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नीलम भी कुछ देर तक बैठकर आने वाले टाइम के बारे में सोचती रही जाने क्यों अपने ससुर के साथ नंगा सोने का सोचते हुए ही आज नीलम की चूत से पानी बहने लगा । नीलम को अपने आप पर बुहत घिन आ रही थी इसीलिए वह उठकर घर का काम काज करने में मसरुफ हो गयी, ऐसे ही टाइम बीत गया और शाम के ४-३० हो गये ।
नीलम अपने कमरे में बैठे हुए अपने ससुर का इंतज़ार कर रही थी उसका दिल आने वाले टाइम के बारे में सोचते हुए ज़ोर से धड़क रहा था । अचानक कमरे का दरवाज़ा खुला और महेश अंदर दाखिल हो गये।
"बापु आप आ गये मुझे तो बुहत डर लग रहा है शायद मैं यह सब नहीं कर पाऊँगी" नीलम ने अपने ससुर को देखते ही बेड से उठते हुए कहा ।
"क्या कहा बहु कहीं तुम पागल तो नहीं हो गई हो?" महेश ने हैंरानी और गुस्से से नीलम को देखते हुए कहा।
"बापु जी मैं सही कह रही हूँ मुझसे यह सब नहीं होगा मुझे अभी से बुहत शर्म आ रही है" नीलम ने अपने ससुर को साफ़ जवाब देते हुए कहा।
"बहु तुम ज्यादा चिंता क्यों करती हो । मैं हूँ न तुम्हारे साथ" महेश ने बात को अपने हाथ से जाता हुआ देखकर अपनी बहु के पास जाकर उसके हाथ को पकडते हुए कहा ।
"बापु जी जाने क्यों मुझे अपने ऊपर यकीन नहीं हो रहा है क्या मैं यह कर सकती हूँ" नीलम ने अपने ससुर की तरफ देखते हुए कहा।
"बेटी क्या तुम चाहती हो की तेरा पति सारी ज़िंदगी तेरे सामने किसी दूसरी औरत को चोदता रहे और तुम देखती रहो। हिम्मत करो बेटी तुम कर सकती हो मुझे तुम पर यकीन है" महेश ने अपनी बहु को समझाते हुए कहा ।
"पिता जी मैं जानती हूँ की आप मुझे दुखि नहीं देख सकते मगर जाने क्यों मेरा दिल नहीं मान रहा है" नीलम ने अपने ससुर की बात को सुनकर कहा।
"बेटी तुम्हारे लिए जब मैं हर हद पार करने को तैयार हूँ तो फिर तुम क्यों डर रही हो । लो पहले मैं ही शुरुआत कर देता हूँ अपने रिश्ते को तार तार करने की" महेश किसी भी कीमत पर यह मोका गँवाना नहीं चाहता था। इसीलिए उसने अपनी धोती को खोलकर नीचे फ़ेंक दिया ।
नीलम अपने कमरे में बैठे हुए अपने ससुर का इंतज़ार कर रही थी उसका दिल आने वाले टाइम के बारे में सोचते हुए ज़ोर से धड़क रहा था । अचानक कमरे का दरवाज़ा खुला और महेश अंदर दाखिल हो गये।
"बापु आप आ गये मुझे तो बुहत डर लग रहा है शायद मैं यह सब नहीं कर पाऊँगी" नीलम ने अपने ससुर को देखते ही बेड से उठते हुए कहा ।
"क्या कहा बहु कहीं तुम पागल तो नहीं हो गई हो?" महेश ने हैंरानी और गुस्से से नीलम को देखते हुए कहा।
"बापु जी मैं सही कह रही हूँ मुझसे यह सब नहीं होगा मुझे अभी से बुहत शर्म आ रही है" नीलम ने अपने ससुर को साफ़ जवाब देते हुए कहा।
"बहु तुम ज्यादा चिंता क्यों करती हो । मैं हूँ न तुम्हारे साथ" महेश ने बात को अपने हाथ से जाता हुआ देखकर अपनी बहु के पास जाकर उसके हाथ को पकडते हुए कहा ।
"बापु जी जाने क्यों मुझे अपने ऊपर यकीन नहीं हो रहा है क्या मैं यह कर सकती हूँ" नीलम ने अपने ससुर की तरफ देखते हुए कहा।
"बेटी क्या तुम चाहती हो की तेरा पति सारी ज़िंदगी तेरे सामने किसी दूसरी औरत को चोदता रहे और तुम देखती रहो। हिम्मत करो बेटी तुम कर सकती हो मुझे तुम पर यकीन है" महेश ने अपनी बहु को समझाते हुए कहा ।
"पिता जी मैं जानती हूँ की आप मुझे दुखि नहीं देख सकते मगर जाने क्यों मेरा दिल नहीं मान रहा है" नीलम ने अपने ससुर की बात को सुनकर कहा।
"बेटी तुम्हारे लिए जब मैं हर हद पार करने को तैयार हूँ तो फिर तुम क्यों डर रही हो । लो पहले मैं ही शुरुआत कर देता हूँ अपने रिश्ते को तार तार करने की" महेश किसी भी कीमत पर यह मोका गँवाना नहीं चाहता था। इसीलिए उसने अपनी धोती को खोलकर नीचे फ़ेंक दिया ।