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पापा की दुलारी जवान बेटियाँ complete

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उर्मिला - मुझे पता था, आपकी गलती नहीं है आपने उन दोनों को २ साल पहले देखा था जब वो दुबली सी थी। अभी पिछले ६-७ महीनो में शालु का बदन काफी भर गया है। इसलिए उसे तो टाइट होगी ही।

बंसल - हाँ मुझे नहीं पता था करेक्ट साइज ।

उर्मिला - अगली बार जब कुछ लाना तो मुझसे साइज पूछ के लेना। शालु के सारे टॉप छोटे हो गए और उसे अब रीना पहनती है। उसके अन्डर्गर्मेन्ट्स भी सारे मैंने फेंक दिया।

बंसल - फेंक दिया क्यों?

उर्मिला - रीना शालु के अंडर्गारमेंट तो नहीं पहन सकती न। कहाँ रीना का ब्रा साइज ३४ है और शालु की ३६ ।

शालु की साइज सुन कर बंसल का लंड सख्त हो जाता है।

बंसल - और तुम्हारी साइज क्या है (उर्मिला के चूचि दबाते हुए)

उर्मिला - आआह्ह्ह जोर से मत दबाओ।। मेरी साइज भी ३४ है। हम तीनो में सबसे बड़ा साइज शालु का है। (उर्मिला मुस्कराते हुए बोली)

(बंसल का लंड सख्त होता जा रहा था और वो उर्मिला के ऊपर चढ़ कर अपना लंड उसकी चुत पे दबाता रहा। उसे शालु के बारे में बात करना अच्छा लग रहा था, ख़ास कर उसके बूब्स के साइज के बारे में। बंसल ने हिम्मत करते हुए उर्मिला से कहा)

बंसल - मेरे पास आओ २ साल से मैंने तुम्हारी चूचि को हाथ नहीं लगाया। इधर आओ उर्मिला मैं तुम्हारी चूचि मसल कर शालु के बराबर कर देता हूँ। (बंसल ने डरते-डरते उर्मिला से शालु के बूब्स के बारे में जिक्र किया। वो देखना चाहता था की उरमिला उसकी इस बात पे ग़ुस्सा करती है या नहीं)

उर्मिला - (उर्मिला बंसल की बात सुन कर जरा सा भी रियेक्ट नहीं करति। जैसे कोई आम बात हो) नहीं मुझे इससे बड़ा नहीं चहिये। शालु मुझसे लम्बी है तो उसपे उसके बड़े बूब्स सूट करते है।
 
बंसल जब उर्मिला के मुह से शालु के बूब्स के बारे में सुनता है तो उसे यकीन हो जाता है की उर्मिला उसकी बात पे कोई भी नेगेटिव रिएक्शन नहीं दे रही। बंसल पूरी तरह उत्तेजित हो कर उर्मिला की पेटीकोट और पेंटी नीचे कर अपना लंड उर्मिला की चुत पे रगडने लगता है।

उर्मिला - क्या बात है, आज आप कुछ ज्यादा ही मूड में दिख रहे है।

बंसल - तुमसे २ साल दूर था न, और दोनों बेटियां से भी।

उर्मिला - अपनी चूत फ़ैलाते हुए, एक बात कहुँ। आप मेरे लिए इतना अच्छा नेकलेस लाये है। और बेटियों के लिए सिर्फ कपडे?

बंसल - तो क्या हुआ उर्मिला? ये तुम्हारे लिए है। मैं तुम्हारे लिए साड़ी भी लाया हुँ।

उर्मिला - क्या, साड़ी भी। नहीं नेकलेस काफी है मुझे साड़ी नहीं चहिये। आप एक काम करिये, शालु के टॉप वैसे भी फिट नहीं आ रही तो क्यों न आप साड़ी उसे दे देना। कुछ दिन में उसकी शादी भी करनी है न।

बंसल - ठीक है जैसा तुम ठीक समझो। लेकिन उसके लिए ब्लाउज और पेटीकोट?

उर्मिला - उसके पास कुछ पुराने ब्लाउज और पेटीकोट है, नहीं होंगे तो मैं खरीद लूंगी ।

बंसल - ठीक है। चलो अच्छा हुआ मैं शालु के लिए जीन्स ले कर नहीं आया। अगर जीन्स टाइट हो जाती तो उसका कुछ नहीं किया जा सकता था।

उर्मिला - जीन्स।।।।???? बिलकुल नही। अगर आपको जीन्स का साइज पता भी होता तब भी मुश्किल होती। जीन्स तो उसके जांघो के ऊपर जाएंगी ही नही। उसकी जाँघें बहुत मोटी और कमर पतली है। 36 के कमर वाली जीन्स में उसके हिप्स नहीं आ पाता। हिप्स के लिए अलग से ४० साइज देखना होता है।

बंसल - ओह (बंसल अपना लंड उर्मिला की चूत में पेल कर कस कर चोदने लगा। उसके दिमाग में शालु की ३६ साइज के बूब्स और ४० साइज के हिप्स घूम रही थी। वो पूरी तरह से एक्साईटेड होकर कस के धक्के मारने लगा।

उर्मिला - आह आज तो आप बहुत जोश में लग रहे हो।

 
बंसल - हाँ मैं तुम्हे चोद-चोद कर तुम्हारी गांड बड़ी कर दूंगा। शालु के गांड से भी ज्यादा बड़ी हो जायेगी तुम्हारी गांड (इस बार बंसल बहुत हिम्मत कर "शालु के गांड" शब्द का इस्तेमाल किया)

उर्मिला - (अपने हस्बैंड को अपनी बेटी के लिए ऐसा वर्ड इस्तेमाल करते हुवे सुनी तो चौंक गई) छी कैसी बात कर रहे हैं आप। चुप रहिये।

(बंसल को समझ में आ गया था की उर्मिला को ये बात अच्छी नहीं लगी उसने तुरंत बात मज़ाक में उडा दी और उर्मिला को जोर-जोर से चोदने लगा।उर्मिला भी दो सालों से प्यासी थी।वह भी गांड उठाके चुदवाने लगी।बंसल की स्पीड बढ़ती जा रही थी।कुछ देर के बाद बंसल ने उर्मिला को घोड़ी बना दिया और पीछे से उसकी गीली चूत में अपना मूसल डाल के पेलने लगा। थोड़ी देर बाद वो उर्मिला की चूत में ही स्खलित हो गया)

उर्मिला को चोदने के बाद वो उठा और कपडे पहनने लगा। उरमिला ने भी जल्दी से अपने कपडे पहन लिए और कमरे से बाहर आ गई।

उर्मिला - बेटी शालू, ये लो पापा तुम्हारे लिए साड़ी भी लाये है। इसका मैचिंग ब्लाउज और पेटीकोट निकाल कर रखना और कल पहन लेना।(उर्मिला ने शालु को आवाज़ लगा के बोली)

शालु - ठीक है मॉम्म।।

ऐसे ही सारा दिन बीत गया, बंसल आज सारा दिन शालु को छूप छूप के देखता रहा। रात को पूरी फैमिली डिनर कर सोने चलि गई। उर्मिला नीचे के रूम में, ऊपर के रूम में बंसल, रीना और शालु अपने-अपने कमरे में सोने चले गये। शालु अपने कमरे में बिस्तर पे बैठी काफी देर तक पढ़ाई कर रही थी।

रात क़रीब ११ बजे, बंसल की नींद खुली तो उसकी खिड़की से रौशनी आ रही थी। उसने सोचा शालु अभी भी पढ़ाई कर रही है। बिस्तर से उठ कर जब वो खिड़की के पास आया तो पाया की शालु वहीँ बिस्तर पे सो गई है। वो शायद रूम की लाइट बंद करना भूल गई थी। बंसल बिस्तर से उतर कर अँधेरे में ही खिड़की के पास आ खड़ा हुआ। अन्दर कमरे में जब उसने शालु को बिस्तर पे देखा तो उसके होश उड़ गये। शालु बिस्तर पे तकिये में अपना मुह घुसाये लेती थी। उसने अपना लेफ्ट पैर मोड रखा था जिससे उसकी कुर्ती ऊपर चढ़ गई थी। उसकी पूरी गांड का शेप सलवार में नज़र आ रही थी। उसकी मोटी मांसल जाँघे बंसल को पागल कर रही थी। उसने सपने में भी नहीं सोचा था की वो अपनी बेटी को कभी इस तरह देख पायेगा।

बंसल मन में - ओह बेटी। उर्मिला सच कह रही थी तुम्हारी जाँघ कितनी मांसल है। काश मैं तुम्हारी जाँघ बिना सलवार के देख पाता। शालु के वाइट कलर की पेंटी उसके ट्रांसपेरेंट सलवार में से नज़र आ रही थी।
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बंसल मन में - बेटी, काश मैं तुम्हारी सल्वार खोल पाता तो तुम्हारी गोरी जाँघो को चाट कर गिला कर देता।

इतना सब सोचते हुए न जाने कब बंसल अपना लंड बाहर निकाल कर मुट्ठ मारने लगा।आज रात के अँधेरे में उसे कुछ भी गलत नहीं लग रहा था। अपनी बेटी की गांड देख कर वो मुट्ठ मार रहा था। बंसल के दिमाग में इस वक़्त मुट्ठ गिराने के अलावा और कुछ भी नहीं सूझ रहा था। सुबह तो शालु उसकी कल्पना में थी, लेकिन अभी तो बंसल उसे अपने सामने देख कर मुट्ठ मार रहा था। लंड हिलाते-हिलाते उसके लंड से सफ़ेद पानी खिड़की के नीचे दिवार पे निकल आया।
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बंसल अब काफी संतुष्ट था, वो वापस बिस्तर पे जा कर सो गया।

उधर सुबह ७ बजे शालु की नींद खुली तो उसने सबसे पहले खिड़की से बाहर देखा। बगल के कमरे में उसके पापा गहरी नींद में थे। वो सोचने लगी की उसने अपने रूम की लाइट बंद नहीं की थी तो क्या पापा उसको रात में सोते हुए देखे होंगे? चलो अच्छा है ।मैंने आज अपना नाईट गाउन नहीं पहना था। उसने सोचा की वो सबको उठा दे, तो वो सबसे पहले अपने पापा के कमरे में गयी। उसके पापा सो रहे थे, और कमरे में खिड़की से धूप आ रही थी। वो कर्टेन लगाने खिड़की के पास गई तो उसने अपने पैरो में कुछ गीलापन महसूस किया।

जब उसने नीचे जमीन पे देखा तो, उसके तलवे में कुछ चिपचिपा सा था, उसने सामने देखा तो खिड़की की दिवार पे भी कुछ लगा था। वो आगे बढ़ कर अपनी उँगलियों से छूने लगी। उसे समझ में नहीं आ रहा था की ये क्या है। वो ऊँगली नाक के पास लगा कर सूंघी तो उसे ये अजीब सी महक कुछ जानी-पहचानी सी लगी। वो चुपके से बाथरूम में गई और पापा की सुबह वाली पेंट खोजने लगी। किस्मत से उसे पेंट मिल गई,पेंट में अभी भी ज़िप के पास दाग था।

लेकिन वो धब्बा काफी कड़ा हो गया था। शालु ने उसे नाक लगा कर सूँघा तो उसे ये समझते देर नहीं लगी की ऊँगली पे लगे पानी की महक और पापा के पेंट पे लगे दाग के महक एक है। शालु मन में सोचने लगी, तो क्या ये पापा के मुट्ठ की महक है? क्या पापा ईस उम्र में मुट्ठ मारते होंगे? क्या पापा ने रात में खिड़की के पास खड़े हो कर मुट्ठ मारा? और खिड़की के पास ही क्यों? कहीं ऐसा तो नहीं की वो खिड़की से मुझे देखकर मुट्ठ मार रहे थे?

छी नहीं नहि।।हे भगवन ये मैं क्या सोच रही हू। वो भी पापा के बारे में।

नही नही, क्या ये सचमुच में मुट्ठ है। हाँ मुट्ठ ही है नहीं तो पेंट के ज़िप पे कैसे। इसका मतलब सुबह भी। और शायद वो कमरे को गन्दा नहीं करना चाहते होंगे तो सोचा होगा की खिड़की से बाहर निकाल दे। लेकिन फिर मुट्ठ अंदर कमरे में ही गिर गया होगा और अँधेरे में उन्हें ध्यान नहीं आया होगा।

शालु कन्फ्यूज्ड थी और अपने पापा की तरफ देख रही थी। क्या पापा इस उमर में ये सब करते होंगे?
 
कहानी जारी रहेगी।अगला अपडेट जल्दी ही।
 
शालु खिड़की के पास जाती है और कर्टेन हटा देती है। कमरे में अब धूप आने लगी। वो अपने पापा की तरफ बढ़ती है। बंसल गहरी नींद में सो रहे थे, उनकी बेटी बिस्तर पे उनके बगल में चढ़ गई और झुक कर उन्हें उठाने लगती है।

शालु - पापा।। पापा

बंसल - (नो साउंड)

शालु अपने पापा के और क़रीब जाती है और उनपे झुक के उन्हें उठाने की कोशिश करती है। बंसल की नींद खुल जाती है, वो मुड के अपनी बेटी को देखता है। उसकी बड़े-बड़े बूब्स सलवार सूट के अंदर लटक रहे थे।

बंसल- शालु तुम?

शालु - उठिये पापा दिन चढ़ गया है, सुबह के ७ बज रहे है। उठिये न।।

बंसल - क्या ७ बज गए? उठ गया बेटी। रात नींद कब आ गई मुझे ख्याल ही नही।

शालु - पापा आप उठ के फ्रेश हो जाइये, आज मंडे है मेरा व्रत का दिन तो मैं नहाने जा रही हूँ।

बंसल - ठीक है बेटी तुम नहा लो, मैं सोच रहा हूँ मैं भी नहा ही लू। कल सफ़र करने के बाद से अभी तक नहाया नही।

शालु - ओके पापा। मैं नहा कर आपकी लाई हुई साड़ी भी पहन लूंग़ी। देखूं तो कैसी लगती है मुझ पे साड़ी।

बंसल - तुमपे वो साड़ी बहुत अच्छी लगेगी बेटी। अच्छा मैं फ्रेश होने जा रहा हू।

शालु भी अपने कमरे से सटे बाथरूम के तरफ चली जाती है। उधर रीना किचन में नाश्ता बना रही होती है। और उसकी माँ, उर्मिला रीना की मदद कर रही थी।

उर्मिला - रीना बेटी से।। बेटी तेरे पापा सो रहे हैं क्या अभी तक।

रीना - नहीं माँ, पापा उठ गए होंगे वो तो हमेशा से सुबह उठ जाते है। मैं उठ कर सीधे किचन में आ गई। सोचा जब तक दीदी नहा कर तैयार होती है तबतक मैं ब्रेकफास्ट बना लू।

थोड़ी देर में बंसल नीचे आता है।।

रीना - गुड मॉर्निंग पापा, दीदी कहाँ हैं?

बंसल - गुड मॉर्निंग बेटी, दीदी तुम्हारी नहा रही है।

तभी, ऊपर से शालु साड़ी पहन कर आती है, उसके बदन पे नीली साड़ी बहुत ही मादक लग रही थी। टाइट ब्लाउस, कसी हुई कमर और साड़ी में लिपटी उसके बडे बड़े कुल्हे मटकाती हुई वो पास आती है।

शालु - पापा कैसी लग रही हूँ?
 
बंसल - बहुत अच्छी लग रही हो बेटी, अब तो तुम्हारी शादी करा देनी चाहिये।।

शालु - पापा, ऐसा मत बोलिये मुझे शादी नहीं करनी अभी तो मुझे जॉब करना है। आपकी तरह सक्सेस होना है लाइफ में।

बंसल - हाँ बेटी बिल्कूल, दिल लगा कर कोशिश करो भगवन तुम्हारी जरूर सुनिगा। अच्छा उर्मिला मैं आज ही रात दिल्ली के लिए निकल रहा हूँ कुछ इम्पोर्टेन्ट काम आ गया है।

उर्मिला - क्या ? आज़? अभी तो आये आपको १ दिन ही हुआ है।

बंसल - क्या करूँ उर्मिला जॉब है करनी पड़ती है।

शालु - पापा, इतना जल्दी? मैंने सोचा मैं आपके साथ बैठ कर इंटरव्यू के लिए टिप्स सीखुंगी।

बंसल - बेटी इस बार जल्दी है, अगली बार आउंगा तो मैं तुम्हे जरूर मदद करुन्गा। लेकिन तुम अभी किस चीज़ के लिए इंटरव्यू दे रही हो?

शालु - कुछ छोटी कंपनी के लिये, मैंने कुछ इंटरव्यू दिए थे लेकिन यहाँ ओपनिंग काफी कम रहती है।

बंसल - छोटी कंपनी? मेरी बेटी होकर तुम छोटी कंपनी के लिए अप्लाय कर रही हो? तुम्हे बड़ी कंपनी में अप्लाय करना चाहिये। दिल्ली में तो बहुत सारी बड़ी-बड़ी कंपनी हैं जो नौजवानो को लेती हैं।

उर्मिला - अगर ऐसी बात है तो आप शालु को अपने साथ ही क्यों नहीं ले जाते? आपके साथ रहेगी तो आपसे सीखेगी भी और आपका ख्याल भी रखेगी।

बंसल - मेरे साथ दिल्ली?

उर्मिला - हाँ। और आप कंपनी में इतनी बड़ी पोजीशन पे है। आप अपने बॉस से बात करके शालु की नौकरी भी लगवा सकते हैं अपनी कंपनी में। बेटी भी आपकी कंपनी में रहेगी तो अच्छा होगा।

शालु - पापा क्या ऐसा सचमुच हो सकता है की मैं आपकी कंपनी में काम कर सकूँ?

बंसल - हाँ बेटी, मेरे बॉस बहुत अच्छे है। अगर मैं उनसे तुम्हारी सिफारीश करू तो उनको तुम्हे जॉब देने में कोई प्रॉब्लम नहीं होगी।

शालु - पापा मैं भी चलूँगी आपके साथ। मुझे अपनी कंपनी में जॉब दे दीजिये। मैं कुछ भी काम कर लूंग़ी।

बंसल - वो सब तो ठीक है लेकिन तुम वहां मेरे साथ। मुझे काम के सिलसिले में अक्सर जगह-जगह जाना पड़ता है। और मैं होटल में रुकता हू। फिर तुम कैसे मैनेज करोगी?

उर्मिला - हाँ जी ये ठीक रहेगा, आप शालु को अपने साथ ले जाइये। आपका ख्याल रखेगी, और कहीं जाना होगा तो इसे भी लेकर चले जाइयेगा।

बंसल - उर्मिला तुम समझ नहीं रही हो। मुझे और शालु को ट्रेवल करना पडेगा, कभी-कभी मैं लेट नाईट पार्टी में जाता हूँ बिज़नेस के लिये।

उर्मिला - तो क्या हुआ? शालु को भी कुछ सीखने को मिलेगा आपके साथ्। होटल में रह लेगी वो, है न शालु बेटी? (उर्मिला ने शालु से पूछा)

शालु - हाँ पापा मैं सब सँभाल लूंग़ी। मुझे ले चलिये न अपने साथ प्लीज पापा।

बंसल - ठीक है बेटी।

शालु - थैंक यू पापा।
 
ब्रेकफास्ट करने के बाद, शालु भी अपना सामान पैक करने अपने रूम में चली जाती है। लेकिन उसे सामान रखने के लिए कोई बैग नहीं मिलता। शालु पापा के कमरे में जाती है। रूम में बंसल भी अपने कपडे पैक कर रहे थे।

शालु - पापा, आपके पास कोई बड़ा सूटकेस या बैग है क्या?

बंसल - बेटी, मेरे पास तो ये सूटकेस है (बंसल ने अपनी सूटकेस की तरफ इशारा करते हुए कहा)

शालु - ओह पापा मेरे पास तो सूटकेस ही नहीं है। मैं कहाँ रखूँ अपने कपडे?

बंसल - बेटी तुम ऐसा करो, मेरे सूटकेस को ही यूज कर लो। इसमे अभी काफी जगह है।

शालु - लेकिन मेरे पास तो बहुत सारे कपडे हैं पैकिंग के लिये।

बंसल - चलो मुझे दिखाओ बेटी, मैं तुम्हारी मदद करता हू। तुम्हे सारे कपडे ले जाने की जरुरत नहीं है। कुछ कपडे ले लो, बाकी के मैं तुम्हारे लिए दिल्ली में खरीद लूंगा।

शालु - ओके पापा।

बंसल और शालु रूम में आते है, शालु के रूम में सारे कपडे बिखरे पड़े होते है। उसकी जिंस, टॉप, सलवार सुट, ब्रा, पैंटी सभी।।

बंसल - अरे बेटी इतने सारे कपडे इसमे कुछ कम करो तुम।

शालु - ओके पापा

बंसल और शालु कपडे अलग करने लगते है।

बंसल - बेटी क्या तुम साड़ी नहीं ले रही? तुम इस साड़ी में इतनी अच्छी लग रही हो।

शालु - नहीं पापा मेरे पास तो सिर्फ २ साड़ी ही है। और मैंने काफी दिनों से ट्राई नहीं किया।

बंसल - तुम साड़ी भी ले लो अगर अच्छी नहीं होगी तो मैं तुम्हारे लिए नयी खरीद दूंगा।

शालु - ओके पापा।

शालु अपने सारे कपडे समेट कर उठा लेती है, कुछ कपडे बच जाते है।

शालु - पापा वो बचे हुए कपडे आप उठा लिजीये और आपके कमरे में चल कर पैक करते है।

बंसल बेड पे देखता है तो वहां पे उसे टोप, सलवार और २-३ ब्रा पेंटी पड़ी हुई मिलति है। बंसल अपनी बेटी के ब्रा और पेंटी उठाने में हिचकिचाता है। फिर थोड़ा हिम्मत कर वो कपडे और ब्रा पेंटी उठा लेता है। पापा के हाथ में अपनी ब्रा देख शालु को शर्म आती है और वो अपनी ब्रा ले लेती है। दोनों एक दूसरे से नज़रें चुराये चुप-चाप कमरे में आ जाते है।

१ घंटे के पैकिंग के बाद दोनों रेडी हो जाते है।

शाम को उर्मिला और रीना स्टेशन तक आते है। ट्रैन अपने टाइम पर रवाना हो जाती है, बंसल और शालु पूरे सफ़र बातचीत करते हुए दिल्ली पहुच जाते है। दिल्ली स्टेशन पहुच कर बंसल टैक्सी बुलाता है और पास के किसी होटल में जाने के लिए टैक्सी वाले को बोलता है।
 
काफी खोजने के बाद उन्हें एक होटल मिलता है। होटल के रिसेप्शन पर -

होटल स्टाफ - गुड इवनिंग सर।

बंसल - गुड इवनिंग

बंसल - मुझे १ रूम चाहिए क़रीब १ हफ्ते के लिये।

होटल स्टाफ - श्योर सर, सिंगल, डबल और हनीमून कपल रूम सर?

(बंसल की पर्सनालिटी से अक्सर लोग धोखा का जाते थे। यहाँ भी यही हुवा, होटल के स्टाफ को लगा की दोनों कपल है। बंसल और शालु दोनों होटल स्टाफ के बातों को इग्नोर कर देते हैं)

बंसल - डबल रूम प्लीज।

होटल स्टाफ - सॉरी सर, डबल रूम्स आर फुल। ओनली सिंगल एंड हनीमून रूम्स आर अवलेबल। इफ़ यू वांट डबल रूम यू हैव टू वेट टिल टूमोरो। फॉर टुडे ओनली दिस रूम्स आर अवैलेबल।

बंसल - ओके थैंक्स।

शालु - क्या पापा, इतनी देर से हमलोग होटल खोज रहे हैं कहीं भी तो नहीं मिल रहा। आप एक दिन के लिए सिंगल बैडरूम ही ले लिजीये जब खाली होगा तब चेंज कर लेंगे। मैं चलते-चलते थक गई हूँ।

बंसल - ठीक है बेटी। सिंगल रूम प्लीज।

होटल स्टाफ - योर की सर। किशोर टेक मैडम एंड सर टू द रूम।

होटल स्टाफ उन्हें ३र्ड फ्लोर पे लास्ट के एक रूम में ले जाता है। रूम बहुत अच्छा था, सिंगल बैडरूम काफी अच्छा था। रूम में धीमी रौशनी थी, वाल पे टीवी और साइड में लंप। रूम के राइट साइड बाथरूम था।

होटल स्टाफ - ओके सर।

होटल स्टाफ के जाने के बाद शालु अंदर से रूम लॉक कर देती है और बिस्तर पे लेट जाती है।

शालु - ओह पापा मैं तो थक गई।

बंसल - तुम थोड़ी देर सो जाओ बेटी।

शालु - नहीं मैं तो बस ऐसे ही रेस्ट ले रही हू। पापा ये होटल के बेड कितने अच्छे होते है। इतने सॉफ्ट की उठने का मन ही नहीं करता।

बंसल - हाँ बेटी सही कहा। वैसे बेटी मैंने अपने बॉस को फ़ोन कर दिया था और तुम्हारी जॉब के बारे में भी। मैंने उन्हें होटल का पता दे दिया है, वो तुमसे आज ही मिलने आ रहे है। तुम अच्छे से उनके प्रश्नो का जवाब देना।

शालु - ओह पापा आज ही? मैं तो नर्वस हो रही हू।

बंसल - चिन्ता मत करो बेटी इश्वर ने चाहा तो सब अच्छा होगा। तुम फ्रेश होकर कपडे चेंज कर लो।

शालु - लेकिन मैं क्या पह्नु पापा?

बंसल - बेटा साड़ी ही पहन लो अच्छा रहेगा।

शालु - ठीकहै पापा।
 
शालु बाथरूम में आ जाती है, वो शीशे में अपने आप को देखती है और मन में सोचती है। ओह मेरे लिए ये जॉब बहुत इम्पोर्टेन्ट है मुझे किसी भी तरह पापा के बॉस को इम्प्रेस करना है। शालु फ्रेश होकर साड़ी पहनती है और शीशे में अपने आप को देखती है। उसकी साड़ी कमर के पास थोड़ी खुली थी। वो अपने कमर पे हाथ रख शीशे में देखती है और सोचती है की क्या मैं साड़ी और ऊपर पह्नु जिससे मेरी कमर ढ़क जाए। कुछ सोच कर वो साड़ी वैसे ही रहने देती है। आज़कल तो दिल्ली में लड़कियां साड़ी ऐसे ही पहनती है, और वैसे भी पापा के बॉस दिल्ली में हैं उन्हें ऐसे कोई फ़र्क़ नहीं पडना चहिये। वो बाहर आ जाती है, बाहर बंसल अपनी बेटी को ऊपर से नीचे तक देखता है। रूम में अकेले वो अपनी पत्नी के अलावा पहली बार किसी स्त्री को ऐसे देख रहा था, वो भी उसकी खुद की बेटी।

बंसल - बेटी तुम तो बहुत अच्छी लग रही हो। बॉस नीचे रिसेप्शन पे है। मैंने उन्हें ऊपर रूम में आने को बोल दिया है। वो आते ही होंगे।

शालु - ओके पापा।

तभी दरवाजे पे कॉल बेल बजति है। बंसल डोर खोलता है तो उसके बॉस गुप्ता जी थे। आइये सर।

गुप्ता जी - कैसे हो बंसल ?

बंसल - मैं अच्छा हूँ ।

(कमरे में अंदर आकर गुप्ता जी बंसल की जवान बेटी को देखते हैं)

गुप्त जी - ये शालु है आपकी बेटी?

बंसल - हाँ।

शालु - नमस्ते अंकल।

गुप्ता जी - नमस्ते बेटी।

बंसल - जी बॉस वो मैंने आपसे बात की थी, शालु जॉब ढून्ढ रही है।

गुप्ता जी - इसमे पूछने की क्या बात है बंसल? तुम मेरे सबसे अच्छे एम्प्लोयी हो, तुम्हे कह दिया मैंने हाँ कर दिया। कल से तुम्हारी बेटी ऑफिस ज्वाइन कर लेगी।

बंसल - थैंक्स बॉस, थैंक यू वैरी मच।

गुप्ता जी - आई अप्पोइंट हर अस माय पी ए। मेरी सेक्रेटरी इस महिने के एन्ड तक काम करेगी और फिर उसका ट्रासफर पुणे हो जाएगा। इसलिए तबतक तुम अपनी बेटी को अपनी पर्सनल सेक्रेटरी बना लो।

लेकिन हाँ याद रखना, ऑफिस में नो फ़ादर-डॉटर रिलेशन। जस्ट बॉस एंड सेक्रेटरी।

गुप्ता जी - शालु बेटी, तुम्हे कोई ऐतराज़ है अपने पापा के पर्सनल सेकेटरी बनने में इस मंथ के लिये। उसके बाद तुम मेरी पी ए के लिए आ सकती हो।

शालु - नो प्रॉब्लम सर। आई विल नॉट डिसअप्पोइंट यु। मैं ऑफिस में पी ए की तरह रहूँगी बेटी की तरह नही।

गुप्ता जी - वैरी गूड।

कुछ देर बाद गुप्ता जी चले जाते है, उनके जाते ही शालु खुशी से झूम उठती है और अपने पापा के गले लग जाती है।
 
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