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"तुम्हारे पीछे वही चश्मू है अब तुम कुछ नहीं कर सकती। इसीलिए चुपचाप खड़ी होकर मज़े लो देखो की वह क्या करता है" विजय भी जो इतनी देर से सारा तमाशा देखकर मज़े ले रहा था उसने शीला के कान में कहा । शीला विजय की बता सुनकर हैंरान रह गयी मगर उसके पास इसके अलावा कोई रास्ता नहीं था इसीलिए वह चुपचाप होकर खड़ी हो गई ।
वह चश्मू लड़का शीला का कोई विरोध न पाकर बुहत खुश हो गया और उसने अपने लंड को शीला के चूतडों पर ज़ोर से दबाते हुए अपना हाथ से शीला के एक हाथ को पकड़ लिया । शीला ने भी अपना हाथ उससे छुड़ाने की कोई कोशिश नहीं की, विजय का लंड भी यह सब देखकर उसकी पेण्ट में उठ चूका था ।
विजय ने भीड़ का फ़ायदा उठाते हुए अपनी पेण्ट की ज़िप को खोल दिया और शीला का दूसरा हाथ पकड़कर अपने खडे लंड पर रख दिया । शीला अचानक अपने हाथ को विजय के गरम नंगे लंड पर महसूस करके कांप उठी। उसने खवाब में भी नहीं सोचा था की बस में भी विजय ऐसा करने की हिम्मत करेगा ।
"विजय तुम क्या कर रहे हो किसी ने देख लिया तो" शीला ने अपने हाथ को विजय के लंड से हटाकर उसके कान में बड़बड़ाते हुए कहा।
"दीदी तुम डरो मत इतनी भीड़ में हमें कोई नहीं देख सकता। वैसे भी तुम मेरे और उसके बीच में फँसी हुई हो" विजय ने शीला के हाथ को फिर से अपने लंड पर रखते हुए कहा ।
शीला समझ गयी की विजय ऐसे नहीं मानेगा। इसीलिए वह अपने हाथ से उसके लंड को सहलाने लगी । बस में इतनी ज्यादा भीड़ थी के किसी का धयान भी उसकी तरफ नहीं जा रहा था और वह खडी भी इस पोजीशन में थे की उन्हें कोई नहीं देख सकता था । मगर वह चश्मू जो शीला के पीछे खडा था सब कुछ देख रहा था।
शीला का हाथ विजय के लंड पर देखकर चश्मू का लंड भी झटके खाने लगा और उसने भी अपना हाथ शीला के हाथ से हटाते हुए अपनी पेण्ट की ज़िप खोल दी । शीला अचानक अपने हाथ से उस लड़के के हाथ के हटते ही सोचने लगी की अचानक उसे क्या हो गया कहीं वह खलास तो नहीं हो गया मगर अगले ही पल उसके पूरे जिस्म को चीटींया काटने लगी और उसका अंग अंग गरम होने लगा ।
वह चश्मू लड़का शीला का कोई विरोध न पाकर बुहत खुश हो गया और उसने अपने लंड को शीला के चूतडों पर ज़ोर से दबाते हुए अपना हाथ से शीला के एक हाथ को पकड़ लिया । शीला ने भी अपना हाथ उससे छुड़ाने की कोई कोशिश नहीं की, विजय का लंड भी यह सब देखकर उसकी पेण्ट में उठ चूका था ।
विजय ने भीड़ का फ़ायदा उठाते हुए अपनी पेण्ट की ज़िप को खोल दिया और शीला का दूसरा हाथ पकड़कर अपने खडे लंड पर रख दिया । शीला अचानक अपने हाथ को विजय के गरम नंगे लंड पर महसूस करके कांप उठी। उसने खवाब में भी नहीं सोचा था की बस में भी विजय ऐसा करने की हिम्मत करेगा ।
"विजय तुम क्या कर रहे हो किसी ने देख लिया तो" शीला ने अपने हाथ को विजय के लंड से हटाकर उसके कान में बड़बड़ाते हुए कहा।
"दीदी तुम डरो मत इतनी भीड़ में हमें कोई नहीं देख सकता। वैसे भी तुम मेरे और उसके बीच में फँसी हुई हो" विजय ने शीला के हाथ को फिर से अपने लंड पर रखते हुए कहा ।
शीला समझ गयी की विजय ऐसे नहीं मानेगा। इसीलिए वह अपने हाथ से उसके लंड को सहलाने लगी । बस में इतनी ज्यादा भीड़ थी के किसी का धयान भी उसकी तरफ नहीं जा रहा था और वह खडी भी इस पोजीशन में थे की उन्हें कोई नहीं देख सकता था । मगर वह चश्मू जो शीला के पीछे खडा था सब कुछ देख रहा था।
शीला का हाथ विजय के लंड पर देखकर चश्मू का लंड भी झटके खाने लगा और उसने भी अपना हाथ शीला के हाथ से हटाते हुए अपनी पेण्ट की ज़िप खोल दी । शीला अचानक अपने हाथ से उस लड़के के हाथ के हटते ही सोचने लगी की अचानक उसे क्या हो गया कहीं वह खलास तो नहीं हो गया मगर अगले ही पल उसके पूरे जिस्म को चीटींया काटने लगी और उसका अंग अंग गरम होने लगा ।