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परिवार(दि फैमिली) complete

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वापस महेश के घर चलते हैं। दोस्तों अब डेली का रूटीन बन चूका था रात के होते ही महेश अपनी बहु के कमरे में घुसकर उसकी शानदार चुदाई करता। समीर भी इसी तरह रोज़ अपनी बहन को चोदता था । आज सुबह समीर के जाने के बाद नीलम घर का काम काज करने में मसरुफ हो गई। महेश ने आज अपनी बेटी को चोदने का पूरा मन बना लिया था क्योंकी पिछले 2 दिनों से उसका लंड भूखा था, नीलम के पीरियड शुरू हो चुके थे इसीलिए वह महेश को अपने क़रीब भी भटकने नहीं दे रही थी।

दोपहर का खाना खाने के बाद सभी अपने कमरों में सोने चले गए। महेश अपने प्लान के मुताबिक सब के कमरों में जाते ही खुद अपने कमरे से निकलकर अपनी बेटी के कमरे में चला गया।

"बापु आपको क्या चाहिए?" ज्योति ने अचानक अपने पिता को कमरे में दाखिल होता देखकर बेड से उठते हुए कहा।

"कुछ नहीं बेटी आज तुमसे बाते करने का मन कर रहा था इसीलिए यहाँ चला आया" महेश ने कमरे का दरवाज़ा अंदर से बंद करते हुए कहा । ज्योति जानती थी की उसके पिता की नज़र उस पर है इसीलिए वह यहाँ आये हैं मगर फिर भी वह कुछ बोल नहीं सकती थी । उसका दिल बुहत ज़ोर से धड़क रहा था, महेश दरवाज़ा बंद करने के बाद सीधा बेड पर जाकर बैठ गया । वह सिर्फ धोती में था।

ज्योति उस वक्त सोने वाली थी इसीलिए उसने नाइटी पहन रखी थी जो बुहत छोटी थी और ज्योति की टांगों को ढ़क नहीं पा रही थी।

"वाह बेटी आज तो बुहत सेक्सी लग रही हो" महेश ने अपनी बेटी को घूरते हुए कहा।

"वो पिता जी मैं सोने वाली थी इसीलिए नाइटी पहन ली" ज्योति ने शर्म से लाल होते हुए अपना कन्धा नीचे करते हुए कहा।

"कोइ बात नहीं मुझे तो तुम ऐसे ही कपड़ों में अच्छी लगती हो" महेश ने हँसते हुए कहा।

"पिता जी मुझे नींद आ रही है" ज्योति ने अपने पिता से जान छुड़ाने के लिए कहा।

"अरे बेटी तो आओ आज मेरी गोद में सर रखकर सो जाओ न । बचपन में भी तो तुम सोती थी" महेश ने ज्योति की बात सुनकर उसे देखते हुए कहा।

"नही पिता जी बस ठीक है" ज्योति ने जल्दी से इन्कार करते हुए कहा।

"अरे वाह बेटी यह क्या बात हुई आओ बडों से ज़िद नहीं करते" महेश ने आगे बढ़कर ज्योति को कलाई से पकडकर अपनी तरफ खींचते हुए कहा । ज्योति के पास अब और कोई रास्ता नहीं बचा था तो वह चुपचाप अपना सर अपने पिता की गोद में रखकर लेट गयी।

"आह्ह्ह्ह बेटी कितनी बड़ी हो गई है तू देख तुम्हारी चुचियां भी तो बुहत बड़ी हो गई हैं" महेश ने अपनी बेटी के गोद में सोते ही उसकी चुचियों को जो ऊपर से थोड़ा बाहर निकल आई थी घूरते हुए कहा।
 
"पिता जी मैं आपकी बेटी हूँ मुझसे गन्दी बाते मत करो" ज्योति ने अपनी पिता को समझाते हुए कहा।

"अरे बेटी क्या करू तुम्हारी जवानी को देखकर मुझे जाने क्या हो जाता है अब देखो यह कैसे खड़ा हो गया है" महेश ने अपनी धोती को आगे से थोड़ा खोलकर अपने मुसल लंड को हाथ में पकडकर अपनी बेटी के आँखों के सामने करते हुए कहा।

"पिता जी कुछ तो शर्म करें में आपकी सगी बेटी हू" ज्योति ने अचानक अपने पिता का नंगा लंड इतना नज़दीक से देखने पर उसकी गोद से उठकर सीधी बैठते हुए कहा। ज्योति की साँसें बुहत ज़ोर से चल रही थी।

"बेटी तुम मेरे साथ कुछ करना नहीं चाहती तो ठीक है में तुमसे ज़बर्दस्ती नहीं करूँगा मगर मेरी एक खवाहिश पूरी कर दो जैसे उस दिन तुमने मेरे लंड को पकडा था वेसे ही एक दफ़ा इसे अपने हाथों से पकड लो" महेश ने अपनी बेटी को देखते हुए कहा।

"नही पिता जी यह ठीक नहीं है" ज्योति ने यों ही बैठते हुए कहा उसकी साँसें अब भी बुहत ज़ोर से चल रही थी जाने क्यों अपने पिता के लंड को देखने के बाद उसे अपने जिस्म में अजीब किस्म की सिहरन हो रही थी।

"बेटी बस एक बार" महेश ने ज्योति के एक हाथ को पकडकर अपने लंड पर रखते हुए कहा।

"आहाहहह पिता जी छोड़िये ना" ज्योति का पूरा जिस्म अपने हाथ को अपने पिता के गरम लंड पर रखने के बाद ज़ोर से कांप उठा और उत्तेजना के मारे उसकी चूत से पानी टपकने लगा मगर फिर भी उसने नखरा करते हुए अपने पिता से कहा । महेश ने ज्योति के हाथ को अपने हाथ से पकडकर अपने लंड पर आगे पीछे करना शुरू कर दिया। कुछ देर में ही ज्योति का हाथ अपने आप उसके पिता के लंड पर आगे पीछे होने लगा।

"आह्ह्ह्ह बेटी कितना नरम हाथ है तुम्हारा तुम मेरी गोद में लेटकर इसे सहलाओ ना" महेश ने अपने हाथ को अपनी बेटी के हाथ से हटाकर उसे कमर से पकडकर अपनी गोद पर लिटा दिया।

ज्योति का उत्तेजना के मारे बुरा हाल था क्योकी अब उसके पिता का लंड ज्योति के मुँह के बिलकुल सामने था और इतने क़रीब से अपने पिता का मुसल लंड सहलाते हुए उसके मुँह में पानी आ रहा था।

"बेटी क्या तुम्हारा दिल इससे प्यार करने को नहीं हो रहा है आज सारी शर्म छोड दो और जी भरकर इससे प्यार करो" महेश ने अपने एक हाथ को अपनी बेटी की नंगी जाँघ पर रखकर उसकी जाँघ को सहलाते हुए कहा।

"आह्ह्ह्ह ओहहहह पिता जी यह आप क्या कर रहे है" अपने पिता के हाथ को अपनी नंगी जाँघ पर महसूस करते ही ज्योति की आँखें नशे से बंद होने लगी और उसने बुहत ज़ोर से सिसकते हुए कहा।
 
"बेटी कितना कोमल जिस्म है तुम्हारा" महेश ने अपनी बेटी को गरम होता देखकर अपने हाथ को उसकी जांघों से ऊपर करते हुए उसकी पेंटी तक ले जाते हुए कह

"ओहहहहह नही पिता जी। प्लीज वहां से हाथ हटाइये ना" ज्योति अपने पिता के हाथ को अपनी चूत के इतना क़रीब महसूस करके ज़ोर से सिसकते हुए बोली। उसकी हालत बुहत ख़राब हो चुकी थी ज्योति की चूत से पानी की नदी बह रही थी और उसका हाथ महेश के लंड पर बुहत ज़ोर से चल रहा था।

"ओहहहहहह बेटी एक बार इसे अपने मूह में ले लो ना" महेश ने अपने दुसरे हाथ से ज्योति के हाथ को पकड़ा जो उसके लंड पर आगे पीछे हो रहा था और उसे ज्योति के होंठो के बिलकुल नज़दीक रख दिया।

"आआह्ह्ह पिता जी" ज्योति अपने पिता के लंड का गुलाबी मोटा सुपाडा अपने होंठो के इतने नज़दीक देखकर सिसक उठी और अगले ही पल वह अपने होंठो से अपने पिता के लंड के मोटे सुपाडे को पागलो की तरह चूमने लगी। वह अपने पिता के लंड के गुलाबी मोटे सुपाडे को ऊपर से नीचे तक अपने होंठो से चूम रही थी।

"ओहहहहह बेटी इसे अपने मुँह में लो ना और जीभ से चाटो" महेश का पूरा जिस्म अपनी बेटी के गुलाबी नरम होंठ अपने लंड पर लगते ही ज़ोर से काम्पने लगा और वह उत्तेजना के मारे ज़ोर से सिसकते हुए बोला उसने अपने हाथ को अपने लंड से हटा दिया । ज्योति अपने पिता की बात सुनकर अपनी जीभ को निकालकर अपने पिता के लंड के गुलाबी मोटे सुपाडे पर फिराने लगी।

"उईईई आहहहह बेटी" महेश का पूरा बदन अपनी बेटी की जीभ अपने लंड के सुपाडे पर महसूस करते ही सिहर उठा और वह अपने एक हाथ से अपनी बेटी के बालों को पकडकर अपनी लंड पर दबाने लगा जबकी दुसरे हाथ को उसकी पेंटी पर रखकर उसकी चूत को पेंटी के ऊपर से ही सहलाने लगा।

ज्योति अपने पिता के हाथ को पेंटी के ऊपर से ही अपनी चूत पर महसूस करके सिहर उठी और वह अपना मुँह खोलकर अपने पिता के लंड के गुलाबी मोटे सुपाडे को अपने मुँह में ले लिया । महेश के लंड का सुपाडा इतना मोटा था की ज्योति के पूरा मुँह खोलने पर भी उसका सुपाडा ही अंदर ले सकी । वह अपने होंठो को अपने पिता के लंड पर आगे पीछे करने लगी। इधर महेश भी ज़ोर से सिसकते हुए अपनी बेटी की चूत को उसकी पेंटी के ऊपर से ही सहलाने लगा । अपनी बेटी की चूत को सहलाते हुए महेश का हाथ गीला हो गया था क्योंकी ज्योति की चूत से उत्तेजना के मारे बुहत पानी निकल रहा था।
 
"बेटी एक काम करो तुम नाइटी को उतारकर मेरे ऊपर उलटी होकर लेट जाओ" महेश ने अपनी बेटी की चूत को उसकी पेंटी के ऊपर से ही सहलाते हुए कहा और खुद सीधा होकर बेड पर लेट गया । ज्योति को उस वक्त हवस का नशा चढ़ चूका था । उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था के वह क्या करे इसीलिए वह अपने पिता की बात को मानते हुए अपने मुँह से उनका लंड निकालकर अपनी नाइटी को उतारते हुए उनके ऊपर उल्टा होकर लेट गयी और अपने पिता के लंड को फिर से अपने हाथ से पकडकर अपने मूह में भर लिया।

"ओहहहहह अह्ह्ह्ह बेटी" महेश अपनी बेटी की नरम चुचियों को अपने पेट पर दबने और उसके भारी गोरे चूतड़ों को देखते हुए सिसका जो अब सिर्फ पेंटी में महेश के मुँह के सामने थे।

ज्योति अपने पिता के लंड को फिर से अपने मुँह में लेकर चूसने लगी । इधर महेश अपने हाथों से अपनी बेटी के चूतडों को दबाते हुए उसकी चूत को पेंटी के ऊपर से ही सहलाने लगा । ज्योति अपने पिता के हाथों को अपनी चूत पर महसूस करते ही उसके लंड को ज़ोर से चूसने लगी। महेश भी अपनी बेटी को गरम देखकर उसकी पेंटी को उसके चूतडों से अलग करने लगा। ज्योति ने भी अपने चूतडों को उठाकर अपने जिस्म से अलग करने में अपने पिता की मदद की, ज्योति की गुलाबी चूत अब बिलकुल नंगी होकर उसके पिता के सामने आ चुकी थी जिसे देखकर महेश अपने होंटों पर जीभ को फिराने लगा।

महेश ने अपने हाथ से अपनी बेटी की चूत को सहलाया और उसके चूतडों से पकडकर सीधा अपने होंठो पर रख दिया। महेश अपनी बेटी की चूत को अपने होंठो से चूमते हुए अपनी जीभ निकालकर चाटने लगा । ज्योति का उत्तेजना के मारे बुरा हाल हो चुका था वह बुहत तेज़ी के साथ अपने पिता के लंड को अपने होंठो से चूस रही थी ।इधर महेश भी अपनी बेटी की नमकीन चूत को बड़े प्यार से चूस और चाट रहा था, अचानक ज्योति का बदन अकडने लगा जिसे देखकर महेश ने अपना मुँह उसकी चूत से हटा दिया।

ज्योति तडपते हुए अपने चूतडों को अपने पिता के मूह पर दबाने लगी मगर महेश ने अपने हाथों से उसके चूतडों को पकडकर अपने मुँह से दूर कर दिया।

"आहहह पिता जी चाटो न क्या हुआ आपको" ज्योति से बर्दाशत नहीं हो रहा था। वह झडने वाली ही थी की उसके पिता ने उसकी चूत से मुँह हटा दिया था। जिस वजह से ज्योति ने अपने पिता के लंड को अपने मुँह से निकालते हुए सिसकते हुए बोली।

"नही बेटी यह सब ठीक नहीं है तुम मेरी बेटी हो" महेश ने अपनी बेटी को अपने ऊपर से उठाते हुए कहा वह जानता था की ज्योति एक बार झडने के बाद उसे कभी भी चोदने नहीं देगी इसीलिए वह नाटक करने लगा।
 
"पिता जी अचानक आपको क्या हुआ आप ही तो मुझे पाना चाहते थे" ज्योति ने अपने पिता को हैंरानी से देखते हुए कहा।

"हाँ मगर मैं तुम्हें पूरी तरह से हासील करना चाहता हूँ" महेश ने सीधी बात करते हुए कहा।

"तो आइये न मैं तैयार हूँ आप मेरे जिस्म से खेलिये ना" ज्योति ने तडपते हुए कहा।

"नही मैं तुम्हारे जिस्म से सिर्फ खेलना नहीं तुम्हें चोदना भी चाहता हूँ" महेष ने ज्योति को देखते हुए कहा।

"पिता जी" ज्योति ने शरमाकर अपनी नज़रों को झुकाते हुए कहा।

"बताओ अगर तुम तैयार हो तो ठीक है वरना मैं जा रहा हू" महेश ने अपनी बेटी को ब्लैकमेल करते हुए कहा।

"नही पिता जी मैं तैयार हू" ज्योति ने चिल्लाते हुए कहा।

"ओहहहहह बेटी तुम कितनी अच्छी हो मुझे अपने कानों पर यकीन नहीं आ रहा है" महेश ने अपनी बेटी के ऊपर चढते हुए कहा और ज्योति के होंठो को बड़े प्यार से चाटने लगा।

ज्योति भी अपने पिता के चुम्बनों का जवाब देने लगी और दोनों बाप बेटी एक दुसरे के होंठो और जीभ से खेलने लगे । महेश ने कुछ देर तक अपनी बेटी के होंठो और जीभ को चाटने के बाद नीचे होते हुए उसकी ब्रा को उसकी चुचियों से अलग किया और बारी बारी अपनी बेटी की दोनों चुचियों को चूसने और चाटने लगा। अपने पिता से अपनी चुचियों को चुसवाते हुए ज्योति के मुँह से भी ज़ोर की सिस्कियाँ निकलने लगी और वह अपने पिता के बालों को सहलाते हुए अपनी चुचियों को चुसवाने लगी, महेश भी अपनी बेटी की चुचियों से खूब खेलने के बाद नीचे होते हुए उसकी टांगों के बीच आ गया और अपनी बेटी की टांगों को उठाकर घुटनों तक मोड़ दिया । ऐसा करने से ज्योति की चूत बिलकुल खुलकर महेश की आँखों से सामने आ गयी और वह अपने फनफनाते हुए लंड को पकडकर अपनी बेटी की चूत पर घीसने लगा।

"आह्ह्ह्ह पिता जी" ज्योति अपने पिता के मोटे लम्बे लंड को अपनी चूत पर घिसता महसूस करके अपने चूतड़ो को उछालते हुए ज़ोर से सिसकने लगी और उसकी चूत से उत्तेजना के मारे पानी टपकने लगा, महेश ने अपने लंड को अपनी बेटी की चूत से निकलते हुए पानी से गीला किया और उसे पकडकर अपनी बेटी की चूत के छेद पर रख दिया।
 
कहानी पसंद करने और उत्साह बढ़ने के लिए सभी को थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अगला अपडेट जल्दी ही।कहानी के बारें में अपनी राय अवश्य दें।thanks
 
आह्ह्ह्ह पिता जी डालिये ना" ज्योति ने अपने पिता के लंड को अपनी चूत के छेद पर महसूस करके सिसकते हुए कहा।

"क्या डालों बेटी?" महेश ने अपनी बेटी की बात सुनकर अपने लंड के मोटे सुपाडे को उसकी छूट के छेद पर घिसते हुए कहा।

"पिता जी अपना वह डाल दो ना" ज्योति ने फिर से तडपते हुए कहा।

"वो क्या बेटी मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है" महेश ने फिर से अपनी बेटी की चूत पर अपना लंड घिसते हुए कहा।

"उईई आह्ह्ह्ह पिता जी अपना लंड डाल दो ना अपनी बेटी की चूत में" ज्योति ने इस बार अपने चूतडों को उछालकर ज़ोर से सिसककर बोली।

"ओहहह बेटी तुम अपने पिता के लंड से चुदना चाहती हो तो कहो पिता जी अपना मोटा और लम्बा लंड मेरी चूत में घुसेडो और मेरी चूत को जमकर चोदो।

"आजहहह पिता जी आप क्यों मुझसे गन्दी बातें बुलवा रहे हो?" ज्योति ने फिर से सिसककर कहा।

"बेटी जितना तुम खुलकर गन्दी बाते करोगी तुम्हें चुदवाने में उतना ही मजा आयेगा" महेश ने अपनी बेटी को समझाते हुए कहा।

"ओहहहह पिता जी डाल दो अपना मोटा मुसल लंड मेरी चूत में और खूब जमकर मेरी चूत का कचूमर बनाओ अब बर्दाशत नहीं होता" ज्योति ने इस बार पूरी बेशरमी से अपने पिता को देखकर सिसकते हुए कहा।

"आआह्ह्ह्ह लो अपने पिता के मोटे लंड को अपनी चूत में महसूस करो" महेश ने एक ज़ोर का धक्का मारकर अपने लंड को आधे से ज्यादा अपनी बेटी की चूत में घुसा दिया।

"उईई माँ बुहत मोटा है आपका पिताजी आह दर्द हो रहा है" एक ही धक्के में अपने पिता का आधा लंड अपनी चूत में घुसते ही ज्योति ने ज़ोर से चिल्लाते हुए कहा।

"आहहह बेटी कितनी गरम चूत है तुम्हारी बस थोड़ा दर्द ही होगा फिर तो मज़े ही मज़े होंगे" महेश ने अपने लंड को बाहर खींचकर फिर से अंदर ड़ालते हुए कहा।

"ओहहहह पिता जी ऐसे ही बुहत मजा आ रहा है" ज्योति ने अपने पिता के मोटे लम्बे लंड को अपनी चूत में अंदर बाहर होता महसूस करके ज़ोर से सिसककर अपने चूतडों को उछालते हुए कहा । अब ज्योति को दर्द से ज्यादा मजा आ रहा था । महेश भी अपनी बेटी को गरम होता देखकर अपने लंड को ज़ोर से ज्योति की चूत में अंदर बाहर करने लगा और ज्योति भी अपने चूतड उछाल उछालकर अपने पिता से चुदवाने लगी।

"आजहहह पिता जी बुहत टाइट और मोटा है आपका आअह्ह्ह मैं झडने वाली हूँ ज़ोर से चोदो फाड़ दो मेरी चूत को" ज्योति ने अचानक अपने पिता से ज़ोर से चिल्लाते हुए कहा । महेश को भी इसी मोके की तलाश थी वह अपनी बेटी को तूफ़ानी रफ़्तार से चोदते हुए उसकी चूत में ज़ोर के धक्के मारने लगा।
 
"ओहहहह पिता जी उईईई आह्ह मैं गई" ज्योति का जिस्म अचानक अकडने लगा और वह ज़ोर से चिल्लाते हुए अपनी आँखें बंद करके झडने लगी । महेश ने ज्योति को झडता देखकर उसकी चूत में ज़ोरदार धक्के मारते हुए अपने लंड को जड़ तक उसकी चूत में घुसा दिया। ज्योति की चूत से पानी निकल रहा था जिस वजह से उसे ज्यादा तकलीफ न हुयी जब तक ज्योति झडती रही महेश उसकी चूत में वैसे ही धक्के मारते रहा।

"आहहह पिता जी आज मुझे झडते हुए जो मजा आया उतना पहले कभी नहीं आया था। मुझे ऐसे महसूस हो रहा था जैसे मैं जन्नत की सैर कर रही हूँ" ज्योति ने पूरी तरह झडने के बाद अपनी आँखें खोलकर अपने पिता को देखते हुए ज़ोर से हाँफते हुए कहा।

"बेटी अभी तो तुम मेरे आधा लंड से चूदी हो अब मैं तुम्हें अपने पूरे लंड का मजा दूंगा" महेश ने अपनी बेटी के ऊपर झुकते हुए कहा और अपनी बेटी की चुचियों को अपने हाथों से सहलाते हुए उसके होंठो को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा । ज्योति भी अपने पिता की हरक़तों से फिर से गरम होते हुए उसका साथ देने लगी उसने अपनी जीभ को अपने पिता के मुँह में डाल दिया और अपनी जीभ को अपने पिता के होंठो से चुसवाते हुए अपने चूतडों को भी उछालने लगी, महेश भी अपनी बेटी के चूतडों को हिलता देखकर अपने लंड को उसकी चूत में आगे पीछे करना शुरू कर दिया। वह अपने लंड को ज्योति की चूत में अंदर बाहर करते हुए उसकी जीभ को भी चूस रहा था। ज्योति का उस वक्त मज़े के मारे बुरा हाल था वह मज़े से हवा में उड़ रही थी।

"बेटी अब बताओ कैसा महसूस हो रहा है तुझे?" महेश ने अपनी बेटी की जीभ को अपने मूह से निकालकर सीधा होकर अपनी बेटी की चूत में ज़ोर के धक्के मारते हुए कहा।

"यआह्ह्ह्ह पिता जी बुहत मजा आ रहा है आपका लंड मुझे अपने पेट तक घुसता महसूस हो रहा है" ज्योति ने अपने पिता की बात का जवाब सिसकते हुए दिया।

"ओहहहह बेटी मैं तो कब से तुझे मजा देने के लिए तैयार था मगर तुम ही नखरे कर रही थी" महेश अपने लंड को पूरा बाहर खींचकर एक ज़ोरदार धक्के के साथ उसे फिर अपनी बेटी की चूत में जड़ तक घुसाते हुए कहा।

"उईई पिता जी आपके लंड ने तो मेरी चूत को पूरी तरह फ़ैला रखा है" ज्योति अपने चूतडों को उछालते हुए अपने पिता के लंड को अपनी चूत में जड़ तक अंदर घुसवाते हुए बोली।
 
"हाँ बेटी मेरा लंड बुहत मोटा है और इसी वजह से तुम्हें इतना मजा आ रहा है क्योंकी लंड जितना ज्यादा लम्बा और मोटा होता है वह औरत की चूत को उतना ही ज्यादा मजा देता है" महेश ने अब अपने लंड को पूरी तेज़ी के साथ अपनी बेटी की चूत में अंदर बाहर करते हुए कहा।

"ओहहहह पिता जी ऐसे ही आअह्ह्ह बुहत मजा आ रहा है" ज्योति अपने पिता के लंड को तेज़ी के साथ अपनी चूत में अंदर बाहर होता महसूस करके ज़ोर से सिसकते हुए कहने लगी । महेश अपने लंड को इतने तेज़ी के साथ अपनी बेटी की चूत में अंदर बाहर कर रहा था की उसके धक्कों के साथ पूरा कमरा फच फच की आवाज़ से गूँज रहा था।

"आह्ह्ह्ह पिता जी मैं झडने वाली हू" अचानक एक बार फिर ज्योति का पूरा जिस्म अकडने लगा और वह ज़ोर से सिसकते हुए बोली।

"ओहहहह बेटी बस मैं भी आने वाला हू" महेश अपनी बेटी की बात सुनकर ज़ोर से चिलाते हुए बोला और वह अपनी बेटी की दोनों टांगों को अपने हाथों से पकडकर उसकी चूत में बुहत ज़ोर के धक्के मारने लगा।

"उईई आह्ह्ह पिता जी ओह्ह्ह्ह" ज्योति का पूरा जिस्म अचानक काम्पने लगा और वह बुहत ज़ोर से सिसकते हुए अपनी आँखें बंद करके झडने लगी।

"आह्ह्ह्ह बेटी मैं भी आया" महेश भी अपनी बेटी के झडने की वजह से उसकी चूत के सिकुड़ने से अपने आप को रोक न सका और वह अपने लंड को अपनी बेटी की चूत में जड़ तक घुसाकर झडने लगा।

"आहहह पिता जी" ज्योति अपने पिता के गरम वीर्य को अपनी चूत की गहराइयों में महसूस करके ज़ोर से सिसकते हुए अपने पिता से लिपट गयी और मज़े से सिसकते हुए अपने पिता के गरम वीर्य को अपनी चूत में गिरता हुआ महसूस करने लगी।

महेश पूरी तरह से झडने के बाद अपनी बेटी के ऊपर ही ढेर हो गया। उसका लंड अभी तक ज्योति की चूत में ही पड़ा हुआ था जो अब ढीला पड़ चूका था।

"बेटी देखा तुम्हें मुझसे से चुद्वाते हुए कितना मजा आया अब हर रोज़ मैं तुम्हें ऐसे ही मजा दूंगा" ज्योति ने जैसे ही कुछ देर तक हाँफने के बाद अपनी आँखें खोली महेश ने उसे देखते हुए कहा।

"पिता जी" ज्योति ने भी प्यार से अपने पिता को एक चुम्बन दिया और अपने ऊपर से हटाने लगी । महेश अपनी बेटी के ऊपर से हट गया। उसका ढीला लंड जैसे ही ज्योति की चूत से निकला ढेर सारा वीर्य ज्योति की चूत से नीचे गिरने लगा, अपने पिता के मोटे और लम्बे लंड से चुदवाने की वजह से ज्योति की चूत का छेद उस वक्त बुरी तरह से खुला हुआ था और ज्योति की पूरी चूत सूजकर लाल हो चुकी थी।
 
ज्योति बेड से उठकर बाथरूम में चलि गयी और थोड़ी देर बाद वह जैसे ही वापस आई महेश ने उसे फिर से अपनी बाहों में दबोच लिया।

"पिता जी छोड़िये न अब" ज्योति ने शरमाते हुए अपने पिता से छूटने की कोशिश करते हुए कहा।

"क्या करुं बेटी तुम्हारे जिस्म को देखकर यह कम्बख्त फिर से खड़ा हो गया है" महेश ने ज्योति का हाथ अपने लंड पर रखते हुए कहा जो फिर से खड़ा होने लगा था।

"नही पिता जी मैं दूसरी बार यह मुसल नहीं झेल पाऊँगी" ज्योति ने अपने हाथ को महेश के लंड से हटाते हुए कहा।

"क्यों बेटी क्या हुआ?" महेश ने हैंरान होते हुए कहा।

"वो पिता जी एक बार में ही मेरी चूत की हालत ख़राब हो चुकी है इसीलिए कह रही हू" ज्योति ने झिझकते हुए कहा।

"अरे बेटी क्या कह रही हो ज़रा दिखाओ अपनी चूत" महेश ने अपनी बेटी की टांगों को फ़ैलाते हुए कहा।

"अरे नहीं पिता जी छोड़िये ना" ज्योति ने शर्म से अपनी टांगों को सिकोडते हुए कहा।

"बेटी ज़िद छोड़ो ज़रा देखने दो कहीं ज़ख़्म तो नहीं हो गया है" महेश ने अपनी बेटी की टांगों को फिर से फ़ैलाते हुए कहा । इस बार ज्योति ने भी अपनी टांगों को फिरसे नहीं सिकोड़े और महेश अपनी बेटी की फूली हुई चूत को गौर से देखते हुए उसे अपने हाथों से सहलाने लगा।

"बेटी तुम्हारी चूत की हालत तो सच में ख़राब हो चुकी है लगता है मुझे ही कुछ करना होगा" महेश ने अपने मुँह को अपनी बेटी की चूत की तरफ ले जाते हुए कहा।

"आहहह कितनी अच्छी गंध आ रही है" महेश ने अपने नाक को ठीक अपनी बेटी की चूत के क़रीब करते हुए कहा।

"आहहह पिता जी आप यह क्या कर रहे हैं" ज्योति भी अपने पिता के मुँह से निकलती हुयी साँसों को अपनी चूत पर महसूस करके सिसकते हुए कहने लगी।

"कुछ नहीं बेटी मैं तुम्हारी चूत को अपनी जीभ से चाट कर साफ़ कर देता हूँ ताकी अगर कोई ज़ख़्म वगैरह हो तो वह ज्यादा न बढे" महेश ने यह कहते हुए अपनी जीभ को निकालकर अपनी बेटी की चूत पर रख दिया ।और उसे अपनी बेटी की पूरी चूत पर फिराने लगा।

ज्योति भी अपने पिता की जीभ अपनी चूत पर लगते ही फिर से गरम हो गई और वह अपने हाथों से महेश के बालों को पकडकर अपनी चूत पर दबाने लगी । महेश ने कुछ देर तक वैसे ही अपनी बेटी की चूत को चाटने के बाद उसे उल्टा कुतिया की तरह कर दिया और खुद उसके पीछे आकर फिर से उसकी चूत को चाटने लगा। महेश अब अपनी बेटी की चूत को चाटते हुए अपनी जीभ को उसकी गांड के भूरे छेद तक ले जाकर चाट रहा था । जिस वजह से ज्योति के मूह से कामुक सिसकियाँ निकल रही थी । महेश ने कुछ देर तक ऐसा करने के बाद अपने लंड को फिर से अपनी बेटी की चूत में घुसा दिया और उसे चूतडों से पकडकर ज़ोर के धक्के मारने लगा, ज्योति भी पीछे से अपनी चूत में इतना बड़ा लंड घूसने से ज़ोर चिल्ला उठी मगर महेश बिना रुके उसे चोदता रहा। कुछ ही समय बाद ज्योति का दर्द ख़तम हो गया और वह भी मज़े से अपने चूतडों को पीछे की तरफ धकेलते हुए अपने पिता के लंड को अपनी चूत की गहराईयों में महसूस करने लगी।

ज्योति और उसके पिता के बीच का यह खेल 30 मिनट तक चला जिसमें ज्योति फिर से दो दफ़ा झडी। अब ज्योति की हालत बुहत ख़राब हो चुकी थी। वह ठीक तरीके से चल भी नहीं पा रही थी और उसकी चूत तो सूजकर डबल रोटी की तरह मोटी हो चुकी थी । महेश वहां से निकलकर चला गया और ज्योति अपने पिता के जाने के बाद दरवाज़ा अंदर से बंद करके अपनी चूत को देखने लगी, अपनी चूत को देखते ही ज्योति के मूह से हंसी निकल गयी क्योंकी उसकी चूत उस वक्त बिलकुल सूजकर लाल हो चुकी थी और उसकी चूत का छेद बिलकुल खुला का खुला रह गया था । ज्योति भी कुछ देर तक अपनी चूत को देखने के बाद बाथरूम में घुस गयी और फ्रेश होकर वापस बेड पर आकर लेट गई।
 
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