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परिवार(दि फैमिली) complete

नीलम भी कुछ देर तक बैठकर आने वाले टाइम के बारे में सोचती रही जाने क्यों अपने ससुर के साथ नंगा सोने का सोचते हुए ही आज नीलम की चूत से पानी बहने लगा । नीलम को अपने आप पर बुहत घिन आ रही थी इसीलिए वह उठकर घर का काम काज करने में मसरुफ हो गयी, ऐसे ही टाइम बीत गया और शाम के ४-३० हो गये ।

नीलम अपने कमरे में बैठे हुए अपने ससुर का इंतज़ार कर रही थी उसका दिल आने वाले टाइम के बारे में सोचते हुए ज़ोर से धड़क रहा था । अचानक कमरे का दरवाज़ा खुला और महेश अंदर दाखिल हो गये।

"बापु आप आ गये मुझे तो बुहत डर लग रहा है शायद मैं यह सब नहीं कर पाऊँगी" नीलम ने अपने ससुर को देखते ही बेड से उठते हुए कहा ।

"क्या कहा बहु कहीं तुम पागल तो नहीं हो गई हो?" महेश ने हैंरानी और गुस्से से नीलम को देखते हुए कहा।

"बापु जी मैं सही कह रही हूँ मुझसे यह सब नहीं होगा मुझे अभी से बुहत शर्म आ रही है" नीलम ने अपने ससुर को साफ़ जवाब देते हुए कहा।

"बहु तुम ज्यादा चिंता क्यों करती हो । मैं हूँ न तुम्हारे साथ" महेश ने बात को अपने हाथ से जाता हुआ देखकर अपनी बहु के पास जाकर उसके हाथ को पकडते हुए कहा ।

"बापु जी जाने क्यों मुझे अपने ऊपर यकीन नहीं हो रहा है क्या मैं यह कर सकती हूँ" नीलम ने अपने ससुर की तरफ देखते हुए कहा।

"बेटी क्या तुम चाहती हो की तेरा पति सारी ज़िंदगी तेरे सामने किसी दूसरी औरत को चोदता रहे और तुम देखती रहो। हिम्मत करो बेटी तुम कर सकती हो मुझे तुम पर यकीन है" महेश ने अपनी बहु को समझाते हुए कहा ।

"पिता जी मैं जानती हूँ की आप मुझे दुखि नहीं देख सकते मगर जाने क्यों मेरा दिल नहीं मान रहा है" नीलम ने अपने ससुर की बात को सुनकर कहा।

"बेटी तुम्हारे लिए जब मैं हर हद पार करने को तैयार हूँ तो फिर तुम क्यों डर रही हो । लो पहले मैं ही शुरुआत कर देता हूँ अपने रिश्ते को तार तार करने की" महेश किसी भी कीमत पर यह मोका गँवाना नहीं चाहता था। इसीलिए उसने अपनी धोती को खोलकर नीचे फ़ेंक दिया ।
 
"बापु जी!" नीलम ने अपने सामने अपने ससुर के नंगे फनफनाते हुए मुसल लंड को देखकर हैंरानी से अपना हाथ अपने मूह पर रखकर बोली।

"क्या हुआ बेटी" महेश अपनी बहु के सामने यों ही नंगा खडा हुए बोला। नीलम की नज़रें अपने ससुर के लंड पर टीक चुकी थी। महेश का लंड देखते हुए नीलम को अपने पूरे शरीर में अजीब किस्म की सिहरन का अहसास हो रहा था और न चाहते हुए भी उसकी चूत गीली होने लगी ।

"बापु जी प्लीज अपनी धोती पहन लो" नीलम ने बिना अपनी नज़रें हटाये ज़ोर से साँस लेते हुए कहा। नीलम ने अपनी ज़िंदगी में कभी इतना बड़ा और मोटा लंड नहीं देखा था।

"बेटी मैंने तुम्हारी शर्म ख़त्म करने के लिए ही अपनी धोती हटायी है" महेश ने आगे बढ़ते हुए नीलम के बिलकुल पास खड़े होते हुए कहा।

"प्लीज बापू मुझसे दूर हटिये इसे देखकर मुझे जाने क्या हो रहा है" नीलम ने फिर से उत्तेजना के मारे तेज़ साँसें लेते हुए बोली ।

"बेटी अगर तुमने मेरा साथ नहीं दिया तो मैं सारी ज़िंदगी अपने आपको माफ़ नहीं कर पाऊँगा की मैंने अपनी बहु के लिए कुछ नहीं किया" महेश ने नीलम का हाथ पकडते हुए कहा।

"हाहहह पिता जी मुझे पता है आप यह सब मेरे लिए कर रहे हैं मगर मुझे अपने ऊपर यकीन नहीं है कहीं मैं बहक न जाऊं" नीलम ने अपने नरम हाथ पर अपने ससुर का ठोस हाथ पडते ही कहा ।

"बेटी तुम मेरा अपमान कर रही हो क्या तुम्हें मुझ पर भरोसा नहीं है?" महेश ने गुस्सा होते हुए कहा।

"नही पिताजी मैं आप पर शक नहीं कर रही ठीक है मैं तैयार हूँ मगर सब कुछ आपको ही करना होगा" नीलम ने आख़िरकार हार मानते हुए कहा।

"सब कुछ मुझे करना होगा बेटी मैं समझा नहीं?" महेश ने अपनी बहु की आँखों में देखकर कहा ।

"वो पिताजी मेरा मतलब है की मुझे शर्म आ रही है इसी लिए मेरे कपडे आपको ही" नीलम ने शर्म से अपनी नज़रें झुककर सिर्फ इतना कहा।
 
मैं समझ गया ठीक है मैं ही तुम्हारे कपडे उतारता हूँ" महेश ने कहा और नीलम की साड़ी में हाथ डालकर उसे उसके जिस्म से अलग करने लगा, दो मिनट में ही नीलम की साड़ी उसके जिस्म से हट गयी और वह अपने ससुर के सामने आधी नंगी होकर सिर्फ ब्लाउज और पेटिकोट में ख़ड़ी थी ।

"ओहहह बेटी तुम कितनी सूंदर हो फिर भी वह नालायक" महेश अपनी बहु की साड़ी उतारने के बाद सिर्फ इतना कहा और अपनी बहु के ब्लाउज को खोलने लगा । ब्लाउज खोलने के बाद महेश ने अपनी बहु की ब्रा को भी उसके जिस्म से अलग कर दिया, ब्रा के हटते ही नीलम की 36 की चुचियाँ बिलकुल नंगी होकर उसके ससुर के सामने आ गयी ।

महेश का लंड अपनी बहु की नंगी चुचियों को देखकर ज़ोर से झटके खाने लगा । नीलम ने शर्म से अपना सर नीचे किये हुए थी। इसीलिए उसे अपनी आँखों के सामने सीधा अपने ससुर का झटके खाता हुआ मुसल लंड नज़र आ रहा था, अपने ससुर के लंड को घूरते हुए नीलम को अपने पूरे शरीर में अजीब सिहरन हो रही थी और उसकी चूत से उत्तेजना के मारे ज्यादा पानी निकल रहा था ।

महेश ने अब नीचे झुककर अपनी बहु के पेटिकोट को भी उसके जिस्म से अलग कर दिया और उसकी छोटी सी काली पेंटी को गौर से देखने लगा जो उसके चूत के पानी से भीगी हुइ थी । महेश ने कुछ देर तक अपनी बहु की पेंटी को गौर से देखने के बाद उसे अपने दोनों हाथों से पकडकर नीलम के चूतडों से नीचे सरका दिया।।

"ओहहहहह बेटी क्या गज़ब चूत है" पेंटी के हटते ही अपनी बहु की गुलाबी चूत को देखकर महेश के मुँह से निकल गया ।

"पिता जी" नीलम ने शर्म से सिर्फ इतना कहा।

"सॉरी बेटी तुम्हारा जिस्म का हर हिस्सा इतना सूंदर है की मेरा मुँह तुम्हारी तारीफ किये बगैर न रह सका" महेश ने पेंटी को अपनी बहु की टांगों से अलग करते हुए कहा । नीलम की हालत बुहत खराब हो चुकी थी। वह खुद हैंरान थी की आज वह इतना गरम कैसे हो गई है और उसकी चूत से इतना पानी कैसे निकल रहा है ।

"बेटी समीर आने वाला ही होगा हमें जल्दी से सोना होगा" महेश ने सीधा होते हुए कहा।

"जी पिता जी" नीलम ने सिर्फ इतना कहा और धीरे धीरे चलते हुए बेड पर जा लेटी । महेश भी बेड पर चढकर अपनी बहु के साथ जा लेटा। उसका लंड बुहत ज़ोर के झटके खा रहा था।
 
"बेटी अब तो हमने एक दुसरे को नंगा देख ही लिया है तो शर्म कैसी । लेकिन हमें समीर को जलाने के लिए थोडा और आगे बढ़ना होगा" महेश ने अपनी बहु की तरफ देखते हुए कहा ।

"जी पिता जी जैसे आप को ठीक लगे मैं तैयार हू" नीलम ने शर्म के मारे अपनी नज़रें झुकाते हुए कहा यह बात कहते हुए नीलम की साँसें बुहत ज़ोर से चल रही थी।

"बेटी मुझे गलत मत समझना मगर जब तक समीर न आ जाये हमें एक दुसरे की बाहों में बाहें डालकर सोना होगा" महेश ने अपनी बहु की इजाज़त पाते ही अपने एक बाज़ू को नीलम के सर के नीचे डालकर उसे अपनी तरफ सरकाते हुए कहा ।

"ठीक है पिता जी" नीलम ने सिर्फ इतना कहा । महेश ने अपनी बहु की बात सुनकर उसको कमर से पकडकर अपनी तरफ करते हुए अपनी बाहों में भर लिया।

"आआह्ह्ह्ह बेटी अपने बाज़ू को मेरी पीठ पर रख लो ताकी देखने वाले को हम पर कोई शक न हो" अपने नंगे सीने से अपनी बहु की नंगी नरम चुचियों के टकराने से महेश ने ज़ोर से सिसकते हुए कहा ।

नीलम को आज तक किसी गैर मरद ने छुआ तक नहीं था । यहाँ तो वह पूरी नंगी होकर अपने ससुर के साथ लिपटी हुयी थी जिस वजह से उसका पूरा जिस्म तपकर आग बन चूका था । उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था की क्या करे । बस उसे अपने पूरे जिस्म में चींटियाँ रेंगते हुए महसूस हो रही थी । अपने ससुर की बात सुनकर उसने अपने हाथ को महेश की पीठ पर रखकर उसे ज़ोर से अपने सीने से दबा दिया।

"आह्ह्ह्ह बेटी शाबास अब हमें एक दुसरे का चुम्बन लेना होगा" महेश ने अपनी बहु को गरम देखकर उसे बुहत ज़ोर से अपनी बाहों में दबाते हुए कहा । नीलम को भी उस वक्त कुछ समझ में नहीं आ रहा था । उसका पूरा जिस्म टूट रहा था उसका मन बस यह चाह रहा था की उसके जिस्म को कोई बुहत ज़ोर से अपनी बाहों में लेकर दबाए, महेश ने अपनी बहु को खामोश देखकर उसके सर को ऊपर करके अपने होंठो के बिलकुल क़रीब कर दिया ।
 
"बेटी क्या मैं आगे बढ़ सकता हूँ" महेश ने अपने होंठो को अपनी बहु के होंठो से बिलकुल सटाते हुए कहा । महेश और नीलम के मुँह एक दुसरे से इतना क़रीब थे की दोनों को एक दुसरे की साँसें महसूस हो रही थी। नीलम का तो उत्तेजना के मारे बुरा हाल था वह शर्म के मारे मुँह से कुछ बोल नहीं पा रही थी इसीलिए उसने अपने होंठो को थोडा आगे कर दिया जो सीधा जाकर महेश के होंठो से लग गए।

अपनी बहु के गरम होंठो को अपने होंटों पर महसूस करते ही महेश का पूरा बदन कांप उठा और वह अपनी बहु को ज़ोर से अपनी बाहों में दबाते हुए उसके होंठो को चूमने और चाटने लगा । इधर नीलम का भी वही हाल था वह अपने ससुर के होंठो से अपने लबों के मिलते ही वह भी सब कुछ भूलकर अपने ससुर की आग़ोश में खो गई, दोनों ससुर बहु बुहत तेज़ी के साथ एक दुसरे को अपनी बाहों में दबाते हुए एक दुसरे के लबों को चूस रहे थे ।

अपने ससुर से चूमा चाटी करती हुए नीलम का पूरा जिस्म कांप रहा था और उसका हाथ महेश के पूरे पीठ को सहला रहा था । अचानक नीलम ने अपनी एक टाँग को उठा कर अपने ससुर की टाँग पर रख दिया, महेश अपनी बहु की इस हरकत से तिलमिला उठा और वह अपने पैर से अपनी बहु की पूरी टाँग को सहलाते हुए अपने हाथ से नीलम के चूतड को पकडकर उसकी चूत को अपने लंड से सटा दिया ।

नीलम अपनी चूत पर अपने ससुर के लंड को महसूस करते ही गरम होते हुए पागलोँ की तरह अपनी चूत को उसके लंड पर दबाने लगी । महेश भी अपनी बहु को गरम देखकर उसके चूतडों को पकडकर ज़ोर से अपने लंड पर दबाने लगा और अपनी बहु की जीभ को पकडकर अपने मुँह में लेकर चूसने लगा ।

नीलम का जिस्म अचानक अकडने लगा और उसकी चूत ज़ोर के झटके खाते हुए झडने लगी । नीलम ने झडते हुए अपने नाखुनों को ज़ोर से अपने ससुर की पीठ में गडा दिया और खुद अपने मुँह को अपने ससुर के मुँह से अलग करके ज़ोर से हाँफते हुए झरने लगी।

"आआह्ह्ह्ह बेटी" अपनी पीठ पर नीलम के नाख़ून के लगते ही महेश के मुँह से ज़ोर की चीख़ निकल गयी और उसने गुस्से से अपनी बहु की एक चूचि को पकड़कर अपने मुँह में भरकर ज़ोर से काट दिया ।

"उईईईईई माँ बापु जी" नीलम ने दर्द के मारे चीखते हुए कहा तभी कमरे का दरवाज़ा खुला और समीर अंदर दाखिल हो गया । समीर जैसे ही अंदर दाखिल हुआ अपने पिता और अपनी पत्नी को बिलकुल नंगा एक दुसरे की बाहों में देखकर उसका मुँह खुला का खुला रह गया ।
 
अब आगे क्या होगा।जानने के लिए पढ़ते रहिये।

कहानी पसंद करने और उत्साह बढ़ने के लिए सभी को थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अगला अपडेट जल्दी ही।कहानी के बारें में अपनी राय अवश्य दें।thanks
 
नीलम दरवाज़े की आवाज़ को सुनकर अपने ससुर से अलग हो गई और जल्दी से अपनी साड़ी को उठाकर अपने जिस्म को आगे से ढक लिया।

"बापु जी आप भी न दरवाज़ा तो बंद कर लेते आप को पता है जब हम दोनों साथ में होते हैं तो टाइम कितनी जल्दी आगे बढ़ता है" नीलम ने एक क़ातिल मुस्कान के साथ समीर को देखते हुए कहा।

"सॉरी बेटी मैं अगली बार ख़याल रखूँगा" महेश ने भी अपनी धोती उठाकर पहनते हुए कहा और चुप चाप वहां से निकल गया ।

"नीलम तुम बापू के साथ नंगी । नहीं मुझे अब भी अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा है" समीर ने अपने पिता के जाने के बाद बेड पर अपना माथा पकडते हुए कहा।

"डालिंग ज्यादा मत सोचो वरना सर में दर्द हो जायेगा। सच्ची में मुझे तो आज पता चला है की चुदाई का असल मजा क्या होता है और बापू के साथ तो मुझे इतना मजा आया की पूछो मत । मैं तो अपने ससुर की दीवानी हो गई । असली मरद है वह कितना लम्बा और मोटा था उनका ओफ्फ मेरी तो जान ही निकल गयी उनके साथ सोते हुये" नीलम अपने पति को जलाने के लिए जाने क्या क्या बोल गयी उसे खुद हैंरानी हो रही थी की वह अपने पति से इतना गन्दा कैसे बोल गयी ।

"नीलम तुम इतना गिर सकती हो मैं सोच भी नहीं सकता" समीर ने गुस्से से अपनी पत्नी को देखते हुए कहा।

"अभी तो शुरुआत है मेरे पति देव मैं तुम्हें बताऊँगी की जब औरत अपने पे आती है तो वह क्या कर सकती है" नीलम ने मुस्कराते हुए कहा और अपने कपड़ों को लेकर बाथरूम में चलि गयी ।

"ख़ाना डार्लिंग" नीलम कुछ देर में ही बाथरूम से निकलकर किचन से खाना ले आई और उसे अपने पति के सामने रखते हुए कहा।

"क्यों आज तुम नहीं खाओगी?" समीर ने नीलम की तरफ देखते हुए कहा।

"डालिंग मैंने अपनी हर भूख को तुम्हारे बिना ही मिटाने का बंदोबस्त कर लिया है" नीलम ने अपने पति को देखते हुए मुसकुराकर कहा ।

समीर को कुछ समझ में नहीं आ रहा था । कहाँ कल उसकी पत्नी उसके पीछे पीछे भागती थी आज वह उसके साथ खाना खाने के लिए भी तैयार नहीं थी । समीर अपने हाथों को साफ़ करके जैसे तैसे खाना खाया और सोचते हुए बेड पर लेट गया, नीलम खाने के बर्तनों को वापस किचन में छोडकर खुद बाहर टीवी ऑन करके देखने लगी ।
 
नीलम आज बुहत खुश थी मगर वह अपने ऊपर शरमिंदा भी थी की वह अपने ऊपर कण्ट्रोल न रख सकी और अपने ससुर के साथ ही वह इतना आगे बढ़ गयी । नीलम ने दिल ही दिल में सोच लिया था की वह अब अपने ससुर से अपनी गलती की माफ़ी माँगेगी।

"क्या हो रहा है बेटी?" अचानक महेश अपने कमरे से निकलकर अपनी बहु के के पास खड़ा होकर बोले ।

"पिता जी थैंक्स आपकी वजह से आज मुझे अपने पति को सजा देने में मदद मिली" नीलम ने अपने ससुर को देखते ही सोफ़े से उठकर उनके गले से लगते हुए कहा।

"बेटी इस में शुक्रिया की क्या बात है यह तो मेरा फ़र्ज़ था" महेश ने मोके का फ़ायदा उठाते हुए अपनी बहु को जोर से अपनी बाहों में दबाते हुए कहा । नीलम को अपने ससुर से गले लगते ही अहसास हो गया था की उसने गलती कर दी है क्योंकी महेश से गले लगते ही उसका लंड जो उस वक्त भी बिलकुल तना हुआ था वह आगे से नीलम की चूत पर टक्कर मारने लगा ।

"पिता जी हम माफ़ कर दे" नीलम ने जल्दी से अपने ससुर से अलग होते हुए कहा।

"क्या हुआ बेटी अब माफ़ी किस बात के लिए माँग रही हो?" महेश ने हैंरान होते हुए कहा।

"वो पिता जी हमें इतना आगे नहीं बढ़ना चाहिए था" नीलम ने शर्म से अपना मुँह दुसरे तरफ कर रखा था।

"बेटी इस में तुम्हारा कोई दोष नहीं है बस हम दोनों इंसान हैं और गलती तो इनसानों से ही होती है मगर मैं उस बात के लिए तुम से बिलकुल ख़फ़ा नहीं हूँ। हकीकत तो यह है की उस वक्त मैं भी बहक गया था तुम्हारे साथ" महेश ने अपनी बहु के पीछे जाकर खड़ा होते हुए कहा ।

"पिता जी मगर यह सब ठीक नहीं है हमें अपने ऊपर कण्ट्रोल रखना चाहिये" नीलम ने चिंता जताते हुए कहा।

"बेटी तुम हो ही इतनी सूंदर की तुम्हें देखकर कोई भी कण्ट्रोल खो बैठेगा" महेश ने थोडा आगे होते हुए अपनी बहु को पीछे से अपनी बाहों में भर लिया।

"पिता जी यह आप क्या कर रहे है" नीलम ने अपने ससुर के खड़े लंड को अपने चूतडों पर साड़ी के ऊपर से ही महसूस करके ज़ोर से साँसें लेते हुए कहा ।
 
"बहु सच कह रहा हूँ मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ" महेश ने अपनी बाहों को अपनी बहु के जिस्म पर कसते हुए कहा।

"पिता जी छोड़िये मुझे यह सब ठीक नहीं है" नीलम ने अपने आप को अपने ससुर से छुड़ाकर सोफ़े पर जाकर बैठते हुए कहा । नीलम की साँसें बुहत ज़ोर से चल रही थी उसे खुद पर हैंरानी हो रही थी की वह अपने ससुर के क़रीब आते ही इतनी गरम क्यों हो जाती है की उसे अपने ससुर की हर हरकत मजा देने लगती है ।

"बहु तुम बस मेरी एक बात का जवाब दो जब मैं तुम्हें छुता हूँ तो तुम्हें कैसा महसूस होता है?" महेश ने भी अपनी बहु के पास जाकर बैठते हुए कहा।

"पिता जी यह कैसा सवाल है" नीलम ने शरमाते हुए कहा।

"बेटी जो मैं पूछ रहा हूँ उसका जवाब दो" महेश ने अपनी बहु का हाथ पकडते हुए कहा । अपने ससुर का हाथ लगते ही नीलम के पूरे शरीर में एक सिहरन सी दौड़ गयी ।

"बापु जी जब आप मुझे छूते हैं तो मुझे पूरे शरीर में कुछ होने लगता है" नीलम ने शर्म से अपना सर नीचे करते हुए कहा।

"बेटी अखिरी सवाल जब मैं तुम्हारे क़रीब आता हूँ तो तुम्हारा मन मुझसे दूर भागने की सोचता है या और क़रीब आने की?" नीलम की बात सुनकर महेश ने उसके हाथ को सहलाते हुए पुछा। नीलम का पूरा चेहरा शर्म से लाल हो गया था वह कुछ बोले बिना ही अपने सर झुकाये बैठी थी ।

"बताओ न बेटी मैं वादा करता हूँ इसके बाद मैं तुमसे कोई सवाल नहीं करूंगा" महेश ने नीलम की तरफ देखते हुए कहा।

"पिता जी सच तो यह है की आपके क़रीब आने से मेरा अंग अंग झूम उठता है और न चाहते हुए भी मेरा दिल आपके क़रीब आने को कहता है। मगर बाद में मुझे यह सब बुहत गलत महसूस होता है" नीलम ने अपने ससुर का जवाब देते हुए कहा ।
 
"बेटी जब तुम्हें मेरा छूना अच्छा लगता है मेरे क़रीब आने को दिल करता है तो फिर तुम्हें किस चीज़ की चिंता है जब तुम्हारा पति ही तुमसे बेवाफ़ाई कर रहा है तो फिर तुम क्यों घुट घुट कर जी रही हो" महेश ने नीलम को समझाते हुए कहा।

"पिता जी शायद आप सच कह रहे हैं मगर मेरा मन आपके साथ सम्बन्ध बनाने को पाप मानता है" नीलम ने अपने ससुर से कहा।

"ठीक है बेटी मेरा तुम से वादा है जब तक तुम अपने मुँह से नहीं कहोगी मैं तुम्हारे साथ आगे नहीं बढूँगा मगर जितना हम एक दुसरे के क़रीब आ गये हैं उतने का तो मजा ले सकते हैं" महेश ने अखिरी पता फेंकते हुए कहा ।

"मैं कुछ समझी नहीं पिता जी" नीलम ने अपना चेहरा ऊपर करते हुए कहा।

"बेटी मेरे कहने का मक़सद है की हम भले एक दुसरे की सारी हदें पार न करें मगर थोडा बुहत जो हम एक दुसरे से जुड़ चुके हैं उससे तो हमें ख़तम नहीं करना चाहिये" महेश ने अपनी बहु की आँखों में निहारते हुए कहा । नीलम समझ गयी की उसके ससुर क्या कहना चाहते हैं इसीलिए उसने शर्म से अपना कन्धा नीचे कर दिया ।

"बेटी इसका मतलब अब तुम मुझसे कोई रिश्ता बाकी रखना नहीं चाहती" महेश ने नाटक करके वहां से उठते हुए कहा।

"पिता जी आपके सिवा मेरा कौन है यहां" नीलम ने अपने ससुर के हाथ को पकडते हुए कहा।

"ओहहहह बेटी मैं तो समझा था की तुमने मुझसे दूर होने का फैसला कर लिया है" महेश ने ख़ुशी से अपनी बहु के साथ सोफ़े पर बैठते हुए कहा और अपनी बहु का हाथ पकडकर उसे अपने ऊपर गिराते हुए खुद भी सोफ़े पर सीधा होकर लेट गया ।

महेश के ऐसा करने से नीलम सीधा अपने ससुर के ऊपर गिर गयी और उसकी चुचियां सीधे उसके ससुर के सीने में दब गयी । नीलम का मुँह अपने ससुर के मुँह के बिलकुल क़रीब हो गया और दोनों की साँसें एक दुसरे से टकराने लगी, नीलम की साँसें बुहत ज़ोर से चल रही थी। महेश ने थोड़ी देर तक अपनी बहु के गुलाबी होंठो को देखने के बाद अपने होंठ उसके होंठो पर रख दिये ।
 
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