"ओहहहहह माँ सच्ची मुझे पता नहीं मगर मैं सपना नहीं देख रहा था" विजय अपनी माँ के हाथ से अपने लंड की चिकोटी लेने से हल्का चिल्लाते हुए बोला।
"लगता है तुम्हारी शादी करनी पड़ेगी। तुझे अब यह सताने लगा है, मगर जिस लड़की से तू शादी करेगा वह बुहत ख़ुशनसीब होगी" रेखा ने अपने बेटे की बात सुनने के बाद उसकी तारीफ करते हुए कहा ।
"माँ मुझ में ऐसा क्या है। जो मुझसे शादी करने वाली ख़ुशनसीब होगी" विजय ने अपनी माँ की बात सुनने के बाद हँसते हुए कहा।
"बेटा जो चीज़ तुमहारे पास है उसकी तम्मना हर औरत करती है मगर यह किसी किसी के नसीब में आती है" रेखा ने वैसे ही अपने बेटे को समझाते हुए कहा।
"माँ आप किस चीज़ की बात कर रही हो" विजय समझ चूका था की उसकी माँ उसके लंड की बात कर रही है। जिसे देखकर वह मदहोश हो गई थी मगर फिर भी वह अपनी माँ के मूह से सुनना चाहता था इसीलिए वह अन्जान बनने का नाटक करते हुए बोला।
"बेटा तुम तो बुहत बुधु हो। मैं तुम्हारे इस लंड की बात कर रही हूँ । इतना बड़ा और मोटा ख़ुशनसीब औरत को ही मिलता है" रेखा ने एक बार फिर अपने बेटे के लंड को अपने हाथ में पकडते हुए कहा।
"माँ सच में मुझे कुछ पता नहीं है । इससे औरत को क्या मिलता है" विजय को अपनी माँ के मुँह से ऐसी बाते सुनते हुए बुहत अच्छा लग रहा था । इसीलिए वह फिर से अन्जान बनने का ढ़ोंग करते हुए बोला।
"वाह री किस्मत जिसे आता है उसके पास ऐसी चीज़ नहीं और जिसके पास इतनी क़ीमती चीज़ है वही इसका इस्तमाल करना नहीं जानता" रेखा ने अपने माथे को पकडकर कहा ।
"माँ आप बताओ न मैं समझ नहीं पा रहा हू" विजय ने अपनी माँ को फिर से कहा।
"बेटे यह जो तुम्हारा लंड है इसे औरत की चूत में डालकर उसे चोदा जाता है । जिससे औरत को बुहत ज्यादा सुख मिलता है" रेखा ने फिर से अपने बेटे के लंड को पकडते हुए कहा।
"माँ मगर यह तो हर मरद के पास होता है" विजय ने फिर से अपनी माँ से कहा।
"हाँ बेटा होता तो सभी के पास है । मगर औरत को जितना बाद और मोटा लंड हो उतना ज्यादा मज़ा आता है जो हर किसी के पास नहीं होता और तुम्हारा तो बुहत ही तगडा लंड है इसीलिए कह रही थी जिसे तू एक बार चोदेगा । वह फिर से तुझसे चुदवाने के लिए भीख मांगेगी" रेखा ने अपने बेटे को एक ही बार में समझाते हुए कहा ।
बेटा अब देर हो रही है। तुम ऐसा करो किचन में आ जाओ मैं वहां पर तुम्हारे बाकी सवालों का जवाब दूंगी और नरेश को भी उठा लेना" रेखा यह कहते हुए वहां से उठते हुए अपनी बड़ी बेटी कंचन के कमरे में आ गयी। रेखा ने देखा की कंचन और शीला दोनों गहरी नींद में थी । रेखा ने आगे जाते हुए कंचन को अपने हाथों से झझोडते हुए उठा दिया ।
"कोन है" कंचन अपनी आँखें मलकर उठते हुए बोली,
"बेटी क्या सारा दिन सोयेगी। उठ और शीला को भी उठा देना" रेखा यह कहते हुए वहां से जाने लगी । रेखा ने अपनी छोटी बेटी और मनीषा को भी उठा दिया और आखिर में अपने ससुर के कमरे में आ गयी।
"बाबूजी उठो बुहत देर हो गई है" रेखा ने अपने ससुर को उठाते हुए कहा।
"हाँ बेटी तुम। मुझे बुखार है मुझसे उठा नहीं जा रहा है" अनिल ने अपनी बहु की तरफ आघी आँखें खोलकर देखते हुए कहा।
"क्या हुआ बाबूजी आपने कोई दवाई ली है" रेखा ने परेशान होते हुए कहा ।
"बेटी तुम चिंता मत करो हल्का बुखार है । मैंने गोलियां खा ली है" अनिल ने अपनी बहु को परेशान होते हुए देखकर कहा।
"ठीक है बाबूजी मैं आपका नाशता यहीं लाती हूँ" रेखा ने अपने ससुर से कहा।
"नही बेटी तुम नाश्ता कर लो । मेरा मन नहीं है अभी" अनिल ने अपनी बहु से कहा।
"ठीक है बाबुजी आप आराम कर लो" यह कहते हुए रेखा अपने ससुर के कमरे से निकलकर किचन की तरफ जाने लगी।
रेखा जैसे ही किचन में दाखिल हुई उसने देखा की उसका बेटा पहले से वहां मौजूद था।
"बेते तुम कुर्सी ले आओ और यहां पर बैठ जाओ" रेखा ने अपने बेटे को देखकर मन ही मन में हँसते हुए कहा।
विजय बाहर जाकर एक कुर्सी ले आया और किचन में आकर बैठ गया।
"बेटे बुहत जल्दी आ गया" रेखा ने किचन में काम करते हुए कहा।
"माँ आपसे बुहत कुछ जानना है इसीलिए आया हूँ" विजय ने अपनी माँ की तरफ देखते हुए कहा।
"बेटे जो पूछ्ना है जल्दी पूछो" रेखा ने अपने बेटे की बात को सुनकर कहा ।
"माँ आप कह रही थी की इसे औरत की चूत में ड़ाला जाता है तो औरत को बुहत मजा आता है यह मुझे समझ में नहीं आया" विजय ने अपनी माँ को देखते हुए कहा।
"क्यों बेटे इस में समझने की क्या बात है" रेखा ने हैंरान होते हुए कहा।
"माँ मैंने एक दफ़ा एक फिल्म में देखा था । जब एक गोरा एक गोरी लड़की की चूत में अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था तो वह बुहत ज़ोर से चिल्ला रही थी। अगर औरत को मजा आता है तो वह चिल्ला क्यों रही थी" विजय ने अपने दिमाग का इस्तेमाल करते हुए अपनी माँ से कहा।
बेटा फिल्मों में यह लड़कियां मरद को उत्तेजिन करने के लिए चिल्लाती हैं। वैसे औरत को जो सुख चुदाई से मिलता है वह शायद उसे दुनिया की किसी चीज़ में नही मिलता" रेखा ने अपने बेटे को समझाते हुए कहा।
"माँ एक और बात आप ने कहा मेरा लंड बड़ा और मोटा है और मैं जिस लड़की को इससे चोदुँगा वह मेरी गुलाम बन जायेगी। क्या औरत को सिर्फ बड़े और मोटे लंड से ही मजा आता है" विजय ने भोला बनने का नाटक करते हुए अपनी माँ से कहा ।
"बेटा मजा तो औरत को हर लंड से आता है मगर तुम्हारे जैसे लंड मिल जाए तो औरत की प्यास पूरी तरह बूझ जाती है" रेखा ने अपने बेटे की तरफ देखते हुए कहा।
"माँ क्या बापू का लंड भी मेरी तरह लम्बा और मोटा है" विजय ने फिर से अपनी माँ से पूछा।
"बेटे मैंने कहा न हर औरत के नसीब में इतना भाग्य नहीं होता" रेखा ने मायूस होते हुए कहा।
"माँ क्या बापू का लंड छोटा है" विजय ने फिर से अपनी माँ से कहा।
"बेटा तुम्हारे बापू का लंड छोटा भी है और अब तो कमज़ोर भी हो गया है । इसीलिए वह मेरी प्यास नहीं बूझ पाते" रेखा ने वैसे ही मायूसी से कहा ।
"माँ आप इतनी मायूस मत हो। मैं हूँ ना" विजय के मूह से अपनी माँ को दिलासा देते हुए निकल गया।
"बेटे मैं जानती हूँ तुम मुझे दुखि नहीं देख सकते। मगर जो सुख मुझे चाहिए वह मैं अपने पति से नहीं ले पा रही हूँ और तुम मेरे बेटे हो" रेखा ने विजय की बात सुनकर अपनी आँखों से आंसू बहाते हुए कहा।
"माँ आप रो मत मैं आपको रोता हुआ नहीं देख सकता" विजय ने अपनी माँ को रोता हुआ देखकर जज़्बाती होते हुए कहा और कुर्सी से उठते हुए अपनी माँ के पास जाते हुए अपने हाथ से उसके बहते हुए आंसूं को पोंछने लगा।
"बेटे यह तो सब भाग्य का लिखा है तुम और मैं इसे नहीं बदल सकते हैं । मेरे नसीब में यह सुख शायद लिखा ही नहीं था" रेखा ने अपने बेटे को अपने पास खडा देखकर उसके गले लगते हुए कहा ।
"माँ मैं आपको दुखी नहीं देख सकता। मैं हूँ न आपको खुश रखने के लिये" विजय ने फिर से जज़्बाती होते हुए कहा।
"ओहहहह बेटे में जानती हूँ । तुम मुझसे प्यार करते हो मगर तुम मेरे सगे बेटे हो । इसीलिए तुमसे मैं वह सुख नहीं ले सकती जिसकी मुझे ज़रुरत है" रेखा ने अपने बेटे के काँधे पर अपना सर रखकर फिर से रोते हुए कहा।
माँ में कुछ नहीं जानता। बस मैं आपको खुश देखना चाहता हूँ" विजय ने अपनी रोती हुई माँ के सर में हाथ डालकर उसके बालों को सहलाते हुए कहा।
"बेटे मगर यह ज़माना क्या कहेंगा" रेखा इतना कहकर रुक गई।
"माँ जब मुझे कोई ऐतराज़ नहीं और आप भी राज़ी हो तो क्यों आप अपने आप को ज़माने की खातिर तडपा रही हो और वैसे भी हम किसी को नहीं बताएँगे अपने बारे में" विजय ने अपने हाथ को अपनी माँ के बालों से हटाकर उसकी पीठ को सहलाते हुए कहा ।
"आआह्ह्ह्ह बेटे सच बताना क्या मैं तुम्हें अच्छी लगती हू" रेखा ने भी अब रोना बंद करके अपने हाथों को अपने बेटे की पीठ को पकडते हुए अपनी चुचियों को उसके सीने से सटाते हुए कहा।
"माँ क्या कहा। आप तो मुझे दुनिया की सब से ख़ूबसूरत औरत दिखती हो" विजय ने भी अपनी माँ को ज़ोर से अपने सीने में दबाकर सिसकते हुए कहा।
"बेटे फिर आज तक तुमने मुझसे कहा क्यों नही" रेखा ने भी अपने बेटे के जवान सीने में अपनी चुचियों के दबने से मज़ा लेते हुए कहा।
"माँ मैं क्या कहता मुझे तो डर लगता था की कहीं आप बुरा न मान जाए" विजय ने अपनी माँ के पीठ से अपने हाथ को आगे ले आते हुए उसके गोरे पेट को अपने हाथ से सहलाते हुए कहा।
"ओहहहह बेटे क्या कर रहे हो गुदगुदी हो रही है" रेखा ने अपने बेटे का हाथ अपने पेट पर लगते ही सिहरते हुए कहा।
"आह्ह्ह्ह माँ आपका जिस्म कितना चिकना और नरम है मुझे इसे महसूस करने दो ना" विजय ने सिसकते हुए कहा और अपने हाथ को अपनी माँ के चिकने पेट पर फिराते हुए ऊपर ले जाते हुए कहा।
"ओहहहहह बेटे मुझे कुछ हो रहा है । अपना हाथ कहाँ ले जा रहे हो" रेखा ने अपने बेटे के हाथ को अपनी चूचि की तरफ जाता हुआ देखकर सिसकते हुए कहा।
"आह्ह्ह्ह माँ मुझे भी कुछ हो रहा है। मैं अपने आपको रोक नहीं पा रहा हू" विजय अपने हाथ को अपनी माँ के ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी चुचियों को पकडते हुए कहा ।
"आह्ह्ह्ह बेटा क्या कर रहे हो कोई आ जायेगा" रेखा ने अपने बेटे के हाथ को अपने ब्लाउज के ऊपर से ही अपनी चूचि पर पड़ने से सिसकते हुए कहा।
"आआह्ह्ह्ह माँ आपकी चूची कितनी बड़ी और नरम है" विजय ने अपनी माँ की चुचियों को उसके ब्लाउज के ऊपर से सहलाते हुए कहा।
"आआह्ह्ह्ह बेटा इस वक्त कोई भी आ सकता है तुम कुर्सी पर जाकर बैठ जाओ" रेखा ने यह कहते हुए विजय को अपने आप से दूर कर दिया और खुद नाश्ता बनाने का इन्तज़ाम करने लगी ।
विजय अपनी माँ से अलग होते ही मायूस होकर कुर्सी पर जाकर बैठ गया।
"क्या हुआ बेटे नाराज़ हो गये क्या" रेखा ने काम करते हुए जैसे ही अपने बेटे को देखा उसका मुँह फूला हुआ देखकर उसकी तरफ देखते हुए कहा।
"माँ मैं आपसे नाराज़ कैसे हो सकता हूँ । मगर मुझे इतना मज़ा आ रहा था की आप से अलग होने से कुछ अजीब लग रहा है" विजय ने अपनी माँ की बात सुनते ही कहा।
"बेटे अब सच बताओ सुबह किसका सपना देख रहे थे" रेखा ने फिर से काम करते हुए कहा ।
"माँ सच कहूँ तो मुझे रात को सपने में आपकी यह बड़ी बड़ी चुचियां और आपके यह बड़े बड़े चूतड़ दिखाई देते हैं । जिन्हें देखकर मेरा लंड तन जाता है" विजय ने अपनी माँ की बात का जवाब बड़ी बेशरमी से देते हुए कहा।
"बेटे क्या मज़ाक कर रहे हो तुम भी मुझे बना रहे हो क्या" रेखा ने अपने बेटे की बात को सुनकर हँसते हुए कहा।
"क्यों माँ मैंने ऐसा क्या कह दिया" विजय ने हैंरानी से अपनी माँ की तरफ देखते हुए कहा।
"बेटे तुम्हें तो कोई कॉलेज की लड़की सपने में आती होगी मुझ में क्या है जो तुम्हें सपने में आती हू" रेखा ने अपने बेटे की तरफ देखते हुए कहा।
"माँ मुझे तो आपकी बड़ी बड़ी चुचियां और यह बड़े चूतड पसंद है। कॉलेज की लड़कयों की तो चुचियां भी छोटी होती है और उनके चूतड भी आपके जैसे बड़े नहीं होते और मैं तो अपनी माँ का दीवाना हू" विजय ने अपनी माँ को घूरते हुए कहा।
"बेटे लगता है तुम्हारी शादी के लिए भी कोई ऐसी लड़की ढूंढ़नी पड़ेगी जिसकी चुचियां और चूतड बड़े हो" रेखा ने हँसते हुए कहा।
"नही माँ मैं शादी नहीं करूँगा मुझे तो बस अपनी माँ को खुश रखना है" विजय ने अपनी माँ की तरफ देखते हुए कहा।
"बेटे ऐसा मत बोलो मैं तुम्हारी शादी तो ज़रूर कराऊँगी" रेखा ने अपने बेटे की बात को सुनते हुए कहा ।
"माँ जब होगी तब देखेंगे अभी तो मुझे बस आप ही अच्छी लगती हो" विजय ने अपनी माँ से कहा।
"बेटे नाश्ता तैयार हो गया है । अब तुम जाकर बाहर बैठ जाओ मैं नाश्ता लेकर आती हू" रेखा ने अपने बेटे से कहा।
विजय अपनी माँ की बात सुनकर बाहर चला गया और नाशते के टेबल पर जाकर बैठ गया जहाँ पर पहले से ही उसके पिता और बाकी लोग बैठे थे।
विजय अपने पिता की तरफ देखकर सोचने लगा क्या बात है । उसका बाप इतना बूढा भी नहीं है फिर उसका लंड क्यों उसकी माँ को शांत नहीं कर पाता, विजय यह सोच ही रहा था की उसकी माँ नाश्ता ले आई और सब मिलकर नाश्ता करने लगे।
नाश्ता ख़तम करने के बाद रेखा बरतन उठाने लगी और सभी उठकर अपने अपने कमरों में जाने लगे।
"बेटा तुम बर्तन उठाने में मेरी मदद करो" रेखा ने अपने बेटे को वहां पर बैठा देखकर कहा।
"जी मम्मी" यह कहते हुए विजय अपनी माँ के साथ बर्तन उठाकर किचन में रखने लगा ।
कंचन शीला के साथ अपने कमरे में आ गयी और उसके साथ बैठकर बाते करने लगी, मनीषा अपने बापू के कमरे में जाकर उसे देखने लगी । अनिल अब भी बेड पर लेटा हुआ था और वह गहरी नींद में था।
मानिषा ने अपने बापू को उठाना ठीक नहीं समझा और वहां से निकलकर बाहर आ गयी । अचानक मनीषा को सूझा क्यों न वह अपने भाई के साथ कुछ देर जाकर बाते करे और वह अपने भाई के बारे में भी पता लगाए की क्यों वह भाभी में इंट्रेस्ट नहीं ले रहे हैं। यह सोचकर वह अपने भाई और भाभी के कमरे में दाखिल हो गई।
मानिषा जैसे ही कमरे में दाखिल हुयी उसने देखा की उसका भाई पेपर पढ रहा था।
"क्या भाई साहब हम इतने दिनों से यहाँ पर हैं और आप हैं की हम से बात करने के लिए भी टाइम नहीं है" मनीषा ने अंदर दाखिल होते ही शिकायत करते हुए कहा और दरवाज़ा बंद करते हुए अंदर आ गयी।
"नही दीदी ऐसी तो कोई बात नहीं है" मुकेश ने अपनी बहन को देखकर खुश होते हुए कहा।
"तो फिर भैया क्यों आप ने हमसे बात भी नहीं की" मनिषा ने यों ही झूठे गुस्से से अपने भाई की तरफ देखते हुए कहा।
"दीदी डेली ऑफिस वर्क की वजह से मैं तुम से बात नहीं कर सका और यकीन करो आज मैं खुद तुम से मिलने आने वाला था की तुम आ गयी" मुकेश ने अपनी बहन की बात सुनकर शर्म से पानी पानी होते हुए कहा ।
"भइया फिर देख क्या रहे हो इतने दिनों के बाद मिले हैं हमें अपने गले तो लगाओ" मनीषा ने अपने भाई को देखकर अपनी बाहों को खोलते हुए कहा । मुकेश अपनी बहन की बाहें खुलते ही उसकी चुचियों और अपनी बहन के जिस्म के फिगर को देखकर हैंरान रह गया ।
मानिषा ने आज सल्वार कमीज पहनी थी और वह अपने कमरे से नाश्ता करने के चक्कर में जल्दी से निकलने की वजह से ब्रा भी नहीं पहन कर निकली थी । मनीषा ने जैसे ही अपनी बाहों को खोला उसका पल्लु उसके आगे से फिसल गया और मनीषा की चुचियां बगैर ब्रा के उसके भाई के सामने आ गयी, मुकेश का टेम्प्रेचर भी अपनी बहन की चुचियों को बगैर ब्रा के सिर्फ कमीज में हिलता हुआ देखकर गरम होने लगा।
मुकेश को अपनी बहन की चुचियां उसकी कमीज में भी नंगी ही महसूस हो रही थी । क्योंकी उसने बुहत पतली कमीज पहन रखी थी । जिस वजह से मुकेश को कमीज के ऊपर से अपनी बहन की चुचियों के गोल नासी दाने साफ़ नज़र आ रहे थे।
"कहा खो गये भइया" मनीषा ने अपने भाई को अपनी चुचियों की तरफ घूरता हुआ देखकर उसे टोकते हुए कहा ।
दीदी कहीं नहीं मगर आपने अपने फिगर को तो बुहत बढिया रखा हुआ है" मुकेश ने अपनी बहन के टोकने से होश में आते हुए अपनी थूक को गटका और आगे बढ़ते हुए अपनी बहन को बुहत ज़ोर से अपने गले लगा लिया,
"आआह्ह्ह्ह दीदी तुम से मिलकर बुहत अच्छा लग रहा है । कितने टाइम के बाद हम गले लगे है" मुकेश ने अपनी बहन के गले लगते ही उसकी चुचियों को अपने सीने में दबने से सिसककर कहा ।
"भइया आपके सीने से लग मुझे भी बुहत अच्छा लग रहा है। अभी तक आपका बदन बुहत गठीला है" मनीषा ने अपने भाई के सख्त सीने से अपनी नरम चुचियों को रगडते हुए कहा।
"ओहहहहह दीदी और बताओ हमारे जीजा जी कैसे हैं और तुम खुश तो हो ना" मुकेश ने अपनी बहन की चुचियों को अपने सीने से रगडता हुआ महसूस करके ज़ोर से सिसकते हुए उससे पुछा।
"भइया मैं खुश हूँ और आपके जीजा जी भी बुहत अच्छे हैं । मगर आप आज मेरी इतनी तारीफ क्यों कर रहे हो आपकी पत्नी तो सेक्स की देवी है उसके सामने मेरी क्या औकात" मनीषा ने यह बात कहते हुए अपनी चुचियों को बुहत ज़ोर से अपने भैया के सीने में दबाकर घिस दिया ।
"हाहहह दीदी तुम क्या कह रही हो । तुम भी कम नहीं हो" मुकेश ने फिर से सिसककर कहा।
"भइया आपकी सेक्स लाइफ तो बुहत बढिया होगी रेखा भाभी के साथ" मनीषा ने अब अपने भाई के गले से अलग होते हुए कहा और अपने भाई के साथ जाकर सोफ़े पर बैठ गई।
"दीदी रेखा बुहत सेक्सी है और शायद मैं उसकी ज़रुरत को पूरा भी नहीं कर पाता हू" मुकेष ने अपनी बहन की बात सुनकर ठण्डी आह्ह्ह्ह भारते हुए कहा।
"मगर क्यों भैया आप में कोई कमी है क्या" मनीषा ने अपने भाई की बात को सुनकर चौकते हुए कहा ।
"नही दीदी मगर मैं उसका मुकाबला नहीं कर पाता और जल्द ही ठण्डा हो जाता हूँ और इसीलिए मैंने उसके साथ सेक्स करना भी कम कर दिया है" मुकेश ने मायूस होते हुए कहा।
"भइया आप किसी डॉक्टर से क्यों नहीं बात करते" मनीषा ने अपने भाई की बात को सुनने के बाद कहा।
"दीदी मैंने कोशिश की थी मगर सब का मानना है की मैं नार्मल हू" मुकेष ने फिर से अपनी दीदी की बात का जवाब देते हुए कहा ।
"भइया मैं समझी नहीं अगर आप नार्मल हो तो क्या तकलीफ है जो आप भाभी का साथ नहीं दे पाते" मनीषा ने फिर से हैंरान होते हुए कहा।
"दीदी डॉक्टर्स का कहना है की ऐसा किसी किसी मरद के साथ होता है की वह बिलकुल सही होते हुए भी किसी एक औरत के सामने टिक नहीं पाता। जिसके साथ वह एक बार सही तरीके से सम्भोग नहीं बनाया हो । शायद वह डर दिल में हर वक्त उस मरद को होता है जब वह उस औरत के क़रीब जाता है मगर अपनी पत्नी के साथ ऐसा होने वाला मेरा पहला केस है" मुकेश ने अपनी दीदी को सारी बात बताते हुए कहा।
"भइया मगर इसका कोई हल तो होगा" मनीषा ने मायूस होते हुए कहा।
"हा है मगर मैं वह नहीं कर सकता" मुकेश ने अपनी बहन की तरफ देखते हुए कहा।
"क्या हल है भैया मुझे जल्दी से बतओ" मनीषा ने एक्साइटेडट होते हुए कहा ।
"दीदी मैं अगर किसी ऐसी औरत से सम्भोग बनाऊँ जो मेरी अपनी हो और जिससे मुझे कोई हिचकिचाहट न हो तो में हमेशा के लिए ठीक हो सकता हूँ" विजय ने अपनी दीदी को बताते हुए कहा।
"भइया मगर यह आपको कब से रेखा भाभी से डर लगने लगा" मनीषा ने फिर से हैंरान होते हुए अपने भाई से कहा।
"दीदी पहले सब कुछ नार्मल था। मगर पिछले कुछ सालों से काम ज्यादा होने के कारण मैं सेक्स में कम इंट्रेस्ट ले रहा था तो एक दफ़ा संभोग करते वक्त तुम्हारी भाभी ने कुछ ऐसे लफ्ज़ कहे जिन्हें सुनकर मैं सेक्स करते वक्त हर बार उससे डरने लगा ।
"क्या कहा था भाभी ने जो आप उससे डरने लगे" मनीषा ने अपने भाई को देखते हुए कहा।
"दीदी 3 दिन बाद सम्भोग हो रहा था और मैंने जैसे ही उसे नंगा करके अपने लंड को उसकी चूत में ड़ाला वह उत्तेजना के मारे अपने चूतड़ उछालते हुए कहने लगी। मुकेष आप को क्या हुआ है मेरी आग क्यों नहीं बुझा पाते । मुझे अब आपके लंड से वह मज़ा नहीं मिलता जो पहले मिलता था" मुकेश ने अपनी बहन को बताते हुए कहा।
"भइया पर इससे आपको क्या हो गया" मनीषा ने हँसते हुए कहा।
"दीदी उसके बाद जब भी मैं अपनी पत्नी को चोदता तो मुझे वह लफ्ज़ याद आ जाते और में अपनी इन्सलट होने के ख़याल से ही उसे इतना एक्साइटेडट होकर चोदता की मेरे लाख कोशिश के बाद भी मैं जल्दी ही फ़ारिग हो जाता" मुकेश ने अपनी बात अपनी बहन को बताते हुए कहा ।
"भइया फिर आप अपने खातिर न सही मगर भाभी के लिए तो अपने आप को ठीक करने की कोशीश किजिये। ऐसा न हो की भाभी कहीं और बहक जाए" मनीषा ने अपने भाई को समझाते हुए कहा।
"दीदी आपकी बात तो ठीक है मगर मैं ऐसी औरत कहाँ से लाऊँ जो मेरे नज़दीक की हो और मैं उससे डरता न हू" मुकेष ने सोचते हुए कहा।
"भइया आप दूर मत जाओ आपके सामने भी तो एक औरत है जो आपसे बुहत प्यार करती है और शायद आप उससे ड़रते भी नही" मनीषा ने अपने भाई के क़रीब जाकर उसके साथ चिपक कर बैठते हुए कहा।
"दीदी आप मगर आप तो मेरी बहन है क्या यह ठीक होगा" मुकेश अपनी बहन के जिस्म का फिगर देखकर उसका दीवाना हो चुका था । मगर फिर भी वह अपनी सगी बहन के साथ होने वाले इस रिश्ते को सोचकर ही काम्पने लगा ।
"क्यों भइया मैं आपको अच्छी नहीं लगती क्या" मनीषा ने अपने भाई के मुँह के क़रीब अपने मुह को लाते हुए कहा । मनीषा का मूह अपने भाई के इतने क़रीब था की उसे अपनी बहन की साँसें अपनी साँसों से टकराती हुयी महसूस हो रही थी।
"दीदी आप तो बुहत सूंदर हो पर" मुकेश सिर्फ इतना कह पाया।
"पर छोड़ो भैया मुझ पर भरोसा करो । इस बारे में किसी को पता नहीं चलेगा" मनीषा ने यह कहते हुए अपने तपते होंठो को अपने भाई के होंठो पर चिपका दिया ।
मुकेश के सारे जिस्म में अपनी बहन के गरम होंठो को अपने होंठो पर महसूस करते ही एक करंट का झटका लगा । मुकेष का सिकुडा हुआ लंड अचानक उत्तेजना से उसकी पेण्ट में उठने की कोशिश करने लगा, मुकेश ने भी अपनी बहन का साथ देते हुए उसके बालों में हाथ ड़ालते हुए अपनी बहन के नरम नरम होंठो को ज़ोर से चूसने लगा ।
मानिषा अपने भाई का साथ मिलते ही सोफ़े पर सीधा लिटाते हुए उसके ऊपर चढ़ गयी और अपनी चुचियों को अपने भाई के सीने में दबाते हुए उसके किसेस का जवाब देने लगी, मुकेश कुछ देर तक अपनी बहन के होंठो को चूसने के बाद अपना मूह उसके होंठो से हटा कर हाँफने लगा।
"भइया लगता है आप बूढ़े हो गये हो" मनीषा ने अपने भाई को हाँफता हुआ देखकर अपने चूतडों को उसके लंड पर दबाते हुए हँसकर कहा।
"दीदी भले मैं बूढा होगया हूँ मगर तुम जैसी गरम चीज़ को देखकर तो हिजडे का लंड भी झटके खाने लगेगा। मैं तो फिर भी सही हू" मुकेश ने यह कहते हुए अपनी बहन को अपने ऊपर से उतारते हुए अपनी गोद में उठा लिया और उसे बेड पर जाकर लेटा दिया ।
मानिषा बेड पर सीधी पडी थी और वह बुहत ज़ोर से साँसें ले रही थी जिस वजह से उसकी चुचियां कमीज में बुहत ज़ोर से ऊपर नीचे हो रही थी । मुकेश अपनी बहन की चुचियों को देखता हुआ उसके ऊपर चढ़ गया और अपने एक हाथ से अपनी सगी बहन की एक चूचि को उसकी कमीज के ऊपर से पकडते हुए दबाने लगा।
"आआह्ह्ह्ह क्या कर रहे हो भैया" मनीषा का पूरा जिस्म अपने भाई का हाथ कमीज के ऊपर से ही अपनी चुचियों पर पड़ने से सिहर उठा जिस वजह से उसने सिसकते हुए कहा।
"ओहहहहह दीदी आपकी चुचियां कितनी नरम हैं । मुझे इन्हें छूने से बुहत मज़ा आ रहा है" मुकेश ने वैसे ही अपने हाथ से अपनी बहन की चुचियों को दबाते हुए कहा ।
"भइया आप तो छुपे रुस्तम निकले पहले तो इतना शरमा रहे थे और अब अपनी बहन की चुचियों को इतनी बेशरमी से दबा रहे हो" मनीषा ने अपने भाई को देखकर हँसते हुए कहा।
"क्या करुं दीदी तुम चीज़ बड़ी हो मस्त मस्त" मुकेश ने यह कहते हुए अपना मूह अपनी दीदी की चूचि पर उसकी कमीज के ऊपर से ही रख दिया ।
मुकेश ने अपनी बहन की चूचि के एक दाने को कमीज के ऊपर से ही अपने मूह में भर लिया और उसे बुहत ज़ोर से चूसते हुए अपनी बहन की दूसरी चूचि को अपने हाथ में लेकर ज़ोर से दबाने लगा।