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परिवार(दि फैमिली) complete

नरेश का पूरा जिस्म अपनी बहन का नरम हाथ अपने लंड पर पडते ही कांप उठा और वह अपनी बहन के होंठो को चूमते हुए उसकी ब्रा को उतारने लगा। ब्रा के उतरते ही नरेश ने अपनी बहन को अपनी गोद में उठाते हुए बेड पर जाकर लिटा दिया और खुद उसकी टांगों के बीच आकर अपनी बहन की गोरी गोरी चुचियों से खेलने लगा ।

नरेश का नंगा लंड सीधा शीला की पेंटी पे टक्कर मार रहा था। जिस वजह से उत्तेजिन के मारे शीला के मूह से ज़ोर की सिसकियाँ निकल रही थी और उसकी चूत से बुह ज़्यादा पानी निकल रहा था।

"आहहह भैया कुछ करो न क्यों तडपा रहे हो" शीला ने उत्तेजना में आकर अपने भाई को बालों से पकडकर अपनी चुचियों पर दबाते हुए कहा ।

नरेश अपनी बहन की बात सुनकर उसकी चुचियों को छोडकर नीचे होने लगा । नरेश ने अपने मूह को शीला की पेंटी तक लाकर रोक दिया और अपनी दीदी की गीली पेंटी को अपने नाक से तेज़ साँसें लेते हुए सूँघने लगा, नरेश कुछ देर तक अपनी बहन की पेंटी को सूँघने के बाद अपना मुँह उसके ऊपर रख दिया ।

"आहहह भैया" नरेश का मुँह अपनी पेंटी के ऊपर से ही अपनी चूत पर लगने से शीला ने सिसकते हुए कहा। नरेश ने कुछ देर तक अपनी बहन की पेंटी को चूमने के बाद उसकी पेंटी में हाथ डालकर उसे अपनी बहन के जिस्म से अलग कर दिया। पेंटी के हटते ही शीला की रस टपकाती चूत नरेश के सामने आ गयी ।

नरेश ने अपनी बहन की गीली चूत को एक बार देखा और नीचे झुककर अपने होंठो को अपनी बहन की चूत के पतले होंठो पर रख दिया।

"आहहह भैया ओह्ह" नरेश के होंठ अपनी चूत पर पडते ही शीला के मुँह से ज़ोर की सिसकी निकल गयी और वह अपने हाथ से अपने भाई के बालों को सहलाते हुए अपनी चूत पर दबाने लगी ।

नरेश कुछ देर तक अपनी बहन की चूत को अपनी जीभ से चाटने के बाद सीधा होते हुए अपना फनफनाता हुआ लंड अपनी बहन की चूत पर घीसने लगा।

"आह्ह्ह्ह ओह भैया डाल दो ना" शीला ने अपने भाई के लंड को अपनी चूत पर महसूस करते ही ज़ोर से सिसकते हुए कहा और अपने चूतडों को उठाकर अपने भाई के लंड पर दबाने लगी ।
 
नरेश ने अपना लंड शीला की चूत पर रखा और एक ज़ोरदार झटके के साथ अपना पूरा लंड उसकी चूत में पेल दिया।

"उईई भैया ओह्ह्ह्ह" एक ही धक्के में अपने भाई का पूरा लंड अपनी चूत में घूसने से शीला के मुँह से ज़ोर की चीख़ निकल गयी । नरेश ने अब अपने लंड को शीला की चूत में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया था ।

शीला भी अब मज़े से अपनी टांगों को नरेश की कमर में डालकर उसके लंड को अपनी चूत में अंदर बाहर होता हुआ महसूस कर रही थी । नरेश जैसे ही अपने लंड को शीला की चूत से बाहर खींचकर वापस धक्का मारता तो वह अपने चूतडों को भी उछालकर नरेश के लंड पर दबा देती जिस वजह से पूरे कमरे में धप धप की आवाज़ें गूँजने लगी ।

यह खेल दोनों भाई बहन के बाच 30 मिनट तक चलते रहा उन 30 मिनटों में नरेश ने अपनी बहन को हर तरीके से चोदा। इस बीच शीला भी दो बार झडी एक बार बीच में और दूसरी बार अपने भाई का गरम वीर्य अपनी चूत में गिरने से । वह दोनों निढाल होकर बेड पर पड़े हुए थे दोनों के जिस्म पसीने से भरे हुए थे ।

कंचन कमरे से निकलकर अपने भाई के कमरे में आ गयी विजय अपनी बहन को देखकर उठते हुए बेड पर बैठ गया।

"भइया आपने मुझे बुलाया?" कंचन ने खडे हुए ही विजय से पूछा।

"हाँ दीदी आओ बैठो वह साले नरेश को आग लगी हुयी थी इसीलिए उसने आपको यहाँ भेज दिया" विजय ने कंचन को देखते हुए कहा ।

विजय की बात सुनकर कंचन विजय के साथ बेड पर जाकर बैठ गई।

"दीदी क्या बात है आज बुहत भाव खा रही हो । कहीं पिताजी के साथ ज्यादा मज़ा तो नहीं आ गया तुम्हें" कंचन के बैठते ही विजय ने उसे टोकते हुए कहा।

"भइया आपसे किसने कहा?" कंचन ने हैंरान होते हुए विजय से पुछा। वह जिस बात से डर रही थी वही हुआ । विजय को उसके बारे में पता लग चूका था ।

"दीदी मुझसे भला कोई बात चुप सकती है" विजय ने कंचन को देखते हुए कहा।

"भइया वह माँ ने कहा" कंचन ने शर्म से अपना कन्धा झुकाकर सिर्फ इतना कहा।

"अरे शर्माओ मत मुझे कोई ऐतेराज़ नहीं है" विजय ने कंचन को शरमाता हुआ देखकर कहा ।
 
अचानक दरवाज़ा खुला और रेखा अंदर दाखिल हो गई कंचन अपनी माँ को देखकर बेड से उठकर खड़ी हो गई।

"अरे वाह यहाँ तो बहन भाई का प्यार चल रहा है" रेखा ने अंदर दाखिल होते ही कंचन को घूरते हुए कहा।

"आप कहो तो यहाँ पर माँ बेटे का प्यार शुरू कर दूं" विजय ने बेड से उठकर अपनी माँ को पीछे से अपनी बाहों में भरते हुए कहा ।

"छोड़ो नालायक मुझे। कुछ तो शर्म करो" रेखा ने अचानक अपने बेटे की इस हरकत से परेशान होकर उसे अपने आप से दूर धकेलते हुए कहा।

"क्यों माँ क्या हुआ अपनी बेटी के सामने शर्म आ रही है" विजय ने अपनी माँ से दूर होते ही हँसकर कहा।

"हँस ले बेटे तेरी हंसी को अभी बंद करती हूँ" रेखा ने विजय को हँसता हुए देखकर गुस्से से कहा ।

"क्यों माँ क्या बात है" विजय ने अपनी माँ की बात सुनकर परेशान होते हुए कहा।

"अरे बेटे तुम परेशान क्यों होते हो। वह तुम्हारे पिता आज मुझे तुमसे चुदता हुआ देखना चाहते हैं और कंचन को तेरे सामने चोदना चाहते है" रेखा ने विजय के पास जाकर हँसते हुए कहा ।

"क्या?" कंचन और विजय के मुँह से हैंरानी के मारे एक साथ निकला।

"क्यों बेटे क्या हुआ?" रेखा ने वैसे ही मुस्कराते हुए कहा।

"माँ पिता जी के सामने । कहीं आप मज़ाक तो नहीं कर रही है?" विजय ने हैंरानी से अपनी माँ की तरफ देखते हुए कहा।

"बेटे तुम्हें यह मज़ाक लग रहा है?" रेखा ने विजय की बात सुनकर उसकी तरफ देखते हुए कहा ।

"मगर माँ हम यह नहीं कर सकते" इस बार कंचन ने बोलते हुए कहा।

"नही दीदी हम करेंगे जैसे पिताजी कहेंगे वैसे ही" अचानक विजय ने बीच में बोलते हुए कहा।

"बुहत खूब यह हुई न मरदों वाली बात" रेखा ने खुश होते हुए कहा । कंचन को कुछ समझ में नहीं आ रहा था की क्या हो रहा है । इसीलिए वह चुपचाप खड़ी थी ।

"आओ दोनों मेरे साथ" रेखा ने विजय और कंचन को देखते हुए कहा।

"माँ मगर नरेश हमें यहाँ न देखकर क्या सोचेगा वह तो आपका बेसबरी से इंतज़ार कर रहा था" विजय ने अपनी माँ को देखते हुए कहा।

"तुम उसकी फिकर मत करो उसे बाद में समझ लेंगे" रेखा ने विजय की बात का जवाब देते हुए कहा और वहां से बाहर जाने लगी । विजय भी कंचन का हाथ पकडकर अपनी माँ के साथ उसके कमरे की तरफ बढ़ने लगा ।
 
कहानी पसंद करने और उत्साह बढ़ने के लिए सभी को थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अगला अपडेट जल्दी ही।कहानी के बारें में अपनी राय अवश्य दें।thanks
 
विजय अपनी बहन के साथ अपनी माँ के पीछे उसके कमरे में पुहंच चूका था । रेखा ने सभी के अंदर दाखिल होने के बाद दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया और खुद कंचन को पकड़कर अपने पति के पास ले जाने लगी।

"डालिंग तुम बच्चों को ले आई। अरे बेटे तुम इतनी दूर क्यों खड़े हो इधर आकर हमारे साथ बैठो" मुकेश ने विजय को दूर खड़ा देखकर कहा ।

"तुम अपनी बेटी को संभालो बुहत शर्मा रही है अपने बेटे को मैं खुद संभाल लूंग़ी" रेखा ने कंचन को अपने पति के पास बेड पर बिठाते हुए कहा।

"हाँ मैं अपनी प्यारी बच्ची को अपने साथ बिठाता हूँ और हम दोनों पहले माँ बेटे का प्यार देंखेंगे ताकी हमारी बेटी की सारी झिझक और शर्म ख़तम हो सके" मुकेश ने बेड से उठकर अपनी बेटी का हाथ पकडते हुए कहा और उसके साथ सामने पड़े सोफ़े पर जाकर बैठ गया ।

"क्यों बेटे आज इतना क्यों शर्मा रहे हो आओ मेरे पास और अपने पिता के सामने मेरे सारे बदन की आग बुझा दो" मुकेश के उठते ही रेखा ने अपनी नाईट ड्रेस को उतार दिया और बेड पर बैठते हुए अपने बेटे की तरफ देखते हुए कहा । रेखा के बदन पर सिर्फ ब्रा और पेंटी थी जिस में उसकी बड़ी बड़ी गोरी चुचियों आधी से ज्यादा ब्रा के बाहर नंगी नज़र आ रही थी और उसकी छोटी सी पेंटी रेखा के बड़े मांसल चूतडों के बीच में ही फंसकर रह गयी थी। जिस वजह से उसके मोटे मोटे चूतड़ बिलकुल नंगे ही नज़र आ रहे थे ।

विजय अपनी माँ की बात सुनकर बेड की तरफ बढ़ने लगा । विजय का लंड अपनी माँ की गोरी चिकनी टांगों और भरे हुए भूरे जिस्म को नंगा देखकर पेण्ट में ही झटके खा रहा था, विजय जैसे ही बेड के क़रीब पुहंचा रेखा बेड से उठकर उससे लिपट गयी और अपने बेटे के सर को पकड़कर उसके पूरे चेहरे को जगह जगह चूमने लगी ।

विजय अपनी माँ के इस रूप को देखकर ज्यादा गरम हो गया और अपनी माँ के नंगे चूतडों में हाथ डालकर उसके बदन को अपने बदन से सटा दिया । विजय अपनी माँ के नंगे चूतडों को ज़ोर से मसलते हुए उसकी चूत को अपनी पेण्ट पर दबाने लगा, रेखा भी अपने बेटे को गले लगाकर मज़े से उसके सीने से अपनी चुचियों को दबाते हुए उसके काँधे को चूमने लगी ।
 
मुकेश अपनी पत्नी और बेटे को इस हालत में देखकर गरम होने लगा और उसने कंचन को कमर से पकड़कर अपनी गोद पर बिठा दिया । कंचन पहले तो अपने पिता से छूटने की कोशिश करने लगी पर जब उसने देखा की उसके पिता उसे नहीं छोड़ने वाले तो वह चुप होकर अपने पिता की गोद में बैठ गयी और अपनी माँ और भाई की तरफ देखने लगी ।

विजय कुछ देर तक अपनी माँ के मोटे चूतड़ों को मसलने के बाद अपना हाथ वहां से हटाकर अपनी माँ के बालों में डाल दिया और उसके सर को पकड़कर अपने होंठो को अपनी माँ के गुलाबी होंठो पर रख दिया । रेखा अपने बेटे के होंठो को अपने होंठो पर महसूस करते ही मज़े के मारे पागल हो गई और वह अपने बेटे के होंठो को बुहत ज़ोर से चूसने लगी, रेखा और विजय कुछ देर तक ऐसे ही एक दुसरे के होंठो को बुहत ज़ोर से चूसते रहे और कुछ देर बाद वह दोनों अपनी साँसें अटकने की वजह से एक दुसरे के होंठो से जुदा होकर हाँफने लगे ।

रेखा ने कुछ देर तक तेज़ साँसें लेने के बाद अपने हाथ से विजय की शर्ट को उसके जिस्म से अलग कर दिया और खुद अपने होंठो से विजय के पूरे सीने को चूमने लगी । रेखा ने अपने बेटे को सीने को चूमते हुए अपनी जीभ निकल ली और अपने बेटे के सीने पर फिराते हुए नीचे जाने लगी, विजय का मज़े के मारे बुरा हाल था। वह अपनी आँखें बंद किये हुए ज़ोर से सिसक रहा था।

रेखा अपनी जीभ को नीचे ले जाते हुए अपने बेटे की पेण्ट तक आ गयी और अपने हाथ से विजय के लंड को पेण्ट के ऊपर से ही सहलाने लगी । रेखा ने कुछ देर तक अपने बेटे के लंड को पेण्ट के ऊपर से ही सहलाने के बाद अपने हाथ से विजय की पेण्ट को खोलकर उसके जिस्म से अलग कर दिया, पेण्ट के हटते ही अंडरवियर में इतना मोटा और लम्बा उभार देखकर मुकेश की आँखें फटी की फटी रह गयी ।

मुकेश ने खवाब में भी नहीं सोचा था की उसके बेटे का लंड इतना बड़ा होगा। विजय के लंड को देखते ही मुकेश का लंड भी उसकी पेण्ट में झटके खाने लगा ।मुकेश ने अपने बेटे और बीबी को देखते हुए अपने हाथों से कंचन की नाइटी को आगे से खोल दिया और अपने दोनों हाथों से अपनी बेटी की दोनों बड़ी बड़ी चुचियों को उसकी ब्रा के ऊपर से ही पकडकर सहलाने लगा ।
 
कंचन भी अपनी माँ और भाई को देखकर गरम हो गई थी । इसीलिए उसने भी अपने पिता से कोई विरोध नहीं किया और चुप चाप अपनी चुचियों को अपने बाप के हाथों से मसलवाने लगी । रेखा ने अपने बेटे की पेण्ट को उतारने के बाद सीधा होते हुए अपने बेटे को हाथ से पकड़कर बेड पर सीधा लिटा दिया, रेखा अपने बेटे को बेड पर लिटाने के बाद खुद भी बेड पर चढते हुए विजय की टांगों के पास बैठ गई ।

रेखा ने एक नज़र अपने बेटे के झटके खाते हुए लंड को उसके अंडरवियर के ऊपर से देखा और नीचे झुककर उसे अपने हाथ में लेकर सहलाने लगी । रेखा ने अपने बेटे के लंड को अपने हाथ से सहलाते हुए अपनी जीभ निकाली और अंडरवियर के ऊपर से ही अपने बेटे के लंड पर अपनी जीभ फिराने लगी।

"आजहहह माँ" विजय ने ज़ोर से सिसकते हुए अपना हाथ रेखा के बालो में डाल दिया ।

रेखा ने अपने बेटे के लंड को अंडरवियर के ऊपर से ही जीभ से चाटते हुए अपना मुँह खोला और विजय के लंड का सुपाडा अपने मुँह में भर लिया । रेखा अपने बेटे के लंड के सुपाडे को अंडरवियर के ऊपर से ही अपने मुँह में लेकर अपने दांतों से हल्का हल्का सा काटने लगी।

"उईई माँ क्या कर रही हो" विजय अपने लंड पर अपनी माँ के दांतों को महसूस करते ही उछलते हुए बोला ।

रेखा ने अपने बेटे के लंड को अपने मुँह से निकाला और अपनी दोनों टांगों को फ़ैलाकर उसके लंड के ऊपर बैठ गई । रेखा अपने बेटे के लंड पर बैठकर उसके लंड को अपनी चूत पर पेंटी के ऊपर से ही घीसने लगी। रेखा बुहत गरम हो चुकी थी इसीलिए उसकी चूत से बुहत ज्यादा पानी निकल रहा था और रेखा के मुँह से उत्तेजना के मारे बुहत ज़ोर की सिस्कियाँ निकल रही थी।

विजय की हालत भी बुहत खराब हो चुकी थी इसीलिए उसने अपनी माँ को कमर से पकडकर नीचे झुका दिया और उसकी बड़ी बड़ी चुचियों के उभारों को अपने होंठो से चूमने लगा । विजय ने अपनी माँ की चुचियों को चूमते हुए उसकी ब्रा को पीछे से खोल दिया और उसे अपनी माँ के जिस्म से अलग करते हुए बेड पर फ़ेंक दिया ।
 
ब्रा के हटते ही रेखा की बड़ी बड़ी चुचियाँ उछलते हुए विजय के सामने आ गयी । विजय ने अपने दोनों हाथों से अपनी माँ की दोनों चुचियों को पकडा और उन्हें ज़ोर से मसलते हुए एक एक करके अपने मूह में लेकर चूसने और चाटने लगा।

"ओहहहह बेटे चूसो अपनी माँ की चुचियों का पूरा रस चूस लो" रेखा ने अपनी चुचियों को विजय के मुँह में महसूस करके ज़ोर से सिसकते हुए कहा ।

अपनी बीबी और बेटे को देखते हुए मुकेश की हालत भी बिगडती जा रही थी इसीलिए उसने कंचन को अपनी गोद से उठाते हुए सोफ़े पर बिठा दिया और खुद की शर्ट और पेण्ट को अपने जिस्म से अलग कर दिया। मुकेश ने अपने कपडे उतारने के बाद कंचन की नाइटी को भी उसके जिस्म से अलग कर दिया और खुद सोफ़े पर सीधा होकर लेट गया, मुकेश ने सोफ़े पर लेटने के बाद अपनी बेटी को भी हाथ से पकडते हुए अपने ऊपर लिटा दिया ।

अपने पिता के ऊपर लेटते ही कंचन के मुँह से एक कामुक सिसकी निकल गयी क्योंकी उसकी पेंटी पर उसके पिता का लंड चूभ गया था, कंचन भी बुहत ज्यादा गरम हो चुकी थी और उत्तेजना के मारे उसकी चूत से बुहत ज्यादा पानी निकल रहा था । मुकेश का लंड भी अपनी बेटी की नरम चुचियों को अपने सीने पर लगते ही ज़ोर से झटके खाते हुए कंचन की चूत पर टक्कर मारने लगा ।

मुकेश ने अपनी बेटी के बालों में हाथ डालकर उसके लबों को अपने होंठो से सटा दिया और अपनी बेटी के रसीले होंठो को चूमने लगा । कंचन भी अपने पिता के होठो को अपने लबों पर महसूस करके मज़े से अपने पिता के साथ खोती चली गई, वह दोनों अब एक दुसरे के होंठो को बुरी तरह से चूस और चाट रहे थे ।

इधर विजय ने अपनी माँ की चुचियों को कुछ देर चूसने और चाटने और काटने के बाद अपने ऊपर से हटाते हुए सीधा लिटा दिया और खुद उसके ऊपर आकर अपनी माँ के पूरे जिस्म को चूमता हुआ नीचे उसकी पेंटी तक आ गया । विजय ने अपना मुँह अपनी माँ की पेंटी पर रख दिया और बुहत ज़ोर से साँसें लेते हुए उसकी चूत के रस की गंध को महसूस करने लगा ।
 
आहहह बेटे क्या कर रहे हो?" रेखा ने सिसकते हुए कहा।

"ओहहह माँ क्या गंध है आपके चूत की" विजय ने अपने मूह को अपनी माँ की चूत से हटाते हुए कहा और अपने हाथों को अपनी माँ की पेंटी में डालकर उसे उसके जिस्म से अलग कर दिया, पेंटी के हटते ही रेखा की गोरी रस टपकाती फूली हुई चूत विजय की ऑंखों के सामने आ गयी ।

कंचन और मुकेश कुछ देर तक एक दुसरे के होंठो से खेलने के बाद शांत होकर विजय और रेखा की तरफ देख रहे थे । मुकेश ने अचानक कंचन को अपने ऊपर से उठाते हुए उसे अपने साथ बेड की तरफ ले जाने लगा, मुकेश अपनी बेटी कंचन के साथ बेड के दुसरे कोने में जा बैठा और नज़दीक से अपनी पत्नी और बेटे को देखने लगा ।

विजय ने अपनी माँ की दोनों टांगों को पकड़कर पूरी तरह से खोल दिया और खुद उसकी फूली हुयी चूत को गौर से देखते हुए अपने अंडरवियर को उतारने लगा।

"कंचन दीदी इधर आओ और अपनी माँ की चूत को चाट कर मेरे लिए तैयार करो" विजय ने अपना अंडरवियर उतारने के बाद अपनी बहन को कलाई से पकडकर अपने पास खींचते हुए कहा ।

नहीं भैया मुझे छोड़ो। मैं यह सब नहीं कर सकती" कंचन ने अचानक अपने भाई की इस हरकत से झटपटाते हुए कहा । मुकेश का लंड भी अपने बेटे की इस हरकत से उत्तेजना में आकर झटके खाने लगा।

"बेटी क्यों शरमा रही वह तेरी माँ ही तो है" मुकेश ने भी उत्तेजना में डूबकर अपने लंड को अंडरवियर के ऊपर से सहलाते हुए कंचन से कहा ।

"नही मैं यह नहीं करूंग़ी" कंचन ने इन्कार करते हुए कहा।

"साली तुम बुहत नखरे करने लगी हो लो अब चाट" विजय ने गुस्से में आकर अपनी बहन को बालों से पकड़कर अपनी माँ की चूत पर झुकाते हुए कहा। विजय के ऐसा करने से कंचन के होंठ सीधा उसकी माँ की चूत पर जा टकराए, कंचन ने अपना मुँह वहां से हटाने की बुहत कोशिश की मगर विजय ने उसे बुहत ज़ोर से अपनी माँ की चूत पर दबा रखा था जिस वजह से उसका मुँह वहां से हटने की बताये रेखा की चूत पर ही रगडने लगा ।
 
"आह्ह्ह्ह बेटी क्या कर रही हो अपनी माँ की चूत को जीभ से चाट" रेखा ने अपनी चूत पर अपनी बेटी के होंठ महसूस करते ही ज़ोर से सिसकते हुय कहा । कंचन के पास अब कोई रास्ता नहीं था । इसीलिए वह अपनी जीभ निकालकर अपनी माँ की चूत पर फेरने लगी, पहले तो कंचन को अपनी माँ की चूत का स्वाद कुछ अजीब लगा मगर थोड़ी देर बाद ही उसे अपनी माँ की चूत को चाटते हुए मजा आने लगा ।

"ओहहहह बेटी हाँ ऐसे ही" रेखा ने अपनी बेटी की जीभ अपनी चूत पर लगते ही ज़ोर से सिसकते हुए कहा।

"शाबास दीदी अब आओ मेरे लंड को भी चाट कर गीला कर दो " विजय ने अपनी बहन को वैसे ही बालों से पकड़कर अपनी माँ की चूत से अलग करते हुए कहा।

"ओहहहह भैया मेरे बालों को तो छोड़ो" कंचन ने इस बार चीखते हुए कहा ।

"ओहहहह सॉरी दीदी" विजय ने कंचन की बात सुनकर उसके बालों से अपने हाथ को हटाते हुए कहा । कंचन अब अपने भाई के फनफनाते हुए लंड को अपने हाथ में पकडकर अपनी जीभ से चाटने लगी।

"आजहहह दीदी इसका सुपाडा मुँह में लो ना" विजय ने ज़ोर से सिसकते हुए कहा । कंचन अपने भैया की बात सुनकर उसके लंड के सुपाडे को मुँह में ले लिया और अपने होंठो के बीच लेकर चूसने लगी ।

"आहहह बस साली यहीं पर झड़ा देगी क्या?" विजय ने अपनी बहन के सर को पकड़कर अपने लंड से हटाते हुए कहा और खुद अपनी माँ की टांगों के बीच आ गया।।

"इधर आओ और मेरे लंड को पकड़कर अपनी माँ की चूत में डालो दीदी" विजय ने कंचन को देखते हुए कहा । कंचन की हालत भी बुहत खराब हो चुकी थी वह बुरी तरह से हवस की आग में जल रही थी ।

कंचन ने अपने भाई की बात सुनकर नशीले अन्दाज़ में ऊपर होते हुए अपने भाई के लंड को पकड़कर अपनी माँ की छूट के छेद पर रख दिया । विजय ने अपने लंड को एक हल्का धक्का मारा उसका मुसल लंड रेखा की गीली चूत में आधा ग़ायब हो गया।

"आह्ह्ह्ह बेटा" अपने बेटे का आधा लंड घुसते ही रेखा के मुँह से ज़ोर की सिसकी निकल गयी ।
 
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