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"ओह दीदी" समीर ने ज़ोर से सिसकते हुए कहा अपनी बहन की इस हरकत से उसका पूरा जिस्म काम्पने लगा था । ज्योति अब अपनी जीभ को नीचे ले जाने लगी और वह अपनी जीभ से अपने भाई की दोनों गोटियों को चाटने लगी, समीर का मज़े के मारे बुरा हाल था पहले कभी भी ज्योति ने ऐसा कुछ नहीं किया था। ज्योति ने अचानक अपनी जीभ को अपने भाई की गोटियों से नीचे करते हुए उसकी गांड को चाट लिया,
"आह्ह्ह्हह दीदी ओह्ह्ह्हह्ह" समीर का पूरा बदन ज्योति की इस हरकत से सिहर उठा और उसने अपनी बहन को बालों से पकडते हुए अपने ऊपर लिटा दिया।
समीर ने अपनी बहन के होंठो को चूमते हुए उसकी पेंटी को नीचे सरका दिया और उसे कमर से पकडते हुए अपने लंड के ऊपर बिठा दिया । अपने भाई से छेड छाड करते हुए ज्योति की चूत इतनी गीली हो चुकी थी की उसके लंड पर अपनी चूत के रखते ही समीर का लंड आराम से उसकी चूत में घुसता चला गया।
"आह्ह्ह्ह भैया" अपनी चूत में अपने भाई का लंड घुसते ही ज्योति के मूह से एक सिसकी निकली और वह अपने चूतडों को उछाल उछालकर अपने भाई का लंड अपनी चूत में अंदर बाहर करने लगी।
समीर भी नीचे से अपने चूतडों को उछालते हुए अपनी बहन को पेलने लगा और साथ में उसके होंठो का रस भी पीने लगा । कुछ देर की चुदाई के बाद ही ज्योति का बदन अकडने लगा क्योंकी वह पहले से बुहत ज्यादा गरम थी। वह अपने भाई के होंठो को छोड़ते हुए सीधी हो गई और पूरी तेज़ी के साथ अपने भाई के लंड पर कूदने लगी, समीर ने भी अपनी बहन की चुचियों को जो उसके ऊपर नीचे होने से बुहत तेज़ी के साथ हिल रही थी पकड लिया और अपने हाथों से उन्हें मसलने लगा।
"आह्ह्ह्हह भैया में आई इसशहहहहहहहः" कुछ देर बाद ही ज्योति का पूरा बदन अकाडकर झटके खाने लगा और वह बुहत ज़ोर से सिसकते हुए झडने लगी । ज्योति ने झरते हुए अपनी आँखें बंद कर ली और बुहत ज़ोर से अपने भैया के लंड पर उछलने लगी, इधर समीर भी इतनी देर की छेडखानी से बुहत ज्यादा उत्तेजित हो गया था इसीलिए अपनी बहन के झडते ही उसकी चूत के सिकुड़ने की वजह से वह भी सिसकते हुए अपनी बहन की चूत में अपना वीर्य गिराने लगा।
ज्योति तब तक अपने भाई के लंड पर उछलती रही जब तक उसके लंड से वीर्य की आखरी बूँद तक निकलकर उसकी चूत में गिरी और उसके बाद वह अपने भाई के उपर ही निढाल होकर लेट गई।
"भाइ अब कैसा महसूस हो रहा है" ज्योति कुछ देर तक ज़ोर से हाँफते रहने के बाद अपनी साँसों को ठीक करते हुए अपने भाई से बोली।
"ओहहहह दीदी अगर आप नहीं होती तो मैं तो मर" समीर ने इतना ही कहा था के ज्योति ने अपने होंठो को उसके होंठो पर रख दिया और अपने भाई के साथ खोती चली गई।
"आह्ह्ह्हह दीदी ओह्ह्ह्हह्ह" समीर का पूरा बदन ज्योति की इस हरकत से सिहर उठा और उसने अपनी बहन को बालों से पकडते हुए अपने ऊपर लिटा दिया।
समीर ने अपनी बहन के होंठो को चूमते हुए उसकी पेंटी को नीचे सरका दिया और उसे कमर से पकडते हुए अपने लंड के ऊपर बिठा दिया । अपने भाई से छेड छाड करते हुए ज्योति की चूत इतनी गीली हो चुकी थी की उसके लंड पर अपनी चूत के रखते ही समीर का लंड आराम से उसकी चूत में घुसता चला गया।
"आह्ह्ह्ह भैया" अपनी चूत में अपने भाई का लंड घुसते ही ज्योति के मूह से एक सिसकी निकली और वह अपने चूतडों को उछाल उछालकर अपने भाई का लंड अपनी चूत में अंदर बाहर करने लगी।
समीर भी नीचे से अपने चूतडों को उछालते हुए अपनी बहन को पेलने लगा और साथ में उसके होंठो का रस भी पीने लगा । कुछ देर की चुदाई के बाद ही ज्योति का बदन अकडने लगा क्योंकी वह पहले से बुहत ज्यादा गरम थी। वह अपने भाई के होंठो को छोड़ते हुए सीधी हो गई और पूरी तेज़ी के साथ अपने भाई के लंड पर कूदने लगी, समीर ने भी अपनी बहन की चुचियों को जो उसके ऊपर नीचे होने से बुहत तेज़ी के साथ हिल रही थी पकड लिया और अपने हाथों से उन्हें मसलने लगा।
"आह्ह्ह्हह भैया में आई इसशहहहहहहहः" कुछ देर बाद ही ज्योति का पूरा बदन अकाडकर झटके खाने लगा और वह बुहत ज़ोर से सिसकते हुए झडने लगी । ज्योति ने झरते हुए अपनी आँखें बंद कर ली और बुहत ज़ोर से अपने भैया के लंड पर उछलने लगी, इधर समीर भी इतनी देर की छेडखानी से बुहत ज्यादा उत्तेजित हो गया था इसीलिए अपनी बहन के झडते ही उसकी चूत के सिकुड़ने की वजह से वह भी सिसकते हुए अपनी बहन की चूत में अपना वीर्य गिराने लगा।
ज्योति तब तक अपने भाई के लंड पर उछलती रही जब तक उसके लंड से वीर्य की आखरी बूँद तक निकलकर उसकी चूत में गिरी और उसके बाद वह अपने भाई के उपर ही निढाल होकर लेट गई।
"भाइ अब कैसा महसूस हो रहा है" ज्योति कुछ देर तक ज़ोर से हाँफते रहने के बाद अपनी साँसों को ठीक करते हुए अपने भाई से बोली।
"ओहहहह दीदी अगर आप नहीं होती तो मैं तो मर" समीर ने इतना ही कहा था के ज्योति ने अपने होंठो को उसके होंठो पर रख दिया और अपने भाई के साथ खोती चली गई।