साली रंडी इसका मतलब तुम जानती थी की मैं तुम्हें ठरकी डॉ के साथ देख रहा हू" विजय ने अपनी माँ की बात सुनकर एक्साईटमेंट में अपना लंड और तेज़ी के साथ उसकी चूत में अंदर बाहर करते हुए कहा।
"ओहहहह बेटा मैंने भी ऐसे ही सारी उम्र नहीं बितायी तुम्हारी एक्साईटमेंट देखकर ही मैं समझ गयी थी की तुमने वहां पर सब कुछ देखा है" रेखा ने अपने बेटे की तरफ देखते हुए कहा ।
"ओहहहहह माँ सच में मुझे आपको उस ठरकी डॉ के साथ देखकर बुहत मजा आ रहा था । क्या आप भी सच में उससे चुदवाना चाहती हो" विजय ने अपनी माँ की बात सुनकर वैसे ही अपनी माँ को चोदते हुए कहा।
"आह्ह्ह्ह बेटे बुहत कमीने हो तुम। डॉ की बात करते हुए तुम्हारा लंड कैसे फूलकर झटके मार रहा है जब तुम मुझे उसके साथ चुदते हुए देखोगे तो तुम्हारी क्या हालत होगी" रेखा ने जानबूझकर अपने बेटे को ज्यादा उत्तेजित करते हुए कहा।
"आह्ह्ह्ह माँ क्या बाताऊँ वह पल मेरी ज़िंदगी का सब से शानदार पल होगा" विजय इतना कहकर अपनी माँ की टांगों को पकडते हुए उसके पेट पर रखकर बुहत ज़ोर से उसकी चूत में अपना लंड अंदर बाहर करने लगा ।
"आआह्ह्ह्ह माँ ओहहहह मैं आ रहा हूँ" विजय बुहत ज़ोर से अपनी की चूत में अपना लंड अंदर बाहर करते हुए झरने लगा।
"ओहहहहहह बेटे तुम्हारा लंड झरते हुए तो और ज्यादा बड़ा और मोटा हो जाता है । आआह्ह्ह्ह मैं तुम्हें एक्साइटेड करने के लिए ही उस डॉ का नाम लिया था" रेखा भी अपने बेटे के झरने से सिसकते हुए झरने लगी ।
विजय झरने के बाद निढाल होकर अपनी माँ के ऊपर गिर गया।
"बेटे अब उठो कहीं कोई आ गया तो" रेखा ने अपने बेटे को अपने ऊपर से उठाते हुए कहा । रेखा ने जैसे ही अपने बेटे को अपने ऊपर से हटाकर उठाने की कोशिश की उसके होश ही उड़ गए सामने दरवाज़ा खुला हुआ था और इतनी देर से रेखा को उसके बेटे के साथ चुदते हुए कोई देख रहा था, रेखा की नज़र जैसे ही सामने गयी उसने जल्दी से बेड पर पडी हुयी चादर को उठाकर अपने नंगे जिस्म को ढ़क लिया ।
हुम्म्म्म तो यहाँ पर माँ बेटे दुनिया से बेखबर मज़े लूट रहे है" मनीषा ने अंदर आते हुए कहा।
"मामी आप यहाँ पर क्या कर रही हो" विजय मनीषा को देखकर बिलकुल नहीं डरा था । वह बेड से उठते हुए नंगा ही सीधा खडा होते हुए बोला ।
"वाह भाई बेशरमी तो देखो अपनी माँ के साथ मज़े करने के बाद ऐसा नंगा होकर खडा है जैसे कोई अवार्ड जीत लिया हो" मनीषा ने विजय के लंड को घूरते हुए उसे टोककर कहा।
"मामी आप क्यों जल रही हो कहो तो आपकी भी प्यास बुझा दूँ" विजय वैसे ही नंगा अपनी मामी के पास आकर बोला।
"भान्जे अपनी औक़ात में रहो में तुम्हारी मम्मी की तरह नहीं हूँ जहाँ लंड देखा वहीँ गिर गई" मनीषा ने गुस्से से विजय को डाँटते हुए कहा।
"तो कैसी हैं आप मामी" विजय ने अपनी मामी को देखते हुए उसके हाथ को पकडकर सहलाते हुए कहा।
"भान्जे मेरे हाथ को छोड़ो" मनीषा ने गुस्सा करते हुए कहा।
"अरे वाह मामी तो नाराज़ हो गई अच्छा ज़रा मेरे लंड को छुकर देख लो शायद आपको वह अच्छा लग जाए" विजय ने अपनी मामी का हाथ अपने मुरझाये हुए लंड पर रखते हुए कहा ।
"भान्जे तुम मुझे ऐसी वैसी औरत मत समझो" मनीषा ने अपना हाथ जल्दी से अपने भांजे के लंड से हटाते हुए कहा । मनीषा का पूरा जिस्म अपने भान्जे के लंड को छुने से सिहर उठा था । मनीषा विजय का हाथ दूर झटकने के बाद गुस्से से वहां से जाने लगी ।
"मामी आप हमारे बारे में पिताजी को बताने का तो नहीं सोच रही हो" विजय ने अपनी मामी को वहां से जाता हुआ देखकर कहा।
"मेरी मर्ज़ी बता दूंगी तुम क्या करोगे" मनीषा ने विजय की बात सुनते हुए गुस्सा होकर कहा।
"मामी भला मैं क्या कर सकता हूँ बस मुझे तो इतना पता है के नरेश भैया और आप" विजय मनीषा के पीछे जाते हुए उसे पीछे से अपनी बाहों में भरते हुए कहा।
"नरेश और मैं क्या कह रहे हो तुम" मनीषा जो विजय के हाथ को बर्दाशत नहीं कर पा रही थी उसकी बात सुनकर बिलकुल शांत होते हुए बोली ।
"छोड़ो न मामी इन बातों को बस चुपचाप मज़े लो" विजय ने अपने हाथों से अपनी मामी की चुचियों को पकडकर दबाते हुए कहा।
"भान्जे मैं किसी को कुछ नहीं बताऊँगी । अब प्लीज मुझे छोड दो" मनीषा ने अपने भांजे के हाथ अपनी चुचियों पर पड़ने से सिसकते हुए कहा।
मामी छोड दूंगा मगर इसका कुछ करना होगा । देखो कितना बदमाश है अपनी माँ की चूत में जाने के बाद भी शांत नहीं हुआ। कैसे अपनी भोली भाली मामी को तंग कर रहा है" विजय ने अपनी मामी को सीधा करते हुए उसका हाथ अपने लंड पर रखते हुए कहा ।
मानिषा ने जैसे ही सीधा होते हुए अपने भांजे का लंड देखा उसकी आँखें फटी की फटी रह गयी और उसका हाथ अपने आप विजय के लंड पर ऊपर नीचे होने लगा।
"आह्ह्ह्हह मामी यह हुयी न बात" विजय ने अपनी मामी का हाथ अपने लंड पर आगे पीछे होने से सिसकते हुए बोला।
मानिषा विजय के लंड को देखकर उसकी दीवानी हो गई थी। इसीलिए वह विजय के लंड को अपनी मुठी में लेकर आगे पीछे कर रही थी । विजय ने अपनी मामी से अपना लंड सहलाते हुए उसकी साड़ी के पल्लु को उसकी चुचियों से अलग कर दिया और अपनी मामी के ब्लाउज के बटन खोलते हुए उसकी चुचियों को उसकी ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा ।
विजय ने अपनी मामी की चुचियों को दबाते हुए अचानक अपना मूह आगे करते हुए अपनी मामी के होंठो पर रख दिया । मनिषा बुहत ज्यादा गरम हो चुकी थी अपने भांजे के होंठ अपने होंठो पर पड़ते ही वह उसके साथ डीप फ्रेंच किस में चलि गयी ।
"बेटा तुम्हारे बापू के आने का टाइम हो गया है तुम्हें जो करने है दीदी के कमरे में जाकर करो" अचानक रेखा ने अपने बेटे और उसकी मामी को बताते हुए कहा।
"दीदी आप बुहत चलाक हैं इतने दिनों तक अपने बेटे से खुद ही मज़े लेती रही और मुझे कुछ बताया भी नही" मनीषा ने रेखा के बोलने से विजय से अलग होते हुए कहा।
"दीदी अब तो आपको पता चल गया आप इसे अपने कमरे में लेकर जाओ" रेखा ने मनीषा की बात सुनकर हँसते हुए कहा।
"नही दीदी इस वक्त ठीक नहीं है । मैं खुद ही अपने भांजे को सही वक्त देखकर बुला लूंग़ी" मनीषा ने रेखा की बात सुनकर हँसते हुए कहा।
"ठीक है दीदी जैसे आपकी मर्ज़ि" रेखा ने हँसते हुए कहा।
"भान्जे छोटी उम्र में ही बुहत अच्छी देख भाल कर रखी है अपने इस हथियार की" मनीषा ने अपने भान्जे के लंड को दबाते हुए हँसकर कहा।
"मामी यह हथियार अपनों के काम ही तो आएगा जैसे मम्मी और आप" विजय ने मनीषा की बात सुनकर मुस्कराते हुए कहा।
मुझे क्या पता यार" नरेश ने विजय की बात सुनकर मुस्कराते हुए कहा।
"यार इन औरतों को देखो अपनी खुजलि मिटाने के लिए वह मरदों से इंजेक्शन लगवाए और बच्चा रोकने के लिए डॉक्टर्स से" विजय ने हँसते हुए नरेश से कहा और दोनों ज़ोर से हंसने लगे ।
"यार तुम बुहत बदमाश हो" नरेश ने ज़ोर से हँसते हुए विजय से कहा।
"और बताओ क्या कर रहे हो सुबह से" विजय ने नरेश के पास बेड पर सोते हुए कहा।
"क्या बाताऊँ यार अपना टेम्प्रेचर तो किसी ने हाई कर दिया है" नरेश ने एक ठण्डी आहहह भरते हुए कहा।
"अब फिर किस ने तुम्हारी नींद चुरा ली" विजय ने नरेश की बात सुनकर उत्तेजित होते हुए कहा।
"अब यार क्या बताऊँ अब तुम गुस्सा न हो जाओ" नरेश ने विजय की तरफ देखते हुए कहा।
"अब बताओ भी मैं नाराज़ नहीं हूंगा" विजय ने वैसे ही उत्तेजित होते हुए बोला ।
"यार वह तुम्हारी बड़ी बहन कंचन ने मेरा लौडा गरम कर दिया है" नरेश ने सीधा सीधा विजय को बताते हुए कहा।
"कंचन दीदी मगर कैसे" विजय ने नरेश की बात सुनकर और ज्यादा उत्तेजित होते हुए कहा।
नरेश ने विजय को पूरी बात बता दिया।
"यार मुझे लगता है यह हम दोनों की बहनें साथ में मिलकर हम दोनों को पागल बना रही हैं और उन दोनों का चाहत अदला बदली करने का है" विजय ने नरेश की बात सुनकर गरम होते हुए कहा ।
"क्या कहा बे शीला भी तुम्हें लाइन दे रही है" नरेश ने विजय की बात सुनकर हैंरान होते हए कहा।
"हाँ यार शीला दीदी जानबूझकर मुझे अपना जिस्म दिखाती रहती है" विजय ने नरेश की बात सुनकर कहा।
"यार कंचन ने तो मुझे पागल बना दिया है काश वह मेरी बहन होती" नरेश ने विजय की तरफ देखते हुए कहा ।
"जल मत बे । वैसे भी वह तुझसे चुदवाना चाहती है" विजय ने नरेश की बात सुनकर हँसते हुए कहा।
"जलने की तो बात है साले इतना अच्छा माल तुम्हें सारी ज़िंदगी के लिए फ्री में मिल गया" नरेश ने विजय की बात सुनकर उसे देखते हुए कहा।
"क्यों बे शीला भी तो किसी से कम नहीं । साली चलती ऐसे है जैसे उसे अपना जिस्म सम्भाला नहीं जा रहा हो। साली अपनी गांड को ऐसे हिलाती है जैसे की उसकी गांड में लंड पडा हो" विजय ने नरेश की बात सुनकर कहा ।
अब मेरा मुँह मत खुलवा। तुम्हारी बहन कंचन साली का जिस्म कितना भरा है जैसे भगवान ने सारा माल उसके जिस्म में कूट कूट कर डाला है। कितनी बड़ी चुचियाँ और गांड। साले कहीं तू उसकी गांड तो नहीं मारता। साली की गांड डेली बढ़ती ही जा रही है" नरेश ने विजय की बात सुनकर गुस्से से उसकी बहन की तारीफ करते हुए कहा ।
"अबे यार तुम्हारी बहन की चुचियां भी कुछ कम नहीं। साले तू उसकी चुचियों के उभारों को जी भरकर चूसता और चाटता है । इसीलिए तो जब देखो वह साड़ी के ऊपर से ही चमकती रहती है" विजय ने शीला की तारीफ करते हुए कहा।
"छोड़ो यार हम आपस में क्यों लड रहें हैं लगता है हम दोनों पर एक दुसरे की बहनों का 'जादू चल गया है" नरेश ने विजय की बात सुनकर हँसते हुए कहा।
"हाँ यार वह हमें पागल बना रही हैं। मेरे पास एक आईडिया है जिससे हमें और ज्यादा मजा आयेगा" विजय ने नरेश की बात सुनते हुए कहा ।
"क्या है बे जल्दी बता ना" नरेश ने उत्तेजित होते हुए कहा।
"यार अगर हम एक दुसरे की बहनों को एक दुसरे के सामने चोदे तो" विजय ने नरेश की आँखों में देखते हुए कहा।
"क्या यार तुमने तो मेरे मूह की बात छीन ली साले बुहत कमीने हो गये हो" नरेश की आँखें विजय की बात सुनकर चमकने लगी और उसने विजय को दाद देते हुए कहा।
बस यार तुम्हारी ही संगत का असर है" विजय ने नरेश की तरफ देखते हुए कहा और दोनों ज़ोर से हंसने लगे,
"यार एक बात कहुँ तुम्हारी किस्मत मुझसे अच्छी ही है क्योंकी तुम्हारी माँ भी किसी से कम नही" नरेश ने फिर से विजय की तरफ देखते हुए कहा ।
"अब फिर से शुरू हो गया मुझसे पहले तो उसका रस तुमने चखा और अपनी माँ को भी पटा लिया साले । मुझे सलाह ही नहीं की" विजय ने नरेश की बात सुनकर उसे टोकते हुए कहा।
"क्या साले अब तुम्हारी नज़र मेरी माँ पर भी है क्या?" नरेश ने हैंरान होते हुए कहा।
"क्यों बे तुम्हारी माँ कौन सी दूध की धूलि है जो मुझसे चुदवाने में उसे तकलीफ होगी" विजय ने नरेश की बात सुनकर गुस्सा होते हुए कहा।
"साले गुस्सा मत हो चोद लेना मेरी माँ को भी। मुझे कोई ऐतराज़ नहीं पर जैसे तुमने हमारी बहानों के बारे में आईडिया दिया है अगर वैसे ही हम अपनी माँओं के साथ करें तो" नरेश ने विजय की आँखों में झाँकते हुए कहा।
"साले कमीने अपनी माँ को मेरे सामने चुदता देखना चाहते हो" विजय ने नरेश की बात सुनकर खुश होते हुए कहा।
"हा बे और तेरी माँ को भी तेरे सामने चोदना चाहता हूँ ताकी तुम्हें पता चले की वह कितनी बड़ी छिनाल है" नरेश ने विजय की बात सुनकर हँसते हुए कहा ।
"साले छिनालपन तो हर औरत में होता है बस उसे निकालने वाला होना चाहिये" विजय ने नरेश की बात सुनकर हँसते हुए कहा और दोनों आपस में गप मारने लगे ।
मुकेश ऑफिस से वापस आ चुका था और वह खाना खाने के बाद अपने कमरे में आराम करने लगा ।
मानिषा अपने बापू के कमरे में आ गयी थी । अनिल अपने कमरे में बेड पर लेटा हुआ था । वह सोया हुआ नहीं था।
"बापु अब तबीयत कैसी है" मनीषा ने अपने बाप के पास बेड पर बैठते हुए कहा।
"बेटी अब सही है। मैं भी तुम्हें ही याद कर रहा था" अनिल ने बेड से उठते हुए अपनी बेटी को अपनी गोद पर लिटाते हुए कहा।
"बापु मैं तो आपकी सेवा करने के लिए ही हू" मनीषा ने अपने बाप के सिकुड़े हुए लंड को धोती के ऊपर से ही अपने हाथ में लेते हुए कहा।
"ओहहहह बेटी आज रात को तुम जी भरकर मेरी सेवा कर लेना" अनिल ने अपनी बेटी के बालों में हाथ ड़ालते हुए कहा।
"हाँ बापू मैं रात को ज़रूर आपकी सेवा करूंगी। मगर इस वक्त थोडी सेवा तो कर ही सकती हू" मनीषा ने अपने पिता की धोती में से उसके लंड को खींचकर बाहर निकाकर सहलाते हुए कहा ।
मानिषा के मूह उसके बाप के लंड के बिलकुल क़रीब था । वह अपने बाप के लंड को अपने हाथ से सहलाते हुए बुहत गौर से बड़ा होता हुआ देख रही थी, कुछ ही देर में अनिल का लंड बिलकुल तनकर फनफनाने लगा।
मनिषा ने अपना मुँह थोडा नीचे करते हुए अपने बाप के लंड को चूम लिया।
"हाहहह बेटी" मनीषा के होंठ अपने लंड पर पडते ही अनिल सिसक उठा । मनिषा अपना मूह थोडा सा खोलते हुए अपने बापू के लंड के सुपाडे को अपने होंठो के बीचे ड़ालते हुए बुहत ज़ोर से चूसने लगी ।
"ओहहहह हहः" अनिल के मुँह से जोर की सिस्कियाँ निकल रही थी और वह मज़े से अपनी बेटी के बालों को सहला रहा था । मनीषा अपने होंठो से अपने बाप के लंड को चूसते हुए अपने एक हाथ से उसकी मोटी गोटीयों और दुसरे हाथ से उसके लंड को सहला रही थी।
अनिल मज़े के मारे हवा में उड़ रहा था। उसे अपना लंड अपनी बेटी के लबों के बीच आगे पीछे होता हुआ जन्नत का मजा दे रहा था।
"आजहहहह बेटी मुझसे कण्ट्रोल नहीं हो रहा है" कुछ ही देर में अनिल का जिस्म काम्पने लगा और वह सिसकते हुए बोला। मनीषा अनिल की बात सुनकर उसके लंड ज़ोर से चूसते हुए अपने हाथ से तेज़ी के साथ सहलाने लगी ।
"ओहहहह बेटी आअह्हह्ह" अनिल का जिस्म झटके खाने लगा और उसके लंड से वीर्य निकल कर उसकी बेटी के मूह में गिरने लगा । मनीषा ने अपने पिता के लंड से निकलते हुए वीर्ये की एक बूँद भी नीचे नहीं गिरने दी, वह अपने बाप के लंड से निकलती हुयी हर बूँद को अपने मूह से सीधा अपने पेट में उतार रही थी।
अचानक दरवाज़ा खटकने लगा जिसकी आवाज़ से अनिल चोंक गया। मगर मनीषा को कोई फर्क नहीं पडा वह अपने बाप के लंड को अपने मूह से निकालकर अपने हाथ से आगे पीछे करने लगी जिस वजह से अनिल के लंड के सुपाडे से फिर से वीर्य की कुछ बूँदे निकलने लगी । मनीषा ने अपना मूह खोलकर अपने पिता के लंड के सुपाडे को फिर से अपने मूह में भर लिया और उसे ज़ोर से चूसते हुए उसमें से बचा हुआ वीर्य भी निचोडकर पीने लगी ।
मानिषा ने अब अपने बाप के लंड को अपने मुँह से निकाल दिया और खुद बाथरूम में चलि गयी । दरवाज़ा अब ज़ोर से खटखटाने लगा था, अनिल को ऐसे महसूस हो रहा था जैसे उसके पूरे जिस्म को निचोड दिया गया हो। वह बुहत ज़ोर से हांफ रहा था ।
अनिल अपनी साँसों को सँभालते हुए दरवाज़े की तरफ बढ़ने लगा और अपने हाथ से दरवाज़े का लॉक खोल दिया।
"क्या बाबुजी इतनी देर क्या कर आहे थे?" रेखा ने अंदर आते ही अपने ससुर से आँखें नचाते हुए सवाल किया।
"कुछ नहीं बेटी वह ज़रा उठने में देर हो गई मनीषा बेटी भी बाथरूम गयी हुयी थी" अनिल ने रेखा का सवाल सुनकर उसे जवाब देते हुए कहा।
"च मनीषा दीदी यहीं है सॉरी मुझसे गलती हो गई जो आप दोनों को डिसट्रब किया" रेखा ने अपने ससुर से माफ़ी माँगते हुए कहा ।
"रेखा दीदी मैं तो बापू से उसकी तबीयत पूछने आई थी मुझ क्या पता आप आने वाली है" मनीषा ने बाथरूम से निकलते हुए कहा।
"दीदी मैं भी बापू से बाते करने आई थी" रेखा ने मनीषा को बाथरूम से निकलता हुआ देखकर कहा।
"मुझे पता है दीदी की आप क्या बाते करने आई है " मनीषा ने रेखा की आँखों में देखते हुए मुसकुराकर कहा।
"मानिषा दीदी फिर बैठिये न मिलकर गप मारते है" रेखा ने मनीषा का हाथ पकडते हुए कहा और दोनों साथ बैठकर बाते करने लगीं ।