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परिवार(दि फैमिली) complete

मुकेश अपनी बेटी को बुहत तेज़ी के साथ चोदते हुए उसके दोनों होठो को अपने मुँह में बारी बारी भरकर चाट रहा था । अचानक कंचन ने गरम होते हुए अपनी जीभ को अपने पिता के मुँह में डाल दिया, मुकेश अपनी बेटी की जीभ को अपने मुँह में महसूस करते ही पागल हो गया और उसने अपनी बेटी को कमर से पकडकर सीधा करते हुए खुद उसके ऊपर आकर जोश में पेलने लगा।

मुकेश अब अपनी बेटी की जीभ चाटते हुए अपने लंड को बुहत तेज़ी के साथ उसकी टाइट चूत में अंदर बाहर करने लगा । कंचन का तो मज़े के मारे बुरा हाल था। वह मज़े से हवा में उड़ रही थी उसकी साँसें अब फूलने लगी थी, कंचन ने अचानक अपनी जीभ को अपने पिता के मूह से निकल लिया और अपने मुँह को मुकेश के मूह से अलग करते हुए ज़ोर से हाँफने लगी ।

मुकेश अब अपनी बेटी के टांगों के बीच सीधा होकर बैठ गया और कंचन की टांगों को उठाकर उसके पेट पर रखते हुए उसे पेलने लगा।

"ओहहहहह बेटी क्या प्यारी और सूंदर और टाइट चूत है तुम्हारी" मुकेश ने अपनी बेटी की चूत को पहली बार देखते ही जोश में आकर उसकी चूत में ज़ोर के धक्के मारते हुए कहा ।

"आहहह पिताजी आपका तो ज्यादा टाइट और मोटा होता जा रहा है ओह्ह्ह्हह ऐसे ही ज़ोर से। मैं झरने वाली हूँ" कंचन ने ज़ोर से चिल्लाते हुए अपने चूतडों को ऊपर उछालते हुए बोली । वह अपने पिता के लंड को अपनी चूत में ज्यादा टाइट और मोटा होता हुआ महसूस कर रही थी । जिस वजह से उसका सारा जिस्म अब अकडने लगा था और वह झरने के बिलकुल क़रीब पुहंच चुकी थी ।

"आहहहहह बेटी यह तुम्हारे जिस्म का ही कमाल है जो इसे देखकर मेरा यह बूढा लंड भी आज जवान होकर तुम्हें चोद रहा है" मुकेश ने अपनी बेटी की बात सुनकर उसको टांगों से पकडते हुए बुहत ज़ोर के साथ उसकी बुर में अपना लंड अंदर बाहर करते हुए कहा ।

"आह्ह्ह्ह पिता जी ओहहहह में आ रही हूँ" अचानक कंचन का पूरा जिस्म काँपने लगा और उसकी चूत झटके खाते हुए अपना पानी छोड लगी । कंचन की चूत झडते हुए अपने पिता के लंड पर ज़ोर से सिकूड़ गयी जिस वजह से मुकेश भी झडने के क़रीब पुहंच गया।
 
कंचन अपनी आँखें बंद किये हुए मज़े से अपने चूतडों को उठा उठा कर अपने पिता के लंड को अपनी चूत में लेते हुए झडने का मज़ा ले रही थी।

"ओहहहहह बेटी मैं भी आने वाला हूँ कहाँ पर झडुँ" मुकेश ने भी ज़ोर से सिसकते हुए अपनी बेटी से कहा।

"पिताजी मेरी चूत में आज भर दो । अपनी बेटी की चूत को अपने वीर्य से ताकी इसकी आग कम हो सके" कंचन ने अपने पिता की बात का जवाब देते हुए कहा ।

"आह्ह्ह्ह बेटी लो अपने पिता के वीर्य को अपनी चूत में महसूस करो" मुकेश अपनी बेटी की बात सुनकर तेज़ी से उसकी चूत में अपना लंड अंदर बाहर करते हुए ज़ोर से हाँफते हुए झडने लगा।

"ओहहहह पिताजी बुहत गरम वीर्य है आपका आहः" कंचन भी अपने पिता का गरम वीर्य अपनी चूत में गिरते ही ज़ोर से सिसकने लगी ।

मुकेश पूरी तरह झडने के बाद अपनी बेटी के ऊपर ही निढाल होकर ढेर हो गया और उसका लंड सिकूड़कर कंचन की चूत से निकल गया । कंचन की चूत से उसके पिता का लंड निकलते ही उसकी चूत से वीर्य निकलकर बेड पर गिरने लगा।

"ओहहहह आई लव यू पापा" कंचन ने अपने पिता को ज़ोर से अपनी बाहों में भर लिया और उनके होंठो को चूसने लगी ।

ओहहहह बेटी आज मुझे जो मजा तुमने दिया है उसका अहसान मैं कभी नहीं भुला सकता" मुकेश ने अपनी बेटी के होंठो को चूमने के बाद उसकी साइड में लेटते हुए कहा और अपनी बेटी की गोरी चुचियों से खेलने लगा।

"आजहहह पिता जी इस में अहसान की क्या बात है । मैं आपकी ही बेटी हूँ और मैं आपकी मेंहनत से ही पैदा हुयी हूँ इसीलिए मुझपर सबसे ज़्यादा हक़ आपका ही है" कंचन ने अपने पिता के बालों में हाथ डालकर उनके मुँह को अपनी चुचियों पर दबाते हुए कहा ।

कंचन के ऐसा करने से मुकेश का मुँह उसकी बेटी की दोनों चुचियों के बीच आ गया । मुकेश भी अपनी बेटी की दोनों चुचियों को अपने दोनों हाथों में थामकर ज़ोर से दबाते हुए उन्हें चूमने और चाटने लाग, दोनों बाप बेटी कुछ देर तक ऐसे ही मस्ती करते रहे और कुछ देर बाद कंचन अपने पिता से अलग होते हुए बाथरूम जाने लगी ।

कंचन बिलकुल नंगी ही वहां से उठकर बाथरूम जा रही थी । कंचन के बाथरूम जाते हुए मुकेश की नज़रें अपनी बेटी के नंगे जिस्म को घूर रही थी।

कंचन के बाथरूम में घूसने के बाद मुकेश भी बेड से उठते हुए अपनी बेटी के पास बाथरूम जाने लगा ।
 
विजय और शीला ने बाजार से सामान खरीद लिया था और वह अब वापस आने के लिए तैयार थे।

"शीला दीदी मैं बुहत थक चूका हूँ यहाँ नज़दीक ही एक बुहत बड़ा पार्क है चलो कुछ देर वहीँ चलकर बैठते है।" विजय ने दूकान से निकलते ही शीला से कहा।

"ठीक है भैया जैसे आपकी मर्जी" शीला ने भी विजय की बात को मानते हुए कहा और दोनों साथ चलते हुए पार्क की तरफ जाने लगे ।

कुछ देर तक चलने के बाद वह पार्क तक पुहंच गए शीला की नज़र जैसे ही पार्क के ऊपर लिखे हुए शब्दों पर गयी वह समझ गयी की विजय उसे यहाँ क्यों लाया है । पार्क के ऊपर लिखा हुआ था "लवर्स पार्क" शीला विजय के साथ पार्क में दाखिल हो गई। वहां पर ज्यादा भीड़ नहीं थी बस कुछ जोड़े दूर दूर बैठे हुए आपस में बातें कर रहे थे, विजय शीला के साथ एक साइड में जाकर बैठ गया और आपस में बातें करने लगे।

"भइया एक बात बताओ यह एक लवर्स पार्क है आपको अपनी बहन को यहाँ लाते हुए ज़रा भी शर्म नहीं आई" शीला ने विजय की तरफ देखते हुए कहा।

"दीदी हम दोनों भी तो लवर्स हैं और लोगों को क्या पता वह तो तुम्हें मेरी लवर ही समझेंगे" विजय ने हँसते हुए कहा ।

"भाइया आप बड़े वो है" शीला ने विजय की बात सुनकर मुस्कराते हुए कहा।

"दीदी वहां देखो" अचानक विजय ने शीला को सामने इशारा करते हुए कहा । शीला ने जैसे ही उस तरफ देखा शर्म से उसका चेहरा लाल हो गया और उसने अपनी नज़रें वहां से हटा लिया क्योंकी सामने एक जोड़ा एक दुसरे को बाहों में भरे हुए फ्रेंच किस कर रहा था ।

"क्या हुआ दीदी आपने नज़र क्यों हटा ली?" विजय ने शीला की कमर में अपना हाथ डालकर उसे अपने से चिपकाते हुए कहा।

"विजय भैया छोड़ो मुझे प्लीज़ मुझे शर्म आ रही है" शीला ने विजय के हाथ को अपनी कमर से हटाते हुए कहा।

"दीदी आप भी। यहाँ पर सभी एन्जॉय करने आते हैं और आप देखते हुए भी शर्मा रहीं हैं" विजय ने शीला को समझाते हुए कहा ।
 
विजय की बात सुनने के बाद शीला फिर से उस जोड़े की तरफ देखने लगी वह जोड़ा अब फ्रेंच किस करते हुए अब एक दुसरे के जिस्म पे अपने हाथ फेर रहा था । शीला का जिस्म भी उन्हें देखते हुए गरम हो रहा था। अचानक शीला ने महसूस किया की विजय ने अपना हाथ उसकी साड़ी के अंदर उसके नंगे पेट पर रख दिया है ।

विजय अपने हाथ से शीला के गोरे चिकने बदन को ऊपर से नीचे तक सहला रहा था । विजय की इस हरकत से शीला का पूरा जिस्म तप कर आग हो गया। अचानक विजय का हाथ शीला के पेट से होता हुआ उसकी चुचियों की तरफ बढ़ने लगा।

"नही भैया यहाँ नही" विजय का हाथ जैसे ही शीला के ब्लाउज तक पुहंचा उसने विजय के हाथ को अपने हाथ से पकडते हुए कहा ।

"क्या हुआ दीदी?" विजय ने शीला की साड़ी से हाथ को हटाकर उसका सर अपनी गोद में रखकर सुलाते हुए कहा।

"भइया बुहत देर हो गई है हमें चलना चाहिये" शीला ने विजय की गोद में सोते हुए उसकी आँखों में निहारते हुए कहा।

"दीदी चलते हैं मगर कुछ तो हमारा भी ख़याल करो" विजय ने थोडा नीचे होकर अपने होंठो को शीला के होंठो के क़रीब करते हुए कहा ।

"भइया आप सुधरोगे नहीं मैं बस एक किस ही दूंगी" शीला ने विजय की गरम सासों को महसूस करके खुद भी गरम होते हुए कहा।

"ठीक है दीदी एक ही" विजय ने शीला की बात सुनकर खुश होते हुए कहा । शीला ने अपने हाथ को विजय के बालों में डालकर उसे नीचे झुकाकर उसके होंठो को अपने होंठो से मिला दिया ।

विजय ने भी अपने एक हाथ को शीला के सर के नीचे डालकर उसके होंठो को अपने होठो से ज़ोर से सटा दिया और शीला के दोनों गुलाबी लबों को बारी बारी चूसने लगा । शीला भी गरम होकर विजय के लबों को चूम रही थी, विजय ने अचानक अपने होंठो को शीला के होंठो के बीच डालकर उसकी जीभ को पकड लिया।।
 
विजय शीला की जीभ को अपने में भरकर चूसने और चाटने लगा । शीला की हालत बिगडती ही जा रही थी। वह अपने भाई की हरक़तों से बुहत ज्यादा गरम हो चुकी थी और अब उसकी साँसें भी फूलने लगी थी।

शीला ने अपनी जीभ को विजय के मूह से निकालकर अपने होंठो को विजय के होंठो से अलग कर दिया ।

शीला विजय के होंठो के अलग होते ही बहूत जोर से हाँफने लगी।

"क्यों दीदी इतनी जल्दी थक गई" विजय ने भी अपनी सांसों को ठीक करते हुए शीला से कहा।

"भइया आप बुहत बदमाश हो एक किस के लिए कहकर फिर छोडते ही नही" शीला ने हाँफते हुए विजय से कहा ।

"दीदी मैंने भी एक ही किस तो दी जिसे भी आपने पूरा नहीं किया" विजय ने मुस्कुराते हुए कहा।

"भइया आप भी न चलो अब बुहत हो गया" शीला ने विजय की तरफ देखते हुए कहा और उसकी गोद से अपना सर उठाकर खड़ी हो गई । विजय भी उठकर खड़ा हो गया और शीला के साथ पार्क से निकलकर घर की तरफ जाने लगा ।

रेखा ने नरेश के कमरे में दाखिल होते ही उसके कान को छोडकर दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया।

"मामी मुझे यह समझ में नहीं आया की आज अचानक मामा को कंचन की याद कैसे आ गयी । वैसे तो उन्होंने कभी कंचन से अकेले में बात नहीं की है?" नरेश ने अपने कमरे में आते ही रेखा से सवाल करते हुए कहा।

"अरे भांजे क्यों खवामखाह अपना सर खपा रहे हो छोड़ो उस बात को" रेखा ने नरेश की बात को टालते हुए कहा ।

"मामी मुझे बताओ न क्या चक्कर है आप ऐसे क्यों टाल रही हो" नरेश ने रेखा से मिन्नत करते हुए कहा।

"भान्जे तुम ऐसे नहीं मानोगे तो सुनो तुम्हारे मामा अपनी बेटी के हुस्न के दीवाने हो गये हैं । पहले तो वह मुझे भी सही ढंग से चोद नहीं पाते थे मगर तेरी माँ ने उनपे जाने क्या 'जादू कर दिया की अब वह मुझे और तेरी माँ के साथ अपनी बेटी की कमसीन जवानी के पीछे पड़ गए हैं" रेखा ने नरेश के क़रीब जाते हुए कहा।

"मामी आप क्या कह रही है" नरेश ने रेखा की बात सुनकर गरम होकर उसे अपनी गोद पर बिठाते हुए कहा।

"भान्जे सच ही कह रही हूँ हो सकता हो वह इस वक्त भी अपनी बेटी को चोद रहे हो" रेखा ने नरेश की गोद पर बैठने के बाद कहा।

"मामी मगर कंचन दीदी कैसे राज़ी हुयी?" नरेश ने अपने हाथों को साड़ी के ऊपर से ही अपनी मामी की बड़ी बड़ी चुचियों पर रखते हुए कहा ।
 
"हाहहह भान्जे जब उसने अपने भाइयों से चुदवा लिया तो अपने पिता से उसे क्या ऐतराज़ हो सकता है । वैसे मैंने ही उसे राज़ी किया था उसके पिता के साथ सोने के लिये" रेखा ने सिसकते हुए कहा।

"साली तुम बुहत कमीनी चीज़ हो" नरेश ने गुस्से में अपनी मामी की चुचियों को ज़ोर से मसलते हुए कहा।

"उईई भान्जे आराम से तुम क्यों जल रहे हो तुम भी तो अपनी मामी को चोद चुके हो" रेखा ने मुस्कराते हुए कहा और नरेश की गोद से उठकर बाहर जाने लगी।

"मामी कहाँ जा रही हो" नरेश ने रेखा को अचानक जाता हुआ देखकर हैंरान होते हुए कहा ।

"तुम आराम करो अगर मैं यहाँ रुकी तो तुम फिर से शुरू हो जाओगे। मैं पहले से बुहत थकी हुई हुँ" रेखा ने जाते हुए नरेश से कहा और कमरे से निकल गयी । रेखा अब मनीषा के कमरे में चलि गयी और उससे बाते करने लगी ।

रेखा के जाने के बाद नरेश भी बेड पर लेटकर आराम करने लगा। मगर उसे बार बार यह ख़याल आ रहा था की इस वक्त कंचन और उसके मामा जाने क्या कर रहे होंगे ।

मुकेश अपनी बेटी के बाथरूम जाने के बाद खुद भी उसके पीछे बाथरूम में घुस गया, कंचन बाथरूम में नीचे बैठकर पेशाब कर रही थी ।

"पिताजी आप यहाँ कुछ तो शर्म कीजिये" कंचन ने अचानक अपने पिता को नंगा ही बाथरूम में दाखिल होता देखकर गुस्से से कहा।

"अरे बेटी अब तुमसे क्या शरम। मैं तो बस अपनी बेटी के साथ नहाना चाहता हूँ" मुकेश ने बाथरूम में अंदर आकर शावर को ऑन करते हुए कहा ।

"पिताजी मुझे शर्म आ रही है। मैं आपके साथ नहीं नहा पाऊँगी। मैं जा रही हूँ" कंचन ने पेशाब करने के बाद अपने पिता से कहा और उठकर वहां से जाने लगी।

"बेटी क्यों इतना शर्मा रही हो बस कुछ ही देर की तो बात है" मुकेश ने अपनी बेटी को कलाई से पकडकर अपने साथ शावर के नीचे खडा करते हुए कहा ।
 
कंचन ने भी अब कोई विरोध नहीं किया और शावर के पानी से अपने पिता के साथ नहाने लगी । मुकेश ने नहाते हुए साबुन उठा लिया और अपनी बेटी की पीठ पर मलने लगा, मुकेश साबुन को कंचन के चिकने पीठ पर मलते हुए नीचे होते हुए उसके दोनों चूतडों तक आ गया और अपनी बेटी के दोनों नर्म चूतडों पर साबुन को मलते हुए उन्हें अपने दुसरे हाथ से दबाने लगा ।

"आआह्ह्ह पिता जी क्या कर रहे हो । बस साबुन लगा लिया ना" कंचन ने सिसकते हुए कहा।

"बेटी थोडा झुक जाओ तुम्हारा हाथ इधर नहीं पुहंच पाता। इसीलिए यहाँ पर थोड़ी गंदगी है मैं इसे साफ़ कर देता हुँ" मुकेश ने अपनी ऊँगली को कंचन के गांड के बीच फिराते हुए कहा ।

"ओहहहहह पिता जी" कंचन ने थोडा झुकते हुए सिसककर कहा । मुकेश अब साबुन को अपनी बेटी के गांड के छेद से नीचे ले जाकर उसकी चूत तक मलने लगा। मुकेश के ऐसा करने से कंचन के मुँह से ज़ोर की सिसकियाँ निकल रही थी । मुकेश थोडी देर तक अपनी बेटी के चूतडों को सही तरीके से साफ़ करने के बाद उठकर खडा हो गया ।

मुकेश अब साबुन को अपनी बेटी की दोनों बड़ी बड़ी गोरी चुचियों पर मलने लगा । मुकेश साबुन को अपनी बेटी की चुचियों पर मलते हुए उन्हें अपने हाथ से भी दबा रहा था।

"आजहहहह पिता जी क्या कर रहें हैं आप" मुकेश के ऐसा करने से कंचन के मुँह से बुहत ज़ोर की सिस्कियाँ निकल रही थी, मुकेश अब साबुन को कंचन के चिकने गोरे पेट पर मलते हुए नीचे ले जाने लगा ।

मुकेश का हाथ अब उसकी बेटी की चूत की हलकी झाँटों तक आ गया था । कंचन ने मज़े के मारे अपनी आँखें बंद कर दी थी । वह अपने पिता की हरक़तों से बुहत ज्यादा गरम हो चुकी थी, मुकेश अब साबुन को अपनी बेटी की चूत पर मल रहा था और कंचन मज़े से सिसक रही थी ।

मुकेश ने कुछ देर तक अपनी बेटी की चूत को साबुन से साफ़ करने के बाद साबुन को नीचे रख दिया और कंचन की चूत को गौर से देखते हुए अपने होंठो को उसकी चूत पर रख दिया।

"ओहहहहहह पिताजी क्या कर दिया आपने" अपने पिता के होंठो को अचानक अपनी चूत पर महसूस करते ही कंचन ने ज़ोर से सिसकते हुए कहा ।
 
मुकेश अपनी बेटी को कोई जवाब दिए बगैर उसकी चूत को चूमते और चाटते हुए उसकी चूत पर गिरता हुआ पानी भी चाटने लगा । कंचन की हालत बुहत ख़राब हो चुकी थी । उसका पूरा बदन तपकर आग बन चूका था, मुकेश ने अचानक अपनी एक ऊँगली को अपनी बेटी की चूत के छेद में ड़ालते हुए उसकी चूत के दाने को अपने मुँह में ले लिया और उसे बुहत ज़ोर से चूसने लगा ।

कंचन अपने पिता की यह हरकत बर्दाशत न कर सकी और उसका पूरा जिस्म काँपने लगा।

"आह्ह्ह्ह ओहहह पिता जी ओह्ह्ह्हह्ह्" कंचन ने ज़ोर से सिसकते हुए अपने पिता को बालों से पकडकर अपनी चूत पर दबा दिया और उसकी चूत झटके खाते हुए पानी छोड लगी, मुकेश अपनी बेटी की चूत का रस शावर के गिरते हुए पानी के साथ चाटने लगा ।

कंचन कुछ देर तक यों ही अपनी आँखें बंद करके झरने लगी।

"बेटी क्या हुआ मजा आया?" कुछ देर बाद जब कंचन ने अपनी आँखें खोली तो मुकेश ने उठकर उसके सामने खडा होते हुए पूछा।

"पिताजी" कंचन ने अपने पिता को अपनी बाहों में भर लिया और दोनों बाप बेटी एक दुसरे के होंठो को चूमने लगे ।

मुकेश का लंड बहुत ही कड़क हो चूका था।जिसे कंचन अपने कोमल हाथो से सहला रही थी।मुकेश ने कंचन को धीरे से घुटनो पर बिठा दिया और अपना लंड अपनी बेटी के होंठो पर रगड़ने लगा।कंचन अपने पिता के लंड को उछलता हुआ देखकर उसको अपने मुँह में भरकर चूसने लगी।मुकेश अपनी बेटी की गरम मुँह में अपना लंड जोर जोर से पेलने लगा।कंचन अपने बाप के लंड को तेजी से चूसने लगी। 5 मिनट अपनी बेटी के मुँह को चोदने के बाद मुकेश ने अपनी बेटी के मुँह अपने गाढ़े वीर्य से भर दिया जिसे कंचन पूरा चाट गई।

फिर बाप बेटी नंगे ही एक दूसरे को चूमने लगे।

कुछ देर तक ऐसे ही एक दुसरे के होंठो से खेलने के बाद दोनों फ्रेश होकर बाथरूम से निकल गए ।

कंचन ने बाहर आते ही अपने कपडे पहने और अपने पिता के कमरे से निकलकर अपने कमरे की तरफ जाने लगी ।

विजय और शीला भी घर लौटने के लिए एक बस में चढ़ गए मगर बस में बुहत ज्यादा भीड़ थी । जिस वजह से दोनों को खडे होकर ही सफ़र करना पड़ा। शीला को खडे हुए अभी ज्यादा देर भी नहीं हुई थी की उसे पीछे से किसी ने धक्का मार दिया ।

शीला ने गुस्से में अपने पीछे की तरफ देखा।

"मैडम मैंने धक्का नहीं मारा । वह पीछे से किसी ने मारा था" शीला के पीछे एक बूढा खडा था । जिसने शीला को गुस्से में अपनी तरफ देखकर कहा तभी पीछे से किसी ने दूसरा धक्का मार दिया और वह बूढा सीधा शीला के ऊपर आ गिरा।

"सॉरी मैडम फिर से किसी ने धक्का दिया" उस बूढ़े ने अपने हाथों से शीला के दोनों कांधों को पकडे हुए उसके चुचियों के नंगे उभारों को घूरते हुए कहा ।

शीला ने गुस्से में उस बूढ़े को पकडकर अपने आप से दूर झटक दिया और विजय को उस तरफ करके खुद विजय की जगह ख़ड़ी हो गयी । शीला को अब कुछ सुकून महसूस हो रहा था क्योंकी उसे अब पीछे से कोई धक्का नहीं मार रहा था और उसके पीछे भी एक लड़का चश्मा पहने हुए खडा था जो सुरत से बुहत शरीफ दिख रहा था ।
 
कहानी पसंद करने और उत्साह बढ़ने के लिए सभी को थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अगला अपडेट जल्दी ही।कहानी के बारें में अपनी राय अवश्य दें।thanks
 
शीला को सुकून से खडे हुए अभी कुछ ही देर हुई होगी की उसे अपने चूतडों पर किसी के हाथ का स्पर्श महसूस हुआ । शीला ने जैसे ही पीछे की तरफ मुड़कर देखा उसके चूतडों से हाथ हट गया मगर उसके पीछे खडा हुआ वह चश्मू शीला को देखकर मुस्कुरा रहा था। शीला समझ गयी की यह उसी की हरकत थी जिसे वह शरीफ समझ रही थी वह भी हरामी निकला ।

शीला बस में कोई हंगामा खडा करना नहीं चाहती थी इसीलिए उसने चश्मू को देखकर गुस्से से अपना चेहरा फिर से दूसरी तरफ कर लिया । कुछ देर तक तो शीला को कुछ महसूस नहीं हुआ मगर थोडी देर बाद फिर से वही हाथ का स्पर्श उसे अपने चूतडों पर महसूस हुआ। शीला को कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वह क्या करे ।

शीला ने एक बार फिर अपना मुँह घुमाते हुए उस चश्मू को देखा मगर इस बार उस हरामी ने शीला के देखने की भी कोई परवाह नहीं की और मुस्कराते हुए शीला के चुतड़ो को सहलाने लगा, शीला ने गुस्से से उस चश्मू का हाथ पकडकर अपने चूतडों से दूर झटक दिया ।

शीला ने उस चश्मू का हाथ अपने चुतडो से हटाने के बाद फिर से अपना मुँह दूसरी तरफ कर लिया । कुछ देर तक शीला को फिर से उस चश्मू ने हाथ लगाने की हिमत नहीं की। शीला ने भी मन ही मन में शुकर अदा किया की चलो अब बाकी का सफ़र उसे कोई तंग नहीं करेगा ।

कुछ देर सुकून से रहने के बाद उसने महसूस किया की उसके पीछे कोई चिपककर खडा है । शीला ने जैसे ही पीछे मुड़ने की कोशिश की तो उसके चूतड़ उसके पीछे खड़े आदमी की पेण्ट से जा टकराये और वह पीछे न मुड सकी।

"मैंडम बुहत ज्यादा भीड़ है पीछे मत मुडो" शीला के पीछे से किसी ने उसे समझाते हुए कहा ।

शीला चुपचाप सीधी होकर खड़ी हो गई । कुछ देर बाद ही उसने महसूस किया की उसके चूतडो पे कोई चीज़ चूभ रही है । शीला को यह समझने में देर न लगी की वह क्या है । इसीलिए वह थोडा आगे सरक गयी मगर दुसरे ही पल उसके चूतड़ों पर फिर से वही स्पर्श होने लगा, शीला के पास अब आगे सरकने की जगह भी नहीं थी। वह विजय से बिलकुल सटकर खड़ी थी जिस वजह से उसकी चुचियां विजय के सीने से टकरा रही थी।
 
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