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प्यासी जिंदगी complete

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कुछ देर बाद मैंने अपने होंठ बाजी के होंठों से अलग किए और कहा- बाजी हमने पहले कभी ऐसे अम्मी का दरवाज़ा बाहर से लॉक नहीं किया.. वो उठ गईं तो कहीं उनके ज़हन में ऐसे ही कोई शक़ ना पैदा हो जाए?

बाजी की आँखें बंद थीं और उन्होंने झुंझलाहट में लरज़ती आवाज़ से कहा- कुछ नहीं होता वसीम.. आओ ना प्लीज़..

और वे मेरे सिर को वापस नीचे दबाने लगीं।

मैंने अपने सिर को अकड़ा कर नीचे होने से रोका और कहा- चलो ना बाजी.. मेरे रूम में चलते हैं.. दरवाज़ा खोल देते हैं अम्मी का..

बाजी ने आँखें खोल दीं.. उनके चेहरे पर शदीद नागवारी के भाव थे, उन्होंने दोनों हाथ मेरी गर्दन में डाले और कहा- क्या है वसीम.. तुम भी ना.. मैं कहीं नहीं जा..वा.. रही.. तुम जाओ.. तुम्हें जहाँ जाना है।

बाजी का ये अंदाज़ ऐसा था जैसे किसी बच्चे को चीज़ दिलाने से मना करो तो वो नाराज़ हो जाता है।

मैंने मुस्कुरा कर बाजी को देखा और कहा- अच्छा मेरी सोहनी बहना जी.. इतनी छोटी बातों पर नाराज़ थोड़ी ना होते हैं..

मैंने बात खत्म करके बाजी के होंठों को चूमने के लिए अपना सिर झुकाया तो उन्होंने अपने हाथ से मेरे चेहरे को रोका और होंठ दूसरी तरफ करते हो नाराज़गी से कहा- अच्छा जाओ.. अब खोल दो अम्मी का दरवाज़ा..

बाजी यह कह कर मेरी गोद से उठने लगीं तो मैंने उनको वापस गोद में दबाते हुए कहा- मैं अपनी जान से प्यारी बहना को खुद ही साथ ले जाता हूँ..

यह कह कर मैंने अपना बाज़ू बाजी के कन्धों के नीचे रखा और एक बाज़ू को उनके कूल्हों के नीचे से गुजार कर उनकी रान को मजबूती से थाम लिया और खड़ा हो गया।

‘वसीम..!’ बाजी ने अचानक लगने वाले झटके की वजह से मुझे पुकारा और फिर मेरी गर्दन में दोनों हाथ डाल कर मुझे मुहब्बत भरी नजरों से देखती मुस्कुराने लगीं।

मैंने बाजी को गोद में उठाए-उठाए ही जाकर अम्मी का दरवाज़ा अनलॉक किया और सरगोशी में बाजी से पूछा- बहना जी कहाँ चलें?? आपके रूम में या ऊपर हमारे रूम में?

बाजी ने सोचने की एक्टिंग करते हुए कहा- उम्म्म्म.. ऐसा करो बाहर रोड पर ले चलो..

और दबी आवाज़ में हँसने लगीं।

‘मेरा बस चले तो मैं तो आपको सात पर्दों में छुपा कर रखूँ जहाँ मेरे अलावा आपको कोई देख भी ना सके!’

मैं ये कह कर बाजी के कमरे की तरफ चल दिया।

बाजी बोलीं- नहीं वसीम यहाँ नहीं.. ऊपर ही ले चलो मुझे.. अपने कमरे में.. अम्मी अगर उठ भी गईं तो ऊपर नहीं आ सकेंगी.. और हनी.. ज़ुबैर तो लेट ही वापस आयेंगे।

मैंने बाजी की इस बात पर मुस्कुरा कर उन्हें देखा.. तो उन्होंने शर्मा कर अपना चेहरा मेरे सीने में छुपा लिया और मैं ऊपर अपने कमरे की तरफ जाते हुए बाजी को भी छेड़ने लगा- अच्छा.. आज तो मेरी बहना जी खुद कह रही हैं कि उन्हें अपने कमरे में ले जाऊँ.. हाँ..!

बाजी ने मेरी तरफ देखा और शर्म से लाल चेहरा लिए बोलीं- बकवास मत करो.. वरना मैं यहाँ ही उतर जाऊँगी।

मैं बाजी को देख कर हँसने लगा.. लेकिन बोला कुछ नहीं।

मैं कमरे में दाखिल हुआ तो दरवाज़ा बंद किए बगैर ही बाजी को लेकर बिस्तर के क़रीब पहुँच गया।

मैंने बाजी को बिस्तर पर लिटाने लगा.. तो उनके वज़न और बाजी के हाथ मेरी गर्दन में होने की वजह से खुद भी उनके ऊपर ही गिर गया।

बाजी ने फिर से मेरे बालों में हाथ फेरा और कहा- उठो.. दरवाज़े को लॉक कर दो..

उन्होंने मेरी गर्दन से हाथ निकाल दिए।

मैंने दरवाज़ा लॉक किया और वापस आते हुए अपनी क़मीज़ भी उतार दी।

बाजी बेड पर बेसुध सी लेटी छत को देखते कुछ सोच रही थीं.. मैं चंद लम्हें उन्हें देखता रहा।

फिर मैंने बाजी के दोनों हाथ पकड़ कर खींचे और उन्हें बिठा कर पीछे हाथ किए और बाजी की क़मीज़ को खींच कर उनके कूल्हों के नीचे से निकाल दिया।

मैं अपने हाथों में बाजी की क़मीज़ का दामन आगे और पीछे से पकड़े.. उनकी क़मीज़ उतारने के लिए ऊपर उठाने लगा तो बाजी ने अपने हाथ मेरे हाथ पर रखा और फिक्रमंद लहजे में कहा- वसीम.. ये सब गलत है.. अभी भी रुक जाओ..

बाजी की कैफियत बहुत मुतज़ाद सी थी.. कभी तो वो ये सब एंजाय करने लगती थीं.. तो कभी उनको गिल्टी फील होने लगता था.. और सब तो होना ही था कि अपने सगे भाई से ऐसा रिश्ता कोई ऐसी बात नहीं थी.. जो उनका जेहन आसानी से क़ुबूल कर लेता।

उनकी बदलती कैफियत फितरती थी और मैं उनकी हालत अच्छी तरह समझता था।

‘बाजी प्लीज़.. अब कुछ मत सोचो बस जो हो रहा है होने दो..’ मैंने ये कह कर बाजी की आँखों में देखा.. तो उन्होंने एक अहह भरी और मेरे हाथ से अपना हाथ उठा दिया।

मैंने बाजी की क़मीज़ को गर्दन तक उठाया.. तो बाजी ने भी मेरी मदद करते हुए अपनी क़मीज़ को अपने जिस्म से अलग कर दिया।

बाजी ने आज भी ब्लैक लेसदार ब्रा ही पहन रखी थी।

क़मीज़ उतारने के बाद मैं दोबारा अपने हाथ सामने से घुमाता हुआ बाजी की पीठ पर ले गया और उनकी ब्रा का हुक खोलने लगा.. तो बाजी ने अपने दोनों हाथों से ब्रा को सीने के उभारों पर ही थाम लिया।

मैंने हुक खोला तो बाजी ने अपने बाज़ू से ब्रा को अपने मम्मों पर ही रखते हुए ब्रा की पट्टियाँ अपने हाथों से निकाल दीं और इसी तरह ब्रा को थामे हुए ही लेट गईं।

मैंने बाजी के सीने से ब्रा हटाना चाहा.. तो उन्होंने अपने सिर को नहीं के अंदाज़ा में ‘राईट-लेफ्ट’ जुंबिश दी और अपनी बाँहें फैलाते हुए मुझे गले से लगने का इशारा किया।

अब मेरे और बाजी के जिस्म पर सिर्फ़ हमारी सलवारें ही मौजूद थीं और बाजी के सीने के उभारों पर उनकी खुली हुई ब्रा रखी हुई थी। मैंने अपने दोनों घुटने बाजी की टाँगों के इर्द-गिर्द टिकाए और उनके सीने के उभारों पर अपना सीना रखते हो बाजी के ऊपर लेट गया।

मेरे लेटते ही बाजी ने मेरी कमर को अपने बाजुओं से कसा और मेरे होंठों से अपने होंठ चिपका दिए। कभी बाजी मेरे होंठ चूसने लगती थीं.. तो कभी मैं.. कभी मैं बाजी की ज़ुबान चूसता.. तो कभी बाजी मेरी ज़ुबान का रस चूसने लगतीं।

मैं बाजी के चेहरे को अपने हाथों में थामे 10 मिनट तक किस करता रहा। फिर बाजी ने अपने होंठ मेरे होंठों से अलग किए और नशीली आवाज़ में कहा- वसीम थोड़ा ऊपर उठो..

मैंने ऊपर उठने के लिए अपने सीने को उठाया ही था कि बाजी ने अपना लेफ्ट हाथ मेरी कमर से हटाया.. और अपने सीने पर रखी ब्रा को हम दोनों के बीच से खींचते हुए राईट हैण्ड से मेरी कमर को वापस अपने जिस्म के साथ दबा दिया।

जैसे ही बाजी के सख़्त हुए निप्पल मेरे बालों भरे सीने से टकराए.. तो मेरे जिस्म में एक बिजली सी कौंध गई और बाजी के जिस्म में भी मज़े की लहर उठी और उनके मुँह से एक सिसकती ‘अहह..’ निकली।

यह मेरी जिन्दगी में पहली बार थी कि मैं किसी लड़की और वो भी अपनी सग़ी बहन जो हुस्न का पैकर थी.. के मम्मों को अपने सीने से चिपका महसूस कर रहा था।

मैं अपने होश खोता जा रहा था और मेरे साथ-साथ बाजी के दिल की धड़कनें भी बहुत तेज हो गई थीं।

उनकी धड़कनों की आवाज़ मुझे साफ सुनाई दे रही थी।

मैंने एक बार फिर बाजी के होंठों को चूमा और फिर उनकी गर्दन पर अपने होंठ रख दिए।

मैंने पहले बाजी की गर्दन के एक-एक मिलीमीटर को चूमा और फिर अपनी ज़ुबान निकाली और बाजी की गर्दन को चाटने लगा।

मेरी ज़ुबान ने बाजी की गर्दन को छुआ तो उन्होंने एक झुरझुरी सी ली और मेरी कमर पर ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर तेजी से हाथ फेरने के साथ-साथ अपने सीने को राईट-लेफ्ट हरकत देते हुए अपने निप्पल्स मेरे सीने से रगड़ने लगीं।

बाजी ने अपनी आँखें मज़बूती से भींच रखी थीं और चेहरे का गुलाबीपन सुर्खी में तब्दील हो गया था।

मेरा लण्ड अपने पूरे जोश में आ चुका था और बाजी की रानों के बीच दबा हुआ था। मैंने बाजी की गर्दन को सामने से और दोनों साइडों से मुकम्मल तौर पर चाटा और अपने घुटनों पर वज़न देता हुआ अपने लण्ड को बाजी की रानों से थोड़ा उठा लिया और अपना सीना भी बाजी के सीने से उठाते हुए गर्दन से नीचे आने लगा।

मैंने नीचे की तरफ ज़ोर दिया.. तो बाजी ने अपने हाथों की गिरफ्त भी ढीली कर दी और एक हाथ से मेरी कमर सहलाते हुए दूसरा हाथ मेरे सिर पर फेरने लगीं।

मैं गर्दन से होता हुआ बाजी के कंधे पर आया और अपनी ज़ुबान से चाटते बाजी के बाज़ू.. हाथ और फिर हाथ की ऊँगलियों तक पहुँच गया।

एक-एक ऊँगली को मुकम्मल चूसने के बाद मैं बाज़ू के निचले हिस्से को चाटता हुआ बाजी की बगलों में आ कर रुका।

 
बाजी की बगलें बालों से बिल्कुल पाक थी। वो कभी फालतू बालों को बढ़ने नहीं देती थीं और बाकायदगी से फालतू बाल साफ करती थीं जो कि उनकी नफीस तबीयत का ख़ासा था कि गंदगी से उन्हें नफ़रत थी।

बाजी की राईट बगल को मुकम्मल चाटते और चूमते हुए मैं कंधों से होता दूसरे हाथ तक पहुँचा और उसी तरह वापस उनके सीने के ऊपरी हिस्से तक आ गया।

बाजी के सीने के ऊपरी हिस्से को चाटने के बाद मैंने अपना रुख़ उनके सीने के राईट उभार की तरफ किया और अपनी बहन के मम्मों की गोलाई पर ज़ुबान फेरने लगा।

मैं बारी-बारी से बाजी के दोनों मम्मों को चाटता और चूमता रहा लेकिन उनके सीने के उभारों की पिंक सर्कल (अरोला) और पिंकिश ब्राउन खूबसूरत निप्पल को अपनी ज़ुबान नहीं टच की।

मैं जब अपनी ज़ुबान से उनके उभार को चाटते हुए पिंक ऐरोला के पास पहुँचता.. तो उससे टच किए बगैर ही सिर्फ़ गोलाई पर ज़ुबान फेरने लगता।

मेरी इस हरकत पर बाजी मचल सी जातीं।

जब मैंने 4-5 बार ऐसा किया तो उनकी बर्दाश्त जवाब दे गई.. और इस बार जब फिर मैं ज़ुबान वहाँ पर टच किए बगैर हटने लगा.. तो बाजी ने गुस्सैल सी आवाज़ में सिसकारी भरी और अपने दोनों हाथों से मेरे सिर की पुश्त से बालों और गर्दन को पकड़ कर मेरा मुँह अपनी निप्पल्स की तरफ दबाने लगीं।

मेरे चेहरे पर शैतानी मुस्कुराहट फैल गई.. मैं जान गया था कि अब बाजी मज़े और लज़्ज़त में पूरी तरह डूब गई हैं।

मैंने अपने सिर को झुकाया और बाजी के लेफ्ट निप्पल को अपने मुँह में ले लिया।

ववॉवव.. बाजी की निप्पल को मुँह में लेते ही.. मेरा लण्ड फनफना उठा और मैं पागलों की तरह बारी-बारी से दोनों मम्मों को चूसने लगा।

बाजी के जिस्म में भी खिचाव पैदा होना शुरू हो गया था और वो भी बुरी तरह मचलने लगी थीं।

मैं कोशिश करने लगा कि बाजी के सीने के उभार को पूरा अपने मुँह मैं भर लूँ लेकिन ये मुमकिन नहीं था क्योंकि मेरा मुँह बहुत छोटा था और बाजी के मम्मे बहुत बड़े थे।

मैंने बाजी के उभार को चूसते हुए उनके निप्पल को अपने दाँतों मैं. पकड़ा और दबाया.. तो बाजी मज़े और तक़लीफ़ की मिली-जुली आवाज़ में चिल्ला उठीं- आहह.. वसीम.. ज़रा.. आआ आआराम से.. उफफ्फ़..अह…

मैंने बाजी के सीने के उभारों को चूसते हुए ही उनका हाथ को पकड़ा और सलवार के ऊपर से ही अपने लण्ड पर रख दिया। बाजी ने फ़ौरन ही मेरे लण्ड को मुठी में दबा लिया।

बाजी को लण्ड पकड़ा कर मैंने अपना हाथ उनकी रान पर रखा और सलवार के ऊपर से ही रान को सहलाते हुए अपना हाथ उनकी टाँगों के बीच रख दिया।

बाजी मेरे हाथ को अपनी चूत पर महसूस करते ही उछल पड़ीं और बोलीं- नहीं वसीम.. प्लीज़ यहाँ नहीं.. टच मत करो न..

उन्होंने अपनी टाँगों को आपस में दबा लिया।

मैंने अपना हाथ हटाया और तेजी से बाजी के मम्मों को चूसने और दबाने लगा..

कुछ ही देर में बाजी की साँसें बहुत तेज हो गईं और जिस्म अकड़ना शुरू हो गया।

मैंने दोबारा हाथ उनकी टाँगों के बीच रख दिया.. बाजी ने कुछ कहने के लिए मुँह खोला ही था कि मैंने अपने होंठ उनके होंठों से लगा दिए और ज़ुबान उनके मुँह में डाल दी।

इस बार मेरी दो उंगलियाँ सीधी उनकी चूत के दाने पर ही छुई थीं.. जिससे बाजी के जिस्म को एक झटका लगा और उन्होंने बेसाख्ता अपनी टाँगें थोड़ी खोल दीं।

मैंने बाजी की चूत के दाने को सहलाते हुए दोबारा उनके निप्पल को अपने मुँह में लिया और चूसने लगा।

मैंने अपनी उंगलियाँ बाजी की चूत के दाने से उठाईं और चूत के अन्दर दाखिल करने के लिए नीचे दबाव दिया ही था कि बाजी फ़ौरन बोलीं- वसीम.. रुको ना.. हाय प्लीज.. उईईई.. और ऊपर.. रगड़ो ना.. आआहह..

बाजी की साँसें बहुत तेज हो गई थीं और जिस्म मुकम्मल तौर पर अकड़ गया था। बाजी मेरे लण्ड को भी अपनी तरफ खींचने लगी थीं।

मुझे भी ऐसा महसूस हो रहा था कि शायद मैं अब कंट्रोल नहीं कर पाऊँगा.. मैंने बहुत तेज-तेज बाजी की चूत के दाने को रगड़ना शुरू कर दिया था और उनके निप्पल को चूसने और दाँतों से काटने लगा था।

अचानक ही बाजी का जिस्म बिल्कुल अकड़ गया और उन्होंने अपने कूल्हे बिस्तर से उठा दिए.. मेरे लण्ड पर बाजी की गिरफ्त बहुत सख़्त हो गई थी.. वो अपनी पूरी ताक़त से मेरे लण्ड को अपनी मुट्ठी में भींचने लगी थीं।

फिर बाजी के जिस्म ने 2 शदीद झटके लिए.. और उनके मुँह से बहुत लंबी ‘आआआआआहह..’ निकली.. उनकी चूत ने पानी छोड़ दिया था।

उसी वक़्त मेरे लण्ड को भी झटका लगा और मेरे लण्ड का जूस मेरी सलवार को गीला करने लगा।

मेरे हाथ की हरकत रुक गई थी और मैं बाजी के सीने के उभार पर ही मुँह रखे हुए निढाल सा लेट गया।

बाजी की साँसें आहिस्ता-आहिस्ता मामूल पर आ रही थीं।

काफ़ी देर तक ऐसे ही लेटे रहने के बाद बाजी ने मेरे सिर पर हाथ फेरना शुरू किया और बोलीं- वसीम उठो.. मुझे भी उठने दो..

मैं आँखें बंद किए बिल्कुल निढाल पड़ा था, मैंने बाजी की बात का जवाब नहीं दिया और मेरे मुँह से सिर्फ़ एक ‘हूऊऊन्न्न्..’ निकली।

बाजी ने नर्मी से मेरे चेहरे को अपने सीने के उभार से उठाया और मेरे नीचे से निकल गईं और तकिया उठा कर मेरे चेहरे के नीचे रख दिया।

मैं वैसे ही बेतरतीब सी हालत में उल्टा.. बिस्तर पर पड़ा रहा। मुझे ऐसे लग रहा था जैसे मेरे जिस्म से बिल्कुल जान निकल गई है और अब मैं कभी उठ नहीं पाऊँगा।

‘देखो वसीम ऐसा लग रहा है.. मैंने पेशाब किया है.. पूरी सलवार गीली हो रही है।’ बाजी यह बोल कर खुद ही हँसने लगीं।

मैंने बोझिल से अंदाज़ में आँखें खोल कर देखा तो बाजी अपनी टाँगों को फैलाए.. सलवार को दोनों हाथों से पकड़ कर देख रही थीं।

कोई आवाज़ ना सुन कर बाजी ने मेरी तरफ देखा और खिलखिला कर हँसने लगीं- हालत तो देखो ज़रा शहज़ादे की.. मुर्दों की तरह पड़े हो..

मैंने कुछ नहीं कहा.. बस झेंपी हुई सी हँसी हँस दिया।

बाजी बिस्तर से उठते हुए बोलीं- वसीम तुम लोगों के पास मेरे या हनी के कपड़े तो ज़रूर होंगे.. जिनसे तुम मज़े लिया करते थे।

मेरी तरफ से कोई जवाब ना पा कर वो बाथरूम की तरफ चली गईं।

मैंने भी आँखें बंद कर लीं क्योंकि मैं बहुत कमज़ोरी महसूस कर रहा था।

बाजी बाथरूम से बाहर आईं और फिर पूछा- वसीमरर.. हमारा कोई सूट पड़ा है या नहीं??

मैंने आँखें खोल कर देखा तो बाजी आईने के सामने नंगी खड़ी अपने बालों को ब्रश कर रही थीं और अपनी सलवार शायद बाथरूम में ही उतार आई थीं।

मैंने अपनी बहन के नंगे जिस्म पर नज़र मारी.. तो अपनी क़िस्मत पर रश्क आया कि खुदा ने कितना हसीन और मुकम्मल जिस्म दिया है मेरी बहन को.. सीने के उभारों की मुकम्मल गोलाइयाँ.. कूल्हों की खूबसूरत शेप.. लंबी सुडौल टाँगें.. भारी-भारी रानें.. लंबे स्लिम बाज़ू.. खूबसूरत हाथ.. गोया जिस्म का हर हिस्सा इतना मुकम्मल है कि हर हिस्से की तारीफ में गज़ल कही जा सकती है।

‘मेरी पैंट की पॉकेट में चाभी पड़ी है.. अलमारी में सूट होगा, आप देख लें..’ मैंने मरी सी आवाज़ में कहा और फिर बाजी के जिस्म को निहारने लगा।

बालों में ब्रश करने के बाद बाजी ने मेरी पैन्ट से चाभी निकाली और अल्मारी में कोई सूट देखने लगीं और एक सूट उन्हें मिल ही गया। लेकिन क़मीज़ अलग और सलवार अलग थी।

लाइट ग्रीन लॉन की क़मीज़.. बाजी की थी और वाइट सलवार हनी की थी।

‘ये कब से यहाँ पड़ी है.. मैं ढूँढ ढूँढ कर पागल हुए जा रही थी..’ बाजी ने गुस्सा करते हुए कहा।

मैंने एक नज़र बाजी के हाथ में पकड़ी क़मीज़ को देखा और कहा- यह तो बहुत दिनों से यहाँ पड़ी है.. लेकिन सलवार तो कल रात को ही ज़ुबैर कहीं से उठा कर लाया था।

बाजी ने क़मीज़ पहनी और सलवार पहनने के लिए फैलाई थी कि कुछ देख कर चौंक गईं।

मैंने बाजी के चेहरे के बदलते रंग देखे तो पूछा- अब क्या हो गया बाजी?

बाजी सलवार लेकर मेरी तरफ आते हुए बोलीं- ये देखो ज़रा.. इस हनी कमीनी को ज़रा भी अहसास नहीं है कि घर में अब्बू होते हैं.. मामू आते-जाते हैं.. 2 जवान भाई हैं.. ऐसी चीजें तो घर की औरतें 1000 तहों में छुपा कर रखती हैं कि किसी की नज़र ना पड़े।

मैंने बाजी के हाथ में पकड़ी हुई सलवार को देखा तो उसमें 3-4 बड़े-बड़े लाल रंग के धब्बे पड़े हुए थे।

पहले तो मुझे कुछ समझ नहीं आया और जब समझ आया तो मैंने मुस्कुराते हुए बाजी से कहा- तो क्या हो गया बाजी.. आपको मेनसिस नहीं होते क्या.. जो इतना गुस्सा हो रही हैं?

‘होते हैं.. पर मैं एक दिन पहले से ही पैड लगा लेती हूँ.. अगर कभी इतिफ़ाक़न सलवार गंदी हो भी जाए.. तो उसी वक़्त धो डालती हूँ.. ऐसे शो पीस बना के नहीं रखती..’

बाजी ने बदस्तूर उसी लहजे में कहा और सलवार हाथ से फेंक कर ज़ुबैर की एक पुरानी पैंट पहन ली।

‘बाजी आप पैंट में और ज्यादा हसीन लग रही हो..’

‘अपनी हालत तो देखो.. उठा जा नहीं रहा..’ और फिर मेरी नक़ल उतारते हुए बोलीं- बाजी आप पैंट में बहुत हसीन लग रही हो..

मुझे बाजी का यह अंदाज़ बहुत अच्छा लगा और मैं मुस्कुरा दिया।

‘उठो नबाव साहब.. अपनी हालत सही कर लो.. मैं नीचे जा रही हूँ कुछ देर बाद अम्मी भी उठ जाएंगी..’

बाजी यह कह कर कमरे से बाहर निकल गईं और मैं वैसे ही आधा नंगा उल्टा पड़ा रहा, कमज़ोरी की वजह से मुझे नींद भी आने लगी थी।

‘वसीम उठो.. वसीम.. उठो, दूध पी लो और चेंज करो.. शाबाश जल्दी से उठ जाओ..’ मेरी गहरी नींद टूटी और आँखें खुलीं.. तो बाजी मुझे कंधे से पकड़ कर हिला-डुला रही थीं और उन्होंने दूध का गिलास पकड़ा हुआ था।

वो अपने असली हुलिया यानि स्कार्फ और चादर पर वापस आ चुकी थीं।

मैं फिर से आँखें बंद करते हुए शरारत से बोला- अब कभी गिलास से नहीं पिऊँगा.. बाजी आप सीधे ही पिला दिया करो ना..

बाजी ने हँसते हो तंज़िया लहजे में कहा- अपनी हालत तो देखो ज़रा..! सीधे पिला दिया करो..!! सीधे पीने का शौक है.. लेकिन अपना आपा संभाला नहीं जाता..

वे दूध का गिलास साइड में टेबल पर रख कर मुझे सीधा करने लगीं- चलो वसीम इंसान बनो अब.. उठ भी जाओ..

मैं सीधा हो कर लेट गया लेकिन उठा नहीं.. वैसे ही बिस्तर पर पड़ा रहा।

बाजी ने मेरे अज़ार बंद को खोला और सलवार में हाथ फँसा कर झुंझलाहट से बोलीं- अपने कूल्हे ऊपर करो.. गंदे.. क्या हाल बनाया हुआ है..

मैंने अपने कूल्हे उठाए तो बाजी ने मेरी सलवार को नीचे खींचते हुए पाँव से बाहर निकाल दिया और सलवार के साथ ही मेरी क़मीज़ भी उठा कर बटोर कर चली गईं।

बाजी बाथरूम से वापस आईं तो उन्होंने हाथ में तौलिया पकड़ा हुआ था.. जिसका कोना पानी से गीला था।

बाजी मेरी रानों.. बॉल्स और लण्ड के आस-पास के हिस्से को गीले तौलिये से साफ करते हुए कहने लगीं- तुम्हारी बीवी की तो जान हमेशा अज़ाब में ही रहेगी.. अपने बच्चों के साथ-साथ तुम्हारी भी गंदगी साफ करती रहेगी।

बाजी ने यह कहा और एक हाथ से मेरे लण्ड को पकड़ कर दूसरे हाथ से गीले तौलिये से साफ करने लगीं।

‘मुझे बीवी की जरूरत ही नहीं है.. मेरी सोहनी सी बहना जी हैं ना मेरे पास..’ मैंने मुस्कुरा कर कहा।

तो बाजी ने रुकते हुए मेरे चेहरे पर एक नज़र डाली और कहा- हाँ, बहनें इसी काम के लिए ही तो रह गईं हैं अब..

 
बाजी ने गीले तौलिये से सफाई के बाद.. तौलिए के खुश्क हिस्से से साफ किया और अलमारी से मेरा दूसरा सूट निकाल लाईं।

अब वे मेरे क़रीब ही बैठ कर बोलीं- अब उठ जाओ वसीम.. अम्मी भी उठने वाली हैं और कुछ देर में अब्बू भी घर आ जाएंगे।

मैं चाय बनाती हूँ जल्दी सी नीचे आ जाओ।

बाजी ने ये कह कर मेरे सिर पर हाथ फेरा और माथे को चूम कर बाहर निकाल गईं।

मुझे वाकयी ही बहुत कमज़ोरी महसूस हो रही थी.. कुछ देर बाद मैं हिम्मत करके उठा और बाथरूम चला गया।

फ्रेश होकर अपना दूसरा सूट पहना और नीचे चला गया।

मैं चाय पीने के लिए बैठा ही था कि अब्बू घर में दाखिल हुए.. उन्होंने अपने हाथ में एक पैकेट पकड़ा हुआ था जो वहाँ ही मेज पर रखा।

हमने उन्हें सलाम किया और वो अपने कमरे में चले गए।

मैं चाय खत्म करके वहाँ ही बैठा रहा।

कुछ देर बाद अब्बू बाहर निकले और सोफे पर बैठते हुए कहा- रूही बेटा, मेरे लिए भी चाय ले आओ।

‘जी अब्बू अभी लाई..’ बाजी ने किचन से ही जवाब दिया।

अब्बू मुझसे इधर-उधर की बातें करने लगे।

बाजी ने आकर चाय का कप आबू को दिया और सोफे पर उनके साथ ही बैठने लगी थीं कि अब्बू बोले- बेटा वो मेज पर एक पैकेट पड़ा है.. वो भी उठा लाओ।

बाजी ने पैकेट ला कर अब्बू को दे दिया.. अब्बू पैकेट खोलते हुए मुझे मुखातिब कर के बोले- यार वसीम.. इसे देखो ज़रा विन्डोस की इन्स्टालेशन वगैरह कर देना।

अब्बू ने पैकेट से लैपटॉप निकाला और मेरी तरफ बढ़ा दिया।

मैंने लैपटॉप को बड़े गौर से देखते हुए कहा- ये कितने तक का मिला है अब्बू?

‘वो इहतिशाम ने दुबई से ला दिया है.. मैंने नहीं खरीदा..’ अब्बू ने जवाब दिया और घूँट-घूँट चाय पीने लगे।

इहतिशाम अंकल अब्बू के बहुत क़रीबी दोस्तों में से थे और इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट का बिजनेस करते थे।

मैं लैपटॉप को ऊपर-नीचे से चैक करने के बाद ओपन कर ही रहा था कि अब्बू की आवाज़ आई- देखो आज रात इसमें जो भी काम है.. वो कर लो.. सुबह मैं ऑफिस जाते हुए ले जाऊँगा और मेरे पुराने लैपटॉप से सारा डाटा इसमें ट्रान्सफ़र कर दो और वो लैपटॉप अपने इस्तेमाल के लिए रख लो।

मैंने अब्बू की तरफ देखा तो वो चाय पी रहे थे और उनका ध्यान टीवी की तरफ था।

मैंने अपना रुख़ फेर कर बाजी के चेहरे पर नज़र डाली, उनकी नजरें लैपटॉप की स्क्रीन पर जमी हुई थीं।

बाजी ने मेरी नजरें अपने चेहरे पर महसूस करते हुए मेरी तरफ देखा.. तो मैंने उन्हें आँख मारी और फिर रुख़ अब्बू की तरफ करते हुए कहा- अब्बू मेरे पास तो पीसी है कमरे मैं… आप लैपटॉप बाजी को दे दें.. उनको ज्यादा जरूरत होगी। आज कल वैसे भी बाजी थीसिस लिख रही हैं।

‘अरे हाँ भाई रूही.. तुम्हारा वो.. क्या था.. हाँ ‘नीक़ाब औरत’ कहाँ तक पहुँचा है वो??’ अब्बू ने बाजी की तरफ देखते हुए सवाल किया।

बाजी ने अब्बू को अपनी तरफ मुतवजा पाकर अपना दुपट्टा सिर पर सही किया और कहा- अब्बू वो तो कंप्लीट हो ही गया है.. लेकिन मैं सोच रही हूँ.. इसी टॉपिक को लेकर एक किताब लिखना शुरू करूँ।

बाजी ने अपनी बात खत्म करके अब्बू को देखा तो वो दोबारा टीवी की तरफ रुख़ फेर चुके थे।

फिर बाजी ने मुझे देखा और आँख मार कर मुस्कुरा दीं।

‘हाँ बेटा ज़रूर लिखो.. किसी चीज़ की भी जरूरत हो.. तो मुझे कह देना.. और बेटा वसीम तुम लैपटॉप बाजी को दे देना अच्छा..’ अब्बू ने ये कहा और चाय का खाली कप टेबल पर रखते हुए उठ खड़े हुए।

‘रूही बेटा मेरा सूट निकाल दो कोई.. मैं ज़रा नहा कर फ्रेश हो लूँ..’ ये कहा और अपने कमरे की तरफ चल दिए।

मैंने अब्बू को कमरे में दाखिल हो कर दरवाज़ा बंद करते हुए देखा तो बाजी के नज़दीक़ होते हुए सरगोशी और शरारत से कहा- अब तो मेरी बहना जी दिन रात गंदी फ़िल्में, पोर्न मूवीज़ देखेंगी और वो भी मज़े से अपने बिस्तर में लेट कर..

एक लम्हें को बाजी के चेहरे पर शर्म के आसार नज़र आए और फिर फ़ौरन ही अपनी हालत पर क़ाबू पा कर बोलीं बकवास ना करो.. मैं तुम्हारे जैसी नहीं हूँ और दूसरी बात यह कि मैं कमरे मैं अकेली नहीं होती हूँ समझे?

मैंने यह बात कही तो वैसे ही शरारत से थी.. लेकिन बाजी की बात सुन कर मैंने एक लम्हें को कुछ सोचा और मेरी आँखों में चमक सी लहरा गई।

मैंने बाजी की तरफ देखा.. तो बाजी ने मुस्कुराते हुए गर्दन को ऐसे हिलाया.. जैसे उन्होंने मेरी सोच पढ़ ली हो और कहा- वसीम कमीने.. मैंने कहा है ना.. मैं तुम्हारी रग-रग से वाक़िफ़ हूँ। मैं जानती हूँ तुम्हारे खबीस दिमाग में क्या चल रहा है।

मैंने झेंपते हुए अपने सिर को खुज़ाया और नज़र झुका कर मुस्कुरा दिया। फिर फ़ौरन ही नज़र उठाई और बाजी से बोला- बाजी यह तो इत्तिफ़ाक़न ही बहुत अच्छा मौका बन गया है, किसी तरह राज़ी कर लो हनी को भी.. फिर मिल कर मज़े करेंगे ना?

बाजी ने सीरीयस अंदाज़ में कहा- शर्म करो वसीम.. उसको तो छोड़ दो.. वो अभी कमसिन है यार..

मैं फ़ौरन बोला- खैर.. अब इतनी छोटी भी नहीं है वो.. मैं कल जब अपने गंदे कपड़े वॉशिंग मशीन में डालने गया.. तो वहाँ मैंने हनी की पैन्टी पड़ी देखी थी। उस पर 4-5 स्पॉट लगे हुए थे.. ब्लड के और दिन में आपने उसकी सलवार भी देखी ही थी।

बाजी ने मेरी गुद्दी पर एक चपत रसीद की और कहा- मेनसिस तो उससे 3 साल पहले से हो रहे हैं.. लेकिन है तो नादान ही ना..

मैंने अपनी गुद्दी को सहलाते हुए कहा- मेनसिस 3 साल से हो रहे हैं.. सीने के उभार आप से कुछ ही छोटे हैं.. कूल्हे मटकने लगे हैं.. तो नादान कहाँ से है?

‘अच्छा बस करो फिज़ूल की बहस.. बाद में देखेंगे कि क्या करना है.. मैं जाती हूँ अब्बू को कपड़े दे दूँ..’ बाजी यह कह कर खड़ी हुईं.. तो मैं भी उनके साथ-साथ ही खड़ा हो गया।

बाजी ने 2 क़दम उठाए और रुक गईं.. फिर वापस घूमीं और आहिस्ता आवाज़ में बोलीं- वसीम मैं आज रात को तुम्हारे कमरे में नहीं आऊँगी.. सुबह यूनिवर्सिटी लाज़मी जाना है क्योंकि मेरी प्रेज़ेंटेशन है।

फिर मेरे सामने दोनों हाथ जोड़ कर गिड़गिड़ाने के अंदाज़ में बोलीं- और प्लीज़.. प्लीज़ तुम लोग भी आपस में कुछ नहीं करना.. कुछ तो अपनी सेहत का ख़याल रखो.. अभी डिस्चार्ज होने के बाद क्या हालत हो गई थी तुम्हारी.. याद है ना?

मैं कुछ देर तो चुप रहा.. फिर बोला- अच्छा ठीक है आप नहीं आना और बेफ़िक्र रहें.. हम कुछ नहीं करेंगे। आज वैसे भी अब्बू के लैपटॉप को सैट करना है.. उसमें ही बहुत टाइम लग जाएगा। सुबह तैयार ना हुआ तो अब्बू की बातें सुननी पड़ेंगी।

बाजी ने मेरी बात सुनी तो मुस्कुरा दीं और मेरे गाल को चुटकी में पकड़ कर दबा दिया और दाँत चबा कर बोलीं- शाबाश मेरा सोहना भाई..

‘आआअप्प्प्प्पीईई..’ मैंने अपने दोनों हाथ बाजी के हाथ पर रख के अपना गाल छुड़ाया और बुरा सा मुँह बना के गाल को सहलाते हुए कहा- यार ये नहीं किया करो ना.. बाजी दर्द होता है ना..

बाजी तेज आवाज़ में खिलखिला कर हँसी और बगैर कुछ बोले ही अब्बू के कपड़े लेने चल दीं।

मैं कुछ देर बुरा सा मुँह बनाए अपना गाल सहलाता रहा और फिर बाहर की तरफ चल दिया कि काफ़ी दिन हो गए स्नूकर की बाज़ी नहीं लगाई थी।

रात को ज़ुबैर ने बाजी का पूछा.. तो मैंने कह दिया- सुबह बाजी की प्रेज़ेंटेशन है.. इसलिए वो नहीं आएँगी और मैंने भी काम करना है.. तुम सो जाओ।

ज़ुबैर को टालने के बाद मैं भी अब्बू के लैपटॉप को ही सैट करता रहा।

डेटा ट्रान्स्फर करने के बाद.. बाजी के कहे बिना ही.. अपने पीसी से तमाम ट्रिपल एक्स मूवीज भी बाजी वाले लैपटॉप में ट्रान्स्फर कर दीं.. ये काम भी तो जरूरी ही था।

अपना काम खत्म करने के बाद मैं भी सोने के लिए लेट गया और आगे का सोचने लगा कि अब बात को आगे कैसे चलाया जाए और इसी सोच में जाने कब नींद ने तमाम सोचों से बेगाना कर दिया।

मेरी बहन को भी अब इस सब खेल में मज़ा आने लगा था और उनकी झिझक काफ़ी हद तक खत्म हो गई थी।

मैं हमेशा यह सोचता था कि लड़कियाँ.. लड़कों के मुक़ाबले में सेक्स की तरफ कम ही मुतवजा होती हैं.. लेकिन अब मेरी सोच का नजरिया बदल चुका था और मैं जान गया था कि जितनी शिद्दत सेक्स की हम लड़कों में होती है.. उससे कई गुना ज्यादा लड़कियों में होती है। बस ये है कि उनमें फितरती झिझक और खौफ होता है.. जो उन्हें सेक्स के मामले में आगे नहीं बढ़ने देता।

मर्दों का तो कुछ नहीं जाता और ना ही कोई ऐसा सबूत होता है.. जो उनके कुंवारेपन को चैलेन्ज कर सके, जबकि लड़कियाँ अगर अपना कुंवारापन खो दें.. तो वे उसे कभी छुपा नहीं सकती हैं।

सुबह जब मेरी आँख खुली और कॉलेज जाने के लिए तैयार होने के लिए बाथरूम के पास गया.. तो ज़ुबैर नहा रहा था।

मैंने बाहर से आवाज़ लगाई- ज़ुबैर यार कितनी देर है?

अन्दर से शावर के शोर के साथ ही ज़ुबैर की आवाज़ आई- भाई मैं अभी तो घुसा हूँ.. नहा रहा हूँ थोड़ा टाइम तो लगेगा ही ना।

मैंने ज़ुबैर की बात का कोई जवाब नहीं दिया और नीचे कामन बाथरूम के लिए चल दिया।

 
मैं बाथरूम के पास पहुँचा ही था कि बाजी के कमरे का दरवाज़ा थोड़ा खुला देखकर रुक गया और अन्दर देखा तो बाजी चादर.. स्कार्फ से बेनियाज़.. उलझे बालों और सिलवटजदा कपड़ों में नज़र आईं.. शायद वो अभी ही बिस्तर से उठी ही थीं, उनकी क़मीज़ बेतरतीब सी हालत में उनके कूल्हों से उठी हुई थी और कमर से चिपकी थी।

बाजी की रानें और कूल्हे देख कर मुझे झुरझुरी सी आई और लण्ड ने अंगड़ाई ली।

मैं बाजी के कमरे की तरफ चल दिया।

मैं अन्दर दाखिल हुआ और आहिस्तगी से दरवाज़ा बंद कर दिया।

बाजी दोनों हाथ कमर पर टिकाए बाथरूम के सामने खड़ी थीं और नींद से बोझिल आँखें लिए हनी के बाथरूम से निकलने का इन्तजार कर रही थीं।

शावर की आवाज़ बता रही थी कि हनी नहा रही है।

मैं दबे पाँव बाजी के पीछे गया और उनकी बगलों के नीचे से हाथ गुजार कर बाजी के सीने के खूबसूरत उभारों पर रखते हुए सरगोशी में कहा- हैलो सेक्सी बहना जी.. सुबह की सलाम..

मैंने बात खत्म करके अपने होंठ बाजी की गर्दन पर रख दिए।

बाजी ने मेरी इस हरकत पर हड़बड़ा कर आँखें खोलीं और कूल्हों को पीछे दबाते हुए मेरे हाथ अपने मम्मों से हटाने की कोशिश की और सहमी हुई सी आवाज़ में बोलीं- वसीम पागल हो गए हो क्या.. छोड़ो मुझे.. किसी ने देख लिया तो..

मैंने बाजी के दोनों निप्पल अपनी चुटकियों में पकड़ कर मसले और बाजी की गर्दन से होंठ हटा कर कहा- मेरी सोहनी बहना जी.. अम्मी अब्बू का रूम अभी बंद है.. शावर की आवाज़ आ रही है.. तो हनी अभी नहा ही रही है और किसने देखना है?

मैंने बात खत्म की और बाजी को अपनी तरफ घुमाते हुए उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।

बाजी ने अपना चेहरा पीछे हटाने की कोशिश की.. लेकिन मैंने उनकी कमर को जकड़े रखा.. जिससे वो पीछे की तरफ कमान की सूरत मुड़ गईं।

मैंने जोरदार चुम्मी करने के बाद अपने होंठ बाजी के होंठों से अलग किए और उन्हें सीधा कर दिया.. जिससे से मेरी गिरफ्त भी ढीली हो गई।

बाजी ने मेरी गिरफ्त को कमज़ोर महसूस किया तो मेरे सीने पर हाथ रख कर पीछे धक्का दिया और झुंझलाते हुए दबी आवाज़ में कहा- इंसान बनो.. सुबह-सुबह क्या मौत पड़ी है तुमको.. अब जाओ भी.. क्यों मरवाओगे क्या?

मैंने शैतानी सी मुस्कुराहट से बाजी की तरफ देखा.. तो वो फ़ौरन बोलीं- वसीम खुदा के लिए जाओ।

मैंने बाजी के चेहरे पर ही नज़र जमाए हुए कहा- एक शर्त पर जाऊँगा।

‘शर्त??!’ बाजी ने हैरत और खौफ की मिली-जुली कैफियत में कहा।

मैंने बाजी के सीने के उभारों की तरफ हाथ से इशारा करते हुए कहा- मुझे ये दोनों देखने हैं..

‘तुम बिल्कुल ही सठिया गए हो.. इस वक़्त.. क्या आग लगी है तुम्हें??

बाजी ने अब अपनी कैफियत पर क़ाबू पा लिया था और अब उनके चेहरे पर खौफ के आसार भी नहीं थे.. लेकिन झुंझलाहट अभी भी मौजूद थी।

मैंने मिन्नतें करते हुए कहा- प्लीज़ बाजी.. मेरी प्यारी बहन हो या नहीं?

‘बहन क्या इसी काम के लिए है?’ बाजी ने कहा और दबी सी मुस्कुराहट चेहरे पर आ गई।

मैंने कहा- चलो ना यार..

‘अगर उसी वक़्त हनी बाहर आ गई तो…ओ..?’ बाजी ने कहा और गर्दन घुमा के बाथरूम के दरवाज़े को देखने लगीं।॥

मैंने कहा- बाजी.. शावर की आवाज़ अभी भी आ रही है.. वो नहीं आएगी.. फिर भी आप अपने इत्मीनान के लिए उससे पूछ लो ना कि कितनी देर में निकलेगी।

बाजी बाथरूम के नज़दीक हुईं और ज़रा तेज आवाज़ में बोलीं- हनी और कितनी देर है.. मैं यूनिवर्सिटी के लिए लेट हो रही हूँ।

हनी ने अन्दर से आवाज़ लगाई- बस बाजी 5 मिनट और.. मैं निकलती हूँ बस.. थोड़ी देर..

मैंने मुस्कुरा कर बाजी को देखा और उनके क़रीब होते हुए कहा- चलो ना बाजी.. प्लीज़.. 5 मिनट बहुत हैं हमारे लिए..

बाजी ने ज़रा डरे हुए अंदाज़ में बाथरूम को देखा और फिर कमरे के दरवाज़े की तरफ गईं.. दरवाज़ा खोल कर बाहर अम्मी-अब्बू के कमरे पर एक नज़र डाली और फिर दरवाज़ा बंद करके मेरी तरफ घूम गईं और दरवाज़े पर अपनी कमर लगा कर वहाँ ही खड़ी हो गईं।

बाजी ने क़मीज़ का दामन पकड़ा- लो.. खबीस.. देखो और जाओ यहाँ से..

और मुझसे यह कहते हुए क़मीज़ गर्दन तक उठा दी।

मैं बाजी के क़रीब पहले ही आ चुका था। मैंने अपनी बहन के हसीन उभारों को देखा और अपने दोनों हाथों में बाजी के उभार पकड़ कर दबाए और निप्पल को सहलाने के फ़ौरन बाद ही अचानक से आगे बढ़ कर बाजी का खूबसूरत गुलाबी निप्पल अपने मुँह में ले लिया।

मेरी ज़ुबान ने बाजी के निप्पल को छुआ.. तो बाजी ने एक ‘आअहह..’ भरी और सरगोशी से बोलीं- ये क्या कर रहे हो… कहते कुछ हो और करते कुछ हो.. देखने का कहा था और अब चूसना भी शुरू कर दिया.. हटो पीछे.. हनी बाहर आने ही वाली है।

मैंने बाजी के दोनों उभारों को हाथों में दबोचा हुआ था और बाजी का एक निप्पल मेरे मुँह में था।

मैंने कुछ देर बारी-बारी बाजी के दोनों निप्पलों को चूसा और फिर अपना मुँह हटा कर एक भरपूर नज़र से बाजी के उभारों को देखा।

मेरे दबोचने से ऐसा लग रहा था.. जैसे बाजी के जिस्म का सारा खून उनके सीने के उभारों में जमा हो गया है.. शफ़फ़ गुलाबी मम्मों पर मेरी ऊँगलियों के निशान बहुत वज़या हो गए थे।

मैंने हाथ उनके मम्मों पर ही रखे-रखे एक बार फिर बाजी को किस किया और उनके जिस्म से अलग होते हुए कहा- थैंक्स मेरी सोहनी सी बहना जी.. आई रियली लव यू।

फिर मैंने बाजी को आँख मारी और शैतानी से मुस्कुराते हुए कहा- अब ये मेरा रोज़ सुबह-सुबह का नाश्ता हुआ करेगा.. आप तैयार रहा करना.. ठीक है ना..

बाजी सिर झुका कर अपनी क़मीज़ को सही कर रही थीं और अपने राईट सीने के उभार को अपने हाथ से ऊपर उठा रखा था.. क़मीज़ सही करने के लिए..

फिर उन्होंने अपने सिर उठा कर मेरी तरफ देखा और कहा- बकवास मत करो.. अब दोबारा ऐसा सोचना भी नहीं.. मैं खामखाँ का रिस्क नहीं लूँगी समझे??

मैंने बाजी की बात को अनसुनी करते हुए मासूम बनते हुए कहा- चलें छोड़ें.. बाद में देखेंगे.. फिलहाल अगर आपकी कोई ख्वाहिश है? मेरे जिस्म की कोई चीज़ देखनी है? या कुछ हाथ मैं पकड़ना है? या कुछ चूसना है.. तो बता दें.. मैं आपकी खिदमत के लिए तैयार हूँ।

बाजी बेसाख्ता हँसने लगीं और बोलीं- मैं समझ रही हूँ तुम किस चीज़ के लिए फटते जा रहे हो.. लेकिन मेरी ऐसी कोई ख्वाहिश नहीं है.. जनाब का बहुत-बहुत शुक्रिया..

बाजी की बात सुन कर मैं भी हँस दिया और बाहर जाने के लिए दो क़दम चला ही था कि बाथरूम का दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आई.. मैंने गर्दन घुमा कर देखा तो हनी अपने जिस्म पर सीने से लेकर घुटनों तक तौलिया लपेटे हुए बाहर निकलती नज़र आई।

हनी को इस हाल में देख कर मेरे लण्ड ने फ़ौरन सलामी के तौर पर एक झटका खाया और मेरी नज़रें हनी की जवानी पर घूम गईं।

हनी 2-3 क़दम बाहर आई ही थी कि मुझ पर नज़र पड़ते ही उछल पड़ी और बोली- उफ्फ़ भाईई.. आप यहाँन्न..?

और फिर तकरीबन भागते हुए वापस बाथरूम में घुस गई.. मैं और बाजी दोनों ही इस सिचुयेशन पर कन्फ्यूज़ हो गए थे और मैं बेसाख्ता ही बोला- सॉरी गुड़िया.. वो हमारे बाथरूम में ज़ुबैर घुसा बैठा है.. और बाहर वाले बाथरूम में अब्बू हैं.. तो मैं यहाँ आ गया कि शायद खाली हो..

हनी ने बदस्तूर गुस्सैल आवाज़ में कहा- लेकिन भाई आप कम से कम मुझे बता तो देते ना.. कि आप कमरे में अन्दर हैं।

‘अच्छा मेरी माँ गलती हो गई मुझसे.. अब जा रहा हूँ बाहर..’

मैंने यह कहा और बाजी की तरफ देख कर अपना लेफ्ट हाथ अपने सीने पर ऐसे रखा.. जैसे मैंने अपना सीने का उभार पकड़ रखा हो और बाजी को आँख मारते हुए अपने दायें हाथ की इंडेक्स फिंगर और अंगूठे को मिला कर सर्कल बनाया और बाथरूम की तरफ आँख से इशारा करते हुए हाथ ऐसे हिलाया जैसे मैं बाजी को जता रहा होऊँ कि हनी के सीने के उभार देखे आपने? कितने मस्त हो गए हैं!

बाजी ने मुस्कुरा कर गर्दन ऐसे हिलाई जैसे मेरी बात समझ गई हों.. और फिर मुझे बाहर जाने का इशारा कर दिया।

‘हनी बाहर आ जाओ.. वसीम.. चला गया है..’ ये आखिरी जुमला था जो मैंने बाजी के कमरे से बाहर निकल कर सुना और दरवाज़ा बंद करके बाथरूम जाते हुए हनी के बारे में ही सोचने लगा।

हनी अब वाकयी ही छोटी नहीं रही है.. जब वो तौलिया में लिपटे हुए बाहर निकली थी.. तो उसके गीले बाल और भीगा-भीगा जिस्म बहुत ही ज्यादा सेक्सी लग रहा था।

मैंने बाजी को आँख मारते हुए बाथरूम की तरफ आँख से इशारा करते हुए हाथ ऐसे हिलाया जैसे मैं बाजी को बता रहा होऊँ कि हनी के सीने के उभार कितने मस्त हो गए हैं।

हनी जब तौलिये में लिपटी बाहर निकली थी.. तो उसके गीले बाल और भीगा ज़िस्म बहुत सेक्सी लग रहा था।

तौलिये में हनी के सीने के उभार काफ़ी बड़े दिख रहे थे और जब वो वापस जाने के लिए मुड़ी थी.. तो उसके चूतड़ों की शेप भी वज़या हो रही थी और वो 3-4 क़दम ही भागी थी.. लेकिन मैंने हनी के कूल्हों का मटकना पहली बार गौर से देखा था.. जो बहुत दिलकश मंज़र था।

हनी के नंगे बाज़ू और नंगी पिण्डलियाँ.. बालों से बिल्कुल साफ और बाजी की ही तरह शफ़फ़ थीं.. बस ये था कि उसका रंग थोड़ा दबता हुआ था या फिर ये कहना ज्यादा मुनासिब है कि बाजी के मुक़ाबले में वो साँवली नज़र आती थी।

हनी का क़द तकरीबन 4 फीट 10 इंच था और उसका जिस्म भारी-भरकम नहीं था.. बल्कि वो दुबली-पतली सी थी.. लेकिन सीने के उभार बाजी से थोड़े छोटे और साइज़ में 32सी के थे, कूल्हे ना ही बहुत ज्यादा बड़े थे और ना ही बहुत छोटे.. बस मुनासिब थे।

उसकी चाल कुदरती तौर पर ही ऐसी थी कि वो चलती थी.. तो उसकी टांग दूसरी टांग को क्रॉस करते हुए पाँव ज़मीन पर पड़ता था.. बिल्कुल बिल्ली की तरह और खुद बा खुद ही उसके छोटे क्यूट से कूल्हे मटक से जाते थे।

मैंने अपनी इन्हीं सोचों के साथ गुसल किया और नाश्ते की टेबल पर ही लैपटॉप अब्बू के हवाले करके कॉलेज के लिए निकल गया।

दो दिन तक बाजी की प्रेज़ेंटेशन चलती रही.. जिसकी वजह से वो हमारे कमरे में नहीं आ सकीं और हमने आपस में भी कुछ नहीं किया।

तीसरे दिन कॉलेज से वापस आकर मैंने कुछ देर आराम किया और फिर शाम को चाय के वक़्त बाजी ने भी सेक्स की हिद्दत से बोझिल आँखें लिए बता दिया कि वो आज रात को हमारे पास आएँगी।

 
दो रातें और 2 दिन गुज़र चुके थे कि बाजी हमारे रूम में नहीं आई थीं। ज़ुबैर और मैं बहुत शिद्दत से कमरे में बैठे बाजी का इन्तजार कर रहे थे।

हम दोनों ने अपने कपड़े पहले से ही उतार रखे थे। जब बाजी कमरे में दाखिल हुईं.. तो हमारे खड़े लण्ड पर नज़र पड़ते ही उनकी आँखों में भी चमक पैदा हो गई।

आख़िर वो थीं तो हमारी ही बहन और अब उन्हें भी इस खेल की आदत हो गई थी।

बाजी ने दरवाज़ा बंद करके बहुत बेताबी से अपनी क़मीज़ उतार कर फैंकी और ब्रा को खोल कर सोफे की तरफ उछाल दिया।

मैंने बाजी को क़मीज़ उतारते देखा तो बिस्तर से उठ कर भागता हुआ बाजी की तरफ गया और अपने बाज़ू उनकी कमर के गिर्द मज़बूती से कसते हुए बाजी की गर्दन पर होंठ रख दिए।

बाजी भी 2 दिन से जिस्म की आग को दबाए बैठी थीं, जैसे ही उनके सीने के उभार और निप्पल मेरे बालों भरे सीने से दबे.. तो उनकी आँखें खुद ही बंद हो गईं और बाजी के मुँह से एक सिसकारी निकली और उन्होंने बेसाख्ता ही अपने बाज़ू मेरे जिस्म के गिर्द कस कर मुझे भींचना शुरू कर दिया और कभी मेरी कमर को अपने हाथों से सहलाने लगीं।

कुछ देर मैं और बाजी ऐसे ही खड़े अपने-अपने जिस्मों को महसूस करते रहे.. फिर मैंने अपने होंठ बाजी की गर्दन से हटाए और बाजी के होंठों को चाटते और चूमते हुए उन्हें तकरीबन घसीटता हुआ बिस्तर की तरफ चल दिया।

ज़ुबैर मुझे और बाजी को इस हाल में देख कर एकदम बेखुद सा बिस्तर पर ही बैठा था। मैंने उससे 2 दिन पहले बाजी के साथ हो सेक्स के बारे में कुछ नहीं बताया था।

बाजी को लिए हुए ही मैं बिस्तर पर लेट गया.. बाजी के अंदाज़ में आज बहुत गरमजोशी थी.. वो बहुत वाइल्ड अंदाज़ में मेरी कमर को सहला रही थीं और अपने सीने के उभारों को मेरे सीने पर रगड़ रही थीं।

बाजी कभी मेरे होंठों को बहुत बेताबी से चूसने लगतीं.. तो कभी दाँतों में दबा कर खींच लेतीं।

कुछ देर ऐसे ही एक-दूसरे के होंठ और ज़ुबान चूसने और चाटने के बाद मैं थोड़ा नीचे हुआ और बाजी की गर्दन को चाटने और छूने लगा।

बाजी सीधे लेटी हुई थीं और उनके हाथ मेरी कमर पर थे.. मैं बाजी के दिल की तेज-तेज धड़कन को साफ सुन और महसूस कर रहा था।

बाजी की गर्दन से होता हुआ मैं नीचे उनके सीने के उभार तक पहुँचा और बारी-बारी दोनों निप्पलों को चाटने और चूसने लगा। बाजी के उभार को मुँह में लिए लिए ही मैंने अपना हाथ नीचे किया और बाजी की सलवार को नीचे उनके पाँव की तरफ सरकाना शुरू कर दिया।

यह भी अच्छा था कि बाजी की इस सलवार में अजारबंद के बजाए इलास्टिक थी.. जिसकी वजह से सलवार आसानी से नीचे सरक रही थी।

जब बाजी को महसूस हुआ कि मैं उनकी सलवार उतार रहा हूँ.. तो उन्होंने अपने एक हाथ से फ़ौरन मेरे उस हाथ को पकड़ लिया जो उनकी सलवार पर था और आँखें बंद किए हुए ही बोलीं- नहीं वसीम प्लीज़ सलवार मत उतारो.. ऊपर-ऊपर से ही कर लो.. जो भी करना है।

मैंने अपना हाथ बाजी की सलवार से हटा दिया और ज़ुबैर को देखा.. जो बाजी की दायीं तरफ़ ही बैठा था। ज़ुबैर से नज़र मिलने पर उससे इशारा किया कि बाजी के एक उभार को मुँह में ले ले।

ज़ुबैर तो बस तैयार ही बैठा था.. उसने मेरा इशारा समझा और एकदम से बाजी के दायें निप्पल पर टूट पड़ा, उसने निप्पल मुँह में लिया और जंगलियों की तरह चूसना और हाथ से दबाना शुरू कर दिया।

बाजी ने एक लम्हे को आँख खोली.. तो अपने दोनों सगे भाईयों के मुँह में अपना एक-एक उभार देख कर वो मचल सी गईं और अपने दोनों हाथ हम दोनों के सिर पर रख कर दबाने लगीं।

उनकी साँसें बहुत तेज हो गई थीं और वो मदहोश होने लगीं थीं।

मैंने दोबारा अपने हाथ को नीचे करके बाजी की सलवार को थामा और दूसरे हाथ से बाजी की कमर को थोड़ा सा ऊपर उठाते हुए एक झटके से उनकी सलवार को कूल्हों के नीचे से निकाल दिया।

बाजी ने कुछ कहने के लिए मुँह खोला ही था कि मैंने अपने होंठ उनके होंठों से चिपका के उनका मुँह बंद कर दिया और दूसरे हाथ से बाजी की सलवार को घुटनों से नीचे तक पहुँचा दिया।

ज़ुबैर कभी बाजी के उभार को चाटने लगता.. तो कभी उनके निप्पल को चूसने लगता।

उसके अंदाज़ में बहुत जंगलीपन था.. और होना भी था क्योंकि ज़िंदगी में पहली बार वो दुनिया की हसीन-तरीन चीज़ को चूस रहा था।

मेरे मुँह हटाते ही ज़ुबैर ने बाजी के दूसरे उभार को भी हाथ में पकड़ लिया था और झंझोड़ने लगा था।

मैंने बाजी के दोनों होंठों को अपने होंठों से खोलते हुए सांस तेजी से अन्दर को खींची.. तो बाजी मेरा इशारा समझ गईं और फ़ौरन अपनी ज़ुबान मेरे मुँह में दाखिल कर दी।

मैंने बाजी की ज़ुबान को अपने दाँतों में पकड़ा और चूसने लगा.. बाजी को ज़ुबान चुसवाने में बहुत मज़ा आता था और मैंने बाजी के इसी मज़े का फ़ायदा उठाते हुए बाजी की टाँगों के बीच अपना हाथ रख दिया।

मेरा हाथ जैसे ही बाजी की चूत के दाने को टच हुआ तो वो मचल गईं.. लेकिन उनकी ज़ुबान को मैंने अपने दाँतों में दबा रखा था.. इसलिए ना ही कुछ बोल सकीं और ना ही ज्यादा हिल सकीं।

मैंने कुछ देर तेजी से अपनी ऊँगलियों को बाजी की चूत के दाने पर मसला.. तो उनकी हालत माही-बेआब बिन पानी की मछली.. की तरह हो गई और बाजी ने तेजी से अपने पाँव की मदद से अपनी सलवार को पाँव तक पहुँचाया और घुटनों को मोड़ते हुए अपनी टाँगों को थोड़ा खोल लिया।

बाजी की चूत बहुत गीली हो गई थी और मेरी उंगलियाँ खुद ब खुद उनकी चूत के दाने से स्लिप होकर नीचे चूत के दरवाजे पर टच होने लगती थीं।

मैंने बाजी की टाँगों को खुलता महसूस कर लिया था और उनकी चूत से बहते पानी ने भी मुझे यह समझा दिया था कि अब बाजी का दिमाग उनकी चूत के कंट्रोल में आ गया है.. इसलिए मैंने उनकी ज़ुबान को अपने दाँतों से निकाल दिया।

बाजी ने अपनी ज़ुबान को आज़ाद महसूस करके आँखें खोल दीं।

उनकी आँखें भी बहुत लाल हो रही थीं और नशे की सी हालत में थीं।

मैंने बाजी को अपनी तरफ देखता पाकर बाजी की चूत पर रखा अपना हाथ हटाया और बाजी को दिखाते हुए अपनी एक-एक उंगली को चूसने लगा।

बाजी ने मेरी इस हरकत पर आँखें फाड़ कर मुझे देखा.. तो मैंने मुस्कुराते हुए मज़े से डूबी आवाज़ में कहा- यम्मम्मी.. मेरी सोहनी बहन की चूत से निकले लव-जूस का ज़ायक़ा.. दुनिया के बेहतरीन मशरूब से ज्यादा लज़ीज़ है।

मेरी बात सुन कर बाजी का चेहरा शदीद शर्म से लाल हो गया और उन्होंने मुस्कुरा कर अपनी आँखें बंद करते हुए चेहरा दूसरी तरफ कर लिया।

मैं भी मुस्कुरा दिया और नीचे सरकते हुए अपनी ज़ुबान बाजी की नफ़ में दाखिल कर दी।

ज़ुबैर ने भी उसी वक़्त बाजी के निप्पल को दाँतों में दबा कर ज़ोर से काटा और ऊपर को खींचने लगा।

ज़ुबैर के काटने की वजह से और मेरी ज़ुबान को अपनी नफ़ के अन्दर महसूस करते हुए बाजी ने एक ज़ोरदार ‘आआआअहह..’ भरी।

उस ‘आहह..’ में ‘मज़े की शिद्दत’ और ‘तक़लीफ़ का अहसास’ दोनों ही बहुत नुमाया हो रहे थे।

 
मैंने बाजी की चूत में उंगली करते हुए अपनी उंगलियाँ चाटी तो मेरी बहना शर्मा गई। मेरा छोटा भाई बाजी की चूचियाँ चूस रहा था और बाजी सिसकार रही थी।

बाजी की चीख भरी ‘आहह..’ सुन कर मैंने ऊपर देखा तो ज़ुबैर ने बाजी के निप्पल को दाँतों में दबाया हुआ था और काफ़ी ताक़त से अपना सिर ऊपर खींच रहा था।

बाजी ने फ़ौरन अपने दोनों हाथ ज़ुबैर के सिर की पुश्त पर रखे और सिर को वापस नीचे अपने उभार पर दबा दिया।

मैंने दोबारा अपनी नज़र नीचे की और बाजी की पूरी नफ़ के अन्दर अपने ज़ुबान फेरने लगा।

बाजी का पूरा पेट अपनी ज़ुबान से चाटने के बाद मैं उनकी रानों पर आया और पूरी रान के अंदरूनी और बाहरी हिस्से को अपनी ज़ुबान से चाटा।

मैं अपनी ज़ुबान से चाटता हुआ रान से घुटने.. और फिर पिण्डलियों से हो कर पाँव तक पहुँचा और बाजी की सलवार को उनके जिस्म से अलग करके पीछे फेंक दिया और फिर पूरे पाँव को ऊपर से चाटने के बाद तलवे को चाटा और पाँव की एक-एक ऊँगली को बारी-बारी से चूसने लगा।

इसके बाद मैंने बाजी की दूसरी टांग को पकड़ा और उसी तरह 1-1 मिलीमीटर के हिस्से को चाटता हुआ वापस बाजी की नफ़ तक आ गया।

मैं उठ कर बाजी की टाँगों के बीच बैठा और बाजी की नफ़ के नीचे बालों वाले हिस्से को चूमने लगा और फिर अपनी ज़ुबान निकाल कर चाटना शुरू कर दिया।

मैं अपना सिर उठा कर एक नज़र ज़ुबैर और बाजी को भी देख लेता था।

ज़ुबैर अभी भी बाजी के मम्मों को ऐसे झंझोड़ और चूस रहा था.. जैसे उसे आज के बाद कभी ये नसीब नहीं होंगे।

बाजी अभी भी बिल्कुल सीधी ही लेटी हुई थीं और आँखें बंद किए अपनी गर्दन को लेफ्ट-राईट झटक रही थीं। उनके चेहरे पर कभी ज़ुबैर की किसी जंगली हरकत पर तक़लीफ़.. और कराह के आसार पैदा होते थे.. तो कभी मेरी ज़ुबान उनके बदन में मज़े की नई लहर पैदा कर देती थी।

मैंने बाजी के बालों वाले हिस्से को अच्छी तरह चाटने के बाद अपने दोनों हाथ बाजी की रानों के नीचे रखे और उनकी टाँगों को थोड़ा सा उठा कर टाँगें खोल दीं।

अब मैंने अपना मुँह बाजी की चूत के बिल्कुल करीब ला कर एक इंच की दूरी पर चंद लम्हें रुका और बाजी की चूत को गौर से देखने लगा।

बाजी की चूत पूरी गीली हो रही थी और उनकी चूत का रस चमक रहा था। बाजी की चूत के दोनों खूबसूरत गुलाबी होंठों में छुपे दो गुलाब की पंखुड़ियाँ.. जैसे पर्दे फड़कते हुए से महसूस हो रहे थे और गोश्त का वो लटका हुआ सा हिस्सा.. जिस में चूत का दाना छुपा होता है.. कांप रहा था।

बाजी ने मेरी गर्म-गर्म तेज साँसों को अपनी चूत पर महसूस कर लिया था और उन्होंने ज़ुबैर के सिर से दोनों हाथ हटाए और अपने बिस्तर पर रखते हुए कोहनियों पर ज़ोर देकर अपना सिर और कंधों तक उठा लिया और नशीली आँखों से मुझे देखने लगीं।

मैंने एक नज़र बाजी को देखा और फिर अपनी आँखें बंद करते हुए नाक के जरिए एक तेज सांस को अपने अन्दर खींचा।

बाजी की चूत से उठती मधुर महक मेरे नाक से होते हुए मेरे दिल और दिमाग पर सीधी असर अंदाज़ हुई और मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मैंने ड्रग्स की भारी डोज अपने अन्दर उतारी हो।

मुझ पर हक़ीक़तन नशा सा हावी हो गया था और मेरे दिलोदिमाग में सिर्फ़ लज़्ज़त ही लज़्ज़त भर गई थी।

मेरा जेहन सिर्फ़ उस महक को महसूस कर रहा था और मेरी तमाम सोचें और अहसासात सिर्फ़ अपनी बहन की चूत पर ही मरकज हो गई थीं।

मैंने सिहरजदा से अंदाज़ में अपनी आँखों खोला.. तो पहली नज़र बाजी के चेहरे पर ही पड़ी.. बाजी की चेहरे पर बहुत बेताबी ज़ाहिर हो रही थी।

वो समझ गई थीं कि मेरा अगला अमल क्या होगा।

बाजी ने मेरी आँखों में देखते हुए ही गर्दन को थोड़ा आगे की तरफ झटका दिया.. जैसे कह रही हों कि आगे बढ़ ना.. रुक क्यों गया।

मैंने बाजी के इशारे पर कोई रद-ए-अमल नहीं ज़ाहिर किया और उनकी आँखों में आँखें डाले हुए ही नाक के जरिए एक और सांस ली और अपने टूटते नशे को सहारा दिया।

बाजी ने एक बार फिर मुझे आगे बढ़ने का इशारा किया और कहा- वसीम प्लीज़ अब और ना तड़फाओ.. चूसो ना प्लीज़..

लेकिन मुझे गुमसुम देख कर उनकी बर्दाश्त जवाब दे गई और बाजी ने अपने कूल्हों को ऊपर की तरफ झटका मारते हुए.. अपनी चूत को मेरे मुँह से लगा दिया।

बाजी की चूत मेरे मुँह से लगी.. तो जो नशा मुझे चूत की महक से हुआ था अचानक ही वो खत्म हो गया।

मैं अपना मुँह जितना ज्यादा खोल सकता था.. मैंने खोला और अपनी बहन की पूरी चूत को अपने मुँह में भर कर अपनी पूरी ताक़त से जंगलियों की तरह चूसने लगा।

दो मिनट इसी अंदाज़ में चूसते रहने के बाद मैंने अपने मुँह की गिरफ्त हल्की की और बाजी की चूत के ऊपरी हिस्से में छुपे क्लिट को होंठों में दबाया और चूसने लगा।

मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरे मुँह में नमक घुल गया हो।

बाजी की चूत से निकलते लिसलिसे पानी ने मेरा मुँह अन्दर और बाहर से लिसलिसा कर दिया था।

मेरे होंठ बाजी की चूत के रस की वजह से बहुत चिकने हो रहे थे और पूरी चूत पर फिसल-फिसल जा रहे थे।

मैंने कुछ देर बाजी की चूत के दाने को चूसा और फिर चूत के दोनों पर्दों को बारी-बारी चूसने लगा।

मेरे मुँह ने बाजी की चूत को छुआ.. तो बाजी ने ‘आअहह वसीम.. उउउफ्फ़.. मेरे.. भाईईई ईईईईई..’ कह कर अपना सिर और कंधे एक झटके से वापस बिस्तर पर गिरा दिए।

कभी बाजी झटकों-झटकों से अपनी चूत को मेरे मुँह पर दबाने लगतीं.. तो कभी कूल्हे बिस्तर पर सुकून से टिका कर तेज-तेज साँसों के साथ सिसकारियाँ भरने लगतीं।

बाजी ने एक और झटका मारने के बाद अपने कूल्हे बिस्तर पर टिकाए.. तो मैंने अपनी ऊँगलियों की मदद से बाजी की चूत के दोनों लब खोले और अपनी ज़ुबान की नोक चूत के बिल्कुल निचले हिस्से.. जो एंट्रेन्स होती है.. पर रख कर एक बार नीचे से ऊपर पूरी चूत को अन्दर से चाटा और वापस नोक एंट्रेन्स पर रख कर ज़ुबान अन्दर-बाहर करने लगा।

जैसे ही मेरी ज़ुबान बाजी की चूत के अंदरूनी हिस्से पर टच हुई.. बाजी ने अपने कूल्हे ऊपर उठा दिए और उनका जिस्म एकदम अकड़ गया और चंद लम्हों बाद ही उनके जिस्म ने 3-4 शदीद झटके खाए और मुझ साफ महसूस हुआ कि जैसे बाजी की चूत मेरी ज़ुबान को भींच रही हो।

मैंने ज़ुबान अन्दर-बाहर करना जारी रखी.. और जब बाजी की चूत ने मेरी ज़ुबान को भींचना बंद कर दिया और बाजी बेसुध सी लेट गईं.. तो मैंने अपना मुँह थोड़ा सा पीछे किया और चूत को मज़ीद खोलते हुए अन्दर देखा।

बाजी की चूत में गाढ़ा-गाढ़ा सफ़ेद पानी जमा हो गया था। मैं कुछ देर नज़र भर के देखता रहा और फिर दोबारा अपनी ज़ुबान की नोक को अन्दर डाला और बाजी के चूतरस को अपनी ज़ुबान पर समेट कर मुँह में डालता गया।

अपनी बहन का सारा लव जूस अपने मुँह में भरने के बाद मैं उठा और बिस्तर पर निढाल और बेसुध पड़ी बाजी के साथ ही लेट कर उनके चेहरे को दोनों हाथों में थाम कर अपनी तरफ घूमते हो फंसी-फंसी आवाज़ में कहा- ओह्ह नोनन्न बाजीईई.. आँखें खोलो ये देखो..

बाजी ने आँखें खोलीं तो मैंने अपना मुँह खोल कर बाजी को दिखाया। मेरे मुँह में अपनी चूत के पानी को देख कर बाजी ने बुरा सा मुँह बनाया और कहा- हट गंदे..

बाजी यह कह कर मुँह दूसरी तरफ करने ही लगीं थीं कि मैंने मज़बूती से उनके गालों को दबा कर पकड़ा.. जिससे बाजी का मुँह खुल गया और मैंने अपना मुँह बाजी के मुँह पर रखते हुए उनकी चूत का रस उन्हीं के मुँह में उड़ेल दिया।

बाजी ने अपना मुँह छुड़ाने की कोशिश की.. लेकिन मैंने उसी तरह उनके गाल दबाए-दबाए ही बाजी के होंठ चूसना शुरू कर दिए।

कुछ देर तक वो मुँह हटाने की कोशिश करती रहीं और फिर अपने आपको ढीला छोड़ते हुए मेरी किस के जवाब में मेरे होंठों को चूसने लगीं।

बाजी का जूस हम दोनों के होंठों और गालों पर फैल गया था और अब उन्हें भी उसकी परवाह नहीं थी.. कुछ ही देर में बाजी मेरे होंठों को चूसते हुए अपनी ही चूत के जूस को भी ज़ुबान से चाटने लगीं थीं और शायद उन्हें भी उसका ज़ायक़ा अच्छा ही लग रहा था।

ज़ुबैर.. हम दोनों से लापरवाह बस बाजी के जिस्म में ही खोया हुआ था। कभी बाजी के उभारों से खेलता तो कभी उनके पेट और नफ़ पर ज़ुबान फेरने लगता।

 
जब ज़ुबैर ने बाजी की चूत को खाली देखा.. तो वो अपनी जगह से उठा और बाजी की टाँगों के बीच बैठते हुए उनकी चूत को चाटने-चूसने लगा।

मैं और बाजी कुछ देर ऐसे ही चूमाचाटी करते रहे और मैंने अपने होंठ बाजी से अलग किए तो उनका चेहरा देख कर बेसाख्ता ही हँसी छूट गई और मैंने कहा- क्यों.. बहना जी.. मज़ा आया अपना ही जूस चख के?

बाजी ने भी मुस्कुरा के मुझे देखा और कहा- तुम खुद तो गंदे हो ही.. अपने साथ-साथ मुझे भी गंदा बना दोगे।

फिर एक गहरी सांस लेकर ज़ुबैर को देखा और कहा- तुझसे ज़रा सबर नहीं हुआ.. मुझे सांस तो लेने दो.. तुम लोग तो जान ही निकाल दोगे मेरी..

ज़ुबैर ने बाजी की बात पर कोई तवज्जो नहीं दी और अपने काम में मग्न रहा।

बाजी ने अपने होंठों पर ज़ुबान फेर के एक बार फिर अपने रस को चाटा और मुस्कुरा कर मुझे आँख मारते हुए शरारत से बोलीं- यार इतना बुरा भी नहीं है इसका ज़ायका..

‘अच्छा जी, तो मेरी बहना को भी अच्छा लगा है चूत का पानी.. और पहले तो बड़ा ‘गंदे.. गंदे..’ कर रही थीं।’ मैंने बाजी को टांग खींचते हुए कहा।

बाजी ने फ़ौरन ही जवाब दिया- गंदे तो हो ही ना तुम.. मैं ये नहीं कह रही कि ये बहुत अच्छा काम है।

मैंने बाजी की बात का कोई जवाब नहीं दिया और उनको कहा- अच्छा बाजी खड़ी हो जाओ।

बाजी ने सवालिया नजरों से मुझे देखा तो मैंने ज़ुबैर को हटाते हुए उन्हें ज़मीन पर सीधा खड़ा कर दिया।

बाजी के खड़े होते ही ज़ुबैर फिर उनकी टाँगों के बीच बैठ गया और अपना मुँह बाजी की चूत से लगाते हुए बोला- बाजी थोड़ी सी तो टाँगें खोलें ना.. प्लीज़..

बाजी ने ज़ुबैर के सिर पर हाथ रखा और टाँगें थोड़ी खोलते हुए अपने घुटने भी थोड़े मोड़ से लिए। बाजी अब फिर से गर्म होने लगी थीं।

मैं बाजी के पीछे आकर खड़ा हुआ और अपने एक हाथ से अपने खड़े लण्ड को ऊपर उनकी नफ़ की तरफ उठाता हुआ बाजी के कूल्हों की दरार पर टिकाया और उनके पीछे से चिपकते हुए मैंने दोनों हाथ बाजी के आगे ले जाकर उनके उभारों पर रख दिए।

बाजी ने मेरे लण्ड को अपने कूल्हों की दरार में महसूस करते ही कहा- आअहह.. वसीम..

और उन्होंने अपने हाथ मेरे हाथों पर रखे और सिर को पीछे झुका कर मेरे कंधे से टिका दिया और अपनी गाण्ड पीछे की तरफ दबा दी।

मैं अपना लण्ड बाजी के कूल्हों की दरार में रगड़ने के साथ-साथ ही उनकी गर्दन को भी चूमता और चाटता जा रहा था, अपने हाथों से कभी बाजी के सीने के उभार दबाने लगता कभी उनके निप्पलों को चुटकियों में दबा कर मसलता।

ज़ुबैर बाजी की चूत को ऐसे चाट रहा था.. जैसे कल कभी नहीं आएगा।

ज़ुबैर का जोश में आना फितरती ही था क्योंकि वो अपनी ज़िंदगी में पहली बार किसी चूत को चाट और चूस रहा था। और चूत भी तो दुनिया की हसीन-तरीन लड़की की थी।

मैंने अपना लण्ड उनके कूल्हों से ज़रा पीछे किया और बाजी का हाथ पकड़ कर अपने लण्ड पर रख दिया।

बाजी को जब अहसास हुआ कि उनके हाथ में मेरा लण्ड है.. तो फ़ौरन ही उन्होंने अपना हाथ पीछे खींच लिया।

मैंने दोबारा इसकी कोशिश नहीं की और बाजी के कन्धों का पिछला हिस्सा अपनी ज़ुबान से चाटने लगा।

कंधों के बाद पूरी कमर को चाटता हुआ मैं नीचे बैठ गया और बाजी के कूल्हों की गोलाइयाँ चूमते और चूसते हुए अपनी ज़ुबान से भी मसाज सी करता रहा।

पूरी तरह कूल्हों को चाटने के बाद मैंने अपने दोनों हाथ बाजी के कूल्हों पर रखे और उनके कूल्हों को खोल कर बाजी की गाण्ड के सुराख को गौर से देखना शुरू कर दिया।

बाजी की गाण्ड का सुराख बाक़ी जिस्म की तरह गुलाबी नहीं था.. बल्कि भूरे रंग का था और बहुत सी उभरी-उभरी सी गोश्त की लकीरें अन्दर सुराख में जाती दिख रही थीं.. जो ऐसे थीं जैसे किसी कुँए पर चुन्नटों का जाल सा बुन दिया गया हो।

मैंने बाजी की गांड के सुराख को कुछ देर बा गौर देखा.. और फिर आगे होते हुए आहिस्तगी से अपनी ज़ुबान की नोक को सुराख के बिल्कुल सेंटर में टच कर दिया।

बाजी ने मेरी ज़ुबान को अपनी गाण्ड के सुराख पर महसूस करते ही एक झुरजुरी सी ली और मज़े की एक शदीद लहर बाजी के बदन में सिहरन कर गई।

वो बेसाख्ता ही अपने ऊपरी जिस्म को आगे की तरफ झुकाते हुए बोलीं- आआहह वसीम.. ये क्या कर रहे हो?

‘म्म्म्म म्मम..’ मैंने गाण्ड के सुराख को चाटने के साथ-साथ अपनी ज़ुबान ऊपर से नीचे और फिर नीचे से ऊपर पूरी दरार में फेरना शुरू कर दी।

बाजी के बेसाख्ता अंदाज़ ने मुझे समझा दिया था कि उन्हें गाण्ड का सुराख चटवाने में बहुत मज़ा आ रहा है।

बाजी के आगे झुकने की वजह से मेरा काम ज्यादा आसान हो गया था और मेरी ज़ुबान बाजी की पूरी दरार में आसानी से घूम रही थी।

ज़ुबैर बाजी की चूत को चूसने में लगा था और मैं बाजी की गाण्ड के सुराख को चाट रहा था.. बाजी की हालत अब बहुत खराब हो रही थी और वो अपने सिर को राईट-लेफ्ट झटके देते हुए दबी-दबी आवाज़ में ‘आहें..’ भर रही थीं।

मेरे जेहन में ये आया कि यही टाइम है कि अब मैं दोबारा ट्राई करूँ।

इस सोच के आते ही मैं उठा और बाजी के सामने आकर उनको सीधा करते हुए बाजी के होंठों को अपने होंठों में दबाया और एक हाथ में बाजी का हाथ पकड़ते हुए दूसरे हाथ से उनके सीने के उभार दबाने लगा।

मैंने चंद लम्हें ऐसे ही बाजी का हाथ थामे रखा.. और फिर आहिस्तगी से उनका हाथ दोबारा अपने लण्ड पर रख दिया।

बाजी ने फिर हाथ हटाने की कोशिश की.. लेकिन मैंने उनके हाथ को मजबूती से अपने लण्ड पर ही दबाए रखा।

कुछ देर तक बाजी ने कोई रिस्पोन्स नहीं दिया और फिर आहिस्ता-आहिस्ता मेरे लण्ड को अपनी मुठ में दबाने लगीं।

वो कभी लण्ड को भींच रही थीं.. तो कभी अपना हाथ लूज कर देतीं..

मैंने ये महसूस किया तो बाजी के हाथ से अपना हाथ हटा लिया और उनकी गर्दन को पुश्त से पकड़ कर किस करने लगा।

मेरे हाथ हटाने के बावजूद भी बाजी ने मेरे लण्ड को नहीं छोड़ा था और नर्मी से लंबाई नापने के अंदाज़ में उस पर अपना हाथ फेरने लगीं।

मैंने दोबारा अपना हाथ बाजी के हाथ पर रखा और उनके हाथ की मुठी बना कर अपने लण्ड पर ऊपर-नीचे की और 3-4 मूव्स के बाद अपना हाथ हटा लिया और अब बाजी खुद ही अपना हाथ मेरे आगे-पीछे करने लगीं।

मैंने एक नज़र ज़ुबैर को देखा तो वो अभी भी बाजी की चूत ही चूस रहा था और थोड़ी-थोड़ी देर बाद ऐसे ज़ोर लगाता था.. जैसे खुद ही बाजी की चूत में घुसना चाह रहा हो।

उसका हाथ अपने लण्ड पर तेजी से आगे-पीछे हो रहा था।

बाजी का जिस्म अकड़ना शुरू हुआ.. तो फ़ौरन मुझे याद आ गया कि कैसे डिसचार्ज होते वक़्त बाजी की चूत मेरी ज़ुबान को भींचने लगी थी।

अब ज़ुबैर की ज़ुबान भी इस मज़े को महसूस करने वाली है।

बाजी को डिस्चार्ज होने के क़रीब देखा तो मैंने ज़ोर से उनके होंठों को चूसना शुरू कर दिया और बाजी के निप्पल्स को चुटकियों में मसलने लगा।

मेरे लण्ड पर बाजी का हाथ बहुत तेज-तेज चलने लगा था और उनकी साँसें बहुत तेज हो गई थीं।

मेरी बर्दाश्त जवाब दे रही थी और एकदम ही मेरे लण्ड ने झटका मारा और मेरे लण्ड से जूस निकल-निकल कर बाजी के पेट पर चिपकने लगा।

बाजी ने भी मेरे लण्ड के पानी को महसूस कर लिया था और फ़ौरन ही उनके जिस्म ने भी झटके खाए और वे अपनी चूत का पानी ज़ुबैर के मुँह में भरने लगीं।

हम तीनों ही अपनी मंज़िल तक पहुँच चुके थे।

जब हम एक-दूसरे से अलग हुए और बाजी की नज़र अपने पेट पर पड़ी.. जहाँ मेरे लण्ड का गाढ़ा सफ़ेद पानी चिपका हुआ था।

बाजी की पूरी नफ़ मेरे लण्ड के जूस से भरी हुई थी।

‘ओह्ह.. अएवव.. ये क्या गंदगी की है तुमने.. गंदे..’ बाजी ने ये कहा और अपनी ऊँगली अपनी नफ़ में डाल कर घूमते हुए.. मेरे लण्ड का पानी अपनी ऊँगली की नोक पर निकाल लिया।

वो चंद लम्हें रुकीं और फिर अपनी ऊँगली को चेहरे के क़रीब ले जाकर गौर से देखने लगीं।

मैंने बाजी को इस तरह मेरे लण्ड के जूस को देखते देखा.. तो मुस्कुराते हुए बाजी को आँख मारी और कहा- शर्मा क्यों रही हो बाजी.. आगे बढ़ो.. बहुत मज़े का ज़ायक़ा है इसका..

बाजी ने मेरी बात सुनी तो झेंपती हँसी के साथ कहा- शट अप्प्प वसीम.. मैं सिर्फ़ क़रीब से देखना चाहती थी.. तुम्हारी तरह गंदी नहीं हूँ।

मैंने कहा- उस वक़्त तो आपको बुरा नहीं लग रहा था.. जब मैं आप की चूत का रस पी रहा था।

यह कहते हुए मैंने आगे बढ़ कर बाजी की चूत पर हाथ रखा और कहा- वो भी डायरेक्ट यहाँ मुँह लगा के..

बाजी ने मुस्कुरा कर मुझे देखा और नर्मी से मेरा हाथ पकड़ कर अपनी टाँगों के बीच से हटाते हुए कहा- अच्छा बस वसीम.. अब बहुत देर हो गई है.. ज़ुबैर मुझे कोई कपड़ा दो.. ताकि मैं अपने पेट से ये गंदगी साफ करूँ।

ज़ुबैर कपड़ा लेने के लिए उठ रहा था कि मैंने और बाजी ने एक साथ ही देखा कि मेरे लण्ड के जूस के बहुत से क़तरे ज़ुबैर के सिर पर गिरे हुए थे और मुझसे पहले ही बाजी बोल पड़ीं- और अपना सिर भी साफ कर लेना.. वहाँ भी सारी गंदगी लगी है।

ज़ुबैर ने बेसाख्ता अपने सिर पर हाथ फेरा तो उसके हाथ पर भी मेरे लण्ड का जूस लग गया। ज़ुबैर ने अपने हाथ को देखा और फिर बाजी की आँखों में देखते हुए ज़ुबान निकाल कर चाटते हुए बोला- उम्म्म.. बाजी आप भी चख कर तो देखतीं.. इतना बुरा नहीं है..

‘आहह…. डिज़्गस्टिंग ज़ुबैर.. तुम तो इसको अपने सिर पर ही सज़ा रहने दो.. ताज समझ कर.. अच्छा अब जाओ.. कोई कपड़ा ला कर दो..’

बाजी ने ज़ुबैर से कहा और अपनी क़मीज़-सलवार.. ब्रा वगैरह इकठ्ठे करने लगीं.. जो इधर-उधर बिखड़े पड़े थे।

ज़ुबैर अपनी ही एक शर्ट लेकर आया और खुद ही बाजी के बदन को साफ करने लगा। अच्छी तरह साफ करने के बाद ज़ुबैर ने बाजी के पेट को चूमा ही था कि बाजी ने उसे पीछे करते हुए कहा- नहीं ज़ुबैर.. अब बस.. मैंने जाना है बहुत देर हो गई है।

बाजी ने क़मीज़ पहनने के लिए अपने हाथ फैलाए ही थे कि मैंने आगे बढ़ कर बाजी को अपने बाजुओं में जकड़ा और एक जोरदार किस करने के बाद कहा- बाजी आज का दिन हमारी ज़िंदगी का हसीन-तरीन दिन था और मुझे खुशी इस बात की है कि मैंने आपके जिस्म के एक-एक मिलीमीटर को चूमा है और अपनी ज़ुबान से चखा है.. आई रियली लव यू।

बाजी ने मुस्कुरा का मुहब्बतपाश नजरों से मुझे देखा और अब उन्होंने आगे बढ़ कर मेरे होंठों को चूमा और कहा- लव यू टू वसीम..

और फिर मेरे गाल को चुटकी में पकड़ के खींचते हुए बोलीं- मेरा राजा भाई.. उम्म्म्ममाअहह..

‘आअप्प्प्पीईईईईई फिर वो हीई..’

बाजी मुझे देख कर खिलखिला कर हँसी और अपने कपड़े पहनने लगीं।

 
मैं और ज़ुबैर बाजी को ड्रेसअप होते देखते रहे। इसके बाद बाजी ने हमें शब-आ-खैर कहा और कमरे से चली गईं।

बाजी के बाद मैंने मुस्कुराते हुए ज़ुबैर को देखा और कहा- मज़ा आया आज मेरे छोटू को?

ज़ुबैर खुशी से खिलखिला कर बोला- बहुत ज्यादा भाई.. मैं तो बस ख्वाब ही देखता था.. मुझे यक़ीन नहीं था कि मैं कभी किसी लड़की के मम्मे और चूत देख भी सकूँगा.. लेकिन आप की वजह से देखना तो दूर की बात मैंने मम्मों को चूस भी लिया और चूत को भी चाट लिया.. वो भी अपनी हसीन बाजी को..

मैंने मुस्कुरा कर शैतानी अंदाज़ में कहा- मेरे भाई बस तुम सबर करो.. और देखते जाओ कि आगे क्या-क्या दिखाता हूँ तुम्हें..

मैं अपने तमाम दोस्तों.. जो इस स्टोरी को पढ़ रहे हैं.. को भी कहता हूँ कि बस थोड़ा सबर करो कि मैं लिख लिया करूँ.. फिर आगेआगे देखो मैं क्या क्या पढ़ाता हूँ।

मेरी बात सुन कर ज़ुबैर बहुत खुश हुआ और कुछ याद आने पर एकदम चौंकता हुआ बोला- भाई कुछ करें ना.. ताकि हनी भी हमारे साथ शामिल हो जाए.. जब मैं हनी के साथ नानी के घर गया था ना.. तो भाई.. तो भाई मैंने उस वक़्त गौर किया था.. हनी के सीने के उभार भी अब बहुत प्यारे हो गए हैं।

मैंने मुस्कुरा कर ज़ुबैर को देखा और कहा- तुम फ़िक्र ना करो.. बस अपना दिमाग मत लगाना.. जो मैं कहूँ.. वो ही करना.. बाक़ी सब मुझ पर छोड़ दो.. और चलो अब सो जाओ.. सुबह तुम्हें स्कूल भी जाना है।

हम दोनों ही बिस्तर पर लेट कर सोने की कोशिश करने लगे।

सुबह मैं देर से ही उठा था.. फ्रेश होकर नीचे नाश्ते के लिए पहुँचा.. तो सब नाश्ता करके जा चुके थे। मैंने भी नाश्ता किया और कॉलेज को चल दिया।

वापसी पर भी आम सी ही रुटीन रही.. कोई ऐसी खास बात नहीं हुई.. जो मैं यहाँ आपको बता सकूँ।

अगली रात

रात के 11 बजे थे.. मैं और ज़ुबैर दोनों बाजी का इन्तजार करते हुए इधर-उधर की बातें करते.. अपना टाइम काट रहे थे.. उसी वक्त दरवाज़ा खुला और बाजी अन्दर दाखिल हुईं।

बाजी को देखते ही ज़ुबैर और मैंने बेड से जंप की और उनकी तरफ बढ़े.. बाजी ने अपने दोनों हाथों को सामने लाकर हमें रोकते हुए कहा- आराम से.. आराम से.. जंगली ही हो दोनों..

मैंने बाजी की बात जैसे सुनी ही नहीं और उन्हें अपने बाजुओं में जकड़ कर होंठों पर होंठ रख दिए।

बाजी ने भी किस का मुकम्मल रिस्पोन्स दिया और भरपूर अंदाज़ में मेरी ज़ुबान और होंठों को चूसने के बाद पीछे हट गईं और अपनी क़मीज़ उतारने लगीं।

क़मीज़ के नीचे बाजी ने कुछ नहीं पहना था और क़मीज़ के उतरते ही उनके खूबसूरत गुलाबी निप्पल मेरी नजरों के सामने आ गए। बाजी क़मीज़ उतार कर सीधी खड़ी हुई ही थीं कि मैंने फिर उनकी तरफ क़दम बढ़ाया तो उन्होंने मुझे रोक दिया।

‘नहीं वसीम.. तुम पीछे रहो और ज़ुबैर की तरफ अपने बाजुओं को खोला जैसे उससे गले लगाने के लिए बुला रही हों और ज़ुबैर को देखते हुए मुस्कुरा कर बोलीं- आज मेरे छोटे भाई की बारी है.. आ जाओ ज़ुबैर!’

ज़ुबैर यह सुन कर खुशी से झूम उठा और भागते हुए आकर बाजी से लिपट गया।

मैंने मुस्कुरा कर उन दोनों को देखा और पीछे हट कर वहाँ सोफे पर बैठ गया.. जहाँ बैठ कर बाजी हमारा शो देखा करती थीं।

ज़ुबैर ने बाजी के बदन को अपने बाजुओं में भरा और उनके होंठों को जंगली अंदाज़ में चूसने लगा।

यह पहली बार था कि ज़ुबैर बाजी के साथ अकले में कुछ कर रहा था.. इसलिए उसके अंदाज़ में बहुत दीवानगी थी।

बाजी भी उसी के अंदाज़ में उसका मुकम्मल साथ दे रही थीं।

ज़ुबैर और बाजी कुछ देर एक-दूसरे के होंठ चूसते रहे।

होंठों को एक-दूसरे से चिपकाए हुए ही बाजी ने अपने हाथ नीचे किए और ज़ुबैर की शर्ट को अपने हाथों से ऊपर उठाने लगीं।

ज़ुबैर थोड़ा पीछे हुआ और बाजी ने उसकी शर्ट को सिर से और हाथों से निकाल कर दूर फेंक दी।

ज़ुबैर ने आगे बढ़ कर फिर अपने होंठ बाजी की गर्दन पर रख दिए और बाजी की गर्दन को चूमने और चाटने लगा।

बाजी ने अपने सिर को पीछे की जानिब ढुलका दिया और ज़ुबैर की नंगी कमर पर अपने हाथ फेरने लगीं।

ज़ुबैर ने अपने हाथों को नीचे किया और बाजी की सलवार में हाथ फँसा कर नीचे को झटका दिया और मुझे ये देख कर हैरत का झटका लगा कि बाजी ने बजाए उसे रोकने के खुद ही अपने हाथों से अपनी सलवार को नीचे किया और अपनी टाँगों से निकाल दी।

बाजी की नंगी गुलाबी रानें और उनके खूबसूरत बिल्कुल गोल कूल्हे मेरी नजरों के सामने आए.. तो मैंने बे इख्तियार ही अपने लण्ड को पकड़ कर झंझोड़ा और अपने कपड़े उतार फैंके।

ज़ुबैर ने बाजी की नंगी कमर को सहलाते हुए अपने हाथ थोड़े नीचे किए और बाजी के दोनों कूल्हों को अपने दोनों हाथों में पकड़ कर पूरी ताक़त से एक-दूसरे से अलहदा कर दिया.. जैसे कि वो दोनों कूल्हों को बीच से चीर देना चाहता हो और इसके साथ-साथ ही उसने गर्दन से नीचे आकर बाजी के एक उभार को अपने मुँह में भरा और अपने दाँत बाजी के उभार में गड़ा दिए।

बाजी के चेहरे पर शदीद तक़लीफ़ के आसार नज़र आए और उनके मुँह से एक कराह निकली- आऐईयईई… ईईईईई.. उफ… फफ्फ़.. ज़ुबैर थोड़ा आराम से.. जंगली ही हो जाते हो.. मैं कहीं भागी.. तो नहीं जा.. रही नाआअ..’

बाजी की बात सुन कर ज़ुबैर ऐसे चौंका.. जैसे उसे पता ही नहीं हो कि वो क्या कर रहा था और अभी ही होश में आया हो।

ज़ुबैर ने बाजी का उभार मुँह से निकाला तो बाजी ने ज़ुबैर को थोड़ा पीछे हटाया और कहा- बिस्तर पर चलो.. मैं इतनी देर खड़ी नहीं रह सकती..

यह कह कर बाजी बिस्तर की तरफ बढ़ीं और अपनी टाँगें नीचे लटका कर बिस्तर पर अधलेटी सी हो गईं।

ज़ुबैर ने अपना ट्राउज़र उतारा और बाजी के ऊपर लेट कर उनके सीने के उभारों को चूसने लगा।

बाजी फिर से ज़ुबैर की कमर को सहलाने लगीं।

कुछ देर बाजी के मम्मे चूसने के बाद ज़ुबैर ने बाजी के पेट को चाटा और अपनी ज़ुबान से बाजी की नफ़ का मसाज करने लगा।

ज़ुबैर थोड़ा और नीचे हुआ और ज़मीन पर बैठ कर अपनी ज़ुबान बाजी के टाँगों के बीच वाली जगह पर रख दी।

बाजी ने ज़ुबैर की ज़ुबान को अपनी चूत पर महसूस किया तो उनके मुँह से एक ‘आआहह..’ खारिज हुई और बेसाख्ता ही बाजी ने अपनी टाँगों को थोड़ा और खोल कर घुटनों को मोड़ते हुए अपने पाँव बिस्तर पर रख लिए।

अपनी आँखें बंद करके बाजी अपने दोनों हाथ ज़ुबैर के सिर पर रख कर.. अपनी चूत ज़ुबैर के मुँह पर दबाने लगीं।

ज़ुबैर ने बाजी की चूत को चूसते हुए अपने दोनों हाथ बाजी के कूल्हों के नीचे रखे और कूल्हों को थोड़ा सा उठा कर बाजी की गाण्ड के सुराख को चूमा।

जैसे ही ज़ुबैर के होंठ बाजी के पिछले सुराख से टच हुए.. बाजी के मुँह से एक ज़ोरदार सिसकी निकली और उन्होंने अपनी आँखें खोल कर सिर थोड़ा उठाया और ज़ुबैर को देखते हुए कहा- हन्ंन ननणणन् ज़ुबैर.. हन्णन्न्.. यहाँ ही.. आहह.. चाटो उसे.. अपनी ज़ुबान टच करो यहाँ.. उफ़फ्फ़..’

बाजी ने अपनी गाण्ड को मज़ीद ऊपर की तरफ झटका दिया और ज़ुबैर के सिर को ज़ोर से नीचे की तरफ अपनी गाण्ड के सुराख पर दबाया।

 
दो-तीन ज़ोरदार झटके मारने के बाद बाजी ने अपना सिर पीछे बिस्तर पर पटका और गर्दन घुमा कर मेरी तरफ देखा।

ज़ुबैर ने बाजी की चूत को चूसते हुए बाजी की गाण्ड के सुराख को चूमा।

मैं उन दोनों को देखते हुए अपना लण्ड आहिस्ता आहिस्ता सहला रहा था। बाजी को अपनी तरफ देखता पाकर मैंने उनकी आँखों में देखा.. बाजी की आँखें नशीली हो रही थीं और लाल डोरे आँखों को मज़ीद खूबसूरत बना रहे थे।

बाजी कुछ देर मेरी आँखों में आँखें डाले देखती रहीं और मीठी-मीठी सिसकारियाँ भरती रहीं।

फिर उन्होंने अपने दोनों हाथों को उठाया और हाथ फैला कर अपनी गर्दन और हाथों को ऐसे हिलाया.. जैसे मुझे गले लगाने के लिए बुला रही हों।

मैं कुछ देर ऐसे ही बैठा रहा और बाजी भी अपने हाथ फैलाए मुझे मुहब्बत और हवस भरी नजरों से देखती रहीं।

कुछ देर बाद उन्होंने फिर इशारा किया और अपने होंठों को किस करने के अंदाज़ में सिकोड़ कर मुस्कुरा दीं।

मैंने भी बाजी को मुस्कुरा कर देखा और सिर झटकते हुए खड़ा होकर बाजी की जानिब बढ़ा।

बाजी के सिर के पास बैठ कर मैंने उनके होंठों पर एक भरपूर चुम्मी की और फिर उनके सीने के उभारों को चाटने और निप्पलों को चूसने लगा।

बाजी ने पहली बार लंड पकड़ा

मैं बाजी के निप्पल को चूस ही रहा था कि मुझे हैरत और लज़्ज़त का एक और झटका लगा, बाजी ने आज पहली बार खुद से.. मेरे बिना कहे हुए.. मेरे लण्ड को पकड़ा था।

मैंने बाजी के निप्पल को छोड़ा और हैरानी की कैफियत में बाजी के चेहरे को देखा.. तो बाजी ने शर्मा के मुस्कुराते हुए अपनी आँखें बंद कर लीं और अपना चेहरा साइड पर कर लिया।

मैं कुछ देर ऐसे ही बाजी के शर्म से लाल हुए चेहरे पर नज़र जमाए रहा।

बाजी की आँखें बंद थीं.. लेकिन वो मेरी नजरों की हिद्दत को अपने चेहरे पर महसूस कर रही थीं।

उन्होंने एक लम्हें को आँख खोल कर मेरी आँखों में देखा और फिर से अपनी आँखों को भींचते हुए शर्मा कर बोलीं- वसीम क्या है.. ऐसे मत देखो ना..आआ.. वरना मैं छोड़ दूँगी.. इसको.. इसको..

यह कहते वक़्त बाजी ने मेरे लण्ड को ज़ोर से अपनी मुट्ठी में दबाया।

मैंने मुस्कुरा कर बाजी को देखा और फिर ज़ुबैर पर नज़र डाली।

ज़ुबैर बाजी की गाण्ड के सुराख को चाटने और चूसने में लगा था.. तो मैंने आगे होकर बाजी की चूत पर अपना मुँह रख दिया और बाजी की चूत के दाने को मुँह में भर कर अपनी पूरी ताक़त से चूसने लगा।

बाजी मेरे लण्ड को अपनी मुट्ठी में पकड़ कर कभी दबाती थीं तो कभी अपनी गिरफ्त लूज कर देती थीं।

अब हमारी पोजीशन कुछ 69 जैसी ही थी, मेरा लण्ड बाजी के मुँह से चंद इंच ही दूर था और मैं अपनी बहन की गर्म-गर्म साँसों को अपने लण्ड और अपने टट्टों पर महसूस कर रहा था।

मेरा बहुत शिद्दत से दिल चाहा था कि बाजी मेरे लण्ड को अपने मुँह में लें.. लेकिन मैं जानता था कि वो अभी इसके लिए राज़ी नहीं होंगी।

मैंने अपना चेहरा नीचे किया और अपनी ज़ुबान निकाल कर बाजी की चूत को चाटने के लिए क़रीब हुआ ही था कि बाजी की चूत से उठती मधुर.. मदहोश कर देने वाली खुश्बू का झोंका मेरी नाक से टकराया।

अपनी बहन की चूत से उठती यह महक मुझ पर जादू सा कर देती थी और मेरा दिल चाहता था कि ये लम्हात ऐसे ही रुक जाएँ और मैं बस अपनी बहन की टाँगों में सिर दिए.. अपनी आँखें बंद किए.. बस उनकी चूत की खुश्बू में ही खोया रहूँ।

आप में से बहुत से लोगों को यह बात शायद अच्छी ना लगे और वो सोचेंगे कि मैं क्या गंदी बातें लिखता हूँ.. लेकिन मैं वाकयी ही आप लोगों को सच बता रहा हूँ।

अजीब सा जादू था मेरी बहन की चूत की खुश्बू में.. जो मैं लफ्जों में कभी भी बयान नहीं कर सकता।

मैंने कुछ देर लंबी-लंबी साँसें नाक से अन्दर खींची और बाजी की चूत की खुश्बू को अपने अन्दर बसा कर मैंने अपनी ज़ुबान से बाजी की चूत को पूरा चाट लिया।

उनकी चूत पर एक किस करने के बाद बाजी की चूत की पूरी लंबाई को.. बाजी की चूत के दोनों लबों को समेट कर अपने होंठों में दबा लिया और अपनी पूरी ताक़त से चूत को चूसने लगा।

बाजी की चूत की दीवारों से रिसता उनका जूस मेरे मुँह में आने लगा और मैंने उसे क़तरा-क़तरा ही अपने हलक़ में उड़ेल लिया।

कुछ देर इसी तरह बाजी की चूत को चूसने के बाद मैंने उनकी चूत के दाने को चूसते हुए अपनी ऊँगलियों से बाजी की चूत के दोनों पर्दों को खोला और एक ऊँगली चूत की लकीर में ऊपर से नीचे.. और नीचे से ऊपर फेरना शुरू कर दी।

बाजी की हालत अब बहुत खराब हो चुकी थी.. उन्हें दीन-दुनिया की कोई खबर नहीं रही थी, उनकी चूत और गाण्ड का सुराख उनके दोनों सगे भाईयों के मुँह में थे।

आप अंदाज़ा कर ही सकते हैं.. ज़रा सोचें कि आपकी सग़ी बहन ऐसे लेटी हो और उसकी गाण्ड और चूत का सुराख उसके सगे भाइयों के मुँह में हो.. तो क्या हालत होगी आपकी बहन की.. बस कुछ ऐसी ही हालत बाजी की भी थी।

बाजी की चूत बहुत गीली हो चुकी थी।

मैंने बाजी की चूत के दाने को अपने मुँह से निकाला और अपनी ऊँगली पर लगा हुआ बाजी का जूस चाट कर अपनी ऊँगली चूस ली।ि

बहन की चूत में उंगली

फिर अपनी उंगली को बाजी की चूत के सुराख पर रखा और हल्का सा दबाव दिया.. तो मेरी उंगली क़रीब एक इंच तक अन्दर दाखिल हो गई।

उसी वक़्त बाजी ने तड़फ कर आँखें खोलीं.. जैसे कि होश में आई हों।

वे बोलीं- नहीं वसीम प्लीज़.. अन्दर नहीं डालो.. जो भी करना है.. बस बाहर-बाहर से ही करो ना..

‘कुछ नहीं होता बाजी.. मैं ज्यादा अन्दर नहीं डालूंगा.. अगर ज्यादा अन्दर डालूं.. तो आप उठ जाना.. प्रॉमिस कुछ नहीं होगा।’

मैंने यह कह कर फिर से बाजी की चूत के दाने को अपने मुँह में ले लिया और अपनी फिंगर को आहिस्ता-आहिस्ता अन्दर-बाहर करने लगा।

लेकिन मैं इस बात का ख्याल रख रहा था कि उंगली ज्यादा अन्दर ना जाए।

बाजी ने कुछ देर तक आँखें खुली रखीं और अलर्ट रहीं कि अगर उंगली ज्यादा अन्दर जाने लगे.. तो वो उठ जाएँ।

लेकिन बाजी ने यह देखा कि मैं ज्यादा अन्दर नहीं कर रहा हूँ.. तो फिर से अपना सिर बेड पर टिका दिया और फिर खुद बा खुद ही उनकी आँखें भी बंद हो गईं।

मैं बाजी की चूत का दाना चूसते हुए.. अपनी ऊँगली को चूत में अन्दर-बाहर कर रहा था।

बाजी की चूत किसी तंदूर की तरह गरम थी।

मैंने काफ़ी सुना और पढ़ा था कि चूत बहुत गरम होती है.. लेकिन मैं यह ही समझता था कि गरम से मुराद सेक्स की तलब से है..

लेकिन आज अपनी बहन की चूत को अन्दर से महसूस करके मुझे पहली बार पता चला था कि चूत हक़ीक़त में ही ऐसी गर्म होती है कि बाकायदा उंगली पर जलन होने लगी थी।

बाजी की चूत अन्दर से बहुत ज्यादा नरम भी थी.. जैसे कोई मखमली चीज़ हो।

मैं अपनी बहन की चूत में उंगली अन्दर-बाहर करता हुआ सोचने लगा कि जब मेरा लण्ड यहाँ जाएगा.. तो कैसा महसूस होगा.. पता नहीं मेरा लण्ड ये गर्मी बर्दाश्त कर पाएगा या नहीं।

बाजी भी अब बहुत एग्ज़ाइटेड हो चुकी थीं और उनका हाथ मेरे लण्ड पर बहुत तेजी से हरकत करने लगा था, कभी वो अपनी मुट्ठी मेरे लण्ड पर आगे-पीछे करने लगती थीं.. तो कभी लण्ड को भींच-भींच कर दबाने लगतीं।

 
कुछ देर बाद मुझे महसूस हुआ कि अब मैं डिसचार्ज होने लगा हूँ.. तो मैंने एक झटके से बाजी का हाथ पकड़ कर अपने लण्ड से हटा दिया.. क्योंकि मैं अभी डिसचार्ज नहीं होना चाहता था।

ज़ुबैर अभी भी बाजी की गाण्ड के सुराख पर ही बिजी था।

मैंने उसके सिर पर एक चपत लगाई और उससे ऊपर आने का इशारा किया और खुद उठ कर बैठ गया।

ज़ुबैर मेरी जगह पर आ कर बैठा.. तो मैंने साइड पर होते हो बाजी का हाथ पकड़ कर ज़ुबैर के लण्ड पर रखा और खुद उठ कर बाजी की टाँगों के बीच में आ बैठा।

ज़ुबैर ने बाजी के हाथ को अपने लण्ड पर महसूस करते ही.. एक ‘आहह..’ भरी और बोला- आअहह… बाजी जी.. आप का हाथ बहुत नर्म है..

यह कह कर बाजी के होंठों को चूसने लगा मैंने फिर से अपनी उंगली को बाजी की चूत में डाला और उनकी गाण्ड के सुराख को चाटते चूसते हुए.. अपनी उंगली को अन्दर-बाहर करने लगा।

कुछ देर बाद मैंने गैर महसूस तरीक़े से अपनी दूसरी उंगली भी पहली उंगली के साथ रखी.. और आहिस्ता-आहिस्ता उससे भी अन्दर दबाने लगा।

लेकिन मैं इस बात का ख़याल रख रहा था कि बाजी को पता ना चले।

बाजी की चूत बहुत गीली और चिकनी हो रही थी। मैंने कुछ देर बाद थोड़ा सा ज़ोर लगाया.. तो मेरी दूसरी ऊँगली भी बाजी की चूत में दाखिल हो गई।

उसी वक़्त बाजी के मुँह से एक सिसकारी निकली और वो बोलीं- उफ्फ़.. वसीम.. नहीं प्लीज़.. बहुत दर्द हो रहा है.. दूसरी उंगली निकाल लो.. एक ही ऊँगली से करो न!

मैंने चंद लम्हों के लिए अपनी ऊँगलियों को हरकत देना बंद कर दी और बाजी से कहा- बस बाजी.. अब तो अन्दर चली गई है.. कुछ सेकेंड में दर्द खत्म हो जाएगा.. अगर दर्द नहीं खत्म हुआ तो मैं बाहर निकाल लूँगा।

मेरी बात के जवाब में बाजी ने कुछ नहीं कहा और बस सिसकारियाँ लेने लगीं।

चंद ही लम्हों बाद बाजी ने अपना हाथ ज़ुबैर के लण्ड पर चलाना शुरू कर दिया और अपनी गाण्ड को थोड़ा सा उठा कर अपनी चूत को मेरे मुँह पर दबाने लगीं..

जिससे मैं समझ गया कि अब बाजी के दर्द का अहसास कम हो गया है।

फिर मैंने भी अपनी उंगलियों को हरकत देना शुरू कर दी। कुछ ही देर में मेरी दोनों उंगलियाँ बहुत आराम से अन्दर-बाहर होने लगीं।

कुछ देर बाद मैंने अपनी उंगलियों को तेजी से अन्दर-बाहर करना शुरू किया जिसकी वजह से मैं ये कंट्रोल नहीं कर पा रहा था कि उंगली एक इंच से ज्यादा अन्दर ना जाए..

और हर 3-4 स्ट्रोक में उंगलियाँ थोड़ा सा और गहराई में चली जातीं.. जिससे बाजी के मुँह से तक़लीफ़ भरी ‘आह..’ खारिज हो जाती।

इसी तेजी-तेजी में मैंने एक बार ज़रा ताक़त से उंगलियों को थोड़ा और गहराई में दबाया तो बाजी के मुँह से एक चीखनुमा सिसकी निकली ‘आआईयई.. ईईईईई.. वसीम.. कहा है ना.. आराम-आराम से करो.. लेकिन तुम लोग जंगली ही हो जाते हो.. हम ये सब मज़ा लेने के लिए कर रहे हैं.. लेकिन इससे मज़ा नहीं.. तक़लीफ़ होती है नाआ..’

‘अच्छा अच्छा.. अब आराम से करूँगा.. कसम से बस.. मैं अपनी बहन को तक़लीफ़ नहीं दे सकता.. बस गलती से हो गया था.. प्लीज़ सॉरी बाजी..’

बाजी को परम आनन्द की प्राप्ति

मैंने फिर से उंगलियों की हरकत को कुछ देर रोकने के बाद आहिस्ता आहिस्ता हरकत देनी शुरू कर दी।

चूत भी अजीब ही चीज़ है.. इसमें इतनी लचक होती है.. कि आज तक इस दुनिया के साइन्सदान इस दर्जे की लचक किसी चीज़ में नहीं पैदा कर सके हैं।

कुछ ही देर में बाजी का जिस्म अकड़ना शुरू हो गया और बाजी के हाथ की हरकत ज़ुबैर के लण्ड पर बहुत तेज हो गई।

मुझे अंदाज़ा हो गया था कि बाजी की चूत अपना रस बहाने को तैयार है।

मैंने बाजी की चूत के दाने को अपने दाँतों में पकड़ा और उंगलियों को तेज-तेज अन्दर-बाहर करने लगा.. लेकिन इस बात का ख़याल रखा कि उंगलियाँ ज्यादा गहराई में ना जाने पाएं।

बाजी का जिस्म अकड़ गया था और उन्होंने अपने कूल्हे बेड से उठा लिए और ज़ुबैर के लण्ड को पूरी ताक़त से अपनी तरफ खींच लिया।

उसी वक़्त ज़ुबैर के मुँह से ‘आहह..’ निकली और उसके लण्ड का जूस बाजी के पेट पर गिरने लगा।

बस 4-5 सेकेंड बाद ही बाजी भी अपनी मंज़िल पर पहुँच गईं और उनकी चूत मेरी उंगलियों को भींचने लगीं।

अजीब ही हरकत थी चूत की.. कभी मेरी उंगलियों को मज़बूती से भींच लेती थी.. तो अचानक ही चूत की ग्रिप लूज हो जाती और अगले ही लम्हें फिर भींचने लगती।

इस तरह 4-5 झटके खाने के बाद बाजी भी पुरसुकून हो गईं और मैंने अपनी उंगलियाँ बाजी की चूत से बाहर निकालीं और उनकी चूत को चाटने और चूसने के बाद खड़ा हो गया।

मैंने बाजी पर नज़र डाली.. तो उनका चेहरा बहुत पुरसुकून नज़र आया.. जैसे कि वो पता नहीं कितनी लंबी मुसाफत तय करके मंज़िल तक पहुँची हों।

बाजी ने मेरी तरफ देखा और मुस्कुरा कर उठ बैठीं और कहा- ऊओ.. मेरा शहज़ादे भाई का ‘वो’ तो अभी तक फुल जोश में ही है।

छोटे भाई ने मेरा लन्ड चूसा

बाजी ने एक नज़र मेरे सीधे खड़े लण्ड पर डाली और फिर ज़ुबैर की तरफ देख कर बोलीं- ज़ुबैर उठो.. वसीम का ‘वो’ चूसो.. आज बहुत दिन हो गए हैं मैंने तुम लोगों को ये करते नहीं देखा।

मैंने बाजी की बात सुनी तो वहीं खड़ा हो गया और मुस्कुरा कर बाजी को देखते हुए कहा ‘वो’ क्या बाजी.. नाम लेकर बोलो ना?

बाजी ने शर्मा कर मुझसे नज़र चुराईं और बोलीं- ज्यादा बकवास नहीं करो.. कह दिया मैंने.. जो कहना था।

फिर उन्होंने ज़ुबैर को देख कर कहा- उठो ना जाओ वसीम के पास..

ज़ुबैर आ कर मेरी टाँगों में बैठा तो मैंने उससे रोकते हुए बाजी को देखा और बोला- बाजी प्लीज़ यार.. बोलो ना.. मज़ा आएगा ना सुन कर.. अब बोलने में भी क्या शर्मा रही हो..

बाजी कुछ देर रुकीं और फिर मुस्कुरा कर बोलीं- अच्छा बाबा.. ज़ुबैर चलो वसीम का.. लण्ड चूसो.. अपने बड़े भाई का लण्ड चूसो..

और यह कह कर वे हँसने लगीं।

यह कोई इतनी बड़ी बात नहीं थी.. लेकिन पता नहीं क्यूँ बाजी के मुँह से ‘लण्ड’ लफ्ज़ सुन कर बहुत मज़ा आया और लण्ड को एक झटका सा लगा।

ज़ुबैर ने मेरे लण्ड को अपने दोनों हाथों में पकड़ा और एक बार ज़ुबान पूरे लण्ड पर फेरने के बाद उसे अपने मुँह में भर लिया।

लेकिन सच यह है कि अब ज़ुबैर के चूसने से इतना मज़ा भी नहीं आ रहा था कि जितना अपनी बहन के हाथ में पकड़ने से ही आ जाता था।

मैंने बाजी की तरफ देखा.. वो बिस्तर पर बैठी थीं.. उन्होंने अपने दोनों घुटने मोड़ करके अपने सीने से लगाए हुए थे और अपने घुटनों से बाज़ू लपेट कर अपना चेहरा घुटनों पर टिका दिया था।

बाजी की दोनों टाँगों के बीच से उनकी क्यूट सी गुलाबी चूत नज़र आ रही थी।

 
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