• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

पाप पुण्य complete

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
करीब आधे घन्टे तक दोनो माँ बेटे एक दुसरे से चिपके नंगे लेटे रहे. कामिनी आंटी आंखे बंद किये टांगे फैलाये बेसुध लेटी थी और बाहर बारिश अपने पुरे शबाब पर थी.

आधे घन्टे बाद जब कामिनी आंटी को होश आया तो खुद को नंगी लेटी देख हडबडाकर उठ गई. चुदाई का नशा उतरने के बाद होश आया तो अपने पर बडी शरम आई. बगल में बेटा भी नंगा लेटा हुआ था. उनका लटका हुआ लौडा और उनका लाल सुपाडा उनके मन में फिर से गुद-गुदी पैदा कर गया.

आहिस्ते से बिस्तर से उतर अपने पेटिकोट और ब्लाउन को फिर से पहन लिया और रिशू की अंडरवियर उनके उपर जैसे ही डालने को हुई की रिशू की आंखे खुल गई. अपने उपर रखी अंडरवियर का अहसास रिशू को हुआ तो मुस्कुराते हुए उसे पहन लिया.

कामिनी आंटी भी शरमाते-सकुचाते थोडी दूर बैठ गई. दोनो मां-बेटे एक दुसरे से आंख मिलाने की हिम्मत जुटा रहे थे. चुदाई का नशा उतरने के बाद जब दिल और दिमाग दोनो सही तरह से काम करने लगा तो अपने किये का अहसास हो रहा था. थोडी देर तक तो दोनो में से कोई नही बोला पर फिर रिशू धीरे से सरक कर कामिनी आंटी की ओर घुम गया और उनके पेट पर हाथ रख दिया और धीरे धीरे हाथ चला कर सहलाने लगा. फिर धीरे से बोला, मम्मी क्या हुआ

कामिनी आंटी कुछ नही बोली तब फिर बोला इधर देखो ना…

कामिनी आंटी मुस्कुराते हुए उनकी तरफ घुम गई. रिशू उनके पेट को हल्के-हल्के सहलाते हुए धीरे से उनके पेटिकोट के लटके हुए नाडे के साथ खेलने लगा. नाडे से खेलते-खेलते रिशू ने अपनी उन्गलीयां धीरे से पेटीकोट के नाड़े के गैप के अन्दर सरका कर चलाई तो गुदगुदी होने पर उसके हाथ को हटाती आंटी बोली क्या करता है, हाथ हटा

रिशू ने हाथ वहां से हटा कमर पर रख दिया और थोडा और आगे सरक कर कामिनी आंटी की आंखो में झांकते हुए बोला मजा आया…

शरम से कामिनी आंटी का चेहरा लाल हो गया. उनकी छाती पर के मुक्का मारती हुइ बोली चुप…गधा कहीं का…

रिशू समझ गया की अभी पहली बार है थोडा तो शरमायेगी ही. उनकी नाभी में उन्गली चलाता हुआ बोला

मुझे तो बहुत मजा आया…बताओ ना तुम्हे कैसा लगा…?”

कामिनी: हाय …तु पहले हाथ हटा…

रिशू: क्यों…बता ना मां कहते हुए उनके होठों को हल्के से चुम लिया.

कामिनी आंटी उनको पिछे धकेलते हुए बोली हट बदमाश तुने अब तक कितनो के साथ…

रिशू एक पल खामोश रहा फिर बोला क्या मां ?…किसी के साथ नही....

कामिनी: चल झुठे रश्मि के साथ तो मैंने ही देखा है. सच सच बता...कहते हुए फिर उनके हाथ को अपने पेट पर से हटाया.

रिशू ने फिर से हाथ को पेट पर रख. उनकी कमर पकड अपनी तरफ खींचते हुए कहा. सच बताऊँ

कामिनी: हा बोल न
 
रिशू उनको और अपनी तरफ खींचता हुआ अपनी कमर को उनकी कमर से सटा धीरे से फुसफुसाता हुआ बोला सच कहू तो याद नही है

कामिनी: हाये राम!!!…इतनी सारी ???…कैसे फांसता है तू इतनी लडकियों को...

रिशू: मैं नहीं फांसता मेरा लंड फांसता है, फिर कुछ तो सच में रंडिया थी. पैसे के लिए चुद्वाती थी. कहते हुए रिशू ने कामिनी आंटी को कमर से पकड कस कर भींचा. उनका खडा हो चुका लंड सीधा कामिनी आंटी की जांघो के बीच दस्तक देने लगा.

कामिनी आंटी उनकी बाहों से छुटने का असफल प्रायास करती मुंह फुलाते हुए बोली छोड बेशरम

पर ये सब बोलते हुए उनके चेहरे पर हल्की मुस्कान भी तैर रही थी. रिशू ने अपनी एक टांग उठा उनकी जांघो पर रखते हुए उनके पैरो को अपने दोनो पैरों के बीच करते हुए लंड को पेटिकोट के उपर से चूत पर सटाते हुए उनके होठों से अपने होठों को सटा आंटी का मुंह बन्द कर दिया. रसिले होठों को अपने होठों के बीच दबोच चूसते हुए अपनी जीभ को उनके मुंह में ठेल उनके मुंह में चारो तरफ घुमाते हुए चुम्मा लेने लगा.

कुछ पल तो कामिनी आंटी के मुंह से ...गो...गो... करके गोगियाने की आवाज आती रही मगर फिर वो भी अपनी जीभ को ठेल-ठेल कर पुरा सहयोग करने लगी. दोनो आपस में लिपटे हुए अपने पैरों से एक दुसरे को रगडते हुए चुम्मा-चाटी कर रहे थे. रिशू ने अपने हाथ कमर से हटा उनकी चुचियों पर रख दिया था और ब्लाउन के उपर से उन्हे दबाने लगा. कामिनी आंटी ने जल्दी से अपने होठों को उनके चुम्बन से छुडाया. दोनो हांफ रहे थे और दोनो का चेहरा लाल हो गया था. रिशू के हाथों को अपनी चुचियों पर से हटाती हुइ बोली इस्सक्या करता है…?

रिशू ने कामिनी आंटी के हाथ को पकड अपनी अंडरवियर के अन्दर घुसा अपना लंड उनके हाथ में पकडा दिया. कामिनी आंटी ने अपना हाथ पिछे खींचने की कोशिश की मगर उसने जबरदस्ती उनकी मुठ्ठीयां खोल अपना गरम तपता हुआ खडा लंड उनके हाथ में पकडा दिया. लौडे की गरमी पा कर उनका हाथ अपने आप लंड पर कसता चला गया.

…. तेरा मन नही भरा क्या…?? लंड को पुरी ताकत से मरोडती दांत पीसती आंटी बोली.

नही भरा…एक बार और करने दे…ना कहते हुए रिशू ने उनके घुटनो तक उठे हुए पेटिकोट के अन्दर झटके से हाथ घुसा दिया. कामिनी

आंटी ने चिहुंक कर लंड को छोड पेटिकोट के अन्दर घुसते रिशू के हाथो को रोकने की कोशिश करते हुए बोली …कहां हाथ घुसा रहा है

रिशू जबरदस्ती उनके ऊपर आ कर हाथ को उनकी जांघो के बीच ठेलता हुआ बोला, बस एक बार और देखो न कैसे खड़ा है...

कामिनी आंटी जब तक उसकी कलाई पकड रोकने की कोशिश करती तब तक रिशू का हाथ उनकी जांघो के बीच चूत तक पहुंच चुका था. चूत की फांको के बीच से रास्ता खोजते हुए चूत के छेद में बीच वाली उन्गली को धकेला. कामिनी आंटी की चूत पनिया गई थी. थोड-सा ठेलने पर ही उन्गिली कच से बुर में घुस गई. दो-तीन बार कच-कच उन्गली चलाता हुआ रिशू बोला पनीया गई है तेरी चुत… आराम से जायेगा…इस बार चिकनी हो गई है…तेरी चुत…

कामिनी आंटी हँसते हुए बोली चुप कर बेशरम बहुत देर हो चुकी है…

रिशू भी हस पडा और उनकी चुंची को पकड कस कर दबा दांत पीसते बोला बस एक बार और.

नही सीईईईई…. कमीने छोड…. घडी देख….क्या टाईम हुआ है कामिनी आंटी रिशू के हटाते हुए बोली.

रिशू ने घडी देखी. सुबह के ४:३० बज रहे थे. टाइम देख कर उसने आंटी को छोड़ दिया और कामिनी आंटी अपने कमरे में सोने चली गयी और रिशू भी अपने बिस्तर पर खर्राटे भरने लगा.
 
अगली सुबह कामिनी आंटी को लगा की कोई उनकी चूत चाट रहा है तो अचानक उनकी आँख खुल गयी तो उन्होंने देखा की रिशू पूरा नंगा उनके बिस्तर पर बैठा बड़े मज़े से उनकी चूत चाट रहा है. आंटी की आँखों के सामने रात का पूरा नज़ारा घूम गया और उनको शर्म सी महसूस हुई पर रिशू जिस तन्मयता से चूत चाट रहा था उनका मन नहीं हुआ उसको हटाने का.

कापती आवाज में आंटी बोली... आःह सुब..ह ह्ह्ह सुबह ईईइ स्स्स्स क्या कर राआअह्ह्ह आ है....बेटा आआ ..ह

रिशू: ११ बज गया मम्मी, तुमको जगा रहा था..

कामिनी: अरे छोड़ न बेशरम अआह्ह हट भी, बड़ा अच्छा अआह तरीका काआअ निकाल आःह्ह.

रिशू जानता था की कामिनी केवल नाटक कर रही है. वो केवल मुह से उसे हटने के लिए कह रही है पर अन्दर ही अन्दर चाहती है की रिशू उसे अपने तगड़े लंड से हचक के चोदे. वो अपनी जीभ चूत के एकदम अन्दर घुसेड़ते हुए बोला, अब तो रोज ऐसे ही जगाऊगा तुम्हे.

कामिनी: अरे हट भी, नहाने जाने दे मुझे...

रिशू: हा चलो न, मैं आज तुम्हे खुद अपने हाथों से नेह्लाऊंगा पर पहले कपडे तो उतर दो मम्मी.

यह कह कर रिशू ने कामिनी के ब्लाउज के बटन भी खोल दिए. दोनों माँ बेटे इसी नूरा कुश्ती में लगे थे की तभी डोर बेल बजी और दोनों हडबडा कर उठे. रिशू तो कपडे पहने था तो वो दरवाजा खोलने चल दिया और कामिनी भाग के बाथरूम में घुस गयी. रिशू ने दरवाजा खोला तो सामने रिक्की खड़ी थी.
 
रिक्की को देख कर रिशू का मूड ख़राब हो गया, उसने पक्का मन बनाया था की पूरे दिन कामिनी को नंगा करके चोदेगा इसीलिए वो सुबह जल्दी उठ कर नहा धोकर झाटे बना कर तैयार हो गया था.. वो चिढ़ कर बोला...

रिशू: अरे तेरे सहेली के भाई की शादी तो आज ही है न तो तू वापस कैसे आ गयी.

रिक्की: क्या भैया सुबह से फ़ोन कर रही हूँ. फ़ोन क्यों नहीं उठा रहे थे. तुम लोग क्या कर रहे थे.

रिशू: अरे फ़ोन की घंटी मैंने नहीं सुनी शायद ख़राब है पर मेरी बात का तो जवाब दे.

रिक्की: अरे आज रात को जो ड्रेस मुझे पहननी थी वो मैं यही भूल गयी थी इसीलिए फ़ोन कर रही थी की तुम मुझे ड्रेस दे जाओ. अच्छा हुआ की एक रुची (रिक्की की फ्रेंड) के एक रिश्तेदार इस तरफ कुछ काम से आ रहे थे तो उन्होंने मुझे यहाँ तक छोड़ दिया. मैं ड्रेस लेने आई हूँ. तुम मुझे वापस रुची के यहाँ छोड़ दो.

इतना कह कर रिक्की अपने रूम में ड्रेस लेने चली गयी. रिशू भी पीछे पीछे रूम में गया और बोला...

रिशू: तू उन्ही के साथ चली जा न जिनके साथ आई है. मुझे कुछ काम है.

रिक्की अपने कपडे पैक करती हुई बोली: अब नखरे मत करो भैय्या. वो तो किसी और काम से आगे चले जायेंगे और शाम तक वापस आएंगे और मुझे दोपहर में रुची के साथ ब्यूटी पार्लर जाना है. अब जल्दी करो और मुझे छोड़ आओ.

रिशू मन मार कर बाइक की चाभी उठाता हुआ बोला...मम्मी नहा रही है. मैं उनको बोल कर आता हूँ. तू एक बार ठीक से देख ले की कुछ और तो नहीं भूली.

रिशू ने बाथरूम का दरवाजा खटखटाया तो कामिनी अन्दर से बोली, कौन आया है रिशू...

रिक्की है मम्मी. अपनी ड्रेस भूल गयी थी वोही लेने आई है. मैं उसे वापस छोड़ने जा रहा हूँ. एक काम और भी है वो करके लौटूंगा. लौटते हुए शाम हो जाएगी...
 
कामिनी आंटी इस समय बाथरूम में अपनी झाटे साफ़ कर रही थी और सुबह सुबह रिशू ने जो उसे गरम कर दिया था तो चूत में ऊँगली भी कर रही थी. उनका मन था की अपनी चूत एकदम चिकनी करके पूरे दिन अपने बेटे का लंड इसमें लेगी लेकिन रिशू की बात सुनकर उनका भी मूड ख़राब हो गया. उधर रिशू सोच रहा था की मम्मी कहाँ जा रही है, रिक्की को छोड़ने जब रुची के घर तक जा ही रहा हूँ तो पास ही में रश्मि का घर भी है. वहां भी चांस ले लूँगा. अगर मौका लगा तो एक दो राउंड रश्मि की चुदाई करके ही वापस आऊँगा. मम्मी के साथ तो पूरी रात बितानी है.

कामिनी आंटी जब नहा कर बाहर आई तब तक रिशू रिक्की को लेकर जा चूका था इसिलए वो केवल एक गाउन पहन कर बाहर आ गयी. उन्होंने ब्रा और पैंटी नहीं पहनी थी और उनकी क्लीन शेव्ड चूत और पपीते साइज़ की चूचिया साफ़ नज़र आ रहे थे.

वासना की आग में जल रही आंटी को और कुछ समझ में नहीं आया तो उन्होंने अलमारी खोल कर अपने पति की शराब की बोतल निकाल ली. इससे पहले उन्होंने कभी कभार अंकल का साथ देने के लिए एक आध सिप ही लिया था पर आज उन्होंने पूरा एक पेग बना कर नीट ही गटक लिया पर शराब उनके गले को जलाते हुए उनके जलते हुए जिस्म में उतर गयी.

पर इस शराब ने उनके बदन की आग को और भड़का दिया. आंटी जाकर अपने बेड पर लेट गयी और अपनी चूचिया दबाने लगी. जैसे जैसे शराब का नशा उने पर छाने लगा उनकी चुदने की इच्छा और बढती गयी.

आखिरकार वो बेड से उठी और उन्होंने फ़ोन पर मेरे घर का नंबर घुमाया और घंटी बजते ही रश्मि दीदी ने फ़ोन उठाया. आंटी ने दीदी से पुछा मोनु कहाँ है.

रश्मि: घर पर ही है. क्यों क्या हुआ आंटी.

कामिनी: उसे जल्दी से मेरे घर भेज दो. उसे कहो फ़ौरन आ जाए... बहुत जरूरी काम है.

इतना कह कर आंटी ने फ़ोन रख दिया. रश्मि दीदी ने मुझे बुलाया और बोली

रश्मि: मुबारक हो. कामिनी आंटी के भोसड़े में बहुत आग लगी है, फ़ौरन तुम्हे बुलाया है. जल्दी जाओ...

मोनू: क्या कह रही थी. साफ़ साफ़ बताओ न दीदी...

रश्मि: अरे जल्दी जा. चुदासी औरत को तडपाना अच्छी बात नहीं है जा.

रश्मि दीदी ने लगभग धक्के देते हुए मुझको घर से बाहर निकाल दिया. मोनिका अचरज से देख रही थी की दीदी कैसे मुझे आंटी को चोदने के लिए उकसा रही है.
 
मैं आधे घंटे के अन्दर कामिनी आंटी के घर के सामने खड़ा था. आज रिशू की माँ चोदने का मेरा सपना पूरा होने वाला था. घंटी बजाते ही आंटी ने दरवाजा खोला. आंटी अभी भी सिर्फ गाउन में ही थी. मेरा लंड पहले ही इस ख्याल में अकड़ा था की शायद आज आंटी की फुद्दी मिल जाये और सामने उनका गदराया बदन देख के मेरा लंड एकदम सख्त हो गया.

कामिनी: अन्दर आओ मोनू.

जी आंटी, क्या जरूरी काम था जिसके लिए आपने मुझे बुलाया था. मैंने मुस्कुराते हुए पुछा.

कामिनी: वो ही कामं था जिसके लिए कल रात तुम मुझको बुलवा रहे थे. चुदाई... करोगे न मेरी चुदाई.

उनकी बात सुनते ही मैंने उत्तेजना से अपना हाथ आंटी की दाई चूची पर रख कर उसे कस कर दबा दिया. आंटी के मुह से एक सीत्कार निकल गयी और मैंने आंटी को अपने आगोश में लेकर उनके होठो पर अपने होठ रख दिए. मुझे बहुत अचम्भा हुआ क्योंकि आंटी के मुह से शराब

की महक आ रही थी. मैंने देखा सामने टेबल पर एक स्कॉच की बोतल सोडा और ग्लास रखा था.

मैंने पुछा आंटी अपने शराब पी है क्या.

कामिनी: तूने आने में इतनी देर लगा दी और जब अन्दर की आग जब बर्दाश्त नहीं हुई तो उसे बुझाने के लिए एक पेग मार ही लिया पर इसने आग और भड़का दी, अब जल्दी से मुझे ठंडा करदे मेरे राजा. जल्दी...

मैंने अपनी पेंट खोल कर सोफे पर बैठ गया और बोला: क्यों नहीं आंटी, इस दिन के लिए तो मैं भी बेक़रार था. आओ… चूस लो मेरा लण्ड… ये कब से बेताब है… और आंटी मेरे सोफे के सामने अपने घुटने पर बैठ कर मेरी कमर पकड़ कर मेरा लण्ड चूसने लगी.

थोड़ी देर चूसने के बाद आंटी ने लण्ड मुंह से निकाला.

आंटी: मैं तुम्हारे लण्ड की भूखी हूँ मोनू. मुझे अब जल्दी से चोद दो ना मोनू…
 
मैं: मैं भी कब से आप को चोदना चाहता हूँ आंटी…

आंटी ने मुझे बेडरूम में आने का इशारा किया और हम दोनों बेडरूम में आ गए.

आंटी बेड पर लेट गयी और अपनी चूत में ऊँगली करने लगी और मैं आंटी के चून्चिया चूसने लगा. आंटी उत्तेजना से बेड पर मचलने लगी. थोड़ी देर बाद मैं उनकी चूत चाटने लगा.

आंटी – उंहमहम: आअहह… मोनू, बहुत मज़ा आ रहा है… जीभ अंदर डाल केहआआ ह्ह्ह करो ना…

और मैं उनकी चूत के अंदर जीभ फिराने लगा और वो और ज़ोर से बेड पर तड़पने लगी.

आंटी – आअहह… मैं एक दम तैयार हूँ, अब और इंतेज़ार नहीं होता… प्लीज़, अब लण्ड डालो ना…

फिर मैंने आंटी को सीधा बेड पर लिटाया और उनके उपर चढ़ गया. अपना लण्ड हाथ में पकड़ कर एक ही झटके में पूरा अंदर घुसा दिया. आंटी के मुंह से सिसकारियाँ निकलने लगी और मैं उसे धीरे धीरे लण्ड अंदर बाहर करते हुए चोदने लगा. धीरे धीरे मैं अपनी स्पीड बड़ा रहा था और साथ ही आंटी की सिसकारियाँ भी तेज़ होती जा रही थी.

आंटी – आ आ अहह… आ आ आह… ओह… ऐसे ही, ज़ोर से… चोदो… मेरी ले लो… मैं रंडी हूँ… मेरी मार लो… आ आ हह… मस्त लण्ड है तेरा… कुतिया की तरह, चोद मुझे… आ आहह… फाड़ डाल… मैं झड़ रही हूँ… करते रहो… ऐसे ही… आ आ आ आ आ आ आ आ ह ह ह ह ह ह ह ह…

मैं – साली, रंडी… कुतिया… ले और ले… आह अहहा… और फिर हम दोनों ने एक साथ चरम आनंद का अनुभव किया और मैंने आंटी की चूत के अंदर ही निकाल दिया.

चुदाई के बाद थोड़ी देर बाद आंटी उठी और बाहर जाकर उन्होंने एक पेग और बनाया. मैं भी उनके पीछे गया और उनको देख कर मेरा भी मन हुआ पीने का.

मैं: आंटी, अकेले अकेले... मुझे नहीं पिलाओगी.

आंटी: पहले कभी पी है तूने..

मैं: व्हिस्की तो नहीं पर बियर कई बार पी है.

आंटी ने मुस्कुराते हुए मुझे भी एक गिलास पकड़ा दिया और हम दोनों सोफे पर नंगे ही आमने सामने बैठ कर पीने लगे.

आंटी: बहुत मज़ा आया आज चुदाई में… मैं कब से तुम्हारे लण्ड की भूखी थी… आज तुम्हारे लण्ड का मज़ा मिल ही गया… अब हम दोनों जब मौका मिलेगा चुदाई करेंगें और खूब ऐश करेंगें… बड़ा मज़ा आएगा…

आंटी के आँखे नशे से लाल हो गयी थी. शायद वो नशे में बडबडा रही थी. अपना गिलास ख़तम करके वो बाथरूम की तरफ चल दी. मैं भी धीरे धीरे पी रहा था और सोच रहा था की आज आंटी चुदवा ही लिया है अब रिक्की की चूत दूर नहीं. अपना गिलास ख़तम करके मैं भी बाथरूम की तरफ चला गया.
 
मैं बाथरूम के अंदर गया. अंदर आंटी शावर के नीचे नंगी खड़ी हो कर शावर ले रही थी. उन्होंने एक बार नज़र उठा के मेरी तरफ देखा, एक हल्की सी स्माइल दी और फिर से आँखें बंद कर के शावर का मज़ा लेने लगी.

मैं जा कर शावर में आंटी के पीछे खड़ा हो गया और उनकी दोनों चून्चिया पीछे से हाथ फैला कर अपने दोनों हाथों में भर ली और निपल्स हल्के हल्के मसलने लगा. मेरा लण्ड फिर से पूरा तन के खड़ा था और मैं अपने लण्ड को आंटी की विशालकाय गाण्ड पर रगड़ रहा था.

आंटी: क्या मेरी गाण्ड मारने का इरादा है, मोनू… दिल नहीं भरा क्या अभी…

मैं: हाँ आंटी मारनी तो मुझे तुम्हारी है… पर गाण्ड नहीं चूत मारनी है… चलो बेड पर चलते हैं…

इतना कह कर मैंने आंटी को बाहों में उठा लिया और बाथरूम से बाहर की तरफ लाने लगा.

आंटी: तुम इतना बेसब्र क्यों हो रहे हो की मुझे लेने बाथरूम में ही आ गये… अरर्रा आआ ययय ययय यायययी… क्या कर रहे हो, मैं गिर जाउंगी…

मैं: डोंट वरी, कुछ नहीं होगा… तुम को बिस्तर पे ले जा रहा हूँ, चोदने के लिए…

फिर, मैं आंटी को बाहों में उठाए चलता हुआ, बाथरूम से बाहर आ गया और उसको गीला ही बिस्तर पर फेंक दिया. सीधा लेट के आंटी ने अपनी टाँगें फोल्ड कर के फैला दी.

मैंने आगे बढ कर अपने आप को कामिनी आंटी की टाँगों के बीच में पोज़िशन किया और अपने लण्ड की टिप को आंटी के उसी छेद पर रख दिया जहाँ से रिशू निकल कर इस दुनिया में आया था और अपने दोनों हाथों को उनकी एक एक चूची पर रख कर उनको मसलते हुए और अपनी बॉडी का पूरा वज़न आंटी की बॉडी पर डालते हुए उनके ऊपर लेट गया और उसके होंठ और चेहरा चूसने लगा.

मैंने आंटी के बदन को अपने हाथों रौंदते हुए अपना लण्ड फिर से आंटी की चूत में घुसा दिया. फिर मैंने आंटी को धीरे धीरे अंदर बाहर करते हुए ठोकना शुरू किया. इस बार मैं कुछ ज्यादा ही उतेज्ज़ित और बेदर्द हो गया था. अपने दोनों हाथों को मैंने आंटी के सीने पर रखा था और बॉडी वेट और हाथों के प्रेशर से उसके चून्चिया रगड़ और मसल रहा था. उनके चेहरे और लिप्स को ज़ोर से चूस रहा था और बहुत ताक़त से उसे चोद रहा था.
 
ऐसी हालत में आंटी को भी बहुत मज़ा आ रहा था और थोड़ा सा दर्द भी हो रहा था. वो दर्द और मज़े की मिली जुली सिसकारियाँ, अपने मुंह से निकाल रही थी. थोड़ी देर इस तरह ठोकने के बाद में, आंटी के ऊपर से उठा और आंटी को भी उठाया फिर उन्हें डॉगी स्टाइल में पोज़िशन किया और उसकी कमर को पकड़ कर ताक़त से पीछे खींचते हुए बहुत ज़ोर से अपना पूरा लण्ड आंटी की चूत में घुसा दिया.

अब बेड पर मैं अपने घुटनों पर खड़ा था और आंटी मेरे आगे कुतिया बनी हुई थी. मेरा लण्ड उनकी चूत में था और मैं उनको कमर से पकड़ कर अपनी बॉडी और लण्ड को स्थिर रख कर उसकी बॉडी आगे पीछे घसीटते हुए चोद रहा था. थोड़ी देर ऐसे चोदने के बाद मैंने फिर पोज़िशन चेंज की और मैं सीधा लेट गया.

मैंने आंटी को अपने ऊपर लण्ड पर बिठाया और लण्ड उसकी चूत में पूरा घुसा दिया. अब आंटी मेरे ऊपर कूद रही थी और मैं उसके चून्चिया मसल रहा था. फिर से मिशनरी पोज़िशन में आ के मैंने आंटी को ज़ोर ज़ोर से ठोकना शुरू किया. इस बीच ये सब करते हुए आंटी दो बार झड़ गई थी और उनके चेहरे पर एक खुशी थी.

अब मैं भी झड़ने के करीब था तो मैंने लण्ड को आंटी की चूत में से निकाला और थोड़ा ऊपर की तरफ जा कर उनके फेस पर रगड़ना शुरू किया, कामिनी आंटी मेरी बॉल्स चाट रही थी और मैं लण्ड को पकड़ कर रगड़ रही थी. थोड़ी देर में मेरे लण्ड ने भी पिचकारी छोड़ दी और मेरा वीर्य आंटी के पूरे चेहरे पर गिर गया.

आंटी बोली इस बार मज़ा आ गया मोनू. कमाल कर दिया तुमने. चलो अब नहा लेते है

और फिर हम दोनों ने फिर से एक बार शावर लिया और कपड़े पहन कर तैयार हो गए.
 
Back
Top