S
StoryPublisher
Guest
शालु - पापा बस करिये न दर्द होने लगी मेरी। शायद चाभी ड़ालने से स्किन छिल गई है। अब मत करिये पापा बहुत दर्द हो रहा है।
बंसल - बेटी तो फिर कैसे होगा?
शालु - मैं क्या करूँ दर्द हो रही है।
बंसल - तो कहाँ से लुब्रीकेंट लॉऊँ? अगर तुम नहीं दोगी तो? क्या मैं अपना निकालूँ?
शालु - हाँ पापा आप अपना पेशाब क्यों नहीं निकालते?
बंसल - मैं पेशाब की बात नहीं कर रहा, मैं मुट्ठ की बात कर रहा हू। उसमे ज्यादा चिकनाइ होती है।
शालु - छी पापा वो कैसे निकलेगा?
बंसल ने बिना देर किये अपना लंड पेंट से बाहर निकाल लिया और शालु को दिखाते हुए कहा। बेटी इसको रगडने से निकलेगा।
(शालू पापा का बड़ा सा लंड देख कर घबरा जाती है)
बंसल - बेटी अगर तुम इसे हाथ में लेकर रगड़ो तो जल्दी निकल जायेगा
शालु - मैं नही।।।
बंसल - पकडो बेटी, (कहते हुए बंसल ने शालू का हाथ पकड़ लिया और अपने खड़े लंड पे रख लिया)
शालु - ओह पापा कितना गरम है ये।
बंसल - अब तुम इसकी स्किन खीच कर नीचे खोलो।
(शालू ने वैसा ही किया लंड को पूरा खोल दिया। लंड के स्मेल शालू को पागल कर रही थी। वो लंड पकड़ कर ऊपर नीचे हिलाने लगी)
बंसल - और तेजी से हिलाओ बेटी।। मेरा मुट्ठ निकाल दो।
शालु - ओके पापा, ये लीजिये।
शालु तेजी से लंड हिलाने लगी, और फिर कुछ ही पलों में बंसल का मुट्ठ शालू के हथेली पे निकल गया।
शालु - ओह पापा ये आपने क्या किये मेरे हाथ पे ही निकाल दिया।
बंसल - सॉरी बेटी।
शालु - आपका कितना ज्यादा निकला है पापा। मैं चाभी को इसमे भिगोती हू। शालु चाभी को हाथ में लेकर पापा के मुट्ठ में डूबाने लगती है।
बंसल - अब स्टार्ट कर के देखो बहुत ग्रीसिंग हो गई।
शालु कार स्टार्ट करती है, हाँ पापा ये तो स्टार्ट हो गई। दोनों ने राहत की साँस ली।
बंसल - बेटी तो फिर कैसे होगा?
शालु - मैं क्या करूँ दर्द हो रही है।
बंसल - तो कहाँ से लुब्रीकेंट लॉऊँ? अगर तुम नहीं दोगी तो? क्या मैं अपना निकालूँ?
शालु - हाँ पापा आप अपना पेशाब क्यों नहीं निकालते?
बंसल - मैं पेशाब की बात नहीं कर रहा, मैं मुट्ठ की बात कर रहा हू। उसमे ज्यादा चिकनाइ होती है।
शालु - छी पापा वो कैसे निकलेगा?
बंसल ने बिना देर किये अपना लंड पेंट से बाहर निकाल लिया और शालु को दिखाते हुए कहा। बेटी इसको रगडने से निकलेगा।
(शालू पापा का बड़ा सा लंड देख कर घबरा जाती है)
बंसल - बेटी अगर तुम इसे हाथ में लेकर रगड़ो तो जल्दी निकल जायेगा
शालु - मैं नही।।।
बंसल - पकडो बेटी, (कहते हुए बंसल ने शालू का हाथ पकड़ लिया और अपने खड़े लंड पे रख लिया)
शालु - ओह पापा कितना गरम है ये।
बंसल - अब तुम इसकी स्किन खीच कर नीचे खोलो।
(शालू ने वैसा ही किया लंड को पूरा खोल दिया। लंड के स्मेल शालू को पागल कर रही थी। वो लंड पकड़ कर ऊपर नीचे हिलाने लगी)
बंसल - और तेजी से हिलाओ बेटी।। मेरा मुट्ठ निकाल दो।
शालु - ओके पापा, ये लीजिये।
शालु तेजी से लंड हिलाने लगी, और फिर कुछ ही पलों में बंसल का मुट्ठ शालू के हथेली पे निकल गया।
शालु - ओह पापा ये आपने क्या किये मेरे हाथ पे ही निकाल दिया।
बंसल - सॉरी बेटी।
शालु - आपका कितना ज्यादा निकला है पापा। मैं चाभी को इसमे भिगोती हू। शालु चाभी को हाथ में लेकर पापा के मुट्ठ में डूबाने लगती है।
बंसल - अब स्टार्ट कर के देखो बहुत ग्रीसिंग हो गई।
शालु कार स्टार्ट करती है, हाँ पापा ये तो स्टार्ट हो गई। दोनों ने राहत की साँस ली।