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परिवार हो तो ऐसा - पार्ट--12
गतान्क से आगे........
"ये तो बहोत ही अछी बात है.. सपाट चूत से चुदवाने मे बहोत मज़ा आता है. हाँ तुम्हारी झांते सॉफ करते करते अगर में कुछ शैतानी करूँ तो बुरा मत मानना" प्रीति ने हंसते हुए कहा. "लेकिन में सोच रही हूँ कि तुम ऐसी क्या शैतानी कर सकती हो" स्वीटी ने अपनी चचेरी बेहन से पूछा "शायद कुछ इस तरह की" प्रीति ने अपनी स्कर्ट उपर उठा दी और अपनी नंगी चूत अपनी बेहन को दीखाने लगी "शुरुआत बुरी नही है" कहकर स्वीटी अपना हाथ बढ़ा प्रीति की
नंगी चूत पर फिराने लगी..
प्रीति हंस रही थी और स्वीटी ने उसके चूतदों को पकड़ अपने नज़दीक खींच लिया... उसकी जीब उसकी पंखुड़ियों तक पहुचि तो वो अपनी जीब को किसी तितली की पंख की तरह फड़फड़ने लगी.. स्वीटी अब अपनी जीब उसकी नंगी सपाट चूत पर उपर से नीचे तक चलाने लगी.. प्रीति ने अपनी उंगलियाँ स्वीटी के बालों मे डाल दी.. थोड़ी देर उसके बालों को सहलाने के बाद उसका हाथ नीचे खिसकते हुए पहले उसके कंधों को सहलाते हुए नीचे खिसक कर उसकी चुचियों पर ठहर गये..
फिर प्रीति ने उसके थोड़ा सा धक्का दे पलंग पर गिरा दिया और खुद उस पर लेट गयी.. उसकी चुचियाँ अब स्वीटी की चुचियों से टकरा रही थी. उसने अपनी जीब उसके मुँह मे दे चूसने लगी.. दोनो लड़कियाँ अपने दूसरे को अपने बाहों मे भीचे अपने बदन को दूसरे के बदन से रगड़ने लगी और अपनी जीव से जीब मिला एक दूसरे को चूम रही थी चाट रही थी... चूमते हुए दोनो एक दूसरे के
कपड़े उतारने लगी...
अब दोनो एक दूसरे के नंगे बदन को सहला रही थी.. मसल रही थी.. स्वीटी ने प्रीति की शानदार चुचिया अपने मूह मे कसी और भींचने लगी.. उसके निपल पर चिकोटी काटने लगी.. उन्हे मसल्ने
लगी...प्रीति ने अपना हाथ उसकी टॅंगो के बीच दे दिया और उसकी चूत को सहलाने लगी...
उन्माद मे स्वीटी ने अपनी टाँगे और फैला दी.. और थोड़ा उपर को उठ उसके निपल को अपने मुँह मे लिया और चूसने लगी. कभी वो पूरी चुचि को मुँह मे ले चूस्ति तो कभी उसके निपल को अपने दन्तो से काट लेती..
"ओ स्वीटी हाआँ ऐसे ही काटो ...ओह कितना अछा लग रहा है" प्रीति सिसक उठी.
प्रीति अब अपनी दो उंगलियाँ उसकी चूत के अंदर डाल घुमाने लगी. फिर धीरे धीरे उसे उंगलियों से चोदने लगी.. स्वीटी खुद थोडा नीचे खिसकी और अपनी उंगलिया अपनी चचेरी
बेहन की चूत मे डाल उसे चोदने लगी.. उसने प्रीति के निपल को अपने मुँह से निकाला और उसकी चुचि को मसल्ते हुए बोली, "अब में तुम्हारी चूत को चूसोंगी... और आज चूस चूस कर
तुम्हारा पानी छुड़ा दूँगी"
"हां स्वीटी हां चूसो मेरी चूत को आज जी भर के चूसो बहुत आग लगी है इस चूत मे हाँ चूस" प्रीति उसकी चूत को कुरेदते हुए बड़बड़ा उठी. स्वीटी नीचे खिसकने लगी.. और उसका चेहरा ठीक प्रीति के चूत के नीचे आ गया.. वो बड़े प्यार से उसकी बिना बालों की सपाट चूत को देखने लगी. अपनी उंगलियाँ फिराने लगी...
"हां प्रीति में चाहती हूँ कि तुम मेरी चूत की झान्टे सॉफ कर इसे भी अपनी चूत्कि तरह चिकनी और सुन्दर बना दो.." वो अपनी जीब को उसकी चूत के बाहरी सतह पर फिराते हुए बोली...
स्वीटी उसकी चूत को मुँह मे भर चूसने लगी. और प्रीति अपनी चूत को उसके मुँह पर दबाते हुए अपनी चुचियो से खेल रही थी... स्वीटी ने पहले उसकी चूत को जी भर के चूसा फिर अपनी उंगलियों
से उसे फैलाते हुए अपनी जीब अंदर तक घुसा गोल गोल घुमाने लगी..और अंदर से बहते शहद को चाटने लगी..
प्रीति सीधी हो अपनी चचेरी बेहन की मुँह पर बैठी थी.. वो एक हाथ से उसके बालों को पकड़ अपनी चूत पर दबा रही थी तो दूसरे हाथ से अपनी चुचि को ज़ोर ज़ोर से मसल रही थी.. जोरों से सिस्कार्ते हुए उसकी चूत ने झड़ना शुरू किया...
फिर प्रीति ने स्वीटी से कहा कि अब वो उसकी चूत का रस पीना चाहती है.. लेकिन स्वीटी ने कहा कि वो पहले उसकी झांते सॉफ कर दे फिर उसकी चूत को चूसे.. थोड़ी देर सुसताने के बाद दोनो बाथरूम की ओर बढ़ गयी.... बाथरूम मे पहुँच प्रीति ने पहले उसकी चूत को गरम पानी से अछी
तरह साफ किया फिर उसपर शेविंग जेल लगाने लगी... थोड़ी ही देर मे उसकी चूत शेविंग जेल के झाग से ढक सी गयी...
फिर प्रीति ने शेविंग रेज़र उठाया और धीरे धीरे उसके झाँते सॉफ करने लगी... जब भी रेज़र स्वीटी की चूत की नाज़ुक त्वचा को स्पर्श करता वो चिहुक उठती.. एक अजीब सी सनसनी मच जाती थी
उसके शरीर मे...उसकी चूत गीली होने लगी. और वो सिसकारने लगी... "तुम्हारी हालत में समझ सकती हूँ स्वीटी.. में खुद बाहो गरमा गयी हूँ तुम्हारी चूत की झाँते सॉफ करते करते... सुलग रही है मेरी चूत अंदर से" प्रीति ने आखरी बार उसकी चूत पर रेज़र चलाते हुए कहा..