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परिवार(दि फैमिली) complete

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" हाहहहहह दीदी ओह्ह्ह्हह ज़ोर से चूसो बुहत मज़ा आ रहा है" विजय अपने लंड को अपनी बहन के नरम नरम गुलाबी रसीले होंठो के बीच महसूस करके ज़ोर से सिसकते हुए अपनी दीदी के बालों में हाथ डालकर उसे अपने लंड पर दबाते हुए बोला । कंचन ने अपना मुँह जितना हो सकता था। उतना खोलकर अपने भाई का लंड आधे से ज्यादा अंदर तक लेकर चूसने लगी। कंचन को अपने भाई का लंड चूसते हुए बुहत ज्यादा मज़ा आ रहा था । इसीलिए वह अपने भाई के लंड को बुहत ज़ोर और तेज़ी के साथ अपने मूह में अंदर बाहर कर रही थी ।

"ओहहहह दीदी आप बुहत अच्छी हो । आअह्ह्ह्ह आप का मूह कितना गरम है" विजय अपनी बहन को सर से पकडते हुए उसके मूह को बुहत ज़ोर से अपने लंड पर आगे पीछे कर रहा था, कंचन कुछ देर तक यों ही अपने भाई के लंड को चूसने के बाद अपने मूह से अपने भाई के लंड को निकालते हुए ज़ोर से हाँफने लगी । विजय ने अपनी बहन को देखते हुए उसे सीधा खडा कर दिया और अपनी बहन को उलटा करते हुए दीवार के सहारे खडा कर दिया ।

विजय अपने बहन के के पीछे घुटनों के बल बैठते हुए अपनी बहन के चूतडों पर अपना मूह रख दिया और अपनी बहन के चूतडों पर दांतों से काटने लगा।

"उई भैया क्या कर रहे हो दर्द होता है" कंचन ने अपने नरम चूतडों पर अपने भाई के होंठो पड़ते ही ज़ोर से सिसकते हुए कहा ।

"दीदी आपके चूतड़ कितने गोरे और नरम है की इन्हें अपने दांतों से चबाने का मन करता है" विजय ने अपनी बहन के चूतडों से अपना मूह हटाते हुए कहा और अपनी दीदी को कमर से पकड कर उसके चूतडो को पीछे की तरफ करके घोड़ी बना दिया । अब कंचन की चूत पीछे से निकल कर विजय के सामने आ गयी, विजय ने अपनी बहन की चूत को देखते हुए एक चुम्बन उसकी चूत पर देते हुए सीधा खडा हो गया।

विजय ने अपने खडे लंड को अपनी दीदी की चूत पर टीका दिया और अपनी बहन के चूतडों को पकडते हुए जोर का धक्का मार दिया।

"ओहहहहहह भैया धीरे दर्द हो रहा है" कंचन ने अपने भाई का आधा लंड एक ही झटके में पीछे से अपनी चूत में जाने से दर्द के मारे सिसकते हुए कहा ।

विजय ने अपनी बहन की बात का कोई जवाब दिए बगैर अपनी बहन की चूत में अपना आधा लंड ही बुहत ज़ोर से अंदर बाहर करने लगा।

"आआह्ह्ह्ह भैया आप तो सच में हमारी जान लेकर छोडेंगे ओह्ह्ह्हह बुहत मज़ा आ रहा है ज़ोर से डालो" कुछ ही देर में कंचन ने भी अपने चूतडो को अपने भाई के लंड पर पीछे की तरफ धक्के मारकर सिसकते हुए कहा।

"आआह्ह्ह्ह दीदी मरे आपके दुश्मन हम तो अपनी प्यारी दीदी को इतना मजा देना चाहते हैं की शादी के बाद भी आप हमें याद रखे" विजय ने अपनी दीदी की बात को सुनते हुए उसके चूतडो को अपने हाथों में पकडकर उसकी चूत में बुहत ज़ोर के धक्के मारते हुए अपना पूरा लंड उसकी चूत में पेल दिया।

"उईई भैया ओहहहहहह बुहत दर्द हो रहा है" कंचन पीछे से अपने भाई का पूरा लंड घुसते ही बुहत ज़ोर से चिल्लाते हुए बोली ।
 
विजय अपनी बहन के चिल्लाने की कोई परवाह न करते हुए अपनी दीदी की चूत में अपने लंड को बुहत तेज़ी के साथ उसकी चूत में अंदर बाहर करने लगा।

"आह्ह्ह्हह भैया हाँ ऐसे ही ओहहहह ज़ोर से धक्के लगाओ। मुझे बुहत मज़ा आ रहा है" कुछ ही देर में कंचन ने फिर से अपने भाई के साथ ताल से ताल मिलाकर चिल्लाते हुए कहने लगी । विजय अपनी बहन की बात सुनकर उसकी चूत में बुहत ज़ोर के धक्के मारने लगा ।

कंचन का उत्तेजना के मारे बुरा हाल था। उसकी चूत अब मज़े से बुहत ज़्यादा पानी छोड रही थी। जिस वजह से उसके भाई का लंड उसकी चूत में खच खच अंदर बाहर होते हुए पच पच की आवाज़ कर रहा था। ।अचानक कंचन का बदन अकडने लगा और वह बुहत ज़ोर से चिल्लाने लगी।

"ओहहहहह भैया तेज़ और तेज़ ओहहहह मैं आ रही हूँ फाड दो मेरी चूत" कंचन अपने चूतड़ो को जितना हो सकता था उतनी तेज़ी के साथ अपने भाई के लंड पर उछालते हुए बोली।

विजय अपनी बहन की बाते सुनकर उत्तेजना के मारे अपना पूरा लंड उसकी चूत से निकालकर बुहत ज़ोर से उसकी चूत में अंदर तक पेलने लगा । कंचन का अंग अंग अपना भाई के हर धक्के के साथ कांप उठता और मज़े से उसके मूह से सिस्किया निकल जाती ।

"हाहहहहह भैया ओह्ह्ह्हह मैं झड रही हूँ इसशःह्ह कंचन के मूह इतना ही निकला और वह अपनी आँखें बंद करके झरने लगी । कंचन ने झरते हुए अपने भाई के लंड पर अपने चूतडो को ज़ोर से मार रही थी और विजय भी अपना लंड अपनी बहन की चूत में बुहत ज़ोर से अंदर बाहर कर रहा था, कंचन की चूत से इतना पानी निकल रहा था की विजय के लंड के अंदर बाहर होते हुए पूरा बाथरूम फच फच की आवाज़ों से गूँजने लगा।

"आआह्ह्ह भाई मैं थक गयी हूँ यहाँ पर खडे खडे" कंचन ने पूरी तरह झरने के बाद अपने भाई से सिसकते हुए कहा । विजय अपनी बहन की बात सुनकर उसकी चूत से लंड को निकालते हुए उसे सीधा खडा कर दिया और उसे अपनी बाहों में भरकर ऊपर उठा दिया । कंचन ने अपनी दोनों टांगों को अपने भाई के दोनों तरफ कर दिया ।

कंचन का ऐसा करने से विजय का लंड उसकी चूत पर आकर टिक गया । विजय ने अपनी बहन की चूतडो को अपनी तरफ धक्का मार दिया। जिस वजह से उसका लंड उसकी बहन की चूत में पूरा घुस गया।

"अअअअअहःहः भैया क्या कर रहे हो" कंचन के मुँह से मज़े के मारे सिसकी निकल गयी ।
 
विजय अपनी बहन की चूत में यों ही अपना लंड घुसाये हुए उसे शावर के नीचे ले गया और उसकी चूत में अपने लंड को धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा । शावर का ठंडा पानी कंचन के पूरे बदन से होता हुआ उसकी चूत पर गिरने लगा। जहां पर विजय का लंड अंदर बाहर हो रहा था, कंचन की चूत में अब अपने भाई के लंड के साथ शावर का ठण्डा पानी भी अंदर बाहर होने लगा।

कंचन का पूरा जिस्म ठन्डे पानी के अहसास से फिर से गरम होने लगा और वह खुद भी अपने भाई के लंड पर अपने चूतडों को ऊपर नीचे करने लगी । कंचन के ऐसा करने से उसके चूत में उसके भाई का पूरा लंड घुसकर अंदर बाहर होने लगा और पूरे बाथरूम में थप थप की आवाज़ें गूँजने लगी ।

विजय ज्यादा देर तक अपनी बहन को इस पोजीशन में चुदाई नही कर पाया और उसे नीचे उतारते हुए शावर के नीचे घुटनों के बल उलटा लिटा दिया और अपना लंड उसकी चूत में पीछे से ड़ालते हुए बुहत ज़ोर से उसकी चूत को चोदने लगा।

विजय कुछ देर तक अपनी बहन की चूत में तेज़ी के साथ लंड अंदर बाहर करने के बाद हाँफने लगा।

"दीदी मैं झरने वाला हू" विजय ने अपनी बहन की चूत में ज़ोर से अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए कहा।

"आआह्ह्ह्ह भैया भर दो अपने वीर्य से मेरी प्यासी चूत को" कंचन ने भी ज़ोर से सिसकते हुए कहा ।

"आह्ह्ह्हह्ह दीदी मेरा निकल रहा है ओह्ह्ह्हह" यह कहते हुए विजय अपनी बहन की चूत में अपना लंड तेजी के साथ अंदर बाहर करते हुए हांफकर झरने लगा।

"ओहहहहह भैया आप का वीर्य कितना गरम है। आह्ह्ह्ह वह मेरी चूत की गहरायी में गिर रहा है आईई भैया में भी आ रही हू" कंचन अपने भाई का गरम वीर्य अपनी चूत में गिरता हुआ महसूस करके ज़ोर से चिल्लाते हुए खुद भी आँखें बंद करके झरने लगी।

दोनों भाई बहन कुछ देर तक यों ही साथ साथ झडने के बाद सीधा खडे हो गये और शावर से निकलते हुए पानी से नहाने लगे । विजय ने नहाने के बाद कंचन को अपनी गोद में उठाते हुए बाथरूम से निकल कर बेड पर लिटा दिया और खुद भी उसकी साइड में लेट गया ।
 
कंचन और विजय कुछ देर तक आपस में बाते करने के बाद एक दुसरे से गले लगकर यो ही नंगे सो गये । इधर शीला अपने भाई का इंतज़ार करते करते थक गयी और अपने हाथों से ही अपने आपको शांत करने लगी, वह कुछ देर की मेंहनत के बाद झड गयी और अपनी नाइटी को पहनकर बेड पर सो गयी ।

नरेश अपनी माँ को दो बार चोदने के बाद थक हारकर उसके कमरे से निकलते हुए अपने कमरे में आ गया। नरेश ने अपने कमरे में आते ही देखा की उसकी बहन सो चुकी है, नरेश भी बुहत थका हुआ था। वह अपनी दीदी के बगल में लेट गया और कुछ ही देर में वह नींद के आग़ोश में चला गया।

मानिषा भी अपने बेटे से दो बार चुदवाने के बाद आराम की नींद करने लगी । विजय की मोबाइल का अलारम बजने लगा वह चौँककर उठ गया और अपनी मोबाइल के अलारम को बंद करते हुए बाथरूम में चला गया। विजय उठकर पेशाब करने के लिए बाथरूम में चला गया ।

विजय ने सुबह के ५ बजे का अलारम अपनी मोबाइल पर सेट किया था, बाथरूम से लौटते ही वह अपनी बहन के जिस्म से चादर हटाकर उसे देखने लगा, विजय अपनी बहन के पैरों से होता हुआ उसकी दोनों टांगों को आपस में से अलग कर दिया।

कंचन की चूत के छेद को देखकर विजय का लंड तनने लगा, क्योंकी चुदाई से पहले कंचन की चूत के दोनों होंठ आपस में मिले हुए थे। मगर अब उसकी चूत का मूह थोडा खुल गया था । विजय अपने मूह को अपनी दीदी की चूत के पास ले जाकर सूँघने लगा ।

विजय की आँखें अपनी दीदी की चूत की गंध सूंघकर बंद होने लगी । क्योंकी उसे अपनी दीदी की चूत की गंध बुहत अच्छी लग रही थी । विजय को कंचन की चूत से उसके वीर्य और उसकी दीदी की चूत के पानी की मिली जुली ख़ुश्बू आ रही थी।

विजय कुछ देर तक अपनी दीदी की चूत को सूँघने के बाद अपनी जीभ को निकालकर अपनी बहन की चूत को चाटने लगा, कंचन जो गहरी नींद में थी अपने भैया की जीभ को अपनी चूत पर महसूस करके हिलने लगी ।विजय अपनी बहन की चूत को चाटते हुए अचानक अपनी जीभ को कडा करते हुए अपनी दीदी की चूत में डाल दिया ।

कंचन का जिस्म अपने भाई की जीभ के घुसते ही ज़ोर से काम्पने लगा, विजय अपनी बहन की चूत में पूरी तेज़ी के साथ अपनी जीभ को अंदर बाहर करने लगा। कंचन की नींद टूटने लगी और उसने अपनी आँखें खोलकर ज़ोर से सिसकते हुए अपने हाथों को नीचे करते हुए अपने भाई के सर को पकडकर अपनी चूत पर दबाने लगी।
 
विजय ने कुछ देर तक अपनी दीदी की चूत को अपनी जीभ से चोदने के बाद उसकी चूत से अपनी जीभ को निकाल दिया और सीधा होते हुए अपना तना हुआ लंड उसकी चूत पर रखते हुए एक ही झटके में उसे पूरा अपनी बहन की चूत में घुसा दिया।

"हाहहहहह भैया ओह्ह्ह्हह फिर से कर रहे हो" कंचन ने अपने भाई का लंड एक ही झटके में अपनी चूत में घूसने से दर्द से चीखते हुए कहा ।

"दीदी मेरा मन तो आपको सारी ज़िंदगी चोदने से भी नहीं भरेंगा" विजय यह कहते हुए अपनी दीदी की चूत में अपने लंड को ज़ोर से अंदर बाहर करने लगा।

"आआह्ह्ह्ह भैया आप ओह्ह्ह्हह ज़ोर से करो फ़ाड़ दो अपनी बहन की चूत को । बुहत मज़ा आ रहा है" कंचन भी अपने भाई की चुदाई से पूरी तरह नींद से जागते हुए चिल्लाकर अपने भाई को जोश दिलाते हुए कहने लगी।

विजय अपनी बहन की बात सुनकर उसे बुहत तेज़ी के साथ चोदने लगा । कंचन ने अपनी दोनों टांगों को अपने भाई की कमर में डाल दिया और बुहत ज़ोर से सिसकते हुए अपने भाई के लंड को अपनी चूत की गहराइयों में रगड देता हुआ महसूस करने लगी ।

विजय अपनी बहन को 15 मिनट तक कई एंगल्स में छोड़ते रहने के बाद हाँफते हुए उसकी चूत में झडने लगा । कंचन अपने भाई का वीर्य अपनी चूत में गिरता हुआ महसूस करके दूसरी बार झरने लगी। विजय पूरी तरह झरने के बाद अपने दीदी की चूत से अपना लंड निकालते हुए उसकी साइड में लेट गया।

"दीदी मैं अब अपने कमरे में जा रहा हूँ सुबह होने वाली है" विजय ने कुछ देर लेटे रहने के बाद बेड से उठकर अपने कपडे पहनते हुए कहा।

"भइया आपने तो मुझे चलने के क़ाबिल नहीं छोड़ा। किसी को पता चल गया तो" कंचन ने अपने भाई की बात को सुनकर उसे अपनी चिंता के बारे में बताते हुए कहा ।

"अरे पगली अब तुम चल सकती हो । वह तो पहली चुदाई की वजह से तुम्हें तकलीफ हो रही थी । मगर अब तुम्हारी चूत पूरी तरह खुल चूकी है । ज़रा उठकर देखो" विजय ने अपने कपड़े पहनने के बाद अपनी बहन के हाथ को पकडते हुए कहा।

कंचन अपने भाई की बात सुनने के बाद अपने भाई के हाथ को पकडकर उठने लगी । कंचन ने उठते हुए महसूस किया की उसे अब तकलीफ नहीं हो रही थी ।कंचन ने उठने के बाद अपने भाई के हाथ को छोडते हुए थोडा आगे चलि गयी और वापस आते हुए अपने भाई को गले लगाते हुए उसके होंठो को चूम लिया।

"भाइ आपने सही कहा था हमें बिलकुल तकलीफ नहीं हो रही है" कंचन ने खुश होते हुए कहा।

"ठीक है दीदी मैं जा रहा हू" विजय ने भी अपनी दीदी को एक चुम्मा देते हुए कहा और वहां से निकलकर अपने कमरे की तरफ जाने लगा।
 
विजय अपने कमरे के पास आकर दरवाज़े को खटकाने लगा, दरवाज़े के खटकाने से शीला की नींद टूट गयी और वह हडबडाकर उठते हुए दरवाज़ा खोलने चली गई।

"क्या हुआ भैया" दरवाज़ा खोलते ही शीला ने एक अँगड़ाई लेते हुए कहा ।

"दीदी आप कंचन दीदी के पास जाओ ना" विजय ने शीला को गौर से देखते हुए कहा।

"क्यों भैया पेट भर गया क्या। कैसी लगी हमारी कंचन दीदी आपको" शीला ने विजय की बात सुनकर उसे टोकते हुए कहा।

"क्या दीदी में समझा नही" विजय का लंड शीला के मूह से ऐसी बात सुनकर फिर से तनने लगा, विजय ने अपने लंड को आगे से दबाते हुए शीला से कहा।

"भइया अब इतने भोले भी मत बनो । तुम ने तो दीदी को खूब मजा दिए होंगे हमारी तरह थोडी सो गये होगे" शीला ने विजय की तरफ देखते हुए कहा ।

"क्यों दीदी नरेश भैया तो थे यहाँ फिर आप" विजय इतना कहकर चुप हो गया। शीला के मूह से ऐसी बातें सुनकर विजय का लंड अब झटके मारने लगा था।

"भइया माँ की तबीयत खराब थी तो वह भैया को अपने कमरे में ले गयी सर दबाने के लिए । पता नहीं वह कब उसके कमरे से निकलकर यहाँ आये" शीला ने फिर से अंगड़ाई लेते हुए कहा । शीला ने इस बार जानबूझकर अपनी चुचियों को जितना हो सकता था । आगे करते हुए अंगड़ाई ली ताकी उसका भाई उसकी चुचियों का फिगर सही तरीके से जान सके।

"दीदी आपका फिगर तो बुहत बढ़िया है, मगर नरेश भाई ने आपको जगाया नही" विजय ने शीला की चुचियों को बाहर की तरफ आने से गौर से देखकर उसकी तारीफ करते हुए उससे पूछा।

"नही भैया जाने क्या हो गया उसे" शीला ने यह कहते हुए बाथरूम का दरवाज़ा खोलते हुए उसमें घुस गयी। शीला ने बाथरूम का दरवाज़ा बंद नहीं किया और अपनी नाइटी को उतार दिया ।

विजय के दिल की धडकनें शीला के जिस्म को सिर्फ छोटी सी पेंटी और ब्रा में देखकर ज़ोर से धडकने लगी और वह ज़ोर से साँसें लेते हुए शीला को देखने लगा। विजय का लंड उसकी पेंट में झटके मारते हुए इतना अकड़ चूका था की उसे अब अपने लंड में दर्द महसूस होने लगा था।

"क्या भैया कंचन को देखकर आपका मन नहीं भरा क्या जो मुझे देख रहे हो" शीला ने मुसकुराकर अपने भाई को अपनी तरफ देखते हुए टोक कर कहा।

"शीला दीदी आप बुहत सूंदर हो" विजय के मूह से सिर्फ इतना निकला ।

"क्यों झूठी तारीफ कर रहे हो, कंचन के सामने तो हम पानी भरेंगी" शीला ने नीचे झुककर अपने एक पाँव को खुजाते हुए कहा।

"दीदी सच में आप बुहत सूंदर हो" शीला के नीचे झुकने से विजय ने उसकी चुचियों को आधा नंगा होकर अपने सामने आने से अपने गले में थूक को गटकते हुए कहा।
 
भइया हमें पता है आप हमें खुश करने के लिए हमारी झूठी तारीफ कर रहे हो। अब अपना मूह दूसरी तरफ करो हम अपनी पेंटी उतारकर मूतने वाले हैं" शीला ने विजय को मुस्कराते हुए कहा ।

विजय को अपने कानों पर इतबार नहीं आ रहा था। शीला की बात सुनकर उत्तेजना के मारे उसका पूरा जिस्म काम्पने लगा। वह सोच रहा था की शीला बाथरूम का दरवाज़ा बंद क्यों नहीं कर रही है। इसका मतलब वह जानबूझकर उसपर लाइन मार रही है। मगर शीला की कुंवारी चूत देखने के ख़याल से ही विजय का पूरा जिस्म गुदगुदी करने लगा।

"ओहहहहह भैया आप नहीं मानेगे। चलो आपसे क्या शरमाना" शीला यह कहते हुए अपनी पेंटी को अपने चूतडों से नीचे करते हुए नीचे बैठकर मूतने लगी । विजय शीला के नंगे चूतडों और उसकी गुलाबी हलके बालों वाली चूत को देखकर बूत की तरह खडा होकर शीला को मूतते हुए देखने लगा ।

विजय का उत्तेजना के मारे बुरा हाल था । उसका लंड उसकी पेंट में ही उत्तेजना के मारे वीर्य की बूँदे टपका रहा था, विजय की बर्दाशत जवाब देने लगी थी । उसे अपने लंड में बुहत दर्द महसूस हो रहा था। उसने अपने हाथ से अपनी पेण्ट की ज़िप खोल दी और अपनी आँखें शीला की नंगी चूत पर टिका दी । शीला की चूत से मूतते हुए मधुर आवज़ आ रही थी।

"भइया आप तो सच में बुहत बदमाश हैं सारी रात अपनी बहन से मजा लेने के बाद भी हमारी चूत को देख रहे हैं" शीला ने मूतने के बाद सीधा होते हुए कहा और अपनी चूत विजय को सही तरीके से दिखाने के बाद अपनी पेंटी को ऊपर खीँच लिया ।

विजय बिना बोले बस बूत की तरह खडा था। उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था की क्या करे । उसके अंडरवियर में बुहत बड़ा उभार बना हुआ था।

"भइया इसे आपने अपनी दीदी का रस नहीं पिलाया क्या। फिर यह क्यों प्यासा है" शीला ने बाथरूम से निकालते हुए विजय के लंड को अंडरवियर के ऊपर से ही अपने हाथ से दबाकर हँसते हुए कहा और कमरे से निकलकर चलि गयी।

विजय की हालत बुहत बुरी थी । उसने शीला के जाते ही अंडरवियर को उतार दिया और बाथरूम में घुस गया, विजय ने उत्तेजना के मारे अपने लंड को अपने हाथों में लेकर ज़ोर से हिलाने लगा । विजय मुठ मारते हुए शीला की चूत को याद कर रहा था ।

विजय को अब भी शीला का हाथ अपने लंड पर पडा महसूस हो रहा था । विजय का जिस्म अचानक अकड़ने लगा और वह ज़ोर से काम्पने लगा।

"ओहहहह शीला दीदी" विजय के लंड से ज़ोर से पिचकारियां निकलकर बाथरूम में नीचे गिरने लगी और वह शीला को याद करते हुए झडने लगा ।
 
दोस्तों आपलोगों के सहयोग के लिए बहुत बहुत थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अगला अपडेट जल्दी ही।कहानी के बारें में अपनी राय अवश्य दें।thanks
 
विजय शांत होने के बाद बाथरूम में अपने कपडे उतार कर नहाने लगा । विजय नहाने के बाद बाथरुम से निकलकर नरेश की साइड में लेट गया, विजय को कुछ ही देर में नींद आ गयी ।

आज संडे था तो रेखा आज सवेरे नहीं उठी थी और उठते ही किसी को उठाया भी नहीं । वह खुद नहाने बाथरूम में चलि गई, रेखा ने नहाने के बाद कपडे पहन कर सीधा कीचन में चलि गयी और नाश्ते का इन्तज़ाम करने लगी।

रेखा को नाश्ता तैयार करते हुए अचानक दिमाग में आया वह जाकर सभी को उठा दे । जब तक सभी फ्रेश हो जाएंगे वह नाश्ता बना लेगी । रेखा ने यह सोचते हुए कीचन से निकलते हुए सीधा अपने बेटे के कमरे में आ गयी, रेखा की नज़र कमरे में दाखिल होते ही अपने बेटे और भांजे पर पडी जो दोनों सीधा होकर बेखबर सिर्फ एक अंडरवियर में सो रहे थे ।

रेखा की नज़र सीधा अपने बेटे और भांजे के अंडरवियर में बने उभारों पर पडी, रेखा अपने बेटे और भांजे के खडे लन्डों को अंडरवियर में क़ैद देखकर ही गरम होने लगी । रेखा दोनों के लन्डों को देखकर एक दुसरे से मिलाने लगी।

रेखा ने अपने भांजे का लंड तो देखा भी था और अपनी चूत में लिया भी था । मगर उसके बेटे का लंड इस वक्त उसे नरेश के लंड से थोडा बड़ा और मोटा लग रहा था। रेखा की चूत अपने बेटे के लंड को देखते हुए उत्तेजना के मारे पानी टपकाने लगी ।

रेखा सोचने लगी जब उसे अपने भान्जे से चढ़वाते हुए इतना मज़ा आया था तो अगर उसे उसका बेटा चोदेगा तो वह तो स्वर्ग की ही सैर करेगी । रेखा का हाथ यह सोचते हुए अपनी साड़ी के ऊपर से उसकी चूत तक आ गया और वह अपने बेटे के लंड को देखकर अपनी चूत को सहलाने लगी।

रेखा के जिस्म की आग उसका हाथ अपनी चूत पर आते ही ख़तम होने के बजाये और ज़्यादा बढ़ने लगी ।रेखा आगे बढ़्ते हुए अपने बेटे के साइड में जाकर बैठ गई और उसके अंडरवियर के उभार को गोर से देखते हुए अपनी चूत को सहलाने लगी ।

रेखा के मन में आया की वह अपने बेटे के लंड को अपने हाथ से छु कर देखे । मगर वह ऐसा कर नहीं पा रही थी । रेखा ने आखिरकार अपने मन की बात मानते हुए अपना हाथ को आगे बढाकर अपने बेटे के अंडरवियर के ऊपर से ही विजय के लंड को पकार लिया। रेखा का पूरा जिस्म अपने बेटे के लंड पर अपना हाथ पड़ते ही ज़ोर से काम्पने लगा।
 
रेखा ज़ोर की साँसें लेते हुए अपने हाथ को अपने बेटे के अंडरवीयर पर थोडा आगे पीछे करने लगी । रेखा का दूसरा हाथ अपने आप उसकी चूत पर चला गया, एक हाथ से अपने बेटे के लंड को महसूस करते हुए दुसरे हाथ से अपनी चूत सहलाने में रेखा को इतना मज़ा आ रहा था की वह बुहत ज़ोर से साँसें लेकर अपने हाथ को जितना हो सकता था तेज़ी के साथ अपनी चूत को सहला रही थी ।

रेखा का जिस्म कुछ ही देर में आखिरकार झटके मारने लगा।

"आआह्ह्ह्हहहहहः" रेखा सिसकते हुए झरने लगी और उसे झरते हुए इतना मज़ा आने लगा की उसके हाथ ने अपने बेटे के लंड को ज़ोर से पकड लिया । रेखा की चूत से झरते हुए बुहत सारा पानी निकलने लगा। इसीलिए वह मज़े के मारे अपनी आँखें बंद करते हुए झरने का मज़ा लेने लगी, विजय गहरी नींद में था फिर भी उसका लंड दबने से उसे थोडी तकलीफ हुई और वह घबराकर अपनी आँखें मलते हुए उठने लगा।

रेखा ने जैसे ही अपनी आँखें खोली। उसका बेटा अपनी आँखें मल रहा था।

"क्या हुआ मम्मी" विजय ने हैंरानी से अपनी माँ की तरफ देखते हुए कहा।

"क्या बेटे सुबह सुबह किसका सपना देख रहे थे। जो यह ऐसे सीना तानकर खडा था" रेखा ने अपने बेटे को उठता हुआ देखकर अपने हाथ से फिर से उसके लंड को दबाकर उसकी तरफ देखते हुए कहा । नरेश अपनी माँ की बात सुनकर जल्दी से सीधा हो गया और अपनी माँ के हाथ के हटते ही अपने लंड को वहां पर पडी चादर से ढकने लगा।

"बेटा अब इसे क्यों छुपा रहे हो। मैं तुम्हारी माँ हूँ मुझे सब कुछ पता है और बचपन से मैंने तुझे नंगा देखा है" रेखा ने चादर को अपने बेटे के ऊपर से उठाते हुए कहा।

"हाँ मगर माँ बचपन और अब में फर्क है" विजय ने शरमाते हुए कहा ।

"बेटा मुझे कोई फर्क नहीं पडता । तुम तो मेरे लिए वही छोटे विजु हो। जिसे मैं बचपन में नंगा नहलाती थी, अब तुम्हारी लूली बड़ी हुयी तो क्या हुआ हो तो तुम मेरे बेटे ही" रेखा ने विजय के लंड की तरफ देखते हुए कहा।

"माँ आप आई किसलिए थी" विजय ने अपनी माँ की बात सुनकर अब शरमाना छोडकर कहा।

"बेटे आई तो तुम्हें उठाने थी । मगर तुम्हारे इस शैतान को देखकर में यहीं बैठ गई, सच बता सपने में किसे चोद रहा था" रेखा ने बड़ी बेशरमी से अपने बेटे से बात करते हुए कहा ।

"माँ आप क्या कह रही हैं मुझे कोई सपना नहीं आया था" विजय अपनी माँ के मुँह से ऐसी बात सुनकर हैंरान होते हुए बोला।

"बेटा मैं तुम्हारी माँ हूँ । सब जानती हूँ अगर तुम्हे कोई सपना नहीं आया था तो फिर यह ऐसा खडा होकर क्यों झटके मार रहा था" रेखा ने इस बार अपने बेटे के लंड पर एक चिकोटी लेते हुए कहा।
 
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