" मनीषा ने अपने हाथ से अपने पेट के ऊपर लगते हुए अपने बेटे के लंड को सहलाते हुए कहा।
 
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