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परिवार(दि फैमिली) complete

रेखा भी अपने बेटे को देखकर खुश हो गई और जल्दी से आगे बढने लगी । वह नहीं चाहती थी की उसका बेटा अपने पिता को रंगे हाथों पकडे।

"बेटा मैं तुम्हारा ही इंतज़ार कर रही थी। मैं परेशान हो गई थी की तुम्हें कैसे बुलाऊँ" रेखा ने अपने बेटे के क़रीब आते हुए कहा ।

"माँ आप नहीं जानती की मैं भी आपके लिए मरा जा रहा था । मगर हम किस कमरे में चलें" विजय ने परेशान होते हुए कहा।

"बेटा तुम चिंता क्यों करते हो आओ मेरे साथ" रेखा अपने बेटे से कहा और अपने कमरे की तरफ बढने लगी । विजय भी अपनी माँ के पीछे चलने लगा। मगर अपनी माँ को अपने कमरे की तरफ जाता हुआ देखकर विजय का दिल बुहत ज़ोरों से धडक रहा था।

रेखा ने अपने कमरे का दरवाज़ा खोला और अंदर दाखिल हो गई । विजय के दिल की धडकनें बुहत ज़ोर से चल रही थी। उसमें इतनी हिम्मत नहीं हो रही थी की वह अपनी माँ के पीछे उसके कमरे में जा सके।

"क्या हुआ बेटे आओ ना" रेखा ने अपने बेटे को बाहर देखकर पुकारते हुए कहा ।

"माँ बापु" विजय के मूह से बस इतना ही निकला और वह चुप होकर खडा हो गया।

"बेटे तुम डर क्यों रहे हो तुम्हारा पिता नहीं है यहां" रेखा ने अपने बेटे की बात सुनते ही हँसकर कहा।

अपनी माँ की बात सुनकर विजय की जान में जान आई और वहां से आगे बढते हुए अपनी माँ के साथ कमरे में दाखिल हो गया । रेखा ने अपने बेटे के अंदर आते ही दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया और खुद जाकर अपने बेड पर बैठ गयी ।

"माँ बापू कहाँ गए है" विजय ने अपनी माँ की तरफ देखते हुए कहा।

"क्यों बेटा तुम्हें मैं अच्छी नहीं लग रही हूँ क्या जो अपने पिता के बारे में पूछ रहे हो" रेखा ने अपने बेटे की बात सुनकर मुँह बनाते हुए कहा।

"माँ आप कैसी बातें कर रही हो शायद आप नहीं जानती की आप मुझे दुनिया में सभी से ख़ूबसूरत और प्यारी लगती है" विजय ने अपनी माँ की बात सुनकर जज़्बाती होते हुए कहा।

"बेटे अब बातों को छोड़ो तुम्हें अपनी शर्त याद है ना" रेखा ने अपने बेटे को याद दिलाते हुए कहा । रेखा अपने पति को उसकी बहन के साथ देखकर बुहत गरम हो चुकी थी । इसीलिए वह चाहती थी की उसका बेटा उसके साथ जल्द से जल्द कुछ करे।
 
"माँ मुझे तो सब याद है बस आपकी इजाज़त चाहिये" विजय अपनी माँ की बात सुनकर अपनी जीभ को अपने होंठो पर फिराते हुए बोला।

"मेरी इजाज़त क्योँ" रेखा ने अन्जान बनने का नाटक करते हुए कहा।

"माँ अब आपको अपनी जुबान से सब कुछ कहलवाने के लिए मुझे आपको चूना और कुछ करना होगा इसीलिए आपकी इजाज़त चाहिये" विजय ने अपनी माँ की बात सुनकर उसे समझाते हुए कहा ।

"बेटा अब तुम सब कुछ देख चुके हो भले जी भरकर छु भी लो मगर मैं अपनी जुबान से कुछ कहने वाली नही" रेखा ने अपने बेटे की बात सुनकर उसे इजाज़त देते हुए कहा।

"माँ वह आप मुझ पर छोड दो" विजय यह कहता हुआ अपने कपडे उतारने लगा।

विजय अपने पूरे कपडे उतारकर बिलकुल नंगा हो गया । विजय का लंड अपनी माँ को चूने के अहसास से ही ज़ोर से उछलता हुआ झटके खा रहा था।

"अरे बेटे तुम तो बुहत बेशर्म हो इतनी जल्दी नंगे भी हो गये" रेखा ने अपने बेटे के नंगे जिस्म को गौर से देखते हुए कहा।

"माँ देखो आपको देखकर कैसे उछल रहा है" विजय ने अपनी माँ को अपनी तरफ घूरता हुआ पाकर अपने लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा ।

"चल बेशर्म तुम्हारा यह तो हर वक्त उछलता रहता है" रेखा ने अपने बेटे की बात सुनकर अपना मूह दूसरी तरफ करते हुए कहा । विजय आगे बढकर अपनी माँ के पास खडा हो गया और उसका हाथ पकडते हुए अपने खडे लंड पर रख दिया ।

रेखा जो पहले से बुहत गरम थी उसका पूरा जिस्म अपना हाथ अपने बेटे के गरम लंड पर पड़ते ही ज़ोर से काम्पने लगा।

"माँ इसे प्यार करो ना" विजय ने अपनी माँ के हाथ को पकडकर अपने लंड पर आगे पीछे करते हुए कहा।

"क्यों बेटे मैं क्यों प्यार करुं। मुझे नहीं करना तुम्हारे इस बदमाश से प्यार ब्यार" रेखा ने अचानक अपने आप को सँभालते हुए कहा और अपने हाथ को अपने बेटे के लंड से हटा दिया।

"माँ देखते हैं आपका यह अहंकार कब तक चलता है" विजय अपनी माँ की बात सुनकर बोला।

"माँ आप ज़रा उठो मुझे आपके कपडे उतारने है" विजय ने अपनी माँ की तरफ देखते हुए कहा।

"वाह बेटे शर्त के बहाने आज अपनी माँ को पूरा नंगा करके देखोगे" रेखा ने बेड से उठकर अपने बेटे को टोकते हुए कहा।
 
माँ शर्त मैंने हारी नहीं है" विजय ने अपनी माँ की नाइटी को उतारते हुए कहा।

"हाँ मगर मुझे पता है तुम ही हारोगे" रेखा अपनी नाइटी के उतरने के बाद बैठने लगी।

"एक मिनट माँ" विजय ने अपनी माँ को कमर से पकडकर बैठने नहीं दिया ।

"क्या हुआ बेटे" रेखा ने सीधा खडे होते हुए अपने बेटे को हैंरानी से देखते हुए कहा।

"माँ मुझे आपको पूरा नंगा करना है" विजय ने अपनी माँ के चिकने गोरे जिस्म को घूरते हुए कहा।

"मैं क्यों उतारुं जो करना है खुद ही करो" रेखा ने अपने बेटे की बात को सुनकर कहा । रेखा का पूरा जिस्म उसके अपने बेटे के सामने नंगे होने के अहसास से ही गरम होने लगा।

विजय अपनी माँ के सारे कपड़ों को एक एक करके उतारने लगा । अब बेटे के हाथों रेखा अपने पूरे कपड़े उतरने के बाद वह बिलकुल नंगी होकर अपने बेटे के सामने खडी थी।

"माँ आप सीधी होकर बेड पर लेट जाओ" विजय ने अपनी माँ के पूरे कपडे उतारने के बाद उसके नंगे शरीर को गौर से देखते हुए कहा ।

रेखा अपने बेटे की बात सुनकर बेड पर सीधी होकर लेत गई।

"माँ पिता के साथ आप यहीं सोती हो ना" विजय ने अपनी माँ के सीधा होकर लेटने के बाद खुद भी बेड पर चढ़ते हुए कहा।

"बदमाश तुम्हें शर्म नहीं आती मुझसे यह बात पूछ्ते हुये" रेखा अपने बेटे की बात सुनकर उसे डाँटते हुए कहा।

"माँ मैं जो पूछ रहा हूँ उसका जवाब दो" विजय अपनी माँ की टांगों के बीच आते हुए उसके ऊपर लेट गया। विजय के ऐसा सोने से उसका खडा लंड उसकी माँ की चूत के ऊपर आकर दब गया और उसका नंगा सीना उसकी माँ की चुचियों में दब गया ।

"हाहहह बेटे हाँ हम यहीं सोते हैं तुम्हारे बापू के साथ" रेखा अपनी चुचियां अपने बेटे के सीने और उसका लंड अपनी चूत के दाने से टकराने की वजह से ज़ोर से सिसकते हुए बोली।

"माँ क्या पिता जी आपको इसी बेड पर चोदते है?" विजय ने अपनी माँ की चूत पर अपना लंड घिसते हुए कहा।

"ओहहहह बेटे तुम क्या कह रहे हो तुम्हारे पिता तो जाने कितनी दफ़ा हमें इस बेड पर चोद चुके है" रेखा ने अपने बेटे की हरक़तों से गरम होते हुए कहा।

"माँ क्या आपका बेटा भी आपको यहीं चोद सकता है" विजय ने अपनी माँ को गरम होता हुआ देखकर उसका फ़ायदा उठाते हुए कहा । विजय का लंड लोहे की तरह सख़्त होकर उसकी माँ की चूत के आस पास घिस रहा था।
 
"आह्ह्ह्हह नहीं बेटे मैं तुम्हारी माँ हूँ। मैं तुमसे यह सब नहीं कर सकती" रेखा समझ चुकी थी की उसका बेटा उसको झाँसा देकर सब कुछ बुलवाना चाहता है इसीलिए उसने अपने आपको संभालते हुए कहा ।

विजय अपनी माँ की बात सुनकर अपने होंठो को अपनी माँ के होंठो पर रख दिया और उसके पूरे होंठो को अपने मुँह में भरकर चूसने लगा । विजय कुछ देर तक अपनी माँ के होंठो को चूसने के बाद उसका मूह खोलते हुए उसकी जीभ को अपने होंठो के बीच लेते हुए चूसने लगा, रेखा अपने बेटे की हरक़तों से बुहत ज्यादा गरम हो चुकी थी । इसीलिए उसने अपने हाथ को अपने बेटे के बालों में डालकर उसके बालों को सहलाने लगी ।

विजय कुछ देर तक अपनी माँ की जीभ को चाटने के बाद उसकी जीभ को अपने मूह से निकाल दिया और अपनी जीभ को उसके मूह में डाल दिया । रेखा अपने बेटे की जीभ अपने मुँह में घुसाते ही उसे पागलोँ की तरह चाटने लगी और उसके बालों को ज़ोर से सहलाने लगी ।

विजय अचानक अपनी जीभ को अपनी माँ के मूह से निकालते हुए थोडा नीचे होकर उसकी चुचियों को अपने हाथों से मसलने लगा । विजय अपनी माँ की बड़ी बडी चुचियों को अपने हाथों से मसलते हुए अपना मूह उनके उभारों के ऊपर रख दिया और अपनी माँ की चुचियों के नरम उभारों को ज़ोर से चूसने और काटने लगा।

"उईए बेटे क्या कर रहे हो दर्द हो रहा है" रेखा अपनी चुचियों पर अपने बेटे के दांतों के पड़ते ही ज़ोर से सिसकते हुए बोली।

"ओहहहहह माँ आपकी चुचियां इतनी मीठी और नरम हैं की इन्हें चूसने और काटने का मन करता है" विजय ने अपनी माँ की चुचियों से अपना मुँह हटाते हुए कहा और फिर से उन पर टूट पडा।

"उई बदमाश निशान पड गए तो तुम्हारे बापू को क्या कहुँगी" रेखा ने अपने बेटे को बालों से पकडते हुए अपनी चुचियों से हटाते हुए कहा।

"माँ कह देना तुम्हारे बेटे के दाँत के निशान है" विजय ने अपनी माँ की चुचियों से अपना मूह अलग होते ही कहा।

"बेटा । पता है तुम कितने बहादुर हो अभी अपने पिता के डर से अंदर नहीं आ रहे थे" रेखा ने सिसकते हुए कहा।

"माँ सच बताना क्या बापू ने कभी तुम्हें मेरी तरह प्यार किया है" विजय ने अपनी माँ को हँसता हुआ देखकर कहा।

"नही बेटा वह तो बस अंदर डालकर शुरू हो जाते है" रेखा ने मायूस होते हुए कहा ।

"तो फिर माँ अपने आप को क्यों तडपा रही हो आओ मुझ में खो जाओ" विजय यह कहता हुआ अपनी माँ की दोनों चुचियों को बारी बारी अपने मुँह में लेकर चूसने लगा । विजय कुछ देर तक अपनी माँ की चुचियों से खेलने के बाद उसकी चुचियों से अलग होते हुए नीचे होने लगा।
 
विजय अपनी माँ की चुचियों को छोडकर नीचे होते हुए अपनी जीभ को निकालकर अपनी माँ के गोरे चिकने पेट पर फिराते हुए उसकी नाभि में घूसाने लगा।

"आह्ह्ह्ह बेटे क्या कर रहे हो बुहत गुदगुदी हो रही है" रेखा अपने बेटे की हरक़तों से गरम होकर ज़ोर से सिसकते हुए बोली।

"माँ मैं आप के जिस्म के हर हिस्से को प्यार करना चाहता हूँ क्या आप भी अपने बेटे से अपने जिस्म का हर हिस्से को प्यार कराना चाहती हो" विजय ने अपनी माँ के नाभि से अपनी जीभ को हटाते हुए कहा और नीचे होते हुए उसकी चूत के ऊपर बनी काली झाँटों के पास रख दिया ।

"ओहहहह बेटे हाँ जी भरकर प्यार करो अपनी माँ के जिस्म के हर हिस्से को नोच दो" रेखा अपने बेटे की जीभ को अपनी चूत की झाँटों पर पड़ने से ज़ोर से अपने चुतडो को उछालकर सिसकते हुए बोली।

"माँ क्या मैं आपकी प्यारी चूत को चूम सकता हू" विजय ने अपनी जीभ को अपनी माँ की चूत के झाँटों से नीचे करते हुए उसकी चूत के दाने के क़रीब फिराते हुए कहा।

"हाहहहहह बेटे हाँ अपनी माँ की चूत को जी भरकर प्यार करो यह कब से प्यासी है" रेखा विजय की हरक़तों से बुहत ज्यादा गरम होते हुए बोली ।

"आह्ह्ह्ह माँ क्या मैं आपको चोद सकता हू" विजय ने अपनी माँ को बुहत ज्यादा गरम होता देखकर कहा और अपनी जीभ को उसकी चूत के दाने पर फिराने लगा।

"उई बेटे ओह्ह्ह्हह" रेखा अपने बेटे के बालों में हाथ ड़ालते हुए अपनी चूत पर दबाते हुए सिसक उठी।

"माँ कहो न क्या मैं अपनी माँ की प्यारी चूत को चोद सकता हू" विजय ने अपनी माँ की चूत के दाने से अपनी जीभ को हटाकर कहा और फिर नीचे होते हुए अपनी माँ की चूत के दाने को अपने मूह में भरकर चूसने लगा ।
 
दोस्तों आपलोगों के सहयोग के लिए बहुत बहुत थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अगला अपडेट जल्दी ही।कहानी के बारें में अपनी राय अवश्य दें।thanks
 
उईईईई शह्ह्ह्हह्ह बेटे आह्ह्ह्हह" रेखा ज़ोर से सिसकती रही मगर फिर भी अपने मूह से कुछ नहीं बोली।

"माँ बता न क्या मैं आपको चोद सकता हू" विजय ने फिर से अपनी माँ की चूत का दाना अपने मूह से निकालकर कहा और फिर से उसे अपने मुँह में भरकर जोर से चूसने लगा।

"ओहहहहह बेटे नहीं मैं अपने मुँह से नहीं बोल सकती मगर मैं तुम्हें इस वक्त रोक भी नहीं सकती" रेखा ने अपने बेटे के मुँह पर अपने चूतडों को उछालते हुए बोली।

विजय अपनी माँ की बात सुनकर उसकी चूत के दाने को अपने मूह से निकालते हुए थोडा और नीचे हो गया और अपनी माँ की चूत के छेद को गौर से देखने लगा।

"माँ आपकी चूत कितनी सूंदर है और यह क्या इसमें से तो रस निकल रहा है। इसका मतलब आपको भी मज़ा आ रहा है" विजय ने अपनी माँ की रस बहाती चूत की तरफ देखते हुए कहा ।

"ओहहहहह माँ आपकी चूत की खुसबू कितनी शानदार है" विजय ने अचानक अपना नाक अपनी माँ की चूत के छेद के बिलकुल पास करते हुए अपनी साँसें ज़ोर से पीछे की तरफ लेते हुए बोला।

"आआह्ह्ह्ह बेटे क्या कर रहा है तुम्हारी गरम साँसें मुझे अपनी चूत के पास महसूस हो रही है" रेखा ने अपने बेटे की साँसों को अपनी चूत के इतना नज़दीक महसूस करके कहा।

"आआह्ह्ह्हह माँ क्या मैं आपकी प्यारी चूत को चूम सकता हू" विजय ने यह कहते हुए अचानक अपने होंठो को अपनी माँ की चूत के लबों पर रखते हुए चूम लिया,

"आह्ह्ह्ह बेशर्म मेरे जवाब से पहले ही चूम लिया" रेखा ने अपने बेटे को डाँटते हुए कहा ।

"माँ क्या करुं आपकी चूत इतनी सूंदर है की मैं रुक नहीं पाया । आपको अगर बुरा लगा है तो मैं अब इसे नहीं चूमूंगा" विजय ने अपनी माँ की बात सुनकर कहा।

"नही बेटे मैं तुम्हें किसी चीज़ से नहीं रोक सकती" रेखा ने अपने बेटे की बात सुनकर चिल्लाते हुए कहा।

रेखा को अपनी चूत में आग लगी हुयी महसूस हो रही थी । वह चाहती थी की उसका बेटा जल्दी से उसकी चूत को अपनी जीभ से शांत कर दे । विजय अपनी माँ की बात सुनकर अपनी जीभ निकालते हुए अपनी माँ की चूत के दोनों होंठो पर फिराने लगा ।

"आह्ह्ह्ह बेटे क्या कर रहे हो अपनी जीभ को अंदर घुसाओ ना" रेखा की बर्दाशत जवाब देती जा रही थी इसीलिए उसने सिसकते हुए कहा।

विजय अपनी माँ की बात को सुनकर अपने मुँह को खोलते हुए उसकी चूत के दोनों होंठो को अपने मूह में भरते हुए चूसने लगा।
 
"ओहहहहहहहह बेटे ऐसे ही बुहत मज़ा आ रहा है" रेखा बुहत ज्यादा गरम होकर सिसकते हुए बोली, रेखा ने अपनी टांगों को जितना हो सकता खोल दिया और अपने चूतड़ो को भी ऊपर उछालते हुए अपने बेटे के मूह पर दबाने लगी । विजय कुछ देर तक अपनी माँ की चूत के दोनों होंठो को चूसने के बाद अपना मुँह वहां से हटा दिया और अपनी जीभ को कडा करते हुए अपनी माँ की चूत के छेद में डालकर अंदर बाहर करने लगा ।

विजय की इस हरकत से रेखा का पूरा जिस्म अकड़कर काम्पने लगा । वह किसी भी वक्त झर सकती थी । विजय ने अपनी माँ के जिस्म को अकडता हुआ देखकर अपनी जीभ को उसकी चूत से निकाल दिया।

"आआह्ह्ह्हह क्या हुआ बेटे अंदर डाल न ओह्ह्ह्हह जल्दी कर बुहत मज़ा आ रहा था" रेखा ने अपने बेटे की इस हरकत से हैंरान होते हुए कहा ।

"माँ अब जीभ नहीं आपकी चूत की प्यास मेरा लंड बुझायेगा। बताओ क्या तुम मुझसे चुदवाना चाहती हो" विजय ने अपनी माँ की बात सुनकर उसकी टांगों को उठाकर घुटनों तक मोड़ दिया और अपने खडे लंड को पकडकर उसकी चूत पर घिसते हुए कहा।

रेखा अपने बेटे की चालाकी को देखकर दंग रह गयी। मगर उसके पास उस वक्त कोई चारा नहीं था उसकी चूत में आग लगी हुयी थी । बस अगर उसका बेटा 1 मिनट और उसकी चूत को चाटता तो वह झर जाती शायद यह बात विजय भी जानता था तभी तो वह अपनी माँ के गरम होने का पूरा फ़ायदा उठा रहा था।

"बेटा तुम बुहत चालाक हो अपनी माँ के साथ तुम ऐसा नहीं कर सकते" रेखा ने अपने बेटे की तरफ देखते हुए कहा।

"ठीक है माँ जैसे आप का हुक्म आज के बाद में आपको कभी तंग नहीं करुंगा" विजय ने अपनी माँ की बात सुनकर अपने लंड को उसकी चूत के छेद पर घिसते हुए उससे अलग होने लगा।

"नही बेटा तुम मुझे ऐसे आधे में नहीं छोड सकते" रेखा ने अपने बेटे के हाथ को पकडकर अपने ऊपर गिराते हुए कहा । विजय लडख़ड़ाकर अपनी माँ के ऊपर गिर गया जिस वजह से उसका लंड सीधा उसकी माँ की चूत पर आकर टक्कर मारने लगा।

"माँ तो फिर बोलो न क्या मैं आपको चोद सकता हू" विजय ने अपनी माँ के ऊपर गिरते ही उसकी आँखों में देखते हुए कहा।

"हाँ बेटे तुम अपनी माँ की चूत में अपने मुसल घुसा सकते हो" रेखा ने अपना हाथ नीचे करते हुए अपने बेटे के लंड को पकडकर अपनी चूत के छेद पर टिकाते हुए बोली।
 
"आह्ह्ह्ह माँ मैं बता नहीं सकता मुझे कितनी ख़ुशी हो रही है" विजय ने अपनी माँ की बात सुनकर खुश होते हुए कहा।

"ओहहहह बेटे अपनी ख़ुशी को अपनी माँ की चूत को ज़ोर से चोदकर पूरा करो" रेखा अपने बेटे की बात को सुनकर अपने चूतडों को उछालते हुए बोली ।

रेखा ने जैसे ही अपने चूतड़ को अपने बेटे के लंड पर उछाला । उसके बेटे के लंड का मोटा सुपाडा उसकी चूत के होंठो को फ़ैलाते हुए रेखा की चूत में फँस गया ।विजय भी अपने लंड के सुपाडे को अपनी माँ की चूत में फँसा हुआ पाकर उसके ऊपर से उठकर सीधा होते हुए अपनी माँ की टांगों को पकड लिया।

विजय ने अपनी माँ की टांगों को पकडकर अपने लंड को थोडा बाहर खींचकर एक जोर का धक्का मार दिया । विजय के इस धक्के से उसका आधे से ज्यादा लंड उसकी माँ की गीली चूत में घुस गया।

"आह्ह्ह्हह्ह बेटा कितना मोटा है तुम्हारा ओह्ह्ह्हह मेरी चूत को तो पूरा भर दिया है" रेखा अपनी चूत में अपने बेटे के तगडे लंड के जाते ही ज़ोर से सिसकते हुए बोली ।

"माँ यह अब सारी ज़िंदगी आपकी चूत में ही रहना चाहता है" विजय ने अपनी माँ की बात सुनकर अपने लंड को बाहर खीचते हुए एक और ज़ोरदार धक्का मार दिया । इस बार विजय का लंड उसकी माँ की चूत में पूरा घुसते हुए उसकी बच्चेदानी में जाकर टक्कर मार दिया।

"उईई आहहहह बेटे तुम्हारा तो बुहत लम्बा भी है यह तो मेरी बच्चेदानी को टक्कर मार रहा है" रेखा अपने बेटे का पूरा लंड घुसते ही दर्द के मारे हल्का चीखते हुए बोली।

"हाँ माँ मेरा लंड अपनी माँ की चूत को देखकर ज्यादा लम्बा और मोटा हो गया है" विजय ने अपने लंड को पूरा बाहर खींचकर अपनी माँ की चूत में फिर से जड़ तक पेलते हुए कहा ।

"ओहहहहह बेटे आराम से क्या मेंरी छुइ को फाड़कर ही छोड़ोगे क्या" रेखा ने अपने बेटे के लंड को इतनी ज़ोर से पूरा अपनी चूत में घूसने से फिर से चीखते हुए कहा।

"क्यों माँ पहली बार चुदवा रही हो क्या जो ऐसे चिल्ला रही हो" रेखा ने अपनी माँ की चूत में अपने लंड को वैसे ही अंदर बाहर करते हुए बोला।

"आह्ह्ह्ह बेटा मैं इंसान के लंड से तो चुदवा चुकी हूँ मगर गधे के लंड से पहली बार चुदवा रही हू" रेखा ने अपने बेटे की बात को सुनकर कहा।

"माँ मेरा इतना बड़ा भी नहीं की आप मुझे गधा कहे" विजय ने अपनी माँ की तरफ देखते हुए कहा।

"बेटे तुम्हारा इतना छोटा भी नहीं की मैं इसे इंसान का लंड कहूँ" रेखा ने अपने चूतडों को उछालते हुए कहा रेखा को अब बुहत ज्यादा मज़ा आ रहा था। अपने बेटे के मोटे और लम्बे लंड से चुदवाते हुए । इसीलिए वह अपने चुतडो को बुहत ज़ोर से उछालते हुए अपने बेटे के लंड को अपनी चूत में पूरा लेने की कोशिश कर रही थी।
 
विजय अपनी माँ के चूतडो को उछालता हुआ देखकर अपने लंड को बुहत ज़ोर से अपनी माँ की चूत में अंदर बाहर करने लगा और रेखा भी बुहत ज़ोर से सिसकते हुए अपने चूतडो को उछाल उछाल कर अपने बेटे के लंड को अपनी चूत में लेते हुए चुदवाने लगी । रेखा का पूरा जिस्म अपने बेटे से चुदवाते हुए पसीना पसीना हो गया था और उसका बदन अब अकडने लगा था। वह झरने के बिलकुल क़रीब थी ।

रेखा का बदन अचानक झटके खाने लगा और उसके मूह से ज़ोर की सिसकियां निकलने लगी । रेखा ने अपने दोनों हाथों को अपने बेटे के चूतडों में डालकर उसे अपनी चूत पर दबाने लगी, विजय भी अपनी माँ को इतना उत्तेजित देखकर पूरी ताक़त के साथ उसकी चूत में अपना लंड अंदर बाहर करने लगा ।

"आआह्ह्ह्ह शहहहहह बेटे ओह्ह्ह्हह्ह्" रेखा के मुँह से बस इतना निकला और उसके नाख़ून उसके बेटे के चूतडों में घुस गये।

"उईई माँ" विजय भी अपनी माँ के नाखुनों को अपने चूतड़ों में घूसने से बुहत ज़ोर से चिल्लाते हुए पूरी ताक़त से अपने लंड को अपनी माँ की चूत में पेलने लगा । रेखा झरते हुए हवा में उड़ रही थी । उसे इतना मज़ा पहले कभी नहीं आया था, अपने ससुर से चुदवाते हुए भी उसे इतना मज़ा नही आया था। क्योंकी उसके बेटे का जवान लंड उसकी चूत के हर हिस्से को बुहत ज़ोर और तेज़ी से रगड दे रहा था।

रेखा ने कुछ देर तक झरने के बाद अपने हाथ को अपने बेटे के चूतडो से हटाकर अपनी टांगों को उसकी कमर में फँसा दिया और अपने बेटे को अपनी टांगों से अपनी चूत पर दबाव देते हुए अपने चूतड़ उछालकर चुदवाने लगी । रेखा की आग एक बार झरने के बाद शांत होने की बजाये ज्यादा भडक गयी थी। इसीलिए वह चुदवाते हुए बुहत ज़ोर से सिसक भी रही थी ।

अचानक रेखा ने अपने बेटे को खींचकर अपने ऊपर गिरा दिया और उसे अपने नीचे करते हुए खुद उसके ऊपर आ गयी । रेखा ने यह सब इतनी चालाकी से किया था की उसके बेटे का लंड उसकी चूत में ही पडा रह गया।
 
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