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Guest
अनय
तू ही तो जन्नत मेरी,तू ही मेरा सुकून
तू ही अंखियों की ठंडक, तू ही दिल की है दस्तक
और कुछ ना जानूं, मैं बस इतना ही जानूं
तुझमें रब दिखता है, यारा मैं क्या करूँ
सजदे सर झुकता है, यारा मैं क्या करुँ
कैसी है ये दूरी, कैसी मजबूरी
मैंने नज़रों से तुझे छू लिया
कभी तेरी खुशबू, कभी तेरी बातें
बिन मांगे ये जहाँ पा लिया
तू ही दिल की है रौनक, तू ही जन्मों की दौलत
और कुछ ना जानूं, बस इतना ही जानूं
तुझमें रब दिखता है, यारा मैं क्या करूँ...
छम छम आए, मुझे तरसाए
तेरा साया छेड़ के चूमता..तू जो मुस्काए, तू जो शरमाये
जैसे मेरा है खुदा झूमता..तू मेरी है बरकत,
तू ही मेरी इबादतऔर कुछ ना जानूं,
बस इतना ही जानूं तुझमें रब.....
डॉली
ना कुछ पूछा, ना कुछ माँगा
तूने दिल से दिया जो दिया
ना कुछ बोला, ना कुछ तोला
मुस्कुरा के दिया जो दिया
तू ही धूप, तू ही छाया
तू ही अपना पराया
और कुछ ना जानूँ बस इतना ही जानूँ
तुझमें रब दिखता है यारा मैं क्या करूँ
सजदे सर झुकता है यारा मैं क्या करूँ...
दोनों की जोड़ी बिल्कुल ऐसी थी जैसी रब ने बनाई जोड़ी..!!
दोनों ने कुछ ना कहकर भी बहुत कुछ कह दिया था..!!
संगीत खतम होते होते सुबह के चार बज चुके थे पर
अब तक किसी का भी नाचना बन्द नहीं हुआ था..!!
दादाजी के कहने पर सबने बिदाई ली और निकल कर
घर आ गए और डॉली की फैमिली तो होटल में ही थी
तो सब जाकर सो गए और थके हुए होने की वजह से
सबको जल्दी ही नींद आ गई..!!
दादू दादी को नींद नहीं आ रही थी तो वे दोनों ही गार्डन
में चले गए..!! इधर डॉली भी बालकनी में बैठी अपने
बचपन को याद कर रही थी, उसकी नजर दादू दादी पर
पड़ी तो वो भी नीचे आ गई..!!
डॉली को देख दादू और दादी दोनों ही हैरान हुए फिर
उसे देख मुस्कुरा दिए..!!
डॉली-आप दोनों सोए क्यों नहीं अब तक तक गए होंगे ना..
दादी-तुम भी तो नहीं सोई..!!
डॉली-हमें पता है आज हमारी शादी है इसलिए आप
दोनों परेशान है कि हम आपसे दूर हो जायेंगे..!! पर
हम दूर कहां होने वाले है आप जब याद करेंगे हम आ
जायेंगे वैसे भी ऋषिकेश दूर नहीं है हरिद्वार से..!!
दादू-हां ये तो है..!!
डॉली दोनों का हाथ पकड़ खड़े करते हुए-तो अब चलिए
और आराम कीजिए आज हमारी शादी है और आप दोनों
थके हुए अच्छे नहीं लगेंगे और हम भी..!!
दादू दादी मुस्कुरा दिए डॉली उन्हीं के रूम में उनके साथ
सो गई और दादू दादी भी जल्दी ही सो गए..!!
अगले दिन सबकी आंखें देर से खुली, क्युकी सब सुबह
सुबह ही सो पाए थे..!! उठने के बाद सब जल्दी जल्दी
तैयार हो होटल गार्डन में शादी का मण्डप और बाकी की
तैयारियां देखने लगे..!!
इधर भी बारात की तैयारियां जोरो शोरो से चल रही थी..!!
कोई अपने कपड़े प्रेस कर रहा था तो कोई किसी और
से करवा रहा था.. किसी को मोजे नहीं मिल रहे थे तो
किसी की टाई..!!
डॉली को तैयार करने के लिए पार्लर वाली आ चुकी थी..!!
बाकी की लेडीज़ भी अपने अपने तरीके से तैयार हो रही
थी..!! जेंट्स लोग तैयार होकर गार्डन में जा चुके थे..!!
शाम होते होते अंधेरा भी होते जा रहा था और अंधेरे में
जगमगाती लाईट्स बहुत खूबसूरत लग रही थी..!!
जैसे-जैसे घड़ी की सुइयां आगे बड़ रही थी डॉली का
दिल तेजी से धड़क रहा था..!! उसकी नर्वसनेस उसके
चेहरे पर झलक रही थी..!!
तू ही तो जन्नत मेरी,तू ही मेरा सुकून
तू ही अंखियों की ठंडक, तू ही दिल की है दस्तक
और कुछ ना जानूं, मैं बस इतना ही जानूं
तुझमें रब दिखता है, यारा मैं क्या करूँ
सजदे सर झुकता है, यारा मैं क्या करुँ
कैसी है ये दूरी, कैसी मजबूरी
मैंने नज़रों से तुझे छू लिया
कभी तेरी खुशबू, कभी तेरी बातें
बिन मांगे ये जहाँ पा लिया
तू ही दिल की है रौनक, तू ही जन्मों की दौलत
और कुछ ना जानूं, बस इतना ही जानूं
तुझमें रब दिखता है, यारा मैं क्या करूँ...
छम छम आए, मुझे तरसाए
तेरा साया छेड़ के चूमता..तू जो मुस्काए, तू जो शरमाये
जैसे मेरा है खुदा झूमता..तू मेरी है बरकत,
तू ही मेरी इबादतऔर कुछ ना जानूं,
बस इतना ही जानूं तुझमें रब.....
डॉली
ना कुछ पूछा, ना कुछ माँगा
तूने दिल से दिया जो दिया
ना कुछ बोला, ना कुछ तोला
मुस्कुरा के दिया जो दिया
तू ही धूप, तू ही छाया
तू ही अपना पराया
और कुछ ना जानूँ बस इतना ही जानूँ
तुझमें रब दिखता है यारा मैं क्या करूँ
सजदे सर झुकता है यारा मैं क्या करूँ...
दोनों की जोड़ी बिल्कुल ऐसी थी जैसी रब ने बनाई जोड़ी..!!
दोनों ने कुछ ना कहकर भी बहुत कुछ कह दिया था..!!
संगीत खतम होते होते सुबह के चार बज चुके थे पर
अब तक किसी का भी नाचना बन्द नहीं हुआ था..!!
दादाजी के कहने पर सबने बिदाई ली और निकल कर
घर आ गए और डॉली की फैमिली तो होटल में ही थी
तो सब जाकर सो गए और थके हुए होने की वजह से
सबको जल्दी ही नींद आ गई..!!
दादू दादी को नींद नहीं आ रही थी तो वे दोनों ही गार्डन
में चले गए..!! इधर डॉली भी बालकनी में बैठी अपने
बचपन को याद कर रही थी, उसकी नजर दादू दादी पर
पड़ी तो वो भी नीचे आ गई..!!
डॉली को देख दादू और दादी दोनों ही हैरान हुए फिर
उसे देख मुस्कुरा दिए..!!
डॉली-आप दोनों सोए क्यों नहीं अब तक तक गए होंगे ना..
दादी-तुम भी तो नहीं सोई..!!
डॉली-हमें पता है आज हमारी शादी है इसलिए आप
दोनों परेशान है कि हम आपसे दूर हो जायेंगे..!! पर
हम दूर कहां होने वाले है आप जब याद करेंगे हम आ
जायेंगे वैसे भी ऋषिकेश दूर नहीं है हरिद्वार से..!!
दादू-हां ये तो है..!!
डॉली दोनों का हाथ पकड़ खड़े करते हुए-तो अब चलिए
और आराम कीजिए आज हमारी शादी है और आप दोनों
थके हुए अच्छे नहीं लगेंगे और हम भी..!!
दादू दादी मुस्कुरा दिए डॉली उन्हीं के रूम में उनके साथ
सो गई और दादू दादी भी जल्दी ही सो गए..!!
अगले दिन सबकी आंखें देर से खुली, क्युकी सब सुबह
सुबह ही सो पाए थे..!! उठने के बाद सब जल्दी जल्दी
तैयार हो होटल गार्डन में शादी का मण्डप और बाकी की
तैयारियां देखने लगे..!!
इधर भी बारात की तैयारियां जोरो शोरो से चल रही थी..!!
कोई अपने कपड़े प्रेस कर रहा था तो कोई किसी और
से करवा रहा था.. किसी को मोजे नहीं मिल रहे थे तो
किसी की टाई..!!
डॉली को तैयार करने के लिए पार्लर वाली आ चुकी थी..!!
बाकी की लेडीज़ भी अपने अपने तरीके से तैयार हो रही
थी..!! जेंट्स लोग तैयार होकर गार्डन में जा चुके थे..!!
शाम होते होते अंधेरा भी होते जा रहा था और अंधेरे में
जगमगाती लाईट्स बहुत खूबसूरत लग रही थी..!!
जैसे-जैसे घड़ी की सुइयां आगे बड़ रही थी डॉली का
दिल तेजी से धड़क रहा था..!! उसकी नर्वसनेस उसके
चेहरे पर झलक रही थी..!!