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परिवार हो तो ऐसा

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परिवार हो तो ऐसा - पार्ट--12

गतान्क से आगे........

"ये तो बहोत ही अछी बात है.. सपाट चूत से चुदवाने मे बहोत मज़ा आता है. हाँ तुम्हारी झांते सॉफ करते करते अगर में कुछ शैतानी करूँ तो बुरा मत मानना" प्रीति ने हंसते हुए कहा. "लेकिन में सोच रही हूँ कि तुम ऐसी क्या शैतानी कर सकती हो" स्वीटी ने अपनी चचेरी बेहन से पूछा "शायद कुछ इस तरह की" प्रीति ने अपनी स्कर्ट उपर उठा दी और अपनी नंगी चूत अपनी बेहन को दीखाने लगी "शुरुआत बुरी नही है" कहकर स्वीटी अपना हाथ बढ़ा प्रीति की

नंगी चूत पर फिराने लगी..

प्रीति हंस रही थी और स्वीटी ने उसके चूतदों को पकड़ अपने नज़दीक खींच लिया... उसकी जीब उसकी पंखुड़ियों तक पहुचि तो वो अपनी जीब को किसी तितली की पंख की तरह फड़फड़ने लगी.. स्वीटी अब अपनी जीब उसकी नंगी सपाट चूत पर उपर से नीचे तक चलाने लगी.. प्रीति ने अपनी उंगलियाँ स्वीटी के बालों मे डाल दी.. थोड़ी देर उसके बालों को सहलाने के बाद उसका हाथ नीचे खिसकते हुए पहले उसके कंधों को सहलाते हुए नीचे खिसक कर उसकी चुचियों पर ठहर गये..

फिर प्रीति ने उसके थोड़ा सा धक्का दे पलंग पर गिरा दिया और खुद उस पर लेट गयी.. उसकी चुचियाँ अब स्वीटी की चुचियों से टकरा रही थी. उसने अपनी जीब उसके मुँह मे दे चूसने लगी.. दोनो लड़कियाँ अपने दूसरे को अपने बाहों मे भीचे अपने बदन को दूसरे के बदन से रगड़ने लगी और अपनी जीव से जीब मिला एक दूसरे को चूम रही थी चाट रही थी... चूमते हुए दोनो एक दूसरे के

कपड़े उतारने लगी...

अब दोनो एक दूसरे के नंगे बदन को सहला रही थी.. मसल रही थी.. स्वीटी ने प्रीति की शानदार चुचिया अपने मूह मे कसी और भींचने लगी.. उसके निपल पर चिकोटी काटने लगी.. उन्हे मसल्ने

लगी...प्रीति ने अपना हाथ उसकी टॅंगो के बीच दे दिया और उसकी चूत को सहलाने लगी...

उन्माद मे स्वीटी ने अपनी टाँगे और फैला दी.. और थोड़ा उपर को उठ उसके निपल को अपने मुँह मे लिया और चूसने लगी. कभी वो पूरी चुचि को मुँह मे ले चूस्ति तो कभी उसके निपल को अपने दन्तो से काट लेती..

"ओ स्वीटी हाआँ ऐसे ही काटो ...ओह कितना अछा लग रहा है" प्रीति सिसक उठी.

प्रीति अब अपनी दो उंगलियाँ उसकी चूत के अंदर डाल घुमाने लगी. फिर धीरे धीरे उसे उंगलियों से चोदने लगी.. स्वीटी खुद थोडा नीचे खिसकी और अपनी उंगलिया अपनी चचेरी

बेहन की चूत मे डाल उसे चोदने लगी.. उसने प्रीति के निपल को अपने मुँह से निकाला और उसकी चुचि को मसल्ते हुए बोली, "अब में तुम्हारी चूत को चूसोंगी... और आज चूस चूस कर

तुम्हारा पानी छुड़ा दूँगी"

"हां स्वीटी हां चूसो मेरी चूत को आज जी भर के चूसो बहुत आग लगी है इस चूत मे हाँ चूस" प्रीति उसकी चूत को कुरेदते हुए बड़बड़ा उठी. स्वीटी नीचे खिसकने लगी.. और उसका चेहरा ठीक प्रीति के चूत के नीचे आ गया.. वो बड़े प्यार से उसकी बिना बालों की सपाट चूत को देखने लगी. अपनी उंगलियाँ फिराने लगी...

"हां प्रीति में चाहती हूँ कि तुम मेरी चूत की झान्टे सॉफ कर इसे भी अपनी चूत्कि तरह चिकनी और सुन्दर बना दो.." वो अपनी जीब को उसकी चूत के बाहरी सतह पर फिराते हुए बोली...

स्वीटी उसकी चूत को मुँह मे भर चूसने लगी. और प्रीति अपनी चूत को उसके मुँह पर दबाते हुए अपनी चुचियो से खेल रही थी... स्वीटी ने पहले उसकी चूत को जी भर के चूसा फिर अपनी उंगलियों

से उसे फैलाते हुए अपनी जीब अंदर तक घुसा गोल गोल घुमाने लगी..और अंदर से बहते शहद को चाटने लगी..

प्रीति सीधी हो अपनी चचेरी बेहन की मुँह पर बैठी थी.. वो एक हाथ से उसके बालों को पकड़ अपनी चूत पर दबा रही थी तो दूसरे हाथ से अपनी चुचि को ज़ोर ज़ोर से मसल रही थी.. जोरों से सिस्कार्ते हुए उसकी चूत ने झड़ना शुरू किया...

फिर प्रीति ने स्वीटी से कहा कि अब वो उसकी चूत का रस पीना चाहती है.. लेकिन स्वीटी ने कहा कि वो पहले उसकी झांते सॉफ कर दे फिर उसकी चूत को चूसे.. थोड़ी देर सुसताने के बाद दोनो बाथरूम की ओर बढ़ गयी.... बाथरूम मे पहुँच प्रीति ने पहले उसकी चूत को गरम पानी से अछी

तरह साफ किया फिर उसपर शेविंग जेल लगाने लगी... थोड़ी ही देर मे उसकी चूत शेविंग जेल के झाग से ढक सी गयी...

फिर प्रीति ने शेविंग रेज़र उठाया और धीरे धीरे उसके झाँते सॉफ करने लगी... जब भी रेज़र स्वीटी की चूत की नाज़ुक त्वचा को स्पर्श करता वो चिहुक उठती.. एक अजीब सी सनसनी मच जाती थी

उसके शरीर मे...उसकी चूत गीली होने लगी. और वो सिसकारने लगी... "तुम्हारी हालत में समझ सकती हूँ स्वीटी.. में खुद बाहो गरमा गयी हूँ तुम्हारी चूत की झाँते सॉफ करते करते... सुलग रही है मेरी चूत अंदर से" प्रीति ने आखरी बार उसकी चूत पर रेज़र चलाते हुए कहा..

 


फिर उसने अछी तरह से उसकी चूत को एक बार फिर गरम पानी से धोया और फिर झुक कर अछी तरह देख कर बाकी की बचे बालों को सॉफ कर दिया.. प्रीति ने अब स्वीटी को अपने सामने खड़ा किया और और खुद उसके सामने नीचे घुटनो पर बैठ गयी.. और अब उसकी नई बिना बालों की चूत को देखने लगी... स्वीटी की चूत की पंखुड़िया किसी गुलाब की पंखुड़ियो की तरह चमक रही थी.. महक रही थी... वो अपनी उंगली को हल्के से फिराने लगी... फिर उसकी चूत को खोल उसने अपनी उंगली अंदर घुसा दी...

"स्वीटी तुमने तो अपनी इस प्यारी चूत को आज तक झांतों से ढक रखा था.. कितनी प्यारी और सुन्दर दीख रही है ये आज...मन कर रहा है कि इसे अपने मुँह मे भर खा जाउ" प्रीति ने अपनी उंगली को

अंदर बाहर करते हुए कहा..

तभी दोनो को ख्याल आया कि वो बाथरूम मे थी और रात के वक्त कोई भी आ सकता है.. इसलिए वो दोनो बिना आवाज़ किए वापस स्वीटी के कमरे मे आ गये... कमरे मे आते ही स्वीटी पलंग पर गिर गयी और प्रीति को खींच कर अपनी टाँगो के बीच कर दिया... प्रीति उसका इशारा समझ गयी और अपनी जीब को उसकी चूत पर फिराने लगी.. उसकी चूत को अछी तरह चारों ओर से चाटने के बाद.. उसने जीब अंदर घुसा दी.. फिर जीब को बाहर निकाल उसकी नंगी त्वचा पर चला उसे चिढ़ाने लगी.. उसे उतेज़ित करने लगी..फिर जीब को चूत के अंदर डाल उसे चोदने लगी.. स्वीटी सिसक रही थी..

"ऑश प्रीती ओ मुझे नही पता था कि बिना बालों की चूत चूसवाने मे इतना मज़ा आता है.. अब तो में राज के लंड को अपनी इस सपाट चूत मे लेने के लिए मरी जा रही हूँ" अगले दिन प्रीति की आँख काफ़ी सुबह खुल गयी.. उसने अपना मुँह तकिये मे छिपा फिर सोने की कोशिश की लेकिन उसे नींद नही आई... फिर उसका दिल किया कि क्यों ना वो राज के कमरे मे जा उसे तय्यार करे उसे चोदने के लिए या एक बार फिर स्वीटी की चूत का मज़ा लिया जाए.... लेकिन उसे पता था कि उसके चाचा चाची घर पर ही थे... उन्हे किसी बात का शक़ ना हो जाए इसलिए उसने मन बदल दिया...

तभी उसे ख़याल आया कि किस तरह कल रात उसके चाचा कंप्यूटर बैठ कर अपने लंड से खेल रहे थे.. उसने सोचा कि क्यों ना वो चाचा की स्टडी रूम मे जाकर कंप्यूटर पर देखे कि उसके चाचा क्या देख रहे थे.. वो दबे पावं अपने कमरे से बाहर निकली... स्वीटी ने स्टडी रूम मे आकर कंप्यूटर को ऑन किया और हिस्टरी सेक्षन की मदद से उन पॉर्न तस्वीरों को देखने लगी.. जिन्हे देख

कर उसके चाचा मूठ मार रहे थे.... उसने देखा की सभी तस्वीरें उसकी उम्र की लड़कियों की ही थी.. तस्वीरों को देखते देखते वो उत्तेजित हो गयी और खुद अपनी चूत मे उंगली डाल अंदर बाहर करने

लगी...उसकी समझ मे नही आ रहा था कि आख़िर उसके चाचा को क्या पसंद है. उसने फिर कंप्यूटर को टटोलना शुरू किया...तभी रीसेंट डॉक्युमेंट्स के सेक्षन मे उसकी नज़र एक फाइल पर पड़ी.. जिगयसा वश उसने वो वर्ड फाइल खोली तो देखा कि वो एक कहानी थी जिसे शायद उसके चाचा ने लीखा था.. ये कहानी एक आदमी की थी जो

अपनी भतीजी के पीछे पड़ जाता है.. कहानी का विषय प्रीति को पसंद आया और वो उसे पढ़ने लगी.. कहानी पढ़ते वक्त उसने महसूस किया कि कहानी की लड़की का किरदार ठीक उससे मिलता जुलता था..उसके बदन का विवरण भी ठीक उससे मेल ख़ाता था.. सिर्फ़ कहानी मे लड़की का नाम रानी रखा हुआ था... वो

सोचें लगी की कहीं ये कहानी उसके चाचा ने उसको को तो दिमाग़ मे रख कर नही लीखी...

उसका शक़ यकीन मे बदल गया जब उसने पढ़ा कि कहानी मे लड़की अपने चाचा के साथ हँसी मज़ाक कर उसे चिढ़ाती है.. ठीक उसी की तरह जैसे उसने कल रात खाने के टेबल पर अपने चाचा को चिढ़ाया था.. इस कहानी मे सिर्फ़ इतना फ़र्क था कि मर्द एक वृढ इंसान था और उसकी पत्नी का निधन हो चुका था... और अब वो अकेला ही अपनी दो बेटियों की परवरिश कर रहा था...एक रात अचानक उसकी छ्होटी बेटी उसके कमरे मे आकर उससे चिपक कर सो जाती है.. और सुबह वो देखता है कि उसकी एक टांग बेटी पर चढ़ि हुई थी.. हाथ उसकी छातियों पर टीके हुए थे और उसका खड़ा लंड उसकी जांघों से रगड़

खा रहा था...

कहानी अभी तक सिर्फ़ यहीं तक लीखी हुई थी.. प्रीति सोचने लगी कि काश उसे ये पता चल जाता कि आगे क्या होने वाला है.. वो सोचने लगी कि काश कल वो अपने चचे को पीछे से देखने की जगह स्टडी

मे घूस जाती और उनका लंड चूस देती.. वो सोचने लगी कि क्या चाचा का लंड भी लंबा और मोटा है... तभी उसे एक ख़याल आया उसने उस अधूरी कहानी को अपने एमाइल आईडी पर मैल दिया... और मुस्कुराने लगी.. अब वो इस कहानी को पूरा कर अपने चाचा को वापस ईमेल कर उन्हे चौंका देगी और उन्हे बताएगी कि आगे की कहानी उसके दिल के हिसाब से होनी चाहिए... तभी प्रीति को स्टडी रूम के बाहर से कदमों की आवाज़ सुनाई डी.. उसने झट से कंप्यूटर बंद किया और बाहर हॉल मे आ गयी...

जब सुबह घर के बाकी लोग चले गये और स्वीटी और शमा अकेले थे तो स्वीटी ने अपनी बेहन से पूछा,, "और सुनाओ कैसी गयी कल की रात क्या तुम्हारी चूत ने पानी छोड़ा?" "एम्म्म" उसने जवाब दिया.. "क्या उसके भी लंड ने पानी छोड़ा?" "हां" "कहाँ तुम्हारी चुचियों पर या फिर और कहीं?" स्वीटी ने मुस्कुराते हुए पूछा. "नहीं मुझ पर तो नही हां..." शमा ने अपनी बात अधूरी छ्चोड़

दी... वो स्वीटी को चिढ़ाना चाहती थी..

"तो फिर क्या उसने दीवान को गंदा किया या फिर ज़मीन को?" स्वीटी ने झल्लाते हुए कहा. "अरे पगली मेरा मतलब था कि बहोत सारा मेरे मुँह मे...." "अरे वाह क्या बात है.. तुमने फिर उसका लंड चूसा.. में पहले ही जानती थी कि मेरी बेहन से रहा नही जाएगा... अब तुम्हे उससे चुदवाने की कोशिश करनी चाहिए? सही कह रही हूँ उसके मोटे लंबे लंड से चुदवा कर तुम्हे बहोत मज़ा आएगा" स्वीटी ने अपनी बेहन से कहा. "हां में भी यही सोच रही थी" "हाँ वो तुम्हे चोद कर बहोत खुस होगा" स्वीटी ने कहा..
 


"हाँ मुझे भी ऐसा ही लगा कि उसे खुशी हुई है" कहकर शमा ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी और अपनी बेहन के चेहरे पर आए भावों को देखने लगी... "हे भगवान.. में भी कितनी बड़ी बेवकूफ़ हूँ मुझे पहले ही समझ जाना चाहिए था... अब देखना जब प्रीति को पता चलेगा तो वो भी अपनी भाई की तरह तुम्हारी चूत का स्वाद चखना चाहेगी" स्वीटी ने कहा.

"हां लेकिन मुझे नही लगता कि वो ऐसा कर पाएगी" शमा ने जवाब दिया. "अरे तुझे उसकी जीब का कमाल नही पता... एक बार उससे चूत चूस्वा लेगी तो दोबारा ना नही कर पाएगी." स्वीटी ने कहा, "या फिर लगता है कि मुझे तुम्हे सीखाना पड़ेगा की चूत कैसे चूसी जाती है ?"

"देखो स्वीटी किसी लड़के चुदवाना अलग बात है और किसी लड़की के साथ सेक्स ये में सोच भी नही सकती.. प्लीज़ ज़िद मत करना हाँ भविश्य का में कह नही सकती" शमा ने अपनी छोटी बेहन से कहा. तभी उनके मम्मी पापा घर आ गये और दोनो बहने अपने अपने काम मे लग गयी.राज और प्रीति जब घर पहुँचे तो उनके मम्मी डॅडी घर पर उनका इंतेज़ार कर रहे थे. और दोनो ही खुश नज़र आ रहे थे...

राज और प्रीति घर मे कुछ बँध से गये थे.. मम्मी पापा के घर मे होते हुए उन्हे मन मानी करने के आज़ादी नही मिल पा रही थी... अब वो इंतेज़ार कर रहे थे उस दिन का जब उन्हे एक बार फिर घर मे एकांत मिले... प्रीति सोचने लगी कि कैसे उसने स्वीटी की झांते सॉफ की थी और जब वो दोबारा उससे मिलेगी तो क्या उसकी चूत वैसे ही होगी... और क्या उसकी नई बिना बालों वाली चूत देख पाएगा... उसे चोद पाएगा...

कुछ दीनो बाद नाश्ते की टेबल पर वसुंधरा ने कहा, "मुझे एक हफ्ते के लिए काम से सहर के बाहर जाना है" राज और प्रीति की नज़रे एक दूसरे की ओर गयी...बड़ी मुश्किल से दोनो ने अपनी मुस्कान छुपाई... अब उन्हे किसी तरह अपने पिताजी को रास्ते से अलग करना था फिर वो दोनो खुल कर मज़ा कर सकते थे.. राज ने अपना ईमेल चेक किया तो उसने देखा कि गीली चूत से ईमेल आया था कि कल की रात वो दिन है जब वो दोनो मिलकर चुदाई कर सकते है... उसने प्रीति से कह दिया कि कल की रात वो अपने दोस्त के यहाँ गुज़ारेगा.... प्रीति को राज की बात सुनकर थोड़ी निराशा हुई.. लेकिन वो कुछ कर भी तो नही सकते थे.. उनके पिताजी थे कि घर से बाहर ही नही जा रहे थे.. गीली चूत ने अपने होटेल का नाम पता और रूम नंबर उसे लीख भेजा था.

अगले दिन राज प्रीति से विदा लेकर निकल गया.. और प्रीति अपने कमरे मे आ गयी और उसने अपने चाचा वाली कहानी को पूरा करने की सोच लिया....वो सिर्फ़ लाल रंग का छोटा टॉप और पॅंटी पहने कुर्सी पर बैठ

कहानी को पूरा करने मे लग गयी... वो जैसे जैसे लिखती जा रही थी वो खुद गरमा रही थी...और आख़िर वो कहानी को एक ऐसे मोड़ पे लाई..जहाँ वो छोटी लड़की उत्तेजना और गर्मी से एक छीनाल बन अपने

बाप का लंड चूस्ति है और फिर जहाँ वो बैठ कर कहानी लीखा करता था उसी टेबल पर उसे चोदने देती है.... कहानी लीखते हुए वो अपनी चूत मे उंगली करती रही कि क्या उसे ये कहानी अपने चाचा

को वापस भेजनी चाहिए.. वो क्या सोचेंगे... क्या वो पढ़ कर खुश होंगे या फिर गुस्से से भर जाएँगे... वो थोडा और सोचना चाहती थी इसलिए वो अपने कमरे से निकल किचन से अपने लिए कुछ ड्रिंक लाने के लिए उठी... देव उस समय किचन मे था..जब उसकी बेटी ने किचन मे कदम रखा...देव ने देखा कि उसकी बेटी के खड़े निपल उसकी पतली टी-शर्ट से छलक रहे थे... उसे लगा कि उसे इस तरह अपनी बेटी को नही देखना चाहिए... लेकिन वो अपनी निगाहों को हटा नही पाया.... प्रीति के तो तन बदन मे आग लगी हुई थी.. उसे पता था कि उसके पिताजी तिरछी नज़रों से उसे देख रहे है... और ना जाने क्यो वो अपनी हरकतों से उन्हे चिढ़ाने लगी.. देव के कड़क होते लंड का उभार उससे छिपा ना रहा... उसे पता था कि घर मे वो दोनो अकेले ही है... उसका दिल तो कर रहा था कि वो रात को अचानक अपने बाप के कमरे मे जाकर उनका लंड पकड़ ले और ज़ोर से चूसे.... पर वो ऐसा कर नही सकती थी...

क्रमशः.......
 
PARIVAR HO TO AISA - paart--12

gataank se aage........

"Ye to bahot hi achi baat hai.. sapat choot se chudwane me bahot mazaa aata hai. haan tumhari jhante saaf karte karte agar mein kuch shaitani karun to bura mat manna" Preeti ne hanste hue kaha. "Lekin mein soch rahi hun ki tum aisi kya shaitani kar sakti ho" Sweety ne apni chacheri behan se pucha "Shayad kuch is tarah ki" Preeti ne apni skirt upar utha di aur apni nangi choot apni behan ko deekhane lagi "Shuruat buri nahi hai" kehkar Swwety apna hatha badha Preeti ki

nangi choot par firane lagi..

Preeti hans rahi thi aur Sweety ne uske chootadon ko pakad apne nazdeek khinch liya... uski jeeb uski pankhudiyon tak paunchi to wo apni jeeb ko kisi titli ki pank ki tarah fadfadane lagi.. Sweety ab apn jeeb uski nangi sapat choot par upar se neeche tak chalane lagi.. Preeti ne apni ungliyan Sweety ke balon me daal di.. thodi der uske balon ko sehlane ke baad uska hath neeche khiskate hue pehle uske kandhon ko sehlate hue niche khisak kar uski chuchiyon par thehar gaye..

Phir Preeti ne uske thoda sa dhakka de palang par gira diya aur khus us par let gayi.. uski chuchiyan ab Sweety ki chuchiyon se takra rahi thi. usne apni jeeb uske munh me de choosne lagi.. Dono ladkiyan apne doosre ko apne bahon me bheeche apne bada ko doosre ke badan se ragadne lagi aur apni jeed se jeeb mila ek doosre ko choom rahi thi chaat rahi thi... choomte hue dono ek doosre ke

kapde uttarne lagi...

Ab dono ek doosre ke nange badan ko sehla rahi thi.. msasal rahi thi.. Sweety ne Preeti ki shandar chuchiya apne muth me kasi aur bheenchne lagi.. uske nipple par chikoti katne lagi.. unhe masalne

lagi...Preeti ne apna hath uski tango ke beech de diya aur uski choot ko sehlane lagi...

Unmad me Sweety ne apni tange aur faila de.. aur thoda upar ko uth uske niple ko apne munh me liya aur choosne lagi. kabhi wo puri chcuhi ko munh me le choosti to kabhi uske nipple ko apne danto se kaat leti..

"OHHH SWEETYOHHH HAAAN AISE HI KATO ...OH KITNA ACHA LAG RAHA HAI" Preeti sisak uthi.

Preeti ne ab apni do ungliyan uski choot ke andar dal ghuoomane lagi. fir dheere dheere use ungliyon se chodne lagi.. Sweety khud thoda neeche khiski aur apni ungliya apni chahcheri

behan ki choot me dal use chodne lagi.. usne Preeti ke nipple ko apne munh se nikala aur uski chuchi ko masalte hue boli, "Ab mein tumhari choot ko choosongi... aur aaj choos choos kar

tumhara pani chuda doongi"

"HAAN SWEETY HAAN CHOOSO MERI CHOOT KO AAJ JEE BHAR KE CHOOSO BAHOT AAG LAGI HAI IS CHOOT ME HAAN CHOOS" Preeti uski choot ko kuredte hue badbada uthi. Sweety neeche khisakne lagi.. aur uska chehra theek Preeti ke choot ke neeche aa gaya.. wo bade pyaar se uski bina balon ki sapat choot ko dekhne lagi. apni ungliyan firane lagi...

"Haan Preeti mein chahti hun ki tum meri choot ki jahnte saaf kar ise bhi apni chootki tarah chikni aur sunder bana do.." wo apni jeeb ko uski choot ke bahari satah par firate hue bole...

Sweety uski choot ko munh me bhar choosne lagi. aur Preeti apni choot ko uske munh par dabate hue apni chichon se khel rahi thi... Sweeti ne pehle uski choot ko jee bhar ke choosa fir apni ungliyon

se use failate hue apni jeen andar tak ghusa gol gol ghumane lagi..aur andar se behte shehad ko chatne lagi..

Preeti seedhi ho apni chacheri behan ki munh par baithi thi.. wo ek hath se uske balon ko pakad apni choot par daba rahi thi to dossre hath se apni chuchi ko jor jor se masal rahi thi.. joron se seksakte hue uski choot ne jhadna shuru kiya...

Phir Preeti ne Sweety se kaha ki ab wo uski choot ka ras peena chahti hai.. lekin Sweety ne kaha ki wo pehle uski jhante saaf kar de fir uski choot ko choose.. Thodi der sustane ke baad dono bathrom ki aur badh gayi.... Bathroom me pahunch Preeti ne pehle uski choot ko garam pani se achi

tarah saaf kiya fir uspar shaving gel lagane lagi... thodi hi der me uski choot shaving gel ke jhag se dhak si gayi...

Fir Preeti ne shaving razor uthaya aur dheere dheere uske jahnte saaf karne lagi... jab bhi razor Sweety ki choot ki nazuk twacha ko sparsh karta wo chihuk uthti.. ek ajeeb si sansani mach jati thi

uske sharir me...uski choot geeli hone lagi. aur wo sissakne lagi... "Tumhari halat mein samajh sakti hoon Sweety.. mein khud baho garma gayi hoon tumhari choot ki jahnte saaf karte karte... sulag rahi hai meri choot andar se" Preeti ne akhri bar uski choot par razor chalate hue kaha..

Fir usne achi tarah se uski choot ko ek bar fir garam pani se dhoya aur fir juhk kar achi tarah dekh kar baki ki bache balon ko saaf kar diya.. Preeti ne ab Sweety ko apne samne khada kiya aur aur khud uske samne neeche ghutno par baiht gayi.. aur ab uski nai bina balon ki choot ko dekhne lagi... Sweety ki choot ki pankhudiya kisi gulab ki pankhudiyan ki tarah chamak rahi thi.. mehak rahi thi... wo apni ungli ko halke se firane lagi... fir uski choot ko khol usne apni ungli andar ghusa di...

"Sweety tumne to apni is pyari choot ko aaj tak jhanton se dhak rakha tha.. kitni pyari aur sunder deekh rahi hai ye aaj...man kar raha hai ki ise apne munh me bhar khaa jaun" Preeti ne apni ungli ko

andar bahr karte hue kaha..

Tabhi dono ko khyal aaya ki wo bathroom me thi aur raat ke wakt koi bhi aa sakta hai.. isliye wo dono bina awaaz kiye wapas Sweety ke kamre me aa gaye... Kamre me aate hi Sweety palang par gir gayi aur Preeti ko khinch kar apni tango ke beech kar diya... Preeti uska ishara samajh gayi aur apni jeeb ko uski choot par firane lagi.. uski choot ko achi tarah charon aur se chatne ke baad.. usne jeeb andar ghusa di.. fir jeeb ko bahar nikal uski nangi twacha par chala use chidhane lagi.. use utejit karne lagi..fir jeeb ko choot ke andar dal use chodne lagi.. Sweety sisak rahi thi..

"OHHH PREEETI OHHH MUJHE NAHI PATA THA KI BINA BALON KI CHOOT CHOOSWANE ME ITNA MAZA AATA HAI.. AB TO MEIN RAJ KE LUND KO APNI IS SAPAT CHOOT ME LENE KE LIYE MARI JAA RAHI HOON" Agle din Preeti ki ankh kafi subah khul gayi.. usne apna munh takiye me chipa fir sone ki koshish ki lekin use neend nahi aayi... fir uska di kiya ki kyon na wo Raj ke kamre me jaa use tayyar kare use chodne ke liye ya ek bar fir Sweety ki choot ka maza liya jaye.... lekin use pata tha ki uske chacha chachi ghar par hi the... unhe kisi baat ka shaq na ho jaye isliye usne man badal diya...
 


Tabhi use khayal aaya ki ki tarah kal raat uske chacha computer baith kar apne lund se khel rahe the.. usne soch ki kyon na wo chacha ki study room me jaakar computer par dekhe ki uske chacha kya dekh rahe the.. wo dabe paon apne kamre se bahar nikali... Sweety ne study room me aakar computer ko on kiya aur history section ki madad se un porn tasveeron ko dekhne lagi.. jinhe dekh

kar uske chacha muth mar rahe the.... usne dekha ki sabhi tasveerein uski umra ki ladkiyon ki hi thi.. tasveeron ko dekhte dekhte wo uttejit ho gayi aur khud apni choot me ungli dal andar bahar karne

lagi...uski samajh me nahi aa raha tha ki aakhir uske chacha ko kya pasand hai. usne fir computer ko tatolna shuru kiya...Tabhi recent documents ke section me uski nazar ek file par padi.. jigyasa vash usne wo word file kholi to dekha ki wo ek kahani thi jise shayad uske chacha ne leekhi thi.. ye kahani ek aadmi thi jo

apni bhatiji ke peeche pad jaata hai.. kahani ka vishay Preeti ko pasand aaya aur wo use padhne lagi.. Kahani padhte wakt usne mehsus kiya ki kahani ki ladki ka kirdar theek usse milta julta tha..uske badan ka vivran bhi theek usse mel khata tha.. sirf kahani me ladki ka naam Rani rakha hua tha... wo

sochen lagi ki kahin ye kahani uske chacha ne uski ko to deemag me rakh kar nahi leekhi...

Uska shaq yakeen me badal gaya jab usne padha ki kahani me ladki apne chacha ke sath hansi mazak kar use chidhati hai.. theek usi ki tarah jaise usne kal raat khane ke table par apne chacha ko chidhaya tha.. is kahani me sirf itna fark tha ki mard ek vridh insaan tha aur uski patni ka nidhan ho chuka tha... aur ab wo akela hi apni do betiyon ki parvarish kar raha tha...ek raat achanak uski chhoti beti uske kamre me aakar ussse chipak kar so jaati hai.. aur subah wo dekhta hai ki uski ek tang beti par chadhi hui thi.. hath uski chatiyon par teeke hue the aur uska khada lund uski janghon se ragad

kha raha tha...

Kahani abhi tak sirf yahin tak leekhi hui thi.. Preeti sochne lagi ki kash use ye pata chal jata ki aage kya hone wala hai.. wo sochne lagi ki kaas kal wo apne chache ko peeche se dekhne ki jagah study

me ghoos jat aur unka lund choos deti.. wo sochne lagi ki kya chacha ka lund bhi lamba aur mota hai... tabhi use ek khayal aaya usne us adhuri kahani ko apne email id par mail diya... aur muskurane lagi.. ab wo is kahani ko pura kar apne chacha ko wapas email kar unhe chaunka degi aur unhe batayegi ki aage ki kahani uske dil ke hisab se honi chahiye... Tabhi Preeti ko study room ke bahar se kadmon ki awaaz sunai dee.. usne jhat se computer band kiya aur bahar hall me aa gayi...

Jab subah ghar ke baki log chale gaye aur Sweety aur Shama akele the to Sweety ne apni behan se pucha,, "aur sunao kaisa gayi kal ki raat kya tumhari choot ne pani choda?" "Mmmm" usne jawab diya.. "Kya uske bhi lund ne pani choda?" "Haan" "Kahan tumhari chuchiyon par ya fir aur kahin?" Sweety ne muskurate hue pucha. "Nahin mujh par to nahi haan..." Shama ne apni baat adhuri chhod

di... wo Sweety ko chidhana chahti thi..

"To fir kya usne deewan ko ganda kiya ya fir jameen ko?" Sweety ne jhalalte hue kaha. "Are pagli mear matlab tha ki bahot sara mere munh me...." "Are wah kya baat hai.. tumne fir uska lund choosa.. mein pehle hi janti thi ki meri behan se raha nahi jayega... ab tumhe usse chudwane ki koshish karni chahiye? sahi keh rahi hun uske mote lambe lund se chudwa kar tumhe bahot maza ayega" Sweety ne apni behan se kaha. "Haan mein bhi yahi soch rahi thi" "Haan wo tumhe chod kar bahot khus hoga" Sweety ne kaha..

"Haan mujhe bhi aisa hi laga ki use khushi hui hai" kehkar Shama jor jor se hanse lagi aur apni behan ke chehre par aaye bhavon ko dekhne lagi... "Hey bhagwan.. mein bhi kitni badi bewkoof hoon mujhe pehle hi samajh jana chahiye tha... ab dekhna jab Preeti ko pata chalega to wo bhi apni bhai ki tarah tumhari choot ka swad chakhna chahegi" Sweety ne kaha.

"Haan lekin mujhe nahi lagrta ki wo aisa kar payegi" Shama ne jawab diya. "Are tujhe uski jeeb ka kamal nahi pata... ek bar usse choot chooswa legi to dobara naa nahi kar payegi." Sweety ne kaha, "ya fir lagta hai ki mujhe tumhe seekhana padega ki choot kaise choosi jaati hai ?"

"Dekho Sweety kisi ladke chudwana alag baat hai aur kisi ladki ke sath sex ye mein soch bhi nahi sakti.. please jid mat karna han bhavishya ka mein keh nahi sakti" Shama ne apni choti behan se kaha. Tabhi unke mummy papa ghar aa gaye aur dono behne apne apne kaam me lag gayi.Raj aur Preeti jab ghar pahunche to unke mummy daddy ghar par unka intezar kar rahe the. aur dono hi khush nazar aa rahe the...

Raj aur Preeti ghar me kuch bandh se gaye the.. mummy papa ke ghar me hote hue unhe man mani karne ke azaadi nahi mil paa rahi thi... ab wo intezar kar rahe the us din ka jab unhe ek bar fir ghar me ekant mile... Preeti sochne lagi ki kaise usne Sweety ki jhante saaf ki thi aur jab wo dobara usse milegi to kya uski choot waise hi hogi... aur kya uski nai bina balon wali chootdekh payega... use chod payega...

Kuch dino baad naashte ki table par Vasundhara ne kaha, "mujhe ek hafte ke liye kaam se sehar ke bahar jana hai" Raj aur Preeti ki nazre ek doosre ki aur tuh gayi...badi mushkil se dono ne apni muskhan chupayi... ab unhe kisi tarah apne pitaji ko raaste se alag karna tha fir wo dono khul kar maza kar sakte the.. Raj ne apna email check kiya to usne dekha ki geeli choot se email aaya tha ki kal ki raat wo din hai jab wo dono milkar chudai kar sakte hai... usne Preeti se keh diya ki kal ki raat wo apne dost ke yahan guzarega.... Preeti ko Raj ki baat sunkar thodi nirasha hui.. lekin wo kuch kar bhi to nahi sakte the.. unke pitaji the ki ghar se bahar hi nahi jaa rahe the.. geeli choot ne apne hotel ka naam pata aur room no use leekh bheja tha.

Agle din Raj Preeti se vida lekar nikal gaya.. aur Preeti apne kamre me aa gaya aur usne apne chacha wali kahani ko pura karne ki soch lee....wo sirf lal rang ka chota top aur panty pehne kursi par baith

kahani ko pura karne me lag gayi... wo jaise jaise lekhti jaa rahi thi wo khud garma rahi thi...aur aakhir wo kahani ko ek aise mod pe layi..jahan wo choti ladki uttejna aur garmi se ek chinal ban apne

baap ka lund choosti hai aur fir jahan wo baith kar kahani leekha karta tha usi table par use chodne deti hai.... kahani leekhte hue wo apni choot me ungli karti rahi ki kya use ye kahani apne chacha

ko wapas bhejni chahiye.. wo kya sochenge... kya wo padh kar khush honge ya fir gusse se bhar jayenge... Wo thoda aur sochna chahti thi isliye wo apne kamre se nikal kitchen se apne liye kuch drink lane ke liye uthi... Dev us samay kitchen me tha..jab uski beti ne kitchen me kadam rakha...Dev ne dekha ki uski beti ke khade nipple uski patli t-shirt se chalak rahe the... use laga ki use is tarah apni beti ko nahi dekhna chahiye... lekin wo apni nigahon ko hata nahi paya.... Preeti ke to tan badan me aag lagi hui thi.. use pata tha ki uske pitaji teerchi nazron se use dekh rahe hai... aur na jane ko wo apni harkaton se unhe chidhane lagi.. Dev ke kadak hote lund ka ubhar usse chipa na raha... use pata tha ki ghar me wo dono akele hi hai... uska dil to kar raha tha ki wo raat ko achanak apne baap ke kamre me jaakar unka lund pakad le aur jor se choose.... par wo aisa kar nahi sakti thi...

kramashah.......

 


परिवार हो तो ऐसा - पार्ट--13


गतान्क से आगे........

प्रीति अपने पिता के नज़दीक गयी और उन्हे अपनी बाहों के घेरे मे ले गुड नाइट कहा....इसी बीच उसने अपनी चुचियों का भार उनकी छाती पर डाल दिया... देव तो अपनी बेटी के इस अचानक व्यवहार से घबरा सा गया उसे पता था कि जब प्रीति ने उसे बाहों मे लिया था तो ज़रूर उसका खड़ा लंड उसकी जांघों से टकराया होगा... उसने अपने आप को प्रीति से अलग किया और उसे गुड नाइट कह अपने कमरे मे आ गया. राज ने अपनी गाड़ी होटेल के बाहर रोकी और थोड़ी देर सोचने लगा कि उसे आगे बढ़ कर होटेल के अंदर जाना चाहिए या फिर वापस लौट जाना चाहिए... पर उसने अपना मन पक्का किया और गाड़ी से उत्तर होटेल के अंदर चला गया..

वो कमरे के बाहर पहुँचा तो देखा कि कमरे का दरवाज़ा खुला था.. वो कमरा खोल अंदर आ गया.. कमरे के अंदर पलंग के बीचों बीच एक चादर बँधी हुई थी... इस तरह पलंग दो हिस्सों मे बँट गया था...उसने आवाज़ देकर ये जानना चाहा कि क्या गीली चूत कमरे मे ही है.

"हां में यही हूँ राज और तुम्हारे इंतेज़ार मे मेरी चूत गीली हो रही है" वासू ने भारी आवाज़ बना कहा... उसने जान बुझ कर अपनी आवाज़ बदली हुई थी... जिससे कि राज उसकी आवाज़ को पहचान ना पाए... वासू ने राज को कपड़े उतार नंगा हो जाने को कहा और कहा कि वो अपने लंड को चादर के दूरी और रख दबाया... राज ने वैसे ही किया... तभी दो हाथों ने उसके चादर से लिपटे लंड को अपने हाथों मे पकड़ लिया...

वासू चादर की दूसरी ओर खड़ी अपने ही हाथ का चादर से लिपटा लंड पकड़ मसल्ने लगी.. अपने हाथों से उसकी मोटाई और लंबाई मापने लगी.. जिस लंड को उसने कई बार कंप्यूटर की स्क्रीन पर देखा था आज वही लंड उसके सामने उसके हाथो मे था... कितने सपने देखे थे उसने इस लंड के...वो राज से कह रही थी कि कितना शानदार और मर्दाना लंड था उसका..."तुम्हे पता नही में तुम्हारी सपाट और चिकनी चूत का कितना दीवाना हूँ.. में कितने दीनो से इसे चूसने के लिए मरा जा रहा

हूँ" राज ने जवाब दिया.

"और आज में भी चाहती हूँ कि तुम्हारा ये मोटा लंड मेरी चूत को फाड़ दे" गीली चूत ने उसके लंड को ज़ोर ज़ोर से मसल्ते हुए कहा.. "लेकिन पहले में देखना चाहूँगी कि में इस लंबे लंड को

कितना अपने मुँह मे ले चूस सकती हूँ" राज ने देखा कि उन दोनो के बीच बँधी चादर थोड़ी उठी और उसका लंड दूसरी ओर खो गया.. तभी उसे एक गरम जीब का एहसास अपने लंड पर हुआ... और जैसे की किसी गरम भट्टी ने उसके लंड को जाकड़ लिया हो.. गीली चूत का गरम मुँह उसके लंड को अपने मुँह मे ले चूसने लगा था... उसे विश्वास नही हो रहा था कि कभी ऐसा भी हो सकता है.. आज एक अंजान औरत एक अंजान होटेल के कमरे मे उसका लंड चूस रही थी... और वो उसका चेहरा तक नही देख पा रहा था.. ना ही उसके बदन की झलक ले पा रहा था.. उत्तेजना मे उसका लंड और अकड़ने आगा.. गीली चूत उसके लंड को अपने मुँह मे ले चूस रही थी.. हर बार वो उसके लंड को और ज़्यादा गले तक लेने की कोशिश करने लगी.. राज की सिसकारियाँ बढ़ने लगी...

 


वासू को भी अपने बेटे का लंड चूसने मे बहोत मज़ा आ रहा था.. उसे भी यकीन नही हो रहा था कि मज़ाक मज़ाक मे बात इतनी आगे बढ़ जाएगी.. वो और ज़ोर ज़ोर से अपने बेटे का लंड चूसने लगी. उसे और अपने गले तक लेने लगी... "में तुम्हारी चूत चूसना चाहता हूँ" वासू को अपने बेटे की आवाज़ दूसरी ओर से सुनाई पड़ी.. उसने उससे कहा कि वो चादर के नीचे पलंग पर उसके लिए जगह बनाए...फिर उसने अपनी टाँगे पलंग पर चादर के नीचे से खिसका दी...अब चादर उसके पेट पर ठहर गयी.. उसका कमर के नीचे का हिस्सा अब राज की तरफ था... वासू ने महसूस किया कि दो हाथ उसकी टाँगो को पकड़ फैला रहे है तो उसने अपनी टाँगे पूरी तरह चौड़ी कर दी..... तभी गीली और गरम जीब उसकी चूत पर चलने लगी... उसकी चूत को चाटने लगी.

वासू के बदन मे एक मस्ती की लहर दौड़ गयी. उत्तेजना मे वो अपनी चुचियों को पकड़ मसल्ने लगी.. उसके ख़यालो मे उसके बेटे का चेहरा आने लगा... और राज हक़ीकत से अंजन उसकी चूत को ज़ोर ज़ोर

से चूसने लगा चाटने लगा...वासू सिसकने लगी.. "ओ हां चूसो और ज़ोर से चूसो ऑश हाँ खा जा मेरी चूत को में कब से तड़प रही थी तुम्हारी जीब के स्पर्श को ऑश"

राज और ज़ोर ज़ोर से अपनी जीब उसकी चूत मे चलाने लगा... अपना पूरा मुँह खोल उसकी चूत को मुँह मे ले चूसने लगा... "ऑश ऑश प्लीज़ रुक जाओ वरना मेरी चूत तुम्हारे मुँह मे पानी छोड़ देगी" राज ने अपना मुँह थोड़ी देर के लिए उसकी चूत से हटाया और बोला, "हां आज तुम मुझे तुम्हारा ये अमृत पीला ही दो.. में भी तुम्हारे इस रस का स्वाद चखना चाहता हूँ" कहकर वो वापस उसकी चूत को चूसने लगा... और तभी गीली चूत की चूत ने पानी छोड़ दिया जिसे राज अपनी जीब से चाटने लगा और पीने लगा...

वासू की चूत मे अंगार लग हुई थी.. अब तो उसकी चूत भी चादर के दूसरी तरफ अपने बेटे के लंड के सामने थी. वो अपने बेट्रे के लंड को अपनी चूत मे लेना चाहती थी... "अपने लंड को अब मेरी छूत मे घुसाओ राज.. में तुम्हारे लंड की लंबाई और मोटाई को अपनी चूत मे महसूस करना चाहती हूं" राज तो खुद बेसबरा हुआ जा रहा था.. उसने अपना लंड उसकी चूत के मुँह पर लगाया और घिसने लगा.. फिर धीरे धीर उसे अंदर घुसाने लगा....गीली चूत की चूत प्रीति और स्वीटी की चूत जितनी कसी हुई थी नही थी..लेकिन फिर भी राज को बहोत मज़ा आने लगा... वासू तो जैसे पागल सी हो गयी... उसने कई बड़े नकली लंड और मूली ग़ज़र अपनी चूत मे घुसाए थे.. लेकिन ये सबसे लंबा और मोटा लंड था जो उसकी चूत मे घुसा था... इतने सालों की शादी के बाद आज फिर उसे अपनी चूत मे हल्का दर्द का एहसास हुआ...

"ओह राज कितना मोटा और लंबा लंड है तुम्हारा कितना अछा लग रहा है." उसने कहा.

राज अब अपने लंड को उसकी चूत के अंदर बाहर करने लगा...अपनी कमर को चला वो ज़ोर ज़ोर के धक्के मारने लगा... "ओ हां राज चोदो मुझे और ज़ोर ज़ोर से चोदो आज फाड़ दो मेरी

चूत को श हां भर दो मेरी चूत को अपने रस से" गीली चूत सिसकने लगी...

राज ने देखा कि एक हाथ चादर के नीचे से आया और चूत को मसल्ने लगा.. वो और ज़ोर ज़ोर से उछाल कर धक्के लगाने लगा... तभी उसका लंड अकड़ने लगा.. उसने अपने लंड को उसकी चूत की गहराइयों मे पेलते हुए पानी छोड़ दिया... और साथ ही वासू का बदन भी ज़ोर से कंपा और उसकी चूत ने एक बार फिर पानी छोड़ दिया. वासू ही अपने काँपते और थाराते बदन को लेटे हुए संभालने लगी...राज लुढ़क कर उसके बगल मे हो गया वो देख रहा था कि गीली चूत की चूत से किस तरह दोनो का मिश्रित रस बह रहा था... "सही मे बहोत मज़ा आ गया राज" गीली चूत ने कहा.

राज वैसे ही बैठा सोचता रहा कि पता नही आगे क्या होगा.. लेकिन तभी उसके सामने लेटा वो अंजान शरीर वापस चादर की दूसरी और खिसक गया... तभी उसने देखा कि चादर के दूसरी ओर से वो अपनी दोनो चुचियों के उभार को चादर पर दबा रही थी.. "राज मुझे छुओ मेरे नंगे बदन को चादर के नीचे हाथ डाल मस्लो मेरे बदन को सहलाओ.." गीली चूत ने उससे कहा. राज घुटनो के बल पलंग पर खिस्सक चादर के नज़दीक आया और अपना हाथ चादर के नीचे से डाल उसकी चुचियो को मुट्ठी मे भर लिया.. उसकी चुचिया प्रीति जितनी बड़ी तो नही थी लेकिन फिर भी काफ़ी भारी थी..वो उन्हे मसल्ने लगा.. भींचने लगा.. फिर अपने हाथों को उसके नंगे बदन पर फिराने लगा एक हाथ से चुचि को मसल्ते हुए उसने अपने दूसरे हाथ से पहले उसकी कमर को सहालाया फिर उसकी सपाट पेट को फिर हाथ को नीचे लेजाकार उसकी चूत को मुट्ठी मे भर मसल दिया...

"राज मेरी चुचियों को ज़ोर ज़ोर से मसल्ते हुए अपनी उंगली मेरी चूत मे डाल अंदर बाहर करो" गीली चूत ने अपनी टाँगे थोड़ी फैलाते हुए कहा. राज ने अपनी उंगली उसकी चूत पर फिराते हुए अंदर घुसा दी.. गीली चूत चिहुक पड़ी.. राज अब एक हाथ से उसकी चुचियों को बेरहमी से मसल रहा था और

दूसरे हाथ की दो उंगलियाँ उसकी चूत मे डाल अंदर बाहर कर रहा था... वो उसके निपल को पकड़ खिच देता तो कभी ज़ोर की चिकोटी काट देता.. तभी गीली चूत ने उसके हाथ को पकड़ा और अपनी गंद

पर रख दिया.. राज को विश्वास नही हम की जिस गंद को उसने कंप्यूटर पर देखा था आज वो उसकी गंद मे उंगली घुसाने जा रहा है.. अब राज ने अपनी एक उंगली उसकी चूत मे डाले दूसरी उंगली उसकी गंद के छेद मे घुसा दी... और अंदर बाहर करने लगा. चादर की दूसरी और से आती सिसकियाँ और उखड़ी साँसों की आवाज़ से राज समझ गया कि गीली चूत एक बार फिर झड़ने वाली है.. तभी गीली चूत ने अपनी टाँगों को जाकड़ उसकी उंगली को अपनी चूत मे जाकड़ लिया...और उसकी उंगली उसके रस से भर गयी..वो अपनी उंगली को उसकी चूत मे घूमाता रहा और गीली चूत का बदन हल्के हल्के

काँपने लगा...
 


तभी गीली चूत ने चादर के नीचे से हाथ डाल उसके लंड को पकड़ खींच लिया..राज ने अपना लंड और चादर की दूसरी ओर कर दिया.. गीली चूत एक बार फिर उसके खड़े लंड को मुँह मे ले चूसने

लगी... "तुम बहोत ही अछा लंड चूस्ति हो" राज ने कहा. "सच, लेकिन एक बात सच सच बताना तुमने अपनी बेहन से भी लंड चूस्वाया है ना.. देखो झूठ मत बोलना.." वासू ने उसके लंड को

मुँह से बाहर निकाल कहा और फिर उसके लंड को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी... "हाँ चुस्वाया है" राज ने जवाब दिया. "क्या में तुम्हारी बेहन से भी अछा लंड चूस्ति हूँ?" गीली चूत ने पूछा.

"एम्म इतना बुरा भी नही चूस्ति..बस जब में ये सोचता हूँ कि मेरी बेहन मेरा लंड चूस रही है. इस बात से ज़्यादा उत्तेजित हो जाता हूँ" राज ने जवाब दिया.. वासू अब और ज़ोर ज़ोर से उसके लंड को चूसने लगी और ज़ोर ज़ोर से मसालने लगी.. राज से सहन नही हुआ और उसका लंड वीर्य की पूछकारी

उसके मुँह मे छोड़ने लगा और वो उसके पानी को पीने लगी.... "राज इससे पहले कि हम जुदा हो क्या तुम्हारी और कोई इच्छा है?" गीली चूत ने पूछा... "हां है तो" राज ने जवाब दिया... ज

राज अपनी मा की हक़ीकत से अंजान उसके साथ होटेल के कमरे मे था.. वो अब भी उसे एक अंजान गरम औरत ही समझ रहा था.. उसकी आँखों के सामने वो द्रिस्य आ गया जब गीली चूत ने अपनी गंद मे

उंगली कर उसे दीखया था... "एक काम है अगर तुम मेरे लिए करो तो मुझे खुशी होगी" राज थोडा

हिचकिचाते हुए कहा. "और वो क्या है?" "अगर तुम आज फिर मुझे अपनी गंद मे उंगली घुसा के दिखाओ तो मुझे बहोत अछा लगेगा." राज ने जवाब दिया.

"में समझ सकती हूँ कि जब में अपनी गंद मे उंगली अंदर बाहर करती हूँ तो तुम बहोत उत्तेजित हो जाते होगे.." वासू ने चादर की दूसरी ओर से राज से कहा, "और जहाँ तक में समझ रही हूँ आज तक तुमने कभी किसी की गंद नही मारी है.. है ना?" वासू ने राज से पूछा. "हाँ तुम सही कह रही हो..मुझे आज तक किसी की गंद मारने का मौका नही मिला और जब तुम अपनी गंद को फैला उसमे जब उंगली अंदर बाहर करती हो तो जैसे में पागल हो जाता हूँ..मेरे लंड इतना अकड़ जाता है कि में बता नही सकता" राज ने जवाब दिया. "फिर तो तुम्हारी इच्छा पूरी करते हुए मुझे ज़्यादा खुशी होगी"

राज ने देखा कि पहले गीली चूत के पैर चादर के नीचे नज़र आए फिर वो घूम कर झुक गयी और पीछे होने लगी.. अब उसके चूतड़ चादर के किस तरफ आ गये.. और राज ललचाई नज़रों से उसकी गंद और चूत को देखने लगा... फिर राज को टाँगो के बीच से एक हाथ नज़र आया वो चूत को सहलाने

लगा...फिर दो उंगलियाँ चूत के अंदर बाहर होने लगी.. और फिर थोड़ी देर के लिए हाथ गायब हो गया और वापस आ अब गंद के छेद को कुरेदने लगा.. राज गीली चूत की गंद और चूत देखते हुए अपने लंड को मसल्ने लगा और तनता जा रहा था... फिर उसने देखा की गीली चूत अपनी दो उंगलिया अपनी गंद मे घुसा घूमाने लगी....और थोड़ी देर बाद बोली..

"राज अब तुम अपना लंड मेरी चूत मे घुसा दो." राज ने गीली चूत को कहते हुए सुना राज आगे बढ़ा और उसने अपने लंड को उसकी चूत पर रख दिया.. गीली चूत ने अपनी गंद थोड़ी सी पीछे धकेल उसके लंड को अपनी चूत मे ले लिया... "ऑश भगवान तुम्हारा लंड कितना बड़ा महसूस हो रहा है" गीली छूट सिसक पड़ी.. "ऑश राज चोदो मुझे के बार फिर से भर दो मेरी चूत को अपने लंड से" वासू अपनी कमर को आगे पीछे करते हुए सिसकने लगी.. राज अपने लंड को उसकी चूत के अंदर बाहर होते देखता रहा और साथ ही गीली चूत की उंगली उसकी गंद के अंदर बाहर हो रही थी.. थोड़ी देर अपनी उंगली को गंद के अंदर बाहर कर वासू ने अपनी उंगली बाहर निकाल ली और राज से कहा कि अब वो अपनी उंगली को उसकी गंद के अंदर बाहर करे. राज ने अपनी दो उंगलियाँ अपने लंड के साथ साथ उसकी चूत मे घुसा दी.. जब उसकी उंगलियाँ अछी तरह से गीली हो गयी तो वो उन्हे उसकी गंद के छेद पर फिराने लगा... फिर धीरे से उंगलियों को उसकी गंद के अंदर ठेलने लगा... राज को मज़ा आने लगा.. एक छेद मे उसका लंड अंदर बाहर हो रहा था तो दूसरे छेद मे उसकी उंगलियाँ ....
 


तभी गीली चूत ने अपना एक हाथ को पीछे लाकर राज के लंड को अपने मुट्ठी मे कस लिया.. अब उसका लंड उसकी मुट्ठी से रगड़ खाते हुए उसकी चूत के अंदर बाहर होने लगा... गीली चूत उसके लंड को पकड़ मसल देती....एक उत्तेजना की लहर राज के शरीर मे दौड़ जाती... "राज अब सहन नही होता प्लीज़ अपना लंड मेरी गंद मे घुसा कर आज इसे फाड़ दो... चिथड़े चिथड़े कर दो मेरी गंद के आज" राज गीली चूत के शब्दों को सुन चौंक पड़ा.. उसे उमीद नही थी की पहली ही मुलाकात मे वो उसे अपनी गंद मारने को कहेगी... वैसे भी उसने अभी तक किसी की गंद मे लंड नही पेला था.. इसलिए वो हर नये मज़े का आनंद लेने को तय्यार था... वो समझ गया कि इस

उम्रदराज़ औरत से उसे बहोत कुछ सीखने को मिलेगा...

राज ने अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाला और उसकी गंद के छेद पर रख अपने लंड को घिसने लगा.... "राज थोड़ा धीरे धीरे करना .... इतना मोटा लंड मेने पहले कभी गंद मे नही लिया है..." वासू ने अपने बेटे से कहा... राज ने अपने लंड को धीरे धीरे उसकी गंद के अंदर घुसाना शुरू किया.. एक दर्द की मीठी लहर दौड़ गयी वासू के शरीर मे.... वासू का बदन काँप उठा.. उसे लगा कि जैसे कोई लोहे की कोई सख़्त सलाख उसकी गंद को और चौड़ा कर रही है.. उसने अपनी गंद को

खूब फैलाता हुआ महसूस किया....

क्रमशः.......
 


PARIVAR HO TO AISA - paart--13

gataank se aage........

Preeti apne pita ke nazdeek gayi aur unhe apni bahon ke ghere me le good night kaha....isi beech usne apni chuchiyon ka bhar unki chhati par dal diya... Dev to apni beti ke is achanak vyavhar se ghabra sa gaya use pata tha ki jab Preeti ne use bahon me liya tha to jaroor uska khada lund uski janghon se takraya hoga... usne apne aap ko Preeti se alag kiya aur use good nigh keh apne kamre me aa gaya. Raj ne apni gadi hotel ke bahar roki aur thodi der sochne laga ki use aage badh kar hotel ke andar jana chahiye ya fir wapas laut jana chahiye... par usne apna man pakka kiya aur gadi se uttar hotel ke andar chala gaya..

Wo kamre ke bahar pahuncha to dekha ki kamre ka darwaza khula tha.. wo kamra khol andar aa gaya.. kamre ke andar palang ke beechon beech ek chadar bandhi hui thi... is tarah palang do hisson me bant gaha tha...usne awaaz dekha ye janna chaha ki kya geeli choot kamre me hi hai.

"Haan mein yahi hun Raj aur tumhare intezar me meri choot geeli ho rahi hai" Vasu ne bhari awaaz bana kaha... usne jaan bujh kar apni awaaz badli hui thi... jisse ki Raj uski awaaz ko pehchan na paye... Vasu ne Raj ko kapde uttar nanga ho jane ko kaha aur kaha ki wo apne lund ko chadar ke doorei aur rakh dabaya... Raj ne waise hi kiya... tabhi do hathon ne uske chadar se lipte lund ko apne hathon me pakad liya...

Vasu chadar ki doosri aur khadi apne hi bata ka chadar se lipta lund pakad masalne lagi.. apne hathon se uski motai aur lambai mapne lagi.. jis lund ko usne kai bar computer ki screen par dekha tha aaj wahi lund uske samne uske hahton me tha... kitne sapne dekhe the usne is lund ke...wo Raj se keh rahi thi ki kitna shandar aur mardana lund tha uska..."Tumhe pata nahi mein tumhari sapat aur chikni choot ka kitna deewana hoon.. mein kitne dino se ise choosne ke liye mara jaa raha

hoon" Raj ne jawab diya.

"Aur aaj mein bhi chahti hoon ki tumhara ye mota lund meri choot ko phad de" geeli choot ne uske lund ko jor jor se masalte hue kaha.. "Lekin pehle mein dekhna chahungi ki mein is lambe lund ko

kitna apne munh me le choos sakti hoon" Raj ne dekha ki un dono ke beech bandhi chadar thodi uthi aur uska lund doosri aur kho gaya.. tabhi use ek garam jeeb ka ehsas apne lund par hua... aur jaise ki kisi garam bhatti ne uske lund ko jakad liya ho.. geeli choot ka garam munh uske lund ko apne munh me le choosne laga tha... use vishwas nahi ho raha tha ki kabhi aisa bhi ho sakta hai.. aaj ek anjaan aurat ek anjaan hotel ke kamre me uska lund choos rahi thi... aur wo uska chehra tak nahi dekh paa raha tha.. na hi uske badan ki jhalak le paa raha tha.. uttejna me uska lund aur akadne aga.. geeli choot uske lund ko apne munh me le choos rahi thi.. har bar wo uske lund ko aur jyada gale tak lene ki koshish karne lagi.. Raj ki siskariyan badhne lagi...

 
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