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आहहहहह बेटे तुमने कहा था कुछ नहीं करोगे फिर इसे क्यों मेरी चूत में घुसा दिया?" रेखा ने नरेश के लंड को अपने मुँह से निकालकर सिसकते हुए कहा।
"मामी हमने आपकी गांड न मारने का वादा किया है चूत का मज़ा तो हम लेंगे ही" नरेश ने अपनी मामी की बात सुनकर अपना लंड फिर से उसके मुह में ड़ालते हुए कहा ।
रेखा समझ गयी की यह दोनों उसे ऐसे नहीं चोदने वाले इसीलिए वह चुपचाप अपने भान्जे का लंड चूसते हुए अपने बेटे के लंड को अपनी चूत में अंदर बाहर होने का मजा लेने लगी । विजय अपना लंड अपनी माँ की चूत में बुहत ज़ोर से जोर से पेल रहा था ।
विजय की दो उँगलियाँ वैसे ही रेखा की गांड में घुसी हुयी थी। जिस वजह से उसे रेखा की चूत चोदते हुए बुहत टाइट लग रही थी और उसे अपनी माँ को चोदते हुए बुहत मजा भी आ रहा था।
विजय ने अचानक अपनी माँ की चूत में अपना लंड अंदर बाहर करते हुए अपनी उँगलियों को उसकी गांड में अंदर बाहर करने लगा । रेखा भी अपने एक छेद में अपने बेटे की उँगलियाँ और दुसरे छेद में उसका लंड अंदर बाहर होने से बुहत ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी और उसका पूरा जिस्म अपने बेटे से चुदवाते हुए कांप रहा था ।
"ओहहहहहह बेटे ज़ोर से करो आअह्ह्ह मैं झरने वाली हूँ आहहहः" रेखा ने अचानक नरेश का लंड अपने मुँह से निकाल लिया और उसे अपने हाथ से सहलाते हुए ज़ोर जोर से बडबडाते हुए झरने लगी । विजय अपनी माँ को झडता हुआ देखकर उसकी चूत में अपना लंड बुहत ज़ोर से अंदर बाहर करने लगा ।
रेखा ने झडते हुए अपनी आँखें बंद कर ली और वह मज़े से अपने चूतडों को उछालते हुए झरने का मजा लेने लगी।
"साले अब तो इधर आ और मुझे भी मामी की चूत का मजा लेने दे" रेखा ने झरने के बाद जैसे ही अपनी आँखें खोली नरेश ने विजय को देखते हुए कहा ।
विजय नरेश की बात सुनकर अपनी माँ की चूत से अपना लंड निकालकर उसके मुँह की तरफ आ गया ।नरेश वहां से उठकर अपनी मामी के पीछे आ गया और नीचे झुककर अपनी मामी की भूरी गांड का एक चुम्मा ले लिया।
"मामी हमने आपकी गांड न मारने का वादा किया है चूत का मज़ा तो हम लेंगे ही" नरेश ने अपनी मामी की बात सुनकर अपना लंड फिर से उसके मुह में ड़ालते हुए कहा ।
रेखा समझ गयी की यह दोनों उसे ऐसे नहीं चोदने वाले इसीलिए वह चुपचाप अपने भान्जे का लंड चूसते हुए अपने बेटे के लंड को अपनी चूत में अंदर बाहर होने का मजा लेने लगी । विजय अपना लंड अपनी माँ की चूत में बुहत ज़ोर से जोर से पेल रहा था ।
विजय की दो उँगलियाँ वैसे ही रेखा की गांड में घुसी हुयी थी। जिस वजह से उसे रेखा की चूत चोदते हुए बुहत टाइट लग रही थी और उसे अपनी माँ को चोदते हुए बुहत मजा भी आ रहा था।
विजय ने अचानक अपनी माँ की चूत में अपना लंड अंदर बाहर करते हुए अपनी उँगलियों को उसकी गांड में अंदर बाहर करने लगा । रेखा भी अपने एक छेद में अपने बेटे की उँगलियाँ और दुसरे छेद में उसका लंड अंदर बाहर होने से बुहत ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी और उसका पूरा जिस्म अपने बेटे से चुदवाते हुए कांप रहा था ।
"ओहहहहहह बेटे ज़ोर से करो आअह्ह्ह मैं झरने वाली हूँ आहहहः" रेखा ने अचानक नरेश का लंड अपने मुँह से निकाल लिया और उसे अपने हाथ से सहलाते हुए ज़ोर जोर से बडबडाते हुए झरने लगी । विजय अपनी माँ को झडता हुआ देखकर उसकी चूत में अपना लंड बुहत ज़ोर से अंदर बाहर करने लगा ।
रेखा ने झडते हुए अपनी आँखें बंद कर ली और वह मज़े से अपने चूतडों को उछालते हुए झरने का मजा लेने लगी।
"साले अब तो इधर आ और मुझे भी मामी की चूत का मजा लेने दे" रेखा ने झरने के बाद जैसे ही अपनी आँखें खोली नरेश ने विजय को देखते हुए कहा ।
विजय नरेश की बात सुनकर अपनी माँ की चूत से अपना लंड निकालकर उसके मुँह की तरफ आ गया ।नरेश वहां से उठकर अपनी मामी के पीछे आ गया और नीचे झुककर अपनी मामी की भूरी गांड का एक चुम्मा ले लिया।