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" हाहहहहह दीदी ओह्ह्ह्हह ज़ोर से चूसो बुहत मज़ा आ रहा है" विजय अपने लंड को अपनी बहन के नरम नरम गुलाबी रसीले होंठो के बीच महसूस करके ज़ोर से सिसकते हुए अपनी दीदी के बालों में हाथ डालकर उसे अपने लंड पर दबाते हुए बोला । कंचन ने अपना मुँह जितना हो सकता था। उतना खोलकर अपने भाई का लंड आधे से ज्यादा अंदर तक लेकर चूसने लगी। कंचन को अपने भाई का लंड चूसते हुए बुहत ज्यादा मज़ा आ रहा था । इसीलिए वह अपने भाई के लंड को बुहत ज़ोर और तेज़ी के साथ अपने मूह में अंदर बाहर कर रही थी ।
"ओहहहह दीदी आप बुहत अच्छी हो । आअह्ह्ह्ह आप का मूह कितना गरम है" विजय अपनी बहन को सर से पकडते हुए उसके मूह को बुहत ज़ोर से अपने लंड पर आगे पीछे कर रहा था, कंचन कुछ देर तक यों ही अपने भाई के लंड को चूसने के बाद अपने मूह से अपने भाई के लंड को निकालते हुए ज़ोर से हाँफने लगी । विजय ने अपनी बहन को देखते हुए उसे सीधा खडा कर दिया और अपनी बहन को उलटा करते हुए दीवार के सहारे खडा कर दिया ।
विजय अपने बहन के के पीछे घुटनों के बल बैठते हुए अपनी बहन के चूतडों पर अपना मूह रख दिया और अपनी बहन के चूतडों पर दांतों से काटने लगा।
"उई भैया क्या कर रहे हो दर्द होता है" कंचन ने अपने नरम चूतडों पर अपने भाई के होंठो पड़ते ही ज़ोर से सिसकते हुए कहा ।
"दीदी आपके चूतड़ कितने गोरे और नरम है की इन्हें अपने दांतों से चबाने का मन करता है" विजय ने अपनी बहन के चूतडों से अपना मूह हटाते हुए कहा और अपनी दीदी को कमर से पकड कर उसके चूतडो को पीछे की तरफ करके घोड़ी बना दिया । अब कंचन की चूत पीछे से निकल कर विजय के सामने आ गयी, विजय ने अपनी बहन की चूत को देखते हुए एक चुम्बन उसकी चूत पर देते हुए सीधा खडा हो गया।
विजय ने अपने खडे लंड को अपनी दीदी की चूत पर टीका दिया और अपनी बहन के चूतडों को पकडते हुए जोर का धक्का मार दिया।
"ओहहहहहह भैया धीरे दर्द हो रहा है" कंचन ने अपने भाई का आधा लंड एक ही झटके में पीछे से अपनी चूत में जाने से दर्द के मारे सिसकते हुए कहा ।
विजय ने अपनी बहन की बात का कोई जवाब दिए बगैर अपनी बहन की चूत में अपना आधा लंड ही बुहत ज़ोर से अंदर बाहर करने लगा।
"आआह्ह्ह्ह भैया आप तो सच में हमारी जान लेकर छोडेंगे ओह्ह्ह्हह बुहत मज़ा आ रहा है ज़ोर से डालो" कुछ ही देर में कंचन ने भी अपने चूतडो को अपने भाई के लंड पर पीछे की तरफ धक्के मारकर सिसकते हुए कहा।
"आआह्ह्ह्ह दीदी मरे आपके दुश्मन हम तो अपनी प्यारी दीदी को इतना मजा देना चाहते हैं की शादी के बाद भी आप हमें याद रखे" विजय ने अपनी दीदी की बात को सुनते हुए उसके चूतडो को अपने हाथों में पकडकर उसकी चूत में बुहत ज़ोर के धक्के मारते हुए अपना पूरा लंड उसकी चूत में पेल दिया।
"उईई भैया ओहहहहहह बुहत दर्द हो रहा है" कंचन पीछे से अपने भाई का पूरा लंड घुसते ही बुहत ज़ोर से चिल्लाते हुए बोली ।
"ओहहहह दीदी आप बुहत अच्छी हो । आअह्ह्ह्ह आप का मूह कितना गरम है" विजय अपनी बहन को सर से पकडते हुए उसके मूह को बुहत ज़ोर से अपने लंड पर आगे पीछे कर रहा था, कंचन कुछ देर तक यों ही अपने भाई के लंड को चूसने के बाद अपने मूह से अपने भाई के लंड को निकालते हुए ज़ोर से हाँफने लगी । विजय ने अपनी बहन को देखते हुए उसे सीधा खडा कर दिया और अपनी बहन को उलटा करते हुए दीवार के सहारे खडा कर दिया ।
विजय अपने बहन के के पीछे घुटनों के बल बैठते हुए अपनी बहन के चूतडों पर अपना मूह रख दिया और अपनी बहन के चूतडों पर दांतों से काटने लगा।
"उई भैया क्या कर रहे हो दर्द होता है" कंचन ने अपने नरम चूतडों पर अपने भाई के होंठो पड़ते ही ज़ोर से सिसकते हुए कहा ।
"दीदी आपके चूतड़ कितने गोरे और नरम है की इन्हें अपने दांतों से चबाने का मन करता है" विजय ने अपनी बहन के चूतडों से अपना मूह हटाते हुए कहा और अपनी दीदी को कमर से पकड कर उसके चूतडो को पीछे की तरफ करके घोड़ी बना दिया । अब कंचन की चूत पीछे से निकल कर विजय के सामने आ गयी, विजय ने अपनी बहन की चूत को देखते हुए एक चुम्बन उसकी चूत पर देते हुए सीधा खडा हो गया।
विजय ने अपने खडे लंड को अपनी दीदी की चूत पर टीका दिया और अपनी बहन के चूतडों को पकडते हुए जोर का धक्का मार दिया।
"ओहहहहहह भैया धीरे दर्द हो रहा है" कंचन ने अपने भाई का आधा लंड एक ही झटके में पीछे से अपनी चूत में जाने से दर्द के मारे सिसकते हुए कहा ।
विजय ने अपनी बहन की बात का कोई जवाब दिए बगैर अपनी बहन की चूत में अपना आधा लंड ही बुहत ज़ोर से अंदर बाहर करने लगा।
"आआह्ह्ह्ह भैया आप तो सच में हमारी जान लेकर छोडेंगे ओह्ह्ह्हह बुहत मज़ा आ रहा है ज़ोर से डालो" कुछ ही देर में कंचन ने भी अपने चूतडो को अपने भाई के लंड पर पीछे की तरफ धक्के मारकर सिसकते हुए कहा।
"आआह्ह्ह्ह दीदी मरे आपके दुश्मन हम तो अपनी प्यारी दीदी को इतना मजा देना चाहते हैं की शादी के बाद भी आप हमें याद रखे" विजय ने अपनी दीदी की बात को सुनते हुए उसके चूतडो को अपने हाथों में पकडकर उसकी चूत में बुहत ज़ोर के धक्के मारते हुए अपना पूरा लंड उसकी चूत में पेल दिया।
"उईई भैया ओहहहहहह बुहत दर्द हो रहा है" कंचन पीछे से अपने भाई का पूरा लंड घुसते ही बुहत ज़ोर से चिल्लाते हुए बोली ।