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परिवार(दि फैमिली) complete

आहहहहह बेटे तुमने कहा था कुछ नहीं करोगे फिर इसे क्यों मेरी चूत में घुसा दिया?" रेखा ने नरेश के लंड को अपने मुँह से निकालकर सिसकते हुए कहा।

"मामी हमने आपकी गांड न मारने का वादा किया है चूत का मज़ा तो हम लेंगे ही" नरेश ने अपनी मामी की बात सुनकर अपना लंड फिर से उसके मुह में ड़ालते हुए कहा ।

रेखा समझ गयी की यह दोनों उसे ऐसे नहीं चोदने वाले इसीलिए वह चुपचाप अपने भान्जे का लंड चूसते हुए अपने बेटे के लंड को अपनी चूत में अंदर बाहर होने का मजा लेने लगी । विजय अपना लंड अपनी माँ की चूत में बुहत ज़ोर से जोर से पेल रहा था ।

विजय की दो उँगलियाँ वैसे ही रेखा की गांड में घुसी हुयी थी। जिस वजह से उसे रेखा की चूत चोदते हुए बुहत टाइट लग रही थी और उसे अपनी माँ को चोदते हुए बुहत मजा भी आ रहा था।

विजय ने अचानक अपनी माँ की चूत में अपना लंड अंदर बाहर करते हुए अपनी उँगलियों को उसकी गांड में अंदर बाहर करने लगा । रेखा भी अपने एक छेद में अपने बेटे की उँगलियाँ और दुसरे छेद में उसका लंड अंदर बाहर होने से बुहत ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी और उसका पूरा जिस्म अपने बेटे से चुदवाते हुए कांप रहा था ।

"ओहहहहहह बेटे ज़ोर से करो आअह्ह्ह मैं झरने वाली हूँ आहहहः" रेखा ने अचानक नरेश का लंड अपने मुँह से निकाल लिया और उसे अपने हाथ से सहलाते हुए ज़ोर जोर से बडबडाते हुए झरने लगी । विजय अपनी माँ को झडता हुआ देखकर उसकी चूत में अपना लंड बुहत ज़ोर से अंदर बाहर करने लगा ।

रेखा ने झडते हुए अपनी आँखें बंद कर ली और वह मज़े से अपने चूतडों को उछालते हुए झरने का मजा लेने लगी।

"साले अब तो इधर आ और मुझे भी मामी की चूत का मजा लेने दे" रेखा ने झरने के बाद जैसे ही अपनी आँखें खोली नरेश ने विजय को देखते हुए कहा ।

विजय नरेश की बात सुनकर अपनी माँ की चूत से अपना लंड निकालकर उसके मुँह की तरफ आ गया ।नरेश वहां से उठकर अपनी मामी के पीछे आ गया और नीचे झुककर अपनी मामी की भूरी गांड का एक चुम्मा ले लिया।
 
"आह्ह्ह्ह भांजे" रेखा अपनी गांड पर अपने भांजे के होंठो के लगते ही सिसक उठी और अपने बेटे के लंड को जो उसकी चूत से निकले पानी से सना हुआ था अपनी जीभ निकालकर चाटने लगी । विजय ने अपने लंड पर अपनी माँ की जीभ के पडते ही एक हाथ को उसके सर में डाल दिया और दुसरे हाथ से अपनी माँ की बड़ी बड़ी चुचियां सहलाने लगा ।

नरेश ने अपनी जीभ निकाली और अपनी मामी की भूरी गांड पर फिराने लगा । रेखा की चूत अपने भांजे की जीभ अपनी गांड पर लगते ही फिर से गरम होकर पानी टपकने लगी, नरेश का लंड भी उत्तेजना के मारे बुहत ज़ोर से झटके खा रहा था ।

नरेश ने कुछ देर अपनी मामी की गांड को चाटने के बाद अपने लंड को पकडते हुए रेखा की चूत में पेल दिया।

"आजहहह भान्जे आज तो तुम्हारा लंड भी मेरे बेटे जितना मोटा हो गया है" रेखा ने नरेश का लंड अपनी चूत में घुसते ही ज़ोर से सिसकते हुए कहा और अपना मुँह खोलकर अपने बेटे के लंड को अपने मुँह में भर कर चूसने लगी।

"आह्ह्ह्ह मामी आपकी भूरी गांड को देखकर तो मेरा लंड पागल हो गया है" नरेश ने अपने लंड को अपनी मामी की चूत में अंदर बाहर करते हुए अपनी एक ऊँगली को उसकी गांड में घुसा दिया । नरेश कुछ देर तक अपनी ऊँगली को रेखा की गांड में अंदर बाहर करने के बाद उसने अपनी दो उँगलियाँ उसकी गांड में घुसा दिया।

रेखा का पूरा बदन फिर से पूरी तरह गरम हो चुका था और वह अपने बेटे के लंड को बुहत ज़ोर से चूसते हुए अपने चूतडों को नरेश के लंड पर दबा रही थी । नरेश को भी आज अपनी मामी को चोदते हुए बुहत मजा आ रहा था क्योंकी अपनी दो उँगलियाँ उसकी गांड में होने के सबब उसे रेखा की चूत चोदते हुए बुहत टाइट लग रही थी।

नरेश के लंड से कुछ देर चुदने के बाद ही रेखा का जिस्म फिर से अकडकर झटके खाने लगा और उसने अपने बेटे के लंड को अपने मुँह से निकालकर अपनी मुठी में ले लिया । रेखा विजय के लंड को बुहत ज़ोर से आगे पीछे करते हुए ज़ोर से हांफ रही थी ।
 
"ओहहहहह भान्जे मैं झडने वाली हूँ आअह्ह्ह्हह्ह

रेखा ने इतना ही कहा था की उसकी चूत से पानी निकलने लगा और उसकी आँखें मज़े से बंद हो गई । विजय भी इतनी देर से अपने आप पर कण्ट्रोल किये हुए था उसने अपनी माँ को झडता हुआ देखकर अपना लंड उसके मुँह में पूरा पेल दिया और उसके सर को पकडकर अपने लंड पर ज़ोर से आगे पीछे करने लगा।

नरेश की हालत भी वैसी ही थी वह भी झडने के बिलकुल क़रीब था । रेखा की चूत ने झडते हुए नरेश के लंड को ज़ोर से पकड लिया था । इसीलिए नरेश भी ज़ोर से हाँफते हुए अपने लंड का पानी रेखा की चूत में गिराने लगा।

"आह्ह्ह्ह मामी मैं भी आ रहा हूँ" नरेश अपनी मामी की चूत में अपना वीर्य भरते हुए ज़ोर से चीखते हुए बोला ।

नरेश का पानी अपनी चूत में गिरते ही रेखा की चूत और ज्यादा पानी बहाने लगी और रेखा ने मज़े के मारे अपने बेटे के लंड को ज़ोर से अपने होंठ के बीच दबा दिया।

"आआह्ह्ह्ह हहहह साली रंडी मैं भी गया" विजय भी ज़ोर से चीखते हुए अपने वीर्य को अपनी माँ के मुँह में गिराने लगा ।

रेखा अपने बेटे का वीर्य जितना हो सकता था गटकने लगी। मगर विजय के लंड बुहत ज्यादा वीर्य निकलने की वजह से वह उसके मुँह से निकलकर उसकी चुचियों पर गिरने लगा । विजय का लंड कुछ देर में ही सिकुड़कर उसकी माँ के मुँह से निकल गया।

नरेश का लंड भी सिकुड़कर उसकी मामी की चूत से निकल चूका था। इसीलिए वह अपनी मामी से दूर हटकर अपने कपड़े पहनने लगा । विजय भी अपनी माँ से दूर हटकर अपने कपड़ों को उठाने लगा, रेखा भी एक ही वक्त अपने बेटे और भान्जे के दो जवान लन्डों से चुदवाकर बुहत ज्यादा थक गयी थी । इसीलिए वह भी सीधा होते हुए अपने कपडे पहनने लगी ।

विजय और नरेश अपने कपड़े पहनकर वहां से चले गए । रेखा ने भी अपने कपडे पहन लिए थे मगर वह बुहत ज्यादा थक चुकी थी इसीलिए वह किचन में ही कुछ देर के लिए बैठकर अपनी हालत को ठीक करने की कोशिश करने लगी । रेखा वहां पर बैठे हुए यह ही सोच रही थी की अगर एक ही वक्त उसके बेटे और भांजे ने उसकी गांड चोद ली तो उसकी क्या हालत होगी ।

रेखा कुछ देर वहां पर बैठे रहने के बाद उठते हुए किचन के सामान को सही जगह रखने लगी । मुकेश का आज ऑफिस में दिल नहीं लग रहा था। उसे बार बार अपनी बीवी की बाते याद आ रही थी की वह अपने बेटे भांजे और ससुर से चुदवा चुकी है और कंचन भी अपने भाई से चुदवा चुकी है ।

मुकेश ने जैसे तैसे ऑफिस का टाइम ख़तम किया और वापस घर आ गया । मुकेश ने अपने कमरे में दाखिल होते ही अपने जूतों को उतारने लगा।

"माँ पिता जी आ गये है" कंचन ने अचानक किचन में दाखिल होते हुए अपनी माँ से कहा।

"बेटा मुझे थोडा काम है। वह नहाकर निकले तो तुम उसे खाना दे देना" रेखा ने अपनी बेटी की तरफ देखते हुए कहा।

"ठीक है माँ मैं अभी देखकर आती हूँ की वह फ्रेश हुए हैं या नही" कंचन ने अपनी माँ से कहा और अपने पिता को देखने उनके कमरे में चली गयी ।
 
मुकेश बाथरूम में आराम से नहा रहा था दरवाज़ा खुलने की आवाज़ उसे सुनाये दी मगर उसे यह पता नहीं था की उसकी बेटी बाहर उसका इंतज़ार कर रही है । मुकेश ने समझा उसकी पत्नी अंदर आई है इसीलिए वह नहाने के बाद सिर्फ टॉवल लपेट कर बाहर आ गया।

कंचन जो बेड पर बैठकर अपने पिता का इंतज़ार कर रही थी वह अपने पिता को सिर्फ टॉवल में देखकर घबराते हुए बेड से उठकर खड़ी हो गई । मुकेश भी अपनी धुन में बाहर निकला था वह भी अचानक अपनी बेटी को सामने देखकर बोखला गया और उस बोखलाहट में उसका टॉवल उसके हाथ से छूट गया।

मुकेश अपनी बेटी के सामने बिलकुल नंगा खडा था ।कंचन को कुछ समझ में नहीं आ रहा था ।उसका बाप बिलकुल नंगा बूत बनकर उसके सामने खडा था।

"बापु मैं खाना लेकर आती हूँ आप कपडे पहन लो" कंचन ने अपना कन्धा नीचे करते हुए कहा और वहां से भाग कर बाहर निकल गई।

मुकेश ने अपनी बेटी के जाते ही अपने कपड़ों को उठाकर पहन लिया । कंचन भागते हुए बाहर आ गयी थी और वह बाहर खडी होकर बुहत ज़ोर से साँसें लेते हुए मुस्कुरा रही थी, कंचन ने अनजाने में ही अपने सगे बाप का लंड देख लिया था ।

मुकेश कपडे पहन कर बेड पर बैठ गया। वह सोच रहा था की जाने उसकी बेटी उसके बारे में क्या सोच रही होगी । कंचन अपनी साँसों को ठीक करने के बाद किचन में जाकर अपने पिता का खाना ले आई और सीधा अपने बाप के कमरे में दाखिल हो गयी।

"बेटी मुझे माफ़ कर देना। मैंने समझा था की यहाँ पर तुम्हारी माँ है इसीलिए मैं ऐसे ही बाहर आ गया और अचानक अपने सामने तुम्हें देखकर घबरा गया" मुकेश ने अपनी बेटी को खाना रखते हुए माफ़ी माँगते हुए कहा।

"पिताजी कोई बात नहीं मैं किसी को नहीं बताउंगी" कंचन ने मुस्कराते हुए कहा ।

"थैंक्स बेटी तुम बुहत समझदार हो" मुकेश ने अपनी बेटी का शुक्रिया अदा करते हुए कहा तभी अचानक मुकेश की नज़र कंचन की चुचियों पर चली गई, कंचन की साड़ी का पल्लू खाना नीचे रखते हुए उसकी चुचियों से हट गया था जिस वजह से उसके ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी बड़ी बड़ी चुचियों का चिकना उभार साफ़ नज़र आ रहा था।

"पिताजी और कुछ तो नहीं चाहिये" कंचन ने खाना रखने के बाद वैसे ही झुके हुए अपने पिता की तरफ देखते हुए कहा । कंचन ने जैसे ही देखा की उसका पिता उसकी चुचियों की तरफ देख रहा है वह जल्दी से सीधा हो गयी।

"बेटी वह बस बाकी पानी रख दो" मुकेश ने अपनी बेटी के हाथों अपनी चोरी पकडे जाने पर हकलाते हुए कहा।कंचन ने पानी भरकर अपने पिता के पास रख दिया और वहां से वापस जाने लगी ।
 
Dhansu update bhai Bahut hi Shandar aur lajawab ekdum jhakaas mind-blowing.

Keep going

We will wait for next update

कमेंट के लिए सभी को थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अगला अपडेट जल्दी ही।कहानी के बारें में अपनी राय अवश्य दें।thanks
 
मुकेश का लंड अपनी बेटी की चुचियों को देखकर खडा हो चुका था । उसे खुद समझ में नहीं आ रहा था की आज उसे क्या हो गया है । कंचन के जाने के बाद मुकेश खाना खाने लगा, कंचन अपने पिता के कमरे से निकलकर सीधा अपने कमरे में चलि गयी और बेड पर जाकर लेट गयी ।

अब भी अपने पिता के नंगे लंड के बारे में सोचते हुए कंचन की साँसें बुहत ज़ोर से ऊपर नीचे हो रही थी।

"क्या हुआ दीदी तुम ऐसे हांफ क्यों रही हो?" शीला ने कंचन को हाँफता हुआ देखकर सवाल किया।

"दीदी पूछो मत आज जो हुआ उसके बारे में खवाब में भी नहीं सोच सकती" कंचन ने शीला की तरफ देखकर उसका जवाब देते हुए कहा ।

"ऐसा क्या हो गया दीदी? जल्दी से बताओ ना" शीला ने उत्तेजित होते हुए कंचन से कहा । कंचन ने शीला को सारी बात बता दी की उसने अपने बाप को पूरा नंगा देखा।

"शाली मुझे तो लगता है तुम्हें अपने बाप का लंड भी पसंद आ गया है इसीलिए तो तुम उसे सोचते हुए ऐसे हांफ रही थी" शीला ने कंचन के पास जाकर उसके चूतडों की एक चुटकी लेते हुए कहा ।

"नही शीला तुम भी न मेरे दिमाग में ऐसी कोई बात नही" कंचन ने शीला की बात सुनकर शर्म के मारे अपना कन्धा झुकाते हुए कहा।

"दीदी एक बात तो बताओ तुम्हारे पिता का लंड भी विजय भैया की तरह लम्बा और मोटा है" शीला ने कंचन के क़रीब आते हुए कहा ।

"दीदी तुम नहीं सुधरोगी मैंने गौर से थोडे ही देखा था और वह उस वक्त ढीला था" कंचन ने शीला को अपने आप से दूर करते हुए कहा।

"दीदी जब आपने गौर से नहीं देखा तो आपको कैसे पता चला उसका लंड ढीला था?" शीला ने कंचन को घूरते हुए सवाल किया ।

"शीला दीदी अब बस करो में इस बारे में ज्यादा बात नहीं करना चाहती" कंचन ने शीला की बात सुनकर अपना मुँह दूसरी तरफ करते हुए कहा।

"दीदी मुझे पता है तुम अपने पिता की बात करते हुए कुछ होता है इसीलिए तुम मुझे मना कर रही हो" शीला ने कंचन को पीछे से अपनी बाहों में लेते हुए कहा ।
 
"पिन्की दीदी तुमने कभी वह देखा है" कोमल ने बेड पर बैठी हुयी पिंकी को देखते हुए कहा।

"दीदी आप किस चीज़ की बात कर रही हो" पिंकी ने कोमल की तरफ जो सोफ़े पर बैठकर अपने मोबाइल पर कुछ देख रही थी को देखते हुए कहा ।

"वही दीदी जो हर लड़का जवान होते ही शौक़ से देखता है" कोमल ने सोफ़े से उठते हुए कहा।

"दीदी मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है आप क्या कह रही है" पिंकी ने कोमल की तरफ देखते हुए कहा।

"दीदी आप मेरी मोबाइल को देखने के बाद सब समझ जाएँगी" कोमल ने पिंकी के पास बेड पर चढते हुए कहा और अपना मोबाइल पिंकी की आँखों के सामने कर दिया ।

"दीदी इस में तो गन्दी फिल्म चल रही है आपको इसे देखते हुए शर्म नहीं आती" पिंकी ने जल्दी से अपने हाथों से कोमल की मोबाइल को अपने आँखों से हटाते हुए कहा।

"दीदी हम अब छोटी नहीं रहीं हम जवान हो चुकी है" कोमल ने पिंकी को समझाते हुए कहा ।

"दीदी वह ठीक है मगर हम लड़कियां हैं । ऐसी गन्दी चीज़ें हम नहीं देख सकती" पिंकी ने कोमल को समझाते हुए कहा।

"अरे दीदी तुम किस दौर की बात कर रही हो। आजकल तो लड़कियां जवान होते ही अपने बॉयफ्रैंड्स के साथ सेक्स कर लेती है" कोमल ने पिंकी के क़रीब होते हुए कहा ।

"मगर दीदी यह ठीक नहीं है" पिंकी ने कोमल की बात सुनकर कहा।

"दीदी कुछ गलत नहीं है हम सिर्फ देख रही हैं कुछ गलत थोड़ी कर रही है" कोमल ने पिंकी को समझाते हुए कहा और उसके सर के नीचे अपनी बाज़ू को रखते हुए अपना मोबाइल फिर से पिंकी के सामने कर दिया ।

पिन्की ने इस बार अपनी नज़र मोबाइल में ही गडा दी और कोमल के साथ एक ब्लू फिल्म का क्लिप देखने लगी । क्लिप में एक लड़के ने लड़की के पूरे कपड़े उतार दिए और उसकी गोरी चुचियों को पकडकर चूसने लगा, पिंकी और कोमल दोनों की साँसें वह क्लिप देखते हुए बुहत ज़ोर से चल रही थी ।
 
वह लड़का अब उस लड़की की चुचियों को छोडकर नीचे जाते हुए उसकी टांगों के बीच बैठ गया । लड़की ने जल्दी से अपनी दोनों टांगों को फ़ैला दिया और लड़का अपनी जीभ निकालकर उसकी गुलाबी चूत को चाटने लगा, लड़के की जीभ अपनी चूत पर पडते ही वह लड़की बुहत ज़ोर से चिल्लाते हुए सिसक रही थी ।

"दीदी यह लड़का गन्दी जगह पर अपनी जीभ क्यों फिरा रहा है?" पिंकी ने मोबाइल को देखते ही कोमल से कहा।

"पता नहीं दीदी मगर लगता है ऐसा करने से उस लड़की को बुहत ज्यादा मजा आ रहा है" कोमल ने पिंकी के सवाल का जवाब देते हुए कहा ।

कुछ देर तक वह लड़का उस लड़की की चूत को चाटने के बाद सीधा लेट गया । लड़के के लेटते ही उस लड़की ने उसके अंडरवियर को नीचे सरकाते हुए नंगा कर दिया, अंडरवियर के उतरते ही उस लड़के का बुहत ही लम्बा और मोटा लंड नंगा होकर उछलने लगा ।

लडकी ने उस लड़के का लंड अपने हाथ में पकडते हुए अपनी जीभ निकालकर चाटने लगी । वह लड़की कुछ देर तक उस लड़के के लंड को जीभ से चाटने के अपना मुँह खोलते हुए उसके लंड को जितना हो सकता था अपने मूह में लेकर अंदर बाहर करके चूसने लगी ।

"दीदी यह दोनों बुहत गंदे है" पिंकी की हालत वह सीन देखते हुए बुहत ख़राब हो रही थी। उसे अपनी छूट में बुहत ज़ोर की सिहरन हो रही थी । लड़के ने अचानक अपना लंड उस लड़की के मुँह से निकालकर उसे सीधा लिटा दिया और अपना लंड उस लड़की की चूत पर रगडते हुए एक ही धक्के में पूरा उसकी चूत में घुसा दिया ।

"आहहह दीदी यह इतना बड़ा उस लड़की की चूत में कैसे घुस गया" उस लड़के का पूरा लंड लड़की की चूत में घुसते ही पिंकी ने हैंरान होते हुए कहा।

"दीदी वही तो मैं आपको दिखाना चाहती थी । एक दफ़ा जब मैंने अपनी चूत में अपनी एक ऊँगली घुसाने की कोशिश की थी तो मुझे इतना दर्द हुआ था की मेरी जान ही निकल गयी थी फिर यह लड़की इतना बड़ा लंड कैसे अपनी चूत में ले सकती है" कोमल ने पिंकी की बात सुनकर जल्दी से अपनी बात बताते हुए कहा ।

लडका कुछ देर तक उस लड़की को तेज़ी के साथ चोदने के बाद ज़ोर हाँफते हुए अपना लंड उसकी चूत से निकालकर उसके चेहरे पर अपना वीर्य गिराने लगा,

"छी दीदी वह लड़का तो उस लड़की के चेहरे पर मूत रहा है" पिंकी ने उस लड़के को झडता हुआ देखकर हैंरान होते हुए बोली।
 
"पिन्की दीदी वह उसका मूत नहीं है यह उस लड़के का वीर्य है जिसे लड़की की चूत में गिराने से बच्चा पैदा होता है" कोमल ने पिंकी को समझाते हुए कहा । क्लिप ख़तम हो चुका था । इसीलिए कोमल ने अपना मोबाइल बेड के खाने में रख दिया और खुद पिंकी के क़रीब होकर सो गयी ।

"दीदी वह क्लिप देखकर तो मुझे वहां पर कुछ हो रहा है" पिंकी ने अपना हाथ सलवार के ऊपर से ही अपनी चूत पर रखते हुए कहा।

"दीदी मेरा भी वही हाल है आप अपने हाथ से मुझे यहाँ सहलाओ। मैं भी वेसे ही आपको सहलाती हूँ" कोमल ने पिंकी का हाथ पकडकर कपड़ों के ऊपर से ही अपनी चूत पर रखते हुए कहा ।

पिन्की अपने हाथ से कोमल की चूत को उसके कपड़ों के ऊपर से ही सहलाने लगी।

"आह्ह्ह्ह दीदी" कोमल ने ज़ोर से सिसकते हुए अपना हाथ पिंकी की चूत पर रख दिया और वह अपने हाथ से उसकी चूत को सहलाने लगी ।

दोनों की आँखें मज़े से बंद होने लगी और दोनों के हाथ एक दुसरे की चूतों पर बुहत ज़ोर से चलने लगे।

दोनों की साँसें बुहत ज़ोर से चल रही थी और वह दोनों अपने दुसरे हाथों से एक दुसरे की चुचियों को सहला रही थी।

"आह्ह्ह्ह ओहह दीदी ओह्ह्ह्हह्ह्" दोनों के मुँह से एक साथ ज़ोर की सिसकियां निकलने लगी और दोनों की चूतें एक साथ पानी छोडने लगी ।

झडते हुए दोनों की आँखें मज़े से बंद हो चुकी थी । कुछ देर बाद जब पूरी तरह झडने के बाद उन दोनों की आँखें खुली तो वह एक दुसरे को देखकर हंसने लगी और दोनों ने प्यार से एक दुसरे को अपनी बाहों में भर लिया । कोमल ने अपने होंठो को पिंकी के नाज़ुक मासूम होंठो पर रख दिया और उसके होंठो को ज़ोर से चूसने लगी, कोमल की इस हरकत से पिंकी को भी मजा आने लगा और वह भी कोमल के कुँवारे होंठो को चूसने लगी ।
 
दोनों कुछ देर तक एक दुसरे के होंठो को चूसने के बाद एक दुसरे से अलग हो गयी।

"दीदी मेरी पेंटी गीली हो गई है । आपके हाथ लगाने से मैंने पेशाब कर दी है" पिंकी ने कोमल से अलग होते ही अपना हाथ कपड़ों के ऊपर से ही अपनी चूत पर रखते हुए कहा।

"दीदी यह पेशाब नहीं है" कोमल ने पिंकी की तरफ देखकर मुस्कराते हुए कहा ।

"दीदी फिर यह क्या है?" पिंकी ने कोमल की बात सुनकर हैंरान होते हुए कहा।

"दीदी यह हमारी चूत का पानी है जो औरत के बुहत ज्यादा एक्साइट (उतेजित) होने पर निकलता है" कोमल ने पिंकी की तरफ देखते हुए कहा।

"हाँ दीदी शायद आप सच कह रही हैं क्योंकी जब वहां से यह पानी निकल रहा था तो मुझे इतना ज्यदा मजा आ रहा था की पूछो मत" पिंकी ने कोमल की बात सुनकर उसकी तरफ देखते हुए कहा ।

"पिंकी तुम ज़रा सोचो वहां पर सिर्फ हाथ लगाने से ही हमें इतना ज्यादा मजा आया है । जब वहां पर कोई चीज़ घुसेगी तो कितना मजा आएगा?" कोमल ने पिंकी की तरफ देखते हुए कहा।

"दीदी आपकी बात तो सही है मगर हमारे वहां का छेद तो बुहत छोटा है" पिंकी ने मासूमियत से कोमल की तरफ देखते हुए कहा ।

"हाँ दीदी वही तो परेशानी है" कोमल ने पिंकी की बात सुनकर मायूस होते हुए कहा।

"कोमल दीदी एक काम करते हैं इस बारे में हम अपनी बड़ी दीदी से पूछ कर देखे" पिंकी ने कोमल की तरफ देखते हुए कहा।

"नही दीदी ऐसा कभी मत करना हम उनसे कुछ नहीं पूछ सकती" कोमल ने पिंकी को मना करते हुए कहा।

"ठीक है दीदी फिर तो हमें बस ऐसे ही मजा लेना पडेगा" पिंकी ने मायूस होते हुए कहा।

"दीदी तुम फिकर मत करो। मैं पता लगा लुँगी बस तुम थोडा इंतज़ार करो" कोमल ने पिंकी को समझाते हुए कहा और दोनों आपस में बातें करने लगी ।

"साले तेरी माँ को चोदकर तो मजा आ गया मगर साली जाने कब अपनी गांड मारने देगी" नरेश ने विजय की तरफ देखते हुए कहा।

"अब क्यों मरा जा रहा है उसने कहा तो था की अभी छोड दो रात को जो करना है कर लेना" विजय ने नरेश को समझाते हुए कहा ।
 
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